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पोलैंड दे सकता है यूक्रेन में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों को शिक्षा पूरी करने की अनुमति: बोले केंद्रीय मंत्री वीके सिंह, रेस्क्यू के लिए 80 फ्लाइट्स तैनात

यूक्रेन पर रूस के हमले (Russia-Ukraine War) के बीच भारत की मोदी सरकार (Modi Government) वहाँ से अपने लोगों को निकालने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है। प्रधनानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने ऑपरेशन गंगा (Operation Ganga) नाम से चलाए जा रहे रेस्क्यू मिशन में 80 विमानों और अपने 24 मंत्रियों को लगाया है। वहीं, यूक्रेन से लौटने वाले भारतीय छात्र-छात्राओं को पोलैंड के विश्वविद्यालय अपने यहाँ एडमिशन देने पर विचार कर रहे हैं, ताकि उनकी पढ़ाई पूरी हो सके।

पोलैंड के Rzeszow में होटल प्रीज़ीडेनकी में 600 भारतीय छात्रों के साथ बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री एवं सेवानिवृत्त जनरल विजय कुमार सिंह (VK Singh) ने कहा, “यदि आपका पाठ्यक्रम पूरा नहीं हुआ है तो पोलैंड में मिले सभी लोगों ने मुझसे कहा कि वे यूक्रेन में पढ़ने वाले छात्रों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेंगे।” उन्होंने संकेत दिया कि पोलिश विश्वविद्यालय भारत के प्रति सद्भावना के तहत इन छात्रों को अपने यहाँ शिक्षा पूरी करने की अनुमति दे सकते हैं।

केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने ट्वीट किया, “पोलैंड और भारत के बीच सदियों पूरानी मित्रता और सौहार्द्रपूर्ण संबंध हैं। इसके कारण दोनों देशों के लोग एक-दूसरे के नजदीक आए हैं। मुझे आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि पोलिश विश्वविद्यालय यूक्रेन के हमारे छात्रों के लिए अपने दरवाजे खोलेंगे, ताकि वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। जय हिन्द!”

यूक्रेन में चल रहे रूस के विशेष सैन्य अभियानों के बीच वीके सिंह मंगलवार (1 मार्च 2022) को यूक्रेन से भारतीय नागरिकों को निकालने की प्रक्रिया की निगरानी के लिए पोलैंड पहुँचे। भारतीय नागरिकों के साथ अपनी बातचीत के दौरान उन्होंने वहाँ फँसे भारतीयों से कीव में भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने का भी आग्रह किया।

भारत ने यूक्रेन में रेस्क्यू ऑपरेशन तेज किया

यूक्रेन में बिगड़ते हालात के बीच भारत ने ऑपरेशन गंगा के तहत अपने रेस्क्यू अभियान को तेज कर कर दिया है। इसके लिए 80 फ्लाइट और 24 मंत्रियों को लगाया गया है। अधिक से अधिक भारतीयों को जल्दी निकालने के लिए विमानों की आवाजाही की संख्या को भी बढ़ा दिया गया है। रोमानिया के बुखारेस्ट से 35 निकासी अभियान का निर्णय लिया गया है। इसमें एअर इंडिया की 14 फ्लाइट, एअर इंडिया एक्सप्रेस की 8 फ्लाइट, इंडिगो की 7 फ्लाइट, विस्तारा की 3 फ्लाइट, वायुसेना की 2 फ्लाइट और स्पाइस जेट की एक फ्लाइट शामिल हैं।

इसी तरह हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट से 28 फ्लाइट, पोलैंड के Rzeszow से 9 फ्लाइट, रोमानिया के Suceava से 5 फ्लाइट और स्लोवाकिया के Kosice से 3 फ्लाइट उड़ान भरेंगी। इन 80 फ्लाइट्स में यूक्रेन से लगभग 17,000 विद्यार्थियों को निकाला जाएगा। वहीं, 2 मार्च तक 24 फ्लाइट्स उड़ान भर चुकी हैं। यूक्रेन से छात्रों को लेकर पहली फ्लाइट 26 फरवरी को मुंबई में लैंड हुई थी।

रेस्क्यू अभियान की निगरानी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीके सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, हरदीप सिंह पुरी और किरेन रिजेजू को हंगरी, रोमानिया, पोलैंड और स्लोवाकिया भेजा है। इसके साथ अन्य मंत्रियों को इस अभियान की निगरानी और यूक्रेन से लौटने छात्र-छात्राओं को दिल्ली और मुंबई में व्यवस्थित करने की जिम्मेवारी सौंपी है।

‘ऐसी ही हो विदेश नीति’: यूक्रेन पर मोदी सरकार के मुरीद हुए कॉन्ग्रेस MP शशि थरूर, कहा- हमारे लिए राष्ट्र सर्वप्रथम

यूक्रेन पर रूस के हमले (Ukraine-Russia War) के बीच वहाँ फँसे भारतीय छात्र-छात्राओं को निकालने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के प्रयासों की कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि विदेश नीति ऐसी ही होनी चाहिए।

दरअसल, यूक्रेन से विद्यार्थियों को निकालने के लिए विदेश मंत्रालय ने विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) की अध्यक्षता में गुरुवार (3 मार्च 2022) को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई। इसमें कॉन्ग्रेस के महासचिव राहुल गाँधी (Congress General Secretary Rahul gandhi) और शशि थरूर के साथ-साथ विभिन्न दलों के नेता शामिल थे।

बैठक के बाद थरूर ने कहा कि यूक्रेन पर विदेश मामलों की सलाहकार समिति की सर्वदलीय बैठक में जयशंकर ने विपक्षी दलों के सवालों एवं चिंताओं के स्पष्ट जवाब दिए। इसके लिए विदेश मंत्री को धन्यवाद देते हुए थरूर ने मोदी सरकार की विदेश नीति की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा कि इसी गति से विदेश नीति चलनी चाहिए।

थरूर ने कहा कि राष्ट्रीय हितों की बात पर ‘भारत सर्वप्रथम की नीति’ के तहत पक्ष-विपक्ष एकजुट हो जाते हैं। वहीं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में रूस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पर वोटिंग से दूर रहने की भारत की नीति का कॉन्ग्रेस के सांसदों ने समर्थन किया। 

राहुल गाँधी ने बैठक में चीन और पाकिस्तान का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ये दोनों देश रूस के करीब आ रहे हैं, लेकिन अभी देश की प्राथमिकता यूक्रेन से छात्र-छात्राओं को निकालना है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिक्रिया में देर हुई और एडवाइजरी भ्रमित कर रही थी। अब इस संकट में साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है।

ऑपरेशन गंगा

बता दें कि युद्धग्रस्त यूक्रेन में फँसे भारतीय छात्र-छात्राओं को वापस लाने के लिे भारत सरकार ‘ऑपरेशन गंगा’ नाम से रेस्क्यू अभियान चला रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि भारतीय वायु सेना के विमान बुखारेस्ट (रोमानिया) से पहली सी-17 उड़ान के साथ ऑपरेशन गंगा में शामिल हो गए हैं। बुडापेस्ट (हंगरी), बुखारेस्ट (रोमानिया) और रेजजो (पोलैंड) से भारतीय वायुसेना (IAF) की उड़ानें शुरू की की गई हैं।

बागची ने बुधवार (2 मार्च, 2022) को जानकारी देते हुए बताया कि यूक्रेन पर रूसी हमला होने के बाद से अभी तक लगभग 17,000 भारतीयों ने यूक्रेन छोड़ दिया है। वहीं अब तक 15 उड़ानों में 3,352 लोग भारत भी लौट आए हैं। 

रूसी हमले का अजब-गजब बदला ले रहे हैं यूक्रेनी: जिस लग्जरी याच पर था मैकेनिक, उसे ही की डूबोने की कोशिश

यूक्रेन के एक नाविक (sailor) को उसके रूसी बॉस की लग्जरी याच को डुबोने की कोशिश करने के आरोप में स्पेन में गिरफ्तार किया गया। अपने देश यूक्रेन पर हमले से नाराज एक 55 वर्षीय यूक्रेनी नाविक तारास ओस्तापचुक ने रूसी बॉस की लग्जरी याच को डुबोने की कोशिश की है। जिसकी कीमत 7.7 मिलियन डॉलर (58 करोड़ रुपए) बताई जा रही है। 

जिस लग्जरी याच को डूबोने की कोशिश की गई उसका नाम लेडी अनास्तासिया बताया जा रहा है। रूसी सैन्य हथियार कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के सीईओ अलेक्जेंडर मिजीव की है। यह रूस को जहाजों, टैंकों और लड़ाकू वाहनों का निर्यात करती है। 

बताया जा रहा है कि 55 वर्षीय तारास ओस्तापचुक ने रूस के युद्ध का विरोध करते हुए 156 फुट के लग्जरी याच के इंजन रूम में वाल्व खोलने की कोशिश की। इससे इंजन को काफी नुुकसान पहुँचा। जब अधिकारी ओस्तापचुक को गिरफ्तार करने पहुँचे, तो क्रू मेंबर ने कथित तौर पर कहा, “मेरा मालिक एक क्रिमिनल है जो यूक्रेन के लोगों को मारने वाला हथियार बेचता है।”

स्थानीय आउटलेट के अनुसार, यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की खबर देखने के बाद ओस्तापचुक ने लग्जरी याच में तोड़फोड़ करने का सोचा। हैरानी की बात यह है कि यूक्रेन के नागरिक ने जज के सामने अपना जुर्म कबूल करते हुए कहा है कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। उसने अदालत में जज के सामने कहा, “मैंने युद्ध की खबरें देखीं। कीव में एक इमारत पर हेलीकॉप्टर हमले का एक वीडियो था। उपयोग किए जाने वाली युद्ध सामग्री याच मालिक की कंपनी में निर्मित किए जाते हैं। वे निर्दोषों पर हमला कर रहे थे।” उसने आगे कहा कि उसे अपने कार्यों पर पछतावा नहीं है और इसे फिर से करेगा।

10 साल तक मैकेनिक के रूप में याच पर काम करने वाले ओस्तापचुक को बाद में हिरासत से रिहा कर दिया गया। इसके बाद वह स्पेन छोड़ चुका है। वह लड़ाई में मदद करने के लिए अपने देश यूक्रेन लौटने वाला है। ओस्तापचुक ने स्थानीय आउटलेट को बताया, “मैं लड़ने जा रहा हूँ। जैसे ही मैं यूक्रेनी शहर में पहुँचूँगा, मैं सैन्य कमांडर की तलाश करूँगा और उससे पूछूँगा कि क्या उन्हें मेरी जरूरत है।”

वह कहता है, “मैंने खुद से कहा, अगर मेरे पास मेरा देश है तो मुझे नौकरी की ज़रूरत क्यों है। मेरे पास नाव पर एक हेड मैकेनिक के रूप में अच्छी नौकरी थी और अच्छी तनख्वाह थी लेकिन मैं अपने देश के लिए लड़ने जा रहा हूँ। मैं अपना देश खोने नहीं जा रहा हूँ। मैं हीरो नहीं हूँ। मैं एक अधेड़ उम्र का आदमी हूँ, लेकिन मेरे पास मैकेनिक के तौर पर काफी अनुभव है। मैंने कभी कोई हथियार नहीं रखा है, लेकिन यदि आवश्यक हो तो मैं करूँगा।”

गौरतलब है कि यूक्रेन के सबसे बड़े शहर खेरसोन (Kherson) पर रूस की सेना ने नियंत्रण कर लिया है। दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध के आठवें दिन गुरुवार (3 मार्च 2022) को इसकी पुष्टि खेरसोन के मेयर इगोर कोल्यखेव ने भी की है। मेयर इहोर कोलिखैव ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट लिखकर निवासियों से रूसी सैनिकों के आदेशों का पालन करने के लिए कहा है। हालाँकि राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

यूक्रेन में MBBS कर रहे छात्रों को देश में ही एडमिशन देने की तैयारी में मोदी सरकार: हर साल 25000 स्टूडेंट डॉक्टरी पढ़ने जाते हैं विदेश

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध (Russia-Ukraine War) के बीच वहाँ फँसे भारतीय छात्र-छात्राओं को रेस्क्यू करने के लिए भारत सरकार लगातार कोशिश कर रही है। यूक्रेन में करीब 18000 भारतीय छात्र हैं, जिन्हें भारत लाया जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार ने केंद्रीय मंत्रियों की टीमें भी गठित की गई हैं, जो यूक्रेन से सीमा साझा करने वाले देशों में जाकर यूक्रेन से आने वाले छात्रों को भारत लाने में लगे हैं। खबर है कि यूक्रेन से आने वाले इन छात्रों को भारत के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन देने की भी सरकार तैयारी कर रही है।

दरअसल भारत में डॉक्टर बनने की चाह रखने वाले स्टूडेंट के लिए भारत सरकार अखिल भारतीय स्तर पर हर साल NEET की परीक्षा आयोजित करती है। इसमें हर साल करीब 8 लाख छात्र इस परीक्षा को क्लियर कर पाते हैं। देश के मेडिकल कॉलेजों में करीब 90,000 सीटें हैं और इनमें से आधी सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हैं। ऐसे में बाकी के छात्रों को विदेशों का रुख करना पड़ता है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के प्राइवेट सेक्टर के कॉलेजों में करीब 20 लाख रुपए प्रतिवर्ष का खर्च होता हैं। वहीं यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई में हर साल करीब 10 लाख रुपए लगते हैं।

विदेश जाने वाले 90 फीसदी स्टूडेंट नहीं पास कर पाते हैं NEET

विदेशों में एमबीबीएस की पढ़ाई करने जाने वाले भारतीयों विद्यार्थियों को लेकर संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी का कहना है कि विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले लगभग 90% भारतीय छात्र भारत में मेडिकल एडमिशन के लिए होने वाली परीक्षाएँ पास ही नहीं कर पाते हैं। मंत्री ने आगे कहा कि मेडिकल स्टडी के लिए विदेश जाने वाले 60% भारतीय छात्र चीन, रूस और यूक्रेन जाते हैं। इन देशों में MBBS कोर्स की कुल फीस लगभग 35 लाख रुपए है, जिसमें छह साल की शिक्षा, रहने का खर्च, कोचिंग और भारत लौटने पर स्क्रीनिंग टेस्ट पास करना शामिल है। वहीं, भारत में यह खर्च 45 से 55 लाख रुपए या इससे भी ज्यादा है। यही कारण है कि अधिकतर छात्र विदेशों में पढ़ने जाते हैं।

गौरतलब है कि भारत से हर साल करीब 20,000 से 25,000 स्टूडेंट विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए जाते हैं। इसके पीछे की बड़ी वजह यह भी है कि विदेशों में एमबीबीएस की स्टडी भारत की अपेक्षा काफी सस्ती होती है।

भारत में कैसे कर सकते हैं प्रैक्टिस

विदेशों से मेडकल की स्टडी करके आने वाले डॉक्टरों को भारत में प्रैक्टिस करने के लिए भी परीक्षा देनी होती है। इस परीक्षा का नाम फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एक्जामिनेशन (FMGE) है। यह साल में 2 बार होती है। इसे पास करने के लिए 3 चांस मिलते हैं। इसके लिए राष्ट्रीय परीक्षा मंडल (NBE) परीक्षा आयोजित करता है।

यूक्रेन से लौटे छात्रों के कैरियर के लिए काम कर रही सरकार

युद्धग्रस्त यूक्रेन से मेडिकल की पढ़ाई बीच में छोड़कर भारत वापस लौटे छात्र-छात्राओं की पढ़ाई की चिंता को देखते हुए भारत सरकार देश के मेडिकल कॉलेजों में इन्हें एडमिशन दिलाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिंग रेगुलेशन (FMGL) एक्ट में बदलाव करने के लिए कहेगी। इस मामले पर अगले कुछ दिनों में एक अहम बैठक होने की बात भी सामने आई है।

आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस ने खालिस्तानियों से यूक्रेन का समर्थन करने का किया आह्वान, कहा- ‘पंजाब को मुक्त’ कराने का यही सही समय

रूस-यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच खालिस्तान की एंट्री हो चुकी है। खालिस्तानी आतंकवादी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ ने बुधवार (2 मार्च 2022) को यूक्रेन के लिए समर्थन देने की घोषणा की। इसके साथ ही संगठन ने खालिस्तानियों से यूक्रेन की रक्षा के लिए विदेशी फाइटरों की एक सेना जुटाने का आग्रह किया। आतंकी संगठन ने यूक्रेन का समर्थन करते हुए एक वीडियो मैसेज और पत्र भी जारी किया। पत्र में उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति से विदेशी फाइटरों की अंतर्राष्ट्रीय सेना के हिस्से के रूप में एक सिख रेजिमेंट बनाने का आग्रह किया है।

फोटो साभार: Twitter

UAPA के तहत एक नामित आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने पत्र में कहा कि भारत के विपरीत खालिस्तानी सिख ‘यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा’ के लिए तैयार हैं। पन्नू का कहना है कि भारत UNSC में मतदान से परहेज कर रहा है और युद्ध में रूस का सपोर्ट कर रहा है। उसने आगे दावा किया कि सिखों के लिए ‘अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत विरोधी ब्लॉक’ का साथ देकर ‘पंजाब को मुक्त’ कराने का यह सही समय है।

वीडियो मैसेज में पन्नू ने यूक्रेनी राष्ट्रपति से एक विशेष सिख रेजिमेंट बनाने का आग्रह किया और पेशकश की कि खालिस्तानी सिख ‘स्वतंत्रता की लड़ाई’ में यूक्रेन की मदद करेंगे। उसने यूक्रेन के राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वे पहले सिखों को स्वाधीनता में मान्यता दें और भारत से पंजाब की स्वतंत्रता के लिए पंथवादी जनमत संग्रह को मान्यता देते हुए आम सभा में एक प्रस्ताव पेश करें।

इसके अलावा पन्नू ने पिछले तीन दशकों में भारत का साथ देने के लिए नाटो और पश्चिमी देशों को दोषी ठहराया और यह कहकर उन्हें उकसाया कि यूक्रेन पर रूस की सैन्य कार्रवाई ‘पंजाब की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई’ में सिखों का समर्थन करने के लिए उचित समय है। उसने आगे कहा कि सिखों ने जैसे प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध में पश्चिम के लिए लड़ाई लड़ी थी, वे इस युद्ध में भी उनके लिए लड़ेंगे, लेकिन इसके लिए पश्चिम को खालिस्तान के समर्थन में आगे आना पड़ेगा।

सिख फॉर जस्टिस और उसके प्रोपेगेंडा की लंबी फेहरिस्त

खालिस्तानी आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस का हर मुद्दे का इस्तेमाल कर अपना प्रोपेगेंडा फैलाने का लंबा इतिहास रहा है। संगठन ने अपना प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए भारत में किसानों के विरोध प्रदर्शन का इस्तेमाल किया और समय-समय पर इसे आगे फैलाने में मदद करने वालों के लिए नकद पुरस्कार की घोषणा की। 

उसने पिछले साल गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर झंडा फहराने वाले को नकद इनाम देने की घोषणा की थी और ऐसा हुआ भी। इसके अलावा संगठन ने बुर्का विवाद में भी दखल दिया और अलग राष्ट्र उर्दूस्तान की माँग उठाने का आग्रह किया। जनवरी में उसके संगठन ने पंजाब में पीएम मोदी के काफिले को रोकने की जिम्मेदारी भी ली थी।

‘यूक्रेन हमले में बहुत लोग मारे गए, शो में नहीं होंगी रूसी बिल्लियाँ’: बैन के बाद FIFe का उड़ा मजाक

यूक्रेन (Ukraine) पर हमले को लेकर रूस (Russia) पर आर्थिक, सामाजिक, खेल सहित कई तरह के प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। अब रूस पर एक नए तरह का प्रतिबंध लगाया गया है, जिसमें वहाँ की बिल्लियों को शामिल किया गया है। बिल्ली पालकों की अंतर्राष्ट्रीय संस्था एवं इंटरनेशनल कैट फैंसियर सोसायटी FIFe (Fédération Internationale Féline) ने रूसी नस्ल की बिल्लियों का आयात नहीं करेगी और ना ही उसे अपने किसी शो में शामिल करेगी। वहीं, सोशल मीडिया पर इस निर्णय का मजाक उड़ाया जा रहा है।

FIFe की एक्जिक्युटिव बोर्ड एक बयान जारी कर कहा है कि रूस के हमले में कई निर्दोष लोग मारे गए और कई लोग घायल हुए हैं। यूक्रेन के हजारों नागरिकों को जान बचाने के लिए अपना घर छोड़कर भागना पड़ा है। इस अत्याचार को देखते हुए संस्था ने फैसला किया है कि 1 मार्च से रूसी प्रजाति की किसी भी बिल्ली को इंपोर्ट नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही FIFe के शो में रूस में रह रहे शख्स की बिल्ली को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

FiFe द्वारा जारी किया गया बयान

संस्था ने कहा कि यह प्रतिबंध 31 मई तक जारी रहेगी और जरूरत पड़ने पर इसे और आगे बढ़ाई जा सकती है। बोर्ड ने यह कहा कि रूसी हमले से प्रभावित यूक्रेन के बिल्ली पालने वाले लोगों पर अपने बजट का एक हिस्सा खर्च करेगा।

सोशल मीडिया पर उड़ा मजाक

FIFe के इस निर्णय का सोशल मीडिया पर खूब मजाक उड़ाया जा रहा है। सईद बेन नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “रसियन कैट फेडरेशन: हमारी रूसी बिल्लियों के प्रति यह नस्लवाद बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके कुछ बड़े परिणाम होंगे।”

एक ट्विटर यूजर ने इस फैसले का मजाक उड़ाया और पूछा कि क्या यह व्यंग्य है।

क्यों महत्वपूर्ण हैं रूसी बिल्लियाँ

बता दें कि रूसी नस्ल की बिल्लियों को दुनिया की सबसे महंगी बिल्लियों में शामिल किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में साइबेरियाई बिल्लियों की कीमत लगभग 1,000 डॉलर (लगभग 76,000 रुपए) से लेकर 2,000 डॉलर (लगभग 1.52 लाख रुपए) तक हो सकती है। वहीं, Russian Blue और Peterbald बिल्लियों की कीमत 3,000 डॉलर (लगभग 2.30 लाख रुपए) तक है। बिल्लियाँ देखने में काफी प्यारी लगती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन बिल्लियों को काफी पसंद किया जाता है।

क्या है FIFe

इंटरनेशनल फेलिन फेडरेशन (FIFe) की शुरुआत 1949 में पहली बार फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुई थी। इसके यूरोप, दक्षिण अमेरिका और एशिया के 39 देश सदस्य हैं। FIFe की वेबसाइट के अनुसार, यह संस्था एक साल में 700 से अधिक कार्यक्रमों को आयोजन करती है और इन कार्यक्रमों में 2,00,000 से अधिक बिल्लियाँ हिस्सा लेती हैं।

रूस पर आर्थिक प्रतिबंध

गौरतलब है कि यूक्रेन पर हमले के बाद अमेरिका सहित कई यूरोपीय देशों ने रूस पर आर्थिक के साथ-साथ राजनयिक और सांस्कृतिक प्रतिबंध भी लगाए हैं। अमेरिका और ब्रिटेन ने रूस के दो सबसे बड़े बैंकों सबरबैंक और वीटीबी बैंक तथा वहाँ के कारोबारियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसके साथ ही रूसी कारोबारियों की संपत्तियों को फ्रीज कर दिया है।

कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने भी रूस पर प्रतिबंध लगाया है। जर्मनी ने भी नॉर्ड स्ट्रीम 2 गैस पाइपलाइन परियोजना को रोकने की बात कही है। पोलैंड, चेक गणराज्य, बुल्गारिया और एस्तोनिया ने रूसी विमानन कंपनियों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है। यूरोपीय संघ के प्रतिबंध 555 रूसी व्यक्तियों और 52 संस्थाओं पर लागू होंगे।

‘विष्णु और कुत्ते में अंतर नहीं’: राजस्थान के स्कूल में महिला टीचर ने बाँटी ‘हिन्दुइज़्म: धर्म या कलंक’ किताब, अभिभावकों का विरोध-जाँच के आदेश

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में हिन्दू धर्म के विरुद्ध पुस्तक बाँटें जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इस पुस्तक का नाम “हिन्दुइज़्म, धर्म या कलंक” है। यह किताब एल आर बाली द्वारा लिखी गई है। इसे बाँटने का आरोप स्कूल की टीचर निर्मला कामड़ पर लगा है। जिला शिक्षा अधिकारी ने इस पर संज्ञान लेते हुए जाँच बिठा दी है।

जानकारी के मुताबिक मामला भीलवाड़ा के आसींद थाना क्षेत्र का है। यहाँ के गाँव रूपपुरा के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल की शिक्षिका निर्मला कावड़ को निलंबित करने की माँग को लेकर प्रदर्शन हो रहा है। सोशल मीडिया पर भी ‘हिन्दू धर्म विरोधी टीचर निर्मला कामड़ को गिरफ्तार करो’ हैशटैग से ट्रेंड चलाया जा रहा है। धरने पर कई पुरुषों के साथ महिलाएं भी बैठी दिखाई दे रही हैं। मौके पर सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस बल तैनात है।

एक अन्य वीडियो में उसी स्कूल के बताए जा रहे एक छात्र का कहना है, “वो किताबें बाँटती थी। वो कहती थीं कि ये किताब लो, जो दिमाग में होगा वो निकल जाएगा। वो क्लास में दूसरे धर्म का प्रचार करती थीं। वो हमें कहती थीं कि ब्रह्मा जी देवता नहीं हैं। ब्रह्मा ने अपनी बेटी के साथ बलात्कार किया है। और राम जी दशरथ की औलाद नहीं हैं।” इसे नागपुर के समता पब्लिकेशंस द्वारा प्रकाशित किया गया है।

विवादित किताब को हरे रंग में प्रिंट किया गया है। इसके तीनों भाग एक साथ ही हैं। इसमें सबसे ऊपर जवाहर लाल नेहरू के शब्द बता कर लिखा गया है, “हिन्दू धर्म निश्चित तौर पर उदार व सहनशील नहीं है। हिन्दू से ज्यादा संकीर्ण व्यक्ति दुनिया में कहीं नहीं है।”

विवादित किताब

ट्विटर हैंडल जीतमल गुर्जर ‘जीतू’ ने इस किताब के कुछ पन्नों के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं। इन पन्नों में लिखा है कि विष्णु और कुत्ते में कोई फर्क नहीं। साथ ही उपनिषदों के मंत्रों को भी एन एन राय द्वारा उनके शब्दों में बताया गया है। साथ ही ब्रह्मा और विश्वामित्र के नामों के साथ आपत्तिजनक बातें कही गईं हैं। हिन्दू देवताओं के लिए ‘नायक नहीं खलनायक’ जैसे शब्द लिखे गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्कूल के प्रिंसिपल मुकेश कुमार को किताबें बाँटे जाने की शिकायत मिली है। लेकिन ये किताबें किसने बाँटी ये उन्हें अब तक नहीं पता। स्थानीय मनरूप गुर्जर ने आरोपित को सस्पेंड करने की माँग की है। वहीं शिक्षिका निर्मला कामड ने खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि वो दलित समुदाय से हैं इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही उन्होने आगे बताया कि उनके कार से आने, बाल खुले रखने और चश्मा पहनने से कुछ लोगों को बहुत दिक्कत है।

केरल के मदरसे में बुला मौलवी ने नाबालिग से किया रेप, दो माह की गर्भवती: बॉयोलॉजी की टीचर ने मासिक धर्म के बारे में बताया तो हुआ खुलासा

केरल में 13 साल की नाबालिग बच्ची से रेप का मामला सामने आय़ा है। जहाँ मदरसे में पढ़ाने वाले मौलवी ने बच्ची से रेप किया। लेकिन जब वो गर्भवती हो गई तो मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद तमिलनाडु के रहने वाले आरोपित मदरसा शिक्षक शराफुद्दीन (27) को गिरफ्तार कर लिया गया। बच्ची दो महीने की प्रेग्नेंट है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दुष्कर्म के घटना की शुरुआत पिछले साल नवंबर 2021 से शुरू हुई थी। जब मदरसे में असिस्टेंट के तौर पर काम करने वाले शराफुद्दीन ने बच्ची को नियमित कक्षा शुरू होने से पहले ही मदरसे में बुलाया औऱ उसके साथ रेप करना शुरू कर दिया। इस मामले में आरोपित के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अर्नाकुलम ग्रामीण की पुलिस ने शराफुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया है।

उल्लेखनीय है कि शराफुद्दीन करीब सात साल पहले वजाकुलम स्थित मदरसे में सहायक के तौर पर आया था। वो पट्टीमट्टम इलाके में किराए के कमरे में रहता है। उसे मलयालम भाषा का ज्ञान है। रेप के मामले में गिरफ्तार करने के बाद पूछताछ में उसने बताया कि अभी तक उसका निकाह नहीं हुआ है। बहरहाल आरोपित को कोर्ट में पेश करने के बाद रिमांड पर भेज दिया गया है।

बॉयोलॉजी की क्लास से खुली अपराध की पोल

नाबालिग को हवश का शिकार बनाए जाने की घटना का खुलासा बीते सोमवार (28 फरवरी, 2022) को उस वक्त हुआ, जब बच्ची के स्कूल में उसकी एक शिक्षिका ने बॉयोलॉजी की क्लास ली। टीचर लड़कियों के मासिक धर्म पर बात कर रही थीं। उस दौरान उन्होंने बताया कि अगर कोई लड़की गर्भवती हो जाए तो उसे मासिक धर्म आना बंद हो जाता है। इसके बाद पीड़िता को शक हुआ, तो उसने अपनी दोस्त को इसके बारे में बताया। इसके बाद पीड़िता की दोस्त ने इसकी जानकारी एक अन्य शिक्षक को दी और उन्होंने इसकी जानकारी स्कूल के प्रिंसिपल को दी।

इसके बाद जब स्कूल प्रशासन ने पीड़िता की काउंसलिंग कराई तो उसने सारी कहानी बयाँ की। पीड़िता ने बताया कि मदरसे के मौलवी ने उसके साथ दुष्कर्म किया था। बाद में कलामास्सेरी मेडिकल कॉलेज में पीड़िता का मेडिकल कराया गया, जहाँ बच्ची की जाँच में खुलासा हुआ कि वो दो महीने की गर्भवती है। इस मामले में पुलिस ने आरोपित के खिलाफ POSCO एक्ट के तहत कार्रवाई की है। हालाँकि, पुलिस का कहना है कि बच्ची के बयान काफी विरोधाभाषी हैं, इसलिए अब उसका डीएनए टेस्ट कराया जाएगा।

यूक्रेन के खेरसोन पर अब रूस का नियंत्रण, खारकीव में छात्रों को बंधक बनाए जाने से भारत का इनकार

यूक्रेन के सबसे बड़े शहर खेरसोन (Kherson) पर रूस की सेना ने नियंत्रण कर लिया है। दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध के आठवें दिन गुरुवार (3 मार्च 2022) को इसकी पुष्टि खेरसोन के मेयर इगोर कोल्यखेव ने भी की है। दूसरी ओर भारत ने उन रिपोर्टों को खारिज किया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि यूक्रेन में भारतीय छात्र बंधक बनाकर रखे गए हैं। दरअसल, रूस की सरकार की ओर से इस तरह का दावा किया गया था।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है कि हमें खारकीव में किसी भी छात्र को बंधक बनाए जाने की कोई जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास यूक्रेन में फँसे भारतीयों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और ऐसी कोई खबर अब तक नहीं मिली है। 

विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है, “यूक्रेनी अधिकारियों की मदद से कई छात्र कल खारकीव छोड़ पाए हैं। हमें किसी भी छात्र के बंधक बनाए जाने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। हमने यूक्रेन के अधिकारियों से अनुरोध किया है कि वे विशेष ट्रेनों की व्यवस्था कर खारकीव और यूक्रेन के दूसरे इलाकों में फँसे भारतीय छात्रों को निकालने में हमारा सहयोग करें।”

बयान में आगे कहा गया है, “हम रूस, रोमानिया, पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और मोल्दोवा सहित यूक्रेन के आसपास के देशों के साथ प्रभावी ढंग से बातचीत कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को यूक्रेन से निकाला गया है। हम यूक्रेन की तरफ से दी गई मदद की सराहना करते हैं। हम यूक्रेन के पश्चिमी पड़ोसी देशों को भारतीय नागरिकों को प्रवेश की इजाजत देने और उड़ान तक देश में रहने देने के लिए उनका धन्यवाद करते हैं।”

क्या कहा था रूस ने?

रूसी रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि उनकी जानकारी के अनुसार यूक्रेनी अधिकारियों ने भारतीय छात्रों के एक बड़े समूह को जबरन खारकीव में रोके रखा है। कथित तौर पर यह समूह ब्रेलग्राद जाना चाहता था। बेलग्राद रूस का एक सीमावर्ती क्षेत्र है और खारकीव से ज्यादा दूर नहीं है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने एक ब्रीफिंग में कहा कि जब खारकीव से रूस भारतीय छात्रों को निकालने की कोशिश कर रहा था, यूक्रेन की सेना ने उन्हें बंधक बना लिया।

खेरसोन पर रूस का कब्‍जा

इधर खेरसोन के मेयर इहोर कोलिखैव ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट लिखकर निवासियों से रूसी सैनिकों के आदेशों का पालन करने के लिए कहा है। बता दें कि खेरसोन में लगभग 2,90,000 लोग रहते हैं और यह कीव से लगभग 480 KM दक्षिण में स्थित है।

इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने गुरुवार (3 मार्च 2022) की सुबह अपने संबोधन में यूक्रेन के लोगों से रूसी सेना का विरोध जारी रखने का आग्रह किया। लेकिन उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की कि रूस ने खेरसोन सहित प्रमुख शहरों पर कब्जा किया है या नहीं। उन्होंने दावा किया कि रूस को उन जगहों से खदेड़ दिया जाएगा जहाँ वह घुस चुके हैं।

सोई थी 11 साल की बच्ची, कमरे में घुस पैंटी उतारी-चूमा… हाई कोर्ट ने कहा- पेनिट्रेशन नहीं तो रेप नहीं: दोषी की सजा कर दी कम

कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) ने अपने एक फैसले में कहा है कि किसी घटना को बलात्कार मानने के लिए पेनिट्रेशन (Penetration) जरूरी है। इस अधार पर अदालत ने दीपक सिंघा की सजा कम कर दी है। ट्रायल कोर्ट ने उसे 11 साल की बच्ची के साथ रेप का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। लेकिन, हाई कोर्ट ने पेनिट्रेशन नहीं होने के आधार पर उसे बलात्कार के प्रयास का दोषी माना।

कलकत्ता हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति बिवास पटनायक की पीठ ने यह फैसला सुनाया। पीठ ने कहा है कि बलात्कार का दोषी ठहराए जाने के लिए यह जरूरी है कि पेनिट्रेशन हो, भले ही यह स्पर्श के ही स्तर पर हो। एमिकस क्यूरी ने भी पीठ को बताया कि न तो पीड़िता ने और न अन्य गवाहों ने इस मामले में पेनिट्रेशन की बात कही है। उल्लेखनीय है कि पेनिट्रेशन का मतलब लिंग और पीड़िता के निजी अंगों के स्पर्श से है। वहीं एमिकस क्यूरी ऐसे वकील को कहते हैं जिसको अदालत किसी मामले में फैसले लेने में खुद की मदद के लिए नियुक्त करती है।

क्या है मामला?

घटना 5 मई 2010 की है। 11 साल की बच्ची अपने घर में सोई हुई थी। उसके परिजन घर के बाहर थे। रात के करीब 11 बजे दीपक उसके घर में घुस गया। उसने बच्ची को दबोच लिया, उसे चूमा और उसकी पैंटी उतार बलात्कार की कोशिश की। बच्ची के चिल्लाने पर लोग जुट गए और दीपक भाग निकला। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने 2013 में दीपक को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(F) (12 साल से कम उम्र की लड़कियों से बलात्कार) के तहत दोषी ठहराया था। उसे दस साल की सश्रम कारावास और 10,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी।

उसने इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की। हाई कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने भी माना है कि पेनेट्रेशन नहीं हुआ था। उसके साथ रेप का प्रयास किया गया था लेकिन उसके विरोध और लोगों के जुटने की वजह से आरोपित अपने इरादे में कामयाब नहीं हो पाया।

इससे पहले फरवरी 2022 में जस्टिस बिवास पटनायक और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सात साल की बच्ची के साथ बलात्कार के मामले में कहा था कि अपराध को साबित करने के लिए केवल पेनिट्रेशन पर्याप्त है। यह आवश्यक नहीं है कि पेनिट्रेशन इस तरह की प्रकृति का होना चाहिए कि इससे चोट लग जाए या हाइमन टूट जाए। पीठ ने इस मामले में दोषी की सजा बरकरार रखी थी

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने भी दी थी जमानत

पेनिट्रेशन के ही आधार पर जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने अपनी भतीजी से रेप की कोशिश के आरोपित फैयाज अहमद डार को जुलाई 2021 में जमानत दी थी। अदालत ने कहा था कि बगैर पेनिट्रेशन के आरोपित द्वारा अपने और पीड़िता के कपड़े उतारने को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376/51 के तहत बलात्कार नहीं माना जा सकता। उसे जमानत देते हुए इसे POCSO एक्ट की धारा 7/8 के तहत इसे यौन हमले का मामला बताया था।

तब जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव कुमार ने कहा था, “इस मामले में याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर पीड़िता के कपड़े उतार दिए थे। अपनी पैंट भी खोल ली थी। यह अपराध करने का प्रयास करने की तैयारी करने की एक कोशिश थी। लेकिन, इस निष्कर्ष पर पहुँचना मुश्किल है कि याचिकाकर्ता का इरादा बलात्कार करने का था या याचिकाकर्ता द्वारा किया गया कृत्य बलात्कार करने के प्रयास के समान है।”