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पांडवों द्वारा स्थापित गढ़वाल का रहस्यमयी मंदिर: रानी कर्णावती ने शाहजहाँ की सेना को हराया, नाक कटने से लज्जित सेनापति ने कर ली थी आत्महत्या

उत्तराखंड (Uttarakhand) को देवभूमि कहा जाता है और यहाँ एक से बढ़ एक मानव को दिए गए प्रकृति के उपहार हैं। कलकल करतीं नदियाँ, हरियाली से आच्छादित भूमि, स्वर्ग को छूते प्रतीत होने वाले पहाड़, सुंदर एवं मनोरम घाटियाँ लोगों को अपनी तरफ आकृष्ट करती हैं। इसके साथ ही यहाँ अति प्राचीन मंदिरों की एक पूरी श्रृंखला भी है। इन्हीं में से एक है बिंदेश्वर महादेव (लोक भाषा में बिनसर महादेव) (Bindeshwar or Binsar Mahadev)का मंदिर है। इस मंदिर से महारानी कर्णावती (Maharani Karnavati) का भी इतिहास जुड़ा है, जिन्होंने मुगलों की हेकड़ी निकाल दी थी।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा (Almora) जिले में दूधातोली पर्वत श्रृंखला की चोटी पर देवदार, ओक और अन्य वृक्षों के घने जंगलों में 2,500 मीटर (8,202 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है बिनसर महादेव का मंदिर। यह दिव्यता, भव्यता और मनमोहकता के लिए विख्यात है।

कहा जाता है कि स्वर्गारोहन के दौरान पांडवों ने अंतिम बार यहाँ महादेव को स्थापित कर उनकी पूजा की थी। तब से इस मंदिर का महात्म्य बना हुआ है। यहाँ आने वाले भक्तों की मनोकामना भगवान महादेव जरूर पूरी करते हैं।

मंदिर (फोटो साभार: hmoob.in)

कहा जाता है कि गढ़वाल साम्राज्य के महाराजा महिपत शाह (Raja Mahipat Shah) के युद्ध में वीरगति प्राप्त करने के बाद राज्य की बागडोर महारानी कर्णावती (मेवाड़ के महाराणा सांगा की पत्नी कर्णावती या कर्मावती से अलग हैं ये) के हाथों में आ गया था। एक महिला को राज्य चलाते देख मुगलों ने आक्रमण कर दिया।

उस दौरान महारानी कर्णावती ने इस बिनसर मंदिर में रहकर अपने दुश्मनों का सामना किया था। कहा जाता है कि जब उनकी स्थिति कमजोर पड़ने लगी, तभी अचानक ओलावृष्टि (ओला गिरना) होने लगी। बड़े-बड़े ओलों की मार से परेशान दुश्मन भागने को मजबूर हो गए।

विख्यात अंग्रेज़ विद्वान एडविन एटकिंसन ने ‘हिमालयन गजेटियर’ (Himalayan Gazetteer) लिखा है कि इसके बाद महारानी ने इसे अपने कुलदेवता का आशीर्वाद समझा और वीणेश्वर महादेव (जो कालांतर में बिनसर महादेव हो गया) का जीर्णोद्धार हो गया।

महाराजा पृथु, पांडव और बिनसर मंदिर की स्थापना

इस मंदिर को लेकर कई कहानियाँ प्रचलित हैं। कहा जाता है कि यहाँ से शिवलिंग को महाराज पृथु (Raja Prithu) ने अपने पिता बिंदु की याद में स्थापित कराया था और इसका नाम बिंदेश्वर महादेव रखा था।

वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि बिनसर महादेव पांडवों ने स्थापित किया था। कहा जाता है कि पाँचों पांडव जब अपनी पत्नी सहित द्रौपदी के साथ स्वर्गारोहण के लिए जाने लगे तो उससे पहले महादेव का यही पूजन किया था। यह भी कहा जाता है कि पांडवों ने यहाँ पर अपना अज्ञातवास गुजारा था। यहाँ पर आज भी भीमघट नाम की एक शिला है। 

बिनसर महादेव शिवलिंग को स्वयंभू शिवलिंग और आदिकाल का बताया जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, स्थानीय लोगों ने देखा की एक गाय रोज एक पत्थर पर दूध गिराती है। गुस्साए ग्रामीणों ने गाय को धक्का देकर उस स्थान पर कुल्हाड़ी से वार किया तो खून निकलने लगा। कुल्हाड़ी का यह निशान आज भी उस शिवलिंग पर है। कहा जाता है कि उस बाद वहाँ रहने वाले मनिहार लोग गाँव छोड़ कर चले। आज भी इस मंदिर के आसपास दूर तक मानव बस्ती नहीं है।

मंदिर परिसर (फोटो साभार: hmoob.in)

मंदिर का वर्तमान स्वरूप 9-10वीं सदी में बनाया गया बताया जाता है। इस मंदिर में भगवान गणेश, हर गौरी और महिषमर्दिनी की मूर्तियाँ स्थापित की गई है। मंदिर की स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। महेशमर्दिनी की मूर्ति 9 वीं शताब्दी की तारीख में ‘नगरीलिपी’ में ग्रंथों के साथ उत्कीर्ण है। 

मंदिर को रहस्यमयी बताया जाता है। कहा जाता है कि इसके गर्भगृह में ठंडे पानी का एक गोलाकार, छोटा और गहरा जलाशय था, जो एक कुएँ जैसा दिखता था। इसके चारों ओर अनेक मूर्तियाँ रखी हुई थीं। जलाशय के अंदर एक सांप के रहने की बात कही गई थी। हालाँकि, इस कुएँ को अब पाट दिया गया है। इसमें एक अज्ञात देवता की मूर्ति भी बताई जाती है।

अज्ञात देवता की मूर्ति (फोटो साभार: hmoob.in)

मुगलों का नाक काटने वाली महारानी कर्णावती

सन 1622 में महाराजा श्याम शाह की मौत अलकनंदा में डूबने के कारण होगई। उसके बाद उनके पुत्र महाराजा महिपत शाह ने मुगलों की सत्ता को कई बार चुनौती दी। इतना ही नहीं, उन्होंने तिब्बत तीन बार आक्रमण किया, लेकिन 1631 में में वह युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो गए।

उस समय उनके बेटे पृथ्वी शाह की उम्र सिर्फ 7 साल थी। ऐसे राज्य की बागडोर महारानी कर्णावती के हाथों में आ गई। महारानी कर्णावती हिमाचल के राजपरिवार से थीं, इसलिए शासन कला में वह सिद्धहस्त थीं। लेकिन, एक महिला को शासन करते देख काँगड़ा का मुगल सूबेदार नजाबत खान (Nazabat Khan) ने मुगल बादशाह शाहजहाँ (Mughal Ruler Shahjahan) से आज्ञा लेकर 1635 में गढ़वाल की राजधानी श्रीनगर पर आक्रमण करने के लिए बढ़ चला।

17वीं शताब्दी भारत आए इटली के यात्री निकोलाओ मानूची ने कर्णावती और मुगलों के संघर्ष के बारे में विस्तार लिखा है। उसने लिखा है कि मुगल सैनिक जब शिवालिक की तलहटी से ऊपर चढ़ना शुरू किया, तब गढ़वाली सैनिकों ने गुरिल्ला युद्ध शुरू कर दिया।

हिमालयन गजेटियर में अंग्रेज़ विद्वान एडविन एटकिंसन ने लिखा है कि महारानी कर्णावती पर्वत की चोटी पर मौजूद बिनसर मंदिर से दुश्मनों के खिलाफ सेना का संचालनकर रही थीं। एक समय ऐसा भी आया, जब उनकी स्थिति कमजोर होने लगी तब अचानक ओलावृष्टि शुरू हो गई। इससे दुश्मन पीछे हटने पर मजबूर हो गया। महारानी ने इसे भगवान का आशीर्वाद समझा।

मंदिर (फोटो साभार: hmoob.in)

मुगल सैनिक भागकर पहाड़ियों की तलहटी में पहुँच गए। वहाँ पहले से छिपे सैनिकों ने उन्हें घेर लिया और महारानी कर्णावती के आदेश पर घाटी के दोनों तरफ के रास्ते बंद करा दिए। लगभग 50 हजार मुगल सैनिक घाटियों में फँसकर रह गए। इसके बाद सेनापति नजाबत खान ने शांति प्रस्ताव भेजा, लेकिन महारानी तैयार नहीं हुईं। रसद खत्म होने के बाद नजाबत खान ने महारानी से वापस लौटने की इजाजत में माँगी। इसके लिए महारानी ने एक शर्त रखी।

महारानी कर्णावती ने नजाबत खान को संदेश भेजवाया कि उसके सैनिक वापस लौट सकते हैं, लेकिन उन्हें अपनी नाक कटवानी होगी। मुगल सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर नाक कटवा कर वापस लौट चले। इस घटना से लज्जित होकर नजाबत खान ने रास्ते में आत्महत्या कर ली। वहीं शाहजहाँ ने गढ़वाल पर कभी आक्रमण नहीं करने का फरमान जारी कर दिया।

इस घटना के बाद महारानी कर्णावती को नक्कटी रानी यानी दुश्मन की नाक काट लेने वाली रानी कहकर संबोधित किया जाने लगा। तंत्र-मंत्र से संबंधित एक अत्यंत लोकप्रिय पुस्तक ‘सांवरी ग्रंथ’ में उन्हें माता कर्णावती कहा गया है। वहीं, मुगल दरबारों की वृस्तांत वाली पुस्तक ‘मआसिर-उल-उमरा’ और यूरोपीय इतिहासकार टेवर्नियर ने अपनी किताबों में महारानी कर्णावती को मुगलों की हेकड़ी निकाल वाली रानी कहा गया है।

जनकल्याण के लिए महारानी ने कई काम किए

1646 में पृथ्वी शाह को गद्दी सौंपी गई, तब तक महारानी कर्णावती ने लोकोपकार के लिए अनेक काम किए। सबसे पहले उन्होंने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। उन्होंने राज्य में कृषि और सामाजिक कल्याण के लिए कई कार्य किए। उन्होंने राजपुर की नहर बनवाई। देहरादून में अजबपुर, करनपुर, कौलागढ़, भोगपुर जैसे आधुनिक नगर बसाए, जो बाद में मुहल्ले बन गए। नवादा में उनका बनवाया हुआ महल आज भी खंडहर के रूप में मौजूद है।

वहीं, बिनसर महादेव आज श्रद्धा का एक केंद्र बन चुका है। गढ़वाल सहित हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग इस मंदिर में एक बार जरूर जाना चाहते हैं। यहाँ दर्शन करने जाने के लिए जब यात्रा शुरू होती है तो उसे ‘जात्रा’ कहा जाता है। जात्रा के दौरान स्त्री और पुरुष लोकगीत गाते हैं।

पहले शिवसेना के MLA छीने, अब बाला साहेब के हिंदुत्व पर दावा: एकनाथ शिंदे की मुट्ठी में उद्धव ठाकरे की कुर्सी, कभी उनका ही पत्ता काट बने थे महाराष्ट्र के CM

महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी शिवसेना के विधायक दल के नेता एकनाथ शिंदे कई विधायकों के साथ गायब हैं, जिसके बाद पार्टी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उन्हें इस पद से हटा दिया है। उनकी जगह अजय चौधरी को ये पद दिया गया है। दादर में शिवसेना भवन के बाहर कार्यकर्ताओं की बड़ी भीड़ लगी हुई है। उधर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा है कि एकनाथ शिंदे और भाजपा ने एक-दूसरे से कोई संपर्क नहीं किया है, लेकिन भविष्य का वो कुछ कह नहीं सकते।

उन्होंने कहा कि राजनीति में कुछ भी संभव है। वहीं शिवसेना के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया कि विधायकों के अपहरण हुआ है। पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर ने कहा कि विधायकों को झूठ बोल कर कार से ले जाया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा को गुजरात से ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाने दीजिए, हमारा ऑपरेशन बाद में शुरू होगा। उन्होंने गायब विधायकों की सही संख्या की पुष्टि नहीं की और कहा कि कुछ के साथ पार्टी संपर्क में है।

उन्होंने कहा, “14-15 विधायक सूरत में हैं और उनमें से कुछ वापस आना चाहते हैं। हमारी फ़िलहाल कोई योजना नहीं है। हम स्थिति को देख रहे हैं। भाजपा जो कर रही है, करने दीजिए।” मुंबई के ‘सेना भवन’ के बाहर शिवसैनिकों को 4 बजे जुटने को कहा गया था, जिसके बाद वहाँ भीड़ लगी हुई है। संजय राउत का कहना है कि इन विधायकों के परिवार वाले मिसिंग कंप्लेंट लिखा रहे हैं, जिनमें नितिन देशमुख की पत्नी भी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आवास के बाहर भी भीड़ लगी हुई है। NCP नेता जयंत पाटिल ने कहा कि MVA (महा विकास अघाड़ी) सरकार अल्पमत में नहीं आएगी और उन्हें उम्मीद है कि उद्धव ठाकरे के विधायक उनके साथ रहेंगे। भाजपा कह रही है कि फ़िलहाल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की माँग नहीं है, 18 जुलाई से नया सत्र शुरू होने के बाद वो इस मामले को देखेंगे। उन्होंने 35 विधायकों के गायब होने की बात कही है।

NCP के मुखिया शरद पवार ने कहा कि राज्य सरकार को गिराने का ये तीसरा प्रयास है। उनकी पार्टी के ही नेता और मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक किस्म का तूफ़ान आ गया है, लेकिन ये शांत भी होगा और ख़त्म भी हो जाएगा। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स का ये भी दावा है कि उद्धव ठाकरे की बैठक में सिर्फ 20 विधायक ही पहुँचे। शिवसेना अब शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में है।

राजस्थान कॉन्ग्रेस के नेता सचिन पायलट ने दावा किया कि चिंता की कोई बात नहीं है, MVA सरकार अपना बचा हुआ कार्यकाल पूरा करेगी और सरकार स्थिर है। कहा जा रहा है कि 7 और शिवसेना विधायक सूरत के उस होटल में पहुँचे हैं, जहाँ एकनाथ शिंदे जमे हुए हैं। वहीं एक एकनाथ शिंदे ने कहा है कि वो सत्ता के लिए बाल ठाकरे की शिक्षाओं को कभी नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ने शिवसैनिकों को हिंदुत्व सिखाया था।

यशवंत सिन्हा बने आधे-अधूरे विपक्ष के राष्ट्रपति उम्मीदवार: पवार, अब्दुल्ला और गोपाल कृष्ण गाँधी नहीं हुए थे राजी

पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा राष्ट्रपति चुनाव में आधे-अधूरे विपक्ष के साझा उम्मीदवार होंगे। दिल्ली में मंगलवार (21 जून, 2022) को विपक्षी दलों की बैठक में यशवंत सिन्हा का नाम सर्वसम्मति से पारित किया गया। यहाँ आधे-अधूरे विपक्ष की बात इसलिए कही गई है क्योंकि कई ऐसे दल जो एनडीए में शामिल नहीं हैं मसलन, बीजद, टीआरएस, वाईएसआर कॉन्ग्रेस, अकाली दल वे इस विपक्षी गुट से अलग रहे हैं।

तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों की बैठक के बाद कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “हमने (विपक्षी दलों ने) सर्वसम्मति से फैसला किया है कि यशवंत सिन्हा राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के साझा उम्मीदवार होंगे।”

बता दें कि इससे पहले आज ही यशवंत सिन्हा ने तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ने का ऐलान करते हुए कहा कि अब वह वृहद विपक्षी एकता के व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए काम करेंगे। वहीं राष्ट्रपति चुनाव को लेकर आज विपक्षी दलों की बैठक में जयराम रमेश, सुधींद्र कुलकर्णी, दीपांकर भट्टाचार्य, शरद पवार, डी राजा, तिरुचि शिवा (डीएमके), प्रफुल्ल पटेल, येचुरी, एन के प्रेमचंद्रन (आरएसपी), मनोज झा, मल्लिकार्जुन खड़गे, रणदीप सुरजेवाला, हसनैन मसूदी (नेशनल कॉन्फ्रेंस), अभिषेक बनर्जी और रामगोपाल यादव के रूप में कई विपक्षी नेता शामिल थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि ओवैसी की पार्टी के सांसद इम्तियाज जलील भी बैठक में मौजूद रहे। वहीं, इस बैठक में शामिल होने से पहले यशवंत सिन्हा ने ट्वीट कर कहा था, “जो सम्मान और प्रतिष्ठा दी उसके लिए मैं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को शुक्रिया करता हूँ। अब वो वक्त आ गया है जब पार्टी से हटकर एक बड़े उद्देश्य के लिए काम करना है।”

गौरतलब है कि सेवानिवृत्त IAS अधिकारी यशवंत सिन्हा ने पहले अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली NDA सरकार में केंद्रीय वित्तमंत्री और फिर विदेश मंत्री के रूप में कार्यभार सँभाला था। लेकिन एक लम्बे समय तक मोदी सरकार से चल रहे टकराव के बीच 2021 में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) में शामिल होने से पहले 2018 में भाजपा छोड़ दी। उन्हें पिछले साल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले TMC का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी नियुक्त किया गया था।

बता दें कि इससे पहले बीते 15 जून को तृणमूल ने दिल्ली में विपक्ष की बैठक बुलाई थी, जिसमें सर्वसम्मति से विपक्ष के उम्मीदवार के रूप में शरद पवार का नाम प्रस्तावित किया गया था। हालाँकि, बाद में पवार ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। फिर ममता बनर्जी ने तब नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गाँधी के नामों को दो संभावित नामों के रूप में प्रस्तावित किया था। लेकिन, फारुख अब्दुल्ला और गोपाल कृष्ण गाँधी, दोनों ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।

पाकिस्तान में रेप केस हुए अनियंत्रित, पंजाब में आपातकाल की घोषणा: गृह मंत्री ने कहा- ‘अपने बच्चों को घर में अकेला न छोड़ें’

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध बढ़ रही यौन हिंसा के बाद वहाँ आपातकाल की घोषणा कर दी गई है। पंजाब के गृह मंत्री अट्टा तरार ने कहा कि उन्हें ये करने पर मजबूर होना पड़ा क्योंकि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होते अपराथ समाज और सरकार दोनों के लिए चिंताजनक हैं।

द डॉन में प्रकाशित प्रांत मंत्री के बयान के अनुसार, उन्होंने कहा, “4 से 5 मामले पंजाब में रोज आ रहे हैं। ऐसे में यौन हिंसा, दुर्व्यवहार और जबरदस्ती के केसों निपटने के लिए ये कदम उठाया गया है। ”

गृह मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कानून मंत्री मलिक मोहम्मद की मौजूदगी में बताया कि बलात्कार और कानून व्यवस्था पर कैबिनेट समिति द्वारा सभी केसों की समीक्षा की जाएगी। ऐसी घटना पर निगरानी के लिए नागरिक संस्थाओं, महिला अधिकार संगठनों, शिक्षकों और वकीलों से परामर्श लिया जाएगा।

तरार ने बच्चों के माता पिता से अपील की कि वह लोग अपने बच्चों को सुरक्षा के मायने समझाएँ और किशोरों को घर पर बिना किसी बड़े के अकेला न छोड़ें। गृह मंत्री ने सूचित किया कि पुलिस लगातार आरोपितों को हिरासत में ले रही है। इसके अलावा हालात सुधारने के लिए उनके द्वारा एंटी रेप अभियान चलाया जा रहा है और छात्रों को स्कूल में यौन शोषण से जुड़ी जानकारी भी दिलवाई जा रही है। 

प्रांत मंत्री ने जानकारी दी कि रेप केसों से निपटने के लिए पंजाब की फॉरेंसिक साइंस एजेंसी ने डीएनए सैंपल को फ्रास्ट ट्रैक आधार पर चेक करना शुरू कर दिया है। सोमवार को लैब अधिकारियों से भी इसके लिए पंजाब प्रशासन ने बैठक की थी। तरार ने कहा कि आज के जमाने में ड्रग्स लेना बड़े स्कूलों में फैशन बन गया है जिसकी वजह से ऐसे अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है।

तरार ने आगे पंजाब की बिगड़ी स्थिति के लिए पाकिस्तान की पूर्व सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पीटीआई के राज में कानून व्यवस्था चरमरा गई थी। पुलिस अधिकारी जो तैनात थे वो रिश्वत लेकर फरार गुज्जर के कहने पर तैनात किए गए थे। फराह बुशरा बीबी की सहेली है। इन पुलिस अधिकारियों को हटाने का काम हो रहा है।

इधर राहुल गाँधी से ED पूछताछ, उधर सड़क पर रोने-चिल्लाने लगी अलका लांबा: कहा- मेरी गर्दन तोड़ने… देखिए Video

जहाँ एक तरफ ED (प्रवर्तन निदेशालय) कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी से लगातार 5वें दिन ‘नेशनल हेराल्ड’ में घोटाले को लेकर पूछताछ कर रही है, वहीं दूसरी तरफ देश भर में कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता-कार्यकर्ता इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में अलका लांबा का वीडियो सामने आया है, जहाँ उन्हें विरोध प्रदर्शन के दौरान अजीबोगरीब हरकतें करते हुए देखा जा सकता है। एक बार को तो वो जमीन पर ही लेट गईं।

इस दौरान आसपास मौजूद पुलिसकर्मियों से हाथ जोड़ कर जमीन पर बैठीं अलका लांबा कहती हैं, “भारत माता की जय! हाथ बँधे हुए हैं। जय जवाब, जय किसान। नहीं करने दे रहे हैं। कौन से संविधान या कानून में ये लिखा हुआ है? कैसी ट्रेनंग इन्हें दी गई है? जब अग्निपथ में 4 साल की ट्रेनिंग देकर बाहर हथियार देकर भेजोगे ना, ऐसे ही गर्दनें तोड़ेंगे। निहत्थों की गर्दनें तोड़ते हैं। मेरी भी गर्दन टूटेगी।” इस दौरान वो पुलिस वालों की तरफ इशारा कर रही थीं।

इतना कहते-कहते अचानक पूर्व विधायक अलका लंबा ने पुलिसकर्मियों को धक्का देना शुरू कर दिया और कहने लगीं कि वो अपनी गर्दन बचाने के लिए ऐसा कर रही हैं, लेकिन इसे दिखाया जाएगा कि अलका लांबा ने वर्दी पर हाथ डाल दिया। इस दौरान वो जमीन पर लेट कर नारेबाजी करती रहीं। फिर चिल्लाते और रोते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया देख रहा है, वो अपनी गर्दन को बचाने के लिए पुलिस का हाथ पकड़ रही हैं, तो दिखाया जाएगा कि उन्होंने वर्दी का हाथ पकड़ लिया।

उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मी ने उनकी गर्दन को तोड़ने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा, “इनको बोलो कि मत करें। निहत्थी और अकेली है। यहाँ सब खड़े हैं। मेरे से कोई खतरा है? मेरे हाथ में बम है। बंदूक है? मैंने AK-47 रखी है? मैं सिर्फ बैठी हूँ। गाँधी के देश में…” इस पर महिला पुलिसकर्मियों ने कहा कि वो भी निहत्थी हैं। अलका लंबा इसके बाद जमीन पर लेट कर ‘भारत माता की जय’ और ”जय जवान, जय किसान’ का नारा लगाती रहीं।

अग्निपथ समय की जरूरत, वापस नहीं होगा: NSA अजीत डोभाल का दो टूक, कहा- अग्निवीर तैयारी कर रहे, हिंसा करने वाले सेना के योग्य नहीं

अग्निपथ योजना पर देश के कई राज्यों में मचे बवाल के बीच विरोध प्रदर्शन करने वाले युवाओं को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने दो टूक संदेश दिया है। डोभाल ने कहा कि जो अग्निवीर बनने वाला होता है, वह न किसी प्रलोभन में आता है, न वह किसी से बहकाया जा सकता है, न ही वह किसी के दुष्प्रचार के लिए प्रेरित किया जा सकता है। ये जितने भी लोग हैं, मुझे नहीं लगता है कि ये वे लोग हैं जो सेना के लिए और सेना में जाने के इच्छुक और फिट हैं। अग्निवीर अपने घरों में बैठकर तैयारी कर रहे होंगे। उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना की माँग 22-25 साल से लंबित थी।

न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत के दौरान, अजीत डोभाल ने अग्निपथ योजना को समय की जरूरत बताया है। अजीत डोभाल ने अग्निपथ योजना समेत राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी बात की है। उन्होंने कहा, “माहौल बदल रहा है और अब प्राथमिकता देश को सुरक्षित करना है। हालात को देखते हुए संरचना में बदलाव करना होगा। रक्षा क्षेत्र के हर स्तर पर सुधार हो रहा है। सेना की आधुनिकता के लिए सरकार नए हथियार खरीद रही है। हमें अपनी सेना को विश्व स्तरीय सेना बनाना है। ऐसे में इस योजना को वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं है।”

डोभाल ने कहा कि आर्म्‍ड फोर्सेज की भर्ती प्रक्रिया में बदलाव ‘जरूरत’ के चलते हुआ है। अग्निपथ योजना पर डोभाल का कहना है, “अगर हमें कल के लिए तैयारी करनी है तो हमें बदलना ही होगा। अग्निपथ कोई ‘स्‍टैंडअलोन’ योजना नहीं है। सेना में चार साल बिताने के बाद अग्निवीर जब वापस जाएगा तो वह स्किल्‍ड और ट्रेन्‍ड होगा। वह समाज में सामान्‍य नागरिक की तुलना में कहीं ज्‍यादा योगदान कर पाएगा।”

वहीं ट्रेनिंग पर बात करते हुए डोभाल ने कहा, “अकेले अग्निवीर कभी पूरी सेना तो बनेंगे नहीं। जो अग्निवीर रेगुलर आर्मी में जाएँगे, उनकी कड़ी ट्रेनिंग होगी, अनुभव हासिल करने के लिए वक्‍त मिलेगा। अग्निवीर को बेहद कम उम्र में इतना अनुभव हासिल होगा, उनकी स्किल्‍स डिवेलप होंगी। 25 साल की उम्र में वे सामान्‍य नागरिकों से कहीं ज्यादा योग्‍य और प्रशिक्षित होंगे। पहला अग्निवीर जब रिटायर होगा तो 25 साल का होगा। उस वक्‍त भारत की इकनॉमी 5 ट्रिलियन डॉलर की होगी। ऐसे में तेजी से बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍था को ऐसे लोग चाहिए होंगे। उनमें सेना का जूनून और जज्‍बा कूट-कूटकर भरा होगा। ये लोग बदलाव के वाहक बनेंगे।”

नई भर्ती योजना के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हुए इस सवाल के जवाब में डोभाल ने कहा क‍ि जब बदलाव आता है तो ऐसा होता ही है, घबराहट होती है। उन्होंने कहा क‍ि एक दूसरा वर्ग भी है जिसे देश की शांति, सुरक्षा से कोई मतलब नहीं है। वे बस ऐसे मुद्दे ढूंढ़ते हैं जहाँ भावुकता को बढ़ावा दिया जा सकता है। जो अग्निवीर बनना चाहते हैं, वो इस तरह हिंसा नहीं करते।

उन्होंने इसी मुद्दे पर आगे कहा, “इसमें दो तरह के प्रदर्शन हो रहे हैं, एक तो वे हैं जिन्हें चिंता है, उन्होंने देश की सेवा भी की है। जब भी कोई बदलाव आता है कुछ चिंताएँ उसके साथ आती हैं। हम इसे समझ सकते हैं। जैसे-जैसे उन्हें पूरी बात का पता चल रहा है वे समझ रहे हैं। जो दूसरा वर्ग है उन्हें न राष्ट्र से कोई मतलब है, न राष्ट्र की सुरक्षा से मतलब है। वे समाज में टकराव पैदा करना चाहते हैं। वे ट्रेन जलाते हैं, पथराव करते हैं, प्रदर्शन करते हैं। वे लोगों को भटकाना चाहते हैं।”

डोभाल ने आगे यह भी कहा, “कुछ लोग जिनके पश्चिमी हित हैं, कोचिंग चला रहे हैं, हमें अंदाजा था कि ऐसा होगा। लेकिन जब उन्‍होंने प्रदर्शन की हदें पार कीं, राष्‍ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बनने लगे, सख्‍ती करनी पड़ेगी। लोकतंत्र में विरोध की इजाजत है, अराजकता की नहीं।” उन्होंने कहा कि ऐलान के बाद से धीरे-धीरे युवाओं को समझ आने लगा है कि ये तो उनके फायदे की बात है। युवाओं के जो भय और आकांक्षाएँ हैं, वो दूर हो जाएँगे।

डोभाल ने इस बात पर जोर देकर कहा, “ये मैसेज बड़ा क्लियर होना चाहिए। सेना में जो लोग जाते हैं, वह सिर्फ पैसे के लिए नहीं जाते हैं। वे एक जज्बे के साथ जाते हैं। उनमें देशप्रेम होता है। उनके अंदर राष्ट्र की भक्ति और यौवन की शक्ति होती है। वो अपने आपको इन्वेस्ट करते हैं। अगर वह भावना नहीं है, तो आप इसके लिए नहीं बने हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत सबसे ज्यादा युवा आबादी है। यह दुनिया में सबसे अधिक है। सेना में 25 प्रतिशत युवाओं को एक अलग स्तर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। भारतीय सेना की औसत उम्र सबसे ज्यादा है। देश में अब तक 2 से 3 तीन ही जाति आधारित रेजिमेंट हैं। ऐसे में रेजिमेंट के सिद्धांत के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। जो रेजिमेंट हैं वे रहेंगी। अग्निवीरों को नई चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा। दुनिया के सबसे अच्छे असाल्ट राइफल भारतीय सेना के पास हैं।

वर्ल्ड चैंपियन मुक्केबाज निखत जरीन ने आसन की तस्वीर शेयर कर बताए योग के फायदे, कट्टरपंथी बोले- मैडम 5 वक्त की नमाज पढ़ो

वर्ल्ड चैंपियन भारतीय महिला मुक्केबाज निखत जरीन (Nikhat Zareen) ने योग दिवस पर तस्वीरें इंस्टाग्राम और ट्विटर पर शेयर की। इन तस्वीरों में वह योग करते हुए नजर आ रही हैं। उन्होंने कैप्शन में योग के फायदे भी बताए। उन्होंने लिखा, “योग करने के कई फायदे हैं। इससे होने वाला लाभ कभी कम नहीं होता है। योग वह प्रकाश है, जो एक बार जला दिया जाए तो कभी कम नहीं होता है। इसकी लौ हमेशा तेज रहेगी। योग का अभ्यास करें। आप सभी को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की बधाई और शुभकामनाएँ।”

लेकिन योग को लेकर निखत जरीन का यह सन्देश कट्टरपंथियों को रास नहीं आया। वे इस्लाम की दुहाई देते हुए योग की बजाए दिन में 5 बार नमाज अदा करने की सलाह दे रहे हैं। वूमेन्स वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडकर जीतकर इतिहास रचने वाली निखत की तस्वीर पर एक यूजर ने लिखा, “नमाज सबकी अम्मी है।”

एक ने कमेंट किया, “योग करने से बेहतर दिन में 5 बार नमाज अदा करना है।”

फोटो साभार: निखत जरीन का इंस्टाग्राम

जिद्दी जेहन ने निखत जरीन द्वारा योग के फायदे बताने पर कमेंट किया, “अच्छा तो ये बताओगी अब आप?”

फोटो साभार: निखत जरीन का इंस्टाग्राम

शारूक्नी ने लिखा, “मैडम 5 वक्त की नमाज पढ़ो, बस वहीच दुनिया का सबसे बड़ा योग है।”

फोटो साभार: निखत जरीन का इंस्टाग्राम

गौरतलब है कि निखत जरीन थाईलैंड की जितपोंग जुटामेंस को 5-0 से हराकर विश्व चैंपियन बनने वाली भारत की पाँचवीं महिला मुक्केबाज हैं। तेलंगाना के निजामाबाद की रहने वाली महिला बॉक्सर निखत जरीन ने पिछले महीने एक इंटरव्यू में कहा था, “मैं एक ऑर्थोडॉक्स (रूढ़िवादी) समुदाय से आती हूँ। जब भी मैं बॉक्सिंग करती थी, तो लोग बहुत ज्यादा कमेंट करते थे। हालाँकि, मैंने किसी की भी नहीं सुनी, क्योंकि मुझे मेरा सपना पता था कि मुझे मेरे देश का प्रतिनिधित्व करके देश के लिए मेडल जीतना है। इसीलिए मेरा ध्यान केवल बॉक्सिंग करने और मेडल पर था।”

निखत ने यह भी कहा था, “मेरे खुद के घर में मेरी दो बहनें हिजाब पहनती हैं। मैं इसलिए नहीं पहनती क्योंकि मैं स्पोर्ट्स में हूँ। एक भारतीय के तौर पर देश को रिप्रेजेंट कर रही हूँ तो मैं कोशिश करती हूँ कि स्पोर्ट्स में धर्म न आए, क्योंकि खेल का कोई धर्म नहीं होता।” इसके साथ ही बॉक्सिंग स्टार ने सलमान खान से मिली बधाई पर कहा था कि वो बचपन से सलमान खान को ही पसंदीदा हीरो मानती थीं और जब सलमान खान ने उनके लिए ट्वीट किया तो वो रोईं भी।

एलन मस्क का बेटा बन गया लड़की, बदला अपना नाम: कहा – बायोलॉजिकल पिता से किसी भी सूरत में कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती

दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क की ट्रांसजेंडर बेटे ने अपने पिता से सारे रिश्ते तोड़ते हुए अपने नाम से ‘मस्क’ सरनेम भी हटा दिया है। ‘ज़ेवियर मस्क’ के रूप में पहचाने जाने वाली एलन मस्क के बेटे ने कैलिफोर्निया के सैंटा मोनिका में दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करते हुए अपना नया नाम ‘विवियाना जेन्ना विल्सन’ रख लिया है और लड़की बन गई है। उन्होंने अपनी ‘जेंडर आइडेंटिटी’ को इसका एक कारण बताया है। वहीं दूसरा कारण चौंकाने वाला है।

उनका कहना है कि वो अब अपने बायोलॉजिकल पिता के साथ नहीं रहती हैं और किसी भी स्थिति में उनके साथ किसी भी प्रकार का सम्बन्ध रखने की इच्छुक नहीं हैं। ये भी स्पष्ट नहीं है कि एलन मस्क की 213 बिलियन डॉलर (16.6 लाख करोड़ रुपए) की संपत्ति में से कोई हिस्सा मिलेगा या नहीं। लॉस एंजेंस काउंटी सुपीरियर कोर्ट में दायर याचिका में उन्होंने अपना नया बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने और नाम बदलने की बात कही है।

पूर्व में ‘ज़ेवियर एलेक्जेंडर मस्क’ फ़िलहाल 18 वर्ष की हैं, ने अदालत में दायर याचिका में कहा है कि उनका जेंडर वाला पहचान पुरुष की जगह स्त्री रखा जाए। कैलिफोर्निया में 18 वर्ष के बाद ‘एज ऑफ कंसेंट’ होता है, जहाँ इस तरह की चीजों के लिए अनुमति है। ऑनलाइन दस्तावेजों में उनके नए नाम को संशोधित कर दिया गया है। उनकी माँ जस्टिन विल्सन के साथ एलन मस्क का 2008 में ही तलाक हो चुका है। वो एक कनाडाई लेखिका हैं, जिन्होंने 2000 में एलन मस्क से शादी की थी।

एलन मस्क का ट्रांसजेंडर कम्युनिटी को लेकर रुख पर भी आलोचना होती रही है। एक बार उन्होंने ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए ‘प्रोनाउन’ पर टिप्पणी की थी। एक बार उन्होंने कहा था कि वो ट्रांस के खिलाफ नहीं हैं। हाल ही में एलन मस्क ने अमेरिका में महिलाओं के फर्टिलिटी रेट गिरने पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि वो अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा था कि जो जितना अमीर होता है, उसके उतने कम बच्चे होते हैं। उन्होंने इसे ‘डेमोग्राफिक डिजास्टर’ नाम दिया था।

RJD के बाहुबली नेता अनंत सिंह को 10 साल सश्रम कारावास की सजा, घर में मिला था AK-47 और ग्रेनेड, अब विधायकी पर संकट

बिहार के मोकामा से RJD के बाहुबली विधायक अनंत सिंह (Anant Singh) उर्फ ‘छोटे सरकार’ को AK-47 मामले में सजा सुनाई गई है। पटना स्थित जज त्रिलोकी दुबे की MP-MLA कोर्ट ने मंगलवार (21 जून 2022) को 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने इस मामले में 14 जून को उन्हें दोषी करार दिया था। सजा मिलने के बाद अनंत सिंह की विधानसभा की सदस्यता जाने का खतरा है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, दो वर्ष या इससे ज्यादा की सजा होने पर विधानसभा या संसद की सदस्यता स्वत: खत्म हो जाती है। हालाँकि, उनके वकील सुनील कुमार ने कहा कि सजा के फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। अदालत ने अनंत सिंह के पैतृक आवास के केयर टेकर को भी 10 साल की सजा सुनाई है।

इस कांड की सुनवाई स्पीडी ट्रायल के तहत 32 महीने तक चली। इस कांड में विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट तक से जमानत नहीं मिली थी। अनंत सिंह 25 अगस्त 2019 से पटना के बेऊर जेल में बंद हैं। इस मामले में विधायक और उनके केयर टेकर पर 15 अक्टूबर 2020 में आरोप तय किया गया था। इसके बाद विशेष लोक अभियोजक ने 13 पुलिस अभियोजन गवाहों को कोर्ट में पेश किया। विधायक की ओर से बचाव पक्ष में 34 गवाह पेश किए गए।  

क्या है पूरा मामला

पटना पुलिस ने सूचना के आधार विधायक अनंत कुमार सिंह के पैतृक आवास बाढ़ थाना के लदवां गाँव में 16 अगस्त 2019 को छापेमारी की थी। इस मामले में बाढ़ की तत्कालीन एसपी लिपि सिंह के नेतृत्व में पुलिस की ये रेड करीब 11 घंटे तक चली थी।

छापेमारी में विधायक के पुश्तैनी घर से एक प्रतिबंधित हथियार AK-47, 33 जिंदा कारतूस और दो ग्रेनेड बरामद हुए थे। इस रेड के बाद अनंत सिंह फरार हो गए थे। बिहार पुलिस उनकी तलाश में जुटी थी तो वे पुलिस को चकमा देने लगे और सोशल मीडिया पर एक के बाद एक वीडियो जारी कर रहे थे।

विधायक के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी हुआ था

पुलिस ने फरार चल रहे अनंत सिंह की गिरफ्तारी के लिए लुकआउट नोटिस भी जारी किया था। विधायक ने दिल्ली के साकेत कोर्ट में अगस्त में सरेंडर किया था। इसके बाद पटना पुलिस उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर पटना ले आई थी। 

एमपी-एमएलए के विशेष कोर्ट ने दोनों आरोपितों के खिलाफ आर्म्स एक्ट की 7 धारा, भारतीय दंड संहिता (IPC) की दो धारा और दो विस्फोटक अधिनियम के तहत आरोप तय किया था। दोनों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र रचने का भी आरोप तय हुआ था। विधायक अनंत सिंह पर एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट में 5 आपराधिक मामले सेशन ट्रायल और 4 आपराधिक मामले न्यायिक दंडाधिकारी एमपी-एमएलए के विशेष कोर्ट में चल रहा है।

इसके अलावा दानापुर, गया व बाढ़ में भी उनके खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं।

कब-कब क्या हुआ

  • 16 अगस्त 2019: मोकामा विधायक अनंत सिंह के पैतृक आवास लंदावा से एके-47 और 2 ग्रेनेड बरामद 
  • 16 अगस्त 2019: बाढ़ थाने में दर्ज कराई गई थी एफआईआर 
  • 25 अगस्त 2019: दिल्ली के साकेत कोर्ट में किया था सरेंडर  
  • 5 नवंबर 2019: पुलिस ने चार्जशीट दायर की
  • 17 जून 2020: एमपी-एमएलए के विशेष कोर्ट में ट्रायल के लिए ट्रांसफर
  • 15 अक्टूबर 2020: आरोप गठित हुआ 
  • 14 जून 2022: अनंत सिंह दोषी करार
  • 21 जून 2022: अनंत सिंह को 10 साल की जेल की सजा

बता दें कि बाहुबली अनंत सिंह को बिहार का कद्दावर नेता माना जाता है और भूमिहार समाज में उनकी गहरी पैठ है। वे पहले नीतीश कुमार के करीबी थे, लेकिन 2015 में करीबी टूट गई। इसके बाद वे RJD में शामिल हो गए थे। एक बार उन्होंने नीतीश कुमार के ‘सुशासन की सरकार’ को ‘$%ड़ा की सरकार है’ बताया था। इसका वीडियो खूब वायरल हुआ था और सोशल मीडिया पर खूब मीम बने थे।

प्रियंका जी, आपने 1 माँगा हम मोहम्मद जुबैर के 35 फेक न्यूज दे रहे, हिंदू घृणा में इतना सना कि बच्चियों का भी करता है शिकार

फेक न्यूज फैलाने के कारण अक्सर सोशल मीडिया पर लताड़ खाने वाला ऑल्ट न्यूज का मोहम्मद जुबैर लिबरलों का चहेता है। यही वजह है कि यदि कोई उसे फेक न्यूज फैलाने वाले कहे तो सारे लिबरल बिलबिला उठते हैं। कुछ ऐसा ही इस बार शिवसेना की महिला नेता प्रियंका चतुर्वेदी के साथ हुआ।

प्रियंका चतुर्वेदी ने मोहम्मद जुबैर के कारण एक सामान्य यूजर को फटकार लगाई और उसे मुँह बंद रखने को कहा। यूजर की गलती यही थी कि वो जुबैर को फेक न्यूज फैलाने वाला बता रहा था। प्रियंका ने यूजर को लिखा, “कृपया जुबैर द्वारा फैलाई गई एक फर्जी खबर ढूँढने में मेरी मदद कर दो। अगर ऐसा नहीं कर सकते तो मुँह बंद करके बैठ जाओ।”

प्रियंका के ट्वीट पर अभी (खबर लिखने तक) तक यूजर ने जवाब नहीं दिया, लेकिन ऑपइंडिया प्रियंका की मदद के लिए ऐसे 35 मामले ढूँढ कर लाया है जब जुबैर ने खुले में झूठी खबर फैलाई और लिबरलों ने इस पर मौन धारण किए रखा। इनमें 35 केसों से जुबैर की हिंदू घृणा स्पष्ट तौर पर देखी जा सकती है।

  1. मोहम्मद जुबैर ने एक वीडियो शेयर कर के आरोप लगाया था कि लोनी में अब्दुल समद नाम के एक बुजुर्ग से जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाया गया, जबकि आरोपितों में आरिफ, आदिल और मुशाहिद भी शामिल थे। पुलिस की जाँच में ये मामला सांप्रदायिक नहीं निकला।
  2. मोहम्मद जुबैर ने एक अखबार की कटिंग ट्वीट की। इस खबर का शीर्षक था- “गो सेवा के नाम पर 20 लाख का दान जूता फरार हुआ पुजारी।” जो तस्वीर मोहम्मद जुबैर ने ट्वीट की वो उस समय की खबर नहीं बल्कि चार साल पहले राजस्थान की एक घटना थी। मोहम्मद जुबैर का ये तस्वीर पोस्ट करने का असली उद्देश्य श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर चल रहे देशव्यापी समर्पण निधि अभियान से जुड़ा हुआ साबित करते हुए लोगों को गुमराह करने का था।
  3. प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने ‘दी लल्लनटॉप’ वेबसाइट के इंटरव्यू का एक हिस्सा शेयर किया। इस वीडियो में एक व्यक्ति मोदी सरकार की खामियों को गिनाता नजर आता है। साथ ही दावा किया गया कि यह शख्स मोदी समर्थक है। उसका फेसबुक प्रोफ़ाइल खँगालने पर पता चला कि उसने खुद को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का भावी विधायक उम्मीदवार बताया था।
  4. मोहम्मद जुबैर ट्विटर पर तनिष्क विवाद का फायदा उठाते हुए यह साबित करने का प्रयास करते देखा गया कि लोग ‘जय श्री राम’ का नारा लगाकर तनिष्क के शोरूम पर हमला करने की प्लानिंग कर रहे हैं या फिर तनिष्क स्टोर में मौजूद लोगों को डराने का प्रयास कर रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद पता चला कि वहाँ कोई हिंसा या धमकी नहीं दी गई, बल्कि शांतिपूर्ण विरोध हुआ।
  5. हाथरस कांड के बाद सोशल मीडिया पर राहुल-प्रियंका के ठहाकों का वीडियो के वायरल हुआ, जो कार से वहाँ जा रहे थे। ऑल्टन्यूज़ ने ‘इंडिया टुडे’ से एक कदम आगे जाते हुए पूरी धूर्तता के साथ शीर्षक तो ‘हाथरस जाते हुए वीडियो’ का रखा लेकिन अपने आकाओं की जिस तस्वीर का फैक्टचेक किया है वह राहुल-प्रियंका के हाथरस जाते समय की नहीं बल्कि 2019 के आम चुनावों से पहले की है।
  6. जुबैर ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में गोंडा के विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कुछ सदस्यों ने पुलवामा आतंकी हमले के ख़िलाफ़ विरोध रैली में देश विरोधी नारे लगाए। गोंडा पुलिस ने साफ़ किया कि VHP के विरोध प्रदर्शन से जुड़े वीडियो का इस्तेमाल ‘भ्रष्ट’ उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है और कहा कि इस तरह के नारे आयोजन के दौरान नहीं लगाए गए थे।
  7. जामिया की लाइब्रेरी में जब पुलिस पर पत्थरबाजी हुई तो प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘ऑल्टन्यूज़’ ने दावा किया कि वीडियो में दिख रहे छात्र के हाथ में पत्थर नहीं, वॉलेट है। मोहम्मद जुबैर ने उस खबर को आगे बढ़ाया, लेकिन पोल खुलने पर लोगों का जवाब देना ही बंद कर दिया।
  8. मोहम्मद जुबैर ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें दो जैन मुनि बैठे दिख रहे हैं और कुछ लोग हाथ जोड़ कर खड़े हैं। बस, फिर क्या था! इसी तस्वीर के सहारे उसने दावा कर दिया कि ये लॉकडाउन का उल्लंघन हो रहा है। जबकि सच्चाई ये थी कि जैन मुनि कोरोना काल में जनसेवा कर रहे थे और लोगों व पशु-पक्षियों को भोजन दे रहे थे। उस फंक्शन की एक और तस्वीर थी, जिसे ज़ुबैर ने छिपा लिया। उस तस्वीर में भोजन सामग्रियों के पैकेट्स और फल-फूल रखे हुए थे, जिनका वितरण किया जा रहा था।
  9. ज़ुबैर के AltNews सहित मीडिया के कई प्रमुख स्रोतों ने इस खबर को स्पष्ट तौर पर यह साबित करने का प्रयास किया है कि अमरोहा में एक दलित को मंदिर में जाने के कारण गोली से मार दिया गया। जुबैर ने खुद इस फेक न्यूज़ को ट्वीट किया। अमरोहा पुलिस ने खुद छानबीन के बाद एक वीडियो जारी कर स्पष्ट करते हुए कहा कि इस घटना में युवक की जाति और मंदिर में प्रवेश का कोई प्रसंग था ही नहीं।
  10. एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें अल्लामा कौकब नूरानी नाम का एक मौलवी, कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर बेहद भ्रामक जानकारी और अफवाह फैलाते हुए देखा जा सकता था। जुबैर ने उक्त मौलाना का बचाव करते हुए अपना पाकिस्तान प्रेम जाहिर किया और लिखा, “वो आदमी पाकिस्तान से है (Raukab Noorani Okarvl), भारत से नहीं। वैसे वीडियो देख के, नैनो चिप वाली नोट का वीडियो याद आ गया।”
  11. ज़ुबैर ने दावा किया कि जहाँ मेक्सिको में टीवी के माध्यम से पढ़ाई कराई जा रही है, भारत में दूरदर्शन पीएम मोदी के ‘मन की बात’ के प्रसारण में लगा हुआ है। बाद में जब लोगों ने बताया कि भारत में 3 दर्जन से भी अधिक चैनल पठन-पाठन के काम में लगे हुए हैं, उसने अपनी ट्वीट्स डिलीट कर दी।
  12. उसने सोलापुर में आग लगने की खबर शेयर की। उसने अप्रैल में ये वीडियो शेयर किया जबकि ये फ़रवरी का निकला। बाद में उसने भी माना कि उसने जिस वीडियो को रीट्वीट किया था, वो 2 महीने पुराना है।
  13. इसके बाद उसने दावा किया कि पीएम मोदी के ‘मन की बात’ के वीडियो पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के डर से कमेंट्स ऑफ कर दिया गया है। हालाँकि, पीएमओ इंडिया के पेज पर सारे वीडियोज पर कमेंट्स वर्षों से ऑफ हैं। जबकि नरेंद्र मोदी और भाजपा के यूट्यूब चैनल पर इसी वीडियो पर कमेंट किया जा सकता है।
  14. जब महंत गोपालदास के कोरोना पॉजिटिव होने की खबर आई तो उसने एडिटेड फोटो शेयर कर के दावा किया कि सरसंघचालक मोहन भागवत उनके बगल में ही बैठे थे। जबकि ये तस्वीर फोटोशॉप्ड है।
  15. खबर आई थी कि अमेरिका के टाइम्स स्क्वायर पर राम मंदिर का बिलबोर्ड दिखाया जाएगा। जुबैर ने दावा किया कि इस कार्यक्रम को कैंसल कर दिया गया है। जबकि तय समय पर राम मंदिर के डिजिटल बिलबोर्ड का प्रदर्शन हुआ।
  16. उसने अपने पेज ‘अनऑफिसियल सुब्रमण्यन स्वामी’ से दावा किया कि भाजपा स्ट्रांग रूम से ईवीएम चुरा रही है। फैक्टहंट द्वारा फैक्ट चेक के बाद उसने पेज के एडमिन्स में से एक पर दोष डाल कर इतिश्री कर ली।
  17. उसने एक तस्वीर शेयर कर के दावा किया कि किसानों के साथ पुलिस आतंकियों की तरह व्यवहार कर रही है। बाद में खुलासा हुआ कि ये वीडियो 2013 है, जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी। ये तस्वीर कविता कृष्णन ने ट्वीट की थी, जिसे जुबैर ने आगे बढ़ाया।
  18. श्रीलंका में हुए हमले के बाद वहाँ के एक मंत्री ने पत्र लिखा, जिसमें कहा गया था कि ख़ुफ़िया अधिकारियों को पहले से इसकी भनक थी। जब अभिजीत मजूमदार और आनंद रंगनाथन जैसे लोगों ने इस पत्र को आगे बढ़ाया तो जुबैर ने आतंकियों के बचाव के लिए उसे फेक करार दिया। जबकि मंत्री ने खुद अपने हैंडल से उसे डाल रखा था।
  19. उसने एक विरोध प्रदर्शन का वीडियो शेयर कर के लिखा कि दिल्ली में इतना बड़ा विरोध होने के बावजूद मीडिया इसे नहीं दिखा रहा। जबकि असलियत ये थी कि वो वीडियो मुंबई का था।
  20. जब देश भर में मॉब लिंचिंग को लेकर मुद्दा गरमाया हुआ था और इसे लेकर नैरेटिव बनाया जा रहा था, तब मोहम्मद जुबैर ने कॉन्ग्रेस शासनकाल का एक विरोध प्रदर्शन का वीडियो शेयर किया, ताकि लोग मोदी सरकार पर हमला बोल सकें।
  21. उसने दावा किया कि विश्व हिन्दू परिषद् के कार्यकर्ताओं ने ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ का नारा लगाया। गोंडा पुलिस ने इन ख़बरों का खंडन करते हुए कहा कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था।
  22. उसने अपने फेसबुक पेज से किया कि कश्मीरी छात्र रक्तदान कर रहे हैं। जबकि वो तस्वीर एक घायल व्यक्ति की थी, जो विरोध प्रदर्शन के दौरान जख्मी हो गया था। अस्पताल में उसका इलाज हो रहा था।
  23. मोहम्मद जुबैर ने अंजू घोष को बांग्लादेशी अभिनेत्री बताते हुए भाजपा की आलोचना की। लेकिन, दिलीप घोष ने उनका जन्म प्रमाण पत्र शेयर कर के उसके झूठ पर विराम लगाया।
  24. पीएम मोदी ने बताया था कि प्रधानमंत्री बनने से पहले वो अपने कपड़े खुद धोया करते थे। बाद में जुबैर ने एक खबर शेयर कर किया, जिसमें लिखा था कि वो पीएम मोदी का धोबी था। उसकी हार्ट अटैक से मृत्यु हुई। उसने ये साबित करने का प्रयास किया कि पीएम मोदी अपने कपड़े खुद नहीं धोते थे, वो झूठ बोल रहे। जबकि उसी खबर में लिखा था कि वो धोबी मोदी के कपड़े प्रेस करता था, धोता नहीं था।
  25. जम्मू कश्मीर के डिप्टी ग्रैंड मुफ़्ती ने दूसरे समुदाय के लिए अलग मुल्क की माँग की, जिस पर ऑपइंडिया ने खबर प्रकाशित की। जुबैर ने किसी अन्य क्लेम का फैक्ट-चेक शेयर कर के दावा कर दिया कि ये खबर गलत है।
  26. कठुआ मामले में विशाल जंगोत्रा निर्दोष है या नहीं, इस सम्बन्ध में ऑपइंडिया ने जब खबर प्रकाशित की तो जुबैर ने इसकी आलोचना की। जबकि बाद में वो कोर्ट से भी निर्दोष साबित हुआ, तब जुबैर की बोलती बंद हो गई।
  27. उसने उस ट्वीट को आगे बढ़ाया, जिसमें ग्रेटर नोएडा हत्याकांड के आरोपित सोनू पाठक का भाजपा से जुड़ाव बताया गया था। बाद में पता चला कि वो कोई और सोनू पाठक है, हत्या आरोपित नहीं।
  28. कन्हैया कुमार ने दावा किया कि बेगूसराय में एक फेरीवाले को पाकिस्तान जाने की बात कह के गोली मार दी गई। जबकि बाद में खुलासा हुआ कि ये घटना सांप्रदायिक थी ही नहीं, किसी चीज की खरीद-बेच को लेकर झगड़ा हुआ था, जिसके बाद ये घटना हुई।
  29. जब तबलीगी जमात वालों ने महामारी फैलाई और मौलाना साद के ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें वो समुदाय के लोगों को कोरोना से न डरते हुए सारी इस्लामी गतिविधियाँ जारी रखने की सलाह दी, तो मोहम्मद जुबैर ने इस ऑडियो को फेक बताया। दिल्ली पुलिस ने इन दावों को ही फेक बता दिया और ऑडियो सही निकला।
  30. उसने दावा किया कि एक दलित लड़के को मंदिर में घुसने पर मार डाला गया। सच्चाई ये थी कि 5000 रुपए के लोन को लेकर ये वारदात हुई थी। उस मंदिर का इतिहास रहा है कि उसमे दशकों से दलित जाकर पूजा-पाठ करते आ रहे हैं।
  31. उसने दावा किया कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा कभी टीपू जयंती समारोह में हिस्सा लेते थे और अब इसका विरोध करते हैं। साथ ही उसने समारोह की तस्वीर भी शेयर की। जबकि वो फोटो ”कर्नाटक जनता पक्ष अल्पसंखज्यक समारोह’ का था, टीपू जयंती का नहीं।
  32. मोहम्मद जुबैर ने दावा किया कि नीतेश कुमार ने 263 करोड़ रुपए की लागत से जिस सत्तर घाट पुल का उद्घाटन किया था, वो बाढ़ से ढह गया है। जबकि सच्चाई ये है कि सत्तर घाट पुल से 2 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटी पुलिया का पहुँच पथ टूटा था, पुल नहीं।
  33. अर्बन नक्सलियों के पास से आपत्तिजनक पुस्तक ‘वॉर एंड पीस’ जब्त हुआ, जिसकी चर्चा बॉम्बे हाईकोर्ट में हुई। बाद में पीएम मोदी का भी ‘वॉर एंड पीस’ पुस्तक पढ़ते हुए तस्वीर जुबैर ने वायरल की। उसे ये नहीं पता था कि किताब का नाम तो समान था लेकिन नक्सलियों वाली इसी नाम की पुस्तक विश्वजीत रॉय ने लिखी थी जबकि पीएम मोदी लिओ टॉलस्टॉय की किताब पढ़ रहे थे।
  34. उसने एक फेक न्यूज़ शेयर कर के दावा किया कि मेजर गोगोई को एक लड़की के साथ आपत्तिजनक अवस्था में गिरफ्तार किया गया है।
  35. उसने एक तस्वीर शेयर कर के दावा किया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने विवेक तिवारी के परिवार से बातचीत के समय उन्हें अपने से दूर रखा जबकि एक अन्य तस्वीर में सीएम योगी परिवार के बच्चों को पास बुला कर उनकी पीठ थपथपाते हुए बात करते दिख रहे हैं। उसने इस तस्वीर को छिपा लिया।