कर्नाटक (Karnataka) का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति ईद के दिन नमाज पढ़कर लौटे मुस्लिमों के समूह का वीडियो रिकॉर्ड करता और अपने गाँव को ‘मिनी पाकिस्तान’ (Mini Pakistan) बताता है। वीडियो वायरल होने के बाद तनाव बढ़ गया है। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई (Basavaraj Bommai) ने जिले के SP को मामले की जाँच करने का आदेश दिया है।
वायरल वीडियो को लेकर लोगों के आक्रोश को देखते हुए पत्रकारों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री बोम्मई से सवाल किया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं एसपी से बात करूँगा और इस मामले जाँच और कार्रवाई के लिए कहूँगा।”
I'll speak to the SP to look into it. I will also tell Police to take action accordingly: Karnataka CM Basavaraj Bommai when asked about a viral video wherein the person shooting the video was allegedly heard saying "Kavalande (in Mysuru), our village is mini Pakistan" pic.twitter.com/8cBxoZmsAZ
कहा जा रहा है कि यह वीडियो मैसूर जिले के नंजनगुड तालुक के कवलांडे गाँव का है। वीडियो 3 मई ईद के दिन का बनाया गया है। वीडियो में दिख रहा है कि मुस्लिमों की भारी भीड़ सड़क के किनारे खड़ी है और ‘नारे ए तकबीर, अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगा रही है।
इस दौरान वीडियो बनाने वाला व्यक्ति कहता है, “मजमा देखो अभी, हमारे गाँव का”। इसके बाद उसका साथी कहता है, “ये मिनी पाकिस्तान है, छोटा पाकिस्तान”। इसके बाद वीडियो बनाने वाला शख्स कहता है, “कोवलांडे बोले तो छोटा पाकिस्तान।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने गुरुवार ( 5 मई 2022) को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू करने को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerajee) पर आरोप लगाया कि वो अफवाह फैलाती हैं कि सीएए कानून कभी जमीन पर लागू नहीं होगा। लेकिन कोरोना खत्म होते ही सीएए को लागू किया जाएगा। शाह ने कहा कि सीएए एक सच्चाई थी, है और रहेगी।
गृहमंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल के दौरे पर हैं। उन्होने सिलीगुड़ी स्थित रेलवे के खेल के मैदान में रैली के दौरान ममता बनर्जी पर जमकर जुबानी हमले किए। सीएम ममता पर राज्य में अत्याचार, भ्रष्टाचार और कट मनी का सिंडिकेट चलाने का आरोप लगाया और कहा कि जब तक ये सब खत्म नहीं होगा। बीजेपी लड़ती रहेगी। ममता को 3 बार चुना गया, लेकिन वो सुधर नहीं रही हैं।
#WATCH TMC is spreading rumours about CAA that it won’t be implemented on ground, but I would like to say that we’ll implement CAA on ground the moment Covid wave ends…Mamata Didi wants infiltration…CAA was, is & will be a reality:Union Home minister Amit Shah in Siliguri, WB pic.twitter.com/E1rYvN9bHM
पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद की गई राजनीतिक हिंसा का जिक्र करते हुए शाह ने दावा किया कि अब तो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी ये मान चुका है कि बंगाल में कानून का नहीं, बल्कि यहाँ जो सत्ता है, उसकी इच्छा का राज चलता है।
बंगाल को ममता ने किया कंगाल
गृह मंत्री ने राज्य में महंगी बिजली को लेकर राज्य सरकार को घेरते हुए दावा किया कि पूरे देश में यहाँ बिजली सबसे अधिक है। वहीं बंगाल में पेट्रोल का दाम 115 रुपए है, जो सबसे अधिक है, जबकि बीजेपी की सरकारों में 105 रुपए ही दाम हैं। उन्होंने कहा कि ममता दीदी ने पश्चिम बंगाल की आर्थिक रूप से कमर को तोड़कर रख दिया है। देश की आजादी के समय देश की जीडीपी में राज्य का योगदान करीब 30% था, जो कि घटकर अब 3.3 प्रतिशत पर आ गया है।
गोरखाओं का जिक्र करते हुए शाह ने ममता बनर्जी पर गोरखा लोगों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया और कहा कि भाजपा ने सदा गोरखाओं का सम्मान किया है। उन्होंने गोरखाओं को धन्यवाद दिया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की सीटें 3 से बढ़ाकर 77 कर दीं। इस मौके पर उन्होंने कहा कि गोरखपुर से सिलीगुड़ी के बीच 545 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण शुरू हो गया है। इस पर 31,000 करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं।
सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम (Instagram) पर एक अकाउंट ‘इंकलाब_इंडिया’ द्वारा 5 मई 2020 को एक ऐसा मनोरंजक पोस्ट किया गया जो वायरल हो रहा है। हालाँकि, अब इस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया है। इस पोस्ट में कहा गया था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) की बेटी ने $6 बिलियन (करीब 45,800 करोड़ रुपए) की माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी को ठुकरा दिया है। इसकी बजाय वो इस पूरे पैकेज को सीरिया के भूखे बच्चों को दान करना चाहती हैं।
भले ही इस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया हो, लेकिन इसका स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हो रहा है। इसी क्रम में ट्विटर यूजर शिव मिश्रा ने कहा, “$6 बिलियन का पैकेज? कौन हैं ये लोग? कहाँ से आते हैं ये लोग?”
कॉलमनिस्ट साकेत ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, “माइक्रोसॉफ्ट ने उन्हें छह अरब डॉलर का पैकेज दिया था। उन्होंने उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। बावजूद इसके उन्हें पैकेज का अग्रिम भुगतान किया गया। उन्होंने ठुकराए हुई नौकरी के लिए मिले पैकेज को सीरिया के बच्चों को दिया, क्योंकि पहले से ही समृद्ध भारत के लिए उस पैसे का कोई उपयोग नहीं है।”
Microsoft gave a six billion package to her. She rejected the offer. Still they paid her the package upfront. She donated the package she got for the job she didn’t take to Syrian children because there’s no use of that kind of money for already prosperous India. pic.twitter.com/cORJHgAkA3
इसी क्रम में देबाशीष त्रिपाठी नाम के एक अन्य ट्विटर यूजर ने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ को मिलने वाली सैलरी का खुलासा किया। यूजर ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ को सिर्फ 2.5 मिलियन डॉलर का वार्षिक मूल वेतन मिलता है। पिछले साल उनका कुल वेतन 50 मिलियन डॉलर से भी कम था और यह सारी जानकारी सार्वजनिक डोमेन में है। यूजर ने ये भी कहा कि पहले प्रोपेगेंडा तो ठीक से कर लो। इंकलाब बाद में लाना।
The CEO of Microsoft has an annual base salary of $2.5 Million & his total compensation in last FY was just shy of $50 M. This info is in public domain. Totally believable that they offered a fresher $6 Billion! ?
जब ऑपइंडिया ने इस पोस्ट को खंगालने की कोशिश शुरू की तो यह मिला ही नहीं। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि उक्त पोस्ट वास्तव में इंकलाब के अकाउंट से ही हुआ था या नहीं। लेकिन, जब हमने इस अकाउंट को और गहराई से जानने की कोशिश की तो हमें वहाँ पर बहुत सारी फर्जी खबरें और नफरत भरी पोस्ट मिलीं।
रामनवमी और हनुमान जयंती हिंसा के लिए हिंदुओं ठहराया जिम्मेदार
इंकलाब इंडिया की छानबीन करते वक्त हमने पाया कि 23 अप्रैल को हैंडल ने एक पोस्ट प्रकाशित किया था, जिसका शीर्षक था ‘ये रमजान भारतीय मुस्लिमों के लिए सबसे बुरी यादें लेकर आया’। इसके साथ ही ‘टूटा हुआ दिल’ की इमोजी भी लगाई गई है। इसमें कुछ ऐसे मुस्लिमों की तस्वीरें थी, जिनके घरों को अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान ध्वस्त कर दिया गया था। तस्वीरें अलग-अलग राज्यों की थीं।
फोटो साभार: इंस्टाग्राम
खास बात ये है कि इस पोस्ट में हिंदू पीड़ितों का तो जिक्र तक नहीं किया गया। इसमें उस शिवम तक का जिक्र नहीं किया गया, जिस पर खरगोन में हिंसा के दौरान मुस्लिमों की भीड़ ने हमला किया था। जहाँगीरपुरी हिंसा के दौरान मुस्लिमों के दंगे को भी दरकिनार कर दिया गया। इसमें उस घटना का भी जिक्र नहीं किया गया, जिसमें रामनवमी औऱ हनुमान जयंती पर हिंदुओं की शोभा यात्रा पर मुस्लिमों ने मांस के टुकड़े फेंके और पत्थरबाजी की थी।
वसीम शेख का अजीबोगरीब मामला
इसी तरह से 20 अप्रैल को इंकलाब इंडिया ने ‘नया भारत’ कैप्शन के साथ एक पोस्ट शेयर किया। इसमें बाईं तरफ एक व्यक्ति को मस्जिद पर भगवा झंडा लगाते दिखाया गया, जबकि दाईं ओर खरगोन के एक शारीरिक दिव्यांग व्यक्ति वसीम शेख की तस्वीर लगाई गई। यह वही वशीम शेख है, जिस पर खरगोन दंगों के दौरान पत्थरबाजी के आरोप में उसकी दुकान को कथित रूप से ध्वस्त कर दिया गया था।
फोटो साभार: इंस्टाग्राम
हालाँकि, इंकलाब इंडिया इन कहानियों की पीछे की सच्चाई का जिक्र नहीं किया। बाईं ओर की तस्वीर बिहार की एक पुरानी तस्वीर है और सरकार इस मामले में पहले ही कार्रवाई कर चुकी है। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। दाईं ओर वसीम शेख की कहानी किसी हाईवोल्टेज ड्रामा से कम नहीं है। शेख ने एक बयान में कहा था कि पथराव करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान उनकी दुकान को गिरा दिया गया। चूँकि वह एक शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति है, इसलिए पथराव में शामिल होने का कोई रास्ता नहीं था। उनके बयान को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खूब शेयर किया गया।
बाद में उसने अपने आरोप से यू-टर्न लेते हुए कहा था कि उसके घर या दुकान को प्रशासन ने नहीं तोड़ा है। इसके अगले दिन फिर से उसने अपने बयान बदल दिए और बिना नाम लिए प्रशासन पर आरोप लगाया। यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में क्या हुआ था। यह स्पष्ट नहीं है कि उसकी दुकान वैध थी या वह अतिक्रमण थी। हालाँकि, लेफ्ट-लिबरल मीडिया और इंकलाब_इंडिया सोशल मीडिया अकाउंट्स ने हिंदुओं और भाजपा के नेतृत्व वाली एमपी सरकार को निशाना बनाया।
यूपीएससी अध्यक्ष पर भी साधा निशाना
अपनी अगली इंस्टा पोस्ट में अकाउंट ने यूपीएससी के चेयरपर्सन मनोज सोनी की नियुक्ति पर सवाल उठाया। उसने कैप्शन में लिखा, ”यूपीएससी बन गया यूनियन प्रचारक संघ कमीशन” और इसके बयान के लिए कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को संदर्भित किया गया है।
फोटो साभार: इंस्टाग्राम
वहीं, सोशल हैंडल ने इस बात को सिरे से दरकिनार कर दिया कि डॉ मनोज सोनी एक हाई क्वालिफाईड शिक्षाविद हैं और 2017 से ही यूपीएससी से जुड़े हुए हैं। वो दो विश्वविद्यालयों के कुलपति थे और उन्होंने तीन कार्यकालों तक सेवा की। उनकी कई किताबें छप चुकी हैं और इस क्षेत्र के सम्मानित व्यक्ति हैं।
द कश्मीर फाइल्स पर बीबीसी का प्रोपेगेंडा
फिल्म द कश्मीर फाइल्स बनाने के बाद से फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री मीडिया और लेफ्ट-लिबरल वर्ग के टार्गेट पर हैं। कई मीडिया हाउस ने इस फिल्म को दुष्प्रचार करार देते हुए इसे झूठा बताया है। विकिपीडिया ने तो कश्मीरी पंडितों के पलायन को साजिश करार दिया।
फोटो साभार: इंस्टाग्राम
इंकलाब इंडिया ने भी मौके पर चौका मारते हुए फिल्म के बारे में कई फर्जी खबरें साझा कीं। उसने बीबीसी के उस प्रोपेगेंडा वीडियो को शेयर किया, जिसमें उसने कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं का इंटरव्यू लिया था। इसको लेकर ऑपइंडिया ने खुलासा किया था कि किस तरह से बीबीसी ने सेलेक्टिव इंटरव्यू लेकर प्रोपेगेंडा फैलाया था।
क्रिप्टो करेंसी पर फैलाई फेक न्यूज
इसी तरह 12 फरवरी 2022 को किए एक अन्य पोस्ट में इंकलाब_इंडिया ने क्रिप्टो करेंसी पर झूठ फैलाया कि भारत सरकार या आरबीआई ने क्रिप्टो करेंसी को मुद्रा के तौर पर मान्यता नहीं दी है, लेकिन वो उस पर टैक्स जरूर लगाएगी। अकाउंट ने कैप्शन में लिखा, “मुद्रा को वैध किए बिना उस पर टैक्स लगाना।”
फोटो साभार: इंस्टाग्राम
ये पोस्ट गलत जानकारियों से पटी पड़ी थी। सबसे पहले भारत सरकार ये स्पष्ट कर चुकी है कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी कभी भी कानूनी टेंडर नहीं बनेगी। इसे एक परिसंपत्ति माना जाएगा, वह भी आरबीआई द्वारा नियम बनाए जाने के बाद। लेकिन क्रिप्टोकरेंसी और एनएफटी समेत किसी भी क्रिप्टो संपत्ति से होने वाले लाभ पर 30% का टैक्स लगेगा।
सोना (Gold) भारत में लीगल टेंडर नहीं है, लेकिन इसे संपत्ति माना जाता है। सोना से कुछ भी नहीं खरीदा जा सकता है। सबसे पहले इसे भुनाना होगा। सोना के लेनदेन से होने वाली किसी भी आय पर कर लगता है। इसी तरह रियल स्टेट एक संपत्ति है। ऐसे ही कीमती धातुएँ और अन्य वस्तुएँ हैं। इन संपत्तियों से होने वाली इनकम पर नियम के अनुसार टैक्स लगता है। जैसे कि भारत में जुआ गैर-कानूनी है, लेकिन इससे होने वाली आय पर टैक्स लगता है।
हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक अन्य मुद्दे पर बात की थी। वह बात ये थी कि क्रिप्टो करेंसी का टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए संभावित इस्तेमाल। सरकार ने क्रिप्टो से होने वाली आय पर 30% कर में से स्रोत पर 1% कर लगाया है। इसको लेकर वित्त मंत्री ने कहा था कि इससे इस पर नजर बनाए रखने पर मदद मिलेगी कि कहीं इसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग के लिए नहीं किया जा रहा है।
सीएए दंगाई को टिकट देने पर कॉन्ग्रेस को सराहा
14 जनवरी 2022 को इंकलाब इंडिया ने सीएए विरोधी दंगों की आरोपित सदफ जफर को टिकट देने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी को बधाई दी थी।
साभार फोटो: इंस्टाग्राम
सीएए विरोधी दंगों में शामिल होने के आरोपी जफर को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आधार पर बने नए कानून के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक रिकवरी नोटिस जारी किया था। सदफ जफर चुनाव हार गई थीं।
फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री ने गुरुवार (5 मई 2022) को भारतीय लिबरल मीडिया द्वारा उठाए गए ‘इस्लामोफोबिया के भूत’ को एक सिरे से खारिज कर दिया। बता दें कि फिल्म पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अग्निहोत्री ने कहा कि जब से फिल्म रिलीज हुई है, लिबरल भारतीय मीडिया इसे इस्लामोफोबिया से जोड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि वह इस्लामोफोबिक फिल्मों के बारे में खुलकर बात करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “चिंता असल में आतंकवाद को लेकर है। फिल्म में मुस्लिम शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है। फिल्म में पाकिस्तान या पाकिस्तानी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है।” उन्होंने आगे सवाल किया कि उनकी फिल्म को टेररफोबिक क्यों नहीं कहा गया क्योंकि यह आतंकवाद के खिलाफ बात करती है।
अग्निहोत्री ने सवाल किया कि फिजा आदि जैसी फिल्में आतंकवाद पर आधारित थीं, लेकिन उन्हें कभी इस्लामोफोबिक नहीं कहा गया। उन्होंने कहा, “इसका मतलब है कि शायद कोई अलिखित कानून है कि अगर आप आतंकवादी को सही ठहराते हैं, तो आप मानवता के मसीहा हैं, लेकिन अगर आप आतंकवाद के खिलाफ बात करते हैं, तो आप इस्लामोफोबिक हैं।”
उन्होंने कहा कि फिल्म का पहला दृश्य हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच भाईचारे को दर्शाता है। अग्निहोत्री ने कहा, “एक हिंदू लड़के शिव को बुरे लोग पीटे जा रहे हैं। अब्दुल ने आकर जान बचाई। उसके बाद पुष्कर नाथ ने अब्दुल की जान बचाई। दरअसल, फिल्म का सबसे अहम प्रोड्यूसर एक मुस्लिम है। क्या यह इस्लामोफोबिक है?”
दो बार रद्द हुई विवेक अग्निहोत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस
हाल ही में, अग्निहोत्री ने ट्विटर पर बताया था कि कैसे विदेशी संवाददाता क्लब द्वारा उनकी निर्धारित प्रेस कॉन्फ्रेंस को रद्द कर दिया गया था क्योंकि कुछ सदस्यों ने क्लब के प्रशासन को प्रेस कॉन्फ्रेंस होने पर सामूहिक इस्तीफा देने की धमकी दी थी। बाद में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) में शिफ्ट कर दिया। PCI ने भी स्लॉट उपलब्ध न होने की बात कहकर बुकिंग स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद अग्निहोत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को 5 मई के लिए एक होटल में शिफ्ट किया।
व्हाट्सएप (WhatsApp) के पूर्व चीफ बिजनेस ऑफिसर (CBO) नीरज अरोड़ा का कहना है कि उन्हें कंपनी को 22 अरब डॉलर में फेसबुक (Facebook) को बेचने पर पछतावा हो रहा है। उन्होंने ट्वीट की एक सीरीज में बताया कि कैसे व्हाट्सएप उस दिशा से भटक गया है, जिस दिशा में उसके संस्थापकों ने मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) के नेतृत्व वाले समूह द्वारा अधिग्रहण के बाद सेवा की कल्पना की थी। बता दें कि व्हाट्सएप और फेसबुक के बीच डील करवाने में नीरज अरोड़ा की अहम भूमिका थी।
In 2014, I was the Chief Business Officer of WhatsApp.
And I helped negotiate the $22 billion sale to Facebook.
अरोड़ा के अनुसार, व्हाट्सएप की संस्थापक टीम ने अधिग्रहण के समय सर्विस को लेकर फेसबुक के सामने तीन प्रमुख माँगें रखी थीं। ये माँगें थीं- किसी यूजर का डेटा नहीं इकट्ठा किया जाएगा, कभी कोई विज्ञापन नहीं दिखाया जाएगा, क्रॉस-प्लेटफॉर्म ट्रैकिंग नहीं होगी। फेसबुक और उसका मैनेजमेंट इन शर्तों पर तैयार हो गया और उन्हें लगा कि वह उनके मिशन में भरोसा करते हैं, मगर ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ। 2014 में फेसबुक ने 22 अरब डॉलर (कैश और स्टॉक) में वाट्सऐप का अधिग्रहण किया, लेकिन 2017-2018 तक चीजें काफी अलग दिखने लगीं। अरोड़ा ने कहा कि उन्होंने वाट्सऐप को जिस लक्ष्य के साथ तैयार किया था, अब यह उसकी छाया भर रह गया है।
As we began talking through the acquisition, and made our stance very clear:
– No mining user data – No ads (ever) – No cross-platform tracking
FB and their management agreed and we thought they believed in our mission.
वह बताते हैं कि फेसबुक ने एक बार नहीं बल्कि दो बार व्हाट्सएप से अधिग्रहण के लिए संपर्क किया। पहली बार जुकरबर्ग ने 2013-2014 में व्हाट्सएप के सामने यह प्रस्ताव रखा था, मगर उस समय व्हाटेसएप ने इसे ठुकरा दिया था। हालाँकि फेसबुक ने दोबारा 2014 में संपर्क किया और ऑफर दिया। अरोड़ा का कहना है कि फेसबुक का यह ऑफर व्हाट्सएप की टीम को पार्टनरशिप जैसा लगा। इसमें एंड-टू-एंड इनक्रिप्शन को पूरा सपोर्ट, कभी भी कोई विज्ञापन नहीं, प्रोडक्ट के फैसले पर पूर्ण स्वतंत्रता, जैम कुम के लिए बोर्ड में जगह और माउंटेन व्यू में खुद के ऑफिस जैसी बातें कही गई थीं।
FB approached us again early 2014 with an offer that made it look like a partnership:
• Full support for end-to-end encryption • No ads (ever) • Complete independence on product decisions • Board seat for Jan Koum • Our own office in Mountain View • Etc.
उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, अगर आपने व्हाट्सएप को पुराने वक्त में भी इस्तेमाल किया है तो आपको याद होगा कि इसे क्या स्पेशल बनाता था। अंतरराष्ट्रीय कम्युनिकेशन। मेरे जैसे लोगों के लिए, जिनके परिवार अलग-अलग देशों में हैं, व्हाट्सएप उनसे जुड़े रहने का एक शानदार तरीका था। वहीं उन्हें लंबी दूरी के लिए SMS और कॉलिंग फीस भी नहीं देनी पड़ती थी। व्हाट्सएप ने ऐप डाउनलोड करने के लिए सिर्फ 1 डॉलर लेकर कमाई की और फेसबुक ने कहा कि उसने हमारे मिशन और विजन को सपोर्ट किया है। ब्रायन ने तो एक फेमस नोट भी लिखा।
How WhatsApp made money was by charging users $1 to download the app.
And Facebook (said they) supported our mission & vision.
उन्होंने कहा कि 2018 आते-आते फेसबुक/कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल सामने आया। ब्रायन एक्टन ने एक ट्वीट किया, जिसने सोशल मीडिया पर तूफान मचा दिया। ब्रायन एक्टन ने लिखा था- It is time #deletefacebook. यानी ये फेसबुक को डिलीट करने का वक्त है।
Until eventually, in 2018, right as details of the Facebook/Cambridge Analytica scandal came out, Brian Acton sent a tweet that sent shockwaves through the social media stratosphere.https://t.co/8jRJUrdB7j
नीरज ने लिखा, “आज व्हाट्सएप फेसबुक का दूसरा सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है, यहाँ तक कि इंस्टाग्राम और फेसबुक मैसेंजर से भी बड़ा है। लेकिन अब यह उस प्रोडक्ट की महज परछाई जैसा रह गया है, जिसके लिए हमने अपनी जान लगा दी थी और चाहते थे कि इसे दुनिया के लिए बनाया जाए। मैं अकेला नहीं हूँ, जो फेसबुक का हिस्सा बन जाने के लिए पछता रहा हूँ। टेक कंपनियों को यह स्वीकार करने की जरूरत है कि कब उन्होंने कुछ गलत किया। शुरुआत में किसी को पता नहीं था कि फेसबुक एक राक्षस बन जाएगा, जो यूजर्स का डेटा खाएगा और पैसे (Dirty Money) उगलेगा। हमें भी इस बात का अंदाजा नहीं था।”
Tech companies need to admit when they have done wrong.
Nobody knew in the beginning that Facebook would become a Frankenstein monster that devoured user data and spat out dirty money.
उन्होंने आगे कहा कि टेक ईकोसिस्टम के इवॉल्व होने के लिए इसको लेकर बात करने की जरूरत है कि कैसे खराब बिजनस मॉडल अच्छे-अच्छे प्रोडक्ट, सर्विस और आइडिया को गलत बना देते हैं। अरोड़ा ने ट्विटर थ्रेड को हलो ऐप (HalloApp) को लेकर द वॉलस्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट का लिंक शेयर करते हुए समाप्त किया। अरोड़ा ने माइकल डोनोह्यू के साथ मिलकर पिछले साल हलो ऐप लॉन्च किया। माइकल डोनोह्यू 2019 तक व्हाट्सएप के इंजीनियरिंग निदेशक थे।
तमिलनाडु के सचिवालय के आगे एक हिन्दू परिवार ने घुटनों के बल चल कर प्रदर्शन किया है। यह प्रदर्शन उनकी जमीन पर कब्ज़ा जमाए एक ईसाई पादरी के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई में हीलाहवाली के विरोध में किया गया। यह प्रदर्शन 29 अप्रैल, 2022 (शुक्रवार) को किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चेन्नई में सेलायुर के निवासी गोथनदरमन ने अपनी 8063 स्क्वायर फिट प्रॉपर्टी जॉन वेंकटेशन को किराए पर दी थी। यह प्रॉपर्टी स्ट्राहन रोड पर मौजूद है। 1980 में किराए पर मिली इस प्रॉपर्टी पर पादरी ने एक चर्च बनवा लिया। पीड़ित हिन्दू परिवार का आरोप है कि अब पादरी उस किराए पर मिली जमीन को हड़पना चाहता है।
जमीन एक पॉश इलाके में है जिसकी वर्तमान समय में कीमत लगभग 12 करोड़ रुपए बताई जा रही है। कुछ सालों से हिन्दू परिवार अपनी जमीन वापस लेना चाह रहा है लेकिन वो इन प्रयासों में असफल रहा। इसके बाद पीड़ित परिवार के गोथनदरमन के मुताबिक उनके बेटों सर्वाना, धानासेकर, धनंजयन और दशरथन ने मुख्यमंत्री के विशेष सेल और चेन्नई के पुलिस कमिश्नर को पत्र लिख कर अपनी जमीन वापस लेने में मदद की गुहार लगाई। पीड़ितों ने जानकारी दी कि इनके अलावा वो मुख्य सचिव, गृह सचिव, DGP को भी शिकायत भेज चुके हैं, लेकिन कहीं से कोई भी कार्रवाई नहीं की गई।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि अभी तक उन्हें कोई भी प्रशासनिक सहायता नहीं मिली। आरोपित पादरी के खिलाफ भी कोई एक्शन नहीं लिए गया है। पीड़ित परिवार का यह भी आरोप है कि स्थानीय पुलिस आरोपित पादरी से मिली हुई है। इसी के चलते पादरी ने पीड़ित परिवार पर ही केस दर्ज करवा दिए हैं। हिन्दू परिवार अब इस मामले में CBCID जाँच की माँग कर रहा है। इन्ही माँगों के साथ पीड़ित परिवार ने सचिवालय पर घुटनों के बल चल कर विरोध प्रदर्शन किया था।
गौरतलब है कि तमिलनाडु में जमीनों पर चर्चों द्वारा कब्ज़ा कोई नई घटना नहीं है। इस से पहले फरवरी 2022 में ही तमिलनाडु में 5 पादरी बालू माफियाओं के साथ साठ-गाँठ रख कर नदी के तट की जमीन पर अवैध कब्ज़े के आरोप में गिरफ्तार किए गए थे। दिसम्बर 2021 में तमिलनाडु के ही तिरुवन्नामलाई जिले में एक पहाड़ी पर बने चर्च पर वन विभाग की 5 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्ज़े का आरोप लगा था।
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रीवा में रिश्वत में ‘माजा कोल्डड्रिंक’ माँगने वाले पोस्ट ऑफिस अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद केंद्रीय रेल एवं संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार (5 मई 2022) को रीवा में स्थित पोस्ट ऑफिस में एटीएम कार्ड लेने गए युवक से रिश्वत माँगने के आरोप में अधिकारी रामकरण आदिवासी (Post Office officer Ramkaran Adivasi) को सस्पेंड कर दिया। रीवा के अधिकारी पर आरोप है कि उसने एटीएम कार्ड देने के लिए ग्राहक से माजा कोल्डड्रिंक, पानी और गुटखे का पैकेट माँगा था। केंद्रीय मंत्री ने इस घटना की निंदा करते हुए और अगले आदेश तक अधिकारी को सस्पेंड कर दिया है।
मध्य प्रदेश के रीवा में पोस्ट ऑफिस अधिकारी ने ‘माजा कोल्डड्रिंक’ न देने पर युवक को ATM कार्ड देने से इनकार कर दिया। इस वाकये का वीडियो वायरल होने के बाद संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आरोपी अधिकारी राम करण को सस्पेंड कर दिया है।#AshwiniVaishnaw#IndiaPostpic.twitter.com/iYLDgE29gJ
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना 2 मई की है। उस दिन मध्य प्रदेश के रीवा के डभौरा इलाके में रहने वाले भोलेनाथ पांडे नाम का एक ग्राहक अपना स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का एटीएम कार्ड लेने पोस्ट ऑफिस पहुँचा। पोस्ट ऑफिसर ने उससे कहा कि जब तक तुम मुझे माजा कोल्डड्रिंक की बोतल, पानी की बोतल और गुटखे का पैकट नहीं लाकर देते, मैं तुम्हें एटीएम कॉर्ड नहीं दूँगा।
अधिकारी के धौंस दिखाने के बाद पांडे तपती धूप में माजा कोल्डड्रिंक की बोतल लेने के लिए निकल गया। लेकिन उसे माजा नहीं मिली, तो उसने फ्रूटी की एक बोतल खरीद ली। जब पांडे फ्रूटी और ठंडे पानी की बोतल लेकर दफ्तर पहुँचा, तो आदिवासी ने माजा नहीं मिलने पर उसे जमकर गालियाँ दीं। उसने पांडे को सरकारी नौकरी का धौंस दिखाते हुए कहा, “खोजने पर तो भगवान भी मिल जाते हैं, तुम्हें माजा की बोतल नहीं मिली? मुझे माजा ही चाहिए। मैं कोई और कोल्डड्रिंक नहीं लूँगा।”
एटीएम लेने आए युवक को परेशान कर बिना एटीएम दिए डाक अधिकारी ने उसे वापस लौटा दिया। वह तपती धूप और गर्मी से परेशान होकर 25 किलोमीटर दूर खाली हाथ अपने गाँव लौट गया। इसके बाद उसने सोशल मीडिया पर न्याय की गुहार लगाई। वायरल वीडियो में पांडे अधिकारी से माजा की जगह फ्रूटी की बोतल लेने और एटीएम कार्ड देने के लिए कहते हुए दिखाई दे रहे हैं, लेकिन रामकरण आदिवासी ने उसे इनकार कर दिया। उन्होंने अधिकारी के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई थी। बाद में घटना का वीडियो वायरल होने के बाद रेल और संचार मंत्री ने उन्हें सस्पेंड कर दिया।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब मध्य प्रदेश के रीवा में एक सरकारी अधिकारी पर रिश्वत माँगने का आरोप लगा हो। इससे पहले फरवरी महीने में लोकायुक्त पुलिस ने रीवा स्थित रजिस्ट्री कार्यालय में स्टेनो धीरेंद्र सिंह तोमर को 12 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
जम्मू-कश्मीर में परिसीमन का काम पूरा हो गया है और उसकी अंतिम रिपोर्ट पर तीन सदस्यीय परिसीमन आयोग ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। परिसीमन के बाद जम्मू में 43 और कश्मीर में 47 सीटों का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए 9 सीटें रखी गई हैं। माना जा रहा है कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश के साथ ही जम्मू-कश्मीर में भी अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं।
Jammu & Kashmir Delimitation Commission signs the final order for Delimitation of the Union Territory pic.twitter.com/zanO90eBKW
परिसीमन आयोग ने अपना कार्यकाल खत्म होने से एक दिन पहले यानी गुरुवार (5 मई 2022) को केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा सीटों के से परिसीमन रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। इसके बाद राजपत्रित अधिसूचना के माध्यम से आदेश जारी कर दिया है। अब प्रदेश में नए सिरे अब मतदाताओं की सूची को तैयार किया जाएगा।
परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू संभाग में 6 और कश्मीर संभाग में एक सीट बढ़ाई गई हैं। इस हिसाब से जम्मू संभाग में विधानसभा की 43 सीट और कश्मीर संभाग में 47 सीट हो गई हैं। विधानसभा की सीटें 90 होंगी, जबकि लोकसभा की 5 सीट रहेगी। वहीं, दोनों संभाग में लोकसभा की ढाई-ढाई सीट होगी, यानी एक लोकसभा सीट का आधा हिस्सा जम्मू में होगा और आधा कश्मीर संभाग में। हर लोकसभा सीट में विधानसभा की 18 सीटें होंगी। प्रदेश में पहली बार ST के लिए 9 सीटें रिजर्व रखी गई हैं। वहीं, अनुसूचित जाति (SC) के लिए 7 सीट रिजर्व रहेगी।
After consultation with Associate Members, representatives of political parties, citizens, and civil society groups, 9 ACs have been reserved for STs, out of which, 6 are in the Jammu region and 3 ACs in the Valley. There are five Parliamentary Constituencies in the region.
परिसीमन से पहले विधानसभा में सीटों की संख्या 87 सीटें थीं। इनमें से जम्मू में 37, कश्मीर में 46 सीटें और 4 सीटें लद्दाख में थीं। इस तरह लद्दाख के अलग होने के बाद जम्मू-कश्मीर के हिस्से में सिर्फ 83 सीटें रह गई हैं। ऐसे में 7 सीटें बढ़ने के बाद राज्य में विधानसभा की कुल 90 सीटें हो गई हैं।
परिसीमन के लिए सरकार ने मार्च 2020 में पैनल बनाया था। इसकी हेड सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई थीं। इसके अलावा पैनल में चीफ इलेक्शन कमिश्नर सुशील चंद्रा और डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर चंदर भूषण कुमार शामिल थे।
बता दें कि इससे पहले जम्मू-कश्मीर में साल 1995 में परिसीमन हुआ था। उस समय राज्य में 12 जिले और 58 तहसीलें थीं। वर्तमान में 20 जिले और 270 तहसीलें हैं। सीटों का परिसीमन का मुख्य आधार जनसंख्या होता है। इसके साथ ही क्षेत्रफल और भौगोलिक स्थिति का भी ध्यान रखा जाता है।
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) ने कई जिंदगियों को छुआ और बदला है। आईपीएल के मंच से कई खिलाड़ियों की जिंदगी बदल चुकी है। भारतीय घरेलू क्रिकेट में अपना जलवा बिखेरने वाले प्लेयरों के लिए आईपीएल सबसे पहला बड़ा मंच होता है जहाँ वो अपना हुनर दिखा सकते हैं। वहीं आईपीएल का 15वाँ सीजन कई युवा खिलाड़ियों के लिए काफी शानदार साबित होता दिख रहा है। कई युवा खिलाड़ियों ने अपने टैलेंट से क्रिकेट विशेषज्ञों को काफी प्रभावित किया है। सोमवार (2 मई 2022) को कोलकाता नाइट राइडर्स की राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ जीत से अधिक चर्चा उस खिलाड़ी की हो रही है जिसके नाम से बहुत सारे क्रिकेट प्रेमी वाकिफ भी नहीं थे।
जी हाँ! आप सही सोच रहे है। यहाँ बात रिंकू सिंह की हो रही है जिनकी बदौलत कोलकाता की टीम ने अपने पिछले मैच में शानदार जीत हासिल की। सोमवार को खेले गए मुकाबले में कोलकाता ने राजस्थान रॉयल्स (RR) को सात विकेट से मात दी। इस जीत के बाद दो बार की चैम्पियन कोलकाता प्वाइंट्स टेबल में पंजाब किंग्स (PBKS) को पीछे छोड़ते हुए सातवें नंबर पर आ गई है।
कोलकाता नाइट राइडर्स की जीत के हीरो रिंकू सिंह ‘मैन ऑफ द मैच’ रहे, जिन्होंने 23 गेंद पर 42 रनों की नाबाद पारी खेली। इस दौरान रिंकू ने 6 चौके और 1 छक्का लगाया। बैटिंग के साथ ही रिंकू ने फील्डिंग करते हुए दो शानदार कैच भी लपके। रिंकू ने अपनी मैच की विजयी पारी के दौरान नीतीश राणा के साथ चौथे विकेट के लिए 38 गेंद में नाबाद 66 रनों की साझेदारी की। राणा ने भी 37 गेंद में नाबाद 48 रन बनाए, जिसमें 2 छक्के और 3 चौके शामिल रहे। इस तरह रिंकू सिंह ने 5 हार के बाद कोलकाता नाइट राइडर्स को जीत दिला दी। केकेआर को उस जीत की सख्त जरूरत थी ताकि वो प्लेऑफ की रेस में बनी रहे।
मैच के बाद केकेआर ने रिंकू सिंह का एक वीडियो भी शेयर किया है। इसमें रिंकू टीम मेट नीतीश राणा को कह रहे हैं, “मुझे सुबह से ही ऐसी फीलिंग आ रही थी कि मैं आज के मैच में रन बनाने जा रहा हूँ। साथ ही मैं मैन ऑफ द मैच भी रहूँगा। इसलिए मैंने मैच से पहले खुद ही अपने हाथों पर लिख लिया था कि आज 50 रन बनाऊँगा।”
रिंकू सिंह कहते हैं, “मैं अलीगढ़ से आईपीएल खेलने वाला पहला व्यक्ति हूँ, हालाँकि कई ने रणजी ट्रॉफी खेली है। आईपीएल में दबाव है जो फर्स्ट क्लास क्रिकेट में नहीं है। पाँच साल हो गए हैं। मुझे नियमित रूप से मौके नहीं मिल रहे हैं। अब योगदान करना अच्छा लगता है।”
महज़ 24 साल में रिंकू सिंह की कामयाबी बताती है कि जब दिल मे जोश और कुछ कर जाने का जुनून हो तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है। रिंकू ने 2014 मे टी20 से क्रिकेट में डेब्यू किया था। हालाँकि, उनका यहाँ तक का सफर आसान नहीं था। यूपी के अलीगढ़ में 12 अक्टूबर 1997 को जन्मे रिंकू सिंह का क्रिकेट करियर काफी उतार चढ़ाव भरा रहा है। उनके पिता गैस सिलिंडर डिलीवर करने का काम करते थे।
घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण उन्होंने क्रिकेट छोड़कर नौकरी भी करने का फैसला किया था। 9वीं कक्षा में फेल होने वाले रिंकू सिंह को ज्यादा पढ़ा लिखा न होने की वजह से ढंग की नौकरी नहीं मिल रही थी। फिर एक बार उनके भाई उनको एक ऐसी जगह लेकर गए, जहाँ पर झाड़ू लगाने का काम था। वह इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहते हैं, “वह मुझे एक ऐसी जगह पर ले गए जहाँ उन्होंने मुझे साफ, सफाई, झाड़ू, पोछा करने के लिए कहा गया। मैं घर वापस आया और अपनी माँ से कहा, ‘मैं वहाँ वापस नहीं जाऊँगा। मुझे क्रिकेट में अपनी किस्मत आजमाने दो।”
रिंकू सिंह ने उस वक्त जान लिया था कि उनकी लाइफ अगर कोई बदल सकता है तो वो केवल और केवल क्रिकेट ही है। उन्होंने क्रिकेट पर पूरा फोकस करने का मन बनाया और दिल्ली में खेले गए टूर्नामेंट में उन्हें ‘मैन ऑफ द सीरीज’ के तौर पर मोटरसाइकल मिली तो उन्होंने इसे अपने पापा को सिलेंडर डिलीवरी के लिए दे दी थी। उस समय उनके पिता को उन पर गर्व महसूस हुआ था।
इस बारे में बात करते हुए वह कहते हैं, “मेरे पिता वाकई में नहीं चाहते थे कि मैं क्रिकेट खेलूँ। वह हमेशा इस बात पर जोर देते थे कि मुझे पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। यह टूर्नामेंट अलीगढ़ में था और मैच के दौरान दिल्ली पब्लिक स्कूल के सुप्रीमो स्वप्निल जैन मौजूद थे। हमने उनकी टीम को हराया और मैंने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। मैं 68 रन पर नाबाद था। मेरी बल्लेबाजी देखकर उन्होंने मुझे अपने स्कूल में दाखिला दिला दिया। मैंने कुछ साल डीपीएस के लिए खेला। 2012 में, उन्होंने एक विश्व कप का आयोजन किया था जहाँ पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश की टीमें खेलने आई थीं। मैंने 354 रन बनाए और 8 विकेट लिए, जिसकी वजह से मुझे ‘मैन ऑफ द सीरीज’ का अवॉर्ड और बाइक दी गई। मेरे माता-पिता ग्राउंड पर आए हुए थे। जब भी मैं क्रिकेट खेलना चाहता था तो मेरे पिता अक्सर मुझे पीटते थे लेकिन इस मैच के बाद उन्होंने मुझे फिर कभी नहीं छुआ।”
IPL से रिंकू सिंह का नाता पहली बार 2017 में जुड़ा था, जब पंजाब किंग्स की टीम ने उन्हें बेस प्राइस पर 10 लाख रुपए में खरीदा था। अगले ही साल यानी साल 2018 के ऑक्शन में रिंकू पंजाब से कोलकाता के हो गए। इस बार बेस प्राइस 20 लाख थी पर कोलकाता ने 80 लाख रुपए में उन्हें खरीदा था। उस समय यह रिंकू सिंह के लिए सपने जैसा था।
वह कहते हैं, “सोचा था 20 लाख रुपए मिलेंगे, लेकिन मुझे 80 लाख रुपए में खरीदा गया। सबसे पहले मन में यह ख्याल आया कि मैं अपने बड़े भाई की शादी में योगदान दे सकता हूँ और अपनी बहन की शादी के लिए भी कुछ बचा सकता हूँ। और एक अच्छे से घर में शिफ्ट हो जाऊँगा।” उन्होंने कहा, “मेरा घरेलू सीजन अच्छा गया था और मैं उम्मीद कर रहा था कि कोई मुझे खरीदेगा, लेकिन मैंने ये कभी नहीं सोचा था कि मुुझे इतनी बड़ी रकम दी जाएगी। मेरे खानदान में इतना पैसा किसी ने भी नहीं देखा है।” खैर, पैसे तो मिल गए लेकिन रिंकू सिंह को खेलने के उतने मौके नहीं मिले। IPL 2022 से पहले तक उन्होंने सिर्फ 10 ही मुकाबले KKR फ्रेंचाइजी के लिए खेले।
IPL 2022 के मेगा ऑक्शन में रिंकू सिंह का नाम एक बार फिर से उछला और इस बार भी उन्हें KKR ने 55 लाख रुपए में खरीदा। पिछले ऑक्शन के मुकाबले दाम कम जरूर मिले, पर अच्छी चीज ये हुई कि इस बार रिंकू सिंह को खेलने का अवसर मिल रहा है। IPL 2022 में रिंकू सिंह KKR के लिए अब तक 3 मैच खेल चुुके हैं, जिसमें 50 की औसत और करीब 150 की स्ट्राइक रेट से वो 100 रन बना चुके हैं। इन 3 मुकाबलों में वो एक में राजस्थान के खिलाफ जीत के नायक बनकर उभरे।
रिंकू सिंह ने घरेलू क्रिकेट में काफी रन बनाए हैं, जिसका फायदा उन्हें IPL में खेलने के मिले मौके के तौर पर हुआ। उनका कहना है कि IPL दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग है। इसका दबाव घरेलू क्रिकेट से कहीं बढ़कर है। पर ये बात जानने के बाद भी उन्होंने इस दबाव पर राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मैच में बेहतरीन ढ़ंग से जीत हासिल की।
KKR के कप्तान श्रेयस अय्यर भी रिंकू सिंह के दवाब झेलने वाली अदा पर मोहित हैं। मैच के बाद उन्होंने कहा कि जिस तरह से रिंकू मैदान पर शांत थे, दबाव झेल रहे थे। ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई नया खिलाड़ी नहीं, बल्कि तजुर्बेकार खिलाड़ी खेल रहा हो। वहीं सुरेश रैना भी उनकी तारीफ में कसीदे पढ़ चुके हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “रिंकू सिंह- घरेलू क्रिकेट की सारी मेहनत अब रंग ला रही है। केकेआर के लिए खेली गई बेहद कीमती पारी। अच्छा किया मेरे भाई। ऐसे ही अच्छा करते रहो और उत्तर प्रदेश का नाम ऊँचा करते रहो।”
IPL करियर के बीते 5 सालों के दौरान वो चोट की मार से लेकर BCCI के नियम उल्लंघन को लेकर सस्पेंशन तक झेल चुके हैं। मगर उन्होंने अपना जज्बा बरकरार रखा और आज हर किसी की जुबाँ पर रिंकू सिंह का नाम है। यहाँ तक कि सुनील गावस्कर ने भी उनकी तारीफ की है।
उत्तर कोरिया की अजीबोगरीब प्रतिबंधों को लेकर दुनिया भर में आलोचना होती है। लेकिन इससे उसके तानाशाह किम जोंग उन (Kim Jong) पर कोई प्रभाव पड़ता नहीं दिख रहा है। रिपोर्टों के अनुसार अब टाइट ट्राउजर पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। पश्चिमी फैशन के प्रभाव को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। इतना ही नहीं स्किनी जींस पहनने वाली महिलाओं पर सोशलिस्ट पैट्रियोटिक यूथ लीग नजर भी रख रहा है। यह संगठन तानाशाह के लिए मोरल पुलिस की तरह काम करती है।
द सन की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर कोरिया के इस यूथ संगठन ने कथित रूप से 20 से 30 साल के बीच की उन लड़कियों की तस्वीर खींचनी और वीडियो बनानी शुरू कर दी है, जो टाइट जींस पहनती हैं। ऐसी कुछ लड़कियों को हिरासत में लेकर यूथ लीग के स्थानीय ऑफिस में ले जाया गया। वहाँ इन लड़कियों को एक पत्र लिखने के लिए बाध्य किया गया। जिसमें वादा किया गया था कि वे अब टाइट जींस नहीं पहनेंगी। एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें टाइट जींस पहनने वाली महिला को अश्लील और बुरी मानसिकता वाला बताया गया है। इसके अलावा विदेशी पॉप संस्कृति को अपने देश के लिए खतरा बताते हुए हेयर कट पर भी आपत्ति जताई गई है।
बता दें कि नॉर्थ कोरिया में पहले से ही जींस पहनने पर रोक लगी हुई है। अब स्किनी जींस को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसी तरह लेदर जैकेट के भी इस्तेमाल पर रोक है। हालाँकि किम को खुद कई मौकों पर लेदर जैकेट पहने देखा गया है। लेकिन वह देश की जनता के पारंपरिक कपड़े पहनने पर जोर देते हैं। इस युवा तानाशाह का मानना है की पश्चिमी फैशन देश के युवाओं को भटका सकता है। यहाँ तक कि बालों को रंगने और पश्चिमी ब्रांड की शर्ट पहनने पर भी प्रतिबंध है। अधिकारियों का कहना है कि उत्तर कोरियाई शैली के पोशाक और बाल ने देश में समाजवादी जीवन शैली स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन नियमों को तोड़ने वालों को प्रशासन ‘पूँजीवादी अपराधी’ मानता है।