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अवैध खनन रोकने गए DSP सुरेंद्र सिंह पर माफियाओं ने चढ़ाया डम्पर, मौके पर मौत: रोहिंग्या बस्तियों के लिए कुख्यात नूँह की घटना

हरियाणा स्थित मेवात के नूँह में DSP सुरेंदर सिंह बिश्नोई पर अवैध खनन माफियाओं ने पत्थर से लदे डम्पर चढ़ा दिया, जिससे उनकी मौत हो गई है। ये घटना उस वक्त हुई, जब पुलिस नूँह के पचगाँव की पहाड़ियों में अवैध खनन माफियाओं को पकड़ने गई थी। घटना के दौरान कुचले जाने से डीएसपी बिश्नोई की मौके पर ही मौत हो गई। वह इसी साल रिटायर होने वाले थे। यह वारदात आज मंगलवार (19 जुलाई, 2022) दोपहर सवा 12 बजे की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डिप्टी एसपी को आज सुबह करीब 11 बजे इस बात की सूचना मिली थी कि इस जगह पर खनन किया जा रहा है। इसके बाद वह साढ़े 11 बजे अपने स्टाफ के साथ मौके पर पहुँचे। ऐसा बताया जा रहा है कि पुलिस को देखकर अवैध खनन माफिया भागने की कोशिश करने लगे और इसी दौरान वे डीएसपी को रौंदते हुए आगे बढ़ गए और डीएसपी की मौके पर ही मौत हो गई।

इसे जिले की खनन माफियाओं की हिस्ट्री में अब तक कि सबसे बड़ी घटना माना जा रहा है। वहीं डिप्टी एसपी की हत्या की खबर से पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। हालाँकि, वारदात के बाद पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

वहीं मौके पर पहुँचे नूह एसपी और आईजी ने आरोपित खनन माफियाओं को पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। जगह-जगह दबिश दी जा रही है।

बता दें कि इस मामले में हरियाणा की नूँह पुलिस का बयान भी सामने आया है। पुलिस ने भी अपने बयान में घटना की पुष्टि करते हुए कहा, “तावडू (मेवात) के DSP सुरेंदर सिंह बिश्नोई नूँह में अवैध खनन की घटना की जाँच के लिए गए थे। यहाँ पर डम्पर चालक ने कुचलकर उनकी हत्या कर दी। आरोपित की गिरफ्तारी के लिए तलाशी अभियान जारी है।”

हरियाणा पुलिस ने उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। साथ ही कहा है कि अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

गौरतलब है कि हरियाणा में पहले भी इस तरह के मामले सामने आए हैं। इससे पहले सोनीपत में अवैध खनन करने वाले माफिया गिरोह ने स्पेशल इन्फोर्समेन्ट टीम पर हमला किया था। इस घटना में एक ASI की वर्दी फाड़ दी गई थी और सिपाही को पीटा गया था।

नूपुर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत, पैगंबर मामले में किसी भी कड़ी कार्रवाई पर रोक: 10 अगस्त को अगली सुनवाई

नूपुर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में दोबारा याचिका डाल कर अपने खिलाफ दर्ज सभी FIR को किसी एक जगह हस्तानांतरित करने और गिरफ़्तारी से अंतरिम राहत की गुहार लगाई है। एक बार फिर से जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने इस पर सुनवाई की। नूपुर शर्मा ने याचिका में कहा कि जजों की टिप्पणी के बाद उन्हें और उनके परिवार को लगातार बलात्कार और हत्या की धमकियाँ मिल रही हैं। पिछली बार इन दोनों जजों ने उन पर तल्ख़ टिप्पणी की थी।

नूपुर शर्मा के वकील मनिंदर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कैसे पाकिस्तान से कुछ लोगों द्वारा नूपुर शर्मा की हत्या की साजिश रचने की खबर आई है और पटना में पकड़ाए आतंकियों के भी उनकी हत्या की साजिश रचने की बात पता चली है। इस पर जस्टिस सूर्यकान्त ने कहा कि एक मिश्रित तरह का एप्लीकेशन दायर करने के बाद वो इन घटनाओं का जिक्र कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 3-4 अन्य FIR भी दर्ज कर लिए गए हैं।

जस्टिस सूर्यकान्त ने इस पर जोर दिया कि वो कम से कम किसी एक जगह, दिल्ली हाईकोर्ट तो जा सकती हैं, अगर जीवन पर खतरे को लेकर अलग-अलग जगह की यात्रा में सक्षम नहीं हैं तो? वकील ने बार-बार कहा कि एक ही आरोप के लिए कई FIR दर्ज कर लिए गए हैं, ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी राहत प्रदान किया है। सुप्रीम कोर्ट को दी गई दलील में नूपुर शर्मा की तरफ से बताया गया कि जान पर खतरा होने के कारण वो अन्य विकल्पों का इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं हो पा रही हैं और सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद-21 का संरक्षक है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “अनुच्छेद-21 के तहत ये समय की आवश्यकता है कि हम उनके जीवन और लिबर्टी की रक्षा करें।” नूपुर शर्मा ने अजमेर शरीफ दरगाह का खादिम सलमान चिश्ती द्वारा नूपुर शर्मा की हत्या की घोषणा करते हुए वीडियो जारी करने वाली घटना का भी जिक्र किया। कोलकाता पुलिस ने लुकआउट नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि पहली प्राथमिकता ये है कि नूपुर शर्मा को वैकल्पिक व्यवस्थाओं तक पहुँच सुनिश्चित की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही रेस्पोंडेंट्स को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। साथ ही अगली सुनवाई के लिए 10 अगस्त, 2022 की तारीख़ तय की। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक नूपुर शर्मा के विरुद्ध दर्ज सारे FIR के मामले में कोई कड़ी कार्रवाई न की जाए। इसके साथ ही नूपुर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान किया। अगली सुनवाई में मामला दिल्ली हाईकोर्ट में भी ट्रांसफर किया जा सकता है।

इसके बाद 1 जुलाई, 2022 को उन्होंने अपनी इस याचिका को वापस ले लिया था। वैकेशन बेंच ने उनके बयान को पूरे देश में आग लगाने के लिए जिम्मेदार बताते हुए उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था, जिसे न्यायिक विशेषज्ञों ने न्यायपालिका के इतिहास पर एक काला धब्बा करार दिया था। नूपुर शर्मा पर 7 राज्यों में 9 FIR दर्ज हैं, जिन्हें वो दिल्ली ट्रांसफर करने की माँग कर रही हैं। लेकिन, पिछली बार दोनों जजों ने कह दिया था कि देश में जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए ‘सिर्फ और सिर्फ’ नूपुर शर्मा ही जिम्मेदार हैं। उनके बयान को गैर-जिम्मेदाराना और उन्हें दंभी बता दिया गया।

कोरोना, मंकीपॉक्स और अब मारबर्ग… दुनिया को नए वायरस ने डराया: जानिए कितना घातक, क्या हैं लक्षण

कोरना वायरस के संक्रमण से अभी तक दुनिया पूरी तरह उबर नहीं पाई है। मंकीपॉक्स का खतरा भी बढ़ रहा है। इसी बीच घातक मारबर्ग वायरस (Marburg Virus) ने चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 17 जुलाई 2022 को एक बयान में कहा है कि पश्चिमी अफ्रीकी देश घाना में अत्यधिक संक्रामक मारबर्ग वायरस के दो मामलों की पुष्टि हुई है।

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, मारबर्ग वायरस के कारण घाना के दक्षिणी अशांति क्षेत्र में पिछले महीने 2 लोगों की मौत हुई थी। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि इन दोनों मरीजों में दस्त, बुखार, मितली और उल्टी के लक्षण दिखे थे। इनके संपर्क में करीब 90 लोग आए हैं, जिनकी निगरानी की जा रही है।

घाना के स्वास्थ्य अधिकारी वहाँ के लोगों को गुफाओं से दूर रहने और सभी मीट प्रोडक्ट्स को खाने से पहले अच्छी तरह से पकाने की चेतावनी दे रहे हैं। घाना के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि 98 लोगों को संक्रमितों के संपर्क में आने के कारण क्वारंटाइन किया गया है। हालाँकि, उनमें से किसी में अभी संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। मारबर्ग वायरस की अब तक कोई भी दवा या वैक्सीन नहीं है। यह इबोला की तरह ही जानलेवा और खतरनाक है। मारबर्ग का संक्रमण चमगादड़ों से ही फैला है।

जानकारों के मुताबिक, इस वायरस के कारण मारबर्ग वायरस डिजीज (MVD) का खतरा होता है और इसकी मृत्युदर 88 फीसदी से अधिक हो सकती है। बताया जा रहा है कि ये वायरस भी इबोला परिवार का ही सदस्य है। लेकिन इबोला से ज्यादा तेजी से संक्रमण फैलाता है। इसमें अचानक तबीयत खराब हो जाती है। यह बीमारी तेज बुखार, सिरदर्द के साथ शुरू होती है। साल 1967 में जर्मनी के मारबर्ग और फ्रैंकफर्ट में और सर्बिया के बेलग्रेड में सबसे पहले इस वायरस का प्रकोप देखा गया था।

मारबर्ग वायरस के लक्षण

विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी इंसान में मारबर्ग वायरस के लक्षण दिखने में 2 से 21 दिन का समय लगता है। इस वायरस के लक्षणों में सिरदर्द, बुखार, मांसपेशियों में दर्द, खून की उल्टी और खून का बहना शामिल है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।

ऐसे फैलता है संक्रमण

मारबर्ग वायरस से संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, पसीना, मल, उल्टी, आदि के संपर्क में आने से संक्रमण दूसरे लोगों में फैल सकता है। यही नहीं संक्रमित व्यक्ति के कपड़े और बिस्तर के इस्तेमाल से भी संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।

कोई वैक्सीन नहीं

डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि इसकी रोकथाम के उपाय किए जा रहे हैं। मारबर्ग वायरस के लिए न तो कोई एंटीवायरल उपचार मौजूद है और न ही कोई टीका। हालाँकि, डिहाइड्रेशन और विशिष्ट लक्षणों के उपचार सहित देखभाल की मदद से इस वायरस से मरीजों को बचाया जा सकता है।

बता दें कि अफ्रीका के अन्य हिस्सों युगांडा, केन्या, अंगोला, दक्षिण अफ्रीका और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में भी मारबर्ग वायरस कहर बरपा चुका है। 2005 में अंगोला में मारबर्ग वायरस ने 200 से अधिक लोगों की जान ले ली थी, जिसके बाद डब्लूएचओ ने इसे मारबर्ग वायरस का सबसे घातक प्रकोप करार दिया था।

मथुरा में कचरा गाड़ी में मिली PM मोदी और CM योगी की तस्वीरें: वीडियो पर बवाल, सफाईकर्मी फिर से बहाल

उत्तर प्रदेश के मथुरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर कूड़ा गाड़ी में मिलने का एक वीडियो वायरल हो रहा है। मामला मथुरा-वृंदावन नगर निगम कार्यालय के समीप सुभाष इंटर कॉलेज के पास का है। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी की तस्वीरें कूड़े में फेंकी हुई थीं। जिसे एक संविदा सफाईकर्मी कूड़े वाली ट्रॉली में डालकर ले जा रहा था तभी किसी ने उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। वहीं सफाई कर्मी को इस मामले में बर्खास्त कर दिया गया था जिसे बाद में पुनः जॉब पर वापस ले लिया गया है।

ट्विटर पर, रविवार 17 जुलाई, 2022 को 1 मिनट 5 सेकेंड का वीडियो सामने आया है। जिसमें एक सफाई कर्मचारी एक कूड़ा गाड़ी लेकर जा रहा है। जैसे ही व्यक्ति की नजर उसके कूड़े गाड़ी पर पड़ती है वह व्यक्ति आवाज देकर सफाईकर्मी से तस्वीर को लेकर पूछताछ करने लगता है। दरअसल, कचरा गाड़ी में कुछ फ्रेम्ड तस्वीरें दिख रही हैं। कूड़ा गाड़ी में चारों तरफ से कुछ कार्ड बोर्ड पर मढ़ी कुछ तस्वीरें के सहारे बीच में कूड़ा भरा गया था। जिसमें मुख्यमंत्री योगी की तस्वीर बाहर से ही दिखाई दे रही है। जिसे लेकर वह व्यक्ति सफाई कर्मी से कहने लगा- मथुरा में मुख्यमंत्री का फोटो डस्टबिन में। ये देखिए आप…भाई, ये फोटो निकालो, ये किनका है? आपके सीएम का फोटो है…ये देखिए सीएम का फोटो है। पीएम नरेंद्र मोदी का फोटो भी है। साथ ही कोई कलाम की फोटो की बात भी वीडियो में कर रहा है।

वहीं जब वीडियो बना रहे व्यक्ति ने सफाई कर्मचारी का नाम पूछा, तो उसने नाम न बताकर जवाब दिया कि यह तस्वीरें उसे कूड़े में पड़ी मिली थीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उस संविदा सफाई कर्मी का नाम बॉबी बताया जा रहा है।

जहाँ यह वीडियो वायरल होने के बाद एक तरफ उस संविदा सफाई कर्मी की लापरवाही की निंदा हो रही है वहीं सबसे गैरजिम्मेदार उस व्यक्ति को बताया जा रहा है जिसने उन्हें कूड़े में फेंकी। हालाँकि, वहाँ से गुजर रहे राजस्थान के अलवर के रहने वाले एक दर्शनार्थी पंकज गुप्ता नामक व्यक्ति ने इन तस्वीरों को कचरा गाड़ी से निकाला और उन्हें साफ़ पानी से धोकर साफ़ किया। ऐसा बताया जा रहा है कि वह उन तस्वीरों को अपने साथ ले गए। उन्होंने कहा, “जिसने भी इन तस्वीरों के साथ ऐसा किया, वह गलत किया है।”

बता दें कि वीडियो वायरल होने के बाद नगर निगम मथुरा-वृंदावन के अतिरिक्त नगर आयुक्त सत्येंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि संविदा कर्मचारी ने गलती से मोदी और योगी की तस्वीरें कूडागाड़ी में डाल दी थीं। तिवारी ने ये भी जानकारी दी कि कॉन्ट्रैक्ट वर्कर बॉबी पर तुरंत एक्शन लेते हुए उसका कॉन्ट्रैक्ट समाप्त कर दिया गया है। जिसे अब लोगों की आलोचना के बाद पुनः बहाल कर दिया गया है।

सत्येंद्र कुमार तिवारी ने इस मामले में अपने बयान में कहा, “मीडिया के माध्यम से पता चला कि निगम का संविदा कर्मचारी अपने हाथ ठेला गाड़ी में पीएम और सीएम का फोटो लेकर जा रहा था। सुभाष इंटर कॉलेज के पास भूलवश उसे वे फोटो मिलीं। स्थानीय लोगों ने टोका तो पता चला कि उसके पास किसकी तस्वीरें हैं। तत्काल फोटो कूड़े से हटा दिए गए। मामले में सफाई कर्मचारी की लापरवाही मालूम पड़ती है। सफाई कर्मचारी पर कार्रवाई करते हुए उनकी सेवाएँ समाप्त कर दी गई हैं। हम इस लापरवाही की कड़ी निंदा करते हैं।”

गौरतलब है कि इस मामले में मथुरा के मेयर मुकेश आर्य बंधु ने इस मामले पर बोलते हुए कहा कि वह अनपढ़ सफाईकर्मी है। पढ़ा लिखा नहीं है लेकिन जिसने उन तस्वीरों को कूड़े में फेंका, वह सभ्य कॉलोनी है। पढ़े-लिखे लोग है फिर भी लोगबाग ऐसी गलती कैसे कर देते हैं। वहीं जब उनसे पूछा गया कि सफाई कर्मी बॉबी का अनुबंध क्यों समाप्त किया गया? तो इसे उन्होंने एक बड़ी गलती बताई। उन्होंने कहा कि अगर कोई आदमी खाना खाता है, तो वह कम से कम जानता है कि यह हमारे पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की तस्वीर है। उसने कचरा गाड़ी में तस्वीरें डालकर गलती की।

वहीं संविदा सफाईकर्मी पर एक्शन के बाद अब सफाई कर्मचारियों के संघ ने उसे वापस न लिए जाने पर पूरे प्रदेश में आंदोलन करने की भी धमकी दी है। उन्होंने इस बाबत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन आगरा को एक मेमोरेंडम भी सौंपा।

वहीं अब सफाई कर्मी पर हुए एक्शन पर लोगों की आलोचना के बाद इस मामले में खबर आ रही है कि बॉबी को पुनः अपने काम पर वापस ले लिया गया है। साथ ही उन्हें आगे सावधानी से काम करने की बात भी कही गई है। जिस पर संविदाकर्मी बॉबी ने ख़ुशी जाहिर की है।

दिल्ली की हिंदू लड़की को फँसाने के लिए मोनू गुप्ता बन गया कासगंज का प्रिंस कुरैशी: शादी का झाँसा दे UP बुलाया, फिर किया रेप

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कासगंज जिले (kasganj) से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ के प्रिंस कुरैशी ने मोनू गुप्ता बनकर दिल्ली की एक हिंदू लड़की से फेसबुक पर दोस्ती की। फिर शादी का झाँसा देकर उसे कासगंज बुलाया। यहाँ उसने युवती को नशीला कोल्डड्रिंक पिलाकर कार में उसके साथ दुष्कर्म किया।

कुरैशी की हकीकत सामने आई तो युवती ने उसका विरोध किया, जिसको लेकर उसके साथ मारपीट की गई। पहले तो पुलिस ने युवती की शिकायत दर्ज नहीं की, लेकिन हिंदूवादी संगठनों के हस्तक्षेप के बाद एसपी बीबीजीटीएस मूर्ति के आदेश पर पुलिस ने प्रिंस कुरैशी समेत दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लड़की की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस प्रिंस कुरैशी की तलाश में जुट गई है। दिल्ली के मयूर विहार की रहने वाली युवती का आरोप है कि कासगंज कस्बे के मुहल्ला आबाजी निवासी प्रिंस कुरैशी सोशल मीडिया के जरिए उसके संपर्क में आया था। उसने उसे अपना नाम मोनू गुप्ता बताया था। 15 जुलाई को युवक ने शादी का झाँसा देकर उसे कासगंज के गंजडुंडवारा बुलाया। सुबह सात बजे वह गंजडुंडवारा पहुँच गई।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया है कि वह लाल रंग की कार लेकर गंजडुंडवारा पहुँचा था। प्रिंस की सच्चाई उस वक्त सामने आई, जब उसकी माँ ने उसे ये पूछने के लिए फोन किया कि वह कहाँ है। इस पर उसने कहा कि अम्मी काम से हूँ। यह सुनते ही उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। इसके बाद लड़की ने उसका विरोध किया और कार से उतरने की कोशिश की। लेकिन कुरैशी ने जबरन उसे कार में डाल लिया और कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

पीड़िता के मुताबिक, जब वह इसकी शिकायत लेकर गंजडुंडवारा थाने पहुँची तो पुलिस ने उसकी नहीं सुनी। मामले की जानकारी जब हिंदूवादी संगठनों को हुई तो वे थाने पहुँचे। इसके बाद एसपी मूर्ति के आदेश पर प्रिंस कुरैशी और उसके एक अन्य साथी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। हिंदूवादी नेता ठाकुर मनजीत सिंह ने बताया कि पीड़िता को समुदाय विशेष के युवक ने नाम बदलकर बहला-फुसलाकर कर बुलाया था।

हमेशा सेक्स के मूड में रहता था पति, पत्नी ने गिफ्ट कर दी अपनी शक्ल वाली सेक्स डॉल: ₹1 लाख कीमत, बिस्तर पर दोनों उसके साथ करते हैं मजे

कुछ साल पहले खबरों से जब सेक्स डॉल के अविष्कार का पता दुनिया को चला तो लोगों को हैरानी हुई कि आखिर एक डॉल किसी की शारीरिक जरूरतों को पूरा करने में कैसे सक्षम होगी। हालाँकि आज हाल ये है कि कुछ समय पहले एक पत्नी ने अपने पति की तीव्र यौन इच्छाओं को पूरा करने किए एक सेक्स डॉल का सहारा लिया और अब वह खुद उसकी आदि हो गई हैं। वह गुड़िया के साथ बिस्तर पर प्रयोग भी करती हैं।

अमेरिका की शैर ग्रे नाम की 23 वर्षीय महिला बताती हैं कि उन्होंने अपने पति की तीव्र यौन इच्छाओं को शांत करने के लिए 1800 डॉलर (143903 रुपए) में एक सेक्स डॉल खरीदी थी, ताकि जब भी वह मूड में न हों तो उन्हें अपने ऊपर दबाव न झेलना पड़े। शैर कहती हैं कि उनका पति उस गुड़िया के लिए फीलिंग ला पाए, इसलिए उन लोगों ने उसका नाम डी रख दिया है।

तस्वीर साभा: द न्यूयॉर्क टाइम्स

साउथ वेस्ट न्यूज सर्विस से बात करते हुए शैर ने कहा, “डी सिर्फ एक गुड़िया नहीं है। हम उससे जुड़े हुए हैं। उसने हमारे रिश्ते को मजबूत बनाया है और अब हमारी सेक्स लाइफ में आग लगा रही है।”

शैर कहती हैं कि उनका पति कैलम हमेशा सिर्फ सेक्स मूड में रहता था और वह उनकी इच्छा को पूरा करने की जद्दोजहद में जुटी रहती थीं। कैलम की सेक्स इच्छाएँ इतनी ज्यादा थीं कि उन्होंने कई बार बिस्तर पर पति-पत्नी के अलावा एक और महिला को लाने की इच्छा जताई यानी थ्रीसम सेक्स करने की इच्छा। 

शैर से ये बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने सोचा कि किसी सच की औरत से अच्छा है कि वो सेक्स डॉल ले आएँ। शैर बताती हैं कि उन्होंने बहुत सारी गुड़िया खोजीं लेकिन फिर उन्हें डी मिली जो बिलकुल उनके जैसी दिखती है। उन्होंने ये गुड़िया जून 2021 में खरीदी थीं और 13 महीनों से वह लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

दंपत्ति का मानना है कि उन्होंने अपनी सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने लिए ये सबसे अच्छा फैसला लिया। अब यदि कभी कैलम की इच्छा होती है और शैर मूड में नहीं रहतीं, तो वह डी के पास चले जाते हैं।

शैर ये भी कहती हैं कि सिर्फ उनका पति ही अपनी यौन इच्छा उस गुड़िया से नहीं मिटाता, वह खुद भी गुड़िया के साथ एक्सपेरिमेंट करती हैं। इसके अलावा ये दंपत्ति इस गुड़िया को शैर जैसे कपड़े पहनाकर बाहर घुमाने भी ले जाते हैं।

बता दें कि शैर और कैलम ओनली फैन्स के स्टार हैं। ये लोग महीने 80 हजार डॉलर तक कमाते हैं। इन लोगों ने डी को भी कैमरे पर दिखाया हुआ है। हालाँकि हर बार वह साथ में नहीं होती। ये लोग उसे अलमारी में बंद रखते हैं और मानते हैं कि इसकी वजह से वह लोग और नजदीक आए।

भोजन और दवाओं के लिए सेक्स वर्कर बनने को मजबूर हुईं श्रीलंका की महिलाएँ, कई अस्थायी वेश्यालय खुले: पुलिस के साथ सोने पर मिलती है सुरक्षा

श्रीलंका में चल रहे विरोध प्रदर्शन के कारण वहाँ के राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे देश छोड़ कर भाग खड़े हुए और अपना इस्तीफा दे दिया। डलास अल्लाहपेरुमा के समर्थन में मुख्य विपक्षी नेता सजीत प्रेमदासा ने राष्ट्रपति की उम्मीदवारी से खुद का नाम वापस ले लिया है। राजनीतिक संकट के कारण अस्थिर द्वीपीय देश में जनता का हाल बुरा है। वेश्यावृत्ति चरम पर है, क्योंकि कई महिलाएँ भोजन और दवा सम्बन्धी जरूरतें पूरी करने के लिए सेक्स बेच रही हैं।

जहाँ श्रीलंका की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है, वहीं वहाँ पर कई अस्थायी वेश्यालय बना दिए गए हैं, जहाँ ‘आयुर्वेदिक स्पा’ और मसाज के नाम पर सेक्स बेचने का काम किया जा रहा है। खासकर वहाँ की टेक्सटाइल इंडस्ट्री में सक्रिय महिलाएँ वेश्यावृत्ति का रुख कर रही हैं, ऐसा श्रीलंकाई अख़बार ‘The Morning’ ने पाया है। आर्थिक बर्बादी की सबसे ज्यादा मार टेक्सटाइल सेक्टर पर ही पड़ी है, ऐसे में कइयों की नौकरियाँ चली गईं, कइयों की असुरक्षित हैं और कोई दूसरी नौकरी का विकल्प भी नहीं बचा है।

ऐसी ही एक सेक्स वर्कर ने श्रीलंकाई अख़बार को बताया, “हमें पता चला कि देश में आर्थिक संकट के कारण हम अपनी नौकरी गँवा सकते हैं। इस समय हम इसका एक ही सर्वश्रेष्ठ समाधान देख पा रहे हैं और वो है सेक्स वर्क। हमारा मासिक वेतन 28,000 श्रीलंकाई रुपए (6233 भारतीय रुपए) है, और हम 35,000 (7792 भारतीय रुपए) तक कमा लेती थीं। लेकिन, सेक्स वाले काम से हम प्रतिदिन 15,000 (3339 भारतीय रुपए) कमा ले रही हैं।”

उक्त महिला ने कहा कि कई लोग भले उससे सहमत न हों, लेकिन सच्चाई यही है। भारत और बांग्लादेश द्वारा श्रीलंकाई कपड़ों की खरीददारी में 10-20% की गिरावट आई है, जिसके लिए वहाँ की संस्था ने राजनीतिक संकट के कारण खरीददारों के विश्वास में गिरावट आने को कारण बताया है। श्रीलंका की कई महिलाएँ राजधानी कोलम्बो का रुख कर रही हैं और जनवरी से लेकर अब तक वेश्यावृत्ति में 30% महिलाओं की बढ़ोतरी हुई है।

इन महिलाओं में से अधिकतर को अपने बच्चों का पालन-पोषण करना है और अपने माता-पिता की देखरेख करनी है। कइयों पर अपने भाई-बहनों की भी जिम्मेदारी है। इसीलिए, जल्दी अधिक रुपए के लिए वो सेक्स वर्क का रुख कर रही हैं। महँगाई आसमान छू रही है और लोगों को वेतन नहीं मिल रहे हैं। ईंधन, भोजन और दवाओं की भारी कमी है। कहा जा रहा है कि कोलम्बो के इंडस्ट्रियल क्षेत्रों के आसपास ये वेश्यालय फल-फूल रहे हैं।

इन महिलाओं को पुलिस के साथ सोना होता है, बदले में उन्हें और उनके काम को सुरक्षा मिलती है। ये ये महिलाएँ कृषि का रुख करने से भी हिचक रही हैं, क्योंकि फसलों के उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले 50% की भारी कमी आई है। मई 2021 में राजपक्षे सरकार ने केमिकल फर्टिलाइजर्स पर बैन लगा दिया था। इनके साथ सोने के लिए माफिया से लेकर कई अमीर लोग पहुँचते हैं। इनमें से कई क्लाइंट्स के हाथों इन्हें प्रताड़ना और हिंसा का भी सामना करना पड़ता है।

नूपुर शर्मा ने जो कहा वह गलत है, उसे इस्लाम माफ नहीं करेगा: निजामुद्दीन दरगाह के दीवान अली मूसा निजामी, कहा- मंदिर जाकर करे तौबा

दिल्ली की हजरत निजामुद्दीन दरगाह के दीवान अली मूसा निजामी का कहना है कि बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने पैगंबर मोहम्मद को लेकर जो टिप्पणी की थी, वह गलत है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें किसी को भी नहीं कहनी चाहिए। इस्लाम में इसके लिए माफी नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में जम्हूरियत है। यदि यह इस्लामी मुल्क होता तो उसने जो कुछ कहा, उसकी एकमात्र सजा मौत होती।

निजामी ने कहा, “नूपुर शर्मा ने जो कहा उसके लिए उसे इस्लाम माफ नहीं करेगा। इसकी सजा मौत है। भारत में जम्हूरियत है, इसलिए वह जिंदा है। उसे अपने बयान के लिए खुलेआम माफी माँगनी चाहिए। मैं तो कहूँगा कि उसे मंदिर में जाकर माफी माँगनी चाहिए। जो कहा उसके लिए तौबा करनी चाहिए। इसका बड़ा असर होगा।” साथ ही उन्होंने कहा कि भारत जम्हूरियत वाला देश है। इसलिए विरोध में ‘सर तन से जुदा’ के जो नारे लग रहे हैं, वह भी गलत है।

यह पूछे जाने पर कि कई इस्लामी विद्वानों का कहना है कि नूपुर शर्मा ने गलत नहीं कहा है। उन्होंने जो कहा वह इस्लामी किताबों में दर्ज है। निजामी ने जवाब में जोर देकर कहा, “उसने जो भी कहा वह गलत है। इस्लाम में इसके लिए माफी की कोई गुंजाइश नहीं है।” हालाँकि नूपुर शर्मा को लेकर इतना सख्त रवैया दिखाने वाले निजामी, कन्हैया लाल का जिक्र आते ही हँस पड़े थे। वैसे अपने जवाब में उन्होंने इस निर्मम हत्या को भी गलत माना था।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों इस्लामिक स्कॉलर अतीकुर रहमान ने कहा था कि नूपुर शर्मा ने पैगंबर मोहम्मद पर जो टिप्पणी की थी, वह गलत नहीं थी। एक टीवी शो में सोशल मीडिया के जरिए फैलाई गई नफरत और धमकियों पर अफसोस जताते हुए उन्होंने कहा था कि यदि किसी को लगता है कि नूपुर शर्मा ने गलत कहा है तो किसी वरिष्ठ मौलवी को बताना चाहिए कि वह कहाँ गलत थीं।

रहमान ने कहा था, “मैं आपको बताना चाहता हूँ कि नूपुर शर्मा गलत नहीं थीं। वो गलत नहीं थी। अगर कोई इस्लामी विद्वान या मुस्लिम सोचता है कि वह गलत थीं, तो इस्लाम का दायरा इतना व्यापक है कि उन्हें माफ किया जा सकता है। कोई वरिष्ठ मौलवी बताए कि वो कहाँ गलत थीं।” लेकिन निजामुद्दीन की दरगाह के दीवान निजामी ने इस संबंध में ऑपइंडिया के सवाल के जवाब में रहमान जैसे इस्लामी विद्वानों के मत को सिरे से खारिज कर दिया।

अपनी 84 साल की उम्र का हवाला देते हुए निजामी ने ऑपइंडिया को बताया कि उन्होंने कई दौर देखे हैं। माहौल खराब करने के लिए हमेशा से बयानबाजी होती रही है। लेकिन उनके अनुसार नफरत का जो दौर आज दिख रहा है, वैसा पहले कभी नहीं रहा। उन्होंने कहा कि यह नफरत अभी और बढ़ेगी। जब तक यह सरकार रहेगी, यह खत्म नहीं होगी।

ऑपइंडिया के साथ बातचीत में निजामी ने दावा किया कि हिंदुओं के बीच नफरत का प्रचार किया जा रहा है। इसके कारण साल भर के भीतर निजामुद्दीन की दरगाह पर आने वाले हिंदुओं की संख्या में 60 फीसदी तक कमी आने की भी बात कही। उन्होंने बताया, “पहले यहाँ खूब हिंदू आते थे। हर रोज। दोपहर के 2 बजे से रात के 11 बजे तक दरगाह पर आने वालों में खूब हिंदू होते थे। लेकिन अब इक्का-दुक्का हिंदू ही आते हैं। पहले यहाँ हिंदू भंडारे भी करते थे। करीब-करीब रोज। अन्न-पैसा बाँटते थे। लेकिन अब वैसी स्थिति नहीं रही।”

पृथ्वी की तरफ बढ़ रहा सोलर स्टॉर्म, टक्कर होते ही गुल हो सकती है बिजली-मोबाइल सिग्नल पर भी खतरा: 22 साल बाद आए संकट के बारे में जानें सब कुछ

14 जून को सूर्य से फूटी सौर ज्वाला अब धरती से टकराने की कगार पर आ गई है। अमेरिका की नेशनल ओशिएनिक एंड एटमॉसफेरिक एडमिनिस्ट्रेशन ने इसकी जानकारी देते हुए अलर्ट भी जारी किया है। उन्होंने बताया है कि धरती की ओर बढ़ते हुए ये ज्वाला सौर तूफान बन धरती से टकराएगा जिससे कि ब्लैक आउट होने की संभावना है।

अंतरिक्ष मौसम विशेषज्ञ डॉ. तमिथा स्कोव ने सूर्य से निकलने वाली इस सौर ज्वाला के बारे में ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लंबे साँप जैसी सौर ज्वाला पृथ्वी से टकराने वाली है। नासा ने भविष्यवाणी करते हुए इसके 19 जुलाई को पृथ्वी से टकराने की बात कही। इसकी वजह से सैटेलाइट प्रभावित हो सकते हैं, साथ ही जीपीएस और रेडियो का काम भी प्रभावित हो सकता है।

सोलर स्टॉर्म का कैसे डालेगा धरती पर असर?

बता दें कि सौर तूफान को लेकर अगर वैज्ञानिकों द्वारा दी जा रही चेतावनी सही साबित होती है तो ये धरती पर इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रेडिएशन और गर्मी बढ़ाएगी। इससे पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड पर असर पड़ेगा और हो सकता है कि धरती पर अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बिजली की समस्या देखने को मिले।

इसके अलावा रेडियो सिग्नल और मोबाइल सिग्नल पकड़ने में भी दिक्कत आने की संभावना है और हो सकता है कि जीपीएस इस्तेमाल करने वालों को भी बाधा का सामना करना पड़े। कुछ जानकार दावा कर रहे हैं कि ये सौर तूफान ऑनलाइन एक्टिविटी पर प्रभाव जरूर डाल सकता है। लेकिन ये इतनी बड़ी परेशानी नहीं होने वाला है।

स्पेसवेदर ने कहा है कि हो सकता है कि ये तूफान अगले हफ्ते आए या 20-21 जुलाई को धरती पर पहुँचे। उनके मुताबिक ये जी-1 क्लास तूफान होगा जोकि छोटा होगा, मगर सैटेलाइट संचालन में इससे परेशानी होगी। जानकारी के अनुसार, ऐसे सौर तूफानों की उत्पत्ति कोरोनल मास इजेक्शन, प्लाजमा और मैग्नेटिक एनर्जी छूटने से होती है। ये विस्फोट पृथ्वी पर एक साल में उत्पन्न होने वाले सभी बिजली संयंत्रों की ऊर्जा की तुलना में 100,000 गुना अधिक ऊर्जा पैदा कर सकता है।

कब-कब आया सौर तूफान?

उल्लेखनीय है कि सौर तूफान की घटनाएँ कम देखने को मिलती हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि ये खतरा पहली दफा धरती पर मंडराया हो। 22 साल पहले धरती ने एक खतरनाख सौर तूफान को झेला था। 14 जुलाई 2000 को बैस्टाइन डे इवेंट के तौर पर याद किया जाता है। इसी दिन सबसे घातक(X5) सौर तूफान धरती पर आया था। उससे पहले साल 1989 में भी दुनिया ने एक ऐसा तूफान देखा था और उसका असर कनाडा के क्यूबेक शहर पर काफी पड़ा था। इसी प्रकार 1859 में आए सौर तूफान से यूरोप और अमेरिका के टेलीग्राफ नेटवर्क को भारी नुकसान हुआ था।

गौहर चिश्ती ने अजमेर-उदयपुर में दंगों का बनाया था प्लान, जानते हुए भी चुप रहे दरगाह के दूसरे खादिम: रिपोर्ट में दावा- सर कलम करने को उकसाया था

उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या के बाद अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह के बाहर भड़काऊ नारेबाजी के वीडियो सामने आए थे। इस मामले में दरगाह का खादिम गौहर चिश्ती भी आरोपित है जो फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में है। पूछताछ से पता चला है कि उसने अजमेर और उदयपुर में दंगों का प्लान बनाया था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार उसकी इस साजिशों के बारे में दरगाह के दूसरे खादिम भी जानते थे। बावजूद उन्होंने इसके बारे में पुलिस को नहीं बताया। रिपोर्ट के अनुसार गौहर ने 16 जून 2022 की शाम खादिमों के साथ मोहल्ले में बैठक की थी। इसके बाद दंगों की तैयारी को लेकर एक वाॅट्सएप ग्रुप बनाया गया। वह लोगों को ‘सर तन से जुदा’ के लिए भी उकसा रहा था। कथित तौर पर उसकी साजिशों का पता चलने के बाद खादिम दो गुट में बँट गए और 17 जून को हुए मौन जुलूस में शामिल नहीं हुए। इसी जुलूस में भड़काऊ नारे लगे थे। इसके बाद गौहर उदयपुर गया था, जहाँ मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने दुकान में घुसकर 28 जून को कन्हैया लाल का गला काट दिया था।

रिपोर्ट की माने तो अभी तक की पूछताछ में कन्हैया लाल के हत्यारों के साथ उसके कनेक्शन सामने नहीं आए हैं। लिहाजा राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने इस मामले से दूरी बना रखी है। उल्लेखनीय है कि जब गौहर फरार था तो कुछ रिपोर्टों में बताया गया था कि उदयपुर में वह कन्हैया लाल के हत्यारे से मिला था। निर्मम हत्या को अंजाम देने के बाद हत्यारे उसके पास ही शरण लेने अजमेर आ रहे थे, लेकिन रास्ते में पकड़े गए।

अजमेर पुलिस ने 25 जून को गौहर चिश्ती के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाने का केस दर्ज किया था। बाद में वह हैदराबाद से पकड़ा गया था। पत्रिका डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार उसके रिश्ते कई इस्लामिक संगठनों से भी मिले हैं। यह भी पता चला है कि गौहर दो मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा था। इनमें से एक से वह 15 गूगल अकाउंट चला रहा था। इन गूगल अकाउंट का इस्तेमाल किस काम के लिए हो रहा था यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

कन्हैया लाल की हत्या नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने को लेकर की गई थी। पिछले दिनों राजस्थान पुलिस ने अजमेर दरगाह के एक और खादिम सलमान चिश्ती को नूपुर की हत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। सलमान का जो वीडियो वायरल हुआ था, उसमें वह कह रहा था कि नूपुर की गर्दन लाने वाले को वह अपना मकान देगा। इसके बाद अजमेर की दरगाह शरीफ मैनेजमेंट कमिटी के सचिव सैयद सरवर चिश्ती का भी बयान सामने आया था। उन्होंने नुपूर शर्मा को मिल रहे समर्थन पर एतराज जताया था। कहा था कि मु​सलमान इसे बर्दश्त नहीं करेंगे।