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महाराष्ट्र के कॉन्ग्रेसी मंत्री ने हनुमान चालीसा का पाठ करने वालों को बताया ‘नीच, &*ट्टा और हर*मी’, महिला नेता पर भी ओछी टिप्पणी

महाराष्ट्र (Mharashtra) में लाउडस्पीकर और हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) किए जाने को लेकर राजनीतिक रण लगातार जारी है। इस बीच कॉन्ग्रेस (Congress) के नेता और महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार में मंत्री विजय वडेट्टीवार (Vijay Wadettiwar) ने हनुमान चालीसा का पाठ करने की माँग करने वाले हिंदुओं पर विवादित बयान दिया है। उन्होंने चंद्रपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि सीएम उद्धव ठाकरे से हनुमान चालीसा के पाठ की माँग करने वाले ‘नीच’ और ‘हर*मी’ हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रपुर के बल्लारपुर में पार्टी द्वारा आयोजित स्वास्थ्य शिविर में मंत्री विजय वडेट्टीवार शामिल होने के लिए आए थे। अपने भाषण के दौरान उन्होंने सांसद नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा द्वारा सीएम उद्धव ठाकरे के घर मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने की चुनौती का जिक्र किया। वडेट्टीवार ने कहा, “कुछ लोगों ने सीएम ठाकरे से कहा है कि वो हनुमान चालीसा का पाठ करें नहीं तो मातोश्री के सामने इसका पाठ करेंगे। अरे तेरे बाप का क्या जाता है? तू कौन है रे चोट्टे हर*मी…।”

कॉन्ग्रेस नेता यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा, “अरे तेरे को जहाँ बोलना है बोल, जहाँ पढ़ना है पढ़, लेकिन को ऐसा करने के लिए कहना गलत है।” वडेट्टीवार ने आगे कहा, “अरे तेरे बाप का नौकर है क्या? ऐसे नीच, नालायक और ह*रामी लोग लोगों को बाँटने के लिए हनुमान चालीसा का इस्तेमाल करने आए हैं। आप सभी को पता है कि हिंदुओं में शादी से पहले हनुमान का आशीर्वाद लेने की परंपरा है। अब ये चोट्टे हमें हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए बताएँगे।”

उनके इस बयान को ट्विटर पर शेयर करते हुए महाराष्ट्र बीजेपी की प्रदेश उपाध्यक्ष चित्रा वाघ ने पूछा कि क्या हनुमान चालीसा का जाप कैसे देशद्रोही हो सकता है। उन्होंने लिखा, “हम विरोध के लिए किसी के घर जाने का विरोध करते हैं, लेकिन भारत में हनुमान चालीसा का पाठ करना देशद्रोह कैसे हो सकता है? मैं ऐसे मंत्रियों (जैसे वडेट्टीवार) की निंदा करती हूँ जो महिलाओं के बारे में इस तरह की गंदी भाषा का इस्तेमाल करते हैं।”

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के मुंबई स्थित घर ‘मातोश्री’ में हनुमान चालीसा का पाठ करने की चेतावनी देने के बाद उन्हें शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया था। उन पर देशद्रोह के आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा 14 दिनों की ज्युडिशियल ट्रायल के दौर से गुजर रहे हैं।

बीवी छोड़ गई, अम्मी तेजाब पीकर मर गई, बचपन में हुआ यौन शोषण… मुनव्वर फारूकी की हिंदूफोबिया को LockUpp से धोने की ये कैसी कोशिश

“ये (मेरी शादी और बच्चा) ऐसी चीज हैं जिनके बारे में सोशल मीडिया पर या ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर बात नहीं करना चाहता हूँ। मैं और मेरी बीवी साथ नहीं रहते।मुझे ये चीजें 2 साल से खा रही हैं।”

“जनवरी 2007 का एक दिन था। दादी ने कोने में ले जाकर बताया- तेरी माँ ने जहर पी लिया है। किसी को बताया तो हमें परेशानी हो जाएगी। डॉक्टरों ने बताया था कि माँ ने 8 दिन से कुछ नहीं खाया।”

“जब मैं 6 या 7 साल का था, तब से 11 साल का होने तक मेरा यौन शोषण हो रहा था। इसमें मेरे परिवार के दो रिश्तेदार भी शामिल थे।”

ये सीक्रेट हैं। उस मुनव्वर फारूकी के जो ​अपनी हिंदूफोबिक कॉमेडी के लिए कुख्यात है। फारूकी के ये सीक्रेट ओटीटी प्लेटफॉर्म पर चल रहे एकता कपूर के रिएलिटी शो लॉकअप (LockUpp) में सामने आए हैं। अभिनेत्री कंगना रनौत इस शो की होस्ट हैं।

फारूकी ने अपने सीक्रेट रिवील करके शो में और शो के बाहर खूब तारीफें पाईं। उसकी छोटी-छोटी क्लिप्स जगह वायरल हो रही है, जिसमें इमोशनल बैकग्राउंड म्यूजिक होता है। इन खुलासों से उसके फैन फॉलोइंग में भी तेजी से इजाफा हुआ है। यह सब तब हो रहा है जब इस शो से पहले तक फारूकी को देशभर मे अपनी हिंदू घृणा के कारण विरोध का सामना करना पड़ रहा था।

आपको याद होगा कि मुनव्वर फारूकी ने भगवान श्रीराम और माता सीता पर अभद्र कॉमेडी करके खुद को एक स्टैंड कॉमेडियन के तौर पर स्थापित किया था। उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ भी खासा माहौल बनाया था। हिंदू घृणा से साणे वीडियोज वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों के दवाब में उस पर कार्रवाई हुई। उसे लंबा वक्त जेल में गुजारना पड़ा। इसके बाद से उसका ग्राफ लगातार नीचे जा रहा था। गुजरात हो या गोवा हर जगह उसके शो कैंसिल हो रहे थे।

दिलचस्प बात ये है कि जनवरी 2021 में फारूकी की गिरफ्तारी के बाद उसके शो रद्द होने की खबरें दिसंबर तक लगातार आ रही थीं। लेकिन इसके बाद अचानक पता चला कि चूँकि वो साल के सबसे विवादित चेहरों में से एक है तो उसे लॉकअप में लाया जा रहा है। ऐसे में इस शो की टाइमिंग और इन कथित सीक्रेट्स के जरिए फारूकी की हिंदूफोबिया को दबाने की कोशिशों के तौर पर भी देखा जा रहा है।

वैसे बॉलीवुड या भारत के मनोरजंन उद्योग के लिए ऐसा करना नई बात नहीं। हिंदूफोबिया से ग्रसित चेहरा हो या आतंकी उनका महिमामंडन स्क्रीन पर हमेशा से होता आया है। याद करिए कश्मीर फाइल्स से पहले कश्मीर के घटनाक्रम पर बनी किस फिल्म में वह पीड़ा दिखाई गई थी जो कश्मीरी पंडितों ने देखा था। एकाध फिल्मों को छोड़ दें तो ज्यादातर ने आतंकियों को कोमल हृदय का, प्रेम करने वाले व्यक्ति के तौर पर ही पेश किया जिसे बंदूक उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसका असर भी होता है।

इसे आप इस तरह भी समझ सकते हैं कि फारूकी के कथित सीक्रेट्स सामने आने के बाद कंगना रनौत ने एक एपिसोड में उसे अपना पसंदीदा प्रतिभागी बताया। नहले पर दहला यह था कि फारूकी ने कहा कि उससे मिलने के बाद लोग अपनी राय बदल लेते हैं। एक तरह से उसने यह संदेश देने की कोशिश की कि जो उस पर हिंदूफोबिया का आरोप लगाते हैं दरअसल उसे जानते नहीं हैं। उसके हिंदू घृणा से सने जो वीडियो वायरल हैं, वे झूठे हैं।

इन सबके बीच तथ्य यही है कि अपनी असफल शादी, माँ की सुसाइड और यौन शोषण की बातें कर संवेदनाएँ बटोरने वाला यह वही मुनव्वर फारूकी है जो हिंदू देवी देवताओं को मंचों से गाली देता था और इसे कॉमेडी बताता था।

जिस तरह से लॉकअप से मुनव्वर फारूकी की खबरों को मीडिया प्रसारित किया जा रहा है उससे भी इस शो के निर्माताओं की नीयत पर सवाल उठते हैं। शो में उसके कॉमेडी पंच, खेल स्ट्रैटेजी, सादगी सबको बाकी प्रतिभागियों से हटकर दिखाया जा रहा है। जितना प्रमोशन फारूकी का सोशल मीडिया पर हो रहा है उतना शायद ही सोशल मीडिया पर 1 मिलियन फॉलोवर वाली अंजलि अरोड़ा, या टीवी इंडस्ट्री के मशहूर करणवीर बोहरा जैसे अन्य प्रतिभागियों का नहीं हो रहा है। इतना ही नहीं, वे प्रतिभागी जिनके सीक्रेट्स फारूकी जैसे ही है उनको भी उसकी तरह स्पेस नहीं मिल रहा है।

ऑपइंडिया ने भी मुनव्वर फारूकी के ये कथित सीक्रेट सामने आने के बाद उनकी रिपोर्ट की है, जिससे पाठक इस बात को समझ सकें कि हमारा मनोरजंन उद्योग कैसे हमारी भावनाओं से खेलता है। कैसे एक हिंदूफोबिक व्यक्ति को पीड़ित की तरह पेश करता है। यह संदेश देने की कोशिश करता है कि ये तो ‘बेचारा’ है। दुनिया की तमाम दुश्वारियों को भोग चुका है। ताकि अगली बार जब मुनव्वर फारूकी मंच से आपके अराध्यों का मजाक उड़ाए तो आप उसे ‘बेचारा’ समझ गौर ही नहीं करें।

सोमालिया में पैदाइश-अमेरिका में राजनीति, सगे भाई से ही निकाह: मिलिए इल्हान उमर से, देखिए उनकी भारत घृणा

जैसे भारत में संसद के उच्च सदन को राज्यसभा और निचले सदन को लोकसभा कहते हैं, उसी तरह अमेरिका में उच्च सदन को सीनेट और निचले सदन को प्रतिनिधि सभा या हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव कहते हैं। इल्हान उमर (Ilhan Omar) अमेरिकी संसद के निचले सदन की सदस्य हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी से नाता रखती हैं।

अफ्रीकी मूल की यह अमेरिकी महिला सांसद अक्सर भारत विरोध को लेकर चर्चा में रहती हैं। उनके बयानों में भारत के प्रति घृणा और पाकिस्तानपरस्ती साफ दिखती है। हाल ही में उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) का दौरा किया। आंतकियों को संरक्षण देने वाले हमारे पड़ोसी मुल्क ने भी उनका जोरदार स्वागत किया। हालाँकि, भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन करने वाली अमेरिकी सांसद के इस दौरे का ना केवल भारत, बल्कि अमेरिका ने भी विरोध किया। भारत ने उनकी इस यात्रा को निंदनीय बताया, जबकि अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन ने उनके पीओके दौरे को व्यक्तिगत गतिविधि बताकर खुद को उनसे अलग कर लिया।

पाकिस्तान परस्त इल्हान उमर

इल्हान उमर की पैदाइश सोमालिया की है। कट्टरपंथी इस्लामी विचार रखती हैं। हालिया पाकिस्तान दौरे में इमरान खान से मिलीं। उनकी जमकर तरीफ की। इमरान ने भी उमर की ‘इस्लामोफोबिया के मुद्दों पर साहसी और सैद्धांतिक रुख’ की सराहना की। उन्होंने पाकिस्तान के राष्ट्रपति सुल्तान महमूद चौधरी और पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ से भी मुलाकात की और जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन पर चर्चा की। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने उमर को एजेंडावादी बताते हुई जबर्दस्त फटकार लगाई थी। उन्हें संकीर्ण सोच वाली नेता बताते हुए कहा कि भारत क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं करेगा।

मुस्लिम देशों में सेलिब्रिटी हैं इल्हान उमर

इल्हान उमर को मुस्लिम देशों में सेलिब्रिटी का दर्जा हासिल है। उमर पर इस्लामी एजेंडा इस कदर हावी है कि वह अमेरिका के राष्ट्रीय हितों की भी परवाह नहीं करती हैं। दुनियाभर में कट्टरपंथी इस्लाम को आगे बढ़ाना ही उनका एकमात्र उद्देश्य है। मुस्लिम देशों से उनकी मोहब्बत और भारत के प्रति उनकी घृणा किसी से भी छिपी नहीं है। कश्मीर, भारतीय मुस्लिमों, बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर इल्हान उमर कई विवादित बयान दे चुकी हैं। खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति उनकी नफरत सोशल मीडिया पर जगजाहिर है। इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी संसद में यहाँ तक कह दिया था कि आखिर मोदी सरकार मुस्लिमों के खिलाफ और कितने जुल्म करेगी जिसके बाद बाइडन प्रशासन कुछ कहेगा?

इल्हान उमर के बारे में बताया जाता है कि वो पहली अफ्रीकी शरणार्थी हैं, जो चुनाव जीतकर अमेरिकी संसद में पहुँची हैं। उमर 2019 में मिनिसोटा से सांसद चुनी गई थीं। इस संसदीय सीट से चुनाव जीतने वाली वह पहली अश्वेत महिला हैं। साथ ही, अमेरिकी संसद पहुँचने वाली पहली दो मुस्लिम-अमेरिकी महिलाओं में भी शामिल हैं। उमर के परिवार ने गृहयुद्ध के कारण सोमालिया छोड़ दिया था, उस वक्त उमर महज आठ वर्ष की थीं। उनके परिवार ने केन्या के शरणार्थी शिविर में चार साल बिताए और फिर 1990 के दशक में अमेरिका आए। दादा ने उमर को उनकी किशोरावस्था में ही राजनीति में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। वह 2016 में चुनाव जीतकर मिनिसोटा की प्रतिनिधि सभा पहुँची और तीन साल बाद 2019 में वो अमेरिकी संसद के लिए चुनी गईं।

गैर मुसलमानों के प्रति नफरत

सोमालिया में ही पैदा हुईं मानवाधिकार कार्यकर्ता अयान हिरसी अली (Ayaan Hirsi Ali) ने 12 जुलाई 2019 को वॉल स्ट्रीट जर्नल में Can Ilhan Omar Overcome Her Prejudice? शीर्षक से लिखे लेख में कहा था, “किसी के मन में किसी के प्रति प्रति नफरत घर कर जाए तो उससे उबरना मुश्किल होता है। इल्हान उमर के साथ भी यही बात लागू है।” अयान के मुताबिक, इल्हान उमर उन मुस्लिमों में शामिल हैं, जो दुनिया में जो भी गलत हो रहा है, उसके लिए एकमात्र दोषी यहूदियों को मानती हैं। उनमें गैर-मुसलमानों के प्रति भी नफरत कूट-कूटकर भरी है, क्योंकि उन्हें बचपन से यही सिखाया गया है। वहीं, भारत में काफी चर्चित पाकिस्तानी मूल के लेखक और पत्रकार तारेक फतेह भी इल्हान उमर को भारत विरोधी कट्टर इस्लामवादी करार दे चुके हैं।

इल्हान उमर के बारे में यह भी कहा जाता है कि वह बातें स्वतंत्रता-समानता की करती हैं, लेकिन कट्टर इस्लाम के प्रति उनका झुकाव साफ-साफ झलकता है। वे बुर्का, हिजाब की जबर्दस्त पैरोकार हैं। उन्होंने ही अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में वैश्विक स्तर पर इस्लामोफोबिया से लड़ने के लिए विशेष प्रतिनिधि का पद सृजित करने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन की मंजूरी भी मिल गई। लेकिन, उनके इस कदम की रिपब्लिकन पार्टी के टिकट पर अमेरिकी कॉन्ग्रेस का चुनाव लड़ चुकीं एक और मुस्लिम नेता डालिया अल-अकिदी (Dalia Al-Aqidi) ने जबर्दस्त विरोध किया था। उन्होंने अरब न्यूज में एक लेख लिखकर पूछा है कि क्या इस्लाम के नाम पर आतंकी वारदातों को अंजाम देने वालों को मुस्लिम आतंकी कहना भी इस्लामोफोबिया के दायरे में आएगा?

सगे भाई ही इल्हान उमर के शौहर

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चुनावी रैली में इल्हान उमर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था, “इल्हान उमर को अमेरिका, यहाँ के शासन-प्रशासन और यहाँ के लोगों से नफरत है। वह हमारे देश से घृणा करती हैं। वह ऐसी जगह से आई हैं जहाँ सरकार है ही नहीं और यहाँ आकर हमें ही ज्ञान दे रही हैं कि अपना देश कैसे चलाना चाहिए?” यही नहीं ट्रंप ने कई बार कहा था कि इल्हान के दूसरा पति अहमद इल्मी और कोई नहीं उनका सगा भाई ही है। ट्रंप ने 2020 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान एक प्रचार अभियान में जस्टिस डिपार्टमेंट से इसकी जाँच करने की माँग भी की थी। इसकी पुष्टि तब हुई जब ट्रंप की पार्टी के एक रणनीतिकार ने पिछले वर्ष अगस्त में डीएनए टेस्ट रिपोर्ट वेबसाइट पर प्रकाशित कर दी। डीएनए के कई टेस्ट में उमर इल्हान और अहमद इल्मी के सगे बहन-भाई होने का सौ फीसदी मिलान हुआ था। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमाली समुदाय के नेता ने भी खुलासा किया था कि इल्हान उमर ने अपने भाई से निकाह किया है।

‘सीता पर थी निषादराज की बुरी नजर, इसीलिए करवाया नदी पार’: सपा जिलाध्यक्ष का बयान, विरोध हुआ तो बोले – गलती से निकल गया

उत्तर प्रदेश के भदोही में समाजवादी पार्टी के निवर्तमान जिलाध्यक्ष हैं विकास यादव। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने माता सीता और निषादराज को लेकर विवादित टिप्पणी की है। विरोध होता देख सपा के नेता ने माफी माँगने में भी देर नहीं लगाई। उन्होंने वादा किया कि वो दोबारा से ऐसी हरकत नहीं करेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना रविवार ( 24 अप्रैल 2022) की है। उस दौरान विकास यादव कुछ लोगों के साथ गंगा में नाव की सवारी कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने ये बयान दिया। सपा नेता ने कहा, “निषादराज सीता के चक्कर में पड़ गए थे, उनकी नजर सीता जी पर थी और वो उन्हें ही नदी के पार ले जाना चाहते थे।” उनके इस बयान को किसी ने रिकॉर्ड कर लिया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

सोमवार जब सोशल मीडिया पर वायरल अपने बयान को लेकर हो रहे विरोध को देखा तो विकास यादव ने कहा कि ये शब्द उनसे गलती से निकल गया है। अब भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी। उन्होंने ये भी स्पष्टीकरण दिया कि उनकी मंशा किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने की नहीं थी। यादव ने सफाई पेश करते हुए दावा किया वो खुद भी भगवान को मानते हैं और उनमें आस्था रखते हैं।

सपा जिलाध्यक्ष के खिलाफ केस दर्ज

भले ही विकास यादव ने अपने आपत्तिजनक बयान को लेकर माफी माँग ली हो, लेकिन उनकी मुश्किलें इससे कम नहीं हो जाती हैं। ‘निषादराज पार्टी’ के ज्ञानपुर के विधायक विपुल दुबे ने एसपी डॉ अनिल कुमार को पत्र लिखकर शिकायत की है। विपुल दुबे ने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता की मानसिकता दूषित हो गई है। पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, मामले में ज्ञानपुर कोतवाली में केस दर्ज किया जा रहा है। मामले में जरूरी कार्रवाई की जाएगी।

जिस आसिफ पर हिन्दुओं से हिंसा का आरोप, वो अशोक गहलोत की रोजा-इफ्तार पार्टी में पहुँचा: जमानत पर है बाहर

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जयपुर स्थित निवास पर शनिवार (23 अप्रैल, 2022) को हुई रोज़ा इफ्तार पार्टी में छाबड़ा हिंसा के मुख्य आरोपित आसिफ असाढ़ी भी शामिल हुआ। पूरे कार्यक्रम के दौरान आसिफ ना सिर्फ सीएम हाउस पर मौजूद रहा, बल्कि मंत्रियों और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ जमकर तस्वीरें भी खिंचवाईं। अब आसिफ की सीएम हाउस में रोज़ा इफ्तार पार्टी में मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पूर्व मंत्री व छबड़ा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने छाबड़ा हिंसा आरोपित के मुख्यमंत्री की रोज़ा इफ्तार पार्टी में मौजूदगी को चिंता का विषय बताया है। उन्होंने कहा कि छाबड़ा हिंसा का मुख्य आरोपित सीएम आवास पर आयोजित इफ्तार पार्टी में मौजूद था। यह चिंता का विषय है और इसकी जाँच होनी चाहिए कि उन्हें सीएम आवास में प्रवेश की अनुमति क्यों दी गई। यह सीएम की सुरक्षा से समझौता है।

सिंघवी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को टैग करते हुए एक ट्वीट भी किया है। इसमें उन्होंने अखबार के पन्नों का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा है, “विडंबना है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के राजकीय आवास पर सांप्रदायिक दंगों के आरोपित की मेजबानी की जा रही है! क्या इसके पीछे तुष्टिकरण से निकले वोट हैं? कॉन्ग्रेस की ऐसी सोच निहायत शर्मनाक व बहुसंख्यक समाज के लिए अपमानजनक है। जनता सब देख रही है, समय आने पर सारा हिसाब होगा।”

इससे पहले उन्होंने एक ट्वीट में लिखा था, “माननीय मुख्यमंत्री जी, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि छबड़ा हिंसा का मुख्य आरोपित आसिफ असाढ़ी आज आपके द्वारा दी गई इफ्तार पार्टी में शरीक हुआ। इंटेलिजेंस विंग को चाहिए कि ऐसे अपराधियों को इफ्तार पार्टी में जगह कैसे मिल गई इसका पता करे।”

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने अपने ट्वीट के जरिए मुख्यमंत्री गहलोत पर भी निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “कॉन्ग्रेस का यह कैसा राज। PFI से प्यार, बहुसंख्यक को दुत्कार, मुख्यमंत्री निवास में इफ्तार, दंगे आरोपितों को बुलाकर करते हैं दुलार, करौली में आरोपियों को बचाने की कवायद, अलवर जिले में शिवमंदिर, गोशाला से एतराज़।”

बीजेपी द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद राजस्थान के मंत्री महेश जोशी ने कहा, “सीएम आवास पर इफ्तार पार्टी में हजारों की संख्या में लोग जमा थे। हमें इस मुद्दे से आगे बढ़ना चाहिए। कोई भी मेरे साथ फोटो क्लिक कर सकता है, लेकिन अगर वह कानून का उल्लंघन कर रहा है तो उसे सजा मिलनी चाहिए।”

वहीं बारां के SP कल्याणनल मीणा ने इस पर बयान देते हुए कहा, “हमें इफ्तार पार्टी में आमंत्रित लोगों की सूची नहीं दी गई। आसिफ अली पर छाबड़ा हिंसा का आरोप है लेकिन वह जमानत पर बाहर है। उन्हें वहाँ किसने आमंत्रित किया, इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है।”

क्या है छबड़ा हिंसा

राजस्थान के बारां जिले के छबड़ा में 11 अप्रैल 2021 को सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। छबड़ा कस्बे में दो युवकों की छुरा घोंपकर हत्या के बाद भड़की सांप्रदायिका हिंसा के दौरान दर्जनों वाहनों और दुकानों में तोड़फोड़ के साथ आगजनी की गई थी। पुलिस ने हालात पर काबू पाने के लिए इंटरनेट को बंद कर दिया था और साथ ही कर्फ्यू लगा दिया था। पूरे घटनाक्रम को लेकर हस्सान खान पार्षद, आसिफ असाढ़ी, आलम मंसूरी, शकील अहमद व राजा खान को आरोपित बनाया गया था।

60 साल पहले नालंदा से चोरी हो गई थी बोधिसत्व मैत्रेय की कांस्य प्रतिमा, अब अमेरिका ने किया वापस

भारत से तस्करी कर विदेशों में ले बेच दी गई प्राचीन भारतीय मूर्तियों को भारत सरकार लगातार वापस ला रही है। इसी क्रम में बिहार से चोरी कर अमेरिका ले जाई गई बिहार के नालंदा स्थित बुद्ध शाक्यमुनि या बोधिसत्व की नक्काशीदार कांस्य की प्रतिमा को अमेरिका में भारतीय वाणिज्य दूतावास को वापस कर दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा दूसरी बार हो रहा है जब नालंदा की बुद्ध की प्रतिमा को भारत को वापस किया गया है। इससे पहले 2018 में लंदन ने ऐसी ही एक प्रतिमा को वापस किया था। इन मूर्तियों को भारत के नालंदा स्थित म्यूजियम से लूट लिया गया था। 1960 के दशक की शुरुआत में पश्चिमी देशों में इसकी तस्करी की गई थी। उल्लेखनीय है कि 22 अगस्त, 1961 और मार्च 1962 में नालंदा संग्रहालय में लूटपाट की गई थी। यहाँ से 1961 में कांस्य की 14 प्रतिमाओं को लूटा गया था। इसे भारत को वापस करने के लिए 15 अगस्त 2018 को लंदन में एक शानदार समारोह हुआ था। उस दौरान कलाकृतियों की अवैध तस्करी से निपटने के लिए काम कर रहे एक्टिविस्ट्स ने इसकी प्रशंसा की थी।

गौरतलब है कि बोधिसत्व मैत्रेय के नाम से जानी जाने वाली बुद्ध शाक्यमुनि की मूर्ति सोने और तांबे की मिश्रित धातु से बनी है। इससे पहले इसके लिए पर्याप्त सबूत नहीं होने के कारण अंमेरिका के लॉस एंजिल्स काउंटी संग्रहालय (एलसीएएमई) में इस मूर्ति को रखा गया था। इसको लेकर इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट के एस विजयकुमार का कहना है कि ये केस होमलैंड सुरक्षा एजेंसियों और एजेंटों के साथ निरंतर सहयोग से अवैध तरीके से पुरातात्विक अवशेषों की तस्करी के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण जीत थी। यह विशेष मामला 1961 से ही चल रहा है, जबकि LACMA 1970 के दशक से इसके लिए सबूतों की तलाश कर रहा था।

विजयकुमार ने कहा, “इस मामले में हमने पुराने डॉक्यूमेंटेशन के लिए संजीव सान्याल और डॉ विश्वास के साथ काम मिलकर काम किया और चोरी को सिद्ध किया। होमलैंड सिक्योरिटी से जुड़े हमारे मैचिंग एजेंट चाड फ्रेडरिकसन के साथ मिलकर हमने जाँच शुरू की जिसके कारण आखिरकार यह जीत हासिल हुई।

गौरतलब है कि भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के पूर्व महानिदेशक सचिंद्र एस बिस्वास और संजीव सान्याल पीएम मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य हैं।

इससे पहले इसी साल जनवरी 2022 में मकर संक्रांति के मौके पर लंदन स्थित भारतीय हाई कमीशन को उत्तर प्रदेश के लोखरी गाँव से 40 पहले लापता हुई बकरी के सिर वाली देवी की प्राचीन भारतीय मूर्तियों को बरामद किया गया था। योगिनी देवियों की 1978 और 1982 के बीच लोखरी से चोरी हो गई थी।

अरब सागर में गुजरात ATS ने पकड़ी पाकिस्तानी बोट, ₹280 करोड़ की हेरोइन लदी थी: पंजाब में अफगानिस्तान से आई ₹700 करोड़ की ड्रग्स पकड़ी गई

अरब सागर में गुजरात एटीएस (Gujarat ATS) और इंडियन कोस्ट गार्ड (ICG) ने एक पाकिस्तानी बोट पकड़ी है। ‘अल हज’ नामक इस बोट पर 280 करोड़ रुपए की हेरोइन लदी थी। ड्रग्स के साथ नौ लोगों को भी पकड़ा गया है। वहीं पंजाब के अमृतसर में भी अफगानिस्तान से मुलेठी की खेप में छिपाकर लाई गई हेरोइन जब्त की गई है।

पाकिस्तानी बोट अरब सागर की भारतीय सीमा में पकड़ी गई है। आगे की जाँच के लिए बोट को जखाऊ (Jakhau) ले जाया जा रहा है। इंडियन कोस्ट गार्ड के अनुसार पाकिस्तानी बोट ‘अल हज’ रविवार (24 अप्रैल 2022) देर रात भारतीय जल सीमा में प्रवेश कर गई। जानकारी मिलने के बाद गुजरात एटीएस और इंडिया कोस्ट गार्ड की टीम मौके पर पहुँची। उन्हें देखकर पाकिस्तानी बोट पर सवार क्रू मेंबर नार्कोटिक्स के पैकेट्स को पानी में फेंककर भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन वे कामयाब नहीं हो सके।

कोस्ट गार्ड ने बताया है कि पाकिस्तानी बोट को पकड़ने के लिए फायरिंग भी करनी पड़ी। इस दौरान बोट में सवार कुछ तस्करों को चोटें भी आई।

अमृतसर में भी पकड़ी गई है ड्रग्स की बड़ी खेप

अमृतसर में सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों ने अफगानिस्तान से आई लगभग 102 किलोग्राम ड्रग्स की खेप जब्त की है जिसकी अनुमानित कीमत 700 करोड़ रुपए है। यह मामला अटारी बॉर्डर का है। अधिकारियों ने बताया कि NDPS के तहत कार्रवाई की जा रही है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक जब सीमा पर सामानों की जाँच के दौरान कुछ लकड़ी के लट्ठों पर ड्यूटी अधिकारी ने धब्बे देखे तो उनको शक हुआ। इसके बाद सीमा शुल्क अधिकारियों ने अन्य कर्मचारियों की मौजूदगी में बैग खोला तो वे भौंचक रह गए।

सीमा शुल्क अधिकारियों ने ने देखा कि कुछ छोटे बेलनाकार लकड़ी के लट्ठे थे। इन्हीं में सुराख कर हेरोइन रखी गई थी। यह अब तक अटारी से दूसरी सबसे बड़ी बरामदगी है। इससे पहले 2019 में 584 किलोग्राम हेरोइन पकड़ी गई थी।

‘जेल में हनुमान चालीसा पढ़ें राणा दंपति’: संजय राउत का तंज, सर्वदलीय बैठक में नहीं जाएँगे राज ठाकरे, PM आवास के बाहर बैठना चाहती हैं NCP नेता

महाराष्ट्र में मस्जिदों में लाउडस्पीकर से होने वाले अजान के खिलाफ चल रहे विवाद गहराता ही जा रहा है। राज्य में ‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS)’ के संस्थापक राज ठाकरे ने ऐलान किया था कि उनके कार्यकर्ता लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा पढ़ेंगे। इसके बाद हिन्दुओं की धर-पकड़ शुरू हो गई। अमरावती से सांसद पूर्व अभिनेत्री नवनीत कौर राणा और उनके पति बडनेरा से विधायक रवि राणा को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के निवास ‘मातोश्री’ के सामने हनुमान चालीसा पढ़ने का निर्णय लिया था।

अब लाउडस्पीकर विवाद को सुलझाने के लिए महाराष्ट्र की MVA (महा विकास अघाड़ी) सरकार ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। हालाँकि, राज ठाकरे की तरफ से साफ़ कर दिया गया है कि वो इस बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। MNS की तरफ से इस बैठक में संदीप देशपांडे, बाला नंदगाँवकर और नितिन सरदेसाई बैठक में उपस्थित रहेंगे। लाउडस्पीकर विवाद के बीच कानून-व्यवस्था की बात करने के लिए ये बैठक राज्य के गृह मंत्री और NCP नेता दिलीप वलसे ने बुलाई है।

राज ठाकरे ने मुस्लिमों से मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का आग्रह करते हुए समझाया था कि मजहब देश और कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा था कि हम दंगे नहीं चाहते, नमाज के खिलाफ भी नहीं हैं, लेकिन देश की सभी मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतारे जाने चाहिए। उन्होंने लाउडस्पीकर के जवाब में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की चेतावनी भी दी थी। दबाव में आकर उद्धव ठाकरे की सरकार ने लाउडस्पीकर को लेकर अदालत के आदेश के पालन की बात कही और इसके इस्तेमाल के लिए प्रशासनिक अनुमति को अनिवार्य कर दिया।

महाराष्ट्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस भी हिस्सा नहीं लेंगे। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे इस बैठक में नहीं रहेंगे। उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। वहीं राणा दंपति को लेकर शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ ने लिखा है कि उन्हें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घर के बाहर हनुमान चालीसा पढ़नी चाहिए। जहाँ नवनीत राणा को बाइकुला जेल में रखा गया है, उनके पति रवि राणा नवीं मुंबई के तलोजा जेल में हैं।

शिवसेना के प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इसे राज्य को अस्थिर करने की साजिश बताते हुए तंज कसा कि अब राणा दंपति जेल में ही हनुमान चालीसा पढ़ें। इस कार्रवाई के खिलाफ नवनीत कौर और रवि राणा ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अपनी याचिका में माँग की है कि उनके खिलाफ दर्ज FIR रद्द किए जाएँ। दोनों 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में हैं। राणा दंपति के घर के बाहर उपद्रव करने वाले 16 शिवसेना कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन अब खार थाने की पुलिस ने उन सभी को छोड़ दिया है।

उधर NCP की नेता फहमीदा हसन खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर हनुमान चालीसा और अजान पढ़ने की अनुमति के लिए अमित शाह को पत्र लिखा है। मुंबई उत्तर में पार्टी की जिला कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि वो पीएम आवास के बाहर नमाज, हनुमान चालीसा, नवकार मंत्र, गुरु ग्रन्थ साहिब और नोविनो (ईसाई प्रार्थना) पढ़ना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि अगर हिंदुत्व और जैन धर्म से देश में बेरोजगारी, भूखमरी और महँगाई घटती है तो वो ख़ुशी से ऐसा करेंगी।

गुजरात: सूरत के हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के अंदर बने ‘दरगाह’ के आसपास का अवैध ढाँचा गिराया गया

गुजरात के सूरत के चौक बाजार इलाके में हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के अंदर एक दरगाह/मजार के आसपास बने अवैध ढाँचे को अधिकारियों ने ध्वस्त कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले दिनों अधिकारियों को अतिक्रमण के बारे में जानकारी मिली थी, जिसके बाद इस पर कार्रवाई करते हुए बीते बुधवार (20 अप्रैल 2022) को अवैध ढाँचे को गिरा दिया गया।

ऑपइंडिया ने रविवार (24 अप्रैल) को बताया था कि चौक बाजार में सूरत हेरिटेज कॉम्प्लेक्स की इमारत में ‘मजार’ के आसपास एक अवैध ढाँचा खड़ा हो गया है। बताया जाता है कि मकबरा कुछ वर्षों से बना हुआ है, लेकिन आसपास का निर्माण हाल ही में किया गया था।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में नए सीमेंट के काम के साथ नए पत्थरों को देखा जा सकता है। इसमें वीडियो लेने वाले व्यक्ति ने कहा कि दरगाह के चारों ओर निर्माण रातोंरात हुआ था। शख्स ने बताया कि एक दिन पहले तक वहाँ पर यह निर्माण नहीं था। वीडियो में दिख रहे शख्स को यह कहते हुए सुना जा सकता है, ”आज यहाँ कब्जा हुआ है, कल आपके घरों पर कब्जा होगा, तो सोच लीजिए क्या करना है।” उन्होंने बताया कि गैबन शाह वालिद की ‘दरगाह’ बनाई गई है।

सूत्रों के अनुसार, जब पुलिस से दरगाह के ब्योरे के लिए संपर्क किया गया तो भूस्वामी की तलाश शुरू हुई। पुलिस ने कहा कि स्वामित्व के रिकॉर्ड से पता चलता है कि जमीन तीन पक्षों की है। एक पक्ष सूरत नगर निगम है, एक पक्ष राज्य सरकार है और एक निजी पार्टी है। निजी मालिक कौन है, इसकी जाँच करने पर सूरत पुलिस के अधिकारी ने कहा कि यह 5-6 ट्रस्टियों वाला एक ट्रस्ट है। पुलिस ने कहा कि वे जमीन के मालिक के बारे में अधिक जानकारी के लिए सर्वेक्षण कर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक घनीभाई देसाई, गोरधनभाई चोखावाला, यशवंतभाई शुक्ला, ईश्वरलाल देसाई, चुन्नीभाई भट्ट इसके ट्रस्टी हैं और आंशिक रूप से जमीन के मालिक हैं। मूल रूप से हेरिटेज कॉम्प्लेक्स की जमीन के तीन अलग-अलग मालिक हैं। इसका एक हिस्सा सूरत नगर निगम के पास है, कुछ हिस्सा गुजरात सरकार के पास है और कुछ हिस्सा ऊपर बताए गए ट्रस्ट के पास है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दरगाह पर राज्य वक्फ बोर्ड ने दावा किया है या नहीं।

रोहिंग्या को बसाने के लिए NGO को ऋतिक रौशन ने दिए ₹100000? खरगोन, जहाँगीरपुरी में पुनर्वास की तैयारी, कैंपेन से इकट्ठा हुए ₹1 करोड़

हिंदुओं की शोभा यात्रा पर हमले के बाद उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और दिल्ली में जो बुलडोजर से अवैध निर्माणों पर कार्रवाई हुई उसके बाद अब सोशल मीडिया पर Miles2Smile फाउंडेशन द्वारा एक अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें उन लोगों के लिए मदद माँगी जा रही है जिनके घरों-दुकानों पर प्रशासन ने बुलडोजर से कार्रवाई की।

इस कैंपेन के लिंक को तमाम वामपंथियों-कट्टरपंथियों द्वारा शेयर किया जा रहा है और तमाम लोग बढ़-चढ़ कर इसमें दान दे रहे हैं। इसी बीच एक चौंकाने वाला नाम भी डोनर्स की लिस्ट में सामने आया है। ये नाम ऋतिक रौशन का है। अमीना कौसर नाम की भारतीय-अमेरिकी मुस्लिम महिला ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि ऋतिक रौशन ने खरगोन, जहाँगीरपुरी जैसे इलाकों में बुलडोजर चलने से बेघर हुए ‘पीड़ितों’ का जीवन दोबारा से शुरू करवाने के लिए 1,00,000 रुपए की मदद की है।

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अमीना ने लिखा, “आज के समय में जब कोई कलाकार मुस्लिमों के साथ खड़ा नहीं होना चाहता। शुक्रिया आपका कि आपने इस काम के लिए दान दिया और शुरुआत करके दूसरे एक्टर्स के सामने उदाहरण सेट किया।” अपने ट्वीट के साथ अमीना ने कीटो पर शुरू किए गए अभियान का स्क्रीनशॉट साझा किया है जिसके साथ देख सकते हैं कि कैसे उस पर टॉप डोनर्स में ऋतिक रौशन का नाम लिखा आ रहा है और राशि में 1 लाख रुपए लिखा है। इस अभियान से जमा हुई कुल राशि 91लाख 74 हजार रुपए दिखाई गई है।

बता दें कि सोशल मीडिया पर अमीना का दावा कितना सही और कितना गलत है इसकी पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। लेकिन अमीना के ही ट्वीट पर देख सकते हैं कि एक सबा नाम की यूजर ने अमीना से दोबारा पूछा कि क्या वो कन्फर्म हैं ये वहीं ऋतिक रौशन हैं? इस पर अमीना ने दोबारा लिखा कि वो कन्फर्म हैं कि ये बॉलीवुड एक्टर ऋतिक रौशन ही हैं।

Miles 2 Smile Foundation और रोहिंग्या कनेक्शन

गौरतलब है कि कीटो प्लेटफॉर्म पर शुरू अभियान के शीर्षक पर खरगोन और जहाँगीरपुरी जैसे इलाकों के नाम हैं। अभियान का उद्देश्य उन लोगों के लिए पैसे जुटाना है जिनकी घर या दुकानों पर बुलडोजर चला। Miles2SmileFoundation द्वारा चलाए जा रहे अभियान को लगभग 4 हजार लोगों का समर्थन मिला है और इनके जरिए 1 करोड़ से ज्यादा की धनराशि इकट्ठा कर ली गई है।

इस पूरे अभियान की दिलचस्प बात ये है कि जो संस्था इसे संचालित कर रही है उसका रोहिंग्याओं से खासा लगाव है। इससे पहले उन्होंने देश में रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने के लिए फंड एकत्रित किया था। इतना ही नहीं इन्होंने हरियाणा के नूँह में लर्निंग सेंटर खोला था और वहीं पर रोहिंग्याओं को छत देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके अलावा रोहिंग्या छात्रों को गणित विज्ञान पढ़ाने के साथ कुरान की शिक्षा देने के लिए भी इंतजाम किया गया था।