Home Blog Page 2613

उधर कट्टर मुस्लिम भीड़ ने 59 हिन्दुओं को ज़िंदा जलाया, इधर नैरेटिव सेट करने में लगा मीडिया: अंदर के लोगों से ही जानिए 2002 को लेकर कैसे हुआ ‘खेल’

वो 27 फरवरी, 2002 की सुबह थी, जब गोधरा में मुस्लिम भीड़ द्वारा एक ट्रेन में आग लगा दी गई। मंशा थी – हिन्दुओं को निशाना बनाना। भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या से जो तीर्थयात्री लौट रहे थे, उन्हें ज़िंदा जला दिया गया। 1000-2000 की मुस्लिम भीड़ द्वारा किए गए इस जघन्य करतूत में 59 हिन्दुओं की मौत हो गई, जिनमें 27 महिलाएँ और 10 बच्चे शामिल थे। मीडिया ने इसके बाद हुए हिन्दू-मुस्लिम दंगों को खूब चलाया, लेकिन गोधरा की घटना को छिपाने में पूरी ताकत लगा दी।

गुजरात दंगा मामले में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जाँच के नाम पर प्रताड़ित करने के लिए यूपीए सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें क्लीन चिट दे दी, और अब इस क्लीन चिट को बरकरार रखने का आदेश आया है। नरेंद्र मोदी ने जाँच एजेंसियों के समन, न्यायपालिका की सुनवाई और राजनीतिक विरोध का भरसक सम्मान किया। लेकिन, गुजरात दंगों में उन्हें दोषी दिखाने के लिए विपक्षियों ने मर्यादा की सारी हदें लाँघ दीं।

NGO, भाजपा विरोधी पार्टियों और पत्रकारों का ‘त्रिकूट’, जिसने 2002 के नैरेटिव में गोधरा की घटना को हटा दिया

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि कैसे भाजपा विरोधी राजनीतिक पार्टियाँ, कुछ आइडियोलॉजिकली राजनीति में आए हुए पत्रकार और कुछ NGO ने मिल कर, इस त्रिकूट ने इन आरोपों को इतना प्रचारित किया और इनका ईकोसिस्‍टम भी इतना मजबूत था कि धीरे-धीरे लोग झूठ को ही सत्‍य मानने लगे। उन्होंने तीस्ता सीतलवाड़ का जिक्र किया, जिसका NGO इस पूरे प्रकरण में खासा सक्रिय था। जाकिया जाफरी किसके इशारे पर लगातार सुर्खियाँ बनती रहीं?

उस समय ‘तहलका’ पत्रिका ने भी स्टिंग के नाम पर मोदी को बदनाम करने की कोशिश की, लेकिन उसे भी न्यायपालिका ने खारिज कर दिया। इसी तरह अमित शाह ने याद दिलाया कि कैसे यूपीए सरकार ने तीस्ता के NGO की जम कर मदद की। गुजरात दंगों में मारे गए कॉन्ग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तीस्ता ने उनकी भावनाओं का फायदा उठाया। राना अय्यूब ने ‘गुजरात फाइल्स’ लिख कर किताब के जरिए प्रोपेगंडा फैलाने की कोशिश की।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें मीडिया चैनलों में बहस के लिए बुलाया जाने लगा और उनके द्वारा कही गई बातों को सत्य माना जाने लगा। भले ही आज वो चंदा चोरी के आरोपों में फँसी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी पुस्तक को शंकाओ, अनुमानों और कल्पनाओं पर आधारित बताते हुए ख़ारिज कर दिया था। देश की सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया था कि किसी व्यक्ति की राय सबूत नहीं हो सकती। अमित शाह ने याद दिलाया कि कैसे दो दशक तक एक नेता दर्द झेलते हुए इस लड़ाई को लड़ता रहा, उन्होंने ये करीब से देखा है।

हर इंटरव्यू से लेकर लेखों और मोदी से जुड़े सभी खबरों में उनके नाम के साथ मीडिया ने ‘2002’ लगा दिया। लेकिन, इसमें गोधरा का कहीं जिक्र क्यों नहीं किया गया? 59 हिन्दुओं को ज़िंदा जलाने वाली मुस्लिम भीड़ को बचाने के लिए कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इसे ‘दुर्घटना’ करार दिया। सोनिया गाँधी ने मोदी को ‘मौत का सौदागर’ बता दिया। राहुल गाँधी ने ‘ज़हर की खेती’ के आरोप लगाए। सच में, एक पूरा इकोसिस्टम गोधरा को छिपाने के लिए नरेंद्र मोदी के पीछे पड़ा था।

वरिष्ठ पत्रकार ने उदाहरण देकर बताया, रिपोर्टिंग में निष्पक्षता के नाम पर कैसे किया गया ‘खेल’

लंबे समय तक कई प्रमुख मीडिया चैनलों में काम कर चुके प्रखर श्रीवास्तव ने इस मुद्दे पर बोलते हुए बताया कि सच दिखाना चाहिए, लेकिन सच दिखाने का तरीका क्या होना चाहिए? उन्होंने कहा कि मीडिया में दोनों तरफ की बातें दिखाने की बात की जाती है, लेकिन दोनों पक्ष दिखाने के नाम पर क्या खेल होता है और क्या नैरेटिव सेट होता है, 2002 के दंगों के समय ‘देश के सबसे बड़े टीवी पत्रकार’ ने स्पष्ट रूप से गोधरा की रिपोर्टिंग के समय कहा था कि एक भीड़ ने, जिसका कोई चेहरा नहीं है, एक बोगी पर हाला दिया।

प्रखर श्रीवास्तव ने कहा कि भले ही इसके पीछे की मंशा को एक आम आदमी न समझ पाए, लेकिन एक पत्रकार इसे समझ सकता है। अब प्रखर श्रीवास्तव ने उसी पत्रकार की रिपोर्टिंग का दूसरा उदाहरण दिया। जब वो गुजरात दंगों में नरोडा पाटिया से रिपोर्टिंग कर रहा होता है, तब खुल कर कहता है कि ‘हिन्दुओं की भीड़ ने मस्जिद पर हमला किया।’ प्रखर श्रीवास्तव कहते हैं कि सवाल पूछने पर वो पत्रकार कहेगा कि मैंने तो दोनों पक्ष लिखा है, गोधरा और नरोडा पटिया – दोनों की रिपोर्टिंग की।

प्रखर श्रीवास्तव ने इस घटना का उदाहरण देने के बाद कहा, “नरोडा पाटिया की रिपोर्टिंग और गोधरा की रिपोर्टिंग में शब्दों का जो अंतर है, आपने जो नैरेटिव सेट किया 2002 में, उसकी सज़ा हम आज भुगत रहे हैं। इसीलिए, किसी को भी ये नहीं कहना चाहिए कि 2014 से ही सब बदला है।” प्रखर श्रीवास्तव की बातों से स्पष्ट है कि मीडिया के कितने ही पत्रकारों ने इस तरह के खेल कर के कितने ही नैरेटिव 2002 को लेकर सेट किए होंगे, तभी आज ‘गुजरात दंगों’ की बात कर के हिन्दुओं को दोष दिया जाता है, लेकिन गोधरा की घटना के बारे में नई पीढ़ी को कुछ पता ही नहीं।

एक युवा पत्रकार के अनुभव से समझिए कैसे मीडिया ने 2002 को लेकर अपना नैरेटिव सेट किया

राहुल रौशन ने अपनी पुस्तक ‘Sanghi Who Never Went To A Shakha‘ के एक हिस्से में उस दौर को याद किया है, जब वो एक युवा पत्रकार हुआ करते थे। वो बताते हैं कि जब ये हमला हुआ, तब वो दिल्ली में बेर सराय से झंडेवालान के लिए DTC की बस लेने जा रहे थे, जहाँ ‘आज तक’ का दफ्तर हुआ करता था। वो जब तक दफ्तर पहुँचे, तब तक गोधरा की घटना सुर्खियाँ बन चुकी थीं, लेकिन इसे कहीं भी आतंकी हमला या यहाँ तक कि हिंसक भी नहीं बताया जा रहा था।

सूचनाएँ अभी आ ही रही थीं, ऐसे में उन्हें भी ऐसा लगा कि पैंट्री कार में आग लगने के कारण ये हादसा हो गया था। अगले एक घंटे के अंदर गुजरात से ग्राउंड रिपोर्टरों ने अतिरिक्त सूचनाएँ भेजनी शुरू कर दी और न्यूज़रूम में सबको पता चला गया कि ये दुर्घटना नहीं है। प्रशासन और ट्रेन के अन्य यात्रियों से बातचीत कर के रिपोर्टरों को पता लगा कि एक भीड़ ने ये किया है। ग्राउंड से ‘इनपुट डेस्क’ तक सूचनाएँ आ रही थी, वहाँ से ‘कॉपी एडिटर्स’ को, फिर वहाँ से उन्हें खबरों में चलाया जा रहा था।

राहुल रौशन बताते हैं कि एक कॉपी एडिटर और इनपुट डेस्क के व्यक्ति की बातचीत सुनने के लिए वो पास खड़े हो गए और ऐसा दिखाने लगे जैसे वो टीवी पर खबर देख रहे हों। कॉपी एडिटर ने पूछा, “पता चला कौन किया?” इनपुट डेस्क के व्यक्ति ने जवाब दिया, “मुसलमान सब, और कौन।” थोड़ी देर रुक कर कॉपी एडिटर ने कहा, “अब ये तो नहीं लिख सकते ना?” इनपुट डेस्क के व्यक्ति के चेहरे पर गुस्सा दिख रहा था, लेकिन वो शांति से कुछ फैक्स फोटोकॉपीज टेबल पर रख कर वहाँ से निकल गया।

राहुल रौशन लिखते हैं कि इस 10 सेकेंड की बातचीत ने काफी कुछ बता दिया। मेनस्ट्रीम मीडिया ‘अनियंत्रित हिन्दू भीड़ ने 16वीं शताब्दी की मस्जिद को ध्वस्त किया’ और ‘दबंग राजपूतों ने दलित दूल्हे को घोड़ी से उतारा’ जैसे हेडलाइंस लिख सकता है, लेकिन यहाँ आरोपितों के जाति-धर्म को बता सकता है, लेकिन आरोपित मुस्लिम हो तो इसे उसका मजहब लिखने में खासी असुविधा होती है। गोधरा में वो भीड़ का मजहब स्पष्ट दिख रहा था।

‘मुस्लिम भीड़ ने हिन्दू तीर्थयात्रियों को ले जा रही ट्रेन को आग के हवाले किया’ – ये सत्य होने के बावजूद मेनस्ट्रीम मीडिया में एक ‘जिम्मेदार’ और वैध हैडिंग नहीं मानी जाएगी। दशकों से ये यही ट्रेंड लेकर चल रहे हैं और इससे अलग हटने पर नैतिकता की दुहाई दी जाती है। जाति को हाइलाइट कर के इस बारे में चिल्लाना न्याय की लड़ाई कहा जाता है और अपराधियों के मजहब को छिपाना जिम्मेदार व्यवहार। हाँ, आरोपित हिन्दू हों तो ये सब नियम-कानून नहीं चलते।

ऐसे मामलों में तो यही पत्रकार ‘बीफ’ और ‘जय श्री राम’ बुलवाने जैसे झूठे आरोप लगा कर दोगुनी ताकत से प्रोपेगंडा फैलाने में जुट जाते हैं। मीडिया के इसी रवैये ने हमें इस कदर ढाल दिया कि हम ये सोचते हुए बड़े हुए कि एक हिन्दू कभी अन्याय या घृणा का पीड़ित हो ही नहीं सकता। हाँ, अगर वो दलित है तो इसे बढ़ा-चढ़ा कर बताया जाएगा। इस देश में हिन्दू-मुस्लिम का रिश्ता ऐसा बना दिया गया, जहाँ डिफ़ॉल्ट रूप से हिन्दू अत्याचारी है और मुस्लिम पीड़ित।

राहुल रौशन लिखते हैं कि इसी कारण एक औसत हिन्दू में खुद के दोषी होने की भावना आ जाती है, जिससे वो मुस्लिमों को खुश करने के लिए कुछ भी करने लगता है। वो अपनी सोच को ही इस्लामी बना लेता है। हमने देखा कि कैसे CAA का विरोध करने के लिए हजारों हिन्दू सड़क पर उतरे और जिन्ना के प्रशंसकों और मोपला नरसंहार के नेता को अपनी प्रेरणा मानने वालो के साथ कंधा से कंधा मिला कर विरोध प्रदर्शन किया।

ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं, जब मीडिया ने इसी तरह का खेल किया। ये सोशल मीडिया का जमाना है, जहाँ लोगों को किसी न किसी माध्यम से कड़वी सच्चाई का पता लग ही जाता है। सोचिए, दशक पहले क्या स्थिति रही होगी। रिपोर्टिंग कितना पक्षपाती रहा होगा। जब लोगों ने मीडिया के झूठ का पर्दाफाश करना शुरू कर दिया तो उन्होंने इसे ‘पोस्ट ट्रुथ’ बता दिया। राहुल रौशन लिखते हैं कि अधिकतर पत्रकारों को पता था कि 2002 में गोधरा में क्या हुआ।

पुस्तक में उन्होंने लिखा है, “पत्रकारों को पता था कि ये आतंकी हमला है और निहत्थे व निर्दोष हिन्दुओं पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया। फिर भी इसके ढाई साल बाद जब कॉन्ग्रेस ने केंद्र सरकार में वापसी के बाद कमिटी गठित की और इस कमिटी ने इसे ‘दुर्घटना’ बता दिया, तब शायद ही किसी पत्रकार ने विरोध में स्वर उठाए हों। न्यूज़रूम में वो बातचीत सुनने के बाद मुझे ये भी अनुभव हुआ कि भले ही हम एक पत्रकार के रूप में कड़वी सच्चाई को बोलना चाहते हों, हमें उनके बने-बनाए नैतिकता के मापदंडों के सामने आत्म-समर्पण करना पड़ेगा।”

महाराष्ट्र: शिवसेना के गुंडों ने बागी MLA के ऑफिस में की तोड़फोड़, शिंदे गुट बोला- बालासाहेब के नाम पर बन सकती है नई पार्टी

महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे सियासी घमासान के बीच जहाँ एकनाथ शिंदे ने उद्धव सरकार पर कई बागी विधायकों के परिजनों की सुरक्षा छीनने का इल्जाम लगाया है। वहीं दूसरी ओर खबर आई है कि शिंदे को समर्थन देने वाले एक विधायक के कार्यालय पर शिवसैनिक हमला भी कर चुके हैं। इस बीच पार्टी के दिग्गज नेता संजय राउत हालात कंट्रोल करने की बजाय कहते सुने गए अगर शिवसैनिकों को भड़काया तो आग लग जाएगी।

बता दें कि कई शिवसैनिकों ने एकनाथ शिंदे को समर्थन देने पर बागी विधायक तानाजी सावंत के पुणे कार्यालय में तोड़फोड़ की। साथ ही वहाँ जय शिवाजी के नारे भी लगाए। ये घटना ठीक उस समय घटित हुई जब एकनाथ शिंदे ने पत्र लिखकर बताया था कि उनके समर्थन में आए 38 विधायकों के परिवार के सदस्यों की सुरक्षा सरकार ने वापस ले ली है। अपने ट्वीट में विधायकों के नाम जारी कर उन्होंने कहा था कि सरकार की जिम्मेदारी है विधायकों को और उनके परिवारों की रक्षा करना।

शिंदे के इस आरोप पर महाराष्ट्र के गृह मंत्रालय ने बयान जारी किया है कि उन्होंने या मुख्यमंत्री ने किसी विधायक की सेक्योरिटी वापस लेने का कोई ऑर्डर नहीं दिया है। लेकिन पार्टी के संजय राउत ने शिंदे द्वारा लिखे पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायकों को कहा, “आप एक विधायक हैं इसलिए आपको सुरक्षा मिली है। आपके परिवार के सदस्यों को वैसी ही सुरक्षा मुहैया नहीं कराई जा सकती।”

बन सकती है नई पार्टी: शिंदे गुट

बता दें कि शिवसैनिकों में पिछले दिनों हुई दो फाड़ के बाद बागी जहाँ बैठकों और जनसभाओं को संबोधित करने की खबरें लगातार आ रही हैं। राउत ने शिवसेना का भविष्य आदित्य ठाकरे को बता दिया है। वहीं बागी विधायकों में से एक दीपक केसरकर ने कहा है कि शिंदे गुट बालासाहेब ठाकरे के नाम पर नई पार्टी बना सकता है।

इसी तरह दूसरे कोरेगाँव सतारा के बागी विधायक ने एनसीपी पर शिवसेना पार्टी को खत्म करने का आरोप लगाया है। उनकी शिकायत है कि उन्होंने कई बार उद्धव ठाकरे से एनसीपी की शिकायक की लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। अब वह लोग बालासाहेब की विचारधारा को बचाने के लिए अपना स्टैंड लेंगे।

उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ महाराष्ट्र में सरकार बचाने के लिए आज शिवसेना राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक कर रही है। वहीं भारतीय जनता पार्टी भी सहयोगी दलों से बातचीत में जुट गई है। उधर खबर आई है कि उद्धव सरकार ने डिप्टी स्पीकर को एक अर्जी दी है जिसमें 16 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की बात है। इस अर्जी को जिरवाल ने स्वीकार लिया है जिसकी वजह से गुवाहाटी में बैठे विधायकों ने उनके ऊपर सरकार को समर्थन देने का इल्जाम लगाया है।

जूते पहन कर शिवलिंग पर बियर उड़ेला, बगल में दूसरा पी रहा था… तीसरा शूट करता रहा वीडियो… चंडीगढ़ पुलिस में शिकायत, विरोध-प्रदर्शन का एलान

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो से शिवलिंग के अपमान का मामला प्रकाश में आया है। वायरल वीडियो में 2 युवक जूते पहन कर एक नदी के किनारे शिवलिंग पर कथित रूप से बियर बहा रहे हैं जबकि तीसरा व्यक्ति वीडियो बना रहा है।

यह वायरल वीडियो कब और कहाँ का है, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। बजरंग दल और भाजपा ने इस मामले की शिकायत चंडीगढ़ पुलिस से की है। चंडीगढ़ पुलिस की साइबर सेल ने वीडियो की जाँच शुरू कर दी है।

इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि नदी के किनारे कच्चे घाट पर 2 शिवलिंग हैं। वीडियो में 2 युवकों के हाथ में बियर की केन दिखाई दे रही है। उन्होंने जूते भी पहन रखे हैं। उसमें से एक नीली टी-शर्ट वाले युवक ने शिवलिंग पर बियर चढ़ाई। बगल ही एक अन्य युवक बियर पी रहा है। वायरल वीडियो के बैकग्राउंड में महादेव शिव का गाना भी बज रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस व्यक्ति ने शिवलिंग पर बियर चढ़ाई है, उसका नाम नरेश उर्फ़ कालिया है। हिन्दू संगठन के लोग आरोपित युवक के घर भी गए, जहाँ उसकी माँ ने उसके घर न होने की जानकारी दी। इसी के साथ 2 अन्य आरोपित युवकों में से एक पंचकुला का विनोद और तीसरा बापूधाम का रहने वाला विवेक बताया जा रहा है।

इस संबंध में हिन्दू संगठनों और भाजपा नेताओं ने मामले की शिकायत चंडीगढ़ के IT पार्क थाने में दर्ज करवाई है। वहाँ से यह केस साइबर सेल को ट्रांसफर कर दिया गया। बजरंग दल ने आरोपितों पर कठोर कार्रवाई न होने पर विरोध प्रदर्शन का एलान किया है।

भगवान राम कैरेक्टरलेस, नूपुर शर्मा के साथ रेप (अप्राकृतिक यौन क्रिया) की सजा: यूट्यूबर वली अहमद का वीडियो, हिंदू-घृणा से भरे कॉमेंट

पटना का एक यूट्यूबर है। नाम है – वली अहमद। 3 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं इसके। अब वली अहमद फँस रहा है। कारण है इस वीडियो में नूपुर शर्मा और उनके समर्थकों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा, और तो और… हिन्दू देवी-देवताओं पर भी बेहद अभद्र टिप्पणी। राजनैतिक विश्लेषक नवीन सिंह ने अपने ट्विटर हैंडल @HackIndia पर 24 जून 2022 (शुक्रवार) को इसके यूट्यूब वीडियो का लिंक शेयर किया।

यह वीडियो 16 जून 2022 को ‘नूपुर शर्मा के अंध भक्त’ नाम की हेडलाइन से बनाया गया है, जिसे अब तक 730000 से अधिक बार देखा जा चुका है। इस पर 3 हजार से भी अधिक कमेंट आ चुके हैं, जिसमें अधिकतर हिन्दू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले हैं। वीडियो कुल 9 मिनट 47 सेकेंड लंबा है।

इस वीडियो के 50वें सेकेंड, 2:25 मिनट, 3:00 मिनट, 4:40 मिनट के बीच वली अहमद नूपुर को ‘शर्मा जी के लौंडिया’ कहता है। वीडियो के 1:37 मिनट पर वली अहमद नूपुर शर्मा के लिए ‘जाहिल औरत’ शब्द का प्रयोग करता है। 3:01 मिनट से 3:09 मिनट के बीच वली अहमद बोला, “उनके भगवान राम की शादी जब सीता माँ से हुई थी तब सीता माँ की उम्र 6 साल थी। फिर तो नूपुर शर्मा के हिसाब से भगवान राम भी कैरेक्टरलेस हुए।”

वली अहमद यहीं खामोश नहीं हुआ। वीडियो के 3:15 मिनट से 3:23 मिनट के बीच वली बोला, “नूपुर शर्मा को जानलेवा न सही पर गाँ$#लेवा सजा जरूर मिलनी चाहिए थी।” वीडियो के 4:06 मिनट से 4:12 मिनट के बीच नूपुर शर्मा के एक समर्थक के बयान पर वली ने कमेंट किया, “इसके हिसाब से आज के बाद जो भी BJP को वोट देगा, वो मियाँ का जना है।” इसी वीडियो के 5:00 मिनट से 7:00 मिनट के बीच वली कई बार नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर व्यंग्य करता है।

वली ने वीडियो के 7:10 मिनट पर एक लड़के को नूपुर शर्मा का ‘नपुंसक भक्त’ कहा। 7:25 मिनट से 7:30 मिनट के बीच वली ने कहा कि नूपुर शर्मा से बड़ा ‘चूतिया’ उनका सपोर्टर है। 7:56 और 8:21 मिनट पर वली अहमद महामंडलेश्वर यति नरसिंहानन्द को ‘पाखंडी बाबा’ कहता है।

8:15वें मिनट पर वली अहमद एक बार फिर यति नरसिंहानंद को ‘सुअर रूपी इंसान, बोलता है। वीडियो के 8:25 से 8:34 मिनट पर वली अहमद ने यति नरसिंहानंद को धमकाते हुए कहा, “तुम अपना तन, मन और बाहुबल नूपुर के बजाय अपनी सुरक्षा में लगाओ क्योंकि तुमने हमारे नबी की शान में नूपुर शर्मा से बड़ी गुस्ताखी की है।”

वली अहमद ने वीडियो के 8:52 से 9:03 मिनट तक यति नरसिंहानंद को फिर से धमकी देते हुए कहा, “इस जानवर के जने को इसकी सजा जल्द मिलेगी। अगर भारत की सरकार से सजा नहीं दे पाई तो उम्मत ए मुसलमां इसे इसके हिस्से की सजा देगा। वीडियो के 9:04 से 9:20 मिनट तक वली अहमद सामूहिक धमकी देते हुए बोला, “आज जो अंधभक्त इन गुस्ताखों का सपोर्ट कर रहे हैं, वो ज़रा सोच समझ कर इनका सपोर्ट करो क्योंकि गुस्ताख़-ए-रसूल का सपोर्ट करने वाला भी गुस्ताख़-ए-रसूल ही होता है। इस्लाम में गुस्ताख़-ए-रसूल की क्या सज़ा है, वो आप इस वीडियो के कमेंट में पढ़ सकते हैं।”

वली अहमद का यूट्यूब कमेंट सेक्शन

इस वीडियो में वली की सोच से सहमति रखने वालों ने उनका पूरा समर्थन किया है। इसी के साथ हिन्दू देवताओं को फर्जी ID बना कर अपमानित भी किया गया है।

गोधरा में जलाए गए कारसेवकों की 59 लाशों को अपनी आँखों से देखा था अमित शाह ने: गुजरात दंगों और उसके पीछे की साजिश पर गृहमंत्री ने बोला सब कुछ

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने 2002 के गुजरात दंगों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने अपने और भाजपा के खिलाफ तमाम बातों को विरोधी पार्टियों के साथ मीडिया का प्रोपोगेंडा बताया। इसी के साथ उन्होंने गोधरा में जलाए गए रामसेवकों पर कॉन्ग्रेस की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने जाकिया जाफ़री को तीस्ता सीतलवाड़ के इशारे पर काम करने वाला बताया।

अमित शाह ने कहा, “PM मोदी की छवि को बदनाम करने के लिए ये पूरी साजिश रची गई थी। लेकिन आख़िरकार सत्य की जीत है। दंगों का राजनैतिक उपयोग करना ही गलत है। मोदी जी की विदेश यात्रा के दौरान उनके खिलाफ लेख लिखे जाते थे। सुप्रीम कोर्ट ने भी ये मान लिया है कि जाकिया जाफ़री किसी और के निर्देश पर काम कर रही है।”

समाचार एजेंसी ANI को दिए वीडियो इंटरव्यू में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुजरात दंगों के अलावा आरक्षण, GST, सर्जिकल स्ट्राइक, किसान आंदोलन, आतंकवाद, पाकिस्तान आदि से संबंधित मसलों पर भी अपनी बात रखी।

अमित शाह ने आगे कहा, “हमने झूठ के सामने लड़ाई लड़ी क्योंकि इतिहास कई हजार सालों तक जीवित रहता है। हमने GST, सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कई लड़ाइयाँ लड़ी हैं। मेरी पार्टी के सर्वोच्च नेता को बदनाम करने की साजिश रची गई। लेकिन उनकी हार हुई। ये PM मोदी के लिए आत्मसंतोष का विषय हो सकता है लेकिन पार्टी के बाकी कार्यकर्ताओं के लिए ये आत्मगौरव की बात है।”

अपनी बात को बढ़ाते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आगे कहा, “दंगा होने का मूल कारण गोधरा में ट्रेन को जला देना था। 16 दिन की बच्ची, जो माँ की गोद में थी… उसे भी जला दिया गया। अपने हाथों से अग्नि-संस्कार किया है मैंने गोधरा में। उस ट्रेन में जले लोगों का अंतिम संस्कार अपनी आँखों से देखा। उनके शवों को एम्बुलेंस से लाया गया। उससे लोगों में दुःख और आक्रोश था। गोधरा में ट्रेन में जले लोगों के शवों की परेड निकाली गई टाइप की बातें साजिश है। गोधरा में ट्रेन को जला देने के कारण दंगे हुए थे। उसके बाद के तमाम दंगे राजनैतिक साजिश से हुए। गुजरात दंगों का कोई आधिकारिक इनपुट भी नहीं था। उस समय के जिम्मेदार लोगों ने अच्छा काम किया था।”

अमित शाह के मुताबिक, “PM मोदी को ये पहली क्लीन चिट नहीं है। नानावटी कमेटी की क्लीन चिट के बाद SIT बनी और सुप्रीम कोर्ट तक मामला गया। फिर भी हमने न्यायिक प्रक्रिया में पूरी आस्था रखी। हम न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन नहीं कर सकते। हम खुद चाहते थे कि हमें न्यायालय भी क्लीन चिट दे। मेरा जेल जाना मेरा सौभाग्य है। जो भी हुआ, वो भले के लिए हुआ और उसके परिणाम अच्छे आए।”

‘…तो मुंबई जल जाती है’ – खत्म हो रही शिवसेना, रोते हुए धमकी दे रहे कॉन्ग्रेसी मंत्री: मुंबई पुलिस हाई अलर्ट

महाराष्ट्र (Maharashtra) में राजनीतिक उठा-पटक के बीच अब संकट पुलिस के सामने भी है। राज्य भर में राजनीतिक हिंसा भड़क सकती है। शनिवार (25 जून 2022) को महाराष्ट्र में शिवसेना के कार्यकर्ताओं के सड़क पर उतरने और गुंडई करने की खबरों को ध्यान में रखते हुए पुलिस हाई अलर्ट पर है। खास तौर पर मुंबई पुलिस। मंत्री नितिन राउत (Nitin Raut) ने इसकी वजह भी स्पष्ट कर दी है।

उद्धव ठाकरे सरकार से बगावत कर एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के साथ जा मिले शिवसेना के विधायकों के खिलाफ हिंसा हो सकती है। महाराष्ट्र के ही एक मंत्री की बातों से पुलिस-प्रशासन को हाई अलर्ट मोड में जाने का अंदाजा आप लगा सकते हैं।

महाराष्ट्र के बिजली मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता नितिन राउत ने मुंबई पुलिस को हाई अलर्ट पर रखने की वजह का जिक्र किया। एक तरह से चेतावनी भरे लहजे में उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में अगर शिवसेना को कुछ होता है तो मुंबई जल जाती है।” मुंबई में अलर्ट पर राउत ने कहा कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि शिवसैनिकों की हिंसा का बहाना बनाकर केंद्र सरकार राज्य में राष्ट्रपति शासन न लगा पाए।

कॉन्ग्रेस नेता नितिन राउत के मुताबिक, उद्धव गुट के समर्थक शिवसैनिकों को हिंसा करने से नहीं रोका गया तो केंद्र को सही मौका मिल जाएगा। मंत्री राउत का मानना है कि इससे पहले इस तरह का विद्रोह शिवसेना ने नहीं देखा है। इसलिए इस घटना को न तो कोई शिवसैनिक हल्के में लेगा और न ही इसे पचा सकेगा। इनके अनुसार लोग किसी भी रूप में अपना गुस्सा जाहिर कर सकते हैं।

संजय राउत की धमकी, एकनाथ शिंदे गुट के MLA ऑफिस में तोड़फोड़

गौरतलब है कि शिवसेना में फूट का असर भी दिखने लगा है। सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को बागी विधायकों को चेताते हुए कहा था कि अब तक शिवसैनिक सड़क पर नहीं उतरे हैं। उन्होंने कहा था, “हमें चुनौती देने वाले एकनाथ शिंदे गुट को पता होना चाहिए कि शिवसैनिक अभी सड़क पर नहीं उतरे हैं। इस तरह की लड़ाई या तो कानूनी तरीके से लड़ी जाती है या सड़क पर। जरूरत पड़ी तो हमारे कार्यकर्ता सड़क पर उतरेंगे।”

शुक्रवार को उनकी इस धमकी का असर भी दिखा। बागी विधायक मंगेश कुडालकर के कुर्ला स्थित ऑफिस में शिवसैनिकों ने तोड़-फोड़ की थी। यहीं नहीं अहमदनगर और नाशिक में भी एकनाथ शिंदे के पोस्टर पर कालिख पोत दी गई थी।

‘द्रौपदी राष्ट्रपति तो पांडव और कौरव कौन हैं?’: राम गोपाल वर्मा के ओछे कमेंट पर हैदराबाद पुलिस ने दर्ज की शिकायत, बीजेपी नेता की SC/ST एक्ट लगाने की माँग

देश के राष्ट्रपति पद के लिए NDA ने झारखंड की राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) को अपना कैंडिडेट घोषित किया है। इसके लिए शुक्रवार को मुर्मू ने अपना नामांकन भी फाइल कर दिया। इस बीच बॉलीवुड के फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा (Ram Gopal Verma) ने 22 जून, 2022 को बहुत ही ओछा कमेंट किया है। उन्होंने ट्वीट किया, “अगर द्रौपदी राष्ट्रपति है तो पांडव कौन हैं? इससे भी अधिक महत्वपूर्ण कौरव कौन हैं?”

वहीं तेलंगाना के वरिष्ठ भाजपा नेता जी नारायण रेड्डी ने फिल्म निर्माता और निर्देशक राम गोपाल वर्मा के खिलाफ एनडीए के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू पर अपमानजनक ट्वीट के लिए पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। हालाँकि, शिकायत और नेटिज़न्स द्वारा नाराजगी जाहिर करने के बाद, वर्मा ने अपने ट्विटर हैंडल से माफी भी माँगी।

बता दें कि जी नारायण रेड्डी ने आबिद रोड पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई कि निर्देशक ने द्रौपदी मुर्मू के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की थी। रेड्डी ने अपनी शिकायत में कहा कि ट्विटर पर वर्मा की टिप्पणी एक अनुभवी महिला राजनेता और झारखंड की पूर्व राज्यपाल के लिए बेहद अपमानजनक है। पुलिस शिकायत के साथ, भाजपा नेता ने ट्वीट को सबूत के रूप में सबमिट किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस द्वारा एससी / एसटी अधिनियम लागू किया जाना चाहिए और निर्देशक को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। वहीं पुलिस ने कहा कि कानूनी राय के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

वहीं राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार के लिए इस तरह के कमेंट के बाद फिल्म निर्माता की ट्विटर पर लोगों ने खिंचाई शुरू कर दी। इसी क्रम में दलित एक्स सी नाम के एक यूजर ने उनके सामाजिक कार्यों पर प्रकाश डाला और कहा, उन्होंने समाज की भलाई के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। 2000 के दशक के अंत तक उनके पास अपना घर नहीं था। व्यक्तिगत त्रासदियों के बावजूद उन्होंने लोगों के लिए काम करना जारी रखा।”

इसी तरह से एमजे रश्मी नाम के एक अन्य यूजर ने राम गोपाल वर्मा को फटकार लगाते हुए कहा, “उनके बारे में क्या जानते हैं आप वो एक आदिवासी महिला है? जिन्होंने अपने पति के साथ ही दो बच्चों को भी एक्सीडेंट में खो दिया।”

एमवी राव नाम के यूजर ने फिल्म निर्माता को आइना दिखाते हुए कहा, “पांडव पंच भूत वायु, अग्नि, वरुण, भूमि आकाश हैं। वह आप जैसे लोगों की भलाई के लिए उन्हें नियंत्रित करती हैं। अगर आप अपनी सीमाओं को लाँघते हैं तो वो आपको नीचे पटक देंगी। …संभलकर रहो भाई।”

निर्माता ने माँगी माफी

ट्विटर पर ओछी हरकत पर विवाद गहराया तो राम गोपाल वर्मा ने माफी माँगने में देर बिल्कुल भी नहीं लगाई। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, “यह सिर्फ एक मजाक में कहा गया था और कोई दूसरा इरादा नहीं था। ..महाभारत में द्रौपदी मेरी पसंदीदा चरित्र हैं, लेकिन चूँकि नाम इतना दुर्लभ है, इसलिए मुझे संबंधित पात्रों की याद आ गई और मैंने ले लिया। किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मकसद बिल्कुल नहीं है।”

गौरतलब है कि द्रौपदी मुर्मू झारखंड में भाजपा की राज्यपाल हैं और बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा है। अगर वो ये चुनाव जीतती हैं तो वे देश की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति होंगी।

संकट में शिवसेना का नाम, निशान और झंडा: राज ठाकरे की MNS ने मुंबई में पोस्टर लगा कसा तंज, पूछा- अब कैसा लग रहा है?

आज शिवसेना में बगावत के कारण महाराष्‍ट्र की महा विकास अघाड़ी सरकार संकट में पड़ गई है। इस बार बगावत किसी अपने नहीं बल्कि बाहरी ने की है। बागी MLA एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के पैरों तले जमीन खिसका दी है। ऐसे में शिवसेना (Shiv sena) में बगावत के बीच राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने इस विवाद में एंट्री मारते हुए शुक्रवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा है।

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना जहाँ टूटने के कगार पर पहुँच गई है। वहीं राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने शिवसेना पर पोस्टर वॉर करते हुए तंज कसा है। मनसे ने पोस्टर में पूछा है, “अब कैसा लग रहा है।” शिवसेना पर तंज कसता हुआ यह होर्डिंग मुंबई के साकीनाका इलाके में लगाया गया है।

मराठी में पोस्टर में लिखा है, “उस समय हमारे नगर सेवकों को फोड़ा था। यह कैसा लगता है?” पोस्टर में महेंद्र भानुशाली का नाम भी है। गौरतलब है कि बीते दिनों राज्य में लाउडस्पीकर पर अजान के विवाद -को लेकर राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे आमने-सामने आ गए थे। माना जा रहा है कि हिन्दुत्व की विचारधारा को कुचलने के बाद शिवसेना के सियासी हालात को लेकर ही मनसे की तरफ से जले में नमक छिड़कने का काम किया गया है।

बता दें कि राज ठाकरे ने पिछले महीने 4 मई को अजान विवाद के बीच ऐलान किया था कि राज्य में जिस भी जगह लाउडस्पीकर पर अजान होगी वहीं पर हनुमान चालीसा बजाएँगे। उन्होंने आरोप लगाए थे कि स्कूल या अस्पताल के नाम पर हिंदू त्योहारों पर साइलेंस जोन के जरिए पाबंदियाँ लगा दी जाती हैं, लेकिन ऐसी पाबंदियों से मस्जिदों को छूट है।

बहरहाल मौजूदा विवाद ये है कि कभी शिवसेना के खास रहे एकनाथ शिंदे पार्टी से नाराज होकर अपने साथ विधायकों का एक जत्था लेकर गुवाहाटी चले गए हैं। उनके समर्थन में बताया जा रहा है कि शिवसेना के बागी विधायकों समेत अब तक कुल 50 विधायक भी आ गए हैं। उद्धव ठाकरे के सामने पार्टी के नाम, निशान, झंडे के रंग और उसके प्रतीकों पर तक बात आ गई है।

बागी विधायक मंगेश कुडालकर के ऑफिस में शिवसैनिकों ने की तोड़फोड़, शिंदे के पोस्टर पर भी पोती कालिख: संजय राउत की धमकी का दिखने लगा असर

शिवसेना के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार के हाथों से सत्ता फिसलती दिख रही है। इसका असर भी दिखने लगा है। राज्य में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का गुट अब खुलेआम गुंडागर्दी पर उतर आया है। इसी क्रम में शिवसेना के कुर्ला से बागी विधायक मंगेश कुडालकर के दफ्तर में तोड़फोड़ की गई है। इसका आरोप उद्धव के गुट वाले शिवसैनिकों पर लग रहा है।

इस घटना की वीडियो भी वायरल हो रहा है। इसमें स्पष्ट देखा जा सकता है कि लाठी-डंडों और लोहे के औजारों के साथ कुछ लोग कुडालकर के ऑफिस के गेट पर पहुँचते हैं और वहाँ पर लगे हुए बोर्ड में तोड़फोड़ करते हैं। इस मौके पर वहाँ पुलिस का एक जवान भी खड़ा होता है। हालाँकि, वो कुछ कर नहीं पाता।

इसी तरह से अहमदनगर में आंदोलनकारियों ने एकनाथ शिंदे के पोस्टर पर कालिख पोत दी। इस दौरान एकनाथ शिंदे हाय-हाय के नारे भी लगाए गए। इसी तरह से नासिक में एकनाथ शिंदे के समर्थन में लगाई गई होर्डिंग पर कुछ लोगों ने स्याही फेंक दी। आरोप है कि ये सब शिवसैनिक कर रहे हैं।

इस बीच महाराष्ट्र के बदलते सियासी मिजाज को देखते हुए महाराष्ट्र पुलिस अलर्ट हो गई है। राज्य के सभी पुलिस थानों, खासकर मुंबई के पुलिस थानों को हाई अलर्ट पर रहने का आदेश दिया गया है। पुलिस का कहना है कि उन्हें सूचना मिली थी कि शिवसैनिक बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर सकते हैं। शांति सुनिश्चित करने के लिए पुलिस को सतर्क रहने को कहा गया है।

संजय राउत ने दी सड़क पर उतरने की चेतावनी

गौरतलब है कि सियासी घमासान के बीच शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा था, “हमें चुनौती देने वाले एकनाथ शिंदे गुट को पता होना चाहिए कि शिवसैनिक अभी सड़क पर नहीं उतरे हैं। इस तरह की लड़ाई या तो कानूनी तरीके से लड़ी जाती है या सड़क पर। जरूरत पड़ी तो हमारे कार्यकर्ता सड़क पर उतरेंगे।”

राउत के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की सड़कों पर कथित शिवसैनिकों का जत्था तोड़फोड़ करते देखा भी जाने लगा है।

राहुल गाँधी के वायनाड कार्यालय में SFI के सदस्यों ने की तोड़फोड़, वीडियो वायरल, कॉन्ग्रेस ने कहा- वहाँ मौजूद लोगों पर भी किया हमला

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और केरल के वायनाड से सांसद राहुल गाँधी के कार्यालय में स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के सदस्यों ने शुक्रवार (24 जून 2022) को जबरन घुसकर तोड़फोड़ की। स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party of India) की छात्र इकाई है। कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया है कि एसएफआई के सदस्यों ने वायनाड में राहुल गाँधी के कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ की और वहाँ मौजूद लोगों पर हमला किया।

कॉन्ग्रेस द्वारा ट्विटर पर शेयर की गई वीडियो में SFI के सदस्यों को पार्टी के कार्यालय में नारे लगाते हुए सुना जा सकता है। गुस्साए लोगों ने राहुल गाँधी की दीवार पर लगी फोटो को भी ​नीचे गिरा दिया। उन्होंने कार्यालय में तोड़फोड़ भी की। कॉन्ग्रेस ने अपने ट्वीट में लिखा, “SFI के गुंडों ने कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी के कार्यालय में तोड़फोड़ की। माकपा के लोग हिंसा कर रहे हैं। पुलिस इनके कार्यकर्ताओं के खिलाफ झूठे मामले दर्ज करती है। वह सीपीआईएम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं करती है। केरल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।”

वहीं, पुलिस ने बताया कि राहुल गाँधी के वायनाड कार्यालय में करीब 80 से 100 SFI कार्यकर्ता घुसे थे। उनमें से अब तक आठ लोगों को हिरासत में लिया गया है। राहुल के कार्यालय के बाहर भारी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इस घटना के पीछे राहुल गाँधी की चुप्पी बताई जा रही है। छात्र संगठन ने यह आरोप लगाया है कि राहुल गाँधी ने केरल के पहाड़ी इलाकों में जंगलों के आसपास ‘बफर जोन’ बनाए जाने के मुद्दे में हस्तक्षेप नहीं किया। बताया जा रहा है कि राहुल के कार्यालय के बाहर तैनात पुलिसकर्मियों ने एसएफआई के प्रदर्शन को रोकने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन वह कार्यालय में घुस आए।

उन्होंने खिड़की के शीशे और शटर तोड़ दिए और दीवारों पर चढ़कर खिड़की के रास्ते कार्यालय में घुस गए। बता दें कि एक दिन पहले, राहुल गाँधी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि इस फैसले से उनके निर्वाचन क्षेत्र वायनाड में विरोध हो रहा है। ऐसा कहा जा रहा है कि SFI उनकी प्रतिक्रिया से नाराज़ हो गया इसलिए उसने सांसद के कार्यालय में तोड़फोड़ और प्रदर्शन करने का फैसला किया।