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तेलंगाना में 3 दिनों से धरने पर बैठे हैं राजीव गाँधी यूनिवर्सिटी ऑफ नॉलेज एंड टेक्नोलॉजी के हजारों छात्र, अग्निपथ के हिंसक प्रदर्शनों के कारण दबी आवाज, ये है मामला

केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के खिलाफ देश के कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। तेलंगाना, यूपी, बिहार, दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान में इस योजना का जबरदस्त विरोध किया जा रहा है। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। वहीं, इस हिंसा और हुड़दंग के बीच तेलंगाना के IIIT बसरा के छात्रों के प्रदर्शन पर किसी भी मेन स्ट्रीम मीडिया की नजर नहीं गई। ये छात्र अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए लगातार 3 दिनों से तेलंगाना सरकार के विरोध में सड़कों पर हैं, लेकिन किसी भी मेन स्ट्रीम मीडिया ने इस खबर को दिखाना जरूरी नहीं समझा। इससे जुड़ी आपको ​केवल एक या दो खबरें ही पोर्टल पर दिखाई देंगी, जबकि अग्निपथ योजना के विरोध में सैकड़ों खबरें।

दरअसल, तेलंगाना में राजीव गाँधी यूनिवर्सिटी ऑफ नॉलेज एंड टेक्नोलॉजी (RGUKT) के छात्र बुधवार (15 जून 2022) से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। निर्मल जिले के बसरा में स्थित अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT Basara) में हजारों छात्र भोजन की खराब गुणवत्ता, बुनियादी सुविधाओं में सुधार और एक नियमित कुलपति की नियुक्ति की माँगों को लेकर बिल्डिंग के मेन गेट पर धरना दे रहे हैं। ये छात्र तेलंगाना सरकार से केवल जरूरी सुविधाओं की माँग कर रहे हैं, इसके बावजूद इनकी अनदेखी की जा रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेलंगाना में जिस राजीव गाँधी यूनिवर्सिटी ऑफ नॉलेज टेक्नोलॉजी में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। उसे IIIT बसरा के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ लगातार तीसरे दिन हजारों छात्र अच्छे भोजन, लैब और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं की माँग को लेकर हड़ताल पर हैं। वे खराब भोजन की गुणवत्ता का विरोध कर रहे हैं। वे राज्य सरकार से माँग कर रहे हैं कि बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ एक स्थायी कुलपति की नियुक्ति पर ध्यान दिया जाए।

छात्रों ने यह भी अनुरोध किया कि मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव और सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री के टी रामा राव आरजीयूकेटी आएँ और देखें उन्हें किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई छात्रों ने हॉस्टल के खाने में छोटे कीड़े और मेंढक देखे जाने का भी दावा किया है। छात्रों का कहना है कि उन्हें हॉस्टल में लैपटॉप, ड्रेस, गद्दे, पंखे और अन्य सुविधाओं के बिना ही रहना पड़ रहा है।

राजीव गाँधी यूनिवर्सिटी ऑफ नॉलेज एंड टेक्नोलॉजी

आरजीयूकेटी या आईआईआईटी बसरा आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के शासन के दौरान 2008 में एपी में स्थापित तीन आईआईआईटी में से एक है। 2 जून 2014 को आंध्र से अलग होने के बाद वर्तमान में यह तेलंगाना का एकमात्र आईआईआईटी है। यह उत्तर तेलंगाना के निर्मल जिले के बसरा में स्थित है।

नूपुर शर्मा की तलाश में 4 दिन से दिल्ली की खाक छान रही मुंबई पुलिस, पैगम्बर मुहम्मद विवाद में पर्याप्त सबूत होने का दावा

पैगंबर मुहम्मद (Prophet Muhammad) पर कथित टिप्पणी को लेकर खड़े हुए विवाद के बीच भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) को गिरफ्तार करने के लिए मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने दिल्ली में डेरा डाल रखा है। महाराष्ट्र गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि मुंबई पुलिस ने पैगंबर मुहम्मद पर विवादित टिप्पणी के मामले में शर्मा को गिरफ्तार करने के लिए ‘पर्याप्त सबूत’ हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुंबई पुलिस बीते चार दिनों से नूपुर शर्मा को ढूँढ रही है, लेकिन अब तक उसे सफलता नहीं मिली है। मुंबई पुलिस के पाइधोनी पुलिस स्टेशन ने नूपुर शर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है और गृह विभाग के सूत्रों ने कहा कि पुलिस के पास शर्मा को गिरफ्तार करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। मुंबई पुलिस के अलावा, नूपुर शर्मा के खिलाफ ठाणे पुलिस कमिश्नरेट में भी केस दर्ज है।

इस बीच मामले में महाराष्ट्र के गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल ने दिल्ली पुलिस पर ही सवाल उठा दिया है। उन्होंने दिल्ली पुलिस पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है। पाटिल ने कहा, “यह सच है। महाराष्ट्र पुलिस की कोशिशें जारी हैं और दिल्ली पुलिस को भी सहयोग करना चाहिए।”

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि भाजपा से निलंबित चल रहीं नूपुर शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने एक टीवी डिबेट के दौरान कथित तौर पर पैगंबर मुहम्मद पर एक टिप्पणी की थी। इसी को लेकर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने उनके खिलाफ केस दर्ज कराए। महाराष्ट्र में शर्मा के खिलाफ कई सारे केस दर्ज किए गए थे। इस मामले में उन्हें महाराष्ट्र के भिवंडी पुलिस स्टेशन ने नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया था। उन्हें 13 जून को ही पूछताछ के लिए पेश होने को कहा गया था। हालाँकि, शर्मा ने पेश होने के लिए समय माँगा था। इतना ही नहीं नूपुर शर्मा को महाराष्ट्र पुलिस के अलावा कोलकाता पुलिस ने भी 20 जून को पूछताछ के लिए तलब किया है।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी दिल्ली के गंगा राम अस्पताल में हुईं भर्ती, साँस की नली में फंगल इन्फेक्शन की शिकायत, 23 जून को ED के सामने होना है पेश

हाल ही में कोरोना संक्रमित पाई गईं कॉन्ग्रेस (Congress) अध्यक्ष सोनिया गाँधी (Sonia Gandhi) का नई दिल्ली के गंगा राम अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। कथित तौर पर पता चला है कि उन्हें लोवर रेस्परेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (साँस की नली में संक्रमण) हुआ है। कॉन्ग्रेस पार्टी के मुताबिक, अस्पताल में उनकी जाँच और इलाज किया जा रहा है।

अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव जयराम रमेश (Jayram Ramesh) के अनुसार, हाल ही में कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद सोनिया गाँधी के नाक से खून बहने लगा था। इसके 12 जून को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जयराम रमेश ने कहा, “उन्हें तुरंत इलाज के लिए ले जाया गया और कल सुबह (गुरुवार) को इलाज से जुड़ी एक प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।” पार्टी के नए महासचिव, संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि अस्पताल में भर्ती होने के दौरान उनके लोवर रेस्पिरेटरी रूट में फंगल इन्फेक्शन का पता चला था। उन्होंने आगे कहा, “मौजूदा वक्त में उनका इलाज पोस्ट-कोविड लक्षणों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। लगातार उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है।”

गौरतलब है कि नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोनिया गाँधी को 23 जून को तलब किया है। उन्हें समन जारी किया गया है। वहीं जाँच एजेंसी उनके बेटे और पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी से पहले से ही पूछताछ कर रही है। सोमवार को उनकी अगली सुनवाई की उम्मीद है। हालाँकि, जब से एजेंसी ने सोनिया-राहुल को समन जारी किया है, तभी से कॉन्ग्रेसी नेता लगातार केंद्र सरकार पर ईडी के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं।

राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) से चल रही ईडी की पूछताछ के विरोध में कॉन्ग्रेसी लगातार हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं। कई राज्यों में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के विभिन्न कार्यालयों के सामने विरोध प्रदर्शन किया। इसी क्रम में तेलंगाना के हैदराबाद में कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मंत्री रेणुका चौधरी ने गुंडागर्दी दिखाते हुए एक पुलिस उप-निरीक्षक का कालर भी पकड़ लिया था। मामले में हैदराबाद पुलिस ने तेलंगाना प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के कई नेताओं को कस्टडी में भी लिया था।

बता दें कि ईडी ने नेशनल हेराल्ड से जुड़े मामले में पूछताछ के लिए सोनिया गाँधी को 8 जून को पेश होने के लिए नोटिस भेजा था। लेकिन कोरोना संक्रमित होने के कारण अब उन्हें 23 जून को ईडी के सामने पेश होना है।

स्कूली बच्चों की बस पर पथराव, पुलिस चौकी फूँकी… अग्निपथ के विरोध में लूट-हिंसा-आगजनी: 200 ट्रेनें प्रभावित, 18 जून को बिहार बंद का ऐलान

सेना में भर्ती के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित अग्निपथ योजना के विरोध में शुक्रवार (17 जून 2022) को भी देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हुए। ट्रेनों में आग लगाई गई। लूट की घटनाओं को अंजाम दिया गया। तेलंगाना में पुलिस फायरिंग में एक की मौत हो गई। इस बीच 18 जून को इस योजना के विरोध में बिहार बंद का ऐलान किया गया है। राजद और वामदलों ने इसके समर्थन की घोषणा की है।

बिहार में सबसे अधिक हिंसा

हिंसा और विरोध प्रदर्शन से सबसे अधिक प्रभावित बिहार रहा है। यहाँ छपरा, मधुबनी, लखीसराय, आरा, समस्तीपुर और बक्सर समेत कुल 25 जिलों में तनाव है। अब तक 11 ट्रेनें जलाए जाने की खबर है। जिलों में सरकारी सम्पत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया। लखीसराय में ट्रेन को आग के हवाले कर दिया गया। बिहिया में रेल ट्रैक अवरुद्ध कर दिया गया। आरा स्टेशन पर भी तोड़फोड़ हुई। मधुबनी में सड़क मार्ग अवरुद्ध करने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माँ की गालियाँ देते हुए मिलने पर काट देने की धमकी दी गई। दरभंगा में स्कूली छात्रों से भरी एक बस पर पथराव किया गया।

सासाराम, नवादा और मधेपुरा में भाजपा कार्यालयों पर हमला किया गया है। हिंसक भीड़ ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल और उप मुख्यमंत्री रेणु जायसवाल के घर पर हमला किया। बिहार के ADG लॉ एन्ड आर्डर संजय सिंह के मुताबिक अब तक 2 दर्जन से अधिक FIR दर्ज कर 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। FIR में 1 हजार से अधिक अज्ञात उपद्रवी भी शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश में भी कई स्थानों पर हिंसा

उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हिंसा हुई। इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित जिला अलीगढ़ रहा। यहाँ जट्टारी पुलिस चौकी को हिंसक प्रदर्शनकारियों ने जला दिया। आगरा-नोएडा यमुना एक्सप्रेसवे पर सरकारी बसों में तोड़फोड़ की।

बलिया जिले के रेलवे स्टेशन पर तोड़फोड़ करते हुए एक ट्रेन को आग लगा दी गई। UP के ADG कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार के मुताबिक, “प्रदेश में कुल 17 स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन हुआ। बलिया और अलीगढ़ में आगजनी हुई है। छात्रों को कुछ लोगों द्वारा गलत जानकारी देकर भड़काया गया है। सभी बच्चों को ग्राम प्रधान और अन्य सरकारी अधिकारीयों के साथ समझाने के प्रयास जारी हैं। कुछ स्थानों पर अभी भी प्रदर्शन चल रहा है जहाँ पर्याप्त पुलिस बल मौजूद है।”

तेलंगाना में एक की मौत

तेलंगाना में 1 व्यक्ति की मौत हो गई है। हैदराबाद से सटे सिकंदराबाद में ट्रेन में आग लगा दी गई। पुलिसकर्मियों पर पथराव किया गया। हिंसा काबू करने के लिए पुलिस ने 17 राउंड फायर किए। इस फायरिंग में 1 व्यक्ति की मौत हो गई है। कुल 13 लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में 2 की हालत गंभीर है।

हरियाणा में इंटरनेट बंद

हरियाणा के कई जिलों में इंटरनेट सेवाएँ रोक दी गई हैं। पलवल में पुलिस थाने पर हमला किया गया। वहाँ धारा 144 लागू की गई है। गुरुग्राम और फरीदाबाद में वाहनों में तोड़फोड़ की गई है। रेवाड़ी में ट्रैफिक पुलिस की लाइटों को तोडा गया है तो लोहारू में भीड़ ने सकड़ों पर उतर कर मार्च किया।

200 ट्रेने प्रभावित, 35 रद्द

रेल मंत्रालय द्वारा जारी आँकड़ों के मुताबिक अग्निपथ विरोधी हिंसक प्रदर्शनों से देश भर में 200 ट्रेनें प्रभावित हुई हैं। 35 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है।

झारखंड के CM हेमंत सोरेन को राहत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, खुद को ही खनन पट्टा देने और मनी लॉन्ड्रिंग की हाईकोर्ट में जारी रहेगी सुनवाई

घोटालों और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में घिरी झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार (Jharkhand CM Hemant Soren) को सुप्रीम कोर्ट से करारा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (17 जून 2022) को झारखंड हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री सोरेन के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग, गबन और खनन पट्टे में अनियमितताओं से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से रोक लगाने से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस हिमा कोहली की खंडपीठ झारखंड उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सोरेन के खिलाफ त्वरित सुनवाई करने से रोक लगाने का आग्रह किया गया था।

झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली एकल पीठ को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनरेगा घोटाले से जुड़ा सीलबंद रिपोर्ट पेश किया था। वहीं, हाईकोर्ट ने सीबीआई को एक मामले की जाँच का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय ने शुरू में सीलबंद कवर रिपोर्ट की स्वीकृति के लिए राज्य की आपत्ति को खारिज कर दिया था।

बता देें कि हेमंत सोरेन पर आरोप है कि उन्होंने राँची के अनगड़ा में खनन पट्टे के लिए आवेदन किया और अपने ही विभाग के द्वारा पर्यावरण संबंधी मंजूरी भी दे दी और अंत में खुद को खनन पट्टा आवंटित भी कर दिया।

इसके अलावा हेमंत सोरेन पर अपने रिश्तेदारों और करीबी लोगों के जरिए शेल कंपनियों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप है। इस मामले में हेमंत सोरेन के भाई एवं कई अन्य करीबी जाँच के घेरे में हैं। इसके अलावा, मनरेगा घोटाले में भी हेमंत सोरेन का नाम है। ED सोरेन के कई नजदीकी लोगों के यहाँ छापेमारी कर चुकी है।

बता दें कि खनन लीज और शेल कंपनियों में निवेश को लेकर हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार (17 जून) को सुनवाई हुई। इस मामले में अब अगली सुनवाई 23 जून को होगी। यह सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाएगी।

झारखंड सरकार ने इन दोनों मामलों से संबंधित याचिकाओं को सुनवाई योग्य नहीं माना था और कहा था कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। इसलिए पर हाईकोर्ट की त्वरित सुनवाई से रोक लगाई जाए। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया।

2 दिन में ‘अग्निपथ’ का नोटिफिकेशन, दिसंबर से ट्रेनिंग-2023 में ज्वाइनिंग: हिंसा-आगजनी के बीच आर्मी चीफ मनोज पांडे ने ‘अग्निवीर’ पर किया ऐलान

देश में सैन्य भर्ती के लिए भारत सरकार द्वारा लाई गई ‘अग्निपथ योजना’ को लेकर मचे बवाल के बीच सेना प्रमुख मनोज पांडे ने बड़ा ऐलान किया है। सेना प्रमुख मनोज पांडे ने शुक्रवार (17 जून 2022) को घोषणा की कि पहले ‘अग्निवीरों’ की ट्रेनिंग इसी साल दिसंबर से शुरू होगी और ट्रेनिंग के बाद इन्हें ज्वाइनिंग 2023 के मध्य तक दे दी जाएगी।

हालाँकि, केंद्र सरकार ने अभी तक अग्निपथ योजना के शुरू होने की आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं किया है। लेकिन आर्मी चीफ ने आज (शुक्रवार) कहा, “भर्ती प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने जा रही है। अगले दो दिनों के भीतर आधिकारिक वेबसाइट पर एक नोटिफिकेशन जारी की जाएगी। उसके बाद सेना भर्ती संगठन इसके लिए रजिस्ट्रेशन और रैली के डिटेल कार्यक्रम को जारी करेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “जहाँ तक ​​भर्ती प्रशिक्षण केंद्रों पर जाने वाले अग्निवीरों का सवाल है, केंद्रों पर इस दिसंबर (2022) में पहले अग्निवीरों का प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा। सक्रिय सेवा 2023 के मध्य में शुरू होगी।”

रिपोर्ट के मुताबिक, सेना भर्ती की नोटिफिकेशन सेना की वेबसाइट http://joinindianarmy.nic.in पर जारी की जाएगी। इसके साथ ही सरकार की इस योजना के हो रहे विरोध को लेकर आर्मी चीफ ने कहा कि युवाओं को इसकी सही जानकारी ही नहीं है। एक बार इसमें शामिल होने के बाद वो इसे समझेंगे और विरोध नहीं करेंगे।

उल्लेखनीय है कि कोरोना संकट के चलते भारतीय सेना की भर्ती बीते दो साल से रुकी हुई थी। 2019-2020 में सेना ने जवानों की भर्ती की और उसके बाद से कोई एंट्री नहीं हुई है। दूसरी ओर भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना दोनों ने क्रमशः पिछले दो वर्षों में भर्ती की थी।

क्या है अग्निपथ योजना

गौरतलब है कि अग्निपथ योजना भारत सरकार की तीन सेनाओं में भर्ती वाली योजना है। इसके तहत प्रशिक्षण समेत कुल सेवा अवधि 4 वर्षों की होगी। हर एक बैच के 25% ‘अग्निवीरों’ को भारतीय सेना के ‘रेगुलर कैडर’ के लिए चुना जाएगा। उन्हें पहले वर्ष में 4.76 लाख रुपए का सालाना वेतन मिलेगा, जो अंतिम वर्ष में बढ़ कर 6.92 लाख रुपए हो जाएगा।

रिटायर होने के बाद उन्हें ब्याज सहित 11.71 लाख रुपए का सेवा निधि पैकेज भी दिया जाएगा, जिस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। साथ ही उन्हें 48 लाख रुपए के बीमा का लाभ भी दिया जाएगा। सेवा पूरी करने के बाद उन्हें ‘अग्निवीर कौशल प्रमाण पत्र’ मिलेगा। सेवा पूरी करने के बाद उनकी अगली नौकरी की तलाश में भी मदद की जाएगी।

पाकिस्तानी मौलाना ने नुपूर शर्मा पर बवाल का अमेरिका को बताया जिम्मेदार, कहा- अरब उसका गुलाम: बायडेन प्रशासन ने BJP के एक्शन को सराहा

पैगंबर मुहम्मद को लेकर जारी विवाद के बीच गुरुवार (16 जून 2022) को अमेरिका ने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल के बयान की निंदा की। इस विवाद से बचने के लिए अमेरिका ने भाजपा द्वारा लिए गए एक्शन का भी समर्थन किया है।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने 16 जून को डेली न्यूज ब्रीफिंग में कहा, “हम भाजपा के दो पदाधिकारियों द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों की निंदा करते हैं, हमें खुशी हुई कि पार्टी ने सार्वजनिक रूप से उनके बयानों की निंदा की।” प्राइस ने कहा कि भारत को मानवाधिकारों को सम्मान देना चाहिए।

दरअसल, एक टीवी डिबेट के दौरान हदीस का हवाला देते हुए पैगंबर मुहम्मद को लेकर बयान दिया गया था, जिसके बाद से इस्लामिक कट्टरपंथियों में उबाल आ गया। नूपुर शर्मा के कथित बयान को फैक्ट चेक के नाम पर नफरत फैलाने वाले ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने एक एडिटेड क्लिप में अपलोड कर इस्लामिक कट्टरपंथियों को उकसाया। हालाँकि, बाद में भाजपा ने शर्मा को बीजेपी से निलंबित कर दिया। पार्टी ने अप्पने बयान में कहा, “भारतीय जनता पार्टी ऐसी किसी भी विचारधारा के खिलाफ है जो किसी भी संप्रदाय या धर्म का अपमान करती है। भाजपा ऐसे लोगों या सिद्धांत को बढ़ावा नहीं देती है। भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के किसी भी धर्म का पालन करने और हर धर्म का सम्मान करने का अधिकार देता है।”

5 जून को भाजपा द्वारा रिलीज किया गया प्रेस नोट

हालाँकि, ये मामला यहीं नहीं थमता। कथित तौर पर नूपुर शर्मा के खिलाफ कई केस दर्ज किए गए और उन्हें इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हत्या की धमकियाँ भी दीं। यहीं नहीं उन्हें पाकिस्तान के चरमपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के समर्थकों ने भी धमकियाँ दीं। उनका सिर कलम करने पर 50 लाख पाकिस्तानी रुपए (करीब 19.5 लाख भारतीय रुपए) के इनाम की भी घोषणा की। अलकायदा जैसे आतंकी संगठन लगातार भारत पर हमले की धमकी दे रहे हैं।

नूपुर शर्मा के बचाव में उतरा पाकिस्तानी मौलाना

हैरानी की बात ये है कि जहाँ नूपुर शर्मा को लगातार इस्लामिक कट्टरपंथी धमकियाँ दे रहे हैं। वहीं पाकिस्तान के मौलाना इंजीनियर मोहम्मद अली मिर्जा ने नूपुर शर्मा का समर्थन किया है। मिर्जा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो कहते हैं कि टीवी डिबेट में मुस्लिम पैनलिस्ट ने पहले नुपुर शर्मा को उकसाया और इसके जवाब में बीजेपी के निलंबित प्रवक्ता ने पैगंबर पर ये टिप्पणी की।

मौलाना ने पैगंबर मोहम्मद मामले में भारत की आलोचना करने पर अमेरिका को सुनाया। उन्होंने कहा, “अरब देश उनके गुलाम हैं, जिनकी रूस के साथ नहीं बनती। जब उन्होंने भारत को विवादों में फँसा देखा तो कहा कि अब इंडिया काबू में आया है। आप लोग अब आधिकारिक बयान दें।”

पैगंबर मुहम्मद विवाद को समझाने की कोशिश करते हुए उन्होंने आगे कहा, “नूपुर शर्मा ने जो भी बयान दिया था वो पलटवार था। जब आप किसी के धर्म पर हमला करोगे तो जबाव में वो आपके धर्म पर हमले करेगा। कोई ऑर्गनाइज तरीके से ऐसा नहीं किया गया। अगर उस टीवी प्रोग्राम को देखें तो उसमें शुरुआत मुस्लिम करते हैं। शर्मा के बयान की शैली और लहजे से हम देख सकते हैं कि वह जवाबी कार्रवाई कर रही थी। पहला आरोपित तो मुस्लिम है जिसने एक लाइव टीवी कार्यक्रम में दूसरे व्यक्ति के धर्म का मजाक उड़ाया था।”

अरब देशों पर सवाल खड़े करते हुए मौलाना ने कहा कि हाल ही में नूपुर शर्मा की घटना सिर्फ 5 सेकंड की विकृत क्लिप थी। ये कोई बड़ा मामला नहीं था। अतीत में इससे भी बड़ी घटनाएँ हुई थीं, तब ये अरब देश सोए हुए थे। मिर्जा के मुताबिक, उन्हें पहले ही इसका अंदाजा हो गया था कि आखिर अरबियों में कौन सा ईमान जाग गया। इस्लामोफोबिया के खिलाफ, कार्टून के खिलाफ। वो जो कुछ भी हुआ था वो सब इससे बड़ा था।

उल्लेखनीय है कि पैगंबर मुहम्मद पर कथित टिप्पणी को लेकर अमेरिका से पहले, कतर, कुवैत, ईरान, पाकिस्तान, सऊदी अरब, बहरीन, जॉर्डन, ओमान, तुर्की, मालदीव, इंडोनेशिया, लीबिया, इराक, मलेशिया और यहाँ तक ​​कि अफगानिस्तान में तालिबान शासन सहित 15 से अधिक देशों ने शर्मा की कथित ‘ईशनिंदा’ वाली टिप्पणी की निंदा की थी।

इस मसले पर भारत में जुमे की नमाज के बाद इस्लामिक कट्टरपंथियों ने व्यापक स्तर पर प्रदर्शन और हिंसा भी की थी। जो अब तक जारी है।

‘फ्लॉप हो रहा था तो भाग गई, सुपरहिट होते ही वापस आई’: कार्तिक आर्यन के साथ सारा अली खान को देख नेटिजन्स ने कसे तंज

‘लव आज कल’ फिल्म के दो साल बाद बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) और सारा अली खान (Sara Ali Khan) एक साथ नजर आए हैं। इनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। दरअसल, मुंबई में गुरुवार (16 जून 2022) की रात एक इवेंट में दोनों सेलेब्स आए हुए थे। इस दौरान कार्तिक एक ब्लैक सूट में दिखे, वहीं सारा ब्लैक थाई हाई स्लिट गाउन में नजर आईं।

इन तस्वीरों और वीडियो में आप देख सकते हैं कि कार्तिक और सारा एक-दूसरे से बात कर रहे हैं। यही नहीं सारा ने ‘भूल भुलैया 2’ के अभिनेता के साथ फोटोज भी क्लिक करवाई और उन्हें गले भी लगाया। इस इवेंट में कृति सेनन, आयुष्मान खुराना, वरुण धवन, कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा के अलावा कई कलाकारों ने शिकरत की थी।

वीडियो में आप देख सकते हैं कि सारा को किस मजबूरी में कार्तिक आर्यन के साथ फोटो क्लिक करवानी पड़ी है। हुआ यूँ कि सारा इवेंट के दौरान कृति सेनन और वरुण धवन के पास जा रही थीं, लेकिन जब उन्होंने दोनों को बात करते हुए देखा तो पास में खड़े कार्तिक के साथ पोज देने लगीं।

इसको लेकर एक यूजर ने लिखा, “सारा की फेक स्माइल।” दूसरे ने लिखा, “बेहद अजीब मूमेंट।”

साभार: विरल भयानी का इंस्टाग्राम

बॉलीवुड के सबसे मशहूर फोटोग्राफर्स में से एक विरल भयानी (Viral Bhayani) के इंस्टाग्राम वीडियो पर एक यूजर लिखते हैं, “फिल्म हिट होती है, तो लोग पीछे-पीछे आ जाते हैं।

साभार: विरल भयानी का इंस्टाग्राम

इंस्टाग्राम पर एक और यूजर लिखते हैं, “जब फ्लॉप हो रहा था, तब सारा भाग गई थी। अब जब सुपरहिट हो गया, तब वापस आ गई।”

साभार: विरल भयानी का इंस्टाग्राम

बता दें कि सारा अली खान और कार्तिक आर्यन की फिल्म ‘लव आज कल’ 14 फरवरी 2020 को रिलीज हुई थी। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरफ्लॉप साबित हुई है। इस दौरान दोनों के अफेयर की खबरें आने लगी थीं। ऐसा कहा जा रहा था कि इस फिल्म की शूटिंग के दौरान सारा और कार्तिक एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। हालाँकि, कुछ समय बाद यह भी खबर सामने आई थी कि दोनों ने अपने रास्ते अलग कर लिए हैं, जिसके बाद दोनों कभी एक साथ नजर नहीं आए। वहीं इन दिनों कार्तिक के सितारे बुलंदी पर हैं। जब बॉलीवुड में एक के बाद एक फ़िल्में फ्लॉप हो रही हैं, उनकी ‘भूल भुलैया 2’ ने बीते काफी समय से हिट फिल्मों के सूखे को खत्म किया है।

अचानक नहीं आया ‘अग्निपथ’, कारगिल वाली कमेटी ने की थी ऐसी योजना की सिफारिश: कहा था- सेना को हमेशा जवान और फिट रहना चाहिए

जब से रक्षा मंत्रालय ने सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना की घोषणा की है, इस योजना को बड़ी संख्या में तथाकथित सैन्य उम्मीदवारों और विपक्षी राजनीतिक दलों के विरोध का सामना करना पड़ा है। हमेशा की तरह राहुल गाँधी ने इस योजना की आलोचना की और इसके खिलाफ विरोध को और भड़काया है।

सशस्त्र बलों में भर्ती की इस नई योजना के तहत चार साल के लिए सैनिकों की भर्ती की जाएगी। यह अवधि समाप्त होने के बाद 25 प्रतिशत अग्निवीरों को सेना में स्थायी कर लिया जाएगा, जबकि बाकी अन्य सशस्त्र बलों, मंत्रालयों, राज्य सरकार एवं पुलिस तथा PSUs में नौकरियों के लिए आवेदन में वरीयता हासिल करेंगे। इन अग्निवीरों को ₹11.71 लाख की राशि एकमुश्त ‘सेवा निधि’ पैकेज के रूप में भुगतान किया जाएगा।

इसे भर्ती प्रक्रिया में आमूल-चूल परिवर्तन कहा गया है। वहीं, सैनिक बनने के इच्छुक कुछ युवा मौजूदा भर्ती प्रक्रिया को जारी रखने की माँग करते हुए इसके खिलाफ ट्रेन जला रहे हैं। दूसरी तरफ विपक्षी दलों एवं सेना के कुछ दिग्गजों ने भी इस योजना की आलोचना की है।

हालाँकि, दो दशक पहले कारगिल समीक्षा समिति की रिपोर्ट में सैनिकों के लिए इतनी छोटी सेवा का सुझाव दिया गया था। कारगिल युद्ध के कारण हुई घटनाओं के क्रम का अध्ययन करने और सिफारिशें करने के लिए गठित समिति ने देश की रक्षा में सुधार के लिए कई सुझाव दिए थे। उनमें से कुछ को पहले ही लागू किया जा चुका है।

समिति की प्रमुख सिफारिशों में से एक सैनिकों की औसत आयु को कम करना था, क्योंकि रिपोर्ट में कहा गया था कि सेना को हर समय युवा और फिट रहना चाहिए। समिति ने सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों और केंद्रीय पुलिस बलों के लिए एक एकीकृत जनशक्ति नीति की भी सिफारिश की थी।

कारगिल समीक्षा समिति की सिफारिश

समिति ने कहा था, “देश के सामने आने वाले छद्म युद्ध और बड़े पैमाने पर आतंकवाद की नई स्थिति को ध्यान में रखते हुए अर्ध-सैन्य बलों की भूमिका और कार्यों को पुनर्गठित किया जाना चाहिए, खासकर कमान एवं नियंत्रण तथा नेतृत्व के संदर्भ में। उन्हें प्रदर्शन के उच्च मानकों के लिए प्रशिक्षित करने और आतंकवादी खतरों से निपटने के लिए बेहतर ढंग से सुसज्जित करने की आवश्यकता है। सशस्त्र बलों, अर्ध-सैन्य बलों और केंद्रीय पुलिस बलों के लिए एक एकीकृत जनशक्ति नीति अपनाने की संभावना की जाँच होनी चाहिए।”

रिपोर्ट में आगे कहा गया था, “सेना को हर समय जवान और फिट रहना चाहिए। इसलिए 17 साल की सेवा (जैसा कि 1976 से नीति रही है) की वर्तमान प्रथा के बजाय, यह सलाह दी जाएगी कि सेवा को सात से दस साल की अवधि तक कम कर दिया जाए। इसके बाद अधिकारियों और जवानों को देश के अर्धसैनिक बलों में सेवा के लिए मुक्त कर दिया जाए।”

कारगिल युद्ध के बाद गठित समिति ने सुझाव दिया था कि सेवा अवधि की समाप्ति के बाद उन्हें नियमित पुलिस बलों में लिया जा सकता है या संविधान के अनुच्छेद 5 IA (d) के तहत ‘राष्ट्रीय सेवा कोर (या एक राष्ट्रीय संरक्षण कोर) में शामिल किया जा सकता है, जो भूमि एवं जल संरक्षण और भौतिक एवं सामाजिक बुनियादी ढाँचे के विकास की एक श्रृंखला का नेतृत्व करेंगे।”

समिति ने देखा था कि इससे सेना और अर्ध-सैन्य बलों की औसत आयु कम हो जाएगी और पेंशन लागत भी घट जाएगी। इसके साथ ही अन्य अधिकारों, जैसे विवाहित जवानों के लिए क्वार्टर और शैक्षिक सुविधाओं पर होने वाले खर्च भी घट जाएँगे।

समिति ने महसूस किया था कि 1999-2000 में सेना का ₹6,932 करोड़ का पेंशन बिल कुल वेतन बिल का लगभग दो-तिहाई था और यह हर साल तेजी से बढ़ रहा था। इस वर्ष के बजट में रक्षा के लिए ₹5.25 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं। इनमें से ₹1,19,696 करोड़ अकेले पेंशन के लिए आवंटित किए गए हैं। इसका अर्थ है कि रक्षा बजट का लगभग 25% केवल पेंशन के भुगतान के लिए खर्च किया जाता है। वन रैंक वन पेंशन (OROP) योजना के लागू होने के बाद सेना की पेंशन में तेजी से वृद्धि हुई है।

पेंशन पर खर्च की गई इतनी बड़ी राशि का मतलब है कि सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए बहुत कुछ नहीं बचता है। इससे आधुनिक हथियारों और उपकरण प्रणालियों की खरीद प्रभावित होती हैं। रक्षा क्षेत्र को पहले से ही बजट आवंटन का एक बड़ा हिस्सा मिलता है और इसके हिस्से को बढ़ाने की संभावना बहुत कम है। जहाँ कुछ विशेषज्ञ रक्षा के लिए बजट आवंटन बढ़ाने का सुझाव देते हैं, वहीं कारगिल समिति ने इसके खिलाफ सुझाव दिया था।

यह देखते हुए कि बजटीय बाधाओं ने आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को प्रभावित किया है और कुछ परिचालन शून्य पैदा किए हैं, समिति ने कहा था कि रक्षा आवंटन नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। इसके बजाय, सरकार को आधुनिकीकरण पर खर्च बढ़ाने का एक और तरीका खोजना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया था, “समिति जीडीपी के किसी भी प्रतिशत को रक्षा क्षेत्र को आवंटित करने की वकालत करना नहीं चाहेगी। इसे संबंधित विभागों और रक्षा सेवाओं के परामर्श से निर्धारित करने के लिए सरकार पर छोड़ दिया जाना चाहिए।”

इन्हीं सिफारिशों को लागू करती है अग्निपथ योजना

इस योजना के तहत 17.5 ​​वर्ष से 21 वर्ष की आयु के बीच के उम्मीदवारों को अग्निवीर के रूप में भर्ती किया जाएगा। वे केवल 4 साल के लिए काम करेंगे, इसलिए एक अग्निवीर की अधिकतम आयु 25 वर्ष होगी। इस प्रकार, सैनिक अपनी पूरी सेवा अवधि में युवा और फिट रहेंगे।

अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए गए 25% अग्निपथ को नियमित कमीशन में शामिल किया जाएगा और उन्हें उच्च रैंक पर पदोन्नत किया जाएगा। बाकी 75% को सरकारी और पीएसयू नौकरियों में वरीयता दी जाएगी। इसमें राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भर्ती भी शामिल है। पुलिस बलों में कार्यरत सेना में प्रशिक्षित युवा निश्चित रूप से पुलिस और अर्धसैनिक बलों की संचालन क्षमता में वृद्धि करेंगे।

राज्य और केंद्रीय पुलिस बलों के अलावा सेवानिवृत्त अग्निवीर केंद्रीय और राज्य आपदा बलों की मूल्यवान जनशक्ति होंगे। इसी तरह की नौकरियों में शारीरिक फिटनेस की आवश्यकता होगी। इसलिए, जब 75% युवा 4 साल की सेवा के बाद सेना से निकलेंगे तो उनके लिए सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध रहेगा।

अग्निपथ योजना बढ़ते सेना पेंशन पर रोक लगाने में मदद करेगी, क्योंकि अग्निवीर को उनकी सेवा समाप्त होने के बाद पेंशन का भुगतान नहीं किया जाएगा। हर साल लगभग 45,000 से 50,000 अग्निवीर की भर्ती की जाएगी। इससे सेना को पेंशन भुगतान में बचत होगी।

इन सबकी सिफारिश कारगिल समीक्षा समिति ने दो दशक से भी पहले की थी। हालाँकि, इन दो दशकों में आई सरकारों ने इसे लागू करने की कभी कोशिश नहीं की।

सेना ने तीन साल की भर्ती योजना का रखा था प्रस्ताव

सिर्फ कारगिल समिति ही नहीं, भारतीय सेना ने भी जनशक्ति लागत को बचाने के लिए अग्निपथ योजना के समान एक भर्ती योजना का प्रस्ताव दिया था। सेना ने 2020 में युवाओं को 3 साल के लिए भर्ती करने के लिए ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ योजना का प्रस्ताव दिया था। मौजूदा योजना में इस प्रस्ताव के साथ कई समानताएँ हैं। हालाँकि, सेना द्वारा प्रस्तुत योजना में सेवा अवधि 4 साल के बजाय 3 साल तय की गई थी।

सेना ने वर्तमान में 17 वर्षों की सेवा अवधि के बजाय तीन वर्षों के लिए सैनिकों को नियुक्त करके पर्याप्त मौद्रिक बचत की गणना की थी। सेना ने कहा था कि इस धन का उपयोग सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए किया जा सकता है।

हिरोइन साईं पल्लवी की शिकायत बजरंग दल ने हैदराबाद पुलिस से की, कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार को गौतस्करों पर हमले जैसा बताया था

कश्मीरी पंडितों पर दिए गए आपत्तिजनक बयान के बाद दक्षिण भारतीय अभिनेत्री साईं पल्लवी के खिलाफ हैदराबाद पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई है। इस मामले में शिकायतकर्ता बजरंग दल के कार्यकर्ता हैं। 16 जून 2022 (गुरुवार) को दी गई शिकायत में गौरक्षकों के विरुद्ध आपत्तिजनक बयानबाजी का आरोप है। पुलिस का कहना है कि वो वीडियो की जाँच के बाद आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी।

ऑपइंडिया से बात करते हुए SHO सुल्तान बाजार इंस्पेक्टर पद्मा ने बताया, “शिकायत ले ली गई है। मामले की जाँच की जा रही है।” हालाँकि, FIR दर्ज हुई है या नहीं इस पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। हैदराबाद से भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने भी ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “बजरंग दल के कार्यकर्ता ने थाने में शिकायत दी है लेकिन इस मामले में अभी FIR दर्ज नहीं हुई है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शिकायतकर्ता ने 27 सेकेण्ड की वीडियो भी पुलिस को सौंपी है। इस मामले में पुलिस ने पूरी वीडियो मँगवाई है जिस पर जाँच चल रही है। वहीं इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि FIR दर्ज नहीं हुई है।

वहीं TRS पार्टी के सोशल मीडिया संचालक द्वारा साईं पल्लवी के बयान का समर्थन किया गया है। YSR नाम के एक हैंडल से लिखा गया, “साईं पल्लवी के बयान में कुछ भी गलत नहीं है। उनके अहिंसक स्टैंड का हम समर्थन करते हैं।”

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में साउथ की मशहूर अदाकारा साई पल्लवी पर कश्मीर में हुए हिंदुओं के नरसंहार की तुलना गौतस्करों पर हुए हमलों से करने का आरोप लग रहा है। ये जवाब उन्होंने विवेक अग्निहोत्री की फिल्म द कश्मीर फाइल्स पर पूछे गए सवाल के जवाब में दिया। साईं पल्लवी के मुताबिक ये दोनों चीजें रुकनी चाहिए। ऐक्ट्रेस के इस बयान के बाद अब सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ गया है। तेलगू भाषा में हुई बातचीत के इसी वीडियो में पल्लवी ने वामपंथ और दक्षिणपंथ पर भी अपने विचार रखे थे।