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‘शिवसैनिकों को हिंदुत्व और वीर सावरकर पर बोलने की नहीं थी इजाजत’: CM शिंदे ने खोले ‘उद्धव सरकार’ के राज, कहा- दाऊद के ‘दोस्तों’ पर भी नहीं की कार्रवाई

महाराष्ट्र (Maharashtra) में शिवसेना-भाजपा सरकार ने सोमवार (4 जुलाई 2022) को बहुमत के साथ फ्लोर टेस्ट को पास कर लिया। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि विकास और हिंदुत्व नए शासन के एजेंडे में हैं। विधानसभा में बोलते हुए, सीएम एकनाथ शिंदे ने पिछले 2.5 सालों में शिवसेना सुप्रीमो बाला साहेब ठाकरे की नीतियों का अनादर करने के लिए उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को लताड़ लगाई।

उन्होंने कहा कि शिव सैनिक हिंदुत्व के लिए आवाज नहीं उठा सकते थे और वीर सावरकर के बारे में भी नहीं बोल सकते थे, क्योंकि शिवसेना कॉन्ग्रेस और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के साथ गठबंधन में थी।

उन्होंने कहा, “शिव सैनिकों का पिछले 2.5 वर्षों में सबसे खराब अनुभव रहा। शिवसेना कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ थी। हम शिवसैनिकों को हिंदुत्व या वीर सावरकर के बारे में बोलने से रोक दिया गया था। ढाई साल में कई बार कॉन्ग्रेस ने वीर सावरकर का अपमान किया था लेकिन हमें कॉन्ग्रेस के खिलाफ बोलने नहीं दिया गया। हम शिवसैनिकों ने पिछले ढाई साल में बहुत कुछ झेला है।”

एनसीपी और कॉन्ग्रेस नेताओं पर निशाना साधते हुए शिंदे ने यह भी कहा कि शिव सैनिकों को चुप रहने के लिए भी मजबूर किया गया। इसके अलावा दाऊद के साथ संबंध रखने वाले मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई करने से रोक दिया गया। उन्होंने दोहराया कि जिन शिवसेना नेताओं ने महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार के खिलाफ विद्रोह किया, वे शिवसेना का हिस्सा थे, बाला साहेब की शिवसेना का हिस्सा थे।

शिंदे ने कहा, “हम बालासाहेब और आनंद दीघे के सिद्धांतों के कट्टर अनुयायी रहे हैं, जिन्होंने हमेशा लोगों के बारे में सोचा है न कि सत्ता के बारे में। हम उनके विचारों के खिलाफ कभी विद्रोह नहीं करेंगे।” इस दौरान सीएम ने यह भी कहा कि वह कभी सत्ता नहीं चाहते थे। वह हमेशा से शिवसेना और भाजपा को गठबंधन में रखना चाहते थे। उन्होंने कहा कि 2019 में भाजपा महाराष्ट्र में शिवसेना से उप मुख्यमंत्री बनाने के लिए राजी हो गई थी, लेकिन उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी सीएम की कुर्सी चाहती थी।

इसके साथ ही शिंदे ने कहा कि महा विकास अघाड़ी गठबंधन बनने के बाद, पार्टी ने उनके नाम का प्रस्ताव सीएम की कुर्सी के लिए किया था, लेकिन पूर्व डिप्टी सीएम अजीत पवार और उनकी पार्टी ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था और फिर उद्धव ठाकरे को सीएम बनाया गया था। उन्होंने कहा, “मैंने तब भी एक शब्द नहीं बोला। मैंने शिवसेना का समर्थन किया। लेकिन बाद में जो कुछ भी हुआ वह अच्छा अनुभव नहीं था।” शिंदे ने कहा कि उन्होंने उद्धव ठाकरे को भाजपा से हाथ मिलाने के लिए 5 से 6 बार समझाने की कोशिश की लेकिन उनकी सभी कोशिशें नाकाम रहीं।

उन्होंने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना की खिंचाई की और कहा कि इसने बाला साहेब ठाकरे का अपमान किया है, जिन्होंने खुद भाजपा के साथ गठबंधन किया था। उल्लेखनीय है कि शिवसेना सुप्रीमो बाला साहेब ठाकरे ने कहा था कि शिवसेना कभी भी शरद पवार की एनसीपी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। उन्होंने पवार के साथ किसी भी तरह के गठबंधन की संभावना को खारिज किया था। लेकिन शिवसेना ने साल 2019 में महाराष्ट्र पर राज करने के लिए एनसीपी और कॉन्ग्रेस के साथ हाथ मिलाया। हालाँकि यह सरकार 2.5 सालों तक ही चल पाई।

सोमवार को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार बहुमत के आँकड़े से आगे निकल गई और राज्य विधानसभा में विश्वास मत हासिल किया। नए भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने सोमवार, 4 जुलाई को हुए फ्लोर टेस्ट के दौरान 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में 164 वोट हासिल किए और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार को केवल 99 वोट मिले।

फ्लोर टेस्ट जीतने के बाद, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने सीएम एकनाथ शिंदे को बधाई दी और गठबंधन का समर्थन करने वाले सभी विधायकों को धन्यवाद दिया।वहीं, शिंदे ने भी सभी विधायकों का आभार व्यक्त किया और बड़े पैमाने पर समर्थन देने के लिए भाजपा की सराहना की। शिंदे ने कहा, “हमारी संख्या (भाजपा की तुलना में) कम थी, लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी ने हमें आशीर्वाद दिया। मोदी साहब ने शपथ ग्रहण से पहले मुझसे कहा था कि वह मेरी हर संभव मदद करेंगे। अमित शाह साहब ने भी कहा था कि वह हमारे पीछे चट्टान की तरह खड़े रहेंगे।”

VIVO जैसी चीनी कंपनियों पर ED ने फिर मारी रेड, इस बार 44 जगहों पर तलाशी जारी: शाओमी के जब्त हो चुके हैं ₹5551 करोड़

मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में लिप्त होने के कारण चीनी कंपनियाँ अक्सर भारत की जाँच एजेंसियों के निशाने पर रहती हैं। इसी क्रम में आज (5 जुलाई 2022) भी प्रवर्तन निदेशालय ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की। सामने आई जानकारी के मुताबिक ईडी ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और कुछ दक्षिण राज्यों में 40 से ज्यादा जगह रेड मारी। इससे पहले भी ईडी ने चीनी कंपनियों से जुड़े मामले में अपनी छापेमारी की थी।

आधिकारियों ने इस छापेमारी को लेकर बताया है कि ये कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत की गई है। जाँच एजेंसी Vivo और उससे संबंधित कंपनियों से जुड़े 44 स्थानों की तलाशी ले रही है। इस रेड के बाद वीवो और अन्य कंपनियों के खिलाफ चल रहे जाँच केस में जल्द ही अधिक जानकारी आने की संभावना है।

बता दें कि चीनी कंपनियों पर हजारों करोड़ रुपए की हेरा-फेरी करने के इल्जाम पिछले कुछ समय में लगे हैं। यही वजह है कि न केवल ईडी बल्कि सीबीआई भी इनके पीछे पड़ी है। मई माह में ZTE Corp और वीवो मोबाइल कम्युनिकेशन कंपनी के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की जाँच हुई थी। इसी तरह शाओमी कंपनी भी फाइनेंशियल फ्रॉड करने के कारण भारतीय जाँच एजेंसियों के निशाने पर रहती है।

शाओमी के जब्त हुए हजारों करोड़

अप्रैल महीने में ईडी ने शाओमी इंडिया पर कार्रवाई की थी और चीनी कंपनियों से जुड़े बैंक खातों में जमा किए गए ₹5 हजार करोड़ से ज्यादा रुपए जब्त कर लिए हैं। ये कार्रवाई विदेशी प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के तहत अंजाम दी गई है।

शाओमी के विरुद्ध भी प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जाँच को इसी साल फरवरी में शुरू किया था। ये जाँच शाओमी टेक्नॉलजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किए गए अवैध लेन-देन पर शुरू हुई थी। इसके बाद इस माह की शुरुआत में पता चला था कि जाँच एजेंसी ने अपनी पड़ताल के लिए कंपनी के एक पूर्व भारतीय प्रमुख बुलाया ताकि यह निर्धारित हो सके कि क्या कंपनी की व्यावसायिक प्रथाएँ भारतीय विदेशी मुद्रा कानूनों के अनुरूप हैं या नहीं।

खादिम को चाहिए नूपुर शर्मा की गर्दन, जिस मोइनुद्दीन चिश्ती की अजमेर में दरगाह उसके शागिर्दों ने हर दिन मंदिर में काटी गाय-गिराए मंदिर

उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैया लाल का मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने कला काट दिया था। उसके बाद अजमेर की दरगाह के दीवान जैनुल आबेदीन अली खान ने कहा था कि भारतीय मुस्लिम तालिबानी मानसिकता कबूल नहीं करेंगे। लेकिन अब दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह, नूपुर शर्मा की गर्दन लाने वाले को अपना मकान देने की बात कह रहा है।

यह दरगाह ‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती (Khwaja Moinuddin Chishti) का है, जिन्हें हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ के नाम से भी जाना जाता है। सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती का जन्म ईरान में हुआ था, लेकिन उन्हें राजस्थान के अजमेर में दफनाया गया था। संयोगवश ‘सूफी संत’ मोईनुद्दीन चिश्ती के बारे में इतिहास में दर्ज तथ्य बॉलीवुड की फिल्मों, गानों, सूफी संगीत और वामपंथी इतिहास से एकदम अलग हैं।

इतिहासकार एमए खान ने अपनी पुस्तक ‘इस्लामिक जिहाद: एक जबरन धर्मांतरण, साम्राज्यवाद और दासता की विरासत’ (Islamic Jihad: A Legacy of Forced Conversion, Imperialism, and Slavery) में इस बारे में विस्तार से लिखा है कि मोइनुद्दीन चिश्ती, निज़ामुद्दीन औलिया, नसीरुद्दीन चिराग और शाह जलाल जैसे सूफी संत जब इस्लाम के मुख्य सिद्धांतों की बात करते थे, तो वे वास्तव में रूढ़िवादी और असहिष्णु विचार रखते थे, जो कि मुख्यधारा के जनमत के विपरीत था।

उदाहरण के लिए, सूफी संत मोईनुद्दीन चिश्ती और औलिया इस्लाम के कुछ पहलुओं जैसे- नाच (रक़) और संगीत (सामा) को लेकर उदार थे, जो कि उन्होंने रूढ़िवादी उलेमा के धर्मगुरु से अपनाया, लेकिन एक बार भी उन्होंने कभी हिंदुओं के उत्पीड़न के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। औलिया ने अपने शिष्य शाह जलाल को बंगाल के हिंदू राजा के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए 360 अन्य शागिर्दों के साथ बंगाल भेजा था।

इस पुस्तक में इस बात का भी जिक्र किया है गया है कि वास्तव में, हिंदुओं के उत्पीड़न का विरोध करने की बात तो दूर, इन सूफी संतों ने बलपूर्वक हिंदुओं के इस्लाम में धर्म परिवर्तन में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। यही नहीं, ‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्दों ने हिंदू रानियों का अपहरण किया और उन्हें मोईनुद्दीन चिश्ती को उपहार के रूप में प्रस्तुत किया।

यह भी एक ऐतिहासिक तथ्य है कि चिश्ती, शाह जलाल और औलिया जैसे सूफी ‘काफिरों’ के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए भारत आए थे। उदाहरण के लिए- मोइनुद्दीन चिश्ती, मुइज़-दीन मुहम्मद ग़ोरी की सेना के साथ भारत आए और गोरी द्वारा अजमेर को जीतने से पहले वहाँ गोरी की तरफ से अजमेर के राजा पृथ्वीराज चौहान की जासूसी करने के लिए अजमेर में बस गए थे। यहाँ उन्होंने पुष्कर झील के पास अपने ठिकाने स्थापित किए।

मध्ययुगीन लेख ‘जवाहर-ए-फरीदी’ में इस बात का उल्लेख किया गया है कि किस तरह चिश्ती ने अजमेर की आना सागर झील, जो कि हिन्दुओं का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, पर बड़ी संख्या में गायों का क़त्ल किया, और इस क्षेत्र में गायों के खून से मंदिरों को अपवित्र करने का काम किया था। मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्द प्रतिदिन एक गाय का वध करते थे और मंदिर परिसर में बैठकर गोमांस खाते थे।

इस अना सागर झील का निर्माण ‘राजा अरणो रा आनाजी’ ने 1135 से 1150 के बीच करवाया था। ‘राजा अरणो रा आनाजी’ सम्राट पृथ्वीराज चौहान के पिता थे। आज इतिहास की किताबों में अजमेर को हिन्दू-मुस्लिम’ समन्वय के पाठ के रूप में तो पढ़ाया जाता है, लेकिन यह जिक्र नहीं किया जाता है कि यह सूफी संत भारत में जिहाद को बढ़ावा देने और इस्लाम के प्रचार के लिए आए थे, जिसके लिए उन्होंने हिन्दुओं के साथ हर प्रकार का उत्पीड़न स्वीकार किया।

खुद मोइनुद्दीन चिश्ती ने तराइन की लड़ाई में पृथ्वीराज चौहान को पकड़ लिया था और उन्हें ‘इस्लाम की सेना’ को सौंप दिया। लेख में इस बात का प्रमाण है कि चिश्ती ने चेतावनी भी जारी की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था – “हमने पिथौरा (पृथ्वीराज) को जिंदा पकड़ लिया है और उसे इस्लाम की सेना को सौंप दिया है।”

मोइनुद्दीन चिश्ती का एक शागिर्द था मलिक ख़ितब। उसने एक हिंदू राजा की बेटी का अपहरण कर लिया और उसे चिश्ती को निकाह के लिए ‘उपहार’ के रूप में प्रस्तुत किया। चिश्ती ने खुशी से ‘उपहार’ स्वीकार किया और उसे ‘बीबी उमिया’ नाम दिया।

ईद उल-अज़हा पर गाय को क्रेन से पटक कर ज़बह करना ‘प्रथा’? हैप्पी म्यूजिक के साथ रॉयटर्स ने इसे बताया Lifestyle: लोगों ने PETA से पूछा – कहाँ हो?

पाकिस्तान में बकरीद पर गाय को ज़बह करने से पहले उसे क्रेन से ऊँचाई से जमीन पर पटका जाता है, ताकि उसकी हड्डियाँ टूट जाएँ। सबसे बड़ी बात तो ये है कि मानवाधिकार से लेकर पशु अधिकार तक जैसी चीजों के लिए भारत और हिन्दुओं को लगातार कोसने वाले अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में से एक Reuters के लिए ये एक किस्म का ‘रीति-रिवाज’ है। इसमें उसे कोई क्रूरता नहीं दिखती, उलटा वो लोगों को ऐसे दिखा रहा है जैसे ये कोई खेल हो।

Reuters मजे लेकर इसका वीडियो दिखाते हुए पूछ रहा है कि क्या आपने कभी किसी गाय को इस तरह क्रेन से ले जाए जाते हुए देखा है? साथ ही उसने पाकिस्तान के कराची में हर साल होने वाली इस जघन्य वारदात का अलग-अलग एंगल से वीडियो भी शूट किया। इसके बाद वो सैयद एजाज अहमद से मिलवाता है, जो उसकी नजर में ‘पशुपालक’ है। फिर वो ईद उल-अज़हा के अवसर पर गाय को रस्सियों से जकड़ कर हत्या के लिए ले जाए जाते हुए दिखाता है।

सबसे बड़ी बात तो ये कि वो गोहत्या को पशु क्रूरता नहीं, बल्कि ‘मांस के लिए कुर्बानी’ कह कर सम्बोधित करता है। जमीन से 40 फीट ऊपर कैसे एक निरीह पशु को क्रेन से उठा लिया जाता है, ये देख कर किसी का भी दिल दहल जाए। इसके बाद Reuters दिखाता है कि कैसे लोग वहाँ पर खड़े होकर इस ‘तमाशे’ को देखते हैं। सैयद एजाज अहमद का कहना है कि जब जानवर छोटे होते हैं तो वो सीढ़ियों से उन्हें ऊपर ले जाता है, लेकिन वो बड़े हो जाते हैं तो ऐसा करना असंभव हो जाता है।

वो बताता है कि छत पर ‘पालने वाले’ जानवरों को इसीलिए वो क्रेन से नीचे लेकर आता है। Reuters की नज़र में एक व्यक्ति द्वारा हर साल की जाने वाली ये क्रूरता ‘प्रथा’ है, जो 18 वर्षों से चली आ रही है। सबसे बड़ी बात कि इसे देखने के लिए बड़ों के अलावा कई बच्चे भी आते हैं। उन लोगों का कहना है कि जानवरों को इस तरह क्रेन से जमीन पर पटका जाना खासा ‘आनंददायक’ है। हर साल लगभग 5-6 गायों की इसी तरह से हत्या कर दी जाती है।

लोग PETA से भी पूछ रहे हैं कि वो कहाँ सोया हुआ है, जो पशु अधिकार की रक्षा के नाम पर हिन्दुओं को गाली देता फिरता है। सबसे बड़ी बात कि रॉयटर्स इस क्रूरता को ‘Lifestyle’ की श्रेणी में दिखा रहा है। साथ ही एक खुशनुमा बैकग्राउंड संगीत भी वीडियो में बज रहा होता है। क्या Reuters और PETA जैसी संस्थाएँ हिन्दुओं को भला-बुरा कहने का कोई अधिकार रखती हैं? निरीह पशुओं की हत्या को मनोरंजन की तरह पेश करने वालों से और क्या उम्मीद।

2020 में भी कोरोना के बीच इस तरह का वीडियो पाकिस्तान से सामने आया था। तड़पती हुई गाय को क्रेन से गिरा कर चाकू से उसे मार डाला जाता है। प्रसिद्ध लेखक और इस्लाम पर कई पुस्तकें लिख चुके अंतरराष्ट्रीय लेखक तारिक फ़तेह ने इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए तब लिखा था कि पाकिस्तान के लोग गोहत्या कर के बकरीद मना रहे हैं और इससे अल्लाह को ख़ुश करना चाह रहे हैं। डॉक्टर वेदिका नामक ट्विटर यूजर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि अगर अल्लाह को खुश करने के लिए ये किया जा रहा है तो फिर शैतान कैसे खुश होगा, ये सोचने वाली बात है।

‘तुमको ज्यादा दिन जीने नहीं देंगे’: BJP नेता कपिल मिश्रा को गोली मारने की धमकी, हिंदू सेना अध्यक्ष भी कट्टरपंथियों के टारगेट पर

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा को जान से मारने की धमकी दी गई है। हिंदू सेना के दिल्ली चैप्टर के अध्यक्ष दीपक मलिक ने भी इस्लामी कट्टरपंथियों से धमकी मिलने की शिकायत पुलिस से की है। इससे पहले बीजेपी की दिल्ली इकाई के पूर्व मीडिया प्रमुख नवीन कुमार जिंदल को भी धमकी दी गई थी।

मिश्रा को धमकी भरा ई-मेल भेजा गया है। मिश्रा ने इस मेल का स्क्रीनशॉट ट्विटर पर साझा किया है। ईमेल करने वाले अकबर आलम ने लिखा है, “कपिल मिश्रा आतंकवादी तुमको ज्यादा दिन तक जीने नहीं देंगे। मेरे आदमी ने प्लान बना लिया है तुमको गोली मारने के लिए।” यह ईमेल रविवार (3 जुलाई 2022) शाम 7:48 पर भेजा गया था।

कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर कहा है, “ऐसी धमकियों से हम ना डरने वाले हैं, ना रुकने वाले हैं। कन्हैया लाल जी, उमेश कोल्हे जी जैसे जिहादी हिंसा के शिकार परिवारों के लिए हमारा अभियान और तेजी से चलेगा। हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता।”

बता दें कि उदयपुर में नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने पर कन्हैया लाल की 28 जून को मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने बेरहमी के साथ हत्या कर दी थी। कपिल मिश्रा ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। क्राउड फंडिंग के माध्यम से परिवार के लिए एक करोड़ रुपए जुटाए थे।

इससे पहले अकबर आलम नाम से ही नवीन जिंदल को भी धमकी मिली थी। इसमें कहा गया था, “नवीन कुमार आतंकवादी अब तेरी बारी है। ऐसे ही तेरी गर्दन काटूँगा जल्द ही।” एक अन्य ईमेल में अकबर आलम ने जिंदल को गाली देते हुए कहा था, “नवीन कुमार आतंकवादी @##$$$$ देख ले ऐसे ही कटिंग कर डालूँगा।”

इसके अलावा हिंदू सेना के दिल्ली चैप्टर के अध्यक्ष दीपक मलिक को भी जान से मारने की धमकी मिली है। उन्होंने 1 जुलाई, 2022 को दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मलिक ने अपनी शिकायत में कहा कि पूर्व भाजपा नेताओं नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल के समर्थन में 20 जून को उनके संगठन ने हनुमान चालीसा कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसके बाद से उन्हें लगातार धमकी मिल रही है।

हिंदू सेना के नेता ने 22 नंबरों की एक लिस्ट दी है। इसी नंबर से उन्हें बार-बार धमकियाँ और गालियाँ मिल रही। दीपक मलिक ने अपनी शिकायत में लिखा है कि उन्हें इन नंबरों से अपमानजनक कॉल और व्हाट्सएप मैसेज मिल रहे हैं, जिनमें से कुछ पाकिस्तान से अज्ञात अंतरराष्ट्रीय नंबर हैं। उन्होंने दिल्ली पुलिस से उन नंबरों का पता लगाने का आग्रह किया है, जिनसे उन्हें धमकियाँ मिल रही हैं।

‘नूपुर शर्मा पर टिप्पणी लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन’: 117 रिटायर्ड जज-नौकरशाहों-सैन्य अधिकारियों का खुला पत्र, CJI को भेजा

नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों जस्टिस सूर्यकान्त और जस्टिस जेबी पारदीवाला की विवादित टिप्पणी पर रार थमता नहीं दिख रहा है। 15 सेवानिवृत्त जजों, 77 रिटायर्ड नौकरशाहों और 25 पूर्व सैन्य अधिकारियों ने खुला पत्र जारी कर के नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट के दोनों जजों की टिप्पणी को ‘दुर्भाग्यपूर्ण और गलत उदाहरण पेश करने वाला’ करार दिया है। नूपुर शर्मा पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के इन दोनों जजों ने विवादित टिप्पणी की थी।

पत्र में लिखा है कि हम एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते ये विश्वास रखते हैं कि किसी भी देश का लोकतंत्र तभी तक अक्षुण्ण रहेगा, जब तक उसकी सारी संस्थाएँ संविधान के हिसाब से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करती रहेंगी। उन्होंने लिखा कि सुप्रीम कोर्ट के दो जजों द्वारा की गई ताज़ा टिप्पणी ‘लक्ष्मण रेखा’ का उल्लंघन है और हमें इस पर बयान जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने लिखा कि इन टिप्पणियों से देश-विदेश में लोगो को हैरानी हुई है।

पत्र में लिखा है, “जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला द्वारा की गई टिप्पणियाँ, जो कि जजमेंट का हिस्सा नहीं हैं – किसी भी तरह से न्यायिक उपयुक्तता और निष्पक्षता के दायरे में नहीं आती। ऐसे अपमानजनक तरीके से कानून का उल्लंघन न्यायपालिका के इतिहास में आज तक नहीं हुआ। इन बयानों या याचिका से कोई लेनादेना नहीं था। नूपुर शर्मा को न्यायपालिका तक पहुँच से मना कर दिया गया और ये संविधान की भावना के साथ-साथ प्रस्तावना का भी उल्लंघन है।”

पत्र में आगे लिखा है कि जजों का ये बयान कि देश में जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए सिर्फ और सिर्फ नूपुर शर्मा जिम्मेदार हैं – इसका कोई औचित्य नहीं बनता। सेवानिवृत्त जजों, अधिकारियों और सैन्य अधिकारियों ने लिखा कि ये सब कह कर जजों ने एक तरह से उदयपुर में सिर कलम किए जाने की क्रूर घटना के अपराधियों को दोषमुक्त करार दिया है। पत्र में लिखा है कि देश की दूसरी संस्थाओं को नोटिस दिए बिना उन पर टिप्पणी चिंताजनक और सतर्क करने वाला है।

पत्र में आगे लिखा है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की न्यायपालिका के इतिहास पर यर टिप्पणियाँ धब्बे की तरह हैं। इस पर आपत्ति जताई गई है कि याचिकाकर्ता को बिना किसी सुनवाई के दोषी ठहरा दिया गे और न्याय देने से इनकार कर दिया गया, जो किसी लोकतांत्रिक समाज की प्रक्रिया नहीं हो सकती। साथ ही याद दिलाया गया है कि एक ही अपराध के लिए कई सज़ा का प्रावधान नहीं है, इसीलिए नूपुर शर्मा FIRs को ट्रांसफर कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुँची थीं।

आज सिगरेट पीती ‘काली’, कभी श्रीराम-गणपति पर उगला था जहर: लीना पर दिल्ली-UP में FIR, मोदी घृणा भी कूट-कूटकर भरी

हिंदुओं की देवी ‘काली’ का विवादित चित्रण कर अपनी डॉक्यूमेंट्री बनाने वाली लीना मणिमेकलई के खिलाफ यूपी पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। इससे पहले दिल्ली में एक वकील ने लीना के विरुद्ध शिकायत देकर एफआईआर की माँग की थी जिसके बाद दिल्ली की आईएफएसओ यूनिट ने भी लीना के खिलाफ मामला दर्ज किया।

दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने आईपीसी की धारा 153ए और 295ए के तहत लीना पर FIR की। वहीं 4 जुलाई को UP पुलिस में दर्ज हुई एफआईआर में लीना मणिमेकलई, प्रोड्यूसर आशा एसोसिएट, एडिटर श्रवण ओनाचन का नाम है। इन पर आरोप है कि इन्होंने जानबूझकर आपराधिक साजिश, धार्मिक भावनाओं को आहत, और शांति भंग करने के लिए ऐसा काम किया। इस फिल्म में हिंदुओं की देवी काली का अपमानजनक रूप में चित्रित किया गया है।

बता दें कि हिंदू देवी ‘काली’ को अपनी फिल्म में सिगरेट पीते हुए दिखाने वाली लीना के पुराने ट्वीट लगातार वायरल हैं। इन ट्वीट से पता चलता है कि वो हिंदूफोबिक मानसिकता से ग्रसित हैं। साथ ही उन्हें भाजपा से और नरेंद्र मोदी से भी खासी नफरत है।

एक ट्वीट में लीना मणिमेकलई ने कहा, “मैं हकीकत में उन देवताओं पर ट्वीट करते-करते थक गई हूँ जो अस्तित्व में हैं भी नहीं और धार्मिक घृणा व कट्टरता की घटिया राजनीति के कारण अस्तित्व में ला दिए जाते हैं।” अपने ट्वीट में लीना गणपति भगवान के लिए व उनकी आराधना करने वालों को गाली दे रही हैं।

एक ट्वीट में साल 2020 में लीना ने कहा था, “राम नहीं है भगवान। वह सिर्फ भाजपा द्वारा बनाई गई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन हैं।” 

इसी तरह साल 2013 में लीना ने कहा था, ” अगर मेरे जीते जी नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो मैं अपने पासपोर्ट, राशन कार्ड, पैन कार्ड और अपनी नागरिकता सब छोड़ दूँगी। कसम से।”

कनाडा ने लगाई लीना को लताड़

उल्लेखनीय है कि लीना मणिमेकलई की हरकत के बाद कनाडा के भारतीय दूतावास ने भी डायरेक्टर को लताड़ लगाई थी। अपने बयान में दूतावास ने कहा था, “हमें हिन्दू समुदाय के नेताओं की तरफ से एक फिल्म के पोस्टर में हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानजनक तरीके से प्रदर्शित किए जाने की शिकायतें मिली हैं। इस फिल्म को टोरंटो स्थित ‘आगा खान म्यूजियम’ में ‘अंडर द टेंट’ परियोजना के तहत दिखाया जा रहा है। टोरंटो में हमारे काउंसलेट जनरल ने इस कार्यक्रम के आयोजकों के समक्ष इन चिंताओं को रखा है।”

भारतीय दूतावास ने ये भी जानकारी दी कि कई हिन्दू संगठनों ने कनाडा के प्रशासन से भी संपर्क कर के इस फिल्म को दिखाए जाने के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है। साथ ही भारतीय दूतावास ने भी कनाडा की सरकार एवं प्रशासन से अनुरोध किया कि इस तरह के भड़काऊ कंटेंट्स को कार्यक्रम से तुरंत हटाए जाएँ। दूतावास ने एक प्रेस रिलीज जारी कर के अपनी बात रखी।

आज नूपुर शर्मा की गर्दन माँग रहा अजमेर दरगाह का खादिम, कभी देश के सबसे बड़े सेक्स कांड (100+ छात्राओं का रेप) में भी शामिल थे खादिम

अजमेर की हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वह बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की हत्या के लिए उकसा रहा है। उनकी गर्दन लाने वाले को अपना घर देने की बात कह रहा है। आपको बता दें कि सलमान चिश्ती एक हिस्ट्रीशीटर भी है। उसके खिलाफ 13 से अधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या और हत्या की कोशिश जैसे गंभीर अपराध भी शामिल हैं।

वैसे अपराध से दरगाह के खादिमों की संलिप्तता नई नहीं है। देश के सबसे बड़े सेक्स कांड में भी दरगाह के खादिम घेरे में थे। यह घटना करीब 30 साल पुरानी है। 1992 में अजमेर में 100 से ज्यादा हिंदू लड़कियों को फँसा कर रेप किया गया। अश्लील तस्वीरों से ब्लैकमेल कर उनसे कहा गया कि वे अन्य लड़की को फँसा कर लाए। इस तरह से पूरा रेप चेन सिस्टम बनाया गया था।

फारुक चिश्ती, नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती- इस कांड के मुख्य आरोपित थे। तीनों ही यूथ कॉन्ग्रेस के लीडर थे। फारूक उस समय इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस की अजमेर यूनिट का अध्यक्ष था। नफीस चिश्ती कॉन्ग्रेस की अजमेर यूनिट का उपाध्यक्ष था। अनवर चिश्ती अजमेर में पार्टी का ज्वाइंट सेक्रेटरी था। साथ ही तीनों अजमेर के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खादिम भी थे। इस तरह से उनके पास राजनैतिक और मजहबी, दोनों ही ताकत थी।

बताया जाता है कि आरोपितों ने सबसे पहले एक बिजनेसमैन के बेटे के साथ कुकर्म कर उसकी अश्लील तस्वीर उतारी और उसे अपनी गर्लफ्रेंड को लाने के लिए मजबूर किया। उसकी गर्लफ्रेंड से रेप के बाद उसकी अश्लील तस्वीरें निकाल ली और लड़की को अपनी सहेलियों को लाने के लिए कहा गया। फिर तो यह सिलसिला ही चल पड़ा। बाद में तो पुलिस ने भी माना कि उन्होंने जानबूझकर खादिमों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे सांप्रदायिक तनाव फैल जाएगा।

एक के बाद एक लड़की के साथ रेप करना, न्यूड तस्वीरें लेना, ब्लैकमेल कर उसकी भी बहन/ सहेलियों को लाने के लिए कहना और उन लड़कियों के साथ भी यही घृणित कृत्य करना- इस चेन सिस्टम में 100 से ज्यादा लड़कियों के साथ भी शर्मनाक कृत्य किया।

उस जमाने में आज की तरह डिजिटल कैमरे नहीं थे। रील वाले थे। फोटो निकालने के लिए जिस स्टूडियो में दिया गया वह भी चिश्ती का दोस्त और मुस्लिम समुदाय का ही था। उसने भी एक्स्ट्रा कॉपी निकाल लड़कियों का शोषण किया। ये भी कहा जाता है कि स्कूल की इन लड़कियों के साथ रेप करने में नेता और सरकारी अधिकारी भी शामिल थे। आगे चलकर ब्लैकमैलिंग में और भी लोग जुड़ते गए।

अजमेर शरीफ दरगाह के खादिम चिश्ती परिवार का खौफ इतना था कि जिन लड़कियों की फोटो खींची गई थीं, उनमें से कइयों ने सुसाइड कर लिया। ये लड़कियाँ किसी गरीब या मिडिल क्लास बेबस घरों से नहीं, बल्कि अजमेर के जाने-माने रसूखदार घरों से आने वाली बच्चियाँ थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरो सिंह शेखावत की सरकार ने इसकी जाँच सीबी-सीआईडी को सौंप दी। हालाँकि तब तब तक काफी देर हो चुकी थी। शुरुआत में 18 आरोपितों के खिलाफ जाँच शुरू की गई थी। 30 साल पुराने इस केस में संपूर्ण न्याय मिलना अभी भी बाकी है। सेशन कोर्ट ने 1998 में 8 आरोपितों को आजीवन कारावास की सज़ा तो सुनाई लेकिन इसके 3 सालों बाद 2001 में राजस्थान हाईकोर्ट ने इनमें से 4 को बरी कर दिया। इस कांड से जुड़े 10 दोषी तो जेल की सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं, लेकिन कई अभी भी बाहर घूम रहे हैं।

मुख्य आरोपित फारूक चिश्ती को 2007 में सजी सुनाई गई थी, लेकिन उसे सिजोफ्रेनिया की बीमारी के बाद मानसिक रूप से विक्षिप्त घोषित कर दिया गया। नफीस को 2003 में गिरफ्तार किया गया था। इकबाल भाटी भी बेल पर बाहर है। सलीम चिश्ती को उस घटना के 20 साल बाद 2012 में गिरफ्तार किया गया था। वह बुर्के में पकड़ा गया था। सोहेल गनी चिश्ती ने साल 2018 में आत्मसमर्पण किया था। 

‘हम (मुस्लिम) 75%, नियम हो हमारे’: क्या भारत में ही है गढ़वा? रिपोर्ट में दावा- स्कूल की प्रार्थना बदलवाई, बच्चों को हाथ जोड़ने से रोका

झारखंड के गढ़वा में बने एक स्कूल में मुस्लिम समुदाय द्वारा स्कूल प्रिंसिपल पर इस्लामी नियम लागू करवाने के लिए दबाव बनाने का मामला सामने आया है। घटना गढ़वा के मध्य विद्यालय की है। वहाँ स्कूल प्रिंसिपल युगेश राम के ऊपर क्षेत्र की बहुल आबादी ने स्कूल प्रार्थना बदलने का दबाव बनाया है।

दैनिक जागरण में 5 जुलाई को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम समुदाय ने प्रिंसिपल को कहा कि क्षेत्र में उनकी आबादी 75% है। इसलिए नियम भी उन्हीं के हिसाब से होंगे। समुदाय के दबाव के चलते स्कूल की प्रार्थना बदल गई है। पहले यहाँ ‘दया का दान विद्या का…’ प्रार्थना करवाई जाती थी। हालाँकि अब ‘तू ही राम है तू ही रहीम’ प्रार्थना स्कूल में होने लगी है। इसके साथ स्कूल में बच्चों को हाथ जोड़ कर प्रार्थना करने से भी मना कर दिया गया है।

प्रिंसिपल ने कहा है कि लंबे समय से मुस्लिम समुदाय के लोग 75 फीसदी आबादी का हवाला देकर स्कूलों के नियमों में बदलाव का दबाव बना रहे थे। कुछ समय पहले इन लोगों ने मिलकर स्कूल में प्रार्थना का ढंग बदलवा दिया। उन्होंने इसकी जानकारी कोरवाडीह पंचायत के मुखिया और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जिला शिक्षा पदाधिकारी कुमार मयंक भूषण ने घटना पर संज्ञान लेते हुए बताया कि विद्यालय में प्रार्थना सभा को अपने हिसाब से कराने को लेकर विद्यालय के शिक्षकों को मजबूर किए जाने की सूचना उनके पास आ गई है। वह इसकी जाँच करवा रहे हैं। सरकार आदेश की नाफरमानी करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएग।

बता दें कि प्रशासन तक बात पहुँचने के बाद गाँव के मुखिया शरीफ अंसारी ने कहा कि उन्हें इस मामले में हाल में (सोमवार को) पता चला है। अब वह विद्यालय प्रबंधन समिति एवं ग्रामीणों की बैठक कर समाधान करना चाहते हैं।

हालाँकि रिपोर्ट बताती है कि जब गढ़वा के मुस्लिम युवक स्कूल में आकर हंगामा करते थे तो इस बारे में मुखिया शरीफ अंसारी को जानकारी दी गई थी। उन्होंने आकर ग्रामीणों को समझाया भी था लेकिन जब किसी ने नहीं सुनी तो प्रिंसिपल को ही सलाह दी गई कि स्कूल प्रिंसिपल ग्रामीणों के मुताबिक ही स्कूल का संचालन करें।

अजमेर दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती ने नूपुर शर्मा की हत्या के लिए उकसाया, कहा- जो लाएगा ​उसकी गर्दन, उसे दूँगा अपना मकान

अजमेर के हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के एक खादिम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस खादिम की पहचान सलमान चिश्ती के रूप में हुई है। वीडियो में वह भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को जान से मारने की धमकी दे रहा है। उसने नुपर शर्मा की गर्दन काटने वाले को अपना मकान और संपत्ति देने का भी ऐलान किया है। यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है, जब कुछ दिन पहले अजमेर दरगाह के दीवान जैनुल आबेदीन अली खान ने दावा किया था कि भारतीय मुस्लिम देश में तालिबानी मानसिकता को कबूल नहीं करेंगे।

सलमान चिश्ती हिस्ट्रीशीटर भी है। उसके खिलाफ 13 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप भी हैं। वीडियो में सलमान चिश्ती कह रहा है कि वक्त पहले जैसा नहीं रहा, वरना वह बोलता नहीं। आगे वह कहता है, “कसम है मुझे पैदा करने वाली मेरी माँ की, मैं उसे सरेआम गोली मार देता। मुझे मेरे बच्चों की कसम, मैं उसे गोली मार देता और आज भी सीना ठोक कर कहता हूँ जो भी नुपुर शर्मा की गर्दन लाएगा, मैं उसे अपना घर दे दूँगा और रास्ते पर निकल जाऊँगा। ये वादा करता है सलमान।”

इसके अलावा, उसने खुद को ‘ख्वाजा का सच्चा सिपाही’ बताया और मुस्लिमों को भड़काने की कोशिश की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजमेर दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती ने 17 जून को दरगाह के बाहर निकाले गए मौन जुलूस के दौरान भड़काऊ भाषण दिया था, जिसमें ‘गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही साजा, सर तन से जुदा’ के नारे लगे थे।

वीडियो वायरल होने के बाद सलमान चिश्ती के खिलाफ अजमेर शहर के अलवर गेट थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। जिले के एएसपी विकास सांगवान ने मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि करते हुए कहा है कि उसकी तलाश की जा रही है। यह भी बताया जा रहा है कि सलमान चिश्ती का लोकेशन कश्मीर आ रहा है। 

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने कहा कि उन्हें यह वीडियो व्हाट्सएप के जरिए भी मिला है। इस वीडियो को लेकर पुलिस प्रशासन का रवैया बेहद सख्त है, वीडियो में सलमान चिश्ती नशे की हालत में नजर आ रहा है। इस संबंध में पुलिस ने दरगाह और अंजुमन के अधिकारियों से भी बात की है। सलमान चिश्ती दरगाह थाना क्षेत्र का रहने वाला है, पुलिस उसकी तलाश कर रही है। 

गौरतलब है कि नुपूर शर्मा के समर्थन में वीडियो पोस्ट करने वाले कन्हैया लाल की हत्या के बाद अजमेर दरगाह दीवान जैनुल आबेदीन अली खान ने कहा था कि भारत के मुस्लिम देश में कभी भी तालिबानी मानसिकता को कबूल नहीं करेंगे। उन्होंने एक बयान में कहा था कि कोई भी धर्म मानवता के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा नहीं देता है, विशेष रूप से इस्लाम में सभी शिक्षाएँ शांति के स्त्रोत के रूप में कार्य करती हैं। खान ने कहा कि आरोपित कुछ कट्टरपंथी समूहों का हिस्सा थे जो हिंसा के रास्ते से ही समाधन ढूँढते हैं। एक तरफ जहाँ दरगाह के प्रमुख अमन की बातें करते हैं, वहीं दूसरी तरफ दरगाह का खादिम नुपुर शर्मा को मारने के लिए उकसाता है।