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मुस्लिमों से सामान खरीदने पर 5100 रुपए जुर्माना, गौशाला में दान: कन्हैयालाल की हत्या के विरोध में पंचायत का लेटर वायरल – फैक्ट चेक

गुजरात के बनासकांठा जिले में मुस्लिम फेरीवालों के बॉयकॉट का एक लेटर वायरल हो रहा है। कुछ लोगों द्वारा इस लेटर को ग्राम पंचायत द्वारा जारी हुआ बताया गया। इस वायरल लेटर में मुस्लिम फेरीवालों से कोई सामान खरीदने वालों पर 5100 रुपए जुर्माना लगाने की घोषणा की गई है। यह पत्र उदयपुर में हुई कन्हैयालाल की निर्मम हत्या के विरोध में जारी हुआ है।

वायरल लेटर पर 30 जून 2022 की तारीख पड़ी हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस पत्र पर पूर्व सरपंच माफ़ीबेन पटेल की दस्तखत और मुहर लगी है। पत्र के नीचे कुछ और लोगों के भी साइन हैं। पत्र के सबसे ऊपर ‘सत्यमेव जयते’ लिखा हुआ है। पत्र के मुताबिक जुर्माने का 5100 रुपया गौशाला में दान किया जाएगा।

वायरल लेटर बना राजनैतिक हथकंडा

इस मामले ने फ़ौरन ही तूल पकड़ लिया और राजनीति शुरू हो गई। कॉन्ग्रेस के अनुसूचित विभाग गुजरात के चेयरमैन हितेन ने इस पत्र को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल पर निशाना साधना शुरू कर दिया। वायरल हो रहा लेटर फर्जी है या आधिकारिक, कॉन्ग्रेसियों ने यह भी जानने की कोशिश नहीं की।

प्रशासन ने पत्र को बताया अनधिकृत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बनासकांठा जिला विकास अधिकारी स्वप्निल खरे ने इस पत्र को अनधिकृत बताया है। उन्होंने कहा, “जिसके द्वारा ये पत्र जारी हुआ है, उसको इसे जारी करने का अधिकार ही नहीं है। फिलहाल पंचायत एक प्रशासक द्वारा संचालित है और सरपंच का चुनाव होना अभी बाकी है।”

वहीं पंचायत प्रशासक ने भी इस पत्र का खंडन किया है। एक विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया गया, “वाघासन पंचायत के वर्तमान प्रशासक आरआर चौधरी हैं। यह लेटर हेड प्रशासक की तरफ से नहीं लिखा गया है। प्रशासक इस पत्र का समर्थन भी नहीं करते, साथ ही ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

स्थानीय प्रशासन ने इस पत्र को लेकर अफवाह फैलाने वालों पर भी नियमानुसार कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। आधिकारिक रूप से सत्यापित करने के बाद यह पत्र फर्जी पाया गया है। प्रधान के पति का कहना है कि उनकी पत्नी नवंबर 2021 से सरपंच नहीं है। उनके अनुसार वो यह पता लगा रहे हैं कि वायरल लेटर को किसने लिखा, किसने दस्तखत किया और मुहर लगाई।

माना जा रहा है कि ऐसा काम मौके को देखते हुए कुछ लोगों की भावनाएँ भड़काने के लिए किया गया है। वायरल हुए इस पत्र की सत्यता और प्रमाणिकता की पुष्टि किसी भी आधिकारिक स्तर से नहीं हो पाई है। यह एक फर्जी पत्र है, जिसे किसी प्रोपेगेंडा के तहत जारी करके वायरल किया जा रहा है।

‘….पाकिस्तान जीत गया’: MP के कटनी में सरपंच चुनाव जीतने पर रहीसा खान के समर्थकों ने पाकिस्तान समर्थक लगाए नारे, वीडियो वायरल, जाँच शुरू

मध्य प्रदेश के कटनी जिले (Katni, Madhya Pradesh) की चाका पंचायत का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक मुस्लिम प्रत्याशी के सरपंच का चुनाव जीतने पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए लगाए गए। इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है।

वीडियो में दिख रहा है कि रहीसा बेगम शौहर वाजिद खान के चुनाव जीतने पर उनके समर्थक ‘जीत गया भाई जीत गया, पाकिस्तान जीत गया’ के नारे लगा रहे हैं। यह वीडियो शुक्रवार (1 जुलाई 2022) की रात का बताया जा रहा हैं। इस दिन पंचायत चुनाव के दूसरे चरण की मतगणना थी। यह वीडियो शनिवार (2 जुलाई 2022) को वायरल हो गया।

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया और ग्रामीण शनिवार को थाने पहुँच गए। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत करते हुए आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। ग्रामीणों का कहना है कि युवाओं ने पहले गाँव में रैली निकालकर नारेबाजी की। इसके बाद प्रत्याशी के घर के पास पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए। ग्रामीणों का कहना है कि इसमें कुछ बाहरी लोग भी शामिल थे।

इस मामले का कटनी के पुलिस अधीक्षक ने भी संज्ञान लिया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “वायरल वीडियो को संज्ञान में लेते हुए सीएसपी को मामले की जाँच के आदेश दिये गये हैं। वायरल वीडियो की जाँच एफएसएल से कराई जाएगी और तथ्‍यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”

Circle SP विजय प्रताप सिंह ने बताया कि ग्राम चाका के 30-40 लोग आए थे और उन्होंने शिकायत की कि सरपंच का चुनाव जीतने के बाद रहीसा वाजिद खान के समर्थन में और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गए। उन्होंने कहा कि इसकी जाँच की जा रही और जो भी तथ्य सामने आएँगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

इलाके के सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र कुमार परोहा ने कहा कि रईसा बेगम दूसरी बार चाका गाँव की सरपंच चुनी गई हैं। उन्होंने कहा, “उनके समर्थकों द्वारा पाकिस्तान समर्थक नारा लगाया गया, जो असहनीय है। हमारे देश के खिलाफ आवाज उठाने वालों को जिंदा नहीं छोड़ा जाएगा। इन लोगों को गिरफ्तार किया जाए और चाका गाँव में सरपंच चुनाव को शून्य घोषित किया जाए।”

जिसने 59 हिंदुओं को जिंदा जलाया, उस रफीक हुसैन भटुक को उम्रकैद: गोधरा कांड के बाद 19 साल फरार था यह दंगाई

गुजरात के गोधरा (Godhra, Gujarat) में अयोध्या से लौट रहे कारसेवकों से भरी साबरमती एक्सप्रेस (Sabarmati Express) की एक बोगी में आग लगाकर 59 लोगों को जिंदा जलाकर मारने के मुख्य आरोपित रफीक हुसैन भटुक को उम्रकैद की सजा मिली है। साल 2002 में घटना को अंजाम देने के बाद रफीक गायब हो गया था, पिछले साल गुजरात पुलिस ने 19 साल बाद उसे गिरफ्तार किया था।

गोधरा के सत्र न्यायालय ने रफीक हुसैन को हत्या की साजिश रचने, हत्या करने और दंगा भड़काने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में विशेष लोक अभियोजक आरसी कोडेकर ने न्यायालय के फैसले की पुष्टि की है।

51 साल का रफीक हुसै भटुक 2002 में घटना को अंजाम देने के बाद फरार हो गया था और उसे गुजरात पुलिस ने फरवरी 2021 में गोधरा शहर से गिरफ्तार किया था। गुप्त सूचना के आधार पर गोधरा पुलिस ने 14 फरवरी 2021 रात को रेलवे स्टेशन के समीप स्थित सिग्नल फलिया के एक घर में छापेमारी की और भटुक को वहाँ से गिरफ्तार किया।

पंचमहल जिले की पुलिस अधीक्षक लीना पाटिल ने कहा गिरफ्तारी के समय कहा था कि रफीक हुसैन भटुक गोधरा कांड के आरोपियों के उस मुख्य समूह का हिस्सा था, जो पूरी साजिश में लिप्त था। उन्होंने बताया कि रफीक हुसैन भटुक पिछले 19 सालों से फरार चल रहा था।

पाटिल ने बताया, “भटुक आरोपितों के उस मुख्य समूह का हिस्सा था, जिन्होंने गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन कोच को जलाने की पूरी साजिश रची थी, जिसके लिए उसने भीड़ को उकसाया और ट्रेन के कोच को जलाने के लिए पेट्रोल का इंतजाम किया था। जाँच के दौरान नाम सामने आने के तुरंत बाद वह दिल्ली भाग गया था।”

गौरतलब है कि 27 फरवरी 2002 को हुए गोधरा कांड में 59 कारसेवक मारे गए थे, जिसके बाद गुजरात में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे। भटुक ने ही इस पूरी घटना की साजिश रची थी, जिसके चलते जिंदा कारसेवकों को आग में झोंक दिया गया था। आज भी इस घटना को याद कर लोगों के रूह कांप जाते है।

नोट: भूलवश हमने रफीक हुसैन भटुक की जगह स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर आरसी कोडेकर की तस्वीर प्रकाशित कर दी थी। इसका हमें खेद है।

‘नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी गैर-जिम्मेदाराना’: रिटायर्ड जज ने सुनाई खरी-खरी, कहा – यही करना है तो नेता बन जाएँ, जज क्यों बने बैठे हैं?

नुपूर शर्मा की याचिका पर सुनवाई के दौरान उनके ऊपर सुप्रीम कोर्ट के जजों ने जो टिप्पणी की, उसके बाद जगह-जगह उनकी आलोचना हो रही है। इसी क्रम में दिल्ली हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज एसएन ढींगरा ने भी मीडिया में आकर बताया कि वो सुप्रीम कोर्ट के जजों की टिप्पणी पर क्या सोचते हैं।

उन्होंने उदयपुर हिंसा के लिए नुपूर शर्मा को जिम्मेदार ठहराए जाने पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जजों की यह टिप्पणी उनके ख्याल से बहुत गैर जिम्मेदार है।

वह बोले,

“मेरे ख्याल से ये टिप्पणी बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। उनका कोई अधिकार नहीं है कि वो इस तरह की टिप्पणी करें, जिससे जो व्यक्ति न्याय माँगने आया है उसका पूरा करियर चौपट हो जाए या जो निचली अदालते हैं वो पक्षपाती हो जाएँ। सुप्रीम कोर्ट ने नुपूर को सुना तक नहीं और आरोप लगाकर अपना फैसला सुना दिया। मामले में न सुनवाई हुई, न कोई गवाही, न कोई जाँच हुई और न नुपूर को अवसर दिया गया कि वो अपनी सफाई पेश कर सकें। तो इस तरह सुप्रीम कोर्ट का टिप्पणी पेश करना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि गैर कानूनी भी है और अनुचित भी। ऐसी टिप्पणी सर्वोच्च न्यायालय को करने का कोई अधिकार नहीं है।”

जस्टिस एसएन ढींगरा ने सवाल उठाया कि आखिर सुप्रीम कोर्ट के जजों ने अपनी कही बातों को लिखित आदेश में क्यों नहीं शामिल किया। उन्होंने कहा कि अगर इस तरह जजों को टिप्पणी देनी है तो उन्हें राजनेता बन जाना चाहिए वो लोग जज क्यों है।

जब जस्टिस से पूछा गया कि आखिर कैसे कोर्ट की टिप्पणी गैर कानूनी हो सकती है तो उन्होंने कहा, “कोर्ट कानून से ऊपर नहीं है। कानून कहता है कि अगर आप किसी व्यक्ति को दोषी बताना चाहते हैं तो पहले आपको उसके ऊपर चार्ज फ्रेम करना होगा और इसके बाद जाँचकर्ता सबूत पेश करेंगे, फिर बयान लिए जाएँगे, गवाही होगी तब जाकर सभी साक्ष्यों को ध्यान में रखकर अपना फैसला सुनाया जाएगा। लेकिन यहाँ क्या हुआ। यहाँ तो नुपूर शर्मा अपनी एफआईआर ट्रांस्फर कराने गई थी और वहीं कोर्ट ने खुद उनके बयान पर स्वत: संज्ञान लेकर उन्हें सुना दिया।”

उन्होंने ये भी बताया कि अगर अब सुप्रीम कोर्ट के जज को ये पूछा जाए कि नुपूर शर्मा का बयान कैसे भड़काने वाला है, इस पर वह आकर कोर्ट को बताएँ, तो उन्हें पेश होकर ये बात बतानी पड़ेगी। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस ढींगरा ने ये भी कहा कि अगर वो ट्रायल कोर्ट के जस्टिस होते तो वो सबसे पहले इन्हीं जजों को बुलाते और कहते –

“आप आकर गवाही दीजिए और बताइए कैसे नुपूर शर्मा ने गलत बयान दिया और उसे आप किस तरह से देखते हैं। टीवी मीडिया और चंद लोगों के कहने पर आपने अपनी राय बना ली। आपने खुद क्या और कैसे महसूस किया, इसे बताएँ।”

उन्होंने मीडिया में ये भी कहा कि जिस प्रकार नुपूर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट ने ये कह दिया कि उनके सिर पर ताकत का नशा था क्योंकि उनकी पार्टी सत्ता में थी। ये चीज सुप्रीम कोर्ट पर भी एप्लाई होती है। कोर्ट किसी को मौखिक तौर पर दोषी नहीं बता सकता। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणियाँ बताती हैं कि सुप्रीम कोर्ट खुद ताकत के नशे में है। सड़क पर खड़ा व्यक्ति अगर मौखिक रूप से कुछ बोले तो लोग उसे गंभीरता से नहीं लेते, लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट बोले तो इसका महत्व होता है। उन्होंने इस मामले पर ऐसी मौखिक टिप्पणी देकर लोगों को मौका दे दिया है कि वो उनकी आलोचना करें। सुप्रीम कोर्ट अपने आपको इस स्तर पर ले गया कि मजिस्ट्रेट भी इस तरह के काम नहीं करता। वो भी मौखिक रूप से नहीं बोलते। इसलिए एसएन ढींगरा मानते हैं कि इन टिप्पणियों से सर्वोच्च न्यायायल का स्तर गिरा है।

एसएन ढींगरा ने मीडिया को बताया कि सुप्रीम कोर्ट का काम था नुपूर शर्मा की याचिका पर सुनवाई करना। उनके पास पर्याप्त वजह थी कोर्ट तक जाने की। उन्हें धमकियाँ आ रही थीं और उनका समर्थन करने वालों को मारा जा रहा था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जजों के बयानों को गैर-आवश्यक और गैर-कानूनी करार दिया। साथ ही इस केस पर बोलते हुए उन्होंने ये भी कहा कि जैसे कोर्ट ने ये पूछा है कि आखिर नुपूर पर हुई एफआईआर पर क्या एक्शन लिया गया। इस पर बोलते हुए एसएन ढींगरा ने कहा कि एफआईआर के आधार पर गिरफ्तारी गलत बात है। जब तक ये सिद्ध न हो कि एफआईआर सही है तब तक उस शख्स को उठाना गलत है।

उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि नुपूर शर्मा का जितना दायित्व है कि वो अपनी बात को सोच समझ कर बोलें उससे ज्यादा जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट की है कि वो अपनी बात को सोच समझ कर कहें। वो क्यों इस तरह की टिप्पणी कर रहे हैं। अगर उन्हें लगता है कि वो राजा है और कुछ भी बोल सकते हैं तो ये अधिकार तो हर कोई सोचता है। उन्होंने बताया कि अब आगे सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद यही विकल्प है कि नुपूर हर हाईकोर्ट में जाकर गुहार लगाएँ और कहें कि उनके खिलाफ एफआईआर ट्रांस्फर हो या फिर उसे खारिज किया जाए।

‘क्या किसी हिन्दू ने शिव जी के नाम पर हत्या की?’: उदयपुर घटना की निंदा करने पर अभिनेत्री को गला काटने की धमकी, कहा – नहीं डरूँगी

टीवी अभिनेत्री निहारिका तिवारी ने उदयपुर में कन्हैया लाल तेली की जघन्य हत्या की निंदा क्या की, उन्हें इस्लामी कट्टरपंथी गला काटने की धमकी दे रहे हैं। ‘रॉडिज’ की कंटेस्टेंट रह चुकीं निहारिका तिवारी को इस्लामी कट्टरवादी इंस्टाग्राम पर मैसेज कर के कह रहे हैं कि अब तुम्हारी बारी है। उनके अलावा भिलाई के एक युवक को भी जान से मार डालने की धमकी मिली है। निहारिका तिवारी ने उदयपुर में सिर कलम किए जाने की घटना की निंदा की थी।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके दंतेवाड़ा की रहने वाली निहारिका तिवारी फ़िलहाल इंडोनेशिया में हैं। एक शूटिंग के सिलसिले में वो वहाँ गई हैं। उन्होंने कहा कि काफी कम इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर इस तरह की घटनाओं पर अपनी राय रखते हैं, लेकिन उदयपुर की घटना भर्त्सना लायक थी, इसीलिए उन्होंने इस पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वो अपनी बयान पर कायम हैं और उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वीडियो में उन्होंने नूपुर शर्मा का पक्ष नहीं लिया था, बल्कि हत्याकांड की निंदा की थी।

निहारिका तिवारी ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए वीडियो में कहा था कि खुलेआम हत्याएँ हो रही हैं और हमारे प्रधानमंत्री तक को जान से मार डालने की धमकियाँ दी जा रही हैं। इसके बाद उन्होंने पूछा था कि क्या ये सही है? साथ ही उन्होंने कहा था कि हम हिन्दू भगवान शिव का नाम लेकर किसी का गला नहीं काटते और ऐसा कभी सुनने को नहीं मिला कि किसी हिन्दू ने शिव जी के लिए हत्या कर दी हो। निहारिका तिवारी ने शिवलिंग के अपमान की घटनाओं की याद दिलाते हुए कहा था कि इससे हमें भी गुस्सा आएगा।

निहारिका तिवारी ने पूछा था कि नूपुर शर्मा को तो भाजपा से निलंबित कर दिया गया, लेकिन शिवलिंग का मजाक बनाने वालों का क्या? अब उन्हें इंस्टाग्राम पर कट्टरवादी कह रहे हैं कि तेरा गला भी कटेगा, तू रुक। एक ने उन्हें गिनती चालू करने की धमकी दी, तो किसी ने काम से काम रखने की सलाह। निहारिका तिवारी ने कहा कि कोई कुछ भी बोले, वो इन चीजों से डरने वाली नहीं हैं। उधर रायपुर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में काम करने वाले एक युवक को भी इंस्टाग्राम पर नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर धमकी मिली है।

नुपूर शर्मा के खिलाफ कोलकाता पुलिस ने किया लुकआउट नोटिस जारी, हत्या की धमकियों के बीच माँगी गई 4 हफ्तों की मोहलत नजरअंदाज

भारतीय जनता पार्टी की निलंबित प्रवक्ता नुपूर शर्मा के खिलाफ कोलकाता पुलिस ने लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है। कोलकाता की दो थानों की पुलिस ने नुपूर शर्मा को कुछ दिन पहले समन भेजकर उनसे वहाँ पेश होने को कहा था। हालाँकि जान का खतरा होने के कारण नुपूर थानों में नहीं गई, जिसके बाद कोलकाता पुलिस ने ये नोटिस जारी किया ताकि नुपूर देश छोड़कर कहीं न जा पाएँ।

बता दें कि नुपूर के खिलाफ कोलकाता समेत बंगाल के लगभग 10 थानों में एफआईआर दर्ज हुई है। कोलकाता के एम्हर्स्ट और नारकेलडांगा थानों ने नुपूर को समन भेजा था जिनके मुताबिक उन्हें एक थाने में पिछले सोमवार को पेश होना था और दूसरे में 20 जून को। लेकिन देश विदेश से मिल रही धमकियों के चलते वह थाने में नहीं हाजिर हुईं और अब खबर है कि उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी हुआ है।

उल्लेखनीय है मई माह में नुपूर शर्मा ने एक डिबेट शो में पैगंबर मोहम्मद को लेकर अपनी टिप्पणी की थी। इसके बाद उनके ऊपर देश के कोने-कोने में एफआईआर की गई और साथ ही विदेशों से उन्हें जान से मारने की धमकियाँ भी आई। दिल्ली पुलिस ने नुपूर शर्मा को मिलती धमकियाँ देख उन्हें सुरक्षा प्रदान की। लेकिन धमकियाँ आनी बंद नहीं हुईं।

अभी कुछ समय पहले बंगाल में तृणमूल के राज्य अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ महासचिव अबू सोहेल ने नुपूर के खिलाफ मेदिनीपुर जिले के कांथी थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाके शांति भंग करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि अगर नुपूर को गिरफ्तार नहीं किया गया तो वो सुप्रीम कोर्ट जाएँगे।

अब यहाँ मालूम रहे कि सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा नुपूर शर्मा द्वारा भी खटखटाया गया था। उन्होंने माँग की थी कि उनके विरुद्ध हुई सारी एफआईआर को दिल्ली ट्रांस्फर किया जाए क्योंकि उन्हें जान का खतरा है। हालाँकि कोर्ट ने उनकी शिकायत पर सुनवाई की जगह उनके ऊपर देश में फैली हिंसा और उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या का ठीकरा फोड़ दिया। कोर्ट ने कहा कि उन्हें जान का खतरा है कि उनके कारण देश खतरे में आ गया है।

मुस्लिम भीड़ ने पूरे जिले की सड़कों को बंधक बनाया, HC ने दिया था अवैध मस्जिद सील करने का आदेश: स्थानीय DMK विधायक भी प्रदर्शनकारियों के साथ

तमिलनाडु के तिरुपुर में एक अवैध मस्जिद सील किए जाने के बाद मुस्लिम भीड़ ने सड़क जाम कर के पूरे शहर को रोक दिया। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे हाइवे पर ही चादर बिछा कर महिला-पुरुष नमाज पढ़ रहे हैं। इस दौरान घंटों ट्रैफिक जाम लगा रहा। राजस्व विभाग ने 15 वेलमपलायम के महालक्ष्मी नगर स्थित एक अवैध रूप से बनी मस्जिद को सील करने का प्रयास किया था, जिसके बाद इस तरह की हरकतें की गईं।

गुरुवार (30 जून, 2022) को निकली मुस्लिम भीड़ ने पूरे जिले भर में ऐसा विरोध प्रदर्शन किया कि यातायात एकदम से ठप्प रहा। इस मस्जिद को पिछले एक दशक से संचालित किया जा रहा था, वो भी बिना अनुमति के। कॉर्पोरेशन के एक अधिकारी ने जानकारी दी कि 1600 स्क्वायर फ़ीट में स्थित इस मस्जिद 2011 में गंजी की कंपनी चलाने के लिए इस जमीन पर अनुमति प्राप्त की थी। इसके बाद मुस्लिमों के एक समूह ने इसे खरीद लिया और इसे मस्जिद में तब्दील कर दिया।

इस मामले में ‘रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन’ ने मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उसमें इसे एक अवैध इमारत बताया गया था। हाईकोर्ट ने 2016 में रेवेन्यू डिपार्टमेंट को इसे सील करने का आदेश दिया। हालाँकि, एसोसिएशन ऐसा करने में नाकाम रहा। फिर एसोसिएशन ने इसे अदालत की अवमानना बताते हुए शिकायत दायर की। तत्पश्चात हाईकोर्ट ने इसे सील करने के लिए 30 जून, 2022 तक की समयावधि निर्धारित की।

गुरुवार की सुबह जब राजस्व विभाग के अधिकारी, कॉर्पोरेशन के अधिकारी और पुलिस टीम मौके पर पहुँची और सील करने की कार्रवाई शुरू की, तभी 300 की मुस्लिम भीड़ ने तिरुपुर कॉर्पोरेशन के दफ्तर के सामने वाली सड़क को जाम कर दिया। कई घंटों के जाम के बाद नगरपालिका को काउंसिल की बैठक रद्द करनी पड़ी। पूरे जिले में सड़कें जाम की गईं। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात करना पड़ा। खुद पुलिस कमिश्नर और एसपी को प्रदर्शनकारियों से बात करनी पड़ी।

प्रदर्शनकारियों ने मद्रास हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की, जिसके बाद 4 जुलाई तक मामले को सुलझाने का निर्देश आया है। शाम के 4 बजे के बाद यातायात वापस बहाल किया जा सका। मुस्लिम प्रदर्शनकारियों के सामने हाथ खड़े कर देने वाली पुलिस के विरोध में ‘हिन्दू मुन्नानी’ संगठन के सदस्यों ने ‘रोड रोको’ अभियान भी चलाया। सत्ताधारी DMK के स्थानीय विधायक ने मुस्लिमों का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन को पत्र लिखा है।

‘मुझे नहीं, कंपनी को मिली विदेशी फंडिंग’: कोर्ट में और AltNews की वेबसाइट पर जुबैर के अलग-अलग दावे, 14 दिन की कस्टडी में भेजा गया

ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की 4 दिन की पुलिस कस्टडी खत्म होने के बाद आज (2 जुलाई) दिल्ली के कोर्ट में इस केस की आगे सुनवाई हुई। सुनवाई में दिल्ली पुलिस ने जुबैर की 14 दिन की पुलिस कस्टडी और माँगी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार लिया। कोर्ट ने जुबैर की बेल याचिका खारिज करते हुए उसे 14 की न्यायिक हिरासत में भेजा।

बता दें कि जुबैर के लिए वकील वृंदा ग्रोवर ने बेल की गुहार लगाई थी जबकि दिल्ली पुलिस ने जुबैर के ऊपर विदेश फंडिंग का आरोप लगाते हुए बताया कि उनकी पड़ताल में पता चला है कि जुबैर को पाकिस्तान, सीरिया से पैसे आए।

पुलिस ने कोर्ट से जुबैर को बेल न देने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें शुरुआती जाँच में गलत ढंग से विदेशों से फंडिंग का पता चला है जिसकी जाँच होनी है। इसलिए जुबैर की जमानत न दी जाए। वहीं जुबैर की ओर से विदेशी फंडिंग मामले में कहा गया कि कोर्ट को ये कहकर भ्रमित किया जा रहा है कि उन्होंने विदेशों से फंडिंग ली है। वह पत्रकार हैं और विदेशों से मिलने वाला फंड उन्हें नहीं मिल सकता। जुबैर के अनुसार ये फंड उनकी कंपनी को गया है न कि उन्हें।

जुबैर को बचाने में फँसा AltNews

बता दें कि एक ओर जहाँ जुबैर जमानत लेने के लिए ये कह रहा है कि ये फंडिंग उसे नहीं बल्कि कंपनी को आई है। वहीं ऑल्ट न्यूज का डोनेशन वाला सेक्शन बताता है कि वह विदेशी फंड नहीं लेते क्योंकि वह FCRA के तहत पंजीकृत ही नहीं हैं। नीचे लगाया गया स्क्रीनशॉट ऑल्ट न्यूज के डोनेट वाला सेक्शन से खबर लिखते समय ही लिया गया है।

बता दें कि जुबैर को 27 जून को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अब आज उसकी पुलिस हिरासत की अवधि खत्म होने पर कोर्ट में पेशी हुई तो सरकारी वकील अतुल श्रीवास्तव ने तमाम तरह के आरोप जुबैर पर लगाए। इन आरोपों में विदेशी फंड लेने के साथ-साथ सबूतों को मिटाने का भी इल्जाम लगा है।

एपीपी श्रीवास्तव ने कहा कि मोहम्मद जुबैर को विदेश में रहने वाले लोगों से पैसे आए। उन्होंने जानकारी दी कि पाकिस्तान, सीरिया से आने वाली पेमेंट को Razor गेटवे से स्वीकार किया गया। अब पुलिस को इसी मामले में आगे की जाँच करनी है क्योंकि जुबैर को बचाने के लिए उनकी वकील की ओर से दिया गया बयान और ऑल्ट न्यूज की वेबसाइट पर हो रखा दावा एक दूसरे से भिन्न हैं।

केरल के पूर्व MLA पीसी जॉर्ज यौन उत्पीड़न केस में गिरफ्तार: सोलर घोटाले की आरोपित ने लगाया आरोप, मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं को नपुंसक बनाने का दे चुके हैं बयान

केरल के वरिष्ठ नेता और पूंजार (Poonjar) के पूर्व विधायक पीसी जॉर्ज (PC George) को सोलर पैनल मामले में एक आरोपित द्वारा दायर यौन उत्पीड़न की शिकायत पर शनिवार (2 जुलाई 2022) को गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले मुस्लिम होटलों में हिंदुओं को नपुंसक बनाने वाली दवा देने के बयान पर गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस ने बताया कि जॉर्ज को तिरुवनंतपुरम के एक अतिथि गृह से छावनी पुलिस ने हिरासत में लिया। यहाँ केरल पुलिस की अपराध शाखा उनसे गोल्ड स्मगलिंग मामले की आरोपित स्वप्ना सुरेश द्वारा सीएम पिनराई विजयन को बदनाम के आरोपों को लेकर पूछताछ कर रही थी।

33 वर्षों तक पूंजर सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले 70 वर्षीय जॉर्ज के खिलाफ IPC की धारा 354 और 354A के तहत यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता घोटाला के मामले में भी आरोपित है।

केटी जलील नाम के व्यक्ति ने पीसी जॉर्ज और सोने की तस्करी मामले में गिरफ्तार स्वप्ना सुरेश के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि ये लोग सीएम विजयन की छवि को धूमिल करना चाहते हैं। इसलिए उन पर झूठे आरोप लगा रहे हैं।

वेबसाइट ऑनमनोरमा की रिपोर्ट के अनुसार, जाँच अधिकारियों ने सरिता एस नायर के बयान का विश्लेषण करने के बाद पीसी जॉर्ज से पूछताछ की। पूछताछ में उन्होंने कहा कि पीसी जॉर्ज ने उन्हें खुलासे करने के लिए मजबूर किया था।

जॉर्ज पर आरोप है कि उन्होंने 10 फरवरी 2022 को महिला को थायकॉड के गेस्ट हाउस में बुलाया था और उसका यौन शोषण किया था। शिकायतकर्ता महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसे पीसी जॉर्ज से गलत सूचनाएँ मिली हैं। इसके बाद जॉर्ज को थायकॉड के गेस्ट हाउस में सरकार के खिलाफ कथित तौर पर साजिश रचने के एक मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

सीएम विजयन के खिलाफ जिस दिन स्वप्ना सुरेश ने आरोप लगाए थे, उसी दिन शिकायतकर्ता और पीसी जॉर्ज के बीच बातचीत का एक ऑडियो क्लिप भी सामने आया था। शिकायतकर्ता कहना है कि बातचीत हुई थी और यह घटना उसी दिन की है।

स्वप्ना सुरेश पर सोने की तस्करी के आरोपों हैं और उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पर आरोप लगाया था कि साल 2016 में दुबई में उन्हेें नोटों से भरा बैग दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि सीएम एक बैग लेना भूल गए थे और वाणिज्य दूतावास में एक राजनयिक के माध्यम से इसे सीएम के पास भेजा गया। जब बैग को दूतावास में लाया गया, तब इसमें करेंसी थी।

मुस्लिम होटलों में हिंदुओं को नपुंसकता की दवा

इसके पहले पीसी जॉर्ज (PC George) को पुलिस ने 1 मई 2022 को गिरफ्तार किया था। जॉर्ज ने कहा था कि राज्य में मुस्लिमों के रेस्टोरेंट में मिलने वाली चाय एवं ड्रिंक्स में नपुंसक बनाने वाली दवा मिली होती है। उन्होंने मुस्लिमों का बहिष्कार करने की भी अपील की थी। उनके इस बयान के बाद शनिवार (30 अप्रैल 2022) को उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

जॉर्ज पर एक हिंदू सम्मेलन में मुस्लिम भावनाओं को आहत करने के आरोप में उनके घर से गिरफ्तार किया गया है। जॉर्ज के खिलाफ धारा 295A के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसमें कहा गया है कि वे समाज में विभाजन पैदा करने और सांप्रदायिक नफरत फैलाने के प्रयास कर रहे हैं। उनके खिलाफ गैर-जमानती धारा लगाई गई है। 

जॉर्ज ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोग गैर-मुस्लिम इलाकों में व्यवसाय शुरू करते हैं और उन्हीं से पैसे कमाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वे ऐसे मुस्लिम कारोबारियों का बहिष्कार करें। उन्होंने कहा, “मुस्लिम खाने में तीन बार थूकते हैं। उनके मौलाना कहते हैं कि थूक इत्र हैं। हम उनका खाना क्यों खाएँ?”

जॉर्ज ने कहा कि लोगों को मुस्लिमों द्वारा चलाए जाने वाले रेस्तरां में बचना चाहिए, क्योंकि वे खाने-पीने के सामानों में ‘नपुंसकता पैदा करने वाले ड्रॉप’ का इस्तेमाल करते हैं। वे पुरुषों को नपुंसक और महिलाओं बांझ बनाकर वे देश पर कब्जा करने की इच्छा पाल कर बैठे हैं। इसलिए हर हिंदू और ईसाई महिला को कम-से-कम चार बच्चे पैदा करना चाहिए।

कन्हैया लाल के हत्यारों को लात-घूसों से धुना, चप्पल-जूते से भी पिटाई: कोर्ट परिसर में ‘मारो-मारो’ कहते दौड़ी भीड़, फाड़ डाले कपड़े

राजस्थान के उदयपुर में 28 जून को हुई कन्हैयालाल की हत्या के चारों आरोपितों की जयपुर कोर्ट में वकीलों ने पिटाई कर दी है। पिटाई में वकीलों के साथ अदालत आए कुछ अन्य लोग भी शामिल थे। इस बीच न्यायालय ने दोनों आरोपितों को 10 दिन के लिए NIA की रिमांड पर भेज दिया है। यह वाकया आज 2 जुलाई 2022 (शनिवार) का है।

पिटाई के वायरल हो रहे वीडियो में पुलिस चारों को भीड़ से बचाने का प्रयास कर रही है। इस दौरान वकीलों की पुलिस से धक्कामुक्की भी होती है। काफी शोर-शराबे के बीच आखिरकार चारों को जैसे-तैसे पुलिस वाहन में लाद कर पुलिस अपने साथ ले गई। इस दौरान भीड़ की तरफ से मारो-मारो की आवाजें भी सुनाई दे रही हैं। रिमांड के लिए आज इनकी पेशी जयपुर के विशेष राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) कोर्ट में थी। यह मामले फ़िलहाल सीबीआई कोर्ट संख्या 1 में ही सुने जा रहे हैं।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक चारों आरोपितों के कपड़े फाड़ दिए गए हैं। आरोपितों पर जूते चप्पलों से हमला किया गया। चारों को चोटें भी आई हैं। इन सभी को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया है। चारों को बचाते हुए कुछ पुलिसकर्मी भी आंशिक रूप से घायल हुए हैं जिनको प्राथमिक उपचार दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपितों की सुरक्षा में मद्देनजर अदालत में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। NIA की टीम भी मौके पर मौजूद थी। कानूनी प्रक्रियाओं के बाद दोनों आरोपितों को 12 जुलाई तक NIA की कस्टडी में भेज दिया गया। दोनों को कोर्ट से ले जाते समय वकीलों की भीड़ ने अचानक आरोपितों पर हमला बोल दिया और चारों की लात-घूसों से पिटाई कर दी।