Home Blog Page 2962

‘थानेदार पैंट गीली कर दे’ पर सिद्धू को चंडीगढ़ के DSP ने घेरा, मुस्तफा का हिंदुओं को धमकाने वाला Video भी सही निकला

पंजाब विधानसभा (Punjab Assembly Election 2022) के लिए कल 20 फरवरी को होने वाली वोटिंग से पहले कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) की मुसीबतें बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि की याचिका (Defamation Plea) दायर की गई है। वहीं, उनके राजनीतिक सलाहकार पूर्व IPS अधिकारी मोहम्मद मुस्तफा का वो वीडियो सही पाया गया है, जिसमें उन्होंने हिंदुओं को खुलेआम धमकी दी थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह याचिका शुक्रवार (18 फरवरी 2022) को चंडीगढ़ पुलिस के डीएसपी दिलशेर सिंह चंदेल ने चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अमनइंदर सिंह की कोर्ट में दायर की। कोर्ट इस मसले पर सोमवार (21 फरवरी 2022) को सुनवाई करेगा। पुलिस अधिकारी ने सिद्धू के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की है। चंदेल की तरफ से कोर्ट में उनका केस वकील डॉ सूर्यप्रकाश ने फाइल किया। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मसले पर डीएसपी चंदेल का कहना है कि राजनेता 2021 में एक रैली के दौरान पुलिस के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी और माफी नहीं माँगी।

क्या है मामला

पंजाब कॉन्ग्रेस (Congress) के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू 18 दिसंबर 2021 को सुल्तानपुर लोधी में गए थे। वहाँ वो कॉन्ग्रेस विधायक नवतेज सिंह चीमा के समर्थन में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने नवतेज सिंह चीमा के कंधे पर हाथ रखकर कहा कि ‘ये मुंडा देख लो, पिली जैकेट पाकर गाडर वरगा, थानेदार नूँ मारे ओ पैंट कर दे गीली..ठोको ताली’। यानी, नवतेज सिंह चीमा इतने मजबूत हैं कि थानेदार अपनी पैंट गीली कर देगा।

उनके इस बयान का वीडियो वायरल हो गया था और उनकी जमकर आलोचना भी हुई। इसके बाद चंडीगढ़ के वर्तमान डीएसपी दिलशेर सिंह चंदेल की ओर से उन्हें एक लीगल नोटिस भेजा गया था और उनसे 21 दिनों के भीतर बिना शर्त माफी माँगने की माँग की गई थी, लेकिन सिद्धू ने ऐसा नहीं किया।

इस मसले पर चंदेल ने एक वीडियो भी रिलीज किया था। इस वीडियो में उन्होंने कहा था ‘ सियासत के रंगों में न डूबो इतना कि वीरो की शहादत याद न आए, जरा सा याद कर लो वादे जुबां के, अगर आपको अपनी जुबां का कहा याद आए’।

पुलिस अधिकारी ने ये भी कहा कि अगर ऐसी ही बात है तो सिद्धू जो पुलिस सुरक्षा में घूमते हैं, उसे लौटा दें। फोर्स के बिना एक रिक्शावाला भी इनकी बात नहीं सुनेगा। सिद्धू को मेरा धन्यवाद कि उन्होंने पुलिस फोर्स को शर्मसार कर दिया। वहीं, जालंधर ग्रामीण में तैनात पंजाब पुलिस के उपनिरीक्षक बलबीर सिंह ने भी सिद्धू की टिप्पणी की कड़ी निंदा की थी।

सिद्धू के सलाहकार की हिंदुओं को धमकी वाला वीडियो सही निकला

इसी तरह से नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार और पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे मोहम्मद मुस्तफा का हिंदुओं को धमकाने वाला बयान जाँच में सही पाया गया है। सीएफएसएल रिपोर्ट में वीडियो सही पाया गया है। मुस्तफा ने पिछले महीने (जनवरी 2022) अपनी एक सभा के दौरा कहा था कि उनके जलसे के बराबर में हिन्दुओं को इजाजत दी गई तो वे ऐसे हालात पैदा कर देंगे कि सँभालने मुश्किल हो जाएँगे।

उन्होंने कहा था, “अल्लाह की कसम खाकर कहता हूँ कि इनका कोई जलसा नहीं होने दूँगा। मैं कौमी फौजी हूँ। मैं आरएसएस (RSS) का एजेंट नहीं हूँ, जो डरकर घर में घुस जाऊँगा। अगर इन्होंने दोबारा ऐसी हरकत की तो खुदा की कसम इनके घर में घुसकर इन्हें मारूँगा। आज मैं इन्हें सिर्फ वॉर्निंग दे रहा हूँ। मैं वोटों के लिए नहीं लड़ रहा हूँ, मैं कौम के लिए लड़ रहा हूँ।”

कश्मीरी पंडितों की व्यथा को पर्दे पर उतारने के लिए फिल्म निर्देशक को मिल रही धमकी और गाली, बताया – ट्विटर ने भी किया शैडो बैन

निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ 11 मार्च, 2022 को रिलीज के लिए तैयार है। हालाँकि, सोशल मीडिया पर खासे सक्रिय रहने वाले ‘बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम (2014)’ और ‘द ताशकंद फाइल्स (2019)’ जैसी फिल्मों के निर्देशक पिछले 4 दिनों से ट्विटर से दूर हैं। उन्होंने अपना अंतिम ट्वीट 15 फरवरी, 2022 को किया था। ऐसे में लोग ये चर्चा कर रहे हैं कि क्या ट्विटर ने उनके हैंडल को सस्पेंड कर दिया है? हालाँकि, बात कुछ और ही है।

विवेक अग्निहोत्री ने बयान जारी कर के बताया कि ट्विटर हैंडल को निलंबित नहीं किया गया है, बल्कि उन्होंने खुद इसे डिएक्टिवेट किया है। उन्होंने बताया कि ट्विटर ने उन्हें तभी से ‘शैडो बैन’ कर रखा है, जब से उन्होंने ‘द कश्मीर फाइल्स’ को लेकर अभियान शुरू किया था। बता दें कि ट्विटर अक्सर दक्षिणपंथी विचारधारा के लोगों को ‘शैडो बैन’ कर देता है, जिससे उनके ट्वीट्स उनके ही अधिकतर फॉलोवरों को नहीं दिखते हैं और उनकी रीच भी कम हो जाती है।

विवेक अग्निहोत्री ने बताया कि न सिर्फ उनके फॉलोवर्स की संख्या काफी कम कर दी गई है, बल्कि उन्हें उनके ट्वीट्स भी नहीं दिखते। साथ ही उन्होंने बताया कि उनके इनबॉक्स में गालियों और धमकियों से भरे कई मैसेज्स भी आ रहे थे। बकौल विवेक अग्निहोत्री, गाली और धमकी देने वाले कौन लोग हैं, ये आप सब जानते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि वो इन तत्वों से निपट नहीं सकते, लेकिन इनमें से अधिकतर पाकिस्तानी और चीनी बोट्स हैं। उन्होंने पूछा कि ये फतवा, गालियाँ और धमकियाँ आखिर किसलिए?

विवेक अग्निहोत्री ने अपने बयान में कहा, “आप भले ही कितने भी कड़े हों, लेकिन अपने और अपने परिवार के प्रति घृणा से सनी गालियाँ देने वालों से घिरे रहना दिमाग पर असर डालने वाला है। ये सब किसलिए? कश्मीरी भाइयों-बहनों के दर्द और कष्ट पर एक ईमानदार फिल्म बनाने के लिए? क्या वो इसीलिए बेचैन हैं क्योंकि सच खुल कर सामने आ जाएगा? सोशल मीडिया की बुरी दुनिया ने कई शैतानी ताकतों को शक्तियाँ दे दी हैं। हमारी चुप्पी से उन्हें उत्साह मिलता है कि वो जीत सकते हैं।”

उन्होंने कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ उस चुप्पी को तोड़ती है, ऊँचे और स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ उस अमानवीय आतंकवाद की पोल खोलने वाला एक प्रयास है, जिसने शिव और सरस्वती की पवित्र भूमि को तबाह कर दिया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि किस तरह मजहबी आतंकवाद भारत की भूमि के अन्य भागों में पाँव पसार रहा है। उन्होंने कहा कि यही कारण है, कि उनके जैसे लोगों को चुप कराने के प्रयास हो रहे हैं। विवेक अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि वो हमेशा उनके लिए बोलते हैं, जिन्हें सुना नहीं गया।

फिल्म निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री को ‘द कश्मीर फाइल्स’ के लिए मिल रही धमकियों पर उनका बयान

फिल्म निर्देशक ने कहा कि वो भारत विरोधी अर्बन नक्सल्स के कई झूठ और फेक नैरेटिव्स की लगातार पोल खोल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ये ताकतें उन्हें चुप कराना चाहती हैं। विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि उन्हें अच्छी तरह पता है कि चुप्पी के कारण कश्मीर नरसंहार जैसी त्रासद घटनाएँ होती हैं। उन्होंने कहा कि इन लोगों को जान लेना चाहिए कि उन्हें चुप नहीं कराया जा सकता है। फिल्म निर्देशक ने अपने फैंस और समर्थकों को उनके प्यार के लिए धन्यवाद भी दिया।

बता दें कि अमेरिका में अब तक 30 जगहों पर ‘द कश्मीर फाइल्स’ की स्क्रीनिंग हो चुकी है। इन शो के माध्यम से दुनिया को कश्मीरी हिन्दुओं पर हुए इस्लामी अत्याचार के बारे में बताया गया। फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती और अनुपम खेर जैसे अभिनेता मुख्य भूमिकाओं में हैं। अमेरिका के टाइम्स स्क्वायर पर फिल्म का पोस्टर भी दिखाया गया था। विवेक अग्निहोत्री का कहना है कि इसकी रिलीज रुकवाने के लिए उन्हें धमकियाँ और गालियाँ मिल रही हैं। उन्हें अमेरिका में इसकी स्क्रीनिंग रोकने के लिए भी धमकियाँ मिली थीं।

PM मोदी ने लॉन्च किए 100 किसान ड्रोन: बुआई से लेकर टिड्डियों के सफाए तक करेगा काम, कृषि क्षेत्र में खुला नया चैप्टर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि क्षेत्र में विकास और किसानों की मदद के लिए आज विशेष अभियान की शुरूआत की। इस अभियान के तहत पीएम मोदी ने 100 किसान ड्रोन (Kisan Drone) का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि भारत में ड्रोन स्टार्ट-अप की एक नई संस्कृति तैयार हो रही है। इनकी तादाद अभी 200 से अधिक है,जो आने वाले वक्त में हजारों में होगी और इससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

याद दिला दें इन किसान ड्रोन का उल्लेख पिछले दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने आम बजट पेश करते हुए किया था। इससे पूर्व साल 2021 में केंद्र सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए खेती-बाड़ी में ड्रोन के इस्तेमाल को मंजूरी दी थी। ये कदम सरकार ने एग्रीकल्चर क्षेत्र को हाईटेक बनाने के लिहाज से उठाया था। अब इसकी आधिकारिक शुरूआत हो गई है।

किसान ड्रोन

किसान ड्रोन का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र को हाईटेक बनाने के लिए किया जा रहा है। इसके प्रयोग से किसान को मेहनत कम पड़ेगी और कम समय में कई काम हो पाएँगे। उदाहरण के लिए किसान ड्रोन का इस्तेमाल कीटनाशक, खाद के छिड़काव और फसलों की बुआई के लिए किया जाएगा। ये ड्रोन जमीन को स्कैन करने की क्षमता रखेंगे और सही मात्रा में जमीन पर कीटनाशक का छिड़काव कर पाएँगे। इसमें केमिकल की मात्रा कम होगी, जिससे पुराने तरीकों से छिड़काव की तुलना में काम 5 गुना तेजी से हो पाएगा।

क्रॉप मॉनिटरिंग में भी ये ड्रोन कारगर साबित होंगे। आमतौर पर जैसा कि जानते हैं कि अगर खेत बढ़े हुए हों तो निगरानी करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में मौसम खराब होने पर तो ये और भी ज्यादा चुनौती भरा काम होता है। इस स्थिति में ड्रोन काफी मददगार होंगे, जो सटीकता से क्रॉप मॉनिटरिंग कर सकेंगे।

सिंचाई क्षेत्र में भी इसका इस्तेमाल होगा। हाइपर-स्पेक्ट्रल, मल्टीस्पेक्ट्रल या थर्मल सेंसर वाले ड्रोन ये पहचान कर पाएँगे कि खेत के कौन से हिस्से सूखे हैं। फिर ऐसे क्षेत्रों को बेहतर तकनीकों से सिंचित करने के उपाय किए जाएँगे। फसल की सेहत जानने के लिए भी ये ड्रोन काफी काम आएँगे।  जैसे कभी कभी बैक्टीरियल और फंगल इन्फेक्शन से फसल खराब हो सकती है। ऐसे में ड्रोन का उपयोग कर फसल को विजिबल और इंफ्रारेड लाइट के जरिए स्कैन किया जा सकेगा।

टिड्डियों को रोकने के लिए किया गया था ड्रोन का इस्तेमाल

बता दें कि भारत में टिड्डियों के खतरे से निपटने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल खेती क्षेत्र में पहली दफा हुआ था। हालाँकि केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा इसके इस्तेमाल के लिए मानक संचानल प्रक्रिया यानी कि किसी काम को करने की एसओपी 2021 में जारी की गई थी। 2021 में ये एसओपी केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने फसल की सुरक्षा के लिए कीटनाशक के प्रयोग तथा मिट्टी एवं फसल के पोषक तत्वों के छिड़काव के लिए की थी।

गधा चोर निकला कॉन्ग्रेस का छात्र नेता, तेलंगाना पुलिस ने किया गिरफ्तार: फोटो लगा मनाया था CM का जन्मदिन

तेलंगाना पुलिस (Telangana Police) ने कॉन्ग्रेस नेता वेंकट बलमूर (Congress Leader Venkat Balmoor) को गधा चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया है। चोरी किए गए गधे को मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (K Chandra Shekhar Rao – KCR) के खिलाफ 17 फ़रवरी (गुरुवार) को हुई रैली में प्रयोग किया गया था। उसी दिन CM केसीआर का जन्मदिन भी था। कॉन्ग्रेस नेता और तेलंगाना नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के अध्यक्ष वेंकट की गिरफ्तारी 18 फ़रवरी (शुक्रवार) को हुई।

वेंकट के खिलाफ करीमनगर के जम्मीकुंता पुलिस स्टेशन में 18 फ़रवरी को शिकायत दी गई थी। इस मामले में 6 अन्य नामजद आरोपित फरार हैं। शिकायत के अनुसार, कॉन्ग्रेस नेता ने पहले तो गधे को चुराया, फिर उसके साथ निर्दयता दिखाई। वेंकट व उनके साथियों पर धारा 143, 153, 504, 379, 149, सेक्शन 67 IT Act और सेक्शन 11 पशु क्रूरता निवारण अधिनियम एक्ट 1960 के तहत केस दर्ज हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक NSUI अध्यक्ष ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री का जन्मदिन सातवाहन विश्वविद्यालय के आगे एक गधे पर KCR की फोटो रख कर मनाया था। बाद में इन्हीं तस्वीरों को वेंकट ने ट्वीट कर के लिखा, “किसानों, छात्रों और बेरोजगारों का जीवन बर्बाद करने, झूठे वादे करने और फर्जी प्रोपोगेंडा फ़ैलाने वाले”।

सत्ता दल के नेताओं ने वायरल हुई इन तस्वीरों के आधार पर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। इस गिरफ़्तारी की निंदा करते हुए कॉन्ग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने कहा, “अविश्वसनीय केसीआर गरु, सत्ता का नशा आपके सिर चढ़कर बोलने लगा है और आप एक छात्र नेता के खिलाफ झूठे मामले बना देते हैं। तेलंगाना के पहले हिटलर द्वारा सत्ता के दुरुपयोग की निंदा करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है।”

तेलंगाना कॉन्ग्रेस प्रमुख रेवनाथ रेड्डी ने भी इस गिरफ्तारी को अवैध बताया है। उन्होंने लिखा, “KCR की सरकार में काम कर रही पुलिस से और क्या उम्मीद ही की जा सकती है?” गौरतलब है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री KCR के जन्मदिन पर कॉन्ग्रेस ने विरोध प्रदर्शन का एलान किया था। इस दौरान 17 फ़रवरी को तेलंगाना कॉन्ग्रेस के सभी सांसदों और विधायकों के अलावा अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं ने KCR सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन किया था। इस दौरान पुलिस ने कई कॉन्ग्रेस नेताओं को हिरासत में भी लिया था।

800 CCTV फुटेज, 1 चोरी की बाइक, 2 संदिग्ध: IED-RDX कहाँ से आया-कौन लाया, दिल्ली में कई बम ब्लास्ट की थी साजिश

पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर में IED विस्फोटक बरामद किए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 2 संदिग्धों की पहचान की है। याद दिला दें कि 14 जनवरी, 2022 को गाजीपुर के ‘फ्लॉवर मार्केट’ में ‘इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED)’ बरामद किया गया था। सीसीटवी कैमरा फुटेज में देखा जा सकता है कि बाइक पर बैठे दो लोग एक बैग लेकर जा रहे हैं। इससे मिले सुराग के आधार पर दिल्ली पुलिस ओल्ड सीमापुरी के एक फ़्लैट पर पहुँची। दिलशाद गार्डन मेट्रो स्टेशन से उनकी बाइक भी जब्त कर ली गई है।

ये इलाका उत्तर-पूर्वी दिल्ली में स्थित है। गुरुवार (17 फरवरी, 2022) को वहाँ से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने RDX से लैस एक विस्फोटक डिवाइस बरामद की है। इसके बाद दिल्ली पुलिस तीन लोगों की तलाश में लग गई, जिनमें से एक की लम्बी दाढ़ी है। इन तीनों के स्केच तैयार कर लिए गए हैं। पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने स्पेशल सेल की नवगठित ‘जिहादी टेरर यूनिट’ की एक टीम का गठन किया है, जो इनका पता लगाएगी। गाजीपुर और सीमापुरी से बरामद किए गए विस्फोटक समान ही हैं।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI)’ की खबर के अनुसार, गाजीपुर में IED बरामद होने के बाद दिल्ली पुलिस ने आसपास के 200 सीसीटीवी कैमरों को खँगाला। गाजीपुर और EDM मॉल के बीच स्थित एक सीसीटीवी कैमरे में दो लोगों को बाइक पर बैठे देखा गया, जिनके पास दिख रहा बैग उस बैग की तरह ही दिख रहा था, जिसमें IED बरामद की गई। उन्होंने अपने चेहरे शॉल से ढक रखे थे। कुल मिला कर 800 कैमरों के फुटेज को खँगाला गया। सुबह के करीब 10 बजे वो उस बैग को फ्लॉवर मार्किट में छोड़ गए थे।

इलेक्ट्रॉनिक रूट के माध्यम से खँगालने के बाद दिल्ली पुलिस को पता चला कि 11 बजे ये दोनों ओल्ड सीमापुरी में गए थे। पुलिस ने इन दोनों के बारे में सूचनाएँ इकट्ठी करने के लिए लोकल इंटेलिजेंस यूनिट को लगाया। फिर ओल्ड सीमापुरी की D49 बिल्डिंग के दूसरे फ्लोर पर उनके रहने की जानकारी मिली। गुरुवार को डेढ़ बजे वहाँ पहुँची पुलिस ने उनके कुछ समान बरामद किए, लेकिन ये दोनों तब तक फरार हो गए थे। उस क्षेत्र और आसपास के इलाकों में पुलिस निगरानी रख रही है।

‘राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA)’ और उत्तर प्रदेश टेररिस्ट स्क्वाड की टीमों ने भी घटनास्थल का दौरा किया है। आतंकियों की साजिश थी कि पूरे इलाके में कई विस्फोट किए जाएँ, ऐसे में आशंका है कि स्थानीय समर्थन के बिना ऐसा संभव नहीं हो पाता। 2.2 RDX को 800 ग्राम के बैग में रखा गया था। एक्स-रे सहित अन्य टेस्ट्स किए गए। उसमें ABCD स्विच और प्रोग्राम टाइमर भी था। पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI भी इसका इस्तेमाल करती रही है। ‘कंट्रोल्ड एक्सप्लोजन’ के जरिए इसे निष्क्रिय किया गया।

कॉलेज छात्रा से सिंदूर हटाने को कहा: बुर्का विवाद पर छात्राओं ने पूछा- टिकटॉक वीडियो बिना हिजाब के, फिर पढ़ाई पर्दे में क्यों

कर्नाटक में बुर्के पर जारी विवाद (Karnataka Hijab Row) के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें सिंदूर लगाकर आई छात्रा को कॉलेज में प्रवेश देने से इनकार कर दिया गया। दूसरी ओर एक वीडियो सामने आया है जिसमें छात्राओं ने हिजाब का समर्थन करने वालों पर सवाल उठाया है। पूछा है कि जब टिकटॉक वीडियो वे बिना हिजाब के डालती हैं तो पढ़ाई पर्दे में क्यों करना चाहती हैं?

रिपोर्टों के अनुसार विजयपुरा में एक छात्रा को सिंदूर लगाकर आने के कारण प्रवेश देने से मना कर दिया गया। कॉलेज परिसर में प्रवेश से पहले उसे सिंदूर हटाने के लिए कहा गया। घटना शुक्रवार (18 फरवरी 2022) की है। कॉलेज प्रशासन को आशंका थी कि माथे पर सिंदूर, हिजाब और भगवा शॉल की तरह समस्या पैदा कर सकता है।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने विवाद पर अंतरिम आदेश आने तक शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक ड्रेस पर रोक लगा रखी है। लेकिन इस मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील हिंदू लड़कियों द्वारा सिंदूर लगाने, चूड़ियाँ पहनने, सिखों द्वारा पगड़ी पहनने और रुद्राक्ष पहनने की दलील देते हुए हिजाब को भी इजाजत देने की अपील कर चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अदालत ने अपने आदेश में माथे पर सिन्दूर लगाने से नहीं रोका है।

इधर इस पूरे विवाद से वे भी प्रभावित हो रहे हैं जिनका बुर्के से लेना-देना नहीं है। ऐसे छात्र-छात्रा अब खुलकर इस विवाद से अपनी पढ़ाई को हो रहे नुकसान के बारे में खुल कर बात कह रहे हैं। ऐसी ही एक छात्रा को कहते सुना गया, “मुस्लिम लड़कियों को अगर पढ़ाई से प्रेम है तो उन्हें हिजाब के बिना ही स्कूल आना चाहिए। अगर वो ऐसा नहीं कर रहीं तो वो सिर्फ झगड़ना चाहती हैं।”

एक अन्य छात्रा ने कहा, “जब इन मुस्लिम छात्राओं को इंस्टाग्राम या टिकटॉक पर बिना हिजाब के वीडियो डालना होता है तब इन्हे कोई दिक्कत नहीं होती। लेकिन इन्हे कॉलेज में ही ये करना है। इनके चलते हमारी पढ़ाई बर्बाद हो रही है।” एक अन्य छात्रा ने कहा, ‘हम गरीब परिवारों से हैं। हमारे पिता दिहाड़ी मजदूर हैं। हमें स्कूल भेजने के लिए वो बहुत मेहनत करते हैं। इन प्रदर्शनों से हमें बहुत दिक्क्तें पेश आ रही हैं।”

स्कूल प्रशासन के नियमों का उललंघन करने वाले कई मुस्लिम छात्र अब अपनी जिद में हाई कोर्ट के आदेशों की भी अनदेखी कर रहे हैं। हाई कोर्ट ने अगले आदेश तक सभी छात्रों को स्कूल द्वारा निर्धारित ड्रेसकोड का पालन करने की सलाह दी है। लेकिन मुस्लिम छात्रों ने साफ़ कह दिया है कि हिजाब उनकी पहली प्राथमिकता है और कॉलेज को उनकी माँग माननी ही होगी।

सामने आ रही तमाम रिपोर्टों में कोर्ट की सलाह का उललंघन देखा जा सकता है। कई लड़कियों को अभी भी कॉलेज में बुर्का पहनकर घुसने की कोशिश करते देखा जा सकता है। इन छात्रों को PFI और जमात-ए-इस्लामी द्वारा समर्थन मिलने का भी दावा किया गया है। इसके जवाब में हिन्दू छात्रों ने भी प्रदर्शन कर कहा था कि अगर मुस्लिम छात्राएँ बुर्का पहनकर आएँगी तो वो भी भगवा शॉल में स्कूल आएँगे।

नोट: भले ही इस विरोध-प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव तक। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, लेकिन ये बुर्का के लिए हो रहा है।

‘योगी सरकार को फिर से वापस लाना है’: कंगना रनौत का वीडियो संदेश, नेटिजन्स बोले- जो राम को लाए हैं, हम उनको लाएँगे

उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनावों के बीच अभिनेत्री कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम के जरिए लोगों से वोट करने की अपील की। कंगना ने एक वीडियो संदेश के जरिए उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का समर्थन किया और अपने प्रशंसकों और लोगों से उन्हें वोट देने के लिए कहा।

अपने वीडियो संदेश में कंगना रनौत कहती हैं, “नमस्ते दोस्तों! हम सब जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में चुनाव चल रहे हैं और इस चुनावी कुरुक्षेत्र में एक मात्र हमारा हथियार है- वोट। याद रखें, हमें अपने चहेते योगी सरकार को फिर से वापस लाना है, इसलिए भर-भर के वोट देने होंगे और जब भी वोट देने जाएँ, अपने साथ तीन से चार लोगों को जरूर लेकर आएँ। याद रखिए, विजय का ये कीर्तिमान टूटे ना, एक भी वोट छूटे ना। जय श्रीराम।”

कंगना रनौत को राष्ट्रवाद के लिए आवाज उठाने वाली और बॉलीवुड की कुरीतियों के विरोध में मुखर रहने वाली अभिनेत्री के रूप में जाना जाता है। कंगना प्रदेश की योगी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार की प्रबल समर्थक हैं। वह भाजपा के समर्थन में समय-समय पर बयान देती रहती हैं।

यूपी में तपस्वी राजा रामचंद्र के बाद अब योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कंगना को राज्य सरकार के प्रमुख कार्यक्रम ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (OPOD) का ब्रांड एंबेसडर भी नियुक्त किया। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के हर जिले में होने वाले चावल, काला नमक, ज़रा ज़रदोज़ी जैसे स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना है।

कंगना रनौत ने 1 अक्टूबर 2021 को राज्य में अपनी आगामी फिल्म ‘तेजस’ की शूटिंग के दौरान लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। बैठक के दौरान योगी आदित्यनाथ ने कंगना रनौत को चांदी का एक सिक्का भेंट किया था, जिसका उपयोग 5 अगस्त 2020 को आयोजित राम मंदिर के ‘भूमि पूजन’ में किया गया था।

मुख्यमंत्री ने कंगना को अयोध्या की पवित्र भूमि पर दर्शन के लिए भी आमंत्रित किया। बॉलीवुड की प्रमुख अभिनेत्री ने 2020 में आयोजित भूमि पूजन के दौरान चढ़ाए गए चांदी के सिक्के की तस्वीर भी साझा की थी। कंगना ने योगी आदित्यनाथ द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते हुए साल 2022 के विधानसभा चुनावों के लिए उन्हें शुभकामनाएँ दी थीं।

कंगना ने लिखा था, “मैंने उत्तर प्रदेश सरकार को हमारी फिल्म (तेजस) की शूटिंग में उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और माननीय मुख्यमंत्री को उनके आगामी चुनाव में शुभकामनाएँ दीं। मैंने इस बात पर जोर दिया कि हमारे पास उत्तर प्रदेश में एक तपस्वी राजा श्री रामचंद्र थे और अब योगी आदित्यनाथ जी हैं… आप सत्ता में बने रहें महाराज जी।”

उत्तर प्रदेश चुनाव के तीसरे चरण में अवध और बुंदेलखंड के 16 जिलों के 59 सीटों पर 20 फरवरी को मतदान होंगे। इसके बाद 23 फरवरी, 27 फरवरी, 3 मार्च और 7 मार्च को मतदान होना है और 10 मार्च को मतों की गिनती की जाएगी और नतीजे घोषित किए जाएँगे।

भोजपुरी-मगही कई जिलों से आउट, पर हर जिले में उर्दू को मान्यता: झारखंड में भाषा के नाम पर भी ‘मुस्लिम तुष्टिकरण

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार (Jharkhand CM Hemant Soren) ने बोकारो और धनबाद जिले की क्षेत्रीय भाषा की सूची से भोजपुरी और मगही (Bhojpuri & Magahi) को भारी विरोध के बाद हटा दिया है। वहीं, उर्दू को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल रखा गया है। इसको लेकर सरकार ने संशोधित नई सूची जारी कर दी है।

नई अधिसूचना के अनुसार, भोजपुरी और मगही को क्षेत्रीय भाषा की सूची से हटा दिया गया, लेकिन राज्य के 24 जिलों की क्षेत्रीय भाषा में उर्दू भाषा को शामिल कर लिया गया। पिछली की अधिसूचना में उर्दू को किसी जिला में क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल नहीं किया गया था। वहीं, पलामू और गढ़वा में भोजपुरी को क्षेत्रीय भाषा की सूची में रखा गया है।

भोजपुरी-मगही को सूची से हटाने के लिए कॉन्ग्रेस ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर दबाव डाला था। शुक्रवार (18 फरवरी) को अधिसूचना जारी होने से ठीक पहले कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर और विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने सोरेन से मुलाकात की थी और इन दोनों भाषाओं को हटाने के लिए कहा था।

बता दें कि पिछले साल 24 दिसंबर को झारखंड सरकार ने जिला स्तर के पदों के लिए जनजातीय भाषाओं सहित क्षेत्रीय भाषाओं की सूची जारी की थी। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा मैट्रिक तथा इंटरमीडिएट स्तर की प्रतियोगिता परीक्षा में जिला स्तर के पदों के लिए इन भाषाओं को चिह्नित किया गया था।

इन भाषाओं को को हटाने के लिए बोकारो और धनबाद में काफी दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहा था। इस विरोध हिंसक हुए प्रदर्शन के दौरान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कोडरमा के पूर्व सांसद रवींद्र राय पर आंदोलनकारियों ने 30 जनवरी को हमला कर दिया था। उनके चालक को मारा-पीटा गया और उनके वाहन में तोड़फोड़ की गई थी। राय को भागकर नजदीकी थाने में अपनी जान बचानी पड़ी थी।

‘संविधान नहीं, कुरान मानेंगे’: अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के आतंकियों की पैरवी करेगा जमीयत, मदनी का ऐलान

अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में विशेष अदालत ने 18 फरवरी 2022 को 38 आतंकियों को फाँसी की सजा सुनाई। साथ ही 11 को आजीवन कारवास की सजा सुनाई गई थी। इन आतंकियों के बचाव में जमीयत उलेमा-ए-हिंद आगे आया है। उसने इनके लिए उच्च अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है। वहीं ब्लास्ट के मास्टरमाइंड सफदर नागौरी ने संविधान की जगह कुरान को तरजीह देने की बात कही है। नागौरी को भी फाँसी की सजा सुनाई गई है और फिलहाल वह भोपाल सेंट्रल जेल में बंद है।

जमीयत के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने विशेष अदालत के फैसले को ‘अविश्वसनीय’ बताया है। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है। मौलाना अरशद मदनी दारुल उलूम देवबंद के प्रिंसिपल भी हैं। रिपोर्ट के अनुसार मदनी ने कहा है कि जिनको सजा सुनाई गई है उनकी हाईकोर्ट में परैवी देश के नामी वकील करेंगे। जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट जाने की भी बात उन्होंने कही है।

वहीं दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस मामले में सजा सुनाए गए नागौरी के साथ सिमी के 5 और आतंकी भोपाल की जेल में बंद हैं। इनके नाम शिवली, शादुली, आमिल परवेज, कमरुद्दीन नागौरी, हाफिज और अंसाब हैं। इनमें अंसाब को उम्रकैद और अन्य 5 को फाँसी की सजा सुनाई गई है। रिपोर्ट के अनुसार सजा सुनाए जाने के बाद बाद भी नागौरी के चेहरे पर कोई शिकन नहीं दिखा। उसने जेल अधीक्षक दिनेश नरगावे से कहा, “संविधान हमारे लिए मायने नहीं रखता, हम कुरान का फैसला मानते हैं।”

बता दें कि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उस समय अहमदाबाद शहर में 26 जुलाई 2008 को लगभग 70 मिनट के भीतर 21 बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे। इस मामले में अहमदाबाद पुलिस ने 20 प्राथमिकी दर्ज की थी, जबकि सूरत में 15 अलग से FIR दर्ज की गईं थी।

बुर्के में पढ़ाती थी अंग्रेजी, हिजाब के समर्थन में इस्तीफा: 15 छात्राओं पर FIR, कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने कहा- ड्रेस कोड वापस हो

कर्नाटक से शुरू हुआ बुर्का और हिजाब विवाद (Karnataka Burqa/Hijab Controversy) थमने का नाम नहीं ले रहा है। कहीं, मुस्लिम छात्राएँ कॉलेज प्रशासन के आदेशकी धज्जियाँ उड़ाते बुर्के में कॉलेज पहुँच रही हैं और नारेबाजी कर रही हैं तो कहीं हिजाब के नाम पर इस्तीफा दिया रहा है। वहीं, राजनीतिक दल भी इस मौके को भूनाने से नहीं चुक रहे हैं।

मुस्लिम लेक्चरर का इस्तीफा

कर्नाटक के तुमकुरु जिले में स्थित जैन प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में अंग्रेजी पढ़ाने वाली चाँदनी नाम की लेक्चरर ने हिजाब को लेकर इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने हिजाब को अपना संवैधानिक अधिकार बताया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में खुद को चाँदनी बताने वाली लेक्चरर ने बताया, “मैं जैन पीयू कॉलेज में तीन साल से गेस्ट लेक्चरर के तौर पर काम कर रही हूँ। इन तीन वर्षों में मुझे कोई समस्या नहीं हुई और मैं आराम से काम कर रही थी।”

वीडियो में लेक्चरर ने आगे बताया, “कल (बुधवार, 16 फरवरी को) प्रधानाध्यापक ने मुझे फोन कर कहा कि उन्हें आदेश मिला है कि कक्षा के दौरान हिजाब जैसे धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इससे मेरे स्वाभिमान को ठेस पहुँची है। मैंने इस्तीफा दे दिया है, क्योंकि मैं उस कॉलेज में बिना हिजाब के काम नहीं कर सकती हूँ।”

हिजाब पहनकर आने वाली लड़कियों के खिलाफ FIR

उधर तुमकुरु में ही पुलिस ने एक सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज की 15 छात्राओं के खिलाफ IPC की धारा 144 का तहत निषेधाज्ञा के उल्लंघन का मामला दर्ज किया है। बुधवार (16 फरवरी) को टाउनहॉल के पास गवर्नमेंट एम्प्रेस जूनियर पीयू कॉलेज में लगभग 40 छात्राएँ हिजाब और बुर्का पहनकर कक्षा में घुसने का प्रयास कर रही थीं। जब कॉलेज प्रशासन ने उन्हें रोक दिया, तब वो नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन करने लगीं।

इस दौरान इन छात्राओं ने बहुत कम दूरी तक और बहुत कम समय के लिए रैली भी निकाली। उपायुक्त के आदेश के बाद प्रिंसिपल ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाई है। हालाँकि, FIR में किसी का नाम नहीं दिया गया है।

उधर आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित प्रसिद्ध आंध्रा लोयला कॉलेज में मुस्लिम छात्राएँ हिजाब पहनकर क्लास करने पहुँच गईं। हालाँकि कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्हें कक्षा से बाहर कर दिया और हिजाब उतार कर आने के लिए कहा। कॉलेज का कहना है कि

हिजाब पर कॉन्ग्रेस की राजनीति

कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने शुक्रवार (18 फरवरी) को कहा कि सरकार वक्फ विभाग के अंतर्गत आने वाले अल्पसंख्यक संस्थानों को हिजाब मानदंडों का पालन करने वाले सर्कुलर को वापस ले। प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार और विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश उन संस्थानों तक ही सीमित है, जिनमें कॉलेज विकास समितियों (सीडीसी) ने यूनीफॉर्म निर्धारित की है। सभी कॉलेज इसके दायरे में नहीं आते हैं।

सिद्धारमैया ने कहा कि वक्फ विभाग ने एक पत्र जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि यह आदेश विभाग द्वारा संचालित आवासीय स्कूलों और कॉलेजों पर लागू होता है। विभाग द्वारा चलाए जा रहे संस्थानों में सीडीसी नहीं है। इसलिए इसका सर्कुलर हाईकोर्ट के आदेश के विपरीत है।