नेशनल हेराल्ड न्यूजपेपर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में सोनिया गाँधी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से समन मिलने के बाद खबर है कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष कोविड संबंधित समस्याओं के कारण गंगाराम अस्पताल में भर्ती हुई हैं। 2 जून को सोनिया गाँधी के कोविड पॉजिटिव होने की खबर आई थी जिसके बाद उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया। अभी उनकी हालत स्थिर है। कॉन्ग्रेस नेताओं ने उनके जल्द ठीक होने की कामना करते हुए यह जानकारी दी है।
कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने बताया, “कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी गंगा राम अस्पताल में कोविड कारणों से भर्ती हुई हैं। वह स्थिर है और अस्पताल की निगरानी में हैं। हम कॉन्ग्रेस से जुड़े हर शुभचिंतक को धन्यवाद देते हैं।”
Congress President, Smt. Sonia Gandhi was admitted to Ganga Ram Hospital today owing to Covid related issues. She is stable and will be kept at the hospital for observation.
We thank all the Congress men & women as also all well wishers for their concern and good wishes.
— Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) June 12, 2022
बता दें कि ईडी द्वारा 23 जून को पूछताछ के लिए पेश होने का समन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को मिलने के बाद एक ओर जहाँ वह कोविड कारणों से अस्पताल में भर्ती हुई हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी पार्टी के कार्यकर्ता 13 जून को केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने की तैयारी में लगे हैं।
दरअसल मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी की ओर से कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को 2 जून को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। मगर, राहुल ने देश से बाहर होने के कारण कोई और डेट माँगी। इसके बाद ईडी ने 13 जून की तारीख उन्हें दी। अब कल उन्हें ईडी के समक्ष पूछताछ के लिए जाना है और इसी वजह से कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता केंद्र के सामने शक्ति प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं। कॉन्ग्रेस ने अपने सांसदो से कहा है कि वो 13 जून की सुबह दिल्ली में मौजूगद रहें।
यह मामला कॉन्ग्रेस पार्टी के नेतृत्व में ‘यंग इंडियन’ में वित्तीय अनियमितता की जाँच के सिलसिले में दर्ज किया गया था। समाचार पत्र ‘नेशनल हेराल्ड’, यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड का है। ‘नेशनल हेराल्ड’ एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के स्वामित्व में है। भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और अन्य पर धोखाधड़ी की साजिश रचने और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के फंड का गबन करने का आरोप लगाया था। स्वामी ने यह भी आरोप लगाया था कि यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड ने 90.25 करोड़ रुपए की वसूली के अधिकार हासिल करने के लिए सिर्फ 50 लाख रुपए का भुगतान किया था, जो एजेएल पर कॉन्ग्रेस का बकाया था।
उल्लेखनीय है कि ईडी के अनुसार, गाँधी परिवार द्वारा नियंत्रित एनजीओ, जिसकी शुरुआत 2010 में केवल 5 लाख रुपए से हुई थी, अब उसकी संपत्ति 800 करोड़ रुपए से अधिक है।
पूर्व भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ पश्चिम बंगाल में भी एक FIR दर्ज हुई है। यह FIR तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) मेटा अबू सोहैल ने दर्ज करवाई है। तमाम अधिकारियों को FIR की कॉपी भेजते हुए सोहैल ने आज रविवार (12 जून, 2022) को कार्रवाई न होने पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट जाने की धमकी दी है। वहीं पश्चिम बंगाल पुलिस ने भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी के हावड़ा जाने पर रोक लगा दी है है।
अबू सोहैल TMC में अल्पसंख्यक मोर्चे के महासचिव हैं। साथ ही वो सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता भी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक FIR मेदिनीपुर के काँधी थाने में दर्ज हुई है। इस केस में IPC की धारा 153A, 504, 505 और 506 लगाई गई है। सोहैल ने इस FIR की कॉपी DGP पश्चिम बंगाल, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और केंद्रीय गृहमंत्रालय को भी भेजी है। अबू सोहैल के मुताबिक नूपुर शर्मा ने पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया है और इसलिए उनके खिलाफ एक्शन होना ही चाहिए।
शुभेंदु अधिकारी के हावड़ा जाने पर रोक
वहीं नूपुर शर्मा के खिलाफ इस्लामी भीड़ द्वारा हावड़ा में किए गए हंगामे के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी को हावड़ा जाने से रोक दिया है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने इस आदेश की कॉपी को शेयर किया है। आदेश में शुभेंदु अधिकारी की सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया है। अमित मालवीय ने आरोप लगाया है कि हावड़ा में भाजपा कार्यालयों को नुकसान पहुँचाया गया है।
After putting BJP WB President Sukanta Majumdar under detention, Mamata Banerjee is now ensuring that LoP Suvendu Adhikari is not able to visit Howrah, where BJP offices have been gutted. Her entire focus is on the opposition, not on rampaging “Dudhel Gais”, as she calls them… pic.twitter.com/YInnxMopdF
खुद शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के DGP की आलोचना करते हुए कहा कि वो पश्चिम बंगाल की पुलिस को भाजपा नेताओं के दमन में प्रयोग कर रहे हैं। जबकि उन्हें यही पुलिस बल सरकारी और आम लोगों की सम्पत्तियों को लूट रहे दंगाइयों पर प्रयोग करना चाहिए।
I wonder why @WBPolice DGP @mmalaviya1 is using the Police personnel to obstruct @BJP4Bengal leadership when the need of the hour is to deploy them across WB where rioters are having a free run destroying & looting public & private properties.@jdhankhar1@chief_west@HomeBengal
— Suvendu Adhikari • শুভেন্দু অধিকারী (@SuvenduWB) June 12, 2022
पश्चिम बंगाल में अब तक 100 से ज्यादा दंगाई गिरफ्तार
पश्चिम बंगाल पुलिस के मुताबिक अब तक सड़क जाम करने और सम्पत्तियों को नुकसान पहुँचाने वाले 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है। इसी के साथ पुलिस ने बिना किसी पक्षपात के कार्रवाई का भरोसा दिया है।
West Bengal police is committed to uphold the spirit of law and constitution without fear or favour. It is advised to all to refrain from indulging in rumour mongering spreading false narratives, videos, photographs etc. that may incite communal riots..(2/3)
पश्चिम बंगाल के कोलकाता में शनिवार (11 जून 2022) की रात हुई एशियन कप 2023 फुटबॉल क्वालीफायर मैच (Asian Cup 2023 Qualifiers) में अफगानिस्तान (Afghanistan) ने हार के बाद भारतीय टीम (India Team) के खिलाड़ियों के साथ अभद्रता और मारपीट की। इसके बाद भारतीय टीम भी बचाव में आ गई और दोनों तरफ से जमकर लात-घूँसे चले।
दरअसल, मैच के आखिरी पलों में भारतीय टीम ने गोल कर अफगानिस्तान पर जीत दर्ज की थी। भारत की इस जीत को अफगान खिलाड़ी पचा नहीं पाए। इस दौरान एक अफगान खिलाड़ी एक भारतीय खिलाड़ी से बदतमीजी करने लगा। इसके बाद बात बढ़ गई और दोनों ओर से कई खिलाड़ी इसमें शामिल हो गए।
वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि अचानक तीन अफगान खिलाड़ी आते हैं और आपस में बात कर रहे दो खिलाड़ियों में एक दो अपने साथ घसीटने लगते हैं। इन अफगान खिलाड़ियों में से एक भारतीय खिलाड़ी का कॉलर पकड़ कर खींचता है, जबकि दूसरे उसे धक्का देता है। इस दौरान दूसरा भारतीय खिलाड़ी भी साथ रहने की कोशिश करता है, लेकिन उसे भी लगातार धक्का दिया जाता रहा है।
इसके बाद मैदान से बाहर बैठे अफगान खिलाड़ी दौड़कर मैदान में आते हैं लड़ाई में अपने साथियों की मदद करने लगते हैं। उनके पीछे-पीछे भारतीय खिलाड़ी भी दौड़कर मैदान में आते हैं। इसके बाद दोनों तरफ से खिलाड़ी गुत्थमगुत्थी हो जाते हैं। फिर लात और घूँसे चलने लगे। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
इस दौरान भारतीय गोलकीपर गुरप्रीत सिंह ने दोनों तरफ के खिलाड़ियों को शांत कराने की काफी कोशिश की, लेकिन उन्हें भी अफगान खिलाड़ियों ने धक्का दे दिया। इसके बाद AFC के अधिकारी मौके पर पहुँचे, लेकिन हाथापाई रुकने के बजाए और तेज हो गई। आयोजन समिति ने घटना को लेकर अभी कुछ नहीं कहा है। हालाँकि, झगड़े की असली वजह क्या यह पता नहीं चला है।
इस महत्वपूर्ण मैच में भारतीय टीम ने अफगानिस्तान को 2-1 से हराकर तीन अंक हासिल किए हैं। सुनील छेत्री ने खेल के 85 मिनट में एक फ्री-किक गोल मारा, लेकिन अफगानिस्तान ने जुबैर अमीरी फ्री हेडर से गोल करते हुए मैच बराबरी पर ला दिया। इसी बीच मैच खत्म होने से ठीक पहले भारतीय टीम ने निर्णायक गोल दागते हुए जीत हासिल कर ली।
अफगानिस्तान के खिलाफ गोल दागने के बाद भारतीय कप्तान सुनील छेत्री के अब 128 इंटरनेशनल मुकाबलों में 82 गोल हो गए हैं। छेत्री से आगे अब सिर्फ पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो और अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी हैं।
भारतीय टीम की यह टीम जनवरी 2016 के बाद अफगानिस्तान के खिलाफ पहली जीत है। इससे ठीक पहले दो मौकों पर अफगानिस्तान की टीम भारत को दो बार बराबरी पर रोकने मे सफल रही थी। भारतीय टीम ने अफगानिस्तान के खिलाफ कुल 11 मैच खेले हैं, जिनमें उसे सात में जीत और एक में हार का सामना करना पड़ा है।
बता दें कि एशियन कप 2023 के फाइनल क्वालीफाइंग राउंड के ग्रुप-डी के मुकाबले में अफगानिस्तान को हराने के बाद भारतीय टीम दूसरे नंबर पर आ गई है। पहले नंबर पर हांगकांग की टीम चल रही है।
तेलंगाना (Telangana) की राजधानी हैदराबाद से चौंकाने वाले घटना प्रकाश में आई है। यहाँ रविवार (12 जून, 2022) को एक केमिकल ब्लास्ट (chemical Blast) हुआ। इसमें एक युवक की मौत की मौत हो गई, जबकि उनके पिता घायल हुए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना अफजलगंज के महाराजगंज इलाके की है। यहीं की मोगरम बस्ती में रहते थे भरत भट्टर। भरत पेशे से केमिकल का काम करते थे। वो गिरिराज कंपनी में काम करते थे और अपनी दुकान के सामने के नाले में एक्सपायर हो चुके केमिकल को फेंक देते थे। रविवार की सुबह भी उन्होंने ऐसा ही कुछ किया।
पुलिस का कहना है कि भरत ने केमिकल को नाली में बहाया। लेकिन नाली के जाम होने के कारण वो उसमें फँस गया। इसके बाद उन्होंने लोहे की रॉड से केमिकल को बाहर निकालने की कोशिश की। ये जानने के लिए कि केमिकल निकला या नहीं, उन्होंने उसमें पानी डाल दिया। इसी दौरान अचानक से जोरदार धमाका हो गया।
बताया जाता है कि केमिकल रिएक्शन के कारण हुआ धमाका इतना तेज था कि भरत करीब दो मंजिल की ऊँचाई तक ऊपर उड़ गए। उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो गए। इस हादसे में भरत के पिता वेणुगोपाल भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही अफजलगंज पुलिस की एक टीम मौके पर पहुँची। इसके साथ ही फॉरेंसिक विभाग की CLUES टीम भी वहाँ पहुँच गई। केमिकल को इकट्ठा कर मामले की छानबीन शुरू कर दी गई है।
वहीं पुलिस ने मृतक भरत भट्टर के शव को उस्मानिया अस्पताल की मॉर्चरी में रखवा दिया है। केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है। लेकिन केमिकल ब्लास्ट की घटना से इलाके में डर का माहौल बताया जा रहा है। बहरहाल घटना को लेकर अभी तक अधिक खुलासा नहीं हो सका है।
Note: पहले इस खबर का शीर्षक था – “हैदराबाद की मस्जिद में केमिकल ब्लास्ट: बेटे भरत के चीथड़े उड़ गए, पिता वेणुगोपाल की हालत गंभीर” – यह खबर मीडिया रिपोर्टों के आधार पर लिखी गई थी। उन मीडिया रिपोर्ट को अब एडिट कर दिया गया है, उसी आधार पर इस खबर को भी एडिट किया गया।
शहरों के नाम बदलने की कवायद ने अब जम्मू में भी दस्तक दे दी है। खबर है कि जम्मू नगर निगम ने एक शहर और एक चौक का नाम बदलने के लिए प्रस्ताव पारित किया है जिसमें शेख नगर को शिवनगर और अम्फल्ला चौक को हनुमान चौक करने को कहा गया है।
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, प्रस्ताव पारित की जानकारी मेयर चंदर मोहन ने खुद दी। उन्होंने बताया कि शेख नगर को शिव नगर करने के लिए भाजपा पार्षद द्वारा प्रस्ताव दिया गया था जिसके बाद जम्मू में दो क्षेत्रों के नाम बदलने के लिए एक सर्वसम्मत से प्रस्ताव पारित हुआ।
जम्मू-कश्मीर: जम्मू नगर निगम (JMC) के मेयर चंदर मोहन गुप्ता ने कल कहा है कि जम्मू नगर निगम ने शेख नगर का नाम बदलकर शिवनगर और अम्फल्ला चौक का नाम हनुमान चौक करने का प्रस्ताव पारित किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि शनिवार को जम्मू नगर निगम की आम सभा की बैठक के दौरान भाजपा पार्षद शारदा कुमारी ने शेख नगर को शिव नगर करने का प्रस्ताव पारित किया। भाजपा पार्षद शारदा कुमारी ने इस संबंध में कहा था कि जनता की माँगों को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव पेश किया गया है। मालूम हो कि जम्मू नगर निगम में दो क्षेत्रों का नाम बदले जाने के लिए प्रस्ताव पारित होने के बाद अब जम्मू कश्मीर के नागरिक सचिवालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा ताकि प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
पिछले साल जम्मू में राजकीय महिला पीजी कॉलेज गाँधी नगर का नाम डोगरी भाषा की पहली आधुनिक कवयित्री पद्मश्री पद्मा सचदेव के नाम पर किया गया था। इस नाम का उद्घाटन चंद्र मोहन गुप्ता ने किया था। पद्मा सचदेव कवयित्री होने के साथ लेखिका के तौर भी जानी जाती हैं। उन्हें 1971 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया था और पिछले ही साल उनका निधन हुआ था।
बता दें कि जम्मू से पहले पहले उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जगहों के नाम बदलने की प्रक्रिया को शुरू किया गया था। इसी क्रम में इलाहाबाद प्रयागराज हुआ था और खबरें आई थीं कि अलीगढ़, फर्रुखाबाद, सुल्तानपुर, बदायूँ, फिरोजाबाद और शाहजहाँपुर का नाम बदलने पर भी विचार चल रहा है। इनके अलावा आगरा, मैनपुरी और गाजीपुर का नाम बदलने के लिए प्रस्ताव तैयार हो रहे हैं।
भाजपा (BJP) की पूर्व नेता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) और नवीन जिंदल (Navin Jindal) द्वारा इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद (Prophet Mohammad) पर दिए गए बयान को लेकर प्रदर्शन करने वालों पर कुवैत (Kuwait) सरकार कार्रवाई करने वाली है।
कुवैत सरकार ऐसे प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करने और वापस उनके मुल्क भेजने का निर्देश जारी करने वाली है। कुवैत सरकार का कहना है कि यहाँ के सभी प्रवासियों को कानूनों का सम्मान करना चाहिए और किसी भी प्रकार के प्रदर्शनों में भाग नहीं लेना चाहिए।
सूत्रों के हवाले से अरब टाइम्स ऑनलाइन ने लिखा है कि इन प्रदर्शनकारियों ने देश के कानूनों और नियमों का उल्लंघन किया है। कुवैत में नियम है कि मुल्क में प्रवासी व्यक्ति धरना या विरोध प्रदर्शन आयोजित नहीं कर सकते हैं।
इस खबर को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संबद्ध प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे नंदकुमार ने ट्वीट किया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने वाले भारतीयों को भारत भेजा जाएगा।
Kuwait : Govt of Kuwait decided to deport Indians who conducted protest rally in Faraheel city of Kuwait against Prophet remarks by Nupur Sharma. Their Visa will be cancelled permanently and will be deported to India. https://t.co/1jhOnKCMWv
रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस को इन्हें गिरफ्तार करने के बाद निर्वासन केंद्र भेजने के लिए कहा गया है, जहाँ से उन्हें उनके संबंधित देशों में भेज दिया जाएगा। इसके अलावा, उन्हें कुवैत में प्रवेश करने पर स्थायी रूप से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।
दरअसल, शुक्रवार (10 जून 2022) को जुमे की नमाज के बाद वहाँ के फहील क्षेत्र लोगों ने भारत में आयोजित विरोध प्रदर्शन की तरह वहाँ भी प्रदर्शन किया था और अल्लाह-हू-अकबर और इल्ल इल्लाह… के नारे लगाए थे। माना जा रहा है कि इन प्रदर्शनकारियों में भारतीय, पाकिस्तान और बांग्लादेशी नागरिक हैं।
बता दें कि इससे पहले UAE स्थित पाकिस्तानी दूतावास ने 24 मई 2022 में एक एडवाइजरी जारी कर अपने नागरिकों से कहा था कि यहाँ विरोध करना कानून जुर्म है। अगर कोई पाकिस्तानी इसमें शामिल होता है तो उसे UAE के कानून के तहत गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
पाकिस्तानी दूतावास ने यह कहा था कि सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल करना भी UAE में अपराध है। इसलिए इन सब चीजों से बचें। एजवाइजरी में पाकिस्तानी नागरिकों से स्थानीय कानून का सम्मान करने के लिए कहा गया था।
नूपुर शर्माल (Nupur Sharma) के पैगंबर मुहम्मद पर कथित बयान के विरोध में 10 जून 2022 को जुमे की नमाज के दिन इस्लामिक कट्टरपंथियों ने झारखंड में राँची में (Ranchi Violence) जमकर हिंसा की। हिसा के दौरान पत्थरबाजी और गोलियाँ भी चलाई गई। हनुमान मंदिर में पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की गई और पुलिस पर भी हमले किए गए गए। जवाबी कार्रवाई में कुछ दंगाइयों की मौत हो गई। रविवार (12 जून, 2022) को इस्लामिक संगठन जमीयत उलेमा ए हिन्द (Jamiat Ulema-e-Hind) ने मारे गए दंगाइयों को ‘शहीद’ करार दिया है।
इसके साथ ही इस्लामिक संगठन ने राँची के दंगाइयो को मुआवजा देने की माँग की है। जमीयत के महासचिव एम हकीमुद्दीन कासमी ने पुलिस पर मुस्लिम प्रदर्शनकारियों को सार्वजनिक रूप से मारने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को घायलों के इलाज में मदद करनी चाहिए और मृतक के परिजनों को वित्तीय मुआवजा देना चाहिए। इससे पहले कॉन्ग्रेस के एमएलए इरफान अंसारी ने 50 लाख रुपए के मुआवजे की माँग की थी।
इसके साथ ही कासमी ने इस्लामिक प्रदर्शनकारियों को हर तरह की कानूनी सहायता देने का ऐलान किया है। कासमी ने कहा कि पैगंबर मुहम्मद का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हमने शांति की अपील करने के लिए डीआईजी से मुलाकात की है और डीसीपी से मुलाकात करेंगे। हम डीजीपी, राज्यपाल और सीएम से भी मिलने की कोशिश कर रहे हैं। घटना की जाँच के लिए एक एसआईटी का गठन किया गया है और डीआईजी के अनुसार एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट आ जाएगी।”
इस बीच अब मारे गए दंगाइयों के परिजनों ने दावा किया है कि वो प्रदर्शन में शामिल ही नहीं थे। मारे गए दोनों दंगाइयों की पहचान मोहम्मद मुदस्सिर कैफ़ी (22) और मोहम्मद साहिल (24) के रूप में हुई। उल्लेखनीय है कि राँची में हुई झड़पों में दो दर्जन से अधिक लोग मारे गए और दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए थे। घायल हुए 13 लोगों का इलाज रिम्स में किया जा रहा है।
आतंकियों के साथ खड़ा रहा है जमीयत
गौरतलब है कि इससे पहले हाल ही में जब वाराणसी ब्लास्ट के दोषी आतंकी वलीउल्लाह खान को कोर्ट ने फाँसी की सजा सुनाई थी तो जमीयत उसके समर्थन में खड़ा हो गया था। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी आतंकी वलीउल्लाह की फाँसी की सजा के खिलाफ हाई कोर्ट जाने की बात कही थी।
मुगलों की तलवार को कुंद करने वाले हिंदुस्तान के महानायक और हिंदू हृदय सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक होना… यह केवल शिवाजी महाराज के विजयारोहण होने की बात नहीं है। इस देश के धर्म, संस्कृति व समाज का संरक्षण कर हिंदूराष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति करने के जो प्रयास चले थे, इन सारे प्रयासों की अंतिम सफल परिणति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक है।
हिन्दू हृदय सम्राट व मराठा गौरव की उपाधि से अंलकृत महानायक छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी, 1630 को पुणे के जुनार स्थित शिवनेरी दुर्ग में शाहजी भोंसले और माता जीजाबाई के घर हुआ था।
माता जीजाबाई धार्मिक स्वभाव की वीरांगना नारी थीं। उनकी पहली गुरु थीं जो रामायण, महाभारत के साथ शिवाजी को भारतीय वीरों और महापुरुषों की कहानियाँ सुनाती थीं। दादा कोणदेव के संरक्षण में शिवाजी ने युद्ध कौशल की सारी कलाएँ सीखीं। शिवाजी को गुरिल्ला युद्ध या छापामार युद्ध का आविष्कारक माना जाता है। शिवाजी के गुरु समर्थ रामदास थे। छत्रपति शिवाजी तुलजा भवानी के उपासक थे।
छत्रपति शिवाजी महाराज की शासन प्रणाली
शिवा जी का राज्य वास्तविक और कानूनी दोनों तरह से एक संप्रभु राज्य था। तथ्य यह है कि उनके पत्र… मुहरें, उपाधियाँ और उनके प्रशासन की प्रकृति… ये सभी रामराज्य या धर्मराज्य की भावना पर आधारित थी। महादेव गोविंद रानाडे के अनुसार:
“नेपोलियन प्रथम की तरह शिवाजी अपने समय में एक महान संगठनकर्ता और नागरिक संस्थानों के निर्माता थे।”
अदन्यापात्र या अजनापात्र
अदन्यापात्र या अजनापात्र भी कहा जाता है। मराठी में रामचंद्र पंत अमात्य द्वारा लिखी गई मराठा नीति के सिद्धांतों पर एक शाही आदेश है, जिन्होंने मराठा राजा शिवाजी को वित्त मंत्री यानी अमात्य के रूप में अष्ट प्रधान परिषद में सेवाएँ दी थीं। अष्टप्रधान की हम आगे चर्चा करेंगे… लेकिन पहले हम आपको अदन्यापात्र के बारे में बता रहे हैं। शिवा जी के राज्य की महिमा और गरिमा भौतिक विस्तार से ज्यादा उनके आदर्शों, सिंद्धातों के चलते इतिहासकारों ने की है।
रामचंद्र पंत अमात्य, जो अपनी अदन्यापत्र और राजनीति में छत्रपति शिवाजी महाराज के राजनीतिक दिमाग को सटीक रूप से दर्शाते हैं… उनके स्वराज्य की भव्य राजनीति की आवश्यक विशेषताओं को एक स्पष्ट रूप से विचार प्रदान करते हैं।
शिवाजी के स्वराज्य प्रशासन के प्रमुख सिद्धांत थे
अपने लोगों की भलाई और राज्य के सामान्य कल्याण को बढ़ावा देना
स्वराज्य की रक्षा के लिए एक कुशल सैन्य बल बनाए रखना
कृषि और उद्योग को बढ़ावा देकर लोगों की आर्थिक जरूरतों को पर्याप्त रूप से उपलब्ध कराना
मराठी और संस्कृत
छत्रपति शिवाजी महाराज की शासन प्रणाली और आधिकारिक भाषाओं को लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज की शासन प्रणाली पर काम करने वाले डॉ. केदार फाल्के बताते हैं।
जहाँ तक आधिकारिक भाषा का प्रश्न है… शिवाजी ने फारसी और अरबी के स्थान पर मराठी की शुरुआत की, जिसे मुस्लिम शासकों ने अपने शासन के पहचान के रूप में लागू किया था। शिवाजी ने आधिकारिक उद्देश्यों के लिए संस्कृत में राज्यव्यवहारकोश नाम से एक विशेष शब्दकोश तैयार करवाया।
यह दुरूह और बड़ा कार्य रघुनाथपंत हनुमंते के कुशल निर्देशन में अनेक विद्वान पंडितों द्वारा किया गया, जिनमें एक धुंडीराज लक्ष्मण व्यास का विशेष रूप से उल्लेख है। इसी तरह प्रशासनिक कार्यों के संचालन के लिए नियम बनाए गए। संस्कृत और मराठी को काम-काज की भाषा बनाकर फारसी के प्रभाव को खत्म किया गया।
उन दिनों अधिकांश शाही मुहरें फारसी में खुदी हुई थीं। शिवाजी ने उन्हें संस्कृत से बदल दिया। अपनी भाषा और अपने धर्म के साथ स्वराज्य प्राप्त करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण परिवर्तन था।शिवाजी ने जिस शाही मुहर को अपनाया, उसमें उनके आदर्शों और उनकी उपलब्धियों का बखूबी वर्णन किया गया है।
अष्ट प्रधान मंडल आज के समय में दुनियाभर में शासन और पावर के डिसेंट्रालाइजेशन की बात होती है। सत्ता के विकेंद्रीकरण पर बड़े-बड़े सेमिनार और व्याख्यान होते हैं। लेकिन साढ़े तीन सौ साल पहले शिवा जी महाराज ने अपने शासन की बागडोर सुचारु रुप से चलाने के लिए जिस तरह से सत्ता का विकेंद्रीकरण किया… उससे समाज आज भी प्रेरणा ले सकता है।
शिवा जी ने अपने शासन के तहत जनहित के कार्यों एवं चहुँमुखी विकास के लिए एक अष्ट प्रधान मंडल की व्यवस्था की थी। ये अष्ट प्रधान मंडल के रूप में जाना जाता था। इसमें आठ मंत्रियों की सीटें थीं, इसे आप नीचे समझ सकते हैं:
मोरो पंत, पेशवा या मुखिया प्रधान – पेशवा को प्रशासन के सभी प्रमुख कार्यों की जिम्मेदारी दी जाती थी।
नारो नीलकंठ और रामचंद्र नीलकंठ, अमात्य – पूरे राज्य की आय और व्यय का लेखा-जोखा देखने की जिम्मेदारी दी गई थी।
रघुनाथ राव के पुत्र, पंडित राव : सभी धार्मिक कार्यों पर अधिकार क्षेत्र दिया गया। सही क्या है और क्या गलत है, इसका फैसला करने के बाद उन्हें दंडित करने का भी अधिकार प्राप्त था।
हम्बीर राव मोहिते, सेनापति (सेना को मजबूत बनाए रखने, युद्ध और अभियान का दायित्व)
दत्ताजी त्र्यंबक, मंत्री (राज्य के राजनीतिक और राजनयिक मामलों का सावधानीपूर्वक संचालन करने की जिम्मेदारी)
रामचंद्र पंत सुमंतव (विदेश मामलों का प्रभार)
अन्नाजी पंत, सचिव (शाही पत्र-व्यवहार को ध्यान से देखने और जब भी कोई पत्र छूट जाए तो उसमें आवश्यक सुधार करने की जिम्मेदारी)
नीराजी राउजी, न्यायाधीश (राज्य में सभी मुकदमों निस्तारित करने और न्याय देने का अधिकार)
छत्रपति शिवा जी की शासन में कृषि व्यवस्था
शिवाजी की कृषि को प्रोत्साहित करने की नीति के बारे में सभासद लिखते हैं:
“जो नए किसान आएँगे, हमारे राज्य में बसने के लिए, उन्हें मवेशी दिए जाने चाहिए। उन्हें बीज देने के लिए अनाज और पैसा दिया जाना चाहिए।”
कृषि और किसानों के हित में शिवाजी ने अनेकों उल्लेखनीय कार्य किए।
शिवा जी की राजमुद्रा
शिवाजी की राजमुद्रा संस्कृत में लिखी हुई एक अष्टकोणीय मुहर (Seal) थी, जिसका उपयोग वे अपने पत्रों एवं सैन्य सामग्री पर करते थे। उनके हजारों पत्र प्राप्त हैं, जिन पर राजमुद्रा लगी हुई है। मुद्रा पर लिखा वाक्य इस तरह है-
प्रतिपच्चंद्रलेखेव वर्धिष्णुर्विश्ववंदिता शाहसुनोः शिवस्यैषा मुद्रा भद्राय राजते। (अर्थात : जिस प्रकार बाल चन्द्रमा प्रतिपद (धीरे-धीरे) बढ़ता जाता है और सारे विश्व द्वारा वन्दनीय होता है, उसी प्रकार शाहजी के पुत्र शिव की यह मुद्रा भी बढ़ती जाएगी।)
छत्रपति शिवाजी महाराज का शासन भोंसले घराने का शासन नहीं था। उन्होंने परिवारवाद को राजनीति में स्थान नहीं दिया। उनका शासन सही अर्थ में प्रजा का शासन था। शासन में सभी की सहभागिता रहती थी। सामान्य मछुआरों से लेकर वेदशास्त्र पंडित सभी उनके राज्यशासन में सहभागी थे। छुआछूत का कोई स्थान नहीं था। पन्हाल गढ़ की घेराबंदी में नकली शिवाजी जो बने थे, उनका नाम था, शिवा काशिद। वे जाति से नाई थे।
अफजलखान के समर प्रसंग में शिवाजी के प्राणों की रक्षा करनेवाला जीवा महाला था। आगरा के किले में कैद के दौरान उनकी सेवा करने वाला मदारी मेहतर था। उनके किलेदार सभी जाति के थे।
1645 के आसपास शिवाजी ने अपनी रणनीति से बीजापुर सल्तनत के तहत पुणे के आसपास इनायत खां से तोरण, फिरंगोजी नरसाला से चाकन और आदिलशाह के गवर्नर से कोंडाना किले जीते। इसके साथ ही सिहंगढ़ और पुरंदर के किले भी उनके अधिपत्य में शामिल थे। प्रतापगढ़ के युद्ध में शिवाजी के नेतृत्व में मराठा सेना ने बीजापुर सल्तनत के 3000 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। बीजापुर सल्तनत के साथ संघर्ष के चलते शिवाजी, औरंगजेब के निशाने पर आ गए। शिवाजी हिन्दू धर्म व परंपरा के प्रबल पक्षधर थे, इसलिए उनके प्रत्येक अच्छे कार्य व अभियान का श्रीगणेश दशहरे के अवसर पर होता था।
तलवार के बल पर इस्लामीकरण हो रहा था। शिवाजी महाराज की दृष्टि क्या थी? विदेशी मुसलमानों को चुन-चुन कर उन्होंने बाहर कर दिया। अपने ही समाज से मुस्लिम बने समाज के वर्ग को आत्मसात करने हेतु अपनाने की प्रक्रिया उन्होंने चलाई। कुतुबशाह को अभय दिया। लेकिन अभय देते समय यह बताया कि तुम्हारे दरबार में जो तुम्हारे पहले दो वजीर होंगे, वे हिंदू होंगे। उसके अनुसार व्यंकण्णा और मादण्णा नाम के दो वजीर नियुक्त हुए और दूसरी शर्त ये थी कि हिंदू प्रजा पर कोई अत्याचार नहीं होगा।
छत्रपति शिवाजी महाराज ने करीब साढ़े तीन सौ साल पहले स्वराज्य, स्वधर्म, स्वभाषा और स्वदेश के पुनरुत्थान के लिए जो कार्य किया है… उसकी तुलना नहीं हो सकती। उनका राज्याभिषेक एक व्यक्ति को राजसिंहासन पर बिठाना, इतने तक सीमित नहीं था। शिवाजी महाराज मात्र एक व्यक्ति नहीं, वे एक महान विचार… एक महान प्रेरणापुंज और एक युगप्रवर्तन के शिल्पकार हैं।
भारत एक सनातन देश है, यह हिंदुस्थान है, और यहाँ पर अपना राज होना चाहिए… अपने धर्म का विकास होना चाहिए, अपने जीवनमूल्यों को चरितार्थ करना चाहिए… शिवाजी महाराज का जीवनसंघर्ष इसी सोच को प्रस्थापित करने के लिए था। वे बार-बार कहा करते थे, “यह राज्य हो, यह परमेश्वर की इच्छा है। मतलब स्वराज्य संस्थापना यह ईश्वरीय कार्य है। मैं ईश्वरीय कार्य का केवल एक सिपाही हूँ।”
गुजरात के आणंद जिले में साम्प्रदायिक हिंसा की खबर है। बताया जा रहा है कि झड़प में 4 लोग घायल हुए हैं जिसमें एक पुलिस का सिपाही भी शामिल है। घटना की शुरुआत एक मंदिर के पास जमीन के लिए तनातनी से हुई बताई जा रही है। हालात काबू करने के लिए पुलिस को ऑंसू गैस के गोले छोड़े पड़े। अब तक कुल 14 की गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है। घटना शनिवार (11 जून) की बताई जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विवाद बोरसद कस्बे में हुआ है। यहाँ पर ब्राह्मणवाडा मोहल्ले में कुछ लोग मंदिर के बगल की एक जमीन पर ईंटे बिछा रहे थे। वह जमीन विवादित बताई जा रही है। दूसरे पक्ष ने इसका विरोध किया तो मामला तू-तू मैं-मैं से हाथापाई तक जा पहुँचा। देखते ही देखते एक पक्ष पथराव करने लगा। घटना की जानकारी पुलिस को हुई तो उन्होंने मौके पर पहुँच कर मोर्चा संभाला। हालत काबू करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के 50 गोले और रबर की 30 गोलियाँ चलानी पड़ी।
पथराव की चपेट में आने से 3 लोगों को चोटें आईं। एक पुलिस कॉन्स्टेबल को चाकू मार दी गई है। हालत गंभीर होने के चलते सिपाही को वडोदरा के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। फ़िलहाल हालत काबू में हैं। इलाके में भारी फ़ोर्स की तैनाती की गई है।
DSP डी आर पटेल ने बताया, “दोनों समुदायों से शाँति स्थापित करने की अपील की गई है। शहर के 15 संवेदनशील जगहों को चिह्नित कर के वहाँ फ़ोर्स की तैनाती की गई है।” इस घटना में चाकूबाजी भी होने का दावा किया गया है। घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। बाकी आरोपितों की धर-पकड़ और पहचान के लिए पुलिस टीमें काम कर रही हैं। पुलिस ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और उस पर ध्यान न देने की अपील की है।
आंध्र प्रदेश सरकार को शराब बॉन्ड से 8000 करोड़ रुपए मिले हैं। सरकार ने पिछले दिनों ‘एपी बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड’ के माध्यम से बॉन्ड जारी किया था। इस पर सरकार को काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। शुक्रवार (10 जून, 2022) को इसमें बड़ा उछाल देखने को मिला। इससे सरकार को 8000 करोड़ रुपए मिले हैं।
जानकारी के मुताबिक, सरकार ने गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (NCD) की पेशकश करके कम से कम 2000 करोड़ रुपए जुटाने का प्रस्ताव रखा था। हालाँकि मार्केट में इसको लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने डेक्कन क्रॉनिकल को बताया, “फिलहाल हम केवल 8000 करोड़ रुपए का इस्तेमाल करना चाहते हैं।”
In 2018 @ncbn created record on Amaravathi My Brick share ?? Present Tuklak CM of Andhra Pradesh ? bumper offer on liquor bonds ? People of AP are paying Taxes fpr alcohol with additional bonus debts inflation ?? ??♂️ #Jaganna Sanka nakandi ? pic.twitter.com/CZx7R5CNEa
इससे पहले, तेलुगु देशम सरकार ने ‘अमरावती विकास निगम’ के माध्यम से बड़ी धूमधाम से बिक्री के लिए बॉन्ड जारी किया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने ‘बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज’ समारोह में हिस्सा लिया था।
उस समय 10.52 फीसदी ब्याज दर वाले अमरावती बॉन्ड की बिक्री से 2000 करोड़ रुपए मिले थे। इस बार मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 7.5 प्रतिशत की आधार ब्याज दर तय की थी, लेकिन यह 9.5 प्रतिशत पर जाकर फिक्स हुई। पिछले वित्त वर्ष में शराब की बिक्री से राजस्व दोगुना होकर 18,000 करोड़ रुपए हो गया था, जो इससे पिछले साल 9,000 करोड़ रुपए था।
रेटिंग एजेंसियों – क्रिसिल और इंडिया रेटिंग – ने पेश किए जा रहे बॉन्ड को स्थिर श्रेणी में रखा गया। इंडिया रेटिंग ने कई कारकों के आधार पर “प्रोविजनल एए (CE) स्टेबल” दिया, जिसमें थोक और खुदरा शराब व्यापार दोनों के मालिक होने की मौजूदा नीति में बदलाव नहीं करने की सरकार की प्रतिबद्धता शामिल है।
दिलचस्प बात यह है कि इंडिया रेटिंग की रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने यह भी वचन दिया कि वह मादक पेय पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध नहीं लगाएगी। नोट में कहा गया है, “अगर सरकार शराब की बिक्री और खपत पर प्रतिबंध लगाती है, तो वह इस तरह के अधिरोपण की तारीख से तीन महीने के भीतर सभी बकाया बॉन्डों का समय से पहले आरोपण सुनिश्चित करेगी।”