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‘नूपुर शर्मा की रक्षा को सड़क पर उतरेंगे 18 लाख नागा साधु’: साधु-संतों का जुटान, कहा – हमारी बेटी को मिल रही रेप की धमकी, शांत नहीं बैठेंगे

पाताल पुरी मठ के प्रमुख महंत बालक दास का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है कि ​यदि इस्लामवादियों ने बीजेपी की प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की तो साधु समाज शांत नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा कि हमारी बेटी को बलात्कार की धमकी दी जा रही है, उनकी रक्षा के लिए 18 लाख नागा साधु-संत सड़कों पर उतरेंगे।

यह वीडियो 11 जून को काशी में हुई धर्म परिषद का है। धर्म परिषद का आयोजन वाराणसी के हर तीरथ के सुदाम कुटी में किया गया था। बैठक की अध्यक्षता पातालपुरी मठ के प्रमुख महंत बालक दास ने की थी। इस सभा में काशी में कई मठों, पीठों और अखाड़ों के प्रमुख पुजारियों और धार्मिक नेताओं के साथ-साथ कई अन्य हिंदू संतों ने भाग लिया था।

इस दौरान महंत बालक दास ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “दिन-ब-दिन अराजकता बढ़ती ही जा रही है। लोगों ने हद ही पार कर दी है। भगवान शिव का मजाक उड़ाया जा रहा है। शिवलिंग को एक फव्वारा कहा जा रहा है। इसके बाद भी सनातन धर्म के लोग शांत बैठे हुए हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “हद हो गई, भारत की एक बेटी ने भगवान शिव पर अपमानजनक टिप्पणी सुनने के बाद वही कहा जो उनके कुरान में लिखा हुआ है। सभी सनातनी लोग शांतिपूर्ण बर्ताव कर हैं, फिर भी ये मौलवी मस्जिदों से लोगों को बुला रहे हैं कि वे आएँ पत्थर फेंकें और अराजकता फैलाएँ।”

महंत बालक दास ने कहा कि अगर चीजें गलत होती हैं तो नागा साधु नूपुर शर्मा के बचाव में सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने कहा, “आज हमारी बेटी को बलात्कार की धमकी दी जा रही है। अगर उसे कुछ हो गया तो ध्यान रहे कि यह साधु संत समाज शांत नहीं बैठेगा। 18 लाख नागा साधु सड़क पर उतर आएँगे, साथ ही पूरा संत समाज सड़क पर उतर आएगा और फिर आप उस दृश्य की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।”

बीते दिनों संतों ने इस्लामिक कट्टरपंथियों की हिंसा के खिलाफ 16 प्रस्तावों को पास किया था। संतों ने एक सुर में कहा था कि भारत में किसी भी तरह से तालिबानी मानसिकता को फैलने नहीं दिया जाएगा। धर्म परिषद में नूपुर शर्मा को रेप और हत्या की धमकी देने वालों को भी जेल भेजने की माँग की गई थी।

ऑपइंडिया से बात करते हुए महंत बालक दास ने कहा था, “काशी में इस तरह की कोई घटना न घटे, इसको लेकर शांति की अपील की गई है। लेकिन, ये सोचने का विषय है कि आखिर जुमे की नमाज में ऐसा क्या पढ़ाया जा रहा है कि वहाँ से निकलते ही लोग उतने उग्र हो जा रहे हैं। 15-16 साल के उन्मादी लड़के पत्थरबाजी कर रहे हैं।”

कौन हैं नागा साधु?

नागा साधु भगवान शिव के भक्त होते हैं, जो हिमालय में निवास करते हैं। आदिगुरु शंकराचार्य की ओर से स्थापित किए गए विभिन्न अखाड़ों में रहने वाले ऐसे साधु नग्न रहते हैं और शरीर पर धूनी की राख लपेटकर रखते हैं। कुंभ मेले में ये शाही स्नान के लिए एकत्रित होते हैं।

जुबैर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने वालों को मिलेगा बड़ा इनाम, अरबपति की घोषणा: हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान का मामला

ट्विटर पर हिन्दू धर्म के समर्थन में बोलने वाले प्रमुख आवाजों में से एक भारतीय मूल के अरबपति व्यवसायी अरुण पुदुर ने ऑल्ट-न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ उसके हिन्दूफोबिक विचारों और हिन्दुओं के खिलाफ चलाए जा रहे नैरेटिव से लड़ने के लिए पुरष्कारों की घोषणा की है। लड़ाई लड़ी है। पुदुर ने उन लोगों के लिए आर्थिक मदद की घोषणा की है जो जुबैर के खिलाफ उसके हिंदूफोबिक कार्यों के कारण कानूनी कार्रवाई करने के इच्छुक हैं।

पुदुर, जो एक सॉफ्टवेयर फर्म सेल्फ्रेम टेक्नोलॉजी ग्रुप ऑफ कंपनीज चलाते हैं, उन्होंने यह घोषणा ट्विटर पर की है। पुरस्कार के अनुसार, जो व्यक्ति जुबैर को हिंदूफोबिया का दोषी ठहराते हुए लम्बे समय तक जेल भेजेगा, उसे पुदुर की तरफ से ₹ ​​50,000 / – का पुरस्कार दिया जाएगा।

वहीं कानूनी कार्रवाई के माध्यम से जुबैर के लिए जेल की सजा का प्रावधान सुनिश्चित करने वालों को ₹10,000/- और मोहम्मद जुबैर और उसके ‘फैक्ट चेक’ पोर्टल ऑल्ट न्यूज़ के खिलाफ हर भारतीय राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में दर्ज की गई पहली FIR के लिए ₹1,000/- मिलेंगे।

यह तब हुआ जब मोहम्मद जुबैर ने अपना फेसबुक अकाउंट डिलीट कर दिया। शायद हिंदू धर्म और हिंदू देवताओं के खिलाफ अपनी विवादास्पद सामग्री को हटाने के लिए। कई नेटिज़न्स के अनुसार जुबैर, नूपुर शर्मा विवाद के बीच हिंदू धर्म और हिंदू देवताओं का मजाक उड़ाते हुए उसके पुराने ट्वीट्स के ऑनलाइन सामने आने के बाद से गुस्से में है।

अरुण पुदुर द्वारा की गई घोषणा के अनुसार, मोहम्मद जुबैर के खिलाफ कार्रवाई कानूनी होनी चाहिए। अपनी घोषणा के बारे में बात करते हुए पुदुर लिखते हैं, “जुबैर ने लंबे समय से मीडिया का दुरुपयोग किया, झूठ बोला और हेरफेर किया। यह समय है कि वह अपने अपराधों की सजा भुगते। उसके झूठ की वजह से बहुत से लोग घायल हुए, दंगे हुए और मौतें हुईं, अब इसे रोकना होगा!”

बता दें कि मलेशिया के पुदुर ने मोहम्मद जुबैर के अपराधों पर, खासकर हिंदू धर्म के खिलाफ उसके द्वारा किए गए अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट को गंभीरता से संज्ञान लेने का फैसला किया है। जुबैर के फेसबुक अकाउंट को डिलीट किए जाने के बाद लोग हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने वाले उसके पुराने ट्वीट्स खोज-खोज कर शेयर कर रहे हैं।

गौरतलब है कि नूपुर शर्मा पहले ही बता चुकी हैं कि कैसे जुबैर ने पैगंबर मोहम्मद पर उनकी टिप्पणियों का एडिटेड वीडियो साझा करके उनके खिलाफ ईशनिंदा का माहौल बनाया और उन्हें लगातार धमकी देने के लिए मुस्लिम उम्माह को उकसायाहै। जबकि अब खुद उसी के पुराने पोस्टों यह पता चला है कि AltNews के सह-संस्थापक का स्वयं हिंदू धर्म और हिंदू देवताओं के बारे में अपमानजनक पोस्ट करने का इतिहास रहा है।

प्रयागराज के दंगाई की बेटी का ट्विटर लोकेशन ‘Lynchistan’, देश का अपमान: CAA-NRC ही नहीं, हिजाब विवाद में भी कई शहरों में दिए भाषण

प्रयागराज में दंगा भड़काने वाले जावेद पंप की JNU वाली बेटी ने सोशल मीडिया पर अपना लोकेशन ‘Lynchistan (लिंचिस्तान)’ लिख दिया है। उन्होंने ट्विटर पर अपना लोकेशन बदल कर ‘Lynchistan’ सेट कर दिया। बता दें कि गिरोह विशेष भारत में ‘मुस्लिमों की मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या)’ का नैरेटिव फैलाता रहा है, जिसे जावेद आफरीन ने आगे बढ़ाया है। बता दें कि उनके अब्बा मोहम्मद जावेद के घर पर प्रयागराज में योगी आदित्यनाथ सरकार का बुलडोजर चल चुका है।

आफरीन फातिमा AMU (अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी) से ‘बैचलर और आर्ट्स (BA)’ और ‘मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA)’ की पढ़ाई की है। CAA और NRC के विरोध में हुए प्रदर्शनों में खासा सक्रिय रहीं आफरीन फातिमा ने संसद भवन पर हमला करने वाले आतंकी अफजल गुरु का भी समर्थन किया था। उन्होंने शाहीन बाग़ और जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों में भड़काऊ भाषण दिए थे। उस दौरान उन्होंने न सिर्फ JNU और दिल्ली, बल्कि अपने गृह जिले प्रयागराज में भी माहौल बिगाड़ने का काम किया था।

हिजाब विवाद में भी आफरीन फातिमा ने कट्टर इस्लामी एजेंडे को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। उन्होंने इस दौरान दक्षिण भारत के कई शहरों का दौरा कर के भाषण दिए थे। बता दें कि कर्नाटक में ही मुख्यतः ये विवाद सामने आया था। जावेद पंप की दूसरी बेटी सुमैया प्रयागराज में ही पीएचडी कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा है कि आफरीन फातिमा के ट्विटर बायो में लोकेशन ‘Lynchistan’ डालने से जाँच एजेंसियाँ भी सतर्क हो गई हैं।

लोगों ने इसे देश विरोधी हरकत करार दिया है। जावेद पंप को दिल्ली दंगा मामले में जेल में बंद उमर खालिद के अब्बा का भी करीबी बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर आफरीन फातिमा के समर्थन में इस्लामी और वामपंथी गैंग ने हैशटैग चलाया और ट्वीट्स किए। यूपी पुलिस इंटरनेट पर दंगाइयों का समर्थन करने वालों को खँगाल रही है। आफरीन फातिमा JNU स्टूडेंट यूनियन की काउंसलर भी हैं। उनके अब्बा का घर फ़िलहाल जमींदोज किया का चुका है।

PM मोदी का स्वागत करने जा रहे थे आदित्य ठाकरे, SPG ने कार से उतारा: भड़के CM उद्धव, कहा – मेरा बेटा मंत्री है…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (14 जून 2022) को महाराष्ट्र पहुँचे। इस दौरान उन्होंने पुणे में तुकाराम महाराज मंदिर का उद्घाटन किया। पीएम को पुणे में रिसीव करने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पहुँचे। इस दौरान उनके साथ बेटे और राज्य के पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे भी थे, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) की सुरक्षा में शामिल एसपीजी कर्मियों ने कैबिनेट मंत्री आदित्य ठाकरे (Aaditya Thackeray) को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की कार से उतार दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और अपने पिता उद्धव ठाकरे की गाड़ी में बैठकर पीएम से मिलने के लिए कोलाबा में नौसेना के हेलीपोर्ट आईएनएस शिकरा जा रहे थे। उद्धव ठाकरे की गाड़ी शिकारा हेलीपोर्ट पहुँची, तो वहाँ तैनात एसपीजी ने कार की चेकिंग कीं। कार में आदित्य ठाकरे को देख एसपीजी ने उन्हें नीचे उतार दिया।

इसकी वजह आदित्य ठाकरे का वीआईपी लोगों की लिस्ट में शामिल नहीं होना बताया जा रहा है। जिन वीआईपी लोगों को पीएम का स्वागत करना था, उस लिस्ट में आदित्य का नाम नहीं था। इसलिए स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) ने उन्हें गाड़ी से नीचे उतरने को कहा। कहा जा रहा है कि एसपीजी के इस रवैये से उद्धव ठाकरे और उनके बेटे काफी नाराज दिखे।

उद्धव ठाकरे ने एसपीजी से कहा कि आदित्य ठाकरे उनके बेटे के तौर पर पीएम को रिसीव करने नहीं आए हैं, बल्कि वह महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री हैं। उनकी दलील थी कि महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री होने के नाते आदित्य ठाकरे आधिकारिक प्रोटोकॉल के अनुसार पीएम मोदी का स्वागत कर सकते हैं। उद्धव ठाकरे से बहस के बाद आदित्य ठाकरे को एसपीजी ने पीएम के स्वागत की अनुमति दी गई।

बता दें कि पुणे के देहू में पीएम मोदी, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री अजित पवार एक ही मंच पर थे। यहाँ पीएम और फडणवीस का मंच पर भाषण हुआ, अजित पवार का भाषण नहीं होने पर सियासत गरमा गई। एनसीपी की सांसद सुप्रिया सुले ने इसे महाराष्ट्र का अपमान बताया और कहा, “ये गंभीर बात है। राज्य के उपमुख्यमंत्री का अपमान है।”

दुनिया का दूसरा सबसे महँगा लीग बना IPL, ₹48390 करोड़ में बिके मीडिया राइट्स: जानें TV और OTT पर कहाँ देख पाएँगे

IPL के मीडिया राइट्स बेच कर BCCI को भारी कमाई हुई है। 2023-2027 साइकल के लिए ‘इंडियन प्रीमियर लीग’ के टीवी और मीडिया राइट्स बिक गए हैं। जहाँ टीवी राइट्स ‘स्टार नेटवर्क’ की झोली में गया है, वहीं डिजिटल राइट्स के लिए ‘Viacom 18’ ने बाजी मारी है। कुल 410 मैचों के लिए ये ई-ऑक्शन हुआ, जिसका नतीजा मंगलवार (14 जून, 2022) को आया। ‘भारतीय क्रिकेट कंट्रोल’ बोर्ड को इससे कितनी कमाई हुई, आइए बताते हैं।

हर मैच के वैल्यू की बात करें तो इस हिसाब से अब IPL दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्पोर्ट्स लीग बन गया है। कुल 48,390 करोड़ रुपए में इसके राइट्स बिके हैं। BCCI के सचिव जय शाह ने कहा कि आज के समय में IPL विकास (Growth) का पर्यायवाची बन गया है। ‘स्टार इंडिया’ ने 23,575 करोड़ रुपए में लीग के मीडिया राइट्स खरीदे। इस हिसाब से देखें तो कंपनी ने हर मैच के लिए 57.50 करोड़ रुपए का भुगतान किया है।

वहीं IPL के डिजिटल राइट्स 23,758 करोड़ रुपए में ‘Viacom 18’ ने खरीदे। इस कंपनी का स्वामित्व रिलायंस के पास है। उसने ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और यूनाइटेड किंगडम के लिए भी डिजिटल राइट्स अपने नाम किया। वहीं ‘टाइम्स’ को ‘मिडिल ईस्ट नॉर्थ अफ्रीका (MENA)’, अमेरिका और बाक़ी देशों के राइट्स मिले। जय शाह ने कहा कि ‘स्टार इंडिया’ की बोली महामारी के बावजूद BCCI की संगठनात्मक क्षमता को दिखाता है।

वहीं ‘Viacom 18’ की बोली की बात करते हुए जय शाह ने कहा कि भारत ने डिजिटल क्रांति देखी है और इस क्षेत्र की क्षमताएँ असीमित हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्षेत्र ने क्रिकेट की दुनिया को भी बदल दिया है। उन्होंने कहा कि ‘डिजिटल इंडिया विजन’ में क्रिकेट के विकास के लिए इसका बड़ा योगदान रहा है। IPL के मीडिया राइट्स की वैल्यू 2017 के मुकाबले ढाई गुना बढ़ गई है। इससे पहले सारे राइट्स स्टार के पास ही थे।

मंदिर नहीं बनाने दे रहे लद्दाख के मुस्लिम, सड़क पर उतरे हजारों बौद्ध: 1961 से ही हो रहा है संघर्ष, ‘जय भीम’ वाले नकली बुद्ध अनुयायी चुप

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के कारगिल में इस्लामी मौलवियों व कट्टरपंथियों द्वारा बौद्धों का प्राचीन मंदिर गोंपा बनाए जाने से रोकने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। क्षेत्र में अल्पसंख्यक बौद्धों ने इन मौलवियों के विरुद्ध आवाज उठाई है और आज भी इस संबंध में बौद्धों द्वारा रैली की गई है। वह क्षेत्र में अपने मठ के शिलान्यास के लिए लगातार माँग कर रहे हैं।

मालूम हो कि कारगिल में इस तरह दो गुटों में बँटवारा प्रत्यक्ष रूप से पहली दफा सामने आया। 31 मई को बौद्ध गुरु चोस्कयोंग पाल्गा रिनपोछे के नेतृत्व में 1 हजार से ज्यादा उनके अनुयायियों ने पदयात्रा शुरू की थी जिसे 14 जून तक कारगिल पहुँचना था। लेकिन इसी बीच मुस्लिमों ने इस पर आपत्ति जता दी। अब बौद्ध अपने अधिकार की माँग कर रहे हैं। उनके मार्च की कई वीडियो सोशल मीडिया के जरिए सामने आई हैं।

इस वीडियो को देख नेशनल सिक्योरिटी अफेयर एनालिस्ट दिव्य कुमार सोती ने सवाल उठया है। उन्होंने पूछा, “बौद्ध धर्म के नाम पर हिंदुओं को गाली देकर जीवन चलाने वाले भंते करूणाकर, वामन मेश्राम और भीम आर्मी कहाँ हैं? असली आतंकियों का सामना करने से डर लगता है क्या?”

लद्दाख में बौद्ध आंदोलन

बता दें कि शिया मुस्लिम बहुल कारगिल क्षेत्र में गोंपा को बनाना बौद्ध समुदाय की एक पुरानी माँग रही है। बौधगुरु चोस्कयोंग पालगा रिनपोछे ने अपने अनुयायियों के साथ कारगिल में इस विवादास्पद स्थल पर प्राचीन मठ की नींव रखने के उद्देश्य से यात्रा शुरू की थी, मगर कट्टरपंथियों से यह देखा नहीं गया। उन्होंने 2 कनाल भूमि पर मठ के शिनान्यास का विरोध  1969 में निकाले गए एक सरकारी आदेश पर किया। कथिततौर पर उस आदेश में लिखा था कि भूमि को कमर्शियल और रेंजीडेंशियल लिहाज से इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन मंदिर बनाने के लिए भूमि का प्रयोग नहीं होगा। हालाँकि, हम यदि 1969 से पहले की बात करें तो कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि 15 मार्च 1961 को जम्मू कश्मीर के जनरल डिपार्टमेंटट ने लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन को बौद्ध मंदिर और सराय बनाने के लिए जमीन दी थी जिसमें उन्हें धार्मिक निर्माण करने की अनुमति थी।

कहा जाता है कि ये जगह दोनों समुदायों के लिए जरूरी है। ऐसे में विवाद सुलझाने के लिए पिछले साल इसे लेकर एक गठबंध बना था। लेकिन, उसके बाद कारगिल डेमोक्रेटिक गठबंधन ने डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिख दिया और कहा कि बौद्धों का ये मार्च राजनीति से प्रेरित है। पत्र में ये भी कहा गया कि ये लद्दाख की सौहार्दता को नुकसान पहुँचा सकता है।

पत्र में बताया गया कि केडीए ने लद्दाख बौद्ध एसोसिएसन के साथ बैठक की थी। दोनों पार्टियों ने मुद्दे को सुलझाने पर सहमति जताई थी। ऐसे में किसी तीसरे शख्स को ये इजाजत नहीं होनी चाहिए कि वो क्षेत्र की शांति को हानि पहुँचाए। वहीं लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन के प्रमुख करमा शारदुल ने इस मुद्दे पर कहा कि वो इलाके में कोई तनाव नहीं पैदा करने चाहते, लेकिन ये बौद्धों का अधिकार है कि वह भी वहाँ पर पूजा करें।

स्थानीयों की बात करें तो कारगिल के मुस्लिमों का कहना कि आसपास के 20 किलोमीटर में कोई बौद्ध नहीं रहता और जो एक बिल्डिंग है उसे बौद्ध गेस्ट हाउस कहा जाता है। ऐसे में उसे वही रहने दिया जाना चाहिए। वहीं बौद्धों ने शिकायत की है कि क्षेत्र की स्थानीय जनता उन्हें बिल्डिंग में निर्माण का कार्य नहीं करने दे रही ।

प्रयागराज हिंसा के इन 37 दंगाइयों के घर और दुकान तलाश रहा PDA: जावेद पंप के बाद भी नहीं रूकेगा बुलडोजर

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के करेली और अटाला क्षेत्र में शुक्रवार (10 जून, 2022) को हुई हिंसा के मास्टरमाइंड जावेद पंप का आलीशान कोठी ध्वस्त करने के बाद प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) अब अन्य 37 दंगाइयों की भी फाइल खंगाल रहा है। जिनकी लिस्ट प्रशासन ने तीन दिन पहले ही प्राधिकरण को सौंप दी थी।

बताया जा रहा है हिंसा में शामिल इन 37 नामों में से किसी के भी मकान में अनियमितता पाई गई तो प्रशासन सख्त एक्शन लेगा। वहीं एक बार फिर बुलडोजर चलने की भनक लगते ही अटाला इलाके में कई दुकानदार जिन्हें आशंका है कि उनके दुकान का भी कुछ हिस्सा अवैध है वो खाली करते नजर आए। अटाला के मजीदी इंटर कॉलेज से सटे कई दुकान सोमवार को अपने सामान हटाते नजर आए।

लिस्ट-1

बता दें कि जब से जावेद पम्प के मकान पर हुई कार्रवाई के खिलाफ दाखिल याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है तब से हिंसा और पत्थरबाजी के मामले में शामिल सभी 85 आरोपितों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है और इलाके में बुलडोजर चलने की चर्चा एक बार फिर शुरू हो गई है।

लिस्ट-2

वहीं प्रयागराज के एसएसपी अजय कुमार ने बताया, “PDA को दो-तीन दिन पहले उन 37 लोगों के नामों की सूची मिली है जो कि अटाला और करेली क्षेत्र में पथराव की घटना में शामिल थे। प्राधिकरण के अधिकारी इन 37 आरोपितों के पते ठिकानों की तलाश कर रहे हैं, उनकी फाइल खंगाली जा रही है। हालाँकि, इलाके में ज्यादातर लोग पथराव और हिंसा की घटना के बाद मकान पर ताला लगाकर कहीं चले गए हैं, जिससे इन आरोपितों के मकान आदि का पता ठिकाना तलाशने और पूछताछ करने में मुश्किल आ रही है।”

अजय कुमार ने इस पूरे मामले में जानकारी देते हुए आगे बताया, “मुश्किलों के बावजूद प्राधिकरण के अधिकारी आरोपितों का पता लगाने के लिए रात में भी गली मोहल्लों में घूम रहे हैं। आरोपितों के मकानों की पहचान होने पर यह देखा जाएगा कि क्या उन मकानों का नक्शा पीडीए से पास है या नहीं, यदि नक्शा पास नहीं होगा तो कानून के मुताबिक उनपर कार्रवाई की जाएगी।”

बता दें कि प्रशासन की सकती के बाद PDA ने भी इन सभी 37 आरोपितों की संपत्ति का व्यौरा जुटाना शुरू कर दिया है। सभी के घरों और दुकानों का सर्वेक्षण किया जा रहा है।

गौरतलब है कि रविवार को जिला प्रशासन और पीडीए ने मिलकर प्रयागराज हिंसा के मास्टरमाइंड जावेद मोहम्मद उर्फ़ जावेद पम्प का दो मंजिला मकान दो जेसीबी और एक पोकलैंड से ध्वस्त कर दिया था। करीब 5 घंटे चली कार्रवाई के दौरान करेली इलाके में भारी फाॅर्स तैनात रही। वहीं इस मामले में किसी ने भी पुलिस या प्रशासन के खिलाफ कोई नारेबाजी या दोबारा पत्थरबाजी की हिमाकत नहीं की।

बता दें कि प्रयागराज हिंसा और पत्थरबाजी के मामले में कुल 92 लोग अब तक हिरासत में लिए गए हैं। जिनमें से 7 नाबालिग बच्चे हैं। जिन्हें सुधार गृह भेज दिया गया है। वहीं यूपी पुलिस के मुताबिक रविवार को हुई हिंसा और विरोध प्रदर्शन के मामले में अब तक पूरे राज्य भर में 333 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

स्वर्ण मंदिर म्यूजियम में लगी आत्मघाती हमलावर दिलावर सिंह की तस्वीर, की थी मुख्यमंत्री की हत्या: SGPC के फैसले के बाद कार्रवाई की माँग

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह (Beant Singh Murder) के हत्यारे दिलावर सिंह की तस्वीर अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर के म्यूजियम में लगाई गई है। सिखों की सबसे बड़ी संस्था ‘शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC)’ की ओर मंगलवार (14 जून, 2022) को आयोजित एक कार्यक्रम में मानव बम बनकर पूर्व सीएम की जान लेने वाले की तस्वीर म्यूजियम में लगाई गई। अकाल तख्त ने 23 मार्च 2012 को दिलावर सिंह बब्बर को ‘कौमी शहीद’ यानी अमर शहीद का दर्जा दिया था।

जहाँ सिख रेडिकल ग्रुप्स ने इस तस्वीर लगाने का समर्थन किया है, वहीं हिंदू संगठनों ने इसे गलत बताया है। हिंदू संगठन और ‘एंटी टेरोरिस्ट फ्रंट इंडिया’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने कहा कि बब्बर खालसा के आतंकी दोबारा पंजाब की अमन-शांति भंग करने की साजिश रच रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। आतंकियों की फोटो हरमंदिर साहब परिसर में लगाने से दरबार साहिब की पवित्रता भंग होगी।

उन्होंने कहा कि देश की एकता व अखंडता और सरदार बेअंत सिंह से प्यार करने वाले लोगों की भावनाओं को भी इससे ठेस पहुँचेगी और अगर SGPC ने दिलावर सिंह बब्बर की तस्वीर नहीं हटाई तो उनका संगठन जल्दी ही पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा।

दिलावर सिंह का तस्वीर लगाने का मामला संगरूर उपचुनाव से पहले आया है। बलवंत सिंह राजोआना की बहन कमलदीप कौर शिरोमणि, जो अकाली दल बादल की तरफ से चुनाव लड़ रही हैं, वह एसजीपीसी को नियंत्रित करती हैं। बेअंत सिंह हत्याकांड में मौत की सजा पाए पंजाब पुलिस के पूर्व कांस्टेबल राजोआना और दिलावर सिंह अच्छे दोस्त थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेंट्रल सिख म्यूजियम में बब्बर खालसा इंटरनेशनल आतंकी दिलावर सिंह की तस्वीर लगाने में देरी का एक कारण यह भी था कि वह अपनी दाढ़ी काटता था। इसके अलावा, शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच गठबंधन भी से इसमें देरी हुई।

बता दें कि पंजाब पुलिस में तैनात दिलावर सिंह बब्बर ने 31 अगस्त 1995 को मानव बम बनकर पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह काे उनकी बुलेटप्रूफ कार के साथ उड़ा दिया था।

‘अग्निपथ’ के जरिए सेना में नौकरी का बड़ा मौका, होगी ‘अग्निवीरों’ की भर्ती: ₹48 लाख का बीमा, ₹11 लाख का ‘सेवा निधि पैकेज’, आगे जॉब में मदद भी

भारत सरकार ने ‘अग्निपथ योजना’ के जरिए देश के युवाओं को ‘अग्निवीर’ बन कर नौकरी और देशसेवा, दोनों का अवसर दिया है। इसके सेहत साढ़े 17 साल से लेकर 21 वर्ष तक के युवाओं की तीनों सेनाओं के लिए भर्ती की जाएगी। प्रशिक्षण समेत कुल सेवा अवधि 4 वर्षों की होगी। सम्बंधित सेवा अधिनियम एवं विनियम के तहत ये बहाली होगी। इसके लिए पारदर्शी, स्वचालित और केंद्रीकृत चयन प्रक्रिया को अमल में लाया जाएगा।

ये योजना पूरे देश के लिए होगी, जिसमें सभी वर्गों को मौका मिलेगा। अग्निवीरों के केंद्रीकृत डेटा एवं रिकार्ड्स रखे जाएँगे। हालाँकि, सम्बंधित पद के लिए इन ‘अग्निवीरों’ को मेडिकल शर्तों को पूरा करना होगा। उन्हें ‘रेगुलर कैडर’ में नामांकन का मौका भी मिलेगा। हर एक बैच के 25% ‘अग्निवीरों’ को भारतीय सेना के ‘रेगुलर कैडर’ के लिए चुना जाएगा। उन्हें पहले वर्ष में 4.76 लाख रुपए का सालाना वेतन मिलेगा, जो अंतिम वर्ष में बढ़ कर 6.92 लाख रुपए हो जाएगा।

उन्हें ब्याज सहित 11.71 लाख रुपए का सेवा निशि पैकेज भी सेवा पूरी करने के बाद दिया जाएगा, जिस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। साथ ही उन्हें 48 लाख रुपए के बीमा का लाभ भी दिया जाएगा। सेवा पूरी करने के बाद उन्हें ‘अग्निवीर कौशल प्रमाण पत्र’ मिलेगा। इतना ही नहीं, सेवा पूरी करने के बाद उनकी अगली नौकरी की तलाश में भी मदद की जाएगी। ‘सेवा निधि पैकेज’ में ‘अग्निवीर’ और सरकार दोनों रुपए डालेंगे, जिस पर उठा ब्याज भी उन्हें मिलेगा।

उन्हें बैंक लोन लेने का विकल्प भी दिया जाएगा। इसकी घोषणा करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सेनाओ को विश्व की बेहतरीन सेना बनाने की दिशा में आज ‘कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए ‘अग्निपथ’ नामक एक बदलावकारी योजना लाने का निर्णय लाया है, जो सशस्त्र बलों में ट्रांसफॉर्मेशन वाले बदलाव लाकर उन्हें पूरी तरह आधुनिक और अच्छी तरह सुसज्जित बनाएगी।

उन्होंने बताया, “अग्निपथ योजना में भारतीय युवाओं को बतौर ‘अग्निवीर’ सशस्त्र बलों में सेवा का अवसर प्रदान किया जाएगा। यह योजना देश की सुरक्षा को मजबूत करने एवं हमारे युवाओं को सैन्य सेवाओं का अवसर देने के लिए लाई गई है। आप सब इस बात से जरूर सहमत होंगे कि संपूर्ण राष्ट्र, खास तौर पर हमारे युवा, सशस्त्र बलों को सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। अपने जीवन काल में कभी न कभी प्रत्येक बच्चा सेना की वर्दी धारण करने की तमन्ना रखता है।”

उन्होंने कहा कि ‘अग्निपथ योजना’ के अंतर्गत यह प्रयास किया जा रहा है कि भारतीय सशस्त्र बलों की प्रोफ़ाइल उतना ही नवयुवा हो, जितना कि भारतीय जनसंख्या के एक बड़े हिस्से की प्रोफ़ाइल है। उन्होंने कहा कि इसका फायदा ये होगा कि इससे नई तकनीकों के लिए प्रशिक्षण में आसानी होगी और उनकी स्वास्थ्य एवं फिटनेस का स्तर भी बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि ‘अग्निवीर’ सेवा के दौरान अर्जित कौशल और अनुभव से अन्य क्षेत्रों में भी उन्हें रोजगार प्राप्त होंगे।

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को भी उच्च कौशल वाला एक वर्कफोर्स प्राप्त होगा, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और इससे देश की GDP के विकास में योगदान होगा। ‘सेवा निधि पैकेज’ के अलावा ‘अग्निवीरों’ को ‘डेथ एंड डिसेबिलिटी पैकेज’ भी प्राप्त होगा। भाजपा ने कहा कि ये फैसला भारत का भविष्य और उज्ज्वल करेगा, हमारी सेना को और मजबूत बनाएगा एवं देश के युवाओं को देश की सेवा करने का अवसर प्रदान करेगा।

AIIMS में आने वाले मरीजों को नहीं होगी रुकने की समस्या, ऋषिकेश में 400 बेड वाला विश्राम सदन: लगेगा मामूली शुल्क, भोजनालय-लाइब्रेरी सब होगा

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ऋषिकेश में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए विश्राम सदन का निर्माण कराया जा रहा है। इस विश्राम सदन का निर्माण भाऊराव देवरस सेवा न्यास की ओर से करवाया जा रहा है। इसमें ऋषिकेश एम्स के मरीजों व उनके तीमारदारों को बहुत मामूली दरों पर आवास एवं भोजन की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।

इस न्यास के ट्रस्टी सजंय गर्ग हैं। उन्होंने बताया कि यहाँ 3.5 एकड़ लीज की भूमि पर बनने वाले माधव सेवा विश्राम सदन (Madhav Seva Vishram Sadan) में 400 लोगों को बेहद कम लागत पर ठहरने और भोजन की सुविधा दी जाएगी। उन्होंने आगे बताया कि उत्तराखंड सरकार की ओर से न्यास को 50 लाख रुपए देने की घोषणा की गई है। एम्स के समीप वीरभद्र में विश्राम सेवा सदन का निर्माण कार्य करीब 55 करोड़ की लागत से दिसंबर 2023 तक पूर्ण हो जाएगा।

बताया जा रहा है कि करीब 135 कमरों वाले भवन में 400 बेड की सुविधा होगी। यह वास्तुशिल्प संरचना, पारंपरिक भारतीय स्थापत्य के अनुसार होगा। इसमें मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए भोजनालय, पुस्तकालय, सत्साहित्य केंद्र सभागार, भजन कीर्तन, सत्संग एवं ध्यान कक्ष निर्माण, फिजियोथेरेपी, नेचुरोपैथी, योग एवं पंचकर्म की सुविधा के साथ ही निशुल्क नेत्र जाँच एवं चश्मे वितरण की सुविधा उपलब्ध होगी।

विश्राम सदन में मरीजों और उनके परिजनों को हर प्रकार की जरूरी सुविधाएँ उपलब्ध होगी। इससे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से गंभीर बीमारी का इलाज कराने के लिए आने वाले रोगियों और परिचारकों को राहत मिलेगी। अभी तक उन्हें महँगे होटलों में रहने और भोजन के लिए काफी पैसा खर्च करना पड़ता था।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जूना अखाड़े के प्रमुख स्वामी अवधेशानंद गिरी, योग गुरू बाबा रामदेव, कथावाचक संत विजय कौशल और संघ के सर कार्यवाह गोपाल कृष्ण शर्मा ने 13 जून को माधव सेवा विश्राम सदन का शिलान्यास किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा था कि यह एक ईश्वरीय कार्य है, इसमें हम भी पूरी सेवा देंगे।

बता दें कि न्यास की तरफ से बनाया जाने वाला यह छठा भवन होगा। इसी तरह के पाँच सदन देश के कई एम्स के मरीजों व उनके तीमारदारों की सेवा में पहले से चल रहे हैं, जहाँ आवास के साथ ही भोजन की सुविधा भी उपलब्ध है।