Home Blog Page 2930

श्राइन में शिवलिंग, पर दरगाह बता उर्स मनाने जुट गए मुस्लिम, शिव भक्तों पर पथराव: कर्नाटक के कलबुर्गी का मामला, 165 पर FIR

कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के आलंद में एक धर्म स्थल को ले कर साम्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ एक धर्मस्थल के अंदर शिवलिंग होने के चलते हिन्दू समाज के लोग शिवरात्रि के दिन (1 मार्च) को वहाँ भजन और पूजा के लिए जमा हुए थे। इसी दिन इस जगह को लाडले मशक दरगाह बताने वाला मुस्लिम समुदाय यहाँ उर्स मनाने के लिए जमा हुआ था। इसी दौरान विवाद होने के चलते दोनों पक्ष कुछ घंटों के लिए आमने-सामने आ गए थे। इस मामले में पुलिस ने अब तक दोनों समुदायों के 165 लोगों पर केस दर्ज किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तनाव के दौरान मुस्लिम पक्ष ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियों पर पथराव किया। इस पत्थरबाजी की चपेट में केंद्रीय उर्वरक राज्य मंत्री भगवंत खूबा और स्थानीय भाजपा विधायक सुभाष गुट्टेदार भी आ गए थे। डिप्टी कमिश्नर की गाड़ी को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया। वो जैसे-तैसे सुरक्षित बाहर निकाले गए। जवाब में हिन्दू संगठनों ने भी पत्थर फेंके। बुधवार (2 मार्च) को पुलिस ने 10 महिलाओं सहित लगभग 167 लोगों को हिरासत में लिया है। इन सभी पर सरकारी सम्पत्ति सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाने और धारा 144 के उल्लंघन के आरोप हैं।

कलबुर्गी की पुलिस अधीक्षक ईशा पंत ने हालत को संभालने की कोशिश की। उन्होंने दोनों पक्षों से बात कर उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की। इस दौरान दरगाह कमेटी ने गेट खोलने से मना कर दिया। इस दौरान दोनों में से कोई भी पक्ष अंदर श्राइन तक नहीं जा पाया।

हिन्दू संगठनों के मुताबिक धर्मस्थल पहले शिव मंदिर था। बाद में वहाँ पर इस्लामी ताकतों ने दरगाह बना दी थी। जबकि मुस्लिम पक्ष उस दरगाह को सदियों पुराना बता रहे हैं। हर साल महाशिवरात्रि पर वहाँ गणाभिषेक कार्यक्रम होता है। दरगाह के अंदर ही मंदिर है जिसमें यह शिवलिंग मौजूद है। मंगलवार को हुई घटना के बाद श्रीराम सेना के प्रमुख प्रमोद मुतालिक, हिन्दू नेता चैत्रा कुन्दपुरा और संत सिद्धलिंगा स्वामी के कलबुर्गी में घुसने पर रोक लगा दी गई है। प्रमोद मुतालिक को शाहाबाद पुलिस ने जिले में घुसते समय रोक लिया है।

कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व विधायक बी आर पाटिल ने इस मामले में भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने इस तनाव की वजह भाजपा नेताओं को बताते हुए उन पर केस दर्ज करने की माँग की है। उन्होंने पुलिस प्रशासन को भी हालत संभालने में नाकाम बताया है।

‘पुतिन को जिंदा लाओ या मुर्दा, दूँगा $1000000’: जिस रूसी व्यापारी के नाम पर वायरल हुआ पोस्टर, उसने किया इनकार

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रहा है। इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तस्वीर लगी है। इसके नीचे लिखा है- जिंदा या मुर्दा। साथ ही पोस्ट में कहा गया है कि जो पुतिन को पकड़ेगा उसे 10 लाख डॉलर (करीब साढ़े सात करोड़ रुपए) दिए जाएँगे। यह पोस्ट एलेक्स कोनानीखिन (Alex Konanykhin) का बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों में उसे रूस का कारोबारी का बताया गया है। हालाँकि लिंक्डइन पर कोनानीखिन ने इस तरह का पोस्ट करने की बात को खारिज किया है।

फोटो साभार: Alex Konanykhin Linkedin

कोनानीखिन ने लिंक्डइन पर लिखा है, “कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मैंने पुतिन की हत्या के लिए इनाम देने का वादा किया है। यह सही नहीं है। हालाँकि इस तरह के परिणाम से दुनिया भर के लाखों लोग खुश होंगे, मगर मेरा मानना है कि पुतिन को न्याय के कठघरे में खड़ा किया जाना चाहिए।”

फोटो साभार: Alex Konanykhin Linkedin

बता दें कि पुतिन के सिर पर इनाम रखने के कोनानीखिन के कथित पोस्ट में कहा गया खा है, “मैं वादा करता हूँ कि जो भी अधिकारी अपनी संवैधानिक ड्यूटी का पालन करेगा और पुतिन को एक युद्ध अपराधी के तौर पर रूस और अंतरराष्‍ट्रीय कानून के अंतर्गत गिरफ्तार करेगा, मैं उसको $1,000,000 दूँगा।”

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा स्क्रीनशॉट

इसमें आगे कहा गया है, “पुतिन रूस  के राष्‍ट्रपति नहीं हैं। उन्‍होंने स्‍पेशल ऑपरेशन के तहत रूस के कई अपार्टमेंट, बिल्डिंग को उड़ा दिया। इसके बाद उन्‍होंने इलेक्‍शन नहीं करवाए, संविधान की धज्जियाँ उड़ाईं गई। उन्‍होंने अपने विरोधियों की हत्‍या करवाई।” वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट में एलेक्‍स ने ये भी लिखा है कि रूस का नागरिक होने के नाते, ये उनका नैतिक कर्तव्‍य है कि रूस को नाजीवाद और उसके प्रभाव से छुटकारा दिलाने के लिए वो मदद करे। वो लगातार यूक्रेन की मदद करेंगे, जिसने इस युद्ध में एक नायक की तरह पुतिन के खिलाफ अपना पक्ष दिखाया है।

रूस के खिलाफ जाँच करेगी ICC

इस बीच, अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने घोषणा की है कि वह यूक्रेन पर आक्रमण के बाद किए गए संभावित युद्ध अपराधों पर रूस की जाँच करेगा। एक बयान में आईसीसी के मुख्य अभियोजक करीम खान ने खुलासा किया कि उनका मानना ​​है कि यूक्रेन में कथित युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध किए गए हैं। जल्द ही रूस के खिलाफ जाँच शुरू की जाएगी।

कौन हैं एलेक्स कोनानीखिन

एलेक्स कोनानीखिन को रूसी सरकार का मुखर आलोचक माना जाता है। जेरुसलम पोस्‍ट के एक आर्टिकल के मुताबिक मॉस्को फिजिक्‍स एंड टेक्निकल इंस्‍टीट्यूट में एलेक्‍स की पढ़ाई पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद उन्‍होंने स्‍टूडेंट कंस्‍ट्रक्‍शन कोऑपरेटिव की शुरुआत की। न्‍होंने कई दूसरे बिजनेस भी किए। इनमें बैंकिंग, स्‍टॉक्‍स, और रियल इस्‍टेट शामिल हैं। 25 साल की उम्र आते-आते उनके पास 100 फर्म थीं।

1992 में उनकी कंपनियों की कमाई 22 अरब रुपए से ज्‍यादा थी। इस साल वह रूस के राष्‍ट्रपति बोरिस येल्सिन के साथ वाशिंगटन जाने वाले प्रतिनिधिमंडल के भी हिस्‍सा थे। लेकिन साल 1996 में उन्‍हें और उनकी पत्‍नी को वीजा में धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में वह वहाँ से चेक गणराज्‍य और बाद में न्‍यूयॉर्क आ गए। उन्होंने बोरिस येल्तिसिन और रूसी अधिकारियों से जान को खतरे का भी आरोप लगाया था। साल 2011 में उन्होंने Transparent Business की स्‍थापना की, जो उन कंपनियों की मदद करती है, जो रिमोटली वर्कफोर्स के तौर पर काम करती हैं। 

कुँवारी लड़कियों से घिरा रहता है ‘हाले-लूइया’ वाला रवि सिंह, रसूख ऐसा कि पुलिस भी नतमस्तक: झारखंड में ‘चंगाई सभा’ के नाम पर ईसाई धर्मांतरण का आरोप

झारखंड के जमशेदपुर में पिछले दिनों चंगाई सभा के नाम पर ईसाई धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए सिखों ने हंगामा किया था। इस विवाद के केंद्र में जो पास्टर है, उसका नाम रवि सिंह है। बताया जा रहा है कि ईसाई बनने से पहले वह खुद भी सिख था। अब मीडिया में जो रिपोर्टें सामने आई है कि उससे रवि सिंह के रसूख और ठाठ-बाट का पता चलता है। इसके मुताबिक वह कुँवारी लड़कियों से घिरा रहता है और उसका रसूख ऐसा है कि पुलिस-प्रशासन भी उस पर हाथ डालने से डरती है।

बीते 27 फरवरी को धर्मान्तरण को लेकर रवि सिंह और सिख युवकों के बीच विवाद हुआ था। रवि सिंह पर भोले-भाले गरीब आदिवासियों का धर्म परिवर्तन करवाने का आरोप है। कई सिखों को भी ईसाई बनने की शिकायत मिली थी। इस मामले में पुलिस ने 4 केस भी दर्ज किए हैं। धर्मांतरण के आरोपों के बाद पुलिस उसे अपने साथ ले भी गई थी लेकिन वह 24 घंटे के भीतर ही लौट आया।आरोपित पॉस्टर रवि सिंह के पहले सिख और बाद में धर्म परिवर्तन कर के ईसाई बनने की भी सूचना है। इस बीच दैनिक जागरण ने रवि सिंह के रंगीन मिज़ाज़ जिंदगी के बारे में रिपोर्ट प्रकाशित की है।

दैनिक जागरण ने रवि सिंह पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसके वह चंगाई सभा के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठता है। वह महँगी SUV कार में घूमता है। उसका पुलिस विभाग में भी दबदबा है। खुद को संत बताने वाला रवि सिंह हमेशा दर्जनों कुँवारी लड़कियों से घिरा रहता है। ये लड़कियाँ उसके संदेशवाहक के रूप में काम करती हैं। उससे मिलने से पहले किसी को भी इन युवतियों के पास अपनी तमाम जानकारी दर्ज करवानी पड़ती है।

रवि सिंह खुद के घर की छत पर चंगाई सभा के नाम पर लोगों को जुटाता है। यहाँ वह लोगों को भूतप्रेत का डर दिखा कर उन्हें ठीक करने का दावा करता है। वह ‘हाले-लूइया’ और आशीर्वाद से ही सब कुछ ठीक कर देने का दावा करता है। आस-पास के लोगों के मुताबिक वह 7 बहनों में एकलौता भाई है। बताया जाता है कि वह पश्चिम बंगाल के आसनसोल में पैदा हुआ था। उसके पिता बर्नपुर की एक खदान में काम करते थे।

रिपोर्ट के अनुसार सबसे पहले उसने आसनसोल में ही लोगों का धर्मान्तरण करवाना शुरू किया। वहाँ विरोध होने पर पंजाब के जालंधर चला गया। पंजाब में कुछ दिन रहकर वो अपने नानी के घर जमशेदपुर के टिनप्लेट पहुँचा। उसका घर भी अवैध और टिनप्लेट कम्पनी की जमीन पर बना बताया जा रहा है। जमशेदपुर में वह अपने माँ-बाप और 2 बहनों के साथ रहता है।

कहा जा रहा है कि रवि सिंह ने हाल ही में शादी की है। उसकी शादी चंडीगढ़ में नेपाल की लड़की से हुई बताई जा रही है। चंगाई सभा का विरोध करने वाले हिन्दू पीठ के प्रमुख अरुण सिंह ने ऑपइंडिया को बताया था, “चंगाई सभा के दौरान रवि सिंह महिलाओं को गलत तरीके से छूता है। हम उसकी पहले भी कई बार प्रशासन से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।”

‘आज छक्के लगेंगे, 7 मार्च को रिकॉर्ड बनेगा’: वोट डाल बोले CM योगी- बीजेपी 300 सीटों की ओर, 10 जिलों की 57 सीटों पर हो रहा मतदान

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के छठे चरण के लिए 10 जिलों की 57 विधानसभा सीटों पर आज (3 मार्च 2022) मतदान हो रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के प्राथमिक विद्यालय गोरखनाथ कन्या नगर में अपना वोट डाला। 

वोट डालने के बाद सीएम योगी ने कहा, “जनता-जनार्दन में अपार उत्साह है। यहाँ आम जन मानस की जागरुकता का प्रमाण है कि वे अपने संवैधानिक कर्तव्यों और अधिकारों के प्रति जागरुक हैं। खास तौर पर माताएँ और बहनें जिस उत्साह के साथ मतदान करने के लिए आ रही हैं, यह शुभ है। 9 जनपदों के मतदाताओं से मेरी अपील है कि वो मतदान केंद्र पर जाकर अपना वोट करें, क्योंकि ये हमारा संवैधानिक दायित्व भी है, एक अच्छी सरकार के लिए, सुशासन की स्थापना के लिए, जनता की आकांक्षा के अनुरुप विकास के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए। 

उन्होंने आगे कहा, “मुझे प्रसन्नता है कि उत्तर प्रदेश के मतदाता 2022 के सामान्य निर्वाचन में बड़े उत्साह से भाग ले रहे हैं। पिछले 5 चरण के मतदान ने इस बात को साबित भी किया है और आज छठे चरण का मतदान है। मैं विश्वास के साथ कह सकता हूँ 5 चरणों का जो रुझान है, भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में पूर्ण बहुमत से काफी आगे चल रही है और आज छठे चरण के चुनाव में छक्के लगेंगे और बीजेपी 300 सीट पाने की ओर अग्रसर होगी। सातवें चरण में ये आँकड़ा 2017 के तर्ज पर रिकॉर्ड बनाता दिखाई देगा।”

पीएम मोदी ने की लोगों से मतदान की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से छठे चरण में मतदान जरूर करने की अपील की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र का उत्सव आज अपने छठे चरण में प्रवेश कर चुका है। सभी मतदाताओं से मेरा विनम्र आग्रह है कि वे अपने वोट के साथ इस उत्सव में जरूर शामिल हों। आपका एक-एक मत, लोकतंत्र की ताकत है।

इन जिलों में वोटिंग

यूपी चुनाव के छठे चरण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि गोरखपुर के साथ ही अंबेडकर नगर, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संत कबीरनगर, महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया और बलिया जिले में वोट डाले जा रहे हैं। राज्य में आखिरी चरण का मतदान 7 मार्च को होगा। नतीजे अन्य चुनावी राज्यों के साथ 10 मार्च को आएँगे।

24 साल बाद ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम का पाकिस्तान दौरा, जान से मारने की धमकी: 13 साल पहले श्रीलंकाई टीम पर हमले में 8 की हुई थी मौत

ऑस्ट्रेलिया (Australia) की क्रिकेट टीम 4 मार्च 2022 से पाकिस्तान में तीन टेस्ट, तीन एकदिवसीय और एक टी-20 यानि कि सात मैचों की सीरीज खेलेगी। इसके लिए ऑस्ट्रेलिया की टीम पाकिस्तान के दौरे पर आ रही है। पहला टेस्ट मैच रावलपिंडी में खेला जाएगा। ऐसा 24 साल बाद हो रहा है, जब ऑस्ट्रेलिया की टीम पाकिस्तान का दौरे पर है। इससे पहले साल 1998 में ऑस्ट्रेलिया की टीम ने पाकिस्तान का दौरा किया था।

हालाँकि, अब 24 साल के बाद एक बार फिर से ऑस्ट्रेलिया वहाँ पर मैच खेलेगी। पहला मुकाबला 4 मार्च को रावलपिंडी में शुरू होगा, जो आठ मार्च तक चलेगा। उसके बाद कराची में 12-16 मार्च तक दूसरा टेस्ट मैच होगा। इसके बाद तीसरा और अंतिम टेस्ट मैच 21-25 मार्च तक लाहौर में होगा। वहीं 29 मार्च से वनडे सीरीज की शुरुआत होगी। पाँच अप्रैल को एकमात्र टी20 मैच खेला जाएगा।

हालाँकि, लंबे समय से दुनिया भर के देश सुरक्षा कारणों से अपनी टीमों को पाकिस्तान भेजने से हिचकते रहे हैं। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण सभी देशों को ये लगने लगा कि अगर वो अपनी टीमों को पाकिस्तान में खेलने के लिए भेजते हैं तो वहाँ पर उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है। ऐसा होने के पीछे कई वजहें भी हैं।

दरअसल, 2009 में श्रीलंका की टीम पाकिस्तान में क्रिकेट सीरीज खेलने के लिए गई थी। उस दौरान 3 मार्च को लाहौर में स्टेडियम जाते वक्त आतंकियों ने श्रीलंकाई बस पर हमला कर दिया था। उन पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाई गईं। रॉकेट प्रोपेल्ड गन (आरपीजी) से भी हमले किए गए। इस आतंकी हमले में आठ लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा श्रीलंकाई क्रिकेट टीम के तत्कालीन कप्तान महेला जयवर्धने, कुमार संगाकार, अजंता मेंडिस, थिलन समरवीरा, थरंगा परानाविताना औऱ चमिंडा वास बुरी तरह से घायल हो गए थे। फिर भी ड्राइवर मेहर खलील ने बस को तेज स्पीड में भगाकर क्रिकेटरों की जान बचाई और उन्हें सुरक्षित स्टेडियम तक पहुँचाया था।

उस घटना के 13 साल बीत गए हैं, लेकिन अब तक पाकिस्तान में हालात नहीं बदले हैं। आतंकपरस्ती का खामियाजा पाकिस्तान को भुगतना पड़ा। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) का कहना है कि उस हमले से उसे करीब 20,000 डॉलर (करीब 15,12,850 रुपए) का नुकसान हुआ।

न्यूजीलैंड-इंग्लैड ने रद्द कर दिया था दौरा

इसके पीछे की मुख्य वजह यह है कि कोई भी विदेशी टीम पाकिस्तान में सुरक्षा कारणों के कारण मैच खेलना ही नहीं चाहती है। अभी पिछले साल सितंबर 2021 की ही बात है, जब न्यूजीलैंड की टीम ने पाकिस्तान में मैच खेलने से इनकार कर दिया था। टॉस होने जा रहा था, लेकिन उससे ऐन पहले ही न्यूजीलैंड की टीम ने खेलने से इनकार कर दिया। NZC चीफ एग्जिक्यूटिव डेविड व्हाइट ने कहा था कि उनके लिए खिलाड़ियों की सुरक्षा अधिक महत्वपूर्ण है।

इसी तरह से 20 सितंबर 2021 को इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने भी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मैच को रद्द कर दिया था। इसको लेकर ईसीबी ने कहा था कि ताजा हालातों में पाकिस्तान का दौरा करना किसी भी तरह से सही नहीं है।

अब जब श्रीलंका की घटना के 13 साल बाद ऑस्ट्रेलिया की क्रिकेट टीम वहाँ पर खेलने पहुँची है तो उसे भी धमकी दी जाने लगी है। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर एश्टन एगर की पार्टनर मैडलीन को सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथियों ने पाकिस्तान दौरा नहीं करने की धमकी दी गई है। इस धमकी में कहा गया है कि एश्टन पाकिस्तान न आएँ। अगर वो पाकिस्तान गए तो जिंदा नहीं बचेंगे। इस धमकी के बाद ऑस्ट्रेलिया भी अपने खिलाड़ियों की सुरक्षा का रिव्यू कर रहा है।

पाकिस्तान ही नहीं, तुर्की के छात्र भी कर रहे तिरंगे का इस्तेमाल: यूक्रेन-रूस युद्ध में भारत का राष्ट्रीय ध्वज बना ‘सुरक्षा की गारंटी’

भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का दुनिया भर में कितना सम्मान है, उसे आप इसी से समझ सकते हैं कि यूक्रेन में रूस के हमले के बीच फँसे पाकिस्तान और तुर्की के छात्र भी अब भारत का झंडा लेकर भी बाहर निकल रहे हैं। चूँकि तिरंगा झंडा देखने के बाद न तो रूस और न ही यूक्रेन की सेना कोई नुकसान नहीं पहुँचा रही है, इसीलिए पाकिस्तानी और तुर्की के छात्र इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। केंद्रीय पर्यटन, संस्कृति और उत्तर-पूर्व विकास मंत्री जी किशन रेड्डी ने भारतीय छात्रों को सलाह दी थी कि यूक्रेन में वो अपनी गाड़ी पर तिरंगा झंडा लगा कर निकलें।

यूक्रेन से रोमानिया के बुकारेस्ट पहुँचने वाले भारतीय छात्र पहले ही बता चुके हैं कि गाड़ी में तिरंगा झंडा लगे होने के कारण उन्हें रास्ते में किसी ने परेशान नहीं किया। विभिन्न चेकपॉइंट्स से गुजरने के दौरान भी उन्हें कोई दिक्कतें नहीं आईं। वहीं उन्होंने बताया कि पाकिस्तान और तुर्की के छात्र भी भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का ही उपयोग कर रहे हैं, ताकि उन्हें कोई भारतीय समझ कर नुकसान नहीं पहुँचाए। छात्रों ने बताया कि कैसे उन्होंने स्प्रे पेंट्स खरीद कर तिरंगा झंडा बनाया।

कई तुर्की और पाकिस्तान के छात्रों ने चेकपॉइंट्स को क्रॉस करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का प्रयोग किया। इससे पहले भी खबर आई थी कि यूक्रेन में जो पाकिस्तानी छात्र-छात्राएँ पढ़ रहे हैं, उनको वापस अपने देश आने के लिए भारत के झंडे और ‘भारत माता की जय’ का सहारा लेना पड़ रहा है। वायरल वीडियो में पाकिस्तानी समाचार एंकर को एक व्यक्ति कहता दिख रहा था कि उनके मुल्क के छात्रों को यूक्रेन से जिंदा बच कर आने के लिए भारतीय झंडे का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

‘बाहर निकल गवाहों को धमका सकता है शरजील इमाम, फिर कर सकता है अपराध’: दिल्ली HC में दी है जमानत याचिका, पुलिस ने किया विरोध

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के आरोपित शरजील इमाम (Sharjeel Imam) की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में अपना जवाब दाखिल किया है। अदालत में पुलिस ने कहा कि जमानत मिलने पर आरोपित को जमानत देने पर गवाहों को धमकी देकर उन्हें प्रभावित कर सकता है और दंगे जैसी गतिविधियों में दोबारा संलिप्त हो सकता है।

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़काऊ भाषण देने और लोगों को उकसाने के मामले में दिल्ली पुलिस से उसका जवाब माँगा था।

पुलिस ने यह भी कहा कि उसने अपने भाषणों के जरिए असम में नरसंहार का झूठा अफवाह फैलाने की भी कोशिश की। उसने अपने भाषणों के जरिए असम के एक विशेष धार्मिक समुदाय को मध्य भारत से काटने के लिए उकसाया था। भाषण में कही गई बातें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124ए/153ए के तहत आती हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि शरजील इमाम की फोन की लोकेशन (CDR) 13 दिसंबर 2019 को जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) और 15 दिसंबर को शाहीन बाग में थी।

पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि शरजील ने अपने भाषणों के जरिए इन दोनों कानूनों को लेकर एक खास धार्मिक समुदाय के लोगों में भय पैदा कर सरकार के खिलाफ उकसाने का काम किया है। जबकि यह कानून असम छोड़कर देश के बाकी हिस्सों में यह कानून लागू होना अभी बाकी है।

गौरतलब है कि दिल्ली की एक अदालत (Delhi Court) ने हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों से जुड़े मुख्य आरोपित शरजील इमाम (Sharjeel Imam) के खिलाफ 24 जनवरी 2022 को देशद्रोह, गैरकानूनी गतिविधियों के लिए सजा (UAPA) समेत कई अन्य धाराएँ लगाने का आदेश दिया था। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (यूपी) और जामिया इलाके (दिल्ली) में एंटी-सीएए (Citizenship Amendment Act) प्रदर्शन के दौरान शरजील द्वारा दिए गए भड़काऊ भाषणों को लेकर ये धाराएँ लगाई जाएँगी।

इससे नवंबर 2021 में देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद शरजील इमाम को इलाहबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में (27 नवम्बर 2021) को जमानत दी थी। यह जमानत अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में CAA कानून के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के मामले में मिली है। शरजील इमाम ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में यह भाषण 16 दिसंबर 2019 को दिया था। तब अलीगढ़ पुलिस ने उसके खिलाफ देशद्रोह के तहत केस दर्ज किया था। शरजील इमाम फ़िलहाल तिहाड़ जेल में बंद है। इससे पहले दिल्ली की साकेत कोर्ट ने सीएए-एनआरसी के विरोध में शरजील इमाम द्वारा दिए गए भड़काऊ भाषण मामले में उसकी जमानत याचिका ख़ारिज कर दी थी।

शरजील इमाम का नाम शाहीन बाग़ प्रदर्शन के मुख्य आयोजकों में भी लिया जाता है। वह JNU का पूर्व छात्र है। 2013 में उसने जेएनयू में आधुनिक इतिहास से पोस्ट ग्रेजुएशन किया था। इसी के साथ उसने एमटेक की पढ़ाई आईआईटी बॉम्बे से पूरी की। वह मूल रूप से वह बिहार के जहानाबाद स्थित गाँव काको का निवासी है। शरजील इमाम पर मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश में भी केस दर्ज हैं।

रूसी अटैक के बाद 17,000 भारतीयों ने छोड़ा यूक्रेन बॉर्डर, अब तक 15 उड़ानों में 3352 लोग लौटे भारत: PM मोदी ने पुतिन से फिर की बात

यूक्रेन पर रूसी हमला होने के बाद से अब तक लगभग 17,000 भारतीयों ने यूक्रेन छोड़ दिया है। युद्धग्रस्त यूक्रेन से छात्रों सहित सभी भारतीय नागरिकों को वापस लाने के मोदी सरकार प्रयासरत है। ऐसे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बुधवार (2 मार्च, 2022) को जानकारी देते हुए बताया कि यूक्रेन पर रूसी हमला होने के बाद से अभी तक लगभग 17,000 भारतीयों ने यूक्रेन छोड़ दिया है। वहीं अब तक 15 उड़ानों में 3,352 लोग भारत भी लौट आए हैं। वहीं PM मोदी ने आज भी रूस के राष्ट्रपति पुतिन से बात की है, जिसमें भारतीयों को सुरक्षित निकालने पर चर्चा होने की खबर सामने आई है।

अरिंदम बागची ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया, “यूक्रेन छोड़ने वाले भारतीयों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। पिछले 24 घंटों के दौरान, 6 उड़ानें भारत पहुँची हैं, जिससे भारत में कुल उड़ानों की संख्या 15 हो गई है और इन उड़ानों से लौटने वाले भारतीयों की कुल संख्या 3,352 है। अब हम अनुमान लगाते हैं कि हमारी सलाह जारी होने के बाद से लगभग 17,000 भारतीय नागरिक यूक्रेन की सीमाओं को छोड़ चुके हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि अगले 24 घंटों में 15 उड़ानें निर्धारित हैं। इनमें से कुछ तो रास्ते में हैं।

ऑपरेशन गंगा में शामिल हुआ सी-17

अरिंदम बागची ने कहा कि भारतीय वायु सेना के विमान बुखारेस्ट (रोमानिया) से पहली सी-17 उड़ान के साथ ऑपरेशन गंगा में शामिल हो गए हैं। जिसके आज रात बाद में दिल्ली लौटने की उम्मीद है। बुडापेस्ट (हंगरी), बुखारेस्ट (रोमानिया) और रेजजो (पोलैंड) से आज 3 और भारतीय वायुसेना (IAF) की उड़ानें शुरू की जाएँगी।

भारतीय छात्रों को हरसंभव मदद

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि हम अपने सभी नागरिकों से आग्रह करेंगे कि वे खारकीव को छोड़कर तुरंत सुरक्षित क्षेत्रों या आगे पश्चिम की ओर चले जाएँ। यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने रूसी पक्ष से मिली सूचना के आधार पर सभी भारतीय नागरिकों को तुरंत खारकीव छोड़ने को कहा है। विदेश मंत्रालय ने साथ ही बताया कि यूक्रेन में रहने वाले भारतीय नागरिक चंदन जिंदल का बुधवार को स्वाभाविक कारणों से निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में भर्ती थे।

वहीं विदेश मंत्रालय ने सरकार की तरफ से अपने बयान में देश को यह आश्वस्त किया है कि हम यूक्रेन से प्रत्येक भारतीय नागरिक को वापस लाएँगे। अरिंदम बागची ने कहा कि जिन लोगों ने अपना भारतीय पासपोर्ट खो दिया है, उन्हें भी आपातकालीन प्रमाणपत्र जारी करने के लिए एक क्रियाविधि स्थापित की गई है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि इससे कई भारतीय छात्रों को भी मदद मिलेगी।

साथ ही अरिंदम बागची ने यह भी कहा कि हम वहाँ फँसे नागरिकों को निकालने में सहायता के लिए पूर्वी यूक्रेन पहुँचने के विकल्प तलाश रहे हैं। हम देख रहे हैं कि क्या हमारी टीमें वहाँ पहुँच सकती हैं, यह आसान नहीं है क्योंकि रास्ता हर समय खुला नहीं रहता है।

क्या PM नरेंद्र मोदी आज रात फिर से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे? इस सवाल के जवाब में बागची ने कहा, “PM कई देशों के नेताओं से बात कर रहे हैं। जब भी ऐसी बातचीत होती है तो हम आपके साथ साझा करते हैं। मैं पहले से कुछ नहीं कहना चाहूँगा।”

गौरतलब है कि विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में जोर दिया है कि पूर्वी यूक्रेन के शहर चिंता का विषय बने हुए हैं। अच्छी खबर है कि कुछ छात्र कल रात, आज सुबह खारकीव से ट्रेन में सवार हो पाए। हम खारकीव और अन्य शहरों से अपने नागरिकों के सुरक्षित मार्ग के संबंध में रूसी पक्ष के साथ बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दूतावास (कीव में) को भारतीयों द्वारा सीमा पार करने की सुविधा के लिए ल्वीव (Lviv) में एक अस्थायी कार्यालय स्थापित करने के लिए कहा गया था। इस उद्देश्य के लिए हमारी दूतावास टीम का एक बड़ा हिस्सा अब Lviv में है।

‘रूस से लड़ने के लिए जेलेंस्की सरकार से हथियार लेकर अपराधी लूटपाट, रेप और हत्या कर रहे हैं’: कीव शहर के नागरिक का दावा

रूसी हमले के बाद यूक्रेन (Russia-Ukraine War) में बिगड़ती स्थिति के बीच यूक्रेन के कई शहरों में यूक्रेनी अपराधियों द्वारा घरों और दुकानों को खुलेआम लूट-पाट और तोड़फोड़ करने की विचलित करने वाली तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल हो रही हैं।

अमेरिका में रहने वाले विदेश नीति विश्लेषक क्लिंट एर्लिच (Clint Ehrlich) ने बुधवार (2 मार्च) को ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें द्वावा किया गया है कि यूक्रेनी सरकार द्वारा रूसी सेना का मुकाबला करने के लिए दिए गए हथियार को लेकर अपराधी राजधानी कीव में बलात्कार, हत्या और लूटपाट को अंजाम दे रहे हैं।

एर्लिच ने गोंजालो लीरा नाम के एक लेखक द्वारा फिल्माया गया एक वीडियो साझा किया, जिसने दावा किया कि राष्ट्रपति वोलोदीमीर ज़ेलेंस्की सरकार द्वारा रूसी सेना से लड़ने के लिए सभी नागरिकों को हथियार देने की घोषणा के बाद यूक्रेन में अपराधियों के हाथों में सेना वाले हथियार आ गए हैं।

एर्लिच द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में लीरा को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “पिछले कुछ दिनों में ज़ेलेंस्की शासन द्वारा हथियार सौंपे जाने के बाद बहुत सारे अपराधियों के पास सैन्य-श्रेणी के हथियार हैं और इसके कारण डकैती, बलात्कार और हर तरह की तबाही हो रही है।”

वह आगे कहते हैं, “यह सच्चाई है कि कल रात कीव में बहुत सारी गोलीबारी का रूसियों से कोई लेना-देना नहीं था। रूसी इस गोलीबारी से 10 किलोमीटर की दूरी पर थे। संभवत: यह आपराधिक गिरोहों द्वारा की जाने वाली गोलीबारी थी।”

गोंजालो लीरा के अनुसार, ‘सरकार द्वारा उत्पन्न की गई अराजकता’ के बीच आपराधिक गिरोह अपने नए हथियारों का उपयोग ‘अपने प्रभुत्व को स्थापित’ करने के लिए कर रहे हैं। अमेरिकी लेखक ने कहा कि सशस्त्र अपराधी पहले अपना आपसी हिसाब-किताब करेंगे और फिर नागरिकों को निशाना बनाएँगे।

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की और उनकी सरकार पर अपराधियों को हथियार देने का आरोप लगाते हुए लीरा ने कहा, “ये लोग रूस के खिलाफ लड़ने वाले लोगों के नाम पर यूक्रेन में अराजकता पैदा कर रहे हैं। यह ‘बेतुका और गैर-जिम्मेदाराना’ है और इससे यूक्रेन के लोगों को नुकसान पहुँचेगा। मैं इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि जेलेंस्की के नेतृत्व वाला शासन शैतान है।”

जेलेंस्की शासन को पागल बताते हुए उन्होंने कहा, “पश्चिमी मीडिया इसके बारे में बात नहीं कर रहा है। मुझे रूस या यूक्रेन की सेना द्वारा नहीं, बल्कि अपराधियों द्वारा गोली मारकर हत्याएँ किए जाने की चिंता है। मैं बहुत नाराज़ हूँ। यह [नागरिकों को हथियार सौंपना] रूसियों को नहीं रोकेगा। यह केवल नागरिकों की मृत्यु और पीड़ा का कारण बनेगा। इसलिए यह ज़ेलेंस्की के बस एक प्रसिद्धि का अवसर हो सकता है।”

यह वीडियो यूक्रेनी राष्ट्रपति की उस घोषणा के कुछ ही दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सैन्य अनुभव वाले कैदी अगर रूसी सेना के खिलाफ लड़ने के इच्छुक हैं तो उन्हें रिहा कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि युद्ध के मैदान में रूसियों से लड़कर ये कैदी अपने अपराधों का प्रायश्चित कर सकेंगे।

बता दें कि रूसी हवाई हमलों और तोपखाने की बमबारी ने यूक्रेन के सैन्य प्रतिष्ठानों को तबाह कर दिया था। इसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने अपने नागरिकों से देश की रक्षा के लिए हथियार उठाने को कहा था। दो दिन पहले जेलेंस्की ने कहा था कि वे किसी को भी हथियार मुहैया कराएँगे, जो लड़ना चाहते हैं। उन्होंने लोगों से शहर के चौकों पर यूक्रेन का समर्थन करने के लिए तैयार रहने के लिए कहा था।

यूक्रेन में सशस्त्र अपराधियों और नागरिकों ने दुकानों एवं ट्रकों को लूटा, वीडियो सामने आए

यूक्रेन के शहरों में सशस्त्र नागरिक, अपराधी और भाड़े के सैनिकों द्वारा लूटपाट करने और अराजकता फैलाने वाले कई असत्यापित वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे हैं। नेटिज़न्स ने सशस्त्र अपराधियों के इस संगठित लूट के भयानक वीडियो साझा किए हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि यूक्रेन की सरकार द्वारा खूंखार अपराधियों को हथियार देने के फैसले ने उनका हौसला बढ़ाया है, जो अब बिना किसी डर के खुलेआम शहरों में लूटपाट कर रहे हैं।

फाजिल मीर नाम के एक यूजर द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में दिख रहा है कि हथियारों से लैस नागरिक लूटपाट में शामिल हैं। यूजर का कहना है कि इसके परिणामस्वरूप अपराधों में वृद्धि हुई है।

यूक्रेन की नागरिक डायना ने भी इसी तरह का एक परेशान करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है। डायना ने कहा कि यूक्रेन को इन व्यक्तियों के लूटपाट और डकैती की लहर का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें ज़ेलेंस्की सरकार ने पिछले दो दिनों हथियार दिए हैं। वीडियो को साझा करते हुए डायना ने आरोप लगाया कि हथियारबंद भाड़े के लोगों और अपराधियों ने किराने का सामान के साथ एक ट्रक को लूटने की कोशिश की।

यूक्रेन के एक सोशल मीडिया यूजर ने एक चौंकाने वाला वीडियो शेयर किया, जिसमें दो अल्जीरियाई भाड़े के सैनिकों ने कथित तौर पर यह कहते सुना गया कि वे डकैती शुरू करने के लिए अंधेरे का इंतजार कर रहे थे।

एक अन्य सोशल मीडिया उपयोगकर्ता ने एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें यूक्रेन के शहर खार्किव में नागरिकों को दुकानों और घरों को लूटते हुए देखा जा सकता है।

बिना पुष्टि वाले ऐसे वीडियो ने अपराधियों और अप्रशिक्षित नागरिकों को यूक्रेन सरकार द्वारा हथियार देने के फैसले पर सोशल मीडिया पर तीव्र बहस पैदा कर दी है।

भगवान शिव की नगरी में काले झंडों के साथ हुआ CM ममता बनर्जी का स्वागत, गूँजा ‘जय श्री राम’ का नारा: लोग बोले – वापस जाओ

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के पक्ष में चुनाव प्रचार करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुँचीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री का जबरदस्त विरोध हुआ। भगवान शिव की नगरी काशी में जनता ने काले झंडे दिखा कर ममता बनर्जी का स्वागत किया और इस दौरान ‘जय श्री राम’ और ‘वापस जाओ’ का नारा भी गूँजा। तृणमूल कॉन्ग्रेस की सुप्रीमो बुधवार (2 फरवरी, 2022) की शाम को काशी पहुँचीं। उन्होंने ‘गंगा आरती’ में भी हिस्सा लिया।

सड़क पर काले झंडे लहराते लोगों को देख कर ममता बनर्जी ने अपनी गाड़ी रोकी और नीचे उतर गईं, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों को भी खासी मशक्कत करनी पड़ी। बताया जा रहा है कि नारेबाजी कर रहे लोग ‘हिन्दू युवा वाहिनी’ के सदस्य थे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस दौरान अपने हाथ बाँधे उनलोगों को देखती रहीं। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। एयरपोर्ट से चेतगंज होते हुए दशाश्वमेध घाट जा रहीं पश्चिम बंगाल सीएम को रास्ते में कई जगह विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा।

ममता बनर्जी के सड़क पर उतरने के बाद पुलिस ने हिन्दू कार्यकर्ताओं को वहाँ से हटाना शुरू किया। ममता बनर्जी ने दावा किया कि ये सब भाजपा हार के डर से कर रही है और वो अब बिना हराए वापस नहीं जाएँगी। एक प्रदर्शनकारी को हिरासत में लेकर दशाश्वमेध थाने ले जाया गया। गुरुवार को सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के साथ ममता बनर्जी की रैली भी प्रस्तावित है। घाट पर पहुँचने के बाद अपने निर्धारित जगह पर बैठने की बजाए सीढ़ियों पर बैठ कर उन्होंने आरती देखी।

न सिर्फ गोदौलिया चौराहे पर ममता बनर्जी का ‘वापस जाओ-वापस जाओ’ नारे के साथ विरोध हुआ, बल्कि घाट पर भी उनके समर्थक और भाजपा कार्यकर्ताओं में झड़प हुई। वहाँ भी उनके विरोध में नारेबाजी ही। इससे पहले यूपी की राजधानी लखनऊ में ममता बनर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के सपा-रालोद गठबंधन का समर्थन किया था। हिंसा के लिए कुख्यात बंगाल चुनाव में जीत के बाद ही उन्होंने यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ चुनाव प्रचार में जाने का ऐलान किया था।