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मौसिम कुरैशी ने 15 साल की हिन्दू लड़की को 3 महीने तक घर में कैद कर किया दुष्कर्म, मुस्लिम बनाने का भी आरोप: गिरफ्तार

यूपी के मथुरा में लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। जहाँ 15 साल की हिंदू नाबालिग लड़की को प्रेम जाल में फँसाकर उससे 3 महीने तक दुष्कर्म करने का आरोप पीड़िता की माँ ने आरोपित मौसिम कुरैशी पर लगाया है। वहीं FIR के बाद पुलिस ने आरोपित मौसिम कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस इस मामले में आरोपित से पूछताछ कर रही है। मामले में पुलिस ने बहला फुसलाकर भगा ले जाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

क्या है मामला

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मथुरा के थाना जमुनापार इलाके के रहने वाले मौसिम कुरेशी नाम के मुस्लिम युवक ने पड़ोस में रहने वाली 15 वर्षीय नाबालिग हिन्दू लड़की को बहला-फुसलाकर अपने प्रेम जाल में फँसा लिया और 3 महीने तक उसे घर में कैद कर उसका मानसिक और शारीरिक शोषण करता रहा। इतना ही नहीं पीड़ित परिवार ने बेटी के धर्म परिवर्तन का भी आरोप लगाया है। नाबालिग फरवरी 2022 से ही घर से गायब है।

वहीं पीड़िता की माँ का कहना है कि जब वह थाना जमुनापार में पिछले कई महीने से कार्रवाई को लेकर पहुँची तो कोई कार्रवाई नहीं की गई। बल्कि कहा जा रहा है कि पुलिस ने पीड़िता की माँ को ही धमका दिया। वहीं जब पीड़िता की विधवा माँ अपनी बेटी को मौसिम कुरैशी के घर से लेने जाती, तो उसे डरा धमका कर भगा दिया जाता। अब चार महीने बाद एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर के आदेश पर पुलिस ने आरोपित मौसिम कुरैशी और उसके परिवार के खिलाफ जमुनापार थाने में केस दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके साथ ही पीड़ित नाबालिग लड़की के बयान भी दर्ज किए गए हैं।

इस मामले में पीड़िता की माँ का कहना है कि उसे यह बताया जाता था कि मौसिम ने उसकी बेटी से निकाह कर लिया है। पीड़िता की विधवा माँ लगातार न्याय के लिए अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रही थी, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। वहीं इस मामले में पीड़िता की माँ ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपित मौसिम कुरैशी ने कुछ पुलिसवालों के साथ मिलकर नाबालिग पीड़िता को मथुरा से दूर कानपुर नारी निकेतन भिजवा दिया था। इस मामले में मीडिया रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि आरोपित का मादक पदार्थों की बिक्री का बड़ा अवैध कारोबार है।

‘मेरे लिए काली मांस भक्षी, शराब वाली देवी’: सिगरेट वाले पोस्टर पर बोलीं MP महुआ मोइत्रा, TMC ने कहा – उनके निजी विचार, हम निंदा करते हैं

पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा ने माँ काली पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सांसद ने माँ काली को मांस भक्षण करने वाली और शराब पीने वाली देवी बता दिया। हालाँकि, पार्टी ने खुद को इन बयानों से अलग कर लिया है। बता दें कि माँ काली को एक फिल्म के पोस्टर में सिगरेट पीते हुए और हाथ में LGBTQ का झंडा लिए दिखाया गया, जिससे हिन्दुओं की भावनाएँ आहत हुई हैं और वो आक्रोशित हैं।

इसी पोस्टर को लेकर महुआ मोइत्रा ने मंगलवार (5 जुलाई, 2022) को बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनके लिए काली मांस खाने वाली और शराब को स्वीकार करने वाली देवी हैं। उन्होंने दावा किया कि कई जगहों पर देवी-देवताओं को व्हिस्की चढ़ाई जाती है। उन्होंने दावा किया कि हमारे पास इसकी स्वतंत्रता है कि हम हमारे देवी-देवताओं को किसी भी रूप में सोच सकते हैं। 2 दिवसीय ‘इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट 2022’ में बोलते हुए उन्होंने ये बातें कहीं।

बकौल महुआ मोइत्रा, सिक्किम में माँ काली को व्हिस्की चढ़ाई जाती है, जबकि किसी दूसरी जगह ये ईशनिंदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि जैसे उत्तर प्रदेश में जाकर माँ काली को प्रसाद के रूप में व्हिस्की चढाने की बात की जाए तो वो इसे ईशनिंदा कहेंगे। महुआ मोइत्रा ने खुद को आलोचना करने की पक्षधर बताते हुए कहा कि इसमें और हिंसा भड़काने में अंतर है। उन्होंने कहा कि तारापीठ में साधु-संत स्मोकिंग करते हुए दिखते हैं।

वहीं TMC ने कहा कि महुआ मोइत्रा द्वारा दिए गए बयान और माँ काली को लेकर उनके द्वारा अभिव्यक्त किए गए विचार उनके निजी हैं और पार्टी किसी भी सूरत में या किसी भी रूप में इसका समर्थन नहीं करती। साथ ही पार्टी के आधिकारिक बयान में ये भी कहा गया कि ‘ऑल इंडिया तृणमूल कॉन्ग्रेस (AITC)’ ऐसे किसी भी बयान की पुरजोर निंदा करता है। इसके बाद महुआ मोइत्रा ने संघियों को ‘झूठा’ बताते हुए कहा कि उन्होंने किसी स्मोकिंग वाले पोस्टर का समर्थन नहीं किया है। हालाँकि, तारापीठ वाले बयान पर उन्होंने कायम होने की बात कही।

बताते चलें कि हिंदू देवी ‘काली’ को अपनी फिल्म में सिगरेट पीते हुए दिखाने वाली लीना के पुराने ट्वीट लगातार वायरल हैं। इन ट्वीट से पता चलता है कि वो हिंदूफोबिक मानसिकता से लंबे समय से ग्रसित हैं। उन्होंने श्रीराम भगवान से लेकर गणपति भगवान तक को गाली दी हुई है। एक ट्वीट में लीना मणिमेकलई ने कहा, “मैं हकीकत में उन देवताओं पर ट्वीट करते-करते थक गई हूँ जो अस्तित्व में हैं भी नहीं और धार्मिक घृणा व कट्टरता की घटिया राजनीति के कारण अस्तित्व में ला दिए जाते हैं।” अपने ट्वीट में लीना गणपति भगवान के लिए व उनकी आराधना करने वालों को गाली दे रही हैं।

द्रौपदी मुर्मू को ‘RSS का मोहरा’ बताने के लिए प्रशांत भूषण ने की फोटो से छेड़खानी, पकड़े जाने पर ट्वीट डिलीट किया

NDA द्वारा राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू का नाम कई लोगों को अखर रहा है। यही वजह है कि वह एक जनजाति महिला नेता के विरुद्ध सोशल मीडिया पर फर्जी दावे कर रहे हैं। मोदी सरकार के कट्टर विरोधी प्रशांत भूषण इन्हीं लोगों में से एक हैं।

उन्होंने द्रौपदी मुर्मू की एक फोटो शेयर करके दावा किया है कि अगर वह राष्ट्रपति बन गईं तो पीछे से भाजपा और आरएसएस काम करेंगे, उनका केवल ठप्पा होगा। इतना ही नहीं प्रशांत भूषण ने ये भी कहा कि मुर्मू स्वतंत्र रूप से कार्यभार नहीं संभाल पाएँगी।

अपने दावे को साबित करने के लिए उन्होंने एक फोटो शेयर की है। इस फोटो में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और द्रौपदी मुर्मू भारत माता के आगे शीष झुकाते दिख रहे हैं। इस तस्वीर के साथ प्रशांत ने लिखा, “भाजपा की राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू मोहन भागवत से मिलने नागपुर में आरएसएस के हेडक्वार्टर गईं! क्या कोई संदेह बचता है कि वो सिर्फ एक मोहरा होंगी और स्वतंत्रत रूप से नहीं काम कर पाएँगी?”

भूषण ने अपने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया। कारण है- इसका फर्जी होना।

दरअसल जो फोटो प्रशांत भूषण ने साझा की है वो एडिटिड है और दो फोटो काटकर एक फोटो बनाई गई है। एक फोटो आरएसएस के ट्विटर पर 11 मार्च 2022 को अपलोड की गई थी। इसमें मोहन भागवत गुजरात के एक कार्यक्रम में माँ भारती को प्रणाम कर रहे थे। उनके साथ दत्तारेया होसबोले भी थे। फोटो में देख सकते हैं कि बैकग्राउंड वही है, कपड़े वही हैं, बस द्रौपदी मुर्मू इसमें नहीं है।

अब सवाल है कि द्रौपदी मुर्मू की यह तस्वीर यहाँ आई कैसे। तो बता दें कि इस तस्वीर को द क्विंट के आर्टिकल में 24 जून 2022 को पब्लिश किया गया था। आर्टिकल में द्रौपदी मुर्मू झारखंड सीएम हेमंत सोरेन का अभिवादन कर रही थीं। वहीं सोरेन भी उन्हें झुक कर नमस्ते कर रहे थे।

इसी तस्वीर को एडिटिड तस्वीर में जोड़ा गया और प्रशांत भूषण ने लोगों को बरगलाने के लिए इसे शेयर भी कर दिया। हालाँकि जब बाद में सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा इस पर ये कहा गया कि ये मैनिपुलेट करने वाला ट्वीट है तब इसे हटाया गया।

अब दोनों तस्वीरों को देख पता लगाया जा सकता है कि कैसे तस्वीर एडिट करने वाले ने द्रौपदी मुर्मू को संघी प्रदर्शित करने के लिए फोटो से छेड़छाड़ कर उसकी मिरर इमेज बनाई और फिर उसे आगे बढ़ाया। प्रशांत भूषण ने भी मुर्मू से जुड़ी फर्जी खबर फैलाने में योगदान दिया और मनगढ़ंत दावा किया।

हकीकत में भूषण लंबे से फर्जी न्यूज फैलाने के लिए कुख्यात रहे हैं। पिछले साल उन्होंने कोविड को लेकर, कोविड वैक्सीन को लेकर, उसके प्रभावों को लेकर, मास्क के विरोध में कई तरह के झूठ फैलाए थे।

SDM सैयद रियाज अहमद ने पार्टी में की किस करने की कोशिश, पिलाई शराब: इंटर्नशिप के लिए झारखंड आई थी IIT की नाबालिग छात्रा, FIR दर्ज

झारखंड के खूँटी जिले में SDM (अनुमंडल पदाधिकारी) सैयद रियाज अहमद पर यौन शोषण के आरोप लगे हैं। इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। हिमाचल प्रदेश की एक IIT (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) की छात्रा के द्वारा ये आरोप लगाया गया है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि एक पार्टी के दौरान SDM ने उनसे छेड़छाड़ की। पीड़िता ने थाने में भी FIR दर्ज कराई है। जिला पुलिस ने पूछताछ के लिए अधिकारी को हिरासत में ले लिया है।

IIT मंडी में ग्रामीण विकास पढ़ रहीं उक्त छात्रा इंटर्नशिप करने के लिए खूँटी आई थी। जिस पार्टी को लेकर ये आरोप लगाए गए हैं, वो शुक्रवार (1 जुलाई, 2022) को आयोजित की गई थी। आरोप है कि उस पार्टी में छेड़खानी करते हुए SDM सैयद रियाज अहमद ने छात्रा को किस करने का प्रयास किया। साथ ही वो गलत नज़र से भी महिला को घूर रहे थे। 4 जुलाई की देर शाम इस मामले की FIR दर्ज कराई गई। सैयद रियाज अहमद 2018 बैच के IAS अधिकारी हैं।

अकादमिक टूर पर झारखंड आई पीड़िता का आरोप है कि उसे शराब भी पिलाया गया। यौन शोषण के आरोपों के बाद खूँटी स्थित CJM की अदालत में हिमाचल प्रदेश की छात्रा का बयान दर्ज कराया गया। सैयद रियाज अहमद शादीशुदा हैं और उनकी पत्नी धनबाद की रहने वाली हैं। उनकी पत्नी भी नागरिक सेवा में हैं और वर्तमान में छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में बतौर SDM कार्यरत हैं। खूँटी के पुलिस अधीक्षक अमन कुमार ने इस घटना की पुष्टि की है।

उक्त पार्टी SDM के आवास पर ही हुई थी। उनके खिलाफ IPC की धाराओं 376D (एक या उससे अधिक व्यक्ति द्वारा किसी स्त्री के साथ यौन दुर्व्यवहार), 376A (बिना सहमति के स्त्री के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाना), 323 (जानबूझ कर चोट पहुँचाना), 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान), 506 (धमकी देना), 34 (समान इरादे से आपराधिक कृत्य) और POCSO एक्ट (यौन अधिकार से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) के तहत मामला दर्ज किया गया है, क्योंकि पीड़िता नाबालिग है।

जिस रिटायर्ड जस्टिस ने नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट जजों को दिखाया था आइना, उनके खिलाफ अवमानना का मामला चलाने को लेकर AG को पत्र

जया सुकिन नामक वकील ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल (KK Venugopal) को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन ढींगरा और अधिवक्ता अमन लेखी, राम कुमार के खिलाफ अवमानना ​​कार्यवाही शुरू करने की अनुमति माँगी है। तीनों ने उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या के बाद नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की गई टिप्पणियों को लेकर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय न्यायपालिका पर सवाल उठाए थे।

लॉ बीट के अनुसार, वकील जया सुकिन ने पत्र में दावा किया है कि न्यायमूर्ति ढींगरा और दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा की गई टिप्पणी का उद्देश्य न केवल सर्वोच्च न्यायालय की अखंडता पर संदेह करना था, बल्कि देश की सर्वोच्च न्यायपालिका की छवि धूमिल करना था। पत्र में यह भी कहा गया है कि न्यायपालिका के खिलाफ असंसदीय और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल अदालतों की अवमानना के दायरे में आता है।

यह मामला तृणमूल कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता साकेत गोखले द्वारा जस्टिस कांत और परदीवाला की विवादास्पद टिप्पणियों पर सवाल उठाने के लिए ऑपइंडिया और इसकी संपादक नूपुर शर्मा को गलत तरीके से फँसाने के लिए एजी से सहमति माँगने के कुछ दिनों बाद आया है। ऑपइंडिया ने अपने एक लेख में कहा था कि जजों के बयान से इस्लामवादियों का हौसला बढ़ा है।

इस तरह टिप्पणी करनी है तो राजनेता बन जाना चाहिए: एसएन ढींगरा

हाल ही में एक न्यूज चैनल से बातचीत में रिटायर्ड जस्टिस एसएन ढींगरा ने कहा था कि अगर इस तरह जजों को टिप्पणी देनी है तो उन्हें राजनेता बन जाना चाहिए। वे लोग जज क्यों है? ढींगरा ने सवाल उठाया कि आखिर सुप्रीम कोर्ट के जजों ने अपनी कही बातों को लिखित आदेश में क्यों नहीं शामिल किया।

उन्होंने कहा था, “मेरे ख्याल से ये टिप्पणी बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। उनका कोई अधिकार नहीं है कि वो इस तरह की टिप्पणी करें, जिससे जो व्यक्ति न्याय माँगने आया है, उसका पूरा करियर चौपट हो जाए या जो निचली अदालते हैं वो पक्षपाती हो जाएँ। सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर को सुना तक नहीं और आरोप लगाकर अपना फैसला सुना दिया। मामले में न सुनवाई हुई, न कोई गवाही, न कोई जाँच हुई और न नूपूर को अवसर दिया गया कि वो अपनी सफाई पेश कर सकें। इस तरह सुप्रीम कोर्ट का टिप्पणी पेश करना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि गैर कानूनी और अनुचित भी। ऐसी टिप्पणी सर्वोच्च न्यायालय को करने का कोई अधिकार नहीं है।”

उन्होंने ये भी बताया था कि अगर अब सुप्रीम कोर्ट के जज को ये पूछा जाए कि नूपूर शर्मा का बयान कैसे भड़काने वाला है, इस पर वह आकर कोर्ट को बताएँ, तो उन्हें पेश होकर ये बात बतानी पड़ेगी। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस ढींगरा ने ये भी कहा था कि अगर वो ट्रायल कोर्ट के जस्टिस होते तो वो सबसे पहले इन्हीं जजों को बुलाते और कहते, “आप आकर गवाही दीजिए और बताइए कैसे नूपूर शर्मा ने गलत बयान दिया और उसे आप किस तरह से देखते हैं। टीवी मीडिया और चंद लोगों के कहने पर आपने अपनी राय बना ली। आपने खुद क्या और कैसे महसूस किया, इसे बताएँ।”

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जज जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला ने उदयपुर हत्याकांड के लिए नूपुर शर्मा को ‘जिम्मेदार’ ठहराया था। 1 जुलाई 2022 को मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था, “नूपुर शर्मा के बयान भड़काने वाले थे। देश में जो कुछ हो रहा है, उसके लिए केवल यह महिला ही जिम्मेदार है। इसके लिए उन्हें देश से माफी माँगनी चाहिए।”

नॉर्वे: कुरान जलाने वाले नेता पर कट्टरपंथी महिलाओं का हमला, फुल स्पीड में गाड़ी को मारी टक्कर, देखिए Video

नॉर्वे के ओसलो में इस्लाम का विरोध करने वाले समूह ‘SIAN ( स्टॉप द इसलामाइजेशन ऑफ नॉर्वे)’ के एक नेता की गाड़ी को दूसरी गाड़ी द्वारा जानबूझकर ठोके जाने का मामला प्रकाश में आाया है। बताया जा रहा है कि इस कार एक्सीडेंट से कुछ समय पहले इसी नेता ने अपने साथियों के साथ मुस्लिमों के बीच जाकर कुरान की प्रति को जलाया था जिसके बाद उनकी कार पर मुस्लिम समुदाय की ओर से हमला किया गया।

नॉर्वे पुलिस ने कहा कि उन्होंने 2 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया है। इनके ऊपर ‘स्टॉप द इसलामाइजेशन ऑफ नॉर्वे’ के नेता लॉर्स थोर्सन की एसयूवी पर जानबूझकर गाड़ी चढ़ाने का इल्जाम है। घटना के समय गाड़ी में बैठे 5 लोग घायल बताए जा रहे हैं जबकि एक को ज्यादा चोट लगने की वजह से अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी।

बता दें कि खुली रोड पर इस तरह एसयूवी को निशाना बनाए जाने की घटना होने से पहले थोर्सन और समूह के अन्य कार्यकर्ताओं को लेकर कहा जा रहा है कि वो लोग पहले मोर्टेनस्रूड गए। फिर वहाँ कुरान को आग लगाई और विरोध होने पर जगह से निकल गए।

हालाँकि, तब तक वहाँ देखते ही देखते भीड़ जमा हो गई थी। उन्हीं में से एक महिला ने कुरान को छीना और उसके पेज पूरी तरह जलने से पहले आग बुझा दी। इसके बाद उसी महिला ने मर्सिडीज गाड़ी से उनका पीछा शुरू कर दिया। खुली रोड पर एसयूवी को जोर से टक्कर मारी गई। गाड़ी स्पीड में थी इसलिए पलट गई।

पूरी घटना को, पीछे आ रही कार में बैठे व्यक्ति ने रिकॉर्ड किया और अब ये वीडियो सोशल मीडिया पर हर जगह वायरल है। सामने आई तस्वीरों से पता चलता है कि एसयूवी को टक्कर मारने वाली गाड़ी में दो महिलाएँ सवार थीं। इनमें से एक की तस्वीर भी लोग साझा कर रहे हैं। फोटो में महिला के चेहरे पर गुस्सा साफ देखा जा सकता है।

डेविड एथरटन ने इसे शेयर करते हुए बताया, “नॉर्वे की कट्टरपंथी मुस्लिम औरतों ने लॉर थोरेन पर हमला किया जो कि SIAN के प्रमुख हैं। इन औरतों ने उनकी गाड़ी को टक्कर मार पलट दिय। दोनों महिला गिरफ्तार की जा चुकी हैं।”

ये घटना ओसलो में हुई गोलीबारी की घटना के बाद की है जिसे नॉर्वे की खुफिया एजेंसी ने इस्लामी आतंकवाद बताया था। गोलीवारी की घटना में दो लोगों की मृत्यु और 21 लोग घायल हुए थे।

व्हाट्सएप्प ग्रुप में उमेश कोल्हे के साथ ही था युसूफ खान, हत्या के लिए उकसाया-फिर अंत्येष्टि में भी हुआ शामिल: NIA की हिरासत में सभी 7 आरोपित

महाराष्ट्र के अमरावती में केमिस्ट उमेश कोल्हे (Umesh Kolhe) की हत्या के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि वाट्सऐप पोस्ट की वजह से उमेश की आरोपितों ने हत्या कर दी थी। उस पोस्ट में उमेश ने साफ शब्दों में बीजेपी की पूर्व नेता नूपुर शर्मा का समर्थन किया था। वहीं अब इस मामले में अब तक गिरफ्तार सभी 7 आरोपितों को NIA ने अपनी कस्टडी में ले लिया है।

व्हाट्सएप्प चैट से हुए नए खुलासे

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, अमरावती में केमिस्ट की हत्या की जाँच कर रही स्थानीय पुलिस का कहना है कि उमेश कोल्हे और हत्यारा यूसुफ खान एक ही वाट्सएप ग्रुप के सदस्य थे। वेटेरनरी दवाओं का व्यवसाय करने वाले कोल्हे ने वेटेरनरी डॉक्टरों का एक वाट्सएप ग्रुप बना रखा था। वेटेरनरी डॉक्टर यूसुफ खान भी इस ग्रुप का सदस्य था। उमेश कोल्हे ने ‘ब्लैक फ्रीडम’ नाम के वॉट्सऐप ग्रुप में नूपुर शर्मा के समर्थन में मैसेज डाला था। इस मैसेज को कुछ और लोगों को भेजकर यूसुफ खान ने उन्हें उमेश कोल्हे ​के खिलाफ भड़काया था। यही नहीं पहले तो यूसुफ ने इरफान जैसे कट्टरपंथी को हत्या के लिए उकसाया। बाद में उनकी (उमेश कोल्हे) अंत्येष्टि में भी शामिल हुआ।

जानकारी के मुताबिक, यूसुफ ने कोल्हे के मैसेज का स्क्रीनशॉट लेकर दूसरे वॉट्सऐप ग्रुप में डाल दिया। इस ग्रुप का नाम ‘कलीम इब्राहिम’ ग्रुप था। पोस्ट देखकर इस ग्रुप के मेंबर बहुत नाराज हो गए। उसी के बाद उन्होंने उमेश कोल्हे से बदला लेने का फैसला किया। इसके चलते इरफान खान ने अपने समुदाय के कुछ लोगों को पैसों का लालच देकर उनकी (उमेश कोल्हे) बेरहमी से हत्या करवा दी।

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लैक फ़्रीडम नाम के WhatsApp ग्रूप पर 14 जून को 7.57 बजे उमेश कोल्हे ने नूपुर शर्मा के बयान के समर्थन में एक पोस्ट डाला था। उस वाट्सऐप चैट में उमेश कोल्हे का नाम The Amit Medi के नाम से सेव था। उमेश ने अपनी पोस्ट में लिखा हुआ था, “I Support Nupur Sharma।”

फोटो साभार: आज तक

बताया जा रहा है कि हत्या से एक दिन पहले उमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में भी एक पोस्ट शेयर की थी।

फोटो साभार: आज तक

NIA की हिरासत में सभी आरोपित

वहीं राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने अमरावती के केमिस्ट की हत्या में शामिल सभी सात आरोपितों को हिरासत में ले लिया है। एक पुलिस अधिकारी ने मंगलवार (5 जुलाई 2022) को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एनआईए ने सभी आरोपितों को हिरासत में ले लिया, जिन्हें अमरावती अदालत में पेश करने के बाद सोमवार (4 जुलाई 2022) को चार दिन की ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया था। पुलिस के अनुसार, आरोपितों को 8 जुलाई या उससे पहले एनआईए की मुंबई अदालत में पेश किया जा सकता है।

मालूम हो कि पुलिस कमिश्नर आरती सिंह ने सोमवार को बताया था कि बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने और व्हाट्सएप पर स्टेटस लगाए जाने के कारण कई लोगों को धमकी भरे फोन आ रहे हैं। महाराष्ट्र की अमरावती पुलिस को केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या के तार भी नुपुर शर्मा का समर्थन करने वाले पोस्ट से जुड़े थे, इसके बारे में पता था। लेकिन मामले के ‘अत्यंत संवेदनशील’ होने के कारण पहले इसका खुलासा नहीं किया गया। वहीं पुलिस इस मामले में एक और संदिग्ध शमीम अहमद की तलाश भी कर रही है।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने इस मामले में अपनी एफआईआर दर्ज करके बताया कि देश के एक वर्ग को निशाना बनाने का प्लान है। जाँच के बाद अभी और खुलासे होंगे। बताया जा रहा है कि हत्याकांड के मास्टरमाइंड शेख इरफान ने ही बाकी आरोपितों को 10-10 हजार रुपए का लालच देकर हत्या करवाई थी।

बता दें कि इस मामले में अब तक इरफान के अलावा 7 गिरफ्तारी हो चुकी है। इनकी पहचान मुदस्सिर अहमद (22), शाहरूख पठान (25), अब्दुल तौफिक (24), शोएब खान (22), अतिब रशीद (22) और युसूफ खान उर्फ़ बहादुर खान (44) के रूप में हुई है। इन लोगों के ऊपर आईपीसी की धारा 302, 120 और 109 के तहत केस दर्ज किया गया है। मृतक के घरवालों ने केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में डालने को कहा है। मृतक के भाई ने यह भी बताया कि जिन आरोपितों को पुलिस ने पकड़ा है, उनमें से एक वेटनरी डॉक्टर यूसुफ है और उसकी उमेश कोल्हे से अच्छी दोस्ती थी। घरवाले उसे 2006-07 से जानते थे। युसूफ पर आरोप है कि उसी ने कोल्हे का पोस्ट संदिग्ध व्हॉट्सग्रुप में शेयर किया था।

उमेश कोल्हे हत्याकांड

गौरतलब है कि इरफान ने उमेश कोल्हे को मारने की योजना सबसे पहले 19 जून को बनाई थी। हालाँकि, उस दिन इरफान शेख डर गया और घटना को अंजाम नहीं दे पाया। 20 जून को फिर वारदात की प्लॉनिंग हुई, मगर तब उमेश के घर से फोन आ गया और वह समय से पहले अपनी दुकान से निकल गए। इसके बाद आरोपितों ने 21 जून 2022 को पूरी तैयारी के साथ उमेश का पीछा किया। इस बार वह उमेश का सिर धड़ से अलग करना चाहते थे। मगर, पीछे दूसरी मोटर गाड़ी से आ रहे बेटे-बहू जोर से चिल्ला दिए। उनकी आवाज सुन हत्यारे भाग खड़े गुए। लेकिन, तब तक वह उमेश कोल्हे को मौत के घाट उतार चुके थे। उनका शव जमीन पर लहू-लुहान था। बेटा उन्हें अस्पताल भी लेकर गया लेकिन वहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम में सामने आया कि उनके गले पर जो जख्म था, वो 5 इंच चौड़ा, 7 इंच लंबा और 5 इंच गहरा था। उनकी साँस लेने वाली नली, भोजन निगलने वाली नली और आँखों की नसों पर भी वार किए गए थे।

अजमेर दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती पर FIR : कहा था- नूपुर शर्मा की गर्दन लाओ, अपना मकान दूँगा

उदयपुर में कन्हैया लाल और महाराष्ट्र में उमेश कोल्हे की हत्या का मामला अभी ठंडा नहीं पड़ा था कि हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती ने नूपुर शर्मा का कत्ल करने की खुलेआम धमकी देने पर FIR दर्ज कर लिया गया है। वहीं वीडियो वायरल होने के बाद सलमान चिश्ती के खिलाफ अजमेर शहर के अलवर गेट थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है जिस पर जाँच जारी है। इसके अलावा इस मामले में एएसपी विकास सांगवान ने बताया कि सलमान चिश्ती के खिलाफ हत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है और उसकी तलाश की जा रही है।

पुलिस ने बताया कि प्रथमदृष्टया जो जानकारी सामने आई है ये उसके हुजरे का ही वीडियो है। उसके खिलाफ हत्या के लिए उकसाने, धमकी देने और उसे धार्मिक रूप देने के साथ अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि वीडियो के बारे में तथ्यपूर्ण जानकारी तभी सामने आएगी जब आरोपित गिरफ्तार होगा। रात से ही उसकी तलाश जारी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सलमान चिश्ती दरगाह पुलिस थाने का एक हिस्ट्रीशीटर भी है, और उसके खिलाफ हत्या व हत्या के प्रयास के कई मामले दर्ज हैं। जो नूपुर शर्मा का सिर कलम करने वालों को अपना मकान देने की बात कहता नजर आता है। यह वीडियो वैसा ही है, जैसा वीडियो उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल के हत्यारे मोहम्मद रियाज अट्टारी और गौस मोहम्मद ने कन्हैयालाल की हत्या से पहले तैयार किया था। करीब दो मिनट पचास सेकंड के इस वायरल विडियो में सलमान चिश्ती खुलेआम नूपुर शर्मा का गर्दन काटने के लिए उकसा रहा है।

इसके अलावा भी आदतन अपराधी सलमान चिश्ती के खिलाफ अलग-अलग थानों में कई मामले दर्ज हैं। वहीं दरगाह थानाधिकारी दलबीर सिंह फौजदार ने मीडिया को बताया कि सलमान के खिलाफ दरगाह थाने में कुल 4 मामले दर्ज हैं जिनमें हत्या व हत्या का प्रयास सहित लड़ाई-झगड़े व अन्य धाराओं से जुड़े मामले भी शामिल हैं।

दरगाह में बने हुजरे में ही बनाया धमकी देने वाला वीडियो

गौरतलब है कि सलमान चिश्ती ने जो धमकी भरा वीडियो बनाकर वायरल किया है उसे उसने अपने हुजरे में ही बनाया है। इसका खुलासा थानाधिकारी दलबीर सिंह ने करते हुए बताया कि पुलिस जाँच में अभी तक यह पता चला है कि दरगाह के अंदर सभी खादिमों को अपने-अपने हुजरे अलॉट हुए हैं। उन्ही में से एक हुजरा सलमान का भी है और वहीं पर इस वीडियो को बनाया गया है।

बता दें कि वीडियो में सलमान चिश्ती कह रहा है कि वक्त पहले जैसा नहीं रहा, वरना वह बोलता नहीं। आगे वह कहता है, “कसम है मुझे पैदा करने वाली मेरी माँ की, मैं उसे सरेआम गोली मार देता। मुझे मेरे बच्चों की कसम, मैं उसे गोली मार देता और आज भी सीना ठोक कर कहता हूँ जो भी नुपुर शर्मा की गर्दन लाएगा, मैं उसे अपना घर दे दूँगा और रास्ते पर निकल जाऊँगा। ये वादा करता है सलमान।”

वहीं दरगाह के खादिमों की संस्था अंजुमन सैयदजादगान के सचिव सरवर चिश्ती ने कहा कि सलमान चिश्ती ने जो धमकी भरा वीडियो जारी किया है उससे उनका कोई वास्ता नहीं है। हालाँकि, उन्होंने सलमान चिश्ती पर कोई कार्रवाई न करते हुए इसे उन्होंने सलमान चिश्ती का निजी मामला बताया है। फिलहाल, इस मामले में बताया जा रहा है कि पुलिस लगातार सलमान के घर और हुजरे पर नजर बनाए हुए है और उसे पकड़ने की कोशिश की जा रही है।

इस्लाम की भेंट चढ़ गया 33% भारत, 75% वाले गाँव में चाहिए शरिया: डेमोग्राफी चेंज से ‘मुस्लिम पट्टी’ बनाने की भी तैयारी

डेमोग्राफी में बदलाव के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं, ये हिन्दुओं को अब समझ में आ रहा है। ऐसा नहीं है कि इतिहास में इसका खामियाजा हमें नहीं भुगतना पड़ा, बल्कि उस इतिहास को हम भूल चुके हैं। पाकिस्तान के रूप में हमारा 8 लाख वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र और बांग्लादेश के रूप में डेढ़ लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र हमसे छिन गया। अफगानिस्तान, जो पहले भारतवर्ष का हिस्सा हुआ करता था, आज उस साढ़े 6 लाख वर्ग किलोमीटर में शरिया चलता है।

यानी, कुल मिला कर ये 16 लाख वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र हमारे हाथों से इस्लाम को फिसल गया। ये कोई छोटा क्षेत्र नहीं है, बल्कि भारत के वर्तमान क्षेत्रफल का लगभग आधा है। अर्थात, आधा भारत हमने खो दिया। वहाँ आज हिन्दू बेहाल हैं। पाकिस्तान में उनकी बहू-बेटियों का अपहरण कर जबरन धर्मांतरण और निकाह करा दिया जाता है, अफगानिस्तान में गुरु ग्रन्थ साहिब सिर पर लाद कर भारत लाना पड़ता है और बांग्लादेश में एक झूठी अफवाह के कारण देश भर में दुर्गा पूजा पंडालों पर हमले होते हैं।

ये होता है जनसांख्यिकी में बदलाव का असर। 1930 के दशक के कराची की तस्वीर देखिए। महाशिवरात्रि के मेले में भीड़ दिखेगी। आम हिन्दू वहाँ आते थे, समृद्ध हिन्दुओं की गाड़ियाँ पार्क हुई दिखेंगी। आज कराची में इस तरह के नज़ारे के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता। क्यों? क्योंकि ये मुस्लिम बहुल इलाका है। नेपाल, भूटान, तिब्बत या म्यांमार भी प्राचीन भारत से अलग हुए, लेकिन वहाँ हिन्दुओं पर अत्याचार नहीं होते। कारण कि वहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक नहीं हैं।

अफगानिस्तान में शरिया लागू है। यहाँ तक कि सिनेमा और गीत-संगीत पर भी प्रतिबंध है। भगवान बुद्ध की प्रतिमा को बम से उड़ा दिया गया। गुरुद्वारों पर हमले होते हैं। बांग्लादेश में क़ुरान के अपमान की झूठी अफवाह से कैसे देश भर के मंदिरों पर हमले और आगजनी हुई, हमने देखा। तीनों देशों में अल्पसंख्यकों, खासकर हिन्दुओं की जनसंख्या पिछले कुछ दशकों में कई गुना कम हो गई। जो बचे-खुचे हैं, डर कर रहते हैं। डर कर रहना पड़ता है।

लेकिन, ये तो इस्लामी कट्टरवाद की बस 33% सफलता है। बाकी की सफलता उन्हें तब प्राप्त होगी, जब उनका ‘गजवा-ए-हिंदुस्तान’ का सपना पूरा होगा। पूरे भारत पर इस्लाम का राज। इसकी एक साजिश हमें तभी देखने को मिली थी, जब देश के बँटवारे के समय बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) से लेकर पाकिस्तान तक एक ‘मुस्लिम पट्टी’ की माँग की गई थी। अर्थात, भारत के बीचोंबीच मुस्लिम जनसंख्या बढ़ा कर देश को और खंडित करना।

ये साजिश अभी भी चल रही है। बांग्लादेश से पाकिस्तान तक एक ‘मुस्लिम पट्टी’ बनाए जाने के आरोप लगते रहे हैं, यानी रास्ते में आने वाले सभी जिलों को मुस्लिम बहुसंख्यक बना दो। इससे न सिर्फ भारत के टुकड़े होंगे, बल्कि हिन्दू भी डर कर रहेंगे। पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। पूर्व विधान पार्षद हरेंद्र प्रताप के इस मुस्लिम गलियारे के बारे में बताते हुए जानकारी दी थी कि कैसे इससे पाकिस्तान और बांग्लादेश को जोड़ने की साजिश चल रही है।

उन्होंने आँकड़े गिनाए थे कि मुस्लिम बहुल इलाकों मुजफ्फरनगर (50.14%), मुरादाबाद (46.77%), बरेली (50.13%), सीतापुर (129.66%), हरदोई (40.14%), बहराइच (49.17%) और गोंडा (42.20%) से ‘मुस्लिम पट्टी’ बनाने की साजिश है। कैराना से हिन्दुओं के पलायन और पश्चिम बंगाल में रोहिंग्या मुस्लिमों के बढ़ते प्रभाव को उन्होंने इससे जोड़ कर देखा था। चिकेन्स नेक काटने की साजिश की तो शाहीन बाग़ में शरजील इमाम जैसों ने ही पोल खोल दी।

झारखंड की एक हालिया घटना को ही देख लीजिए। गढ़वा के एक विद्यालय में प्रधानाध्यापक पर इसीलिए इस्लामी नियम-कानून लागू करने का दबाव है, क्योंकि वहाँ मुस्लिम 75% हो गए हैं। ये अलग बात है कि देश के 8 राज्यों में अल्पसंख्यक होने के बावजूद हिन्दुओं को इसका फायदा नहीं मिलता और सुप्रीम कोर्ट भी इससे जुड़ी याचिका रद्द कर चुका है। मुस्लिम कहीं 100% हो जाएँ, फिर भी उन्हें सरकारी स्तर पर अल्पसंख्यकों वाली सारी सुविधाएँ मिलती रहेंगी।

गढ़वा में समुदाय के दबाव के चलते स्कूल की प्रार्थना बदल गई है। पहले यहाँ ‘दया का दान विद्या का…’ प्रार्थना करवाई जाती थी। हालाँकि अब ‘तू ही राम है तू ही रहीम’ प्रार्थना स्कूल में होने लगी है। इसके साथ स्कूल में बच्चों को हाथ जोड़ कर प्रार्थना करने से भी मना कर दिया गया है। गाँव का मुखिया शरीफ अंसारी है। मुस्लिमों के हंगामे के कारण प्रिंसिपल को सलाह दी गई कि उनके कहे अनुसार चलाएँ। क्या आज तक हिन्दुओं ने किसी स्कूल में घुस कर हंगामा किया है कि वहाँ यज्ञ-हवन करवाएँ जाएँ।

ये इस तरह की अकेली घटना नहीं है। राजस्थान के उदयपुर में टेलर कन्हैया लाल तेली का सिर कलम किए जाने का मामला हो या महाराष्ट्र के अमरावती में केमिस्ट उमेश कोल्हे की गर्दन में खंजर घोंप कर उनकी हत्या की घटना, इस्लामी कट्टरपंथ का प्रयास यही है कि हिन्दू डर कर रहें। कश्मीर में दशकों से आम नागरिक निशाना बनाए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में एक छोटी सी घटना पर निकली मुस्लिम भीड़ रेलवे की अरबों की संपत्ति का झटकों में नुकसान कर देती है।

खासकर जहाँ भाजपा की सरकार नहीं है, वहाँ ऐसी घटनाएँ और ज्यादा होती हैं। अव्वल तो ये कि इन्हें तुरंत अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल जाता है। 50 से अधिक इस्लामी मुल्क हैं दुनिया में, ऊपर से कई देशों में वो बहुसंख्यक हैं और कइयों में प्रभावशाली स्थिति में हैं। फिर भी वो पीड़ित बन कर ही रहते हैं। मीडिया आतंकवाद और कट्टरपंथ के विरोध को ‘इस्लामोफोबिया’ कहता है। किसी हिन्दू का सिर जिहादी काट लें, फिर भी ‘TIME’ जैसे मैगजीन एक तरह से ये पूछते हैं कि ये हिन्दू बिना शोर मचाए क्यों नहीं मर रहे?

जहाँ मुस्लिमों की जनसंख्या ज्यादा नहीं है, वहाँ भी कई गली-मोहल्लों में ये एक साथ रहते हैं। ये इलाके फिर ‘संवेदनशील’ कहे जाते हैं। वहाँ मस्जिद होता है। सड़क सरकार की होती है, लेकिन वहाँ से हिन्दू त्योहारों के जुलूस नहीं गुजर सकते। डीजे बजाने पर पत्थरबाजी होती है। लेकिन, ये सड़क पर नमाज पढ़ सकते हैं। सार्वजनिक स्थान पर शांतिपूर्ण हनुमान चालीसा पाठ को ‘गुंडई’ बता दिया जाता है। यानी, इनकी मंशा है कि ये जहाँ भी रहें, मर्जी इनकी ही चले। शरिया का पालन मुस्लिम ही नहीं, सभी गैर-मुस्लिम भी करें।

उत्तराखंड में भी डेमोग्राफी बदलने की बात सामने आई है। पर्यटन और हिन्दू तीर्थाटन आधारित इस राज्य के उद्योग-धंधों में बाहरी मुस्लिमों का वर्चस्व हो गया है। पश्चिम बंगाल में तो लगभग एक तिहाई जनसंख्या मुस्लिमों की होने जा रही है। तभी भाजपा कार्यकर्ताओं के नरसंहार पर मुस्लिमों की बदौलत सत्ता में आई मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुप रहती हैं। हैदराबाद की सभी विधानसभा और लोकसभा सीटें असदुद्दीन ओवैसी को जाती हैं। बिहार के सीमांचल में मुस्लिम उम्मीदवार ही जीतते हैं। ये होता है डेमोग्राफी में बदलाव का असर।

हम कश्मीर को कैसे भूल सकते हैं। लाखों की संख्या में जहाँ पंडित हुआ करते थे और डल झील के किनारे मंत्र जपते पंडित जिस राज्य की पहचान थे, वहाँ से उन्हें अपनी घर-संपत्ति छोड़ कर भागना पड़ा और अपने ही देश में शरणार्थी बन कर जीना पड़ रहा है। नरसंहार हुआ, बलात्कार हुआ, पलायन हुआ – बदल गई डेमोग्राफी। इसकी कोई गारंटी नहीं कि ये प्रक्रिया भारत के अन्य हिस्सों में नहीं दोहराई जाएगी। गुजरात में एक जैन कॉलोनी का इस्लामीकरण कर दिया गया, जहाँ अहिंसक जैन को कटते हुए पशुओं की चीखें सुननी पड़ती है, बहता खून देखना पड़ता है। यही तो है डेमोग्राफी चेन्ज की प्रक्रिया।

आपसी विवाद में समीउल्लाह को लगी चाकू, हिंदू-मुस्लिम वाले जहर के साथ फैला रहे हैं इस्लामवादी: जानिए पूरा सच

कन्हैया लाल साहू और उमेश कोल्हे की इस्लामवादियों द्वारा की गई बर्बर हत्या से पूरा देश स्तब्ध है। इस बीच कर्नाटक में आपसी विवाद में 38 वर्षीय समीउल्लाह को चाकू मारे जाने के बाद से सोशल मीडिया पर मुस्लिम नाम वाले यूजर्स इसे सांप्रदायिक रंग देकर वायरल कर रहे हैं।

इस खबर को #JusticeForSamiullah हैशटैग के साथ मुस्लिम नाम वाले कई हैंडल से ट्वीट किया गया है। साथ ही यह आरोप लगाया गया है कि यह व्यक्ति कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले का निवासी था और नूतन गौड़ा नाम के एक 22 वर्षीय युवक ने उसे चाकू घोंप दिया। इस खबर को शेयर कर यह दावा किया जा रहा है कि आरोपित संघ परिवार का सदस्य है और उसने एक मुस्लिम को छुरा घोंपने जैसा जघन्य अपराध किया है। मोहम्मद शोएब ने ट्विटर पर लिखा, “यह पहला और आखिरी शिकार नहीं है। जब तक भाजपा सत्ता में है, तब तक संघ परिवार के सदस्य मुस्लिमों को बेरहमी से पीटते रहेंगे। बीजेपी सरकार में मुस्लिमों की मॉब लिंचिंब आम बात हो गई है।

मोहम्मद शोएब के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

टीपू सुल्तान पार्टी के अध्यक्ष शेख सादिक ने दावा किया कि कानून के अभाव में मुस्लिमों के खिलाफ लिंचिंग के मामले बढ़ रहे हैं।

शेख सादिक के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

ट्विटर पर खान ने लिखा, “कर्नाटक पुलिस आरोपित को पकड़ने में कोई रूचि नहीं दिखा रही है। मुस्लिमों पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।”

खान के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

वहीं, सना ने बहुसंख्यक समुदाय (हिंदू) के शख्स को खून का प्यासा बताया। उसने दावा किया कि हमलावर ने मुस्लिम होने की वजह से ही समीउल्लाह पर हमला किया। यही नहीं उसने कर्नाटक पुलिस पर भी सवाल उठाए और कहा कि हमलावर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

सना के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

चाकू मारने की घटना के पीछे का सच

चित्रदुर्ग जिला पुलिस ने ट्विटर पर #JusticeForSamiullah ट्रेंड करने से पहले ही ‘सांप्रदायिक एंगल’ वाली बात को खारिज कर दिया था। पुलिस ने एक बयान में बताया, “2 जुलाई 2022 को, नूतन (22) नाम के एक लड़के ने चित्रदुर्ग जिले के हिरियुर में अलूर गाँव में रहने वाले समीउल्लाह को चाकू मार दिया था। घायल समीउल्लाह का चित्रदुर्ग में बसवेश्वर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। अभी वह खतरे से बाहर है।” पुलिस ने कहा, “नूतन को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। जाँच जारी है।”

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) आलोक कुमार ने स्पष्ट किया कि कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं था। मामूली विवाद के चलते आरोपित ने इस घटना को अंजाम दिया था। उन्होंने मोहम्मद का ट्वीट शेयर करते हुए कहा, “गलत काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। अपुष्ट सूचनाओं को शेयर नहीं किया जाना चाहिए।”

कर्नाटक पुलिस ने अपनी वेबसाइट पर इस मामले के संबंध में सभी तथ्यों को प्रकाशित किया है। इसमें कहा गया है, “जाँच के बाद पाया गया कि यह घटना दो व्यक्तियों के बीच आपसी रंजिश के कारण हुई है। इसमें कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है।” पुलिस ने आगे कहा, “लोगों को सलाह दी जाती है कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी असत्यापित और भ्रामक खबरों को शेयर करने से बचें।”

जाहिर है कि सोशल मीडिया पर ‘हिंदू’ नूतन गौड़ा को गिरफ्तार नहीं करने, मुस्लिम होने के कारण समीउल्लाह को चाकू मारने जैसे किए जा रहे तमाम दावे झूठे और भ्रामक हैं।