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‘शिक्षकों के साथ ये सलूक’: हाई कोर्ट ने ‘पैसों की कमी’ पर केजरीवाल सरकार को फटकारा, दिल्ली के स्कूल टीचर्स की सैलरी से जुड़ा है मामला

दिल्ली के सरकारी स्कूल केवल हेडमास्टर विहीन ही नहीं हैं। शिक्षकों के सामने वेतन का भी संकट है। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई है। अदालत ने बुधवार (13 अप्रैल 2022) को कहा कि शिक्षक देश के भविष्य का निर्माण करते हैं। उनके साथ इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए।

मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा कि पैसों की कमी के कारण शिक्षकों को वेतन नहीं दिए जाने की दलील इस मामले में नहीं चल सकती। बता दें कि अदालत शिक्षकों की ओर से दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इनमें शिक्षकों ने छठे और सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन का भुगतान न करने की शिकायत की है। अदालत ने शिक्षा निदेशालय व दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील से कहा कि शिक्षकों के साथ इस तरह का सलूक कैसे किया जा सकता है? वे देश के भविष्य का निर्माण करते हैं। शिक्षकों को वेतन देने के अदालत के आदेश की पूरी तरह अवहेलना हो रही है। उन्हें मुकदमा दायर करने के लिए मजबूर किया जाता है और फिर उन्हें सुप्रीम कोर्ट में घसीटा जाता है।

मामले में अंतिम सुनवाई सोमवार (18 अप्रैल 2022) को होगी। इस दिन दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय को उन सभी शिक्षकों की सूची पेश करना होगा, जिनके वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि वह यह बयान नहीं सुनना चाहती कि वह लागू कर रहे हैं। कोर्ट में दिल्ली सरकार का जवाब यह होना चाहिए कि उन्होंने लागू कर दिया है।  

गौरतलब है कि इससे पहले राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल के 824 रिक्त पदों पर केजरीवाल सरकार से स्पष्टीकरण माँगा था। दरअसल NCPCR ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों का दौरा करते हुए पाया कि NCT सरकार के शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले 1027 स्कूलों में से केवल 203 में हेड मास्टर या कार्यवाहक हेड मास्टर हैं। बाकी स्कूलों में हेडमास्टर का पद खाली है। NCPCR ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव विजय देव से ऐसे पदों की रिक्तियों और शिक्षा विभाग द्वारा 19 अप्रैल तक की गई कार्रवाई के बारे में तथ्यात्मक स्थिति शेयर करने के लिए कहा है। पत्र में शीर्ष बाल अधिकार निकाय ने कहा है कि अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो के नेतृत्व में एक टीम ने राष्ट्रीय राजधानी के कई स्कूलों का दौरा किया और बुनियादी ढाँचे एवं अन्य पहलुओं के संबंध में खामियाँ पाईं।

लात-घूँसे मारे, गाउन में घसीटा, शराब की बोतल घुसेड़ी… जॉनी डेप ने एम्बर हर्ड के साथ क्या-क्या किया, वकील ने कोर्ट को बताया: एलन मस्क की हो सकती है गवाही

हॉलीवुड स्टार जॉनी डेप (Johnny Depp) और एम्बर हर्ड (Amber Heard) कभी पति-पत्नी थे। फिलहाल कोर्ट में आमने-सामने हैं। वर्जीनिया के फेयरफैक्स काउंटी कोर्ट में इनसे संबंधित मानहानि का मुकदमा चल रहा है। मंगलवार (12 अप्रैल, 2022) को सुनवाई के दौरान हर्ड के वकील ने जॉनी डेप पर गंभीर आरोप लगाए। इसके मुताबिक डेप ने हर्ड का बुरी तरह से यौन उत्पीड़न किया।

कोर्ट को बताया गया कि डेप नशीली दवाओं और शराब के नशे में शारीरिक और यौन शोषण करते थे। इस दौरान वह ‘राक्षस’ बन जाते थे। वकील के अनुसार 2015 में डेप ने हर्ड को तीन दिनों तक बंधक बनाकर रखा था। इस दौरान उनको जमीन पर पटका। लात-घूँसों से मारा। उनके प्राइवेट पार्ट में शराब की बोतल घुसेड़ दी थी। एक के बाद एक कई बोतलें उनके ऊपर फेंकी और फिर फर्श पर टूटे हुए बोतलों पर उन्हें घसीटा भी था। इसी तरह 2016 में ऑस्ट्रेलिया में डेप ने मारपीट के बाद नाइटगाउन में हर्ड को फर्श पर घसीटा था।

हालाँकि डेप के वकीलों ने इन आरोपों के झूठा बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के आरोप डेप के हॉलीवुड करियर को बर्बाद करने के लिए लगाया जा रहा है। बता दें कि यह केस हर्ड द्वारा वाशिंगटन पोस्ट में एक कॉलम लिखने के बाद शुरू हुआ था। 2018 में हर्ड ने जॉनी डेप का नाम लिए बिना घरेलू हिंसा पर लेख लिखा था। इसका टाइटल था- Public figure representing domestic abuse। इसके बाद डेप ने फेयरफैक्स काउंटी सर्किट कोर्ट में पूर्व पत्नी पर मानहानि का केस कर दिया। इसके जवाब में हर्ड ने भी मुकदमा दर्ज करवाया।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान जॉनी डेप और हर्ड दोनों ही कोर्ट में मौजूद थे। कोर्ट में डेप ने कहा कि 2016 में हर्ड द्वारा उन पर लगाए गए घरेलू हिंसा के आरोपों के संदर्भ में यह लेख लिखा गया था। जो परोक्ष रूप से उनकी छवि को खराब करता है। इसके साथ ही उन्होंने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि उन्होंने हर्ड को गाली दी थी। जानकारी के मुताबिक मामले में टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क का भी नाम जुड़ गया है। बताया जा रहा है कि उन्हें भी गवाही देने के लिए बुलाया जा सकता है। डेप ने मामले में एलन मस्क का नाम घसीटा है। उनका आरोप है कि मस्क का उनकी पूर्व पत्नी के साथ अफेयर है।

बता दें कि साल 2011 में एक फिल्म (द रम डायरी) के सेट पर डेप और हर्ड की मुलाकात हुई थी। तब वे एक फ्रेंच एक्ट्रेस के साथ रिलेशनशिप में भी थे, जो पहले से ही दो बच्चों की माँ थीं। साल 2015 में डेप और हर्ड ने काफी धूम-धाम से शादी रचाई थी और साल 2017 में दोनों का तलाक हो गया था।

तोड़ती ही नहीं, जोड़ती भी है UP पुलिस: अलग-अलग रह रहे थे बुजुर्ग दंपती, थाने में करवाई सुलह; एक-दूसरे को मिठाई खिलाते Video वायरल

क्राइम को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति रखने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस का अपराधियों के बीच कैसा खौफ है, इससे हम सब परिचित हैं। इस पुलिस का एक दूसरा चेहरा भी है जो आम लोगों के साथ उसके व्यवहार में झलकता है। हालाँकि इसकी चर्चा मीडिया में कम ही होती है। अब एक वीडियो वायरल हुआ है जो यूपी की गोंडा पुलिस का यही चेहरा दिखाती है।

दरअसल, UP के गोंडा जिले के एक बुजुर्ग दम्पति की थाने में एक-दूसरे को मिठाई खिलाते वीडियो वायरल हो रही है। दोनों के बीच विवाद चल रहा था। इसके कारण कुछ समय से दोनों अलग रह रहे थे। यह मामला थाने पहुँचा तो पुलिसकर्मियौं ने दोनों को समझा-बुझाकर गिले-शिकवे दूर करवाए। आखिरकार इस पूरे मामले का एक सुखद पटाक्षेप हुआ। मामला 11 अप्रैल (सोमवार) का है। इस वीडियो को UP पुलिस के स्टाफ सचिन कौशिक ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है।

सचिन ने लिखा है, “दादा-दादी का झगड़ा हुआ और थाने तक पहुँच गया, अब समझौता देखिए।” गोंडा पुलिस के मुताबिक यह मामला कटराबाजार थाने के गाँव लोनियनपुरवा का है। बुजुर्ग का नाम शिवनाथ और उनकी पत्नी का नाम जनका देवी है। दोनों की उम्र लगभग 75 वर्ष है। आपसी झगड़े के चलते दोनों अलग-अलग रहते थे। इस बात की सूचना पुलिस को हुई तो उन्होंने दोनों को थाने बुलाया।

जब दोनों थाने आए तो उन्हें पुलिसकर्मियों द्वारा समझाया-बुझाया गया। कुछ समय के प्रयास के बाद दोनों में आपसी सहमति बन गई। फिर थाने पर मिठाई मँगाई गई और दोनों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई। बाद में दोनों ख़ुशी-ख़ुशी घर गए। पुलिस के इस कार्य की काफी तारीफ हो रही है।

गोंडा पुलिस के SP IPS संतोष मिश्रा द्वारा भी यह वीडियो शेयर किया है है। इस वीडियो पर वोकल फॉर लोकल नाम के हैंडल ने कहा, “पुलिस का चेहरा मानवीय होना चाहिए। फिर देखना जैसे सेना का लोग सम्मान करते हैं वैसे ही पुलिस का भी सम्मान लोग खुद करेंगे।”

जब सिक्किम की 97.5% जनता ने भारत को चुना: कैसे अंत हुआ चोग्याल राजा और उसकी रहस्यमयी पत्नी के शासन का

वो अप्रैल 14, 1975 का दिन था, जब सिक्किम ने एकमत से राजतन्त्र को हटाने के लिए मतदान किया। रिफ़रेंडम हुआ और सिक्किम की 97.55% जनता ने मिल कर इसे भारतीय गणराज्य का हिस्सा बनाने के लिए वोट दिया। कुल 97,000 लोगों ने इस मतदान की प्रक्रिया में हिस्सा लिया था, जो कुल 63% वोटर टर्नआउट था। उस समय चोग्याल वंश का सिक्किम पर शासन था और चीन हिमालय पर बसे इस राज्य को हथियाने की फ़िराक़ में था। पाल्डेन थोंडुप नामग्याल तब सिक्किम का राजा था। वो गंगटोक स्थित महल में ही भारतीय सेना से घिरा हुआ था। उसकी पत्नी तब 2 बच्चों के साथ न्यूयॉर्क में रहती थी।

51 वर्षीय नामग्याल की पत्नी होप कुक अमेरिकन थी और और उन्होंने उस वक़्त इस मतसंग्रह को अवैध और असंवैधानिक करार दिया था। लेकिन, वही हुआ जो सिक्किम की जनता की इच्छा थी। काजी लेन्डुप दोरजी तक सिक्किम के मुख्यमंत्री थे और उन्होंने भारतीय गणराज्य का पक्ष लिया था। उन्होंने केबलग्राम से वोटिंग का परिणाम तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी तक भिजवाया। उन्होंने गाँधी से आग्रह किया कि वो तुरंत जनता की इच्छानुसार निर्णय लें और जनमत को स्वीकार करें।

हालाँकि, तब चीन ने ज़रूर ये आरोप लगाए थे कि भारत जबरदस्ती सिक्किम पर कब्जा कर रहा है। लेकिन, इंदिरा गाँधी ने ये याद दिलाने में देरी नहीं की कि चीन ने किस तरह तिब्बत पर जबरदस्ती कब्ज़ा किया था और साथ ही ये भी बता दिया कि भारत सरकार वही कर रही है, जैसा सिक्किम की जनता ने निर्णय दिया है। इस मतसंग्रह से 2 साल पहले ही नामग्याल के ख़िलाफ़ लोगों ने आंदोलन चलाया था, जिसके बाद वो नाम का राजा रह गया था। उसकी 400 सदस्यीय फ़ौज को भारतीय सेना ने निःशस्त्र कर दिया था, ताकि कोई हिंसा नहीं हो। हालाँकि, ये आरोप ग़लत हैं कि नामग्याल को सेना ने नज़रबंद किया था।

तब स्थिति ही ऐसी बन गई थी कि वहाँ हिंसा भी हो सकती थी और नामग्याल की सुरक्षा के लिए ही भारतीय सेना ने उसके महल के चारों ओर डेरा डाला था। उसका कहना था कि अगर रेफेरेंडम होता भी है तो किसी ‘स्वतंत्र एजेंसी’ द्वारा होना चाहिए, सिक्किम के प्रशासन अथवा भारतीय चुनाव आयोग द्वारा नहीं। चीन आरोप लगाता रहा है कि भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ ने 2 साल तक चले गुप्त अभियान में सिक्किम की जनता में राजा के प्रति आक्रोश भरा। नामग्याल सिक्किम को भारत से लगातार दूर कर रहा था और अपनी अमेरिकन पत्नी के कहने अनुसार भारत के लिए लगातार समस्याएँ खड़ा कर रहा था।

भौगोलिक स्थिति को समझें तो भारत का उत्तर उत्तर-पूर्वी हिस्सा सामरिक और रणनीतिक रूप से देश का एक महत्वपूर्ण अंग है। यहाँ अभी भारत के आठ राज्य स्थित हैं- अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, असम, त्रिपुरा, मिजोरम, मेघालय व सिक्किम। सिक्किम के उत्तर और उत्तर-पूर्व में तिब्बत स्थित है, जिस पर चीन अपना कब्ज़ा जताता रहा है। राज्य के पूर्व में भूटान है, जो भारत का मित्र राष्ट्र है लेकिन चीन उसे लुभाने की पूरी कोशिश करता रहा है। सिक्किम के पश्चिम में नेपाल है, जहाँ के सत्ताधारियों का झुकाव समय के हिसाब से कभी भारत तो कभी चीन की तरफ रहता है।

सिक्किम के इतिहास को देखें तो 1642 में फुंत्सोग नामग्याल यहाँ के पहले राजा थे। जब सिक्किम देश का 22वाँ राज्य बना, उससे पहले इस राजवंश ने 333 सालों तक वहाँ राज किया। ब्रिटिश और सिक्किम राजवंश के हित भी एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। नेपाल और भूटान जैसे पड़ोसी राज्यों के ख़िलाफ़ दबदबा बढ़ाने के लिए चोग्याल राजाओं ने अंग्रेजों का उपयोग किया। ब्रिटिश के लिए गोरखाओं के ख़िलाफ़ सिक्किम एक दोस्त के रूप में मिला। 1814-15 के अंग्रेज-गोरखा युद्ध में गोरखाओं द्वारा हारे गए कई इलाक़े सिक्किम को मिले। अंग्रेजों ने भी सिक्किम के रूट का उपयोग नॉर्थ-ईस्ट राज्यों तक व्यापार के लिए किया।

1817 में सिक्किम ने ब्रिटिश के साथ ‘ट्रीटी ऑफ तितलिया’ पर हस्ताक्षर किया, जिससे अंग्रेजों को सिक्किम में कई राजनीतिक और व्यापारिक फायदे मिले। इससे एक फायदा ये भी हुआ कि सिक्किम ब्रिटिश की सीधी कॉलनी नहीं बना। लेकिन, ब्रिटिश के जाते ही कहीं-कहीं जनता में सिक्किम राजवंश के ख़िलाफ़ आक्रोश के स्वर उठने शुरू हो गए थे। 70 का दशक आते-आते राजवंश के ख़िलाफ़ आंदोलन और उग्र हो गया। आज भी चीन सिक्किम के एक बड़े हिस्से पर अपना दावा ठोकता रहता है और रह-रह कर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करता है।

बता दें कि 15 अगस्त 1947 को जब भारत आज़ाद हुआ, तब सिक्किम भारतीय गणराज्य का हिस्सा नहीं था। सिक्किम को भारत के आज़ाद होने के 28 सालों बाद भारतीय गणराज्य में शामिल किया गया था। इसे भारतीय गणराज्य में मिलाने की प्रक्रिया पर विचार-विमर्श 1962 में हुए युद्ध के बाद शुरू किया गया। भारत-चीन युद्ध के दौरान भारत को मिली हार का एक कारण उत्तर-पूर्व में भारतीय सेना के पहुँचने में हो रही कठिनाइयों को भी माना गया। सिक्किम के राजा चोग्याल का चीन की तरफ ज्यादा झुकाव था और अपने विस्तारवादी चरित्र के कारण जाना जाने वाला ड्रैगन अपनी सीमा से सटे भारत के हर एक राज्य को हथियाना चाहता था।

आज भी चीन की वही नीति है, जिसके कारण अक्सर डोकलाम जैसे विवाद खड़े हो जाते हैं। इसे पंडित नेहरू की अदूरदर्शिता कहें या फिर उनके निर्णय लेने की क्षमता को सवालों के घेड़े में खड़ा किया जाए, उन्होंने अपनी उत्तर-पूर्व नीति अस्पष्ट रखी। भारत में स्थित अमेरिकी राजनयिकों ने USA के स्टेट डिपार्टमेंट को भेजी गई एक जानकारी में कहा था कि अगर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सरदार पटेल की बात मान ली होती हो सिक्किम 25 साल पहले ही भारत का अंग बन चुका होता। अमेरिका का ये भी मानना था कि भारत ने सिक्किम के विलय (annexation) के लिए कुछ ख़ास नहीं किया बल्कि वो तो सिक्किम की जनता थी जिसने उचित निर्णय लिया और भारत ने सिर्फ ‘परिस्थिति’ का फायदा उठाया। ये सूचनाएँ भारत में स्थित अमेरिकी राजनयिकों द्वारा अपने देश में तब भेजी गई थी जब इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में भारत सरकार ने ये फ़ैसला ले लिया था कि सिक्किम में सेना भेजी जाएगी। ये पूरा घटनाक्रम भी काफ़ी रोचक है और इसमें कई ट्विस्ट्स और टर्न्स हैं।

कश्मीर में फिर एक हिन्दू की गोली मार कर हत्या, आतंकियों ने चिपकाए गैर-कश्मीरियों के घाटी छोड़ने के पोस्टर

जम्मू-कश्मीर में एक बार आतंकियों ने टारगेट किलिंग को अंजाम देते हुए बुधवार (13 अप्रैल 2022) की शाम को सतीश सिंह राजपूत नाम के एक व्यक्ति को गोली मार दी। इस हमले में सतीश सिंह घायल हो गए और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल मे भर्ती कराया गया है, जहाँ इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

घटना दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के काकरान के पोम्बे कमप्रीम इलाके की है। मृतक सतीश काकरान के रहने वाले सुरिंदर सिंह के बेटे हैं और पेशे ड्राइवर थे। स्थानीय अधिकारियों ने घटना की पुष्टि की है। इस घटना के बाद आतंकियों को पकड़ने के लिए सुरक्षाबलों ने इलाके को चारों तरफ से घेर लिया है और सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

वहीं, कुलगाम जिले में आतंकियों ने पोस्टर चिपकाया है, जिसमें बाहरी व्यक्तियों को कश्मीर छोड़ने की चेतावनी दी गई है। लश्कर-ए-इस्लाम नाम के इस आतंकी संगठन ने अपने पोस्टर में पुलिसकर्मियों और सेना के जवानों को धमकी दी है। पोस्टर में लिखा है कि गैर-कश्मीरी और हिन्दुस्तान के अलग-अलग हिस्सों से आए हुए लोग तुरंत घाटी छोड़ दें।

कश्मीर में हतोत्साहित आतंकी और उसका आका पाकिस्तान अब टारगेट किलिंग पर उतर आया है। आतंकी गैर-मुस्लिमों और गैर-कश्मीरियों को निशाना बनाने लगे हैं। इसके पहले आतंकियों ने घाटी में सोनू कुमार नाम के व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी थी। सोनू अपनी दुकान पर बैठे थे। इसी दौरान आए और गोली मार दी।

वहीं, पिछले साल आतंकियों ने दो लोगों की हत्या कर दी थी, जिसमें एक हिंदू और एक सिख समुदाय से संबंधित थे। आतंकियों ने श्रीनगर के ईदगाह इलाके में स्थित एक स्कूल में शिक्षकों को लाइन में खड़े कराकर पहचान करने के बाद दो गैर-मुस्लिम शिक्षकों की हत्या कर दी थी।

‘2 साल से साजिश, फुटबॉल टूर्नामेंट के बहाने फंडिंग’: झारखंड में हिन्दू विरोधी हिंसा पर पुलिस का खुलासा – आतंकी स्लीपर सेल एक्टिव

झारखंड में लोहरदगा जिले के हिरही गाँव में रामनवमी के मौके पर भड़की हिंसा के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हिरही में हिंदू जुलूस पर किया गया हमला एक इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन की सुनियोजित साजिश थी, जिसमें स्पीपर सेल्स शामिल थे। इलाके में तनाव के हालात को देखते हुए चौथे दिन भी इंटरनेट सर्विस को बंद रखा गया है।

पूरे इलाके में धारा 144 लागू की गई है। मंगलवार (12 अप्रैल, 2022) को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी इलाके का दौरा किया था। उन्होंने मामले में प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पीएफआई के शामिल होने की आशंका जताते हुए इसकी हाई लेवल जाँच की माँग की थी। हिरही सांप्रदायिक हिंसा को लेकर एसडीओ अरविंद कुमार लाल का कहना है कि बीते दो साल से स्लीपर सेल्स किसी न किसी रूप में अपनी गतिविधियों को चला रहे थे। प्रशासन को ये सूचना मिली है कि फुटबाल कंपटीशन के बहाने से इसके लिए फंडिंग की जा रही थी।

पुलिस अधिकारी के मुताबिक, रामनवमी के दिन शहर के दुपट्टा चौक से कुटूम डोड्हा टोली में कट्टरपंथी समूहों के संपर्क में रहे स्लीपर सेल के लोग किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। ये लोग ऑटो से घूम रहे थे, लेकिन प्रशासन को इसकी जानकारी मिलते ही ये वहाँ से भाग खड़े हुए और हिरही गाँव में इन्होंने हिंसा को अंजाम दिया।

ऐसे हुई हिंसा

हिरही हिंसा पर एसडीओ अरविंद लाल का कहना है कि कब्रिस्तान में पथराव के बाद जब रामनवमी के जुलूस को समझाकर भोक्ता बगीचा के मेले तक पहुँचाया गया। हालाँकि, भोक्ता रेलवे स्टेशन के पास करीब 70-80 लोगों की भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया, जिसके बाद दोनों पक्ष आपस में भिड़ गए। इससे ये बात पता चलती है कि ये दंगा पूरी तरह से प्लांड था।

NCB ने अपने दो अधिकारियों को किया निलंबित, आर्यन खान ड्रग्स मामले की कर रहे थे जाँच: संदिग्ध गतिविधियों के हैं आरोप

बॉलीवुड ऐक्टर शाहरुख खान (Bollywood Actor Shah Rukh Khan) के बेटे आर्यन खान से जुड़े मुंबई क्रूज ड्रग्स (Aryan Khan Drug Case) मामले की जाँच से जुड़े दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। आर्यन खान मामले के बाद इन दोनों अधिकारियों को तबादला कर दिया गया था। अब संदिग्ध गतिविधियों के बाद दोनों को निलंबित कर दिया गया है। बता दें कि कुछ समय पहले आर्यन खान मामले में एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े (Samir Wankhede) को भी हटा दिया गया था और उनकी जगह सीबीआई के पूर्व अधिकारी संजय सिंह (Sanjay Singh) को कार्यभार दिया गया था। 

जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया है उनके नाम हैं विश्व विजय सिंह (V.V Singh) और आशीष रंजन प्रसाद (Ashish Ranjan Prasad)। वीवी सिंह एनसीबी (NCB) अधिकारी हैं और उन्हें आर्यन खान मामले के बाद गुवाहाटी एनसीबी में ट्रांसफर कर दिया गया था। वहीं, आशीष रंजन प्रसाद खुफिया (IB) अधिकारी हैं और उन्हें CISF में ट्रांसफर कर दिया गया था। अब दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।

ABP के अनुसार, एनसीबी का कहना है कि इन दोनों का निलंबन आर्यन केस नहीं जुड़ा है। बताया जा रहा है कि NCB के प्रमुख (DDG) ज्ञानेश्वर सिंह (Gyaneshwar Singh) की रिपोर्ट के आधार पर इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और इनका निलंबन किसी और मामले में किया गया है। हालाँकि, वो मामला क्या है ये अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।

बता दें कि जब क्रूज पर ड्रग्स को लेकर छापेमारी की गई थी, तब विश्व विजय सिंह जाँच अधिकारी थे और प्रसादी उनके डिप्टी थे। बाद में इस मामले में राजनीति के कारण जाँच को NCB के SIT के हवाले कर दिया गया था। उस दौरान दोनों अधिकारियों ने अपने बयान भी दर्ज कराए थे।

दरअसल, पिछले साल 2 अक्टूबर की रात को मुंबई क्रूज पर एनसीबी के अधिकारियों ने छापेमारी की थी, जिसमें शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान, उनके दोस्त अरबाज मर्चेंट और 6 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार लोगों में मुनमुन धमेचा, अरबाज मर्चेंट, इसमीत सिंह, मोहक जसवाल, गोमित चोपड़ा, नुपुर सतीजा और विक्रांत छोकर के नाम शामिल हैं। 

आर्यन खान और 19 अन्य को प्रतिबंधित दवाओं के इस्तेमाल और बिक्री करने का आरोप लगा था। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस अधिनियम (NDPS Act) के तहत मामला दर्ज किया गया था। बाद में आर्यन खान और 17 अन्य को जमानत मिल गई थी।

देशवासियों को हर संकट से सुरक्षित निकालने का माद्दा: पीएम मोदी ने की देवघर रोपवे हादसे में 46 लोगों को मौत के मुँह से बचाने वाले जवानों से बात

झारखंड के देवघर में हुए रोप-वे हादसे में बहादुरी और तत्परता से 46 लोगों की जान बचाने वाले जवानों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बात की। इस दौरान उन्होंने त्रिकूट पर्वत पर रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने वाले जवानों का हौसला बढ़ाया।

डिजिटल माध्यम से बचाव अभियान में हिस्सा लेने वाले जवानों से बातचीत करते हुए PM मोदी ने कहा, “आपने तीन दिनों तक चौबीसों घंटे लगकर एक मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन को पूरा किया और अनेक देशवासियों की जान बचाई है। देश को गर्व है कि उसके पास हमारी थल सेना, वायु सेना, NDRF, ITBP के जवान और पुलिस बल के रूप में ऐसी कुशल फोर्स है जो देशवासियों को हर संकट से सुरक्षित बाहर निकालने का माद्दा रखती है। हालाँकि, हमें दुख है कि 3 साथियों का जीवन हम नहीं बचा पाए। अनेक साथी घायल भी हुए हैं। पीड़ित परिवारों के साथ हम सभी की पूरी संवेदना है। मैं सभी घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।”

इसके साथ ही उन्होंने जवानों के धैर्य और मुश्किलों का सामना करने के जब्जे की भी सराहना की। वहीं जवानों ने भी ऑपरेशन में आई मुश्किलों और बारीकियों को भी प्रधानमंत्री के साथ-साथ देश से साझा किय।

45 घंटे चला था रेस्क्यू ऑपरेशन

बता दें कि झारखंड के देवघर स्थित त्रिकुट पर्वत पर हुए रोपवे हादसे के बाद शुरू किया गया बचाव अभियान 45 घंटे तक चले अभियान के बाद पूरा हुआ था। जवानों ने रोपवे की ट्रॉलियों में फॅंसे 48 लोगों में से 46 को बचा लिया था। हालाँकि, मंगलवार (12 अप्रैल 2022) को भी एक महिला पर्यटक की ट्रॉली से नीचे गिरने के कारण मौत हो गई थी। यह बचाव अभियान के दौरान ये दूसरी मौत थी। इससे पहले सोमवार को भी एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। वहीं 12 लोग इस हादसे में घायल भी हुए हैं।

गौरतलब है कि रविवार (10 अप्रैल 2022) को रामनवमी होने के कारण बड़ी संख्या में लोग त्रिकुट पहाड़ पर पहुँचे थे। जहाँ पहाड़ पर बने मंदिर की तरफ एक साथ 26 ट्रॉलियाँ रवाना की गई थीं, जिससे रोपवे की तारों पर अचानक लोड बढ़ा और रोलर टूट गया। तीन ट्रॉलियाँ पहाड़ से टकरा गईं, वहीं दो नीचे गिर गईं। इनमें सवार 12 लोग जख्मी हो गए और दो लोगों की मौत हो गई थी। बाकी ट्रॉलियाँ आपस में टकराकर रुक गईं थी। लोगों को निकालने के लिए जैसे ही सेना ने हेलीकॉप्टर का सहारा लिया, वैसे ही पंखे की तेज हवा से ट्रॉलियाँ हिलने लगीं, इससे लोगों की जान पर बन आई थी। जिसे 45 घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद 46 को सुरक्षित बाहर निकालकर पूरा किया गया था।

DYFI नेता शेजिन ने ज्योत्सना से की शादी, केरल में परिवार ने लगाया ‘लव जिहाद’ का आरोप: बोला संगठन – ‘ ये RSS का एजेंडा’

केरल में वामपंथी नेता और ईसाई महिला की शादी के मामले में लव जिहाद को लेकर मचे बवाल के बीच बुधवार (13 अप्रैल, 2022) को सीपीआई (एम) कोझिकोड के जिला सचिव पी मोहनन ने लव जिहाद के एंगल को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “ये कोई लव जिहाद नहीं है। यह अल्पसंख्यकों को टार्गेट करने का RSS का एजेंडा है। जॉर्ज एम थॉमस की जुबान फिसल गई थी।”

डीवाईएफआई कोडेंचेरी ने सोशल मीडिया के जरिए दावा किया कि लव जिहाद का तर्क एक मनगढ़ंत कहानी है, जिसके जरिए कुछ ताकतें केरल की धर्मनिरपेक्ष सांस्कृतिक विरासत को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं।

दरअसल, मंगलवार को कोझिकोड जिला सचिवालय के सदस्य और दो बार विधायक रहे जॉर्ज एम थॉमस ने आरोप लगाया कि डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के नेता एमएस शेजिन की ज्योत्सना मैरी जोसेफ से शादी ने जिले के कोडेनचेरी क्षेत्र में सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ दिया था। उनका कहना था कि शेजिन मुस्लिम है और महिला कैथोलिक क्रिश्चियन हैं। हालाँकि, बाद पार्टी की यूथ विंग ने एक बयान जारी कर अंतरधार्मिक और धर्मनिरपेक्ष विवाह के लिए अपना समर्थन दोहराया।

गौरतलब है कि ईसाई महिला के परिवार वालों ने कोझीकोड में DYFI कन्नोथ क्षेत्र के सचिव शेजिन पर ‘लव जिहाद’ का आरोप लगाया था।

क्या है विवाद

गौरतलब है कि इस शादी पर विवाद इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि कोडनचेरी के रहने वाली शेजिन थेयापारा की रहने वाली ज्योत्सना मैरी जोसेफ को भगा ले गए थे और बाद में उससे शादी कर लिया। उससे पहले दोनों करीब सात महीने तक रिलेशनशिप में भी रहे। ज्योत्सना सऊदी अरब में नर्स थी और उसके परिवार वालों ने उसकी सगाई कहीं और तय कर दी थी, वो अपने घर आई थी। लेकिन सगाई से पहले ही वो शेजिन के साथ भाग गई। इस मामले में ज्योत्सना का कहना है कि वो अपनी मर्जी से भागी है। लेकिन उसके परिजनों का आरोप है कि उस पर ऐसा कहने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

3 मौलवियों की साजिश, बाहर से मँगाए दंगाई: गुजरात के खंभात में रामनवमी पर ऐसे भड़की हिंदू विरोधी हिंसा, घात लगा बैठे थे दंगाई

गुजरात के खंभात में भी देश के अन्य हिस्सों की तरह ही 10 अप्रैल 2022 को रामनवमी के दौरान हिंदुओं द्वारा निकाले गए जुलूस में कट्टरपंथी मुस्लिमों ने हिंसा फैलाई, पत्थरबाजी की। इस पत्थरबाजी में एक बुजुर्ग की मौत हो गई। इसमें तीन मौलवियों की भूमिका सामने आई है। पुलिस ने मामले में तीनों मौलवियों सहित 9 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। बाकियों की तलाश की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा के मामलों में पुलिस ने खंभात जिले में दो और हिम्मतनगर में तीन एफआईआर दर्ज की गई है। खंभात में 65 लोगों और हिम्मतनगर में 850 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इसके साथ ही हिम्मतनगर की दो कंपनियों को तैनात किया गया है। रेंज के आईजी अभय चुडास्मा ने कहा कि हिम्मतनगर ए डिवीजन में 700 और बी डिवीजन में 150 दंगाइयों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इसके अलावा 30 से अधिक आरोपितों को राउंडअप किया गया है।

क्या हुआ था खंभात में

रविवार को खंभात के शंकरपुरा में रामनवमी के मौके पर हिंदुओं की ओर से जुलूस निकाला गया, जिसमें करीब 3000 लोग शामिल थे। शंकरपुरा से चले इस जुलूस को चितरी बाजार, पीठ बाजार और मंडई चौकी से गुजरना था, लेकिन जैसे ही ये जुलूस शुरू हुआ। बबूल के खेतों में पहले से घात लगाए बैठे इस्लामी दंगाइयों ने पथराव शुरू कर दिया। अचानक पत्थर बरसता देख लोग घबरा गए और वहाँ भगदड़ मच गई। दोनों ओर से पत्थरबाजी भी की गई।

मौका अनुकूल देख दंगाइयों ने छगडोल मैदान और सरदार टावर में कई लारियों और दुकानों में आग लगा दी। इसके साथ ही एक घर में भी आग लगा दी गई। पुलिस ने दंगाइयों को कंट्रोल करने के लिए बल प्रयोग किया, जिसमें 15 पुलिस के जवान भी घायल हो गए।

किराए के दंगाई बुलाए गए

सांप्रदायिक हिंसा फैलाने की साजिश रचने वाले मौलवियों ने अपनी नापाक साजिश को अंजाम देने के लिए खंभात के बाहर से दंगाइयों को बुलाया था, ताकि उनकी पहचान न हो सके।