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जामिया में एक ‘संघी’ की नियुक्ति पर मौत के बाद वाला मजहबी लाइन: दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष ने दिखाई हिंदू-घृणा

‘मिली गजट’ जैसे कट्टरपंथी अखबार के एडिटर और दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष जफरुल इस्लाम ने एक बार फिर अपनी हिंदू विरोधी मानसिकता का सार्वजनिक प्रदर्शन किया है। राज्यसभा द्वारा सांसद राकेश सिन्हा को जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के अंजुमन (सभा या कमिटी) में शामिल करने पर इस्लाम ने कटाक्ष किया है।

जफरुल इस्लाम ने राकेश सिन्हा की नियुक्ति से संबंधित राज्यसभा के उप-सचिव द्वारा जारी पत्र को ट्विटर पर साझा करते हुए लिखा, “संघी (RSS) विचारक को जामिया मिलिया अंजुमन (कोर्ट) का सदस्य बनाया गया। इन्ना लिल्लाही वा इन्ना इलाही राजिउन।”

जफरुल ने संघ विचारक को कमिटी में शामिल करने की बात लिखी साथ ही लिखा ‘इन्ना लिल्लाही वा इन्ना इलाही राजिउन’, जिसका अर्थ है ‘हम अल्लाह के हैं और हमें अल्लाह के पास ही जाना है’। जरुफल साफ तौर पर कहना चाह रहे हैं कि जामिया मिलिया इस्लामिया एक इस्लामिक विश्वविद्यालय है और यहाँ काम करने वाला भी मुस्लिम ही होना चाहिए, क्योंकि एक मुस्लिम अल्लाह का होता है और अल्लाह के पास ही जाता है।

दरअसल, 59 सदस्यीय अंजुमन (सभा) जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय का सबसे महत्वपूर्ण प्राधिकार है। इसमें कुलपति और विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोग शामिल होते हैं। इसके साथ ही केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के नाते इसमें लोकसभा के दो और राज्यसभा के एक सदस्य को अंजुमन में तीन साल के लिए शामिल किया जाता है। अंजुमन विश्वविद्यालय के नीतियों और कार्यक्रमों की समय-समय पर समीक्षा करती है और विश्वविद्यालय के सुधार और व्यवस्था के संबंध में सुझाव देती है।

केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के नाते सरकार नियमों से संबद्ध किसी को भी अपना प्रतिनिधि के रूप में भेज सकती है। ये सरकार का काम है, लेकिन जफरुल को आपत्ति है कि एक हिंदू और वो भी एक राष्ट्रवादी को मुस्लिम नाम वाले विश्वविद्यालय में क्यों भेजा गया।

ये तो एक विश्वविद्यालय है, जो केंद्रीय सरकार फंड पर चलता है। लेकिन मुस्लिम नाम होने के कारण जफरूल जैसे कट्टरपंथी विचारधारा के लोग इसे सिर्फ मुसलिमों के सुरक्षित मानते हैं। दूसरी ओर कुंभ जैसे धार्मिक आस्था वाले कार्यक्रम का प्रधान एक मुस्लिम को बना दिया गया था, जो अपनी कट्टरवादी विचारधारा के लिए भी कुख्यात है। नाम है आजम खान।

जब एक मुस्लिम बना था कुंभ मेला प्रभारी

उत्तर प्रदेश के तत्कालीन अखिलेश यादव की सपा सरकार में मंत्री आजम खान को कुंभ मेले का प्रभारी बनाया गया था। आजम उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और वो अच्छी तरह परिचित हैं कि कुंभ मेले में कितने लोग आते हैं और कब आते हैं। हालाँकि, कुंभ आयोजन के प्रमुख होने के नाते या फिर हिंदू आस्था के प्रति वैचारिक घृणा के कारण उन्होंने कुंभ मेला के आयोजन में विशेष सावधानी नहीं बरती। परिणाम ये हुआ कि जनवरी 2013 के कुंभ के दौरान मची भगदड़ में करीब 36 श्रद्धालुओं की जान चली गई थी।

तब दिखावे के तौर पर आजम खान ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनके इस्तीफे को अस्वीकार कर दिया था। अखिलेश यादव ने कहा था कि आजम खान ने पूरी गंभीरता के साथ काम किया था। हालाँकि, ये सत्य है कि आजम खान ने कुंभ आयोजन के लिए व्यवस्था के नाम पर कुछ नहीं किया था। उनकी उदासीनता के कारण रेलवे स्टेशन से लेकर कुंभ क्षेत्र तक अराजकता के हालात बन गए थे।

तब किसी ने किसी ने ये नहीं कहा था कि एक हिंदू धार्मिक आयोजन का मुखिया एक मुस्लिम को क्यों बनाया जा रहा है। आज जब सरकार अपना काम कर रही है तब जफरुल इस्लाम जैसे लोग जहर उगने का काम कर रहे हैं। जहरीले बोल बोलने का इतिहास रहा है जफरुल इस्लाम का।

कौन हैं जफरुल इस्लाम?

पिछले साल नवंबर में हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने वाले स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी के बचाव में जफरुल इस्लाम के ‘मिली गजट’ ने गोधरा ट्रेन हिंसा का समर्थन तक कर डाला था। मिली गजट ने लिखा था, “क्या मुनव्वर फारुकी ने इस तरह की टिप्पणी की कि अगर उनकी कार के नीचे एक कुत्ता भी आ जाता है तो वो दुःखी हो जाते हैं। इससे ज्यादा अमानवीयकरण क्या हो सकता है? क्या गोधरा और ऑशविच समान हैं? वाऊ, यहूदी ट्रेन में ठेले वालों और लोगों पर हमले कर रहे थे। साथ ही वो रेलवे स्टेशनों पर हमले कर के एक धार्मिक इमारत को गिराए जाने का जश्न मना रहे थे?” लोगों ने ‘मिली गैजेट’ से पूछा कि क्या हिन्दुओं को ज़िंदा जलाया जाना उसके लिए एक दुःख भरी घटना नहीं है?

मई 2020 में जफरुल इस्लाम ने ‘काफिरों’ को चेताते हुए कहा था कि कट्टर हिन्दुओं को शुक्र मनाना चाहिए कि भारत के मुस्लिमों ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के मुस्लिम एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे।

जाकिर नाइक को हीरो बताने वाले जफरुल इस्लाम ने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष रहने के दौरान पुलिस पर झूठा आरोप लगाया था कि CAA दंगों के आरोपितों को वह प्रताड़ित कर रही है। उस समय CAA को खूब हवा देने का काम जफरुल कर रहे थे और साथ ही पुलिस पर आरोप लगाकर आरोपितों के लिए सुरक्षा घेरा भी तैयार कर रहे थे। मथुरा में श्रीकष्ण मंदिर को लेकर भी वह हिंदुओं को नमक-हराम बता चुके हैं।

इंटरनेशनल क्रिकेटर रिद्धिमान साहा को पत्रकार ने दी धमकी, विकेटकीपर ने गांगुली-द्रविड़ पर उठाए सवाल

क्रिकेट करियर के खराब दौर से गुजर रहे भारतीय विकेटकीपर रिद्धिमान साहा ने खुद को धमकी मिलने का दावा किया है। इस दावे के समर्थन में उन्होंने व्हाट्सएप का एक स्क्रीनशॉट भी ट्वीट किया है। रिद्धिमान के मुताबिक एक जर्नलिस्ट ने उन्हें इंटरव्यू के लिए धमकी दी है।

ट्वीट किए गए स्क्रीनशॉट में लिखा गया है, “मेरे साथ इंटरव्यू करोगे? यह अच्छा रहेगा। उन्होंने (चयनकर्ताओं) ने मात्र एक ही विकेटकीपर चुना। बेस्ट कौन है? तुमने 11 पत्रकारों को चुनने की कोशिश की है, जो मेरे मुताबिक सही नहीं है। जो ज्यादा सहायता कर सके, उसको चुनो।”

कुछ देर बाद उसी पत्रकार ने फिर लिखा – “तुमने फोन नहीं किया। मैं इसे याद रखूँगा और अब कभी तुम्हारा इंटरव्यू नहीं करूँगा।”

इस स्क्रीनशॉट के साथ रिद्धिमान साहा ने लिखा, “भारतीय क्रिकेट के लिए मेरे तमाम योगदानों के बाद एक तथाकथित सम्मानित पत्रकार से मुझे इन चीजों का सामना करना पड़ रहा। जर्नलिज़्म समाप्त है।”

आपको बता दें कि तथाकथित पत्रकार द्वारा धमकी और टीम में विकेटकीपर के चयन के पीछे यह खबर है – श्रीलंका के खिलाफ 2 टेस्ट मैचों की सीरीज में साहा को शामिल नहीं किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए साहा सौरव गांगुली को जिम्मेदार मान रहे हैं।

रिद्धिमान साहा ने गांगुली से सवाल किया, “ये सब इतना जल्दी कैसे बदल गया? गांगुली ने मुझ से कहा था कि मुझे टीम इंडिया में जगह के लिए चिंता नहीं करनी चाहिए। जब तक मैं हूँ तब तक तुम भी रहोगे। बीते नवंबर में जब मैंने कानपुर में न्यूजीलैंड के विरुद्ध पहले टेस्ट में दर्द निवारक दवा लेते हुए नाबाद 61 रन बनाए, तो दादा (सौरव गांगुली) ने मुझे व्हाट्सएप पर बधाई दी थी।”

टेस्ट मैच की इस सीरीज में चेतेश्वर पुजारा, ईशांत शर्मा और अजिंक्य रहाणे को भी स्थान नहीं मिला है। ऋद्धिमान साहा ने एक पत्रकार वार्ता में राहुल द्रविड़ का भी नाम लिया। उन्होंने कहा, “टीम प्रबंधन ने मुझसे मेरे नाम पर विचार न करने के लिए कहा था। कोच राहुल द्रविड़ ने भी मुझे संन्यास लेने पर विचार करने के लिए कहा था। ये सब मैं तब तक नहीं बता सकता था, जब तक मैं भारतीय टीम का हिस्सा था।”

‘आजीवन कारावास नहीं, सबको फाँसी हो’: अहमदाबाद ब्लास्ट में अपने पिता और भाई को खोने वाले यश, मुश्किल से बची इनकी भी जिंदगी

26 जुलाई 2008 को 8 साल के यश व्यास अपने 10-11 साल के भाई रोहन और पिता दुष्यंत व्यास के साथ साइकिल चलाना सीखने के लिए घर से बाहर निकले। उन्होंने लगभग 2-3 घंटे साइकिल चलाई। शाम करीब 7:30-7:45 बजे किसी ने उनके पिता को फोन कर सिविल अस्पताल में इंतजार करने को कहा। यश को इसके बारे में ठीक से पता नहीं होता, लेकिन अहमदाबाद सिविल अस्पताल के कैंसर विभाग की प्रयोगशाला में काम करने वाले उनके पिता ने इंतजार किया। 10 मिनट बाद एक एम्बुलेंस आई। उनके पिता ने अपने दो बेटों को साइकिल के साथ इंतजार करने के लिए कहा और एम्बुलेंस में चेक करने चले गए। उसी एक धमाका हुआ।

ऑपइंडिया से बात करते हुए यश ने कहा, “मैं ठीक से नहीं बता सकता कि धमाका एंबुलेंस में हुआ था या वहाँ से गुजरने वाले वाहन में हुआ था, लेकिन विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि इसे दो किलोमीटर तक सुना जा सकता था। मेरा भाई साइकिल के साथ खड़ा था और वह इतना जल गया कि उसे पहचानना मुश्किल हो गया। मैं दूसरे रास्ते से भागा, क्योंकि मैं बहुत डरा हुआ था।”

दुष्यंत व्यास और रोहन व्यास

यश घायल अवस्था में अपने घर की ओर भाग रहे थे, लेकिन किसी छात्र या अस्पताल के कर्मी ने उन्हें देखा और अस्पताल में भर्ती कराया। यश ने बताया, “मैंने आखिरी बार अपने पिता को विस्फोट के दिन रात 8:30 बजे देखा था। वे उसे स्ट्रेचर पर ले जा रहे थे। उसके बाद मैं पूरी तरह बेहोश हो गया।” यश के अनुसार, उनके पिता के पैर बुरी तरह घायल हो गए थे और खून की गंभीर कमी के कारण उनकी मौत हो गई थी।

यश बताते हैं कि उन्हें सबसे पहले सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने कहा, “मोदी साहब ने मुझे सबसे अच्छे इलाज का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इलाज सुनिश्चित करने के लिए मुझे दुनिया के किसी भी हिस्से के किसी भी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए तैयार है। फिर मुझे अपोलो अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहाँ मैं तीन महीने तक आईसीयू में रहा और एक महीना आईसीयू के बिताया। अपोलो के डॉ श्रीकांत लगवंकर और डॉ ज्योतिंद्र कौर ने मेरा बहुत ख्याल रखा।”

यश ने कहा कि 1.62 करोड़ रुपये का बिल राज्य सरकार ने भरा। इसके अलावा परिवार को मुआवजा भी दिया गया। इस ब्लास्ट के दोषियों को हाल ही में दी गई मौत की सजा पर व्यास कहते हैं, “उन्हें बहुत पहले फाँसी दे दी जानी चाहिए थी। उन्होंने बेगुनाह लोगों की हत्या की है तो उन्हें क्यों बख्शा जाए। आजीवन कारावास उनके किसी काम का नहीं है।”

एक दशक से अधिक समय के बाद मिले न्याय की भावुक स्थिति उनकी आवाज़ में झलक रही थी। उन्होंने बताया, “मुझे कभी-कभी सुनने में कठिनाई होती है, क्योंकि विस्फोट की आवाज़ बहुत तेज़ थी।” उनके और उनकी माँ एवं दादी के लिए यह स्वीकार करना बहुत कठिन था कि उनका जीवन हमेशा के लिए बदल गया, लेकिन धैर्य बनाए रखे। उन्होंने अपने भाई और पिता को अपनी आँखों के सामने मरते देखा था।

इन सब घटनाओं को अपनी आँखों के सामने होते देखने के बावजूद यश ने हिंसा का रास्ता अपनाने के बजाय खुद को शिक्षित करने का विकल्प चुना। यश बी.एस-सी. (विज्ञान में स्नातक) कर रहे हैं और रसायन विज्ञान में परास्नातक कर ‘प्रयोगशाला’ जैसी किसी जगह पर नौकरी करना चाहते हैं।

इस बीच जमीयत उलमा-ए-हिंद ने दोषियों को मौत की सजा का विरोध किया है और कहा है कि जरूरत पड़ने पर वह हाईकोर्ट और यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ेगा।

अहमदाबाद की एक विशेष अदालत ने 18 फरवरी 2022 को 2008 के अहमदाबाद बम विस्फोट मामले में सजा की घोषणा की। अपने फैसले में अदालत ने इस मामले में दोषी ठहराए गए 49 आरोपियों में से 38 दोषियों को मौत की सजा सुनाई, जबकि शेष 11 को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। कानून के अनुसार, मौत की सजा की पुष्टि गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा की जानी है। इसके पहले भी जमीयत उलमा-ए-हिंद इस्लामिक आतंकियों को कानूनी सहायता पहुँचाता रहा है।

16 जिले, 59 सीटें, 49 पर BJP: उत्तर प्रदेश में तीसरे चरण का मतदान, चाचा-भतीजे की किस्मत का भी होगा फैसला

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Eelection 2022) के लिए चल रहे मतदान के दो चरण सफलता पूर्वक संपन्न हो चुके हैं और शनिवार (19 फरवरी, 2022) को तीसरे चरण के मतदान के लिए चुनाव प्रचार भी रुक गया है। रविवार (20 फरवरी 2022) को राज्य के 16 जिलों की 59 सीटों पर वोटिंग होगी। कल होने वाले मतदान में 28 सीटें यादव बहुल सीटें मानी जाती हैं। इसी कारण से इस बेल्ट को मेनस्ट्रीम मीडिया द्वारा ‘यादव बेल्ट’ भी कहा जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में सत्तारूढ़ योगी सरकार ने पिछले चुनाव में इस बेल्ट की 59 में से 49 सीटों पर जीत दर्ज की थी। जबकि, समाजवादी पार्टी को करारा झटका लगा था। वो ‘यादव बेल्ट’ में भी केवल 8 सीटें ही जीतने में सफल हो पाई थी। वहीं कॉन्ग्रेस और बसपा के खाते में एक-एक सीट गई थी।

तीसरा चरण राजनीतिक लिहाज से इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव करहल सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और तीसरे चरण में यहाँ भी मतदान होने हैं। उनके खिलाफ केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं। इसके अलावा शिवपाल यादव भी जसवंतनगर सीट से चुनावी मैदान में हैं और यहाँ भी इसी चरण में मतदान होने हैं। करहल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई बड़े नेता प्रचार कर चुके हैं। अब कल होने वाली वोटिंग में इनकी किस्मत का फैसला होगा।

इस बीच राजनीतिक पार्टियों द्वारा मतदाताओं में शराब, भाँग इत्यादि बाँटें जाने की घटनाओं से बचने के लिए प्रशासन ने इस तरह की सभी दुकानों को बंद करा दिया है। उल्लेखनीय है कि 2012 के चुनाव में इन्हीं 16 जिलों में सपा ने 37 सीटें जीतकर सत्ता का स्वाद लिया था। हालाँकि, 2017 में भाजपा की आँधी में सपा का यह किला बुरी तरह से बर्बाद हो गया और वो इकाई के आँकड़े पर सिमट गई।

इन सीटों पर होने हैं मतदान

गौरतलब है कि जसराना, फिरोजाबाद, रसूलाबाद अकबरपुर रनिया, सिकन्दरा, झांसी नगर, मऊरानीपुर सु., भोगनीपुर, बिल्हौर सु., शिकोहाबाद, सिरसागंज, हाथरस सु., सादाबाद, सिकन्दराराऊ, टूण्डला सु., कासगंज, अमापुर, पटियाल, अलीगंज, एटा, मारहरा, जलेसर सु., मैनपुरी, भोगांव, किशनी सु., करहल, कायमगंज सु., अमृतपुर, फरूखाबाद, भोजपुर, छिबरामऊ, तिर्वा, कन्नौज सु., जसवंतनगर, इटावा, भरथना सु, बिधुना, दिबियापुर, औरय्या सु., बिठूर, कल्याणपुर, गोविन्दनगर, सीसामऊ, आर्यनगर, किदवईनगर, कानपुर कैण्ट, महराजपुर, घाटमपुर सु., माधौगढ़, कालपी, उरई सु., बबीना, गरौठा, ललितपुर, महरौनी सु., हमीरपुर, राठ सु., महोबा और चरखारी।

गोस्वामी तुलसीदास के गाँव में मौजूद है उनके हाथ से लिखी रामचरितमानस, 400 वर्षों से ग्रंथ की सेवा कर रहा रामाश्रय का परिवार

भारत में इस्लामी शासन के दौरान जब लोग रामायण को भूल रहे थे, तब गोस्वामी तुलसीदास ने सरल भाषा में ‘रामचरितमानस’ की रचना कर के उत्तर भारत के घर-घर में रामकथा को पुनर्जीवित किया। बता दें कि इसकी रचना 966 दिन में पूरी की गई थी। तुलसीदास ने अयोध्या और वाराणसी से लेकर चित्रकूट सहित उन उन सभी स्थानों का दौरा भी किया था, जहाँ-जहाँ से ये कथा जुड़ी हुई है। इन जगहों पर आज भी रामायण काल के बताए जाने वाले कई साक्ष्य मौजूद हैं।

गोस्वामी तुलसीदास का पैतृक गाँव उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले का राजापुर है। वहाँ उनके द्वारा हस्तलिखित रामचरितमानस आज भी मौजूद है। सावन के महीने में इसके दर्शन का विशेष प्रभाव माना जाता है। फ़िलहाल रामाश्रय इसके ‘सेवक’ हैं। ‘आज तक’ की खबर के अनुसार, रामाश्रय ने बताया कि 76 वर्ष की उम्र में गोस्वामी तुलसीदास ने इस अनमोल कृति की रचना की थी। अब इनमें से सिर्फ अयोध्या कांड ही बचा है। बाकी का भाग विलुप्त हो गया है।

नीचे संलग्न की गई तस्वीर में आप गोस्वामी तुलसीदास की लिखावट को देख सकते हैं। रामाश्रय का दावा है कि इस मूल कृति को पढ़ने और समझने वाले वो अब एकमात्र व्यक्ति हैं। उन्होंने बताया कि वो तुलसीदास के शिष्यों की 11वीं पीढ़ी में आते हैं और 500 वर्षों से उनका परिवार इस ग्रन्थ की सेवा करता आ रहा है। उन्होंने बताया कि 400 वर्षों में कई अक्षरों के लिखने के तरीके में बदलाव आया है और पिछले 50 साल में ही 5 अक्षर बदल गए हैं।

गोस्वामी तुलसीदास कृत ‘रामचरितमानस’ की हस्तलिखित मूल कृति

बता दें कि रामचरितमानस की इस मूल कृति को भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित रखने के लिए जापानी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। जहाँ-जहाँ से कागज़ हट गए थे, वहाँ विशेष जापानी लेप लगा कर जोड़ा गया है। हर वर्ष श्रावण (सावन) के महीने में शुक्ल पक्ष सप्तमी को तुलसीदास की जयंती के अवसर पर यहाँ मेला लगता है। राजापुर कस्बे को अब तहसील का दर्जा दिया गया है। सन् 1554 में यमुना तट पर जन्मे तुलसीदास ने 126 वर्ष की उम्र में 1680 ईस्वी में देह-त्याग किया था।

कर्नाटक बुर्का विवाद: मैसूर में हिजाब वाली जिद्द को कॉलेज से मिली परमिशन, तुमकुर में 30 लड़कियों पर केस दर्ज

कर्नाटक में बुर्का विवाद के तूल पकड़ने के बाद कहीं इसका विरोध हो रहा है तो कहीं इसको समर्थन दिया जा रहा है। इस बीच कुछ कॉलेज अब भी अपने संस्थान में ड्रेस कोड के नियम पर स्पष्ट हैं और कुछ जगह ऐसी सामने आने लगी है जहाँ हिजाब के साथ क्लास में बैठने की जिद्द करने वाली छात्राओं की बात मान ली गई है।

मैसूर के कॉलेज में मिली हिजाब को अनुमति

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक के मैसूर में एक निजी कॉलेज ने शुक्रवार को अपना यूनिफॉर्म कोड रद्द करते हुए मुस्लिम छात्रों को हिजाब के साथ कक्षाओं में बैठने की इजाजत दी। मैसूर के डीडीपीयू डीके श्रीनिवास मूर्ति ने बताया कि शुक्रवार को 4 छात्राओं ने बिना हिजाब के कक्षाओं में बैठने से इनकार कर दिया था। इसके बाद वह प्रदर्शन करने लगे और कुछ संगठन भी उन्हें समर्थन देने लगे। जब उन्होंने कॉलेज का दौरा किया और इस संबंध में चर्चा की तो कॉलेज का फैसला आया कि वो यूनिफॉर्म कोड के नियम को रद्द करते हैं। मैसूर की तरह कोडागु में मदिकेरी के फील्ड मार्शल केएम करियप्पा कॉलेज में भी मुस्लिम छात्रों ने कैंपस में प्रवेश करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि जब तक लड़कियों को हिजाब पहनकर अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी तब तक वो कैंपस में ही नहीं आएँगे।

कॉलेजों का बुर्के/हिजाब पर स्पष्ट रुख

बता दें कि कर्नाटक में जहाँ कई जगह मुस्लिम छात्राओं की जिद्द के बाद कॉलेजों के बाहर भारी प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं कुछ जगह ऐसी हैं जहाँ पर प्रशासन, विवाद बढ़ने के कारण छुट्टी के ऐलान कर रहा है और छात्राओं के विरुद्ध कार्रवाई हो रही है।

जैसे जिदेकल्लू के गवर्नमेंट फर्स्ट ग्रेड कॉलेज में तीन छात्रों ने हिजाब को हटाने से इनकार कर दिया था, ऐसे में मामले के तूल पकड़ने पर कॉलेज की ओर से छुट्टी का ऐलान किया गया। ऐसे ही दावणगेरे जिले के हरिहर स्थिति एसजेवीपी कॉलेज में भी हिजाब पहनकर कॉलेज आने वाली लड़कियों को प्रशासन ने प्रवेश देने से मना कर दिया। बेलगावी के विजय पैरामेडिकल कॉलेज में भी कथिततौर पर अनिश्चित समय कर छुट्टी का ऐलान कर दिया गया है। बल्लारी के सरला देवी कॉलेज में भी लड़कियों को ऐसे मजहबी वस्त्र पहनने से मना किया गया है जो शांति, सद्भावना और कानून व्यवस्था को बिगाड़ें। कोपल जिले के गंगावठी कॉलेज में भी छात्रों को कॉलेज में प्रवेश देने पर मनाही हो गई है।

हिजाब की माँग करने वाली 30 छात्राओं पर FIR

उक्त कॉलेजों की तरह तुमकुर में भी गर्ल्स एम्प्रेस गवर्नमेंट पीयू कॉलेज में छात्राएँ हिजाब के साथ क्लास में बैठने की माँग कर रही थीं, लेकिन कॉलेज के प्रिंसिपल ने कॉलेज नियमों से हटकर माँग करने की जिद्द को लेकर तुमकुर सिटी पुलिस में अपनी कंप्लेन दी और पुलिस ने मामले पर एक्शन लेते हुए 30 के ख़िलाफ़ एफआईआर कर ली। बताया जा रहा है कि 30 छात्राओं में वो लड़कियाँ भी शामिल हैं जिन्होंने 17 और 18 फरवरी को हिजाब नियम के विरुद्ध हंगामा किया था।

58 छात्राओं को किया गया सस्पेंड?

इसी प्रकार कर्नाटक शिवमोगा जिले में 58 छात्राओं को सस्पेंड किए जाने की बात भी सोशल मीडिया पर सामने आई है। बताया गया था कि इन 58 छात्राओं को इनके कॉलेज ने इसलिए सस्पेंड किया क्योंकि ये हिजाब पहनने की माँग कर रही थीं। हालाँकि स्कूल के प्रिंसिपल का कहना है कि उन्होंने छात्राओं को मौखिक तौर पर सस्पेंशन के लिए डराया था, उन्हें हकीकत में सस्पेंड नहीं किया था।

भगवा शॉल, स्कार्फ, हिजाब या फिर धार्मिक झंडे के इस्तेमाल पर प्रतिबंध

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले इस पूरे मामले पर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, हज और वक्फ विभाग के सचिव मेजर मणिवन्नन पी की ओर से एक पत्र जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में सभी छात्रों को, उनके धर्म या विश्वास की परवाह किए बिना क्लास के अंदर भगवा शॉल, स्कार्फ, हिजाब या फिर धार्मिक झंडे के इस्तेमाल पर रोक लगा दिया था। इस संबंध में कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र की चेतावनी के बाद यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने 16 फरवरी को स्कूल खुलने के साथ ही सख्त हिदायत दी थी कि अब कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। इसके चलते पुलिस को अंतरिम आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था।

‘राज्यसभा नहीं देने पर आरोप लगा देते हैं’: अब CM केजरीवाल के समर्थन में उतरे राकेश टिकैत, कुमार विश्वास पर लगा दिया बड़ा आरोप

डॉ कुमार विश्वास द्वारा अरविंद केजरीवाल को खालिस्तान का समर्थक बताने के बाद अब भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत केजरीवाल के सपोर्ट में उतर आए हैं। टिकैत ने कहा है कि अगर कुमार विश्वास को आम आदमी पार्टी से राज्यसभा का टिकट मिल जाता तो शायद वो ये आरोप नहीं लगाते।

समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में राकेश टिकैत ने कहा, “वो आंदोलनकारी तो हैं। लेकिन इस तरह के नहीं लगते। कुमार विश्वास तो इनकी पार्टी में था। इन दोनों के बीच राज्यसभा पर कुछ रोड़ा हुआ था। अगर राज्यसभा मिल जाती तो बढ़िया था। राज्यसभा नहीं दिए तो फिर आरोप लगा देते हैं। इसलिए इस तरह का मामला तो नहीं लगता।”

गौरतलब है कि हाल ही में कवि कुमार विश्वास ने केजरीवाल को लेकर कहा था, “उसने (केजरीवाल ने) मुझसे ऐसी भयानक बातें बोली हैं जो पंजाब में सभी को पता है। एक दिन जब मैंने उससे 2020 के जनमत संग्रह के बारे में बात की तो वो कहता है कि तू चिंता मत कर एक दिन मैं या तो स्वतंत्र सूबे का मुख्यमंत्री बनूँगा या फिर स्वतंत्र राष्ट्र (खालिस्तान) का पहला प्रधानमंत्री बनूँगा। जब मैंने बताया कि इस रेफरेंडम को आईएसआई से लेकर दुनिया भर के अलगाववादी तत्व फंडिंग कर रहे हैं तो उन्होंने मुझे चिंता नहीं करने को कहा।”

इसके जवाब ने सीएम केजरीवाल ने अपने ‘विकास कार्यों’ को गिनाते हुए खुद को ‘स्वीट टेररिस्ट’ करार दिया था। इसका जवाब देते हुए कुमार विश्वास ने कहा था, “केजरीवाल बड़े ही आत्मविश्वास के साथ कोई भी सफेद झूठ बोलने में माहिर हैं। ऐसी सूरत बना के ये सिद्ध करते हैं कि पूरी दुनिया इनके पीछे पड़ी है। मैं ये पूछना चाहता हूँ कि भाई आपको तो किसी ने आतंकी नहीं कहा। ये देश को बताइए कि क्या पिछले चुनाव में आपके घर पर आतंकी संगठनों से सहानुभूति रखने वाले लोग आते थे या नहीं? जब मैंने इस पर आपत्ति जाहिर की थी तो मुझे पार्टी की पंजाब की बैठकों से बाहर कर दिया गया था।”

‘मोदी है तो मुमकिन है’: अपहरण के बाद तालिबान के धर्मांतरण का शिकार होते-होते बचे थे निधान सिंह सचदेवा, PM को दिया धन्यवाद

अफगानिस्तान (Afghanistan) में तालिबान (Taliban) के कब्जे के बाद वहाँ से भारत लाए गए अफगान सिखों का दल शनिवार (19 फरवरी, 2022) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला। इसी क्रम में पिछले साल अफगानिस्तान से तालिबान के चंगुल से बचाकर लाए गए सिख निधान सिंह सचदेवा (Nidan Singh Sachdeva) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का धन्यवाद किया। उनके अलावा भी कई सिखों ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए। लोगों ने कहा कि मोदी हैं तो मुमकिन है।

निदान सिंह सचदेवा ने कहा, “मुझे एक गुरुद्वारे से तालिबान द्वारा अपहरण कर लिया गया था। उन्होंने हमें भारतीय जासूस के रूप में सोच लिया था, वे चाहते थे कि हम कन्वर्ट हो जाएँ। हमने पीएम मोदी को धन्यवाद दिया और भारत सरकार की मदद से खुश हैं। हमें बस आश्रय और राष्ट्रीयता की आवश्यकता है।” वहीं एक अन्य सिख ने पीएम मोदी धन्यवाद करते हुए कहा कि मोदी जी जो कहते हैं वो करते हैं। उन्हीं के कारण न केवल हम लोग अफगानिस्तान से लाए गए। बल्कि गुरुग्रंथ साहिब, भगवद गीता और रामायण जैसे पवित्र पुस्तकों को भी लाया गया।

वहीं एक अन्य सिख व्यक्ति ने कहा कि हमारी काफी समस्याएँ सुलझाई जा चुकी है, जैसे सीएए का मुद्दा हो। उन्होंने कहा कि जब से बीजेपी की सरकार केंद्र में आई है, उसने हमारे लिए काफी काम किए हैं। लोगों ने कहा कि अफगानिस्तान के हिंदू, सिखों के अलावा भी वहाँ के मुस्लिम भी पीएम मोदी को काफी पसंद करते हैं। पीएम मोदी ऐसे कड़क फैसले लेते हैं, जिनसे सभी का भला होता है।

कौन हैं निधान सिंह सचदेवा

गौरतलब है कि निधान सिंह सचदेवा अफगानिस्तानी मूल के भारतीय सिख हैं। जिनका परिवार 1990 के दशक से भारत में रह रहा है। अफगानिस्तान में जून 2021 में उनका उस वक्त अपहरण कर लिया गया था, जब चमकनी स्थित थाला श्री गुरु नानक साहिब गुरुद्वारा में थे। वो अब सीएए के तहत भारत की नागरिकता पाने के पात्र हैं।

कुमार विश्वास को केंद्र ने दी Y-कैटेगरी सुरक्षा, IB की इनपुट्स के बाद उठाया कदम: ‘केजरीवाल-खालिस्तान कनेक्शन’ पर किया था खुलासा

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने कवि कुमार विश्वास को Y-कैटेगरी सुरक्षा देने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार ने ‘आसूचना ब्यूरो (IB)’ के कहने पर ये निर्णय लिया है। हाल ही में उन्होंने बताया था कि कैसे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पंजाब का मुख्यमंत्री बनने के लिए खालिस्तानी संगठनों का समर्थन लेने के लिए भी तैयार थे। AAP के संस्थापक सदस्य रहे कुमार विश्वास को ‘केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF)’ द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाएगी। चौबीसों घंटे 4 ‘पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर्स (PSOs)’ उनकी सुरक्षा में तैनात रहेंगे

इससे पहले खबर आई थी कि विभिन्न इनपुट्स के आधार पर डॉ कुमार विश्वास की सुरक्षा की समीक्षा की जा रही है। याद दिला दें कि कुमार विश्वास ने हाल ही में कहा था, “उसने (केजरीवाल ने) मुझसे ऐसी भयानक बातें बोली हैं जो पंजाब में सभी को पता है। एक दिन जब मैंने उससे 2020 के जनमत संग्रह के बारे में बात की तो वो कहता है कि तू चिंता मत कर एक दिन मैं या तो स्वतंत्र सूबे का मुख्यमंत्री बनूँगा या फिर स्वतंत्र राष्ट्र (खालिस्तान) का पहला प्रधानमंत्री बनूँगा। जब मैंने बताया कि इस रेफरेंडम को आईएसआई से लेकर दुनिया भर के अलगाववादी तत्व फंडिंग कर रहे हैं तो उन्होंने मुझे चिंता नहीं करने को कहा।”

इसके जवाब ने सीएम केजरीवाल ने अपने ‘विकास कार्यों’ को गिनाते हुए खुद को ‘स्वीट टेररिस्ट’ करार दिया था। इसका जवाब देते हुए कुमार विश्वास ने कहा था, “केजरीवाल बड़े ही आत्मविश्वास के साथ कोई भी सफेद झूठ बोलने में माहिर हैं। ऐसी सूरत बना के ये सिद्ध करते हैं कि पूरी दुनिया इनके पीछे पड़ी है। मैं ये पूछना चाहता हूँ कि भाई आपको तो किसी ने आतंकी नहीं कहा। ये देश को बताइए कि क्या पिछले चुनाव में आपके घर पर आतंकी संगठनों से सहानुभूति रखने वाले लोग आते थे या नहीं? जब मैंने इस पर आपत्ति जाहिर की थी तो मुझे पार्टी की पंजाब की बैठकों से बाहर कर दिया गया था।”

चुनौतियों से भरे कच्छ के हरामी नाले से पकड़ी गईं 7 और पाकिस्तानी नौकाएँ, अब तक BSF ने जब्त की 18 नावें

गुजरात (Gujrat) के कच्छ स्थित भारत पाकिस्तान की सीमा के बीच स्थित सर क्रीक (हरामी नाला) (Harami Nala) से एक बार फिर से पाकिस्तानियों के घुसपैठ करने की आशंकाएँ प्रबल हो गई हैं। यहाँ से सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने 18 फरवरी 2022 को मछली पकड़ने वाली 7 पाकिस्तानी नौकाओं को बरामद किया है। इसको लेकर BSF के गुजरात फ्रंटियर के इंस्पेक्टर जनरल जीएस मलिक ने कहा कि ये सात नावें पिछले सप्ताह घुसपैठ करने वाली 22 नावों में से ही हैं।

देश गुजरात की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले सप्ताह बीएसएफ को 22 पाकिस्तानी नावों में 11 मिली थीं, जिन्हें सुरक्षा बलों ने अपने कब्जे में ले लिया था। इन सात नावों को मिलाकर जब्त की गई कुल नावें 18 हो गई हैं। इस ऑपरेशन को बीएसएफ, नेवी और एयरफोर्स ने मिलकर पूरा किया था। इन नावों से खाने के सामग्री और सड़ी हुई मछलियों को बरामद किया है।

हरामी नाला और इसका विवादित इतिहास

हरामी नाला गुजरात के कच्छ को पाकिस्तान से अलग करने वाला एक चैनल है। इसका यह नाम कथित तौर पर इसकी उन भौगोलिक विशेषताओं के कारण रखा गया है, जिससे यह पाकिस्तान से आतंकियों और घुसपैठियों को आने का आसान सा मार्ग देता है। इस नाले में बड़ी संख्या में कीमती मछलियाँ पाई जाती है, जिसकी लालच में आए दिन पाकिस्तानी यहाँ पर घुसपैठ करते हैं। भारत से वियान क्रीक उत्तर दिशा में घूमकर पाकिस्तान में जाती है औऱ फिर यह पूर्व की तरफ मुड़ जाती है औऱ भारत में आ जाती है। यही वो प्वाइंट है, जिसे हरामी नाला कहते हैं। हालाँकि, यहाँ से यह नाला दो धाराओं में बँटकर एक पाकिस्तान की सीमा में चला जाता है। इसी के कारण पाकिस्तान से घुसपैठ आसान हो जाती है।

गुजरात के भुज क्षेत्र में हरामी नाले को सर क्रीक के नाम से जाना जाता है। यह 22 किलोमीटर लंबा और 8 किलोमीटर चौड़ा उथले पानी का समुद्री इलाका है। यह पूरी तरह से दलदली क्षेत्र है जो कि सालभर नौकायन के लायक रहता है। सर क्रीक को लेकर लंबे समय से भारत पाकिस्तान के बीत विवाद है। पाकिस्तान इस पर अपना दावा करता है। हालाँकि, संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत भारत इस मसले पर सही है।

लाल रेखा अंतर्राष्ट्रीय सीमा है जिसे अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार भारत द्वारा मान्यता प्राप्त है। साभार: IQ YouTube

गौरतलब है कि सर क्रीक (हरामी नाला) का दलदली क्षेत्र सीमा किसी भी आर्म्ड फोर्स के लिए बेहद चुनौती भरा है। बावजूद इसके बीते 75 सालों से बीएसएफ इसकी सफलतापूर्वक सुरक्षा करता आ रहा है। देश की आजादी से पहले कच्छ के माहाराजा राव साहिब के कंट्रोल में था। वहीं इसकी सीमाएँ सिंध से लगती थीं, जो आज पाकिस्तान का इलाका है।

साभार: विकीपीडिया

दोनों राज्यों के बॉर्डर्स का निर्णय करने के लिए वर्ष 1914 बॉम्बे गवर्नमेंट रिजोल्यूशन पास किया गया। जिसके पैरा नंबर 9 औऱ 10 का हवाला देते हुए पाकिस्तान पूरे क्रीक पर अपना अधिकार जताता है। जबकि भारत थालवेग्स थ्योरी का पालन करता है, जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जल क्षेत्रों की सीमाओं को निर्धारित करता है। इसके मुताबिक, नौवहन योग्य जल क्षेत्र होने पर जल क्षेत्र में दोनों देशों की सीमाओं को माना जा सकता है। ऐसे में भारत इसके आधे हिस्से पर अपना अधिकार मानता है, जो सही है।