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समन के बावजूद ED के सामने नहीं पेश होंगे संजय राउत, जमीन घोटाले का है मामला: कहा – मुझे गिरफ्तार करो

शिवसेना सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समन को राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ उन्हें लड़ने से रोकने के लिए एक साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि वह मंगलवार (28 जून 2022) को पूछताछ के लिए एजेंसी के सामने पेश नहीं हो पाएँगे, क्योंकि उन्हें अलीबाग में एक बैठक में शामिल होना है।

प्रवर्तन निदेशालय ने संजय राउत को ये समन प्रवीण राउत और पात्रा चॉल भूमि घोटाले से जुड़े मामले में भेजा है। ईडी के समन के बाद संजय राउत ने ट्वीट कर कहा था, “ईडी ने समन भेजा है। अच्छा है। महाराष्ट्र में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम चल रहे हैं। हम बाला साहेब के शिवसैनिक बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं। यह मुझे रोकने के लिए बड़ी साजिश है। अगर मेरा सिर भी कट जाए, तब भी मैं गुवाहाटी का रास्ता नहीं अपनाऊँगा।” इसके साथ ही उन्होंने लिखा था, “मुझे गिरफ्तार करो! जय हिन्द!” वहीं, मराठी भाषा में लिखे गए अपने ट्वीट में उन्होंने बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस को भी टैग किया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जिस एचडीआईएल ने ये दोनों जमीन घोटाले किए थे, उसके डायरेक्टर प्रवीण राउत, सारंग वधावन, राकेश वधावन हैं। प्रवीण राउत और सारंग को 2020 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था। तब दोनों से पूछताछ में शिवसेना सांसद संजय राउत का कनेक्शन सामने आया था। बता दें कि प्रवीण राउत शिवसेना सांसद संजय राउत के दोस्त हैं।

गौरतलब है कि 5 अप्रैल, 2022 को पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में ED ने शिवसेना सांसद संजय राउत पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी संपत्ति कुर्क कर ली थी। इस कार्रवाई के तहत जाँच एजेंसी ने राउत के अलीबाग स्थित आठ प्लॉट और दादर में एक फ्लैट को कुर्क किया था।

इसी मामले में ED ने प्रवीण राउत से जुड़ी करोड़ों की संपत्ति को भी कुर्क किया था। ED ने 11 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की थी। इसमें पालघर में प्रवीण राउत से जुड़ी संपत्ति करीब 9 करोड़ रुपए की है। जबकि 2 करोड़ की कीमत वाले दादर में फ्लैट और अलीबाग में प्लॉट संजय राउत की पत्नी का बताया जाता है।

‘सास ने 4 माह की बेटी को पटककर मार डाला’: मेरठ की फौजिया का दर्द- देवर की गलत हरकत की शिकायत पर हुई पिटाई

उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut, Uttar Pradesh) में फौजिया नाम की एक मुस्लिम महिला ने बताया कि उसकी सास ने धमकी दी थी कि अगर उसने बेटी पैदा की तो वह उसकी हत्या कर देगी। महिला के अनुसार, जन्म के समय वह अपनी बेटी को बचाने में कामयाब रही, लेकिन 4 महीने बाद उसकी सास ने बेटी की हत्या कर दी।

मेरठ के लिसाड़ीगेट की रहने वाली फौजिया ने बताया कि उसकी निकाह के एक महीने बाद ससुराल में उसकी सास ने साफ कह दिया था उसे लड़का ही चाहिए। फौजिया के अनुसार, “सास कहती थी कि अगर भूल से भी लड़की पैदा की तो समझ लेना। उसे भी मार दूँगी और तुझे भी नहीं छोड़ूँगी। जिस रोज तूने बेटी पैदा कर दी, समझ लेना घर से तेरा दाना-पानी खत्म।”

फौजिया का कहना है कि जन्म के बाद वह अपनी बेटी को बचाने में कामयाब रही, लेकिन चार महीने बाद 14 जून 2022 को उसकी सास ने अपनी पोती को जमीन पर पटक कर मौत के घाट उतार दिया।

फौजिया का कहना है कि उसकी सास निकाह के सातवें दिन से ही दहेज के लिए उसे तंग करने लगी। उस दिन भी लड़ाई दहेज के लिए ही शुरू हुई थी। इसी दौरान सास आई और बच्ची को पटक कर मार डाला। फौजिया ने कहा, “मेरी बद्दुआ है कि अल्लाह इस खानदान में कभी चिराग नहीं जलाएगा।”

दैनिक भास्कर को फौजिया ने बताया, “14 जून को रोज की तरह सास और शौहर मुझे दहेज के लिए ताने दे रहे थे। इसके बाद शौहर मुझे पीटने लगा। मैंने भी कह दिया कि दहेज में कार कहाँ से लाऊँ। अब्बू के पास इतने रुपए कहाँ से आएँ कि वे तुम्हें कार दें? अभी बेटी के होने पर 2 लाख का सामान और 2 लाख नगद सहित कुल 4 लाख रुपए दिए थे।”

फौजिया आगे बताती है, “इसी बात पर शौहर आग-बबूला हो गया और मुझे पीटने लगा। बोला- मुँह चलाती है। वह गाली देने लगा। तभी सास भी कमरे में घुस आई। उन्होंने बच्ची को बिस्तर से उठाकर पटक दिया। वह वहीं खत्म हो गई।” फौजिया का कहना है कि उसकी सास लड़कियों से हद से अधिक नफरत करती है, क्योंकि उसे लगता है कि लड़कियों को दहेज देना पड़ता है।

फौजिया कहती हैं, “मेरे अम्मी-अब्बू ने दहेज में हर सामान दिया। सास इतनी लालची है कि इसकी भूख शांत नहीं होती। एक साल तक तो मैं किसी तरह ताने सुनकर काम चलाती रही। फिर कहने लगी कि मायके से शौहर के लिए बुलेट मंगा ले। शौहर को जब सास की बातें बताई तो वो भी अपनी माँ के पक्ष में हो गया। दोनों मिलकर मुझे मारते-पीटते। क्लेश से तंग आकर किसी तरह अम्मी-अब्बू ने बुलेट भी दे दी। उसके बाद वे कार माँगने लगे। अब्बू कार कहाँ से लाते?”

देवर की अश्लीलता को लेकर फौजिया बताती है, “एक बार उसके देवर ने उससे गलत निकाह से देखा। जब वह अपने देवर की शिकायत शौहर से की तो वह पिटने लगा। बाद में तीन तलाक देकर वह मुझे घर से निकाल दिया। तब से अपने मायके हूँ।”

अपनी बेटी की हत्या को लेकर फौजिया ने अपनी सास के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है। हालाँकि, इस मामले में अभी उसकी सास की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

AltNews वाले मोहम्मद जुबैर को दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार: धार्मिक भावनाएँ भड़काने और घृणा फैलाने का है आरोप

दिल्ली पुलिस ने AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-153 (ऐसे कृत्य जिससे दंगे और उपद्रव होने की आशंका हो) और धारा-295 (किसी समाज द्वारा पवित्र मानी जाने वाली वस्तु का अपमान करना) लगाई गई है। मोहम्मद ज़ुबैर फेक न्यूज़ फैलाने के लिए कुख्यात है और उनका मीडिया पोर्टल भी हिन्दू विरोधी खबरों के लिए ही जाना जाता है।

मोहम्मद जुबैर को विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने के लिए गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ये कार्रवाई की है। उस पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप है। खुद को फैक्ट-चेकर बताने वाले मोहम्मद जुबैर के समर्थन में वामपंथी गिरोह भी सामने आ गया है। कविता कृष्णन जैसों ने दिल्ली पुलिस को भला-बुरा कहना शुरू कर दिया है। उसके प्रतीक सिन्हा ने दावा किया है कि जाँच वाला मामला 2020 का था।

प्रतीक सिन्हा ने लिखा, “जुबैर को दिल्ली पुलिस की स्पशल सेल ने सोमवार (27 जून, 2022) को कॉल किया था। ये 2020 के एक मामले में जाँच को लेकर था। हालाँकि, उसे उच्च न्यायालय द्वारा गिरफ़्तारी से राहत प्रदत्त है। आज शाम के 6:45 बजे उसे किसी अन्य मामले में उठा लिया गया, जिसके लिए पहले से कोई नोटिस नहीं दिया गया। हमारे बार-बार निवेदन के बावजूद हमें FIR की कॉपी नहीं दी जा रही है।” हालाँकि, इसकी बात में कितनी सत्यता है इसे कहा नहीं जा सकता।

मोहम्मद जुबैर को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने की तैयार पुलिस ने शुरू कर दी है, जिस दौरान पूछताछ के लिए उसकी कस्टडी माँगी जाएगी। उसे जेल भेजने की कार्रवाई भी की जा सकती है। हालाँकि, वामपंथियों की तरफ से बड़े-बड़े वकीलों का तुरंत सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पहुँच जाने का पुराना इतिहास रहा है।

‘My Legs Are Closed’: गर्भपात पर बैन के बाद अमेरिकी की महिला प्रदर्शनकारियों ने किया ‘सेक्स स्ट्राइक’ का ऐलान, कहा – अब पुरुषों को पता चलेगा

अमेरिकी महिलाओं ने वहाँ की सुप्रीम कोर्ट द्वारा गर्भपात को प्रतिबंधित किए जाने के बाद ‘सेक्स स्ट्राइक’ पर जाने की चेतावनी दी है। महिलाओं का कहना है कि ‘Roe v Wade’ फैसले के बाद वो पुरुषों की इसकी सज़ा देंगी और उन्हें सेक्स के लिए तरसाएँगी। कुछ महिलाओं ने कहा कि वो उन पुरुषों के साथ बिलकुल भी सेक्स नहीं केंगी, जिन्होंने अपनी शुक्रवहानली काट कर नहीं हटवाई हो। उन्होंने कहा कि उनके अधिकार के लिए पुरुष सड़कों पर नहीं आ रहे हैं, ऐसे में उनका सेक्स का कोई अधिकार नहीं बनता।

एक अन्य महिला ने सोशल मीडिया पर ‘My Legs Are Closed’ नाम से एक पोस्ट भी डाला, जिसमें उसने कहा कि चूँकि अब इस फैसले के बाद हमलोग गर्भवती होने का खतरा नहीं उठा सकतीं, इसीलिए किसी भी पुरुष के साथ सेक्स मत करो – अपने पति के साथ भी नहीं। महिलाओं का कहना है कि इस फैसले से साबित होता है कि एक पुरुष का सेक्स लाइफ महिलाओं से ज्यादा महत्वपूर्ण है। कुछ महिलाओं ने कहा कि उन्हें अब इसका डर है कि पुरुष सेक्स के समय कॉन्डोम का प्रयोग करेंगे या नहीं, या फिर कहीं इसे बीच में ही न निकाल लें।

एक अन्य महिला ने कहा कि पहले आराम से बाहर जाकर सेक्स किया जा सकता था, क्योंकि उन्हें पता था कि इसके बाद भी उनके पास चॉइस बची है। एक अन्य महिला ने कहा कि अगर वो सोचते हैं कि महिलाओं को हमेशा दबा कर रखेंगे, तो हम भी अपने लेग्स को हमेशा के लिए बंद कर लेंगी। सोशल मीडिया पर भी ‘सेक्स स्ट्राइक’ हैशटैग शेयर किया जा रहा है। एक महिला ने कहा कि अगर मेरे शरीर पर मेरा ही अधिकार नहीं है, तो किसी पुरुष का भी नहीं है।

एक महिला ने तो यहाँ तक सलाह दे डाली कि पूरी दुनिया की महिलाओं को सेक्स करना बंद कर देना चाहिए। साथ ही पूछा कि पुरुषों को बलात्कार से रोकने के लिए अब तक कोई रास्ता या तकनीक क्यों नहीं निकाली गई है? अमेरिकी अभिनेत्री एलिसा मिलानो ने भी इस हैशटैग का समर्थन किया है। कुछ लोग इस पर तंज कस रहे हैं कि इसके बाद अमेरिका में वाइब्रेटर बेचने वाली कंपनियों की चाँदी हो जाएगी। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में अधिकतर पुरुष हैं, इसीलिए ये पुरुष प्रधान फैसला आया है।

अमेरिका में चल रहा ये विरोध प्रदर्शन अब हिंसक हो गया है। एक जगह दीवार पर ‘SCOTUS (अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट) की मौत’ लिख दिया गया। स्टारबक्स और एक टेस्ला कार की खिड़कियों को तोड़ डाला गया। पुलिस के साथ कई जगह झड़प की भी खबर है। महिलाओं का कहना है कि अब उन्हें गर्भपात के लिए किसी अन्य देश में जाना होगा, जिसके लिए अधिकतर के पास न वित्त है और न समय। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने भी वहाँ की सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध किया था।

फेसबुक से दोस्ती, नाबालिग हिन्दू लड़की को ले भागा कैराना का मोहम्मद जमाल: जबरन सिखा रहा था नमाज पढ़ना, हुआ गिरफ्तार

फेसबुक पर दोस्ती के बाद पश्चिम बंगाल से अपहरण करके लाई गई हिन्दू नाबालिग लड़की को वहाँ की पुलिस ने आरोपित मोहम्मद जमाल की निशानदेही पर कैराना के बाहरी इलाके से बरामद कर लिया। जिसके बाद पुलिस आरोपित को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हो गई

इस मामले की जानकारी देते हुए रिपोर्टर स्वाति शर्मा गोयल ने ट्वीट किया, “कैराना के मोहम्मद जमाल ने बंगाल की एक नाबालिग हिंदू लड़की को बहकाकर घर से भगाने में कामयाब हो गया। उसने फेसबुक के जरिए उससे दोस्ती की थी। वहीं NCPCR के प्रियंक कानूनगो और मिशन मुक्ति फाउंडेशन की मदद की मदद से लड़की को कैराना से बरामद कर लिया गया है।”

वहीं इस मामले में सुराग अपहृत किशोरी एवं आरोपित जमाल की फेसबुक पर पूर्व में हुई चेटिंग से लगा, जिसमें आरोपित जमाल की लोकेशन कैराना में मिली। इसके बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग NCPCR) से सहायता माँगी। आयोग अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कार्रवाई के लिए एसएसपी शामली को पत्र लिखा था। वहीं, पश्चिम बंगाल पुलिस के साथ मिशन मुक्ति फाउंडेशन नई दिल्ली के डायरेक्टर वीरेंद्र सिंह व एंटी ह्यूमैन ट्रैफिकिंग यूनिट की प्रभारी आरती चंद्रा भी कैराना पहुँची थी। जहाँ स्थानीय पुलिस की सहायता से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।

क्या है मामला

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के जिला बरुईपुर थाने में तैनात उपनिरीक्षक विजय राय शनिवार (25 जून, 2022) को टीम के साथ कोतवाली पहुँचे। उन्होंने स्थानीय पुलिस के सहयोग से मोहल्ला दरबार कलां में दबिश देकर आरोपित मोहम्मद जमाल को हिरासत में ले लिया।

उन्होंने मामले में आगे जानकारी देते हुए बताया कि बीती 14 मई, 2022 को पश्चिम बंगाल से एक हिन्दू किशोरी का अपहरण किया गया था। उससे फेसबुक पर दोस्ती के बाद बहकाकर घटना को अंजाम दिया गया था। मामले में किशोरी के परिजनों ने FIR दर्ज कराई थी।

वहीं बंगाल पुलिस ने आरोपित मोहम्मद जमाल के मोबाइल की लोकेशन के आधार पर उसे कैराना से गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में आरोपित जमाल पहले पानीपत में पुलिस को अलग-अलग कॉलोनियों में घुमाता रहा। वहीं पुलिस ने देर रात कैराना के बाहरी इलाके से एक किराए के मकान से किशोरी को सकुशल बरामद कर लिया। वहीं बंगाल पुलिस के अनुसार किशोरी ने आरोपित जमाल पर नमाज पढ़ना सिखाने का आरोप लगाया है।

पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया सोशल मीडिया पर कुछ युवक झूठी पहचान बताकर नाबालिग युवतियों को जाल में फँसाते हैं। ये खुद को अमीर दर्शाते हैं। पर हकीकत में इनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब होती है। ये अपराधी प्रवृत्ति के भी होते हैं। बाद में युवतियों जिंदगी से खिलवाड़ करते हैं। इस मामले में भी जमाल पानीपत फैक्टरी में पायदान बनाता था। जबकि किशोरी अपने घर से करीब 37 हजार रुपए लेकर भागी थी।

भगवान की मूर्तियाँ बनाने में PoP के इस्तेमाल पर जारी रहेगा प्रतिबंध, याचिका ख़ारिज: दलील में कहा था – बिना वैज्ञानिक परीक्षण के लगा बैन

बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने सोमवार (27 जून 2022) को भगवान गणेश की मूर्तियाँ बनाने के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) के इस्तेमाल पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एमएस कार्णिक की खंडपीठ ने कहा कि शीर्ष न्यायालय पहले ही प्रतिबंध को बरकरार रख चुका है इसलिए अदालत इस पर फिर से विचार नहीं कर सकती है।

लाइव लॉ के मुताबिक, याचिकाकर्ता अजय वैशम्पायन ने दावा किया कि बिना किसी वैज्ञानिक परीक्षण के पीओपी को प्रतिबंधित कर दिया गया है। उन्होंने आगे दावा किया कि वैकल्पिक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली शादु मिट्टी की मूर्तियाँ पर्यावरण के लिए अधिक हानिकारक हैं।

जनवरी 2021 में, मूर्तिकार संगठन के साथ याचिकाकर्ता ने 2020 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board) द्वारा जारी मूर्ति विसर्जन के लिए संशोधित दिशा निर्देशों को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें पीओपी पर प्रतिबंध भी शामिल था।

हाई कोर्ट ने उस वक्त उन्हें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का दरवाजा खटखटाने का निर्देश दिया था, जिसने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। एनजीटी के आदेश को एक अन्य व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने नवंबर 2021 में याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था और एनजीटी के आदेश को बरकरार रखा था।

इसके बाद याचिकाकर्ता अजय वैशम्पायन ने बॉम्बे हाई कोर्ट में मूर्ति विसर्जन के लिए संशोधित दिशा निर्देशों और पीओपी पर प्रतिबंध को फिर से चुनौती दी। उन्होंने दावा किया कि पीओपी का पीएच स्तर एक प्रयोगशाला परीक्षण के आधार पर पीने के पानी के समान है। उन्होंने आगे दावा किया कि शादु मिट्टी से बनी मूर्तियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव नहीं है, क्योंकि ये मिट्टी आसानी से उपलब्ध नहीं होती है। याचिका में आगे यह भी कहा गया है कि शादु मिट्टी की मूर्तियाँ लंबे समय तक नहीं रखी जा सकती हैं। उनके टूटने की ज्यादा संभावना होती है।

बाबा बिरयानी के 6 रेस्टॉरेंट्स सील, कानपुर के पत्थरबाजों को फंडिंग करने वाला मुख्तार है मालिक: केमिकल मिलाकर बेचता था बिरयानी, फूड लाइसेंस भी रद्द

कानपुर हिंसा के मामले में गिरफ्तार बाबा बिरयानी के मालिक मुख्तार अहमद पर लगातार शिकंजा कसता ही जा रहा है। कानपुर जिला प्रशासन ने आज सोमवार (27 जून, 2022) को कड़ी कार्रवाई करते हुए बाबा बिरयानी की रेवमोती मॉल, रूपनगर समेत 6 रेस्टॉरेंट्स को सील कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आज मुख्तार पर शिकंजा कसने के लिए प्रशासन की 8 टीमों ने बाबा बिरयानी के एक साथ 8 रेस्टॉरेंट्स पर छापेमारी की। जिसमें से नवीन मार्केट, स्वरूप नगर, रेवमोती मॉल स्थित बाबा बिरयानी समेत 6 रेस्टॉरेंट्स को सील कर दिया गया। वहीं यह बात भी सामने आई है कि नवीन मार्केट स्थित बाबा बिरयानी रेस्टॉरेंट्स जोया के नाम से चल रहा था। साथ ही काकादेव स्थित अली बाबा, परेड स्थित जायका रेस्टॉरेंट्स को भी सील किया गया है।

पूरे मामले में हुई कार्रवाई के बारे में कानपुर के डीएम विशाख जी ने बताया कि 6 रेस्टॉरेंट्स के सैंपल भरे गए थे। जिन्हें जाँच के लिए आगरा भेजा गया था। वहाँ से प्राप्त रिपोर्ट में हानिकारक खाद्य सामग्री मिलाने की बात सामने आई है। जिसके आधार सभी 6 दुकानों के फ़ूड लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं।

वहीं मीडिया रिपोर्ट में एसडीएम सदर अनुराज जैन के हवाले से बताया जा रहा है कि 8 जून, 2022 को 6 प्रतिष्ठानों में छापेमारी कर बिरयानी के फूड सैंपल फूड डिपार्टमेंट ने कलेक्ट किए थे। 24 जून को आगरा लैब से सभी की रिपोर्ट में सामने आया कि बिरयानी में कलर के लिए हानिकारक केमिकल मिलाया जा रहा था। जिसे फूड FSSAI यानी फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने भी बैन कर रखा है। जिसके बाद सीलिंग की कार्रवाई की गई।

गौरतलब है कि कानपुर हिंसा में दंगाइयों को बाबा बिरयानी ने ही बिरयानी और आर्थिक मदद उपलब्ध कराया था। जिसके बाद मुख्तार अहमद को बीते बुधवार को कानपुर हिंसा में संलिप्त होने के मामले में एसआईटी ने गिरफ्तार किया था। फिलहाल मुख्तार जेल में है। कानपुर हिंसा मामले सहित मुख्तार पर 3 एफआईआर दर्ज हैं। वहीं मुख़्तार को गिरफ्तार करने से पहले पुलिस ने कानपुर हिंसा की साजिश रचने वाले मुख्य आरोपित जफर हाशमी को गिरफ्तार किया था।

उद्धव समर्थकों ने निकाली बागी शिवसेना विधायकों की ‘शव यात्रा’, श्मशान घाट पास ‘अंतिम संस्कार: संजय राउत ने कहा था – 40 लाशें आएँगी

महाराष्ट्र में चल रही सियासी उठापटक के बीच पुणे के हडपसर इलाके में सोमवार (27 जून 2022) को उद्धव ठाकरे के समर्थकों ने एकनाथ शिंदे खेमे के विधायकों की शव यात्रा निकाली। उन्होंने अमर धाम श्मशान घाट पर शिवसेना के बागी विधायकों के पु​तले का अंतिम संस्कार भी किया। समाचार एजेंसी एएनआई ने इसकी कुछ तस्वीरें शेयर की हैं। इसमें आप देख सकते हैं अमर धाम श्मशान घाट के बाहर उद्धव के समर्थक बागी नेताओं का पुतला जला रहे हैं। एक तस्वीर में समर्थकों की भीड़ के पीछे एम्बुलेंस भी आती हुई दिखाई दे रही है।

साथ ही एक निर्दलीय विधायक के दफ्तर पर हमले ही खबर भी सामने आई है। गोंदिया से निर्दलीय विधायक विनोद अग्रवाल के दफ्तर पर शिवसेना कार्यकर्ताओं ने हमला बोल दिया और जम कर तोड़फोड़ मचाई। इसका वीडियो भी सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है।

शिवसेना के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत द्वारा पार्टी के बागी विधायकों को लेकर विवादित बयान देने के बाद यह शव यात्रा निकाली गई है। उन्होंने रविवार (26 जून 2022) को कहा था कि गुवाहाटी से 40 लाशें आएँगी और महाराष्ट्र विधानसभा में उनका पोस्टमॉर्टेम होगा। संजय रावत के शब्दों में, “ये जो 40 लोग हैं, ये ज़िंदा लाश हैं। मुर्दा हैं। उनके शव यहाँ आएँगे। उनकी आत्मा मरी हुई है। ये 40 लोग जब उतरेंगे तो मन से ये ज़िंदा नहीं रहेंगे। उन्हें पता है कि ये तो आग लगी है, इससे क्या हो सकता है।” इसके साथ ही संजय राउत ने उन विधायकों को धमकी भी दी थी कि वो महाराष्ट्र आकर दिखाएँ।

संजय राउत के विवादित बयान पर एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे ने आपत्ति जताते हुए उन पर धमकाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि यह बगावत नहीं बल्कि, महाराष्ट्र की जनता ये चाहती है। गुवाहाटी से शव लाने से उनका (संजय राउत) क्या मतलब है? यह महाराष्ट्र की संस्कृति नहीं है। उन्हें दूसरे लोगों को धमकाना चाहिए, लेकिन हमें नहीं।

बता दें कि महाराष्ट्र में सियासी तकरार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज शिंदे गुट को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने अयोग्य ठहराए जाने वाले नोटिस पर जवाब देने के लिए उन्हें अब 12 जुलाई की शाम 5:30 तक का समय दे दिया है। जबकि डिप्टी स्पीकर को इस मामले में कोई भी राहत ना देते हुए आज ही जवाब देने को कहा गया।

जिसे सुरेश समझ फेसबुक पर दोस्ती और मंदिर में की शादी, वो निकला जुबेर: 2 बार कराया गर्भभात, मुस्लिम नहीं बनी तो मारपीट कर घर से निकाला

UP के प्रयागराज में मोहम्मद शमी उर्फ़ जुबेर नाम के व्यक्ति को पुलिस ने हिन्दू लड़की से सुरेश नाम से शादी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। मोहम्मद शमी पर पीड़िता के साथ अप्राकृतिक दुराचार, गर्भपात और ठगी का भी आरोप है। बाद में आरोपित ने दूसरा निकाह कर लिया। शमी की गिरफ्तारी रविवार (26 जून 2022) को हुई है। आरोपित की गिरफ्तारी की माँग के साथ कई भाजपा नेता शनिवार रात में ही थाने पहुँच गए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता की उम्र 22 साल है। करेली के रहने वाले मोहम्मद शमी से उसका परिचय फेसबुक के माध्यम से साल 2016 में हुआ था। शमी ने अपनी फेसबुक ID सुरेश पाल के नाम से बनाई थी। इस बीच दोनों की मुलाकातें होने लगी। लगभग 2 साल मिलने के बाद साल 2018 में शमी ने मनकामेश्वर मंदिर में पीड़िता से शादी कर ली। शादी के बाद दोनों खुल्दाबाद इलाके में किराए पर मकान ले कर रहने लगे।

पुलिस को दी गई शिकायत में पीड़िता ने बताया कि बीच में वो गर्भवती हुई तब सुरेश बने शमी ने उसे मारा-पीटा और उसका 2 बार गर्भपात करवाया। खुल्दाबाद थाने पर दी गई शिकायत में शमी पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने और ऐसा न करने पर घर से निकल देने का आरोप लगाया गया है। पीड़िता के मुताबिक उसे सुरेश के शमी होने का पता शिकायत से मात्र 20 दिन पहले पता चला। पीड़िता के मुताबिक शमी ने खुद ही उसे बताया और साथ ही अपने मज़हब की लड़की से निकाह करने की भी जानकारी दी।

पीड़िता ने यह शिकायत शनिवार (25 जून 2022) को दी थी। पुलिस ने फ़ौरन ही FIR दर्ज करते हुए अगले ही दिन 26 जून को आरोपित शमी को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक शमी फाइनेंस क्षेत्र में काम करता है। पीड़िता भी उसी के साथ ही काम किया करती थी। इस दौरान दोनों में जान-पहचान हुई थी। पुलिस ने पीड़िता की सहेली का भी बयान दर्ज किया है। पीड़िता की सहेली ने इस बात की गवाही दी है कि आरोपित शमी पहली बार उस से सुरेश पाल बन कर मिला था। पीड़िता का यह भी दावा है कि उसके द्वारा शिकायत दर्ज करवाने के बाद शमी के पक्ष वाले उसे लगातार धमकी दे रहे हैं।

दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर हिंदू संगठन का प्रदर्शन, सिंध के अस्पताल में शिशु का सिर काट महिला के गर्भ में छोड़ दिया था

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पिछले दिनों सरकारी अस्पताल में एक हिंदू महिला के गर्भ में उसके नवजात शिशु का सिर काटकर छोड़ दिया गया था। इसके विरोध में हिन्दुओं के एक समूह ने दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी जय श्री राम सेना फाउंडेशन (JSRF) के सदस्य थे। प्रदर्शनकारियों ने उच्चायोग कर्मियों को ज्ञापन देकर इस घटना के आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की।

इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे JSRF के महासचिव यश राजवीर ने ऑपइंडिया ने बात की। उन्होंने बताया, “भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद हमने पाकिस्तानी उच्चायोग पर प्रदर्शन का फैसला किया था। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस हमें चाणक्यपुरी थाने ले गई। यहाँ करीब 8 घंटे हिरासत में रखा गया। इसके विरोध में हमने थाने में हनुमान चालीसा का पाठ किया।”

इसके बाद पाकिस्तानी उच्चायोग ने 2 प्रदशर्नकारियों को अपने शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की अनुमति दी। JSRF के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ जैन और महासचिव यश उच्चायोग गए और आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग करते हुए ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में कहा गया है, “भील समुदाय की 32 वर्षीय हिन्दू महिला के नवजात शिशु का सिर काट कर गर्भ के अंदर छोड़ दिया गया। सिंध प्रान्त में मौजूद अस्पताल के स्टाफ द्वारा पीड़िता का जीवन खतरे में डाला गया। आरोपितों के विरुद्ध अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हम ऐसी शर्मनाक हरकत की निंदा करते हैं। ऐसी कई घटनाएँ पाकिस्तान के तमाम हिस्सों में हुई हैं, लेकिन दोषियों को सजा दिलाने के लिए पाकिस्तान में कोई सिस्टम नहीं है।” ज्ञापन में पीड़िता को मुआवजा देने और पाकिस्तान के तमाम हिस्सों में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकने की भी माँग की गई है। इन अत्याचारों में अल्पसंख्यकों पर हमले और उनका जबरन धर्म परिवर्तन शामिल है।

गौरतलब है कि 19 जून 2022 को पाकिस्तान सरकार द्वारा संचालित एक रूरल हेल्थ सेंटर के स्टाफ ने नवजात बच्चे का सिर काटकर महिला के गर्भ में छोड़ दिया था। इतना ही नहीं अस्पताल के स्त्री रोग वार्ड में स्ट्रेचर पर तड़प रही महिला का अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने तस्वीरें खींची। उसका वीडियो बनाया और फिर कई व्हाट्सएप ग्रुप में उसे शेयर भी किया।