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इस्लामी मुल्क क़तर में ईद से पहले 29 कुत्तों की बेरहमी से हत्या, ताबड़तोड़ चलाई गोलियाँ: कुत्तों को ‘अशुद्ध’ मानते हैं कट्टर मुस्लिम

पैगंबर मुहम्मद को लेकर नूपुर शर्मा के कथित बयान के विरोध में सबसे पहले आगे आने वाले अरब देश कतर में 29 कुत्तों की बेरहमी से हत्या किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। घटना 10 जुलाई की बताई जा रही है। बताया जाता है कि 10 जुलाई को कतर के दोहा शहर के पास स्थित एक औद्योगिक परिसर में हथियारबंद लोगों ने ये हत्याएँ की। इस हमले में दो गर्भवती कुतिया समेत तीन अन्य कुत्ते घायल भी हो गए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुत्तों को 4 बदमाशों ने मारा है और कतर की पुलिस ने इनको आईडेंटिफाई भी कर लिया है। आरोपितों ने पहले औद्योगिक परिसर में गार्डों को धमकाया और फिर कुत्तों को राइफलों से गोली मारने चले गए। एक कार्यकर्ता के मुताबिक, मारे गए कुत्तों को लगा कि वो कुछ खाने के लिए देने आए हैं और वो हमलावरों के पास आ गए। लेकिन कुत्तों के पास आते ही हमलावरों ने बेरहमी से फायरिंग कर 29 कुत्तों की हत्या कर दी।

हत्यारों ने कथित तौर पर औद्योगिक परिसर की सुरक्षा में तैनात गार्डों को बताया कि कुत्तों ने उनके एक बेटे को काट लिया था। हालाँकि, इस दावे को खारिज करते हुए एक्टिविस्ट ने जोर देकर कहा, “कैम्पस को ऊँची बाड़ से सील कर दिया गया है और कोई भी बच्चा कुत्तों के पास खेलने के लिए अंदर नहीं घुस सकता।”

एक इंस्टाग्राम पोस्ट में कतर के पशु अधिकार समूह ‘पॉज़ रेस्क्यू कतर’ ने लिखा, “ईद के पहले दिन पुरुषों के एक समूह (उन्हें राक्षस कहते हैं) ने सुरक्षा गार्डों को बंदूकों से धमकाया और सुरक्षित कारखाने की एरिया में घुस गए।” पशु अधिकार समूह ने आगे कहा, सही मायनों में कहें तो दो आदमियों के हाथों में बंदूक थी और इस कारण से सुरक्षा टीम डरी हुई थी। सिक्योरिटी गार्डों ने हमलावरों को सुंदर और न्यूटर्ड कुत्तों के एक समूह को गोली मारने से रोकने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें लगा कि ऐसा करके वो खुद को खतरे में डाल रहे हैं।”

गन कल्चर पर सवाल उठाते हुए ‘पॉज़ रेस्क्यू कतर’ ने कहा,”अगर ये राक्षस लोगों को धमकाकर इन्हें इतनी आसानी से मार सकते हैं, तो सोचिए ये आगे क्या करेंगे। आवारा जानवरों के लिए आगे बढ़िए। बंदूक की किसी भी तरह की हिंसा के खिलाफ खड़े होइए।”

उल्लेखनीय है कि कतर में बड़ी संख्या में मुस्लिम हैं और वे इस्लाम का पालन करते हैं। ये कुत्तों को ‘अशुद्ध‘ मानते हैं। पशु अधिकारों के लिए काम करने वाले एक्टिविस्ट अक्सर कहते रहते हैं कि घरेलू पशुओं की रक्षा के लिए बने कानूनों को खाड़ी देश में लागू नहीं किया जाता है। हाल के दिनों में फ्लेमिंगो सहित कुत्तों और पक्षियों बंदूकधारियों ने बड़े पैमाने पर शिकार किया है। एक कार्यकर्ता ने पूछा, “यहाँ मुद्दा यह है कि लोगों को जानवरों के शिकार के लिए राइफल्स और बंदूकों का उपयोग करने की अनुमति क्यों है। जहाँ तक ​​हम जानते हैं कि किसी भी मामले में सफल अभियोजन नहीं हुआ है।”

पंजाब से नहीं लिया ज्ञान, आपसी खींचतान से छत्तीसगढ़-कर्नाटक कॉन्ग्रेस हलकान: दिल्ली दरबार में पहुँचे CM बघेल, सिंहदेव भी पहुँचे बिगाड़ने खेल

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) और कर्नाटक (Karnataka) में अगले साल यानी 2023 में विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2023) होने हैं। छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस (Congress) सत्ता में है, जबकि कर्नाटक में भाजपा (BJP)। लेकिन, जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आता जा रहा है, इन दोनों राज्यों के कॉन्ग्रेस नेताओं में मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान बढ़ता जा रहा है।

इधर छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस के प्रतिस्पर्धी नेता हाईकमान से मिलने दिल्ली पहुँचे हैं तो उधर कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया (Siddaramaiah) और डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) गुट के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कॉन्ग्रेस की अंदरूनी सेहत कितनी ठीक है यह इन दोनों राज्यों के में राजनीतिक सरगर्मी वाले थर्मामीटर से मापा जा सकता है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) दिल्ली में हाईकमान से मिलने पहुँचे, तो सरकार में उनके सहयोगी मंत्री और प्रदेश की राजनीति में उनके प्रतिस्पर्धी त्रिभुवनेश्वर शरण सिंह देव (TS Singh Deo) भी दिल्ली प्रस्थान कर गए। दोनों आज रविवार (24 जुलाई 2022) को कॉन्ग्रेस हाईकमान से मुलाकात करेंगे।

छत्तीसगढ़ में टीएस सिंह देव और कर्नाटक में डी शिवकुमार कॉन्ग्रेस के संकटमोचक रहे हैं। 2018 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के दौरान टीएस सिंहदेव ने अपने राजनीतिक कौशल का इस्तेमाल करते हुए प्रदेश में कॉन्ग्रेस पर माहौल बनाया था। कॉन्ग्रेस को सत्ता में लाने में उनकी आदिवासी समर्थक छवि भी बहुत काम आई थी। यही नहीं, उन्होंने विधानसभा चुनावों में पार्टी का घोषणा-पत्र भी तैयार किया था।

वहीं, डीके शिवकुमार ने कई बार कॉन्ग्रेस को संकट से उबारा है। जब गुजरात में राज्‍यसभा चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस के विधायक एक-एक कर बीजेपी में शामिल होते जा रहे थे और अहमद पटेल की नैया डूबती नजर आ रही थी, तब डीके शिवकुमार सामने आए थे। उन्होंने कॉन्ग्रेस के बचे 44 विधायकों को बेंगलुरु के पास स्थित अपने ‘ईगलटन’ रिज़ॉर्ट ले गए। इसके बाद अहमद पटेल (Ahmed Patel) चुनाव जीते।

हालाँकि, संकटमोचक को कॉन्ग्रेस में दरकिनार कर कठपुतली को बैठाने की परंपरा रही है। इससे हाईकमान की पूछ और महत्व बना रहता है और राज्य में भी चेक-बैलेंस का खेल होता रहता है। हालाँकि, इस खेल में पंजाब विधानसभा चुनाव जैसे हादसे भी हो जाते हैं और यह बात हाईकमान को भी अच्छी तरह पता है।

छत्तीसगढ़ में टीएस सिंहदेव को स्थानीय लोगों का जबरदस्त समर्थन है, खासकर आदिवासी समुदाय उन्हें मसीहा की तरह मानता है। सिंहदेव ने अपनी ही सरकार द्वारा हसदेव वनों में कोयला खनन को दी गई मंजूरी का विरोध किया था और इसे आदिवासियों के लिए नुकसानदेह बताकर विरोध किया था। सीएम बघेल ने इस पर विशेष ध्यान नहीं दिया, लेकिन राहुल गाँधी ने कैंब्रिज में अपने भाषण के दौरान इस पर असहमति जताई तो बघेल ने इस फैसले को तुरंत वापस ले लिया।

इसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों के घर बनाने के लिए फंड आवंटित नहीं करने पर टीएस सिंहदेव ने राज्य के पंचायती मंत्री से इस्तीफा दे दिया था। उनके समर्थकों का कहना है कि 2018 में यह सहमति बनी थी कि राज्य में आधी अवधि के लिए टीएस सिंहदेव मुख्यमंत्री बनेंगे, लेकिन बघेल इससे पीछे हट रहे हैं। बघेल और सिंहदेव के बीच जारी खटास अपने चरम पर दिख रहा है, जिसका असर आने वाला चुनाव में भी दिखेगा।

उधर कर्नाटक में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के समर्थक अभी से ही राग अलापना शुरू कर दिया कि प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री सिद्धरमैया होने चाहिए। वहीं, प्रदेश के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने कहा कि सभी को किसी व्यक्ति की पूजा करने के बजाय पार्टी को सत्ता में लाने के लिए काम करना चाहिए। इसके बाद प्रदेश में वाकयुद्ध शुरू हो गया है।

अभी बहुत दिन नहीं बीते जब पंजाब में भी ऐसी ही स्थिति देखने के मिली थी। तब के कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और भाजपा छोड़कर कॉन्ग्रेस में शामिल होने वाले नवजोत सिंह सिद्धू के बीच तकरार चरम पर पहुँच गया था। मुख्यमंत्री बनने की चाहत में सिद्धू की चरणजीत सिंह चन्नी के साथ भी टकराव की स्थिति आ गई और परिणाम यह हुआ कि पंजाब कॉन्ग्रेस के हाथ निकल गया।

छत्तीसगढ़ और कर्नाटक के जो हालात दिख रहे हैं, वह पंजाब से बहुत अलग नहीं हैं। अगर कॉन्ग्रेस हाईकमान समय रहते इन गुटबाजियों को खत्म नहीं कर पाई तो कर्नाटक पहले से ही हाथ से निकला हुआ है, छत्तीसगढ़ में भी सत्ता से दूर होना पड़ सकता है, क्योंकि दोनों ही राज्यों में असंतुष्ट नेता कद्दावर और मजबूत पकड़ वाले हैं।

जब आसमान में थमने लगीं साँसें, तेलंगाना की राज्यपाल ने दिया नया जीवन: पेशे से डॉक्टर हैं तमिलिसाई सुंदरराजन, मरीज ने कहा – माँ की तरह मदद की

तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन ने अपने और रुतबे को किनारे रखकर एक डॉक्टर के तौर पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर एक आईपीएस अधिकारी की जान बचाई। दरअसल, दिल्ली से हैदराबाद के लिए उड़ान भर चुकी इंडिगो एयरलाइंस में मौजूद तेलंगाना के सड़क सुरक्षा विभाग के डीजीपी कृपानंद त्रिपाठी उजेला की अचानक तबीयत खराब हो गई। इसके बाद फ्लाइट में इकलौती डॉक्टर राज्यपाल सुंदरराजन ने उनको अटेंड किया और उनकी जान बचाई।

कृपानंद त्रिपाठी आंध्र प्रदेश कैडर के 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्हीं की जान गवर्नर ने बचाई है। इसके बारे में गवर्नर तमिलिसाई सुंदरराजन बताती हैं, “जब फ्लाइट बीच हवा में थी, तब एयर होस्टेस की ओर से पैनिक कॉल आई..क्या इस फ्लाइट में कोई डॉक्टर है? एक यात्री को काफी पसीना आ रहा था, मदद की पुकार सुनकर उसे देखने के लिए गई क्या अपच के लक्षण हैं?”

हैदराबाद पहुँचने के बाद आईपीएस अधिकारी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनके कई सारे टेस्ट किए गए और पता चला कि उन्हें डेंगू हो गया है। जाँच के दौरान पता चला कि डेंगू के कारण आईपीएस अधिकारी की प्लेटलेट्स काउंट गिरकर मात्र 14000 रह गई थी।

शनिवार (23 जुलाई, 2022) को उन्होंने कहा, “मैडम गवर्नर ने मेरी जान बचाई। उन्होंने एक माँ की तरह मेरी मदद की। अन्यथा, मैं अस्पताल भी नहीं पहुँच पाता।” उन्होंने आगे बताया, “जब मैडम गवर्नर ने मेरी हार्टबीट को मापा था, उस दौरान वो केवल 39 थी। उन्होंने मुझे आगे झुकने की सलाह दी और मुझे आराम करने में मदद की, जिससे मेरी साँसें स्थिर हुईं।”

उजेला कहते हैं, “अगर मैडम गवर्नर उस फ्लाइट में नहीं होतीं तो शायद मैं नहीं बच पाता। उन्होंने मुझे एक नया जीवन दिया।” उल्लेखनीय है कि आंध्र प्रदेश कैडर से ताल्लुक रखने वाले उजेला फिलहाल अतिरिक्त डीजीपी (सड़क सुरक्षा) के पद पर तैनात हैं।

गवर्नर बनने पर खड़ा हो गया था विवाद

साल 2019 में केंद्र सरकार ने पेशे से डॉक्टर तमिलिसाई सुंदरराजन को तेलंगाना का गवर्नर बनाया था। उस दौरान राज्य की सत्तारुढ़ पार्टी के मुखिया और सीएम के चंद्र शेखर राव के पीआरओ ने एक लेख लिखकर सुंदरराजन की नियुक्ति पर सवाल उठाया था। उन्होंने अपने लेख में लिखा था, “कैसे लिखूँ कि वो अपने पद का दुरुपयोग करेंगी।” पीआरओ वनम चंद्रशेखर राव ने गवर्नर की नियुक्ति को केंद्र के लिए ‘पॉलिटिकल रिहैबिलिटेशन’ करार दिया था।

टॉप उतरवाने के बाद बोला, ब्रा भी खोलो… मशहूर मॉडल ने बताया फैशन इंडस्ट्री का काला सच

इंटरनेशनल मॉडल केट मॉस (Kate Moss) ने फैशन इंडस्ट्री के स्याह पक्ष को उजागर किया है। बीबीसी रेडियो के डेजर्ट आइलैंड डिस्क्स (Desert Island Discs) प्रोग्राम को दिए एक इंटरव्यू में केट मॉस ने बताया कि कैसे उनका ब्रा उतारने और टॉपलेस देखने के लिए दबाव बनाया गया था। केट मॉस जब मात्र 15 साल की थीं, तो फैशन इंडस्ट्री में उन्हें यह सब झेलना पड़ा था।

अब 48 साल की हो चुकीं केट मॉस (Kate Moss) ने 1988 में लंदन की स्टॉर्म मॉडेलिंग एजेंसी से अपने करियर की शुरुआत की थी। तब उम्र थी सिर्फ 14 साल। 15 साल की उम्र में ब्रा कैटलॉग के लिए एक असाइनमेंट साइन किया। फोटोग्राफर (जो एक मर्द था) ने इसके फोटोशूट के समय क्या बोला, केट मॉस के ही शब्दों में पढ़िए:

“मैं शायद केवल 15 साल की थी। उसने (फोटोग्राफर) कहा कि अपना टॉप उतारो और मैंने अपना टॉप उतार दिया। तब मैं अपने शरीर को लेकर बहुत शर्मीली थी। इसके बाद उसने कहा कि अपनी ब्रा उतारो… मुझे लगा कि कुछ गड़बड़ है, मैंने अपना सामान उठाया और भाग गई।”

एक बहुत फेमस महिला फोटोग्राफर कॉरिन डे (Corinne Day) के साथ भी केट मॉस ने लंबा काम किया। इनके साथ काम के कारण केट मॉस को बहुत प्रसिद्धि मिली… लेकिन कीमत चुकाने के बाद। कीमत थी मानसिक प्रताड़ना, भीतर ही भीतर टूटते रहना। दिवंगत फोटोग्राफर कॉरिन डे के साथ हुए फोटोशूट को याद करते हुए केट मॉस (Kate Moss) ने बताया:

“नंगी होने के बारे में सोच कर मैं बहुत असहज थी। मैं अपना टॉप नहीं उतारना चाहती थी। शूटिंग के दौरान बहुत रोई भी थी। लेकिन उसने (फोटोग्राफर कॉरिन डे, बहुत अच्छी दोस्त भी) स्पष्ट कह दिया कि यदि मैं अपना टॉप नहीं उतारूँगी तो वो मुझे एले (Elle) नहीं ले जाएगी। यह दर्दनाक था क्योंकि वह मेरी सबसे अच्छी दोस्त थी और मैं वास्तव में उससे प्यार करती थी। लेकिन उसकी तस्वीरें अद्भुत आईं। उसे (फोटोग्राफर) वह मिला, जो वह चाहती थी, लेकिन मैंने उसके लिए दुख उठाया। हालाँकि अंत में उन्होंने मेरा करियर बदल दिया।”

केट मॉस मार्क वैलबर्ग के साथ (फोटो साभार: Vogue)

1992 में केट मॉस को कैल्विन क्लेन (Calvin Klein) के अंडरवियर कैंपेन का असाइनमेंट मिला। इस फोटोशूट में इनके साथ हॉलीवुड एक्टर मार्क वैलबर्ग (Mark Wahlberg) भी थे। 17 साल की केट मॉस के लिए यह उनके करियर का अब तक का सबसे बड़ा असाइनमेंट था। कीमत लेकिन इसके बदले भी चुकानी पड़ी। इस फोटोशूट में इन्हें पुरुष मॉडल के साथ नंगा होना था। चिंता और बेचैनी से बचने के लिए केट मॉस (Kate Moss) शूटिंग के समय वैलियम दवा लेती थीं।

कैल्विन क्लेन के विज्ञापन के लिए केट और मार्क

इंटरव्यू में केट मॉस ने बताया कि कैल्विन क्लेन के पूरे फोटोशूट के दौरान वो आपत्तिजनक महसूस करती थीं। कमजोर और डरी रहती थीं। उन्हें (केल्विन को) मेरा छोटा होना, मासूम होना, डरी-सहमी होना पसंद था।

15वीं शताब्दी के संत का कीर्तन, तेलुगू गायिका का वीडियो: जानें नाराज़ अनुयायियों ने क्यों पुलिस में की शिकायत, वीडियो हटा कर माँगनी पड़ी माफ़ी

तेलुगू गायिका श्रवण भार्गवी ने संत अन्नाम्या के भक्ति गाने पर एक वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डाला, जिसके बाद वो मुसीबत में फँस गई हैं। 15वीं शताब्दी के ये संत भगवान वेंकटेश्वर के भक्त थे, जिन्होंने ‘ओकापरी कोकापरी’ नामक ये गाना लिखा था। श्रवण भार्गवी ने जो वीडियो शेयर किया, उसमें वो खुद दिखाई देती हैं और बैकग्राउंड में ये गाना बज रहा होता है। संत के अनुयायियों ने इसे ‘अश्लील’ और ‘कामुक’ करार दिया।

इस वीडियो में श्रवण भार्गवी पुस्तकें पढ़ते हुए और कुछ-कुछ खाते हुए दिख रही हैं। जहाँ उनके फैंस का कहना है कि ये वीडियो सौंदर्यबोध के लिए बनाया गया है, अन्नाम्या के अनुयायी इससे इत्तिफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि ये एक भक्ति कविता है, एक कीर्तन है, जिसका श्रवण भार्गवी ने अपमान किया है। विरोध के बाद तेलुगू गायिका ने तुरंत इस वीडियो को अपने सभी सोशल मीडिया हैंडल्स से हटा लिया है।

उन्होंने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से माफ़ी माँगते हुए लिखा, “मेरा चैनल सब्सक्राइबर्स के लिए हमेशा ख़ुशी, मनोरंजन और शांति लेकर आया है। मैं कभी नहीं चाहती कि इसे अनचाहे विवादों के लिए जाना जाए। मेरे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नकारात्मकता के लिए कोई जगह नहीं है। इसे कभी आगे नहीं बढ़ाया गया। मैं इसे इसी तरह रखना चाहती हूँ।” श्रवण भार्गवी के विरुद्ध पुलिस में शिकायत भी दायर हो चुकी है।

तिरुपति में ये शिकायत दायर की गई है और लोगों का कहना है कि वो कभी तेलुगू गायिका को तिरुमला मंदिर में कदम नहीं रखने देंगे। हालाँकि, वीडियो को वापस लेने के बाद शिकायत को भी वापस ले लिया गया है। पहले श्रवण भार्गवी ने वीडियो का ये कह कर बचाव किया कि इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि दृष्टिकोण ही सब कुछ है। उन्होंने खुद को एक हिन्दू, एक ब्राह्मण महिला बताते हुए पहला कहा था कि वीडियो नहीं हटाएँगी।

ओलंपिक में जिस पाकिस्तानी ने ‘छेड़ा’ था नीरज चोपड़ा का भाला , उससे ‘वर्ल्ड एथलेटिक्स’ में फिर आमना-सामना: जानें क्या बात हुई

टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड जीतने के बाद नीरज चोपड़ा ने वर्ल्ड एथलेटिक्स में भी अपना जलवा कायम रखा। चैंपियनशिप में पदक लाने वाले पहले भारतीय पुरूष बनने के बाद मीडिया में हर जगह दोबारा उनकी चर्चा है। ऐसे में इस मुकाबले से जुड़ी एक दिलचस्प जानकारी भी सामने आई है जिसके तार आपको ओलंपिक में हुए एक वाकये की याद दिला देंगे। 

आपको याद होगा कि टोक्यो ओलंपिक के दौरान नीरज चोपड़ा के स्वर्ण जीतने के बाद एक पाकिस्तानी एथलीट चर्चा में आया था। नाम था- अरशद नदीम। अरशद को लेकर कहा गया था कि वह नीरज की थ्रो से पहले उनके जैवलीन को छेड़ रहे थे। हालाँकि जब नीरज ने इस दृश्य को देखा तो उन्होंने अपना भाला माँगा और फिर अपनी थ्रो की।

उन्हीं अरशद नदीम की मुलाकात नीरज चोपड़ा से इस दफा भी हुई। वर्ल्ड चैंपियनशिप में जहाँ भारत के नीरज चोपड़ा 88.13 मीटर दूर भाला फेंक  सिल्वर लाए, वहीं पाकिस्तान के अरशद नदीम को 86.16 मीटर के साथ पाँचवी रैंक हासिल हुई।

नीरज ने अरशद से क्या कहा?

दोनों एथलीट के बीच नतीजे आने के बाद आपस में बात भी हुई। नीरज ने मीडिया से इस बातचीत के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मैच के दौरान तो उन्हें ज्यादा समय नहीं मिला। लेकिन इवेंट खत्म होने के बाद उन्होंने नदीम से मुलाकात की और उनके तगड़े पर्फॉर्मेंस के लिए उनकी सराहना की।

नीरज ने कहा, “मैंने अरशद से बात की। उन्हें कहा कि वो बहुत अच्छा खेले। उन्होंने जवाब दिया कि उनकी कोहनी में कुछ समस्या हैं। फिर भी मैंने उन्हें उनकी शानदार थ्रो के लिए सराहा और कहा कि चोट के बावजूद उन्होंने बेहतरीन वापसी की। उन्होंने 86 मीटर से ज्यादा जैवलीन फेंकी।”

नीरज ने जैवलीन की छेड़छाड़ पर क्या कहा था?

बता दें कि अरशद नदीम और नीरज चोपड़ा एक दूसरे को काफी समय से जानते हैं। साल 2018 के एशियन गेम्स में जब नीरज ने भारत को स्वर्ण दिलाया था तब अरशद ने भी अपने मुल्क को कास्य पदक जिताया था। हालाँकि पिछले साल नदीम के ऊपर अचानक नीरज की जैवलीन से छेड़छाड़ के आरोप लगने लगे। लेकिन तब नीरज ने सामने आकर साफ किया कि जिस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं वो गलत हैं। एक खिलाड़ी का इस तरह दूसरे की जैवलीन देखना कोई बड़ी बात नहीं हैं।

नीरज ने कहा था, 

एक मुद्दा उठ रहा है, जो अभी मैंने एक इंटरव्यू में कहा कि जो जैवलिन है, वो पहली थ्रो करने से पहले अरशद नदीम जो पाकिस्तानी जैवलिन थ्रोअर है, उससे जैवलिन ली… तो उसका काफी बड़ा मुद्दा बना दिया है, जोकि एक बहुत ही सिंपल सी बात है कि हम जो हमारी पर्सनल जैवलिन होती है, वो हम उसको उसमें रखते हैं, जिसे सभी थ्रोअर उसे यूज कर सकते हैं। ये रूल है। इसमें ऐसा बिल्कुल कुछ भी गलत नहीं है कि वो जैवलिन लेके प्रिरेअर कर रहा था अपनी थ्रो के लिए और मैंने अपनी थ्रो के लिए उसको माँगा।

निर्भया के गुप्तांग में घुसेड़ दी रॉड, नाम तक नहीं जानते आप; बिहार के 8 साल के ‘सीरियल किलर’ का नाम-पता सब जाहिर: आखिर क्यों?

बिहार का वह बच्चा आज जहाँ भी होगा, उसकी उम्र 24 साल होगी। मीडिया ने आठ साल की उम्र में की गई उसकी हत्याओं की फाइल खोलते हुए बताया है कि उसका नाम क्या है। वह बिहार के किस जिले के किस गाँव में पैदा हुआ। किस बाल सुधार गृह में बंद था। उसकी बचपन की तस्वीर भी छापी है। उसे दुनिया का सबसे कम उम्र का सीरियल किलर बताया है।

वैसे अपराध में नाबालिगों की संलिप्तता का यह इकलौता मामला नहीं है। नाबालिगों द्वारा हत्या और रेप जैसे जघन्य अपराध अंजाम देने के मामले आए दिन सामने आते ही रहते हैं। ऐसा ही एक जघन्य अपराध 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में हुआ था। इसे निर्भया गैंगरेप के नाम से हम जानते हैं। इसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। इस मामले में भी जिसने सबसे ज्यादा हैवानियत दिखाई थी, वह नाबालिग था। वह आज कहाँ है किसी को पता नहीं। वह कौन था, कहाँ पैदा हुआ, बचपन में कैसा दिखता था… कुछ भी दुनिया को पता नहीं। बिहार के जिस बच्चे के बारे में मीडिया ने जानकारी सार्वजनिक की है, अपराध के समय वह केवल आठ साल का था। इसके उलट निर्भया गैंगरेप में शामिल नाबालिग की उम्र 17 साल 6 महीने थी। यानी वयस्क होने में सिर्फ 6 महीने कम।

बिहार का वह बच्चा क्यों सबसे छोटा सीरियल किलर

मीडिया रिपोर्टों पर यकीन करें तो 1998 में एक गरीब परिवार में पैदा हुए इस बच्चे ने आठ साल की उम्र में तीन हत्या की। तीनों हत्या एक साल के भीतर 2006 से 2007 के बीच की। सबसे पहले अपने चाचा की छह साल की बेटी को मारा। उसके बाद अपनी ही आठ महीने की बहन को मारा। फिर पड़ोस की छह महीने की बच्ची को मौत के घाट उतार दिया। कथित तौर पर इस बच्ची को उसने ईंट मारकर कूच दिया था। रिपोर्ट बताती हैं कि पुलिस ने जब इस बच्चे को हिरासत में लिया था तो उसके चेहरे पर कोई अफसोस नहीं था। वह मुस्कुरा भी रहा था। उसे कानून के हिसाब से 18 साल की उम्र तक बिहार के बाल सुधार गृह में रखा गया। आज उसके ठिकाने के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई जानकरी उपलब्ध नहीं है।

निर्भया से दरिंदगी करने वाला नाबालिग

कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि वह उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। 11 साल की उम्र में घर से भाग दिल्ली आ गया। उसने ही आवाज देकर उस बस में निर्भया को बुलाया, जिसमें उसके साथ हैवनियत हुई। उसने ही छेड़छाड़ शुरू की। साथियों को रेप के लिए उकसाया। निर्भया के गुप्तांग में रोड घुसेड़ दी। इससे फैले इंफेक्शन की वजह से उसकी मौत हो गई। बाल सुधार गृह में 3 साल बिताने के बाद उसे 20 दिसंबर 2015 को रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद उसे दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने 10 हजार रुपए और सिलाई मशीन दी थी। आज वह कहाँ है, क्या कर रहा है, इसके बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं है।

आखिर क्यों

आठ साल का एक सीरियल किलर बचपन में कैसा दिखता था, यह आज दुनिया को पता है। उसके गाँव और असली नाम के बारे में भी पता है। लेकिन 17 साल 6 महीने के एक दरिंदे के बारे में दुनिया को कुछ नहीं पता। आखिर क्यों? क्या इसके पीछे वही सोच जिम्मेदार है जो समुदाय विशेष के अपराधियों की पहचान छिपाने के लिए उन्हें तांत्रिक बताती है। मौलवी-मुल्ले का गुनाह नजर न आए इसलिए मंदिर और पुजारी का स्केच लगाती है। सनद रहे निर्भया केस के नाबालिग दोषी के मामले में भी कॉन्ग्रेस और AAP पर गैर जिम्मेदाराना रवैया दिखाने का आरोप लगा था। कहा गया था कि इसकी वजह से ही उसकी रिहाई संभव हो पाई थी।

वीर सावरकर का अपमान लेकिन बांग्लादेशी मौलाना ‘भारत का स्वतंत्रता सेनानी’: AAP ने लगाया पोस्टर, केजरीवाल भी घेरे में

वीर सावरकर का अपमान करने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) अब बांग्लादेशी मौलाना महमूद हसन को भारत का स्वतंत्रता सेनानी बताते हुए दिल्ली में पोस्टर्स लगा रही है। बता दें कि 75वें स्वतंत्रता दिवस से पहले जब राष्ट्र ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मना रहा है, ऐसे में देश भर में भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के पोस्टर्स लगाए गए हैं। लेकिन, AAP को बांग्लादेश के मौलाना से प्यार है और वो उसे भारत का स्वतंत्रता सेनानी बताने को आतुर है।

दरअसल, AAP कई महीने पहले दिल्ली के जामिया नगर में आयोजित ‘फ्रीडम फाइटर फाउंटेन’ में चाहती थी कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के संस्थापक मौलाना महमूद हसन देवबंदी के पोस्टर भी लगाए जाएँ। लेकिन, उसने जो पोस्टर लगाया वो देवबंदी का नहीं, बल्कि मौलाना महमूद हसन का था, जो बांग्लादेशी है। वो भी उसकी तस्वीर महात्मा गाँधी, मौलाना अबुल कलम आज़ाद, भगत सिंह, सुखदेव और अशफ़ाक़ुल्लाह खान जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के साथ लगाई गई।

सबसे बड़ी बात तो ये है कि पिछले कई महीनों से ये बोर्ड वहीं पर पड़ा हुआ है और उसमें अब तक कोई सुधार नहीं किया गया है। इस सम्बन्ध में दिल्ली सरकार या AAP की तरफ से कोई प्रतिक्रिया भी नहीं आई है। सैयद इरफ़ान हबीब नामक इतिहासकार ने भी इसकी पुष्टि की है कि वो तस्वीर महमूद हसन देवबंदी की नहीं है। सन् 1851 में उत्तर प्रदेश के बरेली में जन्मे ज़ुल्फ़िकार अली देवबंदी के बेटे महमूद हसन के तस्वीर को AAP नहीं पहचानती।

ज़ुल्फ़िकार अली देवबंदी दारुल उलूम देवबंद के संस्थापक थे और बरेली कॉलेज में प्रोफेसर हुआ करते थे। उनके बेटे महमूद हसन देवबंदी को ‘खिलफर कमिटी’ ने ‘शेख अल-हिन्द’, अर्थात ‘भारत का नेता’ सम्मान से नवाजा था। मुहम्मद अली जौहर और हाकिम अजमल खान के साथ मिल कर उन्होंने जामिया की स्थापना की। वहीं जुलाई 1950 में बांग्लादेश के मयमनसिंह स्थित चरखारिचा में जन्मा महमूद हसन गुलशन सेन्ट्रल आज़ाद मस्जिद का का खब्तीब है।

हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वीर विनायक दामोदर सावरकर का अपमान किया था और खुद को भगत सिंह का अनुसरण करने वाला बताया था। उन्होंने खुद को ‘भगत सिंह की औलाद’ और भाजपा पर निशाना साधते हुए ‘सावरकर की औलाद’ कहा था। दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर लगे आरोपों पर बौखला कर उन्होंने ये बातें कही थीं। ये मामला आबकारी नीति में भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है।

देश विरोधी गतिविधियों के लिए एमनेस्टी ने भारत भेजे ₹51 करोड़: पंजाब चुनावों में 1984 दंगे का प्रचार भी शामिल, कश्मीर पर भी प्रोपगेंडा

केंद्रीय जाँच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पाया है कि एमनेस्टी वर्ल्डवाइड यूके (Amnesty Worldwide UK) ने भारत में देशविरोधी गतिविधियों को हवा देने के लिए भारत की सहयोगी संस्था एमनेस्टी इंडिया को 51 करोड़ रुपए अवैध तरीके से भेजे थे।

यह पैसा ‘कश्मीर: एंट्री टू जस्टिस’ और ‘जस्टिस फॉर 1984 सिख ब्लडबाथ’ जैसे प्रोपेगेंडा को हवा देने के लिए भेजा गया था। इसके साथ ही इस रकम को अवैध तरीके से कंपनी को निर्यात के नाम पर भेजा गया था। ED ने इसकी जानकारी दिल्ली की एक विशेष अदालत को दी।

ED का कहना है कि मानवाधिकार रिपोर्ट तैयार करने और कुछ अन्य सेवाओं नाम पर एमनेस्टी इंटरनेशनल यूके से AIIPL को 36 करोड़ रुपए दिए, जिसमें 10 करोड़ रुपए FDI के जरिए निवेश भी शामिल है। इस तरह व्यवसायिक गतिविधियों के नाम पर FCRA कानून का उल्लंघन कर एनजीओ की गतिविधियों को संचालित किया गया।

ED ने कहा कि इन कार्यों के माध्यम से AIIPL को मीडिया के जरिए लोगों में उकसाना, आरटीआई के माध्यम से जनता की लामबंदी, राजनीतिक मामलों पर तनाव पैदा करने के लिए कैडर की मदद और मीडिया के माध्यम से प्रचार अभियान चलाकर जनता में आक्रोश उत्पन्न करने की कल्पना की गई थी।

इंडियन एक्स्प्रेस के मुताबिक, इसमें यह भी तय किया गया था कि 2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान 1984 का सिख नरसंहार प्रमुख मुद्दा रहे। इसके अलावा कश्मीर मुद्दे पर कुछ ऐसे ही रिपोर्ट की बात ED ने कोर्ट को बताई।

इस मामले में ED ने 9 जुलाई को एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (AIIPL), इंडियंस फॉर एमनेस्टी वर्ल्डवाइड बिलीफ (IAIT) और AIIPL के पूर्व सीईओ जी अनंतपद्मनाभन और आकार पटेल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की आरोप पत्र दायर किया था।

ED ने अपनी चार्जशीट में कहा कि एमनेस्टी वर्ल्डवाइड ने भारत में अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए 1999 में एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया फाउंडेशन ट्रस्ट (AIIFT) स्थापित की थी। साल 2011-12 में जब ओवरसीज कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) लागू हुआ तो इसे केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय फंड प्राप्त करने के लिए अनुमति दी थी, लेकिन इसके बारे में हकीकत पता लगते ही इसे तुरंत रद्द कर दिया गया था।

ED ने यह भी बताया कि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने साल 2012 में NGO के तौर पर IAIT को स्थापना किया। इसके बाद साल 2013 में एक लाभकारी इकाई यानी कंपनी के तौर पर AIIPL की स्थापना की। AIIPL को सोशल सेक्टर रिसर्च कंसल्टेंसी एंड सपोर्ट सर्विस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के तौर पर जाना जाता है।

IAIT का काम भारत में मानवाधिकार रिपोर्ट तैयार करना था, जबकि AIIPL सेवा देकर निर्यात के जरिए लाभ कमाती थी। सबसे बड़ी बात है कि दोनों कंपनियों का ऑफिस एक ही इमारत में अगल-बगल था और दोनों एमनेस्टी यूके द्वारा संचालित होती थीं। बाद में IAIT ने AIIPL में 98.9 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद ली।

बता देें कि ED ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के प्रावधानों के उल्लंघन को लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (AIIPL) पर 51.72 रुपए और उसके पूर्व CEO आकार पटेल पर 10 करोड़ का जुर्माना लगाया था।

ईडी को जानकारी मिली थी कि एमनेस्टी इंटरनेशनल, यूके विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRN) से बचने के लिए FDI के रास्ते अपनी भारतीय संस्थाओं (गैर-एफसीआरए कंपनियों) को बड़ी मात्रा में विदेशी फंड भेज रहा था। इस बात की जैसे ही जाँच एजेंसी को पता चली, उसने एमनेस्टी पर निगाह रखनी शुरू कर दी।

इस नंगई से डरना नहीं है, इसको मारते रहिए भाला… ठीक वैसे ही जैसे लक्ष्य भेदते हैं नीरज चोपड़ा

नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने रविवार (24 जुलाई 2022) को देश को गौरव का एक और क्षण दिया। वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप (World Athletics Championships) में उन्होंने जैवलिन थ्रो का सिल्वर पदक देश के लिए जीता। इसके बाद से वे ट्रेंड कर रहे हैं।

नीरज के छाने से पहले सोशल मीडिया में तमिल एक्टर विष्णु विशाल ने अपनी कुछ नंग-धड़ंग तस्वीरें शेयर की थी, जो कथित तौर पर उनकी पत्नी ज्वाला गुट्टा ने खींची है। दिमाग पर थोड़ा सा जोर डालेंगे तो याद आएगा कि ज्वाला भी एक खिलाड़ी रही हैं और बैडमिंटन की कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में देश का प्रतिनिधित्व किया है।

दरअसल, विष्णु जिस नंगई से देश को परिचित कराना चाह रहे थे, कुछ दिनों पहले उसका सार्वजनिक प्रदर्शन कर बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह इंटरनेट पर छा गए थे। विष्णु हो या रणवीर ये उस दुनिया से आते हैं, जो हमारे ही पैसों से तिजोरी भर हिंदू घृणा का प्रसार करती है। हमारे नायकों, बिंबों को छोटा कर कथित सेकुलर प्रतिमान गढ़ती है ताकि हम खुद को भारतीय, हिंदू कहने पर हीन महसूस करे। हमारे युवा कलाकारों को ठिकाने लगाती है। भारत में इस्लामी आतंकवाद का जहर खोलने वाले पाकिस्तान के कलाकारों को हम पर थोपती है। जय श्रीराम को उन्माद का नारा बताती है…

जब कुकर्मों की वजह से इनकी फिल्मों का बायकॉट शुरू हुआ तो ये सीधे दबंगई पर उतर आए हैं। कहते हैं कि नंगे से नारायण भी डरते हैं। इसलिए इन्होंने सोचा होगा कि भक्तों की क्या औकात। लेकिन, ये शायद भूल गए कि इन्हीं भक्तों के दबाव ने इनके छिद्र-छिद्र इस तरह से खोले हैं कि अब वे उस स्तर पर पहुँच गए हैं, जहाँ अपना बचाव करने के लिए वे यह कहने को मजबूर हैं कि उन्हें हजारों की भीड़ के सामने भी नंगा होने में शर्म नहीं आएगी। वह दिन दूर नहीं जब इस दबाव के कारण ये सार्वजानिक रूप से एक-दूसरे को ही नोंचते दिखेंगे।

आखिर यह दबाव का ही असर है कि त्रिपुण्ड-शिखा वाला गुंडा दिखाने वाली ‘शमशेरा’ दर्शकों को तरस गई है। कपिल देव, मिताली राज, झूलन गोस्वामी से स्नेह करने वाला यह देश उनकी बॉयोपिक को नकार देता है, क्योंकि पर्दे पर उनके किरदार रचने वालों का मुखौटा उतर चुका है। ‘स्पेशल स्क्रीनिंग देखते हुए आमिर खान रो पड़े’ जैसी सहानुभूति पैदा करने वाली प्लान्ड स्टोरी के बावजूद देश ‘लाल सिंह चड्ढा’ को फ्लॉप कराने की प्रतीक्षा बेसब्री से करता नजर आ रहा है… संदेश साफ है कि देश को अब लूटेरों को महिमामंडित करने वालों में रूचि नहीं है। उनमें अब युवाओं को अपना रोल मॉडल नहीं दिखता जो हिंदुओं के पैसे से खजाना भर उन्हें ही नीचा दिखाते हैं।

नीरज चोपड़ा वाले भारत को रणवीर सिंह की जरूरत नहीं। हिंदू और भारत घृणा से ग्रसित भांडो पर लगातार प्रहार करते रहना जरूरी है। चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हो, इनकी बैंड बजती रहनी चाहिए। जब वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में नीरज अपना भाला लेकर दौड़ रहे थे तो हवा उनके साथ नहीं थी। तीसरे राउंड तक आते-आते पदक जीतने की उनकी उम्मीद धुँधली हो चुकी थी। लेकिन चौथे राउंड में वह करिश्मा हुआ, जिसने देश को गर्व का क्षण दिया।

इस नंगई के चिथड़े भी लगातार प्रहार से ही होंगे। ‘माय लाइफ, माय च्वाइस’ की थोथी दलीलों से इस सार्वजनिक नंगई का बचाव नहीं किया जा सकता। हमारे समय, प्रेम, पैसे से बनकर वे हमें ही दबंगई नहीं दिखा सकते। इनकी रस्सी जल चुकी है, बल भी जाएगा ही।