रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध (Russia-Ukraine War) दौरान यूक्रेन की राजधानी कीव (Kyiv) से निकलने की कोशिश कर रहे एक भारतीय छात्र को गोली मार दी गई है। इसके बाद उसे वापस कीव ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री सेवानिवृत जनरल विजय कुमार सिंह (General VK Singh) ने घटना की पुष्टि की है।
इस घटना को लेकर पोलैंड के Rzeszow एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने कहा, “आज मुझे जानकारी मिली है कि कीव से वापस आ रहे एक छात्र को गोली मार दी गई है और उसे वापस कीव ले जाया गया है। हम कम से कम क्षति में अधिक से अधिक लोगों को निकालने का प्रयास कर रहे हैं।”
I received info today that a student coming from Kyiv got shot and was taken back midway. We’re trying for maximum evacuation in minimum loss: MoS Civil Aviation Gen (Retd) VK Singh, in Poland#RussiaUkrainepic.twitter.com/cggVEsqfEj
वीके सिंह ने बताया कि घायल छात्र को इलाज के लिए तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने कहा, “कीव में भारतीय दूतावास ने पहले ही कहा था कि भारतीय छात्र-छात्राएँ जल्द से जल्द कीव को छोड़ दें। युद्ध के दौरान बंदूक की गोली किसी का धर्म या राष्ट्रीयता नहीं देखती है।”
Russia-Ukraine conflict: Another Indian student shot in Kyiv, hospitalised
उन्होंने बताया कि 1600-1700 छात्र-छात्राओं को अभी भारत भेजना बाकी है। पिछले तीन दिन में 7 फ्लाइट में लगभग 1,400 बच्चों को भारत भेजा गया है। कुछ बच्चे पोलैंड के वारसॉ शहर पहुँचकर अपने रिश्तेदारों के साथ रूके हैं और वे सब सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि 5 फ्लाइट में 800-900 लोगों को भारत भेजा जाएगा। फिलहाल उनके रुकने के लिए यहाँ अस्थायी व्यवस्था की गई है।
पहले हो चुकी है दो भारतीय छात्र की मौत
बता दें कि इससे पहले यूक्रेन में दो भारतीय छात्रों की मौत हो चुकी है। एक छात्र की गोली लगने से मौत हुई, जबकि दूसरे छात्र की बीमारी से मौत हो गई थी। यूक्रेन के खार्कीव में पढ़ाई करने वाले कर्नाटक के छात्र नवीन अपने दोस्तों के लिए खाना लाने के लिए बंकर से बाहर निकले थे। उसी दौरान रूसी सैनिकों ने उन्हें गोली मार दी थी। वहाँ से खुद निकलने से पहले वह अपने जूनियर सहयोगियों को पहले निकालने की कोशिश में लगे हुए थे।
इसके बाद यूक्रेन के विनित्स्या में 2 मार्च 2022) को दूसरे भारतीय छात्र चंदन जिंदल (22) की मौत हो गई। चंदन पंजाब के बरनाला के रहने वाले थे और यूक्रेन के विनित्स्या स्थित नेशनल पाइरोगोव मेमोरियल मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, जिंदल को जब इस्केमिक स्ट्रोक आया तो उन्हें तुरंत विनित्स्या के इमरजेंसी अस्पताल (कीवस्का स्ट्रीट 68) में भर्ती कराया गया, जहाँ उनकी मौत हो गई थी।
रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी
यूक्रेन में रूसी हमले का आज शुक्रवार (4 मार्च) को नौवाँ दिन है। राजधानी कीव और खार्कीव में अभी भी कुछ भारतीय विद्यार्थी फँसे हुए हैं। वहीं, रूस का यूक्रेन के शहरों पर बमबारी लगातार जारी है। पिछले 24 घंटों में खार्कीव, चेर्नीहीव, बोरोदयांका, मारियुपोल में भारी बमबारी की गई है। इस दौरान लगभग 22 लोगों के मारे जाने की खबर है।
इधर भारत सरकार ऑपरेशन गंगा के तहत भारतीय छात्रों को निकालने की युद्ध स्तर पर कोशिश कर रही है। आज भारतीय वायुसेना के दो C-17 विमान रोमानिया के बुखारेस्ट और हंगरी के बुडापेस्ट से भारतीय छात्रों को लेकर गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पहुँचे। वहीं, देर रात वायुसेना और एयर इंडिया के विमान से करीब 700 छात्र-छात्राओं को भारत लाया गया है।
उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा के लिए अंतिम चरण का मतदान सात मार्च को होना। इसी दिन मऊ सदर सीट पर भी वोटिंग होगी। यहाँ से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का उम्मीदवार माफिया डॉन मुख्तार अंसारी का बेटा अब्बास है। उसे समाजवादी पार्टी का भी समर्थन हासिल है। अब्बास अंसारी का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह अधिकारियों को धमकी दे रहा है।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में अब्बास अंसारी धमकी भरे लहजे में कह रहा है कि सरकार आने पर 6 महीने तक ट्रांसफर-पोस्टिंग नहीं की जाएगी, पहले हिसाब होगा। अंसारी ने कहा, “समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से ये कह कर आया हूँ कि 6 महीने तक किसी की ट्रांसफर-पोस्टिंग नहीं होगी भैया। जो यहाँ है, वो यहाँ ही रहेगा। पहले हिसाब-किताब होगा। उसके बाद उनके जाने के टिकट पर मुहर लगाया जाएगा।” बता दें कि मुख्तार अंसारी फिलहाल बांदा जेल में बंद है।
Uttar Pradesh | Taking cognizance of the viral video, We’ve registered a case against Mau Sadar constituency candidate Abbas Ansari for violation of the Model Code of Conduct. We’ve submitted a report to Returning Officer for further action: Mau SP, Ghule Sushil pic.twitter.com/GfrawJ4wY3
वीडियो वायरल होने के बाद अब्बास अंसारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मऊ पुलिस ने ट्वीट कर बताया है कि अब्बास अंसारी के वायरल वीडियो के संबंध में थाना कोतवाली पर आचार संहिता के उलंघन के संबंध में आईपीसी की धारा 171च और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है और संबंधित निवार्चन अधिकारी को अग्रिम कार्यवाही हेतु रिपोर्ट दी गई है।
प्रत्याशी अब्बास अंसारी के वायरल विडियों के सम्बन्ध में थाना कोतवाली पर आचार संहिता के उलंघन के सम्बन्ध में धारा 171च,506 भादावि0 का अभियोग पंजीकृत किया गया है तथा इस सम्बन्ध में निवार्चन अधिकारी (RO) 356-मऊ सदर, मऊ को अग्रिम कार्यवाही हतु रिपोर्ट दी गयी है। #UPPolicepic.twitter.com/I3Rz7KJDiW
बता दें कि बाहुबली मुख्तार अंसारी मऊ सदर विधानसभा सीट से 5 बार विधायक रहा है। लेकिन इस बार वह चुनाव नहीं लड़ रहा। उसकी जगह उसका बड़ा बेटा अब्बास अंसारी चुनावी मैदान में हैं। ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) ने मऊ सदर विधानसभा सीट से अब्बास अंसारी को चुनावी मैदान में उतारा है। समाजवादी पार्टी का सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ गठबंधन है। 10 मार्च को अन्य चुनावी राज्यों के साथ यूपी में भी चुनाव के नतीजे आएँगे।
बिहार का भागलपुर गुरुवार (3 मार्च 2022) रात जोरदार धमाके से दहल उठा। ततारपुर थाना क्षेत्र के काजवलीचक यतीमखाना के पास एक तीन मंजिला घर में भीषण विस्फोट हुआ। यह इतना जबर्दस्त था कि आसपास के भी कई घर जमींदोज हो गए। न्यूज एजेंसी एएनआई ने डीएम सुब्रत कुमार सेन के हवाले से 14 लोगों की मौत और आसपास के 2-3 घर क्षतिग्रस्त होने की जानकारी दी है। हालाँकि दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार अब तक मलबे से दोपहर 3 बजे तक 14 शव निकाले गए हैं। इसके अलावा विस्फोट में 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक यह धमाका नवीन आतिशबाज के घर हुआ। डीएम के अनुसार शुरुआती जाँच के अनुसार जिस घर में धमाका हुआ वह परिवार पटाखा बनाने के काम से जुड़ा था। घटना की जानकारी पर डीआइजी सुजीत कुमार, डीएम सुब्रत कुमार सेन, एसएसपी बाबू राम भारी पुलिस बलों के साथ मौके पर पहुँच हालात का जायजा लिया। डीएम सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि शुरुआती जाँच में पता चला कि परिवार पटाखा बनाने में शामिल था। मामले में आगे जाँच की जा रही है। बताया जा रहा है कि नवीन के घर इससे पहले 2002, 2008 और 2018 में भी ऐसी ही घटनाएँ हो चुकी हैं।
भागलपुर रेज के DIG सुजीत कुमार ने बताया, “पुलिस को केदारपुर थाना क्षेत्र के एक घर में रात को विस्फोट की सूचना प्राप्त हुुई। पुलिस अधीक्षक समेत अन्य अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना किया। एक घर पूरी तरह से नष्ट हो गया है। अभी हम डिटेल्स इकट्ठा कर रहे हैं कि घर में कितने लोग थे। अभी सफाई का काम चल ही रहा है, इसलिए घटना के बारे में पूरी स्पष्टता नहीं है। पहली प्राथमिकता रेस्क्यू करना है। लोगों से बात करने से पता चला है कि पहले भी इस घर में धमाके की वजह से क्षति होती रही है। ये लोग पटाखा बनाने का काम करते थे। पूरी जानकारी जाँच के बाद मिलेगी।”
#WATCH | Bihar: 7 dead and several injured in an explosion in Tatarpur police jurisdiction in Bhagalpur district, as per District Administration pic.twitter.com/pdSI6iSJI3
डीआइजी ने घटना की जाँच के लिए एफएसएल की टीम को भी लगाया ताकि विस्फोटक के प्रकार का पता लगाया जा सके। उन्होंने कहा कि बम डिस्पोजल टीम और एफएसएल टीम के निरीक्षण के बाद विस्फोट की असली वजह का पता चल सकेगा। इस बीच बचाव कार्य में स्थानीय लोगों, डिप्टी मेयर राजेश वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष रोहित पांडेय, लोजपा नेता मृणाल शेखर, चांद झुनझुनवाला आदि ने भी घायलों को निकालने में पुलिस बलों की मदद कर उन्हें एंबुलेंस से जवाहर लाल नेहरू अस्पताल भेजा।
बताया जा रहा है कि जिस मकान में धमाका हुआ, वह कोतवाली से सिर्फ 100 मीटर की दूरी पर है। विस्फोट की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता कि घटनास्थल से चार किलोमीटर की परिधि में आने वाले मकान में मौजूद लोगों ने तेज झटके महसूस किए। घरों में कंपन महसूस करते ही लोग-बाग घरों से बाहर निकल भूकंप के बारे में जानकारी लेने लगे। कुछ लोगों ने धमाके की आवाज को लेकर सिलिंडर विस्फोट की भी बात कही, लेकिन चंद मिनटों में ही स्थिति साफ हो गई। पुलिस, फायर ब्रिगेड आदि की सायरन बजाती गाड़ियों ने स्थिति साफ कर दी। इस बीच भारी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा होने लगे। जिन्हें नियंत्रित करने के लिए SSP को स्वयं कमान सँभालनी पड़ी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शब-ए-बारात के लिए घर में बम बनाया जा रहा था। इसी दौरान ब्लास्ट हुआ। बताया जाता है कि यहाँ बारूद का कारोबार होता था। बम भी बनाया जाता था। आतिशबाजी के आड़ में यह कारोबार किया जा रहा था। फिलहाल इसकी जाँच की जा रही है। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत है। कई लोग अभी भी मलबे में दबे हैं। बचाव कार्य जारी है।
गौरतलब है कि इससे पहले बिहार के खगड़िया जिले में ब्लास्ट हुआ था। उससे पहले जून 2021 में बिहार के बाँका जिले में टाउन थाना क्षेत्र के नवटोलिया में नूरी मस्जिद इस्लामपुर परिसर के आगे एक मदरसे में बम विस्फोट हुआ था। इस ब्लास्ट में मदरसे के मौलवी मोहम्मद मोमिद सहित कई लोग घायल हुए थे। वहीं 10 जून 2021 में बिहार के ही अररिया जिले के बैरगाछी थाना क्षेत्र के त भुवनेश्वरी रामपुर गाँव में झोले में रखा एक बम फट गया था। इस धमाके में मोहम्मद अफरोज नाम का शख्स बुरी तरह घायल हो गया। बाद में बताया गया कि अफरोज झोले में बम ले जा रहा था। लेकिन सरिया से टकराकर वह उसके हाथ में ही फट गया। दो जिंदा बम भी बरामद किया गया था।
17 जून 2021 को दरभंगा जंक्शन पर बम ब्लास्ट हुआ था। पुलिस जाँच में पाया गया था कि दरभंगा के मोहम्मद सुफियान के लिए सिकंदराबाद से एक रजिस्टर्ड पार्सल आया था। उसी में विस्फोट हुआ था। 20 जून 2021 को बिहार के सिवान में हुसैनगंज थाना क्षेत्र के जुड़कन गाँव में विस्फोट हुआ था। जाँच में सामने आया कि घटना के समय विनोद माँझी अपने बेटे सत्यम को लेकर गाँव की दुकान पर बिस्किट खरीदने गए थे। उसी दौरान उनकी मुलाकात सगीर साई नाम के व्यक्ति से हुई और उसने एक एक झोला दे दिया। सगीर ने किसी व्यक्ति का नाम लेते हुए कहा कि वह आएगा तो ये झोला उसे दे देना है। इसी बीच झोले में रखा बम ब्लास्ट हो गया।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक दलित नाबालिग को रेप के बाद जहर देकर जंगल में फेंक दिया गया। बाद में उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया। आरोपित साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया है। मरने से पहले पीड़िता ने पूरी घटना के बारे में बताया। इसकी वीडियो रिकॉर्डिग पुलिस को सौंप दी गई है। नाबालिग मृतका और आरोपित एक ही गाँव के बताए जा रहे। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि रेप का विरोध करने पर आरोपित ने नाबालिग को जहर पिलाकर जंगल में फेंक दिया। पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
रिपोर्टों के अनुसार मामला देहात कोतवाली क्षेत्र का है। मृतका बेहट रोड के गाँव बिजोपुरी की रहने वाली थी। वह नौवीं में पढ़ती थी। गुरुवार (3 मार्च 2022) की सुबह वह परीक्षा देने के लिए घर से निकली थी। गाँव का ही रहने वाला आरोपित उसे इसी दौरान बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। एक होटल में ले जाकर रेप किया फिर जहरीला पदार्थ खिलाकर उसे जंगल में फेंक दिया।
रिपोर्ट में मृतका के परिजनों के हवाले से बताया गया है कि शिक्षकों ने फोन कर छात्रा के परीक्षा देने के लिए नहीं पहुँचने की जानकारी दी। इसके बाद वे उसकी तलाश में जुट गए। मृतका की एक सहेली से साहिल के बारे में जानकारी मिलने पर परिजनों ने उसे फोन किया। कथित तौर पर गाली-गलौच करते हुए साहिल ने कहा- तेरी बहन बीजोपुरी के जंगल में पड़ी है, जाकर उसे ले आओ। इसके बाद जब परिजन नाबालिग छात्रा को खोजते हुए जंगल पहुँचे तो वह तड़पती हुई मिली और उसके मुँह से झाग निकल रहा था। उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका।
रिपोर्ट के अनुसार घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण जिला अस्पताल पहुँचे और आरोपित की गिरफ्तारी को लेकर हंगामा किया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भी ग्रामीण नहीं ले जाने दे रहे थे। बाद में पुलिस ने उन्हें समझाया और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। वहीं, बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का आरोप है मामला लव जिहाद से जुड़ा है। उन्होंने मामले की फास्ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की माँग की है। पुलिस के मुताबिक साहिल को गिरफ्तार किया गया है। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
देश के सबसे बड़े दुश्मनों में से एक अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के साथ कथित संबंधों के मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किए गए एनसीपी नेता और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक को मुंबई की स्पेशल कोर्ट ने 7 मार्च 2022 तक के लिए एक बार फिर से ईडी की हिरासत में भेज दिया है। इससे पहले उन्हें 3 मार्च तक के लिए भेजा गया था।
दरअसल, नवाब मलिक अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम के साथ जमीन सौदे के मामले में ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग के केस का सामना कर रहे हैं। उन्हें जाँच एजेंसी ने 23 फरवरी 2022 को दाऊद मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 8 घंटे तक पूछताछ करने के बाद गिरफ्तार कर लिया था।
हाल ही में महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और भाजपा नेता देवेंद्र फड़नवीस नवाब मलिक के दाऊद कनेक्शन को दोहराया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मलिक ने 1993 के बम धमाकों के आरोपित सरदार शाहवाली खान और दाऊद की बहन हसीना पारकर के सहयोगी सरदार पटेल से सिर्फ 30 लाख रुपए में करोड़ों रुपए की जमीन खरीदी थी।
फड़नवीस ने पिछले साल नवंबर 2021 में ही नवाब मलिक के अंडरवर्ल्ड कनेक्शन का पर्दाफाश किया था। उन्होंने खुलासा किया था कि नवाब मलिक औऱ उनके परिवार ने अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों से जमीन के पार्सल खरीदे थे। बाद में जब प्रवर्तन निदेशालय को जाँच के दौरान पता चला कि मलिक ने वर्ष 2005 में दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर से 30 लाख रुपए में 3 करोड़ रुपए कीमत की जमीन खरीदी थी। इसके अलावा जानबूझकर यह दिखाया गया कि जमीन की कीमत केवल 30 लाख रुपए थी, जबकि उस वक्त उसकी लागत करीब 85 लाख रुपए थी। वहीं मौजूदा समय में उस जमीन की कीमत करीब 300 करोड़ रुपए है।
नवाब मलिक ने कुर्ला की गोवावाला कंपाउंड की संपत्ति 85 लाख रुपए में खरीदी थी और फ़राज़ मलिक को हसीना पारकर के ड्राइवर के रूप में काम करने वाले सलीम इशाक पटेल को 55 लाख रुपए नकद देने के लिए कहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पारकर ने पटेल को जमीन का पावर ऑफ अटॉर्नी दिया था, जिसने फराज मलिक से डील साइन करवा ली थी। पटेल को बाद में 2007 में पारकर के साथ जमीन हड़पने और धोखाधड़ी के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन मलिक और उनके बेटे के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। संपत्ति का सौदा 2003 में शुरू हुआ और 2007 तक पूरा हुआ।
ईडी का कहना है था कि नवाब मलिक जाँच में सहयोग नहीं कर रहे थे। वहीं उनका बेटा फराज मलिक भी इस सौदे से जुड़ा हुआ था। इसी कारण एक मार्च 2022 को ईडी ने फ़राज़ मलिक को समन जारी किया।
#WATCH | Mumbai: NCP leader and Maharashtra Minister Nawab Malik being brought out of Enforcement Directorate office, to be taken for medical examination.
He has been arrested by Enforcement Directorate in connection with Dawood Ibrahim money laundering case. pic.twitter.com/UMAVK5ZEVW
दाउद के मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पिछले महीने 15 फरवरी 2022 को दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों के खिलाफ दक्षिण मुंबई में 10 ठिकानों पर छापेमारी की। ईडी ने दाऊद इब्राहिम की दिवंगत बहन हसीना पारकर और भाई इकबाल कासकर के आवासों सहित मुंबई में 9 और ठाणे में 1 जगहों पर छापे मारे हैं। उल्लेखनीय है कि हसीना पारकर से ही मलिक ने जमीन खरीदी थी।
हाल ही में इस बात का भी खुलासा हुआ था कि दाऊद ने देश में आतंक फैलाने के लिए एक स्पेशल यूनिट बनाई थी। इसके जरिए राजनेताओं, बिजनेसमैनों को टार्गेट करने का लक्ष्य तय किया था।
रूस और यूक्रेन (Russia-Ukraine War) के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। गुरुवार (3 मार्च 2021) को दोनों देशों के बीच बेलारूस में जारी दूसरे दौर के वार्ता के बीच रूस ने यूक्रेन पर जबरदस्त हमला किया। राजधानी कीव को रूसी सैनिकों ने चारों तरफ से घेर लिया है और वहाँ के सेंट्रल रेलवे स्टेशन को उड़ा दिया है। चेर्निहाइव पर हमले में 9 लोगों के मारे जाने की खबर है। वहीं, भारत ने दोनों देशों से शत्रुता समाप्त करने का आग्रह किया है।
इधर यूक्रेन की संसद ने देश में रूस या रूस के नागरिकों की संपत्ति को जब्त करने की अनुमति दे दी है। राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की ने इसका फैसला लिया था और यूक्रेन की संसद ने इसकी मंजूरी दे दी।
तनाव को देखते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने रूस के राष्ट्रपति व्लामिदीर पुतिन से लगभग डेढ़ घंटे तक बातचीत की। मैक्रों ने आशंका जताई है कि रूस की नियत यूक्रेन पर पूरी तरह कब्जा करने की है और वहाँ के हालात और बदतर हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी एएफपी ने फ्रांस के राष्ट्रपति के सहायक के हवाले से यह जानकारी दी है।
यूक्रेन में कई जगहों पर रूस का कब्जा
यूक्रेन पर आठवें दिन भी रूस का हमला जारी है और वह लगातार बमबारी कर रहा है। चेर्निहाइव शहर में रूस द्वारा किए गए हमले में 9 लोगों के मारे जाने की खबर है। रूसी सेना ने अपने आक्रामक हमले में यूक्रेन की राजधानी कीव को चारों तरफ से घेर लिया है और कीव के सेंट्रल रेलवे स्टेशन को उड़ा दिया है।
खबर यह भी आ रही है कि रूसी सेना ने खेरसॉन शहर पर भी कब्जा कर लिया है। रूस ने यूक्रेन के एक प्रमुख बंदरगाह पर नियंत्रण कर लिया है। यूक्रेनी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि रूसी सैनिकों ने काला सागर बंदरगाह के सरकारी मुख्यालय पर कब्जा कर लिया है।
शत्रुता समाप्त करें दोनों देश: भारत
भारत ने एक बार फिर दोनों देशों से शांति की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 49वें सत्र में बोलते हुए भारत ने कहा कि दोनों देशों को अपनी शत्रुता समाप्त कर शांति बहाली की दिशा में कदम बढ़ानी चाहिए।
हिंसा को तत्काल समाप्त करने का आग्रह करते हुए भारत ने कहा कि मानव जीवन की कीमत पर कोई समाधान हासिल नहीं किया जा सकता। आपसी मतभेदों को निपटाने का एकमात्र साधन संवाद और कूटनीति है। भारत ने हालात को देखते हुए यूक्रेन में मानवीय सहायता की पहली खेप भेज दी है। भारत ने पोलैंड के रास्ते दवाओं और अन्य राहत सामग्री खेप यूक्रेन को भेजी है।
झारखंड के जमशेदपुर में ईसाई पादरी रवि के ऊपर बड़े पैमाने पर धर्मान्तरण करवाने का आरोप लगा है। उनकी चंगाई सभा के खिलाफ पिछले 27 फरवरी को हिन्दू संगठनों और सिखों ने उग्र प्रदर्शन किया था। वहीं से आरोपित रवि सिंह को गिरफ्तार करने की माँग जोर पकड़ रही है। उस पर आदिवासियों के साथ सिख समाज के लोगों को भी ईसाई बनाने का आरोप है। फिलहाल पुलिस ने उसे हिरासत में ले कर छोड़ दिया था। हिन्दू और सिख समाज के लोगों ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उनके कई बार शिकायत करने के बाद भी आरोपित पॉस्टर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
झारखंड में तेजी से बढ़ी हैं धर्मान्तरण की घटनाएँ
गोलमुरी की घटना धर्मान्तरण की पहली घटना नहीं है। इससे पहले सितम्बर 2021 में इसी गोलमुरी में ही सिख समुदाय ने DC और SP से मिल कर धर्मान्तरण की घटनाओं पर लगाम लगाने की माँग की थी। झारखंड के गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष सरदार शैलेंदर सिंह के मुताबिक इस शिकायत पर भी प्रशासन द्वारा कोई खास ध्यान नहीं दिया गया था।
दिसम्बर 2021 में झारखंड के गुमला के गढ़टोली प्रखंड में 30 आदिवासी परिवारों के धर्मान्तरण की खबर आई थी। इस दौरान धर्मान्तरण न करने वाले परिवारों ने बताया था कि उन्हें ईसाई न बनने पर सामाजिक बहिष्कार के साथ जान से मारने तक की धमकी मिल रही थी। साथ ही पेशे के शिक्षक ने खुद पर गौमांस खाने का दबाव होना स्वीकार किया था। इस मामले में भी पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी।
नवम्बर 2021 में झारखंड के रामगढ़ जिले के गंझूडीह टोला में धर्म परिवर्तन कराने पहुँचे ईसाई समुदाय की एक महिला सहित 6 लोगों को बंधक बना लिया गया था। उन्होंने एक महिला को लालच दिया था कि ईसाई बनते हैं तो उनके घर बेटे जा जन्म होगा। बाद में पुलिस ने बंधकों को छुड़ाया और साथ में थाने ले गई थी।
सितम्बर 2021 में एक गुमला की ही एक दलित महिला ने खुद और अपनी बेटी पर धर्मान्तरण के दबाव का आरोप लगाया था। महिला ने कुरकुरा थाने में इसकी शिकायत भी दर्ज करवाई थी। पीड़िता के मुताबिक तब उसकी 16 साल की बेटी के साथ यौन शोषण किया गया था। शिकायत के अनुसार आरोपितों ने उनकी बेटी के कपड़े खींचते हुए कहा था कि वे उससे शादी करेंगे और फिर उसे ईसाई बना देंगे। इतना ही नहीं, महिला और उसके परिवार के खिलाफ गाँव वालों को भी भड़काया गया था।
कोरोना संकट के दौरान भी झारखंड में धर्मान्तरण का अवैध धंधा खूब फला फूला। जून 2020 में धनबाद के झरिया में पुनर्वास के नाम पर 2 दर्जन परिवारों का धर्मान्तरण करवा दिया गया था। इस घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों ने उग्र विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान सिंदरी से भाजपा विधायक इंद्रजीत महतो ने कहा था कि हेमंत सरकार बनते ही मिशनरी गतिविधियाँ ऐसे बढ़ गई हैं जैसे कि झारखंड में झामुमो नहीं बल्कि मिशनरियों की सरकार हो।
यह कैसी राजनीति है ?? राष्ट्र विरोधी ताकतों द्वारा लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनका धर्मांतरण कराया जा रहा है और हेमंत सोरेन सरकार उनके सामने नतमस्तक है।#हेमंत_हैं_तो_हिम्मत_हैpic.twitter.com/5vvcPDuSOd
— Subodh Kumar Singh Guddu (@subodhguddu) July 17, 2021
धर्मांतरण के मामलों में झारखंड प्रशासन पर लगे हैं लीपापोती के आरोप
झारखंड में आधिकारिक रूप से धर्मान्तरण प्रतिबंधित हैं। लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ढिलाई का फायदा मिशनरियाँ उठा रही हैं। ऑपइंडिया ने 27 फरवरी को जमशेदपुर के गोलमुरी घटनाक्रम पर जानकारी लेने के लिए ADM जमशेदपुर को सम्पर्क किया तब उन्होंने खुद के बजाय DC या SP से बात करने को कहा था। जमशेदपुर के SP सिटी ने ऑपइंडिया को 28 फरवरी को मामले में अपडेट जानकारी न होना बताया था। हमें गोलमुरी थाने के SHO ने बताया कि इस मामले में कुल 4 केस दर्ज हुए हैं। इन 4 केसों में 2 केस दोनों पक्षों (रवि सिंह और उन पर आरोप लगाने वाले) ने एक दूसरे पर करवाए हैं। बाकी 2 केस प्रशासन ने दर्ज किए हैं। अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2021 में झारखंड के चतरा जिला स्थित हंटरगंज के कटैया पंचायत के पन्नाटांड रविदास टोला में अपनी माँ के ईसाई बन जाने से आहत एक युवक ने आत्महत्या कर ली थी। एक स्थानीय पोर्टल के मुताबिक इस घटना को पुलिस ने आत्महत्या मानने से इंकार कर दिया था।
अगस्त 2021 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हजारीबाग के दारू प्रखंड में ईसाई मिशनरियों के अवैध कार्यों पर शिकायत के बाद भी पुलिस या प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगा था। तब मिशनरियों पर 200 से अधिक जनजातियों को लोभ दे कर धर्मांतरित करने का आरोप लगा था।
ईसाई मिशनरियों की तारीफ करते हैं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
गौरतलब है कि झारखंड में वर्तमान में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार चल रही है। इस सरकार में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के अलावा कॉन्ग्रेस और RJD भी शामिल हैं। इस सरकार का गठन दिसम्बर 2019 में हुआ था। सरकार के गठन के बाद भाजपा नेताओं ने बताया कि धर्मान्तरण की गतिविधियों में तेजी आई है।
झारखंड में लगातार घट रही आदिवासियों की जनसंख्या का प्रमुख कारण धर्मांतरण है, @dasraghubar जी ने आदिवासी बंधुओ के हित की रक्षा के लिए धर्मांतरण के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला था जिससे धर्मांतरण में कमी आयी थी।
— Shashi Shekhar Singh (@S_ShekharSingh) July 11, 2021
नवम्बर 2021 में Z न्यूज़ द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए ईसाई मिशनरियों का 50% योगदान बताया था। इसी के साथ उन्होंने कोरोना संक्रमण काल में आदिवासी, पिछड़ों, अल्पसंख्यक समेत अन्य के लिए मिशनरियों के कार्यों को सराहनीय बताया था।
मुख्यमंत्री सोरेन ने अक्टूबर 2020 में NIA द्वारा फादर स्टेन की गिरफ्तारी का विरोध किया था। तब उन्होंने इसे अल्पसंख्यकों पर हमला और सरकारी एजेंसियों का केंद्र द्वारा दुरूपयोग बताया था। फादर स्टेन एल्गार परिषद से जुड़े हुए थे और कई साजिशों में शामिल बताए गए थे।
एक रिपोर्ट के मुताबिक दिसम्बर 2021 में मुख्यमंत्री सोरेन ने राँची के पुरुलिया रोड स्थित आर्चबिशप के साथ मुलाक़ात की थी। इस दौरान दोनों ने मिल कर केक काटा था। साथ ही ईसा मसीह से झारखंड की भलाई की प्रार्थना की थी।
झारखंड के आर्क बिशप मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से माँग चुके हैं ईसाई के लिए मंत्री पद
साल 2020 में आर्कबिशप फेलिक्स टोप्पो और सहायक बिशप थियोडोर मास्करेहंस ने क्रिसमस के मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से ईसाई समुदाय के लिए मंत्री पद माँगा था। यह माँग उन्होंने क्रिसमस गिफ्ट के तौर पर की थी। बिशप के मुताबिक ईसाई मंत्री ईसाइयों की भावनाओं को बेहतर समझ सकता है। उस समय भाजपा ने इसे हेमंत सरकार का छिपा एजेंडा बताया था।
आर्क बिशप के साथ हेमंत सोरेन, चित्र साभार – प्रभात खबर
भाजपा और VHP ने सोरेन सरकार को मिशनरियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया
ऑपइंडिया ने इस बारे में झारखंड भाजपा के प्रदेश महामंत्री प्रदीप वर्मा से बात की। प्रदीप वर्मा ने बताया, “रघुबर दास की सरकार जाते ही और हेमंत सोरेन की सरकार आते ही ईसाई मिशनरियाँ बेकाबू हो चुकी हैं। पहले कानून के तहत किसी का धर्म परिवर्तन करवाने के लिए जिलाधिकारी से अनुमति लेनी पड़ती थी। लेकिन अब उस कानून को कोई मान नहीं रहा है। अब धर्म परिवर्तन सत्ता के संरक्षण में हो रहा है। पुलिस प्रशासन कोई भी कार्रवाई अब शिकायतों पर नहीं करता। पहले धर्म परिवर्तन छिप कर गावों में ही होता था लेकिन अब ये खुलेआम जमशेदपुर जैसे शहरों में हो रहा है। मिशनरियों को अब किसी का भी डर नहीं है।”
विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने झारखंड में धर्मान्तरण की बढ़ती घटनाओं पर हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है। 28 फरवरी को उन्होंने लिखा, “झारखण्ड में भोले-भाले वनवासियों का सरेआम धर्म छीना जा रहा है। यूक्रेन से तो मोदी जी बचाकर ले आएंगे। हेमंत सोरेन जी, धरती आबा की तपोभूमि को पापी पास्टरों के कुकर्मों से बचाओ। झारखंड को ईसाई खण्ड मत बनाओ। चंगाई सभाएं, जिन्हें ये कपटी पादरी प्रार्थना सभा का नाम देते हैं, जमशेदपुर सहित सम्पूर्ण भारत में हिंदुओं के धर्मांतरण के अनाधिकृत अड्डे बन चुकी हैं। विराम ज़रूरी है।”
चंगाई सभाएं, जिन्हें ये कपटी पादरी प्रार्थना सभा का नाम देते हैं, जमशेदपुर सहित सम्पूर्ण भारत में हिंदुओं के धर्मांतरण के अनाधिकृत अड्डे बन चुकी हैं। विराम ज़रूरी है।
अप्रैल 2021 में पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने झारखंड की वर्तमान सोरेन सरकार पर ईसाई मिशनरियों के इशारे पर चलने का आरोप लगाया था। तब उन्होंने हेमंत सोरेन को सोने की चम्मच ले कर पैदा हुआ बताया था। मिशरनियों को राष्ट्रविरोधी ताकतें बताते हुए उन्होंने CM हेमंत सोरेन को उनका समर्थक बताया था।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी के उन्नीस महीने के कार्यकाल में धर्मांतरण का तेज़ी से ‘’विकास’’ हुआ है।
एक साल में पाँच लाख बेरोज़गारों को नौकरी देने वर्ना राजनीति से संन्यास लेने की लोकलुभावन सौगंध लेकर सत्ता हथियाने वाले सोरेन जी धर्मांतरण विकास रोकने के सवाल पर चुप हैं? pic.twitter.com/iL6UJtBUpi
— Sunil Kr. Tiwari (सुनील तिवारी)?? (@itssuniltiwari) July 17, 2021
झारखंड भाजपा नेता सुनील तिवारी ने 17 जुलाई 2021 को कुछ अख़बारों की कटिंग को शेयर करते हुए लिखा, “झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी के उन्नीस महीने के कार्यकाल में धर्मांतरण का तेज़ी से ‘’विकास’’ हुआ है। एक साल में पाँच लाख बेरोज़गारों को नौकरी देने वर्ना राजनीति से संन्यास लेने की लोकलुभावन सौगंध लेकर सत्ता हथियाने वाले सोरेन जी धर्मांतरण विकास रोकने के सवाल पर चुप हैं ?”
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में जारी विधानसभा (Assembly Eelection 2022) चुनाव के लिए छठें चरण का मतदान संपन्न हो गया है। इस चरण में यूपी के 10 जिलों की 57 सीटों पर मतदान हुए हैं। इस चरण में कुल 56.52 फीसदी मतदान हुआ है। इस दौरान सबसे अधिक अंबेडकरनगर जिले में 58.50 प्रतिशत मतदान हुआ है। अब इस चरण में 676 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होना है।
हालाँकि, खबर लिखे जाने तक चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक आँकड़े जारी नहीं किए गए थे। इस चरण में सबसे कम मतदान 48.53 फीसदी वोटिंग बलरामपुर जिले में हुई। उल्लेखनीय है कि छठा चरण इसलिए भी बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि इसी चरण में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Aaditynath) खुद भी गोरखपुर की सदर सीट से चुनावी मैदान में हैं। इसके अलावा भाजपा छोड़ सपा में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य फाजिलनगर सीट से चुनावी मैदान में हैं।
इन सब के अलावा लालजी वर्मा (कटेहरी सीट), रामचल राजभर (अकबरपुर सीट), योगी कैबिनेट के मंत्री जय प्रताप सिंह (बांसी सीट), यूपी के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी (इटवा सीट), प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू (तमकुहीराज सीट), योगी कैबिनेट के मंत्री सूर्य प्रताप शाही (पथरदेवा सीट), यूपी के राज्य मंत्री श्रीराम चौहान (खजनी) और राज्य मंत्री जयप्रकाश निषाद (रुद्रपुर) समेत कई अन्य दिग्गजों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है।
इन जिलों में हुआ मतदान
जिन 10 जिलों में मतदान हुआ है, उसमें अंबेडकरनगर की पाँच सीटें, बलरामपुर की चार, सिद्धार्थनगर की चार, बस्ती की पाँच, संतकबीर नगर की तीन, कुशीनगर की 7, गोरखपुर की 9, महाराजगंज की 5 व देवरिया औऱ बलिया जिले की 7-7 विधानसभा सीटों पर मतदान हुए हैं। गौरतलब है कि अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का आखिरी चरण का मतदान बचा है जो 7 मार्च 2022 को होगा। इसके बाद 10 मार्च को नतीजे आएँगे।
मशहूर फिल्म निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री (Film Director Vivek Ranjan Agnihotri) की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir files) 11 मार्च को रिलीज से पहले विवादों में आ गई है। शिया मुस्लिमों का कहना है कि फिल्म में उनके सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनई (Ayatollah Khamenei) को आतंकवाद से जोड़ना उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है। वहीं, अग्निहोत्री इस सीन को हटाने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।
शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने इस फिल्म के ट्रेल पर सख्त ऐतराज जताते हुए कहा कि अयातुल्लाह खामेनई की तस्वीर को सुनियोजित रूप से आतंकवाद से जोड़ना गलत है। उन्होंने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर (Anurag Singh Thakur) को पत्र लिखकर कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा कि फिल्म के जरिए भारत और ईरान के रिश्ते को प्रभावित करने की भी साजिश की गई है।
उन्होंने कहा कि फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि अयातुल्लाह खामेनई के अनुयायी कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार में शामिल रहे हैं। यह पूरी तरह से गलत है। उन्होंने फिल्म के इन आपत्तिजनक हिस्सों को हटाने के लिए कहा है। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव और मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने भी आपत्ति जताते हुए विवादित सीन को हटाने की माँग की है। उन्होंने सरकार से कार्रवाई की माँग की है।
इससे जुड़े विवाद पर निर्देशक अग्निहोत्री बोले, “दुनिया के किसी कोर्ट में, किसी भी महफिल में, किसी भी फोरम में, किसी भी प्लेटफॉर्म पर मैं इस फिल्म के एक-एक शॉट, उस शॉट के अंदर जो भी दर्शाया गया है, एक-एक डायलॉग, एक-एक कैरेक्टर की पूरी रिस्पॉन्सिबिलिटी अकेले लेने को तैयार हूँ। मैं इसे सौ-सौ रेफरेंस के साथ साबित कर सकता हूँ। इसलिए लोग उंगलियाँ तो बहुत उठाएँगे, क्योंकि हिंदुस्तान में इतने सालों से सबकी दुकानें चल रही थीं तो थोड़ा वो भी एक्सपोज होते हैं। इसकी कोई बात नहीं। फतवों जैसी इतनी बड़ी लड़ाइयाँ लड़ सकते हैं तो 10-12 लीगल केस तो लड़ ही सकते हैं।”
बता दें कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ के ट्रेलर को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। वहीं, इसके खिलाफ दुष्प्रचार शुरू हो गया है। वाम-उदारवादी गैंग बहुत पहले से ही इसे निशाना बनाना शुरू कर दिया था। एनडीटीवी ने फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने से पहले ही इसे एक प्रोपेगेंडा फिल्म कहा था। फिल्म में अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी, दर्शन कुमार, चिन्मय मंडलेकर और मृणाल कुलकर्णी मुख्य भूमिकाओं में हैं और यह 11 मार्च 2021 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
इस फिल्म को बनाने पर उन्हें धमकियाँ भी मिल रही हैं। उन्होंने कहा था कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ उस अमानवीय आतंकवाद की पोल खोलने वाला एक प्रयास है, जिसने शिव और सरस्वती की पवित्र भूमि को तबाह कर दिया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि किस तरह मजहबी आतंकवाद भारत की भूमि के अन्य भागों में पाँव पसार रहा है। उन्होंने कहा कि यही कारण है, कि उनके जैसे लोगों को चुप कराने के प्रयास हो रहे हैं। विवेक अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि वो हमेशा उनके लिए बोलते हैं, जिन्हें सुना नहीं गया।
पिछले दिनों ही उन्होंने फिल्म को लेकर दुष्प्रचार करने वाले गिरोह के बारे में खुलासा किया था। फिल्म समीक्षक अनुपमा चोपड़ा को ‘शूर्पणखा’ बताते हुए फिल्म को नुकसान पहुँचाने की कोशिश का आरोप लगाया था। अब उन्होंने एक वीडियो जारी कर चोपड़ा की कारस्तानी के बारे में विस्तार से बताया है। साथ ही उनलोगों के नाम भी बताए हैं जो कथित तौर पर बॉलीवुड को चलाते हैं। उसके नियम-कायदे सेट करते हैं।
1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के साथ हुई बर्बरता की कहानी और उनके विस्थापन पर आधारित विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ (KashmirFiles) लगातार कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। इसके लिए उन्हें कट्टरपंथियों की ओर से धमकियाँ तो मिल ही रही थीं। अब उनकी फिल्म के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें इस फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की माँग की गई है।
‘लॉ बीट’ रिपोर्ट के मुताबिक, “उत्तर प्रदेश के रहने वाले इंतजार हुसैन सईद नाम के एक शख्स ने कोर्ट में पीआईएल दायर की है। जिसमें उसने विवेक अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित द कश्मीर फाइल्स (KashmirFiles) की रिलीज़ को रोकने की माँग की है। हुसैन ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कहा कि इस फिल्म के ट्रेलर से मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचती है। इसके भड़काऊ दृश्य साम्प्रदायिक हिंसा का कारण बन सकते हैं।”
BREAKING: PIL by one Intezar Hussain Sayed, an Uttar Pradesh Inhabitant to stall release of #KashmirFiles, directed by @vivekagnihotri before Bombay High Court, says “Trailer hurts religious feelings of Muslim Community”, “inflammatory scenes bound to cause communal violence” pic.twitter.com/oz0YM4MP8P
सईद का तर्क है कि द कश्मीर फाइल्स की रिलीज़ को रोक दिया जाना चाहिए, क्योंकि #TheKashmirFilesTrailer में ‘नस्लीय और भेदभावपूर्ण टिप्पणी’ की गई है और इसमें कश्मीरी पंडितों की हत्याओं का लेखा-जोखा है, जो ‘घटना’ का केवल एकतरफा चित्रण करता है। इससे मुस्लिमों की धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं।
In “#TheKashmirFilesTrailer, a graffiti of the phrase “Musalmano Jago Kafiron Bhago” can be seen written on the wall which sets the tone of the film with potency of causing communal imbalance between Hindus & Muslims”: PIL seeks stalling release of #KashmirFiles set for March 11
जनहित याचिका में कहा गया है, “#TheKashmirFilesTrailer में ‘मुसलमानों जागो काफिरों भागों’ शब्द दीवार पर लिखा हुआ देखा जा सकता है, जो हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच साम्प्रदायिक असंतुलन पैदा करने की क्षमता के साथ फिल्म के नैरेटिव को आगे बढ़ाता है। याचिका में #KashmirFiles की 11 मार्च की रिलीज को रोकने की माँग की गई है।”
याचिकाकर्ता इंतजार हुसैन सईद ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की द कश्मीर फाइल्स फिल्म केवल दुष्प्रचार का पीस है। ये भड़काऊ और आग लगाने वाला काम है। ये रचनात्मक अभिव्यक्ति नहीं है। #KashmirFiles संविधान के अनुच्छेद 19 (2) के प्रतिबंधों के तहत आता है क्योंकि ‘व्यक्ति दूसरे के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हुए बुनियादी मौलिक अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकता।
Sayed tells Bombay HC that movie by @vivekagnihotri a “propaganda piece”, “1 sided inflammatory incendiary work”, not “artistic expression” & #KashmirFiles comes under restrictions to Article 19(2) as “person cannot exercise basic fundamental right while violating another’s”
इस मसले पर विवेक अग्निहोत्री ने ट्विटर के जरिए कहा, “एक छोटी सी फिल्म से इतना डर! अब मुझे बताओ मैं क्या करूँ।”
एक छोटी सी फ़िल्म से इतना डर… So much fear of a small film? Pl advise what do I do? https://t.co/AqH1p7Xe2W
— Vivek Ranjan Agnihotri (@vivekagnihotri) March 3, 2022
इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि मैं किसी भी अदालत या उनकी पसंद के किसी भी मंच में साबित कर सकता हूँ कि मेरी फिल्म का हर फ्रेम, हर शब्द सच है। सच्चाई के सिवा कुछ नहीं। वे जितनी चाहें, उतनी बाधाएँ खड़ी कर सकते हैं लेकिन मुझे चुप नहीं कराया जा सकता।