जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद (Mufti Mohammad sayeed) की बेटी रुबैया सईद (Rubaiya Sayeed) के 1989 में आतंकियों को छुड़ाने के लिए किए गए अपहरण (Kidnaping case) के मामले को CBI ने एक बार फिर से खोल दिया है। CBI की टाडा कोर्ट ने रुबैया सईद को गवाह के तौर पर 15 जुलाई को पेश होने के लिए समन जारी किया है।
ऐसा पहली बार हो रहा है जब रुबैया सईद को मामले में पेश होने के लिए कहा गया है। रुबैया सईद को सीबीआई द्वारा अभियोजन पक्ष के गवाह के तौर पर लिस्टेड किया गया है। सीबीआई ने 1990 की शुरुआत में इस मामले की जाँच को अपने हाथ में लिया था।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि सुरक्षा बलों ने कुछ आतंकियों को पकड़ा था, जिन्हें छुड़ाने के लिए 8 दिसंबर 1989 को मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद का कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया था। इसका आरोप जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख आतंकी यासीन मलिक (Yasin Malik) पर लगा था। यासीन मलिक के दबाव के आगे झुकते हुए भारत सरकार ने शेख अब्दुल हमीद, गुलाम नबी बट, नूर मुहम्मद कलवाल, मोहम्मद अल्ताफ और मुश्ताक अहमद जरगर को रिहा कर दिया था। आतंकियों की रिहाई के साथ ही रुबैया सईद को भी रिहा कर दिया गया। जिस वक्त ये घटना हुई थी, उस दौरान मुफ्ती मोहम्मद सईद जनता दल सरकार में गृह मंत्री थे।
यासीन मलिक को हो चुकी है उम्रकैद की सजा
जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार के आरोपित यासीन मलिक को टेरर फंडिग केस में दोषी ठहराए जाने के बाद 25 मई को उसे NIA कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई। हालाँकि, एनआईए ने उसे फाँसी की सजा देने की माँग की थी। यासीन ने भी कोर्ट को कहा था कि वो किसी तरह की भीख नहीं माँगेगा, कोर्ट को जो करना है करे।
कर्नाटक के उडुप्पी जिले में शिल्पा देवडिगा नाम की एक लड़की ने 23 मई 2022 (सोमवार) को जहर खा लिया था। हिन्दू संगठनों ने इस घटना में लव जिहाद का आरोप लगाया है। वहीं मृतका के परिजनों ने पुलिस में शिकायत दे कर अजीज नाम के व्यक्ति पर शिल्पा पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने और इसके लिए ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है।
#Karnataka: Shilpa Devadiga, 25, a resident of the Uppinakudru village near Kundapur city, died on May 25 after consuming rat poison. Hindu activists and her family have alleged that it was a case of love jihad and demanded action against the accused person. pic.twitter.com/gf2XQHnqmt
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला कुंडापुर शहर के पास उप्पिनकुद्रु गाँव का है। मृतका की उम्र 25 साल थी। बताया जा रहा है कि शिल्पा 3 साल से एक कपड़े की दुकान पर काम करती थी। काम से पहले वो ट्यूशन पढ़ती थी जहाँ उसकी मुलाक़ात कोटेश्वर के रहने वाले अजीज से हुई। अजीज पहले से शादीशुदा था लेकिन उसने शिल्पा से शादी का वादा किया। वह शिल्पा को अक्सर अपने घर बुलाने लगा। इस दौरान अजीज ने मृतका का शारीरिक शोषण भी किया।
आरोपित अजीज की उम्र 32 साल है। मृतका के भाई के मुताबिक अजीज ने उसकी बहन को कई अश्लील फोटो भी भेजे थे। इस बीच किसी बात पर आरोपित अजीज ने शिल्पा के ऑफिस में आ कर उसे धमकी भी दे डाली थी। शिल्पा इस अपमान से आहत थी। आरोप है कि उसने इसी की वजह से जहर खा लिया था। कहा जा रहा है कि जहर के रूप में शिल्पा ने चूहे मारने वाली दवा का प्रयोग किया।
इस घटना की शिकायत कुंदापुरा थाने में की गई है। शिल्पा को ब्लैकमेल करने में आरोपित अजीज की पत्नी सलमा अजीज को भी शामिल बताया जा रहा है। शिल्पा के परिवार वालों का आरोप है कि उस पर निकाह और इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया जा रहा था। ऐसा न करने पर उसकी अश्लील वीडियो और तस्वीरें वायरल करने की धमकी दी जाती थी। मृतका के घर से पुलिस ने एक चिट्ठी भी बरामद की है। यह चिट्ठी शिल्पा की बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि इस चिट्ठी में शिल्पा ने अपने शोषण की बातों को कविता के रूप में लिखा है।
This Aziz was already married and wife of Aziz too was blackmailing Shilpa to convert. Shilpa has written in her death note that “they” Will use you for external beauty & then they will do drama of love & later will r@pe & videograph it and blackmail her. 2/4 #LoveJihadpic.twitter.com/1UXpboyYqx
केरल के अलाप्पुझा में गुरुवार (26 मई 2022) को पुलिस कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की रैली में हिंदुओं और ईसाइयों के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाने वाले नाबालिग लड़के का पता लगाने में कामयाब रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में अलाप्पुझा में पीएफआई कार्यकर्ता के कंधों पर बैठे बच्चे का हिंदू विरोधी नारे लगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस घटना का वीडियो सामने के बाद अलाप्पुझा से पुलिस की टीम नाबालिग लड़के और उसके माता-पिता के बारे में जानकारी जुटाने के लिए कोच्चि पहुँची थी। पुलिस नाबालिग के माता-पिता के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए उन्हें ट्रैक कर रही थी, ताकि वह यह पता लगा सकें कि उनके बच्चे को हिंदू विरोधी भड़काऊ नारे लगवाने के लिए किसने उकसाया था।
केरल उच्च न्यायालय ने भी पीएफआई की रैली में भड़काऊ नारे लगाने के मामले में आपत्ति जताई है। अदालत ने कहा कि ‘इस देश में क्या हो रहा है?’ न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन ने कहा कि अगर रैली के किसी सदस्य ने भड़काऊ नारे लगाए हैं, तो इसके लिए रैली का आयोजन करने वाले लोग भी जिम्मेदार थे। पुलिस अधिकारी इस मामले से संबंधित सभी व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। अदालत ने रैली के खिलाफ एसडी कॉलेज, अलाप्पुझा के पूर्व प्रोफेसर आर रामराजा वर्मा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है।
दरअसल, 21 मई को अलाप्पुझा में पीएफआई द्वारा आयोजित ‘गणतंत्र बचाओ रैली’ के दौरान एक व्यक्ति के कंधे पर बैठे एक लड़के का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसमें वह हिंदुओं और ईसाइयों के खिलाफ भड़काऊ नारे लगा रहा था। वीडियो में लड़का कह रहा है, ‘हिंदुओं को अपने अंतिम संस्कार के लिए चावल रखना चाहिए और ईसाइयों को अपने अंतिम संस्कार के लिए अगरबत्ती रखनी चाहिए।” वह लड़का कहता है, “चावल तैयार रखो। यम (मृत्यु के देवता) आपके घर आएँगे। यदि आप सम्मानपूर्वक रहते हैं, तो आप हमारे स्थान पर रह सकते हैं। अगर नहीं, तो हम नहीं जानते कि क्या होगा।”
इस बीच, मामले की जाँच कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कोच्चि शहर की पुलिस ने अलाप्पुझा पुलिस के साथ जानकारी साझा की है। कोच्चि के पुलिस कमिश्नर सीएच नागराजू ने कहा कि उन्होंने नाबालिग के बारे में कई अहम सबूत इकट्ठा किए हैं, जिसका फिलहाल खुलासा नहीं किया जा सकता है। पुलिस ने एक साजिश के बारे में भी संकेत दिया है। उन्होंने बताया कि नाबालिग को नारे लगाने के लिए पहले से ट्रेंनिंग दी गई थी। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमने इस तरह के भड़काऊ नारे लगाने के लिए लड़के को प्रशिक्षित करने वाले लोगों की पहचान करने के लिए एक विस्तृत जाँच शुरू की है।”
खबर है कि केरल पुलिस ने नाबालिग बच्चे को कंधे पर उठाकर ले जाने वाले अंसार नजीब को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के दौरान, नजीब ने दावा किया कि उसे नहीं पता कि वह बच्चा कौन था, उसने तो रैली में उसे केवल अपने कंधों पर उठाया था। पुलिस ने इस मामले में पीएफआई अलाप्पुझा के जिला अध्यक्ष पीए नवास के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
केरल में पीएफआई की रैली में लगाए गए भड़काऊ नारे
कथित तौर पर, 1,000 से अधिक पीएफआई समर्थकों और सदस्यों की भीड़ ने सड़कों पर उतरकर हिंदुओं और ईसाइयों के खिलाफ नारे लगाए थे। भीड़ ने हिंदुओं और ईसाइयों को देश में शांति से नहीं रहने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी थी। कट्टरपंथी लोगों की भीड़ ने धमकी देते हुए कहा था कि वे 2002 के गुजरात दंगों को नहीं भूले हैं और संघ परिवार केरल को गुजरात समझने की गलती न करें।
इसके अलावा, भीड़ ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद की विवादित इमारत में फिर से ‘सुजुद’ (एक तरह की प्रार्थना) करने की कसम खाई। साथ ही उन्होंने ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में ‘सुजूद’ को जारी रखने का फैसला किया है, जो वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर बनाया गया है। उन्होंने कहा कि वे पाकिस्तान या बांग्लादेश नहीं जा रहे हैं। अगर वे वहाँ जाते हैं, तो वे संघ परिवार को भी अपने साथ ले जाएँगे।
PFI का दावा, RSS पर लगाए गए नारे
इस बीच, पीएफआई के प्रदेश अध्यक्ष सीपी मुहम्मद बशीर ने दावा किया कि ये नारे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ लगाए गए थे ना कि हिंदुओं के खिलाफ। उन्होंने आगे कहा कि उनकी पार्टी आरएसएस रूपी आतंकवाद से लड़ना और उसका विरोध करना जारी रखेगी। इससे पहले वीडियो सामने आने के बाद, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के प्रवक्ता रउफ पट्टांबी (PFI spokesperson Rauf Pattambi) ने कहा था कि नारे संगठन के सम्मेलन में नहीं बल्कि एक रैली के दौरान लगाए गए थे, जिसमें हजारों लोगों ने हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा कि नारे हिंदुओं या ईसाइयों के खिलाफ नहीं थे, बल्कि हिंदुत्व के आतंकवादियों और फासीवादियों के खिलाफ थे।
रऊफ पट्टांबी ने यह भी कहा था, “कई लोगों ने हिंदुत्व आतंकवाद के खिलाफ नारे लगाए। इस लड़के ने भी नारे लगाए। हमें नारों की कुछ पंक्तियों पर खेद है, जिस पर हम गौर करेंगे। उनके नारे हिंदुओं या ईसाइयों के खिलाफ नहीं थे, बल्कि नरसंहार की योजना बना रहे हिंदुत्व आतंकवादियों के खिलाफ थे।”
पीएफआई का हिंसा फैलाने का इतिहास
पीएफआई का हिंसा करने का काफी पुराना इतिहास है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मद्देनजर हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों और देश भर में हिंसा की जाँच के दौरान, पीएफआई की भूमिका संदिग्ध रही है और पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा 2020 में कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने देश के विभिन्न हिस्सों में दंगों और हिंसा के लिए उकसाने के आरोपित किसानों के विरोध को अपना समर्थन दिया और प्रदर्शनकारियों को संविधान के संरक्षण के लिए संघर्ष करने के लिए कहा था।
पीएफआई और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन विभिन्न राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की फंडिंग के लिए कुख्यात हैं। दिसंबर 2019 में CAA के विरोध प्रदर्शनों के दौरान गृह मंत्रालय के साथ शेयर की गई एक खुफिया रिपोर्ट ने कुछ ‘राजनीतिक दलों’ की तरफ इशारा किया था और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था।
लद्दाख के तुरतुक सेक्टर में सेना के जवानों को ले जाने वाली बस का का एक्सीडेंट हो गया है, जिसमें सात जवान वीरगति (Army Jawans Martyred In An Accident) को प्राप्त हो गए हैं। शुक्रवार (27 मई 2022) को ये हादसा सुबह के करीब 9 बजे लेह जिले के टुकटुक सेक्टर में थोइस से करीब 25 किलोमीटर दूर हुआ। जब बस सड़क से फिसलकर श्योक नदी में गिर गई।
इस घटना की पुष्टि करते हुए सेना के अधिकारियों ने कहा कि आर्मी के 26 जवानों का एक दल परतापुर ट्रांजिट कैंप से फारवर्ड पोस्ट सबसे सेक्टर हनीफ की ओर जा रहा था। इसी दौरान गाड़ी फिसली और बस सीधे 50-60 फीट की गहराई में नदी में गिर गई। इस हादसे में सभी जवान बुरी तरह से घायल हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, बचाव अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। सभी घायलों को 403 फील्ड हॉस्पिटल परतापुर में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा लेह से सर्जनों की टीम भी परतापुर के लिए रवाना हो गई है।
इस घटना का वीडियो भी सामने आ गया है। एएनआई के मुताबिक, एक स्थानीय व्यक्ति के द्वारा इसे रिकॉर्ड किया गया है। 18 सेकंड के इस वीडियो में देखा जा सकता है कि काफी ऊँचाई से गिरने के कारण बस के परखच्चे उड़ गए हैं। वहीं सेना के जवान लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं। सुरक्षा बलों ने इस वीडियो की पुष्टि कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, घायल हुए 19 जवानों को चाँदीपुर कमांड हॉस्पिटल में एयरलिफ्ट किया गया है।
#WATCH | 7 Indian Army soldiers lost their lives in a vehicle accident in Turtuk sector of Ladakh earlier this evening. All 19 soldiers injured in the accident have been airlifted to Chandimandir Command Hospital.
सेना के एक अधिकारी ने पीटीआई के हवाले से बताया कि अब तक सात जवानों को बलिदानी घोषित किया जा चुका है। बाकी के सभी लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि घायलों को सर्वोत्तम इलाज दिया जाए। इसके तहत एयरफोर्स की मदद से हताहतों को पश्चिमी कमांड में ट्रांसफर किया किया गया है।
वेश्यावृति (Prostitution) करने वालों को समाज हीन भावना से देखता है। पुलिस भी उनके साथ सही से पेश नहीं आती है। ऐसे में उनके मानवाधिकारों पर सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने बड़ा फैसला सुनाया है। गुरुवार (26 मई 2022) को सुप्रीम कोर्ट ने वेश्यावृति को एक ‘प्रोफेशन’ का दर्जा दे दिया। अहम फैसले में कोर्ट ने देशभर के पुलिसकर्मियों को बालिग और अपनी सहमति से वेश्यावृति करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है।
कोरोना संकट के दौरान सेक्स वर्कर्स को हुई दिक्कतों को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सेक्स वर्कर्स को भी सम्मान और गौरवपूर्ण जिंदगी जीने का अधिकार है। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई, एल नागेश्वर राव और एएस बोपन्ना की बेंच ने की।
इस दौरान कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला दिया और कहा कि संविधान ने सभी को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार दिया है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की कि अगर किसी भी मामले को लेकर पुलिस को सेक्स वर्कर्स के खिलाफ छापेमारी करनी पड़ती है तो वे उन्हें बेवजह परेशान न करें।
वेश्यावृति और वेश्यालय के बीच खींची सीमा रेखा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वेश्यावृति करना एक पेशा है और ये अपराध नहीं है। हालाँकि, वेश्यालय चलाना अपराध है। कोर्ट के मुताबिक, अगर कोई बच्चा वेश्याओं के साथ है, तो इसका अर्थ ये नहीं हो सकता कि उसकी तस्करी हुई हो। वेश्याओं को लेकर पुलिसिया रवैये पर भी सवाल खड़े किए गए। कोर्ट ने कहा कि अक्सर ये देखा गया है कि सेक्स वर्कर्स के साथ बहुत ही क्रूर और अनैतिक व्यवहार किया जाता है।
वेश्यावृति करने वालों के प्रति संवेदनशील बनें
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को हिदायद दी है कि वो सेक्स वर्कर्स के प्रति संवेदनशील बनें। उनके साथ न तो शारीरिक और न ही मौखिक दुर्व्यवहार किया जाए। वेश्याओं को जबरन सेक्स के लिए भी मजबूर नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने मीडिया के लिए एडवाइजरी जारी करने को कहा है कि वे किसी भी सूरत में पीड़ित या आरोपित की पहचान को जाहिर न करें। कोर्ट ने विजुअल्स को अपराध बताने वाली धारा 354 सी को सख्ती से लागू करने को कहा है।
उत्तराखंड में एनडी तिवारी के मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान मंत्री रहे राजेंद्र बहुगुणा की बुधवार (25 मई 2022) को मौत हो गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राजेंद्र बहुगुणा पर हाल ही में उनकी बहू ने यौन शोषण का आरोप लगाया था, जिसके बाद उन्होंने बहुत ही नाटकीय अंदाज में आत्महत्या कर ली। राहगीरों ने देखा कि बहुगुणा ने पानी की टंकी पर चढ़कर खुद को गोली मार ली। ये घटना उत्तराखंड के हल्द्वानी में भगत सिंह कॉलोनी की है।
बताया जाता है कि 59 साल के राजेंद्र बहुगुणा पर तीन दिन पहले उनकी ही बहू ने पोती का यौन शोषण करने का आरोप लगाते हुए POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज कराया था। उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस नेता रहे बहुगुणा 2004 से 2005 तक उत्तराखंड में कॉन्ग्रेस की सरकार में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया था।
इस घटना को लेकर नैनीताल जिले के एसएसपी पंकज भट ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि आत्महत्या करने के लिए पानी की टंकी पर चढ़ने से पहले बहुगुणा ने खुद ही पुलिस की हेल्पलाइन नंबर पर फोन किया था। भट के मुताबिक, उनका फोन कॉल मिलने के तुरंत बाद पुलिस की एक टीम मौके पर पहुँची औऱ उन्हें पानी की टंकी से नीचे उतरने के लिए मनाया। शुरू में वो मान भी गए, लेकिन अचानक अपने साथ ले गई पिस्टल को उन्होंने निकाला और खुद को गोली मार ली। उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। खास बात ये है कि इससे पुलिस अभी कथित यौन शोषण पीड़ित लड़की का बयान भी नहीं दर्ज कर पाई थी कि ये घटना हो गई।
बहुगुणा परिवार का कहना है कि जब से बहू ने उनके खिलाफ यौन शोषण के आरोप लगाए थे, तभी से वो काफी उदास और आहत थे। हालाँकि, उनके खिलाफ इसी तरह के आरोप एक पड़ोसी महिला ने भी लगाए थे, जिसमें उन पर ये आरोप लगाया गया था कि जब वो अपने सास-ससुर के साथ जा रही थी तो राजेंद्र बहुगुणा ने उस पर हमला किया, गाली दी और धमकाया था। इसको लेकर केस भी दर्ज कराया गया था।
हालाँकि, इस मामले में डिस्ट्रिक्ट पुलिस के सीनियर अधिकारियों के मुताबिक, बहुगुणा की बहू का अपने पति के साथ वैवाहिक रिश्ता ठीक नहीं चल रहा था, दोनों के बीच विवाद के चलते वो अपने पति से दूर घर की अलग मंजिल पर रह रही हैं। बहुगुणा के बेटे ने अपनी ही माँ के खिलाफ पिता को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस दर्ज कराया है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) के बेटे आर्यन खान को ड्रग्स केस में क्लीनचिट दे दी है। आर्यन खान (Aryan Khan) के साथ 5 अन्य आरोपितों को भी एजेंसी ने सबूतों के अभाव में बरी किया है। यह मामला अक्टूबर 2021 में सामने आया था, जब एनसीबी ने मुंबई से गोवा जा रही एक क्रूज पर छापेमारी की थी। 2 अक्टूबर को आर्यन गिरफ्तार हुए थे और 30 अक्टूबर को उनकी जेल से रिहाई हुई थी। फिल्म अभिनेत्री जूही चावला (Juhi Chawla) उनकी जमानतदार बनीं थी। पिता शाहरुख ने भी बेटे की जमानत के लिए वकीलों की फौज खड़ी कर दी थी।
NCB ने इस बहुचर्चित केस में शुक्रवार (27 मई 2022) को तकरीबन 6000 पेज की चार्जशीट दाखिल की है। इसमें 14 आरोपितों के खिलाफ कई धाराएँ लगाई हैं। लेकिन आर्यन खान का नाम इस लिस्ट में शामिल नहीं है। इस खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया में तमाम तरह की प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। कुछ यूजर्स इसे पैसे की ताकत भी बता रहे हैं।
एक दिलचस्प प्रतिक्रिया इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई की भी सामने आई है। मीडिया गिरोह के प्रमुख चेहरे राजदीप ने ट्वीट कर कहा है कि एनसीबी ने आर्यन खान को क्लीनचिट दे दी है। अब उन सभी (‘शोर’ मीडिया) का क्या होगा जिन्होंने उन्हें दोषी ठहराया था? साथ ही सुशांत सिंह राजपूत मामले का भी जिक्र करते हुए पूछा है कि किसी को खबर है कि इस केस का क्या हुआ जो जुलाई 2020 में सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था।
आर्यन खान को क्लीनचिट मिलने पर मीडिया को ‘ज्ञान’ दे रहे, उसे ‘शोर मीडिया’ बता रहे, राजदीप सरदेसाई वही पत्रकार हैं, जिनका पूरा करियर मीडिया ट्रायल चलाने में ही बीता है। 2002 के गुजरात दंगों को लेकर उनकी एकतरफा रिपोर्टिंग पूरे देश ने देखी है। इसको लेकर टीवी पर नरेंद्र मोदी के खिलाफ उन्होंने कैसे मीडिया ट्रायल चलाया था यह भी छिपा नहीं है।
आर्यन खान को क्लीनचिट मिलने के बाद अपने ट्वीट में उन्होंने जिस सुशांत सिंह राजपूत के मामले का जिक्र किया है, उस दौरान भी राजदीप सरदेसाई रिया चक्रवर्ती का मीडिया मैनेजमेंट करते हुए नजर आए थे। रिया को सुशांत सिंह की मौत में उनके परिवार ने मुख्य संदिग्ध बताया था।
रिया को ‘पीड़ित’ दिखाने के लिए राजदीप ने उस साक्षात्कार में सुशांत सिंह की कथित मानसिक बीमारी पर ज़ोर दिया था। इसे ऐसे पेश किया मानो मानसिक बीमारी का आरोप वास्तविक तथ्य है, जबकि सुशांत सिंह का परिवार इस मुद्दे पर अपना पक्ष पहले ही रख चुका था। इतना ही नहीं इंटरव्यू के दौरान राजदीप ने रिया को अपनी कहानी सुनाने का भरपूर मौका देते हुए उन सवालों का जिक्र तक नहीं किया जिनके कारण रिया कठघरे में हैं।
वैसे यह पहला मौका नहीं था जब राजदीप ने अपने पाखंड से आरोपित का इमेज गढ़ने की कोशिश की थी। अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के लिए भी वे सालों पहले ऐसी ही दरियादिली दिखा चुके हैं। 1993 में मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों से दहल गया था। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI की शह पर दाऊद ने इसे अंजाम दिया था। लेकिन उस वक्त टाइम्स ऑफ इंडिया में काम करने वाले राजदीप ने एक लेख लिखकर उसे ऐसे पेश किया जैसे वह ही पीड़ित हो। ठीक वैसे ही जैसा उन्होंने रिया चकवर्ती के मामले में करने की कोशिश की थी और अब जैसा आर्यन खान के मामले में कर रहे हैं।
आर्यन खान से जुड़े ड्रग्स मामले में मीडिया ने कोई मनगढ़ंत तथ्य पेश नहीं किए थे। एनसीबी की कार्रवाई से जो जानकारी सामने निकलकर आ रहीं थी, उसे पाठकों और दर्शकों के सामने रखा था। इसमें वह संस्थान भी शामिल है, जहाँ राजदीप खुद काम करते हैं। लेकिन, राजदीप जैसे पत्रकार चाहते हैं कि बॉलीवुड गिरोह के पाप पर मीडिया में चर्चा ही नहीं हो। चाहे वह सुशांत का मामला हो या फिर ड्रग्स का। वे चाहते हैं कि मीडिया उनकी तरह ही ‘त्रि-या चरित्र’ पत्रकारिता करे और शाहरुख खान की मन्नत के खूँटे से बँधी रहे।
वैसे राजदीप सरदेसाई के लिए पत्रकारिता का मतलब प्रोपेगेंडा शुरुआत से ही रहा है। उनके लिए गुजरात दंगों के मामले में नरेंद्र मोदी को सुप्रीम कोर्ट से मिली क्लीनचिट मायने नहीं रखती, लेकिन दूसरी ओर चिदंबरम से माफ़ी माँगते उन्हें देर नहीं लगती। याद दिला दें कि सीएनएन आईबीएन में रहते राजदीप पर कैश फॉर वोट की स्टिंग की सीडी भी डकारने के भी आरोप लगे थे। इसके अलावा राडिया केस में भी उनका नाम उछल चुका है।
मध्य प्रदेश के मंदसौर में शेख जफर नाम के एक व्यक्ति ने विधि-विधान से हिन्दू धर्म अपनाते हुए घर वापसी की है। अब वो चैतन्य सिंह राजपूत के नाम से जाने जाएँगे। उन्होंने स्थानीय पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा अर्चना करते हुए महामंडलेश्वर चिदंबरानंद सरस्वती से आशीर्वाद भी लिया है। शेख जफर की घर वापसी शुक्रवार (27 मई 2022) को हुई है। यह जानकारी उन्होंने अपने फेसबुक अकॉउंट पर शेयर की है।
अपनी घर वापसी को अपने फेसबुक पर शेयर करते हुए जफर ने लिखा, “तो पता चल गया ना आज 27 मई को कुछ हुआ ना बड़ा। हर हर महादेव। इस शुभ आयोजन में पधारे सभी राजनीतिक, सामाजिक, पत्रकारिता के महानुभावों का ह्रदय से आभार धन्यवाद। आईडी का नाम चेंज हो जाएगा अब। चैतन्य सिंह राजपूत के नाम से जाना जाए। जय गुरुदेव स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी।”
मध्य प्रदेश के मंदसौर में एक मुस्लिम शख्स ने हिंदू धर्म अपना लिया। शुक्रवार सुबह मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर में विधि विधान से उनका धर्म परिवर्तन करवाया गया। हिंदू धर्म अपनाने के बाद अब शेख जफर अपने नए नाम चैतन्य सिंह राजपूत के नाम से जाने जाएंगे। pic.twitter.com/Bdm40Kr492
घर वापसी के बाद चैतन्य सिंह राजपूत ने कहा, “मैंने तलवार के दम पर नहीं बल्कि अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन किया है। आज मैं बहुत खुश हूँ और मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैं बचपन से ही सनातन को मानता हूँ। मेरे घर में मंदिर है जहाँ मैं पूजा करता हूँ। मैं मंदिरों में भी जाता था। मैं पहले से ही सनातन का पालन कर रहा था अब पूरे विधि-विधान से मैं सनातन में आ गया हूँ। मुझे लगता है कि इस ब्रह्माण्ड में जो भी मनुष्य के रूप में पैदा हुआ है वो सब सनातनी थे। उनका जोर-जुल्म या किसी भी और तरीके से धर्म परिवर्तन करवाया गया होगा। मेरा नया नाम चैतन्य सिंह राजपूत कुंडली से निकला हुआ है। मैं एक आज़ाद देश में रहता हूँ। किस धर्म को मानना है ये मेरी स्वतंत्रता है। जिसे विरोध करना है वो स्वतंत्र है। कौन क्या मानता है उसे मैं नहीं बोलता। अगर मुझे कोई बोलेगा तो ये गलत है।”
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानन्द ने कहा, “भारत का हर मुस्लिम पहले हिन्दू था। इनके पूर्वज सनातनी थे। ये बात शेख जफर को समझ में आ गई है। इसलिए उन्होंने विधि-विधान से हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया है।” वही इस कार्यक्रम में शामिल हुए मंदसौर से भाजपा विधायक यशपाल सिंह सिसौदिया ने कहा, “शेख जफर ने हिन्दू बनने की इच्छा मुझ से जताई थी। मैंने उनकी इच्छा भगवान पशुपति नाथ मंदिर में पूरी करवा दी। अब चैतन्य सिंह राजपूत को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएँ।” शेख जफर ने उज्जैन की विक्रम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी। वो मंदसौर के सामाजिक कार्यकर्ता है और मंदसौर जनसुनवाई न्यूज़ पेपर में काम करते हैं।
सोशल मीडिया पर दो आईएएस अधिकारी ट्रेंड कर रहे हैं। एक हैं संजीव खिरवार, जिनके कुत्ते पर मीम बन रहे हैं। दूसरे बिहार के कटिहार के डीएम उदयन मिश्रा (DM Udayan Mishra)। मिश्रा का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वे जमीन पर बैठकर एक स्कूल में बच्चों के साथ ‘मिड डे मील’ खा रहे हैं।
अमूमन साइकिल से ऑफिस जाने वाले उदयन मिश्रा ने गुरुवार (26 मई 2022) को रौतारा के उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय में औचक निरीक्षण के दौरान मिड-डे मील का स्वाद लिया और उसकी गुणवत्ता की जाँच की। उदयन मिश्रा के इस तरीके की सोशल मीडिया में काफी सराहना हो रही है। उत्कर्ष सिंह लिखते हैं कि कोई स्टेडियम में कुत्ते घुमाने के लिए खिलाड़ियों का हक छीन रहा, कोई छात्रों को उनका हक दिलाने के लिए साथ में बैठकर मिड डे मील खा रहा। ये कटिहार के DM उदयन मिश्रा हैं।
एक उच्च अधिकारी का बच्चों के साथ इस तरह बैठ करके खाना खाना बहुत ही अच्छा लगा हर अधिकारी अगर इस तरीके से हरे स्कूलों में करें तो एक अच्छा संदेश जाएगा बच्चों में कि खाना हमें अब सही मिलेगा ऐसे अधिकारियों का मान सम्मान बढ़ाना जरूरी है जो ईमानदार हो और गरीबों का ख्याल रखता हो धन्यवाद
एक अन्य यूजर ट्विटर पर लिखते हैं, “एक उच्च अधिकारी का बच्चों के साथ इस तरह बैठकर खाना खाना बहुत ही अच्छा लगा। हर अधिकारी अगर इस तरीके से स्कूल में जाए तो एक अच्छा संदेश जाएगा। हमारे बच्चों को सही मिलेगा। ऐसे अधिकारियों का मान-सम्मान बढ़ाना जरूरी है, जो ईमानदार हो और गरीबों का ख्याल रखता हो। धन्यवाद।”
Let’s meet with this #IAS officer. He is the DM of #Katihar. The way of eating food in school by sitting on the ground below is interesting. Children are checking such food in the middle. pic.twitter.com/p5vaOridAz
प्रकाश कुमार लिखते हैं, “एक DM ऐसा भी! ऐसे तो अधिकारी अपने कड़क अंदाज के लिए जाने जाते हैं, लेकिन मिलिए इस आईएएस अफसर से… ये कटिहार के डीएम हैं। नीचे जमीन पर बैठकर स्कूल में खाना खाने का तरीका दिलचस्प है। बच्चों के बीच ऐसे खाना चेक कर रहे हैं।”
एक DM ऐसा भी! ऐसे तो लगभग अधिकारी अपने कड़क अंदाज के लिए जाने जाते हैं लेकिन मिलिए इस आईएएस अफसर से… ये कटिहार के डीएम हैं. नीचे जमीन पर बैठ कर स्कूल में खाना खाने का तरीका दिलचस्प है.. बच्चों को बीच ऐसे खाना चेक कर रहे हैं. pic.twitter.com/pphxtIUoIm
बता दें कि डीएम ने अपने औचक निरीक्षण के दौरान स्कूल की प्रिंसिपल उर्मिला देवी से शिक्षा, मध्याह्न भोजन, विद्यालय के रख-रखाव आदि के संबंध में भी जानकारी ली।
उदयन मिश्रा का वीडियो ऐसे वक्त में वायरल हो रहा है जब दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में कुत्ते के साथ वॉक करने को लेकर आईएएस अधिकारी संजीव खिरवार चर्चा में हैं। इस खबर के सामने आने के बाद उनका लद्दाख ट्रांसफर कर दिया गया है। उनकी IAS पत्नी रिंकू दुग्गा का तबादला अरुणाचल प्रदेश किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा एजीएमयूटी कैडर के दोनों अधिकारियों का ट्रांसफर किए जाने के बाद नेटिजन्स पूछ रहे हैं कि कुत्ते का क्या होगा। वह कहाँ जाएगा।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)- माकपा (CPM) 31 मई से 1 जून के बीच कर्नाटक के शहर मंगलुरु में एक ‘मुस्लिम सम्मेलन’ आयोजित करने जा रही है। यह कार्यक्रम कर्नाटक CPM राज्य समिति के सदस्य मुनीर कटिपल्ला द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के मुताबिक, सम्मेलन में लगभग 2000 मुस्लिम प्रतिनिधि भाग लेंगे। हालाँकि, कटिपल्ला ने दावा किया कि यह आयोजन ‘पहचान की राजनीति’ से प्रेरित नहीं है, बल्कि ‘इस्लामोफोबिया और हिंदुत्व के संयुक्त प्रभाव को रोकने’ से प्रेरित है।
माकपा नेता ने यह भी कहा कि सुन्नी बहुल इलाकों में उन्हें जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। उन्होंने कहा, “स्थानीय मस्जिद समितियों, सुन्नी छात्र संघ (SSF) के यूनिट्स, मुस्लिम केंद्रीय समिति (MCC) ने हमें पंचायत और नगरपालिका स्तर पर आयोजन में मदद की है।”
मुनीर कटिपल्ला ने यह भी बताया कि मुस्लिम बहुल चोक्काबेट्टू क्षेत्र में ‘मुस्लिम सम्मेलन’ को समर्थन मिला। बता दें कि यह इस्लामिक संगठन SDPI (सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया) का गढ़ है। इससे पहले इसी साल 5 मई को केरल उच्च न्यायालय ने कहा था कि SDPI एक चरमपंथी संगठन है, जिस पर अभी तक भारत में प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
माकपा नेता ने कहा कि सम्मेलन ‘मुस्लिमों’ के बारे में है न कि मुस्लिमों का ‘सम्मेलन’ है। उन्होंने कहा, “हाँ, क्योंकि समुदाय द्वारा सामना की जा रही समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है, इसलिए सभा का एक बड़ा हिस्सा मुस्लिमों का होगा। लेकिन इसमें अन्य भी हैं।”
कटिपल्ला ने आगे कहा कि वह अपने प्रचार में हिंदुओं और अन्य समुदाय के लोगों को भी इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए कह रहे हैं, ताकि उन्हें बता सकें कि कोविड महामारी के बाद उनके और मुस्लिमों की समस्या कैसे एक जैसी है। उन्होंने इन समस्याओं के लिए बीजेपी सरकार को दोषी ठहराया है। वहीं, माकपा को मुस्लिम समुदाय के लिए एक खास आयोजन के लिए आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
माकपा खुद के ‘धर्मनिरपेक्ष’ होने का दावा करती है। पहले ऐसा लगता था कि उनका कार्यक्रम इस्लामोफोबिया और हिंदुत्व का मुकाबला करने के लिए है। फिर उन्होंने दावा किया कि यह मुस्लिमों और उनके सामने आने वाली समस्याओं को सुनने के लिए है, इसलिए उन्होंने मुस्लिम प्रतिनिधियों को बुलाया गया है।
अब चौतरफा आलोचना के बाद उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हिंदुओं से भी संपर्क किया गया है। यह स्पष्ट है कि सीपीएम हिंदुओं को अधिक से अधिक बदनाम करने के लिए अब भी मुस्लिम उत्पीड़न का सहारा ले रही है, जो कि पार्टी का पुराना पैंतरा है।
CPIM the main left party that is ‘avowedly secular’ and claims to shun identity politics of the ‘RSS kind’ is planning a meet exclusively for Muslims in coastal Karnataka very shortly. 2000 Muslim delegates invited for the ‘dharam sansad’. How’s that for hypocrisy?
टाइम्स नाउ के राहुल शिवशंकर ने ट्वीट किया, “सीपीआईएम मुख्य वामपंथी पार्टी, जो ‘धर्मनिरपेक्ष’ है और ‘आरएसएस की तरह’ पहचान की राजनीति को दूर करने का दावा करती है, बहुत जल्द कर्नाटक में मुस्लिमों के लिए एक सम्मेलन की योजना बना रही है। 2000 मुस्लिम प्रतिनिधियों को ‘धर्म संसद’ के लिए आमंत्रित किया गया। यह कैसा हिप्पोक्रेसी है?”
सम्मेलन का बचाव करते हुए मुनीर कटिपल्ला ने कहा, “… हाँ, यह एक विशेष सम्मेलन है, जहाँ मुस्लिमों पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह उन असाधारण परिस्थितियों के कारण है जो भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से देश में पैदा हुई हैं।”