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शिल्पा शेट्टी के पति की मुश्किलें बढ़ीं, अब राज कुंद्रा के खिलाफ ED ने दर्ज किया मनी लॉन्ड्रिंग का केस: पिछले साल सामने आया था पोर्न रैकेट

बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति और बिजनेसमैन राज कुंद्रा (Raj Kundra) की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, राज कुंद्रा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पोर्न रैकेट मामले में केस दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि कुंद्रा के खिलाफ फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट यानी FEMA के तहत मामला दर्ज किया गया है।

ये केस पिछले साल सामने आया था। इस मामले में मुंबई पुलिस ने राज कुंद्रा को 20 जुलाई 2021 को गिरफ्तार किया था। उन पर पोर्न फिल्में बनाने का आरोप लगा था। भारत में पर्सनल स्पेस पर पोर्नोग्राफी देखना प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन राज कुंद्रा को जिस पोर्नोग्राफी कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था, उसमें पोर्न फिल्म बनाना, उसे सार्वजनिक तौर पर दिखाना, वितरित करना और प्रकाशित करना अपराध माना गया है। राज कुंद्रा को गिरफ्तार करने से पहले मुंबई पुलिस ने फरवरी में इस मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि ये सभी पॉर्न फिल्में बनाते थे और लोगों को फिल्मों और वेब सीरीज में काम दिलाने का वादा करके ठगी करते थे।

पोर्न ही फ्यूचर

मुंबई पुलिस ने पिछले साल खुलासा किया था, कुंद्रा इस रैकेट को बहुत सुनियोजित ढंग से चला रहे थे। इसमें मुनाफा कमाने के लिए उनके पास एक प्रॉपर स्ट्रैटेजी थी। एक्सेस किए गए सबूतों से यह पता चला था कि राज कुंद्रा सेक्सुअल एक्ट्स की लाइव स्ट्रीमिंग को सबसे अच्छा विकल्प मान रहे थे और इसी में भविष्य देख रहे थे। उनका प्लान था कि वो इस बिजनेस को बॉलीवुड जितना बड़ा बनाएँगे।

‘हॉटशॉट्स’ के जरिए स्ट्रीमिंग

मुंबई क्राइम ब्रांच ने ‘Hotshots’ एप के जरिए अश्लील वीडियो बनाने और उसको पब्लिश करने के मामले में राज कुंद्रा को ‘प्रमुख साजिशकर्ता’ के रूप में नामित किया था। पुलिस के मुताबिक कुंद्रा ‘हॉटशॉट्स’ ऐप के जरिए पोर्न वीडियोज की स्ट्रीमिंग में शामिल थे। उन्होंने वर्ष 2019 में अपने ऐप ‘हॉटशॉट्स’ को 25,000 डॉलर (18,65,410 रुपए) में बेच दिया था। हालाँकि यह सिर्फ जाँच को भटकाने के लिए था, क्योंकि ऐप को बेचने के बाद भी वो कथित तौर पर मुंबई से इसे कंट्रोल कर रहे थे। पोर्न वीडियोज के लिए कुंद्रा ही कंटेट उपलब्ध करवाते थे। उन्होंने अपने वियान इंडस्ट्रीज के ऑफिस से यूके की फर्म को कंट्रोल किया था।

हॉटशॉट्स ऐप विदेश में रजिस्टर्ड

दरअसल, राज कुंद्रा ने पोर्न वीडियो भारत में ही बनाए थे, लेकिन जिस एप्लीकेशन पर उनका प्रसारण किया जाता था, वह हॉटशॉट्स ऐप विदेश में रजिस्टर्ड केनरिन नाम की कंपनी द्वारा बनाया गया था। यानी राज कुंद्रा की फर्म (Viaan) ने यूके बेस्ड फर्म Kenrin से एग्रीमेंट किया हुआ था। भारत के साइबर पोर्नोग्राफी कानूनों से बचने के लिए यह कंपनी विदेश में रजिस्टर्ड कराई गई थी और भारत में शूट की गई पोर्न फिल्में ‘वीट्रांसफर’ नाम के डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए केनरिन को भेजी जाती थीं।

‘वीट्रांसफर’ के माध्यम से बड़ी से बड़ी साइज की फाइल्स (वीडियो, इमेज आदि) आसानी से ट्रांसफर की जा सकती हैं। हालाँकि हॉटशॉट्स ऐप न तो गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध था और न ही एप्पल प्ले स्टोर पर लेकिन इसे APK फ़ाइल की मदद से फोन में इंस्टाल किया जा सकता है। हॉटशॉट्स पर भारत से करीब 10 लाख यूजर मौजूद हैं। हॉटशॉट्स के अलावा पोर्न फिल्मों को कई अन्य एप्लीकेशन पर पेड सब्स्क्रिप्शन के साथ भी बेचकर भारी मुनाफा कमाया गया।

पूनम पांडे और शर्लिन चोपड़ा ने लगाया था आरोप

अभिनेत्री पूनम पांडे और शर्लिन चोपड़ा ने राज कुंद्रा और उनके सहयोगियों पर उनकी तस्वीरों के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया था। इन दोनों ने एक बयान में स्वीकार किया था कि उन्हें राज कुंद्रा ही ‘अडल्ट इंडस्ट्री’ में लेकर आए थे। शर्लिन चोपड़ा को एक प्रोजेक्ट के लिए 30 लाख रुपए मिलते थे और राज ने उन्हें ऐसे 15-20 प्रोजेक्ट्स दिए थे। वहीं पूनम पांडे ने राज कुंद्रा की कंपनी से करार किया था, जिसमें उन्हें कंटेंट के बदले रुपए मिलते थे। कंपनी ‘Armsprime Media’ भारतीय मॉडलों के लिए एप्स विकसित करती थी।

शर्लिन ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने आर्म्सप्राइम नामक कंपनी के साथ कॉन्ट्रेक्ट पर हस्ताक्षर किए थे फिर वीडियोज बनाने लगी थीं। उनका कहना था कि शुरुआत में ये ग्लैमरस वीडियो थी, लेकिन उसके बाद बोल्ड फिल्में बनने लगीं और बाद में उन्हें सेमी न्यूड और न्यूड वीडियोज बनाने पड़े। बकौल शर्लिन चोपड़ा, उन्हें हमेशा कहा जाता था कि इसमें कुछ गलत नहीं है, क्योंकि सभी ऐसा ही करते हैं। शर्लिन ने बताया था कि राज कुंद्रा 27 मार्च 2019 को उनके घर आया था और उनसे जबरदस्ती करने लगा, जबकि वो इसके लिए मना करती रहीं।

पोर्न फिल्मों का प्रकाशन

भारत के IT ऐक्ट के तहत कोई व्यक्ति अथवा डिजिटल प्लेटफॉर्म किसी भी तरह की पोर्न सामग्री के प्रकाशन अथवा प्रसारण का कारण बनता है तो उसे भी पोर्नोग्राफी कानून के तहत दोषी माना जाता है। इस कानून के तहत उस डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालक भी दंडात्मक कार्रवाई के अधीन माने जाएँगे, जहाँ से पोर्न फिल्मों या वीडियो का प्रकाशन या प्रसारण हुआ है।

दो महीने जेल में बिताने के बाद अपने घर लौटे थे

बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद दो महीने जेल में बिताने के बाद राज कुंद्रा 21 सितंबर 2021 को अपने घर लौटे थे। घर पहुँचने पर कुंद्रा काफी इमोशनल दिखे। उनकी आँखों में आँसू थे। इस बीच कुछ मीडिया रिपोर्टों में मुंबई पुलिस के हवाले से बताया गया था कि कुंद्रा के पास 119 पोर्न फिल्मों का कलेक्शन था। इसका सौदा वे 9 करोड़ रुपए में करना चाहते थे। उनकी योजना दो साल में अपने ऐप के यूजर्स 3 गुना और मुनाफा 8 गुना करने की थी। जाँच के दौरान पुलिस को ये वीडियो कुंद्रा के मोबाइल, लैपटॉप और हार्ड डिस्क से मिले थे। उनके खिलाफ मुंबई पुलिस 1500 पन्नों की चार्जशीट दायर कर चुकी है। इसमें शिल्पा सहित 43 गवाहों के बयान दर्ज हैं।

जिस रौनक खातून से चल रहा था इश्क, उसी के आँगन में दफन मिला स्वर्ण कारोबारी शिवरथ; शाहजहाँ ने पीट-पीटकर मार डाला: बिहार का मामला

बिहार के समस्तीपुर से लापता स्वर्ण कारोबारी शिवरथ कुमार का शव मिला है। उसका शव उसी रौनक खातून के आँगन में दफन था, जिससे उसका कथित तौर पर इश्क चल रहा था। पुलिस ने इस मामले में रौनक और उसके शौहर मोहम्मद शाहजहाँ को गिरफ्तार किया है। शिवरथ का शव मंगलवार (17 मई 2022) को बरामद किया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पूछताछ में आरोपितों ने पीट-पीटकर उसकी हत्या की बात कबूली है।

रिपोर्ट के मुताबिक 23 वर्षीय शिवरथ की 14 मई 2022 को अचानक ही लापता हो गया था। वह समस्तीपुर के रोसड़ा के मोहल्ला लक्ष्मीपुरी का रहने वाला था। शिवरथ के लापता होने के बाद उसके भाई ने रोसड़ा थाने में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में हसनपुर थानाक्षेत्र के मोहिउद्दीनपुर गाँव की 3 बच्चों की माँ 35 वर्षीया रौनक खातून पर शक जताया गया था। उसका शिवरथ के साथ प्रेम संबंध बताया गया।

पुलिस ने रौनक खातून को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो सारा भेद सामने आया। पुलिस के मुताबिक घटना के दिन शिवरथ उससे मिलने आया था। इसी दौरान अपनी बीवी पर पहले से नजर रख रहा उसका शौहर शाहजहाँ भी आ गया। दोनों को साथ देख कर वो आग बबूला हो गया। उसने शिवरथ की बुरी तरह से पिटाई की। पिटाई में रौनक ने भी अपने शौहर का साथ दिया। पिटाई से शिवरथ की मौत होने के बाद दोनों ने उसे घर के आँगन में दफना दिया।

बताया जा रहा है कि शिवरथ की पिटाई इतनी निर्ममता से की गई थी कि उसकी आँखें और जीभ बाहर निकल आई थी। शव को दफन करने के बाद सबूत छिपाने के लिए उस जगह पर जलावन डाल दिया गया था। पुलिस ने मृतक शिवरथ का शव बरामद कर लिया है। रोसड़ा के थाना प्रभारी रामाशीष कामती ने भी दोनों के बीच प्रेम संबंध की बात कही है। दोंनो की कॉल डिटेल से भी इनके बीच आए दिन बातचीत होने की पुष्टि हुई है। मृतक के मोबाइल की अंतिम लोकेशन भी रौनक के घर पर मिली थी।

एक अन्य रिपोर्ट मुताबिक पकड़े जाने पर रौनक खातून ने बताया कि दोनों के बीच 6 साल से रिश्ता था। दोनों की पहली मुलाकात हसनपुर रेलवे स्टेशन पर हुई थी। बाद में दोनों की बातचीत होने लगी तो आगे चलकर मुलाक़ात में बदल गई। रौनक से शिवरथ शादी भी करना चाहता था। रौनक ने शिवरथ पर अपने साथ जबरन संबंध बनाने की जिद और अपनी बड़ी बेटी पर बुरी नजर रखने का भी आरोप लगाया है।

Alt News वाले मोहम्मद जुबैर से दिल्ली पुलिस ने की पूछताछ, नाबालिग लड़की के ऑनलाइन उत्पीड़न से जुड़ा है मामला

प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्टन्यूज़ (AltNews) के सह-संस्थापक और कथित फैक्टचेकर मोहम्मद जुबैर से हाल ही में दिल्ली पुलिस ने पूछताछ की है। मामला एक नाबालिग बच्ची के ऑनलाइन उत्पीड़न से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कथित फैक्टचेकर जुबेर को बीते 13 मई को तलब किया गया था। उसके खिलाफ उत्पीड़न का मामला दर्ज है। इसी संबंध में उससे पूछताछ की गई। दिल्ली पुलिस ने इस संबंध में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) से मिली शिकायत के आधार पर उससे पूछताछ की है।

7 अगस्त 2020 को मोहम्मद जुबैर का ट्विटर यूजर जगदीश सिंह के साथ ऑनलाइन विवाद हुआ था। इस दौरान जुबैर ने जगदीश सिंह की प्रोफाइल तस्वीर में दिखाई देने वाली एक नाबालिग लड़की को निशाना बनाया था। बताया गया था कि यह बच्ची जगदीश सिंह की पोती थी। जुबैर द्वारा इस लड़की की पहचान उजागर किए जाने के बाद उसे कट्टरपंथियों ने रेप की धमकी दी थी। इस ट्वीट को लेकर जुबैर की सोशल मीडिया यूजर्स ने तीखी आलोचना की थी।

एक ट्विटर यूजर ने जब इस ओर राष्ट्रीय महिला आयोग का ध्यान दिलाया तो AltNews के सह-संस्थापक ने बेशर्मी से उसकी चिंताओं को खारिज कर दिया। एनसीपीसीआर ने मामले का संज्ञान लिया और मोहम्मद जुबैर के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। इसके बाद मोहम्मद जुबैर के खिलाफ बच्ची के ऑनलाइन उत्पीड़न के लिए दो प्राथमिकी दर्ज की गई। दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई पहली प्राथमिकी में POCSO अधिनियम नहीं जोड़ा गया था। लेकिन छत्तीसगढ़ में जुबैर के खिलाफ दर्ज दूसरी प्राथमिकी में आईपीसी और आईटी अधिनियम की संबंधित धाराओं के साथ, पॉक्सो अधिनियम भी लगाया गया था।

प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्टन्यूज़ को बड़े पैमाने पर पूरे वामपंथी संगठन द्वारा फैक्ट चेकर कहा जाता है। हालाँकि, तथ्यों से ऑल्टन्यूज़ का कभी भी कोई वास्ता नहीं रहा है और उसका एकमात्र मकसद दक्षिणपंथी सरकार के विरोध के साथ हिन्दू-घृणा को फैलाते हुए इस्लामिक विचारधारा को बढ़ावा देना ही है।

चेक के नाम पर यह ऑल्टन्यूज़ हिन्दुओं के बारे में गलत, फर्जी, बेबुनियाद और झूठे आरोप विकसित करते हुए मुस्लिम अपराधों को क्लीन चिट देने का कारनामा कई बार कर चुका है। यहाँ तक ​​कि वे उन आतंकियों को बचाते हुए पकड़े गए, जिन्होंने श्रीलंका में बड़े आतंकी हमले को अंजाम दिया था। वास्तव में, ऐसे किसी मजहबी अपराध को ढूँढना मुश्किल होगा, जिसमें ऑल्टन्यूज़ ने अपना प्रोपेगेंडा नहीं इस्तेमाल किया है।

ऑल्टन्यूज़ को अरुंधति रॉय जैसे संरक्षकों का साथ प्राप्त है, जो नियमित रूप से एक ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं, जिसे कहा जा सकता है कि जो नक्सली आतंकियों की भाषा से मेल खाती है, और किसी भी तरह से भारत के टुकड़े करना चाहती है।

‘The Wire’ की आरफा खानुम शेरवानी ने भगवान कृष्ण को बताया दलित विरोधी, कार्टून के जरिए उड़ाया मजाक: लोग बोले- गिरफ्तार करे यूपी पुलिस

वामपंथी प्रोपगेंडा पोर्टल The Wire की कथित पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी (Arfa Khanum Sherwani) ने एक बार फिर अपनी नीच मानसिकता को दर्शाते हुए हिंदुओं के आराध्य भगवान कृष्ण को दलित विरोधी दिखाने का प्रयास किया है। आरफा ने ट्विटर पर भगवान की एक विवादित कार्टून शेयर किया है, जिसमें वह दलित लड़के को उल्टा पेड़ पर लटकाए हुए हैं।

आरफा ने जिस विवादित कार्टून को ट्विटर पर शेयर किया है उसमें भगवान कृष्ण एक तलवार लेकर खड़े हैं और उनके सामने किताब पढ़ते एक लड़के के पैर को बाँधकर पेड़ से उलटा लटकाया हुआ है। कार्टून पर लिखा हुआ है, “तुम वही दलित हो, जो Ph.D की पढ़ाई करके ABVP के बच्चों का जीवन खतरे में डाल रहा है?”

यह कार्टून हैदराबाद विश्वविद्यालय को संदर्भित करके बनाया गया है। कार्टून के ऊपर लिखा हुआ है, ‘हैदराबाद विश्वविद्यालय VIP शिकायत पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।’ आरफा को इस विवादित ट्वीट देखकर सोशल मीडिया पर लोगों में गुस्सा फैल गया है। सोशल मीडिया यूजर्स ने यूपी पुलिस से आरफा को गिरफ्तार करने की माँग की है।

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

आरफा का मन हिंदुओं के प्रति घृणा से भरा हुआ है और समय-समय पर वह इसका प्रदर्शन भी करती रहती हैं। तनिष्क ज्वैलरी वाले विवाद में आरफा इसका प्रदर्शन कर चुकी हैं। तब उन्होंने कहा था, “लड़की को माँ की कोख में मार देने वाले, दहेज के नाम पर ज़िंदा जला देने वाले, लड़की की ‘सही’ जगह रसोई व बिस्तर के परे न देख पाने वाले कैसे बर्दाश्त करेंगे, एक मुस्लिम घर में हिंदू बहू को प्यार-सम्मान मिले और उसकी पहचान भी सुरक्षित रह पाए। ये लड़कियों के, उनकी आज़ादी के दुश्मन हैं।”

इतना ही नहीं, मुंबई ड्रग केस में पकड़ाए शाहरुख खान के बेटे को लेकर हिंदू-मुस्लिम का रोना रोया था। उन्होंने कहा था, “आर्यन खान केस का ड्रग लेने से कोई लेना-देना नहीं है। ये विशु्द्ध रूप से शाहरुख खान को निशाना बनाने की साजिश है। आर्यन के जमानत पाने के मूल अधिकार को स्वतंत्रत देश में खारिज कर दिया गया…शाहरुख खान हमारे समय के सबसे बड़े मुस्लिम सुपरस्टार हैं।”

कर्नल अजय कोठियाल ने AAP से दिया इस्तीफा, पार्टी ने बनाया था CM चेहरा: कहा – पूर्व सैनिकों, बुजुर्गों, युवाओं के हित में छोड़ रहा पार्टी

उत्तराखंड (Uttarakhand) में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और चुनावों के दौरान पार्टी की मुख्यमंत्री का चेहरा रहे कर्नल अजय कोठियाल (Colonel Ajay kothiyal) ने बुधवार (18 मई 2022) को चौंकाने वाला कदम उठाते हुए पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने ट्विटर पर सार्वजनिक रूप से अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि वह पूर्व सैनिकों, बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं और बुद्धिजीवियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा कर रहे हैं।

कर्नल कोठियाल ने आप से अपना इस्तीफा ट्विटर पर पोस्ट करते हुए लिखा, “पूर्व सैनिकों, पूर्व अर्धसैनिकों, बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं और बुद्धिजीवियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मैं आम आदमी पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूँ।” उल्लेखनीय है कि कर्नल कोठियाल पिछले साल अप्रैल में ही इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे।

देवभूमि उत्तराखंड वो राज्य हैं, जहाँ पूर्व सैनिकों की एक बड़ी आबादी निवास करती है। इसी को देखते हुए अपनी सियासी जमीन मजबूत करने के इरादे से अरविंद केजरीवाल ने कोठियाल को मुख्यमंत्री चेहरा बनाया था। पार्टी ने सत्ता में आने पर 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने के वादे के अलावा कोठियाल की सैन्य सेवा की साख पर भरोसा किया था। दरअसल, सेना में रहते हुए कोठियाल का एक शानदार करियर था, जिसमें उनके नाम कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र, विशिष्ट सेवा पदक और पराक्रम पदक शामिल थे।

AAP का चुनावी दाँव हो गया था फेल

हालाँकि, जिस उम्मीद से आम आदमी पार्टी (AAP) ने ये दाँव खेला था, वो फेल हुआ और AAP चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत पाई। पार्टी की करारी हार के बाद शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला। सागर भंडारी सहित पार्टी के विद्रोही नेताओं के एक दल ने राज्य में AAP की हार के लिए कोठियाल को दोषी ठहराया। राज्य में कर्नल कोठियाल के नाम पर चुनाव लड़े गए। हर बैनर में उनकी फोटो थी। इसलिए उन्हें भी हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। लेकिन अब तक उन्होंने न तो मीडिया के सामने और न ही किसी पार्टी कार्यकर्ता के साथ ऐसा किया है।

बहरहाल अजय कोठियाल ने पार्टी के अंदर मुखर होते विरोध के स्वर और चुनावी प्रदर्शन का सामना करने के बाद कर्नल अजय कोठियाल ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा देते हुए AAP से अलग होने का फैसला किया है।

दलित दूल्हे को घोड़ी पर बैठ डीजे के साथ जाते देख भड़के मुस्लिम: मस्जिद के सामने बारातियों पर हमला, कई घायल, 5 साल की बच्ची की हालत गंभीर

मध्य प्रदेश के राजगढ़ (Rajgarh, Madhya Pradesh) जिले में दलित दूल्हे को घोड़ी पर बैठने और मस्जिद के सामने डीजे बजाने के लेकर उपद्रवियों ने बरातियों पर हमला बोल दिया। इस हमले में कई लोग घायल हो गए हैं। वहीं, एक पाँच साल की बच्ची को गंभीर हालत में उज्जैन रेफर किया या है। पुलिस ने फरहान, जुनैद, सोहैल, साबिर, अनस कसाई सहित सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

घटना मंगलवार (17 मई 2022) की देर रात की है। जिले के जीरापुर में एक दलित के घर बारात आई थी। इस बारात में डीजे बज रहा था और दूल्हा घोड़ी पर बैठकर आ रहा है। बारात जैसे ही माता जी मोहल्ले में मस्जिद के सामने से निकली, कुछ मुस्लिम युवकों ने बारातियों पर पथराव कर दिया। इस दौरान बैंड और ढोल बजाने पर के साथ-साथ बारातियों से जमकर मारपीट की गई।

पीड़ित के पक्ष के अंकित मालवीय ने बताया कि उसकी चचेरी बहन अंजू की बारात सुसनेर के सुरेश चौहान के यहाँ से आई थी। वे सब बारात का स्वागत करने के लिए गेट पर खड़े थे। बारात जैसे ही मस्जिद के पास पहुँची, मुस्लिमों ने बैंड और ढोल बंद करवा दिए और कहा कि इस गाँव में मस्जिद के सामने बैंड बाजे बजाने की मनाही है।

इसके बाद बारात आगे बढ़ी और शीतला माता मंदिर के पास पहुँची और फिर बैंड और ढोल बजने लगे और बाराती में शामिल महिला-पुरुष नाचने लगे। तभी मुस्लिम समुदाय के 20-25 लोगों ने हंगामा करते हुए ढोल वाले की जमकर पिटाई कर दी। इस दौरान उन लोगों ने बरातियों पर पथराव करने लगे।

इस हमले में की बाराती घायल हो गए। वहीं, बारात में शामिल होने आए लोग बिना खाए-पिए ही वापस लौट लगे। अंकित का कहना है कि शादी माता-पिता समेत सिर्फ 10-15 लोगों की मौजूदगी में संपन्न हुई। हमले की पूरी घटना सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गई है।

वहीं फुटेज के आधार पर पुलिस ने समर लाला, फरहान खान, जुनैद खान, सोहैल खान, साबिर खान, अनस कसाई, डग्गा खान एवं अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान कर रही है।

आज़म खान की 250 बीघा जमीन की गई जब्त, 4 किलोमीटर की सिर्फ बाउंड्री! ट्रैक्टर से पिलर और कँटीले तार लेकर पहुँची टीम

समाजवादी पार्टी (Samajwadi party) के नेता आजम खान (Azam Khan) सीतापुर जेल में बंद हैं और सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई हो चुकी है। इस बीच बुधवार (18 मई, 2022) को राजस्व विभाग की टीम ने उनकी जौहर यूनिवर्सिटी पहुँची, जहाँ हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार 250 बीघे की ‘एनिमी प्रॉपर्टी’ को जब्त करने की कार्रवाई की।

रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्व की टीम ने जौहर विश्वविद्यालय की शत्रु संपत्ति की 4000 मीटर (यानी 4 किलोमीटर) की बाउंड्री की दीवार को नापा है। विभाग अपने साथ ट्रैक्टर में पिलर और कँटीले तारों को साथ लेकर आई थी। इसी के साथ विभाग ने ‘शत्रु संपत्ति’ के अंतर्गत आने वाली जमीन पर पिलर और गड्ढे खोदने का काम शुरू कर दिया है। इससे कँटीले तारों से बाउंड्रीवाल बनाई जाएगी और उसे अपने नियंत्रण में लिया जाएगा। इस टीम के सर्वेयर प्रशांत सिंह सैनी अभिरक्षक कार्यालय लखनऊ से आए थे।

बताया जा रहा है कि अब राजस्व विभाग की ये कार्रवाई कई दिनों तक चलने वाली है। इसको लेकर एसडीएम मनीष मीणा का कहना है कि अदालत के आदेश के बाद ये कार्रवाई की जा रही है।

गौरतलब है कि आजम खान एमपी-एमएलए कोर्ट ने मजिस्ट्रेट ट्रायल मुकदमें में आजम खान के खिलाफ आरोप तय किए जाएँगे। इसको लेकर 24 मई को सपा नेता रामपुर कोर्ट में तय होंगे। इसमें डूँगरपुर मामले में दो मामलों चार्ज तय किए जाएँगे। इस मामले को लेकर जिला शासकीय एडवोकेट रामपुर अरुण सक्सेना के मुताबिक, सपा के शासनकाल में डूँगरपुर में आसरा कॉलोनी बनाई गई थी।

उस दौरान वहाँ कुछ लोग पहले से रह रहे थे, जिनके घरों पर बुलडोजर चलवा दिया गया था। इतना ही वहाँ पर लोगों के साथ लूट, मारपीट और छेड़छाड़ भी की गई थी। इसी मामले को लेकर पिछले साल 2021 गंज थाने में करीब 12 अलग-अलग केस दर्ज किए गए थे।

शिवलिंग पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले DU प्रोफेसर पर दर्ज हुई FIR: गलती मानने से किया इनकार, माँगी AK-56 राइफल भी

सुप्रीम कोर्ट के वकील विनीत जिंदल ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ रतन लाल के खिलाफ धार्मिक संवेदनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में दिल्ली पुलिस में मामला दर्ज कराया है। बता दें कि हिन्दू कॉलेज में इतिहास के प्रोफ़ेसर रतन लाल ने ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर सर्वेक्षण के दौरान पाए गए शिवलिंग को लेकर बहुत ही अपमानजनक पोस्ट किया था। जिस पर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने आपत्ति जताई थी। वहीं प्रोफेसर अपनी उल-जलूल दलीलों के जरिए सफाई पेश करते नजर आए।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक रतन लाल के खिलाफ कल रात शिकायत दर्ज की गई थी। साइबर पुलिस की नार्थ डिस्ट्रिक्ट थाने ने आईपीसी की धारा 153ए/295ए के तहत मामला दर्ज किया है। नीचे आप प्रोफेसर रतन लाल द्वारा की गई आपत्तिजनक पोस्ट भी देख सकते हैं।

रतन लाल की पोस्ट और प्रोफाइल

बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में इतिहास के एसोसिएट प्रोफेसर रतन लाल को आपत्तिजनक टिप्पणी पोस्ट किए जाने पर लोगों ने खूब खरी-खोटी सुनाई। लेख पर गुस्से में प्रतिक्रिया देने वाले कई लोगों ने कार्रवाई की माँग करते हुए दिल्ली पुलिस के ट्विटर हैंडल को टैग भी किया।

वहीं बीजेपी के प्रवक्ता आरपी सिंह ने लिखा, “इससे ​​मेरी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है। अगर डॉ रतन लाल पर आईपीसी की धारा 153ए और आईपीसी के अन्य प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया जाता है और उनके खिलाफ मामला चलाया जाता है तो मैं इसकी सराहना करूँगा। उन्होंने दिल्ली पुलिस को टैग भी किया। @CPDelhi @DelhiPolice”

बता दें कि हाल ही में रतन लाल ने केंद्र सरकार और भारत के राष्ट्रपति को दो AK56 राइफल से लैस अंगरक्षकों या एक हथियार लाइसेंस का अनुरोध करते हुए एक पत्र भी लिखा ताकि वह एक AK56 बंदूक प्राप्त कर सकें। उन्होंने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और भारत के राष्ट्रपति का मजाक उड़ाते हुए यह भी कहा कि उन्हें कमांडो ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।

गौरतलब है कि वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे विवादित ज्ञानवापी ढाँचे में न्यायालय के आदेश के बाद सर्वे के दौरान वजूखाना में स्थित एक शिवलिंग का पता चला था। पता चलने के बाद सिविल जज वाराणसी (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर ने 16 मई,2022 को ही विवादित ज्ञानवापी स्ट्रक्चर को सील करने का आदेश दे दिया था।

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में मिले शिवलिंग को फव्वारा बताने पर बोले IIT-BHU के प्रोफेसर- पुराने जमाने में बिजली नहीं थी, 150 फुट से पानी गिराना होता था

एक तरह जहाँ वाराणसी (Varanasi) के विवादित ज्ञानवापी ढाँचे (Gyanvapi Controversial Structure) में मिले शिवलिंग को मुस्लिम पक्ष फव्वारा बताकर इतिहास को झूठा साबित करने की कोशिश कर रहा है, वहीं IIT, BHU के प्रोफेसर ने इसे नकार दिया है। IIT, BHU में मैटेरियल और केमिकल साइंस के प्रोफेसर आरएस सिंह (RS Singh) कहा कि यह शिवलिंग ही है, क्योंकि पुराने जमाने में बिजली नहीं होती थी।

प्रोफेसर सिंह ने कहा पुराने जमाने में फव्वारे को चलाने के लिए पानी को काफी ऊपर से गिराया जाता था और वह दबाव में फव्वारे का आकार लेता था। उन्होंने कहा कि विवादित ज्ञानवापी परिसर में ऐसा कोई सिस्टम नहीं दिखा। शिवलिंग के ऊपर फव्वारेनुमा जो आकृति दिख रही है, वह सीमेंट रखा हुआ हो सकता है।

शिवलिंग के पन्ना होने की बात को लेकर उन्होंने कहा कि उसका को केमिकल एनालिसिस नहीं हुआ है, इसलिए यह कहना है कि वह पन्ना का है, थोड़ा मुश्किल है। इसको देखकर लगता है कि यह काफी पुराना है और लंबे समय से पानी में है। उन्होंने कहा कि अंतिम बार इसे राजा टोडरमल ने 400-500 साल पहले बनवाया था और उस समय बिजली नहीं थी।

प्रोफेसर आरएस सिंह ने कहा कि पुराने जमाने में भी फौव्वारे का निर्माण होता था, लेकिन जब तक पानी 100-150 फुट ऊपर से नहीं गिराया जाता, तब तक फव्वारे में पानी नहीं आता था। उन्होंने कहा कि इतने रेडियस का फव्वारा नहीं होता। अगर यह फव्वारा है तो इसके नीचे कोई मैकेनिज्म होगा और बेसमेंट में इसका सिस्टम बना होगा।

आजतक के अनुसार, उन्होंने कहा कि जो लोग इसे फव्वारा बता रहे हैं, वे लोग इसे चलाकर दिखा दें। अगर यह जाता है तो मान लिया जाएगा कि यह फव्वारा है, नहीं तो यह शिवलिंग है। वहीं, केमिकल डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर चंदन उपाध्याय ने कहा कि अगर यह फव्वारा है तो इसमें नोजल होना चाहिए, जो इसमें दिख नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि इसमें पानी होनी चाहिए, वह भी नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि शिवलिंग पन्ना का हो सकता है, लेकिन इसको प्रमाणित करने के लिए जाँच जरूरी है।

शिवलिंग क्या है – ये नहीं जानेंगे, तो कट्टर इस्लामी दुष्प्रचार को कैसे काटेंगे? अश्लीलता फैलाने वालों से निपटने के लिए समझें लिंगम् का इतिहास और महत्व

शिवलिंग क्या होता है? इसकी पूजा क्यों की जाती है? भगवान शिव से इसका क्या सम्बन्ध है? क्या वेदों में कहीं शिवलिंग का उल्लेख है? आज इन सब सवालों पर चर्चा आवश्यक हो गई है, क्योंकि इस्लामी कट्टरपंथी शिवलिंग को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियाँ फैला कर हिन्दू धर्म को बदनाम कर रहे हैं। ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में प्राचीन शिवलिंग के सामने आने के बाद से वो बौखलाए हुए हैं। लेकिन, अफ़सोस ये कि शिवलिंग को लेकर अधिकतर हिन्दुओं को ही कुछ खास पता नहीं है।

जब हमें अपने प्रतीकों, देवी-देवताओं और पवित्र स्थलों के बारे में अच्छे से पता होगा, फिर कोई हमें भ्रम में नहीं डाल सकता। उससे भी ज्यादा ज़रूरी है कि आज की युवा पीढ़ी का, आज के बच्चों का ये जानना, ये बताया जाना कि हम हिन्दू हैं और हिन्दुओं के प्रतीक चिह्नों व साहित्य का क्या महत्व है, इनमें क्या है। शिवलिंग को लेकर भी अश्लील बातें की जा रही हैं, मजाक बनाया जा रहा है। ऐसे में हमें इस जंजाल को काटने की ज़रूरत है।

शिवलिंग को लेकर ऐसे हिन्दू धर्म को बदनाम कर रहे हैं इस्लामी कट्टरपंथी

दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज में इतिहास के एसोसिएट प्रोफ़ेसर के पद पर कार्यरत रतन लाल ने फेसबुक पर एक लिंक साझा करते हुए लिखा, “यदि यह शिव लिंग है तो लगता है शायद शिव जी का भी खतना कर दिया गया था। साथ ही पोस्ट में चिढ़ाने वाला इमोजी भी लगाया – ? .वहीं तस्वीर का क्रेडिट ‘लल्लनटॉप’ को दिया गया। विरोध के बावजूद ये प्रोफेसर अपने बयान पर कायम हैं और कह रहे हैं कि उन्होंने कुछ गलत नहीं कहा।

इसी तरह उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सपा नेता मोहसिन अंसारी ने लीची के फल को काटकर उसके बीज की तुलना शिवलिंग से की। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। एक अन्य घटना हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित पावंटा साहिब से सामने आई, जहाँ शिवलिंग की तुलना टॉयलेट सीट से करने के मामले में दो लोग गिरफ्तार किए गए। सपा नेता दानिश कुरैशी ने शिवलिंग को लेकर अश्लील बातें की, जिसके बाद गुजरात पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।

इसी तरह पत्रकार सबा नकवी ने ‘भाभा अटॉमिक रिसर्च सेंटर’ की तुलना शिवलिंग से कर डाली और इसे व्हाट्सएप्प फॉरवर्ड बताया। बाद में उन्होंने ट्वीट डिलीट कर के माफ़ी माँग ली। AIIMS में रहे डॉक्टर श्रीनिवास राजकुमार ने एक घटिया अश्लील फेसबुक पोस्ट शिवलिंग को लेकर शेयर किया। ‘न्यूज़ 1 इंडिया’ को नगमा शेख नाम की अपनी एक एंकर को बरखास्त करना पड़ा, क्योंकि उसने भी कुछ इसी तरह की बातें की थीं।

अब रही बात जवाब देने की, तो इस्लाम मजहब, पैगंबर महम्मद या काबा को लेकर टिप्पणी करने वालों का हाल किसी से छिपा नहीं है। कभी ‘शार्ली हेब्दो’ मैगजीन के दफ्तर में घुस कर लोगों को मार डाला जाता है, कभी लखनऊ में कमलेश तिवारी की बेरहमी से हत्या हो जाती है। हिन्दू धर्म में किसी भी अन्य संप्रदाय पर ओछी टिप्पणी करने के लिए नहीं सिखाया जाता, लेकिन इस्लाम को लेकर टिप्पणी ही काफी है, अच्छी हो या बुरी। गला रेत दिए जाते हैं।

अथर्व वेद में भी मिलता है शिवलिंग की मूल कथा का जिक्र

लिंग का एक अर्थ स्तम्भ भी होता है, जिसे वेदों में ‘स्कम्भ’ भी कहा गया है। इसमें कोई शक नहीं है कि भारतीय और सनातन संस्कृति वेदों से ही निकली है और इसीलिए ऋषि-मुनियों ने किसी भी चीज को सही-गलत ठहराने के लिए सबसे पहले वेदों में झाँकना उचित समझा। आज भी हम अपनी संस्कृति की जड़ और सभ्यता का मूल वेदों में ही पाते हैं। इसी तरह अथर्व वेद में ‘स्कम्भ’ का वर्णन है, जहाँ से शिवलिंग की पूजा शुरू होने के संकेत हैं।

अथर्व वेद के दसवें काण्ड के सातवें मंत्र में इस ‘स्कम्भ’ का जिक्र है, जिसे समस्त संसार का मूल भी माना गया है। अतः, लिंग का शाब्दिक अर्थ हम ‘स्कम्भ’ या स्तम्भ भी ले सकते हैं। इसमें ब्रह्म को ‘स्कम्भ’ के रूप में ही वर्णित किया गया है। इसके बाद इस जिज्ञासा को शांत किया गया है कि इस ‘सर्वाधार स्कम्भ’ के किस हिस्से का क्या महत्व है। ध्यान दीजिए, इसमें वर्णित इस ‘स्कम्भ’ का न आदि है और न ही अंत। ईश्वर की ही परिकल्पना इस रूप में की गई है।

आगे ब्रह्म की जिज्ञासा करते हुए पूछा गया है कि ‘स्कम्भ’ रूप वाले ईश्वर के किस अंग में अग्नि दीप्त होती है, कौन से अंग से वायु चलती है और चन्द्रमा किस अंग से प्रकाश फैला रहा है? भूमि और अंतरिक्ष से लेकर बाकी के संसार इसमें कहाँ हैं? जिसमें सूर्य, वायु और जल निरंतर गतिमय हैं, उन्हें ही ‘स्कम्भ’ के रूप में चित्रित किया गया है यहाँ। फिर कहा गया है कि जिस आधार में ऋतुएँ, संवत्सर, मास और अर्धमास चल रहे हैं, वही ‘स्कम्भ’ हैं।

संपूर्ण सृष्टि की कल्पना इसी ‘स्कम्भ’ के अंदर की गई है। उन्हें काल से परे बताया गया है। 33 प्रकार (8 वसु, 12 रूद्र, 11 आदित्य, इंद्र और प्रजापति) के देव भी यहीं निवास करते हैं – ऐसा बताया गया है। अमृत, मृत्यु और समुद्र भी इसी ‘स्कम्भ’ अर्थात, ईश्वर में समाहित है। यज्ञ कार्य का मूल उन्हें ही बताया गया है। पूरे ब्रह्माण्ड को उनके अंगों के रूप में परिकल्पना की गई है। ‘स्कम्भ’ रूपी ईश्वर के स्तुति की सलाह दी गई है।

शिवलिंग को कैसे परिभाषित करते हैं आज के साधु-संत और आध्यात्मिक गुरु

सद्गुरु जग्गी वासुदेव बताते हैं कि लिंग का अर्थ होता है ‘The Form’, अर्थात रूप या आकार। उनका कहना है कि निराकार जब आकार लेता है, या जब सृष्टि की रचना शुरू हुई तो उसने सबसे पहले ‘Ellipsoid’ (दीर्घवृत्ताकार/अंडाकार) आकृति ली। इसीलिए, लिंग को ही प्रथम और अंतिम रूप माना गया। वो इसे ऊर्जा को समाहित रखने वाले वाला एक रूप भी बताते हैं, जिसके पास ये शक्ति है। दक्षिण भारत में पंचभूतों (पृथ्वी, जल, वायु, आकाश और अग्नि) की आराधना के लिए पाँच अलग-अलग लिंग स्थापित हुए।

सद्गुरु कहते हैं कि ज्योतिर्लिंगों की स्थापना भी इसी क्रम में एक निश्चित प्राकृतिक प्रक्रियाओं के जरिए हुई, जो मानवीय सोच से परे है। महाकाल को वो ‘Ultimate Time Machine’ बताते हैं। अमरनाथ जैसे शिवलिंगों को ‘स्वयंभू’ कहते हैं, अर्थात ऐसे शिवलिंग जो स्वयं प्रकट हुआ और किसी ने बनाया नहीं। सद्गुरु ये भी बताते हैं कि कैसे दिव्य ‘स्तम्भ’ से ॐ की ध्वनि निकल रही थी और किसी देवी-देवता को इसका आदि-अंत का पता नहीं था। ये भी एक पौराणिक कथा है।

शैव संत रमेशभाई ओझा, जिन्हें ‘भाईश्री’ भी कहा जाता है, उनसे एक बार सवाल पूछा गया था कि शिव को जब निर्गुण और निराकार वर्णित किया गया है शिव महापुराण में, फिर उनका ये आकार कैसे? वो लिंग को पुरुष और प्रकृति के मिलन का प्रतीक बताते हुए जवाब देते हैं कि मनुष्य को हमेशा कोई न कोई प्रतीक चाहिए होता है। उन्होंने भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण के हवाले से बताया कि निराकार की आराधना कठिन है, इसीलिए शिवलिंग के माध्यम से उस तत्व की पूजा हम करते हैं, जो निराकार है।

श्री श्री रविशंकर कहते हैं कि लिंग का अर्थ हुआ, ‘पहचान’। एक ऐसा प्रतीक चिह्न, जिसके माध्यम से आप सत्य और वास्तविकता को पहचान सकते हैं। वो बताते हैं कि लिंग वो चीज है, जिसके माध्यम से अदृश्य को भी पहचाना जा सकता है। वो कहते हैं, “किसी बच्चे के जन्म के समय वो स्त्री है या पुरुष, ये उसके शरीर के एक खास अंग से पहचाना जाता है। इसीलिए, उसे भी लिंग कह दिया गया।” प्रकृति और इसके निर्माता, दोनों का प्रतीक शिवलिंग है जो अति-प्राचीन है, निराकार का आकार है।

शिवलिंग का इतिहास: दुनिया के कई हिस्सों में मिले, हजारों वर्षों से होती रही है पूजा

शिवलिंग का इतिहास काफी पुराना है और वाराणसी के पास एक गाँव में मिले एक शिवलिंग को 4000 साल पुराना बताया गया। सिंधु घाटी सभ्यता में भी भगवान शिव और शिवलिंग की पूजा के प्रमाण मिले हैं। इस आकर के कई पत्थर मिले हैं सिंधु घाटी सभ्यता के और ‘पशुपति सील’ भी मिली। भगवान शिव का एक नाम पशुपति भी है। इससे ये भी पता चलता है कि उस समय योग की भी प्रधानता थी। भगवान शिव की पूजा उससे पहले से होती आई है।

भारत ही नहीं, दुनिया के कई अन्य हिस्सों में भी खुदाई के दौरान शिवलिंग मिले हैं। रोम में कई ऐसे शिवलिंग मिले हैं, जो हजारों साल पुराने हैं। वियतनाम में एक शिवलिंग मिला, जिसे नौवीं सदी का बताया गया। इसी तरह यहूदियों द्वारा भी शिवलिंग की पूजा के प्रमाण मिले हैं। कज़ाख़स्तान में भी इतिहास में भगवान शिव की पूजा के प्रमाण मिले हैं। मेसोपोटामिया में भी शिवलिंग की पूजा का दावा किया जाता है। सनातन संस्कृति में ‘लिंग पुराण’ में शिवलिंग की महत्ता की चर्चा की गई है।