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पब्लिक प्लेस पर हो जातिगत बदसलूकी तभी लागू SC-ST एक्‍ट: कर्नाटक HC ने दिया अहम फैसला, बेसमेंट में विवाद के दौरान करवाई गई FIR ख़ारिज

एक महत्वपूर्ण फैसले में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि किसी आरोपित पर SC/ST एक्ट तब ही लागू हो सकता है जब बदसलूकी सार्वजानिक स्थान पर हुई हो। इसी के साथ हाईकोर्ट ने इमारत के बेसमेंट में जातिसूचक शब्द कहने पर दर्ज एक FIR को रद्द करने का आदेश दिया। यह आदेश 10 जून 2022 (शुक्रवार) को दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले की सुनवाई जस्टिस एम नागप्रसन्ना की कोर्ट में हुई। मामला साल 2020 की है। तब मकान मालिक जयकुमार आर नायर के यहाँ बेसमेंट में मोहन नाम का सहकर्मी काम कर रहा था। बेसमेंट हो रहे इस निर्माण का विरोध रितेश नाम का व्यक्ति कर रहा था। रितेश ने इस निर्माण के खिलाफ कोर्ट में स्टे भी लिया था। इस दौरान मोहन ने आरोप लगाया कि रितेश कुमार ने उन्हें बेसमेंट में जातिसूचक शब्द बोले। पुलिस ने इसी आधार पर रितेश के खिलाफ धारा 323 IPC के तहत केस दर्ज किया था।

रितेश ने इसी आदेश को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी याचिका पर जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने अपने फैसले में कहा, “बेसमेंट कोई पब्लिक प्लेस नहीं था। इसी के साथ शिकायतकर्ता के सहकर्मी का आरोपित रितेश से कंस्‍ट्रक्‍शन के चलते विवाद था जिसमें स्टे भी लिया गया था। ऐसे में इस बात की संभावना है कि शिकायतकर्ता आरोपित को निशाना बनाने के लिए अपने कर्मचारी का सहारा ले रहा हो।”

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक इसी FIR में शिकायतकर्ता मोहन ने अपनी बाँह पर खरोंच के सामान्य निशान भी दिखाए थे। इसी के साथ उनकी छाती पर भी कुछ निशान पड़े थे। लेकिन उन चोटों से खून बहने का प्रमाण नहीं था। ऐसे में अदालत ने यह कहा कि इस मामले में धारा 323 IPC के तहत अपराध नहीं बनता। अंत में अदालत ने यह कहा कि आरोपित पर केस चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्यों व तथ्यों का अभाव है और ऐसे में आपराधिक केस चलाना न्यायोचित नहीं होगा।

‘अग्निपथ के लिए आवेदन किया तो सामाजिक बहिष्कार’: खाप पंचायतों ने समर्थक कार्पोरेट घरानों के भी बॉयकॉट का किया ऐलान, योजना वापस लेने की माँग

केंद्र सरकार द्वारा सेना में भर्ती के लिए लाई गई अग्निवीर योजना को सेना भी सही बता चुकी है। बावजूद इसके कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं। इसी क्रम में हरियाणा की कुछ खाप पंचायतों ने अग्निपथ के लिए अप्लाई करने वाले लोगों के सामाजिक बहिष्कार की चेतावनी दी है। इतना ही नहीं खाप पंचायत के नेताओं ने राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी-जननायक जनता पार्टी गठबंधन और इस योजना का समर्थन करने वाले कारोबारी घरानों के भी बहिष्कार का ऐलान किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इसको लेकर राज्य के रोहतक में खाप पंचायतों की बैठक हुई थी। बैठक में खाप नेताओं के साथ ही हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और कुछ छात्र संगठनों के नेता भी शामिल रहे। खाप पंचायतों की तरफ से बैठक की अध्यक्षता ओम प्रकाश धनखड़ ने की। उन्होंने धमकी दी कि अग्निपथ के लिए आवेदन करने वालों को सामाजिक रूप से अलग-थलग कर उनका बहिष्कार किया जाएगा। धनखड़ ने कहा, “हम इस योजना का बहिष्कार कर रहे हैं, जो चाहती है कि अग्निवीर होने के नाम पर युवाओं को मजदूरों के रूप में काम पर रखा जाए।”

इतना ही नहीं खाप नेताओं ने बीजेपी-जेजपी और उनका समर्थन करने वाले कार्पोरेट घरानों का विरोध करने की भी अपील की। उल्लेखनीय है कि वेदांता के अनिल अग्रवाल, आनंद महिंद्रा, हर्ष गोयनका, डॉ संगीता रेड्डी, किरण मजूमदार-शॉ और संजीव बिखचंदानी समेत कई कार्पोरेट घरानों ने अग्निपथ का समर्थन किया था। इसके एक दिन बाद खाप पंचायतों ने ये कदम उठाया। गौरतलब है कि देश के बिजनेसमैनों ने ऐलान किया था कि सेना में चार साल के बाद रिटायर होने वालो अग्निवीरों को नौकरी देंगे।

अग्निपथ वाले युवाओं से दूरी बनाए रखने की बात करते हुए धनखड़ ने केंद्र सरकार से इस योजना को वापस लेने की माँग की। नूपुर शर्मा के कथित विवाद के बाद खाड़ी देशों द्वारा भारतीय उत्पादों के बहिष्कार की कथित रिपोर्टों का हवाला देते हुए लोगों से अपील की कि वो अग्निपथ के विरोध में योजना का समर्थन करने वाली कॉर्पोरेट कंपनियों से 10,000 रुपए से अधिक का सामान नहीं खरीदें।

खास बात ये है कि खाप पंचायतों का ये रुख अब तो मुस्लिम समुदायों के उल्टा है। क्योंकि कई मुस्लिम संगठनों ने इस योजना का प्रचार करने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कानपुर में एसोसिएशन ऑफ मुस्लिम प्रोफेशनल्स (AMP) ने मुस्लिम युवाओं से अग्निपथ के तहत सेना में भर्ती होने की अपील की है। संगठन ने शहर की मस्जिदों के इमामों से शुक्रवार के खुतबा (उपदेश) के दौरान केंद्रीय योजना को लोकप्रिय बनाने का भी आग्रह किया।

इस योजना को इसी महीने की 14 जून को केंद्र सरकार ने लॉन्च किया था। इसके जरिए थल सेना, नौसेना और वायु सेना में भर्ती की जाएगी। इसमें सेलेक्ट होने वाले युवाओं को चार साल के लिए सेना में काम करने का मौका मिलेगा। इसमें पहले वर्ष में एक अग्निवीर को 30,000 प्रति महीने की सैलरी मिलेगी, जिसमें से 21,000 रुपए हाथ में होंगे और 9,000 रुपए सरकार पीएफ की तरह ही एक कोष में जमा होंगे। दूसरे, तीसरे और चौथे वर्ष में मासिक वेतन क्रमश: 33,000, 36,500 और 40,000 रुपए हो जाएगा।

हूर बानो के खौफ से मंदसौर पुलिस के पास पहुँचे चैतन्य सिंह, कहा- 25 दिनों से कॉल कर इस्लाम कबूलने का बना रही दबाव

मध्य प्रदेश के मंदसौर में 27 मई 2022 को चैतन्य सिंह बने पूर्व जफर शेख ने खुद पर फिर से मुस्लिम बनने का दबाव बनाने वाली लड़की के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में चैतन्य ने हूर बानो सैफी पर मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाया है। चैतन्य ने हूर बानो के पीछे किसी और का हाथ होने की आशंका जताई है। यह शिकायत आज 24 जून 2022 को की गई है।

अपनी शिकायत में चैतन्य ने लिखा, “एक लड़की हूर बानो सैफी द्वारा मुझे विगत 25 दिनों से लगातार फोन पर इस्लाम में वापसी करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। मुझे इस्लामी बातें बताकर डराया जा रहा है। मुझे ऐसा लगता है इस लड़की के पीछे कोई और लोग भी है जो मुझे इस्लाम में वापस लाना चाहते है। मेरे साथ भविष्य में कोई घटना भी घटित हो सकती है।”

शिकायत

ऑपइंडिया से बात करते हुए चैतन्य सिंह राजपूत ने कहा, “मेरे साथ मेरी पत्नी रहती है। रात 11 बजे तक लड़की के फोन आते हैं। हालत ये हो गए हैं कि मुझे स्पीकर ऑन कर के अपनी पत्नी के आगे बात करना पड़ता है। ये मेरे लिए मानसिक प्रताड़ना है। SP साहब ने मेरी शिकायत पर कार्रवाई का भरोसा दिया है।”

SP मंदसौर IPS अनुराग सुजानिया ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि हमें चैतन्य से शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायत में धमकी नहीं बल्कि फिर से इस्लाम में आने के दबाव का जिक्र किया गया है। सभी पहलुओं पर हम जाँच कर रहे हैं। मामले पर हमारी लगातार नजर है। जो भी तथ्य प्रकाश में आएँगे उस अनुसार कार्रवाई की जाएगी।”

गौरतलब है कि चैतन्य सिंह राजपूत ने बताया था कि सनातन में आते ही उन्हें हूर बानो नाम की उनकी पूर्व सहकर्मी की तरफ से लगातार फिर से मुस्लिम बनने के लिए फोन आ रहे हैं। वो फिर से इस्लाम कबूलने के लिए मना कर चुके हैं लेकिन उसके बाद भी फोन आने का सिलसिला जारी है। हूर बानो उन्हें मज़हबी किताबों में लिखी बातों का हवाला दे कर डराने की कोशिश करती है। ऑपइंडिया से बात करते हुए हूर बानों ने भी चैतन्य को इस्लाम कबूलने की दावत देना स्वीकार किया था। इसी के साथ उन्होंने ऐसा चैतन्य को जहन्नुम की आग से बचाने के लिए करना बताया था।

सभी विधायकों का असम में स्वागत, उद्धव ठाकरे भी आएँ: असम के CM हिमंत सरमा, पुलिस से भिड़े कॉन्ग्रेसी

शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे पार्टी के अन्य विधायकों के साथ गुवाहाटी के होटल रेडिसन ब्लू में डेरा डाले हुए हैं। शिवसेना के बागी विधायकों के विरोध में असम कॉन्ग्रेस के नेता, कार्यकर्ता और कुछ वामपंथी दल शुक्रवार (24 जून 2022) को पुलिस से भिड़ गए। झड़प के दौरान एक पुलिसकर्मी घायल हो गया है, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं दूसरी ओर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर बागी विधायकों को अपने राज्य में पनाह देकर संघीय ढाँचे को रौंदने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसको लेकर सरमा ने विपक्ष को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा, “देश के सभी राज्यों के सभी विधायकों का असम में स्वागत है। उद्धव ठाकरे को भी छुट्टियाँ मनाने के लिए असम में आमंत्रित किया जाता है।”

दरअसल, एएनआई के रिपोर्टर ने सरमा से कहा कि असम के मुख्यमंत्री पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि वह शिवसेना के बागी विधायकों को अपने राज्य में पनाह देकर संघीय ढाँचे को रौंद रहे हैं। इस पर हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “मैंने आपसे सुना कि ज्यादातर विधायक गुवाहाटी पहुँच रहे हैं। मैं देश के सभी विधायकों को असम में आने और यहाँ रहने के लिए आमंत्रित करता हूँ।”

सरमा ने आगे कहा, “इसका संघीय ढाँचे से क्या लेना-देना है? मैं अपने राज्य के होटलों में लोगों के आने और ठहरने पर कैसे रोक लगा सकता हूँ? कल अगर आप होटल बुक करते हैं और मैं आपको मना कर देता हूँ और कहता हूँ कि देश में एक संघीय ढाँचा है। इसलिए आप असम के होटल में नहीं आ सकते हैं, तो क्या यह ठीक रहेगा? क्या आप इसे संघीय ढाँचा कहेंगे?”

सरमा ने सभी को असम आने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा, “मुझे नहीं पता कि वे कितने दिन यहाँ रहेंगे, लेकिन वे जितने भी दिन असम में बिताएँगे, मुझे खुशी होगी। उन्हें वहीं रहना चाहिए। मैं सभी को असम आमंत्रित करता हूँ। सभी को असम आना चाहिए।” उद्धव ठाकरे के बारे में पूछे जाने पर, सीएम ने कहा, “उन्हें भी छुट्टी मनाने के लिए असम आना चाहिए।”

बताया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता आज गुवाहाटी के होटल रेडिसन ब्लू पहुँचे, जहाँ एकनाथ शिंदे के साथ शिवसेना के बागी विधायक और महाराष्ट्र के कुछ निर्दलीय विधायक ठहरे हुए हैं। होटल के बाहर असम कॉन्ग्रेस के नेताओं, कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘बीजेपी मुर्दाबाद’ और ‘गो बैक गो बैक’ के नारे लगाते हुए होटल परिसर में घुसने की कोशिश की। इस दौरान पुलिसकर्मियों के साथ उनकी झड़प हो गई, जिसमें एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। कॉन्ग्रेस प्रदर्शनकारियों में आरपीआई और सीपीआईएम जैसे वामपंथी दलों के कार्यकर्ता और नेता भी शामिल हुए थे।

महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस को उसके हाल पर छोड़ विदेश गईं प्रियंका गाँधी, मालदीव में डाइविंग कोर्स कर रही है बेटी मिराया: रॉबर्ट वाड्रा ने शेयर की तस्वीरें

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा विदेश में हैं। उनके मालदीव में होने की जानकारी ऐसे वक्त में सामने आई है, जब महाराष्ट्र का सियासी तापमान चरम पर है। वहाँ उद्धव ठाकरे की सरकार पर खतरा मँडरा रहा है। इस सरकार में कॉन्ग्रेस भी शामिल है। वैसे जरूरत के वक्त कॉन्ग्रेस को उसके हाल पर छोड़ विदेश चले जाना कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के लिए नई बात नहीं है। प्रियंका के भाई और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी अक्सर इस वजह से चर्चा में रहते हैं।

प्रियंका के मालदीव में होने की पुष्टि कॉन्ग्रेस से कम्यनिकेशन हेड जयराम रमेश ने की है। उन्होंने ट्वीट कर बताया, “दिन भर खबरें आती रही हैं कि प्रियंका गाँधी वाड्रा मुंबई पहुँच गई हैं। वह केवल अपनी बेटी जो 20 साल की हो गई है और मालदीव में एक प्रशिक्षक स्तर का डाइविंग कोर्स पूरा कर रही है, के साथ रहने के लिए मुंबई से गुज़री हैं। वह 30 जून को वापस आएँगी।” रमेश ने यह ट्वीट उन खबरों का खंडन करते हुए किया था जिनमें प्रियंका के मुंबई जाने का दावा किया जा रहा था। शिवसेना के एक-एक करके सभी विधायक सीएम उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर बागी नेता एकनाथ शिंदे के गुट में जा मिले हैं। लेकिन इन सब को दरकिनार करते हुए कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा (Priyanka Gandhi) विदेश दौरे पर मालदीव चली गई हैं। वहाँ उनकी बेटी मिराया (Miraya Vadra) रहती हैं।

उल्लेखनीय है कि प्रियंका गाँधी वाड्रा के दो बच्चे हैं। एक बेटा रेहान और दूसरी बेटी मियारा। मिराया (Miraya Vadra) का 24 जून 2022 को 20वाँ जन्मदिन है। बेटी के जन्मदिन पर रॉबर्ट वाड्रा ने सोशल मीडिया में तस्वीरें पोस्ट कर उन्हें बधाई दी है।

पहले भी पार्टी को संकट में छोड़ छुट्टियों पर गए कॉन्ग्रेस नेता

पार्टी को संकट में छोड़ कॉन्ग्रेस का शीर्ष परिवार अकसर छुट्टी मनाने चला जाता है। इससे पहले पंजाब में सियासी संकट के बीच 20 सितंबर 2021 को प्रियंका गाँधी, भाई राहुल गाँधी के साथ छुट्टियाँ मनाने शिमला चली गई थीं। 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले राहुल गाँधी जैसलमेर छुट्टियाँ मनाने चले गए थे। इसी साल पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गाँधी इटली के दौरे पर चले गए थे।

नौकरी के नाम पर केरल की महिलाओं को कुवैत में बंधक बनाया, भूखे रखकर पीटा: अब आतंकी संगठन ISIS के हाथों बेचने की दे रही धमकी

कड़े कानूनों के बावजूद खाड़ी देशों में मानव तस्करी में कमी नहीं आ रही है। हाल ही में कुवैत में कुछ सामाजिक संगठनों के हस्तक्षेप के बाद केरल की तीन महिलाओं को मानव तस्करी नेटवर्क के चंगुल से बचाया गया, लेकिन अभी भी वहाँ सैकड़ों महिलाओं के फँसे होने की खबर है। इसी बीच कुवैत में कई महीनों तक फँसी रही केरल की दो महिलाओं का दिल दहला देने वाला एक ऑडियो क्लिप सामने आया है। अपने वतन वापस लौट चुकी इन महिलाओं ने अपनी आप बीती बताई ​है कि कैसे मानव तस्करी रैकेट ने उन्हें नौकरी का झाँसा दिया और बाद में उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें कुवैत ले जाकर बेच दिया गया।

मानव तस्करी रैकेट ने केरल की दो महिलाओं की कीमत 3,50,000 रुपए लगाई थी। उन्हें कोच्चि स्थित एक ‘भर्ती’ एजेंसी द्वारा कुवैत में घरेलू नौकरानी के लिए बेचा गया था। खाड़ी देश में उन्हें दर्दनाक दौर से गुजरना पड़ा। महीनों बाद यहाँ से बच निकलने में कामयाब रहीं रेखा और उषा (बदले हुए नाम) के पास कई रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानियाँ हैं। इन दोनों को परिवार के भरण-पोषण के लिए विदेश में नौकरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा। बेहद गरीब परिवार से होने के कारण उनके पास कम दिनों में ज्यादा पैसे कमाने का और कोई विकल्प नहीं था। लेकिन उनकी गरीबी का फायदा उठाया गया और उन्हें अपने घरों से बहुत दूर एक अंजान देश में प्रताड़ित किया गया। नौकरी की चाह में झूठे दावों की शिकार हुई महिलाओं ने किसी तरह व्हाट्सएप पर एक ऑडियो क्लिप शेयर किया, उसमें उनके साथ हो रहे दुर्व्यवहार के बारे बताया और उन्हें रैकेट के चंगुल से बचाने की माँग की। इस ऑडियो क्लिप में ये महिलाएँ रो रही हैं और मलयाली भाषा में अपनी दर्दनाक कहानी बता रही हैं कि किस तरह उन्हें कुवैत में शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

द न्यूज मिनट के मुताबिक, ऑडियो में उन्होंने बताया, “हमें यहाँ लाकर कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया, भूखा रखा गया, हमारे साथ मारपीट और गाली गलौच की गई। जबरन श्रम के लिए मजबूर किया गया। इसके अलावा धमकी दी गई कि अगर हमने उनकी बात मानने से इनकार किया तो उन्हें आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) को बेच दिया जाएगा।”

रेखा बताती हैं, “जब मैंने जनवरी 2022 में कुवैत में बेबी सिटर्स और होम नर्स की नौकरी के लिए एक विज्ञापन देखा, तब मैंने उस पर लिखे फोन नंबर पर संपर्क किया। नंबर आनंद नाम के एक व्यक्ति का था, उसने मुझे चलिक्कवट्टम में अपने ऑफिस आने को कहा।”

वह कहती हैं, “गोल्डन वाया नाम की एजेंसी के कर्मचारियों ने उसे एक अच्छा सैलरी पैकेज ऑफर किया। उसे बताया गया कि अगर वह एक ‘दाई’ (नैनी) के रूप में काम करती है, तो उसे 60,000 रुपए मासिक वेतन और रहने के लिए घर दिया जाएगा। उसे यह भी बताया गया कि उसका एकमात्र काम बच्चों की देखभाल करना होगा, क्योंकि उन घरों में अन्य कामों के लिए नौकर हैं। इसके साथ ही उसे फ्लाइट का टिकट और वीजा भी एजेंसी की तरफ से दिया जाएगा।” रेखा ने बताया कि एजेंसी में दो महिलाएँ भी थीं, जिससे उन्हें एजेंट की बात पर पूरा विश्वास हो गया।

वहीं, उषा मानती हैं कि अगर उन्होंने एजेंसी के वादों को ठुकरा दिया होता तो बहुत अच्छा था। वह ​कहती हैं, “जब मैंने उनसे पूछा कि वीजा और टिकट मुफ्त क्यों हैं, तो उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि महिलाओं की भर्ती मोदी सरकार की योजना के तहत हो रही है। हमें बताया गया कि जाने से पहले हमें केवल अपने मेडिकल चेक-अप और आरटी-पीसीआर परीक्षणों के लिए भुगतान करना होगा। उन्होंने मुझे भरोसा दिलाया कि मुझे एक अच्छी प्रतिष्ठित फर्म में भेजा जा रहा है।”

वह बताती हैं कि उसे समीर नाम के एक व्यक्ति से अपना टिकट, वीजा और पासपोर्ट लेने के लिए कहा गया था। इस पर उषा पूछती हैं कि वह उस पर कैसे विश्वास कर सकती हैं? उससे कहा गया कि समीर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में कार्यरत है। वह केरल के नेदुंबसेरी में स्थित होटल रॉयल विंग्स में उनका इंतजार कर रहा है।

रेखा का कहना है कि जब उन्होंने अपने वीजा पर ‘हाउसमेड’ लिखा हुआ देखा तो वह शुरुआत में घबरा गई थीं। बाद में रेखा उनसे इसके बारे में पूछती हैं, तो उन्होंने कहा कि वह यह सब अडजस्ट कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें इस वीजा के लिए पैसे देने हैं। वह कहती हैं, “उन्होंने मुझसे वादा किया था कि उनका एजेंट मुझे केवल बच्चों की देखभाल के काम के लिए भेज रहा था, इसलिए मैंने खुद को समझाया।” इसके बाद रेखा 6 और उषा 15 फरवरी को कुवैत पहुँची। हवाई अड्डे पर जैद जहर अल-दवसारी मैनपावर रिक्रूटमेंट एजेंसी के एमके गसाली नाम के एक व्यक्ति ने उनका स्वागत किया, जिसे मजीद के नाम से भी जाना जाता है। इसके बाद सब कुछ शीशे की तरह साफ होता गया।

रेखा कहती हैं, “जब मैंने गसाली से उस बच्चे के बारे में पूछा, जिसकी देखभाल के लिए मुझे यहाँ लाया गया था। उसे बताया कि तुम्हें यहाँ बच्चा सम्भालने के लिए नहीं लाया गया है। उन्होंने दावा किया कि ऐसा कोई वीजा नहीं है, जो कुवैत में श्रमिकों को सिर्फ बच्चों की देखभाल करने के लिए यहाँ आने की अनुमति देता हो।” वह आगे बताती हैं, “उसने मुझसे कहा कि तुम्हारे साथ क्या हुआ, इसके प्रति मेरी कोई जवाबदेही नहीं है। तुम्हे यह सब उस व्यक्ति से पूछना चाहिए, जिसने यहाँ भेजा है। रेखा कहती हैं, “कुवैत में उनका बाकी समय धमकियों और अमानवीय व्यवहार के साथ बीता। गसाली ने यह भी बताया था कि उन्होंने उसे 3.5 लाख रुपए में खरीदा है। इसलिए कुवैत में घरेलू काम करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।”

रेखा ने बताया कि उसे ऐसे परिवार में नौकर बनाकर भेजा गया, जहाँ आठ लोग रहते थे। वह रोते हुए याद करती हैं, “मुझे वहाँ सुबह 7 बजे से रात 11 बजे तक काम करना पड़ता था, बिना खाना खाए और आराम किए। कभी-कभी, वे मुझे एक या दो चपाती और काली चाय देते थे। उनके लिए यह मेरे जिंदा रहने के लिए पर्याप्त था। एक दिन, जब मैं थकान के कारण खड़ी नहीं हो पा रही थी, तभी उस घर की मालकिन ने आकर मुझे लात मारी, चप्पल से मारा और बहुत पीटा। मेरे सिर पर पानी डाल दिया और मुझे तेज धूप में खड़ा कर दिया। कह रही थी अभी तक तेरा काम नहीं हुआ। मैं इससे बहुत डर गई थी कि मैंने किसी तरह काम फिर से शुरू कर दिया।”

केरल की महिला ने बताया, “इस घटना के पाँच दिन बाद मेरी तबीयत बहुत खराब हो गई। नाक से खून बहने लगा था। मैंने अपनी स्थिति के बारे में एजेंसी को लगातार अपडेट किया। मैंने वीडियो पर गसाली को फोन किया और उसे मेरी नाक से खून बहने की तस्वीरें भेजीं, लेकिन उसने कोई ध्यान नहीं दिया।” वह कहती हैं, “मुझे बाद में एक क्लिनिक ले जाया गया, लेकिन क्लिनिक में कहा गया कि गम्भीर स्थिति है, मुझे अस्पताल ले जाना होगा। इसके बजाय अरब लोग मुझे एजेंसी के पास ले गए, क्योंकि वे मेरी देखभाल नहीं करना चाहते थे।”

उन्होंने अपनी बात को जारी रखते हुए बताया, “यह आतंक अभी खत्म नहीं हुआ था। अगले दिन मुझे अस्पताल ले जाने की बजाय एजेंसी के लोगों ने मुझे अपने कार्यालय में ले गए और मुझे वहाँ बंद कर दिया। एजेंसी के लोगों ने मुझे धमकाना शुरू कर दिया और बेल्ट से मारा। उन्होंने कहा कि हम अरब लोगों ने तेरी कीमत दी है। इसलिए मुझे वापस जाकर वहाँ काम करना होगा। उन्होंने ऐसा नहीं करने पर मुझे ISIS (आतंकवादियों) के पास भेजने की धमकी दी, मुझे याद दिलाया कि मेरा पासपोर्ट अभी भी उनके पास है। उसी रात वे मुझे वापस उस घर में ले गए जहाँ मुझे पीटा गया था।”

रेखा की तरह उषा को भी कुवैत में कई बार प्रताड़ना दी गई। चप्पलों, बेल्ट से पीटा गया, भूखा रखा गया। शराफुद्दीन, हबीब और रफीक ये वे लोग थे, जिन्होंने रेखा और उषा की घर वापस आने में मदद की। दोनों महिलाओं का कहना है कि अगर एसोसिएशन ने मदद नहीं की होती, तो हमारे बचने की कोई उम्मीद नहीं थी। रेखा कहती हैं, “हो सकता है कि उन्होंने मेरे खराब स्वास्थ्य के कारण मुझे जाने दिया हो। लेकिन दूसरी महिलाएँ एसोसिएशन की मदद से यहाँ से निकलने में कामयाब रहीं। रेखा ने सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की उम्मीद जताई है। उसने कहा कि अभी वहाँ और भी लोग फँसे हुए हैं, जो नरक से भी बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

गौरतलब है कि रैकेट के चंगुल से भागी दोनों महिलाओं के कुवैत पहुँचने पर पासपोर्ट जब्त कर लिए गए थे। बीते दिनों एक ने मीडिया में बताया था, “वहाँ पहुँचने के बाद हमें पता चला कि वे हमें अरब परिवारों के घर की नौकरानी बनाने के लिए यहाँ पर लेकर आए थे। जब हमने इसका विरोध किया तो उन लोगों ने हमें फर्जी मामलों में फँसाकर जेल में डालने की धमकी दी। हम इससे काफी डर गए थे। यह भी नहीं जानते थे कि किसी अनजान जगह पर क्या करें।”

मैनपुरी के खेत से मिले ताम्र अस्त्र 4000 साल पुराने, क्या महाभारत के युद्ध में हुआ था इस्तेमाल: तेजी और आकार ने पुरात्वविदों की बढ़ाई उत्सुकता

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मैनपुरी (Mainpuri) के एक खेत से मिले अस्त्र (हथियार) करीब 4000 साल पुराने हैं। इनमें तलवार, भाला, कांता, त्रिशूल आदि शामिल हैं। ये अस्त्र ताम्र (तांबे​) के हैं। द्वापर युग के बताए जा रहे इन हथियारों का उपयोग महाभारत की लड़ाई में होने की संभावना भी जताई जा रही है। इन अस्त्रों ने पुरातत्वविदों की उत्सुकता बढ़ा दी है। जाँच के बाद उन्होंने इसे ‘रोमांचक’ करार दिया है।

जंग लगे इन हथियारों की जाँच के बाद जो परिणाम सामने आए हैं उसके मुताबिक, प्राचीन काल में भी भारतीय लड़ाकों के पास उन्नत हथियार हुआ करते थे। वे लड़ाई में बड़े अस्त्रों और तलवारों का इस्तेमाल करते थे। उस समय भी करीब चार फीट के तेज हथियार होते थे और स्टारफिश के आकार के हथियारों का प्रयोग किया जाता था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जून महीने की शुरुआत में मैनपुरी के गणेशपुर गाँव में एक किसान अपने खेत की जुताई करा रहा था। खेत को समतल कराने के दौरान उसे ये हथियार मिले थे। किसान ने इस बारे में किसी को नहीं बताया और उन्हें अपने घर ले गया। उसे लगा कि ये हथियार सोने या चाँदी के हो सकते हैं। लेकिन, कुछ दिनों बाद खेत से हथियार मिलने की बात पूरे गाँव में फैल गई। इसी बीच किसी ने पुलिस को सूचित कर दिया। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की आगरा सर्किल टीम 13 जून को गणेशपुर पहुँची। प्रशासन ने सभी 39 ताम्रनिधि पुरातत्व विभाग को सौंप दिया।

इन हथियारों की जाँच करने के बाद विशेषज्ञों ने बताया कि 4000 साल पुराने तांबे के हथियारों के गहन अध्ययन से यह द्वापर युग का लगते हैं। आर्कियोलॉजी के निदेशक भुवन विक्रम का दावा है कि तांबे के ये हथियार ताम्र पाषाण काल (कॉपर एज) के हैं। वहीं, आगरा सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद राजकुमार पटेल ने बताया कि यह बड़ी खोज साबित हो सकती है। उन्होंने बताया है कि प्रारंभिक तौर पर देखने में यह ताम्रनिधियाँ ईसा पूर्व 1800 की लगती हैं। एटा, मैनपुरी, आगरा और गंगा बेल्ट इस तरह की ताम्रनिधियों की संस्कृति वाले क्षेत्र रहे हैं। यह 3800 साल से ज्यादा पुरानी हैं।

₹60,000 करोड़ दान करेगा गौतम अडानी का परिवार: स्कूली बच्चों के साथ फोटो शेयर कर बताया- शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर होगा खर्च

उद्योगपति गौतम अडानी (Gautam Adani) आज (24 जून 2022) अपना 60वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। यह उनके पिता शांतिलाल अडानी की 100वीं जयंती का भी साल है। इसे देखते हुए उनके परिवार ने 60 हजार करोड़ रुपए दान करने का संकल्प लिया है। यह रकम शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर खर्च किया जाएगा।

जन्मदिन से एक दिन पहले अडानी ने एक ट्वीट के जरिए इसकी जानकारी दी। इस ट्वीट में वे स्कूली बच्चों के साथ नजर आ रहे हैं। साथ ही लिखा है, “मेरे​ पिता की 100वीं जयंती और मेरे 60वें जन्मदिन पर अडानी परिवार ने देश भर में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कौशल विकास के लिए 60 हजार करोड़ रुपए दान करने का संकल्प लिया है।”

इस पैसे का इस्तेमाल अडानी फाउंडेशन के जरिए किया जाएगा। ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में अडानी ने बताया है कि भारत में किसी फाउंडेशन के लिए किया गया यह सबसे बड़ा दान है। उन्होंने कहा कि बड़े प्रोजेक्ट प्लानिंग और उन्हें जमीन पर उतारने में हमारा अनुभव, अडानी फाउंडेशन के कार्यों से मिली सीख इन तीन क्षेत्रों में काम करने और भारत का भविष्य तैयार करने की कोशिशों में योगदान के लिए मददगार होगी। इन तीनों सेक्टरों में फंड एलोकेशन को लेकर एक्सपर्ट कमेटियों का गठन करने की बात भी उन्होंने कही है। अडानी फाउंडेशन भारत के 16 राज्यों के 2,409 गाँव में 37 लाख लोगों के बीच काम करता है।

अडानी समूह ने एक बयान जारी कर कहा है, “भारत के डेमोग्राफिक एडवांटेज की क्षमताओं का उपयोग करने के लिए, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। इनमें से प्रत्येक क्षेत्र में कमी ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए बड़ी बाधा है। अडानी फाउंडेशन को इन सभी क्षेत्रों में काम करने का अनुभव है।”

इस मौके पर गौतम अडानी की पत्नी प्रीति अडानी ने भी कहा कि करीब 36 साल पहले उन्होंने अपने कैरियर को किनारे कर गौतम अडानी के साथ शादी की थी। वो कहती हैं कि आज जब वो अपने अतीत में पीछे मुड़कर देखती हैं तो उन्हें उस वक्त लिए गए अपने फैसले पर फक्र होता है।

जन्मदिन पर पत्नी प्रीति अडानी ने भी उद्योगपति को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि करीब 36 साल पहले उन्होंने अपने कैरियर को किनारे कर गौतम अडानी के साथ शादी की थी। आज जब वह पीछे मुड़कर देखती हैं तो उन्हें इस फैसले पर फक्र होता है।

‘इस्लाम में लौटो, वरना दोजख की आग में जलोगे’: चैतन्य को फिर से जफर शेख बनने के लिए कैसे धमका रही हूर बानो, सब कुछ ऑपइंडिया को बताया

मध्य प्रदेश के मंदसौर में 27 मई, 2022 को जफर शेख नाम के व्यक्ति ने घर वापसी करते हुए हिन्दू धर्म को स्वीकार किया था। और उनको नया नाम मिला चैतन्य सिंह उर्फ़ चेतन सिंह। अभी महीना भर भी नहीं बीता कि चैतन्य पर फिर से इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया जा रहा है। चैतन्य के मुताबिक यह दबाव कोई और नहीं बल्कि उन्हीं की एक पूर्व परिचित हूर बानो सैफी नाम की लड़की बना रही है। वहीं हूर बानो ने भी ऑपइंडिया से बातचीत में चैतन्य को कॉल करने और उन्हें फिर से इस्लाम कबूलने के लिए कहने की बात कबूली है।

बता दें कि हूर बानो पहले एक केबल न्यूज़ चैनल में पत्रकार थी। वहीं चैतन्य सिंह ने इस पूरे मामले में न झुकते हुए इसकी शिकायत पुलिस में करने का फैसला किया है। हालाँकि, चैतन्य सिंह के ही मुताबिक उनकी हिन्दू धर्म में घर वापसी के बाद शहर में कई मुस्लिम उनको नफरत की नजर से देखते हैं।

क्या है पूरा मामला

ऑपइंडिया से बात करते हुए चैतन्य सिंह (पूर्व जफर शेख) ने बताया, “मेरे घर वापसी के 3 दिन बाद से ही हूर बानो मुझे लगातार फोन करके फिर से मुस्लिम बनने का दबाव डाल रही है। वो लगातार मज़हबी किताबों में लिखी बातों को मुझे बता कर डराती है। कभी वो दोखज की आग में जलने का हवाला देती है तो कभी खुदा के कहर का। लेकिन कभी-कभी वो इमोशनल हो कर रोने भी लगती है।”

शहर क़ाज़ी से कब मिलवाऊँ?

चैतन्य सिंह ने ऑपइंडिया को एक रिकार्डिंग भी भेजी है जिसे उन्होंने अपनी और हूर बानो के बीच हुई बातचीत बताया है। इस रिकॉर्डिंग में लड़की ने कहा, “मैंने शहर काज़ी और युवाओं से बात कर ली है। बोलो कब मिलवाऊँ उनसे तुम्हे? अल्लाह की कसम तुम बहुत आसानी से वापस आ सकते हो। कोई तुम पर ऊँगली नहीं उठाएगा। तुम्हें मैं बताऊँगी कि क्या बोलना है। तुम्हें लोग (हिन्दू) शक की नजर से देख रहे हैं। आप वापस लौट कर जन्नती बन जाओ। आप अल्लाह को बहुत प्यारे हो। अल्लाह ने तुम्हारी वापसी की जिम्मेदारी मुझे दी है।”

एक दिन हम लोगों को मारा और काटा जाएगा

ऑडियो में आगे लड़की कहती है, “आपके पीछे के लोग मौकापरस्त हैं। एकाध इंसान के जाने से हमारा मज़हब कमजोर नहीं होता है। न ही हमारा इस्लाम झुक जाएगा। लेकिन मैं नहीं चाहती कि आप जहन्नमी बनिए। अगर आपने मेरी बात मान ली तो मैं जिंदगी भर आपका साथ निभाऊँगी। एक बार मोमिन बनो तो सही हर मुस्लिम आपके लिए मरने को तैयार है। शहर क़ाज़ी ने आपके इस्तकबाल का ऐलान किया है। ज्यादा देर हो जाएगी तो लौटना मुश्किल होगा। सबसे अच्छा और सच्चा मज़हब इस्लाम है। एक बार मुझसे मिलो तो तुम समझ क्यों नहीं रहे हो कि एक दिन हम सबको चुन-चुन कर मारा और काटा जाएगा। मैं छोटी भले हूँ पर अल्लाह ने मुझे अक्ल दी है।”

एक केबल चैनल में साथ कर चुकी है काम

चैतन्य सिंह के मुताबिक, “हूर बानो साल भर पहले मेरे साथ एक लोकल केबल चैनल SRM टुडे में काम करती थी। तब मैं वहाँ स्क्रिप्ट लिखता था। यह चैनल विश्व हिन्दू परिषद के एक नेता युवराज सिंह का था जिनकी बाद में हत्या हो गई थी। अब ये चैनल बंद हो चुका है। हमारी तब से बातचीत होती रही।”

CAA प्रदर्शन में रह चुकी है शामिल

चैतन्य ने आगे हूर बानो के बारे में बताते हुए कहा, “मुझे दबाव दे रही हूर बानो लगभग 30-35 साल की अविवाहिता है। उसका ब्रेनवाश हो चुका है। वो CAA प्रदर्शनों के दौरान मंदसौर में काफी एक्टिव थी और यहाँ हुए प्रदर्शनों में उसकी बड़ी भूमिका रही है। इस दौरान उसने बेहद उग्र भाषण दिए थे। उसके पीछे कुछ अन्य कट्टरपंथी लोग भी हैं। मुझसे बातचीत के दौरान हूर बानो ने मुस्लिम महासभा के मज़हर और एक अन्य साबिर का नाम लिया है।”

नफरत भरी निगाह से देख रहे हैं मुस्लिम

चैतन्य के मुताबिक, “हिन्दू बनने के बाद मैं बाजार आदि जाता हूँ तो मुझे अन्य मुस्लिम नफरत भरी निगाह से देखते हैं। कुछ तो मेरे खिलाफ बातें भी करते हैं। फ़िलहाल मैंने पूरे मामले को लेकर पुलिस से शिकायत करने का फैसला किया है। मैं SP को अपनी सुरक्षा का प्रार्थना पत्र देने जा रहा हूँ।”

वापस जाने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता

चैतन्य सिंह ने आगे किसी भी दबाव से इनकार करते हुए कहा, “दबाव या किसी भी हालत में अब वापस जाने का सवाल ही नहीं पैदा होता। मेरे घर वाले पढ़े लिखे लोग हैं। उन्हें मेरे हिन्दू होने से कोई दिक्क्त नहीं है। पत्नी पहले से ही हिन्दू थी। बचपन से ही मैं जिस धर्म में आस्था रख कर मंदिर बना कर पूजा करता था अब हमेशा उसी में रहना है।”

सोशल मीडिया पर हूर बानो की सेना विरोधी पोस्ट

ऑपइंडिया ने जब सोशल मीडिया पर हूर बानो की प्रोफ़ाइल को खंगाली तब 27 मार्च 2022 को उन्होंने सेना विरोधी एक पोस्ट की है। इस पोस्ट में उन्होंने रियल कश्मीर फाइल्स टैग देते हुए एक व्यक्ति के बयानों के आधार पर भारतीय सेना पर एक व्यक्ति के साथ अमानवीय अत्याचार का आरोप लगाया है। ऐसे और भी कई पोस्ट हैं जिससे देश और सेना के प्रति उसके रवैए के बारे में साफ पता लगता है।

ऑपइंडिया ने की हूर बानो से भी बात

सामने आए रिकॉर्डिंग और चैतन्य के दावों को लेकर ऑपइंडिया ने हूर बानो से भी संपर्क किया। उन्होंने बताया, “हाँ, मैंने उन्हें इस्लाम में फिर से आने की दावत दी और मुझे इसका कोई गम नहीं है। इस्लाम में लिखा है कि मजहब छोड़ने वाले जहन्नुम की आग में जलाए जाते हैं। मैंने उनकी भलाई सोची थी। उन्होंने भी मुझसे पूछा था कि यदि वे वापस लौटेंगे तो क्या मुस्लिम लोग उन्हें कबूल करेंगे। लेकिन यदि अब वे पुलिस में इसकी शिकायत करते हैं तो मेरा उनसे कोई वास्ता नहीं होगा।”

धमकी पर उतरा उद्धव गुट, संजय राउत ने दिखाया सड़क का डर: गुवाहाटी से मुंबई कूच कर सकते हैं एकनाथ शिंदे, दिखाए शिवसेना के 38 MLA

महाराष्ट्र की सत्ता हाथ से निकलते देख मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का गुट अब धमकी पर उतर आया है। पार्टी सांसद संजय राउत ने कहा है कि हमें चुनौती देने वाले शिंदे समर्थकों को समझ आ जाना चाहिए कि शिवसैनिकों का अभी सड़क पर उतरना बाकी है। वहीं, शिंदे का दावा है कि उनके साथ शिवसेना के 38 विधायक हैं। इनकी तस्वीर भी गुवाहाटी के रेडिसन ब्लू होटल से सामने आई है। इसी होटल में शिंदे समर्थकों के साथ डेरा डाले हुए हैं। उनके समर्थक विधायकों की संख्या 50 के करीब बताई जाती है, जिनमें कुछ निर्दलीय हैं।

न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में राज्यसभा सांसद राउत ने कहा, “हमें चुनौती देने वाले एकनाथ शिंदे गुट को पता होना चाहिए कि शिवसैनिक अभी सड़क पर नहीं उतरे हैं। इस तरह की लड़ाई या तो कानूनी तरीके से लड़ी जाती है या सड़क पर। जरूरत पड़ी तो हमारे कार्यकर्ता सड़क पर उतरेंगे।”

इस बीच महाराष्ट्र विधानसभा के डिप्टी स्पीकर नरहरि झिरवाल ने अजय चौधरी को शिवसेना विधायक दल के नेता के तौर पर मान्यता दे दी है। उद्धव गुट ने बगावत के बाद शिंदे को इस पद से हटाकर चौधरी को नेता चुना था और इस संबंध में डिप्टी स्पीकर को पत्र भेजा था। इसके बाद गुवाहाटी में कैंप किए विधायकों ने शिंदे को अपना नेता चुनते हुए भी झिरवाल को पत्र भेजा था। इस पर 37 शिवसेना विधायकों के हस्ताक्षर थे जो दलबदल कानून के हिसाब से जरूरी है। इस पत्र में आम सहमति से एकनाथ शिंदे को शिवसेना विधायक दल का नेता और भारत गोगावले को व्हिप ​चुनने की जानकारी दी गई थी।

ऐसे में अब कयास लगाए जा रहे हैं कि शिंदे शायद मुंबई के लिए कूच करें और डिप्टी स्पीकर से मुलाकात करें। इससे पहले ​उद्धव गुट ने शिंदे समेत कुछ शिवसेना विधायकों को अयोग्य ठहराने को लेकर भी डिप्टी स्पीकर के पास याचिका दी थी। इसके जवाब में शिंदे ने कहा था, “12 विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की अर्जी देकर आप हमें डरा नहीं सकते, क्योंकि हम शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के असली शिवसेना और असली शिव सैनिक हैं। इसके अलावा, हम कानून भी जानते हैं। इसलिए हम इस तरह की धमकियों पर ध्यान नहीं देते। नंबर्स नहीं होने के बावजूद अवैध समूह बनाने के लिए हम आपके खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हैं।”