Home Blog Page 2665

‘ब्रह्मास्त्र’ के ट्रेलर में मंदिर में जूते पहन कर घंटी बजाते दिखे रणबीर कपूर, VFX देख बोले लोग – इससे अच्छी शक्तिमान

बॉलीवुड में एक के बाद एक फिल्म सुपरफ्लॉप हो रही है। बड़े बजट और दिग्गज सुपरस्टार्स की फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं दिखा पा रही हैं। इसी बीच स्टार किड्स रणबीर कपूर और आलिया भट्ट (Alia Bhatt) की फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र पार्ट 1: शिवा’ का ट्रेलर (Brahmastra Trailer) रिलीज ​हुआ है। बुधवार (15 जून 2022) को धर्मा प्रोडक्शंस के ट्रेलर रिलीज करते ही ट्विटर पर मीम्स की बाढ़ आ गई।

अयान मुखर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ का ट्रेलर अमिताभ बच्चन की आवाज और रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) की झलक के साथ शुरू होता है। ट्रेलर में महाबली और सर्व शक्तिशाली अस्त्र को ढूँढने की कहानी बताई गई है। फिल्म में अस्त्रों के देवता ‘ब्रह्मास्त्र’ की शक्तियों का एहसास कराने की कोशिश की गई है। ट्रेलर में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, आलिया भट्ट, रणबीर कपूर के अलावा साउथ के सुपरस्टार नागार्जुन और मौनी रॉय की झलक भी देखने को मिल रही है।

ट्रेलर में ‘ब्रह्मास्त्र’ को ‘ शस्त्रों का देवता’ कहा गया है। फिल्म में रणबीर ‘शिवा’ का किरदार निभा रहे हैं। इस ‘ब्रह्मास्त्र’ से रणबीर कपूर का सीधा कनेक्शन दिखाया गया है, जिसे शुरुआत में अपनी शक्तियों का एहसास नहीं होता है। उसे आग भी नहीं जला पाती है, जिसकी वजह से रणबीर कपूर को लगता है कि आग के साथ उसका पुराना रिश्ता है। इसके बाद से नेटिजन्स सोशल मीडिया पर आग की तस्वीर शेयर करते हुए ब्रह्मास्त्र में रणबीर कपूर के किरदार पर चुटकी ले रहे हैं।

ट्विटर पर ब्रह्मास्त्र के ट्रेलर से खासा निराश एक यूजर ने लिखा, “शक्तिमान से ज्यादा अच्छा नहीं है। गारंटी के साथ कहता हूँ फिल्म सुपरफ्लॉप होगी।” फिल्म के एक दृश्य में रणबीर कपूर जूते पहन कर उछल कर मंदिर का घंटा बजाते हुए दिख रहे हैं, जिसे लोगों ने हिन्दू धर्म का अपमान भी करार दिया है। फिल्म के निर्माताओं में करण जौहर भी हैं।

शिंदे लिखते हैं, “मार्वेल, अलिफलैला, हातिमताई और वारक्राफ्ट सब का VFX चोरी करने के बाद बनी ब्रह्मास्त्र फ्लॉप साबित होगी।”

एक और यूजर ब्रह्मास्त्र का ट्रेलर देखने के बाद कहता है कि उसने इससे पहले ऐसा हिंदी सिनेमा में कभी नहीं देखा।

सुशांत सिंह राजपूत के फैंस ने हैरानी जताई कि दिवंगत अभिनेता की दूसरी पुण्यतिथि के एक दिन बाद ही इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया।

वहीं हर्षित करण जौ​हर के धर्मा प्रोडक्शन को टैग करते हुए लिखते हैं, “लिखकर रख लोग फ्लॉप होगी।”

बता दें कि ब्रह्मास्त्र की कहानी फिल्म निर्माता व डायरेक्टर अयान मुखर्जी ने लिखी है। स्टार स्टूडियो के सहयोग से करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन, प्राइम फोकस और स्टारलाईट पिक्चर्स ने इस फिल्म प्रोड्यूस किया है। 9 सितंबर 2022 को यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में अमिताभ बच्चन, रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, मौनी रॉय और नागार्जुन अक्किनेनी मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर से हिन्दू पलायन को मजबूर, बेच रहे घर: बताया- महाजनी टोला में घरों पर मुस्लिम करते हैं पत्थरबाजी

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नरसिंहपुर जिले (Narsinghpur) के मुस्लिम बहुल मोहल्ले ‘महाजनी टोला’ में हिन्दुओं पर पत्थरबाजी (Stone Pelting) करने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित का कहना है कि इलाके में हिन्दुओं की संख्या बहुत ही कम है। इसका फायदा उठाकर कट्टरपंथी मुस्लिम लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं। ताकि हिन्दू उस जगह को छोड़कर पलायन के लिए मजबूर हो जाएँ।

मामला नरसिंहपुर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र का है। इसी के अंतर्गत महाजनी टोला आता है। यहीं पर नया बाजार में रहने वाले दलित हिन्दू इमरत प्रजापति ने पुलिस में शिकायत की है कि सोमवार (14 जून) की रात को को अपने घर में सो रहे थे। कि अचानक से पत्थरबाजी शुरू हो गई। नींद खुलते ही जब आँगन में जाकर देखा तो वहाँ पर पत्थर पड़े थे। घर के खपड़े टूट गए थे। इमरत का कहना है कि उसने कुछ लोगों को बुलाकर उन्हें ये दिखाया और पुलिस को फोन किया। थाने से दो सिपाही आए, जब देख के चले गए तो अचानक फिर से पत्थरबाजी शुरू हो गई।

पीड़ित द्वारा उपलब्ध कराया गया शिकायती पत्र

इमरत का आरोप है कि इलाके में मुस्लिम कट्टरपंथी आए दिन ऐसा करते हैं। इसी कारण से इससे पहले भी कई हिन्दू परिवार मजबूरन पलायन कर गए हैं। पीड़ित ने इलाके में गश्त कराने की माँग प्रशासन से की है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़ित इमरत प्रजापति ने कहा, “रात में मेरे घर पर पत्थरबाजी हुई थी। लेकिन, अँधेरा होने के कारण किसी को देख नहीं पाया। मेरे तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं, आँगन में ही खेलते रहते हैं और पत्थर कभी भी उन्हें लग सकता है। यहाँ पर हिन्दू केवल 4-5 घर ही हैं। डेढ़ साल पहले भी पत्थरबाजी की थी। लेकिन शिकायत की थी, तो पत्थरबाजी बंद हो गई थी। अब तक यहाँ से 2-3 हिन्दू परिवार अपना घर बेचकर चले गए हैं। हम सब लोग यहाँ डर में जी रहे हैं।”

हल्द्वानी में पैसे और जमीन का लालच दे महिला पर डाला ईसाई बनने का दबाव, गाजियाबाद से लापता 12वीं की छात्रा के धर्मांतरण का भी अंदेशा

उत्तराखंड (Uttarakhand) के कुमायूँ जिले के हल्द्वानी में एक महिला के धर्मांतरण (Religious Conversion) का मामला सामने आने के बाद आक्रोशित भीड़ राजपुरा पुलिस चौकी जा पहुँची। वहाँ लोगों एक युवक को पीट दिया। दूसरी घटना उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गाजियाबाद की है, जहाँ 12 कक्षा की एक छात्रा लापता हो गई। अब उसकी माँ ने अपनी बेटी के धर्मान्तरण की आशंका जताई है।

हल्द्वानी मामला

घटना हल्द्वानी के राजपुरा पुलिस चौकी क्षेत्र की बताई जा रही है। मंगलवार (15 जून) को राजपुरा के गौला किनारे रहने वाले हिन्दू समुदाय के लोग पुलिस थाने पहुँचे। इनका आरोप था कि एक दिन पहले, यानी की सोमवार को ईसाई मिशनरियों का एक समूह इलाके में आया था। उन लोगों ने इलाके की हिन्दू आबादी को बरगलाया और एक हिन्दू महिला पर जबरन ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाया।

हिन्दुओं का आरोप इलाके में आए दिन ईसाई मिशनरी आते हैं और लोगों को धर्मांतरण के बदले जमीन, पैसे और सुखी जीवन का लालच देते रहते हैं। ऐसे में हिन्दू संगठनों ने इन आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की। आरोप है हिन्दू लोगों ने एक शख्स को भी पीट दिया। इसके बाद पुलिस पुलिस अधिकारी ने महिला की शिकायत पर तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

माँ को सताया धर्मान्तरण का डर

गाजियाबाद के मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र की रहने वाली 12वीं की छात्रा बीते 25 मई को अपने घर से लापता हो गई थी। उसकी माँ की शिकायत पर पुलिस लड़की की तलाश कर रही है। इस बीच उसकी माँ ने बेटी को बहला-फुसलाकर उसके धर्मान्तरण की आशंका जताई है। पीड़िता की माँ का दावा है कि उनकी बेटी घर में दूसरे धर्म के तौर तरीकों को मानने लगी थी। जब उससे इसका कारण पूछा तो उसने कुछ नहीं बताया।

वहीं पुलिस को मामले की जाँच के दौरान पता चला है कि छात्रा बालिग है और बीते कुछ समय पहले अपनी एक दोस्त के जरिए दिल्ली के युवक से मिली थी।

‘नूपुर शर्मा का बाल भी बाँका हुआ तो 100 करोड़ लोगों को झेल नहीं पाओगे’: बिहार में भगवा झंडों के साथ सड़क पर उतरे हिन्दू, गूँजा ‘जय श्री राम’

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) द्वारा पैग़ंबर मोहम्मद पर की गई विवादित टिप्पणी का मामला देश के अलग-अलग हिस्सों से होते हुए बिहार (Bihar) में भी आ पहुँचा है। इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा सड़कों पर हिंसक प्रदर्शन और आगजनी करने के बाद अब नूपुर शर्मा के समर्थन में लोग सामने आने लगे हैं। मंगलवार को बिहार के आरा और वैशाली जिले के हाजीपुर (Hajipur) में नूपुर शर्मा के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया।

हाजीपुर में मंगलवार (14 जून 2022) को हिंदू पुत्र संगठन की ओर आयोजित आरती कार्यक्रम के बाद संगठन के कार्यकर्ताओं के द्वारा मस्जिद (Mosque) के बाहर जमकर प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ताओ ने ‘नुपुर शर्मा संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं’ का नारा लगाया। साथ ही ‘पाकिस्तान परस्त मुर्दाबाद’, ‘लव जेहाद मुर्दाबाद’, ‘इस्लामिक जेहाद मुर्दाबाद’ के नारे भी लगाए। मस्जिद के पास जाकर हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदर्शन किए जाने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई और हालात ना बिगड़े इसके लिए डीएम एसपी खुद मौके पर पहुँच गए।

इसके अलावा मस्जिद चौक पर भारी संख्या में पुलिस बल को भी तैनात किया गया था। हालाँकि, शांतिपूर्ण तरीके से ‘हिंदू पुत्र’ संगठन के कार्यकर्ताओं ने आरती की, प्रसाद बाँटा और नूपुर शर्मा के समर्थन में नारेबाजी की।

वहीं बिहार के आरा के रमना मैदान में नूपुर के समर्थन में विशाल सभा की गई। यह सबा विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और ABVP के लोगों ने संयुक्त रूप से की थी। इस सभा के बाद रैली भी निकाली गई और कहा गया कि हमारी चुप्पी को कमजोरी ना समझिए। इस दौरान लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगाए। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने कहा, “कोई भी नूपुर शर्मा का बाल भी बाँका नहीं कर सकता। अगर नूपुर शर्मा को कुछ भी होता है तो 100 करोड़ लोगों को तुम झेल नहीं पाओगे।”

साथ ही उन्होंने कहा, “अगर तुम हिंदुओं को छेड़ोगे तो तुम्हें कोई नहीं बचाएगा।” सभा के दौरान हिंदू संगठनों के लोग टार्च और भगवा झंडा लेकर रातभर झूमते नजर आए। आरा में नूपुर के समर्थन में हुई इस रैली का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 

इसके साथ ही बजरंग दल 16 जून को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगा और विवादास्पद धार्मिक टिप्पणियों पर हिंसा की हालिया घटनाओं के खिलाफ राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को एक ज्ञापन सौंपेगा।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इस संबंध में प्रेस रिलीज भी जारी किया है। इसमें कहा गया है कि देश में बढ़ती इस्लामिक जिहादी कट्टरपंथियों की अतिवादी घटनाओं के विरुद्ध विश्व हिंदू परिषद की युवा ईकाई बजरंग दल अब सड़कों पर उतरेगा। मस्जिदों से निकलने वाले कट्टरपंथी लगातार हिंदुओं के घरों को जला रहे हैं, उन पर जानलेवा हमला कर रहे हैं। इन हिंसक घटनाओं के खिलाफ बजरंग दल आगामी गुरुवार 16.6.2022 को देश भर के जिला मुख्यालयों में धरने देकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी देगा।

इससे पहले बिहार के गोपालगंज में नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्टर लगाए गए थे। पोस्टर शहर के तमाम हिस्सों में दिखाई दे रहे थे। पोस्टर में नूपुर शर्मा की फोटो के साथ ‘आई सपोर्ट नुपूर शर्मा’ लिखा हुआ था। ये पोस्टर 12-13 जून के बीच आधी रात को लगाए गए। वहीं पाताल पुरी मठ के प्रमुख महंत बालक दास ने कहा कि नूपुर शर्मा की रक्षा के लिए 18 लाख नागा साधु सड़क पर उतरेंगे।

पिछले दिनों पड़ोसी देश नेपाल में भी बड़ी रैली आयोजित की गई थी। नेपाल में रह रहे हजारों हिंदुओं ने नूपुर शर्मा के समर्थन में सड़कों पर रैली निकाली। यह रैली राजधानी काठमांडू के अलावा बीरगंज, पीरगंज और अन्य शहरों में भी निकाली गई थी। इस दौरान ‘जय हिंदू’, ‘जय हिंदुत्व’ और ‘जय श्री राम’ जैसे नारे लगाए गए। रैली में “जो हिंदू शिव और राम का नही वो किसी काम का नही” जैसे पोस्टर भी दिखाई दिए।

सिगरेट का धुआँ उड़ाते अबुल कलाम, बैठक में सोते कॉन्ग्रेस अध्यक्ष, गाँधी से लड़ते नेहरू: विभाजन को ऐसे राजी हुई थी कॉन्ग्रेस, गई 20 लाख जानें

भारत का विभाजन – ये एक ऐसा अध्याय है जिसने आज़ादी के जश्न को भी फीका कर दिया था। हमें अंग्रेजों की दासता से मुक्ति तो मिली, लेकिन भारत माँ बँट गईं। अंग्रेजों ने सिरिल रेडक्लिफ को आज़ादी से पहले इसकी जिम्मेदारी देकर भेजा, जिसे इस इलाके कोई समझ ही नहीं थी। उसने एक लाइन खींच दी और कॉन्ग्रेस राजी हो गई। 20 लाख लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी। करोड़ों का पलायन हुआ। 200 वर्षों की गुलामी के बाद मिली क्या तो 20 लाख लाशें।

भारत के विभाजन ने 20 लाख ज़िंदगियों को लील लिया

सड़क पर मानव अंग पड़े रहते थे। रेलगाड़ियों में लाशें भर कर भेजी जाती थीं। क्षत-विक्षत शव मिलते थे। कई महिलाओं का बलात्कार हुआ। करीब 2 करोड़ लोगों को पलायन करना पड़ा था। बंगाल और पंजाब पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा, जो उस समय तक अखंड था। लोगों को अपनी संपत्तियाँ छोड़ कर पलायन को मजबूर होना पड़ा। जिस रेडक्लिफ ने कभी पेरिस से पूर्व की ओर देखा तक नहीं था, उसने भारतीय उपमहाद्वीप का नक्शा बदल डाला।

जिस मोहम्मद अली जिन्ना ने मुस्लिमों के भीतर कट्टरता भर कर अलग मुल्क की माँग को अभियान बनाया, वो भी कभी कॉन्ग्रेस का ही नेता हुआ करता था। जो पाकिस्तान भारत से बँट कर अलग हुआ था, 1971 में भारत से भीषण युद्ध के बाद उसका भी विभाजन हुआ और बांग्लादेश एक अलग देश बना। जिस तरह मालाबार हुआ था, वैसे ही बंगाल में जमींदारी के नाम पर हिन्दुओं और उनकी संपत्ति को निशाना बनाया गया। 1937 के प्रांतीय चुनाव में मुस्लिम बहुल इलाकों में जिन्ना की ‘मुस्लिम लीग’ की बड़ी जीत ने ही इसकी पटकथा तैयार की थी।

वो 15 जून, 1947 का ही दिन था जब कॉन्ग्रेस भारत के विभाजन के लिए तैयार हुई थी। ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU)’ के संस्थापक सर सैयद अहमद खान ने सन् 1876 में ही कह दिया था कि एक देश में हिन्दू-मुस्लिम साथ-साथ नहीं रह सकते, क्योंकि दोनों अलग हैं। बाद में भी उन्होंने कहा कि एक ही गद्दी से भारत में हिन्दू-मुस्लिम शासन नहीं कर सकते। सन् 1906 में कॉन्ग्रेस के ही मुस्लिम नेताओं ने मिल कर ‘ऑल इंडिया मुस्लिम लीग’ पार्टी बनाई थी।

1930 ईस्वी में ‘मुस्लिम लीग’ के कवि अल्लामा इकबाल ने मुस्लिमों के लिए एक अलग मुल्क की माँग की। हिन्दू-मुस्लिम एकता की बात करते रहे जिन्ना के नेतृत्व में अलग इस्लामी मुल्क के लिए प्रस्ताव पारित किया गया। ब्रिटश सरकार ने भारत के अंदर की एक स्वायत्त तरह के इस्लामी राज्य के गठन की बात कही, लेकिन जिन्ना और नेहरू ने इसे नकार दिया। जिन्ना ने ‘कांस्टीट्यूएंट असेंबली’ की माँग को भी खारिज कर दिया।

मुस्लिम लीग के सामने कॉन्ग्रेस ने कर दिया था समर्पण

3 जून, 1947 को भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने अलग मुल्क की बात रखी, जिसे कॉन्ग्रेस और मुस्लिम लीग ने स्वीकार कर लिया। माउंटबेटन ने भी सारे काम जल्दी-जल्दी में किया, क्योंकि उसे वापस जाकर अपने नौसेना के करियर को आगे बढ़ाना था। जिन्ना ने ‘डायरेक्ट एक्शन’ का ऐलान किया और हिन्दुओं का कत्लेआम शुरू हो गया। कॉन्ग्रेस हिंसा नहीं रोक पाई। महात्मा गाँधी ने भी कॉन्ग्रेस का समर्थन किया और विभाजन के लिए हिन्दुओं और सिखों को जिम्मेदार ठहराया।

कई देशों में भारत के राजदूत रहे नरेंद्र सिंह सरीला अपनी पुस्तक ‘विभाजन की असली कहानी’ में लिखते हैं कि उन्हें अंग्रेजों के गुप्त दस्तावेजों से पता चला था कि सोवियत संघ के विस्तार को रोकने और ईरान के तेल के कुओं पर उसके कब्जे की आशंका से अंग्रेजों ने भारत को बाँटा, ताकि पाकिस्तान में सैन्य बेस बना कर नजर रख सके। उन्होंने विभाजन में अमेरिका का भी हाथ माना है। साथ ही कहा है कि अंग्रेजों की नींव हिलाने में बोस का हाथ था, उनके देहांत के बाद भी।

इसी तरह मुनीश त्रिपाठी अपनी पुस्तक ‘विभाजन की त्रासदी‘ में लिखते हैं कि माउंटबेटन मुस्लिमों को एक विजेता समाज मानता था, जबकि हिन्दुओं पराजित। मुस्लिम नेताओं से उसकी तुरंत दोस्ती हो जाती थी और उसका कहना था कि मुस्लिम अंग्रेजी शासन को बनाए रखना चाहते हैं। उसका मानना था कि भारत को अंग्रेजों ने ही अखंड बनाया है। जिन्ना के भड़काने के बाद देश भर में 7000 से अधिक हिन्दुओं का नरसंहार हो गया था।

त्रिपाठी लिखते हैं कि विभाजन का सबसे बड़ा कारण पृथक निर्वाचन वाली व्यवस्था थी, जिसे कॉन्ग्रेस ने मान लिया था। 1916 में मुस्लिम लीग से उसने समझौता किया, जिसके तहत मुस्लिमों में भारत से अलग होने की भावना राजनीतिक रूप से भी भर गई। इसे ‘मार्ले मिंटो सुधार’ नाम दिया था, जिसने भारत का बिगाड़ ही किया। एक तरह से कॉन्ग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे समर्पण कर दिया। सर सैयद अहमद खान खुद एक अंग्रेज कर्मचारी हुआ करते थे और उन्होंने मुस्लिमों को अंग्रेजी शिक्षा ग्रहण कर सरकारी नौकरियों के लिए उकसाया था, क्योंकि उन्हें पढ़े-लिखे हिन्दू समाज से द्वेष था।

कॉन्ग्रेस और नेहरू विभाजन को हो गए थे राजी

उन्होंने ही मुस्लिमों को कॉन्ग्रेस के आंदोलन से न जुड़ने की सलाह दी थी। बंगाल में भी सरकारी नौकरियों से लेकर कारोबार तक में हिन्दुओं की प्रतिष्ठा थी, जिससे मुस्लिमों को ईर्ष्या होने लगी। कॉन्ग्रेस के तीसरे ही अध्यक्ष बदरुद्दीन तैयब ने ही लिखा था कि कोई भी भारत को एक राष्ट्र नहीं मानता है, वो भी सन् 1888 में। मुस्लिम लीग के दबाव में महात्मा गाँधी और कॉन्ग्रेस ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया, जो खलीफा के शासन की वापसी के लिए हुआ था और इसकी आड़ में हिन्दुओं का नरसंहार हुआ।

इस पुस्तक में ये भी लिखा है कि अबुल कमाल आज़ाद मानते थे कि जवाहरलाल नेहरू ने विभाजन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, क्योंकि इसके पीछे उनकी पत्नी एडविना माउंटबेटन का हाथ था। एडविना ने नेहरू के सामने पंजाब में हुए दंगों को लेकर आँसू बहाए और नेहरू पिघल गए। इसमें बताया गया है कि एडविना और उनकी बेटी पामेला को नेहरू को मनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। जवाहरलाल नेहरू ने कॉन्ग्रेस में विभाजन के प्रस्ताव को रखा और उस समय बिहार-बंगाल के दौरे पर गए महात्मा गाँधी को इसकी सूचना नहीं दी।

राम मनोहर लोहिया ने अपनी पुस्तक ‘भारत विभाजन के गुनहगार‘ ने इसके बाद हुई बैठक का जिक्र किया है, जिसमें गाँधी की आपत्ति के बाद नेहरू आवेश में आए गए और कहा कि वो तो हर बात की जानकारी गाँधीजी को देते रहते हैं, लेकिन दूर नोआखली में होने के कारण उन्हें विस्तार से नहीं बता पाए। लोहिया ने तत्कालीन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष आचार्य कृपलानी का जिक्र किया है जो बैठकों में सोए रहते थे और मौलाना अबुल कलम आज़ादी सिगरेट का धुआँ उड़ाते रहते थे।

टीवी एक्टर करणवीर बोहरा ने महिला से ब्याज पर लिए ₹1.99 करोड़: दावा- पैसे माँगे तो पत्नी के साथ धमकाया, कहा- हत्या कर देंगे

टीवी के मशहूर एक्टर करणवीर बोहरा (Karanvir Bohra) पर धोखाधड़ी का आरोप लगा है। बुधवार (15 जून 2022) को 40 साल की एक महिला ने बोहरा पर 1.99 करोड़ रुपए ठगने का आरोप लगाया है। महिला का आरोप है कि बोहरा ने उससे पैसे उधार लेते वक्त 2.5% ब्याज के साथ उसे वापस करने का वादा किया था।

पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में महिला ने कहा है कि एक्टर बोहरा ने केवल एक करोड़ रुपए वापस किए। बाकी का मूलधन और ब्याज वो नहीं चुका रहे हैं। इस मामले में बोहरा समेत 6 लोगों के खिलाफ मुंबई के ओशिवारा पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि टीवी एक्टर मनोज बोहरा उर्फ ​​करणवीर बोहरा और उसकी पत्नी तजिंदर सिद्धू ने उसे धमकी दी है कि अगर उसने पैसे वापस माँगे तो वे उसकी हत्या कर देंगे।

उल्लेखनीय है कि बीते कुछ सालों में बोहरा टीवी शो नच बलिए 4, झलक दिखला जा 6, खतरों के खिलाड़ी 5, बिग बॉस 12 और आखिरी बार कंगना रनौत की रियलिटी शो ‘लॉकअप’ में नजर आए थे। ‘लॉकअप’ के शो में उन्हें दूसरे कंटेंस्टेंट से ये कहते हुए देखा गया था कि वह कर्ज में हैं और उसे चुका नहीं पा रहे हैं। इस कारण उनके मन में आत्महत्या के खयाल आ रहे हैं।

एक्टर ने कहा था कि वो एक बड़ी ही गंभीर आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं और उनके खिलाफ कर्ज के पैसे वापस नहीं करने के कई केस दर्ज किए हैं। उन्होंने कहा था कि अगर परिवार में उनकी देखभाल करने वाला कोई न होता तो शायद वो सुसाइड कर चुके होते। उन्होंने ये माना है कि 2015 के बाद से उन्होंने जो भी रियलिटी शो किए हैं वो सभी कर्ज उतारने के लिए थे।

खास बात ये है कि इतने कर्जे में डूबे होने के बाद भी एक्टर और उनकी पत्नी अपने बच्चों को हमेशा एक अच्छी लाइफ स्टाइल देते रहे हैं। हाल ही में दंपति ने अपनी जुड़वाँ बेटियों को भारत के बजाय कनाडा के एक स्कूल में एडमिशन दिलाने का फैसला किया था। साथ ही, वर्ष 2019 में दोनों ने बेला और विएना नाम की अपनी जुड़वाँ बेटियों के लिए हैलोवीन-थीम वाली स्पेशल जन्मदिन की पार्टी रखी थी।

बहरहाल, मुंबई पुलिस ने मामले में करणवीर बोहरा के नाम से मशहूर मनोज बोहरा के खिलाफ आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल इस मामले की जाँच पुलिस कर रही है। इस मामले में दोनों आरोपितों के बयान जल्द ही दर्ज किए जाएँगे।

ऐसी बीवी ना मिले दोबारा: पीड़ित पतियों ने 108 बार पीपल की उलटी परिक्रमा की, ‘पत्नी पीड़ित आश्रम’ में कौए की पूजा

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में एक कार्यालय है। नाम है- पत्नी पीड़ित आश्रम। इसी औरंगाबाद में 14 जून 2022 को वट सावित्री पूर्णिमा पर कथित पीड़ित पतियों ने एक अनूठा प्रदर्शन किया। उन्होंने पीपल के पेड़ की 108 बार उलटी परिक्रमा की। भगवान से पत्नी से बचाने की प्रार्थना की। फिर से ऐसी बीवी नहीं मिलने का आशीर्वाद माँगा।

आश्रम के संस्थापक भरत फुलारे ने बताया, “वट सावित्री पूर्णिमा के अवसर पर महिलाएँ बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन और सात जन्मों के लिए एक ही पति पाने की प्रार्थना करती हैं। हम अपनी पत्नियों से परेशान हैं और उनसे छुटकारा पाने के लिए हमने पीपल के पेड़ की पूजा करते हुए प्रार्थना की है कि कभी ऐसी जीवनसंगिनी ना मिले।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई कानून बनाए गए हैं, लेकिन उनका दुरुपयोग भी हो रहा है। इसका डर दिखाकर पुरुषों को प्रताड़ित किया जा रहा है। अब पुरुषों के लिए भी कानून बनाने की जरूरत है ताकि वे अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें।

फुलारे ने कहा कि उन्होंने पत्नी पीड़ित आश्रम की स्थापना इसलिए की है ताकि पत्नियों से पीड़ित पुरुषों को सुकून मिल सके। हालाँकि इस आश्रम में प्रवेश उतना आसान नहीं है। यहाँ दाखिल होने के लिए पत्नी द्वारा पति पर कम से कम 20 केस दर्ज होने चाहिए या फिर पत्नी की वजह से पति जेल की हवा खा चुका हो। अब पीपल की पूजा करके नई शुरुआत की गई है। 

रोजाना होती है कौए की पूजा

इस आश्रम में प्रवेश करते ही पहले कमरे में कार्यालय है। यहाँ पत्नी पीड़ितों को कानूनी सलाह दी जाती है। कार्यालय में थर्माकोल से बना एक बड़ा सा कौआ भी है। रोजाना सुबह-शाम उसकी पूजा की जाती है। आश्रम में रहने वाले बताते हैं कि मादा कौआ अंडा देकर उड़ जाती है, लेकिन नर कौआ चूजों का पालन-पोषण करता है। ऐसी ही कुछ स्थिति पत्नी पीड़ित पति की होने की वजह से कौए की प्रतिमा का पूजन किया जाता है।

‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से राँची में हिंसा फैलाने वाला नवाब चिश्ती गिरफ्तार: दंगा भड़काने में 2 बार पहले भी जा चुका है जेल, अब तक 29 पकड़ाए

झारखंड की राजधानी राँची (Ranchi) में 10 जून को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा में अब तक 29 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, गैंग्स ऑफ वासेपुर व्हाट्सएप ग्रुप में भड़काऊ मैसेज को वायरल करने के आरोपित नवाब चिश्ती को पुलिस ने मंगलवार (14 जून 2022) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) द्वारा इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ की गई कथित विवादित टिप्पणी के मामले में 10 जून को प्रदर्शन का मैसेज इसी व्हाट्सएप ग्रुप से वायरल किया गया था। आरोपित नवाब ने ग्रुप में लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी।

जाँच में यह भी सामने आया है कि नवाब ही इस ग्रुप का एडमिन है। यूनुस चौक डोरंडा का नवाब सोशल मीडिया पर तरह-तरह के मैसेज भेजकर धार्मिक उन्माद और दंगे भड़काता रहा है। राँची हिंसा में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। नवाब दंगा भड़काने के आरोप में दो बार जेल भी जा चुका है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में पुलिस ने 43 अन्य लोगों को हिरासत में भी लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने बताया कि हिंसा के बाद सीसीटीवी फुटेज और फोटो की जाँच के आधार पर आरोपितों की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस के मुताबिक, कई और आरोपितों की पहचान की गई है और उन्हें भी जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।

गौरतलब है कि वासेपुर झारखंड का ही एक स्थान है, जो राँची के बगल के धनबाद जिले में स्थित है। इस स्थान के नाम पर जून 2012 में बॉलीवुड में फिल्म भी बन चुकी है, जिसमें इस जगह को अपराधियों का गढ़ बताया गया है।

वहीं, राँची हिंसा के दौरान मारे गए मुदस्सिर की अम्मी ने पुलिस को धमकी देते हुए एक इंटरव्यू में कहा था, “गुंडई अब नहीं चलने वाली। वो वर्दी में गुंडा बनेंगे? क्या सोच कर रखा है कि FIR नहीं लिखेगा? ईंट से ईंट बजा देंगे। उन्हें FIR हर हाल में लिखनी होगी, वरना हम उन्हें शांति से नहीं रहने देंगे। मेरे बाबू को कैसे मारा? वो सिर्फ इस्लाम जिंदाबाद बोला था। क्या सरकार ने उन्हें (पुलिसवालों) को आदेश दिया था कि जो इस्लाम जिंदाबाद बोले उसे गोली मार देना ? मेरा बेटा अभी 10 वीं का एग्जाम दिया था और कम्प्यूटर भी पढ़ रहा था।”

दलित से शादी करने पर सबरीना को ताना मारता था जीजा फरहान, कहासुनी का झगड़ा इतना बढ़ा कि मारा गया

आईपी ​​एस्टेट थाना क्षेत्र के टाकिया काले खाँ इलाके में रविवार (12 जून, 2022) की देर रात साली को ताना मारने पर एक शख्स ने अपने ही साढ़ू 32 वर्षीय फरमान की बेरहमी से हत्या कर दी गई। मामले में पुलिस ने हत्या और हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपित बाल्मीकि समाज के राजकुमार उर्फ़ भोला और उसके साथी मुस्तकीम उर्फ ​​मोटा को गिरफ्तार कर लिया है।

क्या है मामला

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि रविवार की रात 10:45 बजे एलएनजेपी अस्पताल से 32 वर्षीय फरमान नामक व्यक्ति को मृत लाए जाने की खबर मिली। फरमान की चाकू से गोदकर बेरहमी से हत्या की गई थी। मामले में सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट डीसीपी ने बताया कि शुरुआती जाँच में पता चला कि मृतक फरमान दिल्ली के मीर दर्द रोड का निवासी था और रविवार रात राजकुमार नामक शख्स ने चाकू से गोदकर हत्या कर दी। दोनों साढ़ू भाई बताए जा रहे हैं।

कहा जा रहा है कि फरमान का निकाह पास में रहने वाली आलिया से दो साल पहले हुई थी और आलिया की बहन सबरीना ने पड़ोस में रहने वाले राजकुमार उर्फ़ भोला से 1 साल पहले शादी की थी। फरमान और राजकुमार बाइक मकैनिक हैं। राजकुमार के दलित हिंदू होने की वजह से फरमान और उसके अब्बू इद्रीश को यह रिश्ता पसंद नहीं था। दोनों आलिया की बहन सबरीना को हमेशा ताना मारते थे। सबरीना के हिन्दू लड़के राजकुमार से शादी करने पर अक्सर इनमें लड़ाई-झगड़ा होता था।

जीजा ने साढ़ू को उतारा मौत के घाट

कहा जा रहा है रविवार रात भी दोनों परिवारों के बीच में कहासुनी हुई। और उनके बीच आपसी विवाद इतना बढ़ गया कि राजकुमार चाकू लेकर फरमान की हत्या करने निकल गया। घर के पास ही उसे फरमान मिल गया तो उसने चाकू से ताबड़तोड़ कई वार किए। इस दौरान फरमान के अब्बू इद्रीस बेटे को बचाने पहुँचे तो आरोपित ने उन्हें भी चाकू से घायल कर दिया। वारदात के बाद लोगों ने घायलों को एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ फरमान की मौत हो गई।

घटना पर तुरंत कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने हत्या के मुख्य आरोपित राजकुमार उर्फ़ भोला निवासी मिरदर्ड रोड, दिल्ली और साथी मुस्तकीम उर्फ ​​मोटा निवासी तुर्कमान गेट, दिल्ली को महज 8 घंटे में हरिद्वार से धर दबोचा। मामले में सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट डीसीपी श्वेता चौहान ने बताया कि लगभग 400 किलोमीटर तक फोन लोकेशन के आधार पर आरोपित पकड़े गए। आरोपितों के पास से वाहन, एक स्विफ्ट कार को जब्त कर लिया गया और अपराध के लिए इस्तेमाल किया गया हथियार (एक चाकू) भी बरामद किया गया। मामले में हत्या और हत्या के प्रयास की धाराओं को जोड़ते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

बंगाल पुलिस अक्षम तो सेंट्रल फोर्स बुलाइए: हिंसा पर ममता बनर्जी की सरकार को हाईकोर्ट ने फटकारा, कहा- CCTV फुटेज इकट्ठा कर दंगाइयों की पहचान करो

इस्लाम के पैगंबर (Islamic Prophet Mohammad) के कथित अपमान को लेकर पश्चिम बंगाल (West Bengal) में मचाए जा रहे उत्पात को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) की सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि यदि राज्य की पुलिस स्थिति को नियंत्रित करने में अक्षम है तो केंद्रीय बलों को सरकार बुलाए।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस राजर्षि भारद्वाज की बेंच ने कहा कि ने हिंसा वाले इलाकों का CCTV फुटेज इकट्ठा करने के लिए कहा है, ताकि हिंसा में शामिल दंगाइयों की पहचान की जा सके और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके।

बेंच ने यह भी कहा कि राज्य के महाधिवक्ता को उन लोगों को मुआवजा देने के मुद्दे पर भी राज्य सरकार का रुख स्पष्ट करना चाहिए, जिनकी हिंसा के दौरान संपत्ति का नुकसान हुआ है। हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को 15 जून तक पोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

अदालत की खंडपीठ ने कहा कि राज्य के अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएँ कि कोई अप्रिय घटना न हो और शांति व्यवस्था कायम रहे। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा, “यदि राज्य की पुलिस किसी भी स्थान पर स्थिति को नियंत्रित करने में असफल रहती है तो प्राधिकारी तत्काल कदम उठाते हुए केंद्रीय बलों को बुलाएँ।”

अदालत अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा दाखिल अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। नीलाद्री साहा नाम के व्यक्ति ने अपनी याचिका में कहा है कि जब भाजपा का कार्यालय जलाया जा रहा था, तब पुलिस मूकदर्शक बनकर खड़ी थी। याचिका में सैन्य या केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की माँग की गई थी।

वहीं, एक अन्य याचिका में 9 जून 2022 को हावड़ा अंकुरहाटी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध करने और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने वाले व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और उन पर भारी जुर्माना लगाने की माँग की गई है।

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता एसएन मुखर्जी ने अदालत को बताया कि यह घटना दो व्यक्तियों द्वारा की गई दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणी के कारण हुई और उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना जैसे अन्य राज्यों में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं।

बता दें कि पैगंबर के अपमान के नाम पर बंगाल के हावड़ा, मुर्शिदाबाद, 24 परगना जैसे कई जिलों में दंगाइयों द्वारा भारी उत्पात किया गया। इस दौरान दंगाइयों ने ना सिर्फ पुलिस पर पथराव किया, बल्कि कई हिंदू परिवारों के घरों में आग लगा दी थी।

वहीं, नदिया जिले में स्थित बेथुआडहरी में 1000 मुस्लिमों की भीड़ ने भारतीय रेलवे को निशाना बनाया गया और ट्रेन को क्षतिग्रस्त कर दिया था। इस दौरान कई यात्रियों को भी चोटें भी आईं। मुस्लिम भीड़ ने रेलवे स्टेशन और ट्रेन पर जम कर पत्थरबाजी की थी।