Home Blog Page 2843

ISIS से मुर्तजा अब्बासी के लिंक, जिहादी वीडियो भी मिले: रिपोर्ट्स में दावा, उस गेट पर किया था हमला जिसका CM योगी करते हैं इस्तेमाल

गोरखनाथ मंदिर में हुए हमले को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। खबर है कि मंदिर पर हुए इस अटैक से पहले खुफिया एजेंसियों ने इस प्लॉनिंग का पता लगा लिया था। उन्होंने राज्य पुलिस के साथ बैठक में 16 नाम भी साझा किए थे जिनपर उन्हें शक था। इस लिस्ट में मुर्तजा अब्बासी भी एक नाम था। मुर्तजा के लिंक ISIS से जुड़े बताए जा रहे हैं। कोर्ट ने उसे फिलहाल 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

सीएनएन-न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2022 को खुफिया एजेंसियों ने उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ 16 साजिशकर्ताओं के नाम साझा किए थे जिनका मकसद गोरखनाथ मंदिर को निशाना बनाना था। इस संबंध में खुफिया एजेंसी के अधिकारियों और राज्य पुलिस अधिकारियों के बीच बैठक भी हुई। 16 नामों में एक नाम अहमद मुर्तजा अब्बासी का था।

रविवार की शाम इस मुर्तजा ने दो PAC कॉन्सटेबल पर हमला किया और धारदार हथियार से उन्हें घायल कर दिया। उसने अल्लाह-हू-अकबर बोलते हुए मंदिर में घुसने की कोशिश भी की। हालाँकि सुरक्षाकर्मियों द्वारा उसे दबोच लिया गया। राज्य गृह विभाग ने प्राप्त सबूतों के आधार पर इसे आतंकी हमला बताया।

सीएनएन-न्यूज 18 की रिपोर्ट यह भी बताती है कि उन्हें सूत्रों ने जानकारी दी है कि ये अब्बासी ISIS के संपर्क में था और उन्हें भारत से फंड भेजता था। ऑनलाइन अपनी इन्हीं हरकतों के चलते वह डिजिटल रडार पर आया था। लेकिन 3 अप्रैल को हुए हमले ने साफ कर दिया कि वो वाकई कोई बड़ी घटना को अंजाम देने के फिराक में था। पत्रकार प्रमोद कुमार सिंह ने ट्विटर पर जानकारी दी कि अब्बासी ने गोरखनाथ मंदिर के गेट नंबर 3 को चुना था, जिसका प्रयोग आने-जाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करते हैं।

उसकी ऑनलाइन एक्टिविटीज से ये बात सामने आई कि वो यूट्यूब पर जिहाद से जुड़ी वीडियो देखता था और अक्सर जिहादी साइटें सर्च करता था। उसकी सर्च हिस्ट्री में कई जिहादी विचारधारा वाले मजहबी उलेमाओं के वीडियो सर्च के सबूत भी मिले हैं। इसके अलावा वह लोन वोल्फ के वीडियोज भी देखता था। उसके लैपटॉप-मोबाइल की जाँच में भी कुछ ISIS से जुड़े वीडियो और उनका साहित्य बरामद हुआ है। इन सबके अलावा मुर्तजा अब्बासी के मोबाइल से कई फतवे और गोरखनाथ मंदिर का नक्शा मिला है। मुर्तजा अकेले हमला करने के तरीके नेट पर तलाशता था। उसका मकसद था कि वह छोटे हथियार से लोगों की जान लेकर दहशत फैलाए। अभी इस मामले की जाँच में एटीएस और एसटीएफ की टीमें जुटी हैं। अब्बासी पुलिस की गिरफ्त में है।

हिमाचल प्रदेश में अब छात्रों को पढ़ाई जाएगी श्रीमद्भगवद्गीता: पाठ्यक्रम में जोड़ा जाएगा नया विषय, गुजरात-कर्नाटक ने भी लिया था फैसला

गुजरात और कर्नाटक की तर्ज पर अब हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) ने भी स्कूली पाठ्यक्रम में ‘भगवद्गीता’ को जोड़ने का फैसला लिया है। हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर (Govind Singh Thakur) ने कहा, “मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि इस सत्र से नौवीं से बारहवीं कक्षा के छात्रों को ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ एक सब्जेक्ट के रूप में पढ़ाई जाएगी।”

उन्होंने मंडी में रविवार (3 अप्रैल, 2022) को लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों को उनकी संस्कृति के बारे में जागरूक करने और उन्हें नैतिक बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। स्कूलों में ‘भगवद्गीता’ संस्कृत और हिंदी भाषा में पढ़ाई जाएगी। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश सरकार ने तीसरी कक्षा से संस्कृत की पढ़ाई शुरू करने का भी फैसला लिया है।

बताया जा रहा है कि शिक्षा मंत्री रविवार को एक जन मंच की अध्यक्षता करने और जनता की शिकायतें सुनने के लिए मंडी जिले में पहुँचे थे। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर लोगों की समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जन मंच कार्यक्रम के माध्यम से राज्य सरकार ने जनता को अपनी शिकायतों का जल्द से जल्द समाधान करने के लिए एक शक्तिशाली मंच दिया है

मालूम हो कि इससे पहले गुजरात सरकार ने मार्च 2022 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत 6 से 12वीं कक्षा तक के बच्चों को स्कूलों में श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ाने का फैसला लिया था। यह आदेश गुजरात के सभी स्कूलों में लागू होगा। गुजरात के शिक्षा मंत्री जीतू वाघानी ने 17 मार्च को इसकी घोषणा की थी। शिक्षा मंत्री जीतू वाघानी ने इसकी घोषणा करते हुए कहा, “क्लास 6 से 8 तक की कक्षाओं में श्रीमद्भगवद्गीता कहानी और श्लोकों रूप में होगी। वहीं क्लास 9 से 12 तक ये कहानी और श्लोकों के रूप में पहली भाषा पुस्तक में होगी।

साल 2022-23 में भारत की संस्कृति और ज्ञान प्रणाली से परिचित करवाने के लिए प्रथम चरण में गीता के मूल्यों और सिद्धांतों को क्लास 6 से 12 तक पढ़ाया जाएगा। यह कदम छात्रों के हितों को ध्यान में रख कर उठाया जा रहा है। बच्चों को गीता के श्लोक ऑडियो और वीडियो रूपों के साथ प्रिंटेड रूप में भी दिए जाएँगे।”

जिस हर्ष मंदर पर बाल गृहों में गड़बड़ी के आरोप, पढ़ाई जा रही उसकी कहानी: NCERT को बाल आयोग का नोटिस, CAA में भड़काने का भी आरोप

लोगों ने छात्रों को वामपंथी हर्ष मंदर की कहानी पढ़ाए जाने पर आपत्ति जताई है, जिसके बाद NCPCR (राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग) ने NCERT (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) को नोटिस भी भेजा है। दूरदर्शन के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने इस पर आपत्ति जताते हुए लिखा था, “9वीं क्लास के बच्चों को NCERT की किताबों में हर्ष मंदर की कहानी पढ़ाई जा रही है। ये वही हर्ष मंदर हैं जिन्होंने CAA पर झूठ बोल कर लोगों को भड़काया, दंगाइयों को बचाने के लिए झूठी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट तैयार की।

साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि NCPCR के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने हर्ष मंदर के बाल सुधार गृहों में घोटाले पकड़े थे। अपनी अगली ट्वीट में उन्होंने बताया, “बच्चों के नाम पर धोखाधड़ी करने के आरोपित और CAA पर झूठ फैलाने वाले हर्ष मंदर की कहानी NCERT की किताब में शामिल किए जाने को लेकर मैंने जो ट्वीट किया था, उस पर NCPCR के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एनसीईआरटी को नोटिस भेजा है।”

NCPCR ने इसका स्वतः संज्ञान लेते हुए NCERT को भेजी गई रिपोर्ट में लिखा है कि उन्हें नौवीं कक्षा की अंग्रेजी की पुस्तक ‘Moments (क्षणों)’ में ‘Weathering the Storm in Ersama (एरसामा में तूफान का सामना)’ नामक कहानी पढ़ाई जा रही है। आयोग ने कहा है कि अपने बाल सुधार गृहों में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपित को प्रतिष्ठित साहित्यकारों के बीच रख कर पढ़ाने पर उन्हें मिली शिकायत में सवाल खड़े किए गए हैं।

इसमें बताया गया है कि कैसे ये कहानी आपात स्थितियों में सरकारी संस्थाओं को धता बताते हुए ये दिखाती है कि केवल NGO वगैरह ही काम आते हैं। साथ ही इसके कंटेंट्स नाबालिगों से जुड़े कानून का भी उल्लंघन करते हैं। बाल आयोग ने उदाहरण बताया कि कैसे ओडिशा में सरकार ने ऐसा मैकेनिज्म विकसित किया है, जिससे बाढ़-तूफान से नुकसान कई गुना घट जाता है। साथ ही बाल आयोग ने बच्चों को पढ़ाई जा रही हर्ष मंदर की अन्य कहानियाँ ‘A Home on the Street’ और ‘Paying For This Tea’ पर भी आपत्ति जताई।

बाल आयोग ने लिखा है, “ये कहानियाँ किस तरह ‘राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा’ के अनुरूप है, इसकी जाँच होनी चाहिए। इसीलिए, आपकी टिप्पणी और कार्रवाई के लिए इसे आपको भेजा जा रहा है। आप ये भी सुनिश्चित करिए कि किसी पुस्तक या पाठ में इस तरह भ्रमित करने वाले कंटेंट्स न हों। अगले एक सप्ताह में आप आयोग को बता सकते हैं कि आपने इस मामले में क्या कार्रवाई की है।” NCERT ने इस पर फ़िलहाल कोई बयान नहीं दिया है।

बता दें कि ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दायर कर बताया था कि देश भर में कई चिल्ड्रेन शेल्टर होम अवैध तरीके से चल रहे हैं और कुछ को संदिग्ध विदेशी संगठनों से फंडिंग हो रही है। इन NGO में हर्ष मंदर का ‘सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज (सीईएस)’ भी शामिल है। पूर्व IAS हर्ष मंदर दिल्ली में दो चिल्ड्रेन होम्स चलाते हैं, जिनमें जाँच एजेंसियों को पैसों के मामले में गड़बड़ी किए जाने की जानकारी मिली थी। ED इन ठिकानों पर छापेमारी भी कर चुकी है।

‘चंदा घोटाले’ की आरोपित पत्रकार राना अय्यूब को दिल्ली हाईकोर्ट ने दी शर्तों के साथ विदेश यात्रा की अनुमति, देनी होगी ये जानकारी

दिल्ली उच्च न्यायालय ने पत्रकार राना अय्यूब को सोमवार (4 अप्रैल, 2022) को सशर्त विदेश यात्रा करने की अनुमति दे दी और उनके खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से सवाल पूछा। इसके जरिए उनके विदेश यात्रा करने पर रोक लगाई गई थी। न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने कहा कि अनुमति उचित शर्तों के साथ है और विस्तृत आदेश बाद में दिया जाएगा।

दिल्ली हाई कोर्ट ने राना अय्यूब को सशर्त विदेश यात्रा करने की अनुमति दी है। जिसमें उनको एक निश्चित राशि जमा करनी होगी, जाँच के लिए संपर्क नंबर देना होगा। साथ ही यात्रा की जानकारी भी साझा करनी होगी। अदालत अय्यूब की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उनकी विदेश यात्रा पर रोक लगाने संबंधी एलओसी को रद्द करने का आग्रह किया गया था।

बता दें कि पिछले हफ्ते पत्रकार राना अय्यूब ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था। इस याचिका का ईडी ने विरोध किया। इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से बहस करते हुए एएसजी एसवी राजू ने कहा कि अय्यूब एक करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि से संबंधित एक गंभीर अपराध में शामिल रही हैं और इस बात की आशंका है कि वह भारत नहीं लौटेंगी। वहीं राना अय्यूब की वकील वृंदा ग्रोवर ने इसे उत्पीड़न का स्पष्ट मामला बताया। उन्होंने कहा कि भारत वापस आने के लिए अय्यूब के पास उचित कारण थे। क्योंकि उनका परिवार यहाँ रहता था।

अदालत में ED के वकील ने कहा, “उनका (अय्यूब) आचरण देखो। बार-बार तलब करने के बाद भी दस्तावेज नहीं दिए गए। फर्जी बिल उपलब्ध कराए गए हैं। हमारे अनुसार, प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी का मामला है। सहयोग का हिस्सा गायब है और एजेंसी के सामने उपस्थिति सहयोग नहीं है।”

अदालत ने कहा, “अगर कोई व्यक्ति एजेंसी के सामने पेश हो रहा है और एजेंसी कहती है कि वह व्यक्ति पेश तो हो रहा है लेकिन वह सहयोग नहीं कर रहा है, तो इसे दिखाने का क्या पैमाना है? अगर असहयोग है तो आप उसे गिरफ्तार क्यों नहीं करते?”

न्यायाधीश ने कहा कि इस स्तर पर, वह केवल एलओसी की पड़ताल कर रहे हैं और महिला को विदेश जाने की अनुमति दी जा सकती है या नहीं तथा अदालत मामले के गुण-दोष पर विचार नहीं कर रही।

गौरतलब है कि राना अय्यूब को 29 मार्च को आव्रजन ब्यूरो ने मुंबई हवाई अड्डे पर तब हिरासत में ले लिया था, जब वह पत्रकारिता से जुड़े कुछ कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लंदन जा रही थीं।

आमिर खान घर-वापसी कर बने अभय त्यागी, जनेऊ भी होगा: कहा – पूर्वज सनातन धर्म से थे, शिव मेरे आराध्य

दिल्ली के आमिर खान (Aamir Khan) अपनी स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपनाकर अभय त्यागी बन गए हैं। उन्होंने अपनी घर वापसी के पीछे एक रोचक वजह बताई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के लोनी इलाके में स्थित रामलीला मैदान 51 में रविवार (3 अप्रैल 2022) को कुण्डीय महायज्ञ का आयोजन किया गया था। बताया जा रहा है जिस वक्त महायज्ञ चल रहा था।

उस वक्त अचानक ही दिल्ली के कर्दमपरी का रहने वाला आमिर नाम का एक युवक महायज्ञ में पहुँचा और जय श्रीराम के नारे लगाने लगा। इस दौरान उसने वहाँ मौजूद लोगों को बताया कि वह दिल्ली का रहने वाला है। उसका नाम आमिर खान है और वह वेल्डिंग का काम करता है।

उन्होंने लोगों को यह भी बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि उनके पूर्वज पहले सनातन धर्म से थे और उनकी आस्था भी सनातन धर्म में है। भगवान शिव उनके अराध्य हैं। वह पिछले कई वर्ष से उनकी पूजा-अर्चना कर रहे हैं। आमिर ने आगे बताया कि उन्हें अपने जन्म के समय यह जानकारी नहीं थी कि हमारा असली धर्म कौन सा है, लेकिन अब उन्हें पता चल गया है कि उसका धर्म कौन सा है। इसलिए वह बिना किसी दबाव के घर वापसी करना चाहता है। उन्होंने आमिर खान की जगह अपना नाम अभय त्यागी भी रख लिया है।

वहाँ मौजूद ब्राह्मणों और अन्य लोगों को पहले तो उनकी बातों पर हैरानी हुई, लेकिन फिर उन्हें उनकी बातों पर यकीन हो गया। उन्होंने युवक की इच्छा का सम्मान करते हुए उसे चंदन लगाकर और पटका पहनाकर हिंदू धर्म में उसका स्वागत किया

त्यागी महासभा के अध्यक्ष धर्मेन्द्र त्यागी ने बताया कि उन्होंने आमिर खान को अपना गोत्र देते हुए उनका नामकरण अभय त्यागी किया है। कानूनी औपचारिकताओं पूरी करने के लिए युवक से जरूरी कागजात मँगाए गए हैं। कागजी कार्रवाई कराने के बाद इस 10 अप्रैल को विधि-विधान से मंदिर में जनेऊ संस्कार कराकर युवक को सनातन धर्म में शामिल किया जाएगा।

तब औरंगजेब-खिलजी, अब IIT वाला मुर्तजा: गोरखनाथ मंदिर पर पहले भी हुए हैं हमले, त्रेता युग से जल रही ज्योति, भोग की पहली रोटी गाय को

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के गोरखनाथ मंदिर में 3 अप्रैल, 2022 (रविवार) की शाम मुर्तजा अब्बासी नामक व्यक्ति ने पुलिसकर्मियों पर धारदार हथियार से हमला किया। मंदिर पर हमले के दौरान अब्बासी ‘अल्लाह हु अकबर’ का नारा लगा रहा था। वह मंदिर में घुसने का प्रयास कर रहा था। इस हमले में 2 पुलिसकर्मी घायल हो गए। हमलावर मुर्तजा को पकड़ लिया गया। UP के गृह सचिव अवनीश अवस्थी के मुताबिक, यह एक आतंकी घटना हो सकती है।

इतिहास में अलाउद्दीन खिलजी और औरंगज़ेब कर चुके हैं गोरखनाथ मंदिर पर हमला

गोरखनाथ मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, त्रेता युग में गोरखपुर में योगीराज गोरखनाथ (गोरक्षनाथ) ने राप्ती नदी के किनारे तपस्या की थी। इसका उल्लेख राजा मानसिंह ने अपनी किताब ‘श्रीनाथतीर्थावली’ में भी किया है। यह मंदिर 52 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। पूरे मंदिर में अलग-अलग प्रकार के फूल और पेड़ दिखाई देते हैं। भारत में इस्लामी हमलों के दौरान इस स्थान ने हिन्दू संस्कारों को जीवंत रखा।

विक्रम संवत की 14वीं सदी में अलाउद्दीन खिलजी और 18वीं सदी में औरंगज़ेब ने इस मंदिर पर हमला किया था। इन हमलों से मंदिर क्षतिग्रस्त हुआ था। यद्यपि इसके बाद भी हिन्दू समाज की श्रद्धा यहाँ से जुड़ी रही। विक्रम संवत की उन्नीसवीं सदी में इस मंदिर का जीर्णोद्धार श्रद्धालुओं द्वारा करवाया गया। इसमें दिवंगत महंत दिग्विजय नाथ और महंत अवेद्यनाथ की मुख्य भूमिका रही। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मंदिर के महंत हैं।

वर्तमान समय में मुर्तजा के हमले से 12 साल पहले गोरखनाथ मंदिर परिसर में आपराधिक घटना की सूचना मिली थी। तब भीम सरोहार ताल के पास विस्फोटक की खबर पुलिस को दी गई थी। पुलिस की जाँच के बाद वो दीवाली वाला बम निकला था।

योगी आदित्यनाथ को मिल चुकी हैं कई धमकियाँ

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुर्तजा अब्बासी के गोरखनाथ मंदिर पर असफल हमले के बाद ATS इस हमले की कड़ियाँ जोड़ने में लगी हुई है। ATS उन धमकियों का भी आपस में मिलान कर रही है जो कुछ समय के अंतराल पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मिली हैं। इसी साल 4 फरवरी को ‘लेडी डॉन’ नाम के ट्विटर हैंडल से कई रेलवे स्टेशन, गोरखनाथ मंदिर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। इस मामले में FIR दर्ज की गई थी, लेकिन कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई थी।

जिस दिन हमला हुआ, उसी दिन समाजवादी पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक शहजिल इस्लाम का योगी आदित्यनाथ को धमकी देते हुए वीडियो वायरल हुआ था। उस बयान में इस्लाम ने कहा था कि अगर उन्होंने उनके खिलाफ कुछ भी कहा तो बंदूक से गोलियाँ चलेंगी। इस घटना में बरेली पुलिस ने FIR दर्ज की है। इसी साल मार्च 2022 में सोशल मीडिया पर बिजनौर के एक किशोर ने योगी आदित्यनाथ को गोली मारने की धमकी दी थी। इस मामले में भी बिजनौर पुलिस ने केस दर्ज किया था।

इसके अलावा मई 2020 में बिहार पुलिस के जवान तनवीर अहमद ने सोशल मीडिया पर CM योगी आदित्यनाथ को गोली मारने की धमकी दी थी। इस मामले में गाजीपुर पुलिस ने उसको गिरफ्तार कर के जेल भेजा था। जून माह में उसको कोर्ट ने सशर्त जमानत दे दी थी। अप्रैल 2021 में CRPF मुंबई ऑफिस में एक मेल के जरिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जान से मारने से धमकी मिली थी।

त्रेता युग से अब तक जल रही है अखंड ज्योति और अखंड धूना

योगीराज गोरखनाथ की सफेद संगमरमर की मूर्ति यहाँ मंदिर के अंदर मुख्य वेदी पर स्थापित है। यही पर उनकी चरण पादुकाएँ भी हैं। यहाँ संगमरमर की दीवारों पर गोरखवाणी लिखी हुई है। मंदिर की दीवारों पर कई धार्मिक चित्र भी बने हुए हैं। इसी मंदिर में त्रेता युग से गुरु गोरखनाथ द्वारा जलाई गई एक अखंड ज्योति आज तक जल रही है। दावा है कि कितने भी विषम हालातों में वो ज्योति कभी बुझी नहीं है। इस ज्योति का काजल यहाँ के श्रद्धालु अपने बच्चो को लगते हैं।

इसी के साथ त्रेता युग से आज तक यहाँ एक धूना लगातार जल रहा है। इसे ‘अखंड धूना’ कहा जाता है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु इस धूने की राख को पवित्र मान कर भभूत के रूप में प्रयोग करते हैं। अखंड ज्योति और अखंड धूना को जलाए रखने के लिए इसमें लगातार ईंधन डाला जाता है।

इस मंदिर के अंदर एक परिक्रमा मार्ग है। पूरे परिक्रमा मार्ग पर अलग-अलग देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित हैं। इन प्रतिमाओं में शिव, काली, भैरव, गणेश, शीतला माँ आदि प्रमुख हैं। इसी के साथ गोरखनाथ मंदिर के अंदर राधा कृष्ण, हट्ठी माता, संतोषी माता, सिंह वाहिनी माता, हनुमान मंदिर राम दरबार, नवग्रह देवता, शनि देवता, भगवती बाल देवी और भगवान विष्णु की प्रतिमाएँ मौजूद हैं।

जिस नाथ सम्प्रदाय से हैं योगी आदित्यनाथ उसका ये है इतिहास

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नाथ सम्प्रदाय की उत्पत्ति भगवान शिव के द्वारा हुई। यहाँ से जुड़े सभी संत और महंत मुख्य रूप से गौ रक्षा और योग मार्ग के प्रचार के लिए जाने जाते हैं। इस सम्प्रदाय के योगी मुख्यतः ‘नाथ-योगी’, ‘सिद्ध-योगी’, ‘दरसनी योगी’ या ‘कनफटा योगी’ के नाम से जाने जाते हैं।

मंदिर में सुबह शाम होती है पूजा और पहला भोग का पहला निवाला गाय को जाता है

मंदिर के पुजारी हर दिन रात 1 बजे ही उठ कर पूजा की तैयारियॉँ शुरू कर देते हैं। सुबह 3 बजे तक मूर्तियों को विधि-विधान से स्नान करवा दिया जाता है। थोड़े ही समय में उनको ताजे फूलों की माला आदि पहनाई जाती है और मूर्तियों का श्रृंगार किया जाता है। मंदिर में 3 बजे ही पूजा शुरू हो जाती है। पूजा के दौरान पुजारी अपने मुँह को भगवा रंग के कपड़ों से ढक लेते हैं। इस दौरान घंटे और नगाड़े बजते रहते हैं। पूजा के बाद मंदिर परिसर में मौजूद विग्रहों (मूर्तियों) की आरती होती है।

इसके बाद देवी-देवताओं का भोग लगाया जाता है। यह भोग चाँदी की थाली में लगता है। इसी भोग से गायों के लिए खाना निकाला जाता है और इसी भोग को प्रसाद के रूप में भक्तों में बाँट दिया जाता है। मंदिर के भंडारे में समाज के हर वर्ग को एक समान समझ कर भोजन करवाया जाता है। शाम को भी 6 बजे पूजा शुरू होती है जो 8 बजे तक चलती है।

स्कूल और अस्पताल भी संचालित हैं गोरखनाथ मंदिर से

गोरखनाथ मंदिर के कैम्पस में ही संस्कृत विद्यापीठ मौजूद है। यहाँ पर छात्रों को संस्कृत की शिक्षा दी जाती है। यह एक महाविद्यालय है जहाँ पढ़ने वाले छात्रों का रहना, खाना और पढ़ाई फ्री है। इसी मंदिर के संरक्षण में ‘महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद’ की स्थापना हुई है जिसके अंतर्गत कई जिलों में 4 दर्जन से ज्यादा पढ़ाई और रोजगार संबंधी ट्रेनिंग दिलाने वाली संस्थाएँ संचालित होती हैं। इस मंदिर के संरक्षण में अनेक जिलों में दयनीय हालत में आ गए कई मंदिरों का जीर्णोद्धार भी करवाया गया है।

इसी क के साथ मंदिर परिसर में ही योग प्रशिक्षण केंद्र भी मौजूद है। इसमें समाज के हर आयु वर्ग के लोगों को योग की शिक्षा दी जाती है।

गोरखनाथ मंदिर परिसर में ही एक 300 बेड का अस्पताल है। इसका नाम ‘गुरु श्री गोरखनाथ चिकित्सालय’ है। यहाँ पर कई असाध्य रोगों का इलाज उच्च तकनीकी से किया जाता है। इस अस्पताल में रजिस्ट्रेशन फीस 30 रुपए है जो 15 दिनों तक वैलिड रहती है। यहाँ टेलीमेडिसिन की सुविधा भी फ्री है। साथ ही आँखों का परीक्षण भी यहाँ समय-समय पर फ्री कैम्प लगा कर किया जाता है। इस अस्पताल में आयुर्वेद पद्धति को बढ़ावा देने के लिए भी कई कदम उठाए जाते हैं।

हिन्दुओं के जातिवाद को आत्महत्या के समान मानता है गोरखनाथ मंदिर, कई नस्लों की गाएँ रहती हैं गौशाला में

गोरखनाथ मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, हिन्दू समाज को इतिहास में भी जातिवाद के चलते काफी हानि उठानी पड़ी हैं। इसको भविष्य में किसी भी हालत में जारी रखने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। मंदिर के नियमों के मुताबिक, हिन्दू समाज का हर व्यक्ति समान अधिकार रखता है और हर सनातनी हिन्दू धर्म का अभिन्न अंग है। गोरखनाथ मंदिर के मुताबिक, जैन, बौद्ध और सिख भी हिन्दू समाज के ही अंग हैं।

यहाँ धर्माचार्यों और आगंतुकों के मंदिर की नियमावली के मुताबिक रुकने की व्यवस्था है। इस में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता। यहाँ के नियमित चलने वाले भंडारे में भी किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होता। यहाँ कथा और यज्ञशाला मौजूद है। उसमें कोई भी श्रद्धालु अपनी इच्छानुसार भक्तिभाव से आराधना कर सकता है। इसी के साथ मंदिर परिसर में ही फव्वारे लगे हैं जो रात में रंग-बिरंगे पानी से इंद्रधनुष जैसी आकृति बनाते हैं।

मंदिर में मौजूद गौशाला में लगभग हर वर्ण की गायें मौजूद हैं। यहाँ पर गायों का संरक्षण और उनका संवर्धन प्रमुख प्राथमिकता होती है। यहाँ गौसेवा से आने वाले दूध से मंदिर के प्रसाद आदि बनाए जाते हैं। गायों के लिए चारे और उनको किसी भी बीमारी के बाद इलाज के लिए डॉक्टर तक का हमेशा प्रबंध रहता है। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद अपने गोरखपुर प्रवास में प्रतिदिन सुबह गौ सेवा करते हैं।

गायों के बीच योगी आदित्यनाथ

अभूतपूर्व होती है मकर संक्राति और नेपाल तक के श्रद्धालु आते हैं दर्शन के लिए

गोरखनाथ मंदिर की मकर संक्रांति पूरे दुनिया में प्रसिद्ध है। इस पर्व को बंगाल में तिलवा संक्रांति और दक्षिण भारत में पोंगल कहते हैं। यहाँ की मान्यताओं के मुताबिक, योगीराज गोरखनाथ के पास अक्षय पात्र था। उस पात्र से खिचड़ी खाने बहुत दूर-दूर से लोग आते थे। आज भी वही परम्परा चल रही है। मकर संक्रांति के पर्व पर यहाँ लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जमा होती है। भारत के कोने-कोने से आए लोगों के अलावा इस आयोजन में नेपाल तक से लोग आते हैं।

यह उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक मेला होता है। पहले नंबर पर गोरखपुर से ही थोड़ी दूर शक्तिपीठ देवीपाटन का मेला है, जो UP के बलरामपुर जिले में है। इसी के साथ गुरु पूर्णिमा, नाग पंचमी, होली, कृष्ण जन्माष्टमी और विजयादशमी पर भी गोरखनाथ मंदिर में बहुत भीड़ होती है।

एडिशनल SP के नेतृत्व में सैकड़ों पुलिसकर्मियों के साथ होती है गोरखपुर मंदिर की सुरक्षा

इंडिया नैरेटिव की रिपोर्ट के मुताबिक, गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में होती है। इसी के साथ लगभग 875 पुलिसकर्मी मंदिर की सुरक्षा करते हैं। इन पुलिसकर्मियों में एक प्लाटून में PAC के जवान भी शामिल हैं। मंदिर में बम डिस्पोजल दस्ता भी तैनात किया गया है। मंदिर परिसर में पुलिस चौकी का भी निर्माण किया गया है। मंदिर में घुसने से पहले स्कैनर से गुजरना होता है।

इसी के साथ आसपास पुलिस की लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) के जवान तैनात रहते हैं। जिले के एसएसपी भी लगातार मंदिर की सुरक्षा की मॉनिटरिंग करते हैं। मंदिर परिसर में धूम्रपान करना और किसी भी प्रकार के हथियार या विस्फोटक वस्तु के साथ प्रवेश वर्जित है।

पाकिस्तानी मंच पर भारत विरोध: PM मोदी से ‘नफरत’ में ‘द वायर’ के करण थापर ने परोसी हिन्दू घृणा, बजरंग बली को बताया ‘हुमायूँ’

द वायर के एंकर और न्यूज़ प्रेजेंटेटर करण थापर ने 1 अप्रैल, 2022 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस्लामाबाद सुरक्षा संवाद में भाग लिया था। ‘नेविगेटिंग डिसइंफॉर्मेशन एंड डिस्कोर्स इन द इन्फॉर्मेशन एज’ नामक शीर्षक पर चर्चा के बहाने दक्षिण एशिया के वर्तमान राजनीतिक ढाँचे पर दुष्प्रचार और फेक न्यूज़ के प्रभाव पर चर्चा करने का एक प्रयास था। चर्चा के दौरान, जिसमें पाकिस्तान के कई थिंक टैंक के सदस्यों ने भाग लिया, थापर ने न सिर्फ मोदी सरकार के खिलाफ अपनी घृणा का प्रदर्शन किया बल्कि भगवान हनुमान को मुगल वंश के दूसरे सम्राट ‘हुमायूँ’ के रूप में संदर्भित किया

दिलचस्प बात यह है कि भारत के एक स्पीकर ने पाकिस्तान के कई थिंक टैंकों के सदस्यों को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ बात की, जहाँ हिंदुओं को लगभग हर रोज अत्याचारों का सामना करना पड़ता है।

थापर ने वाशिंगटन पोस्ट के शेन हैरिस, चीन के सरकारी मीडिया चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क (सीजीटीएन) के लियू शिन और कई पाकिस्तानी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया हस्तियों के साथ एक मंच साझा किया। हालाँकि, क्लिप का केवल एक हिस्सा जहाँ उन्होंने बजरंग बली को दूसरे नाम भगवान हनुमान के रूप में नहीं बल्कि भगवान हुमायूँ कहकर संबोधित किया था, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया जा रहा था, करण थापर का कुल 7 मिनट का वायरल वीडियो ऐसी ही हिन्दुओं के प्रति नफरत भरी बातों से भरा पड़ा है।

थिंक टैंक के संस्थापक मुशर्रफ जैदी ने सत्र का संचालन किया। उन्होंने थापर से उनके विचारों के बारे में पूछा कि कैसे भारत के लोगों को राजनेताओं, विशेष रूप से प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस और भाजपा जैसे हिंदुत्व नेताओं द्वारा गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं का सत्ता में होना एक तरह से ‘धर्मनिरपेक्ष, प्रबुद्ध, प्रगतिशील भारत’ की सामूहिक विफलता है।

उनके विचारों से सहमति जताते हुए थापर ने कहा कि जब से पीएम मोदी सत्ता में आए हैं, ‘समस्या’ बढ़ रही है और संकट आज अपने चरम पर है. उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि यह सब अधिक होने वाला है, लेकिन 2014 की स्थिति की तुलना में आज की स्थिति ज्यादातर लोगों की कल्पना से काफी खराब है।” उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी जानबूझकर हिंदुओं को भड़का रही है, जिसमें धर्म के नाम पर 80% आबादी शामिल है।

उन्होंने कहा, “लोग बहुत धार्मिक हैं। धर्म उनके जीवन में व्याप्त है, उनकी सोच, उनके रिश्ते, उनका मनोविज्ञान उनके बहुत करीब है, और यह उन देशों में होता है जहाँ आर्थिक विकास सीमित है। और धर्म के लिए मैं उस वाक्यांश अफीम का उपयोग नहीं करूँगा क्योंकि यह जानबूझकर अपमानजनक है, लेकिन यह आत्माहीन दुनिया की आत्मा है।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि बीजेपी जानती है कि पुराने घावों को कहाँ खरोंचना है और खोलना है, जैसे कि 1947 में हुआ विभाजन। उस प्रक्रिया में, उन्होंने दूसरे धर्म का दानवीकरण किया। विभाजन इसलिए हुआ क्योंकि मुस्लिम नेता मुसलमानों के लिए एक देश चाहते थे। कॉन्ग्रेस और वामपंथी ‘इतिहासकारों’ के विश्वास के विपरीत, यह सबसे पहले अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक सैयद अहमद खान द्वारा जोर देकर कहा गया था। पिछले साल 14 अगस्त को विभाजन को हॉरर स्मृति दिवस के रूप में घोषित किया गया था, इसी कारण से तथाकथित लिबरल परेशान थे।

भारतीय धर्मनिरपेक्षता की नींव उन हिंदुओं की लाशों के ऊपर बनाई गई है, जिनका स्वतंत्रता काल के दौरान बलात्कार, नरसंहार और हत्या की गई थी। अपने राजनीतिक करियर को सफल बनाने के लिए, कॉन्ग्रेस ने भारत के नागरिकों के लिए एक ‘वैकल्पिक इतिहास’ रचने की बहुत कोशिश की, जहाँ विभाजन की भयावहता को इतिहास के कूड़ेदान में डाल दिया गया। उस पैमाने की त्रासदी को नहीं धोना चाहिए। आखिर इतिहास को भूल जाने वालों द्वारा उसे दोहराने की निंदा की जाती है।

अपनी बात को साबित करने के लिए थापर ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषण का उदाहरण दिया, जहाँ उन्होंने कहा था कि यूपी विधानसभा चुनाव 80% बनाम 20% की लड़ाई है। उन्होंने यूपी में दावा किया कि 80% हिंदू हैं, और 20% मुस्लिम हैं, इसलिए यह स्पष्ट था कि वह क्या कह रहे थे। क्योंकि योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया था कि उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों के बारे में बात नहीं की।

उन्होंने कहा था कि वह उन 80% लोगों के बारे में बात कर रहे थे जो अपने धर्म के बावजूद भाजपा के पक्ष में थे और उनमें से 20% जो भाजपा के खिलाफ थे। यूपी में लाखों हिंदू हैं जिन्होंने समाजवादी पार्टी को वोट दिया और लाखों मुस्लिम, खासकर महिलाओं ने, जिन्होंने बीजेपी को वोट दिया। जबकि सीएम योगी का धार्मिक आधार पर आबादी को विभाजित करने का कोई इरादा नहीं था, थापर सहित मीडिया घरानों ने इसे गलत तरीके से पेश किया और जनता को गुमराह किया।

थापर ने तब दावा किया कि भाजपा नेता उनसे कहते हैं कि जो उनका विरोध करते हैं, वे पाकिस्तान चले जाएँ। उन्होंने कहा, “जब राजनेता अली और बजरंग बली के बारे में बात करते हैं। बजरंगबली भगवान हुमायूँ का दूसरा नाम है, जो हो रहा है वह स्पष्ट हो जाता है, और यह जानकर दुख होता है कि यह हो रहा है।” यह फ्रायडियन स्लिप थी या जुबान फिसल गई, कोई नहीं जानता, लेकिन बजरंगबली हुमायूँ नहीं, हनुमान हैं। हुमायूँ बाबर के बाद दूसरा मुग़ल बादशाह था। थापर के बारे में तो कोई कुछ नहीं कह सकता, लेकिन वह निश्चित रूप से हमारे भगवान नहीं हैं।

थापर ने यह कहने की कोशिश की कि एक जागरूक हिंदू जो भारत में अपनी बात रखता है, वह संभवत: देश के धर्मनिरपेक्ष ढाँचे के खिलाफ है। उन्होंने कहा, “मैं यह दिखावा और यह कहने वाला नहीं हूँ, लेकिन हम हमेशा से जानते थे कि कुछ चीजें हैं जो एक सीमा रेखा से परे हैं, और आपने इसे पार नहीं किया। वह रेखा भंग हो गई है। यह आज शायद ही मौजूद है, और यह इसका सबसे दुखद हिस्सा है। यह जानबूझकर किया गया है। इसके बहुत बड़े राजनीतिक परिणाम मिले हैं, और निस्संदेह यह होता रहेगा।”

उन्होंने कहा, “और परिणामस्वरूप, इस शैतान को बोतल से बाहर निकालने के बाद यह एक अलग देश बन रहा है। मैं जिन्न नहीं कह रहा। कोशिश करना और इसे वापस रखना असंभव है। और मैं पश्चिमी भारतीय नहीं कह रहा हूँ। बहुत से हिंदू लोग हैं जो यह भी महसूस करते हैं कि यह जानबूझकर शोषण, राजनीतिक उद्देश्य के लिए अपने धर्म का जानबूझकर उपयोग करना गलत है।”

उन्होंने आगे दावा किया कि हिंदू धर्म एक अलग तरह की आस्था है। यह स्वीकार कर रहा है, और राजनेता इसे किसी और चीज़ में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वे नेता “हिंदू धर्म की प्रकृति और चरित्र को बहुत गलत समझ रहे हैं।”

दरअसल, थापर पाकिस्तान द्वारा मुहैया कराए गए एक मंच पर बोल रहे थे। वही पाकिस्तान जहाँ हर दूसरे दिन हिंदुओं पर अत्याचार होते हैं। हिंदू लड़कियों को अगवा कर इस्लाम में परिवर्तित कर दिया जाता है। पाकिस्तान में हिंदुओं की संख्या विलुप्त होने के कगार पर पहुँच गई है। अफसोस की बात है कि थापर जैसे लोगों ने सीएए जैसे कानूनों का विरोध किया है। पाकिस्तान में नरक जैसी स्थिति में रह रहे उन हिंदुओं के लिए बोलने के बजाय, वे सरकार को सताए गए हिंदुओं के लिए दरवाजे खोलने से रोकने के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं ताकि वे भारत आकर भारत को अपनी मातृभूमि न बना सकें।

माँगे पूरी नहीं होने पर BMC की बिल्डिंग के सामने शौच करते नजर आए एसटी कर्मचारी, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

महाराष्ट्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि अपनी माँगे पूरी नहीं होने पर मुंबई में बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) की बिल्डिंग के सामने महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन महामंडल (एसटी) के कर्मचारी शौच करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

सोशल मीडिया यूजर्स भी एसटी कर्मचारियों की माँगे पूरी नहीं करने पर महाराष्ट्र सरकार का विरोध कर रहे हैं। एक यूजर ने परिवहन मंत्री अनिल परब (Anil Parab) पर निशाना साधते हुए लिखा, “सरकार को शर्म आनी चाहिए। एसटी कर्मचारियों को किस तरह ये सब करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह सरकार इतनी संवेदनहीन कैसे हो सकती है। यहाँ देखें अनिल परब।”

वहीं, एक अन्य यूजर ने महाराष्ट्र सरकार पर तंज कसते हुए लिखा, “कर्नाटक सरकार ने KSRTC और NWKRTC के कर्मचारियों के लिए 7वें वेतनमान पर मुहर लगा दी, तो महाराष्ट्र ऐसा क्यों नहीं कर सकता? महाराष्ट्र एसटी की तुलना में कर्नाटक बसों में एसी और नॉन एसी बसों के टिकट सस्ते हैं, फिर भी एसटी कर्मचारियों के लिए कोई सुविधा नहीं है।”

बता दें कि महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एसटी) के कर्मचाार नियमितीकरण की माँग को लेकर हड़ताल पर हैं। वे राज्य सरकार द्वारा काम पर लौटने की डेडलाइन देने के बावजूद लगातार हड़ताल कर रहे हैं। बीते दिनों परिवहन मंत्री अनिल परब ने कहा था कि एसटी कर्मचारी जल्द से जल्द काम पर लौटे। उन्होंने कहा था कि जो कर्मचारी 31 मार्च तक काम पर लौटते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी।

‘वाहियात सवाल पर भड़क जाता हूँ’: जॉन अब्राहम ने बताया क्यों कश्मीर फाइल्स वाले प्रश्न पर गुस्साए, कहा – मैं बड़े पर्दे का हीरो

हाल ही में जब अभिनेता जॉन अब्राहम से ‘द कश्मीर फाइल्स’ को लेकर सवाल पूछा गया था, तब उन्होंने उलटा पत्रकार को ही डाँट डाला था। उन्होंने अब ‘अटैक’ के प्रमोशन के दौरान इस तरह आपा खोने के पीछे कारण बताया है। जॉन अब्राहम ने दावा किया कि जब कोई उनसे बेहूदे सवाल करता है तो उनका दिमाग खराब हो जाता है। उन्होंने दावा किया, “मैं आपको जर्नलाइज नहीं कर रहा हूँ लेकिन कई बार आप (प्रेस में कुछ लोग) लोग बहुत बेवकूफी भरे सवाल पूछते हैं।”

उन्होंने कहा कि हमें इन चीजों की ज़रूरत नहीं है और हम सब इंसान ही हैं, लेकिन जब उनसे ‘वाहियात सवाल’ किए जाते हैं तो वो सचमुच भड़क जाते हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञापन और मार्केटिंग की जाती है, लेकिन फिल्म का असली प्रमोशन फिल्म ही होती है। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर मीडिया काफी सहायक होती है, लेकिन उसे फिल्म को लेकर जागरूक करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि फिल्म अच्छी होगी तो चलेगी, वरना काम नहीं करेगी।

जब जॉन अब्राहम से पूछा गया कि क्या वो OTT के लिए डेब्यू करने जा रहे हैं तो उन्होंने कहा कि 299 रुपए के लिए वो ऐसा कभी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि ये काफी कठिन है। ‘अटैक’ अभिनेता ने कहा, “इसके साथ कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन मैं इसके लिए अभी तैयार नहीं हूँ, शायद भविष्य में ये हो। मैं खुद को बड़े पर्दे पर ही देखना चाहता हूँ। क्या मैं बड़े पर्दे पर असफल हो जाऊँगा? मैं वहाँ असफल भी रहा तो मुझे इसका गम नहीं। लेकिन, अभी जॉन अब्राहम बिग स्क्रीन का हीरो है।”

याद हो कि जर्नलिस्ट ने जब निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर अभिनेता की राय माँगी थी, तो पहले उन्होंने उसे अनसुना कर दिया। फिर जॉन ने कहा था कि उन्होंने यह फिल्म नहीं देखी है और उनके पास इसके बारे में कहने के लिए कुछ नहीं है। बाद में उन्होंने इवेंट में मौजूद मीडियाकर्मियों से कहा था कि वह यहाँ ‘अटैक’ के बारे में बात करने आए थे और उनको फिल्म से जुड़े सवाल पूछने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था, “न्यूज डेस्क पर आपसे कंट्रोवर्सी लाने के लिए कहा जाता है, फिर आप यहाँ आकर कहते हैं – ‘हमें कश्मीर फाइल्स के बारे में कुछ बताएँ।’ मैं ऐसा क्यों करूँगा?”

पुलिस कॉन्स्टेबल नजमुल को पसंद नहीं आया प्रोफेसर लता का बिंदी लगाना: सड़क पर धक्का दे गिराया, किया प्रताड़ित

बांग्लादेश (Bangladesh) की राजधानी ढाका में कॉलेज की एक प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने उन्हें बिंदी लगाने पर परेशान किया और जान से मारने की कोशिश की। उन्होंने पुलिस के उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते हुए सुरक्षा की माँग की है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक, ढाका के तेजगाँव कॉलेज में थिएटर और मीडिया स्टडीज पढ़ाने वाली लता समद्दर (College Teacher Lata Samaddar) के साथ यह घटना शनिवार (2 अप्रैल, 2022) की सुबह कॉलेज के पास हुई। उन्होंने शेर-ए-बांग्ला नगर पुलिस स्टेशन में उस पुलिस कॉन्स्टेबल की शिकायत भी की है।

महिला प्रोफेसर ने अपनी शिकायत में बताया कि शनिवार सुबह उनके कॉलेज के पास मोटरसाइकिल पर खड़े एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने उन्हें बिंदी लगाने पर परेशान किया और जब उन्होंने इस बात पर उसका विरोध किया तो उसने =उन्हें जान से मारने की कोशिश की। प्रोफेसर लता समद्दर का कहना है कि उसने उन्हें बाइक से धक्का देने और चोटिल करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने तेजी से बाइक के सामने से हटते हुए अपनी जान बचा ली, पर इस दौरान वह सड़क पर गिर गईं, जिसकी वजह से उन्हें कुछ चोटें आई हैं। उनका कहना है कि इस घटना के बाद से वह बेहद असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के तेजगाँव डिवीजन के डिप्टी कमिश्नर बिप्लब कुमार सरकार ने बताया, “उस कॉन्स्टेबल का नाम नजमुल तारेक है। जाँच में सामने आया है कि वह इस घटना में शामिल था।” पुलिस कॉन्स्टेबल के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी, इसके जवाब में ढाका के पुलिस कमिश्नर (Md Shafiqul Islam) मोहम्मद शफीकुल इस्लाम ने कहा, “उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।”

वहीं, शेर-ए-बांग्ला नगर पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर जहाँगीर आलम ने कहा कि घटनास्थल के पास से सीसीटीवी फुटेज जुटाए गए थे, लेकिन हम शुरुआत में इस बात की पुष्टि नहीं कर पाए थे कि प्रोफेसर को परेशान करने वाला कोई पुलिसकर्मी था।

सोशल मीडिया पर यह खबर वायरल होने के बाद, यूजर्स इसकी कड़ी आलोचना कर रहे हैं। अभिनेत्री और सांसद सुबोरना मुस्तफा (Suborna Mustafa) ने रविवार (3 अप्रैल 2022) को संसद में इस घटना पर चर्चा करते हुए प्रोफेसर को प्रताड़ित करने और जान से मारने की कोशिश करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। वहीं, भारत में रह रहीं बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने भी बंगाली संस्कृति पर हमला करने वालों की आलोचना की है। उन्होंने ट्वीट किया, “बांग्लादेश में एक कट्टरपंथी पुलिस कॉन्सटेबल ने बिंदी लगाने पर कॉलेज की प्रोफेसर लता समद्दर को परेशान किया। तब से सभी समुदायों के पुरुष और महिलाएँ बिंदी लगाकर इस घटना का विरोध कर कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि बंगाली संस्कृति पर कोई हमला न हो।”

बता दें कि तस्लीमा नसरीन ने इससे पहले भी कई बार सोशल मीडिया के जरिए बांग्लादेश के कट्टरपंथियों के खिलाफ आवाज उठाई है। पिछले साल अक्टूबर में हिन्दुओं, उनके मंदिरों और प्रतिष्ठानों पर इस्लामी कट्टरपंथियों के हमले को लेकर तस्लीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पर लिखा था, “पैगम्बर मुहम्मद ने काबा में पेगन समुदाय की 360 मूर्तियों को खंडित कर दिया था। उनका अनुसरण करने वाले उनके ही नक्शेकदम पर चल रहे हैं।” लेखिका ने यह भी कहा था कि बांग्लादेश में जिहाद रोकने का एक ही उपाय है कि सभी मदरसों, मस्जिदों, वाज़ महफ़िलों और इज्तेमा को पूर्णरूपेण बंद कर देना चाहिए।