Home Blog Page 2695

‘जल्दी ही मीडिया हमारे घर पर ध्यान देगी’: एक्ट्रेस बिदिशा की मौत पर बोली थी फ्रेंड मंजूषा, 12 दिनों में 3 बंगाली अभिनेत्रियों के मिले शव

बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेत्रियों के मरने का सिलसिला लगातार जारी है। बीते 12 दिनों में तीन बंगाली एक्ट्रेस की मौत हो चुकी है। सबसे पहले पल्लवी डे (Pallavi De), उसके बाद बिदिशा डे मजूमदार (Bidisha De Majumdar) और अब मंजूषा नियोगी (Manjusha Niyogi) का शव उनके फ्लैट से बरामद हुआ है। इन तीनों ही अभिनेत्रियों की मौत में एक कॉमन बात ये दिखाई दे रही है कि इन सभी का शव इनके कमरों में लटकता हुआ पाया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, बिदिशा और मंजूषा दोनों एक-दूसरे की क्लोज फ्रेंड थीं। दावा यह भी किया जा रहा है कि मौत से पहले तीनों ही एक्ट्रेस किसी न किसी तरह के अवसाद से ग्रस्त थीं। इन सब में सबसे ताजा केस मंजूषा नियोगी का है।

मंजूषा नियोगी की मौत

शुक्रवार (27 मई 2022) को एक्ट्रेस और मॉडल मंजूषा नियोगी का शव उनके कमरे में सीलिंग फैन से लटकते हुए पाया गया। वो अपने परिवार के साथ कोलकाता के पटुली इलाके में रहती थीं। मंजूषा की मौत को लेकर उनकी माँ का कहना है कि उसकी दोस्त बिदिशा डे मजूमदार की मौत का उसे सदमा लगा था और वह बेहद में तनाव में थी। बताया जाता है कि मंजूषा अपने करियर को लेकर भी काफी परेशान रहा करती थीं।

दिवंगत एक्ट्रेस की माँ ने बताया कि मंजूषा अक्सर कहती थी की वह बिदिशा के साथ रहना चाहती है। वो हमेशा उसी के बारे में बातें करती थी। एक बार उसने कहा था कि जल्द ही मीडिया बिदिशा की तरह उसके घर पर ध्यान देगी। इस पर उसकी माँ ने मंजूषा को डाँटा था।

बिदिशा डे मजूमदार

बिदिशा डे मजूमदार (21) ने भी आत्महत्या कर ली थी। बुधवार (25 मई 2022) को उनका शव कोलकाता के नगर बाजार स्थित उनके अपार्टमेंट में फाँसी के फंदे से लटकता मिला था। बिदिशा इस फ्लैट में बीते चार महीने से किराए पर रह रही थीं। बिदिशा दुल्हन के मेकअप और फोटो शूट के लिए काफी प्रसिद्ध थीं।

बिदिशा के कमरे से एक सुसाइड नोट मिला था, जिसको कब्जे में लेकर पुलिस हत्या और आत्महत्या दोनों ही एंगल से मामले की छानबीन कर रही है। बिदिशा का एक ब्वॉयफ्रेंड था, जिसको लेकर वह परेशान रहती थी और अवसाद में चली गई थी।

पल्लवी डे की मौत

इन दोनों ही अभिनेत्रियों की मौत से 12 दिन पहले यानी 15 मई 2022 एक अन्य बंगाली एक्ट्रेस पल्लवी डे का शव मिला था। उनका शव दक्षिण कोलकाता स्थित उनके किराए के फ्लैट में पंखे से लटकता हुआ पाया गया था। वो वहाँ अपने लिव इन पार्टनर शग्निक चक्रबर्ती के साथ रहती थीं। पल्लवी ने अपने लिव इन पार्टनर के खिलाफ FIR भी दर्ज करा रखा था।

पल्लवी डे को ‘आमि सिराजेर बेगम’ और ‘मोन माने ना’ जैसे मशहूर बांग्ला टेलीविजन सीरियल्स के लिए जाना जाता है। वो काफी लोकप्रिय थीं। पलल्वी के इस कदम से बांग्ला एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई थी।

पहले बाँटे कैलेंडर फिर विवाह, इलाज और धन का लालच दे बना रहे ईसाई: बिहार के छपरा में चर्च निर्माण के खिलाफ एकजुट हुए ग्रामीण

बिहार के सारण (छपरा) जिले में दलित समुदाय के लोगों के धर्म परिवर्तन का आरोप लगा कर स्थानीय लोगों ने हंगामा किया है। बताया जा रहा है कि सदर प्रखंड में एक गाँव के पास चर्च बनाने को ले कर विवाद उठ खड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों ने चर्च बनाने वालों पर आस-पास के लोगों का धर्मान्तरण करने का आरोप लगाया है। मामले की शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों से भी की गई है। चर्च बनवा रहे लोग आंध्र प्रदेश के निवासी बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक DM और SP को दी गई अपनी शिकायत में स्थानीय लोगों ने चर्च बनवा रहे लोगों पर स्थानीय लोगों को बहला फुसला कर धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए SDO और DSP ने गाँव का दौरा किया है। बताया जा रहा है कि गाँव वालों ने प्रशासन को एक वीडियो भी दिया है जिसमें कुछ लोग गाँव के ही खेतों में खड़े हो कर प्रार्थना करते दिखाई दे रहे हैं। छपरा के भाजपा नेता शैलन्द्र सेंगर ने ऑपइंडिया को बताया कि चर्च बनाने वाले का नाम मधुकर है जो आंध्र प्रदेश के गुंटूर का निवासी है।

गाँव का नाम जटुआँ है। स्थानीय निवासी भारत माँझी ने न्यूज़ 18 को बताया, “हमारा विरोध इस बात का है कि यहाँ के लोगों को पैसे का लालच दिया जा रहा है। यहाँ पर दलित बस्ती है। इन्हें भ्रमित किया जा रहा है। फ्री शादी, शिक्षा और चिकित्सा का वादा किया जा रहा। यहाँ जबरन धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है। 3-4 आदमियों को ईसाई बना भी दिया गया है।”

एक अन्य स्थानीय निवासी शत्रुघन पासवान ने बताया, “हमसे कहा गया कि अपने देवी-देवताओं का नाम लेना बंद करो और हमारे गॉड का नाम लो। ये हमसे तो नहीं होगा। इसके बाद हमको पैसे का लालच दिया गया। हमसे कहा गया कि भगवान पेट नहीं भरेगा तो हमने जवाब दिया कि हाँ, भगवान पेट भरता है।” इसी वीडियो में एक अन्य निवासी राजा सिंह ने कहा, “यहाँ से मात्र 1 किलोमीटर दूर बिहार के गौरव जैसा द्वारकाधीश मंदिर है। फिर भी क्रिश्चियन धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहे जो सही बात नहीं है।”

एक अन्य वीडियो में चर्च बनाने वाले कारीगरों को काम बंद करके जाते हुए देखा जा रहा है। कारीगरों का कहना है, “हम काम करने का ठेका लिए हैं जवाब देने का नहीं। अभी हमें एक भी पैसा नहीं मिला है। हम यहाँ से काम बंद कर रहे हैं। जो हमसे ये बनवा रहे हैं उनका नाम हमें मालूम नहीं है।”

संजीवनी समाचार ने इस मामले में 26 मई 2022 को ग्राउंड रिपोर्ट की है। उनके रिपोर्टर से एक स्थानीय बुजुर्ग को कहे सुना गया, “मर जाएँगे, मिट जाएँगे लेकिन धर्म परिवर्तन नहीं करेंगे।” एक महिला को कहते सुना गया कि वो (चर्च बनाने वाले) सब बाहरी हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “इस गाँव में हमारी आबादी लगभग 600 से 700 के आस-पास है। हमें धमकाया गया कि अगर धर्म परिवर्तन नहीं किए तो हमारा रास्ता रोक दिया जाएगा। हमें 1 लाख रुपए लालच दिया गया लेकिन हमने 10 लाख देने पर भी धर्म न बदलने का जवाब दिया। हम सनातनी हैं और हिन्दू धर्म में ही रहेंगे। ईसाईयों की संख्या लगभग 30-40 के आस-पास थी। जब हमारी तरफ से लोग जमा होने लगे तब वो भाग गए। कल से वो नहीं आए हैं। 2 साल पहले ही 2 लोगों का धर्म परिवर्तन करवाया गया था। हमने उन दोनों का बहिष्कार कर दिया है। उनके घर हमने खाना-पीना बंद कर दिया है।”

सारण जिले के भाजपा नेता शैलेन्द्र सिंघल ने कहा, “यह एक विदेशी साजिश है। आंध्र प्रदेश से आया एक व्यक्ति यहाँ जमीन खरीदता है और 2 दलितों को वो ईसाई बनाता है। उन्हें लालच के तौर पर 1-1 लाख रुपए भी दिए गए। इसके बाद वो यहाँ चर्च बनाने की घोषणा कर देता है। जमीन लगभग 1 बीघे है। वो पूरी दलित बस्ती को ईसाई बना देना चाहता है। वो लोगों के घरों में अपना कैलेंडर लगा रहा था। अपनी मजहबी पुस्तकों को बाँट रहा था। कुछ लोगों को उसने पैसे भी दिए हैं। इसकी जानकारी लगभग 1 माह से मिल रही थी। तब तक सिर्फ अनुमान लगाए जा रहे थे। जब उसने जमीन खरीदी तब ही लोगों ने जान लिया था कि चर्च बनेगा। जब निर्माण का सामान आदि गिर गया तब उनको हम लोगों ने रोका। फिर वो पुलिस के साथ आए। पुलिस ने भी हमसे ही सवाल किया कि किसी को आप कैसे रोक सकते है? लेकिन हम किसी भी कीमत पर चर्च नहीं बनने देंगे।”

हिन्दू संगठनों ने चर्च निर्माण स्थल पर की हनुमान जी की पूजा

गौरतलब है कि जिस स्थान पर चर्च का निर्माण होना था उस जगह पर हिन्दू संगठनों ने पीपल के पेड़ के नीचे हनुमान जी की पूजा की है। बजरंग दल कार्यकर्ता बोलू सिंह ने इस पूजा के वीडियो और फोटो शेयर करते हुए लिखा, “जहाँ चर्च बनवाया जा रहा था उसी स्थान पर पहले पीपल के नीचे हनुमान जी की पूजा हुआ करती थी। कुछ लोभियों ने उस पूजा को बंद करवाया था जिसे फिर से शुरू करवाया गया है।” इस दौरान गाँव वाले ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाते सुनाई दे रहे हैं।

14 साल का था महेश, नग्न कर पेड़ से बाँध दिया: आठ साल बाद लोहे की जंजीरों से आजाद होने की जगी आस

गुजरात के राजकोट ज‍िले में पिछले आठ सालों से एक व्यक्ति नग्न अवस्था में एक पेड़ में लोहे की जंजीरों में बँधा हुआ है। रोंगटे खड़े कर देने वाली यह घटना बोटाद तालुका के सर्वा गाँव की है। यहाँ 22 वर्षीय महेश ओलकिया बीते आठ सालों से एक पेड़ से बँधे हुए अपना जीवन जी रहा है। सर्दी हो, गर्मी या फिर बरसात, कोई भी उन पर रहम नहीं दिखाता है। लेकिन एक सामाजिक कार्यकर्ता के प्रयासों की बदौलत महेश को जल्द ही अपना अपना जीवन गौरव के साथ जीने का मौका मिल सकता है।

बताया जाता है कि आठ साल पहले महेश ने लोगों से हिंसक व्यवहार करना शुरू कर दिया था। हर क‍िसी को मारना, उस पर पत्‍थर फेंकना उसकी आदत बन गई थी। ऐसे में गरीबी से त्रस्त झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले परिवार ने अपने बेटे को 14 साल की उम्र में ही नग्न अवस्था में एक पेड़ से बाँध दिया था। महेश के पिता प्रागजी ओलकिया ने बताया कि उनका बेटा मानसिक रूप से बीमार है। इसके चलते वह हिंसक हो जाता है। ऐसे में अगर कोई उसके पास जाता है तो वह पथराव शुरू कर देता है। उन्‍होंने यह भी कहा क‍ि हम बहुत गरीब हैं और उसके इलाज या उसे कहीं भी रखने के लिए हमारे पास कोई संसाधन नहीं है। इसलिए, हमने उसे एक पेड़ से जंजीर से बाँधकर रखा हुआ है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यबू पर खजुभाई के नाम से मशहूर सोशल मीडिया कॉमेडियन नितिन जानी को हाल ही में अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इस परिवार के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद वह उस परिवार से मिलने उनके गाँव गए थे। नितिन जानी को लोग सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी जानते हैं। इससे पहले भी उन्होंने बेसहारा और गरीब परिवारों की मदद की है।

परिवार और मानसिक रूप से बीमार महेश से मिलने के बाद जानी बताया क‍ि हमने गाँव के बाहरी इलाके में परिवार के लिए एक घर बनाया है। हमने वहाँ ब‍िजली और पंखे की व्यवस्था भी की है। महेश को खाना-पानी भी दिया है। वह मौजूदा समय में हिंसक है। इसलिए हम एक-दो दिन में उसे इलाज के लिए किसी साइकोलॉज‍िस्‍ट के पास ले जाएँगे।

फव्वारा साबित करने के लिए ज्ञानवापी ढाँचे में मिले शिवलिंग में 63cm छेद: कोर्ट में हिंदू पक्ष ने बताया- भगवान का अपमान, पूरे परिसर को सील करने की माँग

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के वाराणसी स्थित विवादित ज्ञानवापी ढाँचा परिसर (Gyanvapi Structure, Varanasi) में कोर्ट के आदेश पर हुए सर्वे को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हिंदू पक्ष का कहना है कि शिवलिंग के साथ छेड़छाड़ कर उसे अपमानित करने की कोशिश की गई। साथ ही शिवलिंग को फव्वारा साबित करने के लिए उसमें 63 सेंटीमीटर छेद किया गया है।

वाराणसी कोर्ट में गुरुवार (26 मई 2022) को सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने मुस्लिम पक्ष पर कई आरोप लगाए। हिंदू पक्ष ने कोर्ट में बताया कि हिंदू धर्म के आस्था के प्रतिबिंब महादेव के प्रतीक शिवलिंग का तिरस्कार किया गया और साक्ष्यों के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई।

न्यूज 18 इंडिया के पत्रकार यतेंद्र शर्मा का कहना है, “एक चकरीनुमा लोहे की वस्तु से शिवलिंग को फ़व्वारा की शक्ल देने की कोशिश हुई थी… बाद में चकरी को स्टोर रूम में रख दिया था… सर्वे के बाद जब शिवलिंग मिले तो सबूत मिटाने के लिए उस चकरी को बाहर ले जाते समय CRPF के जवानों ने मुस्लिम युवक को पकड़ लिया।” शर्मा ने इस घटना को 26 मई से 4-5 दिन पहले का बताया है।

वाराणसी कोर्ट में लगभग दो घंटे तक चली बहस में हिंदू पक्ष पर मुस्लिम पक्ष ने स्थान का स्वरूप बदलने का आरोप लगाया। इस हिंदू पक्ष वकील विष्णु जैन ने कहा कि कमीशन की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि वहाँ मंदिर था और शिवलिंग मिला है। जब शिवलिंग मौजूद है तो इसी से साफ हो जाता है कि धार्मिक स्वरूप किसने बदलने की कोशिश की।

विष्णु जैन ने कहा कि मस्जिद परिसर में मौजूद साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने वाले को CRPF ने पकड़ा है। उन्होंने कहा कि मस्जिद परिसर में मौजूद चकरी को दूसरे पक्ष के लोग फव्वारा का हिस्सा बताते हुए लेकर जा रहे थे। ऐसा करते हुए CRPF ने उन्हें पकड़ लिया और सामान को स्टोर में रखवा दिया। अधिवक्ता जैन ने पूरे परिसर की निगरानी को मजबूत करने की माँग की। 

उधर, विश्व वैदिक सनातन संघ के संस्थापक जितेंद्र सिंह बिसेन ने भी चौक थाना में एक पत्र देकर ज्ञानवापी परिसर में मौजूद स्वरूप के साथ लगातार छेड़छाड़ की जाने की शिकायत की है। इस मामले उन्होंने अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमिटी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की माँग की है।

इधर, मुस्लिम पक्ष ने सुनवाई के दौरान कोर्ट में कहा कि इस मामले में पूजास्थल कानून-1991 लागू होता है। इसके साथ ही उसने तर्क दिया कि माता श्रृंगार गौरी का केस सुनवाई करने लायक नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाए। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि परिसर में शिवलिंग मिलने की अफवाह उड़ाई गई है।

इस पर हिंदू पक्ष के ही वकील हरिशंकर जैन ने जिला जज की अदालत में 42 बिंदुओं में क्रमवार जवाब दाखिल किया। मामले को सुनवाई योग्य बताते हुए अधिवक्ता जैन ने कहा कि डॉ. एएस अल्टेकर की किताब ‘हिस्ट्री ऑफ बनारस’ में यहाँ पूजा-अर्चना के प्रमाण उपलब्ध हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में साफ कहा गया है कि अंजुमन इंतजामिया ने अवैध कब्जा किया हुआ है।

तमाम दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने 30 मई तक के लिए मामले को टाल दिया है। बता दें कि इस मामले में सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जिला जज को 8 सप्ताह का समय दिया है। इस दौरान नमाज पढ़ने और शिवलिंग की सुरक्षा सहित सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देश लागू रहेंगे।

नमाज के लिए परिसर में जुटे मुस्लिम

सर्वे के बाद यह दूसरा शुक्रवार है, जिस दिन मुस्लिम जुमे की नमाज पढ़ते हैं। विवाद बढ़ने के साथ ही नमाज पढ़ने आने वाले मुस्लिमों की संख्या बढ़ती जा रही थी। हालाँकि, कमिटी ने नमाज के लिए कम से कम लोगों को आने का आग्रह किया था। इसके बाद इस शुक्रवार को नमाजियों की संख्या पहले के मुकाबले थोड़ी कम रही।

मसाजिद कमिटी ने मुस्लिमों से अपील की जाती थी कि बहुत बड़ी तादाद में लोग नमाज के लिए आने से परहेज करें। जुमे की नमाज वे अपने-अपने मोहल्लों ही में अता करें। इसके साथ कमिटी ने यह भी अपील की थी कि जो लोग जुमे की नमाज आएँ वे इस्तिंजा (शौच) और वजू (हाथ-मुँह धोकर) करके आएँ। बता दें कि मस्जिद के वजूखाना में ही शिवलिंग मिला है, जिसे मुस्लिम फव्वारा बता रहा है। वहीं, लोग पूछ रहे हैं कि 500 साल पहले यह फव्वारा चलता कैसे था।

‘हम ही पीड़ित, हम पर ही केस’: जोधपुर के दलित परिवार का फूटा दर्द, बकरामंडी से निकली मुस्लिम भीड़ ने किया था हमला

राजस्थान के जोधपुर में कल 26 मई 2022 (गुरुवार) को पाकिस्तान के एक शरणार्थी हिन्दू परिवार पर लगभग 300 की भीड़ द्वारा पथराव और हमले का आरोप लगा था। दलित समुदाय के पीड़ित भूरालाल का आरोप था कि उनके परिवार के कई लोगों को चोटें आईं हैं। बताया गया था कि विवाद 2 गाड़ियों के आपस में टकराने से शुरू हुआ जिसके बाद बकरामंडी से निकली भीड़ ने पीड़ित के घर पथराव किया था। पुलिस ने इसे 2 पक्षों का झगड़ा बता कर कार्रवाई की बात कही थी। वहीं पथराव करने वालों पर भी FIR दर्ज कर ली गई है।

घर के सामने दिखे मुस्लिम समुदाय के लोग और पुलिस

पीड़ित परिवार द्वारा भेजे गए वीडियो में कुछ मुस्लिम समुदाय के लोग पीड़ित परिवार के घर के आगे खड़े दिखाई दे रहे हैं। मौके पर पुलिस भी है। उन सभी में आपस में बहस होती सुनाई दे रही है। एक अन्य वीडियो में पीड़ित परिवार की महिलाओं को घरों के अंदर भागते देखा जा सकता है।

लूट लिया हमारी दुकान का सामान

ऑपइंडिया से बीती रात बात करते हुए पीड़ित भूरालाल ने बताया, “हम पर अचानक ही लगभग 300 की भीड़ ने हमला किया। हम सिर्फ 3 भाई थे मौके पर। हम किराने की दुकान चलाते हैं। हमारी मारुति वैन को तोड़ डाला गया और भीड़ ने हमारी दुकान से सामान लूट लिया।”

क्षतिग्रस्त कार और उसमें बिखरा सामान

हम ही पीड़ित, हम पर ही केस

भूरालाल ने आगे बताया, “इस समय मैं और मेरा भाई सज्जन राम दोनों पुलिस कस्टडी में हैं। मेरे सिर को फोड़ दिया गया और मेरे हाथ में फैक्चर हुआ है। मेरे भाई को भी चोटें आई हैं। इसके बाद भी हम दोनों भाईयों को कस्टडी में बिठा लिया गया है। पुलिस ने हम दोनों पर धारा 151 की कार्रवाई की बात कही है। ये हमारे साथ गलत हो रहा है।”

भूरालाल ने ऑपइंडिया को अपनी कुछ तस्वीरें भी भेजी हैं।

पीड़ित सज्जन राम

उनकी मदद को कई लोग, हमारी तरफ से कोई नहीं

भूरालाल ने आगे बताया, “दूसरी तरफ से जिन्हें थाने में बिठाया गया है उनके नाम सैफू खान और नजीब खान हैं। उन्हें भी धारा 151 में पाबंद किया जा रहा है। दूसरी तरफ से लगातार कई लोग आ और जा रहे हैं। अभी भी थाने के बाहर 20-25 लोग मौजूद हैं। लेकिन हम दोनों भाइयों की तरफ से कोई नहीं आया।”

CCTV रिकॉडिंग दिखाने में अधिकारी कर रहे आनाकानी

पीड़ित परिवार के सदस्य भागचंद ने ऑपइंडिया को बताया कि हमारी तरफ से 2 लोगों को और दूसरी तरफ से 3 लोगों को 151 में पाबंद किया गया है जबकि हम पर ही हमला हुआ। बकरामंडी में हाई क्वालिटी के CCTV कैमरे लगे हुए हैं। जब हम पुलिस से उसे दिखाने के लिए बोल रहे हैं तो वो आनाकानी करते हुए दूसरे अधिकारियों पर टाल रहे हैं। हालाँकि हमें पथराव करने वालों पर एक्शन लेने का भरोसा दिलाया गया है। अभी तक किसी की जमानत नहीं हो पाई है। हम पुलिस के फोन का इंतजार कर रहे हैं। उसके बाद हम जमानत के लिए अदालत जाएँगे।

‘पथराव करने वालों पर भी लेंगे एक्शन’ : SHO बोरानाडा

ऑपइंडिया से बात करते हुए SHO बोरानाडा ने बताया, “भील पक्ष से 2 और मुस्लिम पक्ष से 3 लोगों को शांतिभंग की धाराओं में गिरफ्तार किया गया है। पथराव की शिकायत पर भी FIR दर्ज कर जाँच की जा रही है। आगे नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

6 शादी, 60 गर्लफ्रेंड, ₹40 करोड़ का फ्रॉड: कभी शेयर ब्रोकर तो कभी फिल्म डायरेक्टर बन फेंकता था ‘प्रेमजाल’, फिर चूना लगा हो जाता था फरार

किसी के लिए ‘पति’ तो किसी के लिए ‘प्रेमी’ ठग आकाश वर्मा (Conman Akash Verma) आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। उसे नोएडा के एक रेस्टोरेंट से गिरफ्तार किया गया। उस पर अलग-अलग महिलाओं से 40 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने का आरोप है। मेट्रिमोनियल साइट्स पर आईडी बनाकर वह महिलाओं से दोस्ती करता था। जाल में फँसने के बाद उनसे धोखाधड़ी कर फरार हो जाता था।

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बीते दो दशकों में उसने कई महिलाओं को अपना शिकार बनाया। 48 वर्षीय आकाश वर्मा मेट्रिमोनियल साइट्स पर कभी खुद को शेयर ब्रोकर, कभी रियल एस्टेट डेवलपर या फिर फिल्म डायरेक्टर बनकर मिलता था। जो महिला जैसी हो, उसके साथ वह वैसा ही बनकर मिलता था। उसने 6 शादियाँ कर रखीं थीं और कम से कम 60 महिलाओं के साथ उसके संबंध थे। 40 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के मामले में बीते तीन महीने से फरीदाबाद की पुलिस उसके पीछे पड़ी हुई थी और आखिरकार सोमवार (23 मई 2022) को उसे गिरफ्तार किया गया।

फरीदाबाद के बीपीटीपी थाने के एसएचओ अर्जुन धुंधारा के मुताबिक, जिन 6 महिलाओं से उसने शादी की थी, उसमें एक एनआरआई और एक मॉडल भी थी। जिन लोगों को उसने अपना शिकार बनाया था उसमें से अधिकतर भावनात्मक रूप से टूट चुकी या फिर तलाकशुदा महिलाएँ थीं। लेकिन ये सभी महिलाएँ किसी न किसी संस्थान में अच्छे पदों पर काम करती थीं। वो नई महिला को फँसाने से पहले अपनी पहचान बदल देता था। उसके खिलाफ नोएडा, दिल्ली, गुरुग्राम, गाजियाबाद औऱ फरीदाबाद में कम से कम 6 केस दर्ज हैं।

आकाश वर्मा ने फेक डॉक्युमेंट्स का इस्तेमाल कर कई सारे बैंक अकाउंट्स खोले औऱ प्रॉपर्टीज को गिरवी रखकर लोन भी लिए। लेकिन जिन प्रॉपर्टीज को उसने गिरवी रखा, उन सभी में पीड़ित महिलाओं के हस्ताक्षर थे। उसने 2005 से 2017 के बीच दिल्ली, गुजरात, मुंबई, पुणे समेत पूरे भारत में कई महिलाओं को अपना शिकार बनाया था।

कौन है आकाश वर्मा

करोड़ों की धोखाधड़ी और कई महिलाओं की जिंदगियों को तबाह करने वाला आकाश वर्मा का जन्म वर्ष 1975 में पंजाब के जालंधर में हुआ था। मिडिल क्लास फैमिली में पैदा हुए आकाश वर्मा के पिता एक प्राइवेट नौकरी करते थे। उसने जालंधर से 10वीं पास की थी। दावा यह भी है कि उसने श्रीराम कॉलेज से कॉमर्स में स्नातक किया था। हालाँकि, इसका कोई सबूत नहीं है।

मध्यमवर्गीय परिवार में पैदा हुआ आकाश शॉर्टकट के जरिए अमीर बनना चाहता था। 18 साल की आयु में उसने पहली बार शादी की और रियल एस्टेट में नौकरी की। उसने शेयरों में निवेश के साथ ही सट्टेबाजी शुरू कर दी।

गौरतलब है कि पहली बार आकाश वर्मा का नाम पुलिस के रिकॉर्ड में उस वक्त आया था, जब उसने ‘Shadi.com’ के जरिए 28 साल की एक महिला को शेयर ब्रोकर बनकर फँसाया। उसने उससे मंदिर में शादी की और फिर ऑस्ट्रेलिया में प्रॉपर्टी खरीदने के नाम पर महिला की 4 करोड़ रुपए की संपत्ति को गिरवी रखकर फरार हो गया।

आगरा की बेगम मस्जिद में दबी है भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति, औरंगजेब ने सीढ़ियों में चुनवाया था: हिंदू पक्ष की मथुरा कोर्ट में याचिका

मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि एवं शाही ईदगाह ढाँचे को लेकर जारी कानूनी विवाद के बीच एक नई याचिका दायर की गई है। मथुरा सिविल कोर्ट में दायर इस याचिका में अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने दावा किया है कि आगरा किले के अंदर दीवान-ए-खास के पास स्थित बेगम साहिबा की मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे केशव देव की पौराणिक और रत्न जड़ित प्रतिमा दबाई गई है। याचिका में आग्रह किया गया है कि पुरातत्व विभाग (ASI) से खुदाई करवाकर प्रतिमा को बाहर निकलवाई जाए।

आगरा किले में केशवदेव की मूर्ति दबी को निकालने के लिए दायर याचिका में अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे मूर्ति के दबे होने और उन पर मुस्लिमों के चलने के कारण हिंदुओं की भावनाएँ आहत हो रही हैं। इसलिए इस पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

अपनी अर्जी में अधिवक्ता सिंह ने मुगल आक्रांता औरंगजेब (Aurangzeb) के मुख्य दरबारी साखी मुस्तेक खान द्वारा लिखित पुस्तक ‘मासर-ए-आलमगिरी’ का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि औरंगजेब ने मूर्ति को तोड़वा कर आगरा के लाल किले में मौजूद बेगम साहिबा मस्जिद की सीढ़ियों में चुनवा दिया था।

मथुरा के कोर्ट में दायर अपनी याचिका में अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के डायरेक्टर जरनल (DG), आगरा ASI के अधीक्षक, ASI के निदेशक और केंद्रीय सचिव को पार्टी बनाया है।

बता दें कि मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह ढाँचे को लेकर जारी विवाद के मामले में जिला जज (सीनियर डिविजन) ने 1 जुलाई को अगली सुनवाई तय की है। यह याचिका सितंबर 2020 में कोर्ट में दाखिल की गई थी।

इसी बीच मनीष यादव नाम के एक शख्स ने खुद भगवान श्रीकृष्ण का प्रत्यक्ष वंशज बताते हुए कोर्ट में आवेदन देकर ईदगाह ढाँचे का सर्वेक्षण कराने के लिए पैनल बनाने की माँग की है। अपने आवेदन में यादव ने कहा कि सर्वे के लिए तीन सदस्यीय कोर्ट कमिश्नर का पैनल नियुक्त किया जाए और ईदगाह के बंद कमरों को खोल कर इसका सर्वे कराई जाए। इस दौरान उन्होंने पुलिस सुरक्षा की भी माँग की।

ऐसे बदली उत्तराखंड की डेमोग्राफी: 11 साल में 12.5% बढ़ी मुस्लिम आबादी, हिन्दू देवी-देवताओं के नाम से कर रहे कारोबार

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने हाल ही में एक कार्यक्रम में राज्य में छिपे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के भी सत्यापन का ऐलान किया था। उन्होंने देवभूमि की डेमोग्राफी में हो रहे बदलाव पर चिंता जताते हुए हजारों संदिग्धों के चिन्हित किए जाने का दावा किया था। इसी मुद्दे पर ऑपइंडिया से बात करते हुए उत्तराखंड के हिन्दू एक्टिविस्ट और संत स्वामी दर्शन भारती ने हालात की गंभीरता से अवगत कराया।

पहले 1.5% से 2% थी मुस्लिम आबादी, अब हो चुकी लगभग 14 %

स्वामी दर्शन भारती के मुताबिक, “पहले उत्तराखंड में मुस्लिमों की कुल आबादी 1.5 से 2% के आस-पास थी। यहाँ के मुस्लिम गढ़वाली बोलते थे और यहीं की संस्कृति को मानते थे। बाद में जब हरिद्वार जिले को उत्तराखंड में शामिल किया गया तब यहाँ की आबादी 5 से 6% हो गई थी। वहीं जब UP में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी तबसे वहाँ के हजारों मुस्लिम भाग कर उत्तराखंड में बस गए। इन बसने वालों में कई बड़े मुस्लिम नेता और व्यापारी भी शामिल हैं। अब यहाँ की मुस्लिम आबादी लगभग 14% हो चुकी है। इस आबादी में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठी भी शामिल हैं जो नदी के किनारे झुग्गियों को कब्ज़ा करते हुए आगे फैलते जा रहे हैं। उन्होंने तमाम सरकारी दस्तावेज भी बनवा डाले हैं।”

बन चुकी हैं बंगाली कालोनियाँ

स्वामी भारती ने आगे बताया, “देहरादून की विकासनगर में पहली विधानसभा में लगभग 6000 मुस्लिम वोटर थे। आज उसी विधानसभा में लगभग 32 हजार मुस्लिम वोटर हैं। ये तेजी से बढ़ी संख्या अन्य प्रदेशों से आई है। इसमें UP, बिहार, बंगाल के मुस्लिम भी शामिल हैं। आज हालात ये हैं कि उत्तराखंड के कुछ शहरों में तो बंगाली कालोनियाँ बस चुकी हैं। कम से कम 50 हजार बंगाली मुस्लिम यहाँ बसे हुए हैं। पहाड़ों की हालत भी गंभीर है। आज उत्तरकाशी में भी लगभग 5 हजार मुस्लिम वोटर हैं जबकि कभी वहाँ 150 वोटर भी नहीं थे। हमने बद्रीनाथ खाली करवाया वरना वहाँ भी मुस्लिम बस गए थे। एक बार तो मुस्लिम समाज ने बद्रीनाथ मंदिर कमेटी से अपने लिए जगह माँग ली थी। फ़िलहाल वहाँ फिर से बसना शुरू हो गए हैं क्योकि हम रोज रखवाली नहीं कर सकते। भाजपा ने कभी मुस्लिम नहीं बसाए। इनके कागजात कॉन्ग्रेस ने तैयार करवाए।”

बता दें कि नवंबर 2000 में जब उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ था तो मुस्लिमों की आबादी केवल 1.5 फीसदी थी। वहीं 2011 की जनगणना में यह बढ़कर 13.95% हो गई। इसके बाद मुस्लिमों की जनसंख्या में वृद्धि को लेकर आधिकारिक आँकड़ा उपलब्ध नहीं है। लेकिन जानकारों का कहना है आबादी बढ़ने की इस रफ्तार में कमी के कोई संकेत नहीं हैं।

व्यापार में भी हार रहा हिन्दू

स्वामी दर्शन भारती के मुताबिक उत्तराखंड झटका मीट के कारोबार के लिए ही जाना जाता था। आज यहाँ हलाल मीट का कारोबार फल फूल रहा है। हर दिन 25 करोड़ रुपए का हलाल मीट देहरादून में ही बिक रहा है। अन्य व्यापार में भी सब्ज़ी, मीट, पंचर, नाई आदि सभी पर मुस्लिम काबिज़ है। हरिद्वार के पास स्थित चिड़ियापुर में लाईन से खाने-पीने की दर्जनों दुकानें हैं। उन तमाम दुकानों के नाम बद्री केदार, गंगोत्री जैसे हिन्दू देवी देवताओं के नाम पर रखे गए हैं। लेकिन उनमे से मात्र 3 दुकानें हिन्दुओं की हैं। बाकी सभी मुस्लिम समुदाय की। देहरादून में कई मुस्लिमों की दुकानें नाम बदल कर चल रही हैं। इसके अलावा फर्नीचर, वेल्डिंग, पानी, खनन और बिल्डिंग मैटेरियल के कामों में भी मुस्लिमों का प्रभुत्व हो गया है। आप देवभूमि में अपना घर बिना मुस्लिमों के सहयोग के नहीं बनवा सकते हैं। अब तो ये सोचना पड़ेगा कि मुस्लिमों का प्रभुत्व किस क्षेत्र में नहीं है।

उन्होंने अपने पेज पर रुद्रप्रयाग में फैजाज अहमद द्वारा चलाई जा रही फल की दुकान बद्री केदार ट्रेडर्स को शेयर भी किया है।

स्वामी दर्शन भारती के मुताबिक, “केदारनाथ में 90% घोड़े मुस्लिमों के चलते हैं। जिन हिन्दुओं के इन धंधों पर कब्ज़े जमाए गए वो हिन्दू अब नौकरी कर के बच्चे पाल रहे हैं। हिन्दुओं के हाथ से गए सभी काम थोक पैसे वाले थे जिसमें GST या कोई अन्य टैक्स का झंझट भी नहीं था।”

ऋषिकेश में हिन्दू युवा वाहिनी के पदाधिकारी अमन पांडेय ने ऑपइंडिया को बताया, “ऋषिकेश में भी कई मुस्लिम कारोबारी नाम बदल कर काम करते हैं। गद्दे बेचने वाला अब्दुल मलिक ऋषिकेश मुख्य मार्किट में मलिक हैंडलूम नाम से काम करता है। इस से पहले जूस की एक दुकान इसी वजह से बंद हुई थी जो मुस्लिम हो कर अपना नाम हिन्दू बताता था।”

हरिद्वार में VHP उठा चुका है नाम बदल कर व्यापार पर आपत्ति

1 अप्रैल 2022 को हरिद्वार में विश्व हिन्दू परिषद ने भी इस मुद्दे पर एक मीटिंग की थी। इस मीटिंग में हरिद्वार से मुजफ्फरनगर तक ढाबों और होटलों को मुस्लिम मालिकों द्वारा हिन्दू नाम से चलाने पर आपत्ति जताई गई थी। इस दौरान महालक्ष्मी होटल नाम से ढाबा चला रहे मुस्लिम व्यक्ति दिलशाद के नाम का खुलासा किया गया था। उस होटल में भगवा पट्टिका लगाई गई थी। इसके अलावा कई अन्य स्थानों का खुलासा किया गया था।

मुस्लिम यूनिवर्सिटी हर हाल में बनाने का एलान

आपको याद ही होगा उत्तरखंड के विधानसभा चुनाव 2022 में कॉन्ग्रेस के हरीश रावत ने मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने का न किया था। इसका व्यापक विरोध हुआ था। बाद में कॉन्ग्रेस ने इस बयान से पल्ला झाड़ लिया था। हालाँकि। विरोध के बाद भी अप्रैल 2022 में उत्तराखंड के कॉन्ग्रेस कमेटी महासचिव अकील अहमद ने हर हाल में उत्तराखंड में मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने की घोषणा की थी।

मुस्लिम लड़की से प्रेम पर दलित विजय कांबले की हत्या, लड़की का भाई शहाबुद्दीन और नवाज गिरफ्तार: कर्नाटक के कलबुर्गी में तनाव

कर्नाटक की कलबुर्गी पुलिस ने विजय कांबले की हत्या मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान शहाबुद्दीन (19) और नवाज के रूप में हुई है। आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 और 34 के तहत केस दर्ज किया गया है। साथ ही SC/ST भी लगाया गया है।

जानकारी के मुताबिक दलित विजय कांबले का शहाबुद्दीन की बहन के साथ प्रेम संबंध था। इसी वजह से शहाबुद्दीन और नवाज ने मिलकर कांबले की हत्या कर दी। मृतक की माँ ने कहा कि शहाबुद्दीन करीब छह महीने पहले उनके घर आया था और उसने अपनी बहन के साथ रिश्ता नहीं रखने की चेतावनी दी थी। घटना के बारे में जानकारी देते हए उन्होंने बताया कि विजय के काम से लौटने के बाद उसे एक फोन आया। फिर वह कहीं चला गया। उन्होंने मीडिया को बताया, “उन्होंने उसके सिर पर वार किया और फिर चाकू से घोंप कर मार डाला।”

कलबुर्गी की SP ईशा पंत ने कहा कि लड़की के परिवार को रिश्ते के बारे में पता चल गया था और अलग धर्म होने की वजह से नाराजगी थी। पंत ने कहा, “इसी नाराजगी के चलते शहाबुद्दीन ने उसकी हत्या कर दी।”  पुलिस के मुताबिक 25 मई 2022 को कांबले को शहाबुद्दीन और नवाज एक रेलवे पुल के नीचे ले गए और हथियारों, पत्थरों एवं ईंटों से उस पर हमला किया। पुलिस ने बताया कि पीड़ित पर बेरहमी से हमला किया गया। आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। मौके पर ही काफी खून बह गया था, जिससे उसकी मौत हो गई।

ईशा पंत ने बताया, “उसकी गर्दन पर कई चोटें थीं और सिर पर भी चोट के निशान थे। वह मौके पर ही मर गया। अब तक की जाँच में पता चला है कि हमला पूर्व नियोजित नहीं था, लेकिन हम और सबूत खोज रहे हैं।” घटना के बाद कलबुर्गी के वाडी में स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने अतिरिक्त जवानों को तैनात किया है।

राजस्थान कॉन्ग्रेस में फिर मारामारी, CM गहलोत से कई MLA नाराज: खेल मंत्री ने ‘जलालत’ से माँगी मुक्ति, BJP ने कहा- डूबने वाली है जहाज

राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार (Rajasthan Congress Government) में उथल-पुथल मचा हुआ है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) के मंत्री अशोक चांदना (Ashok Chandna) अपनी ही सरकार से खफा हैं और त्याग-पत्र देने की पेशकश की है। चांदना प्रमुख सचिव कुलदीप रांका (Kuldeep Ranka) से नाराज हैं और इसको लेकर उन्होंने ट्वीट भी किया।

अपनी ट्वीट में प्रदेश एवं युवा मामलों के मंत्री अशोक चांदना ने कहा, “माननीय मुख्यमंत्री जी मेरा आपसे व्यक्तिगत अनुरोध है की मुझे इस ज़लालत भरे मंत्री पद से मुक्त कर मेरे सभी विभागों का चार्ज श्री कुलदीप रांका जी को दे दिया जाए, क्योंकि वैसे भी वो ही सभी विभागों के मंत्री है।”

दरअसल, राजस्थान की गहलोत सरकार में नौकरशाही हावी होती जा रही है। इसको लेकर कई विधायक पहले ही अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। विधायक गणेश घोघरा, राजेंद्र बिधूड़ी, धीरज गुर्जर और यहाँ तक कि खुद मुख्यमंत्री के सलाहकार संयम लोढ़ा सरकार में नौकरशाही को लेकर सवाल उठा चुके हैं।

विधायक गणेश घोघरा ने पिछले सप्ताह सीएम गहलोत को पत्र लिखकर इस्तीफा तक दे दिया था। अपने पत्र में उन्होंने कहा था, “मैं सत्तारूढ़ पार्टी का विधायक हूँ, लेकिन मुझे ऐसा लग रहा होता है कि राजस्थान सरकार द्वारा उक्त पदों पर पदासीन होने के बाद भी मेरी बातों को अनदेखा किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी मेरी बात सुनने को तैयार नहीं हैं।”

खेल मंत्री अशोक चांदना के इस्तीफे की पेशकश करने के बाद भाजपा ने प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार पर कटाक्ष किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने ट्वीट कर कहा कि अब प्रदेश में कॉन्ग्रेस सरकार का जहाज डूबने वाला है और 2023 के रुझान आने शुरू हो गए हैं।

वहीं, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत (Gajendra Singh Shekhawat) ने ट्वीट किया, “राजस्थान में स्किल डेवलपमेंट और यूथ अफेयर्स मंत्री अशोक चांदना जी ने अपने पदभार को ” जलालत” भरा बताते हुए गहलोत जी से मुक्त करने की माँग की है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे युवा द्वारा ये शब्द कहना कॉन्ग्रेस सरकार को सामंतवादी साबित करता है। युवा मामलों के मंत्री यदि जलालत का अनुभव कर रहे हैं तब राज्य के युवाओं का सोचिए?”

चांदना के ट्वीट को लेकर राज्य के एक अन्य मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी की जिम्मेदारी है कि वह चांदना के ट्वीट को गंभीरता से ले। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस मसले पर बात करेंगे।

सरकार के विधायकों एवं बढ़ते असंतोष के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि चांदना पर काम पर दबाव है, इसलिए उन्होंने तनाव में ऐसा बयान दे दिया होगा। इसे गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। सीएम गहलोत ने यह कहा कि अभी चांदना से उनकी बात नहीं हुई है।

वहीं, प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि नौकरशाही के प्रति मंत्रियों और विधायकों की नाराजगी का संज्ञान लिया जाएगा। डोटासरा ने कहा कि विधायिका और कार्यपालिका सिक्के के दो पहलू हैं। अगर किसी भी विधायक को या जनप्रतिनिधि को लगता है कि नौकरशाह सही से काम नहीं कर रहे हैं तो सरकार का काम है कि संज्ञान ले, चाहे मुख्यमंत्री हों या मंत्री। 

दरअसल, खेल विभाग और स्पोर्ट्स काउंसिल में पिछले दिनों कुछ फैसले लिए गए, जिनमें मंत्री चांदना से पूछा भी नहीं गया। खेल मंत्री को नजरअंदाज कर निर्णय लेने से चांदना नाराज हो गए। इसमें जब प्रमुख सचिव कुलदीप रांका का नाम आया तो उन्होंने मोर्चा खोलते हुए, पूरे विभाग को ही प्रमुख सचिव को सौंपने की नसीहत देते हुए इस्तीफे की पेशकश कर दी।