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‘शहीद-ए-आज़म’ भगत सिंह के परपोते ने पंजाब चुनाव में BJP को दिया समर्थन, कहा – ‘भय से निपटने के लिए इंकलाब लाना है’

पंजाब विधानसभा चुनावों के मद्देनजर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को शहीद भगत सिंह के परपोते यादवेन्द्र सिंह संधू का समर्थन मिला। वोटिंग से पहले उन्होंने फिरोजपुर निर्वाचन क्षेत्र से BJP प्रत्याशी राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी के पक्ष में लोगों से वोट करने को कहा। उन्होंने यह अपील वीडियो संदेश जारी करते हुए की।

वीडियो में संधू ने कहा, “मैं यादवेन्द्र। शहीद भगत सिंह का पोता। आप सबसे अपील करने आया हूँ। मेरा मानना है कि पूरा फिरोजपुर भगत सिंह का वारिस है। हमारा परिवार है और फिरोजपुर के अंदर भगत सिंह परिवार की आत्मा बसती है। फिरोजपुर की दर्दनीय हालात देखकर अब चुनावी क्रांति जो चल रही थी, उसमें जब मुझे पता चला गया कि राणा सोढी का नाम BJP द्वारा पारित किया गया है तो मैं अपने आपको रोक नहीं पाया, क्योंकि फिरोजपुर की दुर्दशा के बारे में, यहाँ पर किए जा रहे अत्याचारों के बारे में बताया जाता था। उसी के निदान के लिए मैं राणा सोढी के समर्थन में आया हूँ और चार दिन से यहाँ घूम रहा हूँ। लोगों के अंदर राणा सोढी के रूप में एक उम्मीद जगी है।”

यादवेन्द्र ने बताया, “जैसा कि मैंने बताया कि मेरा रिश्ता मेरे दादा जी कुलबीर सिंह, जो भगत सिंह के भाई हुए,वो खुद फिरोजपुर से विधायक रह चुके हैं। यहाँ तुड़ी वाली मंडी में हमारा घर रहा है। हमारे पिता जी स्वर्गीय बब्बर सिंह जी के काफी सहपाठी भी मिले। जो ये डर का और भय का माहौल है, उसका निदान करने के लिए और इंकलाब लाने के लिए राणा सोढ़ी जी को आप सब से भगत सिंह के परिवार के होने के नाते, और आपका अपना होने के नाते अपील करता हूँ कि 20 तारीख को ज्यादा तादाद में मतदान करें।” 

कौन है यादवेन्द्र सिंह?

गौरतलब है कि यादवेन्द्र सिंह भगत सिंह के बड़े भाई के पोते हैं। उनके पिता का नाम बब्बर सिंह संधू है। वह शहीद भगत सिंह ब्रिगेड नामक एक ऐसे संगठन के अध्यक्ष हैं जो देशभर में भगत सिंह के विचारों का प्रचार-प्रसार करता है। इस  संगठन के माध्यम से शहीद भगत सिंह के पोते शहीदों के परिजनों के अधिकारों की लड़ाई भी लड़ते हैं। उन्होंने कुछ समय पहले खुलासा किया था कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस के परिवार की ही तरह कॉन्ग्रेस की सरकार में खुफिया एजेंसियाँ शहीद भगत सिंह के परिवार की भी जासूसी करती थी। 

पंजाब चुनाव

बता दें कि पंजाब में आज 20 फरवरी 2022 को 117 विधानसभा क्षेत्रों के लिए मतदान हो रहे हैं। राज्य में 2.14 करोड़ मतदाता कुल 1304 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला कर रहे हैं। इस बीच खबर आई है कि चुनाव आयोग ने एक्टर सोनू सूद को मोगा में मतदान केंद्रों पर जाने से रोक दिया है। उनकी गाड़ी भी जब्त कर ली गई है। सोनू का आरोप है कि मतदान केंद्रों पर वोटरों को पैसे बाँटे जा रहे हैं।

‘मेरी दोस्त ने अपनी बेटी को हिजाब की जगह पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा’: कट्टरपंथियों ने दी गाली, कहा – ‘अल्लाह उस लड़की को अपना गुलाम बनाए’

कर्नाटक के स्कूल-कॉलेजों में मुस्लिम छात्रों द्वारा हिजाब पहन कर एंट्री के लिए हिंसा की गई। साथ ही ये मामला अदालत में भी चल रहा था। इसी दौरान लेखिका अम्ब्रीन जैदी ने लिखा, “मेरी एक दोस्त हिजाब पहनती है। उसकी बेटी नौवीं कक्षा में है। उसने आकर कहा कि कुछ लड़कियाँ हिजाब पहन कर इसके प्रति अपना समर्थन दिलाना चाहती हैं, इसीलिए वो लोग पहनेगी। मेरी दोस्त ने उसे दो थप्पड़ लगाए और पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा। उसने कहा कि हिजाब/बुर्का पर वो निर्णय ले सकती है, वो अपनी शिक्षा पूरी कर लेगी।”

इसके बाद कुछ लोगों ने उन्हें भला-बुरा कहना शुरू कर दिया। इस्लामी कट्टरपंथियों ने भी उन्हें गाली दी। शिफा शकीर नाम के एक व्यक्ति ने लिखा, “तुम्हें और तुम्हारी दोस्त को शर्म आनी चाहिए। तुम दोनों Sl** । होअल्लाह तुम दोनों से निपट लेगा। उस नौवीं कक्षा की छात्रा पर मुझे गर्व है। अल्लाह उसे गलत तरीके के पालन-पोषण से बचाए। अल्लाह उसे अपने प्रति आज्ञाकारी और अपना दास बनाए।”

बच्चों के हिजाब पहनने के विरोध में ट्वीट, इस्लामी कट्टरपंथियों ने दी गाली

सैयद फैजान मुस्तफा नाम के व्यक्ति ने अम्ब्रीन जैदी को रिप्लाई देते हुए लिखा, “हजरत सैय्यदा फातिमा जहरा के किरदार पर चलने और पर्दा करने वाली ख्वातीन किसी सल्तनत की नहीं बल्कि इस्लाम की शहजादियाँ कहलाती है।

एक इस्लामी कट्टरपंथी की रिप्लाई

मोहम्मद याकूब हुसैन नाम के यूजर ने लिखा, “ऐसा लगता है जैसे तुमलोग अपने बच्चों को सच बोलने और ईमानदारी बरतने जैसी अच्छी आदतें 18 वर्ष की उम्र होने के बाद ही सिखाती हो क्या? बहुत अच्छी पैरेंटिंग कर रहे हो। तुमसे भी यही उम्मीद थी।” इस पर याकूब से एक महिला ने पूछा कि क्या पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह देना ‘अच्छी आदत’ नहीं है।

ज़ाहिद दुर्रानी नाम के एक व्यक्ति ने इस पर निशाना साधते हुए लिखा, “और इसी के साथ अम्ब्रीन को हिन्दुओं ने अपने मोहल्ले में बुला कर सबसे अच्छा घर दे दिया रेंट पर। ठोको ताली।”

एडवोकेट आर सैयद नाम के व्यक्ति ने इन्हें ‘स्वार्थी अभिभावक’ बता दिया और कहा कि वो हिजाब को समर्थन देने वाले बच्चों के पिता होकर गर्व महसूस करेंगे। पत्रकार स्तुति ने लिखा कि इस ट्वीट से पता चलता है कि ‘भारतीय पैरेंटिंग’ के साथ क्या-क्या गलत है। एक अन्य पत्रकार समृद्धि सकुनिया ने दिल्ली पुलिस से कार्रवाई करने को कहा। हालाँकि, कई लोगों ने अम्ब्रीन के दोस्त की प्रशंसा भी की और कहा कि बच्चों को शिक्षा से भटकने नहीं देना चाहिए।

सोनू सूद की कार सीज, वोटिंग तक घर से बाहर नहीं निकलने का आदेश: कॉन्ग्रेसी बहन के लिए कर रहे थे वोटरों को प्रभावित

पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 (Punjab Assembly Election 2022) के लिए 20 फरवरी को मतदान शुरू हुआ। राज्य की 117 सीटों पर एक ही फेज में मतदान हो रहे हैं। इन्हीं में से एक सीट मोगा विधानसभा है। यहाँ से बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद (Sonu Sood) की बहन मालविका सूद (Malwika Sood) कॉन्ग्रेस की उम्मीदवार हैं। यहीं से सोनू सूद की गाड़ी सीज कर ली गई।

सोनू सूद लगातार अपनी बहन के लिए प्रचार कर रहे हैं। इस बीच अकाली दल की शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने (Election Commission) एक्टर का पीछा किया। उनके खिलाफ आरोपों को सही पाए जाने के बाद उनकी गाड़ी को सीज कर लिया गया है।

आयोग ने एक्टर को आदेश दिया है कि वो घर में रहें और वोटिंग होने तक घर से बाहर न निकलें। दरअसल, अकाली दल के पोलिंग एजेंट दीदार सिंह ने चुनाव आयोग से सोनू सूद के खिलाफ शिकायत की थी कि वो अपने बूथ से दूसरे बूथों पर जाकर लगातार मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिशें कर रहे हैं।

बहरहाल चुनाव पर्यवेक्षक ने उनकी गाड़ी को रास्ते में ही रोककर उसे जब्त कर थाना सिटी वन में खड़ा कर दिया और उन्हें दूसरी कार से उनके घर भेज दिया। हालाँकि, वोटरों को प्रभावित करने के आरोपों पर एक्टर का कहना है कि उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है।

मोगा जिले के पीआरओ प्रभदीप सिंह ने इस मुद्दे पर कहा, “सोनू सूद एक पोलिंग बूथ में घुसने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान उनकी कार को जब्त कर घर भेज दिया गया। घर से बाहर निकलने पर कार्रवाई होगी।”

गौरतलब है कि आज हो रहे मतदान के मद्देनजर सोनू सूद सुबह से ही बूथ पर जाकर लगातार लोगों को अपने पक्ष में करने की कोशिशें कर रहे थे। मोगा सीट से चुनावी समर में मालविका सूद का मुकाबला भाजपा के उम्मीदवार हरजोत कमल से है। इस बीच मोगा के डिप्टी कमिश्नर सोनू सूद के मामले की एसएसपी से रिपोर्ट तलब की है। साथ ही आरोप सही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई करने की भी बात कही है।

‘EVM में सपा का चुनाव चिह्न साइकिल गायब’: यूपी पुलिस ने सबूत देकर आरोपों को नकारा

उत्तर प्रदेश में विधानसभा (Uttar Pradesh Assembly Election 2022) के लिए तीसरे चरण का मतदान जारी है। इस बीच समाजवादी अपनी हार को देखते हुए आरोप लगाने लगी है। इससे लपकते हुए वामपंथी मीडिया भी दुष्प्रचार फैलाने में लग गया। अफवाह उड़ाई जा रही है कि EVM मशीन में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) का सिंबल साइकल का निशान ही नहीं है। हालाँकि, पुलिस ने इन आरोपों का खंडन किया है।

वामपंथी मीडिया पोर्टल न्यूजक्लिक के पत्रकार श्याम मीरा सिंह ने इस अफवाह को हवा देने के लिए रविवार (20 फरवरी) को लगभग सवा 11 बजे एक ट्वीट किया। इसमें कहा गया, “फ़र्रुख़ाबाद विधानसभा के बूथ-38 पर EVM में ‘सपा’ का चिह्न ही नहीं है। करहल विधानसभा के भागपुर गाँव में बूथ-244, 245 पर ग्रामीणों को वोट डालने से रोका जा रहा है। अमनपुर विधानसभा 101 बूथ नंबर 324 पर सपा के लिए मतदान करने पर रिस्पांस नहीं मिल रहा है।”

एक अन्य ट्वीट में श्याम मीरा ने कहा, “कन्नौज जिले की विधानसभा तिर्वा की बूथ- 296 पर EVM में साइकिल चिन्ह वाला बटन सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। कन्नौज जिले की विधानसभा छिबरामऊ के बूथ- 462, मौरा में पीठासीन अधिकारी पर EVM मशीनों की सील तोड़ के मतदान से पहले ही वोट डालने के प्रयास के आरोप।”

उत्कर्ष सिंह नाम के एक ट्विटर हैंडल ने भी ट्वीट कर यही आरोप लगाया। इस ट्वीट को द वायर की पत्रकार रोहिणी सिंह ने ट्वीट किया।

इसके बाद उत्तर प्रदेश की फतेहपुर पुलिस ने श्याम मीरा सिंह के ट्वीट का जवाब देते हुए इस घटना को झूठा बताया। पुलिस ने कहा, “थाना अमृतपुर क्षेत्र के ग्राम किराचन में बूथ संख्या 38 से सूचना प्राप्त हुई कि सपा का चुनाव चिह्न साइकल पर बटन दबाने पर चुनाव चिह्न दिखता नहीं है। इस सूचना पर संबंधित इंजीनियर व पीठासीन अधिकारी द्वारा बताया गया कि घटना असत्य है। गाँव का कुलदीप यादव पुत्र वीरेंद्र यादव उम्र 32 साल ने अपने मोबाइल नंबर ……. से सूचना दिया कि प्रत्याशी का फोटो नहीं दिख रहा है, लेकिन ईवीएम मशीन में प्रत्याशी का फोटो नहीं, बल्कि चुनाव चिह्न दिखता है। जाँच के उपरांत सूचना असत्य पाई गई। सुचारु रूप से निष्पक्ष मतदान बूथ संख्या 38 ग्राम कीराचन में चल रहा है।”

कर्नाटक बुर्का विवाद पर भड़कीं जायरा वसीम, कहा- ‘हिजाब च्वाइस नहीं, मुस्लिम लड़कियों की जिम्मेदारी है’

कर्नाटक हिजाब विवाद पर तमाम कट्टरपंथी एकजुट हो रहे हैं। इसी क्रम में दंगल फेम जायरा वसीम, जिन्होंने साल 2019 में अपने करियर को साइड करके इस्लाम की राह अपनाई थी, उन्होंने बुर्काधारी और हिजाब की माँग करने वाली लड़कियों का समर्थन किया है। जायरा का कहना है कि इस्लाम में हिजाब कोई पसंद-नापसंद की बात नहीं है बल्कि ये अनिवार्य है और मुस्लिम लड़कियों पर इसे पहनने की जिम्मेदारी है।

जायरा ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये मानते आना कि हिजाब नापसंद-पसंद की बात है, बिलकुल गलत जानकारी है। अपनी सहूलियत या फिर जाहिलता के कारण ये धारणा निर्मित हुई है। इस्लाम में हिजाब पसंद की बात नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है। इस तरह जब एक महिला हिजाब पहनती है तो वह उस अल्लाह द्वारा दिए गए जिम्मेदारी को पूरा करती है, जिसे वह प्यार करती है और खुद को उसे समर्पित कर दिया है। मैं भी हिजाब पहनती हूँ। मैं उस सिस्टम का विरोध करती हूँ, जहाँ महिलाओं को ऐसा करने से रोका जा रहा है। उन्हें परेशान किया जा रहा है।”

अपने पोस्ट में जायरा ने लिखा कि मुस्लिम महिलाओं के साथ होता भेदभाव और ऐसा तंत्र स्थापित करना जो शिक्षा व हिजाब के बीच निर्णय लेने को कहे, बिलकुल अन्याय है। जायरा ने आगे पोस्ट में और आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “आप  उन्हें एक विशेष पसंद को अपनाने पर मजबूर करने की कोशिश कर रहे हैं, जो आपके एजेंडे को चलाता है और फिर उनकी आलोचना करते हैं जबकि वे आपके द्वारा बनाए गए नियमों में कैद हैं।” पूर्व अभिनेत्री ने हिजाब के समर्थन में उतरीं लड़कियों के लिए कहा, “यह उन लोगों के साथ पक्षपात नहीं तो और क्या है जो यह जता रहे हैं कि वह उनके सपोर्ट में कार्य कर रहे हैं? ऊपर से यह दिखाना कि यह सब सशक्तिकरण के नाम पर हो रहा है, इससे बुरा कुछ नहीं है? यह बिल्कुल उसके उलट है। दुखद।”

गौरतलब है कि साल 2019 में जायरा वसीम ने बॉलीवुड से तौबा करते हुए इस्लाम की राह पर चलने का फैसला किया था। इसके बाद वह इस्लाम से संबंधी चीजें अपने सोशल मीडिया पर शेयर करने लगीं। पिछले साल उनकी एक तस्वीर सामने आई थी जिसमें वह पुल पर घूमती दिख रही थीं। इस फोटो में उनका चेहरा भी नहीं दिख रहा था। इसके अलावा साल 2020 में एक पोस्ट सामने आई थी जिसमें जायरा ने कुरान की आयतें लिखी थीं और टिड्डियों के खतरे को इस्लाम से जोड़ा था।

‘अपनी बेटी से मेरा निकाह कराओ’: पिता ने इनकार किया तो इम्तियाज ने पिस्टल निकाल कर गोली मार दी, फोन पर करता था परेशान

दिल्ली के दयालपुर में निकाह से मना करने पर इम्तियाज नाम के एक युवक ने लड़की के अब्बा शौकीन को गोली मार दी है। पीड़ित को घायल अवस्था में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। हमले के बाद इम्तियाज फरार होने की फिराक में था, लेकिन पड़ोसियों ने उसे पकड़कर बुरी तरह पीट दिया और पुलिस हवाले कर दिया। घटना 16 फरवरी (बुधवार) की है।

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक शौक़ीन कबाड़ का काम करते थे। हमलावर इम्तियाज उसके बेटे का चचेरा साला है। वह शौक़ीन की बेटी से ही निकाह की जिद लंबे समय से कर रहा था। वह अक्सर लड़की को फोन करके परेशान करता था। लड़की के घर वालों ने इम्तियाज को कई बार समझाया, लेकिन वो अपनी जिद पर अड़ा रहा। घटना के 1 दिन पहले 15 फ़रवरी को इम्तियाज ने लड़की के अब्बा को जान से मारने की धमकी भी दी थी।

घटना वाले दिन 16 फरवरी को इम्तियाज ने लड़की के घर जाकर उसके अब्बा को छत पर बात करने के बहाने बुलवाया। शौकीन के छत पर पहुँचते ही इम्तियाज ने शादी की अपनी जिद को लेकर बात शुरू क दी। इस पर लड़की के अब्बा ने इनकार कर दिया। इसके बाद गुस्से में आरोपित ने कमर में लगी पिस्टल निकाल ली और शौक़ीन की कनपटी पर रखकर गोली चला दी। सिर के निचले हिस्से में गोली लगते ही शौकीन जमीन पर गिर पड़े।

गोली मार कर इम्तियाज भागने लगा और सीढ़ियों पर फिसल कर गिर पड़ा। इससे वह घायल हो गया। फायरिंग की आवाज सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुँचे। उन्होंने इम्तियाज को बुरी तरह मारा। मौके पर पहुँची पुलिस ने इम्तियाज को कस्टडी में लेकर पूछताछ कर रही है।

‘मेरे शरीर और मन पर तुमसे ज्यादा उसका हक’: पति से छिप कर दूसरे पुरुष से बात करती थी पत्नी, केरल HC ने बताया ‘वैवाहिक क्रूरता’

केरल से अवैध संबंधों (Illegal Relationship) का मामला प्रकाश में आया है, जहाँ अपने पति को अनदेखा कर चोरी-छिपे एक महिला दूसरे पुरुष से बातें करती थी। इस मसले पर सुनवाई करते हुए केरल हाई कोर्ट (Kerala High Court) ने फैसला सुनाया कि अपने पति के द्वारा दी गई चेतावनी को अनदेखा करना वैवाहिक क्रूरता की तरह होता है। इसी के आधार पर कोर्ट ने पति के हक में तलाक देने का फैसला सुनाया।

इस मामले की सुनवाई केरल उच्च न्यायालय के जस्टिर कौसर एडप्पागथ ने की। उन्होंने अपने फैसले में ये भी कहा कि केवल समझौता क्रूरता की माफी के बराबर नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा, “पति की चेतावनी को अनदेखा करते हुए पत्नी द्वारा किसी दूसरे पुरुष को बार-बार फोन करना वो भी गलत समय में वैवाहिक क्रूरता की श्रेणी में आता है।” अदालत पीड़ित पति की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। जिसमें उसने फैमिली कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसने व्यभिचार और क्रूरता के आधार पर विवाह को रद्द करने की माँग को खारिज कर दिया था।

हाई कोर्ट में पीड़ित पति की पैरवी कर रहे वकील टीएम रमन कार्थी ने अदालत में सबूत के तौर पर बताया कि बीएसएनएल के सीडी प्रिंट के देखकर पता चलता है कि कि उनके मुवक्किल की पत्नी और किसी दूसरे व्यक्ति के बीच लगातार बातचीत होती थी, जिससे ये सिद्ध होता है कि दोनों के बीच अवैध संबंध थे। वहीं इस मुद्दे पर महिला के पति ने भी कहा है कि जब से उसकी शादी हुई थी, तभी से उसकी पत्नी के ‘विधर्मी कार्यों’ के कारण उसका वैवाहिक जीवन नर्क सा बन गया है। उसका आरोप है कि शादी से पहले वो जिस व्यक्ति के संबंध में थी, शादी के बाद भी वो उसी के संपर्क में है।

पत्नी की ओर से पेश अधिवक्ता एम.बी.संदीप ने इन दावों का खंडन किया और तर्क दिया कि वह दूसरे प्रतिवादी को कभी-कभार ही बुलाती थी, वह भी आधिकारिक उद्देश्यों के लिए।

तीन बार अलग हो चुके हैं दोनों

पति पत्नी के बीच कलह की शुरुआत 2012 में हुई उसके बाद से वो दोनों तीन बार अलग हो चुके हैं। लेकिन हर बार किसी न किसी समझौते के कारण फिर साथ आ जाते। पति ने कोर्ट में ये भी बताया कि उसने अपनी पत्नी और उस शख्स के बीच हुई अश्लील बातों को सुन लिया था। इसको लेकर जब उसने अपनी पत्नी से पूछताछ की तो उसने कहा कि उक्त शख्स का उसके शरीर और मन पर उससे अधिक अधिकार है।

‘मानव भक्षक तेंदुए…’: अहमदाबाद बम ब्लास्ट में कोर्ट की सख्त टिप्पणी – ये महिलाओं-बच्चों सबको खाते हैं, ‘सज़ा-ए-मौत’ ज़रूरी

गुजरात के अहमदाबाद में 2008 में हुए बम ब्लास्ट के मामले में स्पेशल कोर्ट ने 38 आतंकियों को मौत की सज़ा सुनाई है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इन आतंकियों को मौत की सज़ा ही मिलनी चाहिए, क्योंकि इन्हें खुला छोड़ने का अर्थ होगा ‘मनुष्य भक्षक तेंदुओं’ को लोगों के बीच छोड़ देना। अदालत ने शनिवार (19 फरवरी, 2022) को इस फैसले की प्रति मुहैया कराई। इस मामले में कोर्ट ने आतंकियों के खिलाफ सख्त टिप्पणियाँ भी की। अदालत ने इसे ‘दुर्लभतम में भी सबसे दुर्लभ’ मामला माना।

अदालत ने कहा कि ऐसे लोगों को समाज के बीच छोड़ देना वैसा ही होगा, जैसे किसी तेंदुए को सार्वजनिक रूप से खुला छोड़ देना। अदालत ने कहा कि ये मनुष्य भक्षक तेंदुए ही तो हैं, जो समाज के निर्दोष लोगों का भक्षण करते हैं – जिनमें बच्चे-बूढ़े, युवा और महिलाएँ और शिशु तक भी शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे लोग विभिन्न जाति और समुदायों के लोगों का भक्षण करते हैं। कोर्ट ने कहा कि देश में शांति और राष्ट्र के नागरिकों की सुरक्षा के लिए इन आतंकियों को ‘सज़ा-ए-मौत’ मिलनी आवश्यक है।

स्पेशल कोर्ट ने कहा कि देश में ऐसा कोई जेल नहीं है, जो इन्हें हमेशा के लिए रख सकता है। अदालत ने कहा, “पिछले 5 वर्षों में सुनवाई के दौरान ये कोर्ट के संज्ञान में आया है कि ये सभी आरोपित हर मामले में उच्च-स्तर के दक्ष हैं, शिक्षित हैं, जिनमें से कुछ प्रोफेसर, कम्प्यूटर विशेषज्ञ और डॉक्टर भी हैं। अन्य राज्यों में भी इन्होंने अपराध किए हैं, ऐसे में वहाँ भी मामले दर्ज हैं। ये आतंकी ऐसे हैं कि इनके बारे में सूचनाएँ जुटाना और अपराध की जड़ तक पहुँचना बहुत ही कठिन है।”

कोर्ट ने ये भी याद दिलाया कि कैसे इन आतंकियों ने ये योजना भी बना ली थी कि बम ब्लास्ट को अंजाम देने के बाद कैसे बच कर निकलना है। पुलिस की जाँच के बाद उन्हें भटकाने के लिए कैसी सूचनाएँ देनी हैं और क्या-क्या छिपाना है, ये सब इन आतंकियों ने पहले से तय कर लिया था। अदालत में अपना बचाव कैसे करना है, ये भी उन्हें पता था। बता दें कि देश में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में अपराधियों को ‘सज़ा-ए-मौत’ मिली है। अहमदाबाद में बम ब्लास्ट करने वाले 2022 गुजरात दंगे का ‘बदला’ लेना चाहते थे।

मुलायम सिंह से राजनीति का गुर सीखने वाले बघेल अब बेटे अखिलेश के लिए बने चुनौती: यूपी का करहल सीट क्यों है महत्वपूर्ण जानिए

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों (Uttar Pradesh Assembly Election 2022) के तीसरे चरण का मतदान आज रविवार (20 फरवरी) को जारी है। इस चरण प्रदेश का सबसे हॉट विधानसभा सीट करहल सुर्खियों में है। करहल विधासभा सीट पर समाजवादी पार्टी के मुखिया और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Samajwadi Party Chief and Ex-CM Akhilesh Yadav) चुनाव लड़ रहे हैं और उनके विरोध में भाजपा (BJP) के एसपी सिंह बघेल के नाम से विख्यात सत्यपाल सिंह बघेल (Satya Pal Singh Baghel) उम्मीदवार हैं।

अखिलेश यादव ने यह सीट बहुत सोच-समझकर चुना है। इस जगह पर उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने साल 1955 से 1963 तक पढ़ाई की थी और फिर जैन इंटर कॉलेज में लेक्चरर बन गए थे। साल 1963 से 1984 तक मुलायम सिंह ने इस कॉलेज में राजनीति विज्ञान पढ़ाया था। राजनीति में आने के बाद मुलायम सिंह यादव ने इसी भूमि को अपनी राजनीति की कर्मभूमि भी बनाया। वे मैनपुरी लोकसभा सीट से लंबे समय तक सांसद रहे। इसी मैनपुरी जिले में करहल विधानसभा सीट आता है।

आगरा से भाजपा सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री बघेल पर हाल ही में करहल में हमला हुआ था। कहा जाता है कि अखिलेश यादव के समर्थकों और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया था। इसके बाद सरकार ने उन्हें जेड कैटेगरी की सुरक्षा उपलब्ध कराई है। आज अखिलेश यादव के सबसे बड़ राजनीतिक दुश्मन बघेल कभी उनके पिता मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी थे।

पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के सुरक्षा अधिकारी

बात 1989 की है। उत्तर प्रदेश में पहली बार समाजवादी पार्टी की सरकार बनी थी और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने थे। उस वक्त उनकी सुरक्षा में यूपी पुलिस का एक 30 वर्षीय युवा सब इंस्पेक्टर तैनात हुआ। उसकी नई-नई शादी ही थी, लेकिन शादी के चार दिन बाद ही उसने अपनी ड्यूटी ज्वॉइन कर ली। दिन-रात मुलायम सिंह के आसपास रहने के कारण वे भी बघेल को पहचानने लगे और एक समय ऐसा भी आया, जब वह मुलायम सिंह के बेहद खास हो गए।

करीब डेढ़ साल तक ऐसे ही चलते रहा, लेकिन जून 1991 में मुलायम सिंह यादव की सरकार गिर गई और उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। मुलायम सिंह की जगह भाजपा के कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बन गए और बघेल उनकी सुरक्षा में लगे रहे। हालाँकि, वह मुलायम सिंह यादव के लगातार संपर्क में रहे। साल 1993 में अचानक बघेल में पुलिस विभाग से इस्तीफा दे दिया। तब मुलायम सिंह ने उन्हें समाजवादी पार्टी की यूथ ब्रिगेड का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। यहीं से बघेल के राजनीतिक जीवन की शुरुआत होती है।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत

साल 1993 में मुलायम सिंह यादव फिर से मुख्यमंत्री बने और वह उनके और करीब होते चले गए। औरेया के भटपुरा गाँव के गड़ेरिया (अनुसूचित जाति) आने वाले बघेल नौकरी छोड़कर यूथ ब्रिगेड में जमे रहे। इस दौरान अपना और अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्होंने मिलिट्री साइंस में पीएचडी किया और आगरा कॉलेज में नौकरी करने लगे और साथ में राजनीति भी।

समय गुजरता रहा और 1996 में लोकसभा चुनाव का वक्त आया। बघेल ने मुलायम सिंह यादव से टिकट माँगी, लेकिन उन्होंने बघेल को टिकट नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने मायावती (Mayawati) की पार्टी बहुजन समाजवादी पार्टी (BSP) ज्वॉइन कर ली। उन्होंने इटावा के जलेसर सीट से चुनाव भी लड़ा, लेकिन हार गए। 1998 में लोकसभा चुनावों में उन्होंने मुलायम सिंह यादव से संपर्क किया और इस बार उन्हें उसी जलेसर सीट से सपा का टिकट मिल गया। इस बार बघेल का भाग्य खुल गया था। सपा की टिकट पर बघेल भारी मतों से विजयी घोषित हुए। इसके बाद इसी सीट से वह 1999 और 2004 में चुनाव जीते।

साल 2010 में आपसी मतभेद के बाद सपा ने उन्हें पार्टी के निकाल दिया। इस बार वे फिर मायावती से मिले और मायावती ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया। उसके बाद आया साल 2014 का मोदी लहर, जिसमें बड़े-बड़े नेता धाराशायी हो गए। इस लहर में बघेल भी जीत नहीं पाए। साल 2015 में वह भाजपा में शामिल हो गए।

भाजपा में बघेल

भाजपा में शामिल होने के बाद वे पार्टी की टिकट पर साल 2017 में कानपुर के टुंडला से लड़े और जीते। उन्हें प्रदेश की योगी सरकार में मंत्री बनाया गया। उसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में आगरा से टिकट मिला और वे जीतकर केंद्र में मंत्री बने।

चार बार सांसद रहे एसपी सिंह बघेल करहल सीट से अखिलेश यादव के खिलाफ मैदान में हैं। बघेल के पक्ष में प्रचार के लिए मुख्यमंत्री योगी भी जा चुके हैं। बघेल के खड़ा होने के बाद अखिलेश के सुरक्षित मानी जा रही करहल सीट भी उनके लिए चुनौती बनती जा रही है।

व्यक्तिगत जीवन

सत्यपाल सिंह बघेल उर्फ प्रो. एसपी सिंह बघेल के पिता राम भरोसे सिंह मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में तैनात थे। इंदौर के यशवंतराव होल्कर अस्पताल में बघेल का जन्म हुआ। इसके साथ ही उनकी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक मध्य प्रदेश में ही हुई। उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा में सब इंस्पेक्टर के तौर पर भर्ती होने के बाद उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनाती मिली थी।

पंजाब में चुनाव से एक दिन पहले 4 खालिस्तानी आतंकी AK-47 के साथ गिरफ्तार, बैंक खाते में लाखों रुपए

हरियाणा की सोनीपत पुलिस ने खालिस्तानी आतंकी समूह से जुड़े 4 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इन सभी के पास से AK-47, पिस्टल व अन्य अवैध हथियार भी बरामद किए गए हैं। यह गिरफ्तारी सोनीपत के एक घर में पुलिस की दबिश के दौरान हुई। घटना शनिवार (19 फरवरी) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित पंजाब और आस-पास डर का माहौल बनाना और कुछ विशेष लोगों की हत्या करना चाहते थे। इन्हें खालिस्तान समर्थक समूहों से पैसे मिल रहे थे। आरोपितों के नाम सागर उर्फ़ बिन्नी, सुनील उर्फ़ पहलवान, जतिन उर्फ़ राजेश और सुरेंद्र हैं। इनके पास से एक AK-47, 56 गोलियाँ, 3 विदेशी पिस्टल बरामद हुई है।

सोनीपत के पुलिस अधीक्षक राहुल शर्मा के मुताबिक, “हमने मुखबिर की सूचना पर सोनीपत के एक घर में दबिश दी। हमने आरोपितों के बैंक खातों में लाखों रुपए जमा होने का पता लगाया है। आरोपित खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स, इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन के मुख्य नेताओं के सम्पर्क में थे। सम्पर्क सोशल मीडिया के माध्यम से किया जा रहा था। इन सभी ने पंजाब के उधमपुर के गाँव कलान में अवतार सिंह नाम के व्यक्ति की हत्या की बात कबूली है। ये हत्या खालिस्तानी नेताओं के इशारे पर हुई थी।”

आरोपितों पर UAPA एक्ट की सेक्शन 16, 17, 18, 20, 21, आर्म्स एक्ट के साथ साजिश रचने की धारा 120 बी के तहत कार्रवाई की गई है। यह FIR सोनीपत के मोहाना थाने में दर्ज हुई है। पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपितों ने अपने साथियों के नाम बताए हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।