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जिसे आप कहते हैं कुतुब मीनार, वो है सूर्य स्तंभ: ये रहे 20 साक्ष्य, ASI के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक ने बताया- होती थी नक्षत्रों की गणना

दिल्ली के महरौली स्थित कुतुब मीनार को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक धर्मवीर शर्मा ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि यह मीनार नहीं, बल्कि एक सूर्य स्तंभ है। उन्होंने कहा कि यह मीनार एक वेधशाला है, जिसमें नक्षत्रों की गणना की जाती थी। इस वेधशाला के जरिए सूर्य, तारों और नक्षत्रों का अध्ययन किया जाता था। इस मीनार के तीसरी मंजिल पर देवनागरी में सूर्य स्तंभ के बारे में जिक्र भी है। 27 नक्षत्रों की गणना के लिए इस स्तंभ में दूरबीन वाले 27 स्थान भी हैं।

उन्होंने दावा किया कि इसका निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने नहीं, बल्कि सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने करवाया था। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने अपने दावे की पुष्टि के लिए 20 तर्क दिए हैं। इसमें कर्क रेखा के ऊपर बनाए जाने से लेकर वेधशाला और मुख्य द्वार के ध्रुव तारे की दिशा की ओर खुलने का उल्लेख किया गया है। धर्मवीर शर्मा ने वेधशाला के पक्ष में निम्न साक्ष्य दिए हैं;

  1. कुतुबमीनार 25 इंच दक्षिण की तरह झुकी हुई है।
  2. इसे कर्क रेखा के ऊपर बनाया गया है। 
  3. यह कर्क रेखा से 5 डिग्री उत्तर में स्थित है।
  4. 21 जून को दोपहर 12 बजे कुतुबमीनार की छाया जमीन पर नहीं पड़ती है।
  5. उत्तरायण से दक्षिणायन में सूर्य ठीक 12 बजे आता है।
  6. स्तंभ में 27 आले हैं, जिनमें आँख लगाकर बाहर देखा जा सकता है। इन्हें आप दूरबीन वाले स्थान भी कह सकते हैं। इसमें तीन लोग बैठ सकते हैं।
  7. यह केवल नक्षत्रों के अध्ययन करने के लिए था और बीच में सूर्य स्तंभ था।
  8. कुतुबमीनार के मुख्य गेट से अगर आप 25 इंच अपनी पीठ झुकाकर ऊपर देखेंगे तो आपको ध्रुव तारा नजर आएगा।
  9. इसकी तीसरी मंजिल पर देवनागरी में सूर्य स्तंभ के बारे में जिक्र भी है। 
  10. यह वेधशाला विष्णु पद पहाड़ी पर थी। इसका निर्माण वराहमिहिर की अध्यक्षता में परमार वंश के राजा विक्रमादित्य ने करवाया था।
  11. वेधशाला के ऊपर कोई छत नहीं है।
  12. इस वेधशाला का मुख्य द्वार ध्रुव तारे की दिशा की ओर खुलता है।
  13. इस मीनार के ऊपर बेल बूटे घंटियाँ आदि बनी हैं, जो हिंदुओं की सभ्यता का प्रतीक है।
  14. इसके भीतर देवनागरी में लिखे हुए कई अभिलेख हैं जो सातवीं और आठवीं शताब्दी के हैं।
  15. इसे बनाने वालों के इसके ऊपर जो नाम लिखे हैं उनमें एक भी मुस्लिम नहीं था। इसे बनाने वाले सभी हिंदू थे।
  16. इसका इस्तेमाल अजान देने के लिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे अंदर की आवाज बाहर की ओर नहीं जाती है।
  17. निर्माण कई चरणों में होने की बात भी गलत है। इसका निर्माण एक ही बार में किया गया था। 
  18. मीनार में बाहर की ओर फारसी में लिखा गया है।
  19. इस मीनार के चारों ओर 27 नक्षत्रों के सहायक मंदिर थे, जिन्हें तोड़ दिया गयाहै।
  20. आले के ऊपर पल और घटी जैसे शब्द देवनागरी में लिखे हुए हैं। इसका मुख्य द्वार छोड़कर सभी द्वार पूर्व की ओर खुलते हैं।

बता दें कि पिछले दिनों पुरातत्वविद धर्मवीर शर्मा ने कुतुब मीनार परिसर में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद के एक खंभे में लगी मूर्ति की पहचान नरसिंह भगवान और भक्त प्रह्लाद की मूर्ति के रूप में की थी। धर्मवीर शर्मा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में क्षेत्रीय निदेशक रहे हैं। उनका दावा है कि यह मूर्ति आठवीं-नौवीं सदी में प्रतिहार राजाओं के काल की है। इसे वर्षों से पहचानने की कोशिश की जा रही थी, काफी दिनों के प्रयास के बाद अब पुरातत्वविद ने इस मूर्ति की पहचान की है।

उनका दावा है कि मूर्ति आठवीं या नौवीं शताब्दी की है। उस समय प्रतिहार राजाओं व राजा अनंगपाल प्रथम का समय था। प्रतिहार राजाओं में मिहिर भोज सबसे प्रतापी राजा हुए। इस मूर्ति के चित्र देश के मूर्धन्य पुरातत्वविदों को विशेष अध्ययन के लिए भेजे गए हैं। उनका कहना है कि यह नरसिंह भगवान की दुर्लभतम प्रतिमा है और अन्य कहीं इस तरह की मूर्ति नहीं मिलती है।

बता दें कि दिल्ली के साकेत कोर्ट ने मंगलवार (17 मई 2022) को कुतुबमीनार परिसर में 27 हिंदू और जैन मंदिरों की बहाली के संबंध में एक अपील पर सुनवाई 24 मई के लिए स्थगित कर दी। अपील में कहा गया है कि कुतुब मीनार परिसर के भीतर स्थित कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद को मंदिर परिसर के स्थान पर बनाया गया है। पिछले दिनों कुतुबमीनार परिसर के बाहर हिन्दू संगठनों ने हनुमान चालीसा पाठ कर स्मारक का नाम बदलकर ‘विष्णु स्तंभ’ किए जाने की माँग करते हुए प्रदर्शन किया था। 

गौरतलब है कि इससे पहले इतिहासकार और पुरातत्वविद (आर्कियोलॉजिस्ट) केके मोहम्मद ने कहा था कि दिल्ली के कुतुब मीनार परिसर में स्थित कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद का निर्माण 27 हिन्दू-जैन मंदिरों को तोड़कर किया गया है। उन्होंने कहा था कि मंदिरों को तोड़कर निकाले गए पत्थरों से ही कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद बनाई गई है। उस जगह पर अरबी में पाए गए अभिलेखों में इस बात का उल्लेख भी किया गया है। उन्होंने कहा था कि कुतुबमीनार के पास जिन मंदिरों के अवशेष मिले हैं उनमें गणेश की एक नहीं कई मूर्तियाँ हैं। इससे सिद्ध होता है कि वहाँ गणेश मंदिर थे। उन्होंने बताया कि बताया कि ताजूर मासिर नामक किताब में भी इसका जिक्र है।

बुर्का पहन कर आए आतंकियों ने ग्रेनेड से किया हमला, कर्मचारी की मौत: CRPF पर भी बुर्कानशीं महिला ने किया था हमला

जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में मंगलवार (17 मई 2022) को बुर्का पहने एक आतंकवादी ने एक नई खुली शराब की दुकान पर ग्रेनेड से हमला कर दिया, जिससे एक कर्मचारी की मौत हो गई और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह जानकारी पुलिस ने दी है। पुलिस ने बताया कि रात करीब 8 बजे बाइक सवार दो आतंकवादी बारामूला के दीवान बाग इलाके में स्थित नई शराब की दुकान के पास रुके। इसके बाद बाइक पर पीछे बुर्का पहनकर बैठा एक आतंकवादी उतरा और उसने दुकान पर ग्रेनेड से ​हमला कर दिया।

पुलिस ने आगे बताया कि हमले को अंजाम देने के बाद दोनों बाइक पर बैठकर फरार हो गए। वहीं, हमले में दुकान में काम करने वाले चार कर्मचारी घायल हो गए हैं, जिन्हें उपचार के लिए पास के एक अस्पताल भर्ती कराया गया है। जहाँ इनमें से एक की मौत हो गई है। वहीं अन्य तीन घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही है।

पुलिस ने यह भी बताया कि मृतक की पहचान रंजीत सिंह (52) के रूप में हुई जो कि राजौरी जिले का निवासी था। घायलों की पहचान गोवर्धन सिंह और रवि सिंह निवासी कठुआ और गोविंद सिंह निवासी राजौरी के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि गोविंद सिंह को उपचार के लिए श्रीनगर के अस्पताल को रेफर किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तत्काल घटनास्थल पर पहुँचे और इलाके की घेराबंदी कर हमलावरों की तलाश शुरू कर दी गई है।

गौरतलब है कि दो महीने पहले (29 मार्च 2022) बारामुला जिले के सोपोर में शाम के वक्त बुर्का पहने एक संदिग्ध ने सीआरपीएफ के बंकर पर पेट्रोल बम फेंका था। ये घटना सीसीटीवी में भी कैद हो गई, लेकिन सीसीटीवी फुटेज से यह स्पष्ट नहीं हो रहा था कि बुर्के में हमला करने वाला पुरुष था या महिला। हालाँकि आईजीपी कश्मीर विजय कुमार ने इसको लेकर बताया था कि बारामुला जिले के सोपोर कस्बे में सीआरपीएफ बंकर पर बुर्का पहन हमला करने वाली एक महिला थी। वह महिला लश्कर-ए-तैयबा की ओवर ग्राउंड वर्कर है और पहले भी कुछ आपराधिक मामलों में शामिल पाई गई है।

उसकी धरपकड़ के लिए पुलिस और सुरक्षाबल ने संयुक्त अभियान चलाया था। इसी तरह 2020 में श्रीनगर के शोपियां पुलिस स्टेशन पर आतंकियों ने ग्रेनेड फेंक कर हमला किया था। मगर वह ब्लास्ट नहीं हुआ और आतंकी वहाँ से भाग गए। जिसके बाद मौके पर मौजूद पुलिस बल तुरंत आतंकियों के तलाश में जुट गई थी।

अब तक 23 लाख नई कंपनियों का रजिस्ट्रेशन, अकेले अप्रैल में 16000 नई कंपनियाँ: रंग ला रही है मोदी सरकार की स्टार्टअप योजना

अप्रैल, 2022 में देश में 15,905 कंपनियाँ पंजीकृत हुईं और पिछले महीने के अंत तक कुल 14,51,401 कंपनियाँ सक्रिय थीं। यह जानकारी सरकार के आधिकारिक आँकड़ो के अनुसार सामने आईं हैं। वहीं कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के नवीनतम आँकड़ो से पता चला है कि 30 अप्रैल, 2022 तक कुल 23,33,958 कंपनियाँ कंपनी कानून के तहत रजिस्टर थीं।

इनमें से 8,29,269 कंपनियाँ बंद हो गईं और 7,021 लिक्विडेशन प्रक्रिया में थी। इनके अलावा 43,851 कंपनियाँ आधिकारिक रिकॉर्ड से अलग होने की प्रक्रिया में थीं तो 2,416 कंपनियाँ ‘निष्क्रिय स्थिति’ में पहुँच गई थीं। मंत्रालय द्वारा मासिक समाचार पत्र में उपलब्ध कराए गए नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल के अंत में 14,51,401 सक्रिय कंपनियाँ थीं, जिनमें पिछले 18 महीनों के भीतर 2,53,131 कंपनियाँ शामिल थीं।

मंत्रालय ने कहा, “अप्रैल 2022 के दौरान कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत 851 वन परसन कंपनियों (OPCs) सहित कुल 15,905 कंपनियों को 2,316.52 करोड़ रुपए की अधिकृत पूँजी के साथ पंजीकृत किया गया था।”

बता दें कि कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय कंपनी कानून लागू कर रहा है। जिसके तहत कॉर्पोरेट मामलों के सचिव राजेश वर्मा ने इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के विभिन्न पहलुओं पर की जानकारी दी है।

उन्होंने कहा, “वर्तमान में विश्व बैंक डूइंग बिजनेस रिपोर्ट के अलावा इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्सी व्यवस्था के परिणामों को ट्रैक करने के लिए कोई मानक ढाँचा नहीं है और यह भी हाल ही में बंद कर दिया गया था। इसलिए, IBC द्वारा बनाए गए इन्सॉल्वेंसी ढाँचे के प्रभाव का अध्ययन करना और एक SWOT विश्लेषण करना यानी नियमित आधार पर इसकी ताकत, कमजोरियों, अवसरों और खतरों की जाँच करना महत्वपूर्ण है।”

गौरतलब है कि मोदी सरकार का स्टार्टअप पर काफी फोकस है। इसमें भी सरकार टियर-2 और टियर-3 शहरों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल मंगलवार (17 मई, 2022) को राष्ट्रीय स्टार्टअप सलाहकार परिषद की बैठक में शामिल हुए और परिषद से वेंचर कैपिटल फंडिंग, क्षमता निर्माण और स्टार्टअप को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए टियर-2 और टियर-3 शहरों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है।

टॉयलेट सीट को बता दिया शिवलिंग… भगवान शिव पर ओछी टिप्पणी करने वाला नसीम और अरमान धराया, मुस्लिम भीड़ का थाने पर हमला

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे पर सुनवाई शुरू होने के बाद से अचानक सोशल मीडिया पर हिन्दू देवी-देवताओं के खिलाफ बयानबाजी और उनके अपमान किए जाने की घटनाएँ बढ़ गई हैं। इसी क्रम में हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित पावंटा साहिब की हैं, जहाँ शिवलिंग को लेकर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं, जिससे इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना पावंटा साहिब थाने के अंतर्गत माजरा में शिवलिंग को लेकर विवादित बयान देने के मामले में 2 आरोपितों पावंटा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष नसीम राज और सैलून की दुकान चलाने वाले अरमान मलिक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इससे भड़के मुस्लिम कट्टरपंथियों पुलिस स्टेशन पर ही हमला कर दिया। मुस्लिमों ने लाठी-डंडों और तलवारें लेकर थाने को घेर लिया। इस बीच जैसे ही इसकी खबर हिन्दू समुदाय को लगी तो वे हिन्दू समुदाय के सैकड़ों लोग भी थाने पहुँच गए। दोनों तरफ से नारेबाजी की गई।

हालात बेकाबू होते देख जिले के डीसी और एसपी समेत सभी सीनियर अधिकारी मौके पर पहुँचे और लोगों को समझाने की कोशिशें की। बाद में किसी तरह मामले को शांत कराया जा सका। बहरहाल इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स को डिप्लॉय किया गया है।

ज्ञानवापी के कारण भगवान शिव का किया गया अपमान

इस बीच हिमाचल प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक सुखराम चौधरी ने इसे ज्ञानवापी विवादित ढाँचे से जोड़कर देखा और दावा किया कि ज्ञानवापी विवाद के कारण कुछ लोगों ने पावंटा में भगवान शिव पर अभद्र टिप्पणी की है। ये हिन्दू-मुस्लिम तनाव को बढ़ाने की साजिश है। वहीं बीजेपी की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने कहा है कि हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान को सहन नहीं करेंगे।

क्या है पूरा मामला

फेसबुक का स्क्रीनशॉट

गौरतलब है कि फेसबुक पर अरमान मलिक नाम के मुस्लिम युवक ने हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाली पोस्ट को फेसबुक पर डाला था। बताया जाता है कि वो माजरा का रहने वाला है। वहीं दूसरी आरोपित है नसीम नाज है। इसने इस पोस्ट को शेयर किया था। दावा किया डा रहा है कि नसीम नाज बीजेपी के अल्पसंख्यक मार्चा का अध्यक्ष है।

Himachal Pradesh Sirmaur Arman malik posted Derogatory post about Shivling Hindu-Muslim tension emerged

मौलाना तौकीर रजा को कोर्ट पर विश्वास नहीं, कहा- इस्लाम अपनाने वाले हिन्दुओं ने खुद मंदिरों को बना दिए मस्जिद, बाबरी पर सब्र किया पर अब नहीं

उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi, Uttar Pradesh) में विवादित ज्ञानवापी ढाँचे (Gyanvapi Controversial Structure) में सर्वे के दौरान शिवलिंग एवं अन्य हिंदू प्रतीकों के मिलने के बाद मुस्लिम नेता तरह-तरह की दलील देकर स्वयं को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। अपने विवादित बयानों के कारण अक्सर आलोचना का सामना करने वाले बरेली के मौलाना और कॉन्ग्रेस नेता (Congress Leader) तौकीर रजा खान (Tauqeer Raza Khan) ने एक बार फिर बेढब बयान दिया है। इसके साथ ही उन्होंने हिंदुओं धमकी भी दी है।

इत्तेहाद मिल्लत काउंसिल (Ittehad Millat Council) के प्रमुख तौकीर रजा ने कहा कि देश में किसी भी मंदिरों को तोड़ा नहीं गया था, बल्कि बड़ी संख्या में इस्लाम में धर्मांतरण करने वाले लोगों ने अपने धार्मिक स्थलों को मस्जिद में बदल दिया था। उन्होंने कहा कि ऐसे मस्जिदों को ना छुआ जाए और किसी ने ऐसा किया तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। उन्होंने हा कि देश के अदालतों पर उन्हें विश्वास नहीं है।

तौकीर रजा ने कहा कि ज्ञानवापी का सर्वे बंद कमरों के लिए हुए था खुले हौज के लिए नहीं। हौज के फव्वारे को शिवलिंग बताकर हिंदुत्व का मजाक उड़ाया जा रहा है। सरकार को फौव्वारा और शिवलिंग में अंतर समझ नहीं आता है। उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानवापी ढाँचे में शिवलिंग है तो तो हिंदू हर जिले और हर सूबे के मस्जिदों के फव्वारे को शिवलिंग कहेंगे।

तौकीर रजा ने दी धमकी, कहा- कोर्ट पर विश्वास नहीं

उन्होंने कहा, ”मुस्लिम कानूनी लड़ाई नहीं चाहते, क्योंकि वे बाबरी मस्जिद का फैसला देख चुके हैं। इस बार हम किसी कोर्ट में अपील नहीं करेंगे। नफरत बेचने वालों देश के हर मस्जिद में फव्वारे के साथ शिवलिंग मिलेगा। जामा मस्जिद के हौज का फोटो ले लीजिए, नौमहला मस्जिद में भी पत्थर मौजूद हैं। यदि उनका बस चले तो वे सब पर अतिक्रमण करेंगे। देश में शांति रखने के लिए मुस्लिम अब तक चुप रहे हैं।” 

मौलाना तौकीर रजा ने धमकी भरे अंदाज में कहा, “बाबरी मस्जिद पर मुस्लिमों ने सब्र कर लिया, लेकिन अब वे नहीं करेंगे। ज्ञानवापी मामले में अगर जबर्दस्ती की गई तो सरकार को मुस्लिमों का भारी विरोध झेलना पड़ेगा। हुकूमत हर मस्जिद को मंदिर बनाना चाहती है। इसके नतीजे गंभीर हो सकते हैं। हमारी मजबूरी को कमजोरी न समझें।”

संघ ने जिन्ना के जरिए कराया हिंदुस्तान का बंटवारा

उन्होंने कहा कि ऐसे विवाद पैदा कर हिन्दू-मुस्लिम को उलझाया जा रहा है, ताकि हिन्दुस्तान में एक और बँटवारा करवाया जाए। रजा ने कहा कि हिंदुस्तान और पाकिस्तान का बँटवारा किसी मुस्लिम ने नहीं कराया था। वह संघ (RSS) की साजिश थी हिंदू राष्ट्र बनाने की और एक हिंदू गुंजालाल ठक्कर के बेटे जिन्ना का सहारा लिया।

तौकीर रजा ने नई थ्योरी पेश करते हुए कहा कि जिन्ना ने अपने घर में विवाद होने के बाद इस्लाम धर्म अपना लिया था। वह कभी इस्लामी परंपराओं को नहीं माने। उन्होंने नाथूराम गोडसे को लेकर कहा कि गोडसे ने महात्मा गाँधी की हत्या के लिए खतना करा लिया, ताकि हत्या के बाद मर जाए उसकी पहचान मुसलमान के रूप में हो और देश में दंगे भड़क जाएँ। यह भी संघ की एक चाल थी।

… तो हिंदुओं को भागने की जगह नहीं मिलेगी: तौकीर रजा

इस साल जनवरी में तौकीर रजा ने एक महजबी आयोजन कर हिंदुओं के खिलाफ खूब जहर उगला था और उन्हें धमकी दी थी। इस दौरान भड़काऊ भाषण देते हुए रजा ने कहा कि जिस दिन मुस्लिम कानून हाथ में ले लेंगे, उस दिन हिंदुओं को पूरे देश में कहीं पनाह नहीं मिलेगा।

रजा ने कहा था, “अगर ये गुस्सा फुट पड़ा, जिस दिन मेरा नौजवान मेरे कंट्रोल से बाहर आ गया उस दिन….. । लोग मुझे कहते हैं कि तुम तो बुजदिल हो गए हो, तो मैं कहता हूँ कि पहले मैं मरूँगा, उसके बाद तुम्हारा नंबर आएगा। मैं अपने हिंदू भाइयों से खासतौर पर कहता हूँ कि मुझे उस वक्त से डर लगता है, जिस दिन मेरा ये नौजवान कानून अपने हाथ में ले लेगा उस दिन हिंदुस्तान में तुम्हें रहने की कहीं जगह नहीं मिलेगी।”

तौकीर रजा ने हिंदुओं को चुनौती देते हुए कहा था, “लड़ने का तुम्हें बहुत शौक है, लेकिन तुम लड़ने की बात कर सकते हो, लड़ नहीं सकते हो। लड़ाई तो हमारे खून में है, हम पैदाइशी लड़ाकू हैं।” मौलाना ने कहा कि उनकी बहू-बेटियों को बरगलाने और जाल में फँसाने की बात कही जाती है, और मुस्लिम खून का घूँट पीकर रह जाते हैं।

गुजरात चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे ‘अंडरग्राउंड’ हुए हार्दिक पटेल: लिखा- शीर्ष नेतृत्व मोबाइल में बिजी, नेताओं का ध्यान चिकन सैंडविच पर

गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस को बड़ा झटका देते हुए हार्दिक पटेल ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है। अपने इस्तीफे की जानकारी हार्दिक ने ट्वीट के जरिए दी। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कॉन्ग्रेस से अलग होकर वह गुजरात के लिए सच में सकारात्मक काम कर पाएँगे। सूत्रों के अनुसार, इस इस्तीफे के बाद से वह ‘अंडरग्राउंड’ हो गए हैं।

हार्दिक पटेल ने 18 मई को अपने ट्विटर पर हिंदी, अंग्रेजी और गुजराती में पत्र साझा करते हुए लिखा, “आज मैं हिम्मत करके कॉन्ग्रेस पार्टी के पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूँ। मुझे विश्वास है कि मेरे इस निर्णय का स्वागत मेरा हर साथी और गुजरात की जनता करेगी। मैं मानता हूँ कि मेरे इस कदम के बाद मैं भविष्य में गुजरात के लिए सच में सकारात्मक रूप से कार्य कर पाऊँगा।”

अपने बयान में हार्दिक पटेल ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी देशहित व समाज हित के बिलकुल विपरीत कार्य कर रही है। उन्होंने कॉन्ग्रेस में एक सक्षम और मजबूत नेतृत्व न होने को लेकर अपनी शिकायत की। साथ ही कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी सिर्फ विरोध की राजनीति कर रही है जबकि देश के लोग विकल्प चाहते हैं जो उनके भविष्य के लिए सोचता हो।

हार्दिक ने शिकायत की कि कॉन्ग्रेस अयोध्या से लेकर अनु्च्छेद 370, जीएसटी से लेकर सीएए तक के मुद्दे पर केवल केंद्र का विरोध करती रही। वह कहते हैं कि कॉन्ग्रेस पार्टी को आज देश का हर राज्य रिजेक्ट कर चुका है, इसकी वजह यही है क्योंकि कॉन्ग्रेस पार्टी और पार्टी का नेतृत्व जनता के समक्ष एक रोडमैप प्रस्तुत नहीं करता। उनके शीर्ष नेतृत्व में ही गंभीरता की भारी कमी है।

हार्दिक बताते हैं कि जब वो शीर्ष नेतृत्व से मिले और गुजरात की समस्या पर बात करनी चाही तो साफ पता चला कि उनका ध्यान गुजरात की परेशानियों से ज्यादा मोबाइल व बाकी की चीजों पर है। इतना ही नहीं, वह कहते हैं कि जब भी देश संकट में था और कॉन्ग्रेस नेतृत्व की जरूत पड़ी तो वो विदेश में थे। ये व्यवहार बिलकुल ऐसा ही है जैसे कॉन्ग्रेस को गुजरात से नफरत हो।

उन्होंने पार्टी की स्थिति देख दुख जताया और कहा कि कार्यकर्ता 500-600 किलोमीटर अपने खर्चे पर यात्रा करके जनता के बीच जाते हैं। लेकिन पार्टी के बड़े नेताओं की चिंता होती है कि पार्टी नेतृत्व ने चिकन सैंडविच खाया या नहीं। वह कहते हैं कि उन्हें कई युवाओं ने पूछा था, ‘तुम ऐसी पार्टी में क्यों हो जो हर समय हर क्षेत्र में गुजरातियों का अपमान करती है।’ हार्दिक मानते हैं कि कॉन्ग्रेस ने बुरी तरह युवाओं का भरोसा तोड़ा है। यही वजह है कि कोई युवा कॉन्ग्रेस के साथ दिखना भी नहीं चाहता।

गुजरात में कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं पर हार्दिक ने आरोप लगाया कि उन लोगों ने जानबूझकर गुजरातियों के मुद्दे को कमजोर किया है और इसके बदले आर्थिक फायदा उठाया है। वह कहते हैं कि कॉन्ग्रेस गुजरात के लिए कुछ भी अच्छा नहीं करना चाहती। इसलिए जब उन्होंने गुजरात हित में कदम उठाए तो उनका भी तिरस्कार किया गया। हार्दिक पटेल ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कॉन्ग्रेस का नेतृत्व प्रदेश, समाज और युवाओं के लिए द्वेष भाव रखता है।

हार्दिक पटेल की कॉन्ग्रेस से नाराजगी

बता दें कि गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने साल 2017 में गुजरात विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस को समर्थन दिया था। इसके बाद साल 2019 में 12 मार्च को वो आधिकारिक तौर पर पार्टी से जुड़े थे। कुछ दिन से उनकी पार्टी से अनबन मीडिया में थी। उन्होंने पीछे दिनों कहा था कि पार्टी में उनकी जगह ऐसी है जैसे नए दूल्हे की नसबंदी करवा दी जाए।

ज्ञानवापी मामले में कूदा AIMPLB, मुस्लिम पक्ष को देगा ‘हर तरह की’ कानूनी सहायता: किताबें-पैम्पलेट छपवा कर बनाएगा नैरेटिव

वाराणसी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे का मुद्दा अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। ज्ञानवापी ढाँचे (Gyanvapi Mosque) के वजूखाना में शिवलिंग मिलने के बाद से जहाँ हिंदू अपने पक्ष में आवाज बुलंद कर रहे हैं, वहीं मुस्लिम पक्ष भी इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई के तरीके तलाश रहा है। हिंदुओं ने ज्ञानवापी के नीचे की दीवार को तोड़ने की माँग ​की है। उधर मुस्लिमों के सबसे बड़े संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने ऐलान किया है कि वह इस मामले में मुस्लिम पक्ष को हर तरह से कानूनी सहायता देगा।

उधर समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, अधिवक्ता विष्णु जैन ने कहा, “कोर्ट ने एडवाइजर अजय मिश्रा को हटाने का आदेश दिया है। इसके अलावा, हमने अदालत में एक अर्जी दी है कि वुजू खाने (ज्ञानवापी विवादित ढाँचे की) के नीचे की दीवार को गिरा दिया जाए और हमें वहाँ जाने दिया जाए। उसी पर आज कोर्ट फैसला सुनाएगी।”

आपको बता दें कि AIMPLB ने मंगलवार (16 मई, 2022) शाम को इस मुद्दे पर अपनी कार्यकारिणी की वर्चुअल बैठक भी बुलाई थी। बैठक में फैसला लिया गया कि यह मामला अभी अदालतों में है, इसलिए बोर्ड की लीगल कमेटी केस को लड़ने में मुस्लिम पक्ष की हर संभव मदद करेगी। इसके साथ ही मीडिया पर सटिक और पूर्ण जानकारी नहीं देने का आरोप लगाते हुए AIMPLB ने लोगों को मुस्लिम पक्ष के बिंदुओं से जागरूक करवाने के लिए पैम्पलेट और किताबें छपवाने का भी ऐलान किया, ताकि वह सभी तथ्यों के साथ लोगों को पूरे विवाद के बारे में बता सकें।

AIMPLB क्या है

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के मुद्दे पर मुस्लिमों की मदद का ऐलान करने वाला ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) अक्सर अपने बयानों के कारण विवादों में रहता है। इसने देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) कानून पर भी आपत्ति जताते हुए इसका विरोध किया था। All India Muslim Persona Law Board खुद को मुस्लिमों का रहनुमा बताता है। इससे पहले भी यह स्कूलों में सूर्य नमस्कार, राम जन्मभूमि, CAA-NRC, तीन तलाक कानून का खात्मा, हिजाब बैन, लाउडस्पीकर बैन सहित तमाम मामलों को मुस्लिमों से जोड़कर इसका विरोध करता रहा है। यहाँ तक आतंकी गतिविधियों में शामिल मुस्लिमों के बचाव में भी कई बार यह संगठन सामने आ चुका है।

कश्मीर से नागपुर लाया गया जैश आतंकी रईस अहमद, RSS मुख्यालय की रेकी कर Video पाकिस्तान भेजा था

महाराष्ट्र के नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय की रेकी के मामले में कश्मीर से जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के एक आतंकी को गिरफ्तार किया गया है। रेकी कर इस आतंकी ने वीडियो पाकिस्तान स्थित अपने हैंडलर को भेजा था। इसके अलावा उसने डॉ. हेडगेवार स्मारक स्मृति मंदिर की भी रेकी की थी।

नागपुर एटीएस के एक अधिकारी ने बताया कि आतंकी रईस अहमद शेख असदुल्ला शेख को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतीपोरा से पकड़ा गया था। उसे जम्मू-कश्मीर से प्रोडक्शन वारंट पर हिरासत में लेकर नागपुर लाया गया है। पिछले दो दिनों में उससे गहन पूछताछ की गई है। शेख ने पूछताछ में बताया कि उसका हैंडलर पाकिस्तान के नवाबपुर में स्थित जैश का ऑपरेशनल कमांडर उमर है। उमर आतंकियों के लॉन्च पैड पर मौजूद है। उसके कहने पर ही रईस ने नागपुर में आरएसएस दफ्तर की रेकी की थी।

जानकारी के मुताबिक रईस अहमद असदुल्लाह शेख पिछले साल जुलाई में नागपुर आया था और उसने कुछ महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी की थी। वह 13 जुलाई 2021 को नागपुर फ्लाइट से आया था और सीताबुल्दी इलाके के एक होटल में चेक इन किया। हैंडलर ने शेख को आश्वासन दिया था कि एक स्थानीय व्यक्ति उससे संपर्क करेगा और नागपुर में ऑपरेशन में उसकी मदद करेगा। हालाँकि शेख खुद ही ऑपरेशन में लग गया, क्योंकि नागपुर में किसी ने उससे संपर्क नहीं किया।

हैंडलर से लोकेशन मिलने के बाद उसने 14 जुलाई को ऑटो रिक्शा लिया। गूगल मैप की मदद से रेशमबाग इलाके में पहुँचा। उसका टारगेट स्मृति भवन की रेकी करना था। वह दोपहर में रेशमबाग मैदान के पास गया। इसके बाद शेख ने अपने मोबाइल फोन के कैमरे को चालू किया और उसे इस तरह से रखा, जैसे कि वह किसी से फोन पर बात कर रहा हो। अधिकारी ने बताया कि वीडियो बनाते समय वह रेशमबाग मैदान में टहल रहा था।

इसके बाद शेख ने व्हाट्सएप पर अपने हैंडलर को वीडियो भेजा, लेकिन वीडियो सही से रिकॉर्ड न होने की वजह से उसने उसे फिर से वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए कहा। लेकिन इस बार वह सुरक्षा-व्यवस्था देख घबरा गया और वीडियो शूट करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसने अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लिया।

फिर उसने ऑटो-रिक्शा ड्राइवर को बुलाया और उसे एक मस्जिद में ले जाने के लिए कहा। ऑटो चालक ने उसे संतरा मार्केट गेट के पास एक मस्जिद में छोड़ दिया, जहाँ वह दिन भर रहा और शाम को होटल लौट आया। अधिकारी ने बताया कि 15 जुलाई को शेख विमान से श्रीनगर चला गया। जनवरी में उसे कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने नागपुर में रेकी की बात कबूल की थी। इसके बाद उसके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। इस साल की शुरुआत में महाराष्ट्र के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक संजय पांडे ने मामले की जाँच राज्य एटीएस को ट्रांसफर कर दी थी।

सीता, लक्ष्मी, राखी, मंजू… ज्ञानवापी में श्रृंगार-गौरी माता के नियमित दर्शन के लिए लड़ने वाली महिलाओं के बारे में जानिए सब कुछ

वाराणसी में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के सर्वे का तीन दिन का काम पूरा होने के बाद 19 मई तक रिपोर्ट पेश की जाएगी। इसके साथ ही वाराणसी कोर्ट ने सर्वे करने गई टीम के कोर्ट कमिश्नर को हटा दिया है। अब मस्जिद का सर्वे विशाल सिंह और अजय सिंह करेंगे। ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को कोर्ट में ले जाने वाली पाँच महिलाएँ हैं। इन महिलाओं ने मस्जिद परिसर में श्रृंगार-गौरी स्थल पर प्रार्थना की अनुमति माँगी है। 

इनमें कोई ब्यूटी पार्लर चलाती है, कोई जनरल स्टोर चलाती है तो कोई गृहिणी है। कोर्ट में याचिका लगाने वाली महिलाओं में लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक वाराणसी में रहती हैं, जबकि पाँचवी और मुख्य याचिकाकर्ता राखी सिंह दिल्ली में रहती हैं।

राखी सिंह

राखी सिंह सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह विश्व वैदिक सनातन संघ की संस्थापक सदस्य हैं। इसके अध्यक्ष उनके चाचा जितेंद्र सिंह हैं। वह कई बार वाराणसी आ चुकी हैं और देवी माँ श्रृंगार गौरी की उपासक हैं। सनातन संघ के कार्यक्रम के दौरान राखी सिंह की मुलाकात लक्ष्मी, सीता साहू, मंजू और रेखा पाठक से हुई थी। विश्व वैदिक सनातन संघ के यूपी संयोजक संतोष सिंह का कहना है कि संगठन ने वाराणसी की चार महिलाओं के साथ समन्वय किया और अगस्त 2021 में याचिका दायर करने के लिए उन्हें एक साथ लाया गया।

लक्ष्मी देवी

लक्ष्मी देवी के पति विहिप नेता सोहन लाल आर्य का कहना है कि उनकी पत्नी मुश्किल से ही घर से निकलती हैं। घरेलू महिला होने के बाद भी लक्ष्मी देवी अदालत की सुनवाई के दौरान उपस्थित रहती हैं। दंपति वाराणसी के महमूरगंज इलाके में रहता है। 

लक्ष्मी देवी के पति और वाराणसी में विहिप के एक वरिष्ठ पदाधिकारी सोहन लाल आर्य का दावा है कि उन्होंने ही पाँचों महिलाओं को प्रेरित किया और एक साथ लाए। बचपन से आरएसएस से जुड़े रहने वाले सोहन लाल ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया था कि उन्होंने 1985 में वाराणसी की एक अदालत में काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मामले के बारे में अपनी पहली याचिका दायर की थी। इस बार उन्होंने महिलाओं को सामने रखने का फैसला लिया। ये महिलाएँ परिसर में देवी माँ के श्रृंगार स्थल पर प्रार्थना करना चाहती हैं। उन्होंने कहा, “मैंने चार महिलाओं को चुना क्योंकि मुझे याचिका दायर करने के लिए उनकी आवश्यकता थी। मेरे पास और कोई नाम नहीं था, इसलिए मैंने उन्हें चुना।”

मंजू व्यास

मंजू व्यास ज्ञानवापी परिसर से 1.5 किमी दूर अपने घर पर ही ब्यूटी पार्लर चलाती हैं। वे किसी भी संगठन से जुड़ी हुई नहीं हैं। श्रृंगार गौरी स्थल पर प्रार्थना करने में उनकी रूचि है।

राखी पाठक

काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के समीप ही स्थित हनुमान पाठक क्षेत्र की निवासी रेखा पाठक भी गृहिणी हैं। वह कहती हैं कि वह अपनी देवी के लिए याचिका का हिस्सा बनीं। उन्हें इस बात का बुरा लगा कि मंदिर में पूजा के लिए जाने वाली महिलाओं को बैरिकेडिंग के पार जाने की अनुमति नहीं है, इसलिए वो याचिका का हिस्सा बनी। याचिका दायर करने का निर्णय उन्होंने मंदिर के एक सत्संग के दौरान लिया क्योंकि वह सभी देवी माँ की पूजा करना चाहती हैं।

सीता साहू

सीता साहू ज्ञानवापी परिसर से महज 2 किमी दूर वाराणसी के चेतगंज इलाके में अपने घर से एक छोटा सा जनरल स्टोर चलाती हैं। वह भी कभी किसी संगठन या संगठन से नहीं जुड़ी हैं। उनका कहना है कि उन्हें मंदिर में अपनी देवी की ठीक से पूजा करने की अनुमति नहीं है। इसी कारण से उन्होंने याचिका दायर कर रखी है। सीता साहू ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए बताया कि जब वह दर्शन करने जाती थी, तब उनके साथ अभद्रता की जाती थी। वह बताती हैं कि सभी महिलाएँ विवादित ढाँचे के पास वाली माता का नियमित दर्शन करना चाहती हैं, इसलिए उन्होंने कानून का सहारा लेने का फैसला लिया। वह बताती हैं, “हम लोग इस मामले को लेकर हरिशंकर जैन से मिले। हमें दर्शन न करने का दुख था। इसलिए उन्हें बताया। फिर हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन की मदद से हमने याचिका दायर की।” याचिका में शामिल सभी महिलाओं का कहना है कि उनकी मुलाकात दर्शन पूजन के दौरान हुई थी। फिर दोस्ती हो गई और उसके बाद याचिका दायर किया।

बीच सड़क पर मजारें हैं, कैसे रहेगा सभ्य समाज: दिल्ली HC ने केजरीवाल सरकार को फटकारा, कब्जा हटाने के लिए नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (17 मई, 2022) को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए भजनपुरा इलाके में मजार के तौर पर किए गए अवैध अतिक्रमण पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया। साथ ही पूछा कि अगर बीच सड़क में ऐसे ही अवैध मजहबी ढाँचे बने तो एक सभ्य समाज कैसे रहेगा।

बता दें कि इस मामले में एक्टिंग चीफ जस्टिस विपिन संघी और जस्टिस नवीन चावला ने मामले की सुनवाई की और दिल्ली सरकार को अतिक्रमण करने वालों पर कोई कार्रवाई न करने पर फटकार लगाई। पीठ ने कहा, “आखिर सभ्य समाज कैसे रहेगा अगर इसी तरह रोड की बीच में ऐसे ढाँचे बने तो? आपको समाज में और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ एक संदेश देना होगा कि ये सब किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आपको मजबूरी से सड़कों पर उतरना चाहिए और अतिक्रमण करने वालों को वहाँ से हटा चाहिए।”

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने दो मजारों के निर्माण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार पर नाराजगी व्यक्त की। इनमें एक मजार वजीराबाद रोड के भजनपुरा पर बनी है। दूसरी हसनपुर डिपो पर बनी है। दावा है कि ये दोनों मजारें अवैध हैं। 

अतिक्रमण करके बनाई गई दोनों मजारों के खिलाफ याचिका डालने वाले याचिकाकर्ता एसडी विंडलेश हैं। उन्होंने दलील दी है कि इन मजारों के कारण ट्रैफिक पर असर पड़ता है और इससे नागरिकों को दिक्कत आती है। उन्होंने माँग की है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार इन मजारों को जल्द से जल्द हटाने के निर्देश दिए जाएँ। वहीं दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील गौतम नारायण ने पीठ को सूचित किया कि अवैध संरचनाओं को ध्वस्त करने का मुद्दा पहले ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है।

इस सुनवाई के दौरान याचिका में संलग्न तस्वीरों को देख पीठ ने माना कि ये चौंकाने वाली स्थिति है। पीठ ने नोटिस जारी करते हुए कहा, “हम ये नहीं समझ पा रहे हैं कि राज्य मूक दर्शक कैसे हो सकता है और कैसे इस तरह की अवैध चीजों को होने दे सकता है। हमारे विचार में राज्य को ऐसे मामलों में एक स्पष्ट, निश्चित और दृढ़ स्टैंड लेना चाहिए। अतिक्रमणकारियों को संदेश दें कि इस प्रकार का अतिक्रण आप लोगों द्वारा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जल्द ही अतिक्रमण हटाया जाएगा। इस प्रकार के ढाँचे बनाने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।”