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मदरसाछाप सोच पर यूनेस्को की भी मुहर: रिपोर्ट में बताया- मदरसों में जिनकी तालीम, उनके लिए औरतें बच्चों की मशीन

देश में मदरसा में दी जाने तालीम (शिक्षा) को लेकर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं, लेकिन इसे धार्मिक शिक्षा का अंग बताकर किसी भी सवाल की संभावना को नकार दिया जाता रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की संस्था यूनेस्को (UNESCO) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मदरसों में पढ़े लोगों में लैंगिक पूर्वाग्रह होता है।

यूनेस्को ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मदरसों में पढ़े बेहद कम लोगों में महिलाओं की उच्च शिक्षा और कामकाजी माताओं के प्रति सकारात्मक राय थी। इन लोगों का मानना ​​​​था कि बीवियों का मूल काम बच्चों की परवरिश करना है, क्योंकि अल्लाह को बच्चों की संख्या निर्धारित करनी है। ऐसे लोगों ने बड़े परिवार का समर्थन किया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मदरसा छात्र महिलाओं और उनकी क्षमताओं के बारे में कम अनुकूल रवैया रखते थे। पारंपरिक मदरसों में शिक्षकों के परिवार काफी बड़े पाए गए थे। हालाँकि, इसके असर को लेकर कहा गया है कि मदरसों के कारण सुदूर ग्रामीण इलाकों में लड़कियों की शिक्षा में बढ़ोत्तरी हुई है। इसमें प्रमुख भूमिका आस्था आधारित शिक्षा देने वाले संस्थानों का गैर सरकारी संस्थानों के साथ गठजोड़ की भूमिका महत्वपूर्ण है।

हालाँकि, इस संख्या में बढ़ोत्तरी पर आशंका जाहिर करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है, “मदरसा शिक्षा पहुँच में वृद्धि लैंगिक समानता पर हुए कुछ सकारात्मक प्रभाव को भी खत्म कर सकता है। पहला, मदरसा शिक्षा के पाठ्यक्रम और पाठ्य-पुस्तकें लिंग-समावेशी नहीं हो सकती हैं। इसके बजाय वे लिंग आधारित पारंपरिक भूमिकाओं पर जोर देती हैं। बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया, पाकिस्तान और सऊदी अरब में अध्ययनों से यही पता चला है। दूसरा, उनके शिक्षण और सिखाने की प्रथाएँ जैसे कि सामाजिक मेलजोल के दौरान लैंगिक अलगाव और विशिष्ट लैंगिक प्रतिबंध यह धारणा बना सकते हैं कि इस तरह की लैंगिक असमानता सामाजिक रूप से स्वीकार्य हैं।”

रिपोर्ट में आशंका दर्ज की गई है कि मदरसों शिक्षकों के पास लैंगिक मुद्दों का समाधान करने के लिए प्रशिक्षण की कमी है और वे इसका नकारात्मक मॉडल के रूप में कार्य कर सकते हैं। जैसे कि वे प्रजनन क्षमता को लेकर छात्रों के दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मदरसे आमतौर पर एक ही तरह के पाठ्यक्रम अपनाते हैं, जो मजहब पर आधारित होते हैं। हालाँकि, हर देश में इनकी स्थिति एक जैसी नहीं है। कुछ देश मदरसों को सरकारी पाठ्यक्रमों जोड़ देते हैं, जबकि अन्य मुल्क पारंपरिक मॉडल से चिपके रहते हैं।”

रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि लैंगिक समानता की दिशा में प्रगति पर गैर-राज्य आस्था-आधारित स्कूलों के प्रभाव से मजहबी विश्वास एवं सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के प्रभाव को अलग करना बहुत मुश्किल है। मदरसा नामांकन में किसी के घर के मजहबी विश्वास की प्रगाढ़ता और मजहबी स्कूल से दूरी के बीच अंतरसंबंध है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मदरसों के मजहबी और संस्थागत इतिहास अक्सर राज्य और गैर-राज्य संस्थानों के बीच की सीमाओं को धुंधला करते हैं और विश्लेषण को और अधिक जटिल बनाते हैं। उनके बीच विचारधारा का पालन, मजहबी किताबों और इस्लामी शिक्षाओं पर जोर दिया जाता है। इसके साथ ही दैनिक मजहबी उपस्थिति और स्थानीय मस्जिदों से लगाव जैसे कई कारक हैं।

जुबानी जहर उगलने वालों पर ट्विटर टाइट: खालिस्तानी समर्थक हैंडल्स भारत में बैन, हिंदू घृणा से सने लेखक पर भी एक्शन

सोशल मीडिया पर भारत विरोधी प्रोपेगेंडा चलाने वालों के खिलाफ ट्विटर ने ताबड़तोड़ एक्शन लिया है। राणा अयूब के ट्वीट के बाद खबर है कि कई खालिस्तानी-ISI आतंकियों के अकॉउंट को इंडिया में प्रतिबंधित कर दिया गया है। ये कार्रवाई भी मोदी सरकार द्वारा दिए गए आदेशों के बाद हुई है।

जानकारी के अनुसार, इन ट्विटर अकॉउंट में से एक अकॉउंट खालिस्तानी लेखक अमान बाली का भी है। इस अकॉउंट पर क्लिक करने पर अब लिखा आ रहा है कि ये अकॉउंट लीगल डिमांड के बाद भारत में प्रतिबंधित किया गया है।

अमान बाली को लेकर पता हो कि खालिस्तानी समर्थक एजेंडा फैलाने के साथ इसने उस किसान आंदोलन को भी समर्थन दिया था जिससे समय-समय पर हिंसा की खबरें आईं। इसके अलावा सिख लड़कियों के इस्लामवादियों द्वारा अपहरण पर भी जब हिंदुओं ने आवाज उठाई थी तो इन्होंने कहा था कि हिंदू घटना का फायदा उठा रहे हैं। इसके अलावा स्वर्ण मंदिर में हुईं लिंचिंग का मामला हो या फिर कश्मीरी हिंदू टीचर की हत्या को दबाने का प्रयास, ये सब कुछ अमान बाली द्वारा अक्सर किया जाता रहा।

जब अफगानिस्तान के गुरुद्वारे कार्ते परवान पर आतंकियों ने हमला किया तो भी अमान ने इसका जिम्मेदार हिंदुओं को बताया। उसने इस हमले में नुपूर शर्मा केस को जोड़ा था।

जानकारी के मुताबिक, ट्विटर ने अमान बाली के अलावा जिन अन्य खालिस्तानी अकॉउंट्स पर कार्रवाई की है। उनमें सिख पीए, जकारा मूवमेंट, एएस खालसा 84, शेरे पंजाब यूके, ट्रैक्टर टू ट्विटर जैसे अकॉउंट शामिल है। इन सब पर क्लिक करने पर यही नजर आता है कि ये भारत में प्रतिबंधित कर दिए गए हैं।

बता दें कि इससे पहले भारत विरोधी बातें सोशल मीडिया पर फैलाने के आरोप में ऑस्ट्रेलियाई लेख सी जे वर्लमैन के ट्विटर पर ऐसी ही कार्रवाई हुई थी। इसके अलावा सिद्धू मूसेवाला का एक गाना हाल में इंटरनेट से हटा दिया गया। कथिततौर पर उसमें खालिस्तान का महिमामंडन और भारत विरोधी बातें थीं।

इंडियन साइबर डिफेंडर द्वारा साझा जानकारी के अनुसार खालिस्तानियों के अलावा कुछ इस्लामी आतंकियों के अकॉउंट भी भारत में प्रतिबंधित हुए हैं। इस ट्वीट के अनुसार थिरुमुरुगन गाँधी, सुननंधा थामराई सेलवन, बेसिक्स ऑफ सिक्खी, पकियाराजन जैसे अकॉउंट हैं।

मालूम हो कि आज सुबह ही ट्विटर द्वारा राणा अयूब के ट्वीट पर कार्रवाई करने की खबर आई थी। वो ट्वीट ज्ञानवापी पर था। ट्वीट को भारत में बैन किए जाने को लेकर राणा ने जानकारी दी थी। इसके बाद तमाम लिबरल उनके समर्थन में आकर बोलने लगे थे। सवाल किया गया कि आखिर भारत की इतनी बड़ी पत्रकार की आवाज दबाने की कोशिश क्यों हुई।

न्यूयॉर्क में सिख युवक को भूना, गर्दन और सीने में गोलियाँ लगने से मौत: CCTV कैमरे में कैद हुई घटना, अप्रैल में भी दो सिख बने थे निशाना

अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में सिखों पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। न्यूयॉर्क के साउथ ओजोन पार्क इलाके में 25 जून को एक सिख व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक की पहचान 31 वर्षीय सतनाम सिंह के रूप में हुई है। ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, सतनाम सिंह शनिवार दोपहर को क्वींस के साउथ ओजोन पार्क में खड़ी एक काली जीप में बैठे हुए थे, तभी हमलावर उनके पास आया और उन पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसा दीं

न्यूयॉर्क पुलिस ने बताया कि सिंह की गर्दन और सीने में गोली लगी थी। सिंह को पास के एक अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार, यह घटना रिचमंड हिल में दक्षिण ओजोन पार्क के पास हुई है, जहाँ इस साल अप्रैल में दो सिखों पर अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सतनाम सिंह की हत्या के मामले में पुलिस और चश्मदीद गवाहों के बयानों में अंतर पाया गया है। न्यूयॉर्क पुलिस के अनुसार, हमलावर पैदल आया और जीप में बैठे सिंह पर गोलियाँ चला दीं। वहीं, एक पड़ोसी ने बताया कि हमलावर एक कार से आया था और सिंह की जीप के पास से गुजरते समय उन पर गोलियाँ बरसाई थीं।

पड़ोसी जोआन कैपेलानी ने कहा, “सिंह 129वीं स्ट्रीट पर चलकर पार्किंग में खड़ी जीप की तरफ जा रहे थे, तभी सिडान कार में सवार हमलावर वहाँ से गुजरा।” उन्होंने कहा, “हमलावर ने यू-टर्न लिया, वापस आया, गोलियाँ बरसाईं और फिर 129वीं स्ट्रीट से चला गया।” कैपेलानी के मुताबिक, गोलीबारी की पूरी घटना उनके घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी।

एएम न्यूयॉर्क मेट्रो के मुताबिक, पुलिस ने रविवार सुबह तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं की। उनका कहना है कि पुलिस अकारण किए गए हमले के पीछे क्या मकसद था, इसका पता लगा रही है। मीडिया ने पुलिस सूत्रों के हवाले से कहा कि सतनाम सिंह ने अपने एक दोस्त से जीप उधार ली थी। इसको लेकर अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि क्या वह हमलावर का टारगेट था या फिर उसने गलती से किसी ऐसे व्यक्ति को मार दिया, जो कार के मालिक को निशाना बनाना चाहता था।

अप्रैल में न्यूयॉर्क में तीन सिख लोगों पर हमला

गौरतलब है कि न्यूयॉर्क के क्वींस में 13 अप्रैल 2022 को रिचमंड हिल में दो सिखों पर अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया था। सिखों को पहले बेरहमी से डंडों से पीटा गया और फिर उनकी पगड़ी को उतारा गया था। इससे पहले 72 साल के बुजुर्ग सिख निर्मल सिंह को निशाना बनाया गया था। सिख निर्मल सिंह पर हमले के बाद सिख संगठनों ने हमले में शामिल लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की माँग करते हुए न्यूयॉर्क में एकजुटता रैली निकाली थी। लेकिन इसके करीब 24 घंटे बाद भी सिखों पर हमले हुए थे।

सुप्रीम कोर्ट में एकनाथ शिंदे का पक्ष भारी: डिप्टी स्पीकर के नोटिस पर रोक, 11 जुलाई को अगली सुनवाई

महाराष्ट्र में सियासी तकरार के बीच अब दोनों गुटों की लड़ाई पर सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई समाप्त हो गई है। वहीं आज की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने शिंदे गुट को बड़ी राहत देते हुए अयोग्य ठहराए जाने वाले नोटिस पर जवाब देने के लिए अब 12 जुलाई की शाम 5: 30 तक का समय दे दिया है। पहले यह समय 11 जुलाई को 5: 30 बजे तक ही था। जबकि डिप्टी स्पीकर को आज ही जवाब देना है। सुप्रीम कोर्ट ने शिंदे गुट की अर्जी पर सभी पक्षों को नोटिस भेजा है। और सभी से पाँच दिन में नोटिस का जवाब माँगा है। मामले पर अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में बागी विधायकों को डिप्टी स्पीकर के नोटिस पर जवाब देने का समय बढ़ा दिया है। कोर्ट ने बागियों को जबाव देने के समय 12 जुलाई शाम 5.30 तक बढ़ा दिया। कोर्ट ने सभी 39 बागी विधायकों और उनके परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश भी राज्य सरकार को दिया है। महाराष्ट्र राज्य के वकील ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सभी 39 विधायकों और उनके परिवार के सदस्यों के जीवन और संपत्ति को कोई नुकसान न पहुँचे।

आज सुप्रीम कोर्ट में शिंदे गुट द्वारा दाखिल याचिका में विधानसभा के उपसभापति को विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई से रोकने की माँग की गई है। वहीं अजय चौधरी के विधायक दल का नेता बनाए जाने को भी चुनौती दी गई है। उप सभापति द्वारा जारी किए गए नोटिस भी सवालों के घेरे में थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को सुना।

सुनवाई की खास बातें

एकनाथ शिंदे गुट की दलीलों पर शिवसेना के वकील के तौर पर पेश हुए कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस केस में पहले हाईकोर्ट का ही रुख करना था, लेकिन मीडिया में यह केस इतना चर्चित हो गया है कि जान की धमकी की बात करते हुए वे सीधे सुप्रीम कोर्ट में ही आ गए हैं।

वहीं इसके जवाब में वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने कहा कि कानून हमें सुप्रीम कोर्ट आने से नहीं रोकता। पहले भी ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए हैं। जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि आप हाई कोर्ट क्यों नहीं गए।

वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल शिंदे गुट की तरफ से कहा कि स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव लंबित हो तो उन्हें विधायकों की अयोग्यता पर विचार नहीं करना चाहिए। नोटिस जारी करें तो उसके जवाब के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए।

जज ने कहा कि आप कह रहे हैं कि डिप्टी स्पीकर के खिलाफ 21 को प्रस्ताव दिया। ऐसे में उन्हें सुनवाई नहीं करनी चाहिए। आप यही बात डिप्टी स्पीकर को क्यों नहीं कहते हैं। इस पर वकील कौल ने कहा कि इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का भी पुराना फैसला है। यह बात उन्हें बताई भी गई है। फिर भी उन्होंने कार्रवाई जारी रखी है।

कोर्ट में शिंदे गुट की तरफ से कहा गया कि स्पीकर साबित करें कि उनके पास बहुमत है। फ्लोर टेस्ट से डिप्टी स्पीकर क्यों डर रहे हैं?

शिंदे गुट के वकील ने कहा कि जब स्पीकर के खिलाफ खुद अविश्वास प्रस्ताव हो, तब विधायकों को अयोग्य करार देकर विधानसभा सदस्यों की संख्या में उन्हें बदलाव नहीं करना चाहिए।

वरिष्ठ वकील कौल लगातार 2016 के नबाम रेबिया मामले का फैसला पढ़ रहे हैं। उसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अविश्वास प्रस्ताव लंबित रहते स्पीकर को विधायकों की अयोग्यता पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए।

शिंदे गुट के वकील नीरज कौल ने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा नियमावली के नियम 11 का भी पालन नहीं किया गया। 14 दिन का नोटिस दिया जाना चाहिए था। फिर नोटिस को विधानसभा में आगे विचार के लिए रखा जाना चाहिए था। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि अभी विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा है।

जज ने कहा कि हम पहले डिप्टी स्पीकर के वकील को सुनना चाहते हैं। वही दूसरा मुख्य पक्ष हैं। डिप्टी स्पीकर के लिए पेश राजीव धवन ने कहा कि पहले सिंघवी को बोलने दिया जाए। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मैं शिकायत करने वाले विधायकों के लिए पेश हुआ हूँ। मैं बताना चाहता हूँ कि नबाम रेबिया केस का उदाहरण गलत तरीके से दिया जा रहा है।

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कौल ने सुप्रीम कोर्ट के इस बात का जवाब नहीं दिया कि मामला हाई कोर्ट में नहीं चलना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि राजस्थान का अपवाद छोड़ दें तो सुप्रीम कोर्ट ने कभी भी स्पीकर के पास लंबित कार्रवाई पर सुनवाई नहीं की है। उनका अंतिम फैसला आने पर कोर्ट में सुनवाई होती है। स्पीकर गलत भी तय करते हैं, तो पहले उन्हें अपना काम करने दिया जाता है।

डिप्टी स्पीकर की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 212 कोर्ट को विधानसभा में लंबित किसी विषय पर दखल देने से रोकता है। जिस नोटिस का विरोध किया जा रहा है, वह विधानसभा के काम का हिस्सा है। इस पर जज ने कहा कि क्या हम यह सुनवाई कर विधानसभा की कार्यवाही में दखल दे रहे हैं? जिसका सिंघवी ने जवाब दिया कि अगर नबाम रेबिया का इस तरह से पालन हुआ तो इसके गलत परिणाम आएँगे। कल को कोई भी गुट पार्टी से अलग होने से पहले स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव दे देगा।

जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि आप यह बताइए कि नबाम रेबिया इस केस में लागू क्यों नहीं हो सकता? अनुच्छेद 212 पर आपकी दलील को मानें तो यही लगता है कि नबाम रेबिया केस में इस पर विचार नहीं किया गया या फिर यह विचार के लायक ही नहीं था।

जज ने कहा, “अगर आपको जवाब के लिए समय चाहिए तो हम दे सकते हैं। हम विधानसभा के सक्षम अधिकारी से जवाब माँगेंगे कि डिप्टी स्पीकर को प्रस्ताव मिला था या नहीं? क्या उन्होंने उसे खारिज कर दिया? तब सवाल यह उठेगा कि क्या स्पीकर अपने ही मामले में जज हो सकते हैं?”

एकनाथ शिंदे गुट के विधायकों की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई के दौरान अदालत ने एकनाथ शिंदे के वकील से पूछा, “आखिर इस मामले में पहले हाई कोर्ट का रुख क्यों नहीं किया?”

इस पर शिंदे के वकील ने कहा कि यह मामला गंभीर है और विधायकों को जान से मारने तक की धमकियाँ मिल रही हैं। इसलिए हमने शीर्ष अदालत का रुख किया है। शिंदे के वकील नीरज किशन कौल ने कहा, “अदालत चाहे तो फ्लोर टेस्ट का आदेश दे सकती है। 2019 में सर्वसम्मति से एकनाथ शिंदे को शिवसेना के विधायक दल का नेता चुना गया था, लेकिन बिना प्रक्रिया का पालन किए उन्हें हटा दिया गया।”

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एकनाथ शिंदे के वकील ने सुनवाई के दौरान संजय राउत की ओर से धमकी दिए जाने का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, “डिप्टी स्पीकर ने 15 विधायकों को नोटिस भेजकर 2 दिन में जवाब माँगा है, जबकि कम से कम 14 दिनों का वक्त मिलना चाहिए। जबकि ऐसे मामलों में जबकि सुप्रीम कोर्ट ही पहले भी साफ कर चुका है कि जरूरी वक्त दिया जाना चाहिए।” शिंदे के वकील ने कहा कि डिप्टी स्पीकर का नोटिस असंवैधानिक है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि डिप्टी स्पीकर के नोटिस से आपत्ति है तो आपने उनसे ऐतराज क्यों नहीं जताया? अदालत के इस सवाल पर एकनाथ शिंदे के वकील नीरज किशन कौल ने कहा, ‘विधायकों ने डिप्टी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया है। ऐसे में उनके आगे कैसे इस पर दलील दी जा सकती है।’

बहुमत गुवाहाटी में है तो कैसे लिया डिप्टी स्पीकर ने फैसला

शिंदे के वकील ने कहा, “पार्टी के ज्यादातर विधायक तो गुवाहाटी में ही हैं। ऐसे में कैसे उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए डिप्टी स्पीकर ने नोटिस जारी कर दिया।” बता दें कि केस की सुनवाई के दौरान अरुणाचल प्रदेश के मामले का भी जिक्र हुआ। वकील ने कहा कि स्पीकर ने जब भी अपने अधिकारों का अतिक्रमण किया गया, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश दिया है। एकनाथ शिंदे गुट ने कहा कि पहले तो डिप्टी स्पीकर की स्थिति पर ही फैसला होना चाहिए। उसके बाद ही उनकी ओर से की गई किसी कार्यवाही पर बात की जा सकती है।

विहिप लेकर आई 2024 के लिए एक्शन प्लान: लव जिहाद से लेकर मिशनरी हिंसा और हिंदुओं के खिलाफ अभद्र भाषा तक, ये हैं उसकी माँगें

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अनुषांगिक शाखा विश्व हिंदू परिषद- विहिप (VHP) ने 2024 के लिए अपना रोडमैप जारी किया है। साल 2024 में संगठन अपनी स्थापना के 60 साल पूरे कर रहा है तथा इसी साल लोकसभा चुनाव (General Election 2024) भी है। अपने रोडमैप में VHP ने लव जिहाद (Love Jehad), धर्मांतरण (Religious Conversion), जेहादी-मिशनरी हिंसा (Jehadi-Missionary Violence) और घृणित बयान (Hate Speech) पर पूर्ण रोक को शामिल किया है।

हिंदू संगठन विहिप ने कहा है कि वह एक करोड़ से अधिक सदस्यों को जोड़ने और 15 लाख कार्यकर्ताओं के साथ अपनी (शाखाओं) इकाइयों को एक लाख तक बढ़ाने की योजना बना रहा है, जो लव जिहाद, अवैध धार्मिक रूपांतरण, मंदिरों के विध्वंस के बढ़ते खतरे को रोकने की दिशा में काम करेंगे। संगठन ने कहा कि देश भर में हिंदू मान्यताओं और देवताओं के खिलाफ नफरत भरे भाषण बढ़ रहे हैं।

चेन्नई में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए विहिप के संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र जैन ने देश भर में खासकर तमिलनाडु में हिंदू मंदिरों के विध्वंस, लव जिहाद के बढ़ते खतरे, अवैध धर्मांतरण और हिंदू मान्यताओं एवं देवताओं के खिलाफ बढ़ते नफरत भरे भाषणों पर चिंता जताई।

जैन ने कहा कि सभी राज्य सरकारों को अवैध धर्मांतरण और लव जिहाद पर अंकुश लगाने के लिए कानून बनाना चाहिए। तमिलनाडु को सहस्राब्दियों से हिंदू धर्म का ध्वजवाहक बताते हुए हिंदू संगठन ने राज्य में हिंदुओं के प्रति बढ़ती असहिष्णुता की ओर ध्यान आकर्षित करने की माँग की और राज्य सरकार से बहुत देर होने से पहले उचित कार्रवाई करने की अपील की। विहिप ने चेतावनी दी कि अगर “वे मूकदर्शक बने रहे तो हिंदू समाज को खड़ा होना होगा और उसे अपने गौरव की रक्षा करनी होगी।”

विहिप ने तमिलनाडु जैसे राज्यों से धर्मांतरण विरोधी और लव जिहाद के खिलाफ कानून बनाने का आग्रह किया

डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा कि अवैध धर्मांतरण मानवता के खिलाफ सबसे बड़ा अपराध और हिंसा है। उन्होंने कहा कि ‘मुल्ला, मौलवी और मिशनरी’ इसे अपना धार्मिक अधिकार मानकर इस आपराधिक गतिविधि में लिप्त हैं और ऐसा करने के लिए सभी प्रकार के असंवैधानिक और अनैतिक साधनों का उपयोग कर रहे हैं।

जैन के अनुसार, देश की आजादी के बाद से समाज के कई अलग-अलग वर्गों ने इस अवैध आपराधिक गतिविधि को समाप्त करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार को उन राज्य सरकारों से सीखना चाहिए, जो पहले ही अपने राज्यों में गैर-कानूनी धर्मांतरण को समाप्त करने के लिए कानून लागू कर चुकी हैं।

विहिप के संयुक्त महासचिव ने 17 वर्षीय एम लावण्या के मामले का हवाला देते हुए बताया कि कैसे राज्य सरकार की असंवेदनशीलता और उदासीनता के कारण मिशनरी स्कूलों में अवैध धर्मांतरण और हिंदुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के प्रयास अभी भी तमिलनाडु जैसे राज्यों में जारी हैं। तमिलनाडु के तंजावुर में सेक्रेड हार्ट हायर सेकेंडरी स्कूल, थिरुकट्टुपाली में 12वीं कक्षा की छात्रा लावण्या ने इस साल जनवरी में आत्महत्या कर ली थी। ईसाई धर्म में मतांतरण करने से इनकार करने पर स्कूल के अधिकारियों ने कथित रूप से उसे खूब प्रताड़ित किया था।

उन्होंने मदुरै के रामनाथपुरम और मेलूर में इसी कारण से हुई अन्य आत्महत्याओं को भी सामने लाया और इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा हिंदू लड़कियों को यौन वस्तुओं के रूप में इस्तेमाल करने से पहले लव जिहाद के हिस्से के रूप में लक्षित करने की घटनाओं में वृद्धि के बारे में चिंता व्यक्त की।

डॉ सुरेंद्र जैन ने माँग की कि तमिलनाडु सरकार को इन संस्थाओं और व्यक्तियों को कड़ी से कड़ी सजा देकर ऐसी गतिविधियों को रोकना चाहिए, ताकि हिंदू समाज के इस तरह के उत्पीड़न को रोका जा सके। विहिप सेंट्रल गवर्निंग काउंसिल ने राज्य सरकार से अवैध धर्मांतरण और लव जिहाद के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए एक सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने का आग्रह किया।

विहिप ने इस्लामी कट्टरवाद और आतंकवाद की बढ़ती घटना के खिलाफ आवाज उठाई

हिंदू संगठन ने हाल ही में इस्लामी कट्टरपंथ को लेकर हिंसा की बढ़ती घटनाओं को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “सीएए, कोरोना, हिजाब और नूपुर शर्मा विवाद का इस्तेमाल कर वे देश में हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। आतंकवाद को भी इन कट्टरपंथियों ने ही पोषित किया है। दुर्भाग्य से, तमिलनाडु जिहादी आतंकवादियों का केंद्र और भर्ती केंद्र बन गया है।”

विहिप ने कहा कि NIA ने हाल ही में तमिलनाडु से इस्लामी आतंकवादियों की कई गिरफ्तारियाँ की हैं। यहाँ इसके बुनियादी ढाँचे, ‘स्लीपर सेल’ और वित्तीय सहायता प्रणालियों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। हिंदू संगठन ने कहा कि राज्य की सुरक्षा एजेंसियाँ ​​समाज में इन ताकतों को पहचानने और अपने नागरिकों की रक्षा करने में लापरवाही करती दिख रही हैं।

हिंदुओं के प्रति तमिलनाडु सरकार की उदासीनता की आलोचना करते हुए जैन ने कहा कि राज्य पुलिस की निष्क्रियता राज्य में इस्लामी कट्टरपंथी समूहों को निर्दोष लोगों के खिलाफ हिंसा करने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

विहिप द्वारा जारी प्रेसनोट में कहा गया है, “1985 से अब तक तमिलनाडु में इन इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा सौ से अधिक हिंदू समाज/राजनीतिक नेताओं की हत्या कर दी गई है। विश्व हिंदू परिषद सरकार से आग्रह करती है कि इस्लामी धार्मिक कट्टरवाद के नाम पर आगे रक्तपात को रोकने के लिए इस्लामी कट्टरपंथियों पर दृढ़तापूर्वक और तेज कार्रवाई करे।”

विहिप ने हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने और उनका विध्वंस रोकने का आग्रह किया

तमिलनाडु सरकार को अक्सर हिंदू धर्म के प्रति पूर्वाग्रह के लिए फटकार लगाई गई है। मद्रास एचसी ने कई मौकों पर तमिलनाडु सरकार को फटकार लगाई है, जिससे उसे विभिन्न अतिक्रमित मंदिर भूमि को पुनर्प्राप्त करने के लिए कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया गया है। हिंदू संगठन ने भी तमिलनाडु में द्रमुक सरकार की औपनिवेशिक मानसिकता की आलोचना की और माँग की कि हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाए।

विहिप ने कहा, “हम इस बात की सराहना करते हैं कि कुछ सरकारें पहले ही हिंदू धार्मिक स्थलों को हिंदू समाज द्वारा चलाने की घोषणा कर चुकी हैं। विहिप की माँग है कि तमिलनाडु सहित शेष राज्य सरकारें भी हिंदू मंदिरों को मुक्त करें। हम हिंदू समाज से अपील करते हैं कि वे अपनी ताकत का एहसास करें और सभी जातियों और लिंगों के पुजारियों एवं भक्तों सहित समिति के माध्यम से उन महान मंदिरों को प्रभावी ढंग से और पारदर्शी रूप से चलाने के लिए तैयार रहें।”

प्रेस विज्ञप्ति में आगे कहा गया है कि जबरदस्त पूर्वाग्रह के साथ तमिलनाडु सरकार राज्य में हिंदू मंदिरों को अतिक्रमण और अवैध इमारत बताकर ध्वस्त कर रही है। इसमें कहा गया है कि पिछले 13 महीनों में 20 से अधिक मंदिरों को नष्ट कर दिया गया है, जबकि किसी भी मस्जिद या चर्च पर इस तरह की कार्रवाई नहीं की गई है।

तमिलनाडु सरकार के हिंदू विरोधी पूर्वाग्रह की निंदा करते हुए विहिप ने माँग की, “यदि कानून के अनुसार मंदिर को हटाने की आवश्यकता है तो इसे मंदिर समिति और स्थानीय हिंदू संगठनों के साथ परामर्श से अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। उन देवताओं (सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार जीवित संस्थाएँ) के साथ अत्यंत पवित्रता के साथ व्यवहार किया जाए और हिंदू समाज को पीड़ा न हो।”

हिंदू आस्था और देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी पर हो सख्त कार्रवाई

हिंदू संगठन ने कड़े शब्दों में हिंदू धर्म और उसके देवताओं के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले अपराधियों के प्रति राज्य की निष्क्रियता की निंदा की। विहिप ने स्पष्ट किया कि गैर-हिंदू धर्मों और उनके नेताओं का अपमान करने वालों के खिलाफ देश भर में सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, तमिलनाडु में ऐसा करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जबकि हाल ही में द्रविड़ YouTuber ने हिंदुओं के आराध्य भगवान शिव को अपमानित करने के लिए सबसे अश्लील भाषा का प्रयोग किया था।

विहिप ने सभी राज्य सरकारों से हिंदू समुदाय की भावनाओं को लेकर थोड़ा विचार करने का अनुरोध किया। इसके साथ ही संगठन ने राज्य सरकार को चेतावनी दी कि अगर वह चुपचाप देखती ये सब होता हुआ देखती रहती है तो हिंदू समाज को कदम बढ़ाने और अपने सम्मान को बनाए रखने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

‘छगन भुजबल के साथ बैठते दर्द नहीं होता’: उद्धव गुट से MLA का मुश्किल सवाल, एकनाथ शिंदे के घर के बाहर समर्थकों का भारी जुटान

उद्धव ठाकरे की सरकार में छगन भुजबल के मंत्री होने को लेकर शिवसेना विधायक सुभाष साबने ने सवाल पूछा है। साबने उन विधायकों में हैं जो एकनाथ शिंदे के साथ हैं। इसी बीच ठाणे में शिंदे के घर के बाहर उनके समर्थकों का भरी जुटान देखने को मिल रहा है।

सबने ने पूछा है कि जिस छगन भुजबल ने बाले साहेब को गिरफ्तार करवाया था उनके साथ कैबिनेट में बैठने पर आपको दर्द नहीं होता है? दबंग ओबीसी नेता भुजबल फिलहाल एनसीपी कोटे से उद्धव सरकार में मंत्री हैं। वे कभी शिवसेना में ही थे। उनके ही महाराष्ट्र का गृह मंत्री रहते बाल ठाकरे की गिरफ्तारी हुई थी।

वहीं, एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे ने संजय राउत पर धमकाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि यह बगावत नहीं बल्कि, महाराष्ट्र की जनता ये चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि गुवाहाटी से शव लाने से उनका (संजय राउत) क्या मतलब है? यह महाराष्ट्र की संस्कृति नहीं है। उन्हें दूसरे लोगों को धमकाना चाहिए, लेकिन हमें नहीं।

गौरतलब है कि इससे पहले एकनाथ शिंदे ने 26 जून 2022 को ट्वीट कर उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा था। उन्होंने अपने ट्वीट में बाला साहब ठाकरे के सिद्धांतों की याद दिलाते हुए मुंबई बम विस्फोट और दाऊद से जुड़े लोगों को शिवसेना से मिल रहे समर्थन पर सवाल खड़े किए थे।

एकनाथ शिंदे ने अपने ट्वीट में लिखा था, “मुंबई बम ब्लास्ट में निर्दोषों की हत्या करने वाले और दाऊद इब्राहिम से रिश्ता रखने वालों का हिन्दू हृदय सम्राट बाला साहेब ठाकरे की शिवसेना कैसे समर्थन कर सकती है? हमने अपने कदम इसी की खिलाफत में उठाए हैं। अगर हमें मौत भी आती है तो कोई दिक्क्त नहीं है।”

फर्जी पुलिस बन कर व्यापारियों को धमका रहा था सुहैब, मिल गई असली यूपी पुलिस: वर्दी पहन जमा रहा था धौंस, हुआ गिरफ्तार

UP के बुलंदशहर जिले में पुलिस ने दिल्ली पुलिस की वर्दी में लोगों पर धौंस जमाते एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपित का नाम सुहैब है जो दिल्ली के भजनपुर का रहने वाला है। जाँच के दौरान वह पुलिस विभाग का स्टाफ नहीं पाया गया। आरोपित को जेल भेजा जा रहा है। यह गिरफ्तारी आज 27 जून, 2022 (सोमवार) को की गई है।

यह वर्दी सब इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी थी थी। खास बात ये है कि सुहैब ने बाकायदा अपनी नेमप्लेट भी लगा रखी थी। बुलन्दशहर के SSP श्लोक कुमार के ने बताया, “सुबह थाना खुर्जा नगर में पुलिस टीम गश्त कर रही थी। इस दौरान बाजार में एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में मिला। चेकिंग के दौरान पुलिस को वो संदिग्ध लगा तो उस से पूछताछ की गई। आस-पास के लोगों से भी जुटाई गई जानकारी से पता चला कि वो एक सामान्य व्यक्ति है जो पुलिस विभाग से नहीं है। वो दिल्ली पुलिस की वर्दी में मार्किट में घूम रहा था। पूछताछ में उसने अपना नाम सुहैब और घर दिल्ली के भजनपुरा में बताया।”

श्लोक कुमार ने आगे बताया, “पूछताछ में सुहैब ने वर्दी को दिल्ली से खरीदा जाना बताया। वो बुलंदशहर में व्यापारियों पर धौंस जमाना चाहता था। अभी उस से पूछताछ चल रही है। उस पर नियमानुसार धाराएँ लगाते हुए उसे न्यायिक कस्टडी में भेजा जा रहा है।” पुलिस के मुताबिक सुहैब के अब्बा का नाम मोहम्मद अख्तर है। अदालत में पेश करने के लिए ले जाते हुए पुलिस ने सुहैब की वर्दी उतरवा कर को सामान्य कपड़े पहनाए।

तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ्तारी होते ही इकोसिस्टम का ‘खतरे में लोकतंत्र’ रोना शुरू, मुंबई प्रेस क्लब ने कहा- रिहा करो

गुजरात ATS द्वारा स्वघोषित सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ्तारी के बाद पूरा इकोसिस्टम मोदी सरकार को तानाशाह घोषित करने में जुटा है। मुबंई प्रेस क्लब ने तो इस गिरफ्तारी की निंदा भी की है। अपने पत्र में प्रेस क्लब के सदस्यों ने प्रशासन की कार्रवाई को कोसने के साथ तीस्ता सीतलवाड़ को रिहा करने की माँग की है।

इसमें कहा गया, मुंबई प्रेस क्लब, पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की 25 जून 2022 को हुई गिरफ्तारी पर दुख और निराशा व्यक्त करता है। ये तब हुआ जब 24 जून को सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज किया जिसमें सीतलवाड़ सह-याचिकाकर्ता थीं।

इसमें ये भी कहा गया कि मुंबई प्रेस क्लब को ये बात स्वीकार्य नहीं है कि लोगों को न्याय दिलाने के लिए लड़ने वाले व्यक्ति पर साक्ष्य गढ़ने और एसआईटी को गुमराह करने का आरोप लगे।

अब यहाँ मालूम हो कि एनजीओ चलाकर खुद को सामाजिक कार्यकर्ता कहलाने वाली सीतलवाड़ को प्रेस क्लब की ओर से पत्रकार की उपाधि सिर्फ इस आधार पर दी गई है क्योंकि वह ‘सबरंग’ नाम से एक प्रोपेगेंडा मैगजीन चलाती हैं। इसमें वह नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का काम करती आई हैं।

इकोसिस्टम हुआ सक्रिया, प्रदर्शन की माँग

बता दें कि तीस्ता की गिरफ्तारी पर केवल प्रेस क्लब ही एक पत्र से रिहाई नहीं माँग रहा, बल्कि पूरा इकोसिस्टम लोकतंत्र को खतरे में बताकर सोशल मीडिया पर ऐसी माँग उठा रहा है।

कॉन्ग्रेस एक्टिविस्ट व कई बार फेक न्यूज फैलान के लिए पहचानी जाने वाली शबनम हाशमी ने भी ट्विटर पर पोस्टर शेयर करते हुए सीतलवाड़ के लिए समर्थन माँगा। उन्होंने तीस्ता की गिरफ्तारी के विरुद्ध दिल्ली में प्रदर्शन करने को कहा। पोस्टर में देख सकते हैं कि वो इस समय में अघोषित इमरजेंसी बता रही हैं और लोगों से अपील कर रही हैं कि मोदी सरकार के खिलाफ आवाज उठाएँ।

हिंदुत्व को तालिबान के बराबर बताने वाली कम्युनिस्ट कविता कृष्णन ने भी तीस्ता की गिरफ्तारी के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कोसा। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, “ये काफी बुरा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जाकिया जाफरी की याचिका रद्द कर दी गई और तीस्ता सीतलवाड़ समेत उन अन्य लोगों को अपराधी बना दिया गया, जिन्होंने गुजरात 2002 की हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय माँगा था।”

राणा अयूब ने भी इसी तरह करुणा नुंदी के ट्वीट को रीट्वीट किया जिसमें दावा था कि सुप्रीम कोर्ट संविधान को कमजोर करने का काम कर रही है।

एम्नेस्टी इंडिया की ओर से तीस्ता की गिरफ्तारी को कहा गया कि ये भारतीय प्रशासन मानवाधिकार की बात करने वालों पर सवाल खड़ा कर रही है।

बता दें कि तीस्ता सीतलवाड़ को गुजरात एटीएस ने 25 जून 2022 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें सड़क के रास्ते अहमदाबाद ले जाया गया। इस गिरफ्तारी से एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने ही गुजरात दंगों से जुड़े मामले में सीतलवाड़ की भूमिका पर और जाँच करने को कहा था। कोर्ट ने कहा था कि तीस्ता इस मामले में अपने फायदे के लिए घुसीं और जाफरी की भावनाओं का इस्तेमाल किया।

शराब, भांग और समलैंगिक विवाह पर थाईलैंड का नया कानून, विरोध में उतरा मुस्लिम काउंसिल: कहा – ये सब इस्लाम में हराम, फतवा जारी

थाईलैंड के मौलवियों और इस्लामी संगठनों ने गाँजा, शराब और समलैंगिक विवाह पर आए नए कानूनों का विरोध किया है। पट्टाणी, याला, नराथिवट, सोंगखला, सतून के इस्लामी काउंसिल्स ने एक बैठक की, जिसमें ये निर्णय लिया गया। गुरुवार (23 जून, 2022) को उन्होंने इन तीनों कानूनों पर अपनी राय रखी। उन्होंने ऐलान किया कि एक मुस्लिम इन तीनों कानूनों का अनुसरण न करे, क्योंकि ये इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ जाता है।

काउंसिल ने कहा कि उसे स्पष्टीकरण जारी करने के लिए इसीलिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि इस मुद्दे पर सोशल मीडिया में खासा विचार-विमर्श चल रहा था और मुस्लिमों के बीच संशय का माहौल था। संगठन ने कहा कि वो समाज का स्तंभ है, इसीलिए उसे अपनी राय ज़रूर रखनी चाहिए। इन कानूनों को हराम बताते हुए फतवा का हवाला दिया गया। बता दें कि नए कानून के तहत गाँजा की खेती को कानूनी वैधता प्रदान की गई है, शराब पर नीति को लिबरल बनाया गया है और समलैंगिक विवाह पर भी उदारता दिखाई गई है

मौलवियों ने कहा कि ड्रग्स, शराब और शादी से पहले सेक्स – ये तीनों ही इस्लाम में हराम हैं। थाईलैंड के एक मुस्लिम डॉक्टर ने बताया कि मेडिकल कारणों से भांग की खेती की इजाजत दी गई है, लेकिन ये किसी दवा का इलाज नहीं है। उसका कहना है कि जहाँ अमेरिका में रिक्रिएशन के लिए केवल दो राज्यों में इसकी खेती की अनुमति है, WHO इसे खतरनाक मानता है और कहता है कि इसका इस्तेमाल केवलमेडिकल और रिसर्च के लिए ही होना चाहिए।

वहीं ‘लीग ऑफ इस्लामिक काउंसिल ऑफ साउथर्न थाईलैंड’ ने इन सभी कानूनों का विरोध किया है। इन्हें संसद में पास किया जा चुका है। ‘मूव फॉरवर्ड पार्टी (MFP)’ ने इन कानूनों को आगे बढ़ाया था, जबकि दक्षिण के मुस्लिमों के बीच पैठ रखने वाली ‘Prachachat पार्टी’ ने इसका विरोध किया था। नए शराब कानून के तहत छोटे स्तर पर शराब उत्पादकों को प्रोत्साहन की योजना है। वहीं ‘सिविल पार्टनरशिप बिल’ समलैंगिक कानून को वैध बना देगा।

201, 208 KMPH… T20 में भुवनेश्वर कुमार के गेंद की स्पीड देख नेटिजन्स पूछने लगे- शोएब अख्तर कौन: स्पीडोमीटर से सब चकराए

भारत और आयरलैंड के बीच पहले टी-20 मैच की दो गेंदों ने सबको हैरान कर दिया। रविवार (26 जून 2022) को डब्लिन में हुआ यह मैच भारत ने सात विकेट से जीता। इस मैच में भुवनेश्वर कुमार (Bhuvneshwar Kumar) की एक गेंद की स्पीड 201 KMPH (किलोमीटर प्रति घंटा) थी। अगली गेंद उन्होंने 208 KMPH की स्पीड से फेंकी!

स्पीडोमीटर ने जब यह आँकड़ा दिखाया तो हर कोई हैरान रह गया। हालाँकि बाद में यह स्पष्ट हुआ कि तकनीकी दिक्कतों की वजह से ऐसा हुआ। लेकिन सोशल मीडिया पर इसके बाद प्रतिक्रियाओं की झड़ी लग गई।

नेटिजन्स पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर को याद करने लगे, जिनके नाम वर्ल्ड क्रिकेट में 161.3 kmph की गति से से सबसे तेज गेंद फेंकने का रिकॉर्ड है। उसामा करीम ने लिखा, “शोएब अख्तर, उमरान मलिक कौन? भुवी ने अब तक की सबसे तेज गेंद फेंकी है। असली तस्वीर, अभी-अभी ली है।”

पंकज मिश्रा ने लिखा, “मैच में तो कमाल ही हो गया, भुवनेश्वर कुमार ने 200 से भी ज्यादा किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डाल दी। ये मैच की पहली गेंद थी। सोनी स्पोर्टस नेटवर्क ये क्या था?”

रोहित बिश्ननोई लिखते हैं, “वर्ल्ड रिकॉर्ड! भुवनेश्वर कुमार ने 201 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डाली। क्रिकेट इतिहास की सबसे तेज गेंद।” साथ ही उन्होंने फायर इमोजी भी शेयर किया है। इसके बाद वह दूसरा ट्वीट करते हैं, “भुवी ने 208 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी कर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ डाला। भुवी आज रॉकेट लॉन्च कर रहे हैं। यह अविश्वसनीय है।”

करण नाम के एक और यूजर ने मैच का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “शोएब अख्तर कौन?”

हालाँकि, यह सब किसी तकनीकी गलती के कारण हुआ। भुवनेश्वर कुमार भले ही सबसे तेज गेंद फेंकने का रिकॉर्ड नहीं बना पाए हों, लेकिन टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट के पावरप्ले ओवर में वह सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं। उन्होंने आयरलैंड के खिलाफ मुकाबले के पहले ही ओवर में कप्तान एंड्रयू बालबर्नी को बोल्ड किया।

यह टी-20 इंटरनेशनल मैच के पावरप्ले में भुवी का 34वाँ विकेट था। वह पावरप्ले ओवर में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं। बता दें कि भारतीय टीम ने आयरलैंड के साथ दो मैच की टी-20 सीरीज का पहला मुकाबला रविवार को जीतकर 1-0 की लीड बना ली है। इस मैच से जम्मू-कश्मीर के उमर मलिक को टी20 में डेब्यू करने का मौका मिला।