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बीरभूम नरसंहार में TMC विधायक का करीबी और ब्लॉक प्रमुख अनिरुल हुसैन गिरफ्तार: पार्टी के बाहुबली नेता अनुब्रत मंडल पर कार्रवाई की माँग

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के बोगतुई गाँव (Birbhum, West Bengal Massacre) में 8 लोगों के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट करने के बाद उन्हें जिंदा जलाकर मारने के मुख्य आरोपी और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेता और ब्लॉक प्रमुख अनिरुल हुसैन (Anirul Hossain) को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने घटनास्थल पर जाकर गुरुवार (24 मार्च 2022) को पीड़ित परिवारों से मिलने के दौरान कहा था कि हुसैन या तो सरेंडर करे या उसे गिरफ्तार किया जाएगा। ममता बनर्जी की घोषणा के बाद पुलिस ने हुसैन को तारापीठ के एक होटल से गिरफ्तार कर लिया।

घटना के बाद से ही अनिरुल हुसैन का नाम इसमें मुख्य आरोपित के तौर पर लिया जा रहा था। पीड़ित परिवार ने ममता बनर्जी को बताया कि जब घरों में आग लगाई गई थी, तब स्थानीय लोग हुसैन से लगातार फोन पर संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वह फोन नहीं उठा रहा था। उसकी गिरफ्तारी की माँग कर रहा था। कलकत्ता हाईकोर्ट में आज सुनवाई के दौरान भी उसकी गिरफ्तारी नहीं होने पर कोर्ट ने टिप्पणी की थी।

कौन है अनिरुल हुसैन

अनिरुल हुसैन रामपुरहाट का रहने वाला है और तृणमूल कॉन्ग्रेस का नेता और ब्लॉक प्रमुख है। TMC के गठन से पहले वह कॉन्ग्रेस का नेता था। हुसैन को विधानसभा के उपाध्यक्ष और बीरभूम के विधायक आशीष बनर्जी का बेहद करीबी बताया जाता है। हुसैन इलाके की राजनीतिक गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब घरों में लगाई गई, तब उन्होंने हुसैन को कई बार फोन किया था। लोगों का आरोप है कि अनिरुल हुसैन ने किसी का भी फोन नहीं उठाया और ना ही इस मामले की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस इस मामले में यह भी जानने की कोशिश करेगी की हुसैन ने पुलिस को जानकारी क्यों नहीं दी।

TMC नेता मंडल के खिलाफ कार्रवाई की माँग

मामले में बंगाल इमाम एसोसिएशन ने बीरभूम के बाहुबली नेता अनुब्रत मंडल के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष याहिया खान ने कहा कि इस घटना के बाद जिसने कहा था कि टीवी फटने से आग लगी है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।

बात दें कि आग में जलकर 8 लोगों की मरने की घटना सामने आने के बाद अनुब्रत मंडल कहा था कि टीवी फटने के कारण आग लगी है। जब ममता बनर्जी पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए पहुँची थीं, तब भी अनुब्रत मंडल ममता बनर्जी के साथ थे।

याहिया खान ने इस घटना के लिए ममता बनर्जी को भी दोषी माना। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने कहा था कि वह राज्य की 293 सीटों पर वही उम्मीदवार हैं। अब ममता बनर्जी को भी इस घटना की जिम्मेवारी लेनी चाहिए।

कौन है भादु शेख, जिसकी हत्या के बाद हुआ नरसंहार

बताया जा रहा है कि रामपुरहाट के बोगतुई गाँव की घटना भादु शेख और सोना शेख के आपसी दुश्मनी का परिणाम है। इसमें भादु शेख की बम मारकर हत्या कर दी गई, जिसके बाद 8 लोगों को जिंदा जलाकर मार दिया गया।

भादु और सोना के बीच वर्षों से दुश्मनी चल रही थी। भादू शेख गाँव का उप पंचायत प्रमुख था। वह पुलिस की कार चलाने का काम करता था। इस कारण पुलिस में उसकी पकड़ थी। वह वह बालू वाली गाड़ियों से ‘स्थानीय कल्याण कर’ बता कर वसूली करता था। कुछ समय पहले ही उसके बड़े भाई बाबर शेख की हत्या कर दी गई थी। वह TMC का जिलाध्यक्ष अनुब्रत मंडल का करीबी थी और संपन्न भी है।

भादु शेख की हत्या का आरोप सोना शेख पर लगा और उसके घर में आग लगाकर 8 लोगों की हत्या कर दी गई। कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि नरसंहार के बाद घरों को पानी से धोकर सबूत मिटाने की कोशिश की गई।

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता के लिए बनी कमिटी, पहली ही कैबिनेट बैठक में CM धामी ने लिया बड़ा फैसला

उत्तराखंड के दोबारा से मुख्यमंत्री बने पुष्कर सिंह धामी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड पर बड़ा फैसला लिया है। गुरुवार (24 मार्च 2022) को कैबिनेट की बैठक में सीएम धामी ने ऐलान किया कि उनकी सरकार राज्य में यूसीसी को लागू करेगी। इसके लिए उन्होंने एक्सपर्ट कमेटी बनाने का आदेश दिया है।

मुख्यमंत्री के तौर पर दोबारा चुने जाने के बाद धामी ने यह बड़ी घोषणा की है। इसको लेकर गुरुवार को सीएम धामी ने ट्वीट कर कहा, “चुनाव के समय बीजेपी ने राज्य की देवतुल्य जनता के समक्ष जो दृष्टि पत्र रखा था। उस पर विश्वास जताते हुए आप सभी ने हमें प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने का अवसर दिया है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारी सरकार माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरी तत्परता के साथ दृष्टि पत्र में उल्लेखित सभी संकल्पों को पूरा करते हुए उत्तराखंड राज्य को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का कार्य करेगी।”

गौरतलब है कि बुधवार को राज्य में दूसरी बार मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने से पहले पुष्कर सिंह धामी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड(Uniform Civil Code) यानि समान नागरिक संहिता को लागू करने की बात दोहराई थी। यही बात धामी ने अपनी रैलियों में दोहराया था। बता दें कि समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड का अर्थ होता है भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान कानून होगा, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। समान नागरिक संहिता में शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के बँटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा।

क्या यह संभव है

पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या ये संभव है? तो बता दें कि संविधान के अनुच्छेद-44 के तहत राज्य सरकारों को इस बात का अधिकार दिया गया है कि वो यूसीसी को लागू कर सकती हैं।

भारत की पहली यूनिकॉर्न जोड़ी: आशीष और रू​चि ने साथ की पढ़ाई-नौकरी और शादी, अब स्टार्टअप की दुनिया में जोड़ा नया पन्ना

केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) की प्रोत्साहन के बाद भारत तेजी से स्टार्टअप (Startup) के क्षितिज पर उभरा है। भारत स्टार्टअप की दुनिया में रोज नई कहानियाँ लिख रहा है। नए उद्यमियों की लगन और उनकी मेहनत के साथ-साथ उनकी दूरदर्शिता कंपनी को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। ऐसे ही एक सफल उद्यमी हैं रुचि कालरा (Ruchi Kalra) और आशीष महापात्रा (Ashish Mohapatra)। दोनों पति-पत्नी ने स्टार्टपअप की दुनिया में नई इबारत लिखी है।

रुचि और आशीष ने अपने डिजिटल लेंडिंग स्टार्टअप ऑक्सीजो फाइनेंशियल सर्विसेज (Oxyzo Financial Services) को अपनी मेहनत से इसे यूनिकॉर्न स्टार्टअप (Unicorn Startup) में शामिल करा दिया है। यह स्टार्टअप अब 1 अरब डॉलर (लगभग 77 अरब रुपए) की कंपनी हो गई है और लाभ कमा रही है। वहीं, उनके पति की कंपनी Obusiness पिछले ही साल यूनिकॉर्न के एलीट क्लब में शामिल हो चुकी है।

Unicorn में शामिल दो कंपनियाँ

Oxyzo Financial Services की को-फाउंडर रुचि कालरा ने बुधवार (23 मार्च 2022) को बताया कि कंपनी ने अपने पहले राउंड की फंडिंग में अल्फा वेब ग्लोबल (Alpha Web Global), टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट (Tiger Global Management), नॉरवेस्ट वेंचर पार्टनर्स (Norwest Venture Partners) सहित वेंचर कैपिटल फर्म के जरिए 200 मिलियन डॉलर (1567.5 करोड़ रुपए) जुटाए हैं।

दूसरी तरफ, उनके पति आशीष ने साल भर के भीतर ऑफबिजनेस (OfBusiness) ने सॉफ्टबैंक कॉर्प (Softbank Corp) और अन्य निवेशकों से जुटाए धन के जरिए यह वैल्युएशन हासिल की है। इसमें भी कई कंपनियों ने निवेश किया है। दिसंबर में स्टार्टअप का वैल्युएशन लगभग 5 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया था। ये भारत के पहले ऐसे पति-पत्नी हैं, जिनकी संचालित कंपनी यूनिकॉर्न में शामिल हुई हैं।

IIT के B.Tech के बाद ISB से MBA

38 साल की आशीष और 41 साल के आशीष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) के विद्यार्थी रह चुके हैं। रुचि ने IIT, Delhi से केमिकल इंजीनियरिंग में B.Tech करने के बाद हैदराबाद स्थित इंडियन स्कूल बिजनेस (ISB) से MBA किया है। वहीं, आशीष ने IIT खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में B.Tech और ISB, हैदराबाद से MBA किया है।

दोनों की मुलाकात मैकिन्से एंड कंपनी (Mckinsey & Co.) में काम करने के दौरान हुई थी। रुचि मैकिन्से इंडिया में खुदरा और MSE बैंकिंग सेवा का काम देखती थीं। वहीं, आशीष रेकिट ऐंड कोलमैन (Reckitt & Colman), आईटीसी लिमिटेड (ITC Limited), McKinsey & Company, मैट्रिक्स पार्टनर्स (Matrix Partners) में काम कर चुके हैं।

रुचि ने बताया कि दोनों कुछ अलग करना चाहते थे। यही सोचकर दोनों ने नौकरी छोड़ दी और अपना उद्यम शुरू किया। बता दें कि रुचि ऑक्सीजो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं, जबकि महापात्रा ऑफबिजनेस में सीईओ हैं। 

स्टार्टअप का सफर

कालरा और महापात्रा ने तीन अन्य लोगों के साथ मिलकर साल 2017 में Oxyzo की स्थापना OfBusiness की एक ब्रांच के रूप में की थी। वहीं, OfBusiness की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी। Oxyzo फाइनेंस और Ofbusiness थोक कच्चे माल उपलब्ध कराती है।

Oxyzo डेटा की पूर्ति के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर बिजनेसेस को फाइनेंस उपलब्ध कराती है। यह कंपनी छोटे और मझोले कारोबारियों को पूँजी उपलब्ध कराती है। वहीं, Ofbusiness छोटे और मध्यम कारोबारियों को स्टील, डीजल, खाद्यान्न और औद्योगिक रसायनों जैसे कच्चे माल की थोक में आपूर्ति करती है।

दोनों स्टार्टअप के लिए अलग-अलग ऑफिस बनाए गए हैं और दोनों कंपनियों के लिए अलग-अलग टीम काम करती है। ऑक्सीज़ो में 500 से अधिक कर्मचारी हैं और इसने 2 बिलियन डाॅलर से अधिक का ऋण वितरित किया है। ऑक्सीजो इस समय पूरे देश में 3000 से अधिक एसएमई को अपनी सेवाएँ दे रही है। यह कंपनी हर साल 4000 करोड़ रुपए से अधिक का ऋण वितरण कर रही है।

‘मस्जिद के पास भीड़ मत लगाओ’: मथुरा में मुस्लिमों ने हिन्दू महिलाओं को शीतला माता की पूजा से रोका, सालों से होती रही है ‘बसौड़ा पूजा’

भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में बुधवार (23 मार्च, 2022) को मुस्लिमों ने हिंदू महिलाओं को ‘बासौड़ा पूजा’ करने से रोक दिया। करीब 20-25 हिंदू महिलाएँ रीति-रिवाज के साथ शीतला माता की पूजा करने के लिए ईदगाह मस्जिद के पास कुएँ के के पास आई थीं, लेकिन हिंदू महिलाओं को वहाँ देख मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मस्जिद के पास भीड़ लगाने के आरोप लगाकर बवाल खड़ा कर दिया। इसके बाद हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच झड़पें भी हुईं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार को सुबह के करीब पाँच बजे थे और हिंदू महिलाएँ ईदगाह मस्जिद के ही पास स्थित कुएँ पर बसौड़ा पूजा करने के लिए गईं। लेकिन जैसे ही वहाँ पर महिलाएँ पहुँचीं तो कट्टरपंथी मुस्लिमों ने उन्हें वहाँ पर पूजा करने देने से मना कर दिया। विवाद बढ़ने पर मौके पर गोविंदनगर पुलिस पहुँची और मामले को शांत कराने की कोशिश की।

पुलिस ने मुस्लिमों को इस पूजा के बारे में बताया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मुस्लिम मानने को तैयार ही नहीं थे। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने प्रांतीय सशस्त्र बल को इसकी जानकारी दी। भारी संख्या में फोर्स की तैनाती के बीच महिलाओं ने शीतला माता की पूजा-अर्चना की। महिलाएँ बीते कई सालों से इसी कुएँ में बसौड़ा पूजा करती थी और दूसरे अनुष्ठान भी यहाँ किए जाते रहे हैं।

जबकि मुस्लिमों का कहना है कि इससे पहले वहाँ पर ऐसी कोई भी पूजा नहीं होती थी। सीओ अभिषेक मिश्रा अभिषेक तिवारी के मुताबिक, ये पूजा यहाँ की स्थानीय परंपरा है और इसे होने देना चाहिए। ‘अमर उजाला’ के मुताबिक, स्थानीय लोग इलाके में अपने बच्चों के लिए ‘मुंडन’ भी करते हैं।

बसौड़ा पूजा में शीतला माता को कराते हैं बासी भोजन

बसौड़ा पूजन हिंदू परंपरा का हिस्सा है, जिसे ‘मौसम के बदलाव’ के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है। हिंदू समुदाय बड़ी संख्या में शीतला माता की पूजा करके अपने बच्चों की सलामती के लिए प्रार्थनाएँ करते हैं। शीतला माता को चिकनपॉक्स और त्वचा रोगों से राहत देने वाली देवी माना जाता है। इसमें महिलाएँ पूजा से एक दिन पहले देवी के लिए स्वादिष्ट भोजन का प्रसाद बनाती हैं और इसे बासी बनाने के लिए अलग रख देती हैं।

ये पूजा देश के कई हिस्सों में होती है। बसौड़ा पूजा के दिन भक्तों को गर्मी और गर्म पदार्थों से दूर रहना चाहिए। इसमें बासी ठंडे भोजन, ठंडे पेय जैसे दही दूध, या ‘राब’ (दही, बाजरा के आटे और जीरा का उपयोग करके बनाया गया पारंपरिक पेय) का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा घरेलू काम में ठंडे पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। 24 घंटे के बाद फिर से गर्म चीजों का सेवन किया जा सकता है।

बसौदा पूजन को ‘शीतला सप्तमी’ या ‘शीतला अष्टमी’ भी कहा जाता है और यह हर साल हिंदू कैलेंडर के चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के आसपास मनाया जाता है।

‘स्वरा भास्कर का सामान ले भागा ड्राइवर, बोला Uber- कागज़ दिखाने पड़ेंगे, तभी मिलेगा वापस’: FACT CHECK

बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने ट्विटर के जरिए अपने साथ हुई धोखाधड़ी की जानकारी दी। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के लॉस एंजिलस में उबर कैब ड्राइवर उनका सामान लेकर भाग गया और अब ड्राइवर से संपर्क भी नहीं हो पा रहा है। उन्होंने ट्विटर पर उबर को टैग करते हुए अपना सामान वापस करने की माँग की। इसके बाद सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है, जिसमें दिखाया गया है कि ‘उबर सपोर्ट’ ने उनसे कागज माँगा है। 

क्या है वाकया

दरअसल स्वरा ने घटना की शिकायत करते हुए अपने ट्वीट में लिखा, “हैलो उबर सपोर्ट, LA में आपका एक ड्राइवर मेरा सारा ग्रोसरी का सामान अपनी कार में ले कर भाग गया। जबकि मैं पहले से डाले गए स्टॉप पर रुकी थी। ऐसा लगता है कि आपके एप्लीकेशन पर इसकी रिपोर्ट करने का कोई तरीका नहीं है। मेरा सामान खोया नहीं है, वो जानबूझकर लेकर गया। क्या मुझे अपना सामान वापस मिल सकता है?”

इसके बाद सोशल मीडिया पर ‘उबर सपोर्ट’ वाली ट्विटर आईडी की तरफ से जवाब का एक स्क्रीनशॉट वायरल हुआ है। जिसमें लिखा है, “हमें वाकई में अफसोस है कि आपको इस तरह के कड़वे अनुभव से गुजरना पड़ा। हालाँकि हमें वह सामान मिल गया है और हम इसे आपको लोकेशन पर ड्रॉप कर देंगे, लेकिन सामान सौंपने से पहले मुझे आपका आईडी देखना पड़ेगा। तो…कागज तो दिखाने पड़ेंगे।”

सच क्या है?

बता दें कि यह जवाब उबर सर्विस की तरफ से नहीं बल्कि एक ट्विटर यूजर की तरफ से दिया गया था। जिसका नाम आशीष है और उसका ट्विटर यूजर आईडी @go4ashi है। उसने अपना नाम बदल कर Uber_Support कर लिया और स्वरा को टैग करके जवाब दिया। इसलिए ‘Uber_Support’ में भी आप देख सकते हैं कि यूजर आईडी ‘@go4ashi’ ही है। हालाँकि, अब उस यूजर ने अपना नाम फिर से आशीष कर लिया है।

वास्तव में ‘Uber Support’ ने स्वरा को जवाब देते हुए कहा था, “आपका अनुभव निश्चित रूप से हमारे मानकों के अनुरूप नहीं है। हमने कनेक्ट करने के लिए डीएम के माध्यम से संपर्क किया है। हम इसे ठीक करने के लिए आपकी मदद करना चाहते हैं।” वहीं एक्ट्रेस के इस ट्वीट पर लोग रिएक्ट करते हुए उनका मजाक भी बना रहे हैं।

नेटिजन्स ने सोशल मीडिया पर स्वरा को किया ट्रोल

हजारों की मौत, लाखों को करना पड़ा पलायन: रूस-यूक्रेन नहीं, यहाँ लड़ा जा रहा है दुनिया का सबसे भयंकर युद्ध

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध लगातार जारी है। दोनों तरफ से हजारों की संख्या में सैनिकों के मारे जाने की खबरें भी सामने आ रही हैं। यूक्रेन, रूस के 7000 से 15000 के बीच सैनिकों को मार डालने का दावा कर रहा है। इन दोनों देशों के युद्ध की चर्चा दुनिया भर में हो रही है, लेकिन इस युद्ध से भी भयानक स्थिति पूर्वी अफ्रीकी देश इथियोपिया में है। वहाँ पर सालों से गृह युद्ध चल रहा है, जिसमें हजारों लोग मारे जा चुके हैं।

हालाँकि, इथियोपिया में चल रहे खूनी संघर्ष की आवाज अंतरराष्ट्रीय पर नहीं सुनी जा रही है। कोई भी इसके बारे में चर्चा नहीं कर रहा है। इस बीच 4 मार्च, 2022 को इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद ने रूस और यूक्रेन के युद्ध को खत्म करने के लिए सभी पक्षों से संयम के साथ काम लेने और राजनयिक स्तर की कोशिशों को शुरू करने की अपील की थी, ताकि इस संकट को खत्म किया जा सके।

लेकिन, खुद इथियोपिया में सरकार और टाइग्रे विद्रोहियों के बीच चल रहे खूनी खेल पर किसी भी देश ने ध्यान नहीं दिया। उस पर इथियोपिया के नेल्सन मंडेला कहे जाने वाले अबी अहमद ने इरिट्रिया के साथ शांति समझौता किया था। इसके बाद उन्हें 2019 में शांति का नोबल पुरस्कार दिया गया था।

क्या है इथोपिया का सिविल वॉर

अबी अहमद 2018 में इथोपिया के प्रधानमंत्री बने। उनसे पहले 27 साल से देश में टाइग्रे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (TPLF) सत्ता में थी। इथोपिया के टिगरे क्षेत्र की आबादी पूरे देश की केवल 6 प्रतिशत ही है, लेकिन इनका राष्ट्रीय राजनीति में सिक्का चलता था। अबी अहमद ने भी टाइग्रे को सत्ता में भागीदारी देने की कोशिशें की, लेकिन टाइग्रे का आरोप था कि सरकार सही समय पर चुनाव नहीं करा रही है। 2020 में जब अबी अहमद ने सेना की नॉर्दर्न कमांड के नए चीफ की नियुक्ति की तो ये राजनीतिक संघर्ष गृह युद्ध में बदल गया।

नवंबर 2021 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2020 में अबी ने उत्तरी टाइग्रे क्षेत्र की राजधानी मेकेले के बाहर संघीय आर्मी पर हमला करके हथियार चुराने का आऱोप लगाते हुए टाइग्रे विद्रोहियों के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशन का आदेश दे दिया था। अबी ने लोगों से जल्द ही इस मसले का हल निकालने का वादा भी किया, लेकिन देश में गृह युद्ध शुरू हो गया। हजारों की संख्या में निर्दोष नागरिकों की मौतें हो चुकी हैं।

इस लड़ाई में 20 लाख से अधिक लोगों का आशियाना छिन गया। वो विस्थापित होने के लिए मजबूर हो गए। यहीं देश में अकाल की स्थिति भी आ गई। भयावह होते हालातों के कारण इस बात का डर बढ़ गया है कि कहीं ये युद्ध बाकी क्षेत्रों को अपने चपेट में न ले।

शुरुआत में तो इथियोपिया इस बात से इनकार करता रहा कि सरकार की तरफ से इस युद्ध में पड़ोसी देश इरिट्रिया के सैनिक भी लड़ रहे हैं। लेकिन, अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने इसकी पोल खोल दी। यहाँ शरणार्थी शिविरों में लूटपाट, यौन शोषण और नरसंहारों में हजारों लोगों की मौत हो गई। अबी अहमद की सरकार ने अपनी बर्बरता को छिपाने के लिए पत्रकारों को भी बैन कर दिया।

पिछले साल सितंबर में कहा था कि ‘मानवीय सहायता पर रोक’ टाइग्रे में 50 लाख से अधिक लोगों तक पहुँचने की क्षमता को सीमित कर रही थी। देश के 400,000 अकाल से जूझ रहे थे। तब से अभी तक वहाँ सरकार और विद्रोहियों में लगातार जंग जारी है।

‘इस मामले में कोई दूध का धुला नहीं’: सुप्रीम कोर्ट ने CBI को सौंपा परमबीर सिंह मामला, उद्धव सरकार को बड़ा झटका

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में गुरुवार (24 मार्च, 2022) को मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर IPS परमबीर सिंह मामले की जाँच सीबीआई (CBI) को सौंप दी है। यह जाँच परमबीर सिंह के खिलाफ अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित हैं। इन केसों में परमबीर सिंह पर कुल 5 FIR दर्ज हैं। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में “इस मामले में कोई भी दूध का धुला नहीं” जैसी टिप्पणी भी की है। अदालत का यह आदेश महाराष्ट्र की उद्धव सरकार के लिए एक झटका माना जा रहा है।

परमबीर सिंह के खिलाफ दोनों मामलों की जाँच महाराष्ट्र सरकार करवा रही थी। इसके खिलाफ परमबीर सिंह ने मुंबई हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी जिसे हाईकोर्ट ने 16 सितम्बर को ख़ारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम परमबीर सिंह पर लगे आरोपों पर कोई भी टिप्पणी कर के जाँच को प्रभावित नहीं करना चाहते। मुंबई हाईकोर्ट ने इस मामले को सर्विस मैटर जैसा सुना, जिसे हम ख़ारिज कर रहे हैं। परमबीर सिंह पर दर्ज पाँचों केसों को जाँच रिकॉर्ड के साथ CBI को एक सप्ताह के अंदर ट्रांसफर कर दिया जाए।”

शीर्ष अदालत ने इस केस में प्रथम दृष्टया निष्पक्ष जाँच की जरूरत को पाया। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, “ऐसे हालत क्यों बने? किस की गलती से बने? ये सब कुछ निकल कर सामने आना चाहिए। ऐसे में CBI को निष्पक्षता से जाँच करनी चाहिए। इस केस से जुड़े सभी लोग सच को सामने लाने के लिए CBI को पूरा सहयोग दें।” यह आदेश जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुंदरेश की बेंच ने दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने परमबीर सिंह की अपने निलंबन को समाप्त करने की माँग ठुकरा दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम नहीं जानते कि अंत में क्या होगा और क्या अभी और केस भी दर्ज होंगे। डिपार्टमेंट की कार्रवाई के मामले में CBI के जाँच निष्कर्ष की प्रतीक्षा करना ही ठीक होगा।”

महाराष्ट्र सरकार की तरफ से पेश वकील ने CBI जाँच की माँग का विरोध किया। उन्होंने ऐसा होने पर प्रदेश पुलिस का मनोबल गिरने का तर्क दिया। तब सुप्रीम कोर्ट ने जवाब में कहा, “ये सही है कि हर मामला CBI को नहीं सौंपा जा सकता है लेकिन उस स्थिति का क्या करें जब पुलिस और मंत्रालय एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हों।” अंत में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट हमारे कार्यों को प्रभावित नहीं करती।

‘The Kashmir Files को यूट्यूब पर डाल दो’: CM केजरीवाल ने टैक्स फ्री करने से किया इनकार, स्वरा-तापसी की फिल्मों को किया था TAX FREE

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और पलायन पर बनी फिल्म ‘The Kashmir Files’ को प्रदेश में टैक्स फ्री करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा में विपक्षी भाजपा द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने पर कहा कि निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को इस फिल्म को YouTube पर डाल देना चाहिए, ये फ्री ही फ्री हो जाएगी। उन्होंने पूछा कि फिल्म को टैक्स फ्री क्यों करा रहे हो?

उन्होंने कहा, “निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को इतना ही शौक है तो बोलो यूट्यूब पर डाल देगा, वहाँ सब कुछ फ्री है और सारे लोग देख लेंगे एक ही दिन के अंदर। टैक्स फ्री कराने की ज़रूरत ही क्या है?” AAP विधायकों ने अपनी पार्टी के सुप्रीमो के इस बयान का स्वागत करते हुए विधानसभा में मेज थपथपाए। बता दें कि सभी भाजपा शासित राज्यों ने संवेदनशील मुद्दे पर बनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को टैक्स फ्री किया है।

हालाँकि, इस बयान के बाद अब दिल्ली के मुख्यमंत्री को लोग पुराने फैसले याद दिलाते हुए घेर रहे हैं। बता दें कि 22 अप्रैल, 2016 को उन्होंने स्वरा भास्कर की फिल्म ‘नील बटे सन्नाटा’ को टैक्स फ्री करने की घोषणा करते हुए कहा था कि सभी लोगों को ये मूवी ज़रूर देखनी चाहिए। इतना ही नहीं, उन्होंने तापसी पन्नू की फिल्म ‘साँड की आँख’ को भी 25 अक्टूबर, 2019 को टैक्स फ्री करने की घोषणा करते हुए कहा था कि सभी उम्र और जेंडर के लोगों को ये देखनी चाहिए।

बता दें कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने भारत में 200 करोड़ रुपए से भी अधिक कमा लिए हैं। दुनिया भर में इस फिल्म का प्रदर्शन शानदार रहा है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, असम, कर्नाटक, बिहार, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड और त्रिपुरा जैसे राज्यों में इसे टैक्स फ्री का दर्जा दे दिया गया है। फिल्म की धुआँधार कमाई अब भी जारी है। इस फिल्म में अनुपम खेर, दर्शन कुमार, मिथुन धकरवर्ती, पल्लवी जोशी और पुनीत इस्सर मुख्य भूमिकाओं में हैं।

चुनाव के समय वादे पर वादे, अब मोदी सरकार से माँग रहे ₹50000 करोड़: बोले CM भगवंत मान – पंजाब पर ₹3 लाख करोड़ का कर्ज

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने पंजाब में ‘आप’ की सरकार बनाने के लिए वादे पर वादे किए, लेकिन अब मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) उन वादों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार से पैसे माँग रहे हैं। पंजाब (Punjab) के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरुवार (24 मार्च 2022) को राज्य की वित्तीय स्थिति बेहद खराब होने का दावा करते हुए केंद्र सरकार से दो साल के लिए प्रति वर्ष 50000 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता माँगी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मान ने पीएम को राज्य की आर्थिक स्थिति से अवगत कराया और बताया कि उन पर 3 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। इसके अलावा, उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए पंजाब के लिए दो साल के लिए प्रति वर्ष 50000 करोड़ रुपए के विशेष पैकेज की माँग की है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में उन्होंने कहा, “मैं आज पीएम मोदी से मिला। उन्होंने मुझे पंजाब का सीएम बनने पर बधाई दी।”

इसके बाद पंजाबी भाषा में एक ट्वीट में पीएम मोदी के साथ अपनी मुलाकात की जानकारी देते हुए, मान ने कहा, “पंजाब के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से मुलाकात की। मुझे राज्य के मुद्दों को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार से समर्थन मिलने की पूरी उम्मीद है।” मान ने यह भी कहा कि अगर राज्य को दो साल के लिए विशेष पैकेज मिलता है, तो उनकी सरकार पंजाब की आर्थिक स्थिति को स्थिर करने में सक्षम होगी।

आपको याद होगा कि ‘आप’ सुप्रीमो केजरीवाल का चुनावी वादों में से एक पंजाब के लोगों को मुफ्त उपहार देना था। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में सभी लोगों को चौबीसों घंटे मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। उन्होंने पंजाब में 18 वर्ष से अधिक उम्र की सभी महिलाओं को 1000 रुपए देने का भी वादा किया था। इसके अलावा उन्होंने पंजाब के सभी स्कूलों और अस्पतालों के पुनर्निर्माण और मोहल्ला क्लीनिक की तर्ज पर ‘पिंड क्लीनिक’ की स्थापना का भी वादा किया था, जहाँ सभी का मुफ्त इलाज किया जाएगा। यही नहीं शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मान ने 25,000 सरकारी नौकरियों की घोषणा की थी।

हालाँकि, अब राज्य में सरकार बनने के बाद मुफ्त के इन वादों को पूरा करने में ‘आप’ की कोई रुचि नहीं रही। मान ने दावा किया है कि राज्य भारी कर्ज में डूबा हुआ है और इसके लिए उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार से मदद माँगी है। इससे यह अटकलें लगाई जाने लगी हैं कि अगर पंजाब में आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार मुफ्त के वादों को पूरा करने में विफल रहती है, तो वे एक रणनीति के तहत केंद्र सरकार पर पूरी तरह से आरोप लगा सकते हैं। जैसा कि अरविंद केजरीवाल अक्सर करते रहे हैं।

इस दौरान केजरीवाल का एक पुराना वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें वह कहते हैं कि मैं पूरा होमवर्क करके जाता हूँ कि पैसा कहाँ से आएगा, हम कैसे सब कुछ करेंगे।

बीरभूम मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित: सुनवाई के दौरान बंगाल की ममता सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल, CBI जाँच की माँग

पश्चिम बंगाल के बीरभूम (Birbhum, West Bengal) जिले के एक गाँव में बर्बरतापूर्वक पिटाई के बाद 8 लोगों को जिंदा जलाकर मार डालने के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। उच्च न्यायालय ने गंभीरता को देखते हुए मामले का स्वत: संज्ञान लिया था।

इस मामले में बुधवार (23 मार्च) को निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने के लिए स्वत: संज्ञान लेकर याचिका दायर की गई थी। उच्च न्यायालय ने प्रदेश की ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली सरकार से 24 घंटे में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था। इसके साथ ही घटनास्थल पर CCTV कैमरे लगाने, गवाहों को सुरक्षा देने का निर्देश दिया था।

मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने इस घटना की तुलना साल 2002 में गुजरात हुए साबरमती एक्सप्रेस के अग्निकांड से की। वकील ने कोर्ट को बताया कि अदालत के निर्देश के बावजूद भी बीती रात 10 बजे तक सीसीटीवी नहीं लगाया गया था। यह मीडिया में कहा गया है। इसके साथ ही अदालत में यह भी दलील दी गई कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना वाले गाँव का दौरा कर मुआवजे की घोषणा की, जो तथ्यों को दबाने के लिए पीड़ितों को प्रभावित कर सकता है।

इस मामले में अदालत से सीबीआई जाँच कराने की माँग की गई। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह साल 2007 के नंदिग्राम पुलिस फायरिंग की तरह यह इतिहास दोहराने जैसा है। उन्होंने कहा कि नंदिग्राम मामले को भी सीबीआई को सौंप दिया गया था। याचिकाकर्ता की ओर दी कोर्ट में दलील दी गई कि इस मामले में क्या करना है कि डीजीपी ने पहले ही मन बना लिया है। याचिकाकर्ता ने कहा रिपोर्ट में जिस रिश्तेदार का जिक्र किया गया है, उसका 161 या 164 के तहत बयान दर्ज नहीं कराया गया है।

कोर्ट का कहना है कि इस मामले का मुख्य आरोपित TMC का ब्लॉक प्रमुख को अभी तक पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया है। साथ ही मृतकों के मृत्यु पूर्व के बयान को अंग्रेजी में देखकर कोर्ट ने ममता सरकार से पूछा कि क्या वे सभी शिक्षित थे। इस पर राज्य की ओर से पेश महाधिवक्ता मुखर्जी ने कहा कि यह बयान डॉक्टर ने रजिस्टर किया है।