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कश्मीरी पंडित की हत्या: राहुल भट की पत्नी को शक – आतंकियों से मिले हुए थे उनके ऑफिस के साथी, नाम पूछ कर मारी थी गोली

जम्मू-कश्मीर में हाल ही आतंकियों ने जिस कश्मीरी हिंदू की हत्या की थी, उनकी पत्नी ने इस मामले में बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि राहुल भट के ठिकाने की जानकारी उनके ही ऑफिस से आतंकियों को मिली होगी। इसके बाद ही आतंकवादियों ने गुरुवार को बडगाम के चदूरा में एक युवा कश्मीरी हिंदू राहुल भट की हत्या की थी।

राहुल भट की पत्नी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “वह कहते थे कि हर कोई उनके साथ अच्छे से पेश आता है औऱ कोई भी उन्हें नुकसान नहीं पहुँचा सकता। फिर भी किसी ने उन्हें नहीं बचाया। उन्होंने (आतंकियों) किसी से उनके बारे में पूछा होगा, अन्यथा उन्हें कैसे पता चलता?”

‘इंडिया टुडे’ से बात करते हुए भट की पत्नी ने इस बात का खुलासा किया कि उनके पति राहुल खुद को काफी असुरक्षित महसूस कर रहे थे और इसी के चलते वो डिस्ट्रिक्ट हेडक्वॉर्टर में अपना ट्रांसफर कराने की कोशिशें कर रहे थे। हालाँकि, कई बार कोशिशें करने के बाद भी उनके अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया गया था। बेटे की हत्या की जाँच की माँग की है, ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके। राहुल के पिता ने कहा, “पहले उन्होंने पूछा कि राहुल भट कौन है और फिर उसे गोली मार दी। वहाँ से केवल 100 फीट की दूरी पर पुलिस स्टेशन था। हम मामले की गहन जाँच की माँग करते हैं। ऑफिस में सुरक्षा जरूर रही होगी, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। उन्हें सीसीटीवी फुटेज की जाँच करनी चाहिए।”

बहरहाल इस हत्या के बाद कश्मीरी हिंदुओं द्वारा विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। प्रधानमंत्री के रोजगार पैकेज के तहत काम करने वाले करीब 350 सरकारी कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। इन लोगों का कहना था कि राज्य सरकार उन्हें पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकता है। ऐसे में वे सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। राहुल भट्ट भी इसी योजना के तहत 2011 से घाटी में कार्यरत थे। वो और बडगाम में अपनी पत्नी और 7 साल की बेटी के साथ रहते थे।

इस हत्या के विरोध में सैकड़ों हिंदू सड़कों पर उतरे और उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया। इन आंदोलनों में सरकारी कर्मचारियों और बडगाम में रहने वाले कश्मीरी हिंदुओं के परिवार भी शामिल हुए। वहीं प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज किया। आँसू गैस के गोले दागे गए।

राहुल भट के हत्यारे ढेर

राहुल भट की हत्या करने वाले जैश-ए-मोहम्मद के 3 आतंकियों को शुक्रवार को ही सुरक्षाबलों ने ढेर कर दिया। बावजूद इसके कश्मीरी हिंदू भय के साए में जीने को मजबूर हैं, क्योंकि उन्हें टारगेट कर हमले किए जा रहे हैं। इस बडगाम जिले में कश्मीरी हिंदुओं ने राहुल भट के सम्मान में एक कॉलोनी का नाम उनके नाम पर रख दिया है।

महाराष्ट्र पुलिस ने अभिनेत्री को उठाया, शरद पवार पर टिप्पणी का आरोप: मंत्री ने दी 200 मुकदमों की धमकी

महाराष्ट्र (Maharashtra) के महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार की साझेदार राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को लेकर ठाणे पुलिस ने मराठी अभिनेत्री केतकी चितले (Ketaki Chitale) को हिरासत में ले लिया है। पुलिस का आरोप है कि केतकी ने पवार के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट किया था।

केतकी के पोस्ट को लेकर NCP ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। वहीं, स्वप्निल नेटके नाम के व्यक्ति ने ठाणे शहर के कलवा पुलिस स्टेशन में सेक्शन 153 और 505 के तहत मामला दर्ज कराया है। अपनी शिकायत में नेटके ने दावा किया है कि पवार के खिलाफ केतकी के आपत्तिजनक पोस्ट के कारण राज्य में दोनों राजनीतिक दलों के बीच संबंध और तनावपूर्ण हो सकते हैं। कलवा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करने के बाद केस को ठाणे क्राइम ब्रांच को दे दिया गया है।

मराठी अभिनेत्री केतकी चितले के खिलाफ पवार के खिलाफ कथित अपमानजनक पोस्ट को लेकर कुल तीन FIR दर्ज की गई हैं। बता दें कि केतकी ने अपनी पोस्ट में शरद पवार का नाम नहीं लिखा था, लेकिन उन्‍होंने उपनाम पवार और उम्र का जिक्र करते हुए 80 साल लिखा था। शरद पवार की उम्र 81 साल है। इसी आधार पर इस पोस्ट को शरद पवार के खिलाफ बताया गया है और उनके खिलाफ FIR कर उन्हें हिरासत में ले लिया गया है।

केतकी ने सोशल मीडिया पोस्ट साइट फेसबुक पर जो पोस्ट लिखा था, उस पर कमेंट करते हुए महाराष्ट्र के आवास विकास मंत्री जितेंद्र आव्हाड ने ने कमेंट कर धमकी दी थी। आव्हाड ने अपनी धमकी में कहा था कि पार्टी के कार्यकर्ता अभिनेत्री की इस पोस्ट को लेकर महाराष्ट्र के कम-से-कम 100-200 पुलिस स्टेशनों में मामला दर्ज कराएँगे।

आव्हाड ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता अपने नेता के बारे में इस तरह की गलत टिप्पणियों को कभी भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। वह NCP परिवार के लिए पिता हैं और उन पर की गई टिप्पणी घिनौनी है। वहीं, NCP के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल (Chhagan Bhujbal) ने अभिनेत्री के खिलाफ तत्काल कार्रवाई का माँग की। 

NCP के प्रवक्ता क्लाइड क्रेस्टो ने कहा कि अभिनेत्री ने यह सब महाराष्ट्र भाजपा के नेताओं से सीखा है। उन्होंने कहा कि सस्ती और मुफ्त की लोकप्रियता पाने का सबसे अच्छा तरीका पवार के खिलाफ अपमानजनक बयान देना है। वहीं, महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चकनकर ने भी आलोचना को निंदनीय बता दिया।

पाकिस्तान से तय होता है IPL मैचों का रिजल्ट? CBI ने तीन सट्टेबाजों को दबोचा, वकास मलिक चला रहा है नेटवर्क

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में सट्टेबाजी के मामले में शनिवार (14 मई 2022) को CBI ने बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय जाँच एजेंसी ने खुलासा किया है कि 2019 के आईपीएल में पाकिस्तान से सट्टेबाजी नेटवर्क चलाया जा रहा था। इस मामले में सीबीआई ने एक केस दर्ज करते हुए तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

सीबीआई ने अपनी एफआईआर में कहा है कि सट्टेबाजी में शामिल आरोपित पाकिस्तान से मिले इनपुट्स के आधार पर आईपीएल के मैचों के रिजल्ट को प्रभावित कर रहे थे। इस मामले में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपितों दिलीप कुमार, वासू गुरराम और सज्जन सिंह के अलावा गुरराम सतीश, प्रभुलाल मीणा ,अमित कुमार शर्मा और राम अवतार को भी आरोपित बनाया गया है।

अधिकारियों के मुताबिक, अवैध सट्टेबाजी का यह अंतरराष्ट्रीय रैकेट 2013 से काम कर रहा था। इसके तहत काम करने वाले जालसाजों के बैंक अकाउंट फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर रहे थे। इसमें अज्ञात बैंक अधिकारियों की भी मिलीभगत है। इन्होने इन सट्टेबाजों के लिए डॉक्यूमेंट्स (आईडी और केवाइसी) बनवाने का काम किया। जाँच एजेंसी के मुताबिक, ये अकाउंट इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोले गए थे। एफआईआर में कहा गया है, “इस तरह की सट्टेबाजी गतिविधियों के लिए भारत की जनता से प्राप्त धन का एक हिस्सा हवाला लेनदेन का उपयोग करके विदेशों में स्थित उनके सहयोगियों के साथ भी साझा किया जा रहा है।”

सीबीआई का कहना है कि 2010 से सट्टेबाजी का ये रैकेट चलाया जा रहा है और इसमें कुछ सरकारी अधिकारियों भी मिलीभगत है। अब तक 10 करोड़ रुपए से अधिक का लेनदेन हो चुका है।

पाकिस्तानी नागरिक के संपर्क में थे सट्टेबाज

2013 से चल रहे सट्टेबाजी के इस रैकेट को पाकिस्तानी नागरिक वकास मलिक चला रहा था। उसके मोबाइल नंबर को भी ट्रेस कर लिया गया है। बहरहाल, सीबीआई की रडार पर कई शहरों के कई लोग हैं। हालाँकि, अभी तक सीबीआई ने ये खुलासा नहीं किया है कि किन मैचों को प्रभावित करने की कोशिशें की गई हैं।

गोडसे को भारत का पहला आतंकी बताने वाले कमल हासन ने गाने में उड़ाया केंद्र सरकार का मजाक, फिल्म को लेकर मामला दर्ज

तमिल फिल्मों के विवादित अभिनेता कमल हासन (Kamal Haasan) की आगामी फिल्म ‘विक्रम’ को लेकर बवाल हो गया है। हाल ही में रिलीज हुई इसके गाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि कमल हासन ने फिल्म ‘विक्रम’ के गाने ‘पत्थला पत्थाला’ में केंद्र सरकार की आलोचना की है। इसको लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है।

3 जून को रिलीज होने वाली फिल्म ‘विक्रम’ का यह गाना 12 मई को रिलीज हुआ था। गाने की कुछ पंक्तियों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सेल्वम ने एतराज हुए इसे हटाने की माँग की है। सेल्वम ने कहा कि गाने की पंक्ति ‘गज्जनाले कासिले कल्लालैयुम कासिले कैचल जोरम नेरैया वरुधु थिल्ललंगाडी थिल्लाले ओन्ड्रियाथिन थापले ओन्नियुम इल्ला इप्पले सावी इपो थिरुदन कैला थिल्लंगाडी थिल्लाले’ उपयुक्त नहीं है।

उपरोक्त वाक्य है हिंदी में अर्थ है, “कोषागार में पैसा नहीं बचा है। ऐसे समय में जब बुखार और बीमारियां बढ़ रही हैं। केंद्र (केंद्र सरकार) की गलतियों के कारण अब कुछ नहीं बचा है। चाबी अब चोर के पास है।”

सेल्वम ने 12 मई को चेन्नई के पुलिस आयुक्त कार्यालय में मामला दर्ज कराया है। ‘पत्थला पत्थाला’ गाने में केंद्र सरकार का मजाक उड़ाया जा रहा है। इससे लोगों के बीच खाई भी पैदा होती है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती है तो वे मद्रास हाईकोर्ट हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएँगे और फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की माँग करेंगे।

‘पत्थला पत्थाला’ गाने के कमल हासन ने लिखा है और इसमें आवाज भी उन्होंने खुद दी है, जबकि गाने को संगीतबद्ध अनिरुद्ध रविचंदर ने किया है। इस गाने को सोशल मीडिया पर 1.7 करोड़ व्यूज मिल चुके हैं। उनकी फिल्म विरुमांडी (2004) और विश्वरूपम I (2013) के रिलीज से पहले भी विवाद खड़ा हो गया था।

कमल हासन के विवादित बोल

इससे पहले, कमल हासन ने नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse) को आजाद भारत का पहला आतंकवादी बताकर विवाद खड़ा कर दिया था। साल 2019 में तमिलनाडु के अरवाकुरिची विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा था, “मैं ये इसलिए नहीं कह रहा कि यहाँ काफी संख्या में मुसलमान हैं। मैं ये महात्मा गाँधी की मूर्ति के सामने कह रहा हूँ। आजाद भारत में पहला आतंकवादी एक हिंदू था। उसका नाम था- नाथूराम गोडसे।”

उसी साल हासन ने हिन्दी शब्द को मुगलों की देन बताया था। तमिल में किए गए अपने ट्वीट में उन्होंने कहा था कि हिंदी शब्द मुगलों ने दिया और अंग्रेजों ने इसे बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा था कि पहली सदी के तमिल भारत के अलवार (वैष्णव) और नयनार (शैव) परंपरा ने धर्म के लिए हिंदू शब्द का प्रयोग नहीं किया।

विधानसभा चुनाव से 1 साल पहले त्रिपुरा CM विप्लब देब का इस्तीफा, शाह-नड्डा से मुलाकात के बाद फैसला: अब संगठन को करेंगे मजबूत

पूर्वोत्तर के राज्य त्रिपुरा (Tripura) में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले चौंकाने वाला कदम उठाते हुए राज्य के मुख्यमंत्री बिप्लब देब (Biplab Deb) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। शनिवार (14 मई 2022) को उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल सत्यदेब मारायण आर्य को भेजा। उससे पहले वो गुरुवार को दिल्ली के दौरे पर थे और आज ही वापस त्रिपुरा गए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, गवर्नर से मिलकर इस्तीफा देने के बाद बिप्लब देब ने कहा कि पार्टी चाहती है कि वो संगठन को मजबूत करने पर काम करें। इससे गुरुवार को वो दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने के लिए आए थे। इस बीच खबर ये है कि राज्य के उपमुख्यमंत्री जिष्णु देव वर्मा राज्य के अंतरिम मुख्यमंत्री का प्रभार संभाल सकते हैं। जिष्णु देव वर्मा त्रिपुरा के राज परिवार से ताल्लुक रखते हैं।

हालाँकि, अफवाहें तो ऐसी भी उड़ाई जा रही हैं कि पार्टी के अंदर कलह की स्थिति बनी हुई है। वहीं बिप्लब देब के मंत्रिमंडल के एक मंत्री ने कहा, “हमें आश्चर्य हुआ है। पता नहीं किस बात ने उन्हें इसके लिए प्रेरित किया। लेकिन जाहिर तौर पर उनकी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा हुई थी। पार्टी की कुछ योजनाएँ हो सकती हैं और हमें विश्वास है कि यह पार्टी केज्य लिए अच्छा होगा।”

भाजपा के सूत्रों के मुताबिक, राज्य में नए सीएम के चयन को लेकर शनिवार शाम को 5 बजे विधायक दल की बैठक होगी। इंडियन एक्सप्रेस के सूत्रों के मुताबिक, “निवर्तमान मुख्यमंत्री को पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में लगाया जाएगा। हमारे पास एक नया सीएम होगा।” उल्लेखनीय है कि राज्य के नए मुख्यमंत्री के चयन के लिए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। राज्य में अगले साल 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए अभी से भाजपा ने रणनीतियाँ तैयार करना शुरू कर दिया है।

हिंदू की हवेली गिराने का था प्लान, पूरी जामा मस्जिद पर ही KC ब्रदर्स ने फेर दिया था हाथ: आजादी के बाद की घटना, किताब में छपी कहानी

अमदावाद के प्राचीन क्षेत्र को ‘भद्र’ कहा जाता है। गुजरात के स्कूली-सिलेबस में पढ़ाया जाता है कि यहाँ एक किले की स्थापना अहमद शाह-प्रथम ने की थी, जिसके बाद से वह ‘भद्र के किले’ के तौर पर जाना गया और समग्र कोट-विस्तार ‘भद्र’ के नाम से ही पहचाना जाने लगा। लेकिन हम सभी जानते हैं कि ‘भद्र’ माँ काली का ही एक रूप है, ऐसे में प्रश्न उठता है कि अहमदशाह जैसा धर्मांध शासक इतनी मेहनत से किला बनवा कर उसका नाम हिन्दू देवी के नाम पर क्यों रखेगा?

दूसरा, ‘भद्र’ एक संस्कृत शब्द भी है जिसका अर्थ ‘मंगल’ ‘सुशील’ ‘अच्छा’ इस प्रकार से होता है तो क्या यह संभव है कि अहमदशाह ने अपने किले का नाम संस्कृत डिक्शनरी से ढूंढ कर रखा होगा?

जिस किसी ने भी पुराने अमदावाद का एक बार भी दौरा किया है, उसने यह अनुभव किया ही होगा कि किसी भी अन्य नगर की तुलना में अमदावाद में मस्जिदें ही मस्जिदें हैं। लगभग प्रत्येक सौ गज के अंतर में एक मकबरा या मस्जिद है। सोचने वाली बात है कि आज अमदावाद में मुस्लिमों की जनसंख्या 15 प्रतिशत के आसपास है और अहमदशाह के समय तो यह संख्या अत्यंत ही अल्प रही होगी। तो यह कैसे संभव है कि इतने अल्पांश वर्ग के लिए अहमदशाह ने मस्जिदें ही मस्जिदें बनवा दीं!

उत्तर बहुत स्पष्ट है कि आज का भद्र प्राचीन समय में मंदिरों से भरपूर ‘मंगलप्रद’ विस्तार था। यहाँ की इमारतें जिसे मुस्लिम आज अपना कह रहे हैं, वे सभी प्राचीन राजपूत मंदिर एवं राजप्रासाद थे। यहाँ जामा मस्जिद के नाम से पुकारी वाली प्रमुख मस्जिद ही भद्रकाली का मुख्य मंदिर था। वहीं इस नगर की आराध्य-देवी का स्थान था।

भद्र का किला, जामा मस्जिद, नगर के दरवाजें, आदि हिन्दू शैली में ही बने हुए हैं। अहमद शाह ने अपने कार्यकाल में इन तमाम हिन्दु स्थानों को अपवित्र किया और फिर उस पर कब्ज़ा कर लिया। भद्र विस्तार में खुदाई के समय बहुत बार विष्णु, शिव, महिषासुरमर्दिनी एवं लक्ष्मी, गणेश की मूर्तियाँ प्राप्त हो चुकी हैं। इसलिए बहुत आसानी से यह सिद्ध हो सकता है कि ये इमारतें, ये ढाँचे कभी मुस्लिम शासकों द्वारा निर्मित किए ही नहीं गए, केवल हथिया कर उपयोग में, व्यवहार में ले लिए गए।

बहुत सी घटनाओं से लगता है कि मुस्लिमों को भी इस बात की पूरी जानकारी है। इसी सम्बन्ध में अमदावाद की जामा मस्जिद से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घटना 1964-65 में घटी। मस्जिद के पास ही ‘कांतिचंद्र ब्रदर्स’ नाम की एक पुरानी दुकान थी। दुकान की स्थिति को देखकर ‘K.C. ब्रदर्स’ ने उसे गिरवा कर वहाँ एक ऊँची हवेली बनवा दी।

पुरुषोत्तम नागेश ओक’ अपनी पुस्तक ‘भारतीय इतिहास की भयंकर भूलें’ में लिखते हैं कि मस्जिद के निकट ही एक हिन्दू की ऊँची हवेली देख कर मुस्लिमों को विवाद का एक नया अवसर मिल गया। मस्जिद के ट्रस्टी ने ‘K.C. ब्रदर्स’ की हवेली को ढहा देने के उद्देश्य से कोर्ट में दावा दाखिल किया।

पुरुषोत्तम नागेश ओक की पुस्तक भारतीय इतिहास की भयंकर भूलें का एक पृष्ठ

चिंतित ‘K.C. ब्रदर्स’ अपनी हवेली बचाने के लिए यहाँ-वहाँ भटकने लगे। तभी किसी ने उन्हें ‘पुरुषोत्तम नागेश ओक’ का नाम बताया जोकि एक इतिहासज्ञ हैं और उनके कथनानुसार अमदावाद की जामा मस्जिद प्राचीनकाल में भद्रकाली का मंदिर था।

‘K.C. ब्रदर्स’ ने ओक को अपनी समस्या से अवगत करवाया। और फिर ओक के सुझाव पर ‘K.C. ब्रदर्स’ ने न्यायालय में यह प्रतिवादी उत्तर दिया – “जिस इमारत को मुसलमान मस्जिद कह रहे हैं, वह एक हिन्दू मंदिर है और इस कारण मुसलमानों का इस भवन पर कोई अधिकार ही नहीं होता। अतएव ‘K.C. ब्रदर्स’ की हवेली गिराने का प्रश्न ही नहीं उठता।”

तब एक हैरान कर देने वाली बात हुई कि छोटी-छोटी बातों पर दंगे भड़का देने वाले मुस्लिमों ने ‘K.C. ब्रदर्स’ का वह उत्तर पढ़ते ही अपना दावा वापस ले लिया। शायद उन्हें यह डर लग गया कि यदि केस आगे बढ़ा तो हवेली को गिराना तो दूर मस्जिद ही उनके हाथों से निकल जाएगी।

आज जब देश में ज्ञानवापी, कुतुबमीनार एवं ताजमहल पर एक नए सिरे से चर्चा हो रही है, ऐसे में यह बहुत स्पष्ट है कि भारतवर्ष के प्रत्येक नगर की लगभग प्रत्येक छोटी-बड़ी ऐतिहासिक इमारतें जिसे मुस्लिम उपयोग में ले रहे हैं, वें मध्यकालीन हिन्दू, राजपूत एवं क्षत्रियों द्वारा बनाए गए मंदिर, दुर्ग एवं राजमहल ही थे। जिहादी आक्रांताओं ने पहले इस पर कब्ज़ा किया फिर बाद में मस्जिदों एवं मकबरों में बदल दिया।

इस समय हिन्दुओं को चाहिए कि वे किसी भी तथाकथित मुस्लिम इमारत या भवन को शंका की दृष्टि से ही देखें। उसके विषय में पढ़ें, खोज करें और जागृति फैलाएँ। आज नहीं तो कल सच सामने आ ही जाएगा लेकिन तब तक मुस्लिमों को भी यह समझ आ जाएगी कि अब वे बहुत अधिक दिनों तक इस्लामी-सुप्रीमेसी के ढींगे मार कर हिन्दुओं को परेशान नहीं कर सकते। यदि उन्होंने ऐसा किया तो उन्हें इसकी बहुत बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ सकती है।

इस नए तमिल स्टार ने रणवीर सिंह की ‘जयेशभाई जोरदार’ को तगड़ा पटका: इधर महेश बाबू ने 2 दिन में पार किया ₹100 करोड़ का आँकड़ा

रणवीर सिंह की फिल्म ‘जयेशभाई जोरदार’ को काफी धीमी ओपनिंग मिली है। फिल्म को दर्शकों ने लगभग नकार दिया है। इसका अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि ‘जयेशभाई जोरदार’ ने पहले दिन पूरे भारत में मात्र 3 करोड़ रुपए की नेट कमाई की। ग्रॉस भी 4 करोड़ रुपए से ज्यादा नहीं होगा। तमिल स्टार सिवाकार्तिकेयन की ‘डॉन’ ने रणवीर सिंह को पछाड़ दिया। उधर महेश बाबू की ‘सरकारु वारी पाटा’ जबरदस्त कमाई कर रही है।

बता दें कि सिवाकार्तिकेयन तमिल सिनेमा के उभरते हुए कलाकारों में से एक हैं और उन्होंने 2012 में ‘Marina’ फिल्म से डेब्यू किया था। वो अब तक 20 फिल्मों में नजर आ चुके हैं। हाल ही में आई उनकी फिल्म ‘डॉक्टर’ ने दुनिया भर में 100 करोड़ रुपए की कमाई का आँकड़ा पार किया था। अब उनकी ‘डॉन’ ने केवल तमिलनाडु में पहले ही दिन 9.10 करोड़ रुपए का कारोबार किया है। दुनिया भर में फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 15 करोड़ रुपए के पार है।

ये तो हुई हिंदी और तमिल सिनेमा की बात। अब बात कर लेते हैं महेश बाबू की आई तेलुगु फिल्म ‘सरकारु वारी पाटा’ की, जिसने पहले ही दिन दुनिया भर में 75 करोड़ रुपए की कमाई कर के तहलका मचा दिया, जबकि इसे हिंदी में डब भी नहीं किया गया है। दूसरे दिन महेश बाबू की फिल्म ने अकेले आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 17 करोड़ रुपए की कमाई कर ली। दो दिनों में दुनिया भर में इसकी कमाई 100 करोड़ रुपए के पार हो गई है।

वहीं अब अपने सफल थिएटर रन के अंतिम चरण में आ चुकी फिल्म ‘RRR’ ने भी 1132 करोड़ रुपए बटोर लिए हैं। अब इसे OTT एप ‘Zee5’ पर 20 मई से देखा जा सकेगा। वहीं पाँचवें सप्ताह में भी चल रही कन्नड़ मूवी ‘KGF 2’ ने अब तक दुनिया भर में 1185 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है। फिल्म 1200 करोड़ रुपए का आँकड़ा छू सकती है। फ़िलहाल पूरे तमिलनाडु में सिवाकार्तिकेयन की धूम है, जो इससे पहले कई टीवी शो का भी हिस्सा रह चुके हैं और सुपरस्टार रजनीकांत के बड़े फैन हैं।

‘कुत्तों का काम है भौंकना…’: महाराष्ट्र में AIMIM नेता अकबरुद्दीन औवैसी ने राज ठाकरे पर की आपत्तिजनक टिप्पणी, लगवाए- अल्लाह-हू-अकबर के नारे

बात-बात पर संविधान की मर्यादा का राग अलापने वाले AIMIM के प्रमुख हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी (Akbaruddin Owaisi) आज तक राजनीतिक मर्यादा नहीं सिख पाए हैं। इसकी झलक एक जनसभा में देखने को मिली, जब उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) को कुत्ते की उपमा दे डाली। अकबरुद्दीन अपने जहरीले बयानों के लिए कुख्यात रहे हैं।

अकबरुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद (Aurangabad, Maharashtra) में आयोजित एक जनसभा एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कुत्तों का काम भौंकना है उन्‍हें भौंकने दो, शेर का काम है शांत रहना है। राज ठाकरे पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए अकबरुद्दीन ने कहा, “मैं यहाँ किसी को जवाब देने या बुरा कहने नहीं आया हूँ। तुम्हारी औकात नहीं है कि मैं तुम्हें जवाब दूँ।” इस दौरान उन्होंने ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर’ के भड़काऊ नारे जमकर लगाए और सभा में उपस्थित लोगों से भी लगवाए।

सभा की मंच से अकबरुद्दीन ने कहा, “मैं नौजवानों से कहूँगा, जो हो रहा है होने दो। जो भी छोड़ो… मैं तो कहूँगा कि जो भी कुत्ता जैसा भी भौंकता है, भौंकने दो। जो भी ब्रीड का… जैसा भी… भौंकता है, भौंकने दो। कुत्तों का काम भौंकना है। शेरों का काम खामोश रहना है। बस भौंकने दो। जरूरत नहीं है बोलने की। वक्त और हालात की नजाकत को समझो। उनके जाल में फँसना नहीं है। वो जाल बुन रहे हैं। तुमको फँसाना चाहते हैं। तुम फँसना नहीं। खामोश रहो… मुस्कुराओ और चले जाओ।”

उन्होंने लोगों से पूछा, “क्‍या डर गए हो… क्‍या परेशान हो…?” इसके बाद भीड़ ने ‘नहीं’ का शोर किया। उन्होंने मुस्लिमों को उकसाते हुए कहा कि देश में अजान, हिजाब और मॉब लिंचिंग  को लेकर चर्चा चल रही है, लेकिन मुस्लिमों को इससे डरना नहीं है। मुस्लिमों को इकट्ठा होने की जरूरत है। इसके बाद मंच अकबरुद्दीन ने अल्लाह-हू-अकबर का नारा दिया और लोगों से और जोर लगाकर बोलने के लिए कहा।

बता दें कि अबरुद्दीन ओवैसी अपनी बातों और हरकतों से हिंदुओं को उकसाने के लिए जाने जाते हैं। 12 मई को औरंगाबाद में एक स्कूल के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान उन्होंने मुगल आक्रांता और हिंदुओं के नरसंहारक औरंगजेब की कब्र का दौरा भी किया था और उस पर फूल चढ़ाए थे।

शिवसेना ने शुक्रवार (13 मई 2022) को अकबरुद्दीन ओवैसी के खुल्दाबाद में औरंगजेब के मकबरे पर फूल चढ़ाने की आलोचना की थी और कहा था कि वे इस यात्रा के जरिए राज्य का माहौल खराब करना चाह रहे हैं। 17वीं सदी के मुगल बादशाह के अनुयायियों का भी वही हश्र होगा, जो उसके साथ हुआ था।

बता दें कि राज ठाकरे लाउडस्पीकर लगाकर मस्जिदों से अजान देने के खिलाफ हैं। उन्होंने धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर को हटाने की माँग की थी और कहा था कि जब तक इन लाउडस्पीकरों को नहीं हटाया जाता है, तब तक लाउडस्पीकरों से हनुमान चालीसा का पाठ होगा। राज ठाकरे ने कहा था कि जहाँ पर अजान होगी, वहीं पर हनुमान चालीसा पढ़ा जाएगा।

पहले भी भड़काऊ बयान दे चुके हैं अकबरुद्दीन औवैसी

देश में CAA प्रदर्शन के दौरान भी अकबरुद्दीन ने भड़काऊ बयान दिया था, जिस पर हंगामा हो गया था। उन्होंने कहा था कि मुस्लिमों ने भारत पर 700 सालों तक राज किया है, नागरिकता के लिए इससे बड़ा और क्या सबूत हो सकता है। उन्होंने कहा था, “हमारे पूर्वजों ने इस मुल्क को चारमीनार दिया, मक्का मस्जिद दिया, जामा मस्जिद दिया, कुतुब मीनार दिया। हिंदुस्तान का प्रधानमंत्री जिस लाल किले पर झंडे फहराता है, उसे हमारे पूर्वजों ने दिया। अगर कोई मुस्लिमों से कागज माँगता है तो देख लो हमारे बाप-दादाओं के इन सबूतों को।”

इसके पहले देश के हिंदुओं को खुलेआम धमकी देते हुए अकबरुद्दीन ने कहा कहा था, “इस मुल्क में मुस्लिम 25 करोड़ हैं और तुम लोग (हिंदू) 100 करोड़। सिर्फ 15 मिनट के लिए पुलिस हटा कर देख लो, किस में कितना दम है। समझ में आ जाएगा।”

पंजाब कॉन्ग्रेस में बड़ी हलचल, पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने छोड़ी पार्टी: कहा – चापलूसों से घिरा है गाँधी परिवार; सिद्धू भी समर्थन में उतरे

पंजाब कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कॉन्ग्रेस को गुडबॉय कर दिया है। उनके इस कदम ने पार्टी के सभी लोगों को चौंका कर रख दिया है। लोग चौंके भी क्यों न। जाखड़ परिवार करीब 50 साल से कॉन्ग्रेस के साथ जुड़ा हुआ था। जाखड़ की तीसरी पीढ़ी कॉन्ग्रेस के साथ है। लेकिन अब उन्होंने कॉन्ग्रेस को चापलूसों से घिरी हुई पार्टी करार देते हुए सभी पदों से अपना इस्तीफा दे दिया है।

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का शीर्ष नेतृत्व चापलूसों से घिरा हुआ है, जिसके कारण पार्टी को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही सोनिया गाँधी को नसीहत दे दी है कि वो देशभर में राजनीति करें, लेकिन इससे पंजाब को छोड़ दें। इसके साथ ही उन्होंने उदयपुर में कॉन्ग्रेस के चिंतन शिविर का जिक्र कर कहा कि पार्टी की हालत देखकर तरस आ रहा है। सुनील जाखड़ ने इसे एक औपचारिकता मात्र करार दिया।

सुनील जाखड़ कॉन्ग्रेस का चिंतन शिविर उदयपुर में लगाए जाने पर भी सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं कि कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को पार्टी की कोई चिंता नहीं है। क्योंकि अगर चिंता होती तो चिंतन शिविर उदयपुर की जगह उत्तर प्रदेश में लगाती। ऐसा इसलिए क्योंकि यूपी की 403 सीटों में 300 सीटों पर कॉन्ग्रेस को करारी हार मिली है। उनका कहना है कि जितना वोट कॉन्ग्रेस के उम्मीदवारों को मिला, उससे कहीं अधिक तो एक पंचायत के कैंडिडेट को ही मिल जाता। उन्होंने पार्टी की इस हालत के लिए सीधे तौर पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, यानी राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और प्रियंका गाँधी को जिम्मेदार ठहराया है।

जो AK-47 नहीं कर पाई वो अंबिका सोनी ने कर दिया

पंजाब को धार्मिक रूप से बाँटने का आरोप लगाते हुए सुनील जाखड़ ने 1984 के उस दौर का जिक्र किया जब पंजाब आतंकवाद की आग से झुलस रहा था। उन्होंने कहा कि एके-47 भी हिंदुओं और सिखों को अलग नहीं कर पाया, लेकिन कॉन्ग्रेस की अंबिका सोनी ने वो कर दिखाया। उन्होंने हिंदुओं और सिखों को आपस में लड़ा दिया। सोनी ने ही ये अफवाह फैलाई थी कि अगर पंजाब में हिंदू व्यक्ति सीएम बन गया तो वो यहाँ आग लगा देगा।

जाखड़ के समर्थन में उतरे सिद्धू

इस बीच नवजोत सिंह सिद्धू ने सुनील जाखड़ का समर्थन करते हुए उनके पार्टी छोड़ने पर कहा कि सिद्धू को जाखड़ को पार्टी को नहीं गंवाना चाहिए। वे पार्टी की संपत्ति उन्होंने कहा कि जो भी मतभेद हैं, उन्हें आपसी सहमति से ,सुलझाया जा सकता है।

माँ नहीं बन रही थी पत्नी तो शौहर ने किया दूसरा निकाह, महिला ने पेट्रोल छिड़क कर लगाई आग: शौहर, दूसरी बीवी और सास की भी मौत

बिहार के दरभंगा जिले से दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ शौहर के दूसरा निकाह करने से नाराज पहली बीवी ने पेट्रोल छिड़ककर परिवार के ही 4 लोगों समेत खुद को जिंदा जला डाला। इसमें सास, शौहर और उसकी दोनों बीवियों की मौत हो गई। इनमें से दूसरी बीवी गर्भवती थी। यह घटना शनिवार (14 मई, 2022) की सुबह करीब 5 बजे की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दरभंगा जिले का सुपौल बाजार इलाका है। इसी के अंतर्गत आने वाले शेखपुरा मोहल्ले में खुर्शीद आलम नाम का शख्स रहता था। उसने दो निकाह कर रखे थे। उसकी पहली बीवी 35 साल की परवीन और दूसरी बीवी 32 साल की रोशनी खातून है। खुर्शीद जो कि पेशे से प्लम्बर का काम करता है, उसने करीब 10 साल पहले परवीन बीबी से निकाह किया था। लेकिन परवीन बीबी को कोई संतान नहीं हो रही थी, जिसके बाद उसने दो साल पहले ही अपने पड़ोस के गाँव की रहने वाली रोशनी खातून से निकाह कर लिया।

पहली बीवी लगातार कर रही थी विरोध

घर में सौतन लाए जाने की खबर से ही परवीन नाराज थी। वो लगातार इसका विरोध कर रही थी और उसने खुर्शीद आलम को चेताया था कि अगर उसने ऐसा किया तो इसके अंजाम बुरे होंगे। दो निकाह खुर्शीद आलम के लिए मुसीबत बना हुआ था। इसके कारण घर में आए दिन परवीन और खुर्शीद के बीच झगड़े होते रहते थे। इसी तरह की लड़ाई शनिवार को भी हुई थी।

काफी दिनों से चल रहा ये मियाँ-बीबी का झगड़ा अपने चरम पर पहुँच चुका था। शनिवार को जब लड़ाई हुई तो गुस्से में पहली बीवी परवीन ने पूरे घर में पेट्रोल छिड़कर आग लगा दी। इस घटना में परवीन के साथ ही उसकी सास रुफैदा खातून (65), शौहर खुर्शीद आलम (40) और उसकी दूसरी बीवी रोशनी खातून (32) भी जलकर मर गए। रोशनी खातून तो गर्भवती भी थी।

घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस उन सभी को अस्पताल ले गई, लेकिन किसी को बचाया नहीं जा सका।