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आगरा देशद्रोह मामले में तुर्की के टीवी चैनल ने गलत इमेज प्रसारित किया, कश्मीरी छात्र संघ ने ठोका एक करोड़ का मुकदमा

टी20 विश्वकप में पाकिस्तान (Pakistan) की जीत के बाद उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के आगरा (Agra) में कुछ मुस्लिम छात्रों द्वारा देशद्रोह (Sedition) के कृत्य के मामले में दूसरे कश्मीरी छात्रों की तस्वीरें शेयर कर तुर्की (Turkey) का टीवी चैनल बुरी तरह फँस गया है। तुर्की का TRT वर्ल्ड चैनल के खिलाफ जम्मू-कश्मीर छात्र संघ ने आगरा देशद्रोह मामले में तीन कश्मीरी छात्रों की फेक इमेज को टेलीकास्ट करने को लेकर सोमवार (28 फरवरी 2022) को कानूनी नोटिस भेजा है। इसमें एक करोड़ रुपए के मुआवजे की माँग की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर छात्र संघ (Jammu Kashmir student association) ने यह नोटिस वकील आमिर मसूदी के जरिए भेजा है। इसमें TRT चैनल पर छात्रों के शिक्षा, कैरियर और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया है। जम्मू-कश्मीर छात्र संघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता नासिर खुहमी का कहना है कि टीआरटी वर्ल्ड ने हाल ही में हुए टी-20 विश्व कप मैच में पाकिस्तान क्रिकेट टीम के समर्थन में जश्न मनाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए छात्रों के तथ्यों की जाँच किए बिना ही न्यूज प्रसारित कर दिया। इतना ही नहीं चैनल ने फेक न्यूज को 24 घंटे से भी ज्यादा समय तक टेलीकास्ट किया।

TRT वर्ल्ड को जारी की गई नोटिस में आगे लिखा गया, “TRT वर्ल्ड ने जिन तीन कश्मीरी छात्रों तालिब मजीद, बासित अहमद सोफी और आमिर मोहिदीन वानी की इमेज को दिखाया था, ये छात्र वर्तमान में कर्नाटक भारत में पढ़ रहे हैं। उसका दावा है कि ये छात्र देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद हैं। यह दावा पूरी तरह से निराधार, अपमानजनक और मनगढ़ंत है।”

नोटिस में आगे कहा गया है कि जिन छात्रों की इमेज को टीआरटी वर्ल्ड ने दिखाया है वो प्रधानमंत्री विशेष छात्रवृति योजना के तहत कर्नाटक के हुबली में पढ़ाई कर रहे हैं। नोटिस के मुताबिक, “इन छात्रों को 2020 में नारे लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। अव वो शांति से अपना सामान्य जीवन जी रहे हैं।”

खुहमी ने TRT वर्ल्ड को चुनौती देते हुए बिना शर्त माफी की माँग की है। इसके साथ ही ऐसा नहीं करने पर मानहानि की मुकदमें की चेतावनी भी दी है।

क्या है मामला

गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर 2021 में टी20 वर्ल्ड कप के दौरान पाकिस्तान ने भारत को हरा दिया था। इसके बाद आगरा के बिचपुरी स्थित राजा बलवंत सिंह इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी कॉलेज (RBS) के कुछ छात्रों ने पाकिस्तान के सपोर्ट में व्हाट्सएप स्टेटस अपडेट किया था। बाद में अरशद यूसुफ, इनायत अल्ताफ और शौकत अहमद के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कॉलेज ने तीनों को निलंबित भी कर दिया। वो फिलहाल जेल में बंद हैं।

रूसी फंड से चल रही कॉन्ग्रेस, इसलिए यूक्रेन पर चुप्पी? पुष्पम प्रिया ने याद दिलाया इंदिरा गाँधी का दौर, सूटकेसों में भरकर आता था पैसा

यूक्रेन और रूस युद्ध बीच भारत सरकार लगातार अपने नागरिकों को यूक्रेन से निकालने में जुटी है। इस काम के लिए उनकी तारीफ और आलोचना दोनों हो रही है। इस बीच विपक्ष भी लगातार भारत की मोदी सरकार पर हमलावर है, लेकिन वे खुद यूक्रेन की स्थिति पर कुछ नहीं बोल रहे। इसी बात का जिक्र करंट पुष्पम प्रिया की द प्लूरल्स पार्टी ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा है और उनकी इस चुप्पी के पीछे रूसी फंडिंग को जिम्मेदार बताया है।

अपने ट्वीट में पुष्पम प्रिया चौधरी की द प्लूरल्स पार्टी ने लिखा, “यूक्रेन आक्रमण पर सरकार की दुविधा तो फिर भी समझ में आती है। लेकिन लिबरल होने का ढोंग रचने वाले कॉन्ग्रेस सहित विपक्ष की चुप्पी हास्यास्पद है। बौद्धिक और नैतिक दरिद्रता है या चुनाव के लिए रूसी फ़ंडिंग का असर?”

कॉन्ग्रेस पर विदेशी फंडिंग का भार

बता दें कि कॉन्ग्रेस पर विदेश से फंड लेने के आरोप कोई नई बात नहीं हैं। पार्टी का इतिहास देख कर ही समय-समय पर लोग कॉन्ग्रेस को विदेशी फंडिंग पर घेरते हैं। और ये जानना दिलचस्प है कि ये खेल इंदिरा काल से चला आ रहा है। 

ऑपइंडिया ने आपको अपनी पहले की रिपोर्ट में बता ही रखा है कि कैसे इंदिरा गाँधी के समय में सोवियत संघ की खुफिया एजेंसी केजीबी (कोमितेत गोसुदर्स्त्वेन्नोय बेज़ोप्स्नोस्ति) कॉन्ग्रेस नेताओं को पैसा मुहैया कराती थी। इस संबंध में खुद अमेरिकी एजेंसी सीआईए ने गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक करके दावा किया था कि इंदिरा गाँधी के जमाने में कॉन्ग्रेस के 40 फीसद सांसदों को सोवियत संघ से पैसा मिलता था।

इसके अलावा, साल 2005 में केजीबी के ही एक पूर्व जासूस वासिली मित्रोकिन (Vasili Mitrokhin) की किताब आई थी। इसमें तो बकायदा बताया गया है कि खुद इंदिरा गाँधी को सूटकेसों में भरकर पैसे भेजे गए थे। वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर ने कुछ वक्त पहले ऑपइंडिया को बताया था कि जो तथ्य सार्वजनिक हैं उससे जाहिर होता है कि 1967 के आम चुनाव के वक्त कॉन्ग्रेस सहित देश के ज्यादातर राजनीतिक दलों को विदेश से पैसा मिला था। उन्होंने बताया था कि शीत युद्ध के जमाने में कम्युनिस्ट देश जहाँ भारत में साम्यवाद के फैलाव के लिए पैसे खर्च कर रहे थे, तो पूँजीवादी देश साम्यवाद को रोकने के लिए। ऐसे में जब सत्ताधारी दल का नेता ही बिकने को तैयार हो तो विदेशी ताकतों के लिए चीजें आसान हो जाती है।

मित्रोकिन ने खोले इंदिरा काल के राज

सोवियत संघ से फंडिंग का कैसे खुला राज

मित्रोकिन की किताब के चलते सबसे दिलचस्प बात इतने सालों बाद ये हुई कि वर्षों तक जिन तथ्यों को कॉन्ग्रेस छिपाती रही उसे मित्रोकिन ने 2005 में दुनिया के सामने ला दिया। बताया जाता है कि मित्रोकिन सोवियत संघ जमाने के हजारों गोपनीय दस्तावेज चुराकर देश से बाहर ले गए थे। बाद में इसके आधार पर क्रिस्टोफर एंड्रयू (Christopher Andrew) के साथ मिलकर किताबें लिखी। द वर्ल्ड वॉज गोइंग आवर वे (The World Was Going Our Way) नामक किताब में कहा गया है कि केजीबी ने 1970 के दशक में पूर्व रक्षा मंत्री वीके मेनन के अलावा चार अन्य केंद्रीय मंत्रियों को भी चुनाव प्रचार के लिए फंड दिया था।

इंदिरा काल के बाद भी विदेश से पैसा लेने की कॉन्ग्रेस की आदत में सुधार नहीं आया  सोवियत संघ से पैसा लेने का जो सिलसिला इंदिरा गाँधी के जमाने में शुरू हुआ था वह राजीव गाँधी के जमाने में भी जारी रहा। हालॉंकि इस दौर में सोवियत संघ का प्रभाव कुछ सीमित करने की कोशिश भी हुई थी। लेकिन सोवियत संघ की पकड़ सिर्फ राजनीति में नहीं थी। उन्होंने मीडिया पर भी अपना कब्जा किया हुआ था। मित्रोकिन की किताब अनुसार भारत में सोवियत संघ का प्रोपेगेंडा चलाने के लिए 40-50 पत्रकार थे जो बाद में 200-300 हो गए थे।

विदेशी फंडिंग का मुद्दा उठाने वाली पुष्पम प्रिया कौन हैं?

उल्लेखनीय है कि एक बार फिर से कॉन्ग्रेस पार्टी पर फंडिंग के आरोप मढ़ने वाली द प्लूरल्स पार्टी की अध्यक्ष पुष्पम प्रिया चौधरी हैं जो साल 2020 में बिहार चुनावों में खासी चर्चा में थीं। उन्होंने विदेश में डेवलपमेंट स्टडीज की पढ़ाई की। साल 2019 में वह बिहार लौटीं इस आशा के साथ कि राजनीति में आकर वह पूरे बिहार की सूरत को बदल देंगी। हालाँकि ऐसा नहीं हो सका। बिहार को 2025 तक भारत की और 2030 तक विश्व की सबसे बेहतर बनाने का उनका सपना 2020 के बिहार चुनाव के समय धराशायी हुआ जब तमाम प्रचार के बाद भी उनकी पार्टी को राज्य में जगह बनाने में असफल हुई। अपनी हार देखते हुए पुष्पम प्रिया ने इसका जिम्मा ईवीएम पर लगाया और वोट न मिलने पर दावा किया कि जहाँ उनके कार्यकर्ता उनके सामने बूथ में गए वहाँ भी उन्हें जीरो वोट मिले।

UP की 24 साल की ग्राम प्रधान यूक्रेन में कर रही डॉक्टरी की पढ़ाई, रूसी हमले में फँसी वैशाली यादव की कुर्सी पर खतरा

रूस और यूक्रेन के बीच छिड़े युुद्ध (Russia Ukraine War) ने उत्तर प्रदेश की एक ग्राम प्रधान की कुर्सी पर खतरा पैदा कर दिया है। दरअसल, पिछले साल ग्राम प्रधान चुनी गई 24 साल की वैशाली यादव यूक्रेन में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही हैं। यह बात तब सामने आई जब 24 फरवरी को उनका एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह फँसे छात्रों की मदद के लिए सरकार से गुहार लगा रही थी। वैशाली फिलवक्त इवानो फ्रैंकिव्स्क नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रही हैं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हरदोई के सांडी ब्लॉक के तेरापुरसेली की रहने वाली वैशाली यादव पूर्व ब्लॉक प्रमुख महेंद्र यादव की बेटी हैं। पिछले साल उत्तर प्रदेश में हुए पंचायत चुनावों में वैशाली यादव गाँव आई। उन्होंने ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा और इसमें जीत भी दर्ज कर ली। प्रधानी का चुनाव जीतने के बाद वह अपनी पढ़ाई के लिए वापस यूक्रेन चली गई। इस बात जानकारी गाँव में किसी को नहीं थी। जब यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद यह बात सामने आई तो गाँव के लोग हैरान रह गए।

बताया जा रहा है कि वैशाली के इस तरह गाँव छोड़कर विदेश में रहने को लेकर पंचायती राज विभाग ने कथित तौर पर नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण माँगा है। यह बात भी सामने आई है कि वैशाली के यूक्रेन में रहने के बावजूद उनके काम हुआ और इस दौरान कुछ धन का भी इस्तेमाल किया गया। News18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पंचायती राज विभाग उनकी अनुपस्थिति में ग्राम पंचायत द्वारा उपयोग किए गए धन की जाँच करेगी।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए वैशाली ने कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं यहाँ गोलीबारी में फँस जाऊँगी। मैंने MBBS के लिए यूक्रेन को इसलिए चुना क्योंकि इसकी डिग्री यूरोपीय संघ में कहीं भी प्रैक्टिस के लिए स्वीकार्य है। मुझे अभी घर वापस जाने के लिए फ्लाइट चाहिए।”

वीडियो कॉल के जरिए मीटिंग करना

दिसंबर 2021 मे, अमर उजाला ने वीडियो कॉल के माध्यम से ग्राम पंचायत की बैठकों में भाग लेने के लिए वैशाली की ‘तारीफ’ की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि यादव अपने गाँव तेरा पुरसाली को यूक्रेन के गाँवों की तर्ज पर विकसित करना चाहती हैं। हरदोई जिले और लखनऊ से स्कूली पढ़ाई करने वाली वैशाली पिछले तीन साल से यूक्रेन में MBBS कर रही हैं।

पिछले साल उन्होंने अपने पिता और पूर्व ब्लॉक प्रसिडेंट महेंद्र सिंह यादव के सामने ग्राम पंचायत का चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। हालाँकि उनके पिता इस बात से सहमत नहीं थे, क्योंकि वह चाहते थे कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करे। इसके लिए वैशाली को वापस यूक्रेन लौटना था। मगर वैशाली ने जोर देकर कहा कि वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ग्राम पंचायत की बैठकों में भाग ले सकती है और यूक्रेन में अपनी पढ़ाई जारी रख सकती है।

हालाँकि अमर उजाला की रिपोर्ट में कहा गया कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वापस आना चाहती थी और अपने गाँव की बेहतरी के लिए काम करना चाहती थी, लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट की मानें तो वैशाली ने यूक्रेन को इसलिए चुना क्योंकि इसकी डिग्री यूरोपीय संघ में स्वीकार्य है।

‘मैंगलोर मुस्लिम’ ने हिजाब की सुनवाई कर रहे जज पर की अपमानजनक टिप्पणी, हर्ष की हत्या पर भी फैला चुका है नफरत

कर्नाटक में चल रहे बुर्का विवाद के बीच ‘मैंगलोर मुस्लिम (Mangalore Muslims)’ नामक फेसबुक पेज के एडमिन सहित अन्य पर मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई हिजाब विवाद (Karnataka Hijab Controversy) की सुनवाई कर रहे कर्नाटक हाई कोर्ट के तीन जज में से एक के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने को लेकर की गई है। बेंगलुरु पुलिस की साइबर क्राइम डिवीजन ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मंगलवार (1 मार्च 2022) को पेज के एडमिन अतीक शरीफ और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया।

शिकायत में कहा गया है कि अतीक शरीफ ने 12 फरवरी को जस्टिस कृष्णा दीक्षित के खिलाफ अपमानजनक सामग्री पोस्ट की थी। इसमें उनकी साख और ईमानदारी पर सवाल उठाया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने कहा है कि जिन लोगों ने पोस्ट को लाइक किया है, उन पर दंडात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। बता दें कि हिजाब मामले की सुनवाई के लिए गठित तीन न्यायाधीशों की पीठ में मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी, न्यायमूर्ति जेएम खाजी और न्यायमूर्ति कृष्णा एस दीक्षित शामिल हैं।

यह पहली बार नहीं है जब फेसबुक पेज ‘मैंगलोर मुस्लिम’ के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले 23 फरवरी को मंगलुरु पुलिस ने 26 वर्षीय बजरंग दल नेता हर्ष के बारे में अपमानजनक सामग्री पोस्ट कर नफरत और हिंसा भड़काने के लिए एडमिन के खिलाफ FIR दर्ज की थी। कर्नाटक के शिवमोगा में मुस्लिमों ने हिंदू नेता की चाकू मारकर हत्या कर दी थी।

फेसबुक पेज ने हर्ष की हत्या का बचाव करने वाली सामग्री पोस्ट की थी और उन्हें स्ट्रीट डॉग बताया था। पेज ने दावा किया था कि हर्ष की हत्या वर्ष 2015 में पैगंबर मोहम्मद को कथित रूप से गाली देने के लिए की गई थी। इसमें यह भी कहा गया था कि जो कोई भी पैगंबर का अपमान करेगा, उसका यही हश्र होगा। मैंगलोर मुस्लिम पेज पर हिंदुवादी संगठनों और हिंदू नेताओं के खिलाफ बार-बार भड़काऊ पोस्ट करने और हिंदुओं तथा मुसलमानों के बीच नफरत फैलाने और हिंसा में शामिल होने के लिए उकसाने का आरोप भी है।

इससे पहले जस्टिस कृष्णा दीक्षित के खिलाफ कन्नड़ अभिनेता चेतन कुमार अहिंसा ने अपमानजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने जस्टिस कृष्णा दीक्षित की स्पष्टता पर सवाल उठाते हुए उन पर निशाना साधा था। चेतन कुमार ने 16 फरवरी को जस्टिस कृष्णा दीक्षित के बारे में अपने एक पुराने ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा था, “यह एक ट्वीट है जिसे मैंने लगभग दो साल पहले कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले के संबंध में लिखा था। जस्टिस कृष्णा दीक्षित ने दुष्कर्म के एक मामले में इस तरह की परेशान करने वाली टिप्पणी की थी। अब यही जज तय कर रहे हैं कि सरकारी स्कूलों में हिजाब स्वीकार्य है या नहीं। क्या ऐसा करने के लिए उनके पास स्पष्टता है?” पुलिस ने मामले पर 505 (2) और 504 के तहत FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। 

जिस हत्यारे को छत्तीसगढ़ सरकार ने 2019 में छोड़ा, उस पर 2022 में आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला: न्यायिक व्यवस्था का एक नमूना यह भी

साल था 2004। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में दिनदहाड़े एक युवती की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना को उसके कथित प्रेमी सुरेश यादव उर्फ गुड्डू ने अंजाम दिया। 2004 में उसे एडिशनल सेशन कोर्ट ने दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भी इसे बरकरार रखा। फिर यादव ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। करीब 10 साल बाद शीर्ष अदालत का फैसला अब आया है। भारतीय न्यायिक व्यवस्था की यह देरी नई नहीं है। लेकिन इस मामले में हैरत की बात यह है कि सुरेश यादव को छत्तीसगढ़ की सरकार ने 2019 में ही रिहा कर दिया था।

छत्तीसगढ़ सरकार के रिहाई के निर्णय से पहले यादव 16 साल जेल की सजा काट चुका था। रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस विक्रमनाथ की बेंच ने उसकी याचिका खारिज करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उम्रकैद के फैसले को बरकरार रखा। साथ ही इस मामले में दायर की गई आपराधिक अपील को भी खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसके फैसले का प्रभाव छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा यादव को रिहा करने के निर्णय पर नहीं पड़ेगा।

क्या है पूरा मामला

रिपोर्ट के अनुसार अपनी कथित प्रेमिका को किसी से बात करते देख सुरेश यादव ने 2004 में उसकी हत्या कर दी थी। उसने 21 इंच के चाकू से लड़की के शरीर पर 12 वार किए। चाकू से उसके पेट और फेफड़े में छेद हो गया और वो मर गई। घटना के दो साल बाद दुर्ग की एक निचली अदालत ने 2006 में यादव को आईपीसी की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया। उम्रकैद और आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत अलग-अलग अवधि के कारावास की सजा सुनाई। बाद में छत्तीसगढ़ HC ने यादव की अपील पर सबूतों की फिर से जाँच की और 2010 में उसकी सजा को बरकरार रखा।

इसके बाद यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उसके मामले की सुनवाई के लिए कोई वकील नहीं था इसलिए 2 जुलाई 2012 को शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर न्याय मित्र नियुक्त करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने 30 अगस्त 2013 को यादव की अपील को स्वीकार किया। 2014 में अपील को सुनवाई के लिए लिस्टेड हुई। अब जाकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में बचाव पक्ष की दलील खारिज करते हुए कहा है कि गवाही सिर्फ इस आधार पर रद्द नही कि जा सकती कि गवाह ने मृतका की हत्या के समय उसे बचाने का प्रयास नही किया।

‘यहाँ जाति पर बँटती है सीट, 97% लाकर भी मेरे बच्चे को नहीं मिला एडमिशन’: नवीन के पिता का छलका दर्द, यूक्रेन-रूस युद्ध में हुई मौत

यूक्रेन-रूस युद्ध में जान गँवाने वाले पहले भारतीय छात्र नवीन के जाने के बाद अब कर्नाटक से उनके पिता का बयान आया है। अपने बेटे की मौत से आहत पिता ने मीडिया को बताया है कि आखिर उन्हें नवीन को यूक्रेन में क्यों भेजना पड़ा। अपनी बात रखते हुए उन्होंने भारतीय शिक्षा क्षेत्र में लागू आरक्षण नीतियों पर भी वार किया।

क्यों भेजा था नवीन को यूक्रेन

नवीन के पिता शेखरप्पा ने कहा, “हमारे कुछ सपने थे जो अब बिखर गए हैं। मेरा बेटा जिसने प्री यूनिवर्सिटी कोर्ट में 97% मार्क्स पाए थे, एक टैलेंटेड बच्चा था जिसे सिर्फ यहाँ के सिस्टम की वजह से बाहर पढ़ने जाना पड़ा, जिसमें प्राइवेट एड्यूकेशन इंस्टिट्यूट आपकी पहुँच से बाहर होते हैं। मैंने पता किया था मुझे किसी भी मेडिकल कॉलेज में उसका एडमिशन करवाने के लिए 85 से 1 करोड़ देने थे। तब मैंने सोचा कि मैं अपने बेटे को यूक्रेन भेजूँगा। लेकिन वो तो मुझे और ज्यादा महंगा पड़ गया।”

भारत में जाति के आधार पर बँटती हैं सीट: मृतक छात्र के पिता

नवीन के पिता ने मीडिया के माध्यम से सरकार से अपील की कि वो लोग इस मामले में देखें। वह कहते हैं, “डोनेशन आदि बहुत बेकार चीजें हैं। इसी के चलते इंटेलीजेंट बच्चे पढ़ने के लिए विदेश जाते हैं। यहाँ जगह पाने के लिए करोड़ों माँगे जाते हैं। ऐसे में विदेश में वही शिक्षा बल्कि अच्छी शिक्षा वो भी बढ़िया उपकरणों के साथ मिलती है। यहाँ भारत में सिर्फ जाति के आधार पर मिलती हैं सीटें। मेरे बेटे के 97 फीसद पीयूसी में आए थे।”

पैसे उधार लेकर बेटे को भेजा था विदेश : नवीन के पिता

उन्होंने कहा, देश के शिक्षा तंत्र और जातिवाद के चलते इंटेलिजेंट बच्चें सीट नहीं पाते। वह कहते हैं, “मैं हमारे राजनैतिक तंत्र, शिक्षा तंत्र और जातिवाद के कारण उदास हूँ। सब कुछ निजी संस्थानों के हाथ में है।” उन्होंने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से पैसे लेकर नवीन को एबीबीएस पढ़ने यूक्रेन भेजा था। वहाँ वह अपने दोस्तों के साथ अपार्टमेंट में रहता था। जब से जंग शुरू हुई थी वह घर पर कम से कम 5-6 बार कॉल करता था और फ्लैट के नीचे बने बंकर में जाकर रहने लगा था।

गोली लगने से पहले कहाँ थे नवीन?

नवीन के सीनियर अमित बताते हैं कि उन्होंने बंकर से मार्ट जाने के लिए करीब 6 बजे बंकर छोड़ा था।  7:58 पर उन्होंने एक दोस्त को कुछ पैसे भेजने के लिए मैसेज किया और 8:10 पर हमें खबर आई कि वो अब नहीं हैं। नवीन के सीनियर ने बताया कि वो सारे लोग बिना खाए-पिए 4 दिन से बंकर में रह रहे थे। नवीन के बड़े भाई हर्षा ने बताया कि उनके भाई का इस जून में आठवाँ सेमेस्टर था। उसके बाद वो इंटर्नशिप लेने वाला था। पर अब ये कल्पना करना भी मुश्किल है कि वो हमारे साथ नहीं है।

कब लगी नवीन को गोली?

बता दें कि भारतीय छात्र की मृत्यु की खबर मंगलवार को सुबह आई थी। इसके बाद विदेश मंत्रालय की ओर से बयान जारी करके इस खबर की पुष्टि की गई। साथ ही विदेश मंत्रालय की ओर से नवीन के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई थी। कुछ खबरों से पता चला था कि जिस समय नवीन पर गोली चलाई गई उस समय वह Lviv के स्टेशन जा रहे थे ताकि वहाँ से पश्चिमी सीमा पहुँच सकें। वहीं अब रिपोर्ट्स आई हैं कि नवीन खाना लेने बंकर से बाहर निकले थे।

3 दिन में 26 फ्लाइट्स के जरिए यूक्रेन से निकाले जाएँगे भारतीय छात्र: अब तक 60% बाहर निकले, पड़ोसी देशों में भेजे गए 25 अधिकारी

रूस-यूक्रेन युद्ध से उपजी ताज़ा परिस्थिति और वहाँ से भारतीय छात्रों को सकुशल निकालने की प्रक्रिया का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (1 मार्च, 2022) की शाम एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। केंद्रीय विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला ने बताया कि अगले 3 दिनों में यूक्रेन से 26 फ्लाइट्स भारतीयों को लेकर आने वाली हैं। अब तक 10 फ्लाइट्स वहाँ से आ चुकी हैं। भारत के 4 केंद्रीय मंत्री भी यूक्रेन के चार पड़ोसी देशों में ‘खास राजदूत’ के रूप में पहुँच गए हैं।

विदेश सचिव ने बताया, “यूक्रेन की सरकार के निवेदन पर वहाँ मानवीय मदद भी भारत की तरफ से भेजी गई है। दवाओं और मेडिकल उपकरणों के अलावा अन्य राहत सामग्रियाँ लेकर एक फ्लाइट पोलैंड के रास्ते से यूक्रेन पहुँच गई है। एक अन्य कल जाने वाली है। फ़्रांस और यूरोपियन यूनियन के प्रेसिडेंटस से पीएम मोदी की बात हुई है। उन्होंने यूक्रेन के पड़ोसी देशों के राष्ट्राध्यक्षों से भात कर भारतीय छात्रों को वहाँ से निकालने में मदद की अपील की। कूटनीतिक रूप से हम सभी हितधारकों से संपर्क कर रहे हैं, ताकि हरे लोग सुरक्षित निकल पाएँ। इसके लिए हर माध्यम का इस्तेमाल किया जाएगा।”

भारत सरकार की तरफ से जानकारी दी गई है कि रूस और यूक्रेन के राजदूतों से भी इस युद्ध में भारतीयों की सुरक्षा को लेकर बात की गई है। यूक्रेन के पड़ोसी देशों में कैम्प करने के लिए 25 अधिकारियों को भी भेजा गया है। जानकारी दी गई है कि यूक्रेन से सीमा पार कर के अब तक 5 लाख लोग वहाँ से भाग चुके हैं और इनके अलावा कई विदेशी भी हैं। समस्या ये है कि वहाँ पर भीड़ काफी है और कीव में मौजूद सभी नागरिकों को पश्चिम की तरफ आने और वहाँ से सीमा पार कर के हंगरी, रोमानिया, पोलैंड या स्लोवाकिया की तरफ आने को कहा गया है।

बुखारेस्ट से AI 1942 की 249 यात्रियों के साथ 10वीं उड़ान भी निकल गई है। भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि खारकीव से निकासी हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के हावेरी से ताल्लुक रखने वाले फाइनल ईयर मेडिकल छात्र नवीन शेखरप्पा की बमबारी में मौत के बाद उनके माता-पिता से बात कर के अपनी संवेदना व्यक्त की। उधर रूस के खिलाड़ियों को दुनिया के किसी भी प्रतिस्पर्धा में भाग लेने से रोकने का फैसला लिया गया है।

भारत सरकार का अंदाज़ा है कि यूक्रेन में भारत के 20,000 छात्र (एडवाइजरी जारी किए जाने के समय का आँकड़ा) फँसे हुए थे, जिनमें से 12,000 छात्रों ने यूक्रेन छोड़ दिया है। बाकी बचे 40% को निकालने के लिए प्रयास किया जा रहा है। इनमें से आधे खारकीव में फँसे हुए हैं और आधे पश्चिमी सीमा तक पहुँच गए हैं। कीव में रूस ने एक टेलीविजन टॉवर को भी उड़ा दिया है, जिससे कई ब्रॉडकास्ट रुक गए हैं। ब्रिटेन ने कहा है कि यूक्रेन में जाकर रूस से लड़ने का उसकी सेना का कोई इरादा नहीं है।

ताजमहल में गूँजा ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ और ‘भारत मुर्दाबाद’ का नारा: लोगों ने आरोपितों को धुना, शाहजहाँ के ‘उर्स’ का था मौका

उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित ताजमहल परिसर में ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ सहित अन्य भारत विरोधी नारे लगाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि नारेबाजी करने वालों में कुछ अराजक तत्व शामिल थे, जिन्हें पकड़ कर लोगों ने उनकी धुनाई कर दी। असल में मंगलवार (1 मार्च, 2022) को शाहजहाँ के उर्स (दरगाह पर होने वाली ‘सूफी संतों’ की मृत्यु की बरसी) का मौका था और इस अवसर पर लोगों को ताजमहल में मुफ्त एंट्री की सुविधा दी गई थी। उर्स के अंतिम दिन तीसरे पहर में ये घटना हुई।

सुरक्षाकर्मियों ने भी भारत विरोधी नारा लगाने वालों को तुरंत पकड़ा और उनकी पिटाई की। ताजमहल में इस दिन कई पर्यटक पहुँचे और उधर जाने वाले रास्ते लोगों से भरे पड़े थे। भीड़ के कारण स्मारक के परिसर में पेअर रखने की भी जगह नहीं बची थी। इतनी भीड़ में सुरक्षाकर्मियों के लिए हैकिंग भी संभव नहीं थी। सुरक्षाकर्मियों ने इस काम में मदद के लिए वॉलंटियर्स भी लगाए थे, लेकिन भीड़ के सामने सब लाचार नजर आए। इसी बीच दो युवक देश विरोधी नारेबाजी करने लगे

सेन्ट्रल टैंक के पास एक युवक ने ‘भारत मुर्दाबाद’ का नारा लगा दिया। वो फिरोजपुर का रहने वाला है। CISF के जवान मौके पर ही मौजूद थे और उन्होंने उसे पकड़ कर उसकी पिटाई की। कुछ ही दूसरी पर एक अन्य युवक ने ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ का नारा लगा दिया। जवानों ने उसे भी जम कर धुना। असल में स्थिति ये थी कि CISF वाले इनकी पिटाई नहीं करते तो वहाँ मौजूद लोग ही उसकी जम कर पिटाई करते और कुछ भी हो सकता था। दोनों को हिरासत में ले लिया गया है। बताया जा रहा है कि एक व्यक्ति फरार भी है।

इस दौरान भीड़ इतनी बेकाबू हो गई कि पुलिस को लाठियाँ भी चटकानी पड़ी। ताजमहल के बाहर और अंदर इतनी भीड़ थी कि बच्चे खो जा रहे थे। कई बच्चों को रोते हुए देखा गया। सुरक्षाकर्मी सीटी बजा-बजा कर लोगों को समझा रहे थे। आरोपितों के खिलाफ शांति भंग करने की धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। ताजगंज पुलिस उन्हें ले गई है। आरोपितों में से एक सोहैल के अब्बा का नाम इदरीश है और और गालिबपुरा के नाई मंडी का रहने वाला है। इसी तरह 2019 में चादरपोशी के दौरान आए एक युवक ने उर्स के दौरान ही पाकिस्तान समर्थित नारेबाजी की थी।

केजरीवाल सरकार ने किसान आंदोलन के समय दर्ज हुए 17 मामले वापस लेने को दी मंजूरी, इसमें एक मामला लाल किला हिंसा का भी

केजरीवाल सरकार ने 2020-21 में हुए किसान आंदोलन के दौरान दिल्लीपुलिस की ओर से दर्ज किए गए 17 मामलों को वापस लेने की मंजूरी दे दी है। बता दें कि इन मामलों में गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा से जुड़ा हुआ एक मामला भी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने नवंबर 2020 से दिसंबर 2021 के दौरान दर्ज किए गए 54 मामलों में से 17 को वापस लेने का फैसला किया था। इन मामलों में सैकड़ाें की संख्या में प्रदर्शनकारियों और 25 ट्रैक्टरों के जरिए लाल किला पहुँचने का मामला भी है। जिसके चलते टिकट काउंटरों और सुरक्षा जाँच उपकरणों को नुकसान हुआ था।

जानकारी के अनुसार, अधिकारी ने बताया कि उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय द्वारा गृह मंत्री सत्येंद्र जैन को 31 जनवरी को भेजी गई मामलों से संबंधित फाइल को सोमवार को कानून विभाग की राय लेने के बाद मंजूरी दे दी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, 150-175 ट्रैक्टरों पर सवार होकर उत्तर प्रदेश के लोनी से दिल्ली में प्रवेश करने वाले किसानों के खिलाफ भी उत्तर-पूर्वी दिल्ली के ज्योति नगर पुलिस थाने में एक मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि उन किसानों ने पुलिसकर्मियों के कर्तव्यों में बाधा डाली और उन पर हमला किया था। यह मामला भी दिल्ली सरकार द्वारा वापस लिया गया है।

इसके अलावा अधिकतर मामले दिल्ली के सिंघू, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ एक साल तक चले किसान आंदोलन के दौरान कोविड-19 नियमों और दिशा-निर्देशों के उल्लंघन से संबंधित हैं।

गौरतलब है कि आंदोलनकारी किसानों ने संसद द्वारा पारित कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग करते हुए नवंबर 2020 में दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाल दिया था। वहीं मोदी सरकार द्वारा कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के बाद किसानों ने दिसंबर 2021 में आंदोलन खत्म कर दिया था। तब सरकार ने नवंबर 2020 से दिसंबर 2021 के बीच प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की संयुक्त किसान मोर्चा की माँग पर भी सहमति जताई थी।

आदिवासी लड़की को ले भागा 3 बच्चों का अब्बा आमिर: हिन्दुओं का प्रदर्शन, खंडवा में 2 महीने में ‘लव जिहाद’ का चौथा मामला

मध्य प्रदेश के खंडवा में ‘लव जिहाद’ की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अब तीन बच्चों का पिता आमिर एक आदिवासी लड़की को भगा ले गया। ये घटना शनिवार (26 फरवरी, 2022) की है। आदिवासी छात्रा को भगा ले जाने के विरोध में हिन्दू कार्यकर्ताओं ने खार-खालवा चौराहे पर चक्का-जाम कर के विरोध प्रदर्शन किया और बाजार को बंद रखने की अपील की। पुलिस ने विरोध प्रदर्शन के बाद आरोपित आमिर को हरदा से गिरफ्तार कर लिया है।

साथ ही प्रशासन ने आरोपितों के 6 अवैध अतिक्रमण को भी ध्वस्त किया। बताया जा रहा है कि आदिवासी इलाके में दो महीने में ‘लव जिहाद’ की 4 घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। इसीलिए, हिन्दू संगठनों ने आक्रोशित होकर खालवा नगर बंद का आह्वान किया। सुबह से ही लोगों ने बाजार में अपनी दुकानें नहीं खोलीं। हिन्दू संगठनों के बैनर तले शहर के आम लोगों ने भी अपना आक्रोश जताया। मंडी परिसर में आरोपित और उसके परिजनों ने अतिक्रमण कर रखा था।

लोगों ने पुलिस-प्रशासन को 4 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। दोपहर 12 बजे पुलिस ने काफी मान-मनव्वल के बाद लोगों को शांत कराया। इसके बाद आरोपित आमिर और उसके अब्बा सईद के कई अतिक्रमण हटाए गए। शाम 7 बजे तक पुलिस ने पूरे लाव-लश्कर के साथ उपमंडी में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूरी की। छात्रा के परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट शनिवार को दर्ज कराते हुए आमिर पर शक जताया था। पीड़िता MA की पढ़ाई करती है। हिन्दुओं ने आशा चौराहे पर विरोध प्रदर्शन किया।

हिन्दू आदिवासी छात्रा की उम्र 24 वर्ष बताई जा रही है। आरोप है कि आमिर ने लड़की के साथ बलात्कार भी किया है। इससे पहले खबर आई थी कि खंडवा में ही सरफराज नाम के एक व्यक्ति ने एक लड़की का बलात्कार किया, जो उसे बहन बुलाती थी। एक अन्य खबर में, प्रेमिका के इस्लाम कबूलने से इंकार करने पर तथाकथित प्रेमी दानिश खान उसे खंडवा स्टेशन पर छोड़कर फरार हो गया था। एक अन्य मामले में अरबाज ने हिंदू नाम विशाल बताकर 10वीं की छात्रा से दोस्ती कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म को अंजाम दिया था।