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झारखंड के खूँटी में मुंडा समुदाय के 12 नाबालिग बच्चों को बना दिया ईसाई, NCPCR ने लिया संज्ञान: रोमन कैथोलिक चर्च पर कार्रवाई की माँग

झारखंड के खूँटी जिले में 12 आदिवासी बच्चों के ईसाई धर्मान्तरण की खबर है। इस घटना पर जिला प्रशासन ने जाँच करवा कर जरूरी कार्रवाई करने की घोषणा की है। वहीं केंद्रीय बाल संरक्षण आयोग ने भी इस घटना का संज्ञान लिया है। घटना 22 मई 2022 की बताई जा रही है। जिन एक दर्जन बच्चों के धर्म परिवर्तन कर लेने का दावा किया जा रहा है वो मुंडा समुदाय से हैं। जिन नाबालिगों का धर्म परिवर्तन करवाने का आरोप है उसमें लड़के और लड़कियाँ दोनों शामिल हैं।

TOI के मुताबिक घटना गाँव कमड़ा की है जो खूंटी के तपकारा थानाक्षेत्र में आता है। धर्मान्तरण का आरोप रोमन कैथोलिक चर्च पर है जो उसी गाँव में स्थित है। खूँटी के SDO सैय्यद रियाज़ अहमद ने TOI को बताया है कि ग्रामीणों के एक समूह ने 21 मई को शिकायत देते हुए ऐसे किसी घटना की आशंका जताई थी। हालाँकि उसके आगे उन्होंने कुछ बताने से खुद के अधिकार न होना कह कर मना कर दिया। वहीं जिला प्रशासन ने शनिवार (4 जून 2022) को इस घटना की जाँच शुरू कर दी है।

वहीं पांचजन्य के मुताबिक कमड़ा गाँव के रेड़ा मुंडा ने आरोप लगाया है कि झारखंड में धर्मान्तरण विरोधी कानून होने के बाद भी अवैध ढंग से धर्म परिवर्तन करवाए जा रहे हैं। रेड़ा मुंडा ने सरकार से धर्म परिवर्तन करने वालों को जनजाति के नाम पर मिल रही सहूलियतों से वंचित करने की माँग की है। रेडा मुंडा ने धर्म परिवर्तन करवाने वाले चर्च पर कानूनी कार्रवाई की माँग की है।

रिपोर्ट के मुताबिक कुछ दिन पहले ‘सरना धर्म सोतो समिति’ ने एक मीटिंग करके हो रहे धर्मान्तरण पर नाराजगी जताई थी। इस दौरान धर्म परिवर्तन को संस्कृति तबाह करने की साजिश करार दिया गया था। धर्मान्तरण के खिलाफ नाराजगी जताते हुए गाँव के दुलार मुंडा ने ऐसी हरकतों को किसी भी हाल में सहन न किए जाने का बयान भी दिया था।

कानपुर हिंसा के दिन हयात जफर ने PFI को किया था कॉल, कट्टरपंथी संगठन से कनेक्शन वाला दस्तावेज भी बरामद

कानपुर हिंसा में इस्लामी कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की संलिप्तता के सबूत मिले हैं। इस हिंसा के मुख्य आरोपित हयात जफर हाशमी के घर से पुलिस ने ये दस्तावेज बरामद किए हैं। इसके साथ ही पुलिस ने 5 अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार किया है। इस तरफ इस मामले गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 29 हो गई है।

पुलिस कमिश्नर विजय मीणा का कहना है कि PFI से जुड़े कुछ दस्तावेज मिले हैं, जिनकी जाँच की जा रही है। ये कागजात आरोपित हयात जफर हाशमी के घरों से बरामद किए गए हैं। पुलिस की अब तक की जाँच में इस घटना का मास्टरमाइंड हयात ही है। हयात ने 3 जून को PFI को कॉल भी किया था।

जाँच में ये बात सामने आई है कि हयात जफर की एक कॉल पर हजारों लोग इकट्ठा हुए और उसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में हिंसा भड़क गई। पुलिस के मुताबिक, बवाल के बाद मुख्य आरोपी कानपुर छोड़कर भाग गए थे। एक आरोपित जावेद एशियन वायर पोस्ट यूट्यूब चैनल चलाता है। इसने लखनऊ के हजरतगंज स्थित इसके ऑफिस में अपने साथियों के साथ छिपा हुआ था।

आरोपित जावेद के पास से 6 मोबाइल फोन और कुछ अहम दस्तावेज मिले हैं। इसके साथ ही पुलिस आरोपितों के बैंक खातों की जाँच कर रही है, ताकि PFI के साथ किसी भी प्रकार के लेनदेन का पता लगाया जा सके।

कमिश्नर मीणा का कहना है कि इस घटना में शामिल हर किसी को गिरफ्तार किया जाएगा, भले ही वो कहीं और भाग जाए। उन्होंने कहा कि आरोपितों की संपत्ति जब्त की जाएगी और उन पर बुलडोजर चलाया जाएगा। बता दें कि इस मामले में पुलिस गुंडा ऐक्ट और रासुका के तहत कार्रवाई कर रही है।

क्या है PFI

21 मई 2022 को केरल के अलाप्पुझा में PFI ने एक रैली का आयोजन किया था, जिसमें एक छोटे बच्चे को हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते हुए सुना गया था। उसका वीडियो इंटरनेट पर खूब वायरल हुआ था। वीडियो में लड़के को एक आदमी ने अपने कंधों पर उठाया हुआ है।

इस दौरान वह लड़का कहता है, “चावल तैयार रखो। यम (मृत्यु के देवता) आपके घर आएँगे। यदि आप सम्मानपूर्वक रहते हैं, तो आप हमारे स्थान पर रह सकते हैं। अगर नहीं, तो हम नहीं जानते कि क्या होगा।”

पीएफआई का हिंसा करने का काफी पुराना इतिहास है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मद्देनजर हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों और देश भर में हिंसा की जाँच के दौरान, पीएफआई की भूमिका संदिग्ध रही है और पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया था।

इसके अलावा, साल 2020 में कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने देश के विभिन्न हिस्सों में दंगों और हिंसा के लिए उकसाने के आरोपित किसानों के विरोध को अपना समर्थन दिया और प्रदर्शनकारियों को संविधान के संरक्षण के लिए संघर्ष करने के लिए कहा था।

पीएफआई और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन विभिन्न राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की फंडिंग के लिए कुख्यात हैं। दिसंबर 2019 में CAA के विरोध प्रदर्शनों के दौरान गृह मंत्रालय के साथ शेयर की गई एक खुफिया रिपोर्ट ने कुछ ‘राजनीतिक दलों’ की तरफ इशारा किया था और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

इस तरह के आपत्तिजनक नारे को केरल में रहने वाले हिंदुओं और ईसाइयों को सीधे तौर पर धमकी के रूप में देखा गया। चरमपंथी संगठन PFI ने चेतावनी हिंदू-ईसाइयों को धमकाते हुए कहा था कि अगर वे रास्ते पर नहीं आते हैं तो उन्हें मौत की सजा दी जाएगी।

इसके अलावा, PFI के कई सदस्यों पर धनशोधन निरोधक अधिनियम (मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत मामला दर्ज कर उनके ठिकानों पर छापेमारी हो चुकी है। आयकर विभाग ने 15 जून 2021 को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का 80जी पंजीकरण रद्द कर दिया था। आयकर विभाग ने कहा कि इस्लामी संगठन समुदायों के बीच ‘सद्भावना’ और ‘भाईचारे’ को खत्म कर रहा है।

हयात जफर का कट्टरपंथी इतिहास

राशन कोटे का दुकान चलाने वाला हयात जफर हाशमी सांप्रदायिक नफरत फैलाने का उस्ताद माना जाता है। यह पहले भी कई मौकों पर शहर में नफरत के बीज बो चुका है। इतना ही नहीं, इस्लाम के नाम पर हिंदू-मुस्लिम के बीच खाई को बढ़ाते हुए जफर हाशमी शहर में कई बार उपद्रव करा चुका है।

इतना ही नहीं, अपने मंसूबों के लिए इसने अपनी माँ और बहन तक इस्तेमाल कर लिया। हाशमी ने मकान खाली कराने को लेकर अपनी माँ और बहन को उकसाया और उन्हें जिलाधिकारी कार्यालय भेजा था। यहाँ पर दोनों ने इसके कहने पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली थी। बाद में उपचार के दौरान दोनों की मौत हो गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, हयात जफर हाशमी सोशल मीडिया पर खूब सक्रिय रहता है और लोगों को उकसाते रहता है। NRC और CAA के विरोध के नाम पर हुए बवाल के दौरान भी इसने सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसी तरह यह विरोध प्रदर्शनों का अगुआ रह चुका है।

पिछले साल 21 अक्टूबर को हयात जफर हाशमी ने मूलगंज से मेस्टन रोड, शिवाला बाजार, रामनारायण बाजार होते हुए फूलबाग तक जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला था। इस जुलूस को लेकर उसके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ था। हालाँकि, यह सोशल मीडिया पर समाजसेवी होने का खूब दिखावा करता है।

यति नरसिंहानंद के बयान और जितेंद्र त्यागी बने वसीम रिजवी द्वारा कुरान की आयतों को लेकर कोर्ट में दी गई याचिका को लेकर भी जफर हाशमी ने खूब बवाल काटा था और जमकर लोगों से विरोध प्रदर्शन करवाए थे। हाशमी के जहरीले बोल वाले कॉन्ग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार इमरान प्रतापगढ़ी के साथ भी ताल्लुक हैं।

हयात ने कैसे रची साजि

दरअसल, 26 मई को एक न्यूज चैनल पर ज्ञानवापी मामले को लेकर डिबेट के दौरान मुस्लिम नेताओं के आपत्तिजनक बयान पर भाजपा नेता नुपुर शर्मा ने विरोध जताया था। उन्होंने कहा था कि अगर मुस्लिमों के पैगंबर मोहम्मद को लेकर वह भी कुछ कहेंगी तो बुरा लगेगा। नूपुर शर्मा के बयान पर कई मुस्लिम संगठनों ने आपत्ति जताई।

इसके बाद 27 मई को मौलाना मोहम्मद अली जौहर फैंस एसोसिएशन के अध्यक्ष हयात जफर हाशमी ने इसके विरोध में कानपुर बाजार बंद करने का ऐलान किया। नूपुर के बयान पर कानपुर में पोस्टर लगाए गए। वहीं, 28 मई को हयात ने जेल भरो आंदोलन का आह्वान किया।

मुस्लिम इलाकों के हजारों लोगों ने हयात को समर्थन देते हुए एक बैठक की। इसके बाद प्रशासन से बातचीत के बाद हयात ने 5 जून तक बंदी और जेल भरो आंदोलन टाल दिया, लेकिन बाजार में लगे 3 जून के बंदी के पोस्टर नहीं हटाए गए। 2 जून को बेकनगंज इलाके में फिर दुकानों को बंद करने की अपील की गई।

शुक्रवार को मस्जिदों की तकरीरों में मौलानाओं ने कहा कि वे पैगंबर मुहम्मद पर की गई किसी भी टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसके बाद नमाज पढ़कर निकले लोगों ने जबरन दुकानें बंद करानी शुरू कर दीं। दूसरे पक्ष ने दुकानें बंद करने से मना किया तो उन पर पत्थरबाजी की जाने लगी। इस तरह यह मामले कानपुर के कई इलाकों में एक साथ हुआ।

जाहिर सी बात है कि बिना साजिश के कई इलाकों में इस तरह की घटना एक साथ नहीं हो सकती। एक तरफ हयात जफर ने प्रशासन से बंदी को टालने की बात कहकर खुद को पुलिस का सहयोगी साबित किया और दूसरी तरफ अपने कैडरों के माध्यम से घटना को अंजाम दिलवाया।

बाल काटने वाले शादीशुदा इमरान ने आशा को प्यार में फँसाया, पोल खुली तो मार दी गोली: UP पुलिस ने दबोचा

UP के बदायूँ जिले में एक मुस्लिम युवक ने हिन्दू समुदाय की अपनी प्रेमिका को गोली मार दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित का नाम इमरान और पीड़िता का नाम आशा बताया जा रहा है। इस घटना की वजह आशा के आगे इमरान के शादीशुदा होने की पोल खुलना बताया जा रहा है। पीड़िता पर हमले में इमरान और उसके एक अन्य साथी जीशान को आरोपित बनाया गया है। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। घटना गुरुवार (2 जून 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता मूल रूप से UP के अमेठी जिले की निवासी है। यहाँ के गाँव गोदना के रहने वाले राममिलन हरियाणा के गुरुग्राम में काम करते हैं। उनकी 18 साल की बेटी आशा भी उनके साथ रहती है। आशा घरों में खाना बनाने का काम करती थी। गुरुग्राम के ही हुड्डा बाजार में बदायूँ के इस्लामनगर कुंदावाली का रहने वाला इमरान एक सैलून पर काम करता था। आशा और इमरान की गुरुग्राम में मुलाक़ात हुई और कुछ समय बाद ये मुलाक़ात प्यार में बदल गई। कुछ समय बाद आशा इमरान पर शादी का दबाव बनाने लगी लेकिन इमरान टालता रहा।

आखिरकार बुधवार को इमरान ने आशा को बदायूँ चलने के लिए कहा जिस पर आशा तैयार हो गई। बाद में इमरान अपने साथी अनस के साथ आशा को ले कर गुरुवार को बदायूँ पहुँचा। बदायूँ में इमरान को रिसीव करने उसका साथी जीशान बाइक से आया। उसने इमरान और आशा को बाइक पर बिठा लिया। कुछ दूर आगे चल कर सुनसान में जीशान ने बाइक रोक दी और आशा को मारना-पीटना शुरू कर दिया। जब आशा ने इसका विरोध किया तब इमरान ने जीशान से एक तमंचा ले कर आशा पर तान दिया।

बताया जा रहा है कि तमंचे को देखते ही आशा डर कर भागने लगी। इसी दौरान इमरान ने उस पर गोली चला दी। इमरान की चलाई गोली आशा के सिर को छूते हुए निकल गई लेकिन इस से वो घायल हो गई। भागने के दौरान बदायूँ-बिजनौर मार्ग पर पड़ने वाले नट बाबा मंदिर के पास बेहोश हो गई। राहगीरों ने पुलिस को जानकारी दी जिसके बाद पुलिस ने आशा को अस्पताल पहुँचाया। आशा की तबियत अब ठीक है। आशा को उनके घर भेज दिया गया है। शनिवार (4 जून 2022) को पुलिस ने दोनों आरोपितों की गिरफ्तारी करते हुए हमले में प्रयोग हुआ तमंचा भी बरामद कर लिया है।

मुझे, मेरे अब्बा, खानदान… सबको गाली दो… लेकिन मेरे नबी की शान में बोला तो काट दूँगा: मुफ़्ती नदीम का वीडियो वायरल

राजस्थान में पुलिस के सामने लोगों के हाथ-पैर काटने, आँख नोचने की धमकी दे रहा है एक काजी। खुलेआम वीडियो में। यह वीडियो अब वायरल है। बूंदी शहर के इस क़ाज़ी का नाम मुफ़्ती नदीम है। वीडियो में वो पैगंबर की शान में गुस्ताखी करने वालों के कत्लेआम की धमकी दे रहा है।

बूंदी शहर के क़ाज़ी मुफ़्ती नदीम के इस वीडियो को दानिश रज़ा अज़हरी ने 3 जून 2022 (गुरुवार) को अपने फेसबुक पर शेयर किया है। यह धमकी बूँदी जिले के एक पुलिस स्टेशन के आगे दी गई है। वीडियो में राजस्थान की पुलिस को भी देखा जा सकता है। राजस्थान पुलिस की मौजूदगी में मुफ़्ती ने कहा:

“अगर तुमने एक्शन नहीं लिया तो मुसलमान रिएक्शन देगा। ये कोई गुजारिश नहीं बल्कि चेतावनी है। पूरी दुनिया का मुसलमान उठेगा। ये न सिर्फ यहाँ का प्रशासन बल्कि पूरे देश की हुकूमत सुन ले। अगर उन्होंने (नूपुर शर्मा) ने जो बोला है, वो कानूनी तौर पर सही है तो हम ऐसे कानून के भी खिलाफ जाएँगे। इतिहास उठा कर देख लो कि जिस भी कौम के खिलाफ मुसलमानों ने रिएक्शन दिया है, उनके लिए जमीन छोटी पड़ गई है। वो जगह-जगह भागते फिरे और उनको जमीन का टुकड़ा भी नसीब नहीं हुआ।”

मुफ़्ती ने आगे कहा, “हम अपने आका की शान में की गई गुस्ताखी का बदला लेना जानते हैं। मेरे नबी की शान में एक लफ्ज भी बोला तो याद रखो कि जुबान काट ली जाएगी। हाथ उठाओगे तो हाथ काट लिए जाएँगे। ऊँगली उठाओगे तो ऊँगली काट ली जाएगी। अगर निगाहें भी उठीं तो निकाल कर बाहर फेंक देंगे। उसके बाद चाहे हम पर लाठी बरसाना या हमें जेल भेज देना।”

इस दौरान मौके पर मौजूद भीड़ बेशक-बेशक कह कर क़ाज़ी मुफ़्ती नदीम की बातों का समर्थन करती रही। हास्यास्पद यह कि इसी वीडियो में क़ाज़ी मुफ़्ती नदीम यह कहते सुना जा सकता है – “तुम मुझे गाली दो… बर्दाश्त है, मेरे वालिद लोगों को गाली दो… बर्दाश्त है, तुम मेरे खानदानों को बुरा कहो… बर्दाश्त है… लेकिन मेरे नबी की शान में अगर एक लब्ज भी बोला तो याद रख लो… जबान काट ली जाएगी।”

मुफ़्ती नदीम का वीडियो शेयर करते हुए दानिश रज़ा अज़हरी ने इस वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा, “हमने मुहम्मदे अरबीﷺ का कालिमा पढ़ा है, जिनकी तलवार से कुफ्फारे मक्का हैबत खाते थे। सुन ले पूरी दुनिया, हम मज़बूर हैं, बुजदिल नहीं। हमे आपको मैदान ए अम्ल में आना है। रब तआला पर तव्वको करके याद है ना बद्र का मैदान सहाबा के हाथों में पेड़ की टहनियों से कुफ्फारे मक्का घुटनो के बल आ गए थे। उन टहनियों को ना तोड़ पाय वक़्त के ज़ालिम कुफ्फार! इंशा अल्लाह हक़ आएगा बातिल मिटेगा।”

इस वीडियो को शेयर करने वाले दानिश रज़ा अज़हरी बरेलवी विचारधारा से ताल्लुक रखते हैं। उनके द्वारा शेयर किए गए वीडियो पर अब तक हजारों रिएक्शन आ चुके हैं। अज़हरी के समुदाय के अधिकतर लोगों ने उनकी बातों का समर्थन किया है। उन्होंने न सिर्फ दिल (Heart) का मार्क दिया है बल्कि बेशक और तमाम अन्य बातों से बयान को जायज ठहराया है।

Social Reactions (source – Facebook)

सोशल मीडिया पर राजस्थान पुलिस और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से इस मौलाना पर कार्रवाई की माँग की जा रही है।

‘कार में मेरी जाँघों को सहलाने लगा, फिर होटल में मेरी वर्जिनिटी भंग की’: सेक्रेड गेम्स की अभिनेत्री ने बताई अपने ‘अंकल’ की कहानी

सेक्रेड गेम्स (Sacred Games) की अभिनेत्री कुब्रा सैत (Kubbra Sait) ने अपने टीनएज लाइफ को लेकर सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब वह किशोरावस्था में थी तो ‘अंकल’ ने दो साल तक उनका यौन शोषण किया था और वह चुप रहने को विवश थीं, क्योंकि परिस्थितियाँ ऐसी थीं।

कुब्रा ने बताया कि जब वह 17 साल की थीं तो वह अपने माता-पिता और भाई के साथ बैंगलोर के एक प्रसिद्ध रेस्टोरेंट में गई थीं। वहाँ उन्हें एक आदमी मिला था जो उस रेस्टोरेंट का मालिक था। उनका परिवार उसके व्यवहार से काफी खुश हुआ और सप्ताह में कम से कम एक बार उस रेस्टोरेंट में जाने लगा। इस तरह वह धीरे-धीरे परिवार का करीबी बन गया।

धीरे-धीरे वह व्यक्ति इस परिवार के सुख-दुख का साथी बन गया और उनकी आर्थिक रूप से मदद भी करने लगा। इस तरह उस ‘अंकल’ ने परिवार के सदस्यों के बीच अपनी एक अलग छवि बना ली थी। एक दिन उसने पेपर में लपेट कर कुब्रा की माँ को नोटों की गड्डी दी और बोला- ‘मैं हूँ ना, चिंता मत कीजिए’।

कुब्रा सैत अपनी वृतांत ‘ओपेन बुक’ में लिखती हैं, “एक दिन गाड़ी उसकी मर्सिडीज गाड़ी में हम सभी बैठे थे। इसी दौरान मैंने महसूस किया कि एक हाथ मेरे कपड़ों को हटाकर मेरी जाँघें सहला रहा है। यह हाथ उसी ‘अंकल’ का था, जिसने माँ को पैसे देकर हमारी वित्तीय संकट को दूर किया था।” कुब्रा कहती हैं कि इस घटना से वह अचंभित रह गईं। अब वह व्यक्ति उनके लिए अंकल नहीं रह गया था। वह ‘मिस्टर X’ हो गया था।

कुब्रा बताती हैं कि वह अक्सर घर आता था और परिवार वालों के साथ खूब हँसी-मजाक करता था। इस दौरान वह उनके गाल को चूमते हुए कहता, “मेरी प्यारी कुबरती, तुम मेरी सबसे पसंदीदा हो।” कुब्रा कहती हैं कि वह विरोध नहीं कर पाती थीं, क्योंकि घर में सब उससे घुलमिल गए थे।

कुब्रा अपनी किताब में लिखती हैं कि एक रात मम्मी-पापा को आपस में लड़ते देखा और उनके हाथ में चेकबुक और पेन था। पापा घोर छोड़ने की बात कर रहे थे। अगले दिन कुब्रा ने उसी ‘अंकल’ को PCO से कॉल किया और घर के बारे में बताया और कहा कि आप माँ से बात कर लीजिए बोलिए कि वह मनी क्राइसिस को देख लेंगे।

अपनी किताब में कुब्रा लिखती हैं, “इसके बाद मिस्टर एक्स बोला, ठीक है। लेकिन मैं तुम्हारे लिए चिंतित हूँ। आज तुम कॉलेज मत जाओ और रिचमंड होटल में मुझसे मिलो। मैं वहाँ रहूँगा और सब ठीक कर दूँगा।”

वह आगे बताती हैं, “वह कार से मुझे होटल ले गया और चेहरे को देखकर बोला कितनी थक गई हो। इसके बाद वह मेरे होठों को चूमने लगा। मैं शॉक्ड थी, लेकिन कुछ नहीं बोल पा रही थी। उसका किस और गहरा होता गया और फिर उसने अपना ट्राउजर खोला। मुझे पता चल गया कि मैं अपनी वर्जिनिटी खो रही हूँ। यह एक शर्मनाक गोपनीय सच्चाई थी।”

इसके बाद से उस व्यक्ति का परिवार में दखल और बढ़ गया। जब भी कुब्रा मना करतीं, वह व्यक्ति कुब्रा की माँ का कॉल उठाना बंद कर देता और बात नहीं करता। जब माँ उससे पूछती कि ऐसा क्यों कर रहे हो तो वह व्यक्ति कहता, “अपनी बेटी से पूछो।” फिर कुब्रा की माँ उनसे कहती, “फिर लड़ दिए दोनों। ऐसा मत करो बेटा। देखो वह हमारे परिवार के लिए कितना कुछ करता है।”

कुब्रा के अनुसार, मिस्टर एक्स शादीशुदा था और उसका एक बच्चा भी थी। कुब्रा बताती हैं कि जब वह ग्रेजुएट हो गईं तो वह मुंबई जाना चाहती थीं, लेकिन उनकी माँ ने उन्हें दुबई भेजा। वर्षों बाद जब एक्स की हरकतों के बारे में बताया तो माँ अपने आपको लज्जित महसूस कर रही थीं।

…जब सुभाष चन्द्र बोस भटकने लगे थे तो स्वामी विवेकानंद के कारण ही रास्ते पर लौटे, तभी हुआ था क्रांति का उदय

स्वामी विवेकानंद के जीवन का उपदेश उपनिषदों के निचोड़ से निकला था। वह निर्भीक समाज की संरचना के लिए कार्य करते रहे सम्पूर्ण जीवन। “अभय बनो-अभय बनो” का मंत्र उन्होंने युवाओं के बीच प्रचारित किया, जो आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के लिए अत्यावश्यक है।

स्वामी विवेकानंद के विचार को उनके जीवन काल में लाखों लोगों ने सुना और समझा। उनकी समाधि के उपरांत यह विचार करोड़ों लोगों तक पहुँचा, जिन्होंने अपनी सुविधा अनुसार इसको धारण किया। कुछ ऐसे भी व्यक्तित्व हुए, जिन्होंने उनके विचार को ऐसे अंगीकार किया, जिसके कारण सिर्फ उनका जीवन ही राष्ट्रधारा में नहीं प्रवाहित हुआ बल्कि उनके साथ-साथ लाखों के हृदय में राष्ट्र जीवन की ज्वाला जगी।

इस शृखंला में अगर सबसे पहले किसी का नाम आता है तो वह हैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी तथा सबसे बड़े नेताओं में से एक सुभाष चन्द्र बोस, जिनको करोड़ों भारतीय ‘नेताजी’ के नाम से सम्बोधित करते हैं। जिन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिए भारतीय युद्ध बंदियों में से आज़ाद हिन्द फौज का नेतृत्व किया और “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा” के नारे का उद्धघोष भरा था। जिनकी जयन्ती 23 जनवरी को भारत सरकार पराक्रम दिवस के रूप में मनाती है।

वह महान क्रन्तिकारी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस कहते हैं, ”वर्तमान स्वतंत्रता आंदोलनों की नींव स्वामी विवेकानंद के संदेश के मूल में है।” नेताजी सुभाष के लिए प्रेरणापुरुष थे स्वामी विवेकानन्द। स्वामी विवेकानंद का नेताजी के जीवन में महज 15 वर्ष की उम्र में प्रवेश हो गया था। उनके द्वारा रचित साहित्य का अध्ययन करके नेताजी के अंदर एक मानसिक क्रांति का उदय हुआ। उनका भटकाव खत्म हो गया और उनको आधारभूत सिद्धांत मिल गया था, जिससे वह अपने जीवन का उद्देश्य बना सके।

सुभाष चन्द्र बोस ने हृदय से स्वामी विवेकानंद का सन्देश स्वीकार कर लिया था कि मनुष्य सेवा ही ईश्वर सेवा है। नेताजी ने स्वामी विवेकानंद के इस विचार को अंगीकार किया कि प्रत्येक भारतीय उनके भाई-बहन हैं और भारत की मुक्ति के लिए राष्ट्रीय जागृति अति आवश्यक है। सुभाष चन्द्र बोस लिखते हैं:

”उन्होंने स्वस्थ राष्ट्रीय गतिविधि के हर रूप को प्रेरित करने में सक्रिय हिस्सा लिया। उनके साथ धर्म राष्ट्रवाद को प्रेरणादेता था। उन्होंने नई पीढ़ी में भारत के अतीत में गर्व की भावना, भारत के भविष्य में विश्वास और आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की भावना का संचार करने की कोशिश की। स्वामी विवेकानंद ने हालाँकि कभी कोई राजनीतिक संदेश नहीं दिया, लेकिन उनके संपर्क में आने वाले या उनकी रचनाओं से देशभक्ति और राजनीतिक मानसिकता की भावना विकसित हुई। उनकी 1902 में बहुत युवा उम्र में मृत्यु हो गई, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद से उनका प्रभाव और भी अधिक हो गया है।”

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जीवन पर स्वामी विवेकानंद की छाप, प्रभाव, प्रभुत्व, उनके प्रति स्नेह और सम्मान हम उनके इन शब्दों से समझने की कोशिश कर सकते हैं, जब एक जगह वह ऐसा कहते हैं कि अगर वो जीवित होते, तो वह उनके चरणों में होते। स्वामी विवेकानंद उनके गुरु होते, वो उनको अपने गुरु के रूप में स्वीकार कर लिए होते।

सुभाष चन्द्र बोस आगे कहते हैं, ”जब तक मैं जियूँगा, मैं रामकृष्ण और विवेकानंद के प्रति बिल्कुल वफादार और समर्पित रहूँगा।” स्वामी विवेकानंद का चित्र नेताजी अपने साथ हमेशा रखते थे और अपने अत्यंत व्यस्त दिनचर्या के बीच में भी रामकृष्ण मिशन आश्रम की नजदीकी शाखाओं में जाकर ध्यान करते थे।

बरेली में कानपुर जैसे हालात, धारा 144 लागू: बाटला हाउस के आतंकियों को शहीद बताने वाला मौलाना करने वाला है विरोध-प्रदर्शन

इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के कथित अपमान को लेकर कानपुर में की गई हिंसा की आग को अन्य जगहों पर भी फैलाने की साजिश रची जा रही है। बरेली के मौलाना और कॉन्ग्रेस नेता तौकीर रजा ने कानपुर की तर्ज पर ही बरेली में 10 जून को प्रदर्शन का आह्वान किया है। इसको देखते हुए शहर में धारा 144 लागू कर दिया गया है।

वहीं, कानपुर में शुक्रवार (3 जून 2022) की नमाज के बाद कई इलाकों में की गई बवाल को लेकर पुलिस सख्त है। इस मामले में 800 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जिनमें से घटना के मास्टरमाइंड सहित अब तक 24 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपितों की पहचान के लिए पुलिस ने कम से कम 200 वीडियो फुटेज खंगाले हैं।

इधर, तौकरी रजा द्वारा बरेली में 10 जून को विशाल विरोध प्रदर्शन के आयोजन की घोषणा के बाद 3 जुलाई तक धारा 144 लगा दिया गया है। पुलिस का कहना है कि इस दौरान सार्वजनिक स्थानों पर पाँच से अधिक व्यक्तियों को इकट्ठा होने की अनुमति नहीं होगी। धरना प्रदर्शन पर भी पूरी तरह रोक रहेगी।

बता दें कि तौकीर रजा अपने नफरती बयानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कई बार ऐसे बयान दिए हैं, जिसको लेकर बवाल हो चुका है। दिल्ली में अवैध अतिक्रमण पर बुलडोजर चलने से बौखलाए तौकीर रजा ने कहा था कि जिस दिन मुस्लिम सड़कों पर उतरेगा किसी के कब्जे में नहीं आएगा। तौकीर रजा ने पीएम मोदी को धृतराष्ट्र बताते हुए कहा है कि यदि उनका यही रुख रहा तो देश को महाभारत से कोई नहीं बचा सकता है।

इतना ही नहीं, एक टीवी डिबेट के दौरान उन्होंने एंकर को मारकर मुँह तोड़ने की धमकी दी थी। चुनाव के वक्त में तौकीर रजा ने विवादित बयान देते हुए बाटला हाउस एनकाउंटर पर बोलते हुए कॉन्ग्रेस पर जमकर हमला बोला था और एनकाउंटर में मारे गए आतंकवादियों को शहीद बता दिया था।

हाल ही में औरंगजेब का महिमामंडन करते हुए तौकीर रजा ने कहा था, “फिरकापरस्तों को नफरत औरंगजेब से है। मैं तो कहता हूँ कि उनसे नफरत की जानी चाहिए, क्योंकि उन्होंने हिन्दुओं को नवाजा, उन्होंने मंदिरों को जायदादें दीं। इस वजह से हिन्दू उनसे नाराज है। ईमानदारी से औरंगजेब के बारे में पढ़कर देखो। हिन्दुस्तान में उनसे बेहतर दूसरा किरदार नहीं मिलेगा।”

उधर, कानपुर पुलिस ने शनिवार (4 जून 2022) को कानपुर हिंसा के मास्टरमाइंड हयात जफर हाशमी को तीन अन्य आरोपितों के साथ गिरफ्तार कर लिया। कानपुर सीपी ने कहा, “हम जाँच करेंगे कि क्या उनका कट्टरपंथी संगठन PFI के साथ कोई संबंध है या नहीं। गैंगस्टर एक्ट और NSA के तहत कार्रवाई की जाएगी और उनकी संपत्ति को जब्त किया जाएगा।”

गिरफ्तार किए गए चार लोगों की पहचान हयात जाफर हाशमी, जावेद अहमद खान, मोहम्मद राहिल और मोहम्मद सुफियान के रूप में हुई है। मीना ने कहा, “ये सभी मौलाना अली जौहर फैन्स एसोसिएशन से जुड़े हैं। हम अदालत से उन्हें 14 दिन के रिमांड पर भेजने के लिए कहेंगे।”

कानपुर सीपी ने कहा कि अब तक वीडियो फुटेज के आधार पर 36 लोगों की पहचान हुई है, जिनमें से 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से 18 लोगों को शुक्रवार (3 जून 2022) को गिरफ्तार किया गया था। FIR में कहा गया है कि दंगाइयों ने घातक हथियारों और पेट्रोल बम तक इस्तेमाल घटना के वक्त किया था।

जिस फैक्ट्री में 12 की मौत, उसका मालिक दिलशाद… लेकिन चलाता था वसीम: लाइसेंस बिजली के सामान का, पुलिस को मिला ‘प्लास्टिक कारतूस’

उत्तर प्रदेश के हापुड़ में 4 जून 2022 (शनिवार) को केमिकल फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ। इस ब्लास्ट में 12 लोगों की मौत हो गई और 21 मजदूर घायल हो गए। घायलों में कइयों की हालत गंभीर है। अब जाँच में सामने आया है कि फैक्ट्री के मालिक का नाम दिलशाद है और उसने वसीम को किराए पर चलाने के लिए दी थी यह फैक्ट्री। फिलहाल दोनों फरार हैं। पुलिस ने फैक्ट्री के अंदर प्लास्टिक के कारतूस जैसी चीजें बरामद की हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फैक्ट्री का लाइसेंस साल 2021 में बिजली के सामान बनाने के लिए लिया गया था। लेकिन लाइसेंस लेने वाले ने इसे खुद चलाने के बजाय वसीम को चलाने के लिए दे दिया। DM हापुड़ के मुताबिक इसकी जाँच करवाई जा रही है कि फैक्ट्री में विस्फोटक जैसा पदार्थ कैसे आया।

तलाशी में फैक्ट्री के अंदर कारतूस जैसी प्लास्टिक से बनी कुछ चीजें बरामद की गई हैं। पुलिस को शक है कि ये प्लास्टिक टॉय गन में प्रयोग होते होंगे। लेकिन संभावना ये भी जताई जा रही है कि इन कारतूसों में बारूद भरा जा रहा था। यही बारूद धमाके की वजह बना। इस घटना में हुए ब्लास्ट का CCTV फुटेज सामने आया है।

पुलिस ने पूरे प्रभावित क्षेत्र की ड्रोन से मैपिंग करवाई है। फरार चल रहा फैक्ट्री का मालिक दिलशाद मेरठ का निवासी बताया जा रहा है। फैक्ट्री को चला रहा वसीम भी इस हादसे में घायल बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि उसका इलाज किसी अस्पताल में चल रहा है। पुलिस उसकी तलाश में है।

घटनास्थल हापुड़ के धौलाना में आने वाला इंडस्ट्रीयल एरिया में है, जिसे यूपीसीडा ने बसाया है। सैकड़ों फैक्ट्रियों वाली इस जगह को UP स्टेट इंडस्ट्रियल अथॉरिटी के नाम से भी जाना जाता है। हादसे की शिकार फैक्ट्री प्लॉट नंबर F 128 पर चल रही थी, जिसका नाम रूही इंडस्ट्री था।

इनोवा के शीशे पर सन ब्लॉकर चढ़ाया, फिर हैदराबाद में नाबालिग लड़की से बारी-बारी किया रेप: BJP नेता ने कहा- कुछ आरोपित दुबई भागे

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद (Hyderabad, Telangana) में नाबालिग से प्रभावशाली लोगों के बेटों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म (Minor Gang Rape) के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इनोवा कार में 17 साल की लड़की के साथ आरोपितों ने बारी-बारी से रेप किया और कोई देख ना पाए, इसके लिए कार के शीशों पर सन ब्लॉकर (धूप से बचने के लिए शीशे पर लगाया जाने वाला पर्दा) लगा दिया था।

28 मई की शाम को घटना के अंजाम देने के बाद पाँचों आरोपित बेकरी के पास लौट आए और 2 दिनों तक आराम की जिंदगी जीते रहे, जब तक कि इसको लेकर बवाल नहीं हुआ। पुलिस के अनुसार, शुरू में आरोपित किसी भी अपराध को मानने से इनकार करते रहे।

TOI के अनुसार, पीड़िता की आरोपित से मुलाकात पब में पार्टी के दौरान हुई थी। उसके बाद आरोपित पीड़ित को मर्सिडीज बेंज कार लेकर बेकरी तक आए। उनके पीछे एक इनोवा कार भी थी, जिसमें कुछ और लड़के बैठे थे। बेकरी के बाद लड़कों ने पीड़िता को घर छोड़ने के बहाने उसे इनोवा कार में बैठा लिया और दूर एक सुनसान जगह पर ले जाकर बारी-बारी से रेप किया।

इसके बाद आरोपितों ने लड़की को उसी बंजारा हिल्स स्थित उसी पब के सामने लाकर छोड़ दिया, जहाँ से वे लड़की को लेकर आए थे। घटना को अंजाम देने के बाद सारे आरोपित बेकरी के फिर लौटे और वहाँ एक ग्रुप फोटो लिया। जब पीड़िता ने साथी ने इसके बारे में लड़की की स्थिति के बारे में बताया तो आरोपित सतर्क हो गए।

पब के पास से 17 वर्षीय लड़की ने अपने पिता को फोन किया और उसे घर ले जाने के लिए कहा। उसके पिता 15 मिनट में वहाँ पहुँच गए और लड़की को घर ले गए। घर पर परिजनों ने लड़की की हालत को देखकर महसूस किया कि कुछ गड़बड़ हुआ है। वह सदमे और डर की स्थिति में थी और घरवालों से इसके बारे में एक शब्द भी नहीं कहा।

इस मामले में लड़की के पिता ने 31 मई को थाने में केस दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस के महिला अधिकारियों के लड़की की काउंसलिंग की थी, जिसमें उसने पूरी घटना के बारे में बताया था। लड़की के बयान के आधार पर FIR में सामूहिक रेप की धाराएँ भी जोड़ी गईं।

इन आरोपितों में 2 हैदराबाद और सांगा रेड्डी के नेताओं के बेटे हैं। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इस अपराध की सारी कड़ियाँ जोड़ ली है। पुलिस ने इस अपराध में इस्तेमाल की गई इनोवा कार को जब्त कर लिया है।

भाजपा विधायक रघुनंदन राव का आरोप है कि इस घटना में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के विधायक का बेटा भी शामिल है। उनका आरोप है कि कुछ आरोपित दुबई भाग गए हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने पब बुक कराने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की। भाजपा नेताओं ने इस मामले की जाँच सीबीआई से कराने की माँग की है।

भाजपा (BJP) नेताओं का कहना है कि तेलंगाना के गृह मंत्री मोहम्मद महमूद अली के पोते ने बैचलर पार्टी (Bachelor Party) का आयोजन किया था और पार्टी में शामिल होने के बाद पीड़िता के साथ बलात्कार किया गया। 

बता दें कि इनसोम्निया एंड एम्नेशिया पब पार्टी (Insomnia & Amnesia Pub Party) की योजना इंस्टाग्राम (Instagram) पर बनाई गई थी और इस पार्टी में शहर के विभिन्न इलाकों के लगभग 200 लोगों ने भाग लिया था।

इस पार्टी में जिन लोगों ने लड़कों ने हिस्सा लिया था, वे सभी 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्र थे। ये सभी छात्र बेहद धनाढ्य परिवारों से ताल्लुक रखते थे। इसके साथ ही इनमें से कुछ राजनेताओं और नौकरशाहों के परिवार से ताल्लुक रखने वाले छात्र भी शामिल थे।

हापुड़ की केमिकल फैक्ट्री में बड़ा विस्फोट, उड़ गई आसपास की इमारतों से छत: 12 की मौत, 21 घायल

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के हापुड़ (Hapur) जिले के धौलाना थाना क्षेत्र में स्थित एक अवैध पटाखा (Blast In Cracker Factory) बनाने वाली फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 12 लोगों की मौत हो गई। जबकि, 21 मजदूर बुरी तरह से घायल हुए हैं। इनकी हालत भी गंभीर बताई जा रही है। इन मौतों की पुष्टि मेरठ जोन के एडीजी राजीव सभरवाल ने की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, फैक्ट्री में रखे बारूद में हुआ धमाका इतना तेज था कि आसपास की इमारतों की छतें तक उड़ गईं। बताया जाता है कि इस अवैध फैक्ट्री में प्लास्टिक की बंदूक और उसमें इस्तेमाल के लिए बारूद बनाया जाता था।

इस घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है। पीएमओ ने ट्वीट किया, “उत्तर प्रदेश के हापुड़ की केमिकल फैक्ट्री में हुआ हादसा हृदयविदारक है। इसमें जिन लोगों को जान गँवानी पड़ी है, उनके परिजनों के प्रति मैं अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। घायलों के इलाज और दूसरी हर संभव सहायता में राज्य सरकार तत्परता से जुटी है।”

वहीं राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस घटना पर संवेदना जाहिर की है। उन्होंने ट्वीट किया, “जनपद हापुड़ स्थित फैक्ट्री में बॉयलर फटने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में हुई जनहानि अत्यंत हृदय विदारक है। मेरी संवेदनाएँ शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं। संबंधित अधिकारियों को त्वरित गति से राहत-बचाव कार्य संचालित करने एवं घायलों का समुचित उपचार कराने हेतु निर्देश दिए गए हैं।”

इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने का लिया था लाइसेंस

जिस कंपनी में ये धमाका हुआ है, उसके पास पटाखा बनाने का लाइसेंस ही नहीं था। उक्त कंपनी ने इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने के लिए लाइसेंस लिया था। लेकिन उसकी आड़ में वो पटाखा फैक्ट्री चला रही थी। इस घटना को लेकर आईजी प्रवीण कुमार ने कहा कि शर्तों के उल्लंघन मामले की जाँच की जाएगी और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा।