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कार्ति चिदंबरम के करीबी को CBI ने किया गिरफ्तार, घूस लेकर 250 चीनी नागरिकों को भारत में घुसाने का मामला

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने बुधवार (18 मई 2022) को वीजा भ्रष्टाचार मामले में कॉन्ग्रेस नेता पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम (Karti Chidambaram) के करीबी एम भास्कर रमन को गिरफ्तार किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीबीआई टीम ने देर रात पूछताछ के बाद एस भास्कर रमन (S Bhaskar Raman) को गिरफ्तार किया है। इससे पहले सीबीआई ने मंगलवार (17 मई 2022) को कार्ति चिदंबरम से जुड़े 10 ठिकानों पर छापेमारी की थी। सीबीआई के मुताबिक, यह मामला 50 लाख रुपए की घूस लेकर 250 चीनी नागरिकों का वीजा बनवाने से जुड़ा हुआ है।

इस मामले में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम पर मंगलवार को FIR दर्ज करने के बाद सीबीआई की टीम ने दिल्ली और चेन्नई समेत देश के कई शहरों में 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। सीबीआई का दावा है कि 50 लाख रुपए की घूस लेकर कार्ति ने 250 चीनी नागिरकों को भारत का वीजा दिलाने में मदद की थी। ये सारे चीनी पंजाब में चल रहे एक प्रोजेक्ट के लिए भारत आए थे।

मालूम हो कि प्रोजेक्ट के लिए घूस देकर चीनी मजदूरों का भारत में वीजा लगवाने का मामला गृह मंत्रालय के तहत आता है। ऐसे में आने वाले समय में गृह मंत्रालय के तत्कालीन अधिकारी भी जाँच के दायरे में आ सकते हैं। इस बीच कार्ति ने कल ट्वीट किया था, “यह (सीबीआई की कार्रवाई) कितनी बार हुई है, मैं गिनती भी भूल गया हूँ। इसका एक रिकॉर्ड होना चाहिए।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया है कि बिजली कंपनी के प्रतिनिधि मखारिया ने कार्ति से अपने करीबी सहयोगी भास्कर रमन के जरिए संपर्क किया था। अधिकारियों ने कहा कि मखारिया ने कथित तौर पर गृह मंत्रालय को एक पत्र सौंपा था, जिसमें इस कंपनी को आवंटित परियोजना वीजा के दोबारा उपयोग करने के लिए मंजूरी माँगी गई थी, जिसे एक महीने के भीतर मंजूरी भी दे दी गई थी। बताया जा रहा है कि भास्कर रमन के माध्यम से कथित तौर पर 50 लाख रुपए की रिश्वत माँगी गई थी, जिसका भुगतान मनसा स्थित उक्त निजी कंपनी (तलवंडी साबो) ने किया था।

गौरतलब है कि कार्ति चिदंबरम और उनके पिता पी चिदंबरम के खिलाफ आईएनएक्स मीडिया केस में पहले ही जाँच एजेंसी सीबीआई और ईडी अपने चार्जशीट दाखिल कर चुकी हैं। एजेंसियों का दावा है कि जब पी चिदंबरम वित्त मंत्री थे तब INX मीडिया को विदेशी निवेश हासिल करने की मंजूरी मिली थी। इसके अलावा एयरसेल मैक्सिस डील में भी बेटे और पिता पर चार्जशीट फाइल हुई है। इस मामले में भी उनके ऊपर घूस लेकर विदेशी निवेश की मंजूरी देने का आरोप है। साल 2019 में इन्हीं आरोपों के चलते पूर्व वित्त मंत्री 21 अगस्त 2019 को अरेस्ट भी किया गया था, जिसके बाद उन्हें 106 दिन जेल में गुजारने पड़े थे और 4 दिसंबर को जाकर उन्हें जमानत मिली। इस बीच उनके दिन तिहाड़ में बीते थे।  

हमको पढ़ने के लिए हिम्मत दीजिए… नीतीश हैरान, लालू के बेटे की बोलती बंद: कौन है 11 साल का सोनू, जिससे मिलने गाँव पहुँच गए सुशील मोदी

बिहार का 11 साल का सोनू इन दिनों सोशल मीडिया में चर्चा में है। वह नालंदा जिले के नीमा कौल गाँव का रहने वाला है। वह पढ़-लिखकर आईएएस अधिकारी बनना चाहता है। उसकी बेबाकी ने राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हैरान कर दिया। उसने अपने जवाब से पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की बोलती ऐसे बंद की कि उन्हें फोट काटना पड़ा। उसके हौसले ने पूर्व उप मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी को गाँव तक आने को मजबूर कर दिया।

वायरल वीडियो में सोनू बेबाक अंदाज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) से बेहतर शिक्षा के लिए गुहार लगाते हुए नजर आ रहा है। हाल ही में एक कार्यक्रम में पहुँचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब लोगों से मिल रहे थे, इसी दौरान सोनू भीड़ से निकलकर मुख्यमंत्री से कहता है, सुनिए न सर। नीतीश कुमार से हाथ जोड़कर सोनू आगे कहता है, “प्रणाम सर। सर हमको पढ़ने के लिए हिम्मत दीजिए। हमारे अभिभावक हमें पढ़ाना नहीं चाहते हैं। मेरे पिता सारा पैसा शराब पर उड़ा देते हैं।”

इसके बाद बच्चे ने वहाँ मौजूद मीडियाकर्मियों से कहा, “हमें अच्छी शिक्षा चाहिए। मेरे पापा शराब पीते हैं, वो घर का सारा पैसा इसमें उड़ा देते हैं। मैं बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर जो भी पैसा लाता हूँ, वो सब भी वही ले लेते हैं।” सोनू की पढ़ाई के प्रति दिलचस्पी को इससे भी समझा जा सकता है कि वह गाँव में ही अपने हमउम्र बच्चे को पढ़ाता है। वीडियो वायरल होने के बाद बच्चे के साहस और पढ़ाई के लिए उसकी लगन की तारीफ हो रही है। हर कोई इस बच्चे के बारे में जानना चाहता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोनू के वीडियो को देखने के बाद कई लोग उसकी मदद के लिए सामने आ रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि बचपन से ही सोनू तेज तर्रार है। उसके पिता दूध बेचने का काम करते हैं। माता लीला देवी निरक्षर हैं। बीजेपी नेता सुशील मोदी ने गाँव नीमा कौल जाकर सोनू से मुलाकात की। बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री ने सोनू को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, “सोनू का नवोदय विद्यालय में नामांकन होगा और मैं मैट्रिक तक प्रति माह 2 हजार रुपए उसके खाते में जमा कराऊँगा।”

कौन है ये बच्चा

सोनू क्लास 6 में पढ़ता है। पढ़-लिखकर IAS बनना चाहता है। हमउम्र बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाता है। ट्यूशन से मिले पैसे से उसने एंड्रायड फोन खरीद लिया है, जिससे वह यूट्यूब पर जानकारी हासिल कर सके। उनका कहना है कि सरकारी स्कूल के शिक्षकों में योग्यता की कमी है। उन्हें जानकारी कम है। इसलिए सरकारी स्कूल के बच्चों को पढ़ाता हूँ। सोनू यह भी बताता है कि उसके पास 30 बच्चे ट्यूशन के लिए आते हैं, जिनसे वह प्रति माह के हिसाब से 100 रुपए लेता है। इससे उन बच्चों की पढ़ाई हो जा रही है और मुझे भी आर्थिक मदद मिल जाती है। वीडियो वायरल होने के बाद तेजप्रताप यादव ने वीडियो कॉल पर सोनू से बात की। उन्होंने सोनू से कहा कि IAS बनना तो मेरे अंडर काम करना। इस पर सोनू ने उनसे कहा, “IAS बनूँगा, पर किसी के अंडर नहीं रहूँगा।” यह सुनते ही तेज प्रताप ने फोन काट दिया।

UP में नए मदरसों को अब नहीं मिलेगा अनुदान: योगी सरकार का बड़ा फैसला, अखिलेश यादव के जमाने में खोल दिया गया था खजाना

उत्तर प्रदेश में अब नए मदरसों को किसी तरह का अनुदान नहीं दिया जाएगा। ये फैसला योगी सरकार की कैबिनेट में हुआ है। योगी सरकार ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित करते हुए अखिलेश सरकार की पुरानी नीति को खत्म कर दिया। नए प्रस्ताव के बाद कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर भी मदरसों को कोई राहत नहीं मिलेगी।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में कुल 16461 मदरसे हैं। इनमें से 559 मदरसों को इस समय सरकारी अनुदान दिया जा रहा है। इसी अनुदान से इन मदरसों के शिक्षकों, गैर शिक्षण कर्मचारियों को वेतन मिलता है। मंगलवार (17 मई 2022) को हुई कैबिनेट बैठक में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने इस प्रस्ताव को पास किया कि आगे से किसी भी नए मदरसे को अनुदान नहीं मिलेगा। पिछले वर्ष भी योगी सरकार की ओर से किसी नए मदरसे को अनुदान नहीं दिया गया था।

जानकारी के अनुसार, अखिलेश सरकार द्वारा साल 2016 में मदरसों को अनुदान देने के लिए नीति लागू की गई थी, जिसे योगी सरकार ने खत्म किया है। इस नीति के तहत साल 2003 तक मान्यता पाने वाले 146 मदरसों को सपा सरकार ने अनुदान देने का निर्णय लिया था। हालाँकि योगी सरकार के पहले कार्यकाल में किसी मदरसे को ये अनुदान नहीं मिला। इसके बाद सपा सरकार की नीति का हवाला देते हुए मदरसा प्रबंधक हाई कोर्ट गए और बात रखी कि वे हर मानक को पूरा कर रहे हैं तो उन्हें अनुदान क्यों नहीं मिल रहा।

हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए मऊ के एक मदरसे मामले में सरकार को अनुदान देने पर विचार करने को कहा। सरकार ने जब इस मदरसे के मानकों को जाँचा तो पता चला कि उसकी तो मान्यता ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मिली थी। अब अन्य मदरसे को अनुदान देने वाले मामलों में सरकार मऊ वाले केस से सीख ले रही है और जो दावा कर रहे हैं कि वो अनुदान के लिए हर मानक पूरा करते हैं उसकी पहले जाँच करने को कह रही है।

उल्लेखनीय है कि अभी हाल में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के मदरसों को लेकर एक और बड़ा फैसला लिया था। इसमें कहा गया था कि राज्य के सभी अनुदानित और गैर अनुदानित मदरसों में कक्षा से पहले राष्ट्रगान अनिवार्य होगा। ये फैसला सरकार ने मदरसा छात्रों में देशभक्ति बढ़ाने के लिहाज से लिया था।

हर विवादित ढाँचे के नीचे मंदिर… वो 1800 स्थल जहाँ हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त कर बनाई गई मस्जिदें-मजार, हम लेकर आए हैं राज्यवार सूची

उत्तर प्रदेश में कोर्ट के आदेश के बाद वाराणसी के ज्ञानवापी ‘विवादित ढाँचे’ के सर्वे (Gyanvapi Masjid Survey) का काम सोमवार (16 मई, 2022) को पूरा हो चुका है। अदालत के निर्देश पर सर्वे की टीम ने ‘विवादित ढाँचे’ के परिसर में बनी छत, दीवारों से लेकर तहखाने तक का सर्वे किया। इस दौरान हिन्दू पक्ष ने यहाँ शिवलिंग मिलने का दावा भी किया है। यह शिवलिंग कुएँ में मिला था। साथ ही दीवारों पर हिन्दू मंदिर के अवशेष दिखाई देने का भी दावा किया गया है। ज्ञानवापी ‘विवादित ढाँचे’ के अलावा कई ऐसी मजार, मस्जिद, दरगाह, किले, ईदगाह हैं, जिनका निर्माण मंदिरों को तोड़कर किया गया है। या फिर इनके निर्माण में मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। ज्ञानवापी मामले में इन सबूतों के मिलने के बाद स्पष्ट तौर पर दावा किया जा सकता है कि यहाँ पहले एक मंदिर था। उसे नष्ट कर उस भूमि पर एक मस्जिद का निर्माण किया गया था।

हालाँकि, देश भर में कई ऐसे निर्माण हैं, जिनके प्रमाण इतने स्पष्ट नहीं हैं। वर्ष 1990 में इतिहासकार सीता राम गोयल ने अन्य लेखकों अरुण शौरी, हर्ष नारायण, जय दुबाशी और राम स्वरूप के साथ मिलकर ‘हिंदू टेम्पल: व्हाट हैपन्ड टू देम’ (Hindu Temples: What Happened To Them) नामक दो खंडों की किताब प्रकाशित की थी। उसमें गोयल ने 1800 से अधिक मुस्लिमों द्वारा बनाई गई इमारतों, मस्जिदों और विवादित ढाँचों का पता लगाया था, जो मौजूदा मंदिरों/या नष्ट किए गए मंदिरों की सामग्री का इस्तेमाल करके बनाए गए थे। कुतुब मीनार से लेकर बाबरी मस्जिद, ज्ञानवापी विवादित ढाँचे, पिंजौर गार्डन और अन्य कई का उल्लेख इस किताब में मिलता है।

लेखकों द्वारा उपयोग की जाने वाली पद्धति

पुस्तक के कुछ अध्याय में लेखकों के समाचार पत्रों में पहले प्रकाशित लेखों का भी एक संग्रह है। अध्याय छह में, ‘Historians Versus History’ अर्थात ‘इतिहासकार बनाम इतिहास’ राम स्वरूप ने उल्लेख किया है कि हिंदू मंदिरों को कैसे ध्वस्त किया गया और इससे जुड़ी अन्य जानकारियों के बारे ब्रिटिश और मुस्लिम दोनों इतिहासकारों ने अपने-अपने तरीके से कैसे लिखा है। बात करें ब्रिटिश इतिहासकारों की तो उन्होंने भारत को गुलाम बनाने और यहाँ राज करने को सही ठहराते हुए मुगलों द्वारा की गई क्रूरता और बर्बरता को गलत करार दिया है। इसके विपरीत, मुस्लिम इतिहासकारों ने इस्लाम और उनके तत्कालीन संरक्षकों का महिमामंडन करते हुए विस्तार से बताया कि कैसे मुस्लिम आक्रांताओं ने मंदिरों को तोड़ा और उसके स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया।

देश भर में मौजूद मस्जिदों और कई ऐतिहासिक इमारतों में उपलब्ध शिलालेखों में अल्लाह, पैगंबर और कुरान को कोट करके लिखा हुआ है। इन अभिलेखों से पता चलता है कि इन इमारतों का निर्माण किसके द्वारा, कैसे और कब किया गया था। पुस्तक में कहा गया है, “शिलालेखों को विद्वान मुस्लिम एपिग्राफिस्टों द्वारा उनके ऐतिहासिक संदर्भ से जोड़ा गया है। वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा अपने एपिग्राफिया इंडिका अरबी और फारसी में प्रकाशित किए गए हैं। पहली बार 1907-08 में एपिग्राफिया इंडो-मोस्लेमिका के रूप में प्रकाशित हुआ था।”

5 फरवरी, 1989 को अरुण शौरी (Arun Shourie) का एक लेख प्रकाशित हुआ था। उसमें उन्होंने एक प्रसिद्ध और प्रभावशाली व्यक्ति मौलाना हकीम सैयद अब्दुल हाई (Maulana Hakim Sayid Abdul Hai) का जिक्र किया था। शौरी ने बताया था कि उन्होंने कई किताबें लिखी हैं, जिनमें से एक किताब ‘हिंदुस्तान की मस्जिदें’ है, जिसमें 17 पन्नों का अध्याय था। उस अध्याय के बारे में बात करते हुए शौरी ने कहा था, उसमें मस्जिदों का संक्षिप्त विवरण लिखा गया था, जिसमें हाई ने बताया था कि कैसे मस्जिदों के निर्माण के लिए हिंदू मंदिरों को नष्ट कर दिया गया था।

उदाहरण के लिए बाबरी मस्जिद, जिसके बारे में हमने पढ़ा है, “अयोध्या, जिसे भगवान श्रीराम की जन्मभूमि कहा जाता है। वहाँ पर प्रथम मुगल सम्राट बाबर के आदेश पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था। इस जगह को लेकर एक प्रसिद्ध कहानी है। कहा जाता है कि यहाँ श्रीराम चंद्र भगवान की पत्नी सीता का एक मंदिर था, जिसमें वह रहती थीं और अपने पति के लिए खाना बनाती थीं।” उसी स्थान पर बाबर ने एच. 963 में इस मस्जिद का निर्माण किया था।” यहाँ एच 963 का अर्थ हिजरी कैलेंडर वर्ष 963 से है, जो अंग्रेजी कैलेंडर के वर्ष 1555-1556 के बीच होता है।

इस्लामिक जगहों की राज्यवार सूची

इसके अलावा किताब में विभिन्न राज्यों के 1800 से अधिक स्थानों का उल्लेख है। हिंदू मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए समर्पित संगठन, ‘रिक्लेम टेंपल’ ने सीता राम गोयल द्वारा पुस्तक में दी गई सूचियों पर बखूबी काम किया है। राज्यवार सूची के पीडीएफ यहाँ देखे जा सकते हैं।

आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश को लेकर सीता राम गोयल और अन्य लेखकों ने इस किताब में उल्लेख किया है कि मंदिरों को ध्वस्त करने के बाद उसकी सामग्री का इस्तेमाल मस्जिदों, दरगाहों, प्रवेश द्वार और किलों के निर्माण में किया गया था। अकेले आंध्र प्रदेश को लेकर लेखकों ने 142 जगहों की पुष्टि की है, जिनमें कदिरी में जामी मस्जिद, पेनुकोंडा में अनंतपुर शेर खान मस्जिद, बाबया दरगाह पेनुकोंडा, जो इवारा मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। तदपत्री में ईदगाह, गुंडलाकुंटा में दतगिरी दरगाह, दतगिरी दरगाह को जनलापल्ले में जंगम मंदिर के ऊपर बनाया गया है।

वहीं, हैदराबाद के अलियाबाद में मुमिन चुप की दरगाह है, जिसे 1322 में एक मंदिर की जगह पर बनाया गया था। इसी तरह, राजामुंदरी में जामी मस्जिद का निर्माण 1324 में वेणुगोपालस्वामी मंदिर को नष्ट करके किया गया था। आंध्र प्रदेश में मंदिरों का विनाश सदियों से जारी है। 1729 में बनाई गई गचिनाला मस्जिद (Gachinala Masjid,) को राज्य की सबसे नई मस्जिद के रूप में जाना जाता था। यह भी एक मंदिर की जगह पर बनाई गई है।

असम

किताब में असम के दो मंदिरों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें तोड़कर मस्जिद और मजार में परिवर्तित कर दिया गया था। इनके नाम हैं, पोआ मस्जिद (Poa Mosque) और सुल्तान गयासुद्दीन बलबन (Ghiyasuddin Balban) की मजार। ये दोनों कामरूप जिले के हाजो के मंदिरों की जगह पर आज भी मौजदू हैं।

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में 102 जगहों पर मस्जिदें, किले और दरगाह हैं, जिन्हें मुस्लिम शासकों ने मंदिर को नष्ट करके बनाया था। उन्होंने मंदिरों को नष्ट करने के बाद इकट्ठा हुए मलबे का इस्तेमाल करके इसे बनाया था। इन संरचनाओं में लोकपुरा की गाजी इस्माइल मजार भी शामिल है, जो वेणुगोपाल मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। बीरभूम सियान (1221) Birbhum Siyan (1221) में मखदूम शाह दरगाह को बनाने के लिए मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था। सुता में सैय्यद शाह शाहिद महमूद बहमनी दरगाह को बौद्ध मंदिर की सामग्री से बनाया गया था। बनिया पुकुर में 1342 में बनाई गई अलाउद-दीन अलौल हक़ मस्जिद (Alaud-Din Alaul Haqq Masjid) को भी मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल करके बनाया गया था।

बारहवीं शताब्दी ईस्वी के अंत में मुस्लिमों ने एक हिंदू राजधानी लक्ष्मण नवती को नष्ट कर उसकी सामग्री उपयोग करके गौर में एक मुस्लिम शहर बनाया था। छोटी सोना मस्जिद, तांतीपारा मस्जिद, लटन मस्जिद, मखदुम अखी सिराज चिश्ती दरगाह, चमकट्टी मस्जिद, चाँदीपुर दरवाजा और अन्य संरचनाओं सहित कई मुस्लिम संरचनाएँ शहर में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके दो शताब्दियों के अंदर बनाई गई थीं।

बिहार

बिहार में कुल 77 जगहों पर मंदिर को नष्ट करके या फिर उसकी सामग्री का उपयोग करके मस्जिदों, मुस्लिम संरचनाओं, किलों आदि को बनाया गया था। भागलपुर में, हजरत शाहबाज की दरगाह 1502 में एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। इसी तरह चंपानगर में जैन मंदिरों को नष्ट कर कई मजारों का निर्माण कराया गया था। मुंगेर जिले के अमोलझोरी में मुस्लिम कब्रिस्तान एक विष्णु मंदिर की जगह पर बनाया गया था। गया के नादरगंज में शाही मस्जिद 1617 में एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी।

नालंदा जिले में और बिहारशरीफ में भी मंदिरों को नष्ट किया गया था। 1380 में मखदुमुल मुल्क शरीफुद्दीन की दरगाह, बड़ा दरगाह, छोटा दरगाह और अन्य शामिल हैं। पटना में शाह जुम्मन मदारिया की दरगाह एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। शाह मुर मंसूर की दरगाह, शाह अरज़ानी की दरगाह, पीर दमरिया की दरगाह भी बौद्ध स्थलों पर बनाई गई थीं।

दिल्ली

किताब में दिल्ली का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि यहाँ कुल 72 जगहों की पहचान की गई है, जहाँ पर मुस्लिम आक्रमणकारियों ने सात शहरों का निर्माण करने के लिए इंद्रप्रस्थ और ढिलिका को नष्ट कर दिया था। मंदिर की सामग्री का उपयोग कई स्मारकों, मस्जिदों, मजारों और अन्य संरचनाओं में किया गया था, जिनमें कुतुब मीनार, कुव्वतुल इस्लाम मस्जिद (1198), शम्सूद-दीन इल्तुतमिश का मकबरा, जहाज़ महल, अलल दरवाजा, अलल मीनार, मदरसा और अलाउद-दीन खिलजी का मकबरा और माधी मस्जिद शामिल हैं।

गुजरात

किताब में गुजरात की 170 ऐसी जगहों के बारे में बताया गया है, जहाँ मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई हैं।। असवल, पाटन और चंद्रावती के मंदिरों को नष्ट कर इनकी सामग्री का उपयोग अहमदाबाद को एक मुस्लिम शहर बनाने के लिए किया गया था। अहमदाबाद में मंदिर सामग्री का उपयोग करने वाले जो स्मारक बनाए गए हैं, वह हैं- अहमद शाह की जामी मस्जिद, हैबिट खान की मस्जिद।

ढोलका जिले में बहलोल खान की मस्जिद और बरकत शहीद की मजार भी मंदिरों को ध्वस्त करके बनाई गई थी। इसी तरह, सरखेज में, Shaikh Ahmad Khattu Ganj Baksh की दरगाह 1445 में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी। 1321 में, भरूच में हिंदू और जैन मंदिरों के विध्वंस के बाद जो सामग्री इकट्ठा हुई थी। उसका उपयोग करके जामी मस्जिद का निर्माण किया गया था।

भावनगर में बोटाद में पीर हमीर खान की मजार एक मंदिर की जग​ह पर बनाई गई थी। 1473 में द्वारका में एक मंदिर के स्थल पर मस्जिद का निर्माण किया गया था। भुज में, जामी मस्जिद और बाबा गुरु के गुंबद मंदिर के स्थान पर बनाए गए थे। जैन समुदाय के लोगों को रांदेर से निकाल दिया गया और मंदिरों की जगह मस्जिद बना दी गई थीं। जैसे जामी मस्जिद, नित नौरी मस्जिद, मियां की मस्जिद, खारवा मस्जिद को भी मंदिर के स्थान पर बनाया गया था। इसके अलावा सोमनाथ पाटन में बाजार मस्जिद, चाँदनी मस्जिद और काजी की मस्जिद भी मंदिर के स्थानों पर बनाई गई थी।

दीव

दीव में जो जामी मस्जिद है, उसका निर्माण 1404 में किया गया था। पुस्तक में इसका भी उल्लेख किया गया है। इसे भी एक मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

हरियाणा

इतिहासकारों द्वारा हरियाणा में कुल 77 स्थलों का उल्लेख किया गया है। पिंजौर, अंबाला में मंदिर की सामग्री का उपयोग फिदई खान के बगीचे के निर्माण में किया गया था। फ़िदाई खान गार्डन, जिसे बाद में एक सिख सम्राट ने बदलकर यादवेंद्र गार्डन कर दिया था। इसे पिंजौर गार्डन के नाम से भी जाना जाता है। ये भी मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाया गया था। फरीदाबाद में, जामी मस्जिद 1605 में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। नूंह में, मंदिर की सामग्री का उपयोग करके 1392 में एक मस्जिद का निर्माण किया गया था।

बावल में मस्जिदें और गुरुग्राम जिले के फर्रुखनगर में जामी मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई हैं। कैथल में बल्ख के शेख सलाह-दीन अबुल मुहम्मद (Salahud-Din Abul Muhammad) की दरगाह 1246 में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी। कुरुक्षेत्र में टीले पर मदरसा और झज्जर में काली मस्जिद मंदिर स्थलों पर बनाई गई थी। हिसार का निर्माण फिरोज शाह तुगलक ने अग्रोहा से लाई गई मंदिर सामग्री का उपयोग करके किया था। अग्रोहा शहर का निर्माण भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज महाराजा अग्रसेन ने करवाया था। महाराजा अग्रसेन का जन्म भगवान राम के बाद 35वीं पीढ़ी में हुआ था। 1192 में मुहम्मद गौरी ने इस शहर को नष्ट कर दिया था।

हिमाचल प्रदेश

किताब में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में एक जगह के बारे में बताया गया है, यहाँ मंदिर सामग्री का उपयोग करके जहाँगीरी गेट बनाया गया था।

कर्नाटक

कर्नाटक में कुल 192 स्थान हैं। बेंगलुरु के डोड्डा बल्लापुर में अजोधन की मुहिउद-दीन चिश्ती की दरगाह मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी। कुदाची में मखदूम शाह की दरगाह और शेख मुहम्मद सिराजुद-दीन पिरदादी की मजार भी मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। हम्पी के विजयनगर में मस्जिद और ईदगाह भी मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाए गए थे। काफी पुराने हिंदू शहर बीदर को बदलकर एक मुस्लिम राजधानी का निर्माण किया गया था। सोला खंबा मस्जिद, जामी मस्जिद, मुख्तार खान की मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई थीं और कुछ में मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल भी किया गया था।शहर के मंदिरों को या तो ध्वस्त कर दिया गया या फिर उन्हें मस्जिदों में बदल दिया गया। जामी मस्जिद, महला शाहपुर में मंदिर के स्थान पर आज भी मस्जिद मौजूद हैं। बीजापुर एक प्राचीन हिंदू शहर हुआ करता था, लेकिन इसे एक मुस्लिम राजधानी में तब्दील कर दिया गया था। जामी मस्जिद, करीमुद-दीन की मस्जिद, छोटा मस्जिद, आदि मंदिर स्थलों पर बनाए गए थे या मंदिर सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। टोन्नूर, मैसूर में सैय्यद सालार मसूद की मजार मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी।

केरल

केरल की दो जगहों का उल्लेख किया गया है। पहला कोल्लम में जामी मस्जिद और दूसरा पालघाट में टीपू सुल्तान द्वारा बनाए गए किले का, जिसमें मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था।

लक्षद्वीप

लक्षद्वीप में दो जगहों के बारे में बताया गया है। कल्पेनी में मुहिउद-दीन-पल्ली मस्जिद (Muhiud-Din-Palli Masjid) और कवरती में प्रोट-पल्ली मस्जिद भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। यह सर्वविदित है कि लक्षद्वीप में अब 100% के आसपास मुस्लिम हैं।

मध्य प्रदेश

किताब में मध्य प्रदेश के 151 स्थलों का उल्लेख है। भोपाल में कुदसिया बेगम (Qudsia Begum) द्वारा जामी मस्जिद का निर्माण किया गया था, जहाँ कभी सभामंडल मंदिर हुआ करता था। दमोह में गाजी मियां की दरगाह भी पहले एक मंदिर ही था। धार राजा भोज परमार की राजधानी हुआ करती थी। इसे भी मुस्लिम राजधानी में बदल दिया गया। कमल मौला मस्जिद, लाट की मस्जिद, अदबुल्लाह शाह चंगल की मजार आदि का निर्माण मंदिर की जगह पर या ​फिर उनकी सामग्री का इस्तेमाल करके बनाया गया है।

मांडू एक प्राचीन हिंदू शहर था। इसे भी मुस्लिम राजधानी में भी बदल दिया गया था। जामी मस्जिद, दिलावर खान की मस्जिद, छोटी जामी मस्जिद आदि का निर्माण मंदिर के स्थानों पर किया गया है। चंदेरी को भी मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाया गया था। मोती मस्जिद, जामी मस्जिद और अन्य संरचनाओं में भी मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। ग्वालियर में, मुहम्मद गौस की दरगाह, जामी मस्जिद और गणेश द्वार के पास मस्जिद मंदिर स्थलों पर बनाई गई थी।

महाराष्ट्र

किताब में महाराष्ट्र के 143 स्थलों के बारे में बात की गई है। अहमदनगर में अम्बा जोगी किले में मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। गॉग (Gogh) में ईदगाह, जिसे 1395 में बनाया गया था, यह भी एक मंदिर के स्थान पर बना है। अकोट (Akot) की जामी मस्जिद 1667 में एक मंदिर के स्थल पर बनाई गई थी। करंज में अस्तान मस्जिद 1659 में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। रीतपुर में औरंगजेब की जामी मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। हजरत बुरहानुद्दीन-दीन गरीब चिश्ती की दरगाह खुल्दाबाद में एक मंदिर स्थल पर 1339 में बनाई गई थी।

मैना हज्जम की मजार मुंबई में महालक्ष्मी मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। मुंबई में जामी मस्जिद एक मंदिर स्थल पर बनाई गई थी। परंदा में तलाब के पास नमाजगाह का निर्माण मनकेवरा मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था। लातूर में, मीनापुरी माता मंदिर को मबसू साहिब की दरगाह में बदल दिया गया था, सोमवारा मंदिर को सैय्यद कादिरी की दरगाह में बदल दिया गया था। वहीं, रामचंद्र मंदिर को पौनार की कादिमी मस्जिद (Qadimi Masjid) में बदल दिया गया था।

ओडिशा

ओडिशा में 12 ऐसी जगह हैं, जहाँ मंदिरों को तोड़कर उसके स्थान पर मस्जिद, दरगाह और मजार बनाई गई है। बालेश्वर में महल्ला सुन्नत में जामी मस्जिद श्री चंडी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। शाही मस्जिद और कटक में उड़िया बाजार की मस्जिदों के साथ-साथ केंद्रपाड़ा में एक मस्जिद को मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

पंजाब

किताब में पंजाब के 14 जगहों का जिक्र है। इसमें बाबा हाजी रतन की मजार बठिंडा में एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। जालंधर के सुल्तानपुर की बादशाही सराय बौद्ध विहार के स्थान पर बनी हुई है। लुधियाना में अली सरमस्त की मस्जिद भी एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। बहादुरगढ़ में किले अंदर एक मस्जिद बनाई गई है। उसका निर्माण भी मंदिर की जगह पर किया गया है।

राजस्थान

पुस्तक में राजस्थान के 170 स्थलों का उल्लेख है। पहले अजमेर एक हिंदू राजधानी हुआ करती थी, जिसे मुस्लिम शहर में बदल दिया गया था। अढ़ाई-दिन-का-झोंपरा 1199 में बनाया गया था, मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह 1236 में बनाई गई थी, और अन्य मस्जिदों का निर्माण मंदिर के स्थान पर किया गया था। तिजारा में भरतारी मजार (Bhartari mazar) एक मंदिर को ध्वस्त करके बनाई गई थी। बयाना में नोहारा मस्जिद का निर्माण उषा मंदिर के स्थान पर किया गया था। भितरी-बहारी (Bhitari-Bahari Mahalla) की मस्जिद में विष्णु भगवान की मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था।

काम्यकेश्वर मंदिर को कामां में चौरासी खंबा मस्जिद में बदल दिया गया था। पार्वंथा मंदिर (Parvantha) की सामग्री का उपयोग जालोर में तोपखाना मस्जिद में किया गया था, जिसे 1323 में बनाया गया था। शेर शाह सूरी के किले शेरगढ़ में हिंदू, बौद्ध और जैन मंदिरों की सामग्री का उपयोग किया गया था। लोहारपुरा में पीर जहीरुद्दीन की दरगाह मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। 1625 में, सलावतन में मस्जिद एक मंदिर स्थल पर बनाई गई थी। पीर जहीरुद्दीन की मजार और नागौर में बाबा बद्र की दरगाह भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी।

तमिलनाडु

किताब में तमिलनाडु के 175 स्थलों का उल्लेख किया गया है। Chingleput के आचरवा में शाह अहमद की मजार भी एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। कोवलम में मलिक बिन दिनार की दरगाह एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। पंचा पद्यमलाई की पहाड़ी का नाम बदलकर मौला पहाड़ कर दिया गया था। एक प्राचीन गुफा मंदिर के सेट्रल हॉल को मस्जिद में बदल दिया गया था। कोयंबटूर में, टीपू सुल्तान ने अन्नामलाई किले की मरम्मत के लिए मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया। टीपू सुल्तान की मस्जिद भी एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। तिरुचिरापल्ली (Tiruchirapalli) में नाथर शाह वाली की दरगाह एक शिव मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। मंदिर के लिंगम का उपयोग लैंप के रूप में किया गया था।

उत्तर प्रदेश

अब आते हैं उत्तर प्रदेश पर। किताब में यूपी के 299 स्थलों का उल्लेख है, जो मंदिर सामग्री और मंदिर के स्थानों पर बनाए गए थे। आगरा की कलां मस्जिद का निर्माण मंदिर की सामग्री से किया गया था। अकबर के किले में नदी के किनारे का हिस्सा जैन मंदिर के स्थान पर बनाया गया था। अकबर का मकबरा भी एक मंदिर के ऊपर खड़ा है। इलाहाबाद में अकबर का किला मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। मियां मकबुल और हुसैन खान शाहिद की मजार भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। पत्थर महल में मस्जिद का निर्माण लक्ष्मी नारायण मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था।

अयोध्या में राम जन्मभूमि के स्थल पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था। हालाँकि उस विवादित ढाँचे को ध्वस्त कर दिया गया है और उस स्थान अब भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा स्वर्गद्वार मंदिर और त्रेता का ठाकुर मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था और उन जगहों पर औरंगजेब द्वारा मस्जिदों का निर्माण किया गया था।

शाह जुरान गौरी (Shah Juran Ghuri) की मजार एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। सर पैगंबर और अयूब पैगंबर की मजार एक बौद्ध मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी, जहाँ बुद्ध के पदचिन्ह थे। गोरखपुर में इमामबाड़ा एक मंदिर के स्थान पर बनाया गया था। इसी तरह, पावा में कर्बला एक बौद्ध स्तूप के स्थान पर बनाया गया था।

टिलेवाली मस्जिद लखनऊ में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। मेरठ में जामा मस्जिद एक बौद्ध विहार के खंडहर पर स्थित है। एक दरगाह नौचंड़ी देवी के मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। वाराणसी में, ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को विश्वेश्वर मंदिर सामग्री का उपयोग करके बनाया गया है। हाल ही में अदालत ने विवादित ढाँचे के सर्वेक्षण का आदेश दिया था। सर्वेक्षण करने वाली टीम को वहां एक शिवलिंग भी मिला है। इसके बाद अदालत ने उस जगह को सील कर दिया है।

‘यह केवल एक संक्षिप्त सारांश है’

गोयल ने अपनी किताब में लिखा है कि उनके द्वारा बताई गई सूची अभी अधूरी है, यह सिर्फ एक संक्षिप्त विवरण था। अभी सूची में और कई मस्जिदें व दरगाह हैं, जिनके मंदिर की जगह पर और मंदिर की सामग्री के इस्तेमाल से बनाने के सबूत मौजूद हैं। उन्होंने लिखा, “हमने उल्लेख किए गए स्मारकों के स्थानों, नामों और तारीखों के संबंध में सटीक होने की पूरी कोशिश की है। फिर भी कुछ गलतियाँ और भ्रम रह गए होंगे। हालाँकि, ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि विभिन्न स्रोत एक ही स्मारक के लिए अलग-अलग तिथियाँ और नाम का प्रयोग करते हों। कुछ मुस्लिम फकीरों को कई नामों से जाना जाता है, जो उनकी मजारों या दरगाह की पहचान करने में भ्रम पैदा करते हैं। या फिर कुछ जिलों का नाम बदलकर अगर नया नाम रख दिया गया तो ऐसा हो सकता है। खैर, यह केवल एक संक्षिप्त सारांश है।”

(ये लेख हमारी अंग्रेजी वेबसाइट पर प्रकाशित हुआ था, जिसका हिंदी में अनुवाद सुनीता मिश्रा ने किया है)

2 साल से बीवी का भाइयों से हलाला करवा रहा था शाबाम, फँसाने के लिए बन गया था ‘श्यामू’: मुस्लिम नहीं बनी तो 1 हफ्ते बाद ही तीन तलाक

उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले से लव जिहाद (Love Jihad) का मामला सामने आया है। यहाँ शाबाम नाम के युवक ने श्यामू बनकर पहले हिंदू युवती को अपने प्रेम जाल में फँसाया और फिर मंदिर में लेकर जाकर उससे शादी कर ली। शादी के एक हफ्ते बाद ही उसने युवती पर निकाह कर अपना धर्म बदलने और नमाज पढ़ने का दबाव बनाया। युवती के ऐसा न करने पर युवक ने उसे तीन तलाक दे दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब शाबाम अपनी बीवी को भाइयों के साथ हलाला करने को मजबूर कर रहा है। उधर पीड़िता का परिवार न्याय पाने के लिए दर-दर भटक रहा है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि पुलिस से शिकायत करने के बाद भी अब तक शाबाम पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। एसपी को भी इसके बारे में बताया गया, लेकिन उनकी तरफ से भी कोई मदद नहीं मिली।

बताया जा रहा है कि मालीपुर थाने के सैरपुर उमरन गाँव की युवती की सम्मनपुर के हरदिलपुर में रिश्तेदारी है। आजमगढ़ के पवई थाने के मिल्कीपुर का निवासी शाबाम श्यामू बनकर युवती के ममेरे भाई सुनील के साथ उसके घर पर आने-जाने लगा। धीरे-धीरे उसने युवती को अपने प्रेम जाल में फँसा लिया और उसके पूरे परिवार को शादी के लिए राजी कर लिया।

पीड़िता के मुताबिक, लॉकडाउन की वजह उनकी शादी टल गई थी, ऐसे में उन्हें 10 जुलाई, 2020 को जलालपुर कस्बे के मठिया मंदिर में जाकर शादी करनी पड़ी। शादी के एक हफ्ते बाद ही शाबाम युवती पर निकाह करने, धर्मांतरण और नमाज पढ़ने का दबाव बनाने लगा।

घरवालों के साथ आसपास की मुस्लिम महिलाएँ भी उसे नमाज और कलमा पढ़ने के लिए दबाव बनाने लगीं। आपत्ति जताने पर उसके साथ मारपीट भी की गई। इन सबसे बावजूद भी जब युवती नहीं मानी तो शाबाम ने उसे तीन तलाक दे दिया, लेकिन घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं दी। उसने युवती का फोन भी छीन लिया गया। इस बीच शाबाम ने दोबारा निकाह करने की बात कहकर उसे अपने भाई मेंहदी हसन और शरीफ से हलाला करने पर मजबूर किया।

किसी तरह युवती उस शख्स के घर से भागने में कामयाब रही और अपने पिता के पास पहुँची। उसने उन्हें अपनी आप बीती सुनाई। इसके बाद पीड़ित परिवार मालीपुर थाने में शाबाम की शिकायत, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही डांटकर भगा दिया।

वहीं, विश्व हिंदू परिषद को जब इस मामले की जानकारी हुई तो, उन्होंने पूरे प्रकरण को मुख्यमंत्री तक पहुँचाने की चेतावनी दी। विहिप के अवध प्रांत के प्रमुख अरविंद पांडेय ने बताया कि किछौछा एवं भियांव कस्बे में हिंदू धर्म के नट समुदाय के लोगों का धर्म परिवर्तन कराने का खेल जारी है। ऐसे गंभीर मामले में पुलिस का ढुलमुल रवैया बर्दाश्त के बाहर है।

कॉमेडियन भारती सिंह को दाढ़ी-मूँछ पर मजाक पड़ा भारी, हाथ जोड़ माफी भी न आई काम: सिख समुदाय ने दर्ज कराया FIR

कॉमेडियन भारती सिंह का एक पुराना वीडियो वायरल है जिसमें उनका दाढ़ी-मूँछ का मजाक उड़ाना उनपर भारी पड़ गया है। इस वीडियो के जरिए सिखों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने पर लोगों ने नाराजगी जाहिर की है। वहीं जब यह बात भारती तक पहुँची तो उन्होंने भी हाथ जोड़ते हुए माफी माँगी है।

वहीं भारती सिंह को दाढ़ी और मूँछ का मजाक उड़ाने के लिए सिख समुदाय के आक्रोश का भी सामना करना पड़ा है। हालाँकि, उन्होंने माफी माँग ली थी, लेकिन एक टेलीविजन कार्यक्रम में बातचीत के दौरान उनकी विवादास्पद टिप्पणी एसजीपीसी को पसंद नहीं आई, जिसकी वजह से अमृतसर के पुलिस आयुक्त के पास शिकायत दर्ज कराई है।

डीसीपी परमिंदर सिंह भंडाल ने बताया कि एसजीपीसी की शिकायत के आधार पर कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। वहीं शिअद की महिला विंग सहित कई मानवाधिकार और सिख संगठनों ने भी भारती के खिलाफ अमृतसर में विरोध प्रदर्शन किया। भारती सिंह के खिलाफ बैनर पकड़े हुए विरोध प्रदर्शन करते उन्होंने सिख नैतिकता और सिद्धांतों का मजाक उड़ाने के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 295-ए के तहत मामला दर्ज करने की माँग की।

बता दें कि वीडियो में भारती जैस्मिन से बोलती दिख रही हैं, दाढ़ी- क्यों नहीं चाहिए? दूध पियो, ऐसे दाढ़ी मुँह में डालो, सेवइयों का टेस्ट आता है। मेरी काफी फ्रेंड्स लोगों की शादी हुई जिनकी इतनी-इतनी दाढ़ी है। सारा दिन दाढ़ी में से जुएँ निकालती रहती हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारती सिंह इस क्लिप में दाढ़ी-मूँछ को लेकर मजाक करती दिख रही हैं। हालाँकि, यह वीडियो पुराना है और इसमें उनके साथ जैस्मिन भसीन भी हैं। वहीं लोग इसे सिख समुदाय से जोड़कर भारती को खरी-खोटी सुना रहे हैं। इसका जवाब भारती ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करके दिया है। भारती का कहना है कि उन्होंने बहुत बार देखा पर इसमें कुछ गलत नहीं दिखा। वह एक जनरल बात कर रही थी किसी का मजाक नहीं उड़ाया।

भारती सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके लोगों से माफी माँगी है। भारती ने इंस्टाग्राम पर अपने वीडियो कैप्शन में लिखा है, “मैं कॉमेडी करती हूँ लोगों को खुश करने के लिए न कि किसी का दिल दुखाने के लिए। अगर मेरी किसी बात से कोई हर्ट हुआ है तो माफ कर देना अपनी बहन समझ के।”

सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर ट्रोल किया जाने के बाद भारती सिंह माफ़ी माँगने के लिए सामने आईं। उन्होंने कहा, “नमस्कार सतश्री अकाल। एक-दो दिन से एक वीडियो बहुत वायरल हो रहा है। मुझे भेजा भी गया है, मुझे मैसेज भी किया है कि आपने दाढ़ी-मूँछ के बारे में मजाक उड़ाया है। मैं 2 दिन से बार-बार वीडियो देख रही हूँ। आप से भी रिक्वेस्ट करुँगी कि आप लोग लोग भी देखो। और मैंने कहीं भी किसी धरम या कास्ट के बारे में नहीं बोला कि इस धरम के लोग दाढ़ी रखते हैं और ये प्रॉब्लम्स होती हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “आप वीडियो देख लो, मैंने किसी पंजाबी के बारे में नहीं बोला कि पंजाबी लोग दाढ़ी रखते हैं या दाढ़ी-मूँछ से ये प्रॉब्लम होती है। मैं सिर्फ नॉर्मल बात कर रही थी अपनी दोस्त से। दाढ़ी तो आजकल सब ही रखते हैं। मेरी अगर इस बात से किसी धरम-जात के लोग हर्ट हुए हैं तो मैं माफी माँगती हूँ। मैं खुद पंजाबी हूँ, अमृतसर में पैदा हुई तो मैं पंजाब का मान हमेशा रखूँगी। मुझे प्राउड है कि मैं पंजाबी हूँ।”

गौरतलब है कि भारती वर्तमान में अपने पति हर्ष लिम्बाचिया के साथ ‘द खतरा खतरा शो’ को-होस्ट कर रही हैं। दंपति ने इस साल अप्रैल महीने में अपने पहले बच्चे के रूप में एक बेटे को जन्म दिया है।

‘भारत की तबाही’ का सपना है ‘ग़ज़वा-ए-हिन्द’, ‘हदीस’ में लिखा है: बड़बड़ाता मर गया औरंगज़ेब, कट्टरपंथियों को भी इस पर फख्र

इतिहास में कुछ व्यक्ति अच्छे होते हैं, तो कुछ बुरे होते हैं। कुछ ऐसे होते हैं, जिनकी अच्छे-बुराई पर बहस चलती रहती है। जबकि कुछ ऐसे होते हैं, जिसने हजारों-लाखों निर्दोषों का खून बहाया हो। औरंगजेब ऐसे ही लोगों में से एक था, जिसका मकसद था पूरे हिंदुस्तान पर इस्लामी शासन। हिन्दुओं के इस हत्यारे का आज इस्लामी कट्टरपंथी गुणगान करते नहीं थक रहे। क्या इसके पीछे उनकी ‘गज़वा-ए-हिन्द’ वाली सोच है? आइए, समझाते हैं ये होता क्या है।

असल में ‘गज़वा-ए-हिन्द’ का अर्थ है, पूरे भारतीय उप-महाद्वीप में इस्लाम का शासन। इसमें भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, बांग्लादेश और भूटान – ये सभी आते हैं। हालाँकि, अभी तक किसी ऐसा इस्लामी शासक नहीं हुआ जिसका इस पूरे क्षेत्र पर एक साथ शासन रहा हो। इस्लाम के शुरुआती दौर में तो दिल्ली से विंध्य तक ही उनका ‘हिंदुस्तान’ था। खुद औरंगजेब दक्कन-दक्कन करते-करते बुढ़ापे में दाढ़ी नोचते हुए किसी तंबू में मर गया।

आज भी कट्टरपंथी मुस्लिमों के मन में चलता रहता है ‘गज़वा-ए-हिन्द’

‘गज़वा-ए-हिन्द’ का अर्थ है मुस्लिम फ़ौज द्वारा हमला कर के भारत को ‘दारुल इस्लाम’ बनाना। ये ‘जिहाद’ का ही एक हिस्सा है। वही ‘जिहाद’, जिसके नाम पर अलकायदा ने अमेरिका में तबाही मचाई थी। वही ‘जिहाद’, जिसका नाम लेकर जम्मू कश्मीर और पाकिस्तान में कई आतंकी संगठन उठ खड़े हुए। वही ‘जिहाद’, जिसके नाम पर सीरिया में ISIS, नाइजीरिया में ‘बोको हराम’ और अफगानिस्तान में तालिबान निर्दोषों का खून बहाता है।

जवाब में कोई कह सकता है कि ये सब पुरानी बातें हैं और अब ऐसा कुछ नहीं रहा, लेकिन सच्चाई ये है कि पूरे भारत पर मुस्लिमों के कब्जे का सपना अधूरा ही रहा है और आज भी इसकी बात की जाती है। इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा ही खूब की जाती है। क्रिकेट के इतिहास में सबसे तेज़ गेंद फेंकने का रिकॉर्ड बनाने वाले शोएब अख्तर ने चर्चा की थी कि कैसे इस्लाम की पुस्तकों में ‘गजवा-ए-हिन्द’ के बारे में लिखा है और अटैक की नदी दो बार खून से लाल होगी। उन्होंने कहा था कि हमारी फ़ौज कश्मीर फतह कर के आगे बढ़ेगी।

सितंबर 2021 में अलकायदा ने अफगानिस्तान पर कब्ज़ा करने वाले तालिबान से कहा कि वो अब कश्मीर को भारत से ‘आज़ाद’ कराए। इसे भी ग़ज़वा-ए-हिन्द के एक रूप में ही देखा जाना चाहिए। ‘गज़वा’ का क्या अर्थ हुआ? इसका मतलब है युद्ध अथवा जंग। लेकिन, ये अलग है। इस अरबी शब्द का मतलब है ऐसा युद्ध जो किसी वस्तु वगैरह या साम्राज्य विस्तार और जमीन के लिए नहीं हो रहा हो। ये वो युद्ध है, जो मज़हब के लिए है।

‘गज़वा-ए-हिन्द’ की उत्पत्ति कहाँ से हुई? ऐसा नहीं है कि अलकायदा या शोएब अख्तर जैसों से इसका अविष्कार कर दिया, बल्कि इस्लाम की शुरुआत में ही इसका जिक्र मिलता है। ‘हदीस’ में इसके बारे में बताया गया है। अब ‘हदीस’ क्या है? ‘हदीस’ इस्लाम के संस्थापक पैगंबर मुहम्मद द्वारा कही गई बातों और उनके द्वारा किए गए कार्यों का संकलन है, जिसे सुन-देख कर लिखा गया बताया जाता है। मुहम्मद ने क्या-क्या किया और क्या-क्या कहा, ‘हदीस’ में वही सब है।

पैगंबर मुहम्मद ने भारत की तबाही को लेकर क्या-क्या कहा था, ‘हदीस’ में लिखा है

कुरान के बाद अगर मुस्लिमों के लिए कोई साहित्य सबसे ज्यादा मायने रखता है, तो वो ‘हदीस’ ही है। हालाँकि, कई मुस्लिम ‘विद्वानों’ और संगठनों का ये भी कहना है कि ‘गज़वा-ए-हिन्द’ का गलत मतलब निकाला गया है। ‘हदीस’ की मानें तो पैगंबर मुहम्मद ने कहा था, “मेरे उम्माह में से दो समूहों को अल्लाह ने जहन्नुम की आग से बचा लिया है। एक वो है जो भारत पर आक्रमण करेगा, जबकि दूसरा वो है जो ईसा इब्न मरयम के साथ रहेगा।”

बता दें कि ‘उम्माह’ का मतलब होगा है समुदाय। जैसे इस्लामी मुल्क आपस में मिल कर ‘उम्माह’ कहलाते हैं। इसी तरह ईसा बिन मरयम इस्लाम में जीसस क्राइस्ट को ही कहा जाता है। ‘हदीस’ में एक अन्य जगह लिखा है, ‘अल्लाह के पैगंबर ने वादा किया है कि हमलोग भारत पर आक्रमण करेंगे। अगर मैं तब तक जीवित रहा तो मैं इसके लिए अपनी सारी संपत्ति सहित खुद को भी कुर्बान कर दूँगा। अगर मैं मारा गया तो मुझे शहीदों में उच्च दर्जा मिलेगा, फिर मैं वापस आकर अबू हुरैया अल मुहर्रर (जहन्नुम की आग से मुक्त) कहलाऊँगा।’

‘हदीस’ में एक अन्य जगह भी ‘उम्माह’ का जिक्र करते हुए लिखा है कि सिंध और हिन्द की तरफ फौज को भेजा जाएगा। एक अन्य जगह पैगंबर मुहम्मद का वक्तव्य है, “तुमलोगों में से एक समूह भारत को फतह करेगा। जब तक वो लोग भारत के राजाओं को जंजीरों से बाँध कर लाएँगे, अल्लाह उनका साथ देगा। अल्लाह उन योद्धाओं को माफ़ी देगा। जब वो भारत से वापस लौटेंगे तो सीरिया में इसा इब्न मरयम को पाएँगे।” अर्थात, इस्लाम का शुरुआत से ही सपना रहा है भारत के शासकों को जंजीरों में बाँधना।

‘हदीस’ में ही पैगंबर मुहम्मद का इसी से सम्बंधित एक अन्य उद्धरण है, “येरुशलम का राजा योद्धाओं को हिन्दुओं की तरफ कूच करने का आदेश देगा। ये योद्धा हिन्द की सरजमीं को तबाह कर देंगे। वहाँ के सारे खजाने को जब्त कर के लाएँगे, जिसका इस्तेमाल येरुशलम को सजाने के लिए किया जाएगा। राजा के आदेश से ये योद्धा पूर्व से पश्चिम तक सारे क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लेंगे, और ‘दज्जाल’ (क़यामत से पहले आने वाला झूठा मसीहा) के आने तक वहीं रहेंगे।”

औरंगज़ेब का गुणगान करने वाले भी इसी सोच को लेकर चल रहे

औरंगज़ेब पूरे हिंदुस्तान पर कब्जा कर के इस्लामी शासन के अंतर्गत लाना चाहता था, भले ही इसके लिए उसे कितने ही हिन्दुओं का खून क्यों न बहाना पड़े। औरंगज़ेब के बारे में कहा जाता है कि वो इस्लाम के सारे क्रियाकलापों का पालन करता था और उसने कुरान और हदीस पढ़ रखा था। स्पष्ट है, हदीस में उसने ‘भारत की तबाही’ के बारे में भी पढ़ा होगा और इस पर वो उतारू भी था। हालाँकि, जाट, मराठा, अहोम, सतनामी और सिख समुदाय ने इस दौरान हिंदुत्व की बागडोर सँभाले रखी और औरंगज़ेब से युद्ध करते रहे।

औरंगज़ेब के शासनकाल के अंतिम 26 साल दक्कन में युद्ध लड़ते-लड़ते ही बीते, जिसमें हर साल एक लाख से भी अधिक लोगों की मौत हुई। सूखे और प्लेग से जूझते भारत में उस समय औरंगजेब के खजाने की भी खस्ता हालत थी, यही कारण है कि उसके बाद मुग़ल कंगाल ही होते चले गए। 90 साल के औरंगज़ेब को चीजें ठीक से समझ भी नहीं आती थीं। वो अपने बेटे से पागलों की तरह ‘अकेला आने, अकेला जाने’ और ‘मुझे नहीं पता मैं कौन हूँ, क्या कर रहा हूँ’ जैसी बातें बड़बड़ा रहा था।

हाल ही तीन ख़बरें गौर करने लायक है। पहली, AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी महाराष्ट्र के औरंगाबाद में मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र पर चादर चढ़ाने गए। दूसरा, श्रीनगर के मेयर जुनैद अजीम मट्टू ने लिखा, “हाफिज-ए-कुरान, शहंशाह हजरत मुही-उद-दीन मुहम्मद औरंगजेब और उनकी कब्र पर अल्लाह की रहमो करम हो।” तीसरा, कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि काशी विश्वनाथ मंदिर को औरंगज़ेब ने नष्ट नहीं किया था।

पाकिस्तान भी ‘गज़वा-ए-हिन्द’ वाली सोच से ही चलता है। वहाँ का इस्लामी विशेषज्ञ सैयद जैद जमान हामिद कई बार इसका जिक्र कर चुका है और कहता है कि भारत ‘गजवा-ए-हिन्द’ से डरता है। वहाँ के मंत्री अली मुहम्मद खान ने संसद में इसका जिक्र किया। अब आखिर भारत के ही इस्लामी कट्टरपंथी उस औरंगजेब की आलोचना क्यों करें, जिसने ‘गज़वा-ए-हिन्द’ के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया? वो तो उनके लिए सम्मान का पात्र रहेगा ही। औरंगज़ेब जहाँ भी जीतता था, सबसे पहले वहाँ के मंदिर ध्वस्त किए जाते थे और इस्लाम न अपनाने वाले हिन्दुओं को बेरहमी से मार डाला जाता था।

औरंगजेब ने कैसे सिख गुरु तेग बहादुर की बेरहमी से हत्या करवाई और भाई मति दास के शरीर को बीच से चीर डाला गया, ये सब जानने के बावजूद आज ओवैसी और जुनैद जैसे लोग औरंगजेब को मसीहा बता रहे हैं, टीवी डिबेट में इस्लामी विशेषज्ञ उसे अपने बुजुर्ग बताते हुए उस पर फख्र जता रहे हैं तो इसका कारण है कि उसने ‘गज़वा-ए-हिन्द’ के लिए काम किया। ये तो उसका गुणगान ही करेंगे, क्योंकि ये उसी विचारधारा की उपज हैं।

इनका साथ देने के लिए ‘The Print’ जैसे मीडिया संस्थान मौजूद हैं, जो एक लंबे-चौड़े लेख में पूरे भारत के इस्लामी शासन के अंतर्गत आने के इतिहास का जिक्र करते हुए कहता है कि हिन्दुओं को ‘गजवा-ए-हिन्द’ से डरने की जरूरत नहीं है। उसने लिख दिया कि ‘हिन्द’ का आशय हदीथ में भारत है ही नहीं। फिर सिंध के साथ इसका नाम क्यों लिया जाता? जब ये सब इतिहास है, तो अभी तक दज्जाल और ईसा धरती पर उतरे ही कहाँ हैं? कश्मीर में तो अलकायदा की यूनिट का नाम ही है – ‘अंसार गजवातुल हिन्द’। हिन्दू भले क्यों न इससे लड़ने के लिए तैयार रहे? क्यों न चर्चा करे?

‘यदि यह शिव लिंग है तो शायद शिव जी का भी खतना कर दिया गया था’: DU के प्रोफ़ेसर ने की ओछी टिप्पणी, कार्रवाई की माँग

वाराणसी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे की सच्चाई क्या सामने आई, पूरा का पूरा लिबरल, वामपंथी और कट्टर इस्लामी गिरोह तभी से बौखलाया हुआ है। इसी कड़ी में दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास के प्रोफ़ेसर ने ज्ञानवापी के वजूखाने में मिले शिवलिंग पर टिप्पणी करते हुए सारी सीमाएँ लाँघ गए हैं। जिसकी तीखी आलोचना के साथ कार्रवाई की माँग हो रही है। सोशल मीडिया पर उनके द्वारा ज्ञानवापी में पाए गए काशी विश्वनाथ पर की गई ओछी टिप्पणी पर हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत हो गईं हैं।

दिल्ली के हिन्दू कॉलेज में इतिहास के एसोसिएट प्रोफ़ेसर के पद पर कार्यरत रतन लाल ने फेसबुक पर एक लिंक साझा करते हुए लिखा, “यदि यह शिव लिंग है तो लगता है शायद शिव जी का भी खतना कर दिया गया था। साथ ही पोस्ट में चिढ़ाने वाला इमोजी भी लगाया है ? .वहीं तस्वीर का क्रेडिट लल्लनटॉप (PC: The Lallantop) को दिया गया है।

प्रोफ़ेसर की इस ओछी पोस्ट पर कई लोगों ने जहाँ उन्हें लताड़ लगाई है तो वहीं बहुत से वामपंथी, लिबरल और कट्टरपंथी मुस्लिमों के गिरोह हाहा करते और वाहियात टिप्पणी के साथ गाली-गलौज भी करते हुए नजर आए।

संजय कुमार नाम के एक व्यक्ति ने फेसबुक पर उन्हीं के पोस्ट के कमेंट में लिखा है, “जानबूझ कर लिबरल दिखने की कोशिश में ओछेपन पर उतर आए। इतिहास के प्रोफेसर हो आप, तथ्यों पर बात करो।आपसे बेहतर उम्मीद थी।”

वहीं मिस्टर सिन्हा नाम के एक यूजर ने ट्विटर पर हिन्दू कॉलेज के प्रोफ़ेसर रतन लाल के प्रोफाइल और फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को टैग कर सख्त करवाई की माँग की। उन्होंने लिखा, “हम एक प्रोफेसर की ऐसी बकवास कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं @dpradhanbjp जी? एक प्रोफेसर से ऐसी बकवास आने से यह और अधिक हास्यास्पद हो जाता है क्योंकि वह सैकड़ों निर्दोष छात्रों को प्रभावित कर सकता है।” इसी पोस्ट में उन्होंने दिल्ली पोलिस को भी टैग करते हुए सख्त कार्रवाई की माँग की है।

बाद में तो लोगों ने रतन लाल की पूरी प्रोफाइल ही खंगाल दी है। रतन लाल ‘अम्बेडकर नामा’ के प्रधान संपादक खुद को बताते हैं। साथ ही इनके प्रोफाइल पर ही इन्होने खुद का परिचय हिन्दू कॉलेज में इतिहास के एसोसिएट प्रोफ़ेसर के रूप में दे रखी है।

वहीं विवेक नाम के एक ट्विटर यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, “कब खून खौलेगा बीजेपी सरकार का, ये तो कानून के हिसाब से भी स्वीकार नहीं है, बहुसंख्यकों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना।”

गौरतलब है कि वाराणसी के विवादित ज्ञानवापी ढाँचे से एक शिवलिंग मिला है, जो कहा जा रहा है कि बेशकीमती पत्ना पत्थर का बना हुआ है। सर्वे में शामिल एक सूत्र के मुताबिक, “यह वही शिवलिंग है, जिसे अकबर के वित्त मंत्री टोडरमल ने बनारस के पंडित नारायण भट्ट के साथ मिलकर 1585 में स्थापित कराया था। इस शिवलिंग का रंग हरा है। इसके ऊपर का कुछ हिस्सा औरंगजेब की तबाही में क्षतिग्रस्त हो गया था। इस शिवलिंग का साइज करीब 2 मीटर बताया जा रहा है। यह देखने में काफी आकर्षक है।”

बता दें कि शिवलिंग श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित नंदी के सामने वाले ज्ञानवापी के हिस्से में है। लेकिन यहाँ असली सवाल ये है कि जिस ज्ञानवापी को ‘मस्जिद’ बता कर मुस्लिम वहाँ नमाज पढ़ते आ रहे थे और जिस वजूखाने में हाथ-पाँव धो रहे थे, वहीं पर शिवलिंग मिला है। अदालत की निगरानी में हुई प्रक्रिया में सच्चाई सामने आने के बावजूद लिबरल, वामपंथी और कट्टर इस्लामी गिरोह इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

राहुल भट की रोहिंग्या मुस्लिमों वाली वायरल फोटो डिलीट: जिन इस्लामी आतंकियों ने की हत्या, अब उसी की ‘सॉफ्ट छवि’

जम्मू-कश्मीर में इस्लामी आतंकियों ने राहुल भट नाम के एक कश्मीरी हिंदू की हत्या कर दी। यह घटना 12 मई 2022 को शाम लगभग साढ़े चार बजे अंजाम दी गई। राहुल भट की हत्या के बाद वहाँ रह रहे कश्मीरी हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे। लगभग 350 सरकारी कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफा भी दिया। असुरक्षा का यह माहौल अचानक से हुआ? सिर्फ एक हत्या के बाद?

राहुल भट की हत्या आम आतंकी घटना नहीं थी। यह टार्गेटेड किलिंग थी। टार्गेटेड किलिंग इसलिए क्योंकि जिस तहसील ऑफिस में राहुल भट को घुस कर आतंकियों ने मारा, अगर यह आम आतंकी घटना होती तो वहाँ काम करने वाले दूसरे भी मारे जा सकते थे या घायल होते। क्या ऐसा हुआ? नहीं। क्या कारण हो सकता है? सिर्फ और सिर्फ टार्गेटेड किलिंग। भीड़ भरे ऑफिस में घुसना और नाम पूछ कर गोली मारना टार्गेटेड किलिंग नहीं है तो और क्या है?

राहुल भट की हत्या को इस्लामी आतंकी और हिंदुओं की टार्गेटेड किलिंग से जोड़ कर नहीं देखा जाए, इसके लिए अब तरह-तरह के पैंतरे शुरू हो गए हैं। आतंकियों के स्तर से होते हुए नेताओं और मीडिया तक… सब इस लाइन को पकड़ कर चल रहे हैं कि राहुल भट की हत्या हिंदू होने के कारण नहीं बल्कि संघी/बीजेपी एजेंट आदि-इत्यादि के कारण हुई है। पहली बात तो यह कि कोई संघी हो, दक्षिणपंथी हो तो उसकी हत्या क्यों? दूसरी और बहुत जरूरी बात… राहुल भट किसी भी राजनीतिक विचारधारा से बँधे इंसान नहीं थे। यह तथ्य है, इसके प्रमाण हैं।

7 सितंबर 2017 को फेसबुक पर राहुल भट का अपलोड किया फोटो

जाति-धर्म से परे उठ कर राहुल भट ने रोहिंग्या मुस्लिमों के हितों के लिए आवाज उठाई थी। फेसबुक पर अपने प्रोफाइल के साथ उन्होंने रोहिंग्या मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार को रोकने की अपील की थी। यह सितंबर 2017 की बात है। इसके ठीक एक महीने पहले अगस्त 2017 में लगभग 900000 रोहिंग्या मुस्लिमों को म्यांमार से भाग कर जान बचाने के लिए बांग्लादेश में शरण लेनी पड़ी थी। इनमें से कई हजार भारत में भी अवैध ढंग से घुसे। अफसोस यह कि दूसरे देश के मुस्लिमों के लिए आवाज उठाने वाले राहुल भट को शायद यह नहीं पता होगा कि उनकी जान एक दिन इस्लामी आतंकी ही लेंगे।

राहुल भट से जुड़ा यह तथ्य अब आपको उनके फेसबुक प्रोफाइल पर नहीं मिलेगा। यह डिलीट किया जा चुका है। किसने डिलीट किया, इसका सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है और यह मुद्दा भी नहीं है। डिलीट करने से किसका फायदा होगा, यह चर्चा का विषय है।

राहुल भट का फेसबुक, सबसे ऊपर के लाइन की तीसरी फोटो (यह 3 सितंबर 2017 को अपलोड की गई थी), इसी पर रोहिंग्या मुस्लिमों के हक की बात करता फिल्टर लगा कर 7 सितंबर 2017 को प्रोफाइल इमेज लगाई गई थी

राहुल भट की हत्या… लेकिन इस्लामी आतंकी पाक-साफ

राहुल भट ने रोहिंग्या मुस्लिमों के हितों की बात की, यह जानकारी उस गैंग के लिए सही नहीं थी, जो इस्लामी आतंकियों और हिंदुओं की टार्गेटेड किलिंग से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े थे या इसमें अपना फायदा देखते थे। इस गैंग का और इनकी मानसिकता का पर्दाफाश करना जरूरी है… वो भी पर्याप्त तर्कों के साथ। सबसे पहले समझना होगा कि इस गैंग का मकसद क्या है और इस गैंग के पार्टनर (बोले तो बड़े-बड़े खिलाड़ी) कौन-कौन हैं।

जम्मू-कश्मीर में इस्लामी आतंकी चुन-चुन कर हिंदुओं की टार्गेटेड किलिंग कर रहे हैं, इसके कई उदाहरण हैं, कई खबरें हैं। राहुल भट की घटना ताजा समाचार है, इसलिए लोग चर्चा कर रहे हैं। सच यह है कि इनके पहले भी दूसरे राज्यों के लोग वहाँ रोजगार के लिए गए हैं, उनकी भी हत्याएँ की गई हैं। गैर-मुस्लिमों के नाम धमकी वाले लेटर भी जारी किए गए हैं। इस तरह की सूचनाएँ जब सार्वजनिक होने लगी हैं, तो अब इस पर राजनीतिक चोला ओढ़ाया जा रहा है। इस चोले के लिए आतंकियों, उनके चाहने वालों से लेकर नेता और मीडिया भी अपना खेल दिखा रही है।

राहुल भट की हत्या… लेकिन वोट-बैंक जरूरी

पहले बात राजनीति की। जम्मू-कश्मीर में इस्लामी आतंकी हिंदुओं को चुन-चुन कर मार रहे हैं, इससे फोकस हटाने के लिए मुख्यमंत्री रह चुके फारूक अब्दुल्ला जैसे लोग ‘द कश्मीर फाइल्स’ का मुद्दा उठाने लगे हैं। उनके अनुसार, “कश्मीर में हिंदुओं पर हो रहे हमलों को रोकना है तो इस फिल्म पर रोक लगानी जरूरी है।” मतलब हत्यारों को पकड़ो या पकड़ने के दौरान अगर आरोपित आतंकी भागने लगे, सुरक्षाबलों पर ही गोली चलाने लगे तो उन पर गोली चलाओ जैसे शब्दों-वाक्यों के बजाय फारूक अब्दुल्ला के मुँह से ‘द कश्मीर फाइल्स’ का मुद्दा निकला।

महबूबा मुफ्ती भी मुख्यमंत्री रही हैं। उनके अनुसार बाबरी मस्जिद को शहीद कर दिया गया है। इससे कश्मीर में डायरेक्ट इम्पैक्ट पड़ा है। लोगों में दूरियाँ और बढ़ गई हैं। इन्होंने भी ‘द कश्मीर फाइल्स’ का जिक्र करते हुए कह दिया कि इसके कारण लोगों के दिलों में नफरत डाल दी गई है। मतलब मुख्यमंत्री रह चुकीं महबूबा मुफ्ती को एक नागरिक की मौत से ज्यादा फिल्म पर बात करना जरूरी लगता है। कारण स्पष्ट है। फारूक अब्दुल्ला हों या महबूबा मुफ्ती… कश्मीरी हिंदू राहुल भट की हत्या इस्लामी आतंकियों ने की है, इस बात को जितना दबाया जा सके, दबाओ। साथ ही कोई दूसरा मुद्दा उछाल दो, जनता को बरगला दो।

राहुल भट की हत्या… लेकिन मीडिया का आतंक-प्रेम

राहुल भट की हत्या के बाद एक लेटर सोशल मीडिया पर वायरल होता है। लेटर में यह लिखा होता है कि कश्मीर में रहने वाले संघियों को चुन-चुन कर मार दिया जाएगा। ऐसे कश्मीरी पंडितों को चुन-चुन कर मार दिया जाएगा, जो कश्मीर में रह कर कश्मीरी मुस्लिमों को मारना चाहते हैं, एक दूसरा इजरायल बनाना चाहते हैं। सोशल मीडिया वाले इस लेटर को सच मान लिया जाए तो मतलब अब आतंकी ही यह मैसेज देना चाह रहे हैं कि वो हिंदुओं को टार्गेट नहीं कर रहे हैं, बल्कि सिर्फ उन हिंदुओं को मारेंगे, जो संघी हैं। सवाल उठता है फिर राहुल भट की हत्या क्यों?

हिंदू हो या संघी… इस्लामी आतंकी किसी को मार भी सकते हैं, यह बात भी इनको चाहने वाले मीडिया गैंग को नहीं पची। सोशल मीडिया पर वायरल लेटर को फैक्ट चेक के नाम पर ऑल्ट न्यूज जैसे प्रोपेगेंडा साइट ने तोड़ा-मरोड़ा। आतंकी संगठन का गलत लोगो, स्पेलिंग सही नहीं, लेटर किसी ने साइन नहीं किया… मतलब हर वो बात लिखी, जिसका एक आतंकी संगठन से कोई लेना-देना नहीं होता है लेकिन इनको उन्हें ‘पाक-साफ’ दिखाना था, उसी मकसद से लिखते गए।

राहुल भट की पत्नी और उनकी बेटी से इस्लामी आतंकियों ने जिंदगी भर की खुशियाँ छीन लीं। इनके साथ खड़े होने, इनको इंसाफ दिलाने के बजाय अब कुछ नेता अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंक रहे हैं। प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बोल कर अपने वोट-बैंक को मजबूत कर रहे हैं। मीडिया भी अपने कट्टरपंथी इस्लामी आकाओं के गोद में खेल रही है। इन सब के बीच प्रोपेगेंडा का वो खेल भी खेला जा रहा जिसमें आपसे कहा जाएगा… इस्लामी आतंकी बड़े मानवीय विचार वाले होते हैं, वो हिंदुओं को मार ही नहीं सकते… वो सिर्फ संघियों को मारते हैं/मारेंगे क्योंकि कश्मीर में गैर-मुस्लिम/गैर-कश्मीरियों को बसा कर एक दूसरा इजरायल बनाया जा रहा है।

राजस्थान के बड़े अस्पताल में महिला मरीज की आँख चूहे ने कुतरी: राहुल गाँधी ने प्रदेश के हेल्थ मॉडल को कहा है देश में सबसे Best

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने केंद्र पर निशाना साधते हुए अभी हाल ही में कहा कि देश के किसी राज्य में स्वास्थ्य पर इतना पैसा नहीं दिया जाता जितना राजस्थान सरकार देती है। उन्होंने अपने ट्वीट में राजस्थान के हेल्थ मॉडल को बेस्ट बताया था। लेकिन उनके दावे के एक दिन बाद ही राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था के क्या हाल हैं इसकी पोल खुल गई है। पता चला कि प्रदेश के अस्पताल इतने जर्जर हैं कि चूहे मरीजों की आँख कुतर रहे हैं और प्रशासन इस पर ध्यान तक नहीं दे रहा।

खबर राजस्थान के कोटा शहर के बड़े सरकारी अस्पताल MBS की है। यहाँ हाल में अस्पताल में लकवा से पीड़ित एक महिला की आँख चूहा कुतर गया। जब डॉक्टरों को इसकी खबर मिली तो हड़बड़ी में उस मरीज की पट्टी की गई। लेकिन जब इस लापरवाही पर प्रशासन से सवाल हुए तो उन्होंने चौंकाने वाला जवाब दिया। प्रशासन ने कहा- जहाँ खाने-पीने की चीज होती है वहाँ तो चूहे आते ही हैं। 

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट, जिस महिला की आँख को चूहे ने कतरा वो जीबीएस सिंड्रोम से पीड़ित हैं। उनका नाम रूपमती है। वह इस अस्पताल में लकवा अटैक आ जाने से 45 दिन से एडमिट हैं। पति देवेंद्र के अनुसार उनकी पत्नी लकवे के कारण न्यूरो के ICU में है और अपनी गर्दन तक नहीं हिला सकतीं। 42 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद हाल में वह बाहर लाई गईं थी।

देवेंद्र बताते हैं कि उन्होंने अपनी पत्नी को रात में देखा तो उनकी आँख पर कपड़ा था। जब कपड़ा हटाया तो वो रोने लगीं और पूरे चेहरे पर खून था। उन्होंने तुरंत स्टाफ को इसकी जानकारी दी। पहले कहा गया कि किसी कीड़े ने काटा होगा। पर, चूँकि घाव बड़ा था इसलिए देवेंद्र बातों पर यकीन नहीं कर पाए। उनकी पत्नी की पलक के दो टुकड़े हो गए थे। उन्हें देखकर लगा कि ऐसा कोई कीड़ा तो नहीं काट सकता। डॉक्टरों ने रूपमती का ट्रीटमेंट किया, फिर आँख चेक की, फिर उसपे ड्रेसिंग की। अब डॉक्टरों का कहना है कि ये घाव चूहे के काटने से हुआ था।

अस्पताल की इस लापरवाही पर जब उपाधीक्षक डॉक्टर समीर टंडन से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि हर महीने अस्पताल में पेस्टिसाइड कंट्रोल करवाते हैं। अभी भी चल रहा है। इस घटना की पूरी जाँच करवाएँगे। पेस्ट कंट्रोल के बाद भी यह घटना हुई है, इसमें जिम्मेदारी अस्पताल की और यहाँ के स्टाफ की है। जब उनसे पूछा गया कि चूहा आखिर आया कहाँ से तो उन्होंने कहा कि इस मामले में जाँच कराई जाएगी। जहाँ खाने-पीने की चीज होती हैं वहाँ चूहे आते ही हैं। अस्पताल में भी चूहे हैं।