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93 की उम्र, बैसाखी का सहारा… पर पढ़ाने का समर्पण ऐसा कि रोज तय करती हैं 60 किमी का सफर: मिलिए फिजिक्स की प्रोफेसर चिलुकुरी संथम्मा से

आंध्र प्रदेश की प्रोफेसर चिलुकुरी संथम्मा (Chilukuri Santhamma) 93 साल की हैं। जिस उम्र में लोग आराम करने के बारे में सोचते हैं, वह छात्रों को पढ़ाने के लिए प्रतिदिन 60 किमी से अधिक का सफर तय करती हैं। घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद भी उन्होंने कॉलेज के बच्चों को पढ़ाना नहीं छोड़ा है। वह बैसाखी के सहारे रोज कॉलेज आती हैं और पिछले छह वर्षों से फेलोशिप लेकर सेंचुरियन यूनिवर्सिटी में पढ़ा रही हैं। इसके अलावा वह सात दशकों से छात्रों को फिजिक्स पढ़ाकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, उनकी माँ (Vanajakshamma) भी 104 साल तक जिंदा रहीं और माँ की सीख से ही वह इस मुकाम तक पहुँचने में कामयाब हुई हैं। वह बताती हैं, “मुझे मेरी उम्र परेशान नहीं करती। स्वास्थ्य हमारे दिमाग में है और दौलत हमारे दिलों में। हमें हमेशा अपने दिमाग और दिल को स्वस्थ रखना चाहिए। मैं अपनी तुलना अल्बर्ट आइंस्टीन से नहीं करती, लेकिन मेरा एक ही उद्देश्य है, अपनी आखिरी साँस तक पढ़ाते रहना।” 8 मार्च, 1929 को मछलीपट्टनम में जन्मी संथम्मा ने 5 महीने की उम्र में अपने पिता को खो दिया था। पालन-पोषण मामा ने किया। पढ़ाना ही उनका एकमात्र शौक नहीं है, बल्कि दूसरों की भलाई के लिए उन्होंने अपना घर तक विवेकानंद मेडिकल ट्रस्ट को दान कर दिया है और अब वह किराए के मकान में रह रही हैं।  

प्रो संथम्मा के अनुशासन, समर्पण और कड़ी मेहनत ने उनके साथियों और छात्रों को हैरान कर दिया है। बीएससी ऑप्टोमेट्री प्रथम वर्ष की छात्रा हसीना कहती हैं, “मैं प्रो। संथम्मा की फिजिक्स की क्लास कभी भी मिस नहीं करती हूँ। मुझे उसका बेसब्री से इंतजार रहता है। वह कभी भी क्लास में देर से नहीं आती हैं। वह अनुशासन, समर्पण और प्रतिबद्धता में हम सबके लिए एक आदर्श हैं। उन्हें उनके विषय के बारे में बहुत जानकारी है।” 1945 में प्रो। संथम्मा को महाराजा विक्रम देव वर्मा ने फिजिक्स के लिए गोल्ड मेडल दिया था। उस वक्त वह AVN कॉलेज, विशाखापट्टनम में इंटरमीडिएट की छात्रा थीं। उन्होंने फिजिक्स विषय में बीएससी ऑनर्स किया और आंध्र विश्वविद्यालय से माइक्रोवेव स्पेक्ट्रोस्कोपी में डी.एससी (पीएचडी के समकक्ष) पूरा किया था। 1956 में आंध्र विश्वविद्यालय में बतौर लेक्चरर पढ़ाना शुरू किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, 1989 में रिटायर होने के बाद भी वह रिसर्च से जुड़ी रहीं और एक मानद लेक्चरर के रूप में फिर से आंध्र विश्वविद्यालय जॉइन किया। वह अपने विषय से जुड़े सम्मेलनों में भाग लेने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और स्पेन सहित कई देशों में गई हैं। परमाणु स्पेक्ट्रोस्कोपी और आणविक स्पेक्ट्रोस्कोपी में उनके विश्लेषण ने 2016 में वेटेरन वैज्ञानिकों की कैटेगरी में कई पुरस्कार और स्वर्ण पदक जीता।

‘सरेंडर करो, वरना कुर्की शुरू होगी’ : मुख्तार अंसारी के बीवी-बेटे-साले को UP पुलिस ने घोषित किया ‘भगोड़ा’ , SP ने दी चेतावनी

उत्तर प्रदेश की मऊ पुलिस ने मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे अब्बास अंसारी, उसकी बीवी अफ्शां अंसारी और उसके साले को भगोड़ा घोषित कर दिया है। इससे पहले खबर आई थी मऊ पुलिस ने इन लोगों की तलाश में 4-4 जगहों पर छापेमारी की लेकिन इनमें से किसी का कुछ नहीं पता चला। आखिर में जाकर पुलिस ने अंसारी के फरार हुए परिवार को भगोड़ा घोषित किया है। तस्वीरों में देख सकते हैं पुलिस इनकी संपत्ति के बाहर नोटिस चस्पा करती दिख रही है

रिपोर्ट्स के मुताबिक मऊ एसपी अविनाश पांडे ने वीडियो में अंसारी के परिजनों को चेतावनी देते हुए कहा कि सभी (मुख्तार अंसारी के परिजन) को भगोड़ा घोषित किया गया है। इन्हें पुलिस के सामने पेश होकर गिरफ्तारी देने की हिदायत दी है। इसके साथ ही चेतावनी दी है कि अगर पेश नहीं होते तो धारा 83 के तहत कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि अंसारी के परिजनों के फरार होने की जानकारी देते हुए पुलिस क्षेत्राधिकारी (नगर) धनंजय मिश्रा ने बताया था कि मऊ पुलिस ने गाजीपुर जिले के यूसुफपुर, मोहम्मदाबाद और गाजीपुर शहर में अब्बास और अफ्शां के आवासों और रिश्तेदारों के यहाँ तलाशी ली, लेकिन दोनों नहीं मिले।

उन्होंने ये भी जानकारी दी थी कि मऊ स्थित एफसीआई के गोदाम को मुख्तार अंसारी द्वारा अपराध से अर्जित संपत्ति घोषित करते हुए सरकार ने कब्जे में ले लिया है। इस मामले में मुख्तार की पत्नी अफ्शां, उसके साले और एक अन्य सहयोगी आरोपित है। सबके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी है, कुर्की की कार्रवाई भी हो चुकी है, लेकिन अफशां अब तक अदालत में हाजिर नहीं हुई।

अब्बास अंसारी पर दर्ज केस को लेकर मिश्रा ने बताया था कि मुख्तार अंसारी के बड़े बेटे और मऊ सदर से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से मौजूदा विधायक अब्बास अंसारी पर इस साल की शुरुआत में हुए प्रदेश विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान अधिकारियों के प्रति आपत्तिजनक शब्दों के प्रयोग के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में स्थानीय एमपी-एमएलए अदालत उन्हें कई बार समन भेज चुकी है। लेकिन वह पेश नहीं हो रहे हैं। उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है।

आस्था हिंदुओं की, धंधा हर मजहब के लिए: बोले आमिर- इसी कमाई से पालता हूँ परिवार, तहजीब से पेश आते हैं काँवड़िए

चाहे कुंभ हो या काँवड़ यात्रा, इनका केवल धार्मिक और सामाजिक महत्व ही नहीं है। ये अर्थव्यवस्था में भी अपना योगदान देते हैं। पिछली रिपोर्ट में हमने आपको बताया था कि कैसे कारोबारी इससे लाभान्वित होते हैं। 23 जुलाई 2022 को मुजफ्फरनगर होते हुए हरिद्वार तक की यात्रा में हमने पाया कि इसका आर्थिक पक्ष एक ही धर्म के लोगों को फायदा नहीं पहुँचाता। अन्य मजहब के लोगों को भी इससे लाभ होता है। यही कारण है कि वे भी काँवड़ यात्रा का बेसब्री से इंतजार करते रहते हैं।

मुजफ्फरनगर हरिद्वार हाइवे पर थाना नई मंडी से थोड़ा आगे चलने पर हमें सड़क के किनारे शिकंजी वाले गुड्डू मियाँ मिले। वे हरिद्वार के ज्वालापुर के रहने वाले हैं। लम्बे समय से मुजफ्फरनगर में शिकंजी बेच रहे हैं। उन्होंने बताया, “काँवड़ यात्रा के दौरान हमारी कमाई आम दिनों के मुकाबले बेहतर होती है।”

गुड्डू मियाँ शिकंजी वाले

चमक उठी अफ़ज़ल की चश्मे की दुकान

उत्तराखंड की सीमा में घुसने के कुछ देर बाद मंगलौर इलाके में अफ़ज़ल सड़क किनारे चश्मा बेचते दिखे। उनके चश्में कई काँवड़ियों ने भी खरीदे। अफ़ज़ल ने बताया कि काँवड़ यात्रा के चलते काँवड़ियों की खरीदारी से उनके चश्मों की बिक्री बढ़ी है।

चश्मे बेचते अफ़ज़ल

500 रुपए रोज कमा कर आमिर पाल रहे अपने परिवार को

रुड़की के पास चप्पल और मोज़े बेचने वाले आमिर ने हमें बताया, “मेरी लगभग 500 से 600 रुपए रोज की कमाई है। इसी कमाई से मैं अपना परिवार पालता हूँ। काँवड़ यात्री हमसे तहजीब से बात करते हैं।”

आमिर और पीछे उनका बच्चा

चश्मे वाले सरदार संजू सिंह को भी काँवड़ में फायदा

हर की पौड़ी से पहले लोहा पुल के पास चश्मे बेच रहे सरदार संजू सिंह ने हमें बताया, “मेरा देहरादून में बैलून डेकोरेशन का काम है लेकिन पूरे काँवड़ भर हरिद्वार में चश्मे बेचता हूँ। यहाँ हमारी अच्छी-खासी कमाई हो जाती है।”

सरदार संजू सिंह

काँवड़ बनाने वाले अधिकतर कारीगर मुस्लिम

अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महंत रवींद्र पुरी ने ऑपइंडिया से कहा, “यहाँ किसी भी प्रकार से भेदभाव किसी के साथ भी नहीं होता। काँवड़ बनाने वाले अधिकतर कारीगर मुस्लिम समुदाय से हैं। इस पर्व से उनके भी घर में चूल्हा जलता है।”

अखाड़ा परिषद राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महंत रविंद्र पुरी

ट्रांसपोर्ट और कपड़े के कारोबार से भी अच्छी कमाई

हरिद्वार के समाजसेवी अधीर कौशिक ने ऑपइंडिया को बताया, “न सिर्फ काँवड़ बनाने वाले, बल्कि यहाँ काँवड़ियों को लाने वाली गाड़ियों के ट्रांसपोर्ट मालिक भी अलग-अलग धर्म से हैं। इसी के साथ काँवड़ियों के कपड़े भी सिर्फ हिन्दू समाज के लोग नहीं बनाते। ये धर्म की नगरी है जो सभी को समान रूप से देखती है।”

समाजसेवी अधीर कौशिक

स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रसाद, गंगाजल के डिब्बे और सिन्दूर आदि बेचने वालों में सभी धर्मों के लोग शामिल हैं। हर कोई बिना भेदभाव के अपना व्यापार करता है।

‘…और विपक्ष इन्हें बनाना चाहता है VP’: मार्गरेट अल्वा ने फोन बंद होने का सारा ठीकरा BJP पर फोड़ा, नेटीजन्स ने कहा- ‘पूरी लेडी यशवंत’

विपक्ष की उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार और कॉन्ग्रेस नेता मार्गरेट अल्वा (Margaret Alva) ने सोमवार (25 जुलाई 2022) को ट्विटर पर दावा किया कि बीजेपी के कुछ नेताओं से बात करने के बाद उनके सभी कॉल डायवर्ट किए जा रहे हैं। वे न तो कॉल कर पा रही हैं और ना ही कॉल रिसीव कर पा रही हैं।

मार्गरेट अल्वा ने अपने ट्वीट में बीजेपी पर तंज कसते हुए सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL और MTNL को लिखा, “बीजेपी के कुछ दोस्तों के साथ बातचीत के बाद मेरे मोबाइल फोन की सभी कॉल्स डायवर्ट कर दी गई हैं। मैं कोई कॉल नहीं कर पा रही हूँ और ना ही रिसीव कर पा रही हूँ।” उन्होंने आगे कहा, “यदि आप मेरा फोन रिस्टोर कर देते हैं तो मैं आपसे वादा करती हूँ कि बीजेपी, टीएमसी या बीजेडी के किसी भी सांसद को आज की रात से कॉल नहीं करूँगी।” अल्वा ने ट्विटर पर बताया कि उनके MTNL के नो योर कस्टमर (KYC) को सस्पेंड कर दिया गया है और उनका सिम कार्ड 24 घंटों के लिए ब्लॉक रहेगा। उन्होंने कंपनी से पूछा कि क्या आपको मेरे KYC की अब जरूरत है?

यह दिलचस्प है कि कॉन्ग्रेस नेता ने दिल्ली पुलिस और पीआईबी द्वारा केवाईसी धोखाधड़ी के बारे में बार-बार चेताने के बावजूद मूर्खतापूर्ण बहाना बनाया है। कॉन्ग्रेस नेता मार्गरेट अल्वा यशवंत सिन्हा के एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू से बड़े अंतर से राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई से संपर्क कर रही हैं।

कॉन्ग्रेस नेता के फर्जी दावों के बाद एमटीएनएल ने जवाब दिया कि वे कभी भी व्हाट्सएप/एसएमएस/कॉल आदि पर ई-केवाईसी नहीं माँगते हैं। बल्कि इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए सभी जीएसएम ग्राहकों को संदेश भेजकर और कॉल करके अलर्ट करते हैं। इसलिए आपसे अनुरोध है कि ऐसे ई-केवाईसी संदेशों को नजरअंदाज करें।

बीजेपी ने फर्जी खबरें फैलाने के लिए कॉन्ग्रेस नेता पर निशाना साधा है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “कोई उनका फोन क्यों टैप करे? वह किसी को भी बुला लें, हमें पता है उपराष्ट्रपति चुनाव का परिणाम क्या होगा। हम ऐसा क्यों करेंगे? ये बचकाने आरोप हैं। वह एक वरिष्ठ महिला हैं और उन्हें इस तरह के आरोप नहीं लगाने चाहिए।”

मालूम हो कि दिल्ली पुलिस भी इस तरह की धोखाधड़ी को लेकर कई बार यूजर्स को सचेत कर चुकी है। करीब एक सप्ताह पहले भी ऐसी ख़बरें आई थी कि जालसाज ग्राहकों को जानिए केवाईसी के बारे में संदेश भेजकर उन्हें उनके नंबरों को सत्यापित करने के लिए कहकर ठग रहे हैं।

19 जुलाई को, दिल्ली पुलिस ने एमटीएनएल के नाम और लोगो का दुरुपयोग करने वाले व्हाट्सएप मैसेज को लेकर लोगों को चेतावनी भी दी थी। दिल्ली पुलिस ने फर्जी मैसेज का एक स्क्रीनशॉट साझा करते हुए ट्वीट किया था, “सावधान! धोखाधड़ी की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई है, जिसमें @MTNLOfficial के नाम और लोगो का उपयोग साइबर धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा है। गोपनीय जानकारी प्राप्त करने के लिए जालसाज ग्राहकों को केवाईसी अपडेशन के बहाने व्हाट्सएप पर मैसेज भेज रहे हैं।”

एमटीएनएल ने भी दिल्ली पुलिस के ट्वीट को री-ट्वीट किया था।

बता दें कि 21 मई को दिल्ली पुलिस साइबर-क्राइम सेल ने एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने यूजर्स को चेतावनी दी थी कि कैसे जालसाज नकली संदेश भेज रहे हैं, जिसमें दावा किया जा रहा है कि संदेश में दिए गए फोन नंबरों पर कॉल नहीं करने पर उनके सिम कार्ड ब्लॉक कर दिए जाएँगे।

न केवल दिल्ली पुलिस, बल्कि प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने भी 29 मई, 2022 को एक ट्वीट पोस्ट किया था, जिसमें यूजर्स को एमटीएनएल केवाईसी धोखाधड़ी के बारे में चेतावनी दी गई थी।

ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या सच में कॉन्ग्रेस नेता एमटीएनएल द्वारा यूजर्स को भेजे गए इन सभी अलर्ट से बेखबर थीं। क्या उन्होंने बिना सोचे समझे सोशल मीडिया पर यह ट्वीट लिखा था। जबकि दिल्ली पुलिस और पीआईबी पिछले दो वर्षों से साइबर धोखाधड़ी के बारे में अलर्ट जारी कर रही है।

अल्वा के इन ट्वीट के बाद यूजर्स उनकी ऐसी समझी देख उनपर सवाल उठा रहे हैं। ध्यान दिलाया जा रहा है कि कैसे जो लोग सच बता रहे हैं उनके संदेश अल्वा ने हाइड कर दिए हैं। लोग हैरान होकर पूछ रहे हैं कि क्या विपक्ष इन्हें उप राष्ट्रपति बनाना चाहता है जिन्हें ये तक नहीं पता कि आधिकारिक संदेश और फ्रॉड में क्या फर्क है। कुछ यूजर्स उन्हें लेडी यशवंत सिन्हा भी बोल रहे हैं।

करनी बंगाली हीरोइन अर्पिता मुखर्जी की, गाली मुंबई की सिंगर अर्पिता मुखर्जी को: Video जारी कर बताया- मैं वो नहीं हूँ

पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले में ED द्वारा गिरफ्तार किए गए TMC के मंत्री पार्था चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के घर से छापेमारी में 21 करोड़ रुपए नकद और 76 लाख रुपए के गहने बरामद हुए। इस खबर के बाद मीडिया और सोशल मीडिया में अर्पिता मुखर्जी को लेकर एक कन्फ्यूजन पैदा हो गया। जिस अर्पिता मुखर्जी पर आरोप लगे हैं, वो बंगाली-उड़िया फिल्मों की अभिनेत्री और मॉडल रही हैं। उनका करियर उतना सफल नहीं रहा।

जबकि लोग गायिका अर्पिता मुखर्जी की ये समझ कर आलोचना कर रहे हैं कि वही घोटाले में फँसी हुई अर्पिता मुखर्जी हैं। यहाँ तक कि ‘टाइम्स नाउ नवभारत’, ‘आज तक’ और ‘ABP न्यूज़’ जैसे संस्थान भी चकमा खा गए और उन्होंने गायिका अर्पिता मुखर्जी की तस्वीर चला दी। हालाँकि, बाद में कुछ मीडिया संस्थानों ने इसके लिए माफ़ी भी माँगी। गायिका अर्पिता मुखर्जी ‘सारेगामापा गोल्डन वॉइस हंट’ की विजेता रही हैं और फ़िलहाल इसकी जूरी में शामिल हैं।

ट्रोल होने के बाद उन्होंने एक वीडियो के जरिए अपनी बात रखी, जिसमें उन्होंने कहा कि वो काफी परेशान और विक्षुब्ध हैं, क्योंकि सोशल मीडिया पर लोग उन्हें लेकर गलत-गलत बातें लिख रहे थे और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि बात क्या है। शुरू में तो उन्होंने इसे नज़रअंदाज़ किया, लेकिन उनके सारे हैंडल्स पर लोग काफी ज्यादा बातें लिखने लगे और ट्रोलिंग काफी बढ़ गई। फिर उन्होंने गूगल पर जाकर चेक किया, जहाँ उन्हें पता चला कि कोलकाता में कोई अर्पिता मुखर्जी अभिनेत्री हैं, जिनका ED के साथ कुछ समस्या हुई है।

गायिका अर्पिता मुखर्जी ने कहा, “लोग मुझे कोलकाता वाली अभिनेत्री अर्पिता मुखर्जी समझ कर मुझे ट्रोल कर रहे हैं। कुछ भी लिखने से पहले सोचिए कि मैं अलग अर्पिता मुखर्जी हूँ और वो अलग अर्पिता मुखर्जी हैं। मैं जहाँ बॉम्बे में रहने वाली प्रोफेशनल सिंगर हूँ, वो टॉलीवुड की अभिनेत्री हैं। ये कन्फ्यूजन इसीलिए भी हुआ, क्योंकि कुछ मीडिया संस्थानों ने मेरी तस्वीरों का प्रयोग इस घटना की खबर में कर लिया। इसीलिए, लोग समझ नहीं पाए कि कौन, कौन है।”

उन्होंने सभी मीडिया संस्थानों से अपील की कि वो अपनी गलती सुधारें और तस्वीरें डालने से पहले पहचान की पुष्टि कर लें। उन्होंने बताया कि इससे उनके करियर और प्रोफेशनल जीवन पर भी असर पड़ रहा है। हालाँकि, उन्होंने जानकारी दी कि कुछ मीडिया संस्थानों ने इस गलती को सुधारा भी है। इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया में पोस्ट लिख कर भी बताया था कि वो कोलकाता वाली अर्पिता मुखर्जी नहीं हैं, जिन्हें ED ने गिरफ्तार किया है।

अंत में बता दें कि जो घोटाले वाली अर्पिता मुखर्जी हैं, वो 2008-14 के बीच बंगाल-उड़िया फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय थीं और एक मॉडल भी रही हैं। उत्तरी कोलकाता के बेलघोरिया के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी अर्पिता काफी विलासमय जीवन जी रही थीं। पिता की मौत के बाद उनकी शादी झाड़ग्राम के एक कारोबारी से हुई थी, लेकिन उनके कोलकाता लौटने के बाद इस शादी का क्या हुआ, इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता। अर्पिता मुखर्जी का अपना प्रोडक्शन हाउस भी है। पिता सरकारी नौकरी में थे, ऐसे में उनकी मौत के बाद भी अर्पिता ने सरकार नौकरी ठुकरा दी थी।

2008 में जीत के साथ उनकी फिल्म ‘पार्टनर’ और प्रोसेनजीत चटर्जी के साथ 2009 में ‘Mama Bhagne’ आई थी। 2019-20 में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की सबसे बड़ी दुर्गा पूजा कमिटियों में से एक ‘नकतला उदयन संघ’ ने उन्हें अपने प्रमोशनल अभियान का चेहरा बनाया था। उन्होंने इसमें पैसे भी लगाए थे। 2004 में उन्होंने अपना मॉडलिंग करियर शुरू किया था। उन्होंने प्रसेनजित की ‘Bangla Banchao’ फिल्म में भी काम किया। 2011 में वो ‘The Bhoot of Roseville’ और ‘Bidehir Khonje Rabindranath’ में दिखी थीं।

शौहर ने हथौड़ों से मारा, बिन पूछे बच्चों को मुस्लिम बनाया; कोर्ट ने दी कस्टडी तो कट्टरपंथी कह रहे- इस्लाम छोड़ने की सजा मौत: मलेशिया में हिंदू माँ का संघर्ष

कुछ महीने पहले मलेशिया में अपने मुस्लिम शौहर से अपने बच्चों की कस्टडी की लड़ाई लड़ने वाली हिंदू महिला एक बार फिर चर्चा में है। खबर है 35 साल की लोह सिउ हॉन्ग नाम की हिंदू चीनी महिला पर कट्टरपंथी दबाव बनाना चाहते हैं ताकि वह अपने बच्चों को मुस्लिम ही रहने दें, जबकि लोह का सवाल रहा है कि उनके बच्चों का धर्मांतरण उनकी बिन मर्जी के हुआ था तो ये वैध कैसे हो सकता है।

जानकारी के मुताबिक मलेशिया की इस्लामी पार्टी जो कि सरकार में एक हिस्सा रखती है वो लोह को सलाह दे रही है कि वो बच्चों की घरवापसी न करवाएँ और अगर बच्चे मुस्लिम बन गए हैं तो उन्हें वही रहने दें क्योंकि इस्लाम में मजहब छोड़ने की सजा सिर्फ मौत होती है।

समूह के इन्फॉर्मेशन चीफ खैरिल निजाम खिरुद्दी ने एएफपी को इस संबंध में कहा, “अगर हम उस महिला से मिलते हैं तो हम उन्हें मनाएँगे कि वो बच्चों को मुस्लिम ही रहने दें।”

बता दें कि लोह सिऊ हॉन्ग नाम की 35 वर्षीय हिंदू चीनी महिला ने इसी साल 21 फरवरी को अपने बच्चों की कस्टडी कानूनी लड़ाई लड़के पाई थी। उन्होंने अपने शौहर पर आरोप लगाया था कि उसने बिन उनकी मर्जी पूछे बच्चों का इस्लामी धर्मांतरण करवा दिया। लेकिन, अब चूँकि लोह के पास बच्चों की कस्टडी है तो वो चाहती हैं कि उनके बच्चे अपने असली धर्म का अनुसरण करें।

उल्लेखनीय है कि हिंदू महिला लोह अपने शौहर से मार्च 2019 में अलग हुई थीं। उनका आरोप था कि उनका शौहर नागाहस्वरान मुनियांदी उन्हें बेरहमी से मारता था, उनका सिर दीवार में लड़ा देता था, उनके पैर तोड़ देता था, उन पर हथौड़े से वार करता था और प्रेस उनके सिर पर फेंक देता था। इन्हीं यातनाओं से तंग आकर वह अपने बच्चों के साथ घर से भाग गई थीं और शरीर पर चोट होने के कारण काफी समय अस्पताल में भी रहीं।

लोह के अनुसार जब वह हॉस्पिटल में थीं तभी उनका शौहर उनके तीनों बच्चों (1 लड़का और दो जुड़वा लड़कियों) को साथ ले गया और उनका धर्मांतरण करवा दिया। चूँकि तीनों ही बच्चे नाबालिग थे और सिउ ने अपनी सहमति भी नहीं दी थी, तो इस पूरे धर्मांतरण को एक तरफा कहा गया।

हॉन्ग ने बड़ी मुश्किल से अपने बच्चों की खोजबीन की और पुलिस की मदद से उन तक पहुँची। इसी बीच उनका शौहर भी ड्रग सिलसिले में गिरफ्तार हो गया, लेकिन बच्चों की कस्टडी इस्लामी समूह को देकर गया। ये लोग लोह को उनके बच्चों से मिलने भी नहीं देते थे। जब महिला ने पुलिस से बारे में बताया तो वह अपने बच्चों से मिल पाईं और पूरा केस शुरू हुआ। 2019 में ही उन्हें अपने बच्चों की अंतरिम कस्टडी मिली, लेकिन इसके बाद कोविड के कारण प्रक्रिया में देर होती गई। मार्च 2021 में जाकर लोह ने अपने बच्चों की कस्टडी ढंग से पाई।

‘अर्पिता मुखर्जी के साथ रिलेशनशिप में थे TMC के मंत्री पार्था चटर्जी ‘: रिपोर्ट में दावा- ED ने कोर्ट को बताया, मिल गई वह ‘ब्लैक डायरी’ जिसमें दर्ज हैं कई राज

SSC भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किए गए पश्चिम बंगाल के मंत्री पार्था चटर्जी और उनकी करीबी अभिनेत्री अर्पिता मुखर्जी को लेकर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। अब अर्पिता मुखर्जी के पास से एक ‘ब्लैक डायरी’ मिली है, जिसमें अवैध रूप से SSC में भर्ती किए गए लोगों के नाम दर्ज हैं। ED द्वारा उड़िया-बंगाली अभिनेत्री के घर से जब्त की गई इस डायरी में इस स्कैम को लेकर कई राज़ छिपे हैं। इसमें ये भी लिखा कि किस जगह से कितनी रकम कहाँ जानी है।

साथ ही मेरिट लिस्ट में किन-किन को लेना है, ये भी इसमें दर्ज है। ऐसे भी अभ्यर्थियों के नाम दर्ज हैं, जिन्हें परीक्षा में पास होने लायक अंक तो नहीं मिले लेकिन उनके मार्क्स बढ़ा कर उन्हें पास कराया गया। किसने कितने रुपए दिए और कितना बकाया रखा है, इसमें ये भी दर्ज है। साथ ही एजेंटों के नाम भी दर्ज हैं, जिन्हें रुपए इकट्ठा करने और इधर-उधर करने के लिए भेजा जाता था। पश्चिम बंगाल सरकार के उच्च शिक्षा एवं स्कूली शिक्षा विभाग के बारे में भी अलग-अलग कोडवर्ड्स में बातें लिखी हुई हैं।

विभाग में किसका क्या किरदार था और किसे क्या करना था, ये सब कोड के रूप में ही इसमें दर्ज है। इससे खुलासा होता है कि कैसे SSC की परीक्षाओं में कई उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को नौकरी नहीं दी गई और कई फेल हुए अभ्यर्थियों को भर्ती कर लिया गया। अर्पिता मुखर्जी के घर से न सिर्फ 20 करोड़ रुपए नकद मिले, बल्कि मंत्री पार्था चटर्जी के साथ उनके एक जॉइंट संपत्ति के कागजात भी मिले हैं। मंत्री के नाम वाला एक लिफाफा भी मिला है, जिसमें 5 लाख रुपए रखे हुए थे।

शिक्षकों की भर्तियों में मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की गई थी, जिसमें पार्था चटर्जी फ़िलहाल 3 अगस्त तक ED की कस्टडी में हैं। अर्पिता मुखर्जी के आवास से बड़ी मात्रा में कीमती गहने भी बरामद हुए थे। दोनों ने साथ मिल कर एक जगह जमीन भी खरीदी थी। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सूर्यप्रकाश वी राजू ने अदालत में बताया कि अर्पिता मुखर्जी से जुड़े कई दस्तावेज मंत्री पार्था चटर्जी के घर से मिले। अधिवक्ता ने ये भी बताया कि दोनों रिलेशनशिप में थे और एक-दूसरे के काफी करीबी हैं।

मोबाइल फोन के जरिए मंत्री पार्था चटर्जी और अभिनेत्री अर्पिता मुखर्जी हमेशा संपर्क में रहते थे। दोनों को आमने-सामने बिठा कर पूछताछ की ज़रूरत पर भी ED के वकील ने जोर दिया। हालाँकि, पार्था चटर्जी के वकील ने इसे नकारते हुए कहा कि वो अपनी जूनियर को कॉल करते हैं, इसका अर्थ ये नहीं कि दोनों में अंतरंग सम्बन्ध हैं। अर्पिता मुखर्जी का कहना है कि उनका किसी भी पार्टी के साथ सम्बन्ध नहीं है। पार्था चटर्जी के साथ रिलेशनशिप को भी उन्होंने नकार दिया था। अब इस मामले में TMC विधायक माणिक भट्टाचार्य को समन किया गया है।

प्रियंका गाँधी के ‘समर्थन’ को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया दिखावा, कोर्ट में सेविकाओं के खिलाफ कॉन्ग्रेस नेता ही हैं AAP सरकार के वकील

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने दिल्ली में आँगनबाड़ी कार्यकर्तताओं को बर्खास्त किए जाने को लेकर सोमवार (25 जुलाई, 2022) को दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा था। हालाँकि, अब आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने ही प्रियंका गाँधी के समर्थन पर सवाल उठा दिया है।

बता दें कि दिल्ली सरकार ने मानदेय बढ़ाने की माँग करने वाली 800 से अधिक आँगनबाड़ी सेविकाओं को बर्खास्त कर दिया है। प्रियंका गाँधी ने इस कदम को अन्यायपूर्ण करार दिया और कार्यकर्ताओं की तत्काल बहाली की माँग की थी।

इसके बाद आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने प्रियंका के समर्थन को झूठा करार दिया, क्योंकि कॉन्ग्रेस पार्टी के ही नेता अभिषेक मनु सिंघवी बर्खास्त किए गए कर्मचारियों के मामले में केजरीवाल सरकार का बचाव कर रहे थे। संघ का आरोप है कि आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रति कॉन्ग्रेस की ‘सहानुभूति’ सिर्फ एक ‘तमाशा’ थी और पार्टी केवल ‘चुनावी लाभ’ के लिए इस मुद्दे को उठा रही थी। गाँधी के समर्थन पर प्रतिक्रिया देते हुए, दिल्ली राज्य आँगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका संघ (DSAWHU) ने कहा कि कॉन्ग्रेस नेता का समर्थन ‘झूठी सांत्वना’ के अलावा और कुछ नहीं है।

DSAWHU ने सोमवार को एक बयान में कहा, “प्रियंका गाँधी दिल्ली आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के संघर्ष का ‘समर्थन’ कर रही हैं, जबकि कॉन्ग्रेस के अपने राज्यसभा सांसद और पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी दिल्ली सरकार की ओर से आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के खिलाफ वकालत कर रहे हैं।” 

DSAWHU का कहना है कि आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए कॉन्ग्रेस की ‘सहानुभूति’ ‘तमाशा’ है और पार्टी केवल ‘चुनावी लाभ’ के लिए इस मामले को उठा रही है। संघ ने आगे कॉन्ग्रेस पार्टी पर तंज कसते हुए कहा, “अगर कॉन्ग्रेस सम्मानजनक मानदेय की माँग के प्रति इतनी सहानुभूति रखती है तो वह उन राज्यों में योजना कार्यकर्ताओं के मानदेय को बढ़ाकर 25,000 रुपए क्यों नहीं कर रही है जहाँ उनकी सरकार सत्ता में है?”

गौरतलब है कि मानदेय बढ़ाने और काम के सम्मानजनक घंटों की माँग करते हुए एक महीने से अधिक समय से हड़ताल करने को लेकर दिल्ली की 884 आँगनबाड़ी सेविकाओं को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। इन कर्मियों को उनके 39-दिवसीय प्रदर्शन के खिलाफ 14 मार्च को बर्खास्तगी नोटिस जारी किए गए थे।

इसके बाद प्रियंका गाँधी ने ट्वीट किया था, “दिल्ली सरकार ने कुछ दिनों पहले ही विधायकों के मानदेय में बढ़ोतरी की थी। लेकिन एक अन्यायपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने सम्मानजनक मानदेय की माँग करने वाली 800 से अधिक आँगनबाड़ी सेविकाओं को बर्खास्त कर दिया। मेहनत के बदले अच्छा मानदेय माँगना अपराध नहीं है।” उन्होंने कहा, “इन आँगनबाड़ी सेविकाओं को तुरंत बहाल किया जाना चाहिए।”

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की उम्मीदों को बड़ा झटका: बाहर हुए नीरज चोपड़ा, वर्ल्ड चैंपियनशिप में पट्टी बाँध सिल्वर पर मारा था भाला

इंग्लैंड के बर्मिंघम में इस साल होने वाले कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स (Common wealth Games2022) से पहले भारत को तगड़ा झटका लगा है। ओलंपिक चैंपियन और वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचने वाले नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) कॉमनवेल्थ गेम्स से बाहर हो गए हैं। चोट की वजह से उन्हें टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा है।

इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) के महासचिव राजीव मेहता ने नीरज के कॉमनवेल्थ गेम्स से बाहर होने की पुष्टि की है। मेहता ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, “नीरज चोपड़ा कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में हिस्सा नहीं लेंगे। वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के फाइनल में चोटिल होने के कारण वह फिट नहीं हैं। उन्होंने हमें इस बारे में सूचित कर दिया है।”

कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स (CWG) की शुरुआत 28 जुलाई से बर्मिंघम में होनी है। इस गेम्स के लिए नीरज चोपड़ा को भारत की सबसे बड़ी उम्मीद माना जा रहा था। ऐसे में उनका चोटिल होकर टूर्नामेंट से बाहर होना भारत के लिए बहुत बड़ा झटका है।

दरअसल, नीरज को विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप के फाइनल के दौरान ही चोट लग गई थी। इसका खुलासा उन्होंने खुद किया था। वह जैवलिन थ्रो इवेंट के दौरान जाँघ पर पट्टी बाँधते भी नजर आए थे। इसके बाद उनका एमआरआई स्कैन हुआ था, जिसमें ग्रोइन इंजरी का पता लगा था। उन्हें तीन हफ्ते आराम की सलाह दी गई है। नीरज ने फाइनल के बाद कहा था, “मुझे चौथे थ्रो के बाद थोड़ा दर्द महसूस हुआ था। इसके बाद मैंने बैंडेज बाँधकर अगला थ्रो किया। फिलहाल, इवेंट से लौटा ही हूँ। इसलिए ज्यादा तकलीफ का पता नहीं चल रहा है। जाँच के बाद ही पता लगेगा यह चोट कितनी गंभीर है।”

गौरतलब है कि नीरज चोपड़ा ने वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल हासिल कर इतिहास रचा था। उन्होंने 88.13 मीटर भाला फेंक (बेस्ट ऑफ 6 में से) कर यह मेडल हासिल किया था। वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उनसे पहले किसी भी भारतीय पुरुष ने कोई भी पदक नहीं जीता था। इससे पहले वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत के लिए एकमात्र मेडल अंजू बॉबी जॉर्ज ने 2003 में जीता था। उन्हें लॉन्ग जंप में ब्रॉन्ज मेडल मिला था।

₹16 लाख करोड़ का हुआ अडानी समूह का साम्राज्य, भारत को क्लीन एनर्जी का हब बनाने के लिए ₹5.60 लाख करोड़ लगाएँगे गौतम अडानी

गौतम अडानी ने मंगलवार (26 जुलाई, 2022) को कहा कि अडानी समूह का संयुक्त बाजार पूँजीकरण इस साल 200 अरब डॉलर (₹16 लाख करोड़) तक पहुँच गया है।

शेयरधारकों को संबोधित करते हुए गौतम अडानी ने कहा, “हमने डेटा सेंटर, डिजिटल सुपर ऐप, औद्योगिक क्लाउड, रक्षा, एयरोस्पेस, धातु और सामग्री के क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज की है, ये आत्मानिर्भर भारत के साथ कदम से कदम मिलाकर एक होते हुए किया गया है। इस साल हमारा ग्रुप मार्केट कैपिटलाइजेशन 200 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा गया है। इसलिए, 2022 में, हमने भारत की सीमाओं से परे भी व्यापक विस्तार की नींव रखी।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने आज अडानी एंटरप्राइजेज की एनुअल जनरल मीटिंग में कहा, “भारत आने वाले सालों में क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में सबसे अग्रणी रहने वाला है। अडानी समूह भारत में निवेश करने से कभी भी पीछे नहीं हटा है और यहाँ हम अपना इंवेस्टमेंट बढ़ाते रहेंगे। हमारा आने वाले समय में 70 अरब डॉलर (₹5.60 लाख करोड़) से ज्यादा का खर्च करने का लक्ष्य है।”

अडानी समूह की वार्षिक आम बैठक को संबोधित करते हुए गौतम अडानी ने आज अब तक के कारोबार की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हम पिछले साल देश में सबसे बड़े एयरपोर्ट ऑपरेटर बन गए हैं। अडानी विल्मर के सफल आईपीओ ने कंपनी को देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी बनाने में मदद की है।”

अडानी ने कहा, “समूह ने कुछ सबसे बड़े सड़क अनुबंध प्राप्त किए हैं। साथ ही पोर्ट, लॉजिस्टिक्स, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन, सिटी गैस और पाइप्ड नेचुरल गैस जैसे कारोबार में अपनी पहले से ही पर्याप्त बाजार हिस्सेदारी बढ़ रहा है। और भारत में होल्सिम की संपत्ति के अधिग्रहण के बाद, जिसमें दो सबसे अधिक मान्यता प्राप्त ब्रांड नाम शामिल हैं- एसीसी और अंबुजा सीमेंट्स के साथ अब हम भारत में दूसरे सबसे बड़े सीमेंट निर्माता हैं। यह काम पर हमारे व्यापार मॉडल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।”

अपने सम्बोधन में गौतम अडानी ने आगे कहा, “साल 2015 की तुलना में भारत की रीन्यूएबल एनर्जी की कैपिसिटी 300 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई है। साल 2020-21 की तुलना में पिछले साल रीन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में इंवेस्टमेंट में 125 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है। देश में बिजली की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए जरूरी है कि रीन्यूएबल एनर्जी उत्पादन को और बढ़ाया जाए और इस माँग को पूरा किया जाए।”

गौतम अडानी ने ये भी कहा, “मेरा मानना है कि एक ऐसे देश के रूप में जो ऑयल एंड गैस के क्षेत्र में आयात पर ज्यादा निर्भर रहता है- भारत की पहचान को बदलने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं और इसे ऐसे देश के रूप में सामने लाना चाहते हैं जो एक दिन क्लीन एनर्जी का एक्सपोर्टर बनेगा। जहाँ अडानी ग्रुप का मेजर ग्लोबल रीन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो है, वहीं पिछले 12 महीने या एक साल में हमने कई दूसरी इंडस्ट्रीज में भी असाधारण ग्रोथ दिखाई है।”