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पाकिस्तान में हिंदू महिलाओं के साथ अत्याचार जारी: बंदूक की नोक पर 2 नाबालिग बहनों से रेप, FIR करने में आनाकानी करती रही पुलिस

पाकिस्तान (Pakistan) में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर अत्याचार लगातार जारी है। गुरुवार (16 जून 2022) को खबर आई कि पड़ोसी इस्लामिक देश के पंजाब प्रांत में दो नाबालिग हिंदू बहनों के साथ बंदूक की नोक पर रेप किया गया। आरोपितों में से एक इलाके के प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक रखता है।

भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरुवार को ट्विटर पर इस क्राइम को लेकर DNA की एक रिपोर्ट शेयर की। उन्होंने ट्वीट किया, “पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार जारी है: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 2 हिंदू नाबालिग बहनों के साथ बंदूक की नोक पर बलात्कार किया गया। पाक पुलिस ने 3 दिन की देरी के बाद मामला दर्ज किया, क्योंकि कथित तौर पर इलाके के कुछ प्रभावशाली लोग पीड़ित परिवार के साथ मामले को सुलझाना चाहते थे।”

पुलिस अधिकारी इरशाद याकूब ने बताया कि बहावलनगर के फोर्ट अब्बास में रहने वाली 16 और 17 साल की दो बहनें पाँच जून की सुबह अपने घर से बाहर नजदीक के एक खेत में शौच के लिए गई थीं। वहाँ दो व्यक्तियों ने बंदूक दिखाकर उन्हें बंधक बना लिया और उनके साथ दुष्कर्म किया

अधिकारी ने बताया कि आरोपित की पहचान उमैर अशफाक और काशिफ अली के रूप में हुई है। दोनों आरोपितों ने नाबालिग बहनों के साथ रेप किया और मौके से फरार हो गए। पुलिस अधिकारी याकूब ने कहा कि लड़कियों का मेडिकल टेस्ट कराया गया, जिसमें पुष्टि हुई कि उनके साथ बलात्कार किया गया।

खबरों के मुताबिक, पुलिस ने घटना का तुरंत संज्ञान नहीं लिया और तीन दिन की देरी के बाद मामला दर्ज किया। एक आरोपित काशिफ अली का दबदबा और रसूख मामले में कार्रवाई करने में पुलिस की लापरवाही का कारण माना जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, काशिफ इलाके के एक प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक रखता है और उसका परिवार इस मामले को पीड़ित परिवार के साथ निजी तौर पर सुलझाना चाहता था और इसे अदालत में नहीं ले जाना चाहता था। यही कारण है कि पुलिस ने शुरू में आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज करने में देरी की।

हालाँकि, तीन दिन बाद लड़की के पिता की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने एक आरोपित उमर अशफाक को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरे आरोपित काशिफ अली ने अपने रसूख और दबदबे का इस्तेमाल करते हुए अग्रिम जमानत ले ली है। 

तालिबान के शासन में टीवी एंकर का ऐसा हाल, परिवार का पेट पालने के लिए फुटपाथ पर धंधा कर रहे पत्रकार मूसा मोहम्मदी: तस्वीरें वायरल

अफगानिस्तान में तालिबानी शासन आने के बाद से वहाँ के हालात पूरी तरह से बदल गए हैं। 10 महीने बाद भी वहाँ लोगों को गरीबी, बेरोजगारी और भुखमरी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। लाखों अफगानियों के सामने दो वक्त की रोटी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कुछ तस्वीरें इसका ताजा उदाहरण हैं। यह तस्वीरें अफगानिस्तान के एक पत्रकार की हैं, जो तालिबानी शासन में अब अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए स्ट्रीट फूड बेच रहे हैं। उनकी हालिया तस्वीरों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह अपने ही देश में किस तरह बद से बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

जानकारी के मुताबिक, इस पत्रकार का नाम मूसा मोहम्मदी (Musa Mohammadi) है। उन्होंने अफगानिस्तान के विभिन्न टीवी चैनलों में एंकर और बतौर रिपोर्टर कई वर्षों तक काम किया है। अब वह बेरोजगार हैं। उनके पास अपने परिवार को दो वक्त की रोटी खिलाने के लिए कोई भी आय का साधन नहीं है। इसलिए वह अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए स्ट्रीट फूड बेचते हैं।

उल्लेखनीय है कि तालिबान ने 15 अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर एक बार फिर काबिज होने के बाद पुरुषों और महिलाओं पर अलग-अलग प्रतिबंध लगाए हैं। महिलाओं को शिक्षा से वंचित करने के बाद तालिबान ने इस साल मार्च में अफगानिस्तान के पुरुषों के लिए नया फरमान जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि जो सरकारी कर्मचारी दाढ़ी नहीं रखेगा, उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा। यही नहीं तालिबान ने लड़कियों के स्कूल जाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।

गौरतलब है कि तालिबान अफगानिस्तान में अपने 1996 से 2001 के शासन में मानवाधिकारों के हनन के लिए जाना जाता है, लेकिन दूसरी बार सत्ता में आने के बाद उसने वादा किया था कि इस बार वह सख्त रूख नहीं अपनाएगा। हालाँकि, इसके बाद भी रूढ़ीवादी सोच वाले तालिबान द्वारा ऐसे फरमान जारी किए जा रहे हैं, जिससे अफगान के नागरिक बद से बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

दिल्ली में निहंगों ने डिलीवरी ब्वॉय के सीने में घोंप दिया खंजर, 20 मिनट तक रोड पर तड़पने के बाद तोड़ दिया दम

देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) के कृष्णा नगर इलाके में 2 निहंगों पर एक डिलीवरी बॉय की हत्या करने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि सिगरेट का धुआँ खुद पर आने के बाद शुरू हुआ विवाद आखिरकार हत्या तक पहुँच गया। मृतक का नाम सागर सिंह है और उसकी कृपाण मार कर हत्या किया जाना बताया जा रहा है। इस मामले में पुलिस ने एक निहंग को गिरफ्तार किया है, जबकि दूसरे की तलाश की जा रही है। घटना मंगलवार (14 जून 2022) रात की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक सागर सिंह एक किराए के मकान में कृष्णा पार्क गली नंबर 9 में रहता था। परिवार में सागर की पत्नी सतवंत कौर और 7 साल का एक बेटा है। मृतक डिलीवरी बॉय के तौर पर काम करके अपने परिवार को पाल रहा था।

पुलिस के मुताबिक, घटना की रात सागर एक ऑर्डर पर खाना लेने के लिए एक रेस्टोरेंट में गया था। इसी बीच वो सिगरेट पीने लगा। उसी रेस्टोरेंट के पास 2 निहंग पहले से खड़े थे। दोनों आरोपित वहाँ रोल खा रहे थे। उन्होंने सागर को सिगरेट पीने से टोका।

बताया जा रहा है कि इसी बात पर दोनों पक्षों में बहस हो गई। बाद में एक निहंग ने अपनी कृपाण निकाल कर सागर के सीने पर चला दी। घायल सागर वहाँ से भागने लगा, तब आरोपितों ने उसके चेहरे पर पत्थर से वार किया। सागर वहीं गिरकर तड़पने लगा। घटनास्थल पर सागर लगभग 15-20 मिनट तक तड़पता रहा, लेकिन उसकी मदद किसी ने नहीं की। कुछ देर बाद उधर से गुजर रहे एक अन्य डिलीवरी बॉय ने एम्बुलेंस बुलाकर सागर को अस्पताल भेजवाया, लेकिन तब तक सागर ने दम तोड़ दिया था।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक सागर की उम्र 29 साल थी। वह जोमैटो में काम करता था। उसके रिश्तेदार इन्दरदीप सिंह के मुताबिक, “सागर रात में अतिरिक्त पैसे बनाने और ट्रैफिक न होने के चलते डिलीवरी बॉय के तौर पर काम कर रहा था।” घटना के बाद पुलिस ने 22 वर्षीय हर्षदीप सिंह नाम के एक आरोपित निहंग को गिरफ्तार कर लिया है। हत्या में प्रयोग हुई कृपाण भी बरामद कर ली गई है। पुलिस दूसरे आरोपित की तलाश कर रही है।

PM मोदी को माँ की गाली, मिलने पर काट देने की बात: Video देखिए और तय करिए अग्निपथ का विरोध करते ये छात्र हैं? ये देशसेवा करेंगे?

केंद्र सरकार ने सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना की घोषणा की है। इसका कई राज्यों में हिंसक विरोध हो रहा है। हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित बिहार है। यहाँ कई ट्रेनों को आग के हवाले कर दिया गया है। उपमुख्यमंत्री रेणु देवी और बीजेपी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल के घर पर हमला किया गया है।

इस बीच सोशल मीडिया में कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिसमें इस योजना के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली दी जा रही है। उनकी हत्या करने की बात कही जा रही है। ऐसा ही एक वीडियो बिहार के मधुबनी जिले का बताया जा रहा है। इसे ऑर्गेनाइजर वीकली ने गुरुवार (16 जून 2022) को शेयर किया।

इस वीडियो में सफेद टी शर्ट और काली टोपी वाला एक लड़का प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहा है। वीडियो में प्रदर्शनकरियों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माँ की गाली दे रहे हैं।

फेसबुक पेज मिथिला आज तक पर यही समूह मधुबनी रेलवे स्टेशन पर भीड़ के साथ दिखाई दे रहा है। इन प्रदर्शनकारियों के हाथों में लाल और हरे रंग के झंडे हैं। कुछ के हाथों में डंडे भी दिखाई दे रहे हैं। इसी वीडियो के 1 मिनट 50वें सेकेंड के बाद एक युवक नेताओं को माँ की 2 बार गाली देते सुनाई दे रहा है। यहाँ भी भीड़ का नेतृत्व सफेद टी शर्ट और काली टोपी वाला ही युवक करता दिखाई दे रहा।

मधुबनी जिले में ही कथित प्रदर्शनकारियों के एक समूह NH- 57 को जाम कर दिया। इस वीडियो की शुरुआत में भी गालियाँ सुनाई दे रही हैं। साथ ही आने-जाने वाले लोगों से बदतमीजी की जा रही है।

मधुबनी जिले के ही संतोष कुमार यादव ने ऑन कैमरा नरेंद्र मोदी को माँ और बहन की गालियाँ दी। इसी के साथ उन्होंने कहा, “मोदी केंद्र में हिन्दू-मुस्लिम कर के जीत जाता है। अगर वो मेरे सामने आया उसको काट देंगे।”

बिहार के समस्तीपुर जिले के दलसिंह सराय स्टेशन पर भी PM मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग हुआ। इस वीडियो को राजद नेता ने फेसबुक पर शेयर किया है।

बिहार के ही एक अन्य वीडियो में रेलवे ट्रैक पर जमा कई कथित छात्र मोदी को माँ की गालियाँ देते दिख रहे हैं।

UP के अलीगढ़ जिले में एक ऐसे युवक को भी रोडवेज बस में तोड़फोड़ करते देखा गया जो पैरों की समस्या से चलने में दिक्कत मसहूस कर रहा था। तोड़फोड़ के बाद वह व्यक्ति भीड़ में शामिल हो गया।

बिहार में हिंसा के पीछे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राजद का हाथ होने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि इसमें आरजेडी के गुंडे भी सक्रिय हैं। इस आंदोलन में शामिल गैर-छात्रों की पहचान करना जरूरी है। युवाओं का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है।

देवरानी-जेठानी लड़ते-लड़ते नाले में गिरीं, बाल खींचे, लात-घूँसे चले: करोड़पति कुमावत परिवार की लड़ाई का Video वायरल

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो राजस्थान के अजमेर का बताया जा रहा है। इसमें एक ही परिवार की दो बहुओं को लड़ते हुए देखा जा सकता है। हैरान करने वाली बात यह है कि दोनों महिलाएँ करोड़पति घर से हैं और रिश्ते में देवरानी-जेठानी लगती हैं। देवरानी-जेठानी लड़ाई में इतनी मशगूल होती है कि वह लड़ते-लड़ते पास के नाले में जा गिरती है। हालाँकि, यहाँ भी उनकी लड़ाई जारी रहती है।

परिवार के अन्य सदस्यों ने इसमें शामिल होने की कोशिश की और ये तमाशा देख रहे वहाँ खड़े लोगों ने भी बीच-बचाव करने की कोशिश की। लेकिन आसपास की हर चीज से बेखबर दोनों महिलाएँ आपस में गाली-गलौज और मारपीट करती रहीं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना अजमेर के ब्यावर की है, जहाँ एक प्रमुख कारोबारी के परिवार में संपत्ति के मुद्दों पर दो भाइयों के बीच लड़ाई चल रही है। बुधवार (15 जून 2022) को दोनों भाइयों की पत्नियों में जमकर मारपीट हो गई। वे एक-दूसरे के बाल खींचने लगीं, मुट्ठियों और घूँसे से हमला किया और लात मारी। उनके परिवार के सदस्य भी उन्हें अलग करने की बजाय लड़ाई में शामिल हो गए।

वायरल हुई घटना के वीडियो में, तमाशबीन बनें कई लोग गड्ढे (नाले) के आसपास खड़े दिखाई दे रहे हैं। कोई वीडियो शूट करने में व्यस्त है तो कोई महिलाओं का हौसला बढ़ा रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि लड़ाई के दौरान तीसरी और चौथी महिला भी शामिल हो गई। लेकिन देवरानी जेठानी ने इन पर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बस अपनी लड़ाई जारी रखी। तभी अचानक एक शख्स ने नाले में छलांग लगा दी और 3 नंबर की महिला को गले से लगा लिया। जो भीड़ अब तक महिलाओं की लड़ाई को रोकने के लिए कुछ नहीं कर रही थी, अचानक एक्शन मोड में आ गई और उस आदमी पर हमला कर दिया। एक व्यक्ति ने उसे निंजा स्टाइल में नाले के बाहर से लात मारी, जबकि दूसरे ने उसे यह कहते हुए खींच लिया कि उसने एक महिला को मारने की हिम्मत कैसे की।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाएँ कुमावत परिवार से हैं। पेट्रोल पंप मालिक नरेंद्र कुमावत और उनके मृत भाई के परिवार के बीच संपत्ति का विवाद लंबे समय से चल रहा है। 15 जून को, मृतक भाई की विधवा संगीता कुमावत कथित तौर पर अपने मायके वालों के साथ पेट्रोल पंप पहुँची थी और नरेंद्र कुमावत के परिवार के सदस्यों के साथ लड़ाई शुरू कर दी थीं।

कहा जा रहा है कि नरेंद्र कुमावत की पत्नी चंदा और बहू शिखा ने संगीता को पीटना शुरू कर दिया था और लड़ते-झगड़ते महिलाएँ नाले में गिर गईं। वहीं दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ मारपीट, छेड़छाड़ व तोड़फोड़ की शिकायत दर्ज कराई है।

फेसबुक का फैक्टचेक पार्टनर, पर अपनी ही रिपोर्ट्स के फैक्ट चेक नहीं कर पाया USA टुडे: रिपोर्टर ने झूठी कहानियाँ गढ़ी, 23 रिपोर्ट डिलीट किए

खबरों की सत्यता के आधार पर न्यूज पब्लिश करने का दावा करने वाले अमेरिकी अखबार यूएसए टुडे (USA Today) अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। समाचार पत्र ने कहा कि एक आंतरिक जाँच के बाद उसे पता चला कि उसकी ब्रेकिंग न्यूज रिपोर्टर गैब्रिएला मिरांडा ने कई सारे फेक स्त्रोत और मनगढ़ंत इंटरव्यू का सहारा लेकर रिपोर्ट्स पब्लिश की थी। मामले के सामने आने के बाद कंपनी ने अपनी वेबसाइट से 23 आर्टिकल को डिलीट कर दिया है।

गैब्रिएला मिरांडा ने कई हफ्तों पहले ही वर्जीनिया स्थित अखबार से इस्तीफा दे दिया था। उन पर कथित तौर पर झूठे स्रोतों का फायदा उठाने का आरोप है। खास बात ये है कि USA टुडे फेसबुक (Facebook) का ‘फैक्ट-चेक पार्टनर’ भी है।

साल 2020 में USA टुडे ने अपने फैक्ट चेक नेटवर्क को बढ़ाने के लिए फेसबुक से हाथ मिलाने का ऐलान किया था। उस दौरान गैनेट के न्यूज लीडर और USA टुडे के पब्लिशर पेरेज वाड्सवर्थ ने कहा था, “बिना किसी तुलना के स्थानीय-से-राष्ट्रीय पहुँच वाले मीडिया संगठन के तौर पर हम लोगों को सच्ची सूचनाएँ प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को बहुत गंभीरता से लेते हैं। फैक्ट चेक USA टुडे और देश भर में गैनेट न्यूज़रूम में की जा रही पत्रकारिता का अभिन्न अंग है।”

उन्होंने ये भी कहा था, “हम ये मानते हैं कि सोशल मीडिया पर पब्लिश हो रही फेक इन्फॉर्मेशन एक बड़ा मुद्दा है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है। इसलिए फेक इन्फॉर्मेशन की पहचान करने के लिए फेसबुक के फैक्ट चेक कार्यक्रम में शामिल होना हमारे लिए एक स्वाभाविक कदम है। हमें फेसबुक के साथ साझेदारी करने पर गर्व है।”

हालाँकि, इतना लंबा भाषण देने के बाद भी फेसबुक का फैक्ट चेक पार्टनर USA टुडे अपनी ही न्यूज का फैक्ट चेक नहीं कर पाया। डिलीट किए गए आर्टिकल को लेकर USA टुडे ने एक लिस्ट भी जारी की है। इसके साथ ही उसने मिरांडा की स्टोरी को भी सामने रखा। बाद में चैनल ने ट्रेंडिंग कंटेंट और लोकप्रिय स्टोरीज पर फोकस करने के साथ अपने काम के व्यापक स्पेक्ट्रम को शामिल करने के लिए ऑडिट के दायरे को बढ़ाया।

USA टुडे की नोटिस

USA टुडे वेबसाइट पर जारी की गई नोटिस में लिखा है, “बाहरी सुधार का अनुरोध मिलने के बाद गैब्रिएला मिरांडा के रिपोर्टिंग वर्क का ऑडिट किया गया। ऑडिट से ये पता चला है कि रिपोर्ट में जिन व्यक्तियों का उल्लेख किया गया था, वो उस संगठन से जुड़े ही नहीं थे और मनगढ़ंत लगते थे। इनका वेरीफिकेशन नहीं किया जा सका। इसके अलावा कुछ स्टोरीज में ऐसे तथ्यों को शामिल किया गया था, जिनका श्रेय किसी और को दिया जाना चाहिए था।”

मिरांडा ने पूर्व में गेन्सविले टाइम्स के लिए काम किया, जहाँ उन्होंने शिक्षा और हिस्पैनिक मुद्दों को कवर किया। जॉर्जिया विश्वविद्यालय से वर्ष 2021 में ग्रेजुएशन करने वाली मिरांडा ने वहाँ एक स्टूडेंट मैगजीन रेड एंड ब्लैक के लिए काम किया था। न्यूज पब्लिशर ने फैक्ट चेक के मामले में सोर्स कंटेंट को वेरिफाई करने का वादा किया है।

गुरुवार (16 जून 2022) को USA टुडे ने इस मामले को लेकर चर्चा करने के लिए अपने कर्मचारियों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस की। USA टुडे के प्रधान संपादक निकोल कैरोल की अध्यक्षता में ये बैठक हुई। जाँच के बारे में जानकारी देने वाले एक व्यक्ति के अनुसार, USA टुडे ने पाया है कि मिरांडा ने इंटरव्यू टेप सहित अपने न्यूज कंटेंट नकली सबूत बनाकर इन्वेस्टिगेटरों को भी धोखा देने की कोशिश की।

USA टुडे में इसी तरह की घटना 2004 में भी हुई थी। उस दौरान USA टुडे ने पुलित्जर पुरस्कार की फाइनलिस्ट और लेखक जैक केली पर कहानियों को गढ़ने और दूसरी मैगजीन से स्टोरी चोरी करने का आरोप लगाया था। इसके बाद केली ने इस्तीफा दे दिया था और बाद में माफी माँगी थी।

अग्निवीर पर लगी आग को सपा नेता ने फेक न्यूज से भड़काया, फैक्ट्री ब्लास्ट के पीड़ितों को आत्मदाह करने वाला बताया

समाजवादी पार्टी अग्निपथ योजना को लेकर जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के कारण उत्पन्न अशांति और अराजकता की आग में घी डालने का काम कर रही है। इसी कड़ी में झूठ फैलाते हुए गुरुवार (16 जून, 2022) की रात, समाजवादी पार्टी (सपा) की नेता रचना सिंह ने एक फैक्ट्री विस्फोट में घायल हुए पीड़ितों की तस्वीर को अग्निपथ योजना के विरोध प्रदर्शन में आत्मदाह करने वाले छात्रों (अग्निवीर) के नाम पर जारी कर दिया।

उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, “मैं सेना में भर्ती होने के इच्छुक और तैयारी कर रहे उन छात्रों से अनुरोध कर रही हूँ कि वे आत्महत्या न करें। (मोदी) सरकार को अपना फैसला वापस लेना होगा और यह युवाओं की जीत होगी। उम्मीद मत खोना।”

उसने खून से लथपथ, जले हुए युवकों की तस्वीरें पोस्ट की थीं और यह जताने की कोशिश थी कि सेना के भर्ती अभियान से निराश होने के बाद इन छात्रों ने खुदकुशी का प्रयास किया है। बता दें कि इस विवादित ट्वीट को 249 बार शेयर किया गया और 787 यूजर्स ने इसे लाइक किया जिसके बाद झूठ पकड़े जाने पर सपा नेता ने इसे डिलीट कर दिया।

सत्य क्या है?

करीब से पड़ताल करने पर ऑपइंडिया ने पाया कि दूसरी तस्वीर पर टाइम स्टैंप ‘2022/6/4 14:44’ लिखा है यानी यह तस्वीर इस साल 4 जून को दोपहर 2:44 बजे ली गई थी।

यह देखते हुए कि भारतीय सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना 14 जून, 2022 को शुरू की गई थी, यह स्पष्ट हो गया कि ये तस्वीरें इस विरोध प्रदर्शन की नहीं हो सकती हैं।

रचना सिंह द्वारा शेयर की तस्वीरों में से दूसरी तस्वीर

एक लोकप्रिय ट्विटर यूजर (@Befitting Facts) के अनुसार, उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में एक रासायनिक कारखाने में विस्फोट के दौरान घायल हुए कर्मचारियों की ये तस्वीरें हैं। न कि आत्महत्या की।

7 जून, 2022 को @TheUpNews नाम के एक ट्विटर पोस्ट को देखें, “हापुड़ में एक रासायनिक कारखाने में विस्फोट के बाद एक वीडियो सामने आया है.. घटना से परेशान करने वाली तस्वीरें देखें।”

वीडियो में वही युवक दिखाई दे रहे हैं जिन्हें पहले घायल और झुलसे दिखाया गया था। ऐसे में समाजवादी पार्टी की नेता रचना सिंह द्वारा किया गया दावा न सिर्फ झूठ है बल्कि माहौल ख़राब करने की एक राजनीतिक चाल जैसी नजर आ रही है।

ऐसे समय में, जब छात्रों ने विरोध की आड़ में हिंसा और तोड़फोड़ की है, समाजवादी पार्टी राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे अवसर को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। उसकी ऐसी हरकत एक बार फिर पकड़ी गई हैं।

कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग रोकी तो अच्छा, नहीं तो एक्शन होगा: ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी में हिंदू छात्रों को मुस्लिम सोसायटी की धमकी

हिंदू होने की वजह से ऑस्ट्रेलिया (Australia) के एनएसडब्ल्यू विश्वविद्यालय (University of NSW- UNSW) में भारतीय छात्रों को प्रताड़ित करने की घटना सामने आई है। पिछले दो सप्ताहों से उत्पीड़न से प्रताड़ना झेल रहे भारतीय छात्रों ने विश्वविद्यालय से काउंसलिंग की माँग की है।

दरअसल, UNSW हिंदू सोसाइटी के सदस्यों ने कश्मीरी हिंदुओं को उत्पीड़न और पलायन पर बनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ की स्क्रीनिंग का आयोजन किया था। इसके खिलाफ UNSW मुस्लिम स्टूडेंट्स एसोसिएशन (UNSWMSA) ने छात्रों ने उन्हें धमकाया था। इसके बाद से वे लगातार हिंदू छात्रों को परेशान कर रहे है।

नाम नहीं छापने की शर्त पर एक कश्मीरी हिंदू छात्र ने ऑस्ट्रेलिया टुडे को बताया कि साल 1990 में जब कश्मीर में हिंदुओं का नरसंहार और पलायन हुआ था, तब उनके दादा-दादी और माता-पिता ने कैसा महसूस किया होगा। छात्र का कहना है कि उस घटना को सुनकर वह आज भी रात को डरकर जाग जाता है। छात्र ने बताया कि उस दौरान उसकी माँ के दो रिश्तेदारों की हत्या कर दी गई थी। वह वहाँ की दर्दनाक कहानियों को सुन-सुनकर बड़ा हुआ है।

कश्मीर में हिंदुओं के नरसंहार के पीछे की सच्चाई पर चर्चा के लिए UNSW हिंदू सोसाइटी ने 9 जून को विश्वविद्यालय के कैंपस के कोलंबो थिएटर में फिल्म की स्क्रीनिंग कराने के लिए मतदान किया था। सोसाइटी ने इसे अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा भी किया था।

इसके बाद मुस्लिम सोसाइटी ने इसका विरोध किया। हिंदू सोसाइटी ने इसका समाधान निकालने की कोशिश की और दोनों सोसाइटी ने 7 जून को इस संबंध में जूम पर मीटिंग की। इस मीटिंग में फिल्म की स्क्रीनिंग करने पर मुस्लिम सोसाइटी ने हिंदुओं को धमकी दी, जिसे रिकॉर्ड कर लिया गया है।

मीटिंग के दौरान UNSWMSA के प्रवक्ता उस्मान महमूद ने हिंदू छात्रों को डराने के लिए धार्मिक नेताओं, पत्रकारों और राजनेताओं का नाम लिया। इस दौरान हिंदुओं को फिल्म की स्क्रीनिंग को रोकने के लिए धमकी भी दी गई।

महमूद ने धमकाते हुए कहा, अगर आप लोग (हिंदू) इस फिल्म की स्क्रीनिंग रोकते हो तो बहुत अच्छा है और मुस्लिम सोसाइटी एवं दुनिया के मुस्लिम समाज की ओर से इसकी सराहना करते हैं। अगर नहीं माने तो इसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा और यह एक्शन कोई प्यारा सा एक्शन नहीं होगा।”

महमूद ने डराने के लिए ऑस्ट्रेलिया के ग्रीन्स पार्टी के सीनेटर महरीन फारुकी, पत्रकार मुस्तफा रचवानी, ऑस्ट्रेलिया के ग्रैंड मुफ्ती अबू मोहम्मद, एबीसी न्यूज (एशिया पैसिफिक के चीफ ऑफ स्टाफ) के मोसिकी आचार्य, ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय इमाम परिषद के शेख विसम, यूनाइटेड मुस्लिम एसोसिएशन के शेख उमर अल-ग़ज़ का नाम लिया। उसने कहा कि वे सब उसकी मदद करेंगे।

मीटिंग के दौरान हिंदूफोबिक टिप्पणी करते हुए महमूद ने पूछा कि कश्मीर में कितने हिंदुओं को प्रताड़ित किया गया था और कितने हिंदू मारे गए थे। उसने बार-बार यह सवाल किया। वहीं, इस घटना को लेकर विश्वविद्यालय ने कहा कि उसके कैंपस में धार्मिक उत्पीड़न अस्वीकार्य है।

CM अशोक गहलोत के भाई के घर पर CBI की रेड: फर्टिलाइजर घोटाले से जुड़ा है मामला, किसानों के नाम पर खरीदी कर कंपनियों को बेचने का आरोप

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत (Agrasen Gehlot) के जोधपुर स्थित आवास पर छापेमारी की है। ये मामला फर्टिलाइजर स्कैम से जुड़ा हुआ है। अग्रसेन गहलोत पर आरोप है कि 2007-09 में यूपीए शासनकाल के दौरान उन्होंने सब्सिडी वाले फर्टिलाइजर का एक्सपोर्ट किया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीबीआई की टीम गहलोत के भाई अग्रसेन के ठिकानों पर शुक्रवार (17 जून 2022) की सुबह पहुँची, उस समय वे घर पर ही थे। सीबीआई की टीम में 5 अधिकारी दिल्ली और 5 अधिकारी जोधपुर से हैं। इस मामले की जाँच ED में भी चल रही है। कस्टम विभाग ने अग्रसेन की कंपनी पर करीब 5.46 करोड़ रुपए की पेनाल्टी भी लगाई थी।

क्या है मामला

वर्ष 2020 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने फर्टिलाइजर घोटाले में अशोक गहलोत के भाई के ठिकानों पर छापा मारा था। इस दौरान राजस्थान में छह स्थानों पर छापे मारे गए थे। जिनमें जोधपुर भी शामिल था। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में दो स्थान, गुजरात में चार और दिल्ली में एक जगह छापा मारा गया था।

ईडी के अफसरों के मुताबिक, अग्रसेन गहलोत की कंपनी अनुपम कृषि, म्यूरियेट ऑफ पोटाश (एमओपी) फर्टिलाइजर के एक्सपोर्ट पर बैन होने के बावजूद उसके निर्यात में शामिल थी। एमओपी को इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) इम्पोर्ट कर किसानों को सब्सिडी पर बेचती है।

अग्रसेन गहलोत IPL के ऑथराइज्ड डीलर थे। उनकी कंपनी ने 2007 से 2009 के बीच सब्सिडाइज रेट पर एमओपी खरीदा, लेकिन उसे किसानों को बेचने की बजाए दूसरी कंपनियों को बेच दिया। उन कंपनियों ने एमओपी को इंडस्ट्रियल सॉल्ट के नाम पर मलेशिया और सिंगापुर पहुँचा दिया।

इस घोटाले के बाद भाजपा ने ऑपइंडिया की ख़बर का हवाला देते हुए कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा था। प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि जहाँ एक तरफ कॉन्ग्रेस किसानों की बातें करती फिरती है, वहीं दूसरी तरफ उसके नेता किसानों की सब्सिडी खा जाते हैं। उन्होंने इसे सब्सिडी की चोरी करार दिया था। उन्होंने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की भी आशंका जताई थी।

‘हिंसा के पीछे RJD के गुंडे’: बिहार में फिर से ट्रेन फूँके, डिप्टी CM-BJP प्रदेश अध्यक्ष के घर पर हमला; अग्निपथ को लेकर कई राज्यों में बवाल जारी

सेना में भर्ती के लिए लाई गई केंद्र सरकार की नई योजना ‘अग्निपथ’ के खिलाफ शुक्रवार (17 जून 2022) को भी कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन जारी है। इन राज्यों में बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, मध्‍य प्रदेश, हिमाचल, जम्‍मू-कश्‍मीर, राजस्‍थान, हरियाणा और दिल्‍ली -एनसीआर शामिल हैं।

सबसे ज्यादा हिंसा बिहार में देखी जा रही है। शुक्रवार सुबह बिहिया स्‍टेशन पर जमकर पत्‍थरबाजी हुई है। उपद्रव‍ियों ने स्‍टोर रूम में आग लगा दी। लखीसराय में विक्रमशि‍ला एक्‍सप्रेस और समस्‍तीपुर में लोहित एक्‍सप्रेस की बोगियों में आग लगा दी गई है। बेतिया में बिहार की उपमुख्यमंत्री रेणु देवी के आवास पर हमला किया गया। बेतिया में बीजेपी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल के घर पर भी हमला किया गया है।

बिहार में हिंसा के पीछे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राजद का हाथ होने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि इसमें आरजेडी के गुंडे भी सक्रिय हैं। इस आंदोलन में शामिल गैर-छात्रों की पहचान करना जरूरी है। युवाओं का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है।

बिहार संपर्क क्रांति में भी लगाई आग

समस्तीपुर में दिल्ली से दरभंगा जा रही बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में तोड़फोड़ करने के साथ ही पाँच बोगियों में आग लगा दी गई। समस्तीपुर स्टेशन पहुँचने के पूर्व आउटर सिग्नल पर ट्रेन रुकी थी। इसी दौरान प्रदर्शकारियों की एक टोली पहुँची और ट्रेन की बोगियों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। 

औरंगाबाद में NH जाम

औरंगाबाद में भी प्रदर्शनकारी सड़क पर उतर गए हैं। नेशनल हाइवे को जाम कर दिया है। जाम की वजह से हाइवे पर गाड़ियों की लंबी कतार लग गई है। प्रदर्शनकारियों ने टायर जला कर आवागमन बाधित कर दिया है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय-गया रेलखंड पर जाखिम रेलवे स्टेशन के पास भी जाम लगाया गया हैै। ट्रैक पर बैठे युवकों ने रेल परिचालन रोक दिया है।

बिहिया स्‍टेशन के टिकट काउंटर में लगाई आग

प्रदर्शनकारियों ने बिहिया स्‍टेशन के टिकट काउंटर में आग लगा दी। इस दौरान कुछ पत्रकारों के मोबाइल छीन कर तोड़ दिए। एक पत्रकार की पिटाई भी कर दी। आरा- बक्सर रेलखंड पर भोजपुर के बिहिया स्टेशन पर शुक्रवार की सुबह से बवाल हो रहा है। प्रदर्शनकारियों ने रेल, सिविल पुलिस और आरपीएफ पर पथराव किया है। स्टोर रूम में आग लगा दी।

मोहिउद्दीननगर स्टेशन पर लो‍हित एक्‍सप्रेस में लगाई आग

‘शुक्रवार सुबह करीब सात बजे बरौनी हाजीपुर रेल खंड के मोहिउद्दीननगर स्टेशन पर आंदोलनकारियों ने लोहित एक्सप्रेस की चार बोगी में आग लगा दी। सूचना पर जैसे ही स्थानीय पुलिस पहुँची, उसकी गाड़ी को भी तोड़फोड़ कर क्षतिग्रस्त कर दिया। लखीसराय स्‍टेशन पर विक्रमशि‍ला एक्‍सप्रेस की 4-5 बोगियों में आग लगा दी गई। पुलिस का भी फोन छीन लिया।

जल्द शुरू होगी बहाली: राजनाथ सिंह

इस बीच केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि अग्निवीर स्कीम युवाओं को एक बड़ा मौका देगी। पिछले दो सालों में कोरोना के चलते युवाओं को भर्ती का मौका नहीं मिला था। इसीलिए पीएम मोदी के निर्देश पर सरकार ने आयु सीमा में दो साल की छूट दी है। कुछ ही समय में भर्ती प्रक्रिया शुरू होने वाली है। सभी युवाओं से अपील है कि वे इसके लिए तैयारी करें और पूरा लाभ उठाएँ।