Home Blog Page 2961

पंजाब चुनाव से एक दिन पहले केजरीवाल पर FIR के निर्देश, ‘खालिस्तानी कनेक्शन’ सामने आने के बाद खुद को दिखाया था – ‘बेचारा’

पंजाब में राज्य निर्वाचन आयोग ने मोहाली प्रशासन को आम आदमी पार्टी के रा्ष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। दिल्ली सीएम पर ये कार्रवाई निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर की जाएगी। इस संबंध में शिरोमणि अकाली दल ने अपनी आवाज उठाई थी।

SAD ने गौर करवाया था कि कैसे अरविंद केजरीवाल ने MCC के विरुद्ध जाकर सुखबीर बादल पार्टी पर वीडियो जारी करके आरोप लगाए जबकि राज्य में MCC के लागू होने के बाद ये नियम है कि कोई भी पार्टी किसी भी नेता के विरुद्ध कोई आपत्तिजनक वीडियो नहीं बना सकती। शिकायत पर गौर करते हुए पंजाब के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर ने भी माना कि जो क्लिप केजरीवाल ने शेयर की उसे स्टेट लेवल की एमसीसी कमेटी द्वारा नहीं अप्रूव किया गया था। इसी के बाद उन्होंने केजरीवाल पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। ये फैसला तब सामने आया जब पंजाब में 20 फरवरी को मतदान होना है।

उल्लेखनीय है कि अरविंद केजरीवाल की वीडियो सामने आने के बाद शिरोमणि अकाली दल ने इसका विरोध किया था। उन्होंने कहा था,

“अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो संदेश जारी किया जिसमें शिरोमणि अकाली दल के मतदाताओं से अपील की गई कि वे पंजाब के लोगों को गुमराह करने वाले उनके निराधार, झूठे और तुच्छ दावों के आधार पर AAP को वोट दें। शिरोमणि अकाली दल इस तरह की दुर्भावनापूर्ण और अनैतिक रणनीति का सख्ती से विरोध करता है जो उस आदर्श आचार संहिता की भावना के खिलाफ है जो सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर प्रदान करती है।”

अरविंद केजरीवाल पर FIR क्यों?

कथिततौर पर अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को एक वीडियो जारी करते हुए कॉन्ग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल पर उनके विरुद्ध साजिश रचने के आरोप लगाए थे। उन्होंने खुद को बेचारा दिखाते हुए दावा था कि उनकी पार्टी को हराने के लिए तीनों पार्टियाँ साथ आ गई हैं और उन्हें आतंकवादी बताया जा रहा है। केजरीवाल का दावा था कि दूसरी पार्टियाँ उन्हें निशाना बना रही हैं क्योंकि प्रदेश में हराने के लिए तीनों पार्टियों के पास कोई मुद्दा ही नहीं है।

केजरीवाल और खालिस्तानी कनेक्शन 

मालूम हो कि कुछ दिन पहले अरविंद केजरीवाल के ऊपर उनके पुरानी साथी रहे कुमार विश्वास ने अलगाववादी सोच के साथ होने का आरोप लगाया था। ऐसे में प्रदेश सीएम चन्नी ने केंद्रीय गृह मंत्री को लिखकर माँग की थी कि मामले में जाँच हो। पत्र का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा था कि इस मामले की पूरी जाँच कराई जाएगी और SFJ और AAP के संबंधों का पता लगाया जाएगा।

टी-20 लीग के विदेशी क्रिकेटरों को पैसा भी नहीं दे रहा पा रहा कंगाल पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर जेम्स फॉकनर ने खोल दी पोल

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की देखा-देखी पड़ोसी ने पाकिस्तान सुपर लीग (Pakistan Super League- PSL) शुरू तो कर दिया, लेकिन खिलाड़ियों को पैसे नहीं देने के कारण अब दुनिया भर में उसकी भद पिटने लगी है। PSL के लिए खेल रहे ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाद जेम्स फॉकनर (Australian Cricketer James Faulkner) ने भुगतान नहीं करने और लगातार झूठ बोलने को लेकर खेल को बीच में छोड़कर वापस ऑस्ट्रेलिया लौट गए हैं।

ट्विटर पर फॉकनर ने कहा, “मैं पाकिस्तान क्रिकेट प्रशंसकों से माफी माँगता हूँ, लेकिन दुर्भाग्य से मुझे पिछले 2 मैचों से हटना पड़ा और अब PSL टी-20 छोड़ना पड़ रहा है। इसकी वजह है किए गए समझौते और भुगतान का पाकिस्तान क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (PCB) द्वारा सम्मान नहीं किया गया। मैं यहाँ शुरू से रहा हूँ और वे मुझसे लगातार झूठ बोले जा रहे हैं।”

फॉकनर ने आगे कहा, “मुझे छोड़ते हुए दुख हो रहा है, क्योंकि मैं पाकिस्तान में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को वापस लाने में मदद करना चाहता था। यहाँ बहुत सारे प्रतिभाशाली युवा और अद्भुत प्रशंसक हैं। लेकिन, यहाँ पाकिस्तान क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और PSL द्वारा मेरे साथ जो व्यवहार किया जा रहा है, वह बेहद अपमानजनक है। मुझे उम्मीद है कि आप मेरी स्थिति को समझेंगे।”

ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज खिलाड़ी जेम्स फॉकनर द्वारा पाकिस्तान के क्रिकेट बोर्ड पर लगाए गए आरोपों के बाद पाकिस्तान क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (PCB) ने अपनी गलती मानने के बजाय उसने उल्टा आरोप लगा दिया। पीसीएबी ने फॉकनर को ही झूठा और उनके आरोपों को भ्रामक बता दिया।

फॉकनर के बयानों पर पीसीबी ने ट्वीट किया, “पीसीबी और क्वेटा ग्लैडिएटर्स जेम्स फॉल्कनर के झूठे और भ्रामक आरोपों पर खेदजनक संज्ञान लिया है और इस मामले पर जल्दी ही एक विस्तृत बयान जारी किया जाएगा।” बता दें कि 31 वर्षीय फॉकनर PSL में इस साल ग्वेटा ग्लैडिएटर्स की टीम का हिस्सा थे और उन्होंने अपनी टीम के लिए मैच भी खेले थे।

फॉकनर के आरोपों के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने पाकिस्तान और उसके क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को ट्रोल करना शुरू कर दिया। आकाश गुप्ता नाम के एक यूजर ने कहा कि PSL का असली नाम ‘पाकिस्तान सुपर लीग’ नहीं, ‘पाकिस्तान पैसा शॉर्टेज लीग’ है।

सायन दास नाम की एक ट्विटर यूजर ने फॉकनर के ट्वीट पर जवाब देते हुए लिखा, “वे जेम्स फॉल्कनर को संभाल नहीं पा रहे हैं और PSL में कोहली के होने के सपने देख रहे हैं।”

हरिकृष्णा नाम के एक ट्विटर यूजर ने जवाब दिया, “भाई आपसे गलती हो गई। ये ट्वीट करने से पहले आपको पाकिस्तान छोड़ देना चाहिए था, क्योंकि कुछ भी हो सकता है। आपके सकुशल घर लौटने की कामना करता हूँ।”

मनु नाम के ट्विटर यूजर ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और मंत्री फहद चौधरी का फोटो शेयर कर उनका मजाक उड़ाया।

ये पहली बार नहीं है, जब पाकिस्तान क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड पर अंगुली उठी है। इसके पहले अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों को घटिया खाना देकर सुर्खियों में बटोरी थी। उस समय भी PCB की भारी किरकिरी हुई थी। PSL में खेल रहे एलेक्स हेल्स ने मार्च 2021 में इंस्टाग्राम पर उन्हें परोसे गए खाने का एक फोटो शेयर किया था।

स्टाग्राम पर PCB द्वारा उपलब्ध कराए गए नाश्ते की एक तस्वीर पोस्ट की थी और कैप्शन दिया था ‘टोस्ट, आमलेट, और बेक्ड बीन्स’। हेल्स द्वारा डाली गई तस्वीर में दो अंडे और एक टोस्ट शामिल था, लेकिन अंडों की क्वालिटी वाकई खराब थी। जो पैकेट खुला नहीं दिख रहा है तस्वरी में हो सकता है कि उसमें बेक्ड बीन्स शामिल हो।

लश्कर, अलकायदा, ISIS… जिसके भी आतंकवाद से जुड़े तार, सबका ‘हमदर्द’ जमीयत ही क्यों: अहमदाबाद ब्लास्ट ताजा नमूना

एक इस्लामिक संगठन है जमीयत उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulema-E Hind)। इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष है- मौलाना सैयद अरशद मदनी। आतंकवाद से जुड़ा कोई भी मामला हो यह कट्टरपंथी संगठन उसमें कूद ही जाता है। इसका ताजा नमूना है 2008 का अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट।

विशेष अदालत ने 18 फरवरी 2022 को अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में 38 आतंकियों को फाँसी और 11 को आजीवन कारवास की सजा सुनाई। इस फैसले के बाद आतंकियों के बचाव में खड़ा होने में जमीयत ने देर नहीं की। मदनी ने इस फैसले को ‘अविश्वसनीय’ बताते हुए कहा कि इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। जरूरत हुई तो सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी जाएगी।

यह पहला मौका नहीं है जब जमीयत आतंकियों या आतंकवाद के आरोपितों के बचाव में खड़ा हुआ है। करीब दशक भर से वह लगातार आतंकवाद के उन मामलों में कानूनी सहायता मुहैया कराता रहा है, जिसमें मुस्लिम आरोपित रहे हैं। इसके बचाव में सफाई देते हुए इस्लामी संगठन कहता है कि वह उन ‘बेगुनाह मुस्लिमों’ को कानूनी सहायता मुहैया कराता है, जिन्हें फर्जी तरीके से फँसाया जाता है। जमीयत के लीगल सेल की स्थापना मदनी ने 2007 में की थी। इसके जरिए ही आतंकवाद के आरोपितों के मामले जमीयत देखता है और वकील मुहैया कराता है।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 2007 से लेकर अब तक इस्लामिक संगठन ऐसे करीब 700 आरोपितों की मदद कर चुका है। इससे भी चिंताजनक पहलू यह है कि वह आतंकवाद के 192 आरोपितों को बरी करा चुका है। इनमें से ज्यादातर बरी इसलिए नहीं हुए क्योंकि वे बेगुनाह थे। अधिकतर आरोपित तकनीकी पहलुओं या सबूत की कमी या पुलिस की कमजोर जाँच की वजह से बरी किए गए।

7/11 मुंबई ट्रेन विस्फोट, 2006 मालेगाँव विस्फोट और औरंगाबाद आर्म्स जैसे कई मामलों में कानूनी सेवाएँ जमीयत ने ही मुहैया कराई है। इतना ही नहीं 26/11 के मुंबई आतंकी हमले, 2011 का मुंबई ट्रिपल ब्लास्ट केस, मुलुंड ब्लास्ट केस, गेटवे ऑफ इंडिया ब्लास्ट में भी आरोपितों के बचाव में जमीयत उतरा था।

अल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा और ISIS तक का किया है बचाव

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की वेबसाइट को देखें तो वहाँ पर उन आतंकी मामलों का जिक्र मिलता है, जिनमें वह आरोपित मुस्लिमों का बचाव कर रहा है। पुणे के जर्मन बेकरी बम ब्लास्ट के मामले में आरोपित रहे हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी मिर्जा हिमायत बेग को 2013 में जमीयत ने मुफ्त में कानूनी मदद दी थी। इसी तरह से कई और मामले हैं जिनमें जमीयत ने आतंकियों को कानूनी सहायता दी। मसलन;

  • लश्कर कनेक्शन मामला (अब्दुल रहमान बनाम राज्य एसएलपी)
  • कोच्चि का ISIS साजिश केस (केरल राज्य बनाम अर्शी कुरैशी और अन्य)
  • ISIS साजिश मामला मुंबई (अर्शी कुरैशी और अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य)
  • ISIS साजिश का मामला (राजस्थान राज्य बनाम सिराजुद्दीन)
  • 26/11 मुंबई हमला केस (सैयद ज़बीउद्दीन बनाम महाराष्ट्र राज्य)
  • चिन्नास्वामी स्टेडियम बम विस्फोट केस (राज्य बनाम कातिल सिद्दीकी और अन्य)
  • जंगली महाराज रोड पुणे बम विस्फोट मामला (एटीएस बनाम असद खान और अन्य)
  • इंडियन मुजाहिदीन केस (महाराष्ट्र बनाम अफजल उस्मानी और अन्य)
  • जावेरी बाजार सीरियल ब्लास्ट (राज्य बनाम अजाज शेख और अन्य)
  • सिमी साजिश केस (मध्य प्रदेश राज्य बनाम इरफान मुचले और अन्य)
  • जामा मस्जिद ब्लास्ट केस (दिल्ली स्टेट बनाम कतील सिद्दीकी व अन्य)
  • इंडियन मुजाहिदीन साजिश केस (राज्य बनाम यासीन भटकल और अन्य)
  • अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस 2008 (राज्य बनाम जाहिद और अन्य)

कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने न केवल आतंक के आरोपितों की सहायता की है, बल्कि हिंदू नेता कमलेश तिवारी के हत्यारों को भी लीगल और फाइनैंशियल सपोर्ट दिया था। जमीयत ने कमलेश तिवारी की हत्या करने के पाँचों आरोपितों के लिए कानूनी लड़ाई में हर तरह सहायता करने की बात कही थी। इसके साथ ही संगठन ने पिछले साल ही यूपी में अलकायदा के आतंकियों का बचाव करने के लिए अपने वकीलों को लगाने का ऐलान किया था। उसने कहा था कि वो दो संदिग्ध आतंकियों को सभी तरह की कानूनी मदद देगा। अब एक बार फिर से यह संगठन 56 निर्दोष नागरिकों की हत्या करने और 21 बम विस्फोट करने की साजिश रचने वाले 49 आतंकियों के समर्थन के लिए आगे आया है।

बहरहाल जमीयत को किसी का भी बचाव करने का अधिकार है, अगर उसे लगता है कि इन्हें गलत तरीके से फँसाया जा रहा है। लेकिन इसका एक पक्ष यह भी है यह इस्लामी कट्टरपंथियों को यह संदेश भी देता है कि हर हाल में जमीयत उनके साथ खड़ा रहेगा। यह संदेश मजहबी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करने जैसा है।

‘सपा का हाथ, आतंकियों के साथ’: आतंकी के अब्बा से ही नहीं कनेक्शन, मुकदमा भी वापस ले रहे थे अखिलेश-HC ने लगाई थी फटकार

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि गुजरात के सीरियल ब्लास्ट मामले में न्यायालय ने जो फैसला सुनाया है, इसमें मृत्यु दंड प्राप्त करने वाले एक आतंकी का संबंध दुर्भाग्य से आजमगढ़ से है और उसके परिवार का संबंध सपा से है। उन्होंने कहा कि इससे अनुमान लगा सकते हैं कि सपा के मंसूबे क्या हैं। वहीं पीलीभीत में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा, “नई हवा है, वही सपा है, सपा का हाथ, आतंकियों के साथ।” सीएम योगी ने आरोप लगाया कि आतंकी के परिजनों के साथ अखिलेश यादव वोट माँग रहे हैं।

बता दें कि शुक्रवार (18 फरवरी, 2022) को 49 में से 38 आरोपितों को फाँसी की सज़ा सुनाई गई है। साथ ही अन्य आरोपितों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई। सीएम योगी ने कहा कि इनमें से कुछ उत्तर प्रदेश के भी थे। सीएम योगी ने कहा कि इनमें से कुछ को सपा के लिए चुनाव प्रचार करते हुए भी देखा गया था। सीएम योगी ने इस रैली में ये भी कहा कि पिछली सरकारों में किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर होते थे और गरीब भूखे मरते थे।

बता दें कि वाराणसी में हुए एक बम ब्लास्ट के मामले में भी एक आरोपित के खिलाफ मामलों को ख़त्म करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डाँट पिलाते हुए कहा था कि सरकार कैसे ये निर्णय ले सकती है कि कौन आतंकवादी है और कौन नहीं। हाईकोर्ट ने कहा था कि ये निर्णय अदालत का है। उच्च-न्यायालय ने पूछा था कि आखिर क्या सरकार ऐसे कदम उठा कर आतंकवाद को बढ़ावा देना चाहती है। कोर्ट ने कहा था कि आज मामले वापस लिए जा रहे, और कल उन्हें पद्मा भूषण दे दिया जाएगा!

वाराणसी में 7 मार्च, 2006 को बम ब्लास्ट हुआ था। 2012 में बनी समाजवादी पार्टी की सरकार ने इस मामले के आरोपित ‘मुस्लिमों’ पर से केस हटाने के लिए कदम उठाए थे। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। कई जिलों की अदालतों में आरोपितों के खिलाफ मामले चल रहे थे। याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार के कदम से बम ब्लास्ट की साजिश रचने वालों को और प्रोत्साहन मिलेगा। इस मामले में बम स्टोर कर के रखने वाले वहीदुल्लाह और शमीम को राज्य सरकार रिहा करने की योजना बना रही थी।

वहीं अहमदाबाद बम ब्लास्ट के मामले में कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि उनमें से एक का नाम मोहम्मद सैफ है, जो सपा नेता शादाब अहमद का बेटा है। उन्होंने इसे लेकर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने दो तस्वीरें भी दिखाईं, जिनमें उसे अखिलेश यादव के साथ देखा जा सकता है। उन्होंने पूछा कि क्या अखिलेश यादव ने उसे बिरयानी खाने के लिए बुलाया था? उन्होंने बताया कि शादाब अहमद का बेटा इस बम ब्लास्ट में शामिल था और मास्टरमाइंड भी था।

बता दें कि सपा की सरकार ने आतंकी मामलों में 15 आरोपितों के खिलाफ ‘जनहित’ में आतंकवाद के आरोप वापस लेने का फैसला लिया था, जिस कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट से उसे डाँट पड़ी थी। इस साजिश में 43 लोग मारे गए थे। वलीउल्लाह जहाँ एक मौलवी था, वहीं शमीम उसका शागिर्द था। वहीं 2006 वाले वाराणसी बम ब्लास्ट में 21 लोग मारे गए थे। यूपी की तत्कालीन सपा सरकार ने 2002 में कारगिल युद्ध में सेना की गतिविधि के बारे में जानकारी देने वाला और रामपुर में सीआरपीएफ पर हमले करने वाले भी शामिल थे।

PM मोदी से मिले अफगानिस्तान से आए हिंदू-सिख: CAA लाने और तालिबान से जान बचाने के लिए जताया आभार

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद वहाँ से जान बचाकर भारत आए हिंदू और सिख समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार (19 फरवरी) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आवास पर मुलाकात की। इस शिष्टमंडल में वे लोग भी शामिल थे, जो अफगानिस्तान से वर्षों पहले भारत आ गए थे। शिष्टमंडल ने प्रधानमंत्री को अफगानी साफा भी भेंट किया। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री से मिलने वाले लोगों में अफगान व्यापारी बांसरी लाल अरेंदेह भी शामिल हैं, जिन्हें पिछले साल तालिबान ने किडनैप कर लिया था और एक समझौते के बाद उन्हें छोड़ा गया था।

शनिवार को प्रधानमंत्री के आधारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर हिंदू-सिख समुदाय के लोग पीएम मोदी से मिले। इस दौरान उन्होंने अफगानिस्तान से सुरक्षित भारत लाने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। साथ ही उन्हें सम्मानित भी किया। अफगानी हिंदू-सिखों ने पीएम मोदी अफगानिस्तान का पारंपरिक वस्त्र, साफा, तलवार और स्मृति चिह्न भेंट किया।

इस दौरान अफगानिस्तान से भारत आए निदान सिंह सचदेव ने ANI को को बताया, “मुझे एक गुरुद्वारे से तालिबान ने अपहरण कर लिया था। उन्होंने हमें भारतीय जासूस समझा था। वे चाहते थे कि हम इस्लाम में धर्मांतरित हो जाएँ। हमने पीएम मोदी को धन्यवाद दिया और भारत सरकार की मदद से खुश हैं। हमें बस आश्रय और राष्ट्रीयता की आवश्यकता है।”

साल 1989 में भारत आने वाले अफगानी मूल के नागरिक तरेंद्र सिंह ने कहा “हमने पीएम मोदी को काबुल के हालातों के बारे में संक्षिप्त में बताया। वहाँ के हालात और समीकरण हमारी मुख्य समस्या हैं। हम नागरिकता के लिए भटक रहे थे, इसलिए CAA लाने के लिए हम लोग प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हैं। हम चाहते हैं कि एक ही बार में हमें नागरिकता मिले।” 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (18 फरवरी) को सिख समुदाय के प्रतिष्ठित व्यक्तियों और धर्मगुरुओं के एक प्रतिनिधिमंडल से अपने आवास पर मुलाकात की थी। इस दौरान पीएम मोदी ने नामधारी संप्रदाय के एक आध्यात्मिक नेता उदय सिंह के साथ अपनी मुलाकात की एक तस्वीर भी ट्विटर पर शेयर की थी।

पीएम मोदी ने ट्वीट किया, “संत समाज और सिख समुदाय के प्रतिष्ठित हस्तियों से मुलाकात हुई। ये हस्तियाँ सिख संस्कृति की वाहक हैं। केंद्र सरकार के विभिन्न प्रयासों की सराहना करने के लिए मैं इनका आभारी हूँ।”

शुक्रवार (18 फरवरी) को इंडियन वर्ल्ड फोरम (IWF) नाम के एक नागरिक संगठन ने पीएम मोदी से भारत में अफगान हिंदू और सिख शरणार्थियों के लिए ‘एकल-खिड़की’ सुविधा के साथ नए वीजा देने का आग्रह किया था। इसके साथ ही संगठन ने वहाँ से आने वाले लोगों को जमीन मुहैया कराकर ‘अफगान नगर’ स्थापित करने और युद्धग्रस्त देश में प्राचीन गुरुद्वारों और मंदिरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया।

संगठन प्रमुख पुनीत सिंह चंडोक ने अफगानिस्तान से पवित्र ग्रंथों को भारत मँगवाने, अफगान हिंदू और सिख अल्पसंख्यकों को सुरक्षित भारत लाने के लिए धन्यवाद दिया। चंडोक ने कहा कि अफगानिस्तान के लोगों को भारत की ओर से दी जा रही मानवीय सहायता मोदी सरकार द्वारा मानवता को दिए जाने वाले महत्व को दर्शाती है।

‘हिंदू महिलाओं को बिंदी-सिंदूर में सड़क पर नहीं निकलने देंगे’: बुर्का विवाद के बीच धमकी वाला Video वायरल

कर्नाटक से शुरू हुए हिजाब विवाद पर अब पड़ोसी देश के कट्टरपंथियों ने खुलेआम धमकी देनी शुरू कर दी है। कथिततौर पर, बांग्लादेश से एक वीडियो सामने आई है। इसमें बांग्लादेशी मुस्लिम वहाँ के हिंदुओं को धमकी दे रहे हैं कि अगर कर्नाटक में मुस्लिम लड़कियों को हिजाब नहीं पहनने दिया गया तो फिर बांग्लादेश में किसी हिंदू महिला को किसी धार्मिक प्रतीक (धोती, बिंदी, सिंदूर, साका) के साथ सड़कों पर नहीं चलने दिया जाएगा।

तस्लीमा नसरीन द्वारा शेयर की गई वीडियो के साथ उन्होंने बताया कि बांग्लादेशी मुल्ला, बांग्लादेश के हिंदुओं को धमका रहे हैं। कह रहे हैं कि अगर कर्नाटक मुस्लिमों को हिजाब नहीं पहनने दिया गया तो बांग्लादेशी हिंदुओं को धोती पहनने से संखा और सिंदूर लगाने से बांग्लादेश में रोका जाएगा।

पंडित प्रदीप चंद्रा ने बांग्लादेश की इस वीडियो को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये पार्टी इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश से जुड़े लोगों की है। इसमें एक राजनेता कहता नजर आ रहा है, “कोई बांग्लादेशी हिंदू महिला घरों से निकलकर धार्मिक चिह्न- जैसे साका, सिंदूर जैसी चीजों के साथ सड़कों पर नहीं घूमेगी।”

कथिततौर पर बांग्लादेश में कट्टरपंथियों की ये मीटिंग कर्नाटक के पी यू कॉलेज में लड़कियों को हिजाब पहनकर घुसने से रोकने पर हुई। वीडियो में भी देख सकते हैं कि कट्टरपंथियों ने हाथ में जो बैनर लिया है उसमें साफ लिखा है कि भारत के कर्नाटक में हिजाब बैन होने के ख़िलाफ़ अपना प्रदर्शन कर रहे हैं। नीचे उनके इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश का नाम है।

‘मुस्लिमों को खुलेआम कठमुल्ला बताया’: CM योगी को बदनाम कर रहे थे अजीत अंजुम, ‘रेख़्ता’ दिखा कर लोगों ने खोल दी पोल

तथाकथित पत्रकार अजित अंजुम ने ‘कठमुल्ला’ शब्द के इस्तेमाल के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भला-बुरा कहा। दरअसल, ‘आज तक’ चैनल पर अंजना ओम कश्यप को दिए गए एक इंटरव्यू में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा, “महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव व्यक्त करना अच्छी बात है। तीन तलाक के खिलाफ भारत का जो कानून बना है, उसका समर्थन करना चाहिए। हमने महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर देने के कई कार्य किए, लेकिन उसके रास्ते में देश का ‘कठमुल्लापन’ है, जिसका समर्थन ओवैसी जैसे लोग करते हैं।”

योगी आदित्यनाथ का असदुद्दीन ओवैसी जैसे इस्लामी कट्टरपंथी नेताओं और मौलानाओं की तरफ था, जो महिलाओं के आगे बढ़ने का विरोध करते हैं। ‘सरकास्टिक ह्यूमन’ नाम के ट्विटर हैंडल ने दावा किया कि भाजपा नेता ने मुस्लिमों के लिए ‘कठमुल्ला’ शब्द का प्रयोग किया है। अजीत अंजुम ने इस पर लिखा, “मुख्यमंत्री योगी के दिल में इतनी नफरत भरी है कि मुस्लिमों के लिए। खुलेआम ‘कठमुल्ला’ शब्द का प्रयोग कर रहे हैं। फिर ‘सबका साथ और सबका विश्वास’ जैसे पाखंड क्यों करते हैं योगी जी?

आजकल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की कवरेज के बहाने घूम-घूम कर भाजपा के खिलाफ प्रोपेगंडा फैला रहे अजीत अंजुम ने इसे ऐसे पेश किया, जैसे ‘कठमुल्ला’ कोई गाली हो और संपूर्ण मुस्लिम समुदाय के लिए इसका प्रयोग किया गया हो। लेकिन, ये दोनों ही बातें गलत हैं। लोगों ने अजीत अंजुम को उर्दू शब्द ‘कठमुल्ला’ का अर्थ समझा कर बता दिया। इसके लिए उर्दू की जानी-पहचानी वेबसाइट ‘रेख़्ता’ के जरिए लोगों ने उन्हें समझाया कि ये क्या होता है।

असल में ‘रेख़्ता’ की मानें तो ‘कठमुल्ला’ का अर्थ होता है वो मुल्ला, जो काठ के मनकों की माला फेरता हो। साथ ही इसका अर्थ ‘संकुचित विद्या का मालिक, हाथ-धर्म मौलवी, कट्टर मौलवी, मूर्ख, और कट्टर मुल्ला/मौलवी’ बताया गया है। ‘कठमुल्ला’ का अर्थ ‘दुराग्रही व्यक्ति’ या फिर ‘लाक्षणिक मूर्ख या नकली धर्म गुरु अथवा मौलवी’ भी लिखा हुआ है। मतलब साफ़ है कि इसका अर्थ जाने बिना ही अजीत अंजुम ने ‘खुलेआम सारे मुस्लिमों’ को ‘कठमुल्ला’ कहने का आरोप सीएम योगी पर मढ़ दिया।

भारत को दहलाने के लिए दाऊद इब्राहिम ने बनाई ‘स्पेशल यूनिट’: राजनेता-बिजनेसमैन टारगेट पर, दंगे भड़काने की साजिश

भगोड़ा माफिया और आतंकी दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) के खतरनाक मंसूबों का राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने खुलासा किया है। जाँच एजेंसी के मुताबिक, इस आतंकी ने एक स्पेशल यूनिट का गठन किया है, जिसके जरिए वह घातक हथियारों और विस्फोटकों से देश के राजनेताओं, बिजनेसमैन समेत कई शहरों पर हमले की साजिश रच रहा है। उसका फोकस दिल्ली और मुंबई महानगर हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, दाऊद ने जो हिट लिस्ट तैयार की है, उसमें नेताओं के नामों का भी उल्लेख किया गया है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में अमेरिका द्वारा दाऊद इब्राहिम को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया गया था। इसके बाद NIA ने दाऊद और उसके सभी गुर्गों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इस एफआईआर में जाँच एजेंसी ने ये भी खुलासा किया है कि दाऊद ने भारत के अलग-अलग राज्यों, शहरों में साम्प्रदायिक दंगे भड़काने की भी साजिश रच हा है। इसी एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने दाऊद और उसके भाई के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस भी दर्ज किया है।

कुछ महीनों पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर 2 पाकिस्तान प्रशिक्षित समेत कई लोगों को महाराष्ट्र और यूपी से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और अंडरवर्ल्ड के आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ था। उस दौरान यह बात सामने आई कि दाऊद का भाई अनीस हवाला के जरिए पैसे भेजवाकर भारत में बम धमाके के लिए आईईडी उपलब्ध कराता था।

मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी की हिरासत में है दाऊद का भाई

आतंकी दाऊद इब्राहिम का भाई इकबाल कासकर इस समय प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत में है। शुक्रवार (18 फरवरी 2022) को मुंबई की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने इकबाल कासकर को 24 फरवरी तक के लिए ईडी की हिरासत में भेजा है। कासकर भारत में अपने आतंकी भाई दाऊद इब्राहिम के लिए काम कर रहा था। वो मुंबई और उसके आसपास के क्षेत्रों में उसके अवैध व्यापार को संभालने का काम करता था।

टी-शर्ट, गेंद, भगदड़, मौत… शाहरुख खान से माफी माँगने को कहेगा गुजरात हाई कोर्ट: जानिए क्या है मामला

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के विरुद्ध दर्ज हुए एक आपराधिक मामले में गुजरात हाई कोर्ट ने गुरुवार (17 फरवरी 2022) को सुनवाई की। ये मामला शाहरुख खान की फिल्म रईस के प्रचार के दौरान वडोदरा रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ से जुड़ा है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी व कई घायल हुए थे।

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस निखिल एस करिएल ने अपनी टिप्पणी में कहा कि शाहरुख के खिलाफ ट्रायल चलाने पर काफी अराजकता फैल सकती है। ऐसे में माफी माँगना एक बेहतर विकल्प है उन्होंने शिकायतकर्ता के वकील से कहा, “मैं शाहरुख खान से आपको लिखित में माफी भेजने के लिए और इस मामले को खत्म करने के लिए कहूँगा।” पूरे मामले की अगली सुनवाई अब 24 फरवरी को होगी।

शाहरुख के विरुद्ध FIR में क्या कहा गया

बता दें कि साल 2017 में शाहरुख खान के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर में बताया गया कि रईस के प्रचार के दौरान शाहरुख मुंबई से दिल्ली के लिए ट्रेन में सफर कर रहे थे। लेकिन जब वडोदरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पहुँची तो शाहरुख को देखने के लिए वहाँ भारी भीड़ वहाँ इकट्ठा हो गई। प्रचार के लिए शाहरुख खान ने अपने हाथ उठाए और टीशर्ट व गेंद फेंकी जिसे पकड़ने के लिए उनके फैन्स में भगदड़ मच गई और पुलिस को लाठी चार्ज करनी पड़ी। घटना के बाद पता चला कि इस भगदड़ में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और तमाम लोग घायल हुए। इसके अलावा दो पुलिसकर्मी के बेहोश होने की खबर भी आई थी।

घटना के संबंध में कॉन्ग्रेस नेता जीतेंद्र सोलंकी ने शिकायत दर्ज कराई थी और मामला आईपीसी धारा 336, 337, 338 व रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 145, 150, 152, 154, 155 (1) के तहत दायर हुआ था। इसके बाद साल 2017 की जुलाई माह में खान हाईकोर्ट पहुँचे थे। उनके वकील की ओर से मामले में दलील दी गई कि खान ने प्लेटफॉर्म पर एंटर नहीं किया। उन्होंने बस अपने हाथ दिखाए, टीशर्ट-गेंद फेंकी, जो कि कोई अपराध नहीं है। दलील में ये भी कहा गया कि जिस व्यक्ति की भगदड़ में जान गई वो दिल का मरीज था और किसी अन्य वजह से उसकी मौत हुई।

पार्किंग में पर्ची काटने वाला युनूस निकला पाकिस्तान का जासूस: इधर से सूचना भेजता, उधर से बैंक अकाउंट में आता था पैसा

इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने राजस्थान से एक पाकिस्तानी जासूस को गिरफ्तार किया है। उसकी पहचान मोहम्मद यूनुस के तौर पर हुई है। वह अजमेर के किशनगढ़ का रहने वाला है। वह किशनगढ़ बस स्टैंड के पास पार्किंग में पर्ची काटने का काम करता था। यूनुस पिछले कई दिनों से पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई को भारतीय सेना से जुड़े राज भेज रहा था। उसकी गिरफ्तारी 18 फरवरी 2022 (शुक्रवार) को की गई।

रिपोर्ट के अनुसार इंटेलिजेंस ब्यूरो काफी लम्बे समय से यूनुस की हरकतों पर नजर रखे हुए थी। वह पाकिस्तान के अफसरों से फोन के जरिए सम्पर्क करता था। सम्पर्क करने के लिए उसने फर्जी सिम खरीद रखी थी। जानकारी देने के बदले उसको पैसे मिल रहे थे। यह पैसे उसके बैंक खातों में पाकिस्तान से आए हैं। उसने सैन्य क्षेत्र के कई फोटो और वीडियो पाकिस्तान को भेजे थे। उसका फोन और लैपटॉप जब्त कर जाँच के लिए भेज दिया गया है।

यूनुस का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। उसे हिरासत में लेकर जयपुर मुख्यालय लाया गया था। लंबी पूछताछ के बाद उसे आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। IB यूनुस को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने का प्रयास करेगी। रिमांड की अवधि में उसे पाकिस्तान से मिले पैसे, पाकिस्तान को भेजी गई जानकारियों और उसके नेटवर्क को लेकर पूछताछ की जाएगी।