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‘और करेगा पोस्ट…’ : नुपूर शर्मा का समर्थन करने पर मुकेश तिवारी पर सुलेमान ने किया जानलेवा हमला, घर बुलाकर लाठी-डंडे से पीटा

मध्य प्रदेश के रीवा में नुपुर शर्मा के समर्थक पर जानलेवा हमले की घटना प्रकाश में आई है। खबर के अनुसार, बैकुंठपुर थाना क्षेत्र में रहने वाले मुकेश तिवारी के ऊपर उनके ही दोस्त के भाई सुलेमान ने हमला किया। तिवारी की गलती इतनी थी कि वो सोशल मीडिया पर हिंदूवादी पोस्ट करते थे और नुपूर के समर्थन वाले पोस्ट पर कमेंट करते थे। इसके अलावा उनका भाई भी आरएसएस से जुड़ा हुआ था।

एक निजी फाइनेंस कंपनी में काम करने वाले मुकेश तिवारी बताते हैं कि वह हर रोज की तरह शनिवार को घर से ऑफिस जाने के लिए निकले। लेकिन तभी उनके दोस्त के भाई मोहम्मद सुलेमान ने उन्हें कॉल करके कहा कि उसे कोई जरूरी बात करनी है। जब वह बताई हुई जगह पर गए तो वहाँ सुलेमान ने उन्हें लाठी-डंडे से पीटना शुरू कर दिया।

तिवारी ने कहा कि वह सुलेमान को जानते थे इसलिए उसके बुलाने पर उसके घर गए। सुलेमान ने पहले कुर्सी पर बैठाया और बाद में डंडे से मारना शुरू कर दिया। मारते-मारते उनसे बार-बार गाली-गलौच हुई। साथ ही पूछा गया कि क्या वो दोबारा ऐसे पोस्ट करेंगे।

मुकेश के साथ हुई मारपीट के कारण उन्हें घायल अवस्था में एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। पुलिस एफआईआर दर्ज करके मामले की जाँच में जुटी है। पुलिस को बताया गया कि शनिवार को जब मुकेश घर से ऑफिस जाने के लिए बैकुंठपुर पहुँचे, उसके बाद ही उन्हें सुलेमान का फोन आया और ये सब घटना घटी।

मुकेश के भाई आशीष ने भी मीडिया को बताया कि वह आरएसएस के सक्रिय कार्यकर्ता हैं और धर्म समर्थित पोस्ट अक्सर सोशल मीडिया पर करते रहते हैं। हाल ही में उन्होंने भी नुपूर शर्मा का समर्थन किया था, जिसके बाद उनके भाई पर हमला हुआ। मुकेश से उनका बैग, पैसा और मोबाइल तक छीन लिए गए।

बता दें कि इससे पहले नूपुर शर्मा का समर्थन करने के कारण बजरंग दल के एक नेता पर जानलेवा हमले का मामला मध्य प्रदेश से ही सामने आया था। घटना आगर-मालवा जिले की थी। आगर के उज्जैन रोड पर 20 जुलाई 2022 को 26 साल के आयुष को घेरकर धारदार हथियारों से हमला किया गया था, जिसके बाद उनको गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। पुलिस ने इस मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया था।

बिहार-नेपाल सीमा पर यूरेनियम मिलने से हड़कंप, परमाणु बम बनाने में होता है इस्तेमाल: राज्य में आतंक के 3 मॉड्यूल, साजिश का इंटरनेशनल लिंक

बिहार पुलिस ने नेपाल से लाई जा रही यूरेनियम की खेप पकड़ी है, जिसके बाद आतंकियों की बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। बता दें कि यूरेनियम से ही परमाणु बम भी बनता है। अररिया जिले से सटी नेपाल सीमा के पास 2 किलोग्राम यूरेनियम बरामद किया गया। इसके साथ ही 15 तस्करों को भी गिरफ्तार किया गया है। विस्फोटक के निर्माण में इस यूरेनियम का इस्तेमाल किया जाना था। बता दें कि ये एक रेडियोएक्टिव पदार्थ है, जिसका इस्तेमाल परमाणु बम बनाने में भी होता है।

अरररिया जिले की जोगबनी सीमा से इसे भारत में लाया जा रहा था। इस घटना के सामने आने के बाद देश की सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ सीमा पर तैनात SSB के जवानों को भी अलर्ट पर रखा गया है। भारत-नेपाल सीमा पर सख्ती बढ़ा दी गई है। हालाँकि, ये इस तरह का पहला मामला नहीं है। जून 2021 में झारखंड में लाया जा रहा 7 किलो यूरेनियम पकड़ा गया था। नेपाल पुलिस ने विराटनगर के अलग-अलग इलाकों में छपेमारी कर 2 किलोग्राम यूरेनियम जब्त किया।

इसी दौरान 15 तस्कर भी दबोचे गए। मोरंग के एसपी शांतिराज कोइराला ने बताया कि ये तस्कर नेपाल की राजधानी काठमांडू से यूरेनियम लेकर चले थे। इसकी कीमत करोड़ों रुपयों में आँकी जा रही है। फ़िलहाल ये जाँच का विषय है कि इसका स्रोत क्या है और इसे कहाँ ले जाया जा रहा था। एक किलो यूरेनियम से 24 मेगावाट ऊर्जा वाला बम का निर्माण किया जा सकता है। ये भी जानने वाली बात है कि अगस्त 1945 में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागाशाकी पर पर गिराए गए परमाणु बम के लिए 64 किलो यूरेनियम का इस्तेमाल किया गया था।

ऐसे में 2 किलो यूरेनियम का मिलना भी अपने-आप में एक बड़ी बात है। इसके गलत हाथों में पड़ने का रिस्क सरकारें नहीं ले सकतीं, भले ही यूरेनियम से परमाणु बम बनाने की तकनीक आतंकी संगठनों और सभी देशों के पास नहीं हों। जून 2021 में बोकारो से यूरेनियम बरामद हुआ था। NIA ने इस सम्बन्ध में स्थानीय पुलिस को सूचना दी थी। अंतरराष्ट्रीय तस्करों के इसमें रोल सामने आए थे। अब बिहार में बरामदगी हुई है।

बिहार में PFI आतंकियों की गिरफ़्तारी और भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की सशस्त्र साजिश के बाद स्थिति तनाव में है। बिहार में 3 गिरोह इसके लिए एक साथ काम कर रहे हैं। फुलवारीशरीफ का टेरर मॉड्यूल इनमें से ही एक है, सिमी के पुराने सदस्यों की मदद से भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की साजिश का जिम्मा अतहर परवेज को सौंपा गया था। डिबेट और सेमिनारों के जरिए मदरसों में कट्टरपंथियों को खोज कर उनकी भर्ती की जाती थी।

सिमी का काम जिहाद के लिए फ़ौज तैयार करना था। अतहर परवेज और जलालुद्दीन की गिरफ़्तारी के पास 26 आतंकियों पर FIR दर्ज की गई। वहीं ‘गजवा-ए-हिन्द’ संगठन ISI के लिए नेटवर्क तैयार कर रहा था। 2023 में बड़ी तबाही मचा कर देश को कमजोर करना इसका लक्ष्य था। STF आदर फुलवारीशरीफ से गिरफ्तार मरगूब अहमद के पाकिस्तानी कनेक्शन का खुलासा भी हुआ। वहीं जमात-ए-मुजाहिद्दीन देश में आतंकी हमलों की फिराक में था। पूर्वी चंपारण के ढाका स्थित एक मदरसे से मौलवी सहित 3 गिरफ्तार किए गए।

बिहार को 4 जोन में बाँट कर सारी साजिश रची जा रही थी। पटना से नेपाल का कनेक्शन तैयार करने के लिए 6 जिलों की एक कड़ी बनाई गई थी। इनके 15 से अधिक प्रशिक्षण शिविर हैं। अतहर परवेज ने बताया है कि वो कैसे पूर्व में सिमी का सक्रिय सदस्य था। सिमी की स्थापना 1977 में अलीगढ़ में हुई थी। नेपाल में ‘मुस्लिम वर्ल्ड लीग’ और ‘द आर्गेनाईजेशन वर्ल्ड असेम्ब्ली ऑफ मुस्लिम यूथ’ से इन आतंकियों को सहयोग मिल रहा है। नेपाल की सीमा खुली है, ऐसे में इन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं होती। नूपुर शर्मा के बहाने इन्हें मुद्दा भी मिल गया था।

मुस्लिमों को सेकंड क्लास बना दिया, सावरकर की विचारधारा पर चल रहे PM मोदी: भड़का ओवैसी का गुस्सा, कहा – अखिलेश-शिवपाल धोखेबाज

संसद का मानसून सत्र चल रहा है। ऐसे में राजनीतिक पार्टियाँ एक-दूसरे को घेरने में लगी हैं। इसी क्रम में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार को मुस्लिम विरोधी साबित करने की कोशिश की है। उन्होंने भारत सरकार पर मुस्लिमों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुस्लिमों को सेकंड क्लास सिटिजन बना दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मामला है स्ट्रीट वेंडरों को दिए जाने वाले लोन का। असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि एक आरटीआई के जरिए जानकारी मिली है कि भारत सरकार के स्वनिधि योजना के अंतर्गत रेहड़ी और पटरी पर दुकान लगाने वालों को भी लोन दिया जा रहा है। ऐसे ही 32 लाख लोगों को सरकार की ओर से लोन दिए गए हैं। जबकि, लोन पाने वालों में मुस्लिम समुदाय के केवल 331 लोगों को ही लोन मिला है। ओवैसी ने केंद्र सरकार के सबका साथ सबका विश्वास के दावे पर सवाल खड़ा किया और इसे मात्र दिखावा करार दिया।

ओवैसी ने ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा, “सरकारी आँकड़ों ने मोदी के ‘सबका साथ सबका विकास’ के झूठ की पोल खोल दी। ख्वांचा-फरोशों को दिए गए 32 लाख से अधिक कर्जों में से सिर्फ 331 ही अल्पसंख्यकों को मिले। यानि कि मात्र 0.0102%! बावजूद इसके कि असंगठित क्षेत्र में बड़ी संख्या में मुस्लिम अल्पसंख्यक काम करते हैं। मोदी, सावरकर-गोवलकर की सोच को नाफ़िज़ कर रहे हैं और मुसलमानों को दूसरे दर्जे का शहरी बना रहे हैं।”

राजभर और अखिलेश यादव धोखेबाज

इसके साथ ही ओवैसी ने ओम प्रकाश राजभर और अखिलेश यादव की पार्टी के बीच हुए अलगाव को लेकर कहा कि ये लोग धोखेबाज हैं। पहले मुझे गाली दे रहे थे और अब खुद लड़ रहे हैं। इन्होंने मुस्लिमों को धोखा दिया है। मैं जानता था कि ये लोग बीजेपी को नहीं हरा पाएँगे।

TikTok पर तलाक की बात कर रही थी पाकिस्तानी महिला, शौहर रहील अहमद ने मार दी गोली

अमेरिका के शिकागो में सानिया खान नामक पाकिस्तानी महिला को उसके पूर्व शौहर रहील अहमद ने मार डाला, क्योंकि वो सोशल मीडिया में तलाक के बारे में बातें कर रही थीं। 29 वर्षीय पत्नी की हत्या के बाद 36 वर्षीय व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली। उसने अपनी बीवी की हत्या के लिए जॉर्जिया के अल्फारेट्टा से शिकागो की यात्रा की। साइना के अब्बा हैदर फारूक खान ने फेसबुक के माध्यम से अपनी बेटी की हत्या की पुष्टि की।

वो उनकी सबसे बड़ी बेटी थी। चट्टानूगा इस्लामी सेंटर में मृतका को दफनाया गया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वो उसे अपनी दुआओं में याद रखें। ऑहियो स्ट्रीट में दोनों पति-पत्नी की लाशें मिलीं और उनके शरीर पर गोलियों के निशान थे। महिला को जहाँ मौके पर ही मृत घोषित कर दिया, पति को अस्पताल में मृत घोषित किया गया। दोनों का निकाह एक साल भी नहीं चल सका था, क्योंकि महिला ने तलाक के लिए अर्जी डाल दी थी।

महिला ने एक वीडियो में बताया था कि एक दक्षिण भारतीय महिला के लिए तलाक कभी-कभी ऐसा लगता है जैसे आप ज़िन्दगी में विफल हो गए हों। उसने कहा था कि समाज अच्छा व्यवहार नहीं करता, आपको इमोशनल सपोर्ट नहीं मिलता और कभी-कभी ‘लोग क्या कहेंगे’ वाली सोच सामने आ जाती है। उसने कहा था कि महिलाओं के लिए शादी से बाहर निकलना काफी कठिन है। बता दें कि पाकिस्तान समाज में ‘ऑनर किलिंग’ आम है।

सानिया खान अक्सर TikTok के माध्यम से अपने तलाक के अनुभव को साझा करती थीं, जो उनके शौहर को रास नहीं आया। सानिया खान पेशे से फोटोग्राफर थीं। सानिया का कहना था कि उसकी ज़िन्दगी तभी शुरू हुई, जब उसने पहली बार DSLR कैमरा खरीदा। पिछले जून में अपने शौहर के साथ वो शिकागो आई थी। वो बतौर फ्लाइट अटेंडेंट काम करती थी। सानिया खान अपने अपने पति के खिलाफ अदालती आदेश चाहती थी।

फिलीपींस की बड़ी यूनिवर्सिटी में ताबड़तोड़ चली गोलयिाँ: 3 की मौत, 2 घायल, संदिग्ध हमलावर की Video आई सामने

अमेरिका, ब्रिटेन के बाद अब फिलीपींस में भी खुलेआम लोगों पर गोलीबारी का मामला सामने आया है। घटना फिलीपींस के एक नामी यूनिवर्सिटी की है। गोलीबारी में 3 लोगों के मारे जाने की खबर है जबकि 2 लोग घायल बताए जा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, फिलीपींस की राजधानी मनीला के क्यूजेन शहर में स्थित एटेनियो डी मनीला यूनिवर्सिटी में एक अज्ञात ने गोलीबारी की। सीएनएन फिलीपींस टेलीविजन चैनल को क्यूजन सिटी के पुलिस प्रमुख रेमुस मदीना ने बताया कि उन्होंने संदिग्ध को हिरासत में लिया है। उससे जरूरी पूछताछ की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने पहले दो लोगों के मारे जाने की पुष्टि की थी। हालाँकि अब 3 लोगों के मरने की खबरें हैं। पुलिस ने कहा, “हमलावर एक अज्ञात व्यक्ति था जो एटेनियो में था। घटना में दो घायल हैं और दो के मारे की पुष्टि हम कर सकते हैं।”

इस घटना के बाद यूनिवर्सिटी में चल रही ग्रेजुएशन सेरेमनी को रद्द कर दिया गया। शेड्यूल के हिसाब से आज यूनिवर्सिटी में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस अपनी स्पीच देने वाले थे। लेकिन गोलीबारी के बाद उन्हें वापस जाने को कहा गया। घटना में उन्हें कोई चोट नहीं आई है। वह सुरक्षित हैं।

वाइस वर्ल्ड न्यूज की एडिटर इन चीफ नताशा गुटिरेज़ ने इस घटना पर बताया, “कॉलेज में ग्रेजुएशन के दिन, जश्न मनाने वाले दिन गोलीबारी हुई। जिन्हें लगता है वो इन सब से दूर हैं उनके लिए… फिलीपींस में संस्थागत और सामान्यीकृत हिंसा और उस पर दण्ड न मिलना सालों से हुआ। हर चीज का असर होता है।”

गौरतलब है कि अभी एक हफ्ते पहले ही अमेरिका में सरेआम लोगों पर गोली चलाए जाने की घटना घटित हुई थी। हमलावर ने ग्रीनवुड शहर के इंडियाना मॉल में लोगों को निशाना बनाया था। उसने फूड कोर्ट में बैठे लोगों पर गोली बारी की थी। हालाँकि बाद में वहीं बैठे हथियारों से लैस एक अन्य शख्स ने उसे मौत के घाट उतार दिया था।

‘ये इश्क का मामला, उन्हें खुश देखना चाहती हूँ’: अभिनेत्री ने बताया बार-बार विदेश क्यों जाते हैं राहुल गाँधी, कहा- इस साल 5 बार जा चुके

बॉलीवुड एक्ट्रेस सिमी ग्रेवाल (Bollywood Actress Simi Garewal) ने कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी (Congress Leader Rahul Gandhi) के विदेश दौरे को लेकर एक बार फिर टिप्पणी की है। ग्रेवाल ने कहा कि लगता है कि राहुल गाँधी को प्रेम (Love) हो गया है, इसलिए वह बार-बार विदेश जाते हैं। 

बॉलीवुड अभिनेत्री ने रविवार (23 जुलाई 2022) को इसको लेकर ट्वीट किया है। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा, “मैं यह सोचकर आश्चर्यचकित हुए बिना नहीं रह सकी कि राहुल गाँधी हर 6 सप्ताह में विदेश क्यों जाते हैं। वह इस साल पहले ही 5 ट्रिप कर चुके हैं। मुझे आशा है कि यह एक प्रेम का मामला है ?.. वास्तव में मैं उन्हें खुश देखना चाहती हूँ ..।”

सिमी ग्रेवाल की इस टिप्पणी पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने कहा कि हो सकता है कि उन्हें यात्रा करना पसंद हो, इसलिए वे बार-बार विदेश जाते हैं। कुछ लोगों ने कहा कि हर किसी की व्यक्ति जिंदगी होती है, इसमें किसी को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। वहीं, कई यूजर ने सिमी ग्रेवाल पर ही सवाल उठाए दिए।

वहीं, wanderer_126 नाम के एक यूजर ने कहा, “लेकिन गुप्त प्रेम रुचि, पूरे आत्मविश्वास के साथ करना बेहतर है, भविष्य में विशेष रूप से राजनीति में हर छिपी हुई चीज अच्छी नहीं होती है।”

एके डॉलर नाम से arunkunal नाम के यूजर ने लिखा, “कम से कम #RahulGandhi के खुश होने से संयुक्त राष्ट्र की #WorldHappinessReport में कुछ तो वृद्धि होगी, क्योंकि वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स में इंडिया 146 देशों में 136 वें स्थान पर था!”

बता दें कि इसे पहले जून 2022 में सिमी ग्रेवाल ने राहुल गाँधी की विदेश यात्रा पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि राहुल गाँधी अपनी पार्टी के नेताओं से ही नहीं मिलते और हर महीने विदेश चले जाते हैं। उनकी प्राथमिकताएँ अलग हैं।

सिमी ने ट्विटर पर लिखा था, “राहुल गाँधी हर महीने विदेश चले जाते हैं। क्यों? वो भारत में लोगों से मिलने से इनकार कर देते हैं। क्यों? मैं कई लोगों को जानती हूँ जिन्होंने उनसे मिलने के लिए महीनों तक मिन्नतें कीं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। क्या यह जीत की रणनीति है? फिर भी वे लोग उनसे अपनी उम्मीदें जोड़ रखी हैं।”

महाराष्ट्र के छोटे से गाँव से लेकर लंदन तक, वीर सावरकर ने कैसे खड़ी की क्रांतिदूतों की विशाल सेना: पुनः राष्ट्रवाद की अलख जगाती ‘मित्रमेला’

दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी एक कविता में वीर सावरकर के व्यक्तित्व पर कहा था, “सावरकर माने तेज, त्याग, तप, तत्व, तर्क, तारुण्य, तीर, तलवार..”। आप जब इस पुस्तक को पढ़ेंगे तो वीर सावरकर के इन सभी विशेष गुणों को आसानी से समझ जाएँगे।

डॉ मनीष श्रीवास्तव द्वारा लिखित क्रांतिदूत शृंखला का यह भाग-3 ‘मित्रमेला’ मुख्यतः वीर सावरकर पर ही केंद्रित है। इसमें वीर सावरकर के शुरुआती जीवन से लेकर उनके विदेश में जाकर शिक्षा प्राप्त करना दर्शाया गया है। उनके द्वारा लिखी गई कालजयी पुस्तक “1857 का स्वातंत्र्य समर” की प्रेरणा सावरकर को कैसे मिली, के बारे में भी ‘मित्रमेला’ में संक्षिप्त रूप से कथात्मक उपन्यास शैली में लिखा गया है।

पुस्तक पहले पृष्ठ से लेकर आखिरी पृष्ठ तक पाठकों को बाँध कर रखने में सफल है। क्रांतिदूतों व उनके गुरुओं के आपस में संवादमय तरीकें से यहाँ वीर सावरकर के क्रांतिकारी जीवन पर प्रकाश डाला गया है। वे कौन-कौन से प्रेरणास्रोत व कारण थे, जिसके कारण वे विनायक दामोदर सावरकर से ‘वीर सावरकर’ बने। इन सब ऐतिहासिक संघर्ष भरें पलों को लेखक ने बेहद खूबसूरत तरीक़े से मित्रमेला भाग में लिखा है। यहाँ हर क्रांतिकारी घटना का स्पष्ट संदर्भ भी दिया गया है और उसे छोटे-छोटे अध्यायों के माध्यम से पाठकों के सामने रखा है।

ये अध्याय स्वतंत्रत रूप में भी पूर्ण हैं तथा पुस्तक को किसी भी अध्याय से पढ़ा जा सकता है। 21 छोटे-छोटे अध्यायों में इस भाग को लिखा गया है। हर अध्याय के बाद पाठक की रुचि क्रांतिकारियों की जीवन गाथा को पढ़ने के लिए और बढ़ती जाती है। ‘मित्रमेला’ सामान्य पाठक का इतिहास विषय में रुचि पैदा करता है। वीर सावरकर को मित्रमेला में पढ़कर उनके जीवन के बारे में और जानने का मन होता है तथा साथ ही स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक संघर्षों से पाठक यहाँ रूबरू होता है।

कैसे महाराष्ट्र के एक छोटे से गाँव से लंदन तक वीर सावरकर क्रांतिदूतों की एक महान सेना खड़ी कर देते हैं। इस सब के पीछे उनके व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों को सुंदरता व रोचकता के साथ इस भाग में लेखक ने रचा है। मित्रमेला को पढ़ते हुए पाठक वीर सावरकर के विशाल व्यक्तित्व के निर्माण के बारे में समझ पाएगा। वीर सावरकर की जीवन गाथा वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए जानना व समझना बहुत ज़रूरी है तथा  यह कार्य ‘मित्रमेला’ को पढ़ने से आसानी से हो सकता है।

‘क्रांतिदूत’ के इस तीसरे भाग में वीर सावरकर के साथ ही श्याम जी वर्मा, चापेकर बंधु, लोकमान्य तिलक, मदनलाल ढींगरा, लाला हरदयाल, वासुदेव, रानाडे, साठे, महादेव, बालकृष्ण आदि महान क्रांतिदूतों के जीवन पर भी प्रकाश डाला गया है। कैसे कई क्रांतिदूतों ने वीर सावरकर की सहायता की व उन्हें भारत की स्वतंत्रता के लक्ष्य पर आगे बढ़ने के लिए कौन कौन से संघर्ष व त्याग करने पड़े, यह सब आप इस भाग में संक्षिप्त रूप में पढ़ सकते हैं।

‘मित्रमेला’ वीर सावरकर के द्वारा बनाया गया संगठन था, जो कि विभिन्न सांस्कृतिक, सामाजिक व देशभक्ति से संबंधित आयोजन करता था। इसी के द्वारा सर्वप्रथम वीर सावरकर ने राष्ट्रवाद की अलख जगाई थी। आगे चलकर इस संगठन से कई महान क्रांतिदूत जुड़ते गए। ‘मित्रमेला’ में यह सब रोचकता से कहा गया है। इस भाग में ‘अभिनय भारत संगठन’ पर भी चर्चा की गई है। इसकी प्रेरणा व इसके ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है।

इस भाग में मुख्यतः 1900 से 1920 के स्वतंत्रता संग्राम पर चर्चा की गई है व साथ ही उस समय में अंग्रेजों की नीति व शासन पर तीखी आलोचना के माध्यम से पाठकों के सामने बहुत सी बातें यहाँ रखी गई है। गाँधी व नेहरू की कथनी व करनी पर भी क्रांतिदूतों को उनके शिक्षक इस भाग में बहुत सी बातें स्पष्टता से बताते हैं किन्तु इस भाग में मुख्य नायक वीर सावरकर ही है व उनके चमत्कारी व्यक्तित्व पर बहुत ही पठनीय भाषा व भाव के साथ लिखा गया है।

यहाँ एक अध्याय विशेष तौर पर श्याम जी वर्मा के जीवन पर व उनके क्रांतिकारी कार्यों पर प्रकाश डालता है। यहाँ लेखक ने श्याम जी के जीवन पर विशेष प्रकाश इसलिए भी डाला है कि वीर सावरकर के कृतित्व व व्यक्तित्व निर्माण में उनका बड़ा योगदान रहा था। लंदन में स्थित उस समय के दो महत्वपूर्ण स्थान इंडिया हाऊस व इंडिया आफिस पर भी लेखक ने यहाँ रोचक बातें रखी है। कैसे ये स्थान क्रांतिदूतों के लिए महत्वपूर्ण बने। यह सब पढ़ना सामान्य पाठक के लिए रुचिकर, स्वतंत्रता संग्राम के लिए जिज्ञासा उत्पन्न करने वाला व प्रेरणादायक है।

एक बार फिर इस शृंखला के इस भाग को पढ़कर भी इन महान क्रांतिदूतों की जीवन गाथा जानने की जिज्ञासा बढ़ती जाती है। उस समय विदेश में पढ़ रहे भारतीय युवा कैसे वीर सावरकर के कहने पर अपना बना-बनाया करियर छोड़कर स्वतंत्रता संग्राम के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं। यह सब वर्तमान भारतीय युवा पीढ़ी को जानना जरूरी है।

‘अर्धसत्य’ अध्याय में गाँधी व नेहरू की कथनी व करनी पर तीखी आलोचना की गई है व पाठकों के सामने तथ्यों सहित इनके कृतित्व पर संक्षिप्त प्रकाश डाला गया है। आप नीचे दिए गए संवाद में क्रान्तिदूतों की हैरानी स्पष्ट देख सकते हैं।

‘क्रांतिदूत’ पुस्तक श्रृंखला की ‘मित्रमेला’ का एक अंश

उस समय श्याम जी वर्मा व वीर सावरकर का कद स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में गाँधी व नेहरू से बड़ा था। बाद के इतिहासकारों ने कैसे आम जनमानस से इन महान क्रांतिदूतों को अलग कर दिया, यह इस भाग को पढ़कर आसानी से समझा जा सकता है। आखिरी के अध्यायों में वीर सावरकर को ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ पुस्तक लिखने व समझने की प्रेरणा कैसे मिली यह पढ़ना प्रेरणादायक है। इस पुस्तक को लिखने के लिए उन्होंने तथ्यों की सत्यता के तह में जाकर कैसे एक कालजयी पुस्तक लिखी यह जानकार मन आश्चर्य से भर उठता है।

कैसे उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण व बड़े अध्याय को नष्ट होने से बचाया और कितने ही क्रांतिदूतों को स्वतंत्रता के लिए एक बड़ा हथियार इस पुस्तक के माध्यम से दिया। इस पुस्तक को लिखने में लंदन के इंडिया आफिस में पदस्थ मुखर्जी साहब ने सावकार जी का विशेष सहयोग किया था। इंडिया आफिस में संग्रहित दस्तावेजों के आधार पर वीर सावरकर ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक चमत्कार सा कर दिया था। इतिहास से नया इतिहास रचने की चमत्कारी कला में वीर सावरकर सबके गुरू बनकर विश्व पटल पर छा गए थे।

अंग्रेज उनके इस चमत्कारी व्यक्तित्व से अब चिढ़ने व सर पीटने लगे थे। अंत में इतना ही कह सकता हूँ कि क्रांतिदूत की शृंखला इस भाग को पढ़ने पर वर्तमान युवा पीढ़ी जरूर भारतीय स्वतंत्रता समर के इतिहास को विस्तार से पढ़ने के लिए प्रेरित होगी व साथ ही राष्ट्रवाद की ओर प्रेरित होगी। यह भाग इतिहास को जानने के लिए एक नवीन दस्तावेज बन सकता है। इतिहास के नए लेखक व छात्रों के लिए यह शृंखला नया दृष्टिकोण व नवीन आयाम लेकर आई है।

(लेखक भूपेंद्र भारतीय अधिवक्ता हैं और मध्य प्रदेश के देवास से ताल्लुक रखते हैं)

अपने घर में बम बना रहा था रेयाजू मियाँ, ब्लास्ट से 3 की मौत, 10 घायल: पूरा मकान ही हो गया जमींदोज, बिहार के छपरा की घटना

बिहार (Bihar) के छपरा जिले में एक अवैध रूप से चल रही एक पटाखा फैक्ट्री में रविवार (24 जुलाई 2022) को ब्लास्ट हो गया। धमाका इतना तेज था कि इसके जद में आने वाले कई घर धराशाई हो गए। वहीं इसमें तीन लोगों की मौत हो गई और 10 लोगों के मलबे के नीचे दबे होने की खबर सामने आ रही है। यहाँ पर दीवाली के लिए पटाखे बनाए जाते थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना खैरा थाना क्षेत्र के खोदाईबाग बाजार से सटे खोदाईबाग गाँव की है। यहीं पर मोहम्मद रेयाजू मियाँ खान नाम के व्यक्ति का घर है। गाँव के लोगों का कहना है कि रेयाजू मियाँ अपने घर में ही अवैध तरीके से आतिशबाजी के लिए पटाखे बनाता था। बताया जाता है कि उसके घर रेयाजू मियाँ अपने भाई शब्बीर मियाँ और उसके परिवार के साथ रहता था।

धमाके के बाद खैरा थाने की पुलिस घटना स्थल पर पहुँची है और मलबे में फँसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिशें की जा रही हैं। दरअसल, इस धमाके में रेयाजू मियाँ का पक्का मकान जमीदोज हो गया है। मामले की जाँच करने के लिए मुजफ्फरनगर से एफएसएल की टीम भी पहुँच रही है। रेयाजू मियाँ के घर में अवैध तरीके से चल रही पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट को देखते हुए इस बात का अनुमान लगाया जाता है कि वहाँ बहुत ही पॉवरफुल विस्फोटक तैयार किया गया था और इसी कारण ऐसा हुआ। हालाँकि, अभी तक उसके किसी भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने की जानकारी सामने नहीं आई है।

बहरहाल घटना स्थल पर छपरा सदर के एसडीपीओ मुनेश्वर प्रसाद, बलवाड़ा के एसडीपीओ इंद्रजीत बैठा, इंस्पेक्टर मंजू कुमारी, थाना अध्यक्ष विजय कुमार और फायर ब्रिगेट की टीम समेत कई थानों की फोर्स पहुँची है। फिलहाल, इलाके में राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं, ताकि मलबे के नीचे दबे लोगों को जल्द से जल्द रेस्क्यू किया जा सके।

दूसरे दिन कोई उछाल नहीं, YRF की इस साल तीसरी फ्लॉप है ‘शमशेरा’: बॉलीवुड को भारी पड़ा त्रिपुण्ड-शिखा का मजाक बनाना

रणबीर कपूर, संजय दत्त और वाणी कपूर की फिल्म ‘शमशेरा’ बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई है, क्योंकि दूसरे दिन शनिवार (23 जुलाई, 2022) को फिल्म के कलेक्शंस में कोई उछाल नहीं देखा गया। फिल्म में अंग्रेजों के दलाल के रूप में ‘दरोगा शुद्ध सिंह’ को चित्रित करना और उन्हें त्रिपुण्ड-शिखा वाला लुक देकर गुंडा बनाया जाना लोगों को रास नहीं आया। इस तरह से हिन्दुओं का अपमान खुलेआम करना अब बॉलीवुड को भारी पड़ रहा है।

‘शमशेरा’ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 2 दिनों में 21 करोड़ रुपए से भी कम रहा है, ऐसे में 150 करोड़ रुपए की भारी-भरकम बजट वाली इस फिल्म ने ‘यशराज फिल्म्स’ (YRF) को बड़ी टेंशन दे दी है। आदित्य चोपड़ा की इस साल ये लगातार तीसरी बड़ी फ्लॉप है। सबसे बड़ी बात कि इनमें तीनों ही फिल्मों में लिस्ट-ए-अभिनेताओं को कास्ट किया गया था और इनमें से दो मेगा बजट फ़िल्में थीं। रविवार के बाद साफ़ हो जाएगा कि ‘शमशेरा’ कितनी बड़ी फ्लॉप रहने वाली है।

करण मल्होत्रा द्वारा निर्देशित इस फिल्म का स्क्रिप्ट भी बेहद खराब है, जिसे समीक्षकों ने भी नकार दिया। कहानी में कोई दम नहीं है। रणबीर कपूर डाकू के रोल में जँचे नहीं हैं, बल्कि उनकी आवाज़ अभी भी डाकू वाली नहीं बन पाई। स्क्रीनप्ले को भी समीक्षकों ने नकार दिया। संजय दत्त कुछ इसी तरह का किरदार ‘KGF 2’ सहित कई फिल्मों में कर चुके हैं। ज़रूरत से ज्यादा गानों और एक्शन दृश्यों को दोहराए जाने ने लोगों को बोर कर दिया।

YRF के लिए ये साल ही बुरा चल रहा है, क्योंकि उसकी एक और बड़ी बजट वाली फिल्म अक्षय कुमार स्टारर ‘ सम्राट पृथ्वीराज’ भी बॉक्स ऑफिस पर धराशाई हो गई है। उस फिल्म का बजट 175 करोड़ रुपए था। ‘शमशेरा’ को 4000 थिएटरों में रिलीज किया गया है। दर्शक न मिलने के कारण इसके कई शो रद्द भी किए जा रहे हैं। फिल्म विश्लेषक कह रहे हैं कि एक तो बॉलीवुड के पहले से ही बुरे दिन चल रहे हैं, ऊपर से ‘शमशेरा’ को सुस्त प्रतिक्रिया ने सब गुड़-गोबर कर दिया।

‘जवानी में नहीं बनना माँ, बाद के लिए अंडे फ्रीज करो’ : चीन में अविवाहित महिला की जिद्द कोर्ट से खारिज, शादी होना वहाँ भी जरूरी

चीन में ‘महिला अधिकार’ के नाम पर टेरेसा जू नाम की महिला ने अपने अंडों को फ्रीज करवाने की गुहार कोर्ट में लगाई थी। कोर्ट ने इस मामले को तीन साल अपने पास रखा और अब जाकर महिला की माँग के विरोध में फैसला सुनाया।

कोर्ट ने कहा कि अगर कोई स्थानीय अस्पताल अविवाहित महिला के अंडों को फ्रीज करने से इनकार करता है तो इसमें किसी तरह से अधिकारों का या कानून का उल्लंघन नहीं होता।

अदालत का फैसला सुन कर टेरेसा जू ने इस निर्णय के विरुद्ध अपील करने की कसम खाई और कहा कि वो इस तरह के मामलों को समाप्त नहीं होने देंगे। उन्होंने कोर्ट के फैसला को त्रासदी जैसा कहा है। वहीं नारीवादी भी इस फैसले पर सवाल उठा रही हैं। सबका पूछना है कि शादी न होने के कारण महिला को उसके अधिकार से कैसे वंचित किया जा सकता है।

बता दें कि चीन में अलग से अविवाहित लोगों के लिए प्रजनन उपचार जैसी सेवाएँ सामान्य रूप से प्रतिबंधित नहीं हैं। लेकिन फिर भी अस्पतालों में मैरिज लाइसेंस माँगा जाता है। इसके अलावा वे महिलाएँ जो बिन शादी के माँ बनना चाहती हैं उन्हें मैटरनिटी लीव आदि के लिए बहुत जद्दोजहद करनी पड़ती हैं।

द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2018 में जब 30 साल की जू बीजिंग के कैपिटल मेडिकल यूनिवर्सिटी के अस्पताल अंडे फ्रीज करवाने गई तो प्रारंभिक जाँच के बाद कहा गया कि आगे तभी बढ़ेंगे जब शादी का सर्टिफिकेट मिलेगा। चूँकि जू पर वो नहीं था तो अस्पताल ने उसके अंडे फ्रीज नहीं किए।

जू ने आरोप लगाया कि डॉक्टर उसे जवानी में ही बच्चा पैदा करने को बोल रहे थे जबकि वो अपने अंडे इसलिए बचाकर रखवाना चाहती हैं ताकि वह बाद में बच्चा पैदा करने के लिए उनका इस्तेमाल कर सकें।

महिला ने इस तरह अस्पताल द्वारा उसकी माँग नकारे जाने पर इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर शॉर्ट वीडियो बनाकर उठाया और तूल मिलने के बाद 2019 में इसे कोर्ट लेकर गईं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, अस्पताल के खिलाफ किया गया ऐसा देश में पहला केस है।

अस्पताल ने केस की सुनवाई में कोर्ट को बताया कि इस तरह अंडो को फ्रीज करना कई स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा लेट प्रेगनेंसी भी कई रिस्क लेकर आती है। अस्पताल ने ये भी साफ किया कि उनके यहाँ यह नीति है कि अंडे फ्रीज करने की सर्विस उन्हीं को दी जाती है जो प्राकृतिक ढंग से बच्चे पैदा करने में सक्षम न हों, न कि ये स्वस्थ मरीजों के लिए सुविधा है।