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झारखंड में महिला SI संध्या टोपनो पर पशु तस्करों ने चढ़ाई वैन, कुचल कर मार डाला: BJP ने बताया- गौतस्करों के बढ़े मनोबल का परिणाम

हरियाणा के नूंह में डीएसपी सुरेंद्र सिंह को डंपर से कुचलकर मारे जाने के चंद घंटों बाद झारखंड के राँची में भी महिला दरोगा को वाहन से कुचलकर मार डालने का मामला सामने आया है। महिला पुलिसकर्मी की पहचान संध्या टोपनो के तौर पर हुई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने देर रात जानवरों की अवैध तस्करी की सूचना मिलने पर एक वाहन को चेकिंग के लिए रोका। लेकिन तस्करों ने उनकी सुनने की बजाय उन पर पूरी वैन चढ़ा दी।

सामने आई जानकारी के अनुसार घटना बुधवार (20 जुलाई 2022) तीन बजे के आसपास की है। तुदुपना में इस समय एंटी क्राइम चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसी के तहत अपनी ड्यूटी करते हुए दरोगा संध्या टोपनो ने एक पिकअप वैन को आते देख उसे रुकने का इशारा किया। लेकिन, ड्राइवर ने गाड़ी को रोकने की बजाय उसे दरोगा के ऊपर चढ़ाया और फिर वहाँ से फरार हो गया।

घटना की सूचना होते ही मौके पर थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मी पहुँचे। उन्होंने संध्या को रिम्स अस्पताल में भर्ती कराया। मगर बुरी तरह कुचले जाने के कारण उन्होंने दम तोड़ दिया। संध्या टोपनो 2018 बैच की दरोगा थीं और वर्तमान में तुपुदाना ओपी के प्रभारी पद पर तैनात थीं।

एसएसपी राँची ने इस मामले में जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने SI संध्या को मारने वाले गाड़ी चालक को गिरफ्तार कर लिया है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि तस्करों ने महिला पुलिकर्मी को मारने के बाद वाहन इतनी तेज रफ्तार में भगाया कि वह रिंग रोड पर पलट गया। इसके बाद गाड़ी से कई तस्कर निकलकर भागे। हालाँकि पुलिस ने गाड़ी चलाने वाले को हिरासत में लिया और वाहन को जब्त कर लिया। अब बाकी आरोपितों की तलाश जारी है।

भारतीय जनता पार्टी के राज्य अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने इस घटना को लेकर बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि जब से राज्य में हेमंत सोरेन सरकार आई है उसके बाद से गौ तस्करी की राज्य में वृद्धि हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में बैठे लोग पूरी तरह उन्हें समर्थन देते हैं उनका संरक्षण करते हैं जिनके कारण कानून व्यवस्था चरमराई हुई है और तुपुदाना की घटना जंगलराज की ओर बढ़ता एक उदाहरण है। उन्होंने चेतावनी देते हुए सरकार से कहा कि या तो गौ तस्करी पर रोक लगाई जाए वरना जनता के क्रोध को झेलने के लिए तैयार हो जाएँ।

उल्लेखनीय है कि अभी कल ही हरियाणा के नूँह में पत्थर से भरे डंपर से डीएसपी सुरेंद्र सिंह बिश्नोई को कुचले जाने का मामला प्रकाश में आया था। पुलिस ने इस केस में इकरार नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक गुप्त सूचना मिलने पर डीएसपी इलाके में औचक निरीक्षण के लिए गए थे जहाँ उनके ऊपर डंपर चढ़ाया गया।

लोकसभा में भी एकनाथ शिंदे की ही शिवसेना: राहुल शेवाले को मिली मान्यता, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले उद्धव ठाकरे को एक और झटका

शिवसेना पर कब्जे की लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका लगा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार (19 जुलाई 2022) को एकनाथ शिंदे गुट के नेता राहुल रमेश शेवाले को सदन में शिवसेना नेता के रूप में मान्यता दे दी।

अब लोकसभा में शिवसेना के नेता राहुल शेवाले होंगे, जबकि भावना गवली चीफ व्हिप बनी रहेंगी। लोकसभा सचिवालय ने इस संबंध में सर्कुलर भी जारी कर दिया है। इसमें शिवसेना नेता के रूप में राहुल रमेश शेवाले का नाम दर्ज है।

लोकसभा स्पीकर के पास शिंदे और ठाकरे दोनों गुट की तरफ से आवेदन आए थे। बता दें कि लोकसभा में शिवसेना के 19 सांसद हैं, जिनमें से 12 सांसद शिंदे के साथ हैं। इन 12 लोकसभा सदस्यों ने संसदीय दल के नेता को बदलने के लिए अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा था। राहुल शेवाले ने कहा था कि कई सदस्य सदन के नेता विनायक राउत के काम से खफा थे। इसलिए स्पीकर को सदन का नेता बदलने के लिए लिखा गया था। उन्होंने कहा था कि चीफ व्हिप भावना गवली ही रहेंगी, इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।

इससे एक दिन पहले सोमवार (18 जुलाई 2022) को पार्टी के सदन के नेता विनायक राउत ने लोकसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपा था जिसमें विरोधी खेमे से कोई ज्ञापन स्वीकार नहीं करने का अनुरोध किया गया था। राउत ने सोमवार रात अध्यक्ष को सौंपे गए अपने पत्र में स्पष्ट किया था कि वह शिवसेना संसदीय दल के विधिवत नियुक्त नेता हैं और राजन विचारे चीफ व्हिप हैं।

इसके बाद मंगलवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे सहित शिवसेना के बारह लोकसभा सदस्यों ने ओम बिरला से मुलाकात की और उनसे संसद के निचले सदन में पार्टी के नेता को बदलने का अनुरोध किया। इसके साथ ही उन्होंने प्रतिद्वंद्वी गुट के किसी भी निवेदन पर विचार नहीं करने के लिए कहा था। वहीं दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शेवाले ने कहा, “पिछले साल जून में उद्धव ठाकरे NDA के साथ फिर से जुड़ने के इच्छुक थे, लेकिन अपनी बात से मुकर गए।”

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट में आज (20 जुलाई 2022) फिर महाराष्ट्र के विधायकों की अयोग्यता के मामले पर सुनवाई होगी। विधायकों को अयोग्य ठहराने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच सुनवाई करेगी। शिवसेना के दोनों खेमे ने याचिका दाखिल कर विधायकों को अयोग्य ठहराने की माँग की है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर अयोग्यता नोटिस पर तब तक फैसला नहीं कर सकते जब तक कि अदालत उस पर फैसला न दे।

‘मेरी माँ (राबड़ी देवी) को मारा, मुझे और मेरे परिवार को गालियाँ’: बोले तेज प्रताप- Video जारी कर दूँगा, ऐश्वर्या के साथ चल रहा तलाक का मामला

राजद नेता व बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव (Tej Pratap) के तलाक का मामला फैमिली कोर्ट में चल रहा है। बताया जा रहा है कि ऐश्वर्या राय तलाक नहीं देना चाहती हैं। इस बीच बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के बड़े बेटे तेज प्रताप ने मामले की मीडिया कवरेज पर नाराजगी जताई है। साथ ही वैवाहिक जीवन में मिली प्रताड़ना के वीडियो जारी करने की धमकी दी है।

तेज प्रताप ने मंगलवार (19 जुलाई 2022) को फेसबुक पर लाइव आकर तलाक के मुद्दे पर अपनी छवि खराब करने का आरोप मीडिया पर लगाया। उन्होंने कहा, “मामला कोर्ट में है। मैं हर चीजों को झेलने का काम कर रहा हूँ। किस तरह से इस मामले में हमारी छवि को धूमिल करने का काम किया गया। इसे पब्लिक डोमेन में लाने का काम न करें।”

तेज प्रताप ने कहा कि इस मामले में यदि उन्हें खुलासा करना होगा तो उनके पास एक हजार वीडियो हैं। उन्होंने कहा, “मैं अपने माता-पिता, भाई बहनों के साथ हुए शारीरिक और मानसिक शोषण को साबित करने के लिए अनगिनत वीडियो क्लिप और सबूत पेश कर सकता हूँ। लेकिन मैंने उन्हें साझा नहीं किया, क्योंकि यह एक लड़की का मामला है और बेहद संवेदनशील है।” साथ ही कहा, “हम भी खुलासा कर सकते हैं। हम भी वीडियो चलाने का काम कर सकते हैं। यदि इस मामले को नहीं रोका गया तो मैं आपके सामने दूध का दूध, पानी का पानी करके रहूँगा। मैं अब रुकूँगा नहीं।”

उन्होंने कहा, “चार साल मैंने झेलने का काम किया है। अब इस वीडियो को पूरे बिहार की जनता देखेगी। किस तरीके से मेरी माँ को मारा गया। किस तरीके से मुझे गाली दी गई। मेरे पिता, भाई-बहनों को गाली दी गई।” लाइव के अंत में उन्होंने कहा कि ये चीजें न सामने आए इसलिए मेरी गुजारिश है कि इस मामले को कोर्ट से ही खत्म होने दिया जाए।

तेज प्रताप ने यह भी कहा कि वे पिछले चार साल से जो झेल रहे हैं, उसे कोई नहीं समझ सकता। ससुराल वालों की तरफ से उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। करोड़ों रुपए की डिमांड की जा रही है। उनके पूरे परिवार को बर्बाद करने की साजिश चल रही है।

बता दें कि तेज प्रताप यादव मई 2018 में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय की पोती ऐश्वर्या राय के साथ के शादी के बंधन में बंधे थे। लेकिन उनका रिश्ता छह महीने से भी कम समय तक चला और अब यह मामला फैमिली कोर्ट में है।

‘हिंदू होना पाप है क्या’ : रॉकेट्री की आलोचना पर नंबी नारायण का सवाल, कहा- ‘मैं हिंदू हूँ तो फिल्म में मुस्लिम-ईसाई दिखाएँगे क्या’

‘रॉकेट्री- द नंबी इफेक्ट’ फिल्म में इसरो वैज्ञानिक को हिंदू परंपराओं का पालन करते हुए दिखाए जाने पर लिबरल आलोचकों ने जो सवाल खड़े किए थे, उन पर स्वयं नंबी नारायण ने जवाब दिया है। उन्होंने पूछा है कि क्या हिंदू होना पाप है। अगर वो हिंदू हैं और हिंदू धर्म का अनुसरण करते हैं तो वही तो उनकी बायोग्राफी में दिखाया जाएगा।

डेक्कन वाहिनी को दिए गए इंटरव्यू के दौरान उन्होंने फिल्म की आलोचना को गलत बताते हुए कहा,

“मैं हिंदू हूँ। मुझे कोई शर्म नहीं है हिंदू होने में। क्या हिंदू होना पाप है? अगर मैं हिंदू हूँ और मेरी कहानी दिखाई जा रही है तो वो मुझे हिंदू की तरह ही तो दिखाएँगे । वह लोग मुझे मुस्लिम या ईसाई तो नहीं दिखा सकते…। तो फिर हम किस बारे में बात कर रहे हैं? क्या ब्राह्मण होना पाप है? मैं ब्राह्मण नहीं हूँ, वो अलग सवाल है। अगर कोई ब्राह्मण है तो क्या आप उसे हटा देंगे? कितने ब्राह्मण हैं जिन्होंने इस देश को अपनी सेवा दी। कोई एक नहीं। बहुत सारे। मैं आपको लिस्ट दे सकता हूँ।”

उन्होंने कहा,

“मैं बस ये कहना चाहता हूँ कि हम बेवजह मामले को रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। हम नरेंद्र मोदी को भाजपा नेता कहते हैं न कि प्रधानमंत्री। आपकी जानकारी के लिए बताता हूँ, नरेंद्र मोदी को भूल जाएँ। क्या आप जानते हैं कि वर्तमान के केरल मुख्यमंत्री ने मेरा कितना समर्थन किया था? जिस ढंग से उन्होंने मुझे समर्थन दिया वो जितना बताओ उतना कम है? उन्होंने मेरे मामले को लंबा खिंचने से रोका। ऐसे में क्या मुझे कम्युनिस्ट कहा जाने लगेगा।”

वह इंटरव्यू में साफ करते हैं कि उनका किसी भी राजनीतिक पार्टी के प्रति कोई झुकाव नहीं है। लेकिन फिर भी उनसे सवाल हो रहे हैं क्योंकि लोगों की एक मानसिकता बन गई है। वह कहते हैं, “आप मुझसे सवाल नहीं पूछते, क्योंकि आपने एक तरह की मानसिकता बनाई हुई है कि आप मुझपर बीजेपी का ठप्पा लगाना चाहते हैं।” 

उन्होंने इंटरव्यू लेने वाले को सलाह दी वो अपने सवाल में सुधार करें और चीजों को समझें। तब उन्हें पता चलेगा कि चाहे शिवसेना हो या कोई और उनसे किसी का कोई लेना देना नहीं है।

वह बोले, “अगर कोई मुझे समर्थन देता है है तो कृपया ऐसा न दिखाएँ कि मैं उस पार्टी विशेष का हो गया हूँ। मैं ये देखकर खुश होता हूँ मैंने नरेंद्र मोदी और पिनराई विजयन दोनों से बात की। वह दोनों ही शीर्ष पर हैं। अगर मेरा केस सही नहीं होता तो ये दो लोग क्यों मेरे साथ आते।”

रॉकेट्री की आलोचना

बता दें कि नंबी नारायण के जीवन पर आधारित रॉकेट्री फिल्म 1 जुलाई 2022 को सिनेमाघरों में आई थी। आर माधवन ने इस फिल्म की स्क्रिप्ट को लिखा, इसे डायरेक्ट किया और इसमें लीड रोल निभाया। इस फिल्म को देखने के बाद कई लिबरलों ने इस पर सवाल खड़े किए थे। फिल्म आलोचक अनुपमा चपड़ा ने कहा था,

“ये सराहनीय बात है कि फिल्म ने नारायणन की उपलब्धियों को सुर्खियों में ला दिया है। लेकिन फिल्म में लगातार उनकी राष्ट्रभक्ति दिखाई गई है और बार-बार उनके धर्म को प्रदर्शित किया गया है। सबसे पहले ही दृश्य में नारायण अपने घर में पूजा कर रहे हैं और किसी भी महत्वपूर्ण समय में वह प्रार्थना ही करते दिखते हैं। “

‘3 घंटे बिना ब्रा के दी परीक्षा, अंत में कहा – हाथ में लेकर निकल जाओ’: NEET की छात्रा ने बताया केरल में क्या हुआ, केंद्र और महिला आयोग हरकत में

मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के दौरान केरल के कोल्लम में एग्जास हॉल में जाने से पहले चेकिंग के नाम पर कुछ छात्राओं के ब्रा उतरवाने की घटना को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। जहाँ शिक्षा मंत्रालय ने एग्जाम बाद से उभरे इस मामले में NTA से रिपोर्ट माँगी है। वहीं NTA ने पुलिस में दी गई शिकायत को ‘मनगढ़ंत’ और ‘गलत इरादे’ से की गई बताया है। फ़िलहाल NTA ने इलाके का दौरा करने से एक कमिटी का गठन किया है, जो तथ्यों का पता लगाएगी। वहीं इस मामले में महिला आयोग भी कार्रवाई के लिए पत्र लिख चुका है।

क्या है मामला

केरल के कोल्लम में NEET एग्जाम सेंटर पर सख्ती के नाम पर करीब 100 से अधिक छात्राओं को अपने ब्रा उतारने के लिए मजबूर किया गया। इसको लेकर अब छात्राओं के परिजनों ने पुलिस में मामला दर्ज कराया है। जबकि कोल्लम के मोर्थम इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलेजी ने छात्राओं के आरोपों से इनकार किया है।

इस मामले में केरल पुलिस को अब तक तीन शिकायतें मिलीं हैं। जिसमें से एक केरल के कोल्लम जिले में 17 वर्षीय लड़की के पिता गोपकुमार सूरनाद ने दर्ज कराई है। उन्होंने TNM से बात करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा जारी आधिकारिक सूचना बुलेटिन में धातु के हुक वाली ब्रा पर किसी प्रतिबंध का उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि जब उनकी बेटी ने अपने इनरवियर को हटाने से इनकार कर दिया, तो उन्हें परीक्षा न देने के लिए कहा गया। मेरी बेटी लंबे समय से इस परीक्षा की तैयारी कर रही थी। लेकिन वह ठीक से परीक्षा भी नहीं लिख पा रही थी। वह दुखी होकर रोती हुई हमारे पास लौट आई। उन्होंने आगे बताया कि सेंटर पर अनिवार्य रूप से छात्राओं से अपने इनरवियर को हटाने के लिए कहा गया था। बच्चे बहुत असहज थे। उनमें से कई रो रहे थे। अगर ऐसा है तो वे फ्रिस्किंग के दौरान इनरवियर चेक कर सकते हैं। लेकिन उन्हें क्यों हटाएँ? NEET बुलेटिन में ऐसे कोई नियम नहीं हैं।

वहीं NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित छात्रा ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, “उन्होंने मुझसे पूछा, क्या आपने मेटल हुक इनरवियर पहना है? मेरे हाँ कहने पर उन्होंने मुझे अलग लाइन में खड़ा कर दिया।”

लड़की ने कहा कि उसे समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है। इसके बाद बाद उन्होंने मुझे इनरवियर उतारकर मेज पर रखने को कहा। सारी इनरवियर एक साथ रखी गई थीं। हमें ये तक नहीं पता था कि हमें ये वापस मिलेंगी भी या नहीं। हम जब एग्जाम देकर लौटे तो बहुत भीड़ थी। धक्का-मुक्की हुई लेकिन मुझे अपनी इनरवियर वापस मिल गई।”

पीड़िता ने आरोप लगाया, “उन्होंने हमसे अपनी इनरवियर हाथ में लेकर वहाँ से जाने को कहा, उन्होंने कहा कि इसे यहाँ पहनने की जरूरत नहीं है। हम यह सुनकर हम बहुत शर्मिंदा हुए। यह बहुत भयानक अनुभव था। जब हम एग्जाम हॉल में लिख रहे थे तब हमने अपने बालों से सीना ढका। वहाँ लड़के-लड़कियाँ दोनों थे। यह बहुत ही कठिन और असहज स्थिति थी।”

NCW ने लिया संज्ञान

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस संगीन प्रकरण को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग शर्मनाक करार दे चुका है। एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने एनटीए को पत्र लिखकर आरोपों की स्वतंत्र जाँच की माँग की है। इस घटना के सामने आने के बाद केरल के उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदू ने भी इस घटना को ‘अमानवीय और चौंकाने वाला’ करार दिया और केंद्र से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

वहीं NBT की रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में एनटीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमें कोई शिकायत अथवा प्रतिवेदन नहीं मिला है। मीडिया रिपोर्ट में किए गए दावों के आधार पर केन्द्र के अधीक्षक तथा पर्यवेक्षक से तत्काल रिपोर्ट माँगी गई है।” उन्होंने आगे यह भी कहा कि हमें बताया गया है कि इस प्रकार की कोई घटना नहीं हुई है और दर्ज कराई गई शिकायत ‘मनगढ़ंत’ और ‘गलत इरादे’ से की गई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, छात्राओं ने दावा किया है कि रविवार को जब वे परीक्षा देकर बाहर निकलीं तो उन्हें सारे अंडरगारमेंट्स डिब्बों में एक साथ फेंके हुए मिले। जबकि केरल के मार्थोमा इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में स्थित अयूर चदायमंगलम केंद्र ने यह कहते हुए जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है कि छात्राओं की तलाशी और बायोमेट्रिक जाँच बाहरी एजेंसियों द्वारा की गई थी।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अधिकारियों के अनुसार, मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में रविवार को करीब 95 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई थी, जिसके लिए इस साल सबसे ज्यादा आवेदन आए थे। कुल 18,72,329 उम्मीदवारों ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के लिए पंजीकरण कराया था, जिनमें से 10.64 लाख छात्राएँ थीं।

पता चल गया कहाँ पहुँच रहा ड्रग्स का पैसा, इसी से देश विरोधी एजेंडा चला रहे फर्जी पत्रकार: आतंकवाद की भी फंडिंग, मिले कई दस्तावेज

जम्मू-कश्मीर में ड्रग्स की तस्करी और आतंकवाद का रिश्ता काफी पुराना है। इसी बीच कश्मीर घाटी में कुछ फर्जी पत्रकारों के आतंकवाद का महिमामंडन करने और सुरक्षा बलों को बदनाम करने के लिए ड्रग मनी के इस्तेमाल करने का मामला सामने आया है। सुरक्षा एजेंसियाँ भी भारत की छवि खराब करने वाले ‘फर्जी’ पत्रकारों द्वारा अवैध धन का इस्तेमाल करने से हैरान हैं।

नम्बला, उरी और बारामूला शहर में छापे के दौरान एसआईए की जम्मू विंग के अधिकारियों ने ड्रग सिंडिकेट और इन ‘फर्जी’ पत्रकारों के बीच साँठ-गाँठ का पर्दाफाश कर पर्याप्त सबूत जुटाए हैं। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, छापेमारी के दौरान मिले सबूतों से एसआईए (SIA) टीम को यह समझने में आसानी हुई है कि पाकिस्तान से तस्करी कर लाए गए नशीले पदार्थों और ड्रग्स की बिक्री से जुटाए गए धन का इस्तेमाल आतंकवाद और जेहादी एजेंडा चलाने वाले पत्रकारों दोनों के लिए किया गया था।

बताया जा रहा है कि फर्जी पत्रकारों को सुरक्षा बलों, केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) की छवि खराब करने, आतंकवाद का महिमामंडन करने और युवाओं को भ्रमित करने के लिए भुगतान किया गया था। एसआईए ने छापेमारी 31 मार्च 2022 को गाँधी नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज टेरर फंडिंग मामले के संबंध में एफआईआर संख्या 73/2022 के तहत की थी। यह मामला धारा 13, 17, 18 यूए (पी) अधिनियम, 1967 के तहत दर्ज किया गया था।

एसआईए की टीमों द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि कैसे सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की जड़े मजबूत करने और धन जुटाने के लिए किया गया था। इसके अलावा जाँच में यह भी पता चला है कि किस तरह ड्रग मनी का इस्तेमाल आतंकी मॉड्यूल, अलगाववादियों, ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) और मारे गए आतंकवादियों के परिवारों को देने के लिए किया जा रहा है।

गरीबों के कल्याण के लिए योगी सरकार को ₹600 करोड़ की संपत्ति दान करेंगे ये उद्योगपति: जानिए जूते की वो कहानी, जिसने बदल दी उनकी सोच

उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद के उद्योगपति डॉ. अरविंद कुमार गोयल ने अपनी पूरी संपत्ति सोमवार (18 जुलाई, 2022) को अचानक उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को दान करने की घोषणा कर दी। दरअसल, उद्योगपति के साथ-साथ समाजसेवी एवं शिक्षाविद डॉ. अरविंद गोयल ने 25 साल पहले ही ठान लिया था कि वह एक दिन अपनी सारी संपत्ति गरीबों और जरूरतमंदों के कल्याण के लिए दान कर देंगे। ऐसा ख्याल उनके मन में ट्रेन में सफर के दौरान एक गरीब को ठंड में ठिठुरता देखकर आया था। तब उन्होंने तत्काल उसे अपने जूते तक दे दिए थे।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तक दान स्थान्तरण की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। वहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. अरविंद कुमार गोयल की संपत्ति की कुल कीमत करीब 600 करोड़ रुपए बताई गई है। गोयल ने अपने पास सिर्फ मुरादाबाद सिविल लाइंस स्थित कोठी रखी है। उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति दान करने के बाद अपना पूरा जीवन देशसेवा और समाजसेवा को समर्पित करने की इच्छा व्यक्त की है।

बता दें कि गोयल ने 50 साल की कड़ी मेहनत से यह संपत्ति बनाई। वहीं गोयल ने यह दान सीधे राज्य सरकार को इसलिए दिया है, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों तक मदद पहुँचाई जा सके। अपनी इस घोषणा की जानकारी देते हुए डॉ गोयल ने कहा, “राज्य सरकार उनकी सारी संपत्ति से प्रदेश में गरीबों के लिए निशुल्क शिक्षा और अच्छे इलाज की व्यवस्था करे। उनकी इच्छा है कि समाज का कोई भी गरीब, अनाथ और बेसहारा व्यक्ति शिक्षा से वंचित न रहे।”

वहीं अपने दान के इस अचानक से लगने वाले निर्णय पर डॉ गोयल ने 25 साल पहले की उस घटना को याद करते हुए कहा, “वो दिसंबर की ठंडी रात थी। मैं जैसे ही ट्रेन में सवार हुआ। सामने देखा कि एक गरीब आदमी ठंड से ठिठुर रहा है। उसके पास न तो चादर थी और न ही पैरों में चप्पल या जूते थे। उस आदमी को देखकर मुझसे रहा नहीं गया। मैंने अपने जूते उतार कर उसे दे दिए। कुछ देर तक तो मैंने सहन किया, लेकिन कड़ाके की ठंड होने की वजह से मेरी भी हालत खराब होने लगी। तब मैंने सोचा कि इस सामने वाले आदमी की तरह तमाम लोग ऐसे ही ठंड में ठिठुरते होंगे। मैं घर पहुँचा, लेकिन उस आदमी की सूरत मेरे जहन से नहीं निकल रही थी। इसके बाद मैंने बेसहारा और गरीबों के लिए काम शुरू कर दिया। बुजुर्गों के लिए वृद्धाश्रम बनवाया। छात्र-छात्राओं को किताबें, कॉपी और कपड़े बाँटने शुरू कर दिए।”

डॉ गोयल ने अपनी कहानी साझा करते हुए आगे बताया, “उस दिन से ठंड हो, गर्मी हो या बारिश हो, मैं रोज अपने घर से निकला। सड़क किनारे बैठे लोगों की आर्थिक मदद, फल, सब्जी बेचने वाले बुजुर्ग महिला-पुरुषों की मदद की। लंबे समय से समाजसेवा करने के दौरान गरीबों और बेसहारा लोगों की मुझे बहुत दुआएँ मिलीं। मैं और मेरे परिवार ने भी खूब तरक्की की। अब मैंने सोच लिया है कि अपनी सारी संपत्ति दान कर दूँगा। इसके लिए मैंने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर माँग रखी है। जिला प्रशासन शासन से अनुमति लेगा। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।”

रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. गोयल के सहयोग से बीते करीब 20 साल से देशभर में सैकड़ों वृद्धाश्रम, अनाथ आश्रम और फ्री हेल्थ सेंटर चलाए जा रहे हैं। उनकी मदद से चल रहे स्कूलों में गरीब बच्चों को शिक्षा मुफ्त दी जा रही है। यहाँ तक कि कोविड लॉकडाउन में भी करीब 50 गाँवों को गोद लेकर उन्होंने लोगों को मुफ्त खाना और दवा दिलवाई। उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ राजस्थान में भी उनके स्कूल-कॉलेज हैं।

गौरतलब है कि डॉ. अरविंद कुमार गोयल के समाजसेवा के जूनून और लगन को देश और दुनिया खूब सराहा और सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें अब तक भारत के चार राष्ट्रपतियों से भी सम्मान प्राप्त हो चुका है। बता दें कि मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम समाजसेवा के लिए उनको सम्मानित कर चुके हैं। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी डॉ. गोयल के सेवा कार्यों के लिए उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।​​​​​​

‘शराब पीने वालों के लिए खुशखबरी, प्रधानमंत्री घर-घर पहुँचा रहे पाइपलाइन’: आवेदन फॉर्म हुआ वायरल, जानिए क्या है माजरा

सोशल मीडिया पर एक फार्म वायरल किया जा रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार लोगों के घरों तक शराब की पाइपलाइन पहुँचाने में मदद कर रही है। शराब की पाइपलाइन के लिए लोग आवेदन कर सकते हैं। वायरल फॉर्म में लिखा है, “भारत सरकार, शराब की पाइपलाइन कनेक्शन हेतु आवेदन। माननीय प्रधानमंत्री ने रोज शराब पीने वालों के लिए शराब की पाइपलाइन देने का फैसला लिया है, जो भी इच्छुक हों वो 11000 रुपए के डिमांड ड्राफ्ट के साथ इस आवेदन पत्र को भरकार प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO Office) में जमा करवाएँ।

आवेदन प्राप्त होने के एक महीने बाद निरीक्षण करके आवेदक के घर मीटर के साथ शराब की पाइपलाइन को जोड़ दिया जाएगा। बाद में खपत के अनुसार, बिल घर पर आएगा।” इसके बाद नीचे आवेदन का नाम लिखने के लिए जगह छोड़ी गई और साथ ही एक फोटो के लिए भी जगह दी है। यह फाॅर्म बिल्कुल सरकारी फार्म जैसा ही दिख रहा है।

यह मैसेज सोशल मीडिया पर इतना वायरल हुआ कि प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) फैक्ट चेक के पास पहुँच गया। फैक्ट चेक डिपार्टमेंट ने इस खबर को फर्जी बताया है। PIB ने इस वायरल मैसेज के खूब मजे लिए और नाना पाटेकर की फोटो के साथ इसे शेयर करते हुए लिखा, “चिल गाइज, अपनी उम्मीदों को ज्यादा मत बढ़ाओ।” यानी यह खबर सच नहीं है। इस तरह की कोई योजना नहीं आ रही है। वहीं, यूजर्स भी इस ट्वीट पर काफी मजे ले रहे हैं और इसके मीम्स वायरल कर रहे हैं।

कपिल सिंह लिखते हैं, “लगता है जिस बंदे ने ट्वीट किया है वो मदिरा पान करता है।”

अमिताभ राय लिखते हैं, “पाइपलाइन की कोई आवश्यकता नहीं…CHEER।”

एक यूजर ने लिखा, “दिल्ली सरकार के लिए बेस्ट प्लान… केजरीवाल जी को एक बार सोचना चाहिए।”

कमल सेठी लिखते हैं, “PIB fact check team आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं भारत सरकार का अगले कई 100 वर्षों तक भी ऐसा सोचना संभव नहीं होगा परंतु दिल्ली में अगले 2 वर्षों में श्रीमान केजरीवाल जी इस योजना को लागू जरूर कर देंगे नल से दारू वह भी बिना मीटर के फ्री।”

फोटो साभार: कमल सेठी का ट्विटर

मजदूर शहजाद अंसारी ने ‘रवींद्र’ बन हिन्दू महिला से मंदिर में की शादी, सच्चाई पता चलने पर मारपीट के घर से निकाला: स्टेशन पर रह रही

झारखंड के रहने वाले एक युवक पर आरोप लगा है कि उसने उत्तर प्रदेश आकर ‘लव जिहाद’ किया। उक्त मुस्लिम युवक ने 7 वर्ष पूर्व मंदिर में हिन्दू युवती से शादी की थी। ससुराल पहुँचने पर इसका पता चला कि लड़का मुस्लिम है। उक्त महिला इसके बाद मुस्लिम टोले से भाग कर गढ़वा में आ गई और न्याय की गुहार लगा रही है। उक्त मुस्लिम युवक गढ़वा जिले के सगमा प्रखंड के कुंबा खुर्द गाँव का रहने वाला है। उसने आजमगढ़ की युवती से हिन्दू रीति-रिवाज से शादी की थी।

लड़की 7 साल बाद अपने ससुराल पहुँची, तब उसे पता चला कि लड़का मुस्लिम है। इसके बाद मुस्लिम युवक ने हिन्दू महिला को घर से निकाल दिया, जिसके बाद वो बाहर दर-दर की ठोकर खाने के लिए मजबूर है। उपायुक्त रमेश घोलप के पास पहुँच कर महिला ने न्याय की गुहार लगाई है। बंशीधर नगर स्थित महिला थाना व पुलिस अधीक्षक के पास भी महिला ने शिकायत की थी। शहजाद अंसारी दिल्ली के क्रेशर प्लांट में मजदूरी करता था।

वहीं पर पीड़िता का एक रिश्तेदार भी काम करता था। उसी रिश्तेदार से नंबर लेकर शहजाद अंसारी ने महिला से फोन पर बातचीत करनी शुरू कर दी। जब वो महिला रिश्तेदार के पास जाती-आती थी, तब वो उससे बात भी करता था। मुलाकात होने लगी तो इसके 6 महीने बाद उसने मंदिर में शादी कर ली। शादी के 2 दिन बाद उसे गाँव ले गया, लेकिन कुछ दिन रहने के बाद पीड़िता अपने मौके लौट आई। शहजाद अंसारी भी पीड़िता के मायके में ही एक अलग कमरा लेकर रहने लगा।

शहजाद अंसारी करीब 8 वर्ष तक वैसे ही रहता रहा। क्रेशर प्लांट बंद होने के बाद वो वापस अपने गाँव लौट गया। जब पीड़िता उसके घर पहुँची तो वो मारपीट करने लगा। उसने भरण-पोषण के लिए पैसे देने भी बंद कर दिए। अप्रैल 2022 में महिला ने गढ़वा के एसपी से इसकी शिकायत की। अब वो गढ़वा रेलवे स्टेशन पर ही रह रही हैं। पिछले कुछ समय से ‘लव जिहाद’ कानून के तहत कई मामले दर्ज हुए हैं। फ़िलहाल केवल भाजपा शासित राज्यों में ही ऐसे कानून हैं।

‘ASI ने खोजा, वामपंथियों ने छिपाया’: समुद्री में डूबी द्वारका के रहस्यों पर आ रही है ‘कार्तिकेय 2’, इस्कॉन मंदिर पहुँची पूरी टीम

तेलुगु फिल्म ‘कार्तिकेय’ 8 साल बाद अपने सीक्वेल के साथ एक बार फिर धमाल मचाने के लिए तैयार है। ‘कार्तिकेय 2’ (Karthikeya 2) में भगवान कृष्ण और समुद्र में डूबे द्वारका के रहस्यों से पर्दा उठाया जाएगा। इन दिनों फिल्म की स्टारकास्ट ‘कार्तिकेय 2’ के प्रोमोशन्स में खासा बिजी है। आज हिंदी में फिल्म का टीजर रिलीज हो गया है। इसी सिलसिले में ‘कार्तिकेय 2’ फिल्म में लीड रोल निभाने वाले निखिल सिद्धार्थ (Nikhil Siddartha) फिल्म की स्टारकास्ट के साथ मंगलवार (19 जुलाई 2022) को वृंदावन के इस्कॉन मंदिर पहुँचे।

अभिनेता ने अपने ट्विटर हैंडल पर इसकी तस्वीरें भी शेयर की हैं। उन्होंने लिखा, “इस्कॉन वृंदावन में एपिक मिस्टिकल मूवी कार्तिकेय 2 का बहुत अच्छा अनुभव रहा। इस्कॉन के प्रवक्ता राधाराम दास जी ने फिल्म में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े तथ्यों और द्वारका के रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए टीम को धन्यवाद दिया।”

राधाराम दास ने कहा, “महाभारत के अनुसार कृष्ण का द्वारका 5124 साल पहले समुद्र में डूब गया था। 1984 में ASI ने समुद्र में डूबे हुए द्वारका को खोजा, लेकिन वामपंथियों ने उन निष्कर्षों पर पर्दा डाल दिया। यह फिल्म तथ्यों पर आधारित है। हमारा रामायण और महाभारत का इतिहास है। ​इस विषय पर फिल्म बनाने के लिए आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद।”

बता दें कि ‘कार्तिकेय’ फिल्म को पीपल मीडिया फैक्ट्री और अभिषेक अग्रवाल आर्ट्स द्वारा प्रेजेन्ट किया जा रहा है। ये सुपरनैचुरल मिस्ट्री थ्रिलर 2014 में आई फिल्म कार्तिकेय का सीक्वेल है। यह ​फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु में 22 जुलाई को रिलीज होगी। फिल्म के कन्नड़ और मलयालम में भी रिलीज होने की उम्मीद है।

इस फिल्म के डायरेक्टर चंदू मोंडेती हैं, उन्होंने इस फिल्म की कहानी भी लिखी है। वहीं फिल्म का प्रोडक्शन टीजी विश्व प्रसाद और अभिषेक अग्रवाल का है। इस फिल्म में निखिल सिद्धार्थ के साथ अनुपमा परमेश्वरन, श्रीनिवास रेड्डी, विवा हर्षा और आदित्य मेनन मुख्य किरदार में नजर आएँगे। फिल्म की कोरियोग्राफी कार्तिक घट्टामनेनी ने की है और म्यूजिक काला भैरव ने दिया है।