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महामहिम नहीं कठपुतली: जब सोमनाथ और हिंदू कोड बिल पर राजेंद्र प्रसाद ने निकाली नेहरू की हेकड़ी, बताया- सेक्युलरिज्म मतलब संस्कारों से दूर होना नहीं

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद से अक्सर बचते थे। असल में नेहरू चाहते भी नहीं थे कि राजेंद्र प्रसाद दोबारा राष्ट्रपति बनें, लेकिन डॉ प्रसाद की लोकप्रियता के कारण उनके मंसूबे सफल नहीं हो पाए। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद एक आध्यात्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे, जो ज्योतिष में भी विश्वास रखते थे। भारतीय सनातन संस्कृति में उनकी अटूट श्रद्धा थी। जबकि नेहरू वामपंथी वाला झुकाव रखते थे।

ये भी जगजाहिर है कि डॉ राजेंद्र प्रसाद को राष्ट्रपति बनने से रोकने के लिए नेहरू ने झूठ बोला था। 1957 में जवाहरलाल नेहरू एस राधाकृष्णन को राष्ट्रपति बनाना चाहते थे। इसी तरह वो 1952 में चक्रवर्ती राजगोपालचारी के पक्ष में थे। लेकिन उन्हें दोनों बार निराशा हाथ लगी। नेहरू ने 1950 में डॉ प्रसाद को चिट्ठी लिख कर राष्ट्रपति का चुनाव न लड़ने की सलाह दी और कहा कि सरदार पटेल भी ऐसा ही चाहते हैं। जबकि, उन्होंने पटेल की कोई सहमति नहीं ली थी।

डॉ राजेंद्र प्रसाद के आखिरी दिन: जवाहरलाल नेहरू ने किया अनदेखा

अरबपति कारोबारी और पूर्व राज्यसभा सांसद रवींद्र किशोर (RK) सिन्हा ने अपनी पुस्तक ‘बेलाग लपेट‘ में इसका विस्तृत रूप से जिक्र करते हुए बताया है कि कैसे 12 वर्षों तक राष्ट्रपति रहने के बाद जब राजेंद्र प्रसाद पटना जाकर रहने लगे, तब नेहरू ने उनके लिए एक सरकारी आवास तक की व्यवस्था नहीं की थी। वो सदाकत आश्रम स्थित बिहार विद्यापीठ में एक सीलन वाले कमरे में रहते थे। दमा के रोगी थे, लेकिन उनके स्वास्थ्य का कोई ख्याल नहीं रखा गया।

इस दौरान भारतीय संविधान सभा के प्रथम अध्यक्ष और भारत के पहले राष्ट्रपति से मिलने पहुँचे जयप्रकाश नारायण से उनकी हालत देखी नहीं गई। 28 फरवरी, 1963 को जिस कमरे में डॉ राजेंद्र प्रसाद का निधन हुआ, उसे किसी तरह अपने सहयोगियों के साथ मिल कर जयप्रकाश नारायण ने ही रहने लायक बनाया था। उनके अंतिम संस्कार में भाग लेने भी नेहरू नहीं पहुँचे। वो इस दौरान जयपुर में ‘तुलादान’ नामक एक साधारण से कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे।

उस समय संपूर्णानंद राजस्थान के राज्यपाल थे और उनकी बड़ी इच्छा थी कि वो डॉ प्रसाद की अंत्येष्टि में भाग लेने पटना जाएँ, लेकिन उन्हें नेहरू ने ये कहते हुए रोक दिया कि प्रधानमंत्री के दौरे में राज्यपाल ही नदारद रहेगा तो ये ठीक नहीं होगा। संपूर्णानंद ने खुद इसका खुलासा किया है। दिल्ली में बैठे बिहार के बड़े नेताओं ने राजेंद्र बाबू के अंतिम दर्शन नहीं किए, इसका संपूर्णानंद को मलाल था। डॉ राधाकृष्णन को भी नेहरू ने पटना न जाने की सलाह दी थी, लेकिन वो गए।

आरके सिन्हा लिखते हैं कि पटना में राजेंद्र बाबू के साथ बेरुखी वाला व्यवहार होना और उन्हें मामूली स्वास्थ्य सुविधाएँ तक न मिलना, ये सब केंद्र के इशारे पर हुआ था। कफ निकालने वाली एक मशीन उनके कमरे में थी, जिसे राज्य सरकार ने पटना मेडिकल कॉलेज में भिजवा दिया। वो खाँसते-खाँसते चल बसे। ये भी जानने लायक बात है कि सोमनाथ मंदिर को लेकर भी जवाहरलाल नेहरू और डॉ राजेंद्र प्रसाद में तनातनी हुई थी।

जवाहरलाल नेहरू ने डॉ राजेंद्र प्रसाद से कहा था – सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन करने मत जाइए

क्या डॉ प्रसाद के सामने नेहरू खुद को इतना बौना महसूस करते थे कि उनके सरल और ऊँचे व्यक्तित्व के कारण अपने मन में हीन भावना पैदा कर ली थी? राष्ट्रपति का पद बड़ा होता है, लेकिन नेहरू क्यों हमेशा डॉ प्रसाद को आदेश देने की मुद्रा में रहते थे? 1951 में किसी तरह गुजरात के सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन हुआ। इस मंदिर को बनवाने के लिए तत्कालीन केंद्रीय मंत्री केएम मुंशी ने दिन-रात एक कर दिया था। उन्हें सरदार पटेल का भी सहयोग मिला था।

ज्ञात हो कि महात्मा गाँधी ने महमूद गजनी द्वारा ध्वस्त किए गए सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार में सरकारी रुपया खर्च न करने की बात कही थी, जिसके बाद चंदा जुटा कर इसे बनवाया गया। नेहरू का कहना था कि एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के प्रमुख को मंदिर के उद्घाटन से बचना चाहिए। लेकिन, डॉ प्रसाद मंदिर में शिव मूर्ति की स्थापना में बतौर मुख्य अतिथि पहुँचे। उनका कहना था कि सेकुलरिज्म का ये मतलब थोड़े ही है कि कोई अपने संस्कारों से दूर हो जाए अथवा धर्म का विरोधी हो जाए?

उन्होंने मंदिर के उद्घाटन के दौरान कहा भी था कि हमारा देश धर्मनिरपेक्ष तो है, लेकिन नास्तिक नहीं है। वो सभी धर्मों के प्रति समान और सार्वजनिक सम्मान के प्रदर्शन के हिमायती थे। ये भी याद कीजिए कि कैसे डॉ प्रसाद को सोमनाथ मंदिर जाने से रोकने वाले नेहरू खुद 1956 में कुंभ में डुबकी लगाने प्रयागराज पहुँच गए थे और अचानक दौरे से फैली अव्यवस्था ने 800 लोगों की जान ले ली थी। ये दोहरा रवैया आखिर क्यों था?

असल में 1947 में जूनागढ़ रियासत की आज़ादी के समय सरदार पटेल सोमनाथ गए थे, जहाँ उन्हें मंदिर को जीर्णशीर्ण आस्था में देख कर दुःख हुआ। रजनीकांत पुराणिक अपनी पुस्तक ‘Nehru’s 127 Major Blunders‘ में लिखते हैं कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना आज़ाद इसे खंडहर ही बने रहने देना चाहते थे और इसे ASI को सौंपने की वकालत कर रहे थे। हाँ, मजारों-मस्जिदों की मरम्मत के समय उनके पास ऐसा कोई सुझाव नहीं होता था।

सरदार पटेल के निधन के बाद केएम मुंशी ने इसका जिम्मा सँभाला, जिन पर तंज कसते हुए नेहरू ने कहा था कि उन्हें ये प्रयास पसंद नहीं, क्योंकि ये ‘हिन्दू पुनरुत्थानवाद’ है। जब डॉ प्रसाद को इसके उद्घाटन का न्योता आया तो नेहरू ने उन्हें पत्र भेज कर वहाँ न जाने की सलाह दी, क्योंकि उन्हें लगता था कि इसके कई निहितार्थ हैं। डॉ प्रसाद ने स्पष्ट कर दिया कि वो मंदिर के उद्घाटन के लिए जाएँगे, किसी मस्जिद-चर्च के लिए भी उन्हें न्योता मिला होता तो वो जाते।

हिन्दू कोड मिल पर भी दिखाया आईना

डॉ प्रसाद और जवाहरलाल नेहरू के बीच ‘हिन्दू कोड बिल’ पर भी एक राय नहीं बन पाई। जवाहरलाल नेहरू का कहना था कि इस कानून से हिन्दुओं का पारिवारिक जीवन व्यवस्थित होगा। तब डॉ प्रसाद का कहना था कि लोगों के जीवन और संस्कृति को इतने बड़े स्तर पर प्रभावित करने वाला कानून नहीं लाया जाना चाहिए। 1951 में इसे संसद में लाया गया था, लेकिन नेहरू ने इसे 1948 में भी पारित करने की कोशिश की थी।

तब डॉ प्रसाद ने अध्यक्ष रहते इसका विरोध करते हुए कहा था कि संविधान सभा किसी संप्रदाय के व्यक्तिगत कानून से निपटने के लिए नहीं, देश के संविधान के निर्माण के लिए बना है। 1951 में जब फिर से ये बिल लाया गया, तब डॉ प्रसाद का मत था कि पहला लोकसभा चुनाव हो जाने के बाद जो संसद गठित हो, उसमें इस पर विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उस समय की संसद एक कार्यवाहक निकाय थी, जिसे संविधान के निर्माण के लिए बनाया गया था।

चुनाव में 4 महीने ही थे, ऐसे में जवाहरलाल नेहरू की हड़बड़ी समझ से परे थी। राजेंद्र प्रसाद ने तब पीएम नेहरू को लिखे पत्र में कहा था कि संसद चाहे तो विवाह प्रथा ख़त्म करने या किसी समाज में बहु-विवाह को लागू करने का कानून भी बना सकती है, परन्तु इस प्रकार का क्रांतिकारी परिवर्तन के लिए मतदाताओं का विचार नहीं लिया गया है। उन्होंने बता दिया कि इस सम्बन्ध में अब तक जो भी लोकमत आया है, वो इस बिल के खिलाफ ही है।

डॉ प्रसाद ने लिखा था, “हमारा संविधान बहुत हद तक इंग्लैंड के संविधान को नमूना मान कर बनाया गया है। जहाँ हमारा संविधान ऐसा आवश्यक नहीं मानता, वहाँ भी मुझे सलाह दी जाती है कि मैं इंग्लैंड में चल रही परिपाटी के हिसाब से ही कार्य करूँ। आज उसी इंग्लैंड में आम चुनाव में मतदाताओं के सामने मुद्दा रख कर उनकी स्पष्ट स्वीकृति पाए बना वहाँ की सरकार ऐसा प्रस्ताव ला सकती है या संसद ऐसा कानून बना सकती है, ये मेरे कल्पना के बाहर है।”

हिन्दुओं के सिविल कोड में अंग्रेजों ने भी ज्यादा हस्तक्षेप नहीं किए थे, लेकिन नेहरू इसके लिए जिद पर अड़े हुए थे। भारी विरोध के बाद 1952-47 लोकसभा के बीच इसे तीन टुकड़ों में लाया गया। किसी अन्य जाति में शादी, तलाक और बहुविवाह के सम्बन्ध में अलग-अलग कानून बनाए गए। संपत्ति में हिस्सेदारी से लेकर गोद लेने तक के नियमों में बदलाव किया गया। माँग UCC (समान नागरिक संहिता) की हो रही थी, लेकिन नेहरू हिन्दुओं के पीछे पड़े थे।

‘क्या पाकिस्तान को दे देना चाहिए कश्मीर?’: MPPSC की परीक्षा में पूछा सवाल, प्रोफेसर अब नहीं तैयार कर पाएगा प्रश्न पत्र

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा में कश्मीर पर पूछे गए विवादित सवाल पर आयोग ने पेपर सेट करने वाले पर एक्शन लिया है। लोक सेवा आयोग ने पेपर सेट करने वाले पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उस पर भविष्य में प्रश्न पत्र तैयार करने पर रोक लगा दी है। वहीं प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने भी इस संबंध में ट्​वीट किया है। उन्होंने कहा, “MPPSC की परीक्षा में कश्मीर से जुड़ा विवादित प्रश्न पूछने का प्रसंग आपत्तिजनक है। विवादास्पद प्रश्न पूछने वाले दोनों पेपर सेटर्स पर भविष्य में प्रश्न पत्र तैयार करने पर रोक लगा दी गई है।”

दरअसल, मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की रविवार (19 जून 2022) को हुई राज्य सेवा एवं वन सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कश्मीर को लेकर एक विवादित प्रश्न पूछा गया था, “क्या भारत को कश्मीर पाकिस्तान को देने का फैसला करना चाहिए?” पूछा गया था।

उत्तर चुनने के 2 तर्क भी दिए गए थे-

  1. हाँ, इससे भारत का धन बचेगा
  2. नहीं, ऐसे निर्णय से इसी तरह की और भी माँगे बढ़ जाएँगी।

यह हम सभी जानते हैं कि कश्मीर हमारा अभिन्न अंग है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर पेपर सेट करने वाले के खिलाफ आक्रोश फैल गया है। वहीं, मामले को गंभीरता से लेते हुए आपत्तिजनक सवाल पूछने वाले पर कड़ी कार्रवाई की गई है। लोक सेवा आयोग ने प्रश्नपत्र सेट करने वाले को नोटिस भेजते हुए MPPSC के सभी कामों को करने से रोक लगा दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आयोग ने प्रश्नपत्र बनाने वाले को नोटिस जारी करते हुए लिखा कि इस सवाल के अवलोकन के बाद संज्ञान में आया है कि प्रश्न विवादास्पद है। इसके साथ ही सवाल तैयार करने के दौरान दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। इसे कदाचरण की श्रेणी में मान कर आपको भविष्य के लिए आयोग के सभी कार्यों से हटाया जाता है।

मध्य प्रदेश की बोर्ड परीक्षा में पूछा गया भारत-विरोधी सवाल

गौरतलब है कि मार्च 2020 में भी, मध्य प्रदेश में दसवीं की बोर्ड की परीक्षा में सामाजिक विज्ञान के पेपर में ‘आजाद कश्मीर’ को लेकर सवाल पूछा गया था। आज़ाद कश्मीर’ शब्द का इस्तेमाल पाकिस्तान कश्मीर के उस हिस्से के लिए करता है जिस पर उसने कब्जा कर रखा है, यानी ‘पाक अधिकृत कश्मीर’ अथवा ‘Pakistan Occupied Kashmir (PoK)’ के लिए करता है।

बता दें कि पाक द्वारा कब्जा किए हुए इलाक़े को ‘आज़ाद’ कह कर मध्य प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने भारत विरोधी स्टैंड को आगे बढ़ाया था। उस वक्त राज्य में विपक्षी पार्टी भाजपा ने इस प्रश्न-पत्र को लेकर सवाल उठाए थे। तब भाजपा ने कहा था कि राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार है, ऐसे में इन सवालों का पूछा जाना आश्चर्य की बात नहीं है। पार्टी ने यह भी कहा था कि कॉन्ग्रेस तो वैसे भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अलगाववादी आन्दोलनों का समर्थन करती रही है।

हरियाणा के करनाल में स्कूल-कॉलेज की दीवार पर लिखे मिले खालिस्तानी नारे, पंजाब में मंदिर की दीवार पर लिख दिया था ‘खालिस्तान जिंदाबाद’

हरियाणा के करनाल में खालिस्तान के समर्थन में नारे लिखे जाने का मामला सामने आया है। ये नारे डीएवी स्कूल और दयाल सिंह कॉलेज की दीवारों पर लिखे गए थे। इससे पहले पंजाब के संगरूर में भी काली माता मंदिर की दीवार पर खालिस्तान समर्थक नारे लिखे मिले थे।

करनाल के एसपी गंगा राम पुनिया ने बताया कि डीएवी स्कूल और दयाल सिंह कॉलेज के सामने की दीवार पर खालिस्तान के संबंध में कुछ नारे लिखे थे। सूचना मिलने पर पुलिस की टीम मौके पर पहुँची और घटनास्थल की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करवाई गई। इसके बाद खालिस्तानी नारे को मिटा दिया गया।

पुलिस ने कहा कि थाना सिविल लाइन में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ धारा 153A, 120B और UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

वहीं संगरूर में ये नारे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दौरे से पहले लिखे मिले थे। संगरूर में चुनाव आचार संहिता भी लागू है। 23 जून 2022 को यहाँ उपचुनाव के लिए मतदान होना है। इससे पहले पंजाब के जालंधर में जालंधर शक्ति पीठ, देवी तालाब मंदिर के पास दीवारों पर खालिस्तान समर्थक नारे लिखे पाए गए थे। इस महीने की शुरुआत में, पंजाब के फरीदकोट में एक सेशन कोर्ट के जज के आवास की दीवारों पर खालिस्तान समर्थक नारे लिखे गए थे। पिछले महीने, हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में भी राज्य विधानसभा की दीवारों और गेट पर खालिस्तानी झंडे बाँधे गए थे और साथ ही नारे लिखे गए थे।

इतना ही नहीं ऑपरेशन ब्लूस्टार की 38वीं बरसी पर भी स्वर्ण मंदिर में खालिस्तान समर्थक नारे भी लगे थे। बताया गया कि कट्टरपंथी सिख संगठनों और शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के समर्थकों ने नारेबाजी की थी। युवकों ने बैनर और तख्तियों पर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ लिखा हुआ था और जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहन रखी थी। इसके अतिरिक्त किसान आंदोलन के दौरान भी ऐसी अलगाववादी घटनाएँ देखने को मिली थी।

नौकरी-मकान का लालच दे बनाते मेंबर, मदरसा में कबूल करवाते इस्लाम: हिंदुओं को मुस्लिम बनाने वाला रैकेट पकड़ा गया

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में इस्लामिक धर्मान्तरण का एक बेहद चौकाने वाला मामला सामने आया है। जहाँ इस्लामिक संगठन के जरिए बेरोजगार हिन्दू युवकों को अपना निशाना बनाते हुए अवैध धर्मान्तरण किया जा रहा था। इस्लामिक संगठन की आड़ में मदरसे में इस कथित इस्लामिक धर्मांतरण रैकेट का उस वक्त भंडाफोड़ हुआ, जब वाराणसी जिले के रहने वाले सुधांशु चौहान ने धर्मांतरण करने से साफ इनकार कर दिया।

क्या है मामला

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बेरोजगार हिन्दू युवकों को इस्लाम कबूल करवाने से पहले किसी बड़ी कंपनी में नौकरी, मकान और लाखों रुपए कमाने का सपना दिखाकर पहले अपने संगठन का सदस्य बनाते हैं। और जब हिन्दू युवक इस्लामिक संगठन का सदस्यता ले लेता है तो उसे मदरसे में भेजा जाता है, जहाँ पर मदरसे का मौलवी हिन्दू युवकों को इस्लाम कबूल करने और उसका प्रचार-प्रसार करने की एक सप्ताह की ट्रेनिग देता है। पूरी प्रक्रिया के तहत सख्त निगरानी राखी जाती थी। इस ट्रेनिंग के दौरान जब मौलवी बेरोजगार हिन्दू युवाओं का ब्रेनवॉश करने में कामयाब हो जाता है तो उनका जबरन धर्मांतरण करवा देता है।

ऐसे हुआ खुलासा

रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी के रहने वाले सुधांशु चौहान को इस्लाम कबूल करवाकर मुस्लिम बनाने की कवायद चल रही थी। जिसपर उसने साफ मना कर दिया। लेकिन सुधांशु के मना करने के बाद मदरसे में ही उसे कई दिनों तक बंधक बनाकर बुरी तरह से शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

मामले की भनक परिवार को लगते ही सुधांशु के परिजन केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के पास पहुँचे और उनसे अपने बेटे को इस्लामिक संगठन के चंगुल से छुड़ाने की गुहार लगाई। जिसपर मंत्री ने फतेहपुर जिले के मंत्री प्रतिनिधि अंशू सिंह सेंगर को फोन कर तत्काल पूरे मामले में कार्रवाई कराए जाने की बात कही। मामले का पता लगने के बाद शिकायत सदर कोतवाली पुलिस से की गई।

कहा जा रहा है कि धर्मान्तरण के इस मामले में केंद्रीय मंत्री के जिला प्रतिनिधि अंशू सिंह सेंगर ने सुधांशू चौहान के परिजनों से संपर्क कर पूरा घटनाक्रम जाना। वहीं पुलिस ने इस पूरे मामले में पुलिस ने एक्शन लेते हुए इस्लामिक संगठन की आड़ में लखनऊ बाईपास स्थित एक किराए के मकान में चल रहे मदरसे में दबिश डालकर कर 3 आरोपितों को मौके से गिरफ्तार कर लिया और मदरसे में ही बंधक बनाए गए हिन्दू युवक सुधांशु को भी बरामद कर फतेहपुर थाने ले आई।

पुलिस के मुताबिक, पीड़ित सुधांशू ने इस पूरे मामले में जानकारी देते हुए बताया कि वह वाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र के हबीबपुरा चंदुआ का रहने वाला है। 14 जून को गाजीपुर जिले के अरमान अली ने उसे फोन कर ट्रांसपोर्ट कंपनी में नौकरी दिलाने की बात कही थी। इस पर वह दो दिन बाद अरमान अली के बताए गए पते पर फतेहपुर आबकारी कार्यालय के पास पहुँचा, जहाँ से अरमान अली उसे तुराबअली का पुरवा ले गया और अगले दिन उसे एक मुस्लिम युवक के साथ लखनऊ बाईपास स्थित मार्केटिंग कंपनी के ऑफिस भेज दिया। जहाँ उनलोगों ने रजिस्ट्रेशन के नाम पर पहले 1000 रुपए और फिर बाद में 10000 और ले लिए गए।

सुधांशू ने आगे बताया कि जब वह 17 जून को उसी ऑफिस पहुँचा, तो वहाँ से से मोहसिन, यासीन नाम के मुस्लिम युवक उसे और करीब 20 हिंदू लड़कों को 30 से 40 मुस्लिम लोगों के साथ शहर के एक मदरसे में ले गए। मदरसे में उन्हें यह झाँसा दिया गया कि वह लोग उनके अनुसार चलेंगे तो हर महीने एक से दो लाख कमा सकते हैं। फिर सेमिनार के नाम पर एक तकरीर हुआ, जिसमें वक्ताओं ने इस्लामिक संगठन से जुड़कर रुपए कमाने की बात कही।

सुधांशू ने इस पूरे मामले से नकाब हटाते हुए बताया कि, 19 जून की सुबह करीब 50 हिंदू लड़कों और 100 मुस्लिम लड़कों के साथ उसे भी शहर के एक मस्जिद में ले गए। जहाँ उनके फोन वगैरह जब्त कर लिए गए और मस्जिद में मौजूद मौलवी ने मुस्लिम धर्म अपनाने और प्रचार-प्रसार की बात कही। जहाँ करीब सप्ताह भर की ट्रेनिंग के बाद उसे इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर करने लगे। लेकिन सुधांशु के इनकार करने पर मामला बिगड़ता नजर आया। और कहा जा रहा है कि मकान मालिक अलीम ने धर्म परिवर्तन के लिए उसे जबरन बाध्य करते हुए बंधक बना लिया था।

हालाँकि, बाद में परिजनों की शिकायत पर इस्लामी धर्मान्तरण के इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। वहीं इस्लामी संगठन के लोगों द्वारा बंधक बनाए गए सुधांशु को छुड़ा लेने के बाद इस मामले की जाँच की जा रही है। बता दें कि बाद में पुलिस ने सुधांशु की तहरीर पर कंपनी के हेड इकलाख, यासीन, मकान मालिक अलीम, मोहसिन, मौलवी, अरमान अली और उसके एक अज्ञात मुस्लिम साथी के खिलाफ बंधक बनाने, अवैध धर्म परिवर्तन, धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। वहीं गिरफ्तार किए गए मोहसिन, यासीन और मकान मालिक आलिम को पुलिस ने न्यायिक हिरासत में जेल भेजते हुए मौलवी सहित अन्य आरोपितों की तलाश तेज कर दी है।

कभी UGC के ‘बेस्ट टीचर’, आज अग्निपथ हिंसा के ‘गुरु’: पटना में घर-कोचिंग पर छापे, जानिए कौन हैं हिंदू लड़की से शादी करने वाले रहमान सर

केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के बाद बिहार के दानापुर में भड़की हिंसा मामले में गुरु रहमान के पटना के घर और उनके कोचिंग सेंटर पर पुलिस ने छापेमारी की। गुरु रहमान पर छात्रों को हिंसा के लिए भड़काने का आरोप है। पुलिस ने उन्हें इस केस में आरोपित बनाया है।

रहमान ने अपनी सफाई में कहा है कि वह इस योजना का विरोध कर रहे थे क्योंकि देश भर के अन्य छात्र इसके विरोध में हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा कि ये स्कीम न किसी को समझ आई और न किसी ने इसे समझाने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने (गुरु रहमान) फिर भी हमेशा बच्चों को अहिंसा पर चलने को कहा।

बता दें कि गुरु रहमान का ये बयान सामने आने के बाद हमने गुरु रहमान के वीडियो खंगाले। देख सकते हैं कि लाइव सिटीज से बात के दौरान उन्होंने साफ तौर पर छात्रों को कहा था कि वह बिना डरे ट्रेन रोक दें। वीडियो में गुरु रहमान कहते हैं- “ट्रेन रोक सकते हैं आप क्योंकि आपकी जिंदगी रोकी जा रही है।” इस वीडियो में उन्होंने दावा किया हुआ था कि सेना का भी प्राइवेटाइजेशन होने वाला है।

वीडियो में गुरु रहमान ने अग्निपथ योजना पर बात करते हुए सरकार से नाराजगी जताई। साथ ही विपक्ष को लेकर पूछा कि आखिर वो कहाँ गए हैं तो सत्ता में बैठी सरकार इतने गलत फैसले लेती जा रही है। वीडियो में रहमान कहते हैं कि वो किसी कीमत पर सरकार का साथ नहीं देंगे क्योंकि सरकार छात्रों के साथ अन्यायपूर्ण कार्य कर रही है।

बता दें कि बिहार हिंसा में कोचिंग सेंटरों पर गाज गिरी तो उनमें एक नंबर गुरु रहमान के कोचिंग का भी आया है। गुरु रहमान का कोचिंग सेंटर पटना के मशहूर कोचिंग सेंटरों में से एक है। इसके संचालक गुरु रहमान सारण जिले के बसंतपुर निवासी हैं। उन्होंने बीएचयू से प्राचीन भारत और पुरात्व में ग्रेजुएशन और मास्टर्स किया। इसके बाद कोचिंग में पढ़ाना शुरू किया। फिर पटना विश्वविद्यालय में अपनी सर्विस दी। वहाँ रहमान को यूजीसी से बेस्ट टीचर अवार्ड मिला।

टीवी 9 पर प्रकाशित जानकारी के अनुसार, 1997 में रहमान ने हिंदू लड़की अमिता से शादी करने का मन बनाया, जिसे परिवार द्वारा नहीं स्वीकारा गया। घर के लोग चाहते थे अमिता इस्लाम कबूले। मगर जब ऐसा नहीं हुआ तो रहमान ने अपनी बीवी के साथ घर छोड़ दिया। शादी के 7 साल रहमान ने पत्नी को लॉज में रखा। 2010 में दोनों के बेटी हुई और साथ ही एक कोचिंग सेंटर को शुरू किया गया। आज गुरु रहमान का कोचिंग सेंटर पटना के नामी कोचिंग संस्थानों में से एक माना जाता है।

छात्रों पर उनका इतना प्रभाव है कि पुलिस ने जब उपद्रवी छात्रों के मोबाइल खंगाले तो संबंधित स्कीम पर बात करते हुए उनके वीडियो छात्रों के मोबाइल में मिले। दानापुर पुलिस ने उनके विरुद्ध केस दर्ज किया है। इसी संबंध में सोमवार को उनके आवास पर छापेमारी की गई थी।

‘उद्धव पर हनुमान जी का प्रकोप, फडणवीस होंगे CM’: शिवसेना के बागी विधायकों के साथ सूरत में एकनाथ शिंदे, महाराष्ट्र का सियासी गणित बदला?

महाराष्ट्र (Maharashtra) में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के नेतृत्व में महाविकास अघाड़ी (MVA) की सरकार पर संकट के बादल छाए हुए हैं। एक तरफ वसूली मामले में आरोपित सचिन वाजे को दबाव डालकर बहाल कराने के आरोप सामने आए हैं तो दूसरी तरफ गठबंधन सरकार में बगावत के सुर उठने लगे हैं। जो हालात बने हैं, वह उद्धव ठाकरे सरकार के लिए सही साबित नहीं हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की कार्य-प्रणाली से गठबंधन सरकार के सहयोगी खुश नहीं हैं। इसका असर पहले राज्य सभा चुनावों और फिर महाराष्ट्र विधान परिषद की चुनावों में दिखा। हार के बाद ये सवाल उठने लगे हैं कि महाराष्ट्र की उद्धव सरकार अब कितने दिन की मेहमान है।

इधर, उद्धव ठाकरे की राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बने अमरावती से निर्दलीय विधायक रवि राणा (Ravi Rana) ने यह कहकर इन कयासों को और हवा दे दी है कि अगले दो महीनों में भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन जाएँगे।

राज्यसभा चुनावों में शिवसेना के संजय पवार की भाजपा के तीसरे उम्मीदवार धनंजय महाडिक से हार हुई थी। इसके बाद पार्टी के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा था कि बहुजन विकास आघाडी के हितेंद्र ठाकुर के तीन विधायकों और दो निर्दलीय विधायकों ने धोखा दिया, जिसकी वजह से हार का मुँह देखना पड़ा।

वहीं, विधान परिषद चुनावों में करारी हार के बाद मंथन के लिए सीएम उद्धव ठाकरे ने पार्टी की आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक में सभी विधायकों को शामिल रहने का सख्त निर्देश दिया गया है। हालाँकि, पार्टी के असंतुष्ट विधायक एकनाथ शिंदे अपने समर्थक विधायकों के साथ गुजरात के सूरत में हैं।

शिवसेना नेता संजय राउत ने सोमवार को कहा था कि शिवसेना के कुछ विधायक और एकनाथ शिंदे फिलहाल नहीं पहुँच से दूर हैं। उन्होंने कहा था कि एमवीए सरकार को गिराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन बीजेपी को यह याद रखना होगा कि महाराष्ट्र, राजस्थान या मध्य प्रदेश से बहुत अलग है।

सोमवार (20 जून 2022) को सामने आए विधान परिषद के 10 सीटों के नतीजों में भाजपा के 5 उम्मीदवार और शिवसेना एवं राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के दो-दो उम्मीदवार जीते हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस का उम्मीदवार जीता है। शिवसेना की इस हार में पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री एकनाथ शिंदे का हाथ बताया जा रहा है।

कहा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे की कार्य-प्रणाली से असंतुष्ट शिंदे ने अपने 20 समर्थक विधायकों के साथ क्रॉस वोटिंग की, जिसकी वजह से भाजपा को फायदा और शिवसेना को नुकसान हुआ है। यह सीधे तौर पर उद्धव ठाकरे से बगावत का बिगुल है। वह सूरत के एक होटल में अपने विधायकों के साथ हैं और आज 2 बजे के करीब प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। संभावना है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में वह कुछ बड़ी घोषणा करेंगे।

कहा जा रहा है कि शिंदे पार्टी और सरकार में अपनी उपेक्षा से नाराज हैं। मुख्यमंत्री ठाकरे और पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे के हस्तक्षेप के चलते वे शहरी विकास और लोक निर्माण (एमएसआरडीसी) समेत अपने विभागों को स्वतंत्र रूप से नहीं चला पाते हैं।

इतना ही नहीं, शिवसेना के शिंदे समर्थक विधायकों का भी आरोप है कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों के लिए सरकार द्वारा पर्याप्त राशि आवंटित नहीं की जाती है। इनका आरोप है कि रांकपा नेता और उप-मुख्यमंत्री अजित पवार दूसरी पार्टी के दलों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहे हैं।

यही आरोप कॉन्ग्रेस के नेताओं ने भी अजित पवार पर लगाया था और अपने हाईकमान से दिल्ली में मुलाकात की थी। वित्त और योजना विभाग अजीत पवार के पास ही है। हालाँकि, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे नहीं शिवसेना और कॉन्ग्रेस की नेताओं की आपत्तियों का निराकरण नहीं किया।

उधर कॉन्ग्रेस के दलित नेता और पूर्व मंत्री चंद्रकांत हंडोरे के विधान परिषद चुनाव में हार हुई है। कहा जा रहा है कि कॉन्ग्रेस के अगर सात विधायकों ने क्रॉस वोटिंग नहीं की होती हो तो भाई जगताप के साथ ही हंडोरे भी जीत गए होते। इस सब को लेकर चेंबूर में कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता अपने हाईकमान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और कॉन्ग्रेस मुर्दाबाद के नारे लगाए।

उधर एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद महाराष्ट्र सरकार में शामिल गठबंधन पार्टियों की NCP प्रमुख शरद पवार ने एक बैठक बुलाई है, लेकिन पार्टी में बगावत की आशंका के बीच संजय राउत शामिल नहीं होंगे। इधर भाजपा में भी राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।

रवि राणा का कहना है, “आने वाले दो महीने के भीतर उद्धव ठाकरे सीएम नहीं रहेंगे। देवेंद्र फडणवीस सीएम बनेंगे। गुप्त मतदान के बाद भाजपा के पास विधानसभा अध्यक्ष होगा। विधान परिषद के अध्यक्ष भी भाजपा के ही होंगे। शिवसेना और कॉन्ग्रेस के कई विधायक हमारे संपर्क में हैं। शिवसेना और कॉन्ग्रेस में बड़े पैमाने पर दलबदल देखने को मिलेगा। हम निश्चित रूप से अविश्वास प्रस्ताव लाएँगे।”

रवि राणा ने कहा, “सीएम ने हनुमान चालीसा का अपमान किया है। उन्होंने हिंदुत्व का गला घोंटा है। जो व्यक्ति भगवान हनुमान के लिए नहीं है, वह भगवान राम के पक्ष में कैसे हो सकता है? उद्धव ठाकरे को इसका भुगतना पड़ा है। हनुमान चालीसा पढ़ते हुए मैंने भविष्यवाणी की थी कि हनुमान जी उन्हें सबक सिखाएँगे। राज्यसभा के बाद उन्हें एक बड़ा झटका लगा।”

रवि राणा की भविष्यवाणी और महाराष्ट्र के हालात इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि उद्धव ठाकरे एक बड़े राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस भी शिवसेना से संतुष्ट नजर नहीं आ रही है।

योग दिवस पर इस्लामी कट्टरपंथियों का उपद्रव: मालदीव के स्टेडियम में घुसकर उखाड़े झंडे, भारत सरकार के आयोजन में शामिल लोगों को धमकियाँ

योग दिवस के मौके पर 21 जून को मालदीव के नेशनल फुटबॉल स्टेडियम में भारतीय सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में अचानक इस्लामी भीड़ ने घुसकर उपद्रव किया। सामने आई वीडियो में देख सकते हैं कि कट्टरपंथियों की भीड़ शोर करते हुए स्टेडियम में घुसी और तोड़फोड़ करना शुरू कर दिया।

वीडियो में अराजक भीड़ को झंडे उखाड़ते और ध्यान में बैठे लोगों को स्टेडियम से खदेड़ते देखा जा सकता है। कुछ अन्य विजुअल्स में स्टेडियम में खाने पीने का सामान उलटा पड़ा दिख रहा है। टेबल सारी पलटी पड़ी हैं। पीछे से जोर-जोर शोर मचाया जा रहा है।

पूरी घटना गलोलूह स्टेडियम की है। मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने ट्विटर पर बताया है कि मालदीव पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जो कोई भी इस घटना के लिए जिम्मेदार होगा उसे सजा दी जाएगी।

संबंधी मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि योग कर रहे कुछ लोगों ने स्टेडियम में घुसी भीड़ पर धमकी देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भीड़ ने उनसे फौरन स्टेडियम खाली करने को कह दिया था। लेकिन बाद में पुलिस ने स्थिति को संभाला और आँसू गैस छोड़ कर स्थिति को कंट्रोल किया।

बता दें कि योग और ध्यान का ये कार्यक्रम स्टेडियम में 6: 30 बजे भारतीय सांस्कृति केंद्र द्वारा भारत के युवा, खेल और सामुदायिक विकास मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया गया था। कई लोगों ने इसमें भाग भी लिया था। लेकिन भीड़ के उपद्रव के वजह से इसे जारी नहीं रखा जा सका। इस इवेंट में कई राजनयिक, सरकारी अधिकारी और मालदीव के मंत्री भी थे।

महिंद्रा के बाद टाटा भी अग्निपथ के साथ, जॉब में मिलेगी प्राथमिकता: हरियाणा के CM बोले- अग्निवीरों को राज्य में गारंटी के साथ मिलेगी नौकरी

केंद्र सरकार की सैन्य बहाली की नई योजना अग्निपथ को उद्योग जगत से भी समर्थन मिल रहा है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इस योजना की सराहना करते हुए अग्निवीरों को चार साल की सेवा के बाद टाटा समूह की कंपनियों में नौकरी में प्राथमिकता देने की बात कही है। वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ऐलान किया है कि अग्निवीरों को गारंटी के साथ राज्य में नौकरी दी जाएगी।

चंद्रशेखरन ने एक बयान में कहा, “अग्निपथ न केवल युवाओं के लिए देश के रक्षा बलों की सेवा करने का एक बड़ा अवसर है, बल्कि यह टाटा समूह समेत उद्योगों के लिए एक बहुत ही अनुशासित और प्रशिक्षित युवाओं को भी उपलब्ध कराएगा। हम अग्निवीरों की क्षमताओं को पहचानते हैं। टाटा समूह में उन्हें इस संबंध में अवसर प्रदान करने का स्वागत करते हैं।”

इससे पहले महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा भी इस योजना के समर्थन में आए थे। महिंद्रा ने कहा था, “अग्निपथ स्कीम के ऐलान के बाद जिस तरह हिंसा हुई उससे दुखी और निराश हूँ। पिछले साल जब इस स्कीम पर विचार किया गया था तब मैंने कहा था कि अग्निवीर को जो अनुशासन और कौशल मिलेगा वह उन्हें उल्लेखनीय रूप से रोजगार के लिए योग्य बनाएगा। महिंद्रा ग्रुप ऐसे प्रशिक्षित और सक्षम युवाओं को अपनी कंपनी में नौकरी देगा।”

इधर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 8वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर भिवानी में मंगलवार (21 जून 2022) को बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना से रिटायर्ड 75% युवाओं को हरियाणा सरकार नौकरी देगी। सीएम मनोहर लाल ने कहा कि सभी को पुलिस में वरीयता दी जाएगी। अग्निपथ के रिटायर्ड युवा ग्रुप C में भी भर्ती हो सकते हैं।

उन्होंने ट्वीट कर कहा, “मैं घोषणा करता हूँ कि ‘अग्निपथ योजना’ के तहत 4 वर्ष देश की सेवा करने के बाद वापस आने वाले अग्निवीरों को गारंटी के साथ हरियाणा सरकार में नौकरी दी जाएगी।” इससे पहले मध्य प्रदेश सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, उत्तराखंड सरकार ने भी ‘अग्निवीरों’ को उनकी सेवा समाप्त होने के बाद नौकरी देने का ऐलान किया था।

टेढ़ा मुँह, फूले होंठ, आँख बंद: सर्जरी ने बिगाड़ा एक और हिरोईन का चेहरा, एनेस्थीसिया की जगह डॉक्टर ने दिया सैलिसिलिक एसिड

साउथ की अभिनेत्री स्वाति सतीश हाल ही में रूट कैनाल सर्जरी करवाने के बाद पछता रही हैं। उनकी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं। तस्वीरों में उनका पूरा चेहरा टेढ़ा नजर आ रहा है। स्वाति के अनुसार, गलत ट्रीटमेंट के कारण उनके साथ ऐसा हुआ और इसके लिए पूरी तरह डॉक्टर जिम्मेदार है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वाति ने हाल में दाँतों के लिए रूट कैनाल सर्जरी करवाई थी लेकिन इसके बाद उनके पूरे चेहरे पर सूजन आ गई और दर्द शुरू हो गया। डॉक्टर से शिकायत की तो उसने कहा कि ये सामान्य बात है, दो-तीन दिन में चेहरा ठीक हो जाएगा। हालाँकि सर्जरी के 3 हफ्ते बीत जाने के बाद भी स्वाति का चेहरा वैसा का वैसा ही है। उनकी तस्वीरों में उनकी एक आँख बंद, मुँह टेढ़ा और होंठ फूले नजर आ रहे हैं।

कोई भी उनकी पहली और बाद की फोटो देखे तो नहीं कह सकता कि ये एक ही शख्स की है। स्वाति ने अपने चेहरे की हालत की वजह से घर से बाहर निकलना बंद कर दिया है। साथ ही तस्वीर शेयर करके डॉक्टर पर आरोप लगाया कि उसने एक्ट्रेस को ट्रीटमेंट के दौरान गलत और आधी-अधूरी जानकारी दी। ट्रीटमेंट के दौरान उन्हें एनेस्थीसिया न देकर सैलिसिलिक एसिड दिया गया था। इसका पता भी उन्हें तब चला जब वह दूसरे अस्पताल में गईं।

बता दें कि सर्जरी के कारण चेहरा बिगड़ने का ये कोई पहला मामला नहीं सामने आया है। पिछले महीने कन्नड़ धारावाहिकों की अभिनेत्री चेतना राज से जुड़ा केस भी खूब वायरल हुआ था जब उन्होंने चेहरे पर प्लास्टिक सर्जरी करवाई थी और उसके कारण उनकी मौत हो गई थी। खबर आई थी कि 16 मई को ‘फैट फ्री’ (fat-free plastic surgery) सर्जरी के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन शाम को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और उनके फेफड़ों में पानी जमा होने लगा, जिससे उनकी मौत हो गई।

एक्ट्रेस के माता-पिता ने भी बेटी की मौत के बाद डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि डॉक्टर की लापरवाही के कारण उनकी बेटी की असमय मौत हो गई। चेतना राज के माता-पिता ने अस्पताल के अधिकारियों के खिलाफ पास के थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी।

हिंदू महिला के शिशु का सिर काट गर्भ में छोड़ा, स्ट्रेचर पर तड़पते हुए Video बना किया वायरल: पाकिस्तान के सरकारी अस्पताल की घटना

पाकिस्तान में एक सरकारी अस्पताल के स्टाफ की घोर लापरवाही सामने आई है। सिंध प्रांत में एक ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने एक नवजात शिशु का सिर काटकर माँ के गर्भ में छोड़ दिया। इस वजह से महिला की जान खतरे में पड़ गई।

खबर मीडिया में आने के बाद जागी सरकार

पीड़ित हिंदू महिला भील है। उसकी उम्र 32 वर्ष है। इस घटना के मीडिया में आने के बाद सिंध सरकार ने जाँच के आदेश दिए हैं। साथ ही मामले की तह तक जाने और दोषियों का पता लगाने के लिए चिकित्सा जाँच बोर्ड का गठन किया है।

अनुभवहीन कर्मचारियों ने कर दी सर्जरी

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक प्रोफेसर राहिल सिकंदर ने बताया है कि पीड़ित हिंदू महिला थारपारकर जिले के एक दूर-दराज के गाँव की रहने वाली है। वह इलाज के लिए अपने क्षेत्र के एक ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र (RHC) गई थी। वहाँ कोई महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण उसकी सर्जरी अनुभवहीन कर्मचारियों ने कर दी, जिसकी वजह से उसकी जान पर बन आई।

मरने जैसी हो गई थी हालात

उन्होंने कहा कि आरएचसी के कर्मचारियों ने रविवार (19 जून 2022) को हुई सर्जरी के दौरान माँ के गर्भ में पल रहे नवजात शिशु का सिर काट दिया और उसके गर्भ में छोड़ दिया। इसके बाद महिला की तबियत बिगड़ती चली गई। जब महिला की मरने जैसी हालात हो गई तो उसे मीठी के नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। लेकिन वहाँ भी उसके इलाज के लिए कोई सुविधा नहीं थी। आखिरकार, उसका परिवार नेसे हैदराबाद के लियाकत यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल (LUH) ले आया, जहाँ गर्भ से शिशु का सिर निकाला गया और महिला की जान बच गई। 

बच्चे का सिर पेट में फँसा हुआ था

प्रोफेसर राहिल सिकंदर जमशोरो के लियाकत यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज (LUH) की स्त्री रोग इकाई के प्रमुख हैं। उन्होंने इस घटना के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। प्रोफेसर सिकंदर ने बताया कि बच्चे का सिर अंदर फँसा हुआ था और माँ के गर्भाशय की हालत भी खराब हो चुकी थी। इसलिए महिला की जान बचाने के लिए उसका पेट खोलना पड़ा और नवजात के सिर को बाहर निकाला गया। 

सिंध स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशक डॉ. जुमान बहोतो ने इस मामले में अलग से जाँच का आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जाँच समितियाँ पता लगा लगाएँगी कि क्या हुआ था, खासकर चाचरो के आरएचसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ और महिला कर्मचारियों की अनुपस्थिति को लेकर जाँच होगी। मीठी के जिला स्वास्थ्य अधिकारी को 24 घंटे के भीतर जाँच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

पीड़ित महिला का बनाया वीडियो

जुमान ने कहा कि जाँच समितियाँ उन रिपोर्टों पर भी गौर करेंगी, जिसमें महिला स्ट्रेचर पर तड़प रही थी और उसका वीडियो बनाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि अस्पताल के अंदर कुछ मेडिकल कर्मचारियों ने स्त्री रोग वार्ड में तड़पती महिला की तस्वीरें खींची, उसका वीडियो बनाया और फिर कई व्हाट्सएप ग्रुप में उसे शेयर किया गया। जाँच टीम इसकी भी जाँच करेगी, क्योंकि ये अमानवीयता है।