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‘सार्वजनिक स्थान पर धार्मिक छंदों को पढ़ना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन’: बॉम्बे HC ने राणा दंपति की याचिका ठुकराई, FIR रद्द नहीं

महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा पढ़ने के कारण गिरफ्तार किए गए सांसद नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा की दूसरी FIR को रद्द करने से बॉम्बे हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया है। याचिका पर सोमवार (25 अप्रैल, 2022) को सुनवाई हाई कोर्ट के जस्टिस पीबी वराले और एसएम मोदक की बेंच ने की। कोर्ट ने कहा कि दोनों याचिकाएँ अलग-अलग हैं और ये सुनवाई करने के लायक नहीं है।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी दूसरे के घर या फिर धार्मिक छंदों को सार्वजनिक स्थानों पर पढ़ने से इस तरह के ऐलान से किसी दूसरे व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन होता है। राज्य को इस बात की आशंका है कि ऐसे कृत्यों से कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ेगी। कोर्ट ने ये भी कहा कि वो याचिकाकर्ताओं की जमानत याचिका पर अपने गुण और दोषों के आधार पर सुनवाई करेगा। बॉम्बे हाई कोर्ट ने नवनीत राणा द्वारा सीएम उद्धव ठाकरे के घर के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने के ऐलान पर नाराजगी जाहिर की।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, “याचिकाकर्ता जो राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं, उनसे जिम्मेदारी से व्यवहार करने की उम्मीद की जाती है। बड़ी शक्ति बड़ी जिम्मेदारी के साथ आती है। सक्रिय जीवन वाले लोगों के जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा है।”

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि लाउडस्पीकर और हनुमान चालीसा पर जारी सियासत के बीच अमरावती से सांसद नवनीत राणा ने उद्धव ठाकरे के आवास मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने का ऐलान किया था, जिसके बाद 23 अप्रैल, 2022 को मुंबई की खार पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। उन पर मुंबई पुलिस ने राजद्रोह (आईपीसी की धारा 124 A) और धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप लगाए थे। इसके अलावा उन पर आईपीसी की धारा 353 (सरकार काम में बाधा) के तहत केस दर्ज किया गया था। इसी एफआईआर को कोर्ट ने खारिज करने से इनकार कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि इस बीच नवनीत राणा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा, “मुझे 23 तारीख को पुलिस स्टेशन ले जाया गया। 23 अप्रैल को मुझे पूरी रात पुलिस स्टेशन में ही गुजारनी पड़ी। रात को मैंने कई बार पीने के लिए पानी माँगा, लेकिन रातभर मुझे पानी नहीं दिया गया।” नवनीत ने आगे बड़ा आरोप लगाते हुए कहा, “मौके पर मौजूद पुलिस स्टाफ ने कहा कि मैं अनुसूचित जाति की हूँ, इसलिए वह मुझे उसी ग्लास में पानी नहीं दे सकते, जिसमें वे लोग पीते हैं। मतलब मुझे मेरी जाति की वजह से पीने के लिए पानी तक नहीं दिया गया। मैं यह जोर देकर कहना चाहती हूँ कि मेरी जाति की वजह से मुझे बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित रखा गया।”

नवनीत राणा का ये भी आरोप था कि जब रात में उन्हें वॉशरूम जाना था तो पुलिस वालों ने इससे इनकार करते हुए कहा कि वे नीची जाति वालों को अपना बाथरूम इस्तेमाल नहीं करने दे सकते।

जमानत मिलने के कुछ ही देर बाद फिर गिरफ्तार किए गए MLA जिग्नेश मेवाणी, अधिकारियों पर हमला का मामला: असम पुलिस की कार्रवाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक आपत्तिजनक ट्वीट के मामले में असम से गिरफ्तार हुए गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी को असम की कोकराझार कोर्ट ने सोमवार (25 अप्रैल, 2022) को जमानत दे दी। हालाँकि, असम पुलिस ने जमानत मिलने के कुछ ही देर बाद, ‘अधिकारियों पर हमला करने’ के आरोप में फिर से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि कॉन्ग्रेस समर्थित विधायक मेवाणी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इससे पहले जिग्नेश मेवाणी को पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ किए गए एक ट्वीट के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने अपने ट्वीट में आपत्तिजनक दावा करते हुए लिखा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नाथूराम गोडसे की विचारधारा में मानते हैं इसलिए वे देश में शांति की अपील नहीं करेंगे। इसको लेकर उनके खिलाफ असम शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद मेवाणी को पुलिस गुवाहाटी के रास्ते कोकराझार ले गई और न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया। उन्हें तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया था।

मेवाणी पर आपराधिक साजिश के आरोप में सेक्शन 120 बी, सेक्शन 259ए, वैमनस्यता फैलाने के आरोप में धारा 153A, शांति भंग करने के लिए किसी का अपमान करने आरोप में सेक्शन 504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके अलावा ट्वीट पोस्ट के लिए उन पर ये आरोप लगे थे, इसलिए आईटी एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने उन्हें अदालत में पेश किया गया था और फिर कोर्ट ने उन्हें तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था।

जिसके बाद कॉन्ग्रेस ने असम में मेवाणी की रिहाई के लिए विरोध प्रदर्शन भी किया। रविवार (24 अप्रैल, 2022) देर शाम मेवाणी को कोर्ट में पेश किया गया था। देर रात तक इस मामले में जिरह चलती रही। इसके बाद सीजेएम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अदालत से जमानत मिल गई, लेकिन उन्हें कुछ मिनटों के अंदर ही एक अन्य मामले में अरेस्ट कर लिया गया।

हिन्दू विवाह की रीति-रिवाजों का मजाक बनाता है बॉलीवुड, सोशल मीडिया में तस्वीरें बेच कमाते हैं पैसे भी: जानिए इस पवित्र बंधन का महत्व

हिंदू सनातन धर्म में विवाह को बहुत ही पवित्र बंधन माना गया है। विवाह वर एवं वधू के बीच एक अनुबंध, करार या समझौता ना होकर एक पवित्र आध्यात्मिक संबंध है, लेकिन बॉलीवुड वालों के लिए विवाह के मायने कुछ और ही हैं। हाल ही में 5 सालों से रिलेशनशिप में रहे आलिया भट्ट और रणबीर कपूर (Alia Bhatt & Ranbir Kapoor Wedding) हिंदू-पंजाबी रीति रिवाज से शादी के बंधन में बँधे। इसके बाद कपूर हाउस में जमकर पार्टी हुई और दूल्हा-दुल्हन ने केक काटकर जश्न मनाया।

साथ ही बाहों में बाहें डालकर वाइन भी पी। इसके बाद फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी के डिजाइन किए गए कपड़ों में आलिया भट्ट और रणबीर कपूर ने मीडिया वालों को कई पोज देकर अपनी तस्वीरें दी। खैर, ऐसा करके वह लाइम लाइट में तो आ गए, लेकिन इन लोगों ने सनातन धर्म को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

यही नहीं, इससे पहले कैटरीना कैफ, विक्की कौशल, प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह जैसे कई कलाकारों ने भी हिंदू विवाह और इससे जुड़े रीति-रिवाजों का केवल मजाक ही उड़ाया है। उन्होंने अपने विवाह को केवल फैशन और ट्रेंड से जोड़कर देखा। फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी का डिजाइन किया हुआ लहंगा और कपड़े ​पहने बिना तो इनकी शादी मानो पूरी ही नहीं होती है। सिंदूर, बिंदी, चूड़ियाँ, लहँगा, साड़ी, पगड़ी, हल्दी, मेहंदी की रस्म इनके लिए केवल सुर्खियाँ बटोरने से ज्यादा और कुछ नहीं है। यही नहीं, अपने सोशल मीडिया पर शादी, मेहंदी और संगीत सेरेमनी की तस्वीरें और वीडियो शेयर कर ये लोग करोड़ों रुपए कमाते हैं।

हिंदू सनातन धर्म में विवाह का महत्व

हिंदू सनातन धर्म में विवाह को बहुत ही पवित्र बंधन माना गया है। हिंदू धर्म में विवाह और इससे जुड़ी रस्मों का भी विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म शास्त्रों में हमारे सोलह संस्कार बताए गए हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण विवाह संस्कार होता है। अन्य मजहबों में विवाह पति और पत्नी के बीच एक प्रकार का करार होता है, जिसे किसी विशेष परिस्थिति में तोड़ा भी जा सकता है, लेकिन हिंदू विवाह में पति और पत्नी के बीच जन्म-जन्मांतरों का संबंध होता है, जिसे किसी भी तरह से तोड़ा नहीं जा सकता है। ​अग्नि के सामने सात फेरे लेने के बाद पति-पत्नी तन, मन और आत्मा से पवित्र बंधन में बँध जाते हैं। यानी कि हिंदू धर्म में विवाह के जरिए वर-वधू का, जिनके पास दो शरीर, दो मन, दो हृदय, दो प्राण और दो आत्माएँ होती हैं उनका आपस में मिलन हो जाता है। इसे बेहद अटूट मिलन कहा गया है।

विवाह पवित्र संस्कार

भारतीय संस्कृति में कई तरह के विवाह प्रचलित हैं। इनमें ब्रम्ह, देव, प्रजापत्य, असुर, गंधर्व प्रमुख हैं। इनमें गठबंधन को विवाह का प्रतीक माना जाता है। हिंदू विवाह में गठबंधन के समय वर के पल्लू में सिक्का, हल्दी, अक्षत, पुष्प, दूब इत्यादि रखकर वधू के पल्लू से गाँठ बाँधी जाती है। सिक्के मतलब यह होता है कि धन पर केवल एक शख्स का ही अधिकार नहीं होगा, बल्कि घर में आने वाले धन के पति और पत्नी दोनों समान रूप से अधिकारी होंगे। फूल इस बात का प्रतीक होता है कि दोनों सदैव एक-दूसरे को देखकर प्रसन्न रहेंगे। वहीं, हल्दी सेहत, दूब हरियाली और अक्षत अन्न को दर्शाती है। यानी, यह गठबंधन इस बात का प्रतीक होता है कि वर-वधू जीवनभर के लिए एक-दूसरे के हो गए हैं। वर-वधू पर भी इस बात की जिम्मेदारी होती है कि वे इस गठबंधन को कभी भी टूटने नहीं देंगे। इन्हीं परंपराओं के कारण विवाह को पवित्र संस्कार माना गया है। इसके अलावा हिंदू विवाह में सिंदूर, सात फेरों, चूड़ियों और कन्यादान का विशेष महत्व होता है।

विवाह की धार्मिक महत्ता मनु ने इस प्रकार लिखी है-

दश पूर्वांन् परान्वंश्यान् आत्मनं चैकविंशकम्।
ब्राह्मीपुत्रः सुकृतकृन् मोचये देनसः पितृन्।।

अर्थात, ‘ब्राह्मविवाह’ से उत्पन्न पुत्र अपने कुल की 21 पीढ़ियों को पाप से मुक्त करता है- 10 अपने आगे की, 10 अपने से पीछे और एक स्वयं अपनी। भविष्य पुराण में लिखा है कि जो किसी लड़की से ब्राह्मविधि से विवाह करते हैं, वे निश्चय ही अपने सात पूर्वजों और सात वंशजों को नरक में जाने से बचा लेते हैं।

‘शबाब मिलता है’: मैनेजर जहीर ने HDFC बैंक में कराया नमाज और रोजा-इफ्तारी, सपा नेता ओसामा भी हुए शामिल, बोले हिन्दू संगठन – ‘गजवा-ए-हिन्द’

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एक बैंक के अंदर नमाज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो HDFC बैंक की शहर शाखा का बताया जा रहा है। बाद में बैंक के ही अंदर रोज़ा-इफ्तारी का कार्यक्रम करवाया गया। इफ्तारी कार्यक्रम करवाने वाले ब्रांच मैनेजर का नाम ज़हीर अब्बास है। यह आयोजन शुक्रवार (22 अप्रैल, 2022) को हुआ था। हिन्दू संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की माँग की है।

रोज़ा इफ्तारी के आयोजकों में डिप्टी मैनेजर अनवर रिज़वी भी

एक स्थानीय पोर्टल के मुताबिक, इस आयोजन में बैंक के मुस्लिम खाताधारकों को बुलवाया गया था। नमाज़ बैंक के काउंटर के आगे हुई। इफ्तारी के लिए पूरी तैयारी की गई थी। खाने में बिरयानी का इंतज़ाम था। बैंक स्टाफ ने खाने के साथ रोज़ेदारों के लिए उपहार भी दिए। इस दौरान सभासद मुजीब अंसारी, सपा नेता ओसामा अंसारी के अलावा बैंक की तरफ से ब्रांच मैनेजर जहीर अब्बास, डिप्टी ब्रांच मैनेजर अनवर रिजवी और अब्दुल अंसारी शामिल हुए।

बैंक काउंटर पर नमाज़

“इफ्तारी अच्छी चीज”: ब्रांच मैनेजर जहीर अब्बास

बैंक के ब्रांच मैनेजर जहीर अब्बास ने इस इफ्तारी के बाद बयान दिया, “यह हर साल होता था। 2 साल से कोविड के चक्कर में हम ये करा नहीं पा रहे थे। ये लोगों से कनेक्ट करने के लिए अच्छा है। हम लोगों के इस्लाम मजहब में रोजा इफ्तारी एक अच्छी चीज होती है। रोज़ा इफ्तारी करवाने से शबाब (पुण्य) मिलता है।”

बजरंग दल ने उठाई कार्रवाई की माँग

बाराबंकी से बजरंग दल के प्रान्त विद्यार्थी प्रमुख अखिलेश सिंह ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया, “बैंक परिसर में नमाज़ के आरोपितों के खिलाफ हम प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की माँग करते हैं। ये अनजाने में नहीं किया गया है, बल्कि इसके पीछे गज़वा-ए-हिन्द की सोच है।” बजरंग दल के ही अवध प्रान्त संयोजक सुनील सिंह ने कहा, “आज बैंक ने नमाज़ पढ़ी गई गई। कल कहीं और पढ़ी जाएगी। प्रशासन इन सभी पर कार्रवाई करे।’

“प्रशासनिक कार्रवाई की जरूरत नहीं” : बाराबंकी जिला प्रशासन

पुलिस अधीक्षक बाराबंकी के PRO (जनसम्पर्क अधिकरी) ने ऑपइंडिया को बताया, “घटना लगभग 4 दिन पुरानी है। बैंक के अंदर नमाज का प्रकरण हमारे संज्ञान में आया था। लेकिन, इस मामले में पुलिस के हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं थी।” जबकि DM बाराबंकी ने कहा, “मामला बैंक के अंदर का था। कार्रवाई आदि उनका आंतरिक विषय है। हम लोगों की जानकारी में ये प्रकरण कल ही आया है। अभी तक हमारी तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।”

ऑपइंडिया ने इस पूरे प्रकरण पर ब्रांच मैनेजर ज़हीर अब्बास का पक्ष जानने के लिए उनके नंबर पर फोन मिलाया, लेकिन ज़हीर का फोन उठा नहीं।

‘तेज प्रताप यादव ने कमरे में ले जाकर नंगा कर के पीटा, भाई तेजस्वी को भी जम कर दी गालियाँ’: RJD महानगर अध्यक्ष

आए दिन अपनी हरकतों को लेकर चर्चा में बने रहने वाले लालू के लाल तेज प्रताप यादव नए कारणों के कारण चर्चा में हैं। इस बार उन पर अपनी ही पार्टी के महानगर अध्यक्ष रामराज यादव को कमरे में बंद कर और नंगा कर बुरी तरह से पीटने का आरोप लगा है। रामराज यादव का आरोप है कि वो तेजस्वी यादव के खेमे का समर्थन करते हैं, इसलिए तेज प्रताप यादव ने उन्हें नंगा कर पीटा।

रिपोर्ट के मुताबिक, बताया जाता है कि ये घटना 22 अप्रैल 2022 को घटी। उस दिन पटना में राबड़ी देवी के आवास में इफ्तार पार्टी आयोजित की गई थी। उसी दौरान तेज प्रताप यादव ने उन्हें कमरे में बंद कर पीटा। रामराज के मुताबिक, तेज प्रताप ने तेजस्वी यादव और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह को भी भद्दी-भद्दी गालियाँ दीं। रामराज ने कहा, “इफ्तार पार्टी के दिन मुझे पार्टी के द्वारा 3 नंबर पंडाल की जिम्मेदारी दी गई थी। उस दिन करीब 3 जब मैं 10 नंबर पंडाल पर अपने महानगर के पदाधिकारियों को ड्यूटी पर लगा रहा था तो तेज प्रताप यादव मुझे कमरे में लेकर गए। उसके बाद जो सुलूक मेरे साथ किया गया, उससे आज भी मेरा रोया खड़ा हो जाता है…मुझे धमकी दी गई तो आरजेडी छोड़ दो, अन्यथा 10 दिन में तुम्हें गोली मरवा देंगे।”

रामराज ने आगे कहा, “तेज प्रताप यादव ने एक खास अपराधी से गोली मरवाने की धमकी दी। मैंने उन्हें कहा कि 10 दिन के बजाय मुझे 10 मिनट में मुझे गोली मरवा दीजिए। उसके बाद मुझे कमरे में बंद कर 10 सर्कुलर रोड पर मारा गया। तेज प्रताप ने लालू यादव, तेजस्वी यादव और जगदानंद के बारे में अपशब्द बोला। उन्होंने मुझे बताया कि आरजेडी में होना ही तेरी सबसे बड़ी गलती है।”

आरजेडी नेता ने अपनी व्यथा बताई और पूछा कि आखिर उन्होंने क्या गलती की थी कि उनके माँ-बहन को गाली दी और उन्हें पीटा। आखिर 18 मिनट के अंदर 500 गालियाँ क्यों दी गईं? बहरहाल, रामराज ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

अनिल सम्राट से भी मारपीट

‘हिंदुस्तानी आवामी पार्टी’ के प्रवक्ता दानिश रिजवान के मुताबिक, 22 अप्रैल को तेज प्रताप यादव ने दो नेताओं के साथ मारपीट की थी। उन्होंने भोजपुर से आरजेडी के उम्मीदवार रहे अनिल सम्राट से भी मारपीट की थी।

तेज प्रताप ने आरोपों से किया इनकार

हालाँकि, रामराज के आरोपों को सिरे से नकार दिया है। उनका दावा है कि ये सब जगदानंद सिंह और सुनील सिंह के इशारे पर किया जा रहा है।

‘नीची जाति वाला कहा, गाली बकी, पानी तक न दिया’: नवनीत राणा का महाराष्ट्र पुलिस पर भेदभाव का आरोप, लोकसभा स्पीकर को पत्र

मुंबई में हनुमान चालीसा को लेकर हुए बवाल के बाद गिरफ्तार अमरावती की निर्दलीय सांसद नवनीत राणा ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा। पत्र में सांसद ने 23 अप्रैल, 2022 को खार पुलिस स्टेशन में जातिगत भेदभाव और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया।

नवनीत राणा ने यह भी कहा कि उनका दृढ़ विश्वास है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना हिंदुत्व सिद्धांतों से पूरी तरह से भटक गई है, क्योंकि वह जनादेश को धोखा देना चाहती थी और कॉन्ग्रेस-एनसीपी के साथ चुनाव के बाद गठबंधन करना चाहती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ठाकरे ने हिंदुत्व के सिद्धांतों को धोखा दिया है।

राणा ने जोर देकर कहा, “मैंने शिवसेना में हिंदुत्व की लौ को फिर से जगाने की सच्ची आशा के साथ घोषणा की थी कि मैं मुख्यमंत्री के आवास पर जाऊँगी और उनके आवास के बाहर हनुमान चालीसा का जाप करूँगी। यह किसी धार्मिक तनाव को भड़काने के लिए नहीं था।”

अमरावती सांसद ने कहा कि वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को अपने और अपने पति रवि राणा के साथ ‘हनुमान चालीसा’ का जाप करने के लिए आमंत्रित करना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि उनकी कार्रवाई सीएम के खिलाफ नहीं थी।

यह महसूस करने के बाद कि उनकी कार्रवाई से कानून-व्यवस्था में बाधा पैदा हो सकती है, नवनीत राणा ने अपनी योजना वापस ले ली। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें उनके घर में कैद कर लिया। उन्होंने पुलिस हिरासत में अपने साथ हुए जातिवादी व्यवहार के बारे में बताया।

नवनीत राणा ने चिट्ठी में लिखा, “मुझे 23 तारीख को पुलिस स्टेशन ले जाया गया। 23 अप्रैल को मुझे पूरी रात पुलिस स्टेशन में ही गुजारनी पड़ी। रात को मैंने कई बार पीने के लिए पानी माँगा, लेकिन रातभर मुझे पानी नहीं दिया गया।” नवनीत ने आगे बड़ा आरोप लगाते हुए कहा, “मौके पर मौजूद पुलिस स्टाफ ने कहा कि मैं अनुसूचित जाति की हूँ, इसलिए वह मुझे उसी ग्लास में पानी नहीं दे सकते, जिसमें वे लोग पीते हैं। मतलब मुझे मेरी जाति की वजह से पीने के लिए पानी तक नहीं दिया गया। मैं यह जोर देकर कहना चाहती हूँ कि मेरी जाति की वजह से मुझे बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित रखा गया।”

उसने दावा किया कि पुलिस ने उसे पानी देने से इनकार कर दिया क्योंकि वह SC समुदाय से थी। राणा ने कहा, “इसके अलावा, जब मुझे रात में बाथरूम जाना था तो पुलिस कर्मचारियों ने मेरी माँगों पर ध्यान नहीं दिया। कहा गया कि नीची जात वालों को वे (पुलिस स्टाफ) अपना बाथरूम इस्तेमाल नहीं करने देते हैं। मुझे फिर से गंदी भाषा में गाली दी गई।” वह वर्तमान में भायखला महिला जेल में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में है।

हनुमान चालीसा विवाद

सांसद नवनीत राणा और उनके पति विधायक रवि राणा को पहले मुंबई पुलिस ने सीएम उद्धव ठाकरे के आवास मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने की योजना बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। हालाँकि बाद में उन्होंने अपनी योजना वापस ले ली थी, लेकिन दोनों को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया था। उन पर देशद्रोह का भी आरोप लगाया गया।

‘मस्जिद के सामने नहीं की कोई नारेबाजी, राज्य अपने आँख-कान बंद न करे’: मुंबई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फटकारा, 3 लोगों को दी जमानत

मुंबई की एक अदालत ने हाल में उन तीन लोगों को जमानत दी जिन्हें कुछ दिन पहले ये आरोप लगा कर पकड़ा गया था कि उन्होंने मस्जिद के बाहर ढोल बजाया। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए माना कि अजान के दौरान किसी प्रकार की नारेबाजी नहीं हुई थी इसलिए आरोप लगा कर उन लोगों से पूछताछ करने की कोई जरूरत नहीं है।

लाइव लॉ के मुताबिक, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एसयू बघेले ने कहा, “यह सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है कि विभिन्न समुदायों के बीच आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए कौन से कदम उठाए जाएँ। राज्य को अपनी आँखें और कान बंद नहीं करने चाहिए, जिससे कोई भी निर्दोष व्यक्ति अपमानित हो। भारत का संविधान कहता है कि आपसी भाईचारे को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।”

पुलिस के अनुसार, “एक समुदाय द्वारा धार्मिक जुलूस का आयोजन किया गया था। आवेदक और अन्य इस धार्मिक जुलूस का हिस्सा थे। उन पर यह आरोप लगाया गया है उन्होंने अन्य समुदाय के लोगों को परेशान करने के लिए जानबूझकर अज़ान के समय मस्जिद के सामने ढोल बजाया। यही नहीं धार्मिक जुलूस निकालने वालों पर दंगा भड़काने और उकसाने का आरोप भी लगाया गया है। राज्य ने इस मामले में जाँच के आदेश दिए थे और यह पता लगाने को कहा था कि कि क्या यह अपराध पूर्व नियोजित था। इसके लिए उन लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था।”

अदालत ने कहा, “इन आरोपों को देखते हुए हम कह सकते हैं कि आवेदकों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। आवेदकों से पूछताछ करके इस समस्या का कोई हल नहीं निकलने वाला।” अदालत ने यह भी कहा कि एक समुदाय ने दूसरे समुदाय के खिलाफ कोई नारा नहीं लगाया, ऐसे में दो समुदायों के बीच किसी भी प्रकार की कोई नफरत और द्वेष पैदा नहीं हुआ। इन सबको को देखते हुए हमने निर्णय लिया है कि आवेदक अग्रिम जमानत के हकदार हैं।

इसके साथ ही कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा, “राज्य को किसी भी घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि सामंजस्य बन सकें। इसे विवेकपूर्ण तरीके से हल करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि दो समुदायों में धार्मिक आस्था को लेकर किसी भी प्रकार की नफरत पैदा ना हो सके। संविधान में भी आपसी भाईचारे को बढ़ावा देना सर्वोपरि माना गया है।”

सरकार कर देगी बहुविवाह को अवैध, मुस्लिम पुरुष जल्द करें दूसरा निकाह: जामिया हमदर्द की ट्रांसजेंडर प्रोफेसर डॉ अक्सा शेख

सोशल मीडिया के जरिए समुदाय विशेष के अंदर सरकार और कानून के खिलाफ नफरत भरने का काम इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा सरेआम किया जाता रहा है। इसका सबसे ताजा उदाहरण जामिया हमदर्द की प्रोफेसर डॉ अक्सा शेख के ट्वीट हैं। अपने थ्रेड में अक्सा ने समझाया है कि कैसे देश में फैले इस्लामोफोबिया से निपटने का एक मात्र तरीका है कि सिंगल लोग जल्द से जल्द निकाह करें और जिन पुरुषों का निकाह हो गया है वो बहुविवाह करें।

डॉ अक्सा का मानना है कि मुस्लिम पुरुषों को दूसरी शादियाँ कर लेनी चाहिए इससे पहले कि बहुविवाह को सरकार अवैध घोषित कर दे। अपने सिलसिलेवार ट्विट्स में उन्होंने समझाया है कि कैसे आए दिन मुस्लिमों पर हमले हो रहे हैं। इसलिए अंतरधार्मिक विवाह जैसी चीज नहीं करनी चाहिए। हालाँकि, अंत में वह लिखती हैं कि बहुविवाह भारत में अब भी मुस्लिमों के लिए वैध है। मगर ये ज्यादा समय नहीं रहेगा इसलिए मुस्लिम पुरुषों को जल्द से जल्द इसे करना चाहिए।

अपने ट्वीट में अक्सा लिखती हैं, “प्रिय मुस्लिमों। निकाह कर लो। ठीक है, ये आपको थोड़ा विवादित सुनाई पड़ रहा है, लेकिन मुझे ये कहना पड़ रहा है। यही सही समय है। आज चाहे आप गाँव में हों या दिल्ली में, सरकारी नौकरी में हों या दिहाड़ी मजदूर, भारत भर में इस्लामोफोबिया फैल रहा है…कोई अकेला दिन नहीं जाता जब हम पर नए तरीकों से हमले न होते हों। हर घर में बात होती है-इन सबसे कैसे निपटा जाए। समुदाय के तौर पर हमें अपनी सुरक्षा और कल्याण के लिए बहुत उपाय करने की आवश्यता है। मैं इन्हें लिख रही हूँ।”

अपने ट्वीट में वह लिखती हैं, “सबसे पहले करो शादी। हाँ! मैं हर मुस्लिम से कहती हूँ कि अगर वो तैयार हैं तो वो निकाह करें। इससे उनमें जिम्मेदारी, अपनेपन और देखभाल की भावना आएगी। इसके अलावा निकाह बहुत सादे तौर पर करें। इसमें ज्यादा खर्चा न करें। आपको ये जमापूँजी भविष्य के मुश्किल समय में काम आएगी जो कि जल्द ही हमारा भविष्य हो सकती है। ज्यादा घमंडी या चुगलखोर मत बनो और उन मानदंडों को देखो जो मायने रखते हैं, फिर अपने लिए एक व्यक्ति चुनो।

वह लिखती हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वो ये सारी बातें करेंगी मगर परिस्थिति इतनी विकट है कि मुश्किल राय बनानी पड़ेगी। किसी भी अंतरधार्मिक रिश्तों के चक्कर में न पड़ें। इसे लेकर बहुत बवाल होता है। खासकर तब जब इसमें मुस्लिम आदमी शामिल हों। परिणामस्वरूप अगर आप इसमें जिंदा बचे तो आपको और आपके परिवार को शोषण झेलना होगा। कुछ समय जेल में बीतेगा। इसलिए इस फैसले को लेने से पहले सोचें।

मुस्लिमों को तीन तलाक, दहेज, बहुविवाह पर सलाह

इसके साथ अक्सा मुस्लिमों को सलाह देती हैं कि वह लोग तीन तलाक देने की कोशिश भी न करें। जो लोग इसे वैध नहीं मानते हैं वो उन्हें जेल में डाल सकते हैं। इसी तरह दहेज भी इस्लाम में हराम है। अपना मेहर दें और गैर मुस्लिमों के साथ रिश्ते में न फँसे। कई अकॉउंट हनी ट्रैप में फँसाए जाने के लिए बनते हैं, जिनसे पैसा वसूली, धमकी और शोषण को अंजाम दिया जाता है। हमारे पास कुछ अच्छी चीजें हैं करने को। अक्सा शेख लिखती हैं, “बहुविवाह भारत में मुस्लिमों के लिए अब भी वैध है।  लेकिन ये ज्यादा समय नहीं रहेगा। अगर आप मुस्लिम पुरुष हैं जो अपने बीवी से दूसरी शादी पर बात करें और हो सके तो किसी विधवा, तलाकशुदा या ट्रांसजेंडर महिला से निकाह करें।” 

मेडिकल पढ़ाई से भी डॉ अक्सा को दिक्कत

गौरतलब है कि अक्सा शेख खुद एक ट्रांसवुमन हैं और जामिया हमदर्द इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइसेज में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं। अपने पुराने ट्वीट में अक्सा ने मेडिकल पाठ्यक्रम पर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि इसमें बहुत ज्यादा एनाटॉमी और बायोकेमेस्ट्री पढ़ाया जाता है। उन्होंने बयान में कहा था कि सेक्सुअल और जेंडर माइनॉरिटी के बारे में टेक्स्टबुक से ज्यादा इंस्टाग्राम पर पढ़ाया जाता है।

असम पुलिस ने अलकायदा के बड़े मॉड्यूल को तबाह किया, अब तक 16 आतंकी गिरफ्तार: CM सरमा ने की सराहना

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार (25 अप्रैल 2022 ) को बांग्लादेश के आतंकवादी समूह अंसार-उल बांग्ला टीम (ABT) के कई मॉड्यूल पर नकेल कसने के लिए असम पुलिस की सराहना की। उन्होंने ट्विटर पर बताया कि असम पुलिस ने अब तक संगठन से कुल 16 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है।

बता दें कि ABT एक इस्लामी आतंकी संगठन है, जिसका भारतीय उपमहाद्वीप (AQIS) में अल कायदा से संबंध है। हालाँकि यह 2007 में बांग्लादेश में जमातुल मुस्लेमिन के रूप में उभरा, लेकिन समूह ने 2013 में खुद को एबीटी के रूप में पेश किया।

सीएम ने ट्वीट किया, “लंबे समय से चले आ रहे ऑपरेशन में असम पुलिस ने अंसारुल बांग्ला टीम/अल-कायदा भारतीय उपमहाद्वीप के कई मॉड्यूल पर कार्रवाई की है। यह एक बड़ी खुफिया सफलता है और असम पुलिस के साहस और समर्पण का एक सच्चा उदाहरण है। अब तक कुल 16 गिरफ्तारियाँ हुई हैं।”

18 अप्रैल को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने विश्वास जताते हुए कहा था कि उनके राज्य में जिहादी नेटवर्क समाप्त हो जाएगा। सरमा ने कहा था, “जिहादियों के बारे में जानकारी मिली है और हम इस पर काम कर रहे हैं। हमें केंद्र से खुफिया जानकारी मिल रही है। जिहादी नेटवर्क को खत्म कर दिया जाएगा।”

उल्लेखनीय है कि 15 अप्रैल को असम के बारपेटा जिले में पुलिस ने अल कायदा से जुड़े बांग्लादेश स्थित आतंकवादी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) से जुड़े छह लोगों को गिरफ्तार किया। सभी छह पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये सभी असम के बारपेटा जिले के निवासी हैं।

बारपेटा में इस तरह की यह पहली गिरफ्तारी नहीं है। मार्च में, जिले के अधिकारियों ने सैफुल इस्लाम (जिसे मोहम्मद सुमन और हारुन राशिद के नाम से भी जाना जाता है) नामक एक बांग्लादेशी नागरिक और ABT से संबंध रखने वाले चार अन्य लोगों को हिरासत में लिया था।

मार्च में गिरफ्तारी के बाद, मामला राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को स्थानांतरित कर दिया गया था। NIA ने कार्यभार सँभालने के बाद सैफुल इस्लाम और चार अन्य के खिलाफ धारा 120 बी, 121, 121 ए, धारा 17, 18, 18 बी, 19, 20 और पासपोर्ट अधिनियम की धाराएँ, विदेशियों के लिए भारत में अवैध प्रवेश और पासपोर्ट नहीं दिखाने के आरोप के तहत FIR दर्ज की थी।

जाँच के दौरान पता चला कि बांग्लादेशी नागरिक सैफुल इस्लाम ने अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था और बारपेटा में ढकलीपारा मस्जिद में अरबी भाषा के शिक्षक के रूप में काम कर रहा था। अधिकारियों के मुताबिक, इस्लाम ने बारपेटा को ‘जेहादी’ काम और अल-कायदा और उससे जुड़े संगठनों की अवैध गतिविधियों के बेस के रूप में विकसित करने का लक्ष्य दिखाकर चार अन्य लोगों को ABT मॉड्यूल में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। 

एसपी अमिताभ सिन्हा ने कहा, “वे यहाँ लोगों को बहका रहे हैं और कट्टर बना रहे हैं।” उन्होंने कहा कि उनमें से एक कुख्यात इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का हिस्सा था, जिस पर केंद्र सरकार जल्द ही किसी भी समय प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है।

72 दिन से दरभंगा से गायब है 14 साल की बच्ची, पीड़ित परिवार की गुहार अनसुनी: पुलिस का गजब लॉजिक, कहा- फोन बंद आ रहे इसलिए खोजने में हो रही देरी

बिहार के दरभंगा जिले से 14 साल की एक बच्ची फरवरी से ही गायब है। पीड़ित परिवार सोशल मीडिया से लेकर हर जगह गुहार लगा रहा है, लेकिन पुलिस के हाथ 72 दिन बाद भी खाली हैं। पीड़ित परिवार ने इस संबंध में नामजद मामला दर्ज करवाया है। उनका दावा है कि उन्हें आरोपितों की ओर से लगातार धमकी दी जा रही है। इतना ही नहीं उन्होंने पुलिस पर भी एक आरोपित को पकड़कर छोड़ने का आरोप लगाया है। हालाँकि पुलिस ने इस दावे को नकार दिया है।

इस संबंध में 13 फरवरी 2022 को लड़की को अगवा करने की शिकायत दर्ज हुई थी। पीड़ित पक्ष ने 4 लोगों को नामजद किया है।

नाना के घर से अपहरण

जानकारी के मुताबिक मुख्य आरोपित और लड़की दोनों नाबालिग हैं। दोनों मधुबनी जिले के रहने वाले हैं। पीड़िता घोघरडीहा थाना क्षेत्र की रहने वाली है, जबकि आरोपित फुलपरास थान क्षेत्र से है। पीड़ित पिता द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, “मेरी 14 साल की नाबालिग बेटी अपने नाना के घर दरभंगा के घनश्यामपुर थानक्षेत्र में गई थी। यहीं से 13 फरवरी 2022 को उसका अपहरण कौशलेन्द्र कुमार उनके 2 बेटों और पत्नी सावित्री देवी ने कर लिया। उस दिन सभी पुरुष बाहर थे। घर में मेरी बेटी के अलावा 2 महिलाएँ थीं। अचानक ही आरोपित अपनी कार स्विफ्ट डिजायर से आए और मेरी बेटी को जबरन साथ ले गए।” शिकायत पर पुलिस ने चारों आरोपितों के खिलाफ 366 (A) / 34 IPC के साथ पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर लिया। पीड़ित पिता का कहना है कि अपहरण से 1 दिन पहले लड़के के पिता उनके घर आए थे और उनकी बेटी की शादी अपने बेटे से कराने की धमकी दी थी।

पीड़ित परिवार को मिल रही हैं धमकियाँ

पीड़ित पिता का आरोप है कि पुलिस ने उनकी बेटी को खोजने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए हैं। पीड़िता के भाई ने ऑपइंडिया को बताया, “अपहरण के बाद 19 अप्रैल 2022 (मंगलवार) को सुबह 11.40 और शाम 6 बजे अनजान नम्बरों से मेरे पिता को धमकी भरे फोन आए। इन धमकियों की शिकायत हमने स्थानीय थाने में की है।”

धमकियों की शिकायत कॉपी

फोन बंद आ रहे, इसलिए खोजने में हो रही देरी: पुलिस

इस केस के जाँच अधिकारी सब इंस्पेक्टर अरुण कुमार झा ने ऑपइंडिया को बताया, “लड़की की तलाश में कई जगह छापेमारी कर चुके हैं। आरोपित और लड़की दोनों के फोन बंद आ रहे हैं इसलिए खोजने में देर लग रही है। आरोपितों के कई रिश्तेदारों के ठिकानों पर भी पुलिस बल जा चुका है। आरोपित के घर पर सिर्फ कुछ बुजुर्ग मिलते हैं, जिनसे कई बार पूछताछ की जा चुकी है। पीड़ित परिवार को धमकियाँ मिलने पर हमने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज करने को कहा था। इस केस में सभी 4 आरोपित फरार हैं। उच्चाधिकारियों से निर्देश हैं कि लड़की के बरामद होने के बाद उसके बयान के आधार पर ही आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई हो। किसी को पकड़ कर छोड़ दिए जाने की बात गलत है।’