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‘योगी का इस्तेमाल न हो, पूरा और असली नाम बताएँ’: UP सीएम के खिलाफ लगाई याचिका, हाई कोर्ट ने ₹1 लाख का जुर्माना लगाया

इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) को आधिकारिक संवाद के लिए अपने नाम में ‘योगी’ का इस्तेमाल करने से रोकने की गुहार लगाई गई थी। साथ ही माँग की गई थी वे अपने पूरे और वास्तविक नाम का सार्वजनिक तौर पर इस्तेमाल करें और इसी नाम से शपथ लें। यह जनहित याचिका नमहा ने दायर की थी। हाई कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

बार ऐंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा, “हम इस याचिका को पूरी तरह से गलत मानते हैं। याचिकाकर्ता एक राजनीतिक व्यक्ति है। लेकिन उसने जानबूझकर अपनी पहचान छिपाते हुए याचिका दायर की। इसका कोई छिपा मकसद हो सकता है या ऐसा सस्ता प्रचार पाने के लिए किया गया हो। यह देखते हुए इस याचिका को खारिज किया जाता है।” अदालत ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ता ने दिल्ली का अपना पता दिया था, जबकि वह उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखता है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने जुर्माने की राशि छह सप्ताह के भीतर प्रयागराज के विकलांग केंद्र, भारद्वाज आश्रम में जमा कराने के निर्देश दिए हैं।

इससे पहले याचिकाकर्ता ने दलील दी कि सीएम अलग-अलग जगहों पर, अलग-अलग मौकों पर अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उसका कहना था कि सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत उसने मुख्यमंत्री के नाम के संबंध में जानकारी माँगी थी। लेकिन उसे यह उपलब्ध नहीं कराई गई। नमहा ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि मुख्यमंत्री के कई नामों जैसे आदित्यनाथ, योगी आदित्यनाथ आदि का इस्तेमाल डिजिटल मंचों सहित विभिन्न जगहों पर किया जा रहा है। इससे लोगों में भ्रम पैदा हो रहा है। इसलिए मुख्यमंत्री को केवल एक नाम का उपयोग करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।

इस पर राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका पर आपत्ति जताते हुए दलील दी कि यह विचार योग्य नहीं है। याचिकाकर्ता ने इसे (याचिका) जनता के लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने प्रचार में लिए दायर किया है। इसमें मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाया गया है और एक व्यक्ति के खिलाफ जनहित याचिका दायर नहीं की जा सकती। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील का कहना था कि उसके मुवक्किल ने लोगों के लाभ के लिए इसे दायर किया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्टकी पीठ ने याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

बूचड़खाने, मस्जिद, बांग्लादेशी-रोहिंग्या… जहाँगीरपुरी के हिंदू विरोधी दंगों पर फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी ने सब कुछ बताया

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में हनुमान जयंती के दिन हुए हिन्दू विरोधी दंगों को लेकर विशेषज्ञों की एक फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी ने रिपोर्ट तैयार की है। इस कमिटी में सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा, उद्यमी मोनिका अग्रवाल, दिल्ली विश्वविद्यालय स्थित ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ होम इकोनॉमिक्स (IIHE)’ की अस्सिस्टेंट प्रोफेसर दिव्यांशा शर्मा, PGDAV की प्रोफेसर श्रुति मिश्रा और DU के मिरांडा हाउस कॉलेज में राजनीतिक विज्ञान की अस्सिस्टेंट प्रोफेसर सोनाली चितलकर शामिल थीं।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे हिन्दुओं द्वारा निकाली जा रही शोभा यात्रा पर स्थानीय मुस्लिमों ने हमला किया। पिछले 20 वर्षों से शांतिपूर्ण ढंग से चली आ रही यात्रा पर न सिर्फ पत्थरबाजी की गई, बल्कि तलवारों और बंदूकों के साथ उस पर हमला किया गया। इस यात्रा का आयोजन ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ के दिल्ली प्रांत ने किया था। यात्रा के रूट और समय-तारीख़ को लेकर स्थानीय पुलिस-प्रशासन को पहले ही सूचित कर दिया गया था।

इस रिपोर्ट में पाया गया है कि ताजिया जैसे सामान्य यात्राओं के लिए पुलिस अनुमति नहीं देती है, बल्कि उन्हें पूर्व में सूचित कर दिया जाता है और वो सुरक्षा मुहैया कराते हैं। हिन्दुओं की इस शोभा यात्रा के साथ भी पुलिस थी। यात्रा में भक्ति गाने बज रहे थे और साथ में एक झाँकी भी चल रही थी। इस क्षेत्र में जामा मस्जिद है और इसके आसपास मुस्लिमों के घर हैं। रिपोर्ट में लिखा है कि यात्रा निकलने के कुछ ही देर में कुशल सिनेमा वाली सड़क से मुस्लिम भीड़ ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाती हुई आ गई, जिनके पास तरह-तरह के हथियार थे।

इसी हमले ने एक दंगे का रूप ले लिया। FIR में 6-7 पुलिसकर्मियों के गंभीर रूप से घायल होने की बात कही गई है। लोगों ने बताया कि उन्होंने भाग कर के छिप कर अपनी जान बचाई। उनकी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। कई गाड़ियाँ चुरा ली गईं। रिपोर्ट में ये भी पाया गया है कि छतों पर हमले से ही पत्थर-बोतल इकट्ठे कर लिए गए थे और हनुमान जयंती शोभा यात्रा पर हमले की साजिश पूर्व में ही रच ली गई थी। पत्थरों और पेट्रोल बमों के साथ पल में ही एक बड़ी मुस्लिम भीड़ सामने आ गई।

इस रिपोर्ट में जहाँगीरपुरी को अवैध गतिविधियों, डेमोग्राफिक बदलाव और कट्टरवाद का सक्रिय टाइम बम बताते हुए इसके पीछे पाँच कारण गिनाए गए हैं – आवासीय व्यवस्था के लिए आरक्षित की गई ग्रीन लैंड्स का अवैध अतिक्रमण, इलाके में कई अवैध कबाड़ वाले स्थलों का होना, अवैध पार्किंग, कई अवैध बूचड़खाने और सट्टेबाजी। रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि हिन्दू शोभा यात्रा पर हमले में स्थानीय मुस्लिम और बंगलदेश रोहिंग्या शामिल थे।

फैक-फाइंडिंग कमिटी ने पाया कि स्थानीय मस्जिद पर हमले के कोई सबूत नहीं हैं, लेकिन मीडिया का एक धड़ा बिना तथ्यों के फेक न्यूज़ फैलाने में लगा हुआ है। शोभा यात्रा के दौरान किसी भी मस्जिद के ऊपर कोई झंडा नहीं लगाया गया। भीड़ में कई बाहरी भी थे। हमलावरों में बच्चों के शामिल होने को क्षेत्र में बढ़ती कट्टरता का एक उदाहरण बताया गया है। ये भी पाया गया कि अवैध अतिक्रमण कर के ग्रीन लैंड पर बने घरों से हमले हुए, जो मस्जिद के आसपास हैं।

जहाँगीरपुरी दंगों को लेकर फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी की रिपोर्ट

इस क्षेत्र में चल रहे अवैध व्यापार की ओर भी रिपोर्ट में इशारा किया गया है। यहाँ कई अवैध कबाब की दुकानें चल रही हैं। बताया गया है कि कई अवैध बूचड़खाने और बना दिए गए हैं और खाली सरकारी जमीनों को अवैध पार्किंग में तब्दील कर दिया गया है। अवैध व्यापार के कारण ये अधिक अपराध वाला क्षेत्र है। पुलिस पर स्थानीय लोगों की शिकायतों पर आँख मूँदे रहने के आरोप लगाए गए हैं। बताया गया है कि लोग इस क्षेत्र में जाना नहीं चाहते।

इन सबके अलावा इस क्षेत्र में होने वाली चेन छीनने जैसी घटनाओं की ओर इशारा किया गया है और लिखा है कि रात के अँधेरे में यहाँ कोई नहीं निकलना चाहता। महिलाओं के लिए ये जगह खासा असुरक्षित है। याद दिलाया गया है कि कैसे 18 अप्रैल, 2022 को घटना की जाँच करने गए क्राइम ब्रांच के अधिकारियों पर भी पत्थरबाजी हुई। कानून-व्यवस्था स्थापित करने की किसी भी कोशिश का जवाब यहाँ पत्थरबाजी से ही दिया जाता है।

इफ्तार पार्टी, पिटाई, इस्तीफा, माँ… लालू के परिवार में क्या चल रहा है, क्या अबकी बार अपने ही ‘अर्जुन’ का लालटेन बुझा देंगे स्वयंभू ‘कृष्ण’

बिहार में डेढ़ दशक शासन कर लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने जंगलराज की ख्याति अर्जित की थी। 2005 में बीजेपी नीत एनडीए की सरकार बनने के बाद इस जंगलराज का तो सफाया होगा, लेकिन इसकी प्रवर्तक पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर कब्जे को लेकर लालू प्रसाद यादव के कुनबे की लड़ाई थमने का नाम नहीं ले रही है। औपचारिक तौर पर लालू पार्टी अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव के हवाले कर चुके हैं। लेकिन, सांसद बेटी मीसा भारती हो या फिर विधायक बेटे तेजप्रताप यादव वे भी पारिवारिक पार्टी पर कब्जे को लेकर समय-समय पर प्रयासरत रहते हैं। कभी पर्दे के पीछे से तो कभी खुलकर।

इसी कड़ी में तेज प्रताप यादव ने सोमवार (25 अप्रैल 2022) को ट्विटर पर धमाका किया। उन्होंने लिखा, “मैंने अपने पिता के नक्शे कदम पर चलने का काम किया। सभी कार्यकर्ताओं को सम्मान दिया। जल्द अपने पिता से मिलकर अपना इस्तीफा दूँगा।” ट्वीट में उन्होंने पिता लालू यादव, माँ राबड़ी देवी, भाई तेजस्वी यादव और बहन मीसा भारती को भी टैग किया है।

इस्तीफे के ऐलान कुछ देर बाद उन्होंने फेसबुक पर माँ राबड़ी देवी के साथ एक तस्वीर साझा की। तस्वीर में माँ (राबड़ी देवी) प्यार से उनके (तेज प्रताप) सिर को सहलाती दिख रही हैं। माना जा रहा है कि तेज प्रताप ने इस तस्वीर से यह संकेत देने की कोशिश की है कि इस पारिवारिक झगड़े में माँ उनके साथ है। हालाँकि, अभी तक राबड़ी, लालू या तेजस्वी का रुख इस पर सामने नहीं आया है।

तेज प्रताप ने फेसबुक पर शेयर किया राबड़ी देवी के साथ फोटो (साभार: Tej Pratap Yadav Facebook)

फेसबुक पेज एक नेता का किया वीडियो शेयर

तेज प्रताप यादव ने सोमवार आधी रात के बाद अपने फेसबुक पेज पर छात्र संगठन जनशक्ति परिषद के एक नेता का वीडियो भी शेयर किया। शेयर किए गए वीडियो में कहा गया है कि जो लोग परिवार में फूट डालना चाहते हैं, उन्होंने रामराज को स्क्रिप्ट लिखकर दी है और उन्हीं के इशारे पर सब कुछ हो रहा है। आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह का नाम लेते हुए एक बार फिर उन पर ठीकड़ा फोड़ा गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि लालू और तेजस्वी यादव को गाली देने का आरोप गलत है। तेज प्रताप ने अपने पिता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव का पैर धोकर पिया है। ऐसा पुत्र इस युग में होना मुश्किल है और बड़े भाई होने की वजह से विरासत के पहले हकदार होते हुए भी उन्होंने अपने छोटे भाई को मुख्यमंत्री का दावेदार बनाया। तो ये एक स्क्रिप्टेड ड्रामा है, जो कि फ्लॉप है।

बता दें कि तेज प्रताप के इस्तीफे वाले ट्वीट से पहले राजद के पटना महानगर अध्यक्ष रामराज यादव ने आरोप लगाया था कि 22 अप्रैल 2022 को राबड़ी देवी के आवास पर हुई इफ्तार पार्टी के दौरान उन्हें कमरे में बंद कर बुरी तरह से पीटा गया। रामराज यादव का कहना था कि वे तेजस्वी यादव का समर्थन करते हैं, इसलिए तेज प्रताप यादव ने उन्हें नंगा कर पीटा। उनका दावा था कि तेज प्रताप ने तेजस्वी यादव और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह को भद्दी-भद्दी गालियाँ भी दी। हालाँकि, तेज प्रताप रामराज के आरोपों को नकारते हुए दावा किया था कि ये सब जगदानंद सिंह और सुनील सिंह के इशारे पर किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल को तेज प्रताप को इफ्तार पार्टी में छोटे भाई तेजस्वी यादव, माँ राबड़ी देवी और सीएम नीतीश कुमार के साथ बैठे देखा गया था। इस पार्टी के बाद तेज प्रताप ने मीडिया से बातचीत में कहा था, “नीतीश कुमार और हमारे बीच जो बातचीत हुई, वो सीक्रेट है। समय आने पर बताएँगे। लेकिन, सरकार हमारी ही बनेगी। बिहार में खेला होगा।”

गौरतलब है कि सार्वजनिक मंचों से छोटे भाई तेजस्वी को ‘अर्जुन’ और खुद को ‘कृष्ण’ बताने वाले तेज प्रताप के बीच यह अदावत तब से ही चल रही है, जब महागठबंधन सरकार में तेजस्वी को उप मुख्यमंत्री और तेज प्रताप को केवल मंत्री बनाया गया था। ज्यादातर मौके पर इसे लड़ाई के एक केंद्र राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह भी रहे हैं। जाहिर है कि यह लड़ाई नहीं है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि स्वयंभू कृष्ण इस बार अपने अर्जुन और जंगलराज वाली उनकी पार्टी के सदा-सदा के लिए साथ छोड़ देंगे या फिर इस फैमिली ड्रामे का अंत उसी तरह होगा जैसे खौलते दूध का बुलबुला आखिर में दूध में ही मिल जाता है।

‘सबसे बेकार हेमंत सरकार’: 3 साल बाद फिर पावर कट से बिगड़ा साक्षी धोनी का मूड, बिजली संकट पर झारखंड सरकार को लगाई लताड़

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह की पत्नी साक्षी धोनी ने झारखंड में बिजली की कमी का मुद्दा एक बार फिर से सोशल मीडिया पर उठाया है। उन्होंने अपनें इंस्टाग्राम पर बताया था कि कैसे उनका क्षेत्र बिजली कटौती की समस्या से जूझ रहा है और उन लोगों को बिजली नहीं मिल पा रही। अब उन्होंने इसी समस्या पर करदाता होने के नाते जवाब माँगा है।

अपने ट्विटर पर उन्होंने लिखा, “झारखंड के एक करदाता के रूप में, मैं सिर्फ यह जानना चाहती हूँ कि झारखंड में इतने सालों से बिजली संकट क्यों है? हम ऊर्जा की बचत करने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं!”

साक्षी के इस ट्वीट के बाद इस समस्या से जूझने वाले तमाम लोग उन्हें रिप्लाई देकर हालातों के बारे में बताने लगे। आलोक प्रसुन्न जिन्होंने 2021 में बताया था कि हजारीबाग में 15-16 घंटे बिजली नहीं रहती, उन्हीं आलोक ने कहा, “साक्षी मैम ये हाल तब है जब आप राज्य की राजधानी राँची में रहती हैं, सोचिए अन्य शहरों के क्या हाल हैं। ये हर झारखंडी की किस्मत बन गई है। हेमंत सोरेन सरकार पहली सभी सरकारों से भी घटिया है कि बिजली भी नहीं दे सकती।”

बता दें कि ये पहली बार नहीं है कि साक्षी ने राज्य में बिजली कटौती का मुद्दा सोशल मीडिया पर उठाया हो। उन्होंने साल 2019 में भी ऐसा ही एक पोस्ट किया था और राँची के लोगों की आवाज उठाते हुए कहा था, “राँची के लोगों के घर हर दिन 4-7 घंटे बिजली जाती है।”

उन्होंने 19 सितंबर 2019 को लिखा था कि उनके घर 5 घंटे से बिजली नहीं है जबकि मौसम भी ठीक है और कोई त्योहार भी नहीं है। अपने पोस्ट में उन्होंने उम्मीद जताई थी कि उनकी समस्या संबंधित अधिकारियों द्वारा सुनी जाएगी। हालाँकि, उस पोस्ट के 3 साल बाद भी ऐसा लगता है कि झारखंड के हालात सुधरे नहीं हैं जो झारखंड के सबसे बड़े करदाताओं में शुमार महेंद्र सिंह धोनी के परिवार को भी इसकी शिकायत करनी पड़ रही है।

अलवर में मंदिर तोड़े जाने के बाद 3 पर गिरी गाज: SDM-नगरपालिका बोर्ड अध्यक्ष-EO सस्पेंड, कॉन्ग्रेस MLA पर कार्रवाई कब

राजस्थान सरकार ने अलवर जिले के राजगढ़ अनुमंडल दंडाधिकारी (SDM) केशव कुमार मीणा, राजगढ़ नगर पालिका बोर्ड के अध्यक्ष सतीश दुहरिया और स्थानीय नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) बनवारी लाल मीणा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बुलडोजर से मंदिर तोड़े जाने के बाद इन अधिकारियों की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे थे। SDM और EO के खिलाफ शिकायत भी की गई थी।

महंत प्रकाश दास ने राजगढ़ SDM केशव कुमार मीणा और स्थानीय नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) बनवारी लाल मीणा के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। इसमें धार्मिक भावनाओं को आहत करने और अधिकारियों द्वारा मंदिर परिसर में जूते पहनकर घुसने का आरोप लगाया था। साथ ही मूर्तियों को ड्रिल मशीन और हथौड़े से भी तोड़ने की बात कही गई थी।

मंदिर तोड़े जाने में अधिकारियों के साथ ही कॉन्ग्रेस विधायक की भूमिका पर भी सवाल उठे थे। ब्रज विकास परिषद ने मामले में शिकायत करते हुए SDM और EO के साथ ही कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक जौहरी लाल मीणा पर भी आरोप लगाया गया था। बृज विकास परिषद के अध्यक्ष और शिकायतकर्ता पंकज गुप्ता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा था कि इस घटना के मुख्य जिम्मेदार कॉन्ग्रेस विधायक जौहरी मीणा हैं। उनका और उनके बेटे का आपराधिक इतिहास है। भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने भी मंदिर तोड़े जाने के लिए कॉन्ग्रेस विधायक को जिम्मेदार ठहराया था। लेकिन प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने अब तक अपने विधायक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।

वहीं मंदिर तोड़े जाने के कुछ दिन बाद ही अलवर के पूर्व कलेक्टर नन्नूमल पहाड़िया को पाँच लाख रुपए की घूस लेते गिरफ्तार किया गया था। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने पूर्व कलेक्टर के साथ आरएएस अधिकारी अशोक सांखला और दलाल नितिन को भी गिरफ्तार किया था। तलाशी में आईएएस पहाड़िया के बंगले से महँगी शराब की 17 बोतलें भी बरामद हुई थी।

नन्नूमल पहाड़िया का 14 अप्रैल को ही तबादला हो गया था। सरकार ने उन्हें जिला कलेक्टर के पद से हटाकर विभागीय जाँच आयुक्त नियुक्त किया था। इस पद पर बैठा अफसर सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों की गड़बड़ियों की जाँच करता है, हालाँकि इससे पहले ही वह रिश्चतखोरी के मामले में गिरफ्तार हो गए।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान के अलवर जिले के राजगढ़ में वर्षों पुराने हिंदू मंदिर को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया था। मास्टर प्लान का हवाला देते हुए नगरपालिका प्रशासन ने तथाकथित 35 अतिक्रमण हटाए थे। इसी दौरान 300 साल पुराने मंदिर पर भी बुलडोजर चला था। साथ ही आसपास के घरों को भी अतिक्रमण बताकर तोड़ा गया था। कई मूर्तियाँ खंडित हो गई थीं।

ट्विटर की नौकरी बस 6 महीने ही सेफ: रिपोर्ट में दावा- कर्मचारियों को इमरजेंसी मीटिंग में मिला संदेश, एलन मस्क के हाथों बिकने के बाद बदलावों पर भी ब्रेक

दुनिया के सबसे अमीर आदमी एलन मस्क के हाथों ट्विटर के बिकने के बाद खबर आ रही है कि कंपनी ने प्लेटफॉर्म पर शुक्रवार तक बदलावों पर ब्रेक लगा दिया है। यानी माइक्रोब्लॉगिंग साइट के कर्मचारियों के लिए प्लेटफॉर्म पर किसी भी प्रकार का अनाधिकृत बदलाव करना संभव नहीं होगा। यह फैसला सुरक्षा लिहाज से लिया गया है। आशंका है कि इस डील से नाराज कोई कर्मचारी खुन्नस में किसी तरह का अनुचित बदलाव न कर दे। मस्क ने यह कंपनी 43 अरब डॉलर (3.2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा) में खरीदी है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी से जुड़े एक व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर खुलासा किया कि ट्विटर फिलहाल कोई प्रोडक्ट अपडेट को अनुमति नहीं देगा जब तक कि वो बिजनेस से जुड़े नहीं होते। प्रोडक्ट अपडेट के लिए कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट से अनुमति लेना अनिवार्य है। रिपोर्ट की मानें तो ये फैसला उन कर्मचारियों की दुष्टता से बचने के लिए लिया गया है जो डील से नाराज होकर कंपनी के लिए दिक्कत खड़ी कर सकते हैं।

गौरतलब है कि एलन मस्क द्वारा ट्विटर खरीदे जाने के बाद कंपनी के कई कर्मचारियों में इस डील को लेकर गुस्सा है। सामान्य जन भी ये सोच रहे हैं कि आखिर दुनिया का सबसे अमीर आदमी इतनी बड़ी कीमत में ये प्लेटफॉर्म लेकर करेगा क्या? या वो इसमें क्या बदलाव करेगा? कहीं पुराने कर्मचारियों की नौकरी तो नहीं जाएगी।

तो, बता दें कि, मस्क और ट्विटर के बीच हुई इस डील के बाद ये प्लेटफॉर्म प्राइवेट प्लेटफॉर्म बनेगा। एलन मस्क संभव है साल भर के अंदर ही इस कंपनी के अधिकारिक तौर पर मालिक बन जाएँ। पहले उन्होंने ट्विटर की 9 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की बात की थी। लेकिन अब उनके पास 100 फीसदी स्टॉक होने जा रहा है।

ट्विटर कंपनी में हुई इस उथल-पुथल के बीच कंपनी की इमरजेंसी मीटिंग हुई और ट्विटर के स्टाफ को बताया गया कि उन सबकी जॉब 6 महीने तक सुरक्षित है जब तक कि मस्क पूरी तरह कंपनी टेक ओवर नहीं करते। कंपनी के सीईओ पराग अग्रवाल और चेयरमैन ब्रेट टेलर ने मीडिया से बात करते हुए ट्विटर में होने वाले बदलाव पर बात की। उन्होंने इस दिन को बेहद भावुक दिन बताया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, आगामी 6 माह में जब तक ये डील क्लोज नहीं होती तब तक वहाँ के स्टाफ की नौकरी पर कोई खतरा नहीं है।

उल्लेखनीय है कि ट्विटर के साथ डील पक्की होने के बाद एलन मस्क ने इस बारे में बात की और कहा कि लोकतंत्र के लिए फ्री स्पीच बहुत जरूरी है। उनका मकसद है कि ट्विटर प्रोडक्ट को आगे बढ़ाया जाए और नए फीचर्स के साथ इसे सबसे बेस्ट स्पेस बनाया जाए। वह बोले कि लोगों का भरोसा जीतने के लिए ट्विटर को और बेहतक बनाने की आवश्यकता है। अपने एक ट्वीट में उन्होंने अपने धुर विरोधियों को भी इस ट्विटर पर रहने को कहा। वह बोले कि उम्मीद है कि उनके विरोधी में ट्विटर पर बने रहेंगे क्योंकि यही तो स्वतंत्र अभिव्यक्ति है।

‘मदरसों की बढ़ती संख्या, सरकारी संपत्ति पर कब्ज़ा, डेमोग्राफी चेंज’: पढ़िए क्या कहती है जहाँगीरपुरी पर फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी की रिपोर्ट

दिल्ली के जहाँगीरपुरी (Jahangirpuri Violence) में हनुमान जयंती के मौके पर 16 अप्रैल को हुई हिंसा पर फैक्ट फाइंडिंग टीम की रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट को बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों के समूह (जीआईए) द्वारा तैयार किया गया है। वर्ष 2015 में इसकी स्थापना की गई थी। जीआईए (GIA) पेशेवर महिलाओं, उद्यमियों, मीडियाकर्मियों और शिक्षाविदों का एक समूह है, जो सामाजिक न्याय और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। बताया जा रहा है कि बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों के समूह ने हिंसा के अगले तीन दिनों तक जहाँगीरपुरी में रहकर वहाँ की जमीनी हकीकत और हिंसा से जुड़े तथ्यों का पता लगाया है।

उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया, “जब हम घटनास्थल पर पहुँचे तो हमें कई ऐसी जानकारी मिली, जो अभी तक किसी के सबके सामने नहीं आई है। हम देखते हैं कि इस इलाके में अवैध गतिविधियाँ, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और कट्टरता अपने चरम पर है। सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। यहाँ अवैध तरीके से निर्माण कार्य हो रहे हैं। अतिक्रमण को नियंत्रित करने के लिए कोई भी प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।” उन्होंने अपनी रिपोर्ट में सिलसिलेवार ढंग से निम्नलिखित पाँच बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की है।

  1. सार्वजनिक भूमि का अतिक्रमण
  2. कबाड़ इकट्ठा करना और उसे बेचना
  3. अवैध पार्किंग
  4. अवैध निर्माण कार्य
  5. जनसांख्यिकीय परिवर्तन, मदरसों की संख्या में इजाफा

उन्होंने एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें जहाँगीरपुरी के डीसी ब्लॉक की रोड पर अवैध पार्किंग दिखाई दे रही है। यहाँ वाहन चालकों से पार्किंग के लिए बहुत अधिक पैसा वसूला जाता है, जिसके चलते यहाँ जबरन वसूली और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा बढ़ा है। यह इलाका आम नागरिकों के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है।

फोटो साभार: GIA

अवैध पार्किंग

इसी तरह की अवैध पार्किंग जहाँगीरपुरी के डीसी ब्लॉक में सरकारी स्कूल के पास भी देखी जा सकती है।

फोटो साभार: GIA

सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा

जहाँगीरपुरी के एफ ब्लॉक में डीडीए फ्लैट के पास एक पार्क का उपयोग कबाड़ को इकट्ठा करने के लिए किया जाता है। यह एक तरह से सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा है। यहाँ कई युवाओं को नशा करते हुए भी देखा जा सकता है। वे भी कबाड़ को इकट्ठा करने और उसका गैरकानूनी तरीके से व्यवसाय करने वाले नेटवर्क का हिस्सा हैं।

फोटो साभार: GIA

जहाँगीरपुरी में मकानों का अवैध निर्माण

यहाँ एक लाइन से घर बने हुए हैं, जो सी ब्लॉक में मस्जिद से सटे हुए हैं। इन्हीं घरों से 16 अप्रैल, 2022 को हनुमान जयंती की शोभा यात्रा पर पथराव शुरू हुआ था। ये ग्रीन लैंड पर अवैध घर हैं।

फोटो साभार: GIA

मदरसों की संख्या बढ़ी

बताया जा रहा है कि इस इलाके में पिछले कुछ वर्षों में मदरसों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि यह जाँच का विषय है कि क्या ये मदरसे ही इस इलाके में महिलाओं और बच्चों को कट्टरपंथी बनाने के लिए जिम्मेदार हैं। 16 अप्रैल 2022 को हुए दंगों की फुटेज में बड़ी संख्या में बच्चों को पथराव में पुलिस और शोभा यात्रा पर पथराव करते हुए देखा गया था।

हनुमान जयंती पर हमला

गौरतलब है कि 16 अप्रैल 2022 को हनुमान जयंती के मौके पर हिंदुओं ने शोभा यात्रा निकाली थी, जिसमें कट्टरपंथी मुस्लिमों ने हमला कर दिया था। कट्टपंथियों ने शोभा यात्रा पर पथराव और काँच की बोतलों से हमला किया था। इस हिंसा में कई लोग बुरी तरह घायल हुए थे। दंगाइयों के द्वारा चलाई गई गोली में एक पुलिसकर्मी भी घायल हो गया था। खास बात ये है कि जहाँगारपुरी की हिंसा में आरोपित अंसार के आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता होने का शक है। उसने दिल्ली चुनाव के दौरान पार्टी के लिए सक्रिय रूप से प्रचार किया था। इस मामले में गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपित की पहचान गुलाम रसूल उर्फ गुल्ली के तौर पर हुई है

‘हम दादागिरी तोड़ना जानते हैं’: लाउडस्पीकर विवाद पर भड़के CM उद्धव, विरोध करने वालों को बताया ‘घंटाधारी हिन्दू’

महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा पर जारी सियासत के बीच राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पहली बार बयान दिया है। उन्होंने सांसद नवनीत राणा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर कोई हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहता है तो घर आए, लेकिन अगर दादागीरी करेगा तो शिवसेना प्रमुख बाला साहब ने हमें इसे तोड़ना सिखाया है।

सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि वो जल्द ही एक जनसभा आयोजित कर फर्जी हिंदू समर्थक कार्यकर्ताओं से बात करना चाहते हैं। शिवसेना प्रमुख कहते हैं कि मेरी कमीज तुम्हारी कमीज से अधिक भगवा कैसे है? इसको लेकर जल्द ही एक बैठक कर इनका मुखौटा उतारूँगा। हिंदुत्व की अनदेखी के आरोप पर ठाकरे कहते हैं कि क्या हिंदुत्व कोई धोती है। उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान की गदा की तरह गदाधारी है। अगर आप हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहते हैं तो फोन कर घर आइए, अगर आप दादागीरी की सहारा लेते हैं तो हम जानते हैं कि इसे कैसे तोड़ना है।

उन्होंने ये भी कहा कि वो गदाधारी हिंदू हैं और बाकी घंटाधारी हिंदू हैं और उनके कार्यकर्ताओं को घंटाधारियों से हिंदुत्व सीखने की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने का एक तरीका होता है। शिवसेना प्रमुख ने पूछा कि क्या वो केवल मुंबई के लोगों के लिए काम करते हैं और मुंबई का विकास करेंगे? उनका ये भी कहना है कि कुछ लोगों के पेट में एसिडिटी हो गई है।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि अमरावती से सांसद नवनीत राणा ने उद्धव ठाकरे के आवास मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने का ऐलान किया था, जिसके बाद 23 अप्रैल, 2022 को मुंबई की खार पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। उन पर मुंबई पुलिस ने राजद्रोह (आईपीसी की धारा 124 A) और धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप लगाए थे। इसके अलावा उन पर आईपीसी की धारा 353 (सरकार काम में बाधा) के तहत केस दर्ज किया गया था।

ट्विटर को मिलेगा नया ‘मालिक’! एलन मस्क के ऑफर को स्वीकार करने के कगार पर बोर्ड, ₹3.2 लाख करोड़ में डील: रिपोर्ट

दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क सोमवार (25 अप्रैल, 2022) की रात माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) के मालिक बन सकते हैं। खबरों की माने तो ट्विटर इंक एलन मस्क (Elon Musk) के प्रस्तावित 54.20 (4183.84 रुपए) डॉलर प्रति शेयर नकद में खरीदने के सौदे के बेहद करीब है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एलन मस्क ने 43 अरब डॉलर (3.2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा) में ट्विटर को 100 फीसदी खरीदने का ऑफर दिया है।

मस्क ने कहा था कि यह उनका ‘सर्वश्रेष्ठ और अंतिम’ ऑफर है। सोमवार (25 अप्रैल 2022) को ट्विटर बोर्ड ने अपने शेयरधारकों से लेनदेन की सिफारिश करने के लिए मुलाकात की है। ऐसे में उम्मीद है कि ट्विटर आज रात तक इस सौदे के लिए राजी हो सकता है। ट्विटर के शेयर प्रीमार्केट ट्रेडिंग में भी उछाल देखने को मिला है। न्यूयॉर्क में ट्रेडिंग शुरू होते ही ट्विटर के शेयर 3.9% बढ़कर 50.84 डॉलर पर पहुँच गए।

शेयरों की ये कीमत चुकाने को तैयार मस्क

इस डील के लिए टेस्ला के सीईओ एलन मस्क हर शेयर का 54.20 डॉलर नकद में देने को तैयार हैं। हाल ही में ट्विटर बोर्ड ने मस्क के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। इसके बाद भी मस्क ने इस डील को लेकर कई ट्वीट किए और अब इस रिपोर्ट में संभावना जताई गई है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत पहले से ज्यादा बेहतर है। बीते दिनों टेस्ला के सीईओ ने कहा था कि उन्होंने इस डील के लिए 46.5 अरब डॉलर की रकम इकठ्ठा कर ली है।

ट्विटर को खरीदने के लिए एलन मस्क ने कंपनी बोर्ड को जो पत्र लिखा था, उसमें उन्होंने कहा था कि ट्विटर में ‘राइट टू स्पीच’ की असीमित क्षमता है, लेकिन वर्तमान हालात में कंपनी अपनी इस क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि ट्विटर को एक निजी कंपनी में बदलने की जरूरत है और वो इसे अनलॉक करना चाहते हैं। उन्होंने वैनक्यूबर में टीईडी कॉन्फ्रेंस में बात करते हुए डील पूरी होने के बाद के अपने प्लान के बारे में भी जिक्र किया था।

मोदी सरकार ने 16 YouTube चैनलों को किया बैन, इनमें 6 पाकिस्तानी: फैला रहे थे भारत विरोधी एजेंडा, 68 करोड़ व्यूअरशिप

केंद्र सरकार (Central Government) ने राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फेक न्यूज फैलाने के आरोप में 16 यूट्यूब चैनलों (YouTube Channel Banned) पर प्रतिबंध लगा दिया है। बैन किए गए चैनलों में 6 पाकिस्तानी थे और बाकी के 10 भारत के ही हैं। सरकार का कहना है कि ये यूट्यूब चैनल भारत में दहशत पैदा करने, सांप्रदायिक विद्वेश फैलाने और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए फेक न्यूज फैला रहे थे। इन्हें भारत में 68 करोड़ से अधिक लोग देखते हैं।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा है कि इन यूट्यूब चैनलों के द्वारा प्रकाशित किए गए कंटेंट में एक समुदाय को आतंकवादी के तौर पर दिखाया गया है। इसके अलावा ये धार्मिक समुदायों के बीच नफरत को बढ़ावा दे रहे थे। इसके जरिए सरकारी व्यवस्था और साम्प्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ा गया। इतना ही नहीं, कोरोना लॉकडाउन को लेकर भी इन यूट्यूब चैनलों ने खूब फेक न्यूज फैलाई, जिससे प्रवासी मजदूरों के लिए खतरा पैदा हुआ।

सरकार का इस मामले में कहा है कि जिन यूट्यूब चैनलों को बैन किया है इन सभी ने इंडियन आर्मी, रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत की स्थिति और जम्मू-कश्मीर जैसे मामलों पर झूठी खबरें चलाई, जिससे देश की संप्रभुता को चोट पहुँचाने का प्रयास किया गया। इससे पहले 23 अप्रैल 2022 को भारत सरकार ने एक एडवायजरी जारी कर इन यूट्यूब चैनलों को झूठे दावे करने से बचने को आगाह किया था।

इससे पहले भी बैन किए जा चुके हैं यूट्यूब चैनल

गौरतलब है कि इससे पहले इसी महीने 5 अप्रैल, 2022 को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश संबंधों और सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित दुष्प्रचार फैलाने के आरोप में 22 YouTube चैनलों और कुछ सोशल मीडिया हैंडल को ब्लॉक कर दिया था। इन सभी पर आईटी एक्ट-2021 के तहत कार्रवाई की गई थी।

इसके अलावा 1 फेसबुक अकाउंट, 3 ट्विटर अकाउंट और 1 वेबसाइट को ब्लॉक करने के संबंध में एक नोटिस जारी किया गया था, जो लगातार भारत के खिलाफ फेक न्यूज फैलाने में लगे हुए थे। इन चैनलों की व्यूअरशिप 260 करोड़ थी।