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तालिब हुसैन के होटल में हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरों में चिकन की पैकिंग, जाँच के लिए गई यूपी पुलिस पर चाकू से हमला: हुआ गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के संभल (Sambhal) जिले से देवी-देवताओं की तस्वीरों वाले अखबार में चिकन रखकर बेचने का मामला सामने आया है। सूचना पाकर मौके पर पहुँची पुलिस ने जब होटल संचालक तालिब हुसैन को ऐसा करने से रोका तो उसने धारदार हथियार से उन पर हमला कर दिया। होटल संचालक को हमला करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस अधीक्षक चक्रेश मिश्रा (Chakresh Mishra) ने बताया कि यह शिकायत वरिष्ठ उपनिरीक्षक अजय कुमार ने सोमवार (4 जुलाई, 2022) को दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि संभल कोतवाली क्षेत्र में तालिब हुसैन नाम का शख्स अपने होटल में देवी-देवताओं के फोटो वाले अखबार में चिकन रखकर बेच रहा था।

पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, कुछ लोगों की शिकायत के बाद पुलिस की एक टीम मौके पर पहुँची थी। जाँच के दौरान तालिब ने पुलिस दल पर चाकू से हमला किया। इस मामले में रविवार (3 जुलाई, 2022) देर रात तालिब के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 ‘अ’ (वैमनस्य फैलाना), 295 ए (किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थल को क्षति पहुँचाना या अपवित्र करना), 353 (सरकारी काम में बाधा डालना) और 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। मिश्रा ने बताया कि मौके से देवी-देवताओं की तस्वीरों वाले अखबार की कॉपियाँ और हमले में इस्तेमाल किया गया चाकू बरामद कर लिया गया है।

यह पहला मामला नहीं है, जब हिंदू देवी देवताओं के चित्रों का गलत इस्तेमाल किया गया है। वर्ष 2019 में अमेजन पर हिंदू देवी-देवताओं के चित्र वाली टॉयलेट सीट कवर और डोरमैट्स (दरवाजे पर बिछाए जाने वाले मैट) बेचने का आरोप लगा था। ई-कॉमर्स वेबसाइट ने लोगों के विरोध के बाद भी हिंदू देवी-देवताओं के चित्र वाले टॉयलेट कवर और पायदान बेचना बंद नहीं किया था।

बता दें कि इससे पहले वर्ष 2017 में अमेजन की कनाडा वाली वेबसाइट पर भारतीय तिरंगे के चित्र वाले डोरमैट बेचने का आरोप लगा था। तब भारत सरकार ने अमेरिकी और कैनेडियन एंबेसी के सामने ये मुद्दा उठाया था। नवंबर 2020 में ऑनलाइन गांजा बेचे जाने को लेकर अमेजन के डायरेक्टर्स के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था।

‘तुरंत हटाए जाएँ भड़काऊ कंटेंट्स’: माँ काली के आपत्तिजनक पोस्टर को लेकर भारतीय दूतावास की कनाडा को दो टूक, आयोजकों से भी जाहिर की चिंता

कनाडा में रह रहीं भारतीय मूल की फ़िल्मकार लीना मणिमेकलाई द्वारा अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म के पोस्टर में माँ काली का अपमान किए जाने का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ रहा है। हिन्दुओं के विरोध के बाद अब कनाडा में स्थित भारतीय दूतावास ने इस मुद्दे का संज्ञान लिया है। डॉक्यूमेंट्री के पोस्टर में माँ काली को सिगरेट पीते हुए दिखाया गया है और उनके हाथ में LGBTQ का झंडा थमा दिया गया है। लोग उनसे पूछ रहे हैं कि क्या किसी दूसरे मजहब को लेकर वो ऐसी हिम्मत कर सकती हैं?

ओटावा में स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार (4 जुलाई, 2022) की शाम जारी किए गए बयान में कहा, “हमें हिन्दू समुदाय के नेताओं की तरफ से एक फिल्म के पोस्टर में हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानजनक तरीके से प्रदर्शित किए जाने की शिकायतें मिली हैं। इस फिल्म को टोरंटो स्थित ‘आगा खान म्यूजियम’ में ‘अंडर द टेंट’ परियोजना के तहत दिखाया जा रहा है। टोरंटो में हमारे काउंसलेट जनरल ने इस कार्यक्रम के आयोजकों के समक्ष इन चिंताओं को रखा है।”

भारतीय दूतावास ने ये भी जानकारी दी कि कई हिन्दू संगठनों ने कनाडा के प्रशासन से भी संपर्क कर के इस फिल्म को दिखाए जाने के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है। साथ ही भारतीय दूतावास ने भी कनाडा की सरकार एवं प्रशासन से अनुरोध किया कि इस तरह के भड़काऊ कंटेंट्स को कार्यक्रम से तुरंत हटाए जाएँ। दूतावास ने एक प्रेस रिलीज जारी कर के अपनी बात रखी। फ़िलहाल कनाडा सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

विरोध के बाद फिल्म की निर्देशक लीना मणिमेकलाई ने कहा, “मेरे पास खाने के लिए कुछ नहीं है। मैं एक ऐसी आवाज के साथ रहना चाहती हूँ जो बिना किसी डर के बोले जब तक वह है। अगर इसकी कीमत मेरी जान है तो मैं दे दूँगी। ये फिल्म एक ऐसी शाम पर है जब काली प्रकट होती हैं और टोरंटो की सड़कों पर घूमती हैं। अगर आप इस तस्वीर को देखें तो #arrestleenamanimekalai की जगह #Loveyouleenamanimekalai लिखें।”

टीना डाबी के पति उदयपुर भेजे गए, खुद पहली बार बनीं जिला कलक्टर: राजस्थान सरकार ने 45 IAS-IPS अधिकारियों का किया तबादला

राजस्थान में सोमवार (4 जुलाई 2022) को 29 आईएएस और 16 आईपीएस के तबादले किए गए। इस लिस्ट में टीना डाबी (Tina Dabi) और उनके पति प्रदीप गवांडे का नाम भी शामिल है, जिनको जयपुर से बाहर भेजा गया है। आईएएस अफसर टीना डाबी को जैसलमेर जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट बनाया गया है। वर्तमान में टीना डाबी जयपुर में वित्त (कर) विभाग में संयुक्त शासन सचिव के पद पर कार्यरत थीं। वहीं उनके पति आईएएस अफसर डॉ. प्रदीप गवांडे को उदयपुर भेजा गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गवांडे को राजस्थान राज्य खान एवं खनिज निगम लिमेटड का प्रबंध निदेशक और पेट्रोलियम का निदेशक बनाया गया है। वहीं, प्रकाश राजपुरोहित को जयपुर कलेक्टर बनाया गया।

इस लिस्ट में 4 वरिष्ठ आईएएस को अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। कार्मिक विभाग के प्रमुख शासन सचिव हेमंत कुमार गेरा को महानिदेशक, हरीश चंद्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान एवं मदन को मुख्य सचिव का अतिरिक्त पदभार दिया गया है। इसी तरह डॉक्टर पृथ्वीराज को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग के शासन सचिव के अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का निदेशक पद का अतिरिक्त प्रभार दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजस्थान मोटर गैराज उद्यान विभाग के शासन सचिव जितेंद्र कुमार उपाध्याय को मुख्य प्रोटोकॉल अधिकारी राजस्थान सर्किट हाउस का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसी तरह कुमार पाल गौतम को शहरी आधारभूत विकास परियोजना निदेशक के अलावा संयुक्त शासन सचिव जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग का निर्देशक का प्रभार दिया गया है। वहीं इस सूची में सिरोही जिले के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नारायण सिंह चारण को आदेशों तक पदस्थापन प्रतीक्षा में रखने के आदेश जारी किए हैं।

UPSC 2015 बैच की टॉपर IAS टीना डाबी ने इस साल अप्रैल में 2013 बैच के IAS डॉ. प्रदीप गवांडे के साथ सात फेरे लिए थे। टीना ने अपनी दूसरी शादी की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करके इसकी जानकारी दी थी। RSLDC में MD रहते हुए गावंडे का नाम रिश्वत केस में भी आया था।

बता दें कि साल 2015 में यूपीएससी की परीक्षा टॉप करने के बाद टीना डाबी सुर्खियों में आई थीं। इसके बाद आईएएस अतहर आमिर से उन्होंने निकाह किया था। यह निकाह 2018 में हुआ और दोनों ने साल 2020 में तलाक की अर्जी दी, जिसे अगस्त 2021 में मँजूर कर लिया गया था।

सावन में ज्ञानवापी शिवलिंग के जलाभिषेक की माँग, मुस्लिम पक्ष की दलीलें वर्शिप एक्ट पर टिकीं: अगली सुनवाई 12 जुलाई को

वाराणसी की अदालत में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में मिले शिवलिंग को लेकर सोमवार (4 जुलाई, 2022) को सुनवाई हुई। इसमें मुस्लिम पक्ष ने श्रृंगार गौरी में पूजा-पाठ को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। अब तक मुस्लिम पक्ष ने 40 बिंदुओं पर बहस की है और 52 बिंदुओं पर बहस होनी है। जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में सुनवाई हुई, जहाँ सन् 1669 से लेकर 2022 तक ज्ञानवापी के मुकदमों और इससे सम्बंधित दलीलें मुस्लिम पक्ष ने पेश की।

12 जुलाई को सुनवाई की अगली तारीख़ मुक़र्रर की गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था भी काफी कड़ी रही। बता दें कि 5 महिलाओं ने इस सम्बन्ध में परिवाद दायर किया है। सर्वे के दौरान वजू वाली जगह पर मिले शिवलिंग और देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के लिए जितेंद्र सिंह बिसेन की पत्नी राखी सिंह ने याचिका दायर की है, जिस पर फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई होनी है। ‘काशी धर्म परिषद’ ने सावन में शिवलिंग पर जल चढाने की अनुमति भी माँगी है।

आज की सुनवाई 35 दिन के बाद हुई। 12 जुलाई को मुस्लिम पक्ष की दलीलें पेश हो जाने के बाद हिन्दू पक्ष जिरह कर के बताएगा कि क्यों ये मुकदमा सुनवाई योग्य है। जबकि मस्जिद के वकील मुक़दमे को ख़ारिज करने की वकालत करेंगे। हिन्दू पक्ष ने अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के साथ सुनवाई से पहले काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूजा करने की हमारी माँग कानूनी रूप से योग्य है। सावन में जलाभिषेक के लिए अदालत से हिन्दू भावनाओं का ख्याल रखने कहा जाएगा।

मुस्लिम पक्ष की दलीलें मुखयतः ‘प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रॉविजंस) एक्ट, 1991’ पर टिकी हुई हैं, जिसके हिसाब से धर्मस्थलों में आज़ादी के समय वाली यथास्थिति बनाए रखने की बात है। वहीं महिलाओं का दावा है कि ये यहाँ लागू नहीं होता, क्योंकि 1991 तक यहाँ श्रृंगार गौरी की पूजा होती थी। सुनवाई में 10 और लोग पक्षकार बनना चाहते हैं। CBI जाँच के लिए भी अर्जी पहुँची है। औरंगजेब द्वारा माधव मंदिर को तोड़ कर बनाए गए धरहरा मस्जिद में नमाज रोकने के लिए भी याचिका दायर की है

‘बुरे वक्त में युसूफ की करते थे मदद, पत्नी के साथ उसके घर पर गए थे’: उमेश कोल्हे के भाई ने बताया – मेरे ऑफिस में 15 साल रहा एक मुस्लिम स्टाफ

महाराष्ट्र के अमरावती जिले में दवा व्यवसाई उमेश कोल्हे की हत्या 21 जून 2022 की रात को कुछ मुस्लिमों ने गला काट कर कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने कुल 7 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपित उमेश द्वारा नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया में एक पोस्ट फॉरवर्ड करने से नाराज थे। हत्या के मुख्य साजिशकर्ता के रूप में शेख इरफ़ान युसूफ का भी नाम सामने आया जो उमेश का पूर्व परिचित था। इस मामले में जानकारी निकल कर सामने आई है कि उमेश ने इरफ़ान युसूफ की कई बार जरूरत के समय मदद की थी।

‘आज तक’ के मुताबिक, मृतक उमेश ने युसूफ के बच्चे के एडमिशन और उसकी बहन की शादी में आर्थिक मदद की थी।

कुछ रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उमेश और युसूफ एक दूसरे से लगभग 16 साल से परिचित थे। युसूफ इस से पहले भी एक बार उमेश की हत्या का प्रयास कर चुका था लेकिन उसमें असफल रहा था। आख़िरकार 2 आटो ड्राइवर और अन्य मजदूरों को उसने अपनी एनजीओ में बुलाकर माइंड वॉश किया था। बाद में कथिततौर पर उन्हें 10-10 हजार रुपए देकर उनसे ये उमेश की हत्या करवाई।

काफी अच्छे व्यापारिक रिश्ते थे भाई और युसूफ के

ऑपइंडिया ने उमेश कोल्हे के भाई महेश कोल्हे से बात की। महेश ने कहा, “भैया (उमेश) के युसूफ से व्यापारिक रिश्ते काफी अच्छे थे। वो कई बार उसकी जरूरत के मुताबिक दवाओं के पैसे लेने में भैया समय आगे-पीछे कर लेते थे। भैया अपनी पत्नी के साथ युसूफ के घर पर एकाध बार कार्यक्रमों में भी गए थे। हालाँकि, युसूफ कभी हमारे घर नहीं आया। फिर भी जो हुआ वो सोच से भी परे है। कई मीडिया मेरी बयान को बढ़ा कर युसूफ को भैया का बेहद जिगरी यार बता रही हैं जो गलत है।”

इंसानो की सेवा को ही मानते थे सच्ची पूजा

महेश कोल्हे के मुताबिक, “कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में चल रहा कि भैया बहुत पक्के धार्मिक थे और वो हर दिन मंदिर जाते थे। ये दावा भी गलत है। वो इंसानों की सेवा को अपना धर्म मानते थे। ये शिक्षा हमें हमारे स्वर्गीय पिता से मिली है।”

खुद मेरे ऑफिस में था 15 साल पुराना मुस्लिम स्टाफ

महेश कोल्हे ने हमें बताया, “मैं ट्रेवेल्स का काम करता हूँ। हमारे परिवार में कभी हिन्दू-मुस्लिम का भाव नहीं रहा था। भैया तो दूर खुद मेरे ऑफिस में 15 साल तक एक मुस्लिम स्टाफ ने काम किया। पिछले ही साल उसने अपना हार्डवेयर का काम शुरू किया।”

पुलिस ने कभी हत्या को लूट नहीं कहा

महेश कोल्हे के मुताबिक, “पहले मीडिया में चला कि पुलिस ने मेरे भाई की हत्या को लूट बताया। मेरे भाई का पर्स और पैसा सब सुरक्षित था इसलिए हमने मीडिया की उन बातों को नहीं माना। पुलिस ने भी कभी हमसे भैया की हत्या को लूट नहीं बताया। बस कुछ मीडिया वालों ने अपनी मर्जी से लूट की खबर पब्लिश कर दी जिसको बाद में बाक़ी मीडिया वालों ने भी वही मान लिया। अमरावती पुलिस ने भी हमसे बताया है कि हमने किसी को भी लूट का न तो बयान दिया है और न ही इसकी कोई प्रेसनोट जारी की थी।”

अमरावती पुलिस कमिश्नर IPS आरती सिंह ने भी इस बावत बयान जारी किया है और किसी प्रकार से मामले को दबाने जैसी बात से इंकार किया है।

source – ANI

बेटा संभाल रहा पिता का काम

महेश कोल्हे ने ऑपइंडिया को आगे बताया, “भैया ने कोई मैसेज नूपुर के समर्थन में खुद से नहीं लिखा था। उन्होंने तो बस एक संदेश फारवर्ड कर दिया था। अब उनके घर में उनकी पत्नी, उनका बेटा और बहू बचे हैं। बेटे ने पिता के कारोबार में 2 साल पहले से ही हाथ बँटाना शुरू कर दिया था। अब वही दवा के व्यापार को संभाल रहा है।”

साल भर भी नहीं हुआ पिता को मरे हुए

उमेश के भाई महेश ने आगे कहा, “हमारे पिता जी की मृत्यु पिछले साल 2 जुलाई को हुई थी। इस साल 2 जुलाई को हम उनकी मृत्यु की पहली बरसी पर उन्हें याद करने वाले थे। अफ़सोस ये है कि उस दिन हमें अपने भाई की तेरहवीं करनी पड़ी थी।”

जब इस्लामी कट्टरपंथियों ने केरल के प्रोफेसर का काट डाला था हाथ, परीक्षा के सवाल में खोज ली थी ‘ईशनिंदा’: पत्नी ने कर ली थी आत्महत्या

हाल के दिनों में हिंदु समुदाय के खिलाफ इस्लामी हमलों में काफी तेजी देखी गई है। इस बात से अधिकतर लोग वाकिफ हैं कि मुस्लिम कट्टरपंथियों के लिए किसी की जान की कोई कीमत नहीं होती है। मजहब के नाम पर किसी की गर्दन, तो किसी का हाथ काटना उनके बाएँ हाथ का खेल बन गया है। आपको बता दें कि हिंदू ही नहीं, बल्कि ईसाई समुदाय के लोग भी इन इस्लामवादियों से खौफजदा हैं। वर्ष 2010 में आज ही के दिन (4 जुलाई) केरल में ईशनिंदा के आरोप में नजीब समेत 7 कट्टरपंथियों ने प्रोफेसर जोसेफ पर चाकुओं से हमला करके उनका दाहिना हाथ काट दिया था। उन पर यह हमला तब किया गया, जब वे अपने परिवार के साथ चर्च से प्रार्थना करके लौट रहे थे। नजीब एर्नाकुलम जिले के अलुवा का रहने वाला था और कट्टरपंथी इस्लामिक समूह पॉपुलर फ्रंट इंडिया का सदस्य था।

जोसेफ केरल के इदुकी जिले के एक कॉलेज में मलयालम पढ़ाते थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने मलयालम भाषा में बीकॉम का पेपर तैयार करते हुए पैगंबर मुहम्मद का नाम लिया, जिससे समुदाय विशेष की मजहबी भावनाएँ आहत हुईं। जबकि जोसेफ का कहना था कि वो पीटी कुंजू मोहम्मद नामक एक लेखक के बारे में लिख रहे थे पर कुछ लोगों ने जानबूझकर मुहम्मद नाम को गलत लिया। हालाँकि इस बीच कई लोगों ने उन पर सवाल उठाए और कॉलेज प्रशासन ने उन्हें नौकरी से भी निकाल दिया था। मजहबी संगठनों के दबाव में कॉलेज प्रशासन के फैसले से उनका जीवन सामान्य नहीं रहा। सामाजिक दबाव और आर्थिक परेशानियों के चलते उनकी पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी।

जोसेफ के अनुसार, उनकी पत्नी गहरे सदमें में थी। 19 मार्च 2014 को वह मनोवैज्ञानिक के पास से लौटीं और आत्महत्या कर ली। ये क्षण जोसेफ के लिए और मुश्किल भरा था। उन्हें दुख इस बात का था कि उनकी पत्नी उन्हें दोबारा जॉब करते नहीं देख पाईं जो कि उनकी सबसे बड़ी इच्छा थी। इतना सब कुछ होने के बाद भी उन्होंने फैसला किया कि वे कॉलेज के फैसले के खिलाफ कोई कानूनी कदम नहीं उठाएँगे। यही नहीं उन्होंने हमला करने वाले कट्टरपंथियों को भी माफ कर दिया था।

लेकिन, कोर्ट ने दोषियों पर कार्रवाई जारी रखी और कुछ साल पहले उन्हें प्रोफेसर पर हमला करने का दोषी पाया गया। आरोपितों पर फैसला उस समय आया जब जोसेफ की लिखी एक किताब रिलीज हुई थी। इदुकी जिले में एक छोटे कार्यक्रम में अपनी किताब को रिलीज करने के दौरान जोसेफ ने कहा था, “ये किताब मैंने दाहिने हाथ से लिखी थी, आज मैं आपके सामने इसे बाएँ हाथ से पेश कर रहा हूँ।”

चर्च और ईसाई समुदाय ने भी हमारा समर्थन नहीं किया: टीजे जोसेफ

जोसेफ ने किताब में अपनी आपबीती लिखी थी कि कैसे कट्टरपंथ के कारण हर कोई खतरे में हैं। उन्होंने बताया था कि कैसे कट्टरपंथियों ने उनके साथ जो किया सो किया लेकिन उनके समुदाय के लोगों, चर्च, कॉलेज, दोस्त, पड़ोसियों ने भी उन्हें नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जोसेफ ने कहा था कि वो तीन बार हमले से बच गए, लेकिन चौथी बार हमलावरों ने उनका हाथ काट दिया था।

इसके अलावा जोसेफ ने एक साक्षात्कार में कहा था कि आरोपितों को दंड देने से न्याय नहीं मिलेगा। असल समस्या कट्टरपंथ की है। उन्होंने यह भी बताया था, “थोड़ूपुझा न्यूमैन कॉलेज के प्रिंसिपल और मैनेजमेंट ने शुरुआती समय में मेरा साथ दिया लेकिन समय के साथ उनके मत बदल गए। ये जानने के बावजूद कि मैं निर्दोष हूँ, कॉलेज ने मुझ पर ईशनिंदा का आरोप मढ़ा, मुझे सस्पेंड किया गया और बाद में नौकरी से निकाल दिया गया। चर्च ने मेरे परिवार को बहिष्कृत किया और कोठामंगलम सूबा के 120 चर्चों में मेरे खिलाफ पत्र पढ़े गए कि आखिर मेरे विरुद्ध ऐसा एक्शन क्यों लिया गया है।”

उन्होंने आगे बताया था, “कई ईसाई दोस्तों और परिवारों ने हमारे घर आना छोड़ दिया। उन्हें डर था कि चर्च उनसे नाराज हो जाएगा। मेरे ऊपर हमला करने वालों की आँख पर कट्टरपंथ की पट्टी बंधी थी जिसने मुझे शारीरिक रूप से दुख दिया। लेकिन जो मेरे लोगों ने मेरे साथ किया वो भी और भी ज्यादा भयावह है क्योंकि उससे मेरे परिवार पर प्रभाव पड़ा। कैथोलिक चर्च ने अदालतों द्वारा उन्हें ईशनिंदा के आरोप से मुक्त करने के बाद भी उनके साथ बुरा व्यवहार किया है।” उन्होंने आगे कहा, “चर्च ने इस्लामी कट्टरवाद और मेरे साथ हुए हमले का समर्थन किया, जिसकी वजह से PFI ने मुझ पर हमला किया और मुझे अपने हाथ गँवाने पड़े।”

‘नंबी नारायणन ने देश के लिए सहे कष्ट, किए त्याग’: R माधवन की फिल्म के कायल हुए सुपरस्टार रजनीकांत, कहा – हृदय से धन्यवाद

सुपरस्टार रजनीकांत ने आर माधवन की फिल्म ‘रॉकेट्री: द नंबी इफ़ेक्ट’ की तारीफ़ की है। उन्होंने इस तरह की फिल्म बनाने के लिए धन्यवाद भी दिया। कहा जा रहा है कि उन्होंने इस फिल्म को देखा, जिसके बाद इसके कायल हो गए। ये फिल्म शुक्रवार (1 जुलाई, 2022) को रिलीज हुई है। रजनीकांत ने आर माधवन के कार्य की तारीफ़ की, जिन्होंने इस फिल्म में भारतीय वैज्ञानिक नंबी नारायणन का किरदार निभाया है। उन्हें अपने जीवन में काफी प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था।

सुपरस्टार रजनीकांत ने लिखा, “आर माधवान ने बतौर निर्देशक अपनी पहली ही फिल्म में अपने वास्तविक अभिनय के साथ-साथ साबित किया है कि वो बेहतरीन फिल्म निर्देशकों में से एक हैं। उन्होंने पद्म भूषण वैज्ञानिक नंबी नारायणन के इतिहास को दिखाया है, जिन्होंने भारत के अंतरिक्ष रिसर्च के विकास के लिए कई बाधाओं का सामना किया और बलिदान दिए। इस तरह की फिल्म देने के लिए मैं अपने हृदय से आर माधवन को धन्यवाद देता हूँ।”

सुपरस्टार ने अपने बयान को तमिल में ट्विटर पर शेयर किया। इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे ISRO के पूर्व ऐरोस्पेस इंजीनियर को एक स्कैंडल में फँसाया गया, जिससे इस क्षेत्र में भारत काफी पीछे चला गया। इस फिल्म की शूटिंग भारत के अलावा फ्रांस, कनाडा, जॉर्जिया, सर्बिया और रूस में हुई है। तमिल में सूर्या और हिंदी में शाहरुख़ खान ने पत्रकार के किरदार में स्पेशल अपीयरेंस भी दिया है। पहले 3 दिन में फिल्म ने 8 करोड़ रुपए की कमाई की है। दक्षिण भारत में ‘थलाइवा’ के नाम से पुकारे जाने वाले रजनीकांत ने कहा कि ‘रॉकेट्री’ फिल्म सभी को, खासकर युवाओं को ज़रूर देखनी चाहिए।

जहाँ तक सुपरस्टार रजनीकांत की बात है, वो अपनी 169वीं फिल्म ‘जेलर’ की शूटिंग में व्यस्त हैं, जिसका निर्देशन हाल ही में आई विजय की फिल्म ‘बीस्ट’ के निर्देशक नेल्सन दिलीपकुमार ने किया है। इस फिल्म में वरिष्ठ कन्नड़ अभिनेता शिवा राजकुमार भी दिखेंगे। फिल्म के बारे में फ़िलहाल ज्यादा कुछ नहीं बताया गया है। नंबी नारायणन को फँसाने वाले पूर्व DGP आरबी श्रीकुमार को हाल ही में गुजरात दंगा मामले में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने उसकी गिरफ़्तारी पर ख़ुशी जताते हुए याद किया कि कैसे उसने सभी सीमाओं को पार कर दिया था।

सिगरेट पीती हिंदू देवी पर फिल्म बनाने वाली ‘Bisexual’ डायरेक्टर के खिलाफ शिकायत: नहीं माँगी माफ़ी, कहा – टोरंटो की सड़कों पर घूमते दिखेगी ‘काली’

भारतीय फिल्म डायरेक्टर लीना मणिमेकलई (Leena Manimekalai) द्वारा बनाई गई डॉक्यूमेंट्री ‘काली (Kaali)’ का विवादित पोस्टर देखने के बाद उनके खिलाफ वकील विनीत जिंदल ने शिकायत दर्ज कराई है। ये शिकायत नॉर्थ वेस्ट दिल्ली में लीना के विरुद्ध दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री के लिए जारी किया गया महाकाली का पोस्टj बेहद अपमानजनक है। इससे हिंदुओं की भावनाएँ आहत हुई है। 

विनीत ने अपनी शिकायत में कहा कि इस प्रकार महाकाली को सिगरेट पीते देखना किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हिंदुओं की भावनाओं को जानबूझकर आहत किया गया है। इसलिए लीना के विरुद्ध आईपीसी  की धारा 295 ए, 298, 505 और आईटी एक्ट 67 के तहत केस दर्ज होना चाहिए।

इस कंप्लेन में लीना के विरुद्ध एफआईआर के अलावा माँग की गई है कि इंटरनेट ने माँ काली के विवादित पोस्टर व वीडियो को हटाया जाए और ऐसी सामग्री प्रकाशित पर प्रतिबंध लगे। उन्होंने कहा,

“यह एक सोचा-समझा और दुर्भाग्यपूर्ण कार्य है। इसका उद्देश्य हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आपत्तिजनक वीडियो और फोटो के जरिए आहत करना है, जिसे आरोपित ने अपने ट्विटर एकाउंट के जरिए शेयर किया था और जो सोशल मीडिया और पब्लिक प्लेटफार्म पर खूब प्रसारित हुआ था।”

बता दें कि काली का पोस्टर सोशल मीडिया में शेयर होने के बाद हिंदुओं ने इसे देख आपत्ति जताई ती और लीना मणिमेकलई की गिरफ्तारी की माँग उठाई थी। लेकिन तभी, पोस्टर को लेकर हुए तमाम विरोध के बाद भी लीना ने इस पर माफी नहीं माँगी और जवाब दिया, “ये फिल्म एक ऐसी शाम पर है जब काली प्रकट होती हैं और टोरंटो की सड़कों पर घूमती हैं। अगर आप इस तस्वीर को देखें तो #arrestleenamanimekalai की जगह #Loveyouleenamanimekalai लिखें।”

इसके अलावा, टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने तमिल में बीबीसी से बात करते हुए ये भी कहा, “मेरे पास खाने के लिए कुछ नहीं है। मैं एक ऐसी आवाज के साथ रहना चाहती हूँ जो बिना किसी डर के बोले जब तक वह है। अगर इसकी कीमत मेरी जान है तो मैं दे दूँगी।”

कौन है लीना?

बता दें कि लीना मणिमेकलई के बारे में मौजूद जानकारी बताती है कि लीना एक बायसेक्सुअल, सोशल एक्टिविस्ट, डायरेक्टर हैं। उन्होंने अब तक 15 फिल्म निर्देशित की हैं और 4 फिल्मों में एक्टिंग की है। लीना की सबसे ज्यादा मशहूर डॉक्यूमेंट्री 20 मिनट की महात्मा है। उन्हें 2004 से 2015 के बीच कई अवार्ड मिले हैं। 2 जुलाई को उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर ‘काली’ का पोस्टर शेयर किया, जिसे देख लोग भड़क गए और गिरफ्तारी की माँग तेज हो गई। इसी बीच ये भी सामने आया कि लीना मोहम्मद जुबैर की कट्टर समर्थक हैं जो अपने ट्विट्स के कारण इस समय जेल में है।

हिंदुओं की आपत्ति पर कोई सुनवाई नहीं

इससे पहले याद दिला दें कि ब्रह्मस्त्र फिल्म में रणबीर कपूर ने जूते पहन देवी की मूर्ति के सामने घंटी बजाई थी तब भी हिंदुओं ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई। दूसरी ओर खुद हाफिज फिल्म के हक हुसैन गाने पर कुछ दिन पहले शिया समुदाय ने अपनी आपत्ति व्यक्त की थी और इसे देखते हुए निर्माताओं ने गाने के लिरिक्स और सीन बदलने का निर्णय ले लिया। साथ ही समुदाय से अपने किए की माफी भी माँगी।

हाजी इक़बाल की कोठियों पर चला योगी सरकार का बुलडोजर, फरार चल रहा है बसपा का पूर्व MLC: भाई-बेटों पर भी रेप-छेड़छाड़ का आरोप

UP के सहारनपुर जिले में खनन माफिया और बहुजन समाज पार्टी के पूर्व MLC हाजी इक़बाल के घर पर आज 4 जुलाई 2022 (सोमवार) को बुलडोजर चला है। हाजी इक़बाल और उनके परिवार पर दुष्कर्म के साथ अवैध सम्पत्ति के कई मामले दर्ज हैं। पुलिस से फरार चल रहे हाजी इकबाल की तलाश कर रही है। इस से पहले हाजी इक़बाल के घर की कुर्की हो चुकी है।

वायरल हो रहे वीडियो में एक बुलडोजर इकबाल के निर्माण को गिराता दिखाई दे रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाजी इकबाल की जिस कोठी पर बुलडोजर चला है वो सहारनपुर के पॉश इलाके भगत सिंह कॉलोनी में है। यहाँ पर इकबाल की कुल 3 कोठियाँ हैं जिसमें एक का नक्शा पास नहीं है और 2 अन्य निर्धारित मैप के अनुरूप नहीं बनाई गईं हैं।

बताया जा रहा है कि सहारनपुर विकास प्राधिकरण द्वारा इन निर्माणों पर नोटिस भेजा गया था। इस नोटिस का तय सीमा में कोई जवाब नहीं आया जिसके बाद ये कार्रवाई की गई है। सहारनपुर के ADM वित्त व राजस्व रजनीश मिश्रा ने कहा कि कार्रवाई विकास प्राधिकरण द्वारा हो रही है। माना जा रहा है कि जिस कोठी का नक्शा नहीं पास है वो पूरी तरह से और जो नक्शे के अनुरूप नहीं है वो मैप सीमा तक गिराई जाएगी।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक करवाई, की जद में आई 3 में से एक कोठी उनके भाई महमूद अली के नाम पर है। महमूद भी बहुजन समाज पार्टी से पूर्व MLC रह चुके हैं और मायावती के बेहद करीबियों में गिने जाते हैं। इस ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के साथ ADM और SDM , सहारनपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ किसी विषम हालात से निबटने के लिए भारी पुलिस फ़ोर्स भी मौके पर मौजूद था।

गौरतलब है कि 23 जून 2022 को हाजी इकबाल, उसके भाई पर एक नाबालिग लड़की से रेप का केस दर्ज हुआ था। हाजी इकबाल के 4 बेटों पर उसी पीड़िता से छेड़छाड़ और मारपीट की FIR दर्ज हुई थी। वहीं मई 2022 में हाजी इकबाल के नौकर नसीम के नाम 50 बेनामी संपत्तियाँ सरकार ने जब्त की थी। इसकी कीमत करीब 21 करोड़ रुपए है। सहारनपुर पुलिस ने ये कार्रवाई 14(1) गैंगस्टर एक्ट के तहत की थी।

गुजरात के BJP नेता को अब्दुल ने दी ‘कन्हैया लाल जैसा हश्र’ करने की धमकी, क्योंकि उदयपुर की बर्बरता की निंदा की थी

गुजरात के एक बीजेपी नेता को कन्हैया लाल जैसा हश्र करने की धमकी दी गई है। ये नेता हैं- नीलेश सिंह जादव। वे वडोदरा की पाड्रा तालुका के बीजेपी अध्यक्ष हैं। उन्हें 29 जून 2022 को उदयपुर की बर्बर हत्या पर कमेंट करने की वजह से इस्लामवादियों ने धमकी दी। इस संबंध में जादव ने पुलिस से शिकायत की है। उल्लेखनीय है कि बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने पर उदयपुर में कन्हैया लाल का गला मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने काट डाला था।

दरअसल, जादव के एक परिचित ने उदयपुर हत्याकांड की निंदा करते हुए फेसबुक पर पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा था, “ऐसी घटना तालिबान अफगानिस्तान या पाकिस्तान में होती है। यह भयावह और मानवता को शर्मसार करने वाला है। इस घटना को अंजाम देने वाले दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ताकि फिर कोई इसे दोहराने की हिम्मत ना कर सके। कानून अपना काम करेगा। कृपया शांति बनाए रखें।”

इसी पोस्ट का जवाब देते हुए जादव ने कमेंट किया था, “हत्या करने वाला जानता था इसके लिए वो जेल जाएगा। हो सके वो उम्र कैद के ​लिए अंदर हो जाए। इस घटना को अंजाम देने के एवज में उसके खानदान को कम से कम करोड़ों रुपए मिले होंगे और ये सब पैसे ​कतर, कुवैत और सऊदी अरब के होंगे…।”

उन्होंने आगे लिखा, “एनआईए हत्यारे के बाप, माँ, भाई, बहन, रिश्तेदारों और उसके आसपास के रहने वाले मौलवियों को भी गिरफ्तार करे। ताकि उस पैसे का उपयोग कोई भी ना कर सके। इसके अलावा उन लोगों की सारी जायदाद की कुर्की करे।” उन्होंने लिखा, “ये लोग हुरों के लिए नहीं पैसे के लिए ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं।”

नीलेश सिंह जादव के कमेंट को लेकर अब्दुल ने धमकी दी

इस कमेंट के जवाब में अब्दुल सुबुर चौधरी ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और बीजेपी नेता को धमकी देते हुए लिखा, “नीलेश और उनके जैसे लोगों का भी यही हश्र होगा।”

ऑपइंडिया से बातचीत में जादव ने बताया कि उन्होंने राजस्थान के किसी व्यक्ति के सोशल मीडिया पोस्ट पर कमेंट कर दोषियों को कड़ी सजा देने और उनकी संपत्ति कुर्क करने की माँग की थी। उन्होंने कहा, “अब्दुल सुबुर चौधरी ने इस कमेंट को लेकर मुझे धमकी दी है कि मेरा भी वही हश्र होगा जो कन्हैया लाल का हुआ था। मैंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और उन्होंने मुझे सुरक्षा दी है।”

पुलिस ने सोशल मीडिया पर अब्दुल सुबुर नाम की आईडी से जादव को धमकी देने वाले के खिलाफ आईपीसी की धारा 507 (आपराधिक धमकी) और 294 (बी) (अभद्र भाषा का उपयोग) के तहत शिकायत दर्ज की है। हालाँकि, अब इस अकाउंट को डिलीट कर दिया गया है, लेकिन पुलिस इस मामले की गहनता से जाँच कर रही है।

कन्हैया लाल हत्याकांड

उल्लेखनीय है कि 28 जून 2022 को कन्हैया लाल की निर्मम हत्या उनके दुकान में घुसकर कर दी गई थी। हत्यारे कपड़ा सिलवाने के बहाने उनके टेलर शॉप में आए थे और फिर उनका सिर कलम कर 2611 नंबर प्लेट की बाइक से फरार हो गए। घटना के बाद हत्यारों ने वीडियो जारी करते हुए पीएम मोदी को भी धमकी दी थी।