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ऑपइंडिया की एडिटर इन चीफ नुपूर शर्मा को डिजिटल पत्रकारिता का ‘देवऋषि नारद सम्मान’, इस साल 12 पत्रकारों को मिला है यह अवॉर्ड

पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले मीडियाकर्मियों को आरएसएस की संचार शाखा इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद की ओर से 18 मई को देवऋषि नारद सम्मान 2022 से सम्मानित किया गया। इस दौरान 12 पत्रकारों को विभिन्न श्रेणियों में अवार्ड मिले। इनमें एक नाम ऑपइंडिया की एडिटर-इन-चीफ नुपूर शर्मा का भी है। उन्हें डिजिटल पत्रकार नारद सम्मान से सम्मानित किया गया।

नारद पुरस्कार पाने वाले पत्रकारों के नाम

नुपूर शर्मा के साथ जिन पत्रकारों को विभिन्न कैटगरी में अवार्ड मिला उनमें हिंदुस्तान समाचार के आशुतोष कुमार पांडे (युवा पत्रकार नारद सम्मान पाने वाले ); ऑर्गनाइजर के निशांत कुमार आजाद (स्त्री सरोकार/महिला संवेदना पत्रकार नारद सम्मान); इंडियन साइंस वायर के उमाशंकर मिश्रा (ग्रामीण पत्रकारिता नारद सम्मान); दूर्दशन न्यूज के सुरेश कुमार जायसवाल (न्यूज रूम सहयोग नारद सम्मान); न्यूज जंक्शन की प्रियंका देव (सोशल मीडिया पत्रकार नारद सम्मान); पंजाब केसरी के मिहिर सिंह (फोटो पत्रकार नारद सम्मान); न्यूजनेशन के विद्यानाथ झा (टीवी का वीडियो पत्रकार नारद सम्मान); पीएम नारायणन (विदेशी पत्रकारिता नारद सम्मान); वरिष्ठ पत्रकार दीपक उपाध्याय (उत्कृष्ट पत्रकार नारद सम्मान); और पूर्व पत्रकार, स्तंभरकार बलबीर पुंज (आजीवन सेवा नारद सम्मान) का नाम शामिल है।

सम्मानित पत्रकार

पत्रकारिता निष्पक्ष हो, सकारात्मक दिशा में आगे जाए

इस कार्यक्रम में आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर मुख्य वक्ता के तौर पर और राज्यमंत्री डॉ संजीव कुमार बालियान व नेटवर्क 18 के प्रबंध संपादक एंकर आनंद नरसिम्हन विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। सुनील आंबेकर ने कार्यक्रम संबोधित करते हुए जिम्मेदार पत्रकारिता पर बात की और कहा कि पत्रकारिता में सत्य को लेकर आगे जाना और सत्य के साथ कभी कोई समझौता नहीं करना, या किस सत्य को लोगों तक पहुँचाना चाहते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है। वहीं राज्यमंत्री संजीव बालियान ने कहा कि पत्रकारिता इतनी महत्वपूर्ण है कि वो हर जनमानस को प्रभावित करती है। इसलिए ये सकारात्मक दिशा में होनी चाहिए। सभी विचारों का सम्मान करके इसे हमेशा निष्पक्ष होना चाहिए।

कॉन्ग्रेस सबसे बड़ी जातिवादी, सच बोलो तो बदनाम करती है: इस्तीफे के बाद बरसे हार्दिक पटेल, मोबाइल-चिकन सैंडविच पर फोकस की भी खोल चुके हैं पोल

कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देने के बाद गुजरात के नेता हार्दिक पटेल (Hardik Patel) ने देश की सबसे पुरानी पार्टी पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने गुरुवार (19 मई 2022) को कहा, “गुजरात में सिर्फ हार्दिक ही नहीं, बल्कि कई नेता कॉन्ग्रेस से नाराज हैं। कॉन्ग्रेस में सच बोलो तो बड़े नेता आपको बदनाम करते हैं। यही उनकी रणनीति है।” इसके साथ ही पटेल ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस सबसे बड़ी जातिवादी पार्टी है।

पाटीदार नेता ने अहमदाबाद में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गुजरात में चाहे पाटीदार समुदाय हो या कोई अन्य समुदाय, उन्हें कॉन्ग्रेस में भुगतना पड़ा है। उन्होंने कहा, “7-8 लोग 33 साल से कॉन्ग्रेस चला रहे हैं। मेरे जैसे कार्यकर्ता रोजाना 500-600 किमी का सफर तय करते हैं। मैं लोगों के बीच जाकर उनका हाल जानने की कोशिश करता हूँ, तो यहाँ के बड़े नेता एसी चेंबर में बैठकर मेरे इस प्रयास को बाधित करने की कोशिश करते हैं।”

पटेल यही नहीं रुके उन्होंने कॉन्ग्रेस पर एक के बाद एक गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा, “गुजरात में कई नेता और विधायक हैं, जो कॉन्ग्रेस का इस्तेमाल करते हैं। सत्ता में बैठने और पार्टी की प्रशंसा करने का मतलब यह नहीं है कि पार्टी उन्हें मुख्यमंत्री बना सकती है।” इसके साथ ही उन्होंने भाजपा में जाने की अटकलों को लेकर कहा कि अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं किया है।

गौरतलब है कि गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले 18 मई को हार्दिक पटेल ने कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देकर पार्टी की राज्य इकाई को बड़ा झटका दिया था। पटेल ने ट्विटर पर हिंदी, अंग्रेजी और गुजराती में पत्र साझा करते हुए लिखा था, “आज मैं हिम्मत करके कॉन्ग्रेस पार्टी के पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूँ। मुझे विश्वास है कि मेरे इस निर्णय का स्वागत मेरा हर साथी और गुजरात की जनता करेगी। मैं मानता हूँ कि मेरे इस कदम के बाद मैं भविष्य में गुजरात के लिए सच में सकारात्मक रूप से कार्य कर पाऊँगा।”

अपने बयान में हार्दिक पटेल ने यह भी कहा था कि कॉन्ग्रेस पार्टी देशहित व समाज हित के बिलकुल विपरीत कार्य कर रही है। उन्होंने कॉन्ग्रेस में एक सक्षम और मजबूत नेतृत्व न होने को लेकर अपनी शिकायत की थी। साथ ही कहा था कि कॉन्ग्रेस पार्टी सिर्फ विरोध की राजनीति कर रही है जबकि देश के लोग विकल्प चाहते हैं जो उनके भविष्य के लिए सोचता हो। उन्होंने इस्तीफे में कहा था कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व गंभीर नहीं है। उनका ध्यान गुजरात की परेशानियों से ज्यादा मोबाइल व बाकी की चीजों पर है। पार्टी के बड़े नेताओं की चिंता होती है कि पार्टी नेतृत्व ने चिकन सैंडविच खाया या नहीं।

टेरर फंडिंग में आतंकी यासीन मलिक दोषी करार, 25 मई को सजा सुनाएगी NIA की स्पेशल कोर्ट

जम्मू कश्मीर में कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार के आरोपितों में एक आतंकी यासीन मलिक को टेरर फंडिंग के मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की अदालत ने दोषी करार दिया है। अब उसे कितनी सजा दी जाए, इसको लेकर 25 मई से कोर्ट सुनवाई करेगा। कोर्ट ने जाँच एजेंसी को मलिक के फाइनैंशियल लेन-देन को लेकर भी एक रिपोर्ट को सौंपने का आदेश दिया है।

गुरुवार (19 मई 2022) को मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली की अदालत ने यासीन मलिक को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत और इंडियन पीनल कोड के तहत साजिश और देशद्रोह का दोषी पाया। कोर्ट ने मलिक को सुनवाई की अगली तारीख तक अपनी वित्तीय संपत्ति के संबंध में एक एफिडेविड कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है।

बता दें कि टेरर फंडिंग के मामले में अदालत ने मार्च में आरोप तय किए थे। उस दौरान ये पाया गया था कि मलिक, शब्बीर शाह, राशिद इंजीनियर, अल्ताफ फंटूश, मसरत और हुर्रियत/संयुक्त प्रतिरोध नेतृत्व (JRL) सीधे आतंकी फंड लेते थे। इसके अलावा मलिक ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए फंड जुटाने के लिए दुनियाभर में एक मैकेनिज्म तैयार कर दिया था।

कबूल चुका है आतंकवाद के आरोप

गौरतलब है कि इसी महीने 2022 में यासीन मलिक ने कोर्ट में आतंकवाद के आरोपों को कबूल किया था। उसने पटियाला हाउस कोर्ट की एनआईए अदालत में अपनी गलती मानते हुए कोर्ट से कानून के मुताबिक सजा देने की माँग की थी।

कौन है यासीन मलिक

यासीन मलिक वो आतंकी है, जो कि घाटी में हिंदुओं के नरसंहार में सीधे तौर पर शामिल था। वो जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का अध्यक्ष होने के साथ ही पाकिस्तान का कट्टर समर्थक भी है। उस पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण का भी आरोप है। इतना ही नहीं 1990 में वायुसेना के 4 अधिकारियों की बेरहमी से हत्या का आरोप भी यासीन मलिक पर ही है।

महाराष्ट्र में जुवेनाइल बोर्ड ने ISIS आतंकी को छोड़ा, स्कूल के बच्चों को पढ़ाने और वृद्धाश्रम में सेवा का दिया आदेश

महाराष्ट्र के औरंगाबाद से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। राज्य के किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board) ने आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) से जुड़े एक आतंकी को रिहा करने का फैसला किया है। यही नहीं अपने विवादास्पद आदेश में बोर्ड ने उसे दोषी ठहराए जाने के बावजूद अपने इलाके में स्कूल के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने की अनुमति भी दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीन सदस्यीय किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) की अध्यक्षता कर रहे एक प्रधान मजिस्ट्रेट ने कानून का उल्लंघन करने वाले और आतंकवादी मामले में दोषी ठहराए गए एक नाबालिग (CCL) की रिहाई का आदेश देकर उसे सेट-ऑफ बेनिफिट दिया है। वह तीन साल (23 जनवरी, 2019 से अब तक) की सजा एक ऑब्जर्वेशन होम (Observation Home) में बिता चुका है।

11 मई को अपने फैसले में जेजेबी ने आतंकी गतिविधियों में संलिप्त अपराधी को ‘Child in Conflict with the Law (CCL)’ के तहत रिहा करने का फैसला किया। सीसीएल यानी उसे एक वर्ष की अवधि के लिए अच्छे व्यवहार के तौर पर रिहा किया गया है। ठाणे में एक परिवीक्षा अधिकारी (Probation Officer) की देखरेख में उसे रखा गया है।

इसके साथ ही अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि दोषी अगले छह महीनों तक महीने में दो बार वृद्धाश्रम में जाकर बुजुर्गों की सेवा करेगा और सामाजिक कार्यों में अपना योगदान देगा। इसके रूप में उसे अपने इलाके में कक्षा 7 और 9 के बच्चों को गणित और अंग्रेजी में ट्यूशन देने का भी आदेश दिया गया है।

जेजेबी ने ISIS आतंकवादी को दोषी ठहराया, लेकिन रिहा कर दिया

जेजेबी ने आरोपित ISIS आतंकी को आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और 201 (सबूत नष्ट करना) के अलावा, धारा 18 (साजिश), 20 (एक आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होने के नाते), 38 और 39 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता और समर्थन से संबंधित अपराध) के तहत आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी ठहराया है।

किशोर न्याय बोर्ड ने पहले यह आदेश दिया कि आतंकी संगठन ISIS से जुड़े एक किशोर को दोषी पाया गया है, उसे तीन साल के लिए विशेष गृह भेजा जाए। लेकिन उसके कुछ देर बाद ही जेजेबी ने उस अवधि पर विचार किया, जब वह तीन साल की सजा के तौर पर एक ऑब्जर्वेशन होम में था। इसे ध्यान मे रखते हुए जेजेबी ने उसकी रिहाई का आदेश दिया था।

महाराष्ट्र एटीएस ने 2018 में किया था गिरफ्तार

महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) ने दोषी को उसके अन्य सदस्यों के साथ 27 दिसंबर, 2018 को गिरफ्तार किया था। उस वक्त वह 17 साल का था। उसे प्रतिबंधित इस्लामिक आतंकी संगठन आईएसआईएस के एक संगठित मॉड्यूल का हिस्सा होने के लिए गिरफ्तार किया गया था। उस वक्त बताया गया था कि महाराष्ट्र एटीएस ने औरंगाबाद और मुंबई में आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए ‘उम्मत-ए-मुहम्मदिया’ नाम का संगठन बनाने वाले आतंकियों को गिरफ्तार किया है।

अगस्त 2018 में, राज्य एटीएस की औरंगाबाद इकाई ने आईएसआईएस से प्रभावित और आतंकी हमले की योजना बनाने के संदेह में नाबालिग संदिग्ध सहित नौ लोगों को हिरासत में लिया था। एटीएस ने आरोप लगाया था कि नौ आरोपित आतंकवादी संगठन आईएसआईएस की विचारधारा से प्रेरित थे। उन्होंने मुंबई, औरंगाबाद और अन्य जगहों पर कुछ जहरीले पदार्थ और विस्फोटकों का इस्तेमाल कर आतंकी हमले को अंजाम देने की साजिश रची थी।

एटीएस ने किशोर न्याय बोर्ड में दलील दी थी कि नाबालिग आरोपित के साथ वयस्क जैसा व्यवहार किया जाए। हालाँकि, जेजेबी ने अक्टूबर 2019 में एटीएस की याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद एटीएस सेशन कोर्ट में गई थी, जिसने मई 2021 में जेजेबी के आदेश को भी बरकरार रखा। वहीं, बॉम्बे उच्च न्यायालय ने भी क्रिमिनल रिवीजन अपील को खारिज कर दिया था।

बता दें कि गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान सलमान खान, फहद शाह, जमान कुटेपदी, मोहसीन खान, मोहम्मद मजहर शेख, तकी खान, सरफराज अहमद, जाहिद शेख और एक 17 वर्षीय नाबालिग के रूप में हुई थी। गिरफ्तार किए गए लोगों में से एक दाऊद इब्राहिम के करीबी रशीद मालाबारी का बेटा बताया गया था। वहीं ये सभी आरोपित शिक्षित बताए गए थे। उनमें से दो इंजीनियर और एक 11 वीं कक्षा का छात्र भी था।

सहिष्णुता ही हिंदू धर्म की पहचान है: तमिलनाडु मंदिर में दो संप्रदायों को पूजा का मिला बराबर अधिकार, मद्रास HC ने सुनाया फैसला

तमिलनाडु के एक मंदिर में दो संप्रदायों के पूजा के अधिकार की रक्षा करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने हिंदू धर्म पर विशेष टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि किसी भी कीमत पर किसी पक्ष को पूजा करने से नहीं रोका जा सकता। इसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए श्री वरदराज पेरुमल मंदिर में वडगलाई और ठेंगलई संप्रदाय को अपने-अपने मंत्र पढ़ने की छूट दी। जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम ने कहा कि सहिष्णुता हिंदू धर्म की पहचान है और ऐसे तुच्छ मामलों पर लड़ने की जगह भगवान की आराधना का अधिकार दोनों पक्षों को दिया जाना चाहिए।

बता दें कि पूजा के अधिकार को लेकर जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम की अदालत में एक याचिका डाली गई थी जिसका संबंध दो संप्रदायों से था। ये दोनों पक्ष- वडगलाई और ठेंगलई हैं। कोर्ट तक ये मामला तब पहुँचा जब श्री वरदराज पेरुमल मंदिर की कार्यकारी ट्रस्टी द्वारा वडगलाई संप्रदाय को मंदिर में जाप करने से रोकने के लिए नोटिस जारी हुआ। ट्रस्टी के इसी नोटिस के बाद पूरा विवाद भड़का। वडगलाई समाज ने कोर्ट से कहा कि वो मंदिर में अपने पूजा के अधिकार के तहत अनुमति चाहते हैं कि उन्हें भी प्रार्थना की अनुमति मिले।

याचिकाकर्ता ने कहा कि वे ठेंगलाई संप्रदाय के अधिकारों का अनादर नहीं कर रहे थे लेकिन उन्हें इस तरह उनके गुरु की पूजा करने से रोक कर उनके अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। वहीं प्रतिवादी ने मामले में जवाब देते हुए कहा कि साल 1915 से सिर्फ ठेंगलाई समुदाय को ही उनके मंत्र पढ़ने की अनुमति है।

सुनवाई के दौरान हर पक्ष की दलील सुन कोर्ट ने कहा कि सहिष्णुता हिंदू धर्म की पहचान है। दोनों समुदायों को अधिकार है कि वो अपनी अपनी आस्था प्रदर्शित करें। न्यायाधीश बोले कि वो किसी कीमत पर किसी से उसका पूजा का अधिकार नहीं छीनेंगे। इसके बाद उन्होंने मंदिर समिति को निर्देश दिए कि वो दोनों संप्रदाय को पूजा करने दें।

जस्टिस ने कहा, “सहिष्णुता हिंदू धर्म की पहचान है। आपसी तालमेल, एक दूसरे का आदर और केवल प्रभु की आराधना करने से मंदिर में होने वाले गतिविधियों की पवित्रता बरकरार रहेगी। इसलिए दोनों समुदायों को लड़ने की बजाय श्री वरदराज पेरुमल की सेवा करने की अपेक्षा की जाती है।”

कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते समय सुनिश्चित किया कि किसी भी संप्रदाय की आस्था को ठेस न पहुँचे। इसी के साथ उन्होंने मंदिर के अंदर परंपराओं के पालन हेतु नियम भी लागू किए गए। इसके मुताबिक ठेंगलई संप्रदाय को पहले उनका पाठ करने की अनुमति दी जाएगी जिसका नाम श्रीशैला दयापथ्रम हैं और बाद में वडागलाई संप्रदाय को पाठ का जाप करन की अनुमति मिलेगी जिसे रामनुज दया पथ्रम कहा जाता है।

निर्देशानुसार, 10-12 सेकेंड का समय दोनों संप्रदायों को मिलेगा। इसके बाद सारे भक्तों के साथ मिलकर दोनों संप्रदाय नालाइरा दिव्य प्रबंधन का पाठ कर सकते हैं बिना दूसरे श्रद्धालुओं को कोई असुविधा दिए। फिर सारे अनुष्ठान पूरे होने पर अपने मंत्र का जाप ठेंगलई संप्रदाय के लोगों द्वारा किया जाएगा फिर यही प्रक्रिया वडगलाई संप्रदाय द्वारा अपनी जाएगी। इसके बाद ही अनुष्ठान प्रक्रिया पूरी होगी।

6 साल की बच्ची को नोएडा में मारी गोली, अंगदान कर 5 को जिंदगी दे गई: एम्स की सबसे कम उम्र की ऑर्गन डोनर बनी रोली प्रजापति

रोली प्रजापति (Roli Prajapati) दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की सबसे कम उम्र की ऑर्गन डोनर हैं। 6 साल की रोली को नोएडा में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी। ब्रेन डेड की स्थिति में उसे अस्पताल लाया गया था। लेकिन जाते-जाते अंगदान कर वह 5 लोगों को जीवन दे गई।

न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, छह साल की बच्ची रोली प्रजापति की 27 अप्रैल को नोएडा में गोली मारी गई थी। गोली उसके सिर में लगी थी। उसे आनन-फानन में हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन वह कोमा में चली गई। इसके बाद उसे दिल्ली के AIIMS में इलाज के लिए रेफर कर दिया गया।

एम्स के सीनियर न्यूरोसर्जन डॉक्टर दीपक गुप्ता ने समाचार एजेंसी को बताया, ”साढ़े छह साल की बच्ची रोली 27 अप्रैल को अस्पताल लाई गई थी। उसके सिर में गोली लगी थी। गोली सिर में फँसी थी। वह लगभग ब्रेन डेड हालत में अस्पताल लाई गई। इसलिए, हमने पूरी बात उसके परिवार के लोगों को बताई।”

न्यूरोसर्जन ने कहा कि बच्ची के माता-पिता को उसके ऑर्गन को डोनेट करने को लेकर तब बताया जब इस बात का पता चला कि वो तो ब्रेन डेड कंडीशन में अस्पताल पहुँची है। उन्होंने बताया कि हमने उसके ब्रेन डेथ होने का डायग्नोसिस किया। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने माता-पिता के साथ बैठकर अंगदान के बारे में बात की। हमने माता-पिता को इसके बारे में विस्तार से बताया औऱ उनकी सहमति माँगी।

सोचने के बाद जब रोली के माता-पिता इसके लिए तैयार हो गए तो रोली के ऑर्गन्स डोनेट कर पाँच लोगों की जिंदगियों को बचाया जा सका। रोली के लीवर, किडनी, कॉर्निया और दोनों हार्ट वॉल्व डोनेट किए गए। इसी के साथ रोली दिल्ली एम्स के इतिहास में अंग दान करने वाली सबसे कम उम्र की डोनर बन गई।

10-15 पेज में लिखी गई ज्ञानवापी विवादित ढाँचे की सर्वे रिपोर्ट, अदालत में आज हुई जमा : SC ने वाराणसी कोर्ट को सुनवाई करने से रोका

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे की सर्वे रिपोर्ट आज (मई 19, 2022) वाराणसी कोर्ट में जमा कर दी गई। इस दौरान हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष दोनों कोर्ट में मौजूद थे। कोर्ट कमिश्नर अजय प्रताप सिंह ने बताया कि ये रिपोर्ट 10-15 पेजों की है। इस बीच खबर आई है कि सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए निचली कोर्ट में इस केस की सनुवाई पर 20 मई तक रोक लगाई है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, ज्ञानवापी केस की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय 20 मई को 3 बजे करेगा। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी अदालत को निर्देश दिए हैं कि वो 20 मई तक इस केस पर हियरिंग न रखें।

जानकारी के मुताबिक, मुस्लिम पक्ष की याचिका को वरिष्ठ वकील हुफेजा अहमदी ने सुप्रीम कोर्ट में दिया था। उन्होंने अदालत से कहा था कि देश भर में कई मामले हैं लेकिन इस मामले को आज सुना जाना अतिआवश्यक है। वहीं हिंदू पक्ष की ओर से पेश विष्णु शंकर जैन ने अदालत को बताया कि उनकी ओर से पेश होने वाले वरिष्ठ वकील हरि शंकर जैन की तबीयत ठीक नहीं हैं इसलिए इस मामले को कल यानी 20 मई को सुना जाए। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि वह इस याचिका पर 20 मई को सुनवाई करेंगे लेकिन तब तक वाराणसी का ट्रायल कोर्ट भी इस याचिका पर कोई सुनवाई न करे।

ज्ञानवापी में मिले हिंदू प्रतीक

गौरतलब है कि ज्ञानवापी विवादित ढाँचे मामले पर सर्वे पूरा होने के बाद इससे पहले पूर्व एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा की रिपोर्ट को लेकर खुलासा हुए। सामने आई रिपोर्ट में बताया गया है कि ज्ञानवापी ढाँचे की पश्चिमी दीवार पर शेषनाग और हिंदू देवी-देवताओं की कलाकृति साफ रूप से नजर आ रही है। दीवार के उत्तर से पश्चिम की ओर शिलापट्ट पर सिंदूरी लेप की उभरी हुई कलाकृति है। इसमें देवों के रूप में चार मूर्तियों की आकृति दिखाई दे रही है।

दो पेज की रिपोर्ट में पूर्व एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा ने न्यायालय को आगे बताया कि 6 मई को हुई जाँच में चौथी आकृति मूर्ति के रूप में प्रतीत हो रही है और उस पर सिंदूर का मोटा लेप है। इसके आगे दीपक जलाने के लिए उपयोग में लाए गए त्रिकोणीय ताखा (गंउखा) में फूल रखे हुए थे। इसके अलावा पूर्व दिशा में बैरिकेडिंग के अंदर व ढाँचे की पश्चिम दीवार के बीच मलबे का ढेर पड़ा हुआ है। यह शिलापट्ट भी उन्हीं का हिस्सा प्रतीत हो रहा है। इन पर उभरी हुई कलाकृतियाँ ढाँचे की पश्चिम दीवार पर उभरी कलाकृतियों से मेल खाती दिख रही हैं।

भगवान नरसिंह की जो मूर्ति कहीं नहीं, वह कुतुब मीनार परिसर में मिली: दुर्लभ मूर्ति की हुई पहचान, प्रभु की गोद में बैठे मिले भक्त प्रह्लाद

पिछले दो महीनों से दिल्ली के महरौली में स्थित कुतुब मीनार की देश भर में चर्चा हो रही है। यहाँ हिंदू धर्म से संबंधित देवी-देवताओं की मूर्तियाँ और जैन धर्म से संबंधित विभिन्न प्रतीकों के मिलने की खबरें आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुतुब मीनार परिसर (Qutub Minar complex) में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद के रूप में जाने जाने वाले विवादित ढाँचे के एक खंभे में यह मूर्ति लगी हुई है। इसे वर्षों से पहचानने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन अब पुरातत्वविद धर्मवीर शर्मा ने इसकी पहचान नरसिंह भगवान और भक्त प्रह्लाद की मूर्ति के रूप में की है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के क्षेत्रीय निदेशक रहे धर्मवीर शर्मा (Dharamveer Sharma) का दावा है कि यह मूर्ति आठवीं-नौवीं सदी में प्रतिहार राजाओं के काल की है। सालों से इसकी पहचान करने की कोशिश की जा रही थी और काफी प्रयास के बाद अब पुरातत्वविद ने इस मूर्ति की पहचान कर ली है। दावा किया जा रहा है कि यह मूर्ति 1200 साल पुरानी है और यह प्रतिहार राजाओं या राजा अनंगपाल के समय की है। प्रतिहार राजाओं में मिहिर भोज सबसे प्रतापी राजा हुए हैं। इस मूर्ति की तस्वीरें देश भर के विशेषज्ञ पुरातत्वविदों को विशेष अध्ययन के लिए भेजी गई हैं। उनका कहना है कि यह नरसिंह भगवान की दुर्लभ मूर्ति है, किसी और जगह इस तरह की मूर्ति नहीं मिलती है।

प्रसिद्ध पुरातत्वविद शर्मा कहते हैं, “अभी तक हम केवल भगवान नरसिंह की उस मूर्ति को ही देखते आ रहे हैं, जिसमें हिरण्यकश्यप को अपने घुटने पर रखकर भगवान नरसिंह द्वारा असुर को नाखूनों से चीरते हुए दिखाया गया है। लेकिन इस मूर्ति में दिखाया गया है कि जब क्रोधित नरसिंह भगवान ने हिरण्यकश्यप का वध किया तो उनकी क्रोधाग्नि से पूरी पृथ्वी जलने लगी थी। देवताओं ने तब भक्त प्रह्लाद से प्रार्थना की, क्योंकि वह नरसिंह भगवान के प्रिय थे और वही भगवान के क्रोध का शांत कर सकते थे। तब प्रह्लाद भगवान नरसिंह से प्रार्थना करने लगे, इससे प्रसन्न होकर भगवान ने उनको अपनी गोद में बिठाया और वह शांत हो गए।” धर्मवीर शर्मा दिल्ली में एएसआई के क्षेत्रीय प्रभारी भी रह चुके हैं।

वहीं, मूर्ति के बारे में बात करते हुए राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के अध्यक्ष तरुण विजय ने कहा कि कुतुब मीनार में पहचानी गई मूर्ति अद्भुत है। यह मूर्ति धार्मिक और शोध करने वाले लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। इस मूर्ति की तस्वीरें देश के विशेषज्ञ पुरातत्वविदों को विशेष अध्ययन के लिए भेजी गई हैं।

उल्लेखनीय है कि नरसिंह भगवान की पूजा पूरे भारत में बड़ी ही श्रद्धा के साथ की जाती है। पुरी में भगवान जगन्नाथ की सभी विशेष पूजा पास के नरसिंह मंदिर में की जाती हैं। भगवान नरसिंह बुराई का अंत करने और अपने भक्तों से प्रेम करने के लिए जाने जाते हैं।

जिन राहुल भट को आतंकियों ने मारा, उनकी पत्नी को मिली सरकारी नौकरी और ₹5 लाख की सहायता: बेटी का खर्च उठाएँगे उप-राज्यपाल

जम्मू-कश्मीर के बड़गाम जिले में आतंकियों द्वारा हत्या कर दिए गए कश्मीरी हिन्दू राहुल भट्ट की पत्नी मिनाक्षी रैना को सरकारी नौकरी मिल गई है। उन्हें जम्मू के नोवाबाद के गर्वनमेंट हायर सेकेंड्री स्कूल में चतुर्थ श्रेणी स्टाफ के तौर पर नियुक्त किया गया है। इसी के साथ सरकार ने बुधवार (18 मई 2022) को राहुल भट के परिवार को सहायता राशि के तौर पर 5 लाख रुपए का चेक भी सौंपा है। इससे पहले उप राज्यपाल ने इस मदद की घोषणा करते हुए कहा था कि वह राहुल भट की बच्ची की पढ़ाई का खर्च भी वहन करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जम्मू के डिविशनल कमिश्नर रमेश कुमार और जम्मू पुलिस के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस मुकेश सिंह बुधवार को राहुल भट के परिवार में गए। वहाँ पर उन्होंने 5 लाख रुपए की सहायता राशि का चेक मृतक राहुल भट के पिता को सौंपा। राहुल भट की पत्नी मिनाक्षी को भी नियुक्ति पत्र मिल चुका है। उन्हें रुपए (14,800-47,100) के पे स्केल पर नियुक्ति दी गई है।

गौरतलब है कि 12 मई 2022 को आतंकियों ने बड़गाम जिले में राहुल भट की गोली मार कर हत्या कर दी थी। वो तहसीलदार कार्यालय में क्लर्क थे। उन्हें विस्थापितों के लिए विशेष पैकेज के तहत नौकरी मिली थी। उनकी हत्या के बाद कश्मीर और देश के तमाम हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। अनंतनाग जिले में ‘थाली बजाओ’ नाम से प्रदर्शन हुआ। हुमहमा चौक पर सड़क जाम कर दी गई। राहुल भट के भाई ने सरकार ने आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

अशोक पंडित से शेयर की कश्मीरी हिन्दू लड़की की वीडियो

फिल्ममेकर अशोक पंडित ने 19 मई को एक लड़की की वीडियो शेयर की है। उन्होंने लड़की को कश्मीर की बताया है। वीडियो में वो लड़की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कश्मीर से सभी पंडित कर्मचारियों को जम्मू में तब तक शिफ्ट करने का निवेदन करती सुनाई दे रही है जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते। लड़की ने ये भी कहा कि पहले भी पंडितों को कश्मीर में मारा गया है जो फिर से दोहराया जा रहा है।

पेड़ के नीचे पत्थर और लाल झंडे लगाओ, बन गया मंदिर: अखिलेश यादव ने हिंदू धर्म का उड़ाया मजाक, कहा- ज्ञानवापी मामला BJP बढ़ा रही है

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ज्ञानवापी में शिवलिंग मिलने के दावे के बीच हिंदू धर्म पर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि हिंदू धर्म में तो ये है कि कहीं पर भी पीपल के पेड़ के नीचे पत्थर रख दो, एक झंडा लगा दो बस मंदिर बन गया। उन्होंने सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में पहुँचने से पहले उसकी जानकारी बाहर आने पर अपनी आपत्ति जताई। साथ ही अयोध्या मामले पर कहा कि उस समय भी मूर्ति को अंदर रखा गया था।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने कहा, “हमारे धर्म में तो कहीं भी पत्थर और लाल झंडा रख दो तो वहीं पर मंदिर बन जाता है। लोग वहाँ पूजा पाठ करने लगते हैं… बीजेपी इस पूरे मुद्दे को जानबूझकर बढ़ा रही है ताकि जनता का ध्यान महंगाई और बेरोजगारी से हट जाए। यह मामला कोर्ट में है तो अदालत इसका फैसला देगी।”

आगे अखिलेश ने राम मंदिर मुद्दे पर भी बात रखी और ऐसे दिखाया कि हिंदुओं ने जोर जबरदस्ती करके उस स्थान को लिया है। उन्होंने भाजपा से सावधाना रहने की सलाह दी और आगे कहा, “अयोध्या में भी मूर्ति को रखवाया गया था। बीजेपी जानबूझकर माहौल खराब करना चाहती हैं। असल मुद्दों से ध्यान हटा कर वह धर्म जाति और धर्म के मुद्दों में लोगों को उलझाना चाहती है।”

आगे अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सदन कार्यवाही को लेकर भी योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा सदन में जनता के सवाल नहीं सुनना चाहती। पता चला है कि सदन केवल 9 दिन चलेगा। जिस राज्य का 6 लाख करोड़ का बजट हो। उस प्रदेश की जनता के सवालों को 9 दिनमें कैसे पूरा किया जा सकता है। अखिलेश ने कहा कि वह सरकार से सदन को चलाने दिन बढ़ाने की बात करेंगे।

अखिलेश ने सरकार पर वसूली का आरोप लगाया, दावा किया कि सरकार गरीबों को पहचानने से इंकार कर रही है। उनके मुताबिक जिन गरीबों को राशन दिया गया उनसे वसूली चल रही है। स्टील महंगा हो गया, कोयला महंगा हो गया। जब से सरकार बनी है तभी से बिजली कटौती हो रही है और जनता के पास नोटिस आते जा रहे हैं।

सपा प्रमुख ने केंद्र पर भी निशाना साधते हुए कहा कि देश में उद्योगपतियों को बड़ी-बड़ी चीजें बेची जा रही हैं। कंपनियाँ बिक रही हैं, बैंक मर्ज हो रहे हैं, एलआईसी का निजीकरण हो रहा है, एयरपोर्ट बिक रहे हैं, राज्य का गेहूँ विदेशों में बेचा जा रहा है… अखिलेश के अनुसार, ज्ञानवापी का मामला इन्हीं सब मामलों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए उठाया गया है।

वह वर्तमान सरकार पर ‘फूट डालो राज करो’ वाली नीति पर चलने का इल्जाम मढ़ते हैं। वह कहते हैं कि अंग्रेजों ने जिस तरह से डिवाइड एंड रूल किया उसी तरीके से भाजपा भी यही नियम अपना रही है। ये सिद्धांत कई साल पुराना जिसे अंग्रेज इस्तेमाल करते थे। जनता के साथ इतना अन्याय और उत्पीड़न कभी नहीं हुआ, जितना इस सरकार में हो रहा है। ये सरकार केवल डरा कर धर्म और जाति के नाम पर डरा रही है।