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इराक के राष्ट्रपति भवन पर शिया मौलवी के समर्थकों का कब्जा, दिखा श्रीलंका वाला नजारा: स्विमिंग पूल में मस्ती करते लोग, बगदाद में रात भर चले रॉकेट्स

श्रीलंका के बाद अब इराक में अराजकता का माहौल है। इराक (Iraq) के एक प्रभावशाली मौलवी मुक्तदा अल-सदर (Al-Sadar) के इस्तीफे के बाद उनके समर्थक भड़क उठे। राजधानी बगदाद (Baghdad) में सोमवार (29 अगस्त, 2022) को जमकर विरोध-प्रदर्शन किया गया। देखते ही देखते भारी हिंसा भड़क उठी। भारी संख्या में मुक्तदा समर्थकों ने इराक के राष्ट्रपति भवन के बाहर डेरा डाल लिया। इस दौरान, अल-सदर और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें मरने वालों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है।

‘स्पुतनिक’ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, झड़पों में 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। रात भर बगदाद के ग्रीन जोन में एरिया में रॉकेट दागे जाते रहे। उग्र भीड़ ने श्रीलंका के घटनाक्रम की तरह इराक के राष्ट्रपति भवन और सरकारी भवनों पर कब्जा कर लिया है। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने आँसू गैस के गोले भी छोड़े। लेकिन, वे उन्हें खदेड़ने में नाकाम रहे। भीड़ में शामिल अराजक तत्व राष्ट्रपति भवन में बने स्विमिंग पूल में मस्ती करते हुए नजर आए। ये लोग मुक्तदा अल-सदर के समर्थक बताए जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर इनकी तस्वीरें और वीडियो भी खूब वायरल हो रहे हैं, जिसमें प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रपति भवन पर धावा बोलते हुए देखा जा सकता है। शिया मौलवी के समर्थक बगदाद के ग्रीन जोन में स्थित संसद के बाहर एक सप्ताह से धरना दे रहे थे। जैसे ही उन्हें मुक्तदा अल-सदर के इस्तीफे के बारे में फैसले का पता चला, वे भड़क गए। इसके बाद सेना व पुलिस ने मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों से ग्रीन जोन छोड़ने की अपील की।

तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए पूरे इराक में कर्फ्यू लगाना पड़ा है और पूरे शहर के चप्पे-चप्पे पर सेना तैनात कर दी गई है। बताया जा रहा है कि इराक की सरकार में गतिरोध तब से आया है, जब मुक्तदा अल-सदर की पार्टी ने अक्टूबर के संसदीय चुनावों में सबसे अधिक सीटें जीती थीं, लेकिन वह बहुमत तक नहीं पहुँच पाए थे। उन्होंने आम सहमति वाली सरकार बनाने के लिए ईरान समर्थित शिया प्रतिद्वंद्वियों के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया था।

गौरतलब है कि इराक से पहले भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका (Sri Lanka) में अराजकता का माहौल देखा गया था। राजधानी कोलंबो (Colombo) में 9 जुलाई, 2022 को प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति भवन में घुस गए थे। इसके बाद राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) वहाँ से भाग गए। वहीं, सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों घायल हो गए थे।

18 साल की लड़की को अगवा कर गैंगरेप, बांग्लादेश बॉर्डर के पास जंगल में मिली: सुलेमान, नसीरुद्दीन और रहीमुद्दीन गिरफ्तार, 1 फरार

असम के करीमगंज जिले से रविवार (28 अगस्त 2022) की सुबह पुलिस ने 18 साल की लड़की के अपहरण और सामूहिक बलात्कार के मामले में 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपितों की पहचान सुलेमान अली, नसीरुद्दीन और रहीमुद्दीन के रूप में हुई है। एक आरोपित अब भी फरार बताया जा रहा है। आरोपितों की उम्र 19-23 वर्ष के बीच है। ये भी दलग्राम गाँव के रहने वाले हैं।

बताया जा रहा है कि एक आरोपित ने पीड़िता को सुनसान जगह पर बुलाया। लड़की उस लड़के से अच्छी तरह से परिचित थी इसलिए उसने अपने घर में इस बारे में बताना उचित नहीं समझा और लड़के से मिलने पहुँच गई। वहीं से चार लोगों ने उसे अगवा कर लिया। लड़की को भारत-बांग्लादेश सीमा के पास स्थित एक जंगल में ले जाया गया। आरोपितों ने बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता नीलम बाजार की रहने वाली बताई जा रही है।

जब काफी देर होने के बाद भी लड़की घर नहीं लौटी तो माता-पिता ने नीलम बाजार थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद प्रभारी अधिकारी दीपज्योति मालाकार द्वारा तलाशी अभियान चलाया गया। पीड़िता को जंगल से बरामद किया गया और उसकी शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया।

अपहरण और बलात्कार के इस मामले में पुलिस ने 4 में से 3 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। इसमें सुलेमान अली, नसीरुद्दीन और रहीमुद्दीन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 366 (एक महिला को शादी के लिए मजबूर करने के लिए अपहरण) और 376 D (सामूहिक बलात्कार) के तहत मामला दर्ज किया गया है। करीमगंज एसपी पद्मनाभ बरुआ ने बताया, “मुख्य आरोपित सहित तीन को गिरफ्तार किया गया है। एक आरोपित अभी भी फरार है।”

उन्होंने कहा, “मामले की जाँच जारी है। पीड़ित और आरोपितों के मेडिकल टेस्ट करवाया गया है।” वहीं आरोपितों के परिवार का दावा है कि पीड़िता एक आरोपी के साथ रिलेशन में थी और सब कुछ लड़की की सहमति से हुआ है।

8 दिन बाद अंकिता के घर पहुँची फॉरेंसिक टीम, SDPO नूर मोहम्मद पर कोई केस नहीं: बोले पूर्व CM – घटना में PFI का हाथ

झारखंड के दुमका में शाहरुख़ हुसैन ने अंकिता सिंह को जला कर मार डाला। अब अंकिता को जलाए जाने के 8 दिन बाद फॉरेंसिक की टीम घटनास्थल पर पहुँची है। CID के DSP संदीप कुमार गुप्ता के नेतृत्व में जाँच के लिए 10 सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। अब जाकर वो टीम मंगलवार (30 अगस्त, 2022) को 12वीं की छात्रा रही 17 वर्षीय मृतका के आवास पर पहुँची। टीम में CID के सदस्य, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के विशेषज्ञ और फिंगर प्रिंट ब्यूरो के लोग हैं।’

CID के डीएसपी संदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि वो लोग यहाँ पर घटनास्थल से सबूत इकट्ठा करने के लिए पहुँचे हैं। इन सबूतों को बाद में अदालत के समक्ष रखा जाएगा। एक दिन पहले ही उन्हें यहाँ आने के आदेश दिए गए हैं। स्थानीय SDPO नूर मोहम्मद को इस घटना की जाँच से हटा दिया गया है, जिस पर आरोपित को बचाने के आरोप लगे थे। स्थानीय लोग और पीड़िता के परिजन भी उसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।

हालाँकि, नूर मुस्तफा के विरुद्ध अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी कुछ दस्तावेज साझा करते हुए बताया था कि कैसे उसने ST एक्ट के आरोपित जुल्फिकार को बचाया था। अंकिता सिंह की हत्या की जाँच अब इंस्पेक्टर स्तर का एक पुलिस अधिकारी करेगा। इस केस की निगरानी SP स्तर के एक अधिकारी को दी जाएगी। दुमका के एसपी अंबर लकरा ने इस सम्बन्ध में जानकारी दी है।

पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता रघुबर दास ने कहा है कि इस घटना के पीछे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI का हाथ हो सकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस की हिरासत में हत्यारे शाहरुख़ हुसैन के हँसना और मूँछों पर ताव देना ये दिखाता है कि एक पूरा गिरोह है, जो जिहादी मानसिकता के लोग चला रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नूर मुस्तफा के संरक्षण में PFI काम कर रही है। उन्होंने इलाके में हिन्दुओं को निशाना बनाए जाने और धर्मांतरण का गिरोह चलने की भी बात बताई।

उन्होंने PFI को हेमंत सोरेन सरकार का वोटबैंक बताते हुए कहा कि भाजपा की सरकार आने पर इन चीजों की विस्तृत जाँच की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि वतमान हेमंत सोरेन सरकार में बड़े पैमाने पर राष्ट्र विरोधी शक्तियाँ सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि ये शक्तियाँ समाज को तोड़ना चाहती हैं। रघुबर दास ने आरोप लगाया कि ये जिहादी मानसिकता के लोग लड़कियों से ‘लव जिहाद’ करते हैं और सफल रहने पर ज़िंदा जलाने की धमकी देते हैं।

‘उसने धोखा दिया था, जला जलौवल चलता रहता है’ : अंकिता को जलाकर मारना पत्रकार सिमाब अख्तर के लिए ‘नॉर्मल’, नफरत पर घिरा तो माँगी माफी

झारखंड में अंकिता हत्याकांड के बाद जगह-जगह आरोपित शाहरुख हुसैन को कड़ी से कड़ी सजा देने की माँग हो रही है। इसी बीच पटना में न्यूज4नेशन के पत्रकार सिमाब अख्तर ने उसके कृत्य को जायज ठहराने का प्रयास किया है।

सिमाब अख्तर ने एक फेसबुक पोस्ट में आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा कि जला जलौवल चलता ही रहता है। देख सकते हैं कि ये पोस्ट का स्क्रीनशॉट अब वायरल है। इसमें सिमाब अख्तर ने लिख रखा है, “ज्यादा बिलकुल नहीं होना चाहिए। जला जलौवल तो चलता ही रहता है।”

इस कमेंट को पढ़ने के बाद एक यूजर ने उनसे पूछा, “पत्रकारिता कहाँ से सीख ली है। सिमाब अख्तर साहब। भाषा तो आपकी बिलकुल अच्छी नहीं है।”

इस पर सिमाब ने शाहरुख को दोषी ठहराने या अपनी गलती मानने की बजाय फिर लिखा, “गहलोत साहब, उसने धोखा दिया और जला दिया। जहाँ हवस हो वहाँ हमदर्दी…।”

तस्वीर साभार: शुभम भारद्वाज का ट्विटर

इस कमेंट को देखने के बाद कई लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। बजरंग दल के शुभम भारद्वाज ने इस मामले को उठाते हुए कहा, “पत्रकार सिमाब अख्तर ने विधर्मियों द्वारा जलाई गई बहन अंकिता सिंह पर अमर्यादित टिप्पणी की है। कोई सरकारी तंत्र है जो कार्रवाई करे?”

मिहिर झा कहते हैं, “सिमाब अख्तर से मिलिए। पटना में न्यूज4नेशन के पत्रकार हैं। इस तरह ये शाहरुख द्वारा अंकिता को जलाए जाने का जश्न मना रहे हैं।”

सिमाब की यह टिप्पणी देखने के बाद जब उसके विरुद्ध कार्रवाई की माँग उठी, तो सिमाब एकदम ठंडा पड़ गया। उसने अपनी गलती मानते हुए एक और पोस्ट किया। इसमें उसने शाहरुख के लिए फाँसी माँगी। वह लिखता है,

“अंकिता सिंह के लिए मुझसे अमर्यादित टिप्पणी हो गई थी जिसके लिए मैं बहुत शर्मिंदा हूँ और् आप सभी से क्षमा माँगता हूँ। बहन अंकिता का हत्या करने वाला शाहरुख को फाँसी की सजा मिले। समाज में ऐसे कृत्य करने वाले अपराधियों का कोई जगह नहीं है।”

नौकरानी को गर्म तवे से दागा, लोहे की रॉड से पिटाई, जीभ से शौच साफ करवाया: बेटे ने विरोध किया तो ‘पागल’ बता उसे भी हॉस्पिटल भेजा

झारखंड में एक नौकरानी को बुरी तरह प्रताड़ित किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता जनजाति समाज से है। आरोपित महिला सीमा पात्रा पूर्व आईएएस अधिकारी महेश्वर पात्रा की पत्नी है। वह राजनीति में भी सक्रिय हैं। बीजेपी में शामिल होने से पहले वह कॉन्ग्रेस में एक्टिव थी।

पीड़ित नौकरानी की पहचान सुनीता के तौर पर हुई है। बताया जा रहा है कि राँची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र स्थित पात्रा के घर में उसे बंधक बनाकर रखा गया था। उसे लगातार टॉर्चर किया जाता था। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि झारखंड सरकार के कार्मिक विभाग के अधिकारी विवेक बास्की को सुनीता के बंधक होने की जानकारी मिली थी। उन्होंने राँची पुलिस को इसकी जानकारी दी। इसके बाद 22 अगस्त 2022 को सुनीता को मुक्त कराया गया। इस मामले में अब तक कोई भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।

रिपोर्टों के अनुसार करीब दस साल पहले पात्रा के घर सुनीता को काम करने के लिए लाया गया था। बाद में उसे दिल्ली भेज दिया गया जहाँ पात्रा की बेटी वत्सला रहती थी। दिल्ली से उनके ट्रांसफर के बाद सुनीता वापस राँची पात्रा के घर आ गई।

यहाँ उसकी पिटाई होती थी। जब उसने घर जाने की इजाजत माँगी तो उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया। सुनीता का शरीर जख्मों से भरा हुआ है। उसके साथ आए दिन मारपीट की जा रही थी। कई बार गरम तवे से भी उसके शरीर के कई अंगों को दागा गया। कथित तौर पर उसे जीभ से शौच साफ करने को मजबूर किया जाता था।

बताया जा रहा है कि लोहे की रॉड से पिटाई के कारण उसके तीन-चार दाँत भी टूट चुके हैं। हालत ऐसी है कि न तो वह खुद से खड़ी हो पा रही और न ही ढंग से कुछ बोल पा रही। फिलहाल राँची के रिम्स हॉस्पिटल में उसका इलाज चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, सीमा पात्रा के बेटे आयुष्मान ने सुनीता के साथ मारपीट का कई बार विरोध किया था। इस दौरान उसकी अपनी माँ से बहस भी जो जाती थी। बाद में उसे भी मानसिक रोगी बता अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया।

लिबरल गिरोह को सुप्रीम कोर्ट का तिहरा झटका: गुजरात दंगों की 11 याचिकाएँ रद्द, बाबरी पर सारे केस बंद; राफेल पर कहा – बार-बार नहीं सुन सकते

सुप्रीम कोर्ट ने इन 2 दिनों में कुछ ऐसे फैसले लिए हैं, जो विपक्षी दलों के लिए झटका है। जहाँ एक तरह उच्चतम न्यायालय ने ये कह दिया कि राफेल के मुद्दे को वो बार-बार नहीं सुन सकता, वहीं 2002 के गुजरात दंगों के CBI को ट्रांसफर करने की 11 याचिकाओं को भी रद्द कर दिया। वहीं 1992 में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त किए जाने के मामले में अवमानना के तमाम आरोपों की जो सुनवाई चल रही थी, उन्हें भी खत्म कर दिया गया।

बाबरी मामले में अवमानना के सभी आरोपों की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

बाबरी मस्जिद को ध्वस्त किए गए 30 वर्ष हो चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के बाद जो भी सुनवाइयाँ शुरू हुई थीं, उन सभी पर मंगलवार (30 अगस्त, 2022) को रोक लगा दी। उत्तर प्रदेश सरकार और इसके अधिकारियों पर आरोप था कि उन्होंने बाबरी को बचाने के लिए कुछ नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इतना समय बीत जाने के बाद और 2019 में राम जन्मभूमि अयोध्या मामले के बड़े फैसले के बाद इसका कोई औचित्य नहीं बनता।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अब ये मामले सुनने लायक नहीं बचे हैं। मोहम्मद असलम भूरे ने इस सम्बन्ध में 1991 में एक याचिका दायर की थी और फिर 1992 में अवमानना का मामला दायर किया था। 2010 में उसकी मौत भी हो चुकी है। अधिवक्ता एमएम कश्यप इस केस को आगे ले जाना चाहते थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने नकार दिया। उस समय यूपी में कल्याण सिंह मुख्यमंत्री थे, जिनका अब निधन हो चुका है। बाबरी मामले में लालकृष्ण आडवाणी सहित सभी नेता पहले ही क्लीन-चिट पा चुके हैं।

गुजरात दंगों के मामलों को CBI को भजने के लिए 11 याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया रद्द

भाजपा विरोधी लॉबी गुजरात विधानसभा चुनावों से पहले से फिर 2002 के दंगों की फाइलें खुलवाने की साजिश रच रहा है। गुजरात दंगों की जाँच CBI को देने के लिए 11 याचिकाएँ दायर की गई थीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी को रद्द कर दिया। ये याचिकाएँ 2002-2003 से ही लंबित थीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसकी 9 सदस्यीय SIT ने इस मामले की जाँच और कार्रवाई के लिए 9 मामलों को देखा है, ऐसे में इन याचिकाओं का कोई औचित्य नहीं बनता।

9 में से 8 मामलों की तो सुनवाई भी पूरी हो चुकी है। जबकि नौवें मामले में अंतिम दलीलें चल रही हैं। ये मामला गुजरात के नरोदा गाँव का है। सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी की तरह इसमें भी काफी समय व्यतीत हो जाने की बात याद दिलाई। नौवें मामले की जाँच पूरी करने के लिए भी SIT को कह दिया गया है। 2008-10 के बीच भी कुछ ट्रांसफर याचिकाएँ आई थीं। तीस्ता सीतलवाड़ का एक अलग मामला चल रहा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानत पर सही अथॉरिटी फैसला लेगी। उन पर गुजरात दंगों में निर्दोषों को फँसाने का आरोप है।

बार-बार राफेल मामले में नहीं घुस सकते: राहुल गाँधी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से झटका

2019 लोकसभा चुनाव से पहले राफेल लड़ाकू विमान सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए राहुल गाँधी ने ‘चौकीदार चोर है’ का नारा दिया था, लेकिन चुनाव परिणामों में कॉन्ग्रेस की बुरी हार और राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट व कैग से मोदी सरकार को क्लीन-चिट के बाद ये मामला हवा हो गया। कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे चुके गुलाम नबी आज़ाद भी कह चुके हैं कि ये सिर्फ राहुल गाँधी का नारा था। अब राफेल मामले की स्वतंत्र जाँच को लेकर एक और याचिका दायर हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके पिछले दो फैसलों में सब कुछ साफ़ हो चुका है, ऐसे में बार-बार इस मामले को नहीं सुन सकते। 2018 में ही सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया था कि इस मामले में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर शक करने का कोई कारण नहीं है। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने समीक्षा याचिका को भी बंद कर दिया और कहा कि अब और जाँच की ज़रूरत नहीं है। अधिवक्ता एमएल शर्मा ने नई याचिका दायर की थी।

‘मैं दिलशाद की कैद में हूँ… ये मुझे जान से मार देगा’: UP में स्कूल के लिए निकली हिंदू लड़की हरियाणा से बरामद, जबरन धर्मांतरण के बाद करवाया निकाह

उत्तर प्रदेश की एक नाबालिग हिंदू लड़की को हरियाणा ले जाकर धर्मांतरण (Religious conversion) और निकाह कराने का मामला सामने आया है। पीड़िता फतेहपुर (Fatehpur) जिले की है। उन्नाव के बांगरमऊ गाँव के रहने वाले दिलशाद पर आरोप है कि वह नाबालिग हिन्दू लड़की को अगवा कर हरियाणा ले गया। वहाँ जबरन धर्मांतरण करवा उससे निकाह कर लिया। हरियाणा पुलिस की मदद से फतेहपुर पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना थरियांव थाना क्षेत्र के रमवा गाँव की है। अगवा लड़की ने मौका पाकर हरियाणा से अपने भाई को फोन किया और उसे आपबीती बताई। इसके बाद युवती के भाई ने थाने पहुँचकर आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। थरियांव पुलिस ने युवक की शिकायत के आधार पर केस दर्ज जिस नंबर से कॉल आया था उसे ट्रेस किया। हरियाणा पुलिस की मदद से फतेहपुर पुलिस ने आरोपित दिलशाद के चंगुल से नाबालिग लड़की को छुड़ाया और उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने लड़की का बयान दर्ज कर उसे मेडिकल जाँच के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।

लड़की की उम्र 17 साल बताई जा रही है। वह हाई स्कूल की छात्रा है। बताया जा रहा है कि वह 17 अगस्त को स्कूल जाने के लिए घर से निकली, लेकिन वापस नहीं आई। काफी खोजबीन के बाद उसके भाई ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। 21 अगस्त को लड़की ने मौका पाकर अपने भाई को फोन किया। उसने फोन पर बताया कि उसे उन्नाव के बांगरमऊ का रहने वाला दिलशाद किडनैप कर हरियाणा ले आया है। दिलशाद ने धर्मांतरण कर उससे जबरन निकाह कर लिया है। उसने कहा, “भाई, मैं यहाँ दिलशाद के कैद में हूँ। प्लीज मुझे यहाँ से जल्दी ले जाओ, नहीं तो ये मुझे जान से मार देगा।”

गौरतलब है कि इस महीने (9 अगस्त 2022) की शुरुआत में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से नाबालिग लड़की के साथ गैंग रेप और जबरन धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया था। नाबालिग लड़की को प्यार का झाँसा देकर पहले जबरील कुरैशी ने उसे अगवा किया, फिर अपने चार साथियों के साथ मिलकर उसका रेप किया। इसके बाद आरोपित ने धर्म परिवर्तन न करने पर उसके पिता और भाई को जान से मारने की धमकी भी दी थी।

‘प्रेम-प्रसंग में जलाकर मार डाली गई अंकिता’: झारखंड के मुख्यमंत्री के भाई ने खोजा नया एंगल, दुमका से ही MLA हैं बसंत सोरेन

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन ने दुमका में अंकिता सिंह की हत्या के मामले में ‘प्रेम प्रसंग’ खोज लिया। बसंत सोरेन दुमका से ही विधायक हैं। खुद हेमंत सोरेन ने 2019 विधानसभा चुनाव में इस सीट से जीत दर्ज की थी, लेकिन वो साहिबगंज के बरहेट से भी लड़े थे और वहाँ भी उन्हें जीत मिली थी। ऐसे में उन्होंने अपनी परंपरागत सीट छोड़ दी थी, तब 2020 में हुए उपचुनाव में भाई बसंत को JMM से उतारा गया और उनकी जीत हुई।

अब उन्होंने अपने गृह जिले में 12वीं की 17 वर्षीय छात्रा अंकिता की हत्या पर बयान दिया है। अंकिता को शाहरुख़ हुसैन नाम के एक मनचले ने पेट्रोल छिड़क कर जला दिया, जिसके बाद इलाज के क्रम में उसकी मौत हो गई। अंकिता उससे बात तक नहीं करना चाहती थी, लेकिन शाहरुख़ 2 वर्षों से उसे प्रताड़ित कर रहा था। वो अक्सर अंकिता के घर में घुस जाता था। स्कूल जाते वक्त छेड़खानी करता था। एक बार वो अंकिता के घर की ग्रील उखाड़ते हुए पकड़ा गया था।

‘लाइव लगातार’ से बात करते हुए बसंत सोरेन ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा, “देखिए, प्रेम-प्रसंग का मामला है। इसमें व्यक्तिगत या सामाजिक तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता। हमारा-आपका प्रेम है और हमारी-आपकी प्रतिक्रिया है – इसमें घटना को अंजाम देने का काम कोई समाज तो करेगा नहीं न, या कोई पार्टी तो करेगी नहीं न। दो लोग साथ बैठे हुए हैं और उन्होंने मारपीट कर ली। कोई विधायक या कोई पार्टी, इसे किसी चीज से जोड़ना गलत है।”

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इस क्लिप को शेयर करते हुए लिखा, “हे भगवान! सोरेन परिवार के इन छोटे राजकुमार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भाई विधायक बसंत सोरेन को सद्बुद्धि दीजिए न। जिस अंकिता को घर में सोई हुए अवस्था में खिड़की से पेट्रोल छिड़क शाहरुख़ और छोटू खान ने जला कर मार दिया, उसमें इनको प्रेम प्रसंग का एंगल कहाँ से दिखाई दे गया?” सिर्फ बसंत सोरेन ही नहीं, उनकी भाभी दुर्गा सोरेन भी दुमका के ही जामा से विधायक हैं।

अंकिता के परिजनों से मुलाकात करने के बाद बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अगर समय पर इलाज मिलता तो उसकी जान बच सकती थी। एयरलिफ्ट कर समय पर राँची के रिम्स में लाया जा सकता था। उन्होंने पूछा कि दुमका जिले के सोरेन परिवार के दोनों विधायक उस समय क्या कर रहे थे? उन्होंने आरोप लगाया कि झामुमो की सरकार बच्ची की जान बचाने की बजाय अपराधियों को बचाने का प्रयास करती है। उन्होंने फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से अपराधियों को सज़ा दिलाने की माँग की।

झारखंड में ‘लैंड जिहाद’ ऐसे भी: भीड़ बनकर आए मुस्लिम, मदरसे की जमीन बता 50 महादलित परिवारों का घर तोड़ा; पीटकर गॉंव से भगाया

झारखंड के पलामू में विशेष समुदाय के लोगों द्वारा 50 से ज्यादा महादलित परिवारों के सदस्यों को पीटे जाने का और उन्हें उनकी जमीन से बेदखल करने मामला सामने आया है। 

विशेष समुदाय का कहना है कि वो जमीन मदरसे की है जबकि मुसहर समुदाय कह रहा है कि 40 वर्ष से वो यहाँ रहते हैं। उनका नाम सर्वे में दर्ज हुआ था तब प्रशासन ने उन्हें रहने की जगह दी थी।

पूरी घटना कुजरुकला पंचायत के अंतर्गत मुरुमातू गाँव के पास की है। वहाँ टोंगरी पहाड़ी के नजदीक करीबन 40 दशक से खपरैल के नीचे मुसहर परिवार के लोग आराम से रहते थे। 29 अगस्त 2022 को समुदाय विशेष के लोग वहाँ आए और कच्चे घरों को जमींदोज करके मुसहर परिवारों से बदसलूकी करने लगे और उन पर गाँव छोड़ने का दबाव बनाने लगे।

मालूम हो कि समुदाय विशेष ने महादलित परिवारों के केवल घरों को ध्वस्त नहीं किया बल्कि ट्रैक्टर में बच्चों से लेकर बुजुर्गों को बैठाकर लोटो जंगल में छोड़ आए। इस दौरान सब लोग इधर-उधर भाग-भागकर रोते रहे लेकिन किसी पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

पुलिस पर अत्याचार को नजरअंदाज करने का आरोप

सबसे हैरान करने वाली बात इस पूरी घटना में यह है कि जहाँ पर महादलित परिवारों का ठिकाना था, वहीं से पांडू थाना मात्र 4 किमी दूरी पर था। फिर भी कोई पुलिसकर्मी महादलितों पर होते अत्याचार को रोकने नहीं आया। उलटा जब इस बाबत सवाल हुए तो कहा गया कि अगर मुसहर परिवार पुलिस से आकर मिलता तो वो कहीं खाली पड़े भूखंड में उनको रहने की जगह दे देते।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट बताती है कि थाना पुलिस केवल तब सामने आई जब ये दिखाना हुआ कि मुसहर परिवार सहमति से मुरुमातू को छोड़ रहे हैं। या फिर तब, जब मुसहर परिवारों को जंगल में छोड़ दिया गया और बाद में उनमें से कुछ लोग हिम्मत करके थाना शिकायत देने आए।

पांडू थाना प्रभारी धुमा किस्कू ने इस मामले पर कहा कि ये पूरा मामला जमीन विवाद से जुड़ा है। हमले के बाद मुसहर जाति के लोग थाना आए और मौखिक जानकारी दी। अभी तक लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

सोरेन सरकार में बढ़ी जिहादियों की हिम्मत: पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास

बता दें कि इस पूरे मामले में पीड़ितों का कहना है कि जहाँ वो लोग रहते थे वो भूखंड जीएम लैंड है। प्रशासन ने उनको सर्वे करवाकर वहाँ बसाया। मगर अब दूसरा समुदाय इसे मदरसे की जमीन बता रहा है। 

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता रघुबर दास ने इस पर लिखा है,

“हिम्मतवाली सरकार में जिहादियों की हिम्मत बढ़ गई है। महादलित परिवारों को घरों को मदरसे की जमीन बताकर तोड़कर बेघर कर दिया और यह गूंगी-बहरी सरकार मौज मस्ती में लगी रही। यह साबित करता है कि सरकार के सरंक्षण में राज्य की डेमोग्राफी बदलने के लिए सुनियोजित तरीके से षड्यंत्र चल रहा है।”

वहीं झारखंड प्रदेश भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष विधायक अमर बाउरी ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य में दलित और आदिवासी सुरक्षित नहीं है। ऐसा लग रहा है कि यह खबर अफगानिस्तान या पाकिस्तान की है। लेकिन सच तो यही है कि ये घटना झारखंड के पलामू की है।

महिला ने कहा- जब सेक्स किया तब नाबालिग थी, हाई कोर्ट ने बताया- सहमति से संबंध में आधार और पैन कार्ड चेक करने की जरूरत नहीं

दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने कहा है कि सहमति से यौन संबंध बनाते वक्त साथी की उम्र का सत्यापन करने के लिए आधार और पैन कार्ड देखने की जरूरत नहीं होती। अदालत ने यह टिप्पणी कथित हनीट्रैप केस के आरोपित को जमानत देते हुए की। महिला का दावा था कि जब उसे यौन संबंध बनाने के लिए आरोपित ने सहमत किया था तब वह नाबालिग थी।

कोर्ट ने यह भी पाया कि महिला के बयानों में भी विरोधाभास है। इसे देखते हुए हाई कोर्ट ने पुलिस को मामले की विस्तृत जाँच निर्देश दिया है। संदेह है कि खुद को पीड़ित बता रही महिला पेशेवर अपराधी हो सकती है। रेप का मामला पैसे वसूलने को लेकर दर्ज कराया गया हो।

जस्टिस जसमीत सिंह ने हंजला इकबाल को जमानत देते हुए टिप्पणी की, “सहमति से शारीरिक संबंध बनाने पर अपने साथी की जन्मतिथि की न्यायिक जाँच करने की आवश्यकता नहीं है। शारीरिक संबंध बनाने वाले साथी के आधार कार्ड, पैन कार्ड या स्कूल सर्टिफिकेट से उसका जन्मतिथि सत्यापित करने की आवश्यकता नहीं है।”

महिला ने दावा किया था कि जब उसके साथ संबंध बनाया गया, उस वक्त वह नाबालिग थी। पहले उसे सहमति से यौन संबंध बनाने का लालच दिया गया, फिर आरोपित ने उसे धमकाया और बलात्कार किया। आरोपित की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि महिला की तीन अलग-अलग जन्म तिथियाँ है। आधार कार्ड के अनुसार, उसकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1998 है। लेकिन उसके पैन कार्ड में 25 फरवरी 2004 जन्मतिथि दर्ज है। पुलिस जाँच में उसकी एक और जन्मतिथि जून 2005 मिली।

जस्टिस ने सिंह 24 अगस्त को सुनाए आदेश में कहा, “सच बात यह है कि आधार कार्ड में जन्मतिथि 1 जनवरी 1998 है। यह इस बात को बताने के लिए काफी है कि याचिकाकर्ता किसी नाबालिग से शारीरिक संबंध नहीं बना रहा था।”

इसके साथ ही अदालत ने महिला के बयान में कई विसंगतियाँ पाईं। कोर्ट ने जमानत देते हुए जून 2021 से अप्रैल 2022 तक बड़ी रकम महिला के खाते में ट्रांसफर होने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महिला ने लगभग एक साल की अवधि में आरोपित से अपने खाते में 50 लाख रुपए ट्रांसफर करवाए थे। प्राथमिकी दर्ज होने से ठीक एक सप्ताह पहले आरोपित ने अंतिम भुगतान किया था। महिला ने उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया था।