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सेल्फी के चक्कर में ब्रिटिश टूरिस्ट की गई जान, हेलीकॉप्टर की ब्लेड से ग्रीस में हुआ हादसा

ग्रीस में सोमवार (25 जुलाई, 2022) शाम एक हेलीकॉप्टर के प्रोपेलर की चपेट में आने से एक 22 वर्षीय ब्रिटिश पर्यटक की मौत हो गई है। ब्रिटेन के टाइम्स अखबार ने बताया कि पुलिस ने पीड़ित की पहचान जैक फेंटन के रूप में की और कहा कि वह अपने चार्टर्ड विमान से उतरते समय गंभीर रूप से घायल हो गया था। जिससे उसकी मौत हो गई।

इस मामले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने टाइम्स को बताया, “वह एथेंस में बेल 407 हेलीकॉप्टर से उतरने वाले पहले व्यक्ति थे और जैसे ही वह पीछे की ओर बढ़े, विमान के छोटे रियर रोटर से उनके सिर में चोट लग गई।” वहीं द सन की रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि सेल्फी लेने के चक्कर में पीछे जाने से यह हादसा हो गया।

टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, फ़िलहाल, हेलीकॉप्टर पायलट और दो ग्राउंड क्रू को फिलहाल हिरासत में लिया गया है और जिन्हें कथित लापरवाही के आरोपों में कोर्ट के पेश किया गया।

वहीं इस मामले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मीडिया को बताया, “हम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या गलत हुआ और यह दुखद दुर्घटना कैसे हुई।”

रिपोर्ट के अनुसार, दरअसल, जैक फेंटन ने अपने तीन दोस्तों के साथ मायकोनोस (Mykonos) से स्पाटा के एक निजी हवाई अड्डे के लिए उड़ान भरने के लिए दो हेलीकॉप्टर किराए पर लिए थे। वे तब एक निजी जेट से वापस यूके जाने की योजना बना रहे थे। इसी दौरान ग्रीस के एथेंस में हेलीकॉप्टर ब्लेड से उसके सिर में चोट लग गई, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

इस मामले में कहा जा रहा है कि फेंटन हेलीकॉप्टर से उतरने के बाद पीछे की ओर चले गए, जबकि इसके इंजन अभी भी चल रहे थे। और टेल रोटर से घायल होने की वजह से मौत हो गई।

वहीं फेंटन के माता-पिता दूसरे हेलीकॉप्टर में थे, जो दुर्घटना के समय तक जमीन नहीं उतरा था। द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार, उस हेलीकॉप्टर के पायलट ने जमीन पर अपने सहयोगियों द्वारा सतर्क किए जाने के बाद दूसरे हवाई अड्डे के लिए उड़ान भरने का फैसला किया, ताकि उनके माता-पिता को दुर्घटना का यह भयावह दृश्य न देखना पड़े।

जबकि इस मामले में फेंटन के दोस्त जैक स्टैंटन-ग्रीव्स, जो हेलीकॉप्टर में साथ में थे, ने द सन को बताया कि हेलिकॉप्टर से बाहर निकलते समय उन्हें कोई निर्देश नहीं दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनका दोस्त पीछे के ब्लेड की ओर क्यों मुड़ा।

वहीं ग्रीक अधिकारियों ने दावा किया है कि समूह को हेलीकॉप्टर से दूर ले जाया गया था – लेकिन जैक अपने फोन पर बिजी था। पुलिस इस एंगल से भी जाँच कर रही है कि हो सकता है कि युवक हेलिकॉप्टर के साथ सेल्फी लेने की कोशिश कर रहा हो।

हिन्दू विरोधी ही नहीं, जातिवादी लड़ाई को भी बढ़ावा देती है ‘शमशेरा’: ‘दरोगा शुद्ध सिंह’ अंग्रेजों का दलाल, चौथे दिन 70% गिरा कलेक्शन

बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) की फिल्म ‘शमशेरा’ (Shamshera) बॉक्‍स ऑफिस पर 4 दिनों में ही ढेर हो गई। 4 साल के बाद सिल्वर स्क्रीन पर लौटे रणबीर कपूर ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी फिल्म ‘शमशेरा’ का इतना बुरा हश्र होगा। 4000 से अधिक स्क्रीन पर रिलीज होने के बावजूद यह फिल्म दर्शक जुटा पाने में सफल नहीं हो पाई। ओपनिंग डे पर 10 करोड़ रुपए की कमाई करने वाली ‘शमशेरा’ चौथे दिन केवल 3.25 करोड़ रुपए का बिजनेस ही कर पाई।

150 करोड़ रुपए के बजट में बनी यह फिल्‍म बॉक्‍स ऑफिस पर बॉलीवुड की अगली डिजास्‍टर साबित होने वाली है। सोमवार की कमाई देखकर यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि ‘शमशेरा’ 100 करोड़ रुपए भी नहीं कमाए पाएगी। ‘शमशेरा’ फिल्म जाति के नाम पर भी लड़ाती है, जहाँ अंग्रेजों के दलाल ‘दरोगा शुद्ध सिंह’ (संजय दत्त) को जनजातीय लोगों पर क्रूरता करते हुए दिखाया गया है और डाकू के किरदार में हीरो को ‘सवर्णों’ को लूटते हुए दिखाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार को ‘शमशेरा’ के कलेक्शन में 70 फीसदी गिरावट दर्ज की गई। ‘शमशेरा’ के चौथे दिन की कमाई मिलाकर मूवी की कुल कमाई 34 करोड़ हो गई है। ‘शमशेरा’ ने शुक्रवार को 10.25 करोड़, शनिवार 10.50 करोड़, रविवार 11 करोड़ का कलेक्शन किया है।

‘शमशेरा’ फिल्‍म की सबसे कमजोर कड़ी इसकी कहानी को बताया जा रहा है। यही नहीं सिनेमाघरों में साउथ की फ़िल्में जैसे ‘पुष्‍पा’, ‘आरआरआर’ और ‘केजीएफ 2’ के रिलीज होने के बाद से दर्शकों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। उन्हें बॉलीवुड फिल्मों की कहानी पसंद नहीं आ रही है। यही कारण है कि ‘शमशेरा’ का फर्स्‍ट वीकेंड भी बहुत ही बुरा रहा। हालाँकि, एक के बाद बॉलीवुड फिल्मों के फ्लॉप होने की वजह यही बताई जा रही है।

बता दें कि राजकुमार हिरानी की फिल्म ‘संजू’ की रिलीज के चार साल बाद ‘शमशेरा’ से रणबीर कपूर ने बड़े पर्दे पर वापसी की है। फिल्‍म में वह डबल रोल में हैं। इसमें उनके साथ संजय दत्त, वाणी कपूर, रोनित रॉय और सौरभ शुक्‍ला भी हैं, लेकिन दमदार स्टारकास्ट और डायरेक्‍टर करण मल्‍होत्रा के बावजूद यह फिल्‍म दर्शक बटोरने में नाकाम रही है।

जम्मू कश्मीर में क्रिकेट को भी नहीं छोड़ा, वहाँ भी मनी लॉन्ड्रिंग: फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ ED की चार्जशीट, 11 साल थे JKCA के अध्यक्ष

जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार (26 जुलाई, 2022) को जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इस चार्जशीट में अब्दुल्ला के साथ-साथ JKCA के तब के अधिकारी अहसान अहमद मिर्जा, मीर मंजूर गजानफर आदि को भी आरोपित बनाया गया है। इस मामले में अब्दुल्ला समेत बाकी आरोपितों की 27 अगस्त 2022 को पेशी होगी।

मालूम हो कि ईडी जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जाँच कर रहा है, जब फारूक अब्दुल्ला 2001 से 2012 तक जेकेसीए अध्यक्ष थे। ईडी ने विशेष पीएमएलए कोर्ट श्रीनगर के समक्ष मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत फारूक अब्दुल्ला, अहसान अहमद मिर्जा, मीर मंजूर गजनफ्फर और अन्य के खिलाफ एक पूरक अभियोजन शिकायत (The Supplementary Prosecution Complaint) दायर की है। इससे पहले अनुपूरक अभियोजन शिकायत 28 फरवरी 2020, 18 दिसंबर 2020 और 25 फरवरी 2022 को तीन अंतिम कुर्की आदेशों से पहले की गई थी। इसमें फारूक अब्दुल्ला, मिर्जा सन्स, मीर मंजूर गजनफ्फर और अहसान अहमद मिर्जा से संबंधित कुल 21.55 करोड़ रुपए की चल एवं अचल संपत्ति को अटैच किया गया था।

ईडी के मुताबिक, जाँच में पाया गया है कि JKCA बैंक अकाउंट से बिना किसी कारण कैश निकासी हुई। इसके साथ-साथ JKCA का पैसा कई निजी खातों में ट्रांसफर हुआ, जिसमें JKCA के कुछ अधिकारियों के खाते भी शामिल थे। ईडी ने सीबीआई द्वारा दर्ज FIR को इस मामले में जाँच का आधार बनाया था। सीबीआई ने यह FIR जुलाई 2018 में दर्ज की थी। इसमें जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन को गलत तरीके से नुकसान पहुँचाने और आरोपितों को 43.69 करोड़ रुपए का फायदा कराने का आरोप था, जिसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की गई थी।

बता दें कि इस मामले में ईडी अब तक 21.55 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच कर चुका है। JKCA के तत्कालीन कोषाध्यक्ष अहसान अहमद मिर्जा को CBI ने 4 सितंबर, 2019 को गिरफ्तार किया था।

अस्पताल के कमरे में मस्त सो रहे थे सत्येंद्र जैन, ED के पहुँचते ऑक्सीजन मास्क और बीपी बेल्ट लगा लिया: जिस हॉस्पिटल में भर्ती, वो दिल्ली सरकार का

दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन को LNJP की बजाए AIIMS में भर्ती कराने की माँग ED ने की है, क्योंकि उनकी मेडिकल रिपोर्ट्स में छेड़छाड़ की आशंका है। ED अधिकारियों का कहना है कि जब वो अस्पताल में भर्ती सत्येंद्र जैन के कमरे में पहुँचे तो वो वहाँ सो रहे थे और किसी भी मेडिकल उपकरण से उनकी निगरानी नहीं की जा रही थी। उनकी पत्नी भी वहाँ उनके साथ में ही थी। ED ने कहा है कि उन्हें RML या सफदरगंज अस्पताल में भी भर्ती कराया जा सकता है।

यही माँग करते हुए ED ने दिल्ली उच्च-न्यायालय में याचिका भी दायर की है। LNJP अस्पताल दिल्ली सरकार के अंतर्गत ही आती है और दिल्ली में AAP की सरकार है। सत्येंद्र जैन इसी सरकार में मंत्री हैं। ED का कहना है कि सत्येंद्र जैन स्वस्थ हैं और बीमारी का बहाना बना कर अस्पताल में भर्ती हैं, जिसमें अस्पताल प्रशासन उनका सहयोग कर रहा है। उनके स्वास्थ्य की स्वतंत्र जाँच हो सके, इसीलिए किसी केंद्रीय अस्पताल में परीक्षण की माँग की गई है।

27 जून को इसकी जाँच के लिए ED के अधिकारी अस्पताल में उनके कमरे में गए थे, जहाँ उन्होंने पाया कि मल्टीपारा रोगी मॉनिटर बंद पड़ा था और सत्येंद्र जैन मस्त सो रहे थे। उन्हें कोई परेशानी नहीं दिख रही थी। जैसे ही ED के अधिकारी वहाँ पहुँचे, सत्येंद्र जैन ने तुरंत ऑक्सीजन मास्क पहन कर बीपी जाँचने वाला बेल्ट लगा लिया और मॉनिटर चालू कर के लेट गए। निचली अदालत पहले ही ED की माँग को ख़ारिज कर चुकी है।

6 जुलाई के इसी आदेश को अब ED ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। LNJP अस्पताल की वेबसाइट पर सत्येंद्र जैन की तस्वीर प्रमुखता से दिखाई जा रही है, क्योंकि वो दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री हैं। उनके द्वारा यहाँ एक पट्टिका के उद्घाटन की भी तस्वीर है। LNJP अस्पताल से इस सम्बन्ध में जवाब माँगा गया है और 29 जुलाई को इसकी सुनवाई होगी। उधर पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले में फँसे TMC के मंत्री पार्था चटर्जी ने यही तिकड़म आजमाया, लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनकी याचिका ख़ारिज करते हुए भुवनेश्वर के AIIMS में मेडिकल जाँच कराने को कहा।

‘जेल में AC कमरे में रहा मोहम्मद ज़ुबैर’: TNM ने घंटे भर में बदली अपनी खबर, फेक न्यूज़ फैलाने की कोशिश या विक्टिम कार्ड खेलने की?

द न्यूज मिनट (टीएनएम) ने हाल ही में ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के जेल से छूट के आने के बाद एक इंटरव्यू प्रकाशित किया था। हाल ही में मोहम्मद ज़ुबैर को उत्तर प्रदेश में दर्ज करीब आधा दर्जन से अधिक मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत दी गई थी, जिसमें हिंदू संतों को बदनाम करने से लेकर फर्जी खबरें फैलाने तक के कई मामले शामिल थे।

हालाँकि, इंटरव्यू प्रकाशित होने के तुरंत बाद ही उसे अपडेट किया गया क्योंकि पाठकों ने इस बात पर घेर लिया कि कैसे ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर यूपी के जेलों में आराम से से रहे जबकि लिबरल-वामपंथी गिरोह ऐसी कई कहानियाँ बुनी थी जिसमें ज़ुबैर को गंभीर पीड़ित के रूप दिखाया गया था। उनके द्वारा ऐसा नैरेटिव बनाया गया था जैसर ज़ुबैर के साथ जेल में दुर्व्यवहार हो रहा हो या कठोर परिस्थिति में रखा गया हो।

द न्यूज मिनट में प्रकाशित रिपोर्ट, एक ऐसा संस्थान जो अपने वामपंथी झुकाव के लिए जाना जाता है और जिसके वरिष्ठ नेतृत्व ने ऑल्ट न्यूज़ और मोहम्मद जुबैर के लिए प्रोपेगेंडा चलाने में, झूठ फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ा। हालाँकि, दिल्ली पुलिस हिरासत में जुबैर को जेल में अच्छी तरह से रखा गया था। लेख में कहा गया है कि उन्हें दिल्ली पुलिस द्वारा एक वातानुकूलित कमरे में रखा गया था।

लेकिन घंटों बाद, लेख में वातानुकूलित कमरे के संदर्भ को सिर्फ एक “कमरे” से बदल दिया। नीचे दिए गए स्क्रीनशॉट में देखा जा सकता है कि “एसी रूम” को एडिट करके केवल “रूम” में बदल दिया गया है।

यहाँ AC कमरे के संदर्भ को हटाने का मतलब केवल दो चीजें हो सकती हैं- या तो द न्यूज मिनट ने लेख को एडिट किया क्योंकि इसने दिल्ली पुलिस द्वारा मोहम्मद जुबैर को एसी कमरे में रखने के बारे में फर्जी खबर की रिपोर्ट की- या अपने पीड़ित वाले नैरेटिव को बचाए रखने के लिए इसे बदल दिया गया। जिसको वामपंथी मीडिया ने मोहम्मद ज़ुबैर के 24 दिनों की पुलिस हिरासत में रहने के दौरान गढ़ा था।

यह देखते हुए कि द न्यूज मिनट का लेख एक इंटरव्यू के रूप में प्रकाशित हुआ है और इसमें जुबैर ने जो उत्तर दिए वही बात लिखी गई थी। ऐसे में इस बात की संभावना न के बराबर है कि उस कमरे के प्रकार के बारे में जानकारी नहीं थी जिसमें दिल्ली पुलिस ने ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर को रखा था।

इसलिए, यह कहा जा सकता है कि रिपोर्ट में वही प्रकाशित किया गया था जो जुबैर ने उन्हें बताया था, ऐसे में यह संभावना ज़्यादा है कि लेख को दिल्ली पुलिस हिरासत के दौरान एसी कमरे में मोहम्मद ज़ुबैर के रहने के संदर्भ को अपने विक्टिमहुड वाले नैरेटिव के हिसाब से एडिट किया गया था ताकि पीड़ित वाली नैरेटिव को बनाए रखा जा सके। जिसे पिछले महीने ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक की हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद वामपंथी और लिबरल मीडिया संगठनों द्वारा फैलाया गया था। यह नैरेटिव मोहम्मद ज़ुबैर के हिंदूफोबिक ट्वीट और फेसबुक पोस्ट इंटरनेट पर वायरल होने के बाद बड़ी सावधानी से गढ़ा गया था।

धार्मिक भावनाएँ आहत करने के आरोप में मोहम्मद जुबैर गिरफ्तार

बता दें कि मोहम्मद जुबैर को 28 जून, 2022 को दिल्ली पुलिस ने हिंदू धर्म को निशाना बनाते हुए अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए और 295 के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह प्राथमिकी ट्विटर यूजर @balajikijaiin के एक ट्वीट पर आधारित थी जिसमें यूजर ने जुबैर के एक पुराने ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर किया था जिसमें ज़ुबैर ने भगवान हनुमान का मजाक उड़ाया था। @balajikijain ने अपने ट्वीट में दिल्ली पुलिस को टैग किया था और उनसे भगवान हनुमान के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट के साथ हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के लिए जुबैर के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा था।

गौरतलब है कि इससे पहले जून में, जुबैर द्वारा हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाते हुए उसके पुराने हिंदूफोबिक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। वहीं मोहम्मद ज़ुबैर के हिंदूफोबिक ट्वीट और सोशल मीडिया पोस्ट इंटरनेट पर वायरल होने से कुछ दिन पहले, जुबैर ने टाइम्स नाउ की एक डिबेट के दौरान एक टिप्पणी को आधार बनाकर भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा के खिलाफ मुस्लिम भीड़ को उकसाया था। जिसके परिणामस्वरूप कट्टरपंथी मुस्लिम उनके जान के पीछे पड़ गए थे। और इसके बाद कम से कम तीन लोगों को नूपुर शर्मा के समर्थन के कारण बेरहमी से जान से मार दिया गया था।

बिहार के 500+ सरकारी स्कूलों में रविवार की जगह जुमे के दिन छुट्टी, अधिकारी बताते हैं ‘परंपरा’: मुस्लिम बहुल सीमांचल में नेताओं का दबाव भी

बिहार के सीमांचल क्षेत्र में कई वर्षों से बिना किसी आधिकारिक आदेश के 500 से अधिक सरकारी स्कूलों में रविवार की बजाय शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश दिया जा रहा है। मुस्लिम बहुल आबादी वाले किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया जिले में स्थित स्कूलों में इस परंपरा का पालन किया जा रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार, बिहार के पूर्वी हिस्से में मुस्लिम आबादी 30 प्रतिशत से 70 प्रतिशत के बीच है।

अररिया जिले के जोकीहाट ब्लॉक में अधिकांश स्कूलों, यानी 244 सरकारी स्कूलों में से 229 का साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार को होता है। जोकीहाट ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) शिव नारायण सुमन ने इन आँकड़ों की पुष्टि की है। उनके मुताबिक, यहाँ शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश की परंपरा शुरू से चली आ रही है।

इस बीच, अररिया जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) राज कुमार ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ से बात करते हुए कहा, “जोकीहाट ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले लगभग सभी स्कूल शुक्रवार को बंद रहते हैं। इसके लिए कोई आधिकारिक आदेश नहीं दिया गया है।” पूर्णिया में 200, जबकि किशनगंज में 19 ऐसे सरकारी स्कूल हैं, जो शुक्रवार को बंद रहते हैं। शिक्षा अधिकारियों ने साप्ताहिक छुट्टी शुक्रवार को देने वाले किसी भी आदेश को मंजूरी नहीं दी है। शिक्षकों का मानना ​​है कि यह प्रथा लगभग एक दशक पहले स्थानीय मुस्लिम नेताओं के आदेश पर शुरू हुई थी।

एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने कहा, “2014 में, जद (यू) नेता महमूद असरफ (अब मृतक) ने पूर्णिया जिले के बैसी ब्लॉक के तहत अपनी मीनापुर पंचायत में सरकारी स्कूलों को रविवार की बजाय शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश देने के लिए मजबूर किया था। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस प्रस्ताव का कभी विरोध नहीं किया।”

वहीं, किशनगंज डीईओ सुभाष कुमार गुप्ता ने दावा किया कि शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश का पालन करना बिहार में एक सामान्य प्रथा थी। इसके लिए कोई आधिकारिक आदेश नहीं जारी किया गया था। जबकि बलरामपुर के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) मुमताज अहमद ने कहा कि बिहार सरकार ने इस संबंध में 2010 में एक पत्र लिखा था, और तब से इन स्कूलों ने शुक्रवार को छुट्टी घोषित कर दी है। हालाँकि, बिहार के शिक्षा मंत्री, विजय कुमार चौधरी इन सबसे अनजान थे।

भाजपा ने शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश किए जाने का विरोध किया और कहा कि संविधान के अनुसार एक धर्म के लिए उपयुक्त नियमों के बदलाव की अनुमति नहीं दी जा सकती है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा, “भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और संविधान के तहत किसी के धर्म के अनुसार नियम बनाने की अनुमति नहीं है। यदि मुस्लिमों के अनुरूप शुक्रवार को स्कूल बंद रहते हैं, तो हिंदू मंगलवार को स्कूलों को बंद करने की माँग कर सकते हैं। इस तरह की प्रथा को धार्मिक तुष्टिकरण के लिए बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।”

गौरतलब है कि बीते दिनों झारखंड के जामताड़ा और दुमका जिलों के सरकारी स्कूलों में रविवार के बजाय शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश देने की खबर सामने आई थी। दावा किया गया था कि स्कूल के नोटिस बोर्ड पर बाकायदा शुक्रवार को जुमे का दिन घोषित करके अवकाश लिखा गया था। वहीं शिक्षा विभाग द्वारा उन स्कूलों को उर्दू स्कूल बताते हुए ऐसा कदम शिक्षकों की सुविधा को देख कर उठाया जाना बताया गया था।

वहीं, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गृह जिला दुमका के 33 सरकारी स्कूलों ने अपने नाम में ‘उर्दू’ जोड़ लिया, ताकि रविवार की जगह शुक्रवार को छुट्टी दी जा सके। लेकिन प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। उसकी नींद तब टूटी जब मीडिया में यह मामला सामने आया और शिक्षा के कथित इस्लामीकरण को लेकर राज्य सरकार की किरकिरी शुरू हुई।

‘आमिर खान ने कराया सामंथा का तलाक’: ‘लाल सिंह चड्ढा’ के लिए हथियाना चाहते हैं ज्यादा से ज्यादा स्क्रीन्स, सबसे बड़े थिएटर चेन से करार

आमिर खान ने ‘लाल सिंह चड्ढा’ को ज्यादा से ज्यादा स्क्रीन्स दिलाने के लिए मल्टीप्लेक्स थिएटर चेन PVR के साथ एक बड़ा करार किया है। उसी दिन अक्षय कुमार की ‘रक्षा बंधन’ और निखिल सिद्धार्थ की ‘कार्तिकेय 2’ भी रिलीज हो रही है, ऐसे में आमिर खान चाहते हैं कि शहरों में लोग उनकी फिल्म ज्यादा देखें और ये ज्यादा थिएटरों में रिलीज हो। PVR भारत का सबसे बड़ा सिनेमा हॉल चेन है, ऐसे में आमिर खान को उम्मीद है कि उनकी फिल्म को फायदा होगा।

बताया जा रहा है कि ये डील आदान-प्रदान वाली है और इस पर तेजी से काम चल रहा है। इससे PVR के अधिकतर स्क्रीन्स आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ को मिल जाएँगे। पूरे देश में फैला PVR चेन भारत के 55% मल्टीप्लेक्स कारोबार का अकेला हिस्सेदार है। हालाँकि, आनंद एल रॉय द्वारा निर्देशित ‘रक्षा बंधन’ की टीम को उम्मीद है कि इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। फिल्म की टीम ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों के दर्शकों को अपना टारगेट मान कर चल रही है।

हालाँकि, जहाँ ‘रक्षा बंधन’ को लाभ कमाने के लिए 85 करोड़ रुपए का आँकड़ा पार करना होगा, आमिर खान और करीना कपूर की ‘लाल सिंह चड्ढा’ 200 करोड़ रुपए के भारी भरकम बजट में बनी है और इसे केवल भारत में इतने का नेट कारोबार करना होगा। वहीं भगवान श्रीकृष्ण के रहस्यों पर आ रही फिल्म ‘कार्तिकेय 2’ के निर्माता अभिषेक अग्रवाल कह चुके हैं कि फेस्टिवल वीकेंड होने के कारण क्लैश होता रहता है और तीनों अलग जॉनर की फिल्म है। अभिषेक अग्रवाल ने ही ‘द कश्मीर फाइल्स’ का निर्माण किया था।

आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ में तेलुगु अभिनेता नाग चैतन्य भी हैं, जो वरिष्ठ अभिनेता नागार्जुन के बेटे और अभिनेत्री सामंथा के पूर्व पति हैं। अब फिल्म समीक्षक कमाल आर खान (KRK) ने आरोप लगाया है कि आमिर खान ने ही नाग चैतन्य का घर तोड़ा। फिल्म में नाग चैतन्य एक आर्मी मेजर के किरदार में दिखेंगे। KRK ने दावा किया कि नाग चैतन्य ने अपने एक निर्देशक दोस्त को बताया है कि वो ‘लाल सिंह चड्ढा’ कर के पछता रहे हैं, उन्हें उम्मीद नहीं थी कि ये तनी खराब होगी लेकिन मजबूरी में तारीफ़ करनी पड़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि आमिर ने चैतन्य को सामंथा को तलाक देने के लिए मनाया।

3 साल में मोदी सरकार ने रद्द किए 1811 NGO के FCRA लाइसेंस, नहीं ले पाएँगे विदेशी चंदा: सबसे ज्यादा तमिलनाडु-महाराष्ट्र के

2019, 2020 और 2021 – इन 3 वर्षों में 1800 से भी अधिक गैर-सरकार संगठनों (NGO) के FCRA (विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम) लाइसेंस रद्द करने का फैसला मोदी सरकार ने लिया। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने संसद में एक सवाल का जवाब देते हुए ये जानकारी दी। ये सभी नियमों का उल्लंघन कर रहे थे, इसीलिए कानून के हिसाब से उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई। इन 3 वर्षों में 783 NGO के FCRA लाइसेंस को रिन्यू करने के प्रस्ताव को भी मोदी सरकार ने ठुकरा दिया।

लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से ये जानकारी दी गई है। कुल मिला कर 1811 NGO के FCRA लाइसेंस रद्द किए गए, जिसके बाद वो विदेशी चंदा लेने के काबिल नहीं रह गए। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने ये भी बताया कि फैसला लेने से पहले इन गैर-सरकारी संगठनों को उनकी बात रखने का पूरा समय दिया गया और पंजीकरण रद्द किए जाने से पहले उन्हें ‘कारण बताओ नोटिस’ भी जारी किया गया। उन्होंने बताया कि 2010 के कानून के अंतर्गत फैसले लिए गए।

इनमें सबसे ज्यादा तमिलनाडु के 218 NGO थे, जबकि महाराष्ट्र के 206, पश्चिम बंगाल के 193, आंध्र प्रदेश के 168 और बिहार के 122, उत्तर प्रदेश के 115 और ओडिशा के 109 और कर्नाटक के 96 NGO थे। इसी तरह जिन राज्यों के NGO का लाइसेंस रिन्यू नहीं किया गया, उनमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र के 110, आंध्र प्रदेश के 84, तमिलनाडु के 66, कर्नाटक के 57 और ओडिशा के 55 थे। जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख में 9 का रद्द किया गया, जबकि 5 का रिन्यू एप्लिकेशन ठुकराया गया।

भारत में NGO द्वारा गड़बड़ी के कई मामले सामने आए हैं, जहाँ विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल देश विरोधी एजेंडे के लिए किया गया। नोएडा के सेक्टर 12 में लिटिल फ्लॉक नाम की एक एनजीओ के जरिए एक पादरी द्वारा ईसाई धर्मांतरण की बातें सामने आई थीं। इसी तरह महाराष्ट्र के अमरावती में केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या का साजिशकर्ता भी NGO चलाता था, जिसके कनेक्शन पाकिस्तान से हैं। मेधा पाटकर के NGO पर फंडिंग के दुरुपयोग के आरोप लगे। रोहिंग्यों को बसाने के लिए कई NGO सक्रिय हैं। केरल के एक NGO पर कश्मीर से फंड डायवर्ट करने के आरोप लगे।

मेडागास्कर में भव्य हिन्दू मंदिर का उद्घाटन, राजधानी एंटानानैरिवो का पहला हिन्दू मंदिर: 18वीं सदी में यहाँ पहुँचे थे भारतीय

पूर्वी अफ्रीका में हिन्द महासागर में स्थित द्वीपीय देश मेडागास्कर की राजधानी एंटानानैरिवो में मंगलवार (26 जुलाई, 2022) को भव्य हिन्दू मंदिर का उद्घाटन हुआ है। 2.60 करोड़ की जनसंख्या वाला मेडागास्कर एक काफी बड़ा द्वीप है। भव्य मंदिर में कई हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। बड़ी संख्या में भक्त इस मौके का साक्षी बनने पहुँचे। भजन-कीर्तन के साथ-साथ भक्ति गाने भी बजे और आरती का आयोजन किया गया।

इस दौरान मेडागास्कर और कोमरोस में भारत के राजदूत अभय कुमार भी मौजूद रहे। ये भी जानने लायक बात है कि ये मंदिर एंटानानैरिवो का पहला हिन्दू मंदिर है। यहाँ के हिन्दू समाज को लंबे समय से इसकी प्रतीक्षा थी। काफी समय से इस मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा था। इस दौरान हिन्दू समाज के अध्यक्ष संजीव हेमतलाल ने कहा कि इस भव्य मंदिर का उद्घाटन होना मेडागास्कर के हिन्दू समाज के लिए बड़े ही गर्व का विषय है।

मेडागास्कर में 20,000 से भी अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिनमें से अधिकतर गुजराती हैं। उनमें से अधिकतर हिन्दू धर्म को मानते हैं और उन्हें पहली बार वहाँ कोई मंदिर मिला है। हालाँकि, मेडागास्कर के अन्य शहरों, जैसे कि महाजंगा और अंतसीरानाना में कुछ छोटे-छोटे हिन्दू मंदिर हैं। देश में गुजराती समुदाय कई इलाकों में फैला हुआ है। नए भव्य मंदिर के बनने से वो एक-दूसरे से मिलेंगे, जिससे समाज के बीच बंधुत्व का विकास होगा।

इससे पहले नवरात्री 2020 के मौके पर एंटानानैरिवो में एक विशाल हिन्दू मंदिर कक्ष का उद्घाटन किया गया था। 18वीं सदी के अंत में भारतीय मेडागास्कर पहुँचने शुरू हुए थे, जिनमें गुजरातियों की संख्या ज्यादा थी। वो छोटे-छोटे नाव से आए थे, ताकि हिन्द महासागर की व्यापार व्यवस्था का हिस्सा बन सकें। उसके बाद से उन्होंने भारत एवं मेडागास्कर के व्यापार एवं वाणिज्य में अच्छा-खासा योगदान दिया है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2020-21 में 40 करोड़ डॉलर (3192 करोड़ रुपए) रहा था।

2 साल के कोरोना ब्रेक के बाद हुई काँवड़ यात्रा, पर नहीं सुधरे वे: कहीं मांस फेंका-कहीं थूका, कहीं औरतों ने चारपाई डाल रोका रास्ता

इस वर्ष (2022) की काँवड़ यात्रा भगवान शिव के भक्तों के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि यह कोविड -19 महामारी के कारण दो साल के अंतराल के बाद पूरे उत्साह के साथ हो रही है। पूरे भारत में लाखों काँवड़िया माँ गंगा की जलधारा से जलभरकर उसे भगवान महादेव को अर्पित करने के लिए कठिन यात्रा कर रहे हैं। इस बीच ऐसी कई घटनाएँ सामने आई हैं जहाँ किसी को मिर्ची लगी तो, कहीं काँवड़ियों पर हमले किए गए, उन पर मांस फेंके गए तो कहीं आतंकी हमले की धमकी भी आई। ऐसी ही कुछ घटनाओं पर हम यहाँ संक्षेप में बात करेंगे।

काँवड़ यात्रा में महंत की रेकी कर रहा था नाजिम

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में काँवड़ यात्रा के दौरान काँवड़ियों की भीड़ में से एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया गया है। आरोपित का नाम नाज़िम है, जो मेरठ का ही रहने वाला है। उस पर काँवड़ यात्रा में चल रहे महंत मछेन्द्रपुरी की रेकी करने और किसी और को उनकी जानकारी देने का आरोप है। हालाँकि, इस मामले में काँवड़ियों ने नाज़िम को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया है। घटना 24 जुलाई 2022 (रविवार) की है। इस घटना की पुलिस में शिकायत महंत मछेन्द्र पुरी के शिष्य ब्रह्मानन्द पुरी ने दर्ज करवाई है। 

कॉन्ग्रेस नेता ने की विवादित टिप्पणी

कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय समन्वयक रितु चौधरी ने 17 जुलाई को कहा, “किताबें उठाइए, काँवड़ उठाने की जरुरत नहीं पड़ेगी।”

हालाँकि, रितु चौधरी के ट्वीट के बाद, लोगों ने उनकी टिप्पणियों की आलोचना की और सवाल किया कि वह और उनकी पार्टी हिंदुओं और सनातन धर्म से जुड़ी परंपराओं से नफरत क्यों करती हैं। एक यूजर ने उनसे यह कहने के लिए भी कहा, “एक किताब उठाओ, आपको हज नहीं जाना पड़ेगा।” अगर उनमें हिम्मत है। वैसे जैसे ही विवाद गर्माया, उन्होंने बिना किसी माफी के ट्वीट को चुपचाप डिलीट कर दिया।

काँवड़ियों पर पुष्प वर्षा से बरखा दत्त को लगी मिर्ची

सावन के महीने में काँवड़िए बाबा भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए कोई हरिद्वार तो कोई काशी निकल पड़ा है। हरिद्वार में उनपर पुष्प वर्षा भी हो रही है। इस बीच NDTV की पूर्व पत्रकार और मोजो न्यूज़ की संपादक, बरखा दत्त को पुष्प वर्षा से मिर्ची लगी है। उन्होंने ट्विटर पर इसमें प्रशासन की संलिप्तता का विरोध किया है।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “राज्य के अधिकारियों के लिए काँवड़ियों पर पंखुड़ियों की बौछार करना लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ पर आपत्ति जताना कैसे ठीक है? मैं साझा सार्वजनिक स्थानों पर फैले धर्म की प्रशंसक नहीं हूँ, लेकिन यह खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण है।”

काँवड़ यात्रा पर फेंका गया मांस

19 जुलाई को दिल्ली के मुस्लिम बहुल सीलमपुर इलाके में हरिद्वार से राजस्थान जा रहे काँवड़ यात्रा पर किसी ने मांस का टुकड़ा फेंक दिया। घटना शाम के वक्त हुई, जिसके बाद काँवड़ यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं ने एक घंटे तक सड़क जाम कर दिया। बता दें कि हरिद्वार से दिल्ली पहुँचने में इन काँवड़ियों को सात दिन का समय लगा था। लेकिन दिल्ली में उनका स्वागत मांस के टुकड़े के साथ हुआ।

ऑपइंडिया से बात करते हुए, काँवड़ियों ने कहा कि उन्हें मांस के टुकड़े के बारे में तब पता चला जब एक कंधे से दूसरे कंधे पर काँवड़ बदल रहे थे।

काँवड़ियों से भरी सड़क पर नमाज पढ़ने वाले 8 मुस्लिम गिरफ्तार

पुलिस को उत्तराखंड के शिवालिकपुर नगर, रानीपुर और हरिद्वार में नमाज अदा करने वाले मुस्लिम पुरुषों के एक समूह के बारे में सूचना मिली। जब वे नमाज अदा कर रहे थे तभी उस रास्ते से काँवड़ियों का एक बड़ा जत्था गुजर रहा था। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए सभी आठ नमाजी दुकानदार थे। उन पर कानून-व्यवस्था भंग करने का मामला दर्ज किया गया था।

मुस्लिमों ने मेरठ में काँवड़ियों पर थूका

यूपी के मेरठ में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने के लिए मुस्लिम समुदायके युवकों ने काँवड़ियों पर थूक दिया। इससे काँवड़िए भड़क गए और युवक को जमकर कर पीट दिया। बाद में पुलिस ने मामले को शांत कराया। घटना 22 जुलाई को मेरठ में हुई। घटना के बाद काँवड़ियों ने सड़क जाम कर पुलिस से कार्रवाई की माँग की।

दरअसल, शनिवार (22 जुलाई 2022) को कुछ काँवड़िए अपने काँवड़ को रखकर शिविर में आराम कर रहे थे। तभी दूसरे समुदाय के दो युवक बाइक से आए और काँवड़ पर थूकने का प्रयास किया। आगे चलकर इनमें से एक युवक बाइक से उतरा और काँवड़ पर थूक कर अपवित्र कर दिया।

जब काँवड़ियों ने इन्हें देखा तो एक को पकड़ लिया, जबकि दूसरा भाग गया। पकड़ने के बाद काँवड़ियों ने उसे पीटना शुरू कर दिया। इसी बीच पुलिस मौके पर पहुँचकर आरोपित को भीड़ से छुड़ाकर अपने साथ लेकर चली गई।

इब्राहिमपुर में मुस्लिम महिलाओं ने काँवड़ियों का रास्ता रोका

ताजा घटना मुरादाबाद के इब्राहिमपुर गाँव की है। जहाँ मुस्लिम महिलाओं के एक समूह ने काँवड़ियों को इब्राहिमपुर में आगे बढ़ने से चारपाई लगाकर रोक दिया। उन्होंने सड़क पर खाट बिछा दी और माँग की कि काँवड़िए वापस जाएँ और निर्धारित मार्ग का पालन करें। यहाँ, महिलाओं ने जिन काँवड़ियों को रोका, वे उसी इब्राहिमपुर गाँव के ही थे।

हालाँकि, इस मामले में पुलिस ने आकर दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। महिलाओं ने दावा किया कि काँवड़िए मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में प्रवेश करने का एक नया चलन शुरू कर रहे हैं, और वे उन्हें वहाँ से नहीं जाने देंगे। दूसरी ओर, काँवड़ियों ने कहा कि वे एक ही गाँव के हैं। बाद में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और बुजुर्गों ने एक पंचायत की और जिसके बाद काँवड़ियों को वहाँ से गुजरने दिया।

काँवड़ियों पर हुए आतंकी हमले के इनपुट्स

काँवड़ यात्रा शुरू होने से पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों को सतर्क रहने को कहा था क्योंकि तीर्थयात्रियों पर आतंकी हमले की सूचना भी मिली थी।