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‘मुझे हिंदी फ़िल्में करने की ज़रूरत नहीं’: राजामौली की अगली फिल्म में महेश बाबू होंगे हीरो, बॉलीवुड को ऐसे दिखाया आईना

दक्षिण भारतीय सिनेमा इंडस्ट्री के फैंस के लिए काफी खुश करने वाली खबर आई है, क्योंकि ‘मक्खी (2012)’, ‘बाहुबली सीरीज (2015, 2017)’ और हाल ही में ‘RRR’ जैसी ब्लॉकबस्टर फ़िल्में दे चुके निर्देशक एसएस राजामौली की अगली फिल्म में ‘प्रिंस’ महेश बाबू ही होंगे। हालाँकि, हाल के दिनों में हिंदी फिल्मों में उनके डेब्यू को लेकर भी बातें की जा रही थीं। कहा जा रहा था कि वो बॉलीवुड में जल्द ही कदम रख सकते हैं।

हैदराबाद के एक कार्यक्रम में महेश बाबू ने इसका खंडन करते हुए कहा, “मुझे हिंदी फ़िल्में करने की जरूरत नहीं है। मैं सिर्फ एक तेलुगु फिल्म करूँगा और दुनिया भर में लोग मुझे देख सकते हैं। अभी भी वही तो हो रहा है। आप चाहेंगे कि आप सिर्फ एक तेलुगु फिल्म करने की स्थिति में हों।” बता दें कि हाल ही में अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा’ (365 करोड़ रुपए) और पवन कल्याण की ‘भीमला नायक’ (192 करोड़ रुपए) ने दुनिया भर में अच्छी कमाई की है।

अब जब ‘RRR’ 1000 करोड़ रुपए का कारोबार करने की ओर बढ़ रही है, तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री के बढ़ते दबदबे को महसूस किया जा सकता है। एसएस राजामौली की महेश बाबू के साथ अगली फिल्म ‘लार्जर दैन लाइफ’ होगी और इसे बड़े बजट में बनाया जाएगा। इसके लिए दो कहानियों पर चर्चा जारी है। महेश बाबू ने भी कहा कि वो इस प्रोजेक्ट को लेकर खासे उत्साहित हैं। ‘RRR’ की तारीफ करते हुए भी उन्होंने कहा था कि एक तरफ फ़िल्में होती हैं, और फिर एसएस राजामौली की फिल्म होती है।

एसएस राजमुली एक फिल्म बनाने में काफी समय भी लेते हैं। ऐसे में महेश बाबू की नई फिल्म की शूटिंग 2022 के अंत तक शुरू हो सकती है। ‘RRR’ भी पहले ही पूरी हो जाती, लेकिन इसके लेखक और राजामौली के पिता विजयेंद्र प्रसाद ने उन्हें घर पर शांत बैठने को कहा था। ये खुलासा खुद एसएस राजामौली ने किया था। एसएस राजामौली ने महेश बाबू के फैंस से वादा किया कि वो कुछ बड़ा लेकर सामने आएँगे। फ़िलहाल इसके बारे में ज्यादा कुछ खुलासा नहीं किया जा रहा है।

‘भूख से तड़प कर मर जाएँ…’: चीन के शंघाई से नागरिकों का चीखते-चिल्लाते हुए वीडियो, नल में पानी नहीं, सुपरमार्केट खाली

चीन के शंघाई में हालात बद्तर होते जा रहे हैं। कोरोना ने वहाँ जो त्राहि मचाई है वो अलग है, लेकिन जो प्रशासन के कारण वहाँ हालात उपजे हैं उन्होंने नागरिकों को हिंसक बना दिया है। वहाँ लोग खाने के लिए लड़ रहे हैं। बुजुर्गों को समय से दवाई नहीं मिल पा रही। एक वीडियो सामने आया है जिसमें स्थानीय सड़कों पर आकर पीपीई किट पहने लोगों के सामने अपना प्रदर्शन कर रहे हैं। इस वीडियो को विदेशी पत्रकार माइकल स्मिथ ने शेयर किया है। उन्होंने सवाल उठाए हैं कि क्या चीन ऐसे कोरोना को रोकने के लिए ये कड़े प्रतिबंध लगा रहा है जिसे लेकर उसका दावा है कि उसने किसी की जान नहीं ली।

सोशल मीडिया पर यूजर्स उतार रहे गुस्सा

बता दें कि चीन के शंघाई में पहले कोविड के मद्देनजर 5 अप्रैल तक लॉकडाउन था। लेकिन बाद में इसे अनिश्चित समय तक बढ़ा दिया। स्थानीय अब बुनियादी जरूरतें न पूरी होने के चलते प्रशासन से नाराज हैं। वीबो साइट पर लिख लिखकर स्थानीय लोग अपना गुस्सा उतार रहे हैं। इनमें से एक ने लिखा, “मतलब ही नहीं है कि तुम कहाँ रहते हो। तुम्हारे पास पैसे हैं या नहीं। तुम्हें चिंता इस बात की होनी चाहिए कि तुम क्या-क्या खा सकते हो और कैसे करके चीजों को खरीद सकते हो।” वहीं दूसरे शख्स ने प्रशासन को लिखा कि क्या आप चाहते हो कि बोशन के लोग भूख से तड़प कर मर जाएँ।

बता दें कि शंघाई के हाल इस समय ये हैं कि मेडिकल वॉलिंटियर भी महामारी में खाना पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं जबकि उन्हें खुद प्रशासन ने भेजा है। उनके सवाल हैं कि आखिर जो आपूर्ति भेजी जा रही है क्या वो सिर्फ शंघाई लोगों के लिए है। उनके लिए कुछ नहीं जो इस महामारी को झेल रहे हैं। वीडियो सामने आई है जहाँ यूजर्स प्रशासन पर चिल्लाकर बता रहा है कि वो भूख से मरा जा रहा है।

ड्रोन से चीन दे रहा चेतावनी

मालूम हो कि एक ओर शंघाई की ये हालत है और दूसरी ओर से चीन से पिछले दिनों खबरें आई थी कि वहाँ ड्रोन की मदद से स्थानीय लोगों को धमकाया जा रहा है कि वे बालकनी में न आएँ और घर के अंदर ही रहें। हालात ऐसे हैं कि अन्य जगह के लोग शंघाई की स्थिति पर दुख जताने के सिवा कुछ नहीं कर पा रहे। अनुमान लगाया जा रहा है कि शायद 2022 में शंघाई में ऐसी किल्लत रहे।

खाने की किल्लत से जूझ रहा शंघाई शहर

प्रशासन वहाँ लगातर बढ़ते कोरोना की रोकथाम के लिए कदम उठा रहा है लेकिन उनकी सख्ती सामान्य जन को काफी महंगी पड़ रही है। खाने की कमी इस समय शंघाई शहर के नागरिकों के लिए सबसे ज्यादा चिंता की बात है। रिपोर्ट बताती हैं कि वहाँ के सुपरमार्केट खाली हो गए हैं, सरकार समय से डिलिवरी नहीं दे रही। इसके अलावा जो लोग खाने तक अपनी पहुँच बना पा रहे हैं उन्हें फूड प्वॉयसनिंग का  सामना करना पड़ रहा है। उन्हें हालातों के मद्देनजर पुरानी सब्जियाँ खानी पड़ रही हैं। घर में आने वाला पानी भी ऐसा नहीं है कि उसे इंसान पी सके। जिन लोगों के घर में पानी का फिल्टर लगा है वो संख्या शंघाई में बेहद कम है।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि शहर में लॉकडाउन लगने के बाद इस बार आपूर्ति की कमी के अलग-अलग कारण हैं। प्रशासन माल लाने वाले ट्रकों के ड्राइवरों को क्वारंटाइन करता है। माल ढुलाई करने वाले ड्राइवर फिर माल ढुलाई के लिए ज्यादा भुगतान (करीब 2000 यूआन) माँगते हैं और जिन्हें ये देने से मना किया जाता है वो शंघाई में सामान पहुँचाने से मना कर देते हैं।

‘लालच देकर 100 हिन्दुओं का इस्लामी धर्मांतरण’: गुजरात HC ने अब्दुल वहाब की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

गुजरात के भरूच स्थित काकरिया गाँव में 37 हिंदू परिवारों और 100 हिंदुओं का धर्मांतरण कराकर इस्लाम कबूल करवाने के मामले में गुजरात हाई कोर्ट ने सोमवार (4 अप्रैल, 2022) को वरयावा अब्दुल वहाब महमूद नाम के एक इस्लामी मौलवी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी

‘लॉ बीट’ की रिपोर्ट के अनुसार, महमूद को उसके धर्मांतरण के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए 5 अन्य आरोपितों शब्बीरभाई, समदभाई, अब्दुल अजीज, यूसुफ और अय्यूब ने मदद की थी। आरोपित महमूद ने गुजरात के भरूच शहर के आमोद पुलिस स्टेशन में पिछले साल 15 नवंबर 2021 में दर्ज एफआईआर के मामले में एंटीसिपेटरी बेल माँगी थी।

हाई कोर्ट के जस्टिस बीएन करिया ने सुनवाई की। उन्होंने अपने फैसले में कहा, “अभियोजन द्वारा पेश किए गए रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया, ऐसा प्रतीत होता है कि याचिककर्ता ने किसी व्यक्ति को एक धर्म से दूसरे धर्म में बल प्रयोग या प्रलोभन या किसी कपटपूर्ण तरीके से या किसी भी व्यक्ति को सीधे या अन्यथा परिवर्तित करने का प्रयास किया है। धर्मांतरण के लिए प्रेरित किया है।”

जस्टिस बीएन करिया मे कहा, “अदालत के समक्ष रिकॉर्ड में रखे गए दस्तावेजों पर विचार करते हुए अदालत अपीलकर्ता को अग्रिम जमानत पर रिहा करने की प्रार्थना को स्वीकार करने के लिए इच्छुक नहीं है। इसलिए, यह अपील खारिज करने योग्य है और इसे इसे खारिज किया जाता है।”

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि पिछले साल आमोद के काकरिया गाँव के रहने वाले प्रवीणभाई वसंतभाई वसावा (धर्मांतरण के बाद सलमान पटेल) नाम के एक व्यक्ति ने 15 नवंबर, 2021 को भरूच शहर में आमोद पुलिस में शब्बीरभाई बेकरीवाला और समदभाई बेकरीवाला नाम के दो लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उसने दोनों आरोपितों पर उसका धर्मांतरण कराने के बाद जबरन उसका आधार कार्ड में भी नाम बदलवाने का आऱोप लगाया।

प्रवीणभाई के मुताबिक, इन्हीं दोनों आरोपितों ने 15 साल पहले अजीतभाई वसावा नाम के एक हिंदू व्यक्ति को आर्थिक लालच देकर इस्लाम कबूल करवाया था। धर्मान्तरण के बाद उनका नाम ‘अब्दुल अजीज पटेल’ हो गया था। इसके बाद पैसे की लालच में तीनों ने दो अन्य लोगों महेंद्र वसावा (धर्मांतरण के बाद यूसुफ) और रमन वसावा (जो अय्यूब बन गए) का भी धर्मान्तरण कराया। इन सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी, 153 (बी) (1) (सी), 506 (2) और गुजरात धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2003 की धारा 4 के तहत केस दर्ज किया गया था।

एफआईआर के मुताबिक, आरोपितों ने 37 हिंदू परिवारों (100 हिंदुओं) का धर्मांतरण कराया था और एक सरकारी फंडिग से तैयार घर को इबादतगाह बना दिया था। बाद में जब प्रवीण वसावा ने हिंदू धर्म में घर वापसी की बात की तो उसे 26 अक्टूबर 2021 को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई। इसके बाद उन्होंने इस्लामिक कट्टरपंथियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

जब प्रवीणभाई ने फिर से हिंदू धर्म अपनाने की इच्छा व्यक्त की, तो उन्हें पिछले साल 26 अक्टूबर को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई थी। परिस्थितियों और खतरे की तत्काल भावना से मजबूर होकर, उसने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

अदालत के फैसले में कहा गया है, “बाद में जाँच अधिकारी ने आईपीसी की धारा 466, 467, 468 और 471 और अत्याचार अधिनियम की धारा 3 (2) (5-ए) को जोड़ने की माँग करते हुए एक रिपोर्ट दर्ज की। बाद में 16 दिसंबर 2021 को इस मामले में धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम के 4A और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2002 के 84C को प्राथमिकी में जोड़ा गया।”

बाद में इस मामले में जाँच अधिकारी ने 24 दिसंबर 2021 को एक एफिडेविट दायर कर दावा किया कि अपील कर्ता ने धर्मांतरित लोगों को वित्तीय सहायता दी और हिंदू धर्म को नीचा दिखाने वाली मजहबी तकरीरें की थीं।” इसके साथ ही आरोपित यूसुफ, अय्यूब और अन्य एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया, जहाँ उन्होंने वीडियो, भाषण और चैट के जरिए हिंदू समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट किए।

इस मामले में गवाहों ने गवाही दी कि इस्लामिक तकरीरें करने वाले वरयावा अब्दुल वहाब महमूद ने लोगों को कपड़े, दवाइयाँ, एयर कूलर, वाटर कूलर, लॉरी, चाटाई (कालीन) उपहार में देकर इस्लाम कबूल करवाने का लालच दिया था।

पिछले साल 28 दिसंबर को एक विशेष अदालत ने महमूद की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने राहत की माँग करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था। हालाँकि, उनकी याचिका को उच्च न्यायालय ने मामले के प्रथम दृष्टया विवरण के आधार पर खारिज कर दिया था।

गीता फाड़ने से लेकर ‘Pak के लिए सब कुछ कुर्बान’ करने तक, AMU में हिन्दू घृणा पुरानी: अंग्रेजों के आशीर्वाद से स्थापना, जिन्ना की फोटो

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) एक बार फिर से अपने हिन्दू विरोधी रवैये को लेकर चर्चा में है। आमतौर पर यह विश्वविद्यालय देश-दुनिया के लिए लाभकारी शोध की अपेक्षा अपनी सांप्रदायिक और रूढ़िवादी मानसिकता के लिए बदनाम रहता है। अभी वहाँ के एक प्रोफेसर ने हिन्दुओं के देवी-देवताओं का अपमान किया है। हालाँकि, इस तरह की चर्चाओं को पिछले कई सालों से दलित विमर्श का हिस्सा बनाने की कोशिशें होती रही है, लेकिन उसे कभी मान्यता नहीं मिली।

वैसे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी द्वारा इस प्रकार की हिन्दू-विरोधी मिथ्याओं को बढ़ावा देना कोई नया नहीं है। वास्तव में, यह उसके उसी कट्टरपंथी चरित्र का स्पष्टीकरण है, जो कि 1947 से पहले हुआ करता था। इस विश्वविद्यालय की स्थापना सैयद अहमद खान के ‘द्वि-राष्ट्रवाद’ सिद्धांत के आधार पर की गयी थी। शुरुआत 1869 में हुई, जब वे इंग्लैंड के दौरे पर गए थे। लगभग एक साल बाद, 1870 में भारत लौटने के बाद उन्होंने भारतीय मुस्लिमों के बीच अंग्रेजी शिक्षा एवं पश्चिमी संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए जोरदार अभियान चलाया।

इस दौरान उन्हें ब्रिटिश सरकार का भी भरपूर सहयोग मिला। प्रतिष्ठित इतिहासकार, आर.सी. मजूमदार उनके इस प्रयासों को उजागर करते हुए लिखते हैं, “सैयद अहमद के प्रयास सामाजिक एवं धार्मिक सुधारों तक ही सीमित नहीं थे। उन्होंने मुस्लिम राजनीति को एक नया मोड़ दिया जो हिंदू विरोधी हो गई।” सैयद अहमद खान का कर्नल बैक नाम का एक ब्रिटिश सहयोगी था, जो कि कॉलेज की मुखपत्रिका के माध्यम से मुस्लिमों में हिन्दुओं के खिलाफ जहर भरता रहता था।

उसी ने इस बात को मुसलमानों के अन्दर भर दिया था कि भारत के लिए संसदीय व्यवस्था अनुपयुक्त है और इसके स्वीकृत होने की स्थिति में बहुसंख्यक हिन्दुओं का उसी तरह राज होगा जो किसी मुस्लिम सम्राट का भी नहीं था। सैयद के निधन के बाद यह अलीगढ़ योजना जारी रही और आगा खां के नेतृत्व में 1 अक्तूबर 1906 को 36 मुसलमानों का एक दल वायसराय मिन्टो से मिला। इस मुलाकात का मुख्य मकसद मुस्लिमों को हिन्दुओं से अलग ‘सेपरेट इलेक्टोरेट’ और एक अलग मुस्लिम विश्वविद्यालय माँग करना था।

मिन्टो ने उनकी सभी माँगों पर सहमती जताते हुए कहा, “मैं पूरी तरह से आपसे सहमत हूँ। मैं आपको यह कह सकता हूँ कि किसी भी प्रशासनिक परिवर्तन में मुस्लिम समुदाय अपने राजनीतिक अधिकारों एवं हितों के लिए निश्चिंत रहें।” ब्रिटिश सरकार आश्वासन के बाद, 1920 में अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय अस्तित्व में आया और इसी के साथ मुस्लिमों के लिए एक अलग देश की माँग जोर पकड़ती चली गई। पाकिस्तान सरकार द्वारा प्रकाशित ‘जिन्ना पेपर्स’ की प्रस्तावना में उल्लेख है, “अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की तरफ से मोहम्मद अली जिन्ना को दिल से एवं अटूट समर्थन दिया गया था।”

जैसे 2 अक्टूबर, 1945 को विश्वविद्यालय के कुछ मुस्लिम छात्रों ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा कि पाकिस्तान के गठन के लिए वे कुछ भी कुर्बान करने के लिए तैयार है। इसी महीने की 19 अक्टूबर को जिन्ना को अलीगढ़ के रहने वाले मोहम्मद शाहजहाँ का एक पत्र मिला जिसमें उन्होंने लिखा कि इस विश्वविद्यालय के छात्र भारत के मुस्लिमों के ‘हथियार’ है। दरअसल, ऐसे एक नहीं बल्कि हजारों उदाहरण है जो कि इस तथ्य की पुष्टि करते है कि भारत के सांप्रदायिक विभाजन में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की एक बहुत बड़ी भूमिका थी। 

1947 में जब पाकिस्तान बन गया, उसके बाद के सालों में भी वहाँ से भारत एवं हिन्दू-विरोधी गतिविधियाँ उजागर होती रहीं। साल 1956 में एक खबर प्रकाशित हुई कि विश्वविद्यालय के छात्रों ने श्रीमद्भागवतगीता की प्रतियाँ फाड़कर जला दी। कुछ सालों बाद, 12 मार्च 1959 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री, के. एल. माली ने बताया कि विश्वविद्यालय को फोर्ड फाउंडेशन की ओर से 22,14,268 रुपए की सहायता मिली है। जबकि उस दौर में फोर्ड फाउंडेशन अपनी भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए हमेशा सुर्ख़ियों में बना रहता था।

जब 80 के दशक में विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की बहस चल रही थी, तो वहाँ के एक प्रोफ़ेसर ने एक साक्षात्कार में कोई एक वक्तव्य दे दिया। जब साक्षात्कार छापा तो मुसलमान छात्रों ने इसे अपना अपमान समझा और एक आंदोलन छेड़ दिया। धीरे-धीरे यह आन्दोलन सांप्रदायिक दंगों में बदल गया। हालात इतने तनावपूर्ण थे कि छात्रावास खाली करवाने पड़े और कुछ महीनों के लिए विश्वविद्यालय को भी बंद करना पड़ गया था।

इसी तरह, 90 के दशक में भी हर आए दिन सांप्रदायिक तनावों के चलते यूनिवर्सिटी में हंगामा होता रहता और कई बार स्थितियां सँभालने के लिए पुलिस को भी बुलाना पड़ता था। एक लम्बे समय तक विश्वविद्यालय में मजहबी रूढ़िवादी मान्यताओं के चलते महिलाओं को पुस्तकालय में पढ़ने की अनुमति नहीं थी। ‘द टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ में 11 नवम्बर, 2014 को प्रकाशित एक खबर के अनुसार, विश्वविद्यालय के वूमेन कॉलेज की छात्राओं ने माँग उठाई कि उन्हें मौलाना आजाद लाइब्रेरी में पढ़ने दिया जाए।

उनकी इस माँग को उप-कुलपति, जमीरुद्दीन शाह ने यह कहकर ठुकरा दिया कि इससे पुस्तकालय में लड़कों की संख्या चार गुना बढ़ जाएगी। अंततः प्रशासनिक इस मामलें में इलाहबाद उच्चन्यायालय के हस्तक्षेप के बाद छात्राओं को विश्वविद्यालय के पुस्तकालय की सदस्यता दी गई। फिर 2018 में एक और प्रत्यक्ष प्रमाण मिला कि विश्वविद्यालय का जिन्ना के प्रति लगाव एकदम बना हुआ है। अलीगढ़ के लोकसभा सांसद सतीश गौतम ने उप-कुलपति को पत्र लिखकर जवाब माँगा कि आज भी विश्वविद्यालय की दीवार पर जिन्ना की तस्वीर को लगायी गई है?

मामला तब देश भर में चर्चा का मुद्दा बना लेकिन पूरा विश्वविद्यालय प्रशासन जिन्ना की वकालत करने में ही लगा रहा। साल 2019 में भी नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में विश्वविद्यालय के छात्रों ने भारत-विरोधी एवं सांप्रदायिक उन्मांद फैलाने के उद्देश्य से कई दिनों तक उत्पात मचाया था। “हिंदुत्व और सावरकर की कब्र खुदेगी”, जैसे भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले नारे लगाए गए थे। आज अगर इतिहास में पीछे झाँक कर देखे तो अलीगढ़ योजना को एक शताब्दी से भी अधिक का समय हो चुका है लेकिन इस दौरान वहाँ परिवर्तन देखने को नहीं मिला।

‘द्वि-राष्ट्रवाद’ सिद्धांत, सांप्रदायिक कट्टरपंथ एवं रुढ़िवादी सोच आज भी वहां हावी है। यही एक कारण है कि तमाम सुविधाओं के बावजूद भी यह विश्वविद्यालय अपने मूल उद्देश्य से भटका हुआ है और इसलिए इसका वैश्विक रैंकिंग में 1000 से भी ऊपर स्थान रहता है।

महाराष्ट्र में ST कर्मचारियों का आंदोलन जारी: शरद पवार के घर पर चप्पल फेंकने और पथराव करने के आरोप में 107 गिरफ्तार

राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) के मुंबई स्थित घर ‘सिल्वर ओक’ (Silver Oak) के बाहर प्रदर्शन करने वाले महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) के 107 कर्मचारियों को पुलिस ने शुक्रवार (8 अप्रैल 2022) की देर रात गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए लोगों में 23 महिलाएँ भी हैं। मुंबई के गाँवदेवी पुलिस स्टेशन में दर्ज केस में इन प्रदर्शनकारियों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने पवार के घर पर पथराव किया और चप्पलें फेंकी। इनके खिलाफ हिंसा की साजिश रचने और दंगे भड़काने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं, पवार की सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है।

बताया जा रहा है कि शनिवार (9 अप्रैल 2022) को एनसीपी के कार्यकर्ता और नेता राज्य भर में इस घटना के विरोध में मूक मोर्चा निकालने वाले हैं। वहीं, एसटी के कर्मचारी एक बार फिर प्रदर्शन करने के लिए आज दोपहर में मुंबई के सीएसएमटी स्टेशन पहुँचे। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी माँगों को नहीं माना जाता, तब तक वे अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे। ऐसे में मुंबई में सार्वजनिक स्थानों पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है।

इस बीच वकील गुणरत्न सदावर्ते की पत्नी जयश्री पाटील ने आरोप लगाया है कि शरद पवार पुलिस भेजकर उनके पति से बदला ले रहे हैं। गुणरत्न ने गाँवदेवी पुलिस स्टेशन जाते वक्त मीडिया से कहा कि उन्हें बिना कुछ बताए पुलिस स्टेशन लाया गया। उनकी जान को खतरा है और उन्हें कुछ हुआ तो इसके लिए महाराष्ट्र के गृहमंत्री दिलीप वलसे पाटील जिम्मेदार होंगे।

वहीं, पुलिस का कहना है कि उनके हाथ वकील गुणरत्न सदावर्ते के भाषणों की कुछ क्लिप्स लगी हैं। इनमें वह कर्मचारियों को भड़का रहे हैं। उन्होंने गुरुवार के अपने भाषण में 12 अप्रैल को बारामती जाकर शरद पवार की पोल खोलने का आह्वान किया है। इस प्रदर्शन को लेकर एनसीपी चीफ शरद पवार ने कहा कि वे एसटी कर्मचारियों के साथ हैं, लेकिन उनके पीछे के गलत नेतृत्व का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा, “पिछले 50 सालों से मैंने राज्य परिवहन निगम के कर्मचारियों के आंदोलन का नेतृत्व किया है, पर आंदोलन का यह मोड़ लेना गलत नेतृत्व का नतीजा है।”

मालूम हो कि शुक्रवार को एसटी कर्मचारियों ने महाराष्ट्र सरकार पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाते हुए मुंबई में पवार के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। शरद पवार हाय-हाय के नारे भी लगाए थे। यह विरोध प्रदर्शन अभी भी जारी है।

बता दें कि महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) के कर्मचारी नवंबर 2021 से हड़ताल पर हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने (Bombay High Court) MSRTC कर्मचारियों की हड़ताल (MSRTC Strike) को लेकर दो दिन पहले यानी 7 अप्रैल को बड़ा फैसला दिया था। कोर्ट ने कर्मचारियों को 22 अप्रैल तक ड्यूटी पर फिर से लौटने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन कोर्ट के अल्टीमेटम के एक दिन बाद ही कर्मचारियों ने शरद पवार के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

वहीं, हाईकोर्ट के फैसले के बाद परिवहन मंत्री अनिल परब ने भी हड़ताली कर्मचारियों को काम पर लौटने का अनुरोध किया है और उन्हें भरोसा दिलाया है कि जो कर्मचारी ड्यूटी ज्वाइन करेंगे, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। उनकी वाजिब माँगों को पूरा किया जाएगा।

‘AAP सरकार की पंजाब पुलिस भाजपा नेता की माँ-बहन को कर रही परेशान’: BJP नेता ने कहा- सब केजरीवाल के इशारे पर

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और पंजाब पुलिस पर राज्य की बाजेपी ने निशाना साधा है। यह पूरा मामला तजिंदर पाल सिंह बग्गा की गिरफ्तारी से संबंधित है। दिल्ली बीजेपी ने शनिवार (9 अप्रैल 2022) को आरोप लगाया कि बग्गा को दिल्ली में गिरफ्तार करने के लिए आई पंजाब पुलिस जब अपने मकसद में असफल रही तो वो अब उनकी माँ और बहन को प्रताड़ित कर रही है।

बीजेपी नेता प्रवेश साहिब सिंह ने ट्वीट कर केजरीवाल सरकार पर हमला बोला। उन्होने कहा, “पंजाब पुलिस के डीएसपी रात के दो बजे तजिंदर पाल सिंह बग्गा के घर पहुँचे व उनकी माता जी, बहन को परेशान किया। बग्गा जी इस दौरान वहाँ से निकल कर कहीं और गए व चार ठिकाने बदले। पुलिस इन सभी ठिकानों पर पहुँची। मतलब साफ है पुलिस हमारे नेताओं का फोन टैप कर रही है। ये सब केजरीवाल के कहने से हो रहा है।”

एक अन्य वीडियो जारी कर बीजेपी नेता प्रवेश सिंह साहिब ने आम आदमी पार्टी द्वारा पंजाब में किए गए वादों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “क्या पंजाब में लोकतंत्र खत्म हो गया है। क्या पंजाब की जनता ने इस सरकार को केवल इसलिए चुना था कि जिस आम आदमी पार्टी ने गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के आरोपितों को 24 घंटे में जेल में डालने का वादा किया था, इसी पार्टी ने खून खराबे को रोकने का वादा किया था, लेकिन केवल 24 दिनों में ही राज्य में 24 हत्याएँ हुई हैं।”

पंजाब में ड्रग्स तस्करी के मामले पर भी दिल्ली बीजेपी ने आम आदमी पार्टी को घेरा। बीजेपी नेता प्रवेश सिंह साहिब ने कहा कि 24 घंटे के भीतर ड्रग्स को रोकने का वादा किया गया था… यह सिर्फ वादा ही रह गया। सारे काम छोड़कर पंजाब पुलिस अरविंद केजरीवाल को लेकर दिल्ली से ट्वीट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के फिराक में लगी हुई है।

गौरतलब है कि तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के दिल्ली स्थित घर पर शनिवार (2 अप्रैल 2022) को पंजाब पुलिस पहुँची थी। हालाँकि, वो वहाँ नहीं मिले। पुलिस के इस एक्शन के बाद एक बार फिर से बग्गा ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा था।

बग्गा ने कहा था, “मेरे खिलाफ एक नहीं 100 FIR करो, लेकिन अगर केजरीवाल कश्मीरी पंडितों के नरंसहार को झूठा बोलेगा तो मैं विरोध करूँगा, अगर वो कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर ठहाके लगा के हँसेगा तो मैं विरोध करूँगा, उसके लिए मुझे जो भी अंजाम भुगतना पड़े, मैं तैयार हूँ।”

इस मामले में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब पुलिस को हद में रहने की नसीहत देते हुए उसे सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की याद दिलाई थी।

‘हिन्दुओं को AK-47 से मारूँगा, उनकी माँ-बहनों का बलात्कार करूँगा’: नदीम को लेने पहुँची असम पुलिस, राजस्थान पुलिस ने किया गिरफ्तार

इंस्टाग्राम पर 6 अप्रैल, 2022 को नदीम और उसकी दोस्त शबनम के बीच बातचीत की एक ऑडियो वायरल हुई थी। दावा किया जा रहा है कि इस क्लिप में नदीम ने हिन्दुओं को पहचान कर उनके रेप और हत्या करने की बात कही है। अब आरोपित नदीम को राजस्थान की बीकानेर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस केस में शबनम को भी आरोपित किया गया है। यह गिरफ्तारी 8 अप्रैल, 2022 (शुक्रवार) को की गई है। नदीम पर असम के गुवाहाटी में भी केस दर्ज है।

नदीम की गिरफ्तारी की पुष्टि बीकानेर के नवा शहर थाने के सब इंस्पेक्टर चंद्रजीत सिंह ने भी की है। उन्होंने बताया, “सोशल मीडिया पर एक भड़काऊ ऑडियो के मामले में नदीम के खिलाफ बीकानेर में पुलिस को शिकायत मिली थी। हमने नदीम को गिरफ्तार कर लिया है। वो हमारी कस्टडी में है और उस से पूछताछ चल रही है। उस पर धारा 295 (A) व अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जाँच के बाद इस मामले में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, असम पुलिस की भी एक टीम राजस्थान में मौजूद है। वह नदीम को अपनी कस्टडी में लेने का प्रयास कर रही है। नदीम और शबनम का यह आपत्तिजनक ऑडियो बुधवार (6 मार्च) को वायरल हुआ था। इस बातचीत में नदीम न सिर्फ हिन्दुओं बल्कि उनके देवी-देवताओं के खिलाफ भी आपत्तिजनक बातें करता सुनाई दे रहा है। नदीम को शनिवार (9 अप्रैल) को अदालत में पेश किया गया है।

गौरतलब है कि वायरल हुई क्लिप में आवाज नदीम की बताई जा रही है। उस क्लिप में नदीम को कहते सुना गया, “मेरे पास AK 47 होती तो मैं इस से मैं हिन्दुओं को मारता। हिन्दू महिलाओं का बलात्कार किया जाना चाहिए।” नदीम ने गाय कटने की बात करते हुए पुलिस और प्रशासन को भी अपनी ऑडियो में चुनौती दी है। नदीम के आवाज पर शबनम बार-बार हँस रही थी। यह ऑडियो वायरल होने के बाद शबनम ने विक्टिम कार्ड खेलते हुए कहा कि उन्हें मैसेज में धमकियाँ दी जा रही हैं। शबनम के मुताबिक, अगर मामला बहुत आगे बढ़ा तो वो आत्महत्या कर लेंगी।

‘…तो छाती में छुरा मार देता… मैं भिखमंगा हूँ… देश ने मुझे जूते मारे हैं’ – राहुल गाँधी

कॉन्ग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) का विवादों के साथ चोली-दामन का संबंध है। वे जब भी कुछ कहते हैं तो उस पर विवाद हो जाता है। शनिवार को दिल्ली के जवाहर भवन में दलितों पर लिखी पुस्तक ‘द दलित ट्रुथ’ के विमोचन के दौरान ऐसा कुछ उन्होंने कहा, जिससे विवाद हो गया है। लोग उन पर दलितों को उकसा कर समाज में हिंसा फैलाने का आरोप लगा रहे हैं।

दलितों का दर्द बाँटने के लिए पहुँचे राहुल गाँधी ने विमोचन के दौरान उत्तर प्रदेश के उना की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी घटना उनके साथ हुई होती, उनके भाई को मारा गया होता तो वे आत्महत्या करने की जगह आरोपितों का पता लगाते और उन्हें चाकू मार देते। पीड़ित युवकों से मिलने के दौरान हुई बातचीत का जिक्र करते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि जब आत्महत्या करना ही है तो मार कर मरना चाहिए।

राहुल गाँधी के ट्विटर हैंडल द्वारा शेयर किए गए उन्हें वीडियो में 15वें मिनट से लेकर 26वें मिनट तक में इस पूरे प्रसंग को सुना जा सकता है। इस दौरान राहुल गाँधी ने अपने पिता राजीव गाँधी की हत्या का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे अपने पिता के हत्यारों को माफ कर चुके हैं, लेकिन उना कांड के पीड़ितों में अगर वे शामिल रहते तो आरोपितों को चाकू जरूर मारते।

राहुल गाँधी ने कहा, जब मैं एक पीड़ित से अस्पताल में मिला तो वह बोला कि जब मैंने व्हाट्सएप देखा तो उसमें मेरे भाई को कुत्ते जैसे मारा जा रहा था और मैं उसे सह नहीं पाया और घर घर जाकर कीटनाशक पी लिया। दूसरे से पूछा उसने कहा कि इस हिंसा को सह नहीं पाया और घर के पीछे जाकर कीटनाशक पी लिया।”

कानून के पास जाने के बजाए आरोपितों को चाकू मारने के अपने सुझाव को ‘आइडिया’ बताते हुए राहुल गाँधी ने कहा, “मैंने सोचा कि ये घर के पीछे जाकर क्यूँ कीटनाशक पी रहे थे? जैसे ये मैं सोच रहा था, मेरे दिमाग में एक दूसरा आइडिया आया। कहने से झिझक रहा हूँ। मेरे दिमाग में आई कि अगर मैं इसकी जगह होता और मैं मरने के लिए तैयार होता तो मरने से पहले जिसने मेरे भाई को मारा था उसको मार देता।”

अपनी आइडिया को विस्तार से बताते हुए राहुल गाँधी आगे कहते हैं, “मैंने उससे (अस्पताल में भर्ती उना कांड का पीड़ित से) कहा कि जिसने आपके भाई को मारा उसके नाम का पता लगा सकते हो। उसने कहा हाँ। तो मैंने कहा कि आपके रसोई में छुरी है। उसने कहा कि हाँ है। उसने पूछा कि ऐसा क्यों पूछ रहे हो। मैंने कहा कि अगर मैं आपकी जगह होता और मैं अपने आपको लाश बनाने के लिए तैयार होता, आत्महत्या करने के तैयार होता तो उससे पहले ये पता लगाता कि ये कौन है जिसने मेरे भाई को मारा। रसोई से चाकू निकालता, बस में जाता, उसके घर जाता और छाती में छुरा मार देता।”

उन्होंने कहा, “मेरे दिमाग में आया कि अगर मेरी बहन को किसी ने बांधकर कुत्ते जैसे मारा होता तो मैं आत्महत्या करने से पहले उसको एक चाकू तो मार देता। मेेरे पिता के खिलाफ हिंसा किया गया, उन्हें मारा गया। लेकिन मेरे दिल में पिता के हत्यारों के खिलाफ कोई नफरत नहीं है। मगर जब मैं अस्पताल में था तो मैंने सोचा कि अगर मेरे साथ ऐसा होता तो मैं मार देता।”

मैं प्रेमी की तरह देश को समझने की कोशिश कर रहा हूँ

राहुल गाँधी ने कहा कि वह एक प्रेमी की तरह है और उसी भाव से देश को समझने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे सत्ता के बीचों-बीच पैदा हुए हैं, लेकिन वो सत्ता के बजाए देश के बारे में हमेशा सोचते रहते हैं। उन्होंने कहा कि वो रात में सोते समय देश को समझने की कोशिश करे हैं।

राहुल गाँधी ने कहा, “मैं सत्ता के बीच में पैदा हुआ। बिल्कुल बीच में हूँ। बड़ी अजीब से बीमारी है… मुझे उसमें इंटरेस्ट ही नहीं है। क्यों… मैं रात को सोता हूँ, अपने देश को समझने की कोशिश करता हूँ। जैसे एक प्रेमी होता है और जिससे वह प्रेम करता है उसे समझने की कोशिश करता है, वैसे ही मैं सुबह उठकर समझने की कोशिश करता हूँ।”

मैं भिखमंगा हूँ… देश ने मुझे जूते मारे: राहुल गाँधी

इस दौरान राहुल ने कहा, “मैं भिखमंगा हूँ। सुनो क्यों…. क्योंकि मेरे देश ने बिना कोई कारण पूरा का पूरा प्यार मुझे दे दिया। तो मेरे ऊपर एक कर्ज है।” उन्होंने आगे कहा, “देश ने मुझे सिर्फ प्यार ही नहीं दिया, देश ने मुझे जूते भी मारे हैं। आप समझ नहीं सकते कि कितनी जोरों से, कितनी हिंसा से इस देश ने मुझे मारा है, पीटा है। जब मैंने इस पर सोचा तो जवाब मिला कि देश मुझे सिखाना चाह रहा है।”

पुनर्जन्म और भाजपा नेता

इस दौरान राहुल गाँधी ने भगवान राम और पुनर्जन्म की बात की। उन्होंने कहा कि संसद में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता से उनकी मुलाकात हुई। खाना-पान और व्यायाम वगैरह की बात हो रही थी। इसी दौरान उन्होंने भाजपा के उस नेता औस राम और पुनर्जन्म की बात भी की।

राहुल गाँधी ने कहा, “मैंने उनसे पूछा कि क्या आप पुनर्जन्म में विलीव करते हो। कहता है मैं तो नहीं करता। फिर मैंने कहा कि जब पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करते हो तो राम में विश्वास कैसे कर सकते हो। वह चौंक गया। कहता बात तो सही है, बाहर किसी को मत बता देना।”

अयोध्या में बनने जा रही रामायण यूनिवर्सिटी, 100 दिन के अंदर काम शुरू: योगी सरकार ने चिह्नित की 21 एकड़ भूमि

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में योगी सरकार महर्षि विद्यापीठ ट्रस्ट के साथ रामायण विश्वविद्यालय बनवाने जा रही है। 100 दिन के अंदर इसकी स्थापना की जाएगी। इस विश्वविद्यालय के लिए ट्रस्ट ने 21 एकड़ भूमि चिह्नित की है। बताया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी का काम योगी सरकार की 100 दिन की कार्य योजना में सबसे शीर्ष पर है।

प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने समीक्षा करते हुए इस बाबत बताया कि संस्कृति विभाग की ओर से आगामी 100 दिन में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए महर्षि विद्यापीठ ट्रस्ट के साथ एमओयू साइन किया जाएगा।

वहीं विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने इस विश्वविद्यालय को लेकर बताया, “महर्षि विद्यापीठ संस्थान के साथ हमने वार्ता प्रारंभ की है क्योंकि उन्होंने पहले से ही इस विश्वविद्यालय के लिए भूमि अधिग्रहण भी कर रखा है और उनके द्वारा रामायण विश्वविद्यालय का एक खाका प्रस्तुत भी किया गया है। इस समय उच्च शिक्षा विभाग के पास में मंथन चल रहा है। जो संस्कृति विभाग है वो साथ में मिल कर के इस विश्वविद्यालय को स्थापित कराने में पूर्ण सहयोग देगा और एक अहम भूमिका अदा करेगा।”

योगी सरकार की 100 दिन की कार्य योजना

प्रमुख सचिव ने 100 दिन की कार्य योजना प्रस्तुत करते हुए जानकारी दी कि अयोध्या शोध संस्थान द्वारा राम नवमी के मौके पर ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ द रामायण के तहत 10 ग्रन्थों का प्रकाशन एवं विमोचन किया जाएगा। इसका उद्देश्य विज्ञान एवं आध्यात्म के अनेक पहलुओं को जनता तक पहुँचाना होगा।

इसके बाद योगी सरकार की कार्य योजना में लखनऊ में जनजातीय संग्रहालय की स्थापना के लिए भूमि पूजन और कबीर अकादमी, मगहर के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण भी शामिल है। इनके अलावा राज्य ललित कला अकादमी में कलाकृति विक्रय केंद्र की स्थापना होगी। इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र भारत सरकार की योजना के तहत पांडुलिपि रिसोर्स सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। आगे आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत ज्ञात व अज्ञात शहीदों के जीवन एवं योगदान पर लिखी गई 10 पुस्तकों का प्रकाशन किया जाएगा।

भगवान श्रीराम के नाम पर बनेगा एयरपोर्ट

बता दें कि योगी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में भी अयोध्या का कायापलट करने के लिए प्रतिबद्ध है। यहाँ जैसे रामायण यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए वार्ता शुरू हो हई है। वैसे ही मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का काम भी जोरो पर है। इसका विकास तीन चरण में किया जाएगा। एयरपोर्ट के विकास हेतु 821 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। राज्य सरकार ने इसके लिए 1008.77 करोड़ रुपए धनराशि स्वीकृत की है।

‘जय श्री राम’ लिखने की सज़ा: मुनव्वर और उसकी बीवी को अपने ही समुदाय के लोगों ने घर में घुस कर मारा, 4 साल की बेटी को पटका

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भाजपा विधायक की फेसबुक पोस्ट पर मुनव्वर अंसारी को ‘जय श्री राम’ लिखना बहुत भारी पड़ा। इसको लेकर मुनव्वर अंसारी के समुदाय के लोगों ने उसे और उसकी पत्नी को बुरी तरह पीटा। यही नहीं मुस्लिम लोगों ने मुनव्वर घर में तोड़फोड़ की, उसे कौम का गद्दार बताया और उसकी 4 साल की बेटी को उठाकर पटक दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोकता के रहने वाले मुनव्वर अंसारी ​​​​​पेशे से कारपेंटर है। उन्होंने बताया कि वह भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के कट्टर समर्थक हैं। उन्होंने विधायक रामेश्वर शर्मा की फेसबुक पोस्ट को लाइक किया और कमेंट बॉक्स में ‘जय श्रीराम’ लिखा था। उसका पोस्ट पढ़ने के बाद मोहल्ले में रहने वाले सोहेल अहमद ने अपने समुदाय के लोगों को भड़काना शुरू कर दिया था। उसने (सोहेल) उन लोगों से कहा कि मुनव्वर हिंदूवादी नेताओं का साथ देता है। वह अपनी कौम के साथ गद्दारी कर रहा है।

मुनव्वर का आरोप है कि बुधवार (6 अप्रैल, 2022) शाम को सोहेल अपने 10–15 लोगों के साथ उसके घर में घुस गया। उन लोगों ने मुनव्वर और उनकी पत्नी को बुरी तरह पीटा। घर का सामान भी बाहर फेंक दिया। उन लोगों ने उसके मासूम बच्चे के साथ भी मारपीट की।

मुनव्वर और उसकी पत्नी को बुरी तरह पीटा (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)

मुनव्वर का कहना है कि घटना के दौरान कोई भी पड़ोसी उसे बचाने के लिए आगे नहीं आया। उसके फोन करने पर पुलिस की वैन तो बस्ती में आई थी, लेकिन उसका बयान लिए बिना ही वापस चली गई। इसके बाद उसने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था।

मुनव्वर का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई। बिलखिरिया के थाना प्रभारी रामबाबू चौधरी ने बताया कि मुनव्वर ने उन लोगों के खिलाफ शिकायत की है। हमें घटनास्थल पर तोड़फोड़ करने के साक्ष्य नहीं मिले हैं। आसपास के लोगों ने भी घटना के बारे में अभी तक कुछ नहीं बताया है। हम इस मामले की जाँच कर रहे हैं। उधर इस मामले में विधायक रामेश्वर शर्मा ने मामले की जाँच कर दोषी के खिलाफ मामला दर्ज करने की सिफारिश की है।