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बाबरी का काम देख तीस्ता को मिला था गुजरात दंगों के बाद ‘कॉन्ट्रैक्ट’, अहमद पटेल ने कहा था – फंड नहीं रुकेगा: पूर्व करीबी का खुलासा

गुजरात दंगों के बाद मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए रची गई साजिश मामले में तीस्ता सीतलवाड़ की भूमिका पर उनके पूर्व सहयोगी रईस खान पठान ने बड़ा बयान दिया है। पठान ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि जब पटेल ने तीस्ता को रुपए दिए थे उस समय वह उसी जगह मौजूद थे। उनके सामने ही यह 30 लाख रुपए की लेन-देन हुई थी।

एएनआई से बातचीच में उन्होंने कहा,

“जो बात सामने आ रही 30 लाख रुपयों की वो बिलकुल दंगों के शुरुआती दिनों की बात है। तीस्ता बहुत पहले से अहमद पटेल को जानती थीं। लेकिन जब दंगे हुए उसके कुछ दिन बाद की मुलाकात जो है वो शाही बाग के सर्किट हाउस में हुई थी। वहाँ उनके साथ मैं भी गया था।”

रईस ने बताया कि उस मुलाकात में पटेल ने तीस्ता को कहा था- “आपको मैं अच्छे से जानता हूँ, आपके कामों से मैं अच्छे से वाकिफ हूँ, आपने बाबरी मस्जिद-राम मंदिर पर जो भूमिका निभाई है उससे भी मैं बखूबी वाकिफ हूँ। लेकिन अभी हम सत्ता में नहीं हैं।

पठान के अनुसार, अहमद पटेल से तीस्ता की लंबी बातचीत के बाद सीतलवाड़ ने कहा कि उनके पास फंड नहीं हैं और फंड की कमी हुई तो वह लोग काम नहीं कर पाएँगे क्योंकि गुजरात में जो कुछ हुआ है वो बहुत बड़ा है।

पठान के मुताबिक अहमद पटेल ने सीतलवाड़ की बात सुनने के बाद कहा,

“आप अपने काम को जारी रखिए। काम को आगे बढ़ाइए। रहा फंड का सवाल तो आप बेफिक्र हो जाइए क्योंकि फंड आपको मिल जाएगा। हमारी पार्टी तो आपको जितना हो सकेगा फंड देगी लेकिन साथ में आपको देश विदेश की एजेंसियों से भी फंड आएँगे। इसके बाद सीतलवाड़ ने कहा कि जब आप आश्वासन दे रहे हैं तो ठीक है आप जैसा चाहेंगे हम वैसा काम करेंगे”

रईस पठान इस खुलासे के साथ बताते हैं कि पहली फंडिंग 5 लाख रुपए की सर्किट हाउस में हुई थी और अगली मुलाकात में 25 लाख रुपए तीस्ता को अहमद पटेल द्वारा दिए गए थे।

भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस

बता दें कि गुजरात दंगों में मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए तीस्ता सीतलवाड़ की जो भूमिका एसआईटी जाँच में उभर कर आई है, उसके बाद बीजेपी नेता संबित पात्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि एसआईटी का हलफनामा कहता है कि गुजरात दंगों के दौरान तीस्ता सीतलवाड़ और उनके सहयोगी मानवता के नाम पर काम नहीं कर रहे थे बल्कि उनके दो मकसद थे। पहला गुजरात की तत्कालीन सरकार को अस्थिर करना। दूसरा बेगुनाह लोगों को दोषी बताना।

पात्रा ने कहा कि नरेंद्र मोदी को अपमानित करने के लिए अहमद पटेल सिर्फ एक नाम थे। षड्यंत्र तो असली सोनिया गाँधी ने रचा था। इतना ही नहीं भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि गुजरात की और नरेंद्र मोदी को छवि धूमिल करने के लिए सोनिया गाँधी ने तीस्ता को पद्मश्री से सम्मानित भी किया। एसआईटी का हलफनामा ये भी कहता है कि गुजरात दंगों को लेकर तीस्ता ने राज्यसभा सीट माँगी थी।

राजस्थान के छोटे से गाँव से लेकर उप-राष्ट्रपति तक, ऐसा रहा है जगदीप धनखड़ का सफर: बंगाल हिंसा के बाद CM ममता से भिड़े, रहे हैं केंद्रीय मंत्री भी

मोदी सरकार हमेशा अपने फैसलों से चौंकाती रही है। राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू को अपना उम्मीदवार बनाने के बाद बीजेपी ने अब उप-राष्ट्रपति पद के लिए पश्चिम बंगाल के गवर्नर जगदीप धनखड़ को अपना उम्मीदवार बनाया है। दिल्ली में संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उनके नाम का ऐलान किया।

कौन हैं जगदीप धनखड़

बीजेपी के जाट नेता जगदीप धनखड़ मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं। उनका जन्म झुंझुनू जिले के किठाना गाँव में 1951 में साधारण से किसान परिवार में हुआ था। राजस्थान यूनिवर्सिटी से लॉ करने के बाद उनका सेलेक्शन आईआईटी, एनडीए और आईएएस के लिए भी हुआ था। हालाँकि, उन्होंने इन सभी को ठोकर मारकर वकालत करना शुरू किया। धनखड़ राजस्थान बार काउंसिल के अध्यक्ष भी रहे।

इसके बाद वे जनता दल से जुड़ गए। वर्ष 1989 में वो झुंझुनू से चुनकर सासंद बने। यहीं नहीं, 1989 से 1991 तक वीपी सिंह और चंद्रशेखर की सरकार में वो केंद्रीय मंत्री के पद पर भी रहे। 1991 में जनता दल ने उनका टिकट काट दिया तो वो कॉन्ग्रेस में चले गए। 1993 में अजमेर के किशनगढ़ से चुनाव लड़कर वो विधायक बने। हालाँकि, 1003 में अचानक से उन्हें कॉन्ग्रेस से नफरत सी होने लगी और वो फिर से बीजेपी में शामिल हो गए।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों में से एक धनखड़ को राजस्थान में जाट आरक्षण दिलवाने के लिए जाना जाता है। धनखड़ को 30 जुलाई साल 2019 में पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।

वो पश्चिम बंगाल के मौजूदा राज्यपाल हैं। राज्य में पिछले साल चुनाव बाद हुई हिंसा के विरोध में धनखड़ ने कई बार सीएम ममता बनर्जी की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने राज्य में हिंसा के लिए सीधे तौर पर ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने स्पष्ट कहा था, “मैं चुप रहने वाला गवर्नर नहीं हूँ।”

AltNews सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को झटका, यूपी की अदालत ने ख़ारिज की जमानत याचिका: 20 जुलाई को पुलिस रिमांड पर सुनवाई

उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी स्थित मोहम्मदी की सेशन कोर्ट ने 2021 के एक ट्वीट के मामले में ऑल्ट न्यूज के को फाउंडर सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को बड़ा झटका देते हुए उसकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। जुबैर के वकील हरजीत सिंह ने पुष्टि की है कि उसकी पुलिस रिमांड पर 20 जुलाई को अदालत सुनवाई करेगी।

कोर्ट में मामले की सुनवाई एसीजेएम रुचि श्रीवास्तव ने की। दरअसल, पिछले साल 18 सितंबर 2021 को जुबेर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसी मामले में लखीमपुर खीरी कोर्ट ने जुबैर को तलब किया था।

जुबैर के खिलाफ शिकायत दर्ज होने के बाद 18 सितंबर, 2021 को उनके खिलाफ दर्ज एक मामले में लखीमपुर खीरी अदालत ने उन्हें तलब किया था। इससे पहले सोमवार को ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोप में पिछले साल उनके खिलाफ दर्ज एक मामले में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। सोमवार को ही लखीमपुर खीरी पुलिस ने भी एक स्थानीय अदालत में एक आवेदन दायर कर उससे पूछताछ करने के लिए 14 दिनों की पुलिस कस्टडी की माँग की थी।

इस मामले में मोहम्मदी थाना प्रभारी अंबर सिंह ने कहा था कि जुबैर के खिलाफ पिछले साल 25 नवंबर को एक निजी न्यूज चैनल के रिपोर्टर आशीष कटियार ने मामला दर्ज कराया था।

उन्होंने कहा, “अपनी शिकायत में कटियार ने जुबैर पर अपने चैनल के बारे में ट्वीट कर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया था।”

दिल्ली की अदालत ने दी थी जमानत

गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार (15 जुलाई ) को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जुबैर को आपत्तिजनक ट्वीट ‘हनुमान होटल’ के मामले में जमानत दे दी थी। अदालत ने जुबैर को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके एवं इतने ही रुपए मूल्य के जमानती के आधार पर बेल मंजूर की थी।

दिल्ली पुलिस ने बीते माह 27 जून को मोहम्मद जुबैर को दुश्मनी को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने, सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक अशांति फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने जुबैर के खिलाफ आईपीसी की धारा 153/295 के तहत केस दर्ज किया था।

हनुमान मंदिर के हवन कुंड में फेंका मवेशी का कटा हुआ सिर, भीड़ ने प्रतिमा भी तोड़ी: कन्नौज में हिंसा और आगजनी

कन्नौज के तालग्राम स्थित एक हनुमान मंदिर में हवन कुंड में एक मवेशी के कटा हुआ सिर फेंके जाने के बाद हिंसा भड़क गई। ये घटना शनिवार (16 जुलाई, 2022) को तालग्राम थाना क्षेत्र स्थित रसूलाबाद गाँव में हुई। सुबह मंदिर की साफ़-सफाई व पूजा-अर्चना करने पहुँचे बुजुर्ग पुजारी ने हवन कुंड के पास मवेशी का कटा हुआ सिर पड़ा देखा तो भौंचक रह गए। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने तुरंत इसे वहाँ से हटाया।

इसके बाद छानबीन शुरू कर दी गई। हिन्दू संगठनों में भी इस घटना को लेकर आक्रोश है। उन्होंने सड़क पर बैठ कर प्रदर्शन किया। आसपास की दुकानें भी बंद हो गईं। सुबह से जिले में तनाव की स्थिति रही, जिसके बाद आईजी रेन्ज प्रशांत कुमार खुद मौके पर पहुँचे। उन्होंने जानकारी दी कि अब स्थिति नियंत्रण में है। पुजारी जगदीश चंद्र ने बताया कि ये मंदिर उन्होंने ही बनवाया है। मौके पर बड़ी संख्या में हिन्दू भी जुटे। पुलिस ने कहा कि दुकानों में आग लगाए जाने और तोड़फोड़ की जाँच चल रही है।

इसके बाद कुछ अराजक तत्वों द्वारा मंदिर की प्रतिमा क्षतिग्रस्त किए जाने की भी खबर आई। कुछ लोगों का आरोप था कि मांस की दुकानों को जला दिया गया। मवेशी का कटा हुए सिर फेंके जाने की घटना रात में हुई थी। पुलिस ने अपनी मौजूदगी में मंदिर की साफ़-सफाई करवाई। फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई, जिसके बाद आग बुझाने का कार्य शुरू किया गया। दोपहर के बाद हालात बेकाबू होने शुरू हुए और हिंसा भड़कने लगी।

हालाँकि, SDM और CO के आश्वासन के बाद हिन्दू संगठनों ने सड़क जाम को स्थगित कर दिया। जगदीश जाटव ने अपने खेत में ही ये मंदिर बनवा रखा है, जो उनके घर से आधा किलोमीटर की दूरी पर है। हवन कुंड के आसपास मांस के अन्य टुकड़े भी थे। प्रदर्शन स्थल से लगभग 1 किलोमीटर की दूसरी पर स्थित मजार के बाहर कुछ दुकानों में आग लगाई गई। इसके बाद मंदिर में भीड़ ने घुस कर तोड़फोड़ की। DM-SP खुद मौके पर हैं और तालग्राम को बंद कर के पुलिस गश्त की जा रही है।

हज यात्रियों की आरती, पैगंबर का गुणगान: कश्मीरी हिंदुओं से स्वागत करवाकर लहालोट हुए मुस्लिम, Video देख कहा- यही हैं हमारे असली पंडित

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में शेख-उल-आलम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से आज (16 जुलाई 2022) एक वीडियो वायरल हो रही है। इस वीडियो में सऊदी से लौटे हज यात्रियों के पहले जत्थे का स्वागत कश्मीरी हिंदुओं द्वारा किया जा रहा है।

देख सकते है कि कैसे वह लोग हज यात्रियों की आरती करते हैं और उसके बाद पैगंबर का गुणगान करते हैं। दावा किया जा रहा है कि हिंदुओं द्वारा गुनगुनाए जाने वाले गाने में पैगंबर से आशीर्वाद माँगा जा रहा है। फिर हज से वापसी आए लोगों को फूल देकर, गले लगाकर उन्हें घर के लिए विदा किया जा रहा है।

पीडीपी नेता मोहित भान ने वीडियो शेयर करके लिखा, “हमारे कश्मीरी पंडित हज से लौटे यात्रियों का श्रीनगर में नात गाकर स्वागत कर रहे हैं और पैगंबर से आशीर्वाद माँग रहे हैं। ये हमारी समन्वित संस्कृति है कि इस्लाम को मानने वाले अमरनाथ को समर्थन करते हैं और शैव एकता के संदेशवाहक हैं।”

सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से शेयर हो रही है। केंद्र शासित प्रदेश के कुछ मुस्लिम इसे देख फूले नहीं समा रहे। उन्हें खुशी है कि हिंदुओं ने उनके लिए नात गाया। एक गुफ्तार अहमद ने कहा,

“एक अलग अंदाज में कश्मीरी पंडितों ने हज यात्रियों के पहले जत्थे का स्वागत श्रीनगर में किया। यही लोग असली कश्मीरी पंडिंत हैं जो दशकों से कश्मीर में रह रहे हैं। विवेक अग्निहोत्री, अनुपम खेर जैसे पाखंडी ये देखने के बाद गहरी पीड़ा में चले जाएँगे।”

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ इस वीडियो को देख कुछ लोग खुश हो रहे है, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे भी लोग हैं जो सवाल उठा रहे हैं कि क्या ऐसा ही स्वागत तीर्थ से लौटे तीर्थयात्रियों का भी होता है। एक यूजर कहता है, “वैष्णो देवी के दर्शन करके आने वालों के स्वागत में फूल बिछाता भी कोई मिल जाता तो ठीक होता।”

अतुल शर्मा लिखते हैं, “हाँ भाई हम भाई चारा निभाते रहें और तुम हम हिंदुओं को चारा समझ काटते रहो। बगल में ही अमरनाथ और वैष्णो देवी की यात्रा होती है वहाँ पर बम फोड़कर कौन सा भाईचारा निभाया जाता है।”

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ होंगे NDA की तरफ से उप-राष्ट्रपति उम्मीदवार, BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा का ऐलान

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ऐलान किया है कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ राजग की तरफ से उप-राष्ट्रपति के उम्मीदवार हैं। उन्होंने इसका ऐलान करते हुए कहा, “भाजपा और NDA उपराष्ट्रपति पद के लिए प्रत्याशी किसान पुत्र श्री जगदीप धनखड़ जी को घोषित करती है। श्री जगदीप धनखड़ जी पश्चिम बंगाल के अभी राज्यपाल हैं और लगभग तीन दशक तक सार्वजनिक जीवन में काम किया है।” वोटों के गणित के हिसाब से उनकी जीत सुरक्षित मानी जा रही है।

जेपी नड्डा ने जगदीप धनखड़ को ‘किसान पुत्र’ बताते हुए जिक्र किया कि उनका सार्वजनिक जीवन 30 वर्षों का है। 18 मई, 1951 को जन्मे 71 वर्षीय जगदीप धनखड़ को जुलाई 2019 में पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया था। उनका जन्म राजस्थान के एक छोटे से गाँव किठाना में हुआ था, जो झुंझुनू जिले के के चैरवा तहसील में स्थित है। चित्तौरगढ़ स्थित सैनिक स्कूल से अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने जयपुर स्थित ‘यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान’ से स्नातक किया।

वो 1989 में झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से ‘जनता दल’ के टिकट पर सांस चुने गए थे। इससे पहले वो अजमेर के किशनगढ़ विधानसभा क्षेत्र से 1993-98 में विधायक भी रहे हैं। पेशे से अधिवक्ता जगदीप धनखड़ ‘राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन’ के अध्यक्ष पद को भी सुशोभित कर चुके हैं। 1990-91 में जगदीप धनखड़ केंद्रीय मंत्री भी रहे थे। IIT, NDA और IAS के लिए चुने जाने के बावजूद उन्होंने वकालत को अपना पेशा चुना।

न सिर्फ जाट समुदाय को आरक्षण दिलाने में उनकी बड़ी भूमिका है, बल्कि मारवाड़ी समाज में भी उनका अच्छा-खासा प्रभाव माना जाता है। बीच में जगदीप धनखड़ ने कॉन्ग्रेस का दामन भी थामा था। अजमेर से लोकसभा का चुनाव हारने के बाद उन्होंने भाजपा का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट के भी वो जाने-माने वकील रह चुके हैं। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC सरकार के फैसलों के लिए कई बार उन्हें आड़े हाथों लिया और ये टकराव मीडिया की सुर्खियाँ बनता रहा।

राष्ट्रपति चुनाव में यशवंत सिन्हा को मिला AAP का साथ, 60% से ज्यादा समर्थन द्रौपदी मुर्मू के पास: अंबेडकर के पोते ने दी सलाह- ‘रेस से हट जाओ’

आम आदमी पार्टी (AAP) ने शनिवार (16 जुलाई 2022) को ऐलान किया कि वो आगामी राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) का समर्थन करेगी। 18 जुलाई को राष्ट्रपति के लिए चुनाव होना है। AAP सासंद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने कहा, “द्रौपदी मुर्मू का सम्मान करते हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी यशवंत सिन्हा का समर्थन करेगी।”

रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने ये फैसला महत्वपूर्ण राजनीतिक मामलों की समिति (PAC) की बैठक के बाद लिया। बैठक में आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, पंजाब के सांसद राघव चड्ढा, विधायक आतिशी और PAC के अन्य सदस्य शामिल थे। आम आदमी पार्टी के अलावा तेलंगाना के TRS ने भी सिन्हा को समर्थन देने का ऐलान किया है।

गौरतलब है कि आप का यह फैसला एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मुर्मू के बढ़ते समर्थन के बीच आया है। शिवसेना द्वारा मुर्मू को समर्थन देने की घोषणा के मद्देनजर सिन्हा ने शनिवार को होने वाला अपना मुंबई दौरा रद्द कर दिया। BJD, YSR-CP, BSP, अन्नाद्रमुक, TDP, JDS, शिरोमणि अकाली दल (SAD) और शिवसेना जैसे कुछ क्षेत्रीय दलों का समर्थन मिलने के बाद मुर्मू का वोट शेयर पहले ही 60 प्रतिशत को पार कर चुका है। उनके नामांकन के समय यह लगभग 50 प्रतिशत था।

राष्ट्रपति से अपना नाम वापस लें यशवंत सिन्हा

इस बीच महाराष्ट्र की क्षेत्रीय पार्टी वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बीआर अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर (Prakash Ambedkar) ने यशवंत सिन्हा से राष्ट्रपति पद की दौड़ से हटने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में वोट देने के लिए पार्टियों के कई अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्य शामिल हो रहे हैं।

वहीं एकनाथ शिंदे गुट के प्रवक्ता दीपक केसरकर (Deepak Kesarkar) ने प्रकाश अंबेडकर के इस बयान का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि द्रौपदी मुर्मू एक बड़ी उम्मीदवार हैं और हर कोई उनके समर्थन में है।

माँ काली के बाद अब पूरे अहोम समाज का अपमान, TMC सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ FIR: यौन शोषण का अर्थ बताया था ‘गोगोई’

तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मित्रा के खिलाफ असम में लोगों की भावना आहत करने के मामले में एफआईआर दर्ज हुई है। ये शिकायत जातीय संग्रामी सेना ने सिवसागर जिले में शुक्रवार (15 जुलाई 2022) को कराई है। इसमें माँग की गई है कि ‘यौन शोषण’ शब्द का पर्याय ‘गोगोई’ बताने के लिए महुआ मोइत्रा माफी माँगें।

शिकायतकर्ता प्रणब चेतिया ने कहा, “यह पाया गया है कि मोइत्रा की ट्विटर टिप्पणी में जानबूझकर गोगोई शब्द की जगह शारीरिक शोषण जोड़ा गया। ये असम के एक स्थापित जातीय समुदाय को बदनाम करने और उसे नीचा दिखाने का एक स्पष्ट इरादे को दिखाता है। FIR में संगठन ने अहोम समुदाय की पवित्रता, अखंडता और सम्मान की रक्षा करने और मोहुआ मोइत्रा को सजा दिलाने की माँग की है।

बता दें कि बीते दिनों काली माँ का अपमान करने वाली महुआ मोइत्रा ने हाल में अपने अकॉउंट से एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने कहा था, “असंसदीय शब्दों को रिप्लेस करने पर मेरी पहली नई ट्विटर सीरिज। अब प्रतिबंधित शब्द शारीरिक शोषण (सेक्सुअल हैरेसमेंट) की जगह मिस्टर गोगोई का उपयोग होगा।”

उल्लेखनीय है कि असम में अहोम समुदाय द्वारा गोगोई उपनाम का इस्तेमाल बेहद आम बात है। यही वजह है कि जब महुआ ने अपने ट्विटर पर टिप्पणी की तो राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म समीक्षक उत्पल बोरपुरारी ने खुलेतौर पर उनकी आलोचना की। साथ ही सलाह दी कि वो गोगोई लिखने की बजाय जिस व्यक्ति को निशाना बना रही हैं उसका नाम लिखें। उत्पल ने लिखा, “ये मिस्टर गोगोई कौन हैं? अगर आपने दिमाग में कोई एक नाम है तो उसे बोलें। वरना ने सारे गोगोई लोगों का अपमान होगा।”

अपने ट्वीट पर होती आलोचना को देख मोइत्रा ने सफाई में एक ट्वीट लिखा और बताया, “ये सिर्फ उन संघियों के ट्वीट के लिए है जो कह रहे हैं कि मैंने सभी गोगोई को निशाना बनाया है। मैं स्पष्ट कर दूँ कि यह शब्द मैंने राज्यसभा के माननीय सांसद मिस्टर रंजन गोगोई के लिए प्रयोग किया है।”

लुलु मॉल के बाद अब चारबाग रेलवे स्टेशन पर पढ़ी गई नमाज, परिसर में अवैध मस्जिद और दरगाह की भी शिकायत: सामने आया वीडियो

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लुलु मॉल के बाद अब रेलवे स्टेशन पर नमाज़ पढ़ने का वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो के चारबाग स्टेशन का होने का दावा किया जा रहा है। रेलवे पुलिस ने इस वीडियो का संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी है। हिन्दू महासभा ने स्टेशन पर हुई नमाज़ के विरोध में पुलिस को शिकायत सौंपी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हिन्दू महासभा की शिकायत में उत्तर प्रदेश में सार्वजानिक स्थलों पर नमाज़ पर प्रतिबंध होने के बाद भी स्टेशन पर नमाज़ होने पर आपत्ति जताई गई है। शिकायत हिन्दू महासभा के पदाधिकारी शिशिर चतुर्वेदी ने दर्ज करवाई है। उनके मुताबिक नमाज़ प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर पढ़ी गई है। शिकायतकर्ता ने स्टेशन परिसर में बनी एक मजार और एक मस्जिद को अवैध बताते हुए उस पर भी कार्रवाई की माँग की है।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक स्टेशन पर नमाज़ शाम 7 बजे पढ़ी गई। शिशिर चतुर्वेदी की शिकायत पर चारबाग रेलवे पुलिस के DSP प्रथम ने बताया, “शिकायत की जाँच करवाई जा रही है। जाँच के बाद जो भी तथ्य प्रकाश में आएँगे उन पर नियमानुसार एक्शन लिया जाएगा। इस नमाज़ का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। SP GRP ने भी इस वीडियो पर जाँच करवा कर कार्रवाई की बात कही है।

22 सेकेण्ड के इस वीडियो में नमाज़ी ने गुलाबी रंग का कुर्ता पायजामा पहन रखा है और सिर पर नमाज़ी टोपी लगा रखी है। उसने एक जगह दीवाल के बगल में चटाई बिछा रखी है जहाँ रेलवे के एनाउंसमेंट की आवाज साफ़ सुनाई दे रही है। दीवाल पर ‘एक तू ही सच्चा, तेरा नाम सच्चा’ लिखा हुआ है। यह वीडियो बगल से गुजर रहे एक व्यक्ति ने बनाई है।

गौरतलब है कि इस से पहले लखनऊ में ही लू लू मॉल के अंदर नमाज़ पढ़ने का वीडियो वायरल होने के बाद हिन्दू संगठनों ने मॉल के आगे विरोध प्रदर्शन किया है। जहाँ अज्ञात नमाज़ियों के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की है वहीं विरोध दर्ज करवाते कई हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया है।

‘आम आदमी कैसे भरेगा वकीलों की ₹10-15 लाख की फी?’: बोले केंद्रीय कानून मंत्री – 3.5 लाख कैदी बिना अपराध साबित हुए जेल में

केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने शनिवार (16 जुलाई 2022) को अदालतों में केवल अंग्रेजी भाषा का ही इस्तेमाल किए जाने पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि निचली अदालतों और हाई कोर्ट में हिन्दू और क्षेत्रीय भाषाओं को प्रमुखता दी जानी चाहिए। अदालत की भाषा अगर आम होगी तो हम कई तरह की समस्याओं का निराकरण कर सकते हैं। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री कहा कि संसद के अगले सत्र में 71 अलग-अलग कानूनों को खत्म किया जाएगा।

किरेन रिजिजू ने यह बात राजस्थान के जयपुर में रही 18वीं अखिल भारतीय कानूनी सेवा प्राधिकरण की बैठक को संबोधित करते हुए कही। इसके साथ ही कानून मंत्री ने देश के टॉप वकीलों द्वारा एक केस के 10-15 लाख रुपए की फीस लिए जाने पर चिंता जाहिर की और कहा कि इससे गरीबों और हाशिए के लोगों के लिए न्याय पहुँच से बाहर हो गया।

उन्होंने आगे कहा, “संसाधनवान लोग बड़े वकीलों का खर्च उठा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट में ऐसे वकील हैं जिनकी फीस आम आदमी नहीं उठा सकता। अगर वे प्रति सुनवाई के लिए 10-15 लाख रुपए लेते हैं, तो एक आम आदमी कैसे भुगतान कर सकता है?” मंत्री ने ये भी स्पष्ट किया कि 18 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में अप्रचलित 71 कानूनों को निरस्त कर दिया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने सभी राज्यों की कानूनी एजेंसियों से इस साल 15 अगस्त,2022 तक अंडर ट्रायल कैदियों की रिहाई के लिए प्रयास करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में 3.5 लाख कैदी विचाराधीन हैं। हर जिले में जिला मजिस्ट्रेट के तहत एक रिव्यू कमिटी है। हम सभी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से प्रोएक्टिव काम करने का अनुरोध करते हैं। वे कर रहे हैं। उनसे और प्रो एक्टिव काम की अपील करते हैं ताकि जिला जज उनसे प्रभावित हों।