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‘शरिया लॉ में बदलाव कबूल नहीं’: UCC के विरोध में देवबंद के मौलवियों की बैठक, कहा – ‘सब सह कर हम 10 साल से चुप, ये देश हमारा’

PFI की रैली के बाद अब उत्तर प्रदेश के देवबंद से जमीयत उलेमा ए हिन्द (Jamiat Ulema E Hind) ने दो दिवसीय बैठक की। इसमें प्रमुख रूप से ज्ञानवापी विवादित ढाँचे, मथुरा के शाही ईदगाह और कुतुबमीनार पर दावे का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया। रविवार (29 मई, 2022) को कॉमन सिविल कोड (Uniform Civil Code) समेत कई मुद्दों पर अहम प्रस्तावों को पास किया गया। मौलवियों ने एक सुर में कॉमन सिविल कोड का विरोध किया और कहा कि वे अपने शरिया लॉ (Sharia Law) में किसी भी तरह का बदलाव नहीं मानेंगे।

जमीयत की कॉन्फ्रेंस में इसके अध्यक्ष महमूद असद मदनी (Mahmood Asad Madani) ने मुस्लिमों से सब्र रखने की अपील की। उन्होंने केंद्र सरकार पर डराने का आरोप लगाया। मदनी ने कहा कि अगर वो लोग अखंडता की बातें करते हैं तो वो धर्म है, लेकिन हम करते हैं तो ये तंज माना जाता है। हमें डराना बंद करिए। हम पराए नहीं हैं, ये देश हमारा है। हमें पाकिस्तान जाने का मौका मिला था, लेकिन हम नहीं गए और जो हमें पाकिस्तान जाने की सलाह देते हैं वो खुद चले जाएँ।

मदनी ने कहा, “ये लोग देवबंद को दहशतगर्दी का अड्डा मानते हैं। यूपी में इनकी सरकार बनते ही यहाँ के एक लड़के को बलात्कार के आरोप में पकड़ लिया गया।” मदनी कहते हैं कि बहुत कुछ सहने के बाद भी मुस्लिम समुदाय बीते 10 साल से चुप है।

कॉमन सिविल कोड का विरोध

इस्लामिक उलेमा मौलाना नोमानी शाहजहाँपुरी ने सामन नागरिक संहिता पर एक प्रस्ताव पेश किया। नोमानी ने आरोप लगाया कि सरकार मुस्लिम पर्सनल लॉ को खत्म करना चाहती है। इसीलिए वो कॉमन सिविल कोड लागू करना चाहती है, लेकिन हम अपने मजहबी कानून में किसी भी तरह की छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं करेंगे। यदि ऐसा हुआ तो हम हर तरह के विरोध के लिए मजबूर होंगे।

वहीं वाराणसी के मौलाना मौलाना हाजी उबेदुल्ला ने ज्ञानवापी के विवादित ढाँचे और मथुरा में ईदगाह के मामले को लेकर एक प्रस्ताव रखा। इस्लामिक उलेमा ने दावा किया कि इससे देश में अमन, चैन को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया सुप्रीम कोर्ट ने ‘पूजा स्थल कानून 1991 एक्ट 42’ को संविधान की मूल आत्मा माना है। मौलाना के मुताबिक, गड़े मुर्दे उखाड़ने से बचना चाहिए।

इस्लामिक संगठन जमीयत उलेमा ए हिन्द ने इस साल 2022-23 के लिए 13,35,70,000 रुपए का बजट पेश किया है। इसे इस्लामिक शिक्षा और उसके प्रचार-प्रसार पर खर्च किया जाएगा।

‘नींद की बीमारी दूर करने के लिए फूँकता था गाँजा, अमेरिका में शुरू किया ड्रग्स लेना’: आर्यन खान ने NCB को बताया, फिर भी मिली क्लीन-चिट

मुंबई ड्रग केस में एनसीबी से क्लिन चिट पाने के बाद आर्यन खान से जुड़ी एक दिलचस्प जानकारी मीडिया में सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एनसीबी की जाँच के दौरान आर्यन ने खुद ड्रग्स लेने की बात को स्वीकारते हुए कहा था कि उन्होंने गांजा पीना ग्रेजुएशन के दिनों से शुरू किया था। ये बात शुक्रवार को एनसीबी द्वारा फाइल की गई चार्जशीट में भी है जिसमें क्रूज से पकड़े गए 20 लोगों में 14 के नाम हैं। चार्जशीट में से जिन 6 आरोपितों का नाम सबूतों के अभाव में हटाया गया है उनमें एक आर्यन खान हैं।

आर्यन खान ने एनसीबी को दी अपनी स्टेटमेंट में कहा था कि उन्होंने साल 2018 में अमेरिका में रहते हुए गांजा फूँकना शुरू किया था। उस समय वह ग्रेजुएशन कर रहे थे और उन्हें स्लीपिंग डिसॉर्डर हो गया था। इसके बाद उन्होंने इंटरनेट पर आर्टिकल पढ़े जिसमें लिखा था कि इस बीमारी से छुटकारा पाने में गांजा फूँकना मददगार साबित हो सकता है। अपने बयान में आर्यन खान ने ये बात भी मानी थी कि जो चैट उनके फोन में मिली है अनन्या पांडे से ड्रग माँगने वाली वो उन्हीं की हैं। आर्यन ने जाँच एजेंसी को बताया था कि वो बांद्रा में ड्रग डीलर को जानते हैं लेकिन उसका नाम और सही जगह उन्हें नहीं मालूम। उनकी पहचान डीलर से एक अचित नाम के दोस्त के जरिए हुई थी।

बता दें कि पूछताछ में आर्यन खान द्वारा किए गए तमाम बयानों के बाद एनसीबी की ओर से उन्हें क्लिनचिट मिली और कहा गया कि आर्यन के पास से एनसीबी को कोई ड्रग्स नहीं मिले थे या कोई अन्य सबूत ऐसा नहीं था जो साबित करे कि उन्होंने बाकी आरोपितों के साथ मिलकर साजिश रची। एनसीबी के अनुसार, आर्यन खान ड्रग केस में सहआरोपित अरबाज मर्चेंट के बयानों की जाँच से पता चला कि उसने कहीं भी ये बात नहीं कही कि जो 6 ग्राम चरस उसके पास थी उसका आर्यन खान द्वारा किया जाना था। इसके उलट एनसीबी को पता चला कि आर्यन खान ने तो अरबाज मर्चेंट को समझाया था कि वो क्रूज पर ड्रग लेकर न जाएँ।

गौरतलब है कि 2 अक्टूबर 2021 को मुंबई से गोवा जा रहे कार्डिलिया क्रूज में एनसीबी ने छापेमारी करके आर्यन खान को गिरफ्तार किया था। इस मामले में 19 अन्य भी आरोप थे। जब समीर वानखेड़े के नेतृत्व में छापेमारी हुई तो पाया गया कि अरबाज ने अपने जूतों में चरस को छिपा रखा था जिसका सेवल आर्यन करने वाले थे। इस गिरफ्तारी के बाद आर्यन को एनसीबी कस्टडी में रखा गया। 7 अक्टूबर को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया और फिर करीब महीना भर वह ऑर्थर रोड जेल में रहे। 28 अक्टूबर आर्यन की सशर्त बेल हुई और 7 माह बाद आर्यन को केस में क्लीनचिट दे दी गई।

भारतीय परिधान में कान्स में पहुँची अभिनेत्री को जानते हैं? 30 साल से कर रहीं फिल्मों में काम: इंटरनेशनल हुआ ‘मेखला चादोर’, लोग बोले – गर्व है

फ्रांस में चल रहे कान्स फिल्म फेस्टिवल (Cannes Film Festivals) के 75वें संस्करण में शामिल हुईं असमी फिल्मों की अभिनेत्री और फिल्म डायरेक्टर एमी बरुआ (Amy Barua) अपने पहनावे को लेकर खासी चर्चा में हैं। रेड कार्पेट पर डेब्यू करते वक्त उन्होंने जिस अंदाज में भारतीय संस्कृति का प्रदर्शन किया, उसकी प्रशंसा की जा रही है।

एक्ट्रेस एमी असम की पारंपरिक पोशाक पोशाक मेखला चादोर पहनकर रेड कार्पेट पर उतरीं। इसकी तस्वीरें उन्होंने इंस्टाग्राम पर शेयर की। उनके निर्देशन में बनी पहली फिल्म सेमखोर दिमाषा भाषा की फिल्म है, जिसे भारतीय पविलियन में प्रदर्शित किया गया।

कॉन्स में डेब्यू की अपनी झलकियों को इंस्टाग्राम पर शेयर कर उन्होंने कैप्शन में लिखा, “सिनेमा की दुनिया में सबसे अधिक सम्मानित कार्यक्रमों में से एक कान्स फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर मैं मुगा सिल्क के परिधान में उतरी। हर असमिया का गौरव। एक असमी के तौर पर मैं अपनी भाषा और स्थान का प्रतिनिधित्व करने वाले इस प्रतिष्ठित फेस्टिवल में आकर काफी खुश हूँ। मैं असीम खुशी से भर गई हूँ। भारत सरकार, कार्यक्रम के आयोजकों और मेरे गृह राज्य असम के लोगों का दिल से आभार।”

सोशल मीडिया पर असमी मेखला चादोर में उनकी तस्वीरें वायरल हो रही हैं। लोग इसकी काफी तारीफ भी कर रहे हैं। ‘गीतायन’ के लेखक आनंद कुमार नाम ने एमी बरुआ की पोशाक की तारीफ करते हुए लिखा, “कान्स फिल्म फेस्टिवल में भला ये मुगा सिल्क की मेखला चादोर (असम का साड़ी जैसा पारंपरिक परिधान) पहने क्यों खड़ी हैं? स्पष्ट ही है कि अपने क्षेत्र की संस्कृति को दुनिया के सामने लाने में इन्हें संकोच नहीं हुआ। ये एमी बरुआ हैं, जिन्होंने ‘सेम्खोर’ नाम की फिल्म बनाई है।”

आनंद के मुताबिक, सेमखोर दिमाषा भाषा में बनी पहली फिल्म है, जिसमें एक ऐसे क्षेत्र के लोगों की कहानी को दुनिया के सामने रखा गया, जो कि तथाकथित विकास को छोड़कर अपने पारंपरिक आवास में रहना चाहते हैं। यूजर ने अंडमान आइलैंड के सेंटिनल द्वीप पर रहने वाले लोगों का भी जिक्र किया, जिनका कथित धर्मान्तरण कराने गए ईसाई एलन चाऊ को मार दिया गया था।

इसी तरह से स्वराज्य मैगजीन की उप संपादक निष्ठा अनुश्री कहती है कि वो जल्द ही अपने लिए मेखला बनवाएँगी।

जिमी दत्ता नाम की यूजर ने कहा, “हमें आप पर गर्व है।”

फोटो साभार: इंस्टाग्राम

जिंकी स्मिता नाम की यूजर ने एमी बरुआ को असम को गौरवान्वित करने के लिए धन्यवाद कहा।

फोटो साभार: इंस्टाग्राम

कौन हैं एमी बरुआ

एमी बरुआ असमी फिल्मों की अभिनेत्री और डायरेक्टर हैं। राज्य के नौगाँव की रहने वाली एमी करीब 30 साल से फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रही हैं। एक्ट्रेस ने अर्थशास्त्र में स्नातक और सोशल वर्क में मास्टर्स की डिग्री ली है। उन्होंने 2011 में बीजेपी नेता पीयूष हजारिका से शादी की थी। उनके दो छोटे बच्चे भी हैं।

क्या है मेखला चादोर

मेखला चादोर (मेखला चादर) एक प्रकार की साड़ी है जिसमें कपड़े के दो टुकड़े होते हैं, जो ऊपर और नीचे लपेटे जाते हैं। ये असम की महिलाओं का पारंपरिक परिधान है। इस विशेष पहनावे के आधे हिस्से को ‘मेखला’ कहा जाता है जो गोल फिट होती है और पेटीकोट के ऊपर कमर नीचे होती है। जबकि, इसके ऊपरी हिस्से को चादोर कहा जाता है।

दुर्घटना में 7 जवान बलिदान, कूद कर भागे ड्राइवर अहमद शाह पर FIR: 13 साल पुरानी बिना परमिट वाली बस का मालिक इब्राहिम कस्टडी में, RC में इलियास का नंबर

भारतीय सेना के 26 जवानों को लद्दाख क्षेत्र में ले जा रही बस 27 मई 2022 को दुर्घटना का शिकार हो गई थी। अब इस मामले में बस ड्राइवर अहमद शाह पर FIR दर्ज की गई है। यह FIR 28 मई 2022 को दर्ज हुई है। बताया जा रहा है कि ड्राइवर अहमद शाह अंतिम मौके पर बस से बाहर कूद गया था। इस हादसे में 7 जवान बलिदान हुए थे जबकि 19 सैनिक घायल हो गए थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक ड्राइवर अहमद शाह पर धारा 337 (अपनी हरकतों से किसी का जीवन खतरे में डालना), 304-A (लापरवाही के चलते मृत्यु) और 279 (गलत तरीके से गाडी चलाना) IPC के तहत केस दर्ज हुआ है। यह केस लेह के नुब्रा थाने में दर्ज हुआ है। दुर्घटना हनीफ सेक्टर में हुई थी जो थोसे से 25 किलोमीटर की दूरी पर है। जैसे ही बस 50-60 फीट गहरी खाई में गिरने लगी, वैसे ही ड्राइवर अहमद शाह ने बाहर छलाँग लगा दी थी।

मो0 इब्राहिम की बस का 3 साल से एक्सपायर था फिटनेस

ऑनलाइन उपब्लध आँकड़ों के मुताबिक जिस वाहन से सैनिकों को ले जाया जा रहा था वह स्वराज माजदा मिनी बस थी। सफेद और लाल रंग की वह दुर्घटनाग्रस्त बस लगभग 13 साल पुरानी थी। बस के मालिक का नाम मोहम्मद इब्राहिम है। मोहम्मद इब्राहिम के अब्बा का नाम गुलाम हैदर है। बस लेह RTO ऑफिस द्वारा रजिस्टर्ड है। सैनिको को ले जा रही उस बस का फिटनेस भी मार्च- 2020 में खत्म हो चुका था। यह बस जम्मू एन्ड कश्मीर बैंक द्वारा फाइनेंस की गई थी। इस बस की परमिट भी नवंबर 2019 तक वैलिड बताई जा रही है।

फिटनेस

15 दिनों से OTP माँग रहा था बस मलिक इब्राहिम

ऑपइंडिया ने बस मालिक मोहम्मद इब्राहिम के दोस्त मोहम्मद इलियास से बात की। इलियास ने बताया, “बस मालिक इब्राहिम मेरा दोस्त है। मेरे ही मोबाइल नंबर पर उसकी बस की RC बनी हुई है। वो लेह में रहता है और मैं कारगिल में। पिछले लगभग 15 दिनों से इब्राहिम मुझ से कॉल कर के OTP माँग था। शायद उसको अपनी गाड़ी के कागजातों में कुछ बदलाव करवाना रहा होगा। हालाँकि मैंने उसे OTP नहीं दिया। उसकी गाड़ी की दुर्घटना की जानकारी मुझे भी हुई है।”

पुलिस कस्टडी में है बस मालिक इब्राहिम

ऑपइंडिया ने मोहम्मद इब्राहिम का ट्रांसपोर्ट कारोबार देखने वाले शब्बीर शाह से बात की। शब्बीर ने जताया, “मैं इब्राहिम के ट्रांसपोर्ट के काम को देखता हूँ। दुर्घटनाग्रस्त बस जहाँ थी अभी भी वहीं पड़ी है। गाड़ी के फिटनेस पूरा होने या न होने की जानकारी मुझे नहीं है। गाड़ी के मालिक से पुलिस वाले पूछताछ कर रहे हैं। उसका नुब्रा वैल्यू मिनी बस ऑपरेटर नाम से ट्रांसपोर्ट है। इब्राहिम के पास एक ही बस है। फ़िलहाल वो (इब्राहिम) पुलिस कस्टडी में हैं।”

स्थिर है घायल जवानों की हालत

नुब्रा के SHO के मुताबिक प्रथम दृष्टया मामला ड्राइवर की लापरवाही का लग रहा है। वहीं एक अन्य पुलिस अधिकारी के मुताबिक घटना के बाद स्थानीय निवासियों ने बचाव अभियान में सेना और पुलिस की मदद की। सभी घायल सैनिकों को एयरलिफ्ट कर के चडीगढ़ चंडी मंदिर क्षेत्र स्थित पश्चिम कमांड अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है। वहीं बलिदानी सैनिकों के पार्थिव शव दिल्ली भेज दिए गए हैं जहाँ से उन्हें उनके पैतृक स्थानों पर भेजा जाएगा।

‘कब्ज़ा कर के बनाई गई मस्जिद को गिरा दो’: मंदिरों को ध्वस्त कर बनाए गए मस्जिदों पर बोले थे गाँधी – मुस्लिम खुद सौंप दें ऐसे स्थल

27 मंदिरों को तोड़कर बनी कुतुब मीनार और भगवान शिव की मंदिर के ऊपर बने ज्ञानवापी को लेकर देश भर में मंदिर और मस्जिद की डिबेट हो रही है। मुगल आक्रांताओं ने हजारों मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनवाईं। क्या तलवार के बल पर जबरन जिन स्थानों पर मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई गईं? उन्हें मस्जिदें मानी जानी चाहिए? अनेक मस्जिदें ऐसी हैं जिनकी दीवारें आज भी मंदिर के हैं, उनके सिर्फ ऊपरी गुंबदों के आकार को बदलकर मस्जिद का रूप दिया गया है।

क्या ये मस्जिदें हुईं? वैसे भी इस्लाम किसी की इबादतगाह को तोड़कर मस्जिद बनाने की अनुमति नहीं प्रदान करता है। मंदिरों को तोड़कर बनाई गई मस्जिदों पर महात्मा गाँधी ने क्या कहा है – साक्ष्य, तथ्य और इतिहास के आईने में इसे समझने की कोशिश करते हैं। 27 जुलाई, 1937 को प्रकाशित एक लेख में महात्मा गाँधी ने लिखा है – “जो मस्जिदें मंदिर तोड़कर बनाई गई हैं, वे गुलामी की निशानी हैं।” इस लेख की तस्वीर आप देख सकते हैं, पढ़ सकते हैं और समझ सकते हैं कि गाँधी जी के विचार क्या हैं।

ध्वस्त किए गए मंदिरों और उसके ऊपर बने मस्जिदों पर महात्मा गाँधी की राय

गाँधी जी का ये लेख ‘सेवा समर्पण’ (दिल्ली की मासिक पत्रिका) में, 27 जुलाई, 1937 को प्रकाशित किया गया था। इस आर्टिकल में महात्मा गाँधी ने श्रीराम गोपाल ‘शरद’ के पत्र का जवाब भेजा है। इसमें गाँधी जी ने खुलकर अपने विचार साझा किए हैं। आइए, बताते हैं कि महात्मा गाँधी ने क्या लिखा है इस लेख में।

इसमें महात्मा गाँधी ने लिखा है, “किसी भी धार्मिक उपासना गृह के ऊपर बलपूर्वक अधिकार करना बड़ा जघन्य अपराध है। मुगल काल में धार्मिक धर्मांधता के कारण मुगल शासकों ने हिंदुओं के बहुत से धार्मिक स्थानों पर कब्जा कर लिया, जो हिंदुओं के पवित्र आराधना स्थल थे। इनमें से कई को लूटा गया और कई को मस्जिदों में तब्दील कर दिया गया। हालाँकि, मंदिर और मस्जिद दोनों ही भगवान की पूजा करने के पवित्र स्थल हैं और दोनों में कोई अंतर नहीं है। मुस्लिमों और हिंदुओं के पूजा करने का तरीका अलग है।”

महात्मा गाँधी लिखते हैं, “धार्मिकता के दृष्टिकोण से देखें तो मुस्लिम कभी यह बर्दाश्त नहीं करेंगे कि हिंदू उस मस्जिद में लूटपाट करें, जहाँ वह इबादत करते हैं। इसी तरह हिंदू भी यह बर्दाश्त नहीं करेंगे कि जहाँ वह भगवान राम, कृष्ण, विष्णु और अन्य भगवानों की पूजा करते हैं, उसे ध्वस्त कर दिया जाए। जहाँ भी ऐसी घटनाएँ हुई हैं, वे गुलामी की निशानी हैं। जहाँ विवाद हैं, हिन्दुओं और मुस्लिमों को आपस में इनको लेकर तय करना होगा। मुस्लिमों के वे पूजा स्थल जो हिंदुओं के कब्जे में हैं, हिंदुओं को उन्हें उदारता से मुस्लिमों को देना चाहिए।”

इस्लामी आक्रांताओं के कृत्य में गाँधी जी ने लिखा था

महात्मा गाँधी ने आगे लिखा था, “इसी तरह हिन्दुओं के जिन धार्मिक स्थलों पर मुस्लिमों का कब्जा है, उन्हें खुशी-खुशी हिन्दुओं को सौंप देना चाहिए। इससे आपसी भेदभाव दूर होगा और हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच एकता बढ़ेगी, जो भारत जैसे देश के लिए वरदान साबित होगी।” 27 जुलाई, 1937 को ‘नवजीवन’ के इस अंक में गाँधी जी बिना किसी लाग-लपेट के साफ-साफ कहते हैं कि हिंदुओं की जिन धार्मिक स्थलों पर मुस्लिमों का कब्जा है उन्हें खुशी-खुशी हिंदुओं को सौंप देना चाहिए।

महात्मा गाँधी ने मंदिर गिरा के बनाए गए मस्जिदों पर और क्या कहा था?

85 वर्ष पहले जिस बात को गाँधी जी ने कहा था अब उस पर अमल करने का समय आ गया है। महात्मा गाँधी ने 1925 में भी मस्जिदों द्वारा मंदिरों की जमीनों पर अवैध कब्जे पर मंदिरों के पुनर्निर्माण की बात कही थी।

यही नहीं, गाँधी जी ‘यंग इंडिया’ के 5 फरवरी, 1925 को एक दूसरे लेख में लिखते हैं- “अगर ‘अ’ (हिन्दू) का कब्जा अपनी जमीन पर है और कोई शख्स उसपर कोई इमारत बनाता है, चाहे वह मस्जिद ही हो, तो ‘अ’ को यह अख्तियार है कि वह उसे गिरा दे। मस्जिद की शक्ल में खड़ी की गई हर एक इमारत मस्जिद नहीं हो सकती। वह मस्जिद तभी कही जाएगी जब उसके मस्जिद होने का धर्म-संस्कार कर लिया जाए। बिना पूछे किसी की जमीन पर इमारत खड़ी करना सरासर डाकेजनी है।”

गाँधी जी ने आगे लिखा था, “डाकेजनी पवित्र नहीं हो सकती। अगर उस इमारत को जिसका नाम झूठ-मूठ मस्जिद रख दिया गया हो, उखाड़ डालने की इच्छा या ताकत ‘अ’ में न हो, तो उसे यह हक बराबर है कि वह अदालत में जाए और उसे अदालत द्वारा गिरवा दें।” (मूलतः ‘यंग इंडिया’ – 5 फरवरी, 1925 को प्रकाशित; ‘गाँधी सम्पूर्ण वांग्मय’, खंड 26, पृष्ठ 65-66)

अब समय आ गया है कि गाँधी के अनुयायी भी इसका समर्थन करें और गाँधी जी की इस सलाह पर अमल करें, जिससे समाज में भाईचारा व्याप्त सके। ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ की दुहाई देने वाले इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं? क्या गंगा-जमुनी तहजीब की सारे ठेकदारी हिंदुओं के पास है ? इसमें मुस्लिम पक्ष का कोई रोल नहीं है? इस तहजीब को बनाए रखने के लिए मुस्लिमों को भी आगे आना चाहिए और जिन-जिन स्थानों पर विदेशी लुटेरों और आक्रांताओं ने जबरन मंदिर तोड़कर मस्जिदें बनाई हैं, उन्हें हिंदुओं को सौंपकर उदारता का परिचय देना चाहिए।

‘ऑल इंडिया सेक्सुअल असॉल्टर्स’: JNU में AISA के कॉमरेड पर छात्रा के यौन शोषण का आरोप, दावा – आईशी घोष ने शिकायत करने से रोका

वामपंथियों का गढ़ माना जाने वाला दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर से चर्चा में है। मामला है परिसर के अंदर एक छात्रा के यौन उत्पीड़न का। इस मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शनिवार (28 मई, 2022) को वामपंथियों के स्टूडेंट विंग ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिशन (AISA) के एक मेंबर पर JNU कैम्पस में ही छात्रा के यौन शोषण (Sexual Misconduct) का आरोप लगाया है।

बताया जा रहा है कि आरोपित प्रसन्ना राज नाम का व्यक्ति है, जो कि सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज (CPS) से मास्टर डिग्री कर रहा है। ये कथित घटना जेएनयू के चंद्रबाघा होटल की छत पर हुई। इस घटना को लेकर एबीवीपी ने एक बयान जारी कर कहा, “उसने उसका यौन उत्पीड़न करने की कोशिश के साथ ही उसे पब्लिक में नहीं बोलने को लेकर धमकी भी दी। सीनियर ‘कामरेड’ इस घिनौने कृत्य को दबाने की कोशिशों में जुट गए हैं। अब तक संगठन की किसी भी महिला कार्यकर्ता ने इस वीभत्स हमले के खिलाफ आवाज नहीं उठाई है।”

ABVP का कहना है कि लड़की का यौन उत्पीड़न करने की कोशिश करने वाला आरोपित प्रसन्ना जेएनयू के कैम्पस में बेखौफ होकर घूमता देखा गया। वहीं, AISA के लोग उसे दोषी ठहराने की जगह पीड़िता को दोषी साबित करने की कोशिशें कर रहे हैं। छात्र संगठन ने इस बात पर भी अफसोस जताया कि जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आईशी घोष इस घटना पर चुप्पी मार के बैठ गई हैं। इसमें आगे कहा गया, “नारीवाद का झंडा बुलंद कर ये पहले एक्टिविज्म के नाम पर छात्रों को अपने संगठन में आने का लालच देते हैं। लेकिन जब कभी इनके संगठन (वामपंथियों ) के ही कार्यकर्ता महिलाओं के साथ रेप जैसे घिनौने कृत्य करते हैं तो ये चुप हो जाते हैं।”

पता चला है कि इस घटना को लेकर पीड़िता ने आईशी घोष से मदद माँगी थी, लेकिन घोष ने बड़ी ही चालाकी के साथ पीड़िता को ICC से शिकायत करने से रोकते हुए उसे गैर-मौजूदा GSCASH से संपर्क करने को कहा। ABVP का कहना है कि यह कम्युनिस्ट समूह से जुड़े यौन उत्पीड़न के आरोपितों को बचाने का क्लासिक तरीका है। ABVP ने इसका उल्लेख किया है कि किस तरह वामपंथी संगठन से जुड़े कई लोग पहले भी यौन उत्पीड़न मामलों में शामिल रहे हैं। इसी तरह से आरोप AISA के पदाधिकारी अनमोल रतन पर भी है कि उसने एक छात्रा के साथ उसके ही कमरे पर 2 दिनों तक रेप किया था।

ABVP के मुताबिक, “अकबर चौधरी, केशव कुमार ये कुछ ऐसे आरोपित हैं, जिनके नामों को समय के साथ भुलाया नहीं जाना चाहिए। बहरहाल अगर AISA का नाम बदलकर ‘ऑल इंडिया सेक्शुअल असॉल्टर्स’ भी कर दिया जाए तो किसी तरह की आतिश्योक्ति नहीं होनी चाहिए। इन्हीं वैचारिक और ऑर्गनाइजेशनल समस्याओं के चलते इसके 11 लोग AISA से इस्तीफा दे चुके हैं।”

छात्र संगठन का मानना है, “यूनिवर्सिटी कैंपस के कम्युनिस्ट अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए GSCASH का सहारा ले रहे हैं, क्योंकि AISA और SFI सेक्सुअल असॉल्टर्स को ये बचाता है। ये बात सभी जानते हैं कि दोषी होते हुए भी GSCASH ने किस तरह से अकबर चौधरी, अरशद आलम, शकील अंजुम का बचाव किया था। GSCASH ने दिल्ली पुलिस को FIR रजिस्टर करने से रोककर इन सभी को बचाया था।”

PHD स्टूडेंट से छेड़छाड़

ये घटना इसी साल जनवरी की है। उस दिन 17 जनवरी थी और वक्त रात के 11:45 बजे का था। एक व्यक्ति यूनिवर्सिटी ईस्टर्न गेट से बाइक से अंदर आया और उसने एक लड़की के साथ छेड़छाड़ की। पीड़िता कैंपस के अंदर ही रहने वाली PHD की स्टूडेंट थी। बाद में दिल्ली पुलिस ने अज्ञात आरोपित के खिलाफ यौन शोषण का मामला दर्ज किया था।

इसी तरह से साल 2018 में JNU की एक छात्रा ने आरोप लगाया था कि कठुआ विरोध प्रदर्शन के ‘हीरो’ ने उसके साथ बलात्कार किया था। पीड़िता ने कहा कि उसन इस घटना को लेकर चुप रहने का विकल्प चुना। आरोपित ने न केवल उसे शारीरिक तौर पर क्षति पहुँचाई, बल्कि मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया। पीड़िता ने आगे लिखा था कि पहले वो इस कारण से चुप रह गई थी, क्योंकि उसे लगा कि अगर वो इसका खुलासा करती है तो इससे कठुआ में बच्ची के साथ हुई बर्बरता का मामला ठंडा पड़ सकता था।

…इरानियों, अफ्रीकियों के आने से बना भारत: ओवैसी ने बताया- ‘भारत मेरा नहीं है, ये धरती मेरे बाप की है’

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहालदुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के भिवंडी में आरएसएस-भाजपा के लिए जहर उगलने के दौरान बताया कि ये भारत उनका नहीं है। अगर ये किसी का है तो ड्रविडों और आदिवासियों का है। ओवैसी ने अपनी बात के साथ ये भी कहा कि मुगलों के साथ भारत में अन्य लोग भी पलायन करके आए थे लेकिन आरएसएस कहता रहता है कि सिर्फ यहाँ मुगल आए।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा साझा की गई कार्यक्रम की वीडियो में सुन सकते हैं, “भारत न तो मेरा है, न ठाकरे का, न ही मोदी-शाह का। अगर भारत किसी का है, तो वह द्रविड़ और आदिवासियों का है, लेकिन भाजपा-आरएसएस मुगलों के बाद ही आए हैं। भारत का गठन अफ्रीका, ईरान, मध्य एशिया, पूर्वी एशिया से लोगों के पलायन के बाद हुआ था।”

ओवैसी ने कहा, “चार जगहों से लोग आए थे, तब से माइग्रेशन हो रहा है। लेकिन बीजेपी-आरएसएस वाले कहते हैं कि मुगल आए, मुगल आए। अफ्रीका से भी आए थे, ईरान से भी आए थे, सेंट्रल और ईस्ट एशिया से भी आए थे… ये सब मिले तो भारत बना। मगर आदिवासी यहाँ का है, द्रविड़ यहाँ के हैं। ये आर्यन आए थे 4000 साल पहले। हैरत की बात है जब मैंने कहा कि बाबरी की तरह ज्ञानवापी मस्जिद को भी छीनने की कोशिश की जा रही है। तो सोशल मीडिया पर संघ परिवार के लोगों ने कह दिया कि ओवैसी के पूर्वज तो ब्राह्मण थे। मेरा ताल्लुक बाबा आदम से है। हमारे अब्बा कौन हैं… बाबा आदम।” ओवैसी ने कहा, “ऊपर वाले ने आदम को अम्मी के साथ भेजा तो बारत में भेजा। इस हिसाब से ये धरती मेरे भाप की है…।”

जम्मू-कश्मीर में इस्लामी आतंकवादियों द्वारा लोगों को निशाना बनाने पर ओवैसी ने इसका जिम्मेदार मोदी सरकार को दर्शाया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार अनुच्छेद 370 हटाने की बात करती है लेकिन कश्मीर में हिंदू मारे जा रहे हैं। फिल्मी एक्टर को गोली मार दी गई इसका जिम्मेदार कौन है। क्या ये सब मुगल बादशाह अकबर, शाहजहाँ और औरंगजेब ने किया है। ओवैसी ने बढ़ती महंगाई का उदाहरण देकर पीलू खान की मौत का जिम्मेदार, खरगोन में चले बुलडोजर का जिम्मेदार मोदी सरकार को दिखाया और साथ में सवाल भी किया कि मुसलमानों की मौत का जिम्मेदार कौन है?

महाराष्ट्र में अपनी मुस्लिम राजनीति करने के दौरान ओवैसी ने एनसीपी के शरद पवार के ऊपर निशाना साधते हुए पूछा कि आखिर शरद पवार ने संजय राउत को तो जेल जाने से बचा लिया। मगर, नवाब मलिक को क्यों नहीं बचाया। क्या संजय रात, नवाब मलिक से ज्यादा जरूरी हो गए। ओवैसी ने भाजपा, एनसीपी, कॉन्ग्रेस, सपा सबको घेरा और पूछा य़े धर्मनिरपेक्ष दल हैं। लेकिन अगर को मुस्लिम पार्टी का सदस्य जेल जाए तो ठीक है। इस कार्यक्रम में ओवैसी ने खालिद गुड्डू की रिहाई की माँग भी की जिसे 2020 में कई अपराध के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

देश ने लगाया यूनिकॉर्न्स का शतक, कुल मूल्य ₹25 लाख करोड़: पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ के 89वें एपिसोड में कहा- योग दिवस पर देश के 75 जगहों पर कार्यक्रम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रविवार (29 मई 2022) को ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) कार्यक्रम के 89वें एपिसोड को संबोधित करते हुए कई बातों का जिक्र किया। पीएम ने यूनिकॉर्न कंपनी, भाषा-बोली, सामाजिक जुड़ाव और लोगों की प्रेरणादायक कहानियाँ देशवासियों के साथ साझा की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस महीने की 5 तारीख को देश में Unicorn की संख्या 100 हो गई है। उन्होंने कहा कि एक यूनिकॉर्न मतलब, कम-से-कम 7,500 करोड़ रुपए का स्टार्टअप। इन यूनिकॉर्न्स का कुल वैल्यूएशन 330 बिलियन डॉलर, यानी, 25 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के सामर्थ्य से नया विश्वास जागा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “निश्चित रूप से ये बात हर भारतीय के लिए गर्व करने वाली बात है कि हमारे कुल Unicorn में से 44 पिछले साल बने थे।इतना ही नहीं, इस वर्ष के 3-4 महीने में ही 14 और नए Unicorn बन गए। इसका मतलब यह हुआ कि global pandemic के इस दौर में भी हमारे Start-Ups, wealth और value, create करते रहे हैं। Indian Unicorns का Average Annual Growth Rate, USA, UK और अन्य कई देशों से भी ज्यादा है।”

इस दौरान प्रधानमंत्री ने पद्मश्री सम्मान से सम्मानित श्रीधर वेम्बू, मदन पडाकी और मीरा शिनॉय के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, “हमारे यहाँ मदन पडाकी जैसे लोग भी हैं, जिन्होंने rural entrepreneurs को बढ़ावा देने के लिए 2014 में One-Bridge नाम का platform बनाया था। आज One-Bridge दक्षिण और पूर्वी-भारत के 75 से अधिक जिलों में मौजूद है। इससे जुड़े 9,000 से अधिक rural entrepreneurs ग्रामीण उपभोक्ताओं को अपनी सेवाएँ उपलब्ध करा रहे हैं।”

पीएम ने कहा, “मीरा शेनॉय जी एक ऐसी मिसाल हैं, वो Rural, Tribal और disabled youth के लिए Market Linked Skills Training के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं।” उन्होंने कहा कि Start-Up के लिए आज देश में एक पूरा support system तैयार हो रहा है। प्रधानमंत्री ने उपहार में मिले गुड़ियों की भी बात की और कहा कि यह एक special Thanjavur Doll है, जिसे GI Tag भी मिला हुआ है और Thanjavur Self-Help Group द्वारा बनाया जाता है। उन्होंने देश के सभी महिला self Group की सराहना की।

भाषा और बोलियों को लेकर पीएम मोदी ने कहा, हमारे देश में कई सारी भाषा, लिपियाँ और बोलियों का समृद्ध खजाना है। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग पहनावा, खानपान और संस्कृति, ये हमारी पहचान है। ये Diversity, ये विविधता एक राष्ट्र के रूप में हमें अधिक सशक्त करती हैं और एकजुट रखती हैं।”

पीएम मोदी ने उत्तराखंड में चल रहे चारधाम यात्रा का जिक्र किया और कहा कि इन स्थानों पर गंदगी फैलाने से लोगों को बचना चाहिए। उन्होंने रूद्र प्रयाग के रहने वाले श्रीमान मनोज बैंजवाल की बता करते हहुए कहा कि वे पिछले पच्चीस वर्षों से पर्यावरण की देख-रेख कर रहे हैं। वे स्वच्छता की मुहिम चलाने के साथ ही पवित्र स्थलों को प्लास्टिक मुक्त करने में भी जुटे रहते हैं।

योग को आज जीवन का आवश्यक अंग बताते हुए उन्होंने कहा कि विश्व के top Business person से लेकर film और sports personalities तक, students से लेकर सामान्य मानव तक, सभी योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस बार अमृत महोत्सव पर देश के 75 स्थानों पर सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। ये स्थान कोई प्राचीन मंदिर, पर्यटन केंद्र, कोई प्रसिद्ध नदी, झील या तालाब का किनारा भी हो सकता है।

अपनी हालिया जापान यात्रा को लेकर प्रधानमंत्री ने बताया, “वे लोग हैं तो जापान के, लेकिन भारत के प्रति इनमें गज़ब का लगाव और प्रेम है। इनमें से एक हैं हिरोशि कोइके जी, जो एक जाने-माने Art Director हैं। इन्होंने Mahabharat Project को Direct किया है। इस Project की शुरुआत Cambodia में हुई थी और पिछले 9 सालों से ये निरंतर जारी है! इस Project के माध्यम से उन्होंने India, Cambodia और Indonesia सहित नौ देशों में Production किये हैं और Stage Performance भी दी हैं।”

उन्होंने कहा, “हमसे हजारों किलोमीटर दूर जापान में बैठे लोग जो न हमारी भाषा जानते हैं, जो न हमारी परम्पराओं के बारे में उतना जानते हैं, उनका हमारी संस्कृति के लिए समर्पण, ये श्रद्धा, ये आदर, बहुत ही प्रशंसनीय है।” उन्होंने कहा कि स्व से ऊपर उठकर समाज की सेवा का मंत्र, self for society का मंत्र, भारतीय संस्कारों का हिस्सा है। इसे आत्मसात करना चाहिए।

पीएम मोदी ने उत्तर प्रदेश के आगरा के कचौरा गाँव में मीठे पानी की किल्लत को दूर करने वाले कुंवर सिंह का भी जिक्र किया। पीएम ने कहा, “कुंवर सिंह को गाँव से 6-7 किलोमीटर दूर अपने खेत में मीठा पानी मिला। उन्होंने सोचा क्यों न इस पानी से बाकी सभी गाँववासियों की भी सेवा की जाए। खेत से गाँव तक पानी ले जाने के लिए 30-32 लाख रुपए चाहिए थे।”

प्रधानमंत्री ने आगे बताया, “कुछ समय बाद कुंवर सिंह के छोटे भाई श्याम सिंह सेना से retire होकर गाँव आए तो उन्हें ये बात पता चली। उन्होंने retirement पर मिली अपनी सारी धनराशि इस काम के लिए सौंप दी और खेत से गाँव तक pipeline बिछाकर गाँव वालों के लिए मीठा पानी पहुँचाया।”

5 साल में एक भी दंगा नहीं, महिला सुरक्षा भी अभूतपूर्व: योगी सरकार 2.0 के पहले बजट में रफ्तार और भी तेज

पाँच वर्ष पहले जब उत्तर प्रदेश की बात होती थी तो अपराध, दंगा, उपद्रव, माफियागीरी और महिलाओं पर अपराध की चर्चा होती थी। कानून-व्यवस्था की स्थिति दयनीय थी। प्रदेश में माफिया सक्रिय थे। सत्ता और अपराधियों का ऐसा गठजोड़ दिखता था कि त्रस्त जनता ने आस ही छोड़ दी थी। सुखद यह रहा कि 2017 में प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने।

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही प्रदेश का वातावरण परिवर्तित होने लगा। कानून-व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन हुआ और भयमुक्त प्रदेश बनने लगा। प्रदेश की जनता इस परिवर्तन का अनुभव कर रही है। 2022 में सीएम योगी की प्रचंड बहुमत की सरकार बनने के पीछे के अनेक कारणों में से एक बड़ा कारण यह भी रहा।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने आपराधिक तत्वों के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार की उस अघोषित नीति पर प्रहार किया, जिसके अंतर्गत अपराधी को बचाया जाता था और पीड़ित को सताया जाता था। योगी सरकार ने पुलिस और प्रशासन के काम में राजनीतिक हस्तक्षेप को बंद किया।

दबाव-मुक्त पुलिस/प्रशासन

राजनीतिक हस्तक्षेप बंद होने का परिणाम यह हुआ कि सीएम योगी के शासन में पुलिस व प्रशासन ने निष्पक्षता से अपराधियों, गुंडों, भू-माफियाओं, उपद्रवी तत्वों पर कार्रवाई की। इससे डकैती, लूट, हत्या, दुष्कर्म, छेड़खानी, बलवा, भूमि पर कब्जा और दहेज हत्याओं की घटनाओं पर अंकुश लगा।

उत्तर प्रदेश में अब सड़कों पर नमाज के नाम पर हुड़दंग नहीं होता। राम नवमी के त्योहार पर पूरे प्रदेश में 771 जुलूस निकाले गए और 671 मेले लगाए गए, किंतु कहीं कोई अप्रिय घटना, हिंसा या तनाव की घटना नहीं हुई। पहले ईद और अलविदा की नमाज पर प्रदेश भर में हुड़दंग होता था; मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुरादबाद व अन्य स्थान संवेदनशील हुआ करते थे। इन स्थानों पर हिंसा और दंगे का भय बना रहता था।

योगी सरकार आने के पश्चात हुड़दंगियों, दंगाइयों और उपद्रवियों पर निष्पक्षता से कार्रवाई हुई। अयोध्या में पहली बार तीस लाख से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी और शांतिपूर्ण ढंग से हर्षोल्लास के साथ धार्मिक कार्यक्रम सम्पन्न हुए। अब त्योहारों पर जनता भयभीत नहीं रहती, अपितु उल्लास से मनाते हैं।

प्रदेश की कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने को लेकर योगी सरकार ने पिछले पाँच साल में जो किया और अब दूसरी पारी में उसे और तीव्रता से कर रहे हैं। पहले जो गुंडे और माफिया सत्ता के संरक्षण में समानांतर सत्ता चलाते थे, आज वे स्वयं थाने में आत्मसमर्पण कर रहे हैं।

भय/दंगा-मुक्त प्रदेश

पूर्ववर्ती सरकार के समय प्रदेश में महिलाओं का सड़क पर निकलना खतरनाक हो गया था; बलात्कार, छेड़खानी और महिलाओं के विरुद्ध अपराध के प्रकरणों में नंबर एक था। पाँच वर्ष के सीएम योगी के शासन में प्रदेश महिलाओं के लिए देश का सबसे सुरक्षित राज्य बन गया।

सीएम योगी के कार्यकाल में पिछले पाँच साल में एक भी दंगा नहीं हुआ, जबकि अखिलेश के समय में 2012 से 2017 के बीच लगभग एक हजार दंगे हुए थे। वर्ष 2016 के सापेक्ष वर्ष 2022 के अप्रैल तक डकैती में 77 प्रतिशत, लूट के प्रकरणों में 55 प्रतिशत, हत्या में 34 प्रतिशत, बलवा में 50 प्रतिशत, फिरौती हेतु अपहरण में 37 प्रतिशत और बलात्कार की घटनाओं में 28 प्रतिशत की कमी अंकित हुई है।

योगी सरकार में प्रदेश के 50 कुख्यात माफिया अपराधियों द्वारा अवैध रूप से अर्जित 1438 करोड़ की सम्पत्ति जब्त की और ध्वस्तीकरण करके अवैध कब्जा हटवाया गया। कुल मिलाकर माफियाओं व अन्य अपराधियों की कुल 24 अरब 14 करोड़ की सम्पति का जब्तीकरण अथवा ध्वस्तीकरण किया गया।

ये सब योगी सरकार के सबको सुरक्षा एवं सबको सम्मान, अपराध एवं अपराधियों के प्रति शून्य सहिष्णुता, प्रदेश में शांति और सौहार्द स्थापित करने, महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, माफिया राज समाप्त करके प्रदेश में कानून व्यवस्था का राज लाने के संकल्प और सुशासन से संभव हुआ। आज प्रदेश की कानून-व्यवस्था इतनी अच्छी है कि शांतिपूर्वक बिना किसी कोलाहल के धार्मिक स्थलों से 64000 अनधिकृत ध्वनि विस्तारक हटाए गए और 57000 ध्वनि विस्तारकों को निर्धारित सीमा में किए गए।

कुछ समय पूर्व चुनाव के समय हुए एक सर्वे में यह सामने आया कि उत्तर प्रदेश के 56 प्रतिशत निवासी मानते हैं कि पिछले पाँच वर्षों में कानून-व्यवस्था में बड़ा सुधार हुआ है, जबकि 22 प्रतिशत लोगों का मानना है कि कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है। कुल मिलाकर 78 प्रतिशत लोग मानते हैं कि राज्य का वातावरण सुरक्षित हुआ है।

सबकी सुरक्षा प्राथमिकता

योगी सरकार में अभूतपूर्व महिला सुरक्षा की व्यवस्था हुई है। वर्ष 2022-23 के बजट में भी दिखा कि कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा योगी सरकार की प्राथमिकता है। योगी सरकार 2.0 के पहले बजट में महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। इसमें राज्य के सभी जनपदों के समस्त 1535 थानों पर महिला बीट आरक्षी नामित करते हुए ‘महिला हेल्प डेस्क’ की स्थापना का प्रावधान किया गया है।

‘महिला हेल्प डेस्क’ के अतिरिक्त 2740 महिला पुलिस कार्मिकों को 10370 महिला बीटों का आवंटन किया गया है। लखनऊ, गोरखपुर और बदायूं में तीन महिला पीएसी बटालियन का गठन किया गया है। सेफ सिटी योजना के अन्तर्गत महिलाओं की सुरक्षा के लिए लखनऊ, गौतमबुद्ध नगर, आगरा, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज में योजना लागू किए जाने हेतु 523 करोड़ 34 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है।

इसके अतिरिक्त प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। आतंकवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए देवबंद में आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) केंद्र का निर्माण कार्य प्रगति पर है। मेरठ, बहराइच, कानपुर, आजमगढ़ एवं रामपुर में ऐसे केंद्रों का निर्माण प्रस्तावित है।

इस बजट में 37 सौ करोड़ रुपए की धनराशि पुलिस सुदृढ़ीकरण और आधारभूत ढाँचों के विकास और पुलिस सुधार के लिए प्रस्तावित किया गया है। प्रदेश पुलिस के आँकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में 97 मामले दर्ज किए गए थे, लेकिन इस बार मात्र 33 घटनाएँ हुईं। इन घटनाओं में कोई भी व्यक्ति न तो गंभीर रूप से घायल हुआ और न ही किसी की मृत्यु हुई है।

स्पष्ट देखा जा सकता है कि भाजपा की सरकार आने के पश्चात उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है। प्रदेश सभी नागरिकों के लिए सुरक्षित हो गया है। कानून-व्यवस्था अच्छी होने के कारण राज्य में औद्योगिक विकास व निवेश हो रहे हैं। प्रदेश की अर्थव्यवस्था और जनता का जीवन स्तर अच्छा हुआ है। पिछली सरकारों के समय अपराध और गुंडाराज से त्रस्त प्रदेश को पाँच वर्ष में देश का सबसे सुरक्षित राज्य बना देने की सीएम योगी की यह उपलब्धि असाधारण है।

रजनू खान ने हमला कर 2 पुलिस वालों को घायल किया, लहराए धारदार हथियार और बरसाए पत्थर: अब बताया जा रहा ‘मानसिक बीमार’

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में 2 पुलिसकर्मियों पर धारदार हथियार से हमला किया गया है। इस हमले में एक पुलिसकर्मी की गर्दन को निशाना बनाया गया। घायल पुलिसकर्मी को बचाने दौड़े दूसरे सिपाही को भी हमलावर ने बाँका (धारदार हथियार) मार कर घायल कर दिया। हमलावर का नाम रजनू खान है। घटना 28 मई, 2022 (शनिवार) की है।

कुशीनगर पुलिस के एडिशनल एस पी के मुताबिक, “पुलिस लाइन कुशीनगर में तैनात कॉन्स्टेबल मासूम अली एक बयान देने CO ऑफिस गए थे। वापस लौटते समय खड्डा बाजार के सुभाष चौक पर एक व्यक्ति द्वारा उन पर धारदार हथियार से हमला किया गया। घायल सिपाही को इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया गया। आरोपित को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पूछताछ में उसने अपना नाम रजनू खान (S/o जैसू खान) बताया है।” बताया जा रहा है कि हालत गंभीर होने के चलते घायल पुलिसकर्मी मासूम अली को गोरखपुर रेफर कर दिया गया है।

ASP कुशीनगर रितेश कुमार सिंह के मुताबिक, “हमलावर ने अपना पता सुल्तानपुर जिले के थाना कूरेभार में आने वाले गाँव धर्मदासपुर बताया है। आरोपित पिछले डेढ़ महीने से खड्डा में बन रही कचहरी परिसर में मजदूर के तौर पर काम कर रहा था। आरोपित प्रथम दृष्टया मानसिक रूप से अस्वस्थ लग रहा है। आरोपित को कस्टडी में लेने के दौरान कॉन्स्टेबल प्रेम नारायण को भी हल्की चोटें आईं हैं। उन्हें भी इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। मामले में जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।’

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावर को स्थानीय लोगों और पुलिस ने मिल कर काबू किया। स्थानीय लोगों ने रजनू खान की पिटाई भी की। मौके पर पहुँचे DSP संदीप वर्मा ने बताया, “प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावर अकेला था। पकड़े जाने पर वो खुद को किसी के द्वारा मृत्युदंड दिए जाने की बात कह रहा था। फ़िलहाल आरोपित विक्षिप्त लग रहा है लेकिन बाकी तथ्य जाँच में सामने आएँगे।” वीडियो में रजनू खान को पकड़ने के लिए कई पुलिस वालों को मशक्कत करते देखा जा सकता है।

एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, “मेरी दुकान बगल में ही है। मेरी दुकान के बगल से ही हमलावर निकल कर गया। पुलिसकर्मी बस की प्रतीक्षा करते हुए खीरा खरीद कर खा रहे थे। उन्होंने किसी को कुछ नहीं कहा। तभी हमलावर ने आ कर पुलिसकर्मियों को अपशब्द कहे। बाद में धारदार हथियार से पुलिसकर्मी के गले पर वार कर दिया। जब पुलिसकर्मी गिर पड़ा तब वो हथियार लहराने लगा। लोगों में भगदड़ मच गई। बाद में बाकी पुलिस बल आया। तब हमलावर पत्थरबाजी करने लगा।”