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मेरे चारों ओर खून ही खून था, मैं मरना नहीं चाहती थी: मलाइका अरोड़ा ने बताई उस खौफनाक रात की कहानी, कहा- ये निशान याद दिलाते हैं मेरे साथ क्या हुआ

बॉलीवुड अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा (Malaika Arora) ऐक्सीडेंट के बाद काम पर वापसी कर चुकी हैं। 2 अप्रैल को वह एक कार हादसे की शिकार हो गई थीं। इस दौरान उन्हें काफी चोटें आई थी। इस एक्सीडेंट को लेकर मलाइका के मन में बैठे दहशत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि भले ही उनके जख्म भर गए हों और वह काम पर लौट आई हों, लेकिन आज भी वह कार में बैठने से डरती हैं। उन्हें लगता है कि कार सुरक्षित नहीं है।

बॉलीवुड टाइम्स को दिए इंटरव्यू के दौरान मलाइका अरोड़ा ने बताया कि इस कार एक्सीडेंट के बाद उनकी जिंदगी में कितना बदलाव आया। उन्होंने यह भी बताया कि बेहोशी की हालत में वह किन दो लोगों का नाम ले रही थीं और ईश्वर से क्या प्रार्थना कर रही थीं। इसके साथ-साथ उन्होंने अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor) से अपने रिश्ते पर भी बात की है।

मलाइका अरोड़ा ने खुलासा किया कि एक्सीडेंट में घायल होने के बाद वह बेहोशी की हालत में अपनी माँ और बेटे अरहान के बारे में पूछ रही थी और बार-बार शूटिंग सेट पर जाने के बारे में बड़बड़ा रही थी। मलाइका अरोड़ा ने हादसे की रात की पूरी कहानी बताते हुए कहा, “वह भयानक रात मुझे याद है। मेरे चारों ओर खून ही खून था। मेरा परिवार, अर्जुन कपूर और सभी लोग घबरा गए थे। लगभग एक हफ्ते के बाद आखिरकार मैंने खुद को आईने में देखा। मेरे माथे पर वहीं निशान था, जहाँ मुझे चोट लगी थी। यह मुझे याद दिलाता है कि मेरे साथ क्या हुआ था।”

मलाइका ने आगे कहा, “यह निशान मुझे हमेशा याद दिलाएगा कि उस रात क्या हुआ था। लेकिन यह मुझे जिंदगी जीने से कभी नहीं रोक सकता। हादसे की रात वाला वो पल मुझे ठीक से याद है, जिसमें मैं सिर्फ दो चीजों के लिए प्रार्थना कर रही थी- पहली बात कि मैं उस रात मरना नहीं चाहती थी और दूसरी बात मैं अपनी आँखों की रोशनी नहीं खोना चाहती थी।” अपनी चोट के बारे में बात करते हुए मलाइका ने कहा, “शुरुआत में, मुझे चोट के बारें कोई अंदाजा नहीं था, क्योंकि मैं शॉक्ड और सदमे थी। मुझे कुछ क्लियर नहीं दिख रहा था। मैं बस ये महसूस कर पा रही थी कि मेरे चारों तरफ काँच के टुकड़े बिखरे हैं और कुछ छोटे-छोटे टुकड़े मेरी आँखों में चले गए थे।”

इंटरव्यू के दौरान जब मलाइका से अर्जुन कपूर के साथ रिलेशनशिप को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हर रिलेशनशिप में उसे अगले लेवल तक ले जाने का प्लान होता है। अर्जुन के साथ रिलेशनशिप में वह काफी खुश और पॉजिटिव हैं और यह आत्मविश्वास उन्हें अर्जुन से मिलता है। उन्होंने कहा, “हम वाकई में एक-दूसरे के हैं। हम मैच्योर अवस्था में हैं जहाँ अभी और तलाश के लिए जगह है, लेकिन हम भविष्य को एक साथ देखना चाहते हैं। हम इसके बारे में हँसी-मजाक करते हैं, लेकिन हम बेहद गंभीर भी हैं। मुझे नहीं लगता कि हमें (अर्जु-मलाइका) एक साथ सभी कार्ड खोलने चाहिए। मैं हमेशा उससे कहती हूँ कि मैं तुम्हारे साथ आगे बढ़ना चाहती हूँ। हम बाकी का पता लगा लेंगे। बाकी चीजें आगे समझ आ जाएँगी लेकिन मुझे पता है कि वह मेरा है।”

बता दें कि मलाइका की कार का 2 अप्रैल को मुंबई-पुणे हाईवे पर एक्सीडेंट हो गया था। जब ये सड़क हादसा हुआ था, तब मलाइका पुणे से लौट रही थीं। गुड़ी पड़वा के अवसर पर ज्यादा ट्रैफिक की वजह से एक्सीडेंट हुआ था।

इस्लाम छोड़ने पर जान के पीछे पड़े रिश्तेदार: केरल के अस्कर अली ने कहा- बातचीत के लिए बुलाकर अपहरण करने की कोशिश की, पुलिस ने जान बचाई

हाल ही में इस्लाम छोड़ने वाले केरल (Kerala) के अस्कर अली (Askar Ali) ने आरोप लगाया है कि उनके रिश्तेदार अब उन्हें परेशान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 1 मई को एसेन्स ग्लोबल सम्मेलन को संबोधित करने से पहले उनके रिश्तेदारों ने उनका अपहरण करने की भी कोशिश की।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस को उन्होंने बताया, “पारिवारिक मामलों पर बात करने के बहाने दो रिश्तेदार मेरे पास आए और सुबह मुझे बीच पर ले गए। बाद में वहाँ कार से दो अन्य लोग भी आए। मेरे रिश्तेदारों ने उनकी मदद से मुझे जबरन गाड़ी में बैठाने की कोशिश की। एक व्यक्ति ने मेरा मोबाइल फोन तोड़ दिया। मैं चिल्लाने लगा। मेरी चीख सुनकर मौके पर पहुँचे लोगों ने पुलिस को फोन कर दिया।”

अस्कर अली फिलहाल अपने दोस्त के यहाँ रह रहे हैं। उनके परिवार के सदस्यों ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी, जिसकी वजह से उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश होना पड़ा। उन्होंने आगे कहा, “मैंने इस्लाम का विस्तार से अध्ययन करने के बाद इस मजहब को छोड़ दिया। जब मैं (हुदावी) कोर्स कर रहा था तो इस्लाम से संबंधित सामग्री के अलावा अन्य सामग्री को पढ़ने का अवसर काफी कम था। लॉकडाउन के दौरान मुझे अन्य विषयों को पढ़ने को मिला, जिससे मेरी आँखें खुल गईं।” अस्कर ने कहा कि जो लोग धर्म छोड़ते हैं उन्हें उनके परिवार के सदस्य नीच प्राणी के रूप में देखते हैं।

इससे पहले बुधवार (4 मई 2022) को रिपोर्ट में बताया गया कि 24 वर्षीय अस्कर पर इस्लाम छोड़ने पर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने हमला कर दिया था। उन्होंने कोल्लम पुलिस में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कराया है। अली ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके इस्लाम छोड़ने के बाद भीड़ ने उन पर हमला किया। इसके अलावा इस्लाम छोड़ने की वजह से उन्हें समुदाय के लोगों की तरफ से दी जाने वाली धमकियों का भी सामना करना पड़ रहा है।

मलप्पुरम के रहने वाले अस्कर अली ने मलप्पुरम की एक प्रमुख मजहबी एकेडमी से 12 साल का हुदावी धार्मिक कार्यक्रम पूरा किया है। वह रविवार (1 मई, 2022) को ‘वैज्ञानिक सोच, मानवतावाद और समाज में सुधार की भावना’ को बढ़ावा देने वाले संगठन ‘एसेंस ग्लोबल’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में इस्लामी अध्ययन के छात्र के रूप में अपने अनुभव को साझा करने के लिए कोल्लम गए थे।

अली ने अपनी शिकायत में कहा कि मलप्पुरम में लोगों के एक समूह ने उनका अपहरण करने की कोशिश की, ताकि वह उस कार्यक्रम को संबोधित न कर सकें। अली ने बताया, “वे मुझे कोल्लम समुद्र तट पर ले गए, जहाँ मेरे साथ मारपीट की गई। उन्होंने मेरा मोबाइल फोन तोड़ दिया और मेरे कपड़े फाड़ दिए। वे मुझे जबरन एक वाहन में ले गए और मुझे अंदर बंद करने की कोशिश की। जब स्थानीय लोगों ने शोर मचाया तो पुलिस ने मुझे बचा लिया।” बाद में अली को पुलिस ने छोड़ दिया। इसके बाद अली ने पुलिस की मौजूदगी में सभा को संबोधित किया।

इस्लाम में मजहब छोड़ने की सजा मौत

इस्लाम में मजहब छोड़ने पर मौत की सजा है। साल 2014 में आठ मुस्लिम बहुल देशों में एक मुस्लिम द्वारा इस्लाम के त्याग करने की सजा मृत्युदंड थी। जानकारी के मुताबिक, तेरह देशों में इस्लाम छोड़ने पर कई तरह की सजा दी जाती थी। इसके तहत उन्हें जेल में डाल दिया जाता है या जुर्माना लगाया जाता है। इतना ही नहीं, इसके तहत उनके बच्चे की कस्टडी भी छीन ली जाती है। कुछ दशक पहले, अधिकांश शिया और सुन्नी कानूनविदों का मानना ​​था कि इस्लाम छोड़ना अपराध के साथ-साथ पाप भी है।

गले में तख्ती और कान पकड़कर मुजफ्फरनगर थाने पहुँचे गौ-तस्कर नईम और नसीम, हिस्ट्रीशीटर भाइयों ने किया अपराध से तौबा

उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ के शासन में हिस्ट्रीशीटर और अपराधियों का पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का सिलसिला जारी है। ताजा मामला मुजफ्फरनगर का है, जहाँ दो अपराधी गले में तख्ती डाल, कान पकड़कर पुलिस स्टेशन पहुँचे और आगे से अपराध नहीं करने की बात कही।

मुजफ्फरनगर पुलिस ने बताया कि दोनों अपराधी गौ तस्करी और गौहत्या के मामलों में भी आरोपित थे। आरोपितों का नाम नईम और नसीम है। नईम (हिस्ट्रीशीटर 26ए) और नसीम (हिस्ट्रीशीटर 27ए) दोनों भाई हैं। इनके पिता का नाम नसीर है। ये दोनों मुजफ्फरनगर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बसी कलां गाँव में रहते हैं। वे पहचान पत्र लेकर शाहपुर थाने पहुँचे। दोनों हिस्ट्रीशीटर पर गायों की हत्या का आरोप है। थाना प्रभारी के सामने दोनों ने दोबारा कोई अपराध न करने और आगे अपराध मुक्त शांतिपूर्ण जीवन बिताने की शपथ ली।

नईम शाहपुर थाना क्षेत्र के टॉप टेन अपराधियों में से एक है। इन दोनों के खिलाफ गोहत्या और गैंगस्टर एक्ट के तहत कुल 18 मामले दर्ज हैं। मुठभेड़ के डर से बदमाश गले में तख्तियाँ लटकाए शाहपुर थाने पहुँचे और SHO राधेश्याम यादव के सामने भविष्य में अपराध नहीं करने की शपथ ली। अपराधबोध की बात कहते हुए दोनों भाइयों ने थाना परिसर के अंदर आत्मसमर्पण कर दिया और भविष्य में अपराधों से दूर रहने का वादा किया।

SP (मुजफ्फरनगर-ग्रामीण) अतुल कुमार श्रीवास्तव ने कहा, “दो हिस्ट्रीशीटरों ने शाहपुर थाना प्रभारी के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इनमें से एक शाहपुर थाने के टॉप टेन अपराधियों में शामिल है। इन दोनों पर गोहत्या का आरोप है। उन्होंने भविष्य में कोई अपराध नहीं करने की बात स्वीकार की। उन दोनों ने स्वीकार किया कि वे नियमित रूप से पुलिस स्टेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँगे।”

योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल में भी सरेंडर का सिलसिला जारी

10 मार्च 2022 को उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली भाजपा सरकार के सत्ता में लौटने के 15 दिनों के भीतर कम से कम 50 अपराधियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। दिलचस्प बात यह है कि कई अपराधी अपने वादों की घोषणा करने वाले संदेश के साथ तख्तियाँ लेकर थानों में आए थे। पुलिस कार्रवाई के डर और अवैध संपत्तियों को लेकर चल रहे बुलडोजर ने राज्य में कई अपराधियों को सरेंडर करने के लिए मजबूर कर दिया है।

देखिए वह सुरंग जिससे भारत में घुसे थे जैश के 2 आत्मघाती हमलावर, सांबा में मिला: 1.5 साल में बॉर्डर पर मिला 5वाँ अंडरग्राउंड टनल

जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले के बीओपी चक फकीरा क्षेत्र में सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने बुधवार (4 मई 2022) की रात एक भूमिगत सुरंग का पता लगाया। इस सुरंग का इस्तेमाल आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेएम) के दो आत्मघाती हमलावरों ने पाकिस्तान से भारत में घुसने के लिए किया था। सीमा सुरक्षा बल के अनुसार हाल ही में इस सुरंग को 2 फीट खोदा गया है। आशंका जताई जा रही है कि यह पाकिस्तान की ओर से लगभग 150 मीटर लंबी है।

सुरंग की कुछ तस्वीरें साझा करते हुए बीएसएफ जम्मू ने ट्वीट कर कहा है, “आज बीएसएफ जम्मू के सतर्क सैनिकों ने सांबा अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र के साथ एक सुरंग का पता लगाकर पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को नाकाम कर दिया।”

इस सुरंग से 21 रेत के बोरे भी बरामद हुए हैं। इनका इस्तेमाल सुरंग मजबूत करने के लिए किया गया था। बीएसएफ के मुताबिक डेढ़ साल से भी कम समय में पता लगाई गई यह 5वीं सुरंग है।

गौरतलब है कि जम्मू के सुंजवां इलाके में 22 अप्रैल को मुठभेड़ के बाद बीएसएफ ने इस सुरंग का पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया था। 22 अप्रैल को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों को ले जा रही एक बस पर भारी हथियारों से लैस आत्मघाती आतंकियों ने हमला किया था। जैश के इन आतंकवादियों को सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में मार गिराया गया था। मुठभेड़ में सीआईएसएफ के एक सहायक उप निरीक्षक भी बलिदान हो गए थे। साथ ही दो पुलिसकर्मियों समेत नौ सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे।

एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “अंतरराष्ट्रीय सीमा से 150 मीटर की दूरी पर और सीमा की बाड़ से 50 मीटर की दूरी पर एक नई खोदी गई सुरंग का पता पाकिस्तानी चौकी चमन खुर्द (फियाज) के सामने लगाया गया, जो भारत की ओर से 900 मीटर की दूरी पर है।” उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत सीमा चौकी चक फकीरा से लगभग 300 मीटर और अंतिम भारतीय गाँव से 700 मीटर की दूरी पर है।

ससुराल से नहीं आई ईदी तो सोहेल ने बीवी हसीना को लगाई आग, खुद भी झुलसा: भांजे ने बाहर से लगा दी थी कुंडी, दिल्ली की घटना

दिल्ली के आनंद पर्वत इलाके में एक शौहर ने अपनी बीवी को आग लगा दी। वह ईद पर ससुराल से ईदी नहीं आने की वजह से नाराज था। बताया जा रहा है कि आग लगाने के लिए आरोपित ने थिनर का प्रयोग किया है। इस दौरान आरोपित खुद भी आग की चपेट में आ कर झुलस गया है। मियाँ-बीवी को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। आरोपित शौहर का नाम सोहेल और पीड़िता बीवी का नाम हसीना है। घटना 1 मई 2022 (रविवार) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों का निकाह 28 अक्तूबर 2021 को हुआ था। दोनों आनंद पर्वत के बस्ती तालीवालान क्षेत्र में रहते हैं। हसीना की चीख सुन कर पड़ोसियों ने आग बुझाई थी। बाद में दोनों को राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती करवाया। पीड़िता के बयानों के आधार पर पुलिस ने शौहर पर केस दर्ज किया है।

पीड़िता के मुताबिक, “निकाह के बाद पहली ईद पर मेरे घर से मेरे शौहर के घर ईदी आई थी। मेरे भाई ने इस बार की ईदी नहीं भेजी और अगली बार भेजने के लिए कहा। इस बार मेरे भाई ने पैसे भेजने को कहा। इसी बात पर मेरे शौहर सोहेल मुझसे झगड़ने लगे। उन्होंने मुझे पीटा और फिर थिनर उड़ेल कर आग लगा दी।” पीड़िता की उम्र 22 वर्ष बताई जा रही है।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता का आरोप है कि हमले में उसकी ननद के लड़के ने भी मदद की है। उस पर घटना के दौरान घर कुंडी बाहर से बंद कर देने का आरोप है। इस घटना के चलते हसीना का शरीर 15 प्रतिशत जल चुका है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घटना के दिन ही पीड़िता का बयान लेना चाह रहे थे, लेकिन हालत ठीक न होने के चलते उन्हें इंतज़ार करना पड़ा।

जिस संभाजी भिड़े को शरद पवार ने बताया था भीमा कोरेगाँव का विलेन, उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला: पुलिस ने बताया- केस से हटा दिया है नाम

महाराष्ट्र के भीमा कोरेगाँव में 1 जनवरी 2018 को हिंसा हुई थी। लिबरल और वामपंथी नेक्सस इसके लिए संभाजी भिड़े को जिम्मेदार बताता रहा है। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार भी उन पर हिंसा का माहौल तैयार करने का आरोप लगा चुके हैं। लेकिन पुणे पुलिस को इस मामले में संभाजी भिड़े के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। पुणे ग्रामीण पुलिस ने बुधवार (4 मई 2022) को महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष इस संबंध में एक रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया गया है कि हिंसा में संभाजी भिड़े की कोई भूमिका नहीं पाई गई है और उनका नाम मामले से हटा दिया गया है।

भीमा कोरेगाँव हिंसा के एक दिन बाद कथित दलित राजनीतिक कार्यकर्ता अनीता सावले ने हिंदुत्ववादी नेताओं संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे के खिलाफ हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करवाई थी। इस हिंसा में एक की जान चली गई थी, जबकि कई लोग घायल हो गए थे। पिंपरी-चिंचवड़ की रहने वाली सावले राजनीतिक संगठन बहुजन रिपब्लिकन सोशलिस्ट पार्टी की नेता भी हैं।

मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एकबोटे की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद पुणे ग्रामीण पुलिस उन्हें गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें अदालत से जमानत मिल गई और इधर पुलिस ने चार्जशीट भी दाखिल कर दिया। हालाँकि सबूतों के अभाव में पुलिस संभाजी भिड़े को कभी गिरफ्तार नहीं कर पाई।

इस बीच, मुंबई के एक वकील आदित्य मिश्रा ने एक साल पहले MSHRC के समक्ष एक शिकायत दर्ज की, जिसमें 28 मार्च, 2018 की एक अखबार की रिपोर्ट का जिक्र था। इसमें महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान का जिक्र था, जिसमें उन्होंने कहा था कि पुलिस के पास भिड़े के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। .

मिश्रा ने शिकायत में कहा, “क्या कोई XYZ को बिना किसी सबूत के किसी को अफवाहों के आधार पर आरोपित के रूप में फँसा सकता है?” उन्होंने आगे अनुरोध किया कि भिड़े के खिलाफ मामले में पुलिस से स्थिति रिपोर्ट माँगी जाए। मिश्रा ने आयोग से न्याय के हित में कानून के अनुसार आवश्यक निर्देश की माँग करते हुए कहा था, “भिड़े गुरुजी के सिर पर कब तक FIR की तलवार लटकी रहेगी।”

MSHRC ने पुणे ग्रामीण पुलिस अधिकारियों को तलब कर भिड़े के खिलाफ मामले में स्थिति रिपोर्ट माँगी थी। बुधवार को सुनवाई के दौरान MSHRC के समक्ष एक रिपोर्ट पेश किया गया। इस पर 3 मई, 2022 की तारीख थी और पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक अभिनव देशमुख का सिग्नेचर था। रिपोर्ट के मुताबिक भिड़े के खिलाफ अनीता सावले द्वारा दर्ज मामले में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। इसलिए, भिड़े का नाम हटा दिया गया है, जबकि शेष 41 आरोपितों के खिलाफ धारा 307, 143, 147, 148, 149, 295 (ए), 435, 439, 153 (ए), 120 (बी) के तहत चार्जशीट दायर किया गया है।

वकील मिश्रा ने कहा, “पुलिस ने अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए कहा कि भिड़े का नाम मामले से हटा दिया गया है। MSHRC ने पुलिस को शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए बयान को मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा है। मामले की अंतिम सुनवाई 4 जुलाई, 2022 को होगी।”

कौन हैं संभाजी भिड़े?

संभाजी भिड़े का असली नाम मनोहर है। वे महाराष्ट्र के सांगली जिले के रहने वाले हैं। सांगली में उन्हें हर कोई ‘गुरुजी’ के नाम से जानता है। भिड़े ने पुणे विश्वविद्यालय से अटॉमिक साइंस में एमएससी की है। वह पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज में प्रोफेसर भी रह चुके हैं। वे बाबाराव भिड़े के भतीजे हैं, जो सांगली में आरएसएस के बड़े कार्यकर्ता रहे हैं। 1980 के दशक में संभाजी भी RSS से जुड़े हुए थे और संगठन के लिए उन्होंने काफी काम भी किया। 1980 के दशक में उन्होंने RSS छोड़ा और ‘शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान’ नाम का संगठन बनाया। 

इस संगठन की शुरुआत 1984 में हुई। जिस तरह के काम RSS करता है, ठीक वैसा ही काम शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान संगठन भी करता है। उनकी संस्था का मुख्य काम शिवाजी महाराज के बारे में लोगों को बताना है। संभाजी ने रायगढ़ किले में छत्रपति शिवाजी के लिए सोने का सिंहासन बनाने का प्रण लिया है, जिसके लिए कम से कम 144 किलो सोने का इस्तेमाल होगा। संभाजी नंगे पैर चलते हैं। साइकल से चलना पसंद करते हैं। 2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी उनके नाम की तब बहुत चर्चा हुई थी जब प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान उनसे मुलाक़ात की थी और मंच से उन्हें ‘गुरुजी’ कहा था। उन्होंने मंच से कहा था, “भिड़े गुरुजी ने मुझे आमंत्रित नहीं किया, मैं यहाँ उनके आदेश से आया हूँ।”

इतालवी फुटबॉलर के साथ रिलेशन में थीं सोनिया (एंटोनियो माइनो), एक अफेयर राजीव गाँधी की एंट्री से पहले भी था? दावों में कितनी हकीकत, कितना फसाना

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी का पहला प्यार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी नहीं थे? सोनिया गाँधी (Sonia Gandhi) जो उस समय एंटोनियो माइनो का नाम से जानी जातीं थीं, क्या कई सालों तक इटली के फुलबॉलर फ्रेंको लुइसन (Franco Luison) के साथ रिलेशनशिप में थीं? सालों पहले यह खबर सोशल मीडिया पर उस वक्त चर्चा का विषय बनी थी, जब वर्ष 2004 में इतालवी मैगजीन जेंटे (Gente Magazine) ने दिवंगत फुटबॉलर का एक इंटरव्यू प्रकाशित किया था।

लुइसन ने अपने इंटरव्यू में दावा किया था कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के संपर्क में आने से पहले सोनिया (एंटोनियो माइनो) के साथ वह 4 सालों तक रिलेशनशिप में थे। फुटबॉलर ने अपने उन दिनों (जब वे सोनिया के साथ रिलेशन में थे) को याद करते हुए बताया था, “हम दोनों के परिवार वाले इस रिश्ते से बेहद खुश थे और उसके माता-पिता अक्सर मुझे ट्यूरिन के पास ओरबासानो में अपने घर पर बुलाया करते थे।” 1960 में फ्रेंको और एंटोनियो जेसोलो में समुद्र के किनारे पहली बार मिले थे। उस समय वह केवल 14 वर्ष की थी और फ्रेंको 26 वर्ष के थे। यानी दोनों की उम्र में 12 वर्ष का अंतर था। उन्होंने अपने इंटरव्यू में आगे बताया, “मैं उससे मिलने ओरबासानो जाया करता था। उसके परिवार वालों ने मुझे हमेशा सम्मान दिया।”

चार सालों तक रिश्ते में रहने वाले फुटबॉलर ने इस बात का भी जिक्र किया था कि एंटोनियो को फुटबॉल में कोई दिलचस्पी नहीं थी और ना ही वह कभी फ्रेंको को फुटबॉल खेलते हुए देखने के लिए स्टेडियम गईं। बातचीत में उन्होंने बताया था कि वे दोनों वीकेंड पर अक्सर विसेंज़ा (Vicenza) जाया करते थे। फ्रेंको ने कहा था कि एंटोनियो शादी की जिद कर बैठी थी और मैं अपने करियर को लेकर चिंतित था। इसलिए मैंने उसे थोड़ा इंतजार करने को कहा, लेकिन वह इसके लिए नहीं मानी। इसके बाद एंटोनियो को उसके माता-पिता ने पढ़ाई के लिए इंग्लैंड भेज दिया। फ्रेंको को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं आया।

इंग्लैंड में सोनिया की मुलाकात राजीव गाँधी से हुई। हालाँकि उस दौरान भी वह फ्रेंको के संपर्क में थीं और उन्हें अपनी बात बताती थीं, लेकिन इंटरव्यू से ऐसा लगता है कि उन्होंने अपने पत्रों में कभी भी राजीव का जिक्र नहीं किया। छुट्टी के दिनों में इटली आने के बाद उन्होंने फ्रेंको को राजीव के बारे में बताया। साथ ही यह भी कहा कि उन्होंने (राजीव गाँधी) मुझे अपनी माँ इंदिरा गाँधी से मिलने के लिए भारत बुलाया था। फ्रेंको ने कहा कि जब एंटोनियो वापस इटली आई, तो मुझे उसकी बातों से यकीन हो गया था कि अब वह राजीव से ही शादी करेगी।

उन्होंने कहा कि एंटोनियो के इस तरह से छोड़कर चले जाने पर मैं अंदर से टूट गया था। बताया जाता है कि फ्रेंको इसके बाद भी एंटोनियो के परिवार के संपर्क में रहे। राजीव के मिलने के बाद एंटोनियो अपने प्यार को भूल चुकी थीं। वह अब फ्रेंको के पास नहीं आना चा​हती थी। उनके छोड़कर जाने के बाद फ्रेंको ने भी कुछ साल बाद नोरा नाम की महिला से शादी कर ली थी। फ्रेंको की पत्नी नोरा ने कहा था, “मुझे सोनिया से जलन होती थी, क्योंकि उनके सभी दोस्त उनके बारे में बोलते थे। जब मैंने 1964 के अंत में हमारे रिश्ते की शुरुआत की थी, तो मुझे डर था कि एक दिन सोनिया वापस आ जाएगी और मैं फ्रेंको को खो दूँगी!”

अफेयर के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं

ऑपइंडिया ने राजीव गाँधी से मिलने से पहले सोनिया गाँधी और इतालवी फुटबॉलर के बीच कथित अफेयर को लेकर फैक्टचेक किया। इसको लेकर केवल कुछ ही ब्लॉग पोस्ट मिले, जिसमें दावा किया गया है कि यह फ्रेंको द्वारा इतालवी मैगजीन को दिए गए इंटरव्यू का अनुवाद है। इन ब्लॉग में बताया गया है कि सोनिया के राजीव गाँधी से पहले इतालवी फुटबॉलर से प्रेम संबंध थे। हालाँकि, इसके अलावा सोनिया और फुटबॉलर फ्रेंको के अफेयर के बारे में कहीं भी ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह केवल कुछ ब्लॉग पोस्ट थे, जिन्होंने एक दूसरे को कॉपी किया है

हमें केवल इंटरव्यू से मिलता-जुलता एक रेफरेंस मिला है। वर्ष 2013 में, एक स्वतंत्र पत्रकार, एगिडियो जैम्पिस ने Ilsussidiario.net को एक घटना के बारे में बताया था, जब उन्होंने सोनिया गाँधी (तब एंटोनियो माइनो) को फुटबॉलर के साथ देखा था। जैम्पिस लुसियाना में सोनिया गाँधी के माता-पिता के घर के पास रहते थे। उन्होंने कहा था, “मुझे 1970 के दशक में दिन के समय उनसे हुई मुलाकात याद है, जब वह अपने दोस्त फ्रेंको लुइसन के साथ थीं, जो एक पूर्व विसेंज़ा गोलकीपर थे। मैं उन दोनों की तस्वीर लेना चाहता था, लेकिन वह ऐसा नहीं चाहती थीं। इसलिए मैंने सिर्फ उनकी (फ्रेंको) फोटो खींची, जिन्होंने मुझे अपना ऑटोग्राफ भी दिया। इसके बाद हम सभी चुप हो गए। फिर उन्होंने मुझे बताया कि वह कहाँ पैदा हुई थीं और फिर हमने इस बारे में बात की। हम लगभग एक ही उम्र के थे, हमारे बीच केवल तीन साल का अंतर था।”

यह सच है कि फ्रेंको लुइसन नाम का एक फुटबॉलर था। हालाँकि, रिसर्च के दौरान हमें ना तो कोई ठोस तथ्य मिला और न ही इस स्टोरी का कोई ऑनलाइन संस्करण। वहीं, राजीव गाँधी से मिलने और शादी करने से पहले सोनिया के परिवार को लेकर कॉन्ग्रेस और गाँधी परिवार ने भी कभी खुलकर नहीं बोला है।

ऑपइंडिया ने Hearst publication को एक ईमेल भेजा है, जो कथित रूप से इस इंटरव्यू को प्रकाशित करने वाली Gente मैगजीन का संचालन करती है। अगर उनकी तरफ से हमें इससे जुड़ा कोई भी जवाब प्राप्त होता है, तो हम इस स्टोरी को अपडेट करेंगे। लेकिन अभी तक ऑपइंडिया न तो इन दावों की पुष्टि कर सकता है और न ही इससे इनकार कर सकता है कि राजीव गाँधी से पहले सोनिया गाँधी ने एक इतालवी फुटबॉलर को डेट किया था।

‘कैंपस को राजनीतिक मंच न बनाएँ’: उस्मानिया यूनिवर्सिटी में राहुल गाँधी के कार्यक्रम को अनुमति देने से हाई कोर्ट का इनकार, कॉन्ग्रेस नेता पर CM की बेटी भी बरसी

उस्मानिया यूनिवर्सिटी में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के कार्यक्रम को अनुमति देने से तेलंगाना हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा है कि यूनिवर्सिटी कैंपस का इस्तेमाल राजनीतिक मंच के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए। इससे पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी कॉन्ग्रेस नेता को इजाजत देने से इनकार कर दिया था। वहीं, तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर की बेटी कविता ने भी राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए उनकी यात्रा का मकसद पूछा है।

हाई कोर्ट ने बुधवार (4 अप्रैल 2022) को राहुल गाँधी के प्रस्तावित कार्यक्रम को यूनिवर्सिटी काउंसिल के प्रस्ताव का उल्लंघन बताया। मुताबिक राहुल गाँधी का यहाँ 7 मई 2022 (शनिवार) को कायर्क्रम प्रस्तावित था। यूनिवर्सिटी प्रशासन के इनकार के बाद कुछ छात्रों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका कहना था कि राहुल गॉंधी छात्रों से सीधा संवाद करना चाहते हैं। उन्हें इसकी इजाजत दी जानी चाहिए।

लेकिन अदालत ने कहा कि भले इसे सीधा संवाद बताया जा रहा हो, लेकिन इसके पीछे राजनैतिक मंशा से इनकार नहीं किया जा सकता। यूनिवर्सिटी का परिसर राजनैतिक प्लेटफॉर्म की तरह प्रयोग नहीं होना चाहिए। विश्वविद्यालय में राजनैतिक इवेंट करना यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के प्रस्ताव संख्या 6 के नियम 1591 का उल्लंघन है। लिहाजा इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।

तेलंगाना की सत्ताधारी पार्टी TRS की विधान पार्षद कविता ने भी राहुल गाँधी के दौरे को राजनैतिक बताया है। उन्होंने कहा, “राहुल गाँधी ने कभी भी तेलंगाना के हित की बात नहीं की। पता नहीं वो यहाँ उस्मानिया यूनिवर्सिटी में क्यों आना चाह रहे? हमने उनसे किसानों के मुद्दे को संसद में उठाने की अपील की थी। लेकिन अब वे राजनीति करने के लिए वारंगल आ रहे हैं।”

गौरतलब है कि उस्मानिया यूनिवर्सिटी ने साल 2017 में कार्यकारी परिषद ने एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें राजनीति के साथ-साथ गैर-शैक्षणिक गतिविधियों पर कैंपस में रोक लगा दी गई थी। इसके एक साल पहले हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यूनिवर्सिटी कैंपस में राजनीतिक और सार्वजनिक बैठकों की अनुमति नहीं देने के आदेश दिए थे। उस

स्टालिन सरकार ने रोकी 500 साल पुरानी शोभा यात्रा तो साधु-संतों ने ‘धर्मद्रोहियों’ को चेताया, कहा- अंग्रेजों ने भी नहीं किया ऐसा, ये हिन्दू विरोधी फैसला

तमिलनाडु के मदुरै में एक बड़ा विवाद छिड़ गया है जब मयिलादुथुराई कलेक्ट्रेट ने ‘पट्टिना प्रवेशम’ के पारंपरिक अनुष्ठान को आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, भक्तों की परंपरा धर्मपुरम अधीनम के द्रष्टा को पालकी में बिठाकर कन्धों पर ले जाने की परंपरा है। दरअसल, शैव मठ के महंत को पालकी में बिठाकर कंधों पर ले जाने की परंपरा पर मयिलादुथुराई कलक्ट्रेट ने मानवाधिकारों का हवाला देकर रोक लगा दी है।

इस निर्णय के खिलाफ मठ के पदाधिकारी और अनुयायियों ने मोर्चा खोल दिया है। इस आदेश को दरकिनार करके पट्टिना प्रवेशम यात्रा निकालने का ऐलान कर दिया है। बता दें कि इस बार 22 मई 2022 को यह यात्रा निकलनी है।

मदुरै अधीनम के प्रमुख हरिहर ज्ञानसंबंदा स्वामीगल ने कहा, “धर्मपुरम अधीनम 500 साल पुराना है और पिछले 500 साल से यह (पट्टिना प्रवेशम) चल रहा था। इस साल अचानक ऐसा नहीं हो रहा है, मुझे दुख हो रहा है। यहाँ तक कि अंग्रेजों ने पट्टिना प्रवेशम की अनुमति दी थी।”

वहीं, वैष्णव गुरु मन्नारगुडी श्री सेंडलंगरा जीयर का कहना है, “पट्टिना प्रवेशम एक धार्मिक अनुष्ठान है। इसे रोकने का अधिकार किसी को नहीं है। यह मठ के अनुयायियों द्वारा किया जाता है। मैं, मन्नारगुडी जीयर के रूप में इन ‘धर्मद्रोही’ और ‘देशद्रोही’ को उनके हिंदू विरोधी कार्यों के लिए चेतावनी देता हूँ।”

मयिलादुथुराई के राजस्व मंडल अधिकारी जे बालाजी ने प्रतिबंध आदेश जारी किया था और यह भी दावा किया था कि यह प्रथा “मानवाधिकारों का उल्लंघन” है। वहीं अनुवाईयों का कहना है कि 500 साल पुरानी परंपरा को इस तरह बैन करने का अधिकार किसी अधिकारी के पास नहीं है। यहाँ तक कि अंग्रेजों के जमाने में और आजादी के बाद भी किसी मुख्यमंत्री ने इस पर रोक नहीं लगाई थी। यह धार्मिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप है। वहीं अब इस मामले में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से दखल देने की माँग की गई है।

बता दें कि मदुरै अधीनम को दक्षिण भारत में शैवों का सबसे प्राचीन मठ माना जाता है। ये मठ तमिलनाडु के मदुरै में मीनाक्षी अम्मन मंदिर के पास स्थित है, जो देश के सबसे महत्वपूर्ण शिवशक्ति मंदिरों में से एक है। इस मठ में पट्टिना प्रवेशम नाम से एक परंपरा है। इसमें धरमापुरम अधीनम के महंत को पालकी में बिठाकर लोग कंधों पर शोभायात्रा के रूप में ले जाते हैं।

मदुरै अधीनम के श्री हरिहर श्री ज्ञानसंबंदा देसिका स्वामीगल के 293वें महंत ने कहा कि धरमापुरम अधीनम का शैव सम्प्रदाय के लोगों के लिए वही महत्व है जो कैथोलिक ईसाइयों के लिए वेटिकन सिटी का है। मदुरै अधीनम ने कहा कि महंत को पालकी में ले जाना लोगों का अपने गुरु के प्रति सम्मान का प्रतीक है। वे स्वेच्छा से गुरु को अपने कंधों पर लेकर चलते हैं। तमिलनाडु सरकार को इस प्राचीन शैव मठ की परंपरा का सम्मान करना चाहिए, ना कि विरोध करते हुए प्रतिबन्ध लगाना चाहिए।

कहा जा रहा है कि द्रविड़ कड़गम के नेता और वामपंथी इस प्रथा का ये कहकर विरोध कर रहे हैं कि ये मानवाधिकारों के खिलाफ है। द्रविड़ कड़गम के मयिलादुथुराई जिला सचिव के थलपतिराज का कहना है कि इंसानों द्वारा किसी इंसान को पालकी में ले जाना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। उनके विरोध और उसकी वजह से कानून व्यवस्था की स्थिति का हवाला देकर मयिलादुथुराई जिले के रेवेन्यू ऑफिसर ने 27 अप्रैल को आदेश जारी करके महंत को पालकी में ले जाने पर रोक लगा दी है। हालाँकि, कार्यक्रम के आयोजन पर पाबंदी नहीं लगाई गई है।

एम्स से छूटते ही बोले लालू यादव – ‘मंदिर में पढ़ो हनुमान चालीसा, इरिटेट क्यों करते हो, देश तोड़ने के लिए हो रहा ये सब’

चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता आरजेडी (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) ने बुधवार (4 मई, 2022) को देश में चल रहे हनुमान चालीसा विवाद (Hanuman Chalisa Row) पर बयान दिया। उन्होंने तर्क दिया कि जिसे हनुमान चालीसा पढ़ना है तो वो मंदिर में जाके पढ़े। उन्होंने कहा, “कोई क्यों जा रहा है मस्जिद में हनुमान चालीसा पढ़ने ये तो देश को तोड़ने के लिए किया जा रहा है। ऐसा करके इरिटेट किया जा रहा है कि वो रिएक्ट करें और दंगा-फसाद हो।”

लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा को लालू प्रसाद यादव ने गलत करार दिया। उन्होंने कहा कि ये देश के लिए बहुत ही खराब हो रहा है। इसके साथ ही लालू प्रसाद ने प्रशांत किशोर द्वारा नई पार्टी बनाने के सवाल पर आरजेडी सुप्रीमो ने कहा कि वो (प्रशांत किशोर) पूरा देश घूमे लेकिन वो लौटा दिए गए। अब वहीं पहुँच गए हैं, जहाँ उनका कोई ठिकाना नहीं है।

बेटी मीसा भारती के घर पर रहेंगे लालू प्रसाद

गौरतलब है कि 22 अप्रैल को ही डोरंडा ट्रेजरी मामले में जमानत मिलने के बाद से ही उनकी रिहाई कागजातों के कारण लटक गई थी। बाद में उन्हें 28 अप्रैल को रिहाई का आदेश मिला, लेकिन एम्स के डॉक्टरों से हरी झंडी मिलने का इंतजार था। उन्होंने कहा कि वो अपनी बेटी मीसा भारती के आवास पर रहेंगे। उन्हें डॉक्टरों ने पानी कम पीने और संयम बरतने की सलाह दी है। लालू के मुताबिक, वे डॉक्टरों के कहे अनुसार ही दिनचर्या का पालन करेंगे। दो सप्ताह के बाद उनकी फिर से जाँच होगी। हालाँकि, उससे पहले वो पटना जाएँगे।