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3 राज्य की 165 सीटों पर हो रहा मतदान: UP के संभल में BJP प्रत्याशी पर सपाइयों ने किया हमला

साल 2022 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर 14 फरवरी को 3 राज्यों की 165 सीटों पर वोट डल रहे हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश के संभल से खबर आई है कि वहाँ BJP प्रत्याशी पर जानलेवा हमला हुआ। बताया जा रहा है कि BJP प्रत्याशी के काफिले पर हमले के मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। मामला कैलादेवी के खिरनी तिराहा का है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, कथिततौर पर असमोली की सपा विधायक पिंकी यादव के समर्थकों ने खिरनी पुलिस चौकी के पास BJP प्रत्याशी हरेंद्र सिंह के काफिले पर हमला किया। घटना में एक BJP समर्थक के चोटिल होने और एफएसटी मजिस्ट्रेट के एक सुरक्षाकर्मी समेत दो सिपाहियों के घायल होने की खबर है।

पिंकी यादव पति-भाई समेत समर्थकों पर हुआ केस दर्ज

आरोप है कि सपा कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए हमले का वीडियो बनाने का जब मजिस्ट्रेट ने आदेश दिया तो सपा समर्थकों ने कैमरे पर डंडा मारकर रिकॉर्डिंग रोकने का प्रयास किया। पुलिस ने बताया कि समाजवादी कार्यकर्ताओं ने BJP प्रत्याशी पर तब हमला बोला जब चुनाव आयोग की फ्लाइंग स्क्वॉड टीम उनके वाहन को चेक कर रही थी।

हमलावरों ने पुलिस टीम के हस्तक्षेप करने पर उनके ऊपर भी हमला किया। सूचना मिलने पर मौके पर अतिरिक्त पुलिस टीमें वहाँ पहुँची लेकिन तब तक हमलावर वहाँ से भाग चुके थे। पुलिस ने इस संबंध में 5 लोगों के विरुद्ध केस दर्ज किया है जिसमें सपा विधायक के पति प्रमोद कुमार और भाई समेत उनके सपा समर्थकों के नाम है। पुलिस ने ये केस धारा 307, 332 एवं 7 क्रिमिनल ला एवर्टमेंट एक्ट आदि गंभीर धाराओं में दर्ज किया है। 2 आरोपित मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं।

लाठी, रॉड के साथ आए सपा समर्थकों ने किया हमला

पुलिस को शिकायतकर्ता राहुल कुमार ने बताया कि वो हरेंद्र कुमार के साथ बर्थडे पार्टी से लौट रहे थे। तभी उनकी गाड़ी फ्लाइंग स्क्वॉड टीम ने रोकी। वहीं प्रमोद यादव के नेतृत्व में सपा कार्यकर्ताओं ने हमला किया। शिकायतकर्ता के अनुसार, इन लोगों के पास लाठी, डंडे, लोहे की रॉड और देसी पिस्तौल थी। उन्होंने ओपन फायर किया और वाहन को भी तोडा। खुद को बचाने के लिए हम पुलिस चौकी में घुशे। पर, हमलावर वहाँ भी आ गए और पुलिस टीम पर हमला करके फ्लाइंग स्क्वॉड का कैमरा तोड़ दिया।

14 फरवरी को 3 राज्यों में वोटिंग

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान में 14 फरवरी को प्रदेश के 9 जिलों- सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, अमरोहा, बदायूं, बरेली और शाहजहाँपुर जिले की 55 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। इससे पहले 10 फरवरी को हुए मतदान के प्रथम चरण में 58 सीटों के लिए 60.71 फीसद मतदान हुआ था। यूपी के अलावा उत्तराखंड की 70 सीट और गोवा की 40 सीटों पर भी आज मतदान हो रहा है।

गुजरात का सुल्तान जहरीले थूक से लेता था जान, संत एकनाथ महाराज भी नहीं बचे: ‘थूक जिहाद’ के अनसुने किस्से

इस्लाम में थूक बहुत ही मुक़द्दस है। इस्लामी किताबों में ऐसे बहुत से संदर्भ मिलते हैं, जिनमें बताया गया है कि पैगंबर रहमत के लिए लोगों पर थूका करते थे। फराह खान ने एक वाकया शेयर करते हुए कहा था कि आमिर खान अभिनेत्रियों को कहते थे, मुझे अपना हाथ पढ़ने के लिए दो और फिर उस पर थूक देते थे। मेरठ और गाज़ियाबाद से थूक वाली रोटी के वीडियो सभी देख ही चुके हैं और तबलीगी जमात ने आइसोलेशन के दौरान जिस प्रकार से थूक-थूक कर उत्पात मचाया, खबरें पब्लिक डोमेन में हैं। हेयर स्टाइलिस्ट जावेब हबीब के ‘इस थूक में जान है‘ वाले कांड के बाद तो कहने को कुछ बचा ही नहीं है।

गौर करें तो यह मात्र संयोग नहीं हो सकता कि मुस्लिम कौम से हर स्तर का व्यक्ति थूकने की वृत्ति में लिप्त है। भारत के मध्यकालीन इतिहास में भी ऐसे बहुत से वाकये मिलते हैं जब क्या तो सुल्तान, क्या तो नवाब और क्या ही आम मुसलमान, सबने अपने थूक से हिन्दुओं को परेशान कर दिया।

महमूद बेगड़ा का जहरीला थूक

महमूद बेगड़ा ने 1458 से 1511 के बीच गुजरात पर शासन किया। वह एक कट्टर इस्लामी शासक था। उसने अपने शासनकाल में वह सब कुछ किया जिसकी झलक आगे चलकर औरंगजेब में दिखती है। उसने गिरनार के राजा को जबरदस्ती इस्लाम कबूलवाया। साथ ही द्वारका एवं अनेक हिन्दू मंदिरों को भी नष्ट किया।

बेगड़ा शासन से ज्यादा अपनी राक्षसी भूख के लिए कुख्यात हुआ। ‘मीरात-ए-सिकंदरी’ से ज्ञात होता है कि नाश्ते में वह एक प्याला शहद, एक प्याला मक्खन और 100-150 तक मोटे केले खा जाता था। वह प्रतिदिन 10-15 किलो खाना खाता था। रात में नींद खुले तो खाने के लिए अपने तकिए के दोनों ओर माँस से भरे समोसे रखवाता था।

द बुक ऑफ़ ड्यूरेटे बाबोसा वॉल्यूम 1 नाम की पुस्तक का अंश

बेगड़ा के शासनकाल के दौरान पुर्तगाली यात्री ‘बाबोसा’ ने गुजरात का दौरा किया था। उसकी पुस्तक ‘द बुक ऑफ़ ड्यूरेटे बाबोसा वॉल्यूम 1’ में लिखा है, “बेगड़ा को बचपन से ही जहर देकर पाला गया था, क्योंकि उसके पिता नहीं चाहते थे कि कोई जहर देकर उसकी हत्या कर दे।” बेगड़ा ने पहले कम मात्रा में जहर खाने से शुरुआत की जिससे कि उसे नुकसान ना हों और आगे चलकर उसके शरीर में जहर की मात्रा इतनी अधिक हो गई कि यदि मक्खी भी उसके शरीर को छूती तो वह मर जाती। यही नहीं उसके शरीर में मौजूद जहर के कारण बहुत सी औरतें भी उसके साथ सोने के कारण मर जाती थीं।

ऐसा ही वर्णन इटालियन यात्री लुडोविको डि वर्थेमा की पुस्तक ‘इटिनेरारियो डी लुडोइको डी वर्थेमा बोलोग्नीज़’ में भी मिलता है। यहाँ वर्थेमा एक दिलचस्प उल्लेख करते हैं कि बेगड़ा जब भी किसी को मारना चाहता तो उसके कपड़े उतरवा कर उसके सामने जायफल और पान चबाता और जब उसका मुँह (थूक से) भर जाता तो वह सामने वाले व्यक्ति पर पिचकारी मार देता। सामने वाला व्यक्ति जहरीले थूक के कारण आधे घंटे में ही मर जाता था।

इटालियन यात्री लुडोविको डि वर्थेमा की पुस्तक का अंश

बेगड़ा जिस प्रकार की इस्लामी शख्सियत रखता था, उससे समझना मुश्किल नहीं कि उसके ‘जहरीले थूक’ के शिकार हुए ज्यादातर लोग कौन रहे होंगे।

एकनाथ महाराज स्नान करके आते और थूक देता था यवन

थूक जिहाद का एक किस्सा महाराष्ट्र के महान संत एकनाथ महाराज से जुड़ा हुआ है। उनका जन्म 1533 में महाराष्ट्र के पैठण में एक महान भागवत-धर्मी संत भानुदास के वंश में हुआ था। उन्होंने ‘भावार्थ रामायण’ जैसे महान ग्रन्थ की रचना कर महाराष्ट्र की भक्ति परंपरा में ज्ञानेश्वर एवं तुकाराम के बीच सेतु का कार्य किया था।

एकनाथ चरित्र के अंश

एकनाथ महाराज के जीवन का एक प्रसिद्ध किस्सा है। गीताप्रेस गोरखपुर की एकनाथ चरित्र में उल्लेख मिलता है कि पैठण में एकनाथजी के स्थान से गोदावरी जाने वाले मार्ग में एक यवन रहा करता था। वह मार्ग में आते-जाते हिन्दुओं को बहुत तंग किया करता था। एकनाथ महाराज जब भी स्नान करके लौटते तो वह उनपर थूक की पिचकारी छोड़ देता था। इस कारण किसी-किसी दिन महाराज को कई बार स्नान करना पड़ता था। एकबार वह यवन अत्यंत उन्मत्त होकर महाराज के बार-बार स्नान कर के लौटने पर उनके शरीर पर बार-बार थूकता ही रहा। वह थूकता जाए और महाराज को स्नान के लिए जाना पड़ता। इस प्रकार कहा जाता है कि 108 बार महाराजजी को स्नान करना पड़ा था।

दुनिया का सबसे बड़ा इस्लामी मुल्क, जहाँ हिजाब को यूनिफॉर्म का हिस्सा बनाने पर स्कूलों को मिलती है सज़ा: इंडोनेशिया में है ‘बैन’

कर्नाटक के मुस्लिमों की जिद है कि उनके घर की छात्राएँ बुर्का पहन कर स्कूल-कॉलेजों में जाएँ और शैक्षणिक संस्थान में यूनिफॉर्म के तय नियमों की धज्जियाँ उड़ाएँ। इसे इस्लाम में अनिवार्य बताते हुए कर्नाटक उच्च-न्यायालय में भी जिरह की जा रही है। लेकिन, इस दौरान वो ये भूल गए कि दुनिया के सबसे बड़े इस्लामी मुल्क इंडोनेशिया ने स्कूलों पर हिजाब को अनिवार्य बनाने से प्रतिबंधित कर रखा है। वहाँ नॉन-मुस्लिमों को हिजाब के लिए मजबूर किए जाने के बाद देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद ये नियम बनाने पड़े।

इंडोनेशिया के 20 से अधिक प्रांतों में कई स्कूलों ने हिजाब को स्कूली छात्राओं के यूनिफॉर्म के तहत अनिवार्य बना रखा था। ये नियम न सिर्फ छात्राओं, बल्कि महिला शिक्षकों के लिए भी था। इंडोनेशिया में आधिकारिक रूप से 6 धर्मों को मान्यता प्राप्त है, लेकिन वहाँ की 86.7% जनसंख्या मुस्लिम है। अब वहाँ के स्कूल किसी मजहबी वस्त्र को यूनिफॉर्म का हिस्सा नहीं बना सकते। पश्चिमी सुमात्रा के एक स्कूल ने गैर-मुस्लिमों को भी हिजाब पहनने को कहा था, जिसके बाद ये विवाद शुरू हुआ था।

इनमें से एक लड़की के माता-पिता ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जो पूरे मुल्क तक फ़ैल गया था। फिर फरवरी 2021 में वहाँ की सरकार के कड़े कदम उठाए। इंडोनेशिया के मजहबी मामलों के मंत्री याक़ूत चोलिल कौमास ने कहा था कि पश्चिमी सुमात्रा का मामला तो बस दिख रहा था, लेकिन ऐसे कई और मामले आए थे। उन्होंने कहा था कि मजहब के नाम पर किसी दूसरे व्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन नहीं किया जा सकता। एक ईसाई लड़की को हिजाब पहनने के लिए मजबूर किए जाने के एक वीडियो के बाद वहाँ की सरकार ने इतना बड़ा निर्णय ले लिया था।

16 साल की लड़की का वीडियो वायरल होने के बाद इंडोनेशिया की सरकार ने सभी स्कूलों को एक महीने का समय दिया, हिजाब/बुर्का सम्बंधित नियमों को हटाने के लिए। नियम बनाया गया कि इसे न मानने वाले स्कूलों पर कार्रवाई होगी और जुर्माना लगेगा। मुल्क की सरकार ने माना कि ये व्यक्तिगत अधिकार है और स्कूल इस बारे में फैसला नहीं ले सकते। आज कर्नाटक में मुस्लिम लड़कियों को हिजाब में स्कूल में एंट्री न मिलने पर उनके पैरेंट्स शिक्षक-शिक्षिकाओं से झगड़ रहे हैं, उन पर चिल्ला रहे हैं।

बुर्के में होंगी मेडिकल की छात्राएँ, नमाजी टोपी में उनसे 2 मीटर दूर रहेंगे छात्र: वैलेंटाइन डे पर पाकिस्तानी कॉलेज का फरमान

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक मेडिकल कॉलेज ने अपने स्टूडेंट्स को वैलेंटाइन डे पर दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनमें लड़कियों को हिजाब (बुर्का) पहनने और लड़कों को नमाज वाली सफेद टोपी पहनने के लिए कहा गया है। इसके अलावा लड़कों को लड़कियों से दो मीटर की दूरी बनाए रखने के भी निर्देश दिए हैं।

पाकिस्तान के अखबार ‘फ्राइडे टाइम्स’ की खबर के मुताबिक, “इस्लामाबाद इंटरनेशनल मेडिकल कॉलेज ने शनिवार (12 फरवरी 2022) को एक नोट जारी कर विद्यार्थियों को वैलेंटाइन डे समारोहों और इससे जुड़ी ऐसी गतिविधियाँ, जो युवाओं को गलत रास्ते पर ले जाती हैं, उनमें शामिल होने से मना किया गया है।”

छात्राओं के लिए हिजाब और मर्दों के लिए सफेद टोपी पहनने का निर्देश

नोट में कहा गया है, ‘‘सभी छात्राओं को विश्वविद्यालय ड्रेस कोड के अनुसार हिजाब के साथ सिर, गर्दन और छाती को अच्छी तरह से ढका हुआ होना चाहिए। सभी छात्रों को नमाज वाली सफेद टोपी पहनने का सख्त आदेश दिया गया है।’’ 

वैलेंटाइन डे मनाने से रोकने के लिए गश्त करेंगे स्टाफ के लोग

नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले विद्यार्थियों को पकड़ने के लिए कॉलेज स्टॉफ के सदस्य परिसर में गश्त करेंगे। जो भी लोग इन नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएँगे, उन पर 5,000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। कॉलेज के सर्कुलर के हवाले से खबर में कहा गया है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा।

बता दें कि यह रिफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से संबद्ध एक मेडिकल स्कूल है जिसकी स्‍थापना 1996 में की गई थी। मालूम हो कि ‘वैलेंटाइन डे’ (Valentine’s Day) हर साल 14 फरवरी को मनाया जाता है। वैसे यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्‍तान में छात्राओं के लिए ऐसे ड्रेस कोड के निर्देश किसी कालेज की ओर से जारी किए गए हैं। पाकिस्‍तान में पहले भी ऐसी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।

मदरसे में पढ़ता था 10 साल का बच्चा, अरबी पढ़ाने वाला शोएब अख्तर करता था कुकर्म: जख्म और खून देख हैरान रह गए परिजन

तेलंगाना के हैदराबाद स्थित दारूल उलूम मदरसे में एक 10 साल के बच्चे के साथ कुकर्म का मामला सामने आया है। आरोपित मदरसे में अरबी पढ़ाने वाला 25 साल का शोएब अख्तर है। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार यह मामला तब सामने आया जब बच्चा पिछले कई दिनों से लगातार दर्द की शिकायत कर रहा था। उसके जख्म और खून देख परिजन हैरान रह गए।

डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के अनुसार रविवार 7 फरवरी 2022 की रात पीड़ित के परिजनों ने महसूस किया कि उनका बच्चा लगातार दर्द की शिकायत कर रहा है। जब उन्होंने पूछताछ की तो पीड़ित ने बताया कि शोएब अख्तर उसे 10 दिन से मजबूर कर रहा था। इसके बाद पीड़ित के परिजन और कुछ स्थानीय लोगों ने मदरसे का घेराव किया। मेडिकल परीक्षण के बाद आरोपित मौलाना को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार पीड़ित का दो महीने पहले ही मदरसे में दाखिला करवाया गया था।

उल्लेखनीय है कि मदरसों से इस तरह की घटना लगातार सामने आती रही है। बीते साल नवंबर में दादरा नगर हवेली के सिलवासा स्थित एक मदरसे के छात्रावास में रहकर पढ़ने वाली नाबालिग लड़की ने मौलवी पर हॉस्टल में ही रेप करने का आरोप लगाया था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपित मौलवी शेख मोहम्मद तारिक को पॉस्को एक्ट के तहत करवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया था।

इसी तरह इस साल की शुरुआत में बिहार के सीतामढ़ी जिले से मदरसे की नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म का मामला सामने आया था। रिपोर्ट के मुताबिक मौलवी तबरेज़ ने मदरसे में पढ़ने के लिए आई नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार कर उसे गर्भवती कर दिया। उसने इस हरकत को रिकॉर्ड भी कर लिया और वीडियो के जरिए पीड़िता को ब्लैकमेल कर रहा था।

बीते साल अगस्त में कर्नाटक के तुमकुरु जिले में नाबालिग लड़के से अप्राकृतिक यौनाचार के दोषी पाए गए मुफ्ती मुशर्रफ को बेंगलुरु की स्पेशल कोर्ट ने 11 साल जेल की सजा सुनाई थी। उत्तर प्रदेश का रहने वाला मुशर्रफ तुमकुरु में अमलापुर के पास एक मदरसे में शिक्षक था। उसने 17 अप्रैल, 2015 को मदरसे में एक नाबालिग बच्चे के साथ कुकर्म किया था। यह घटना तब सबके सामने आई, जब नाबालिग की माँ मदरसे में उससे मिलने गई। 13 वर्षीय बच्चे ने उस समय अपनी माँ को मुशर्रफ की करतूत के बारे में बताया और उसे मदरसे से वापस ले जाने के लिए कहा था।

बुर्का के समर्थन में काली पट्टी बाँध कर विधानसभा पहुँचे कॉन्ग्रेस MLAs, शिक्षकों से लड़ बैठे मुस्लिम अभिभावक: कर्नाटक HC में सुनवाई

कर्नाटक के कई जिलों में स्कूलों के आसपास धारा-144 लगा दी गई है। उडुपी, शिवमोगा और दक्षिण कन्नड़ जिलों में ये प्रतिबंध लगाए गए हैं। वहीं विधानसभा में कॉन्ग्रेस पार्टी भी इस मामले में काली पट्टी पहन कर विरोध प्रदर्शन किया। मंत्री ईश्वरप्पा के भगवा झंडे वाले बयान को लेकर भी सभी कॉन्ग्रेस के विधायकों और विधान पार्षदों ने विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है। बुर्का विवाद के बीच ईश्वरप्पा ने कभी न कभी भगवा झंडे के राष्ट्रीय ध्वज बनने की बात की थी।

वहीं मांड्या के रोटरी स्कूल के बाहर मुस्लिम छात्रों के अभिभावकों और स्कूल के शिक्षकों के बीच बहस हो गई। स्कूल ने छात्राओं को अंदर आने से पहले हिजाब उतारने को कहा, जिस पर ये सारा विवाद हुआ। अभिभावकों का कहना था कि लड़कियाँ क्लासरूम के अंदर जाकर हिजाब उतार देंगी, लेकिन स्कूल हिजाब के साथ उन्हें एंट्री नहीं दे रहा है। वीडियो में छात्राओं के अभिभावकों को शिक्षकों से लड़ते हुए देखा जा सकता है। तमिलनाडु में भी कई इस्लामी संगठनों ने कर्नाटक सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

कोयंबटूर में ‘येगातुवा मुस्लिम जमात’ के बैनर तले कई मुस्लिम महिलाओं ने तिरंगा झंडा लेकर विरोध प्रदर्शन किया। ‘वीमेन लिबरेशन पार्टी’ ने भी विरोध प्रदर्शन किया। वहीं कर्नाटक के उडुपी में छात्रों ने कहा कि प्रदर्शनकारी शांति भंग करना चाहते हैं, ऐसे में ऑनलाइन क्लासेज ही लिए जाए। बुर्का विवाद पर कर्नाटक के गृह मंत्री अरगा ज्ञानेंद्र ने कहा कि याचिका डालने वालों के कुछ संगठनों से सम्बन्ध हैं और इस बारे में जानकारियाँ जुटाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भड़काऊ पाए जाने पर कार्रवाई होगी।

उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की गलत छवि बनाए जाने की साजिश करार दिया। मेंगलुरु में भी स्कूलों के 200 मीटर के घेरे में धारा-144 लागू की गई है। सोमवार (13 फरवरी, 2022) को ही वहाँ के स्कूल-कॉलेज खुल रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कह चुके हैं कि व्यवस्था संविधान के हिसाब से चलेगी, न कि शरीयत के हिसाब से। असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि एक दिन कोई हिजाबी भारत की प्रधानमंत्री बनेगी, जिस पर उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पीएम मोदी ने तिल तलाक हटा कर मुस्लिम महिलाओं को बेड़ियों से मुक्त किया।

आज 2:30 बजे से इस मसले पर कर्नाटक उच्च-न्यायालय में भी सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई फिर से शुरू करेगी। सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले में सुनवाई से इनकार कर चुका है। उसका कहना है कि पहला कर्नाटक HC इस मामले को सुने। केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने भी विदेश से आ रहे बयानों पर कहा कि ये हमारा आतंरिक मुद्दा है। उडुपी के विधायक रघुपति भट्ट ने लोगों के साथ एक बैठक के बाद कहा कि जिन स्कूल-कॉलेजों में यूनिफॉर्म के तय नियम नहीं हैं, वहाँ हिजाब की अनुमति दी जा सकती है।

मोदी सरकार का चीन को एक और झटका: इन 54 चाइनीज ऐप्स पर लगेगा प्रतिबंध, सुरक्षा को लेकर उठाया बड़ा कदम

भारत सरकार ने एक बार फिर चीन पर डिजिटल स्ट्राइक की है। बताया जा रहा है कि भारत सरकार देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले 54 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाएगी। समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, इन 54 चीनी ऐप्स में ब्यूटी कैमरा, स्वीट सेल्फी एचडी, सेल्फी कैमरा, इक्वलाइजर और बास बूस्टर, आइसोलैंड 2, एशेज आफ टाइम लाइट, वाइवा वीडियो एडिटर, टेनसेंट एक्सरिवर, ओनमोजी चेस, ओनमोजी एरिना, ऐपलाक, डुअल स्पेस लाइट शामिल हैं।

बता दें कि पिछले साल जून में भारत ने देश की संप्रभुता और सुरक्षा के खतरे को ध्यान में रखते हुए व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे टिकटाक, वीचैट और हेलो सहित 59 चीनी मोबाइल एप्लिकेशन पर प्रतिबंध लगा दिया था। 29 जून, 2021 के आदेश में प्रतिबंधित अधिकांश ऐप्स को लेकर खुफिया एजेंसियों ने चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि यूजर्स डेटा इकट्ठा कर रहे हैं और संभवतः उन्हें बाहर भी भेज रहे हैं। इसके बाद 27 जुलाई, 2021 को भी 47 ऐप बैन किए गए थे। सरकार ने यह कदम तब उठाया था, जब लद्दाख में तनाव बढ़ रहा था और चीनी सैनिकों ने दो बार घुसपैठ की कोशिश की थी।

सितंबर, 2021 में भी भारत सरकार ने 118 चीनी मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया था। भारत सरकार की तरफ से ये कहा गया था कि भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए ये ऐप्स हानिकारक हैं। फिर नवंबर में भारत सरकार ने 43 मोबाइल ऐप्स बैन किया था। इसे देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए खतरा बताया गया था।

चीन ने ऐप्स पर प्रतिबंध लगाए जाने के भारत सरकार के फैसले का विरोध किया था। चीन ने कहा था कि यह कार्रवाई विश्व व्यापार संगठन के गैर-भेदभावपूर्ण सिद्धांतों का उल्लंघन है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा यह कार्रवाई 20 भारतीय सैनिकों के बलिदान के बाद चीन के खिलाफ की गई थी। पिछले साल पूर्वी लद्दाख की गालवान घाटी में हिंसक झड़प में 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

पुलवामा की बरसी पर भी बाज नहीं आया विपक्ष: राहुल गाँधी के बाद तेलंगाना के CM ने उठाए सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल, कहा- BJP करती है गलत प्रचार

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी द्वारा भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाए जाने के बाद तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने भी इस विषय पर कॉन्ग्रेस नेता को समर्थन दिया है। पुलवामा की तीसरी बरसी के मौके पर उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल पूछा जाना गलत नहीं है। वो भी इस पर सबूत माँगते हैं।

चंद्रशेखर राव ने अपना ये बयान उस समय दिया जब एक पत्रकार ने उन्हें बताया कि असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि आखिर उन्होंने राहुल गाँधी के सर्जिकल स्ट्राइक वाले सवाल पर कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी। इस पर चंद्रशेखर बोले,

“सर्जिकल स्ट्राइक पर राहुल गाँधी का सबूत माँगना गलत नहीं है। मैं भी सबूत माँग रहा हूँ कि भारत सरकार प्रमाण दे। वो लोगों के प्रतिनिधि हैं। बीजेपी हमेशा गलत प्रचार करती है। इसलिए लोग सबूत माँग रहे हैं। लोकतंत्र में आप राजा नहीं हैं। राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं और वायनाड के सांसद हैं। सवाल करना उनका अधिकार है।”

केसीआर ने कहा, “भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए सर्जिकल स्ट्राइक का इस्तेमाल करना चाहती है। हम निश्चित रूप से इस पर सवाल उठाएँगे। सेना को इस सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय मिलना चाहिए ना कि भाजपा को।” 

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों उत्तराखंड की एक रैली में असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गाँधी द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल पूछे जाने पर प्रश्न खड़े किए थे। उन्होंने कहा था, “वह (राहुल गाँधी) हमारी सेना से सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत माँगते हैं, क्या हमने कभी आपसे सबूत माँगा कि आप राजीव गाँधी के बेटे हैं या नहीं? आपको क्या अधिकार है मेरी सेना से सबूत माँगने का?”

बता दें कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने केसीआर की टिप्पणी पर भी बयान दिया है। उन्होंने कहा, “पुलवामा हमले की बरसी पर विपक्ष ने फिर सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाकर हमारे शहीदों का अपमान किया है। गाँधी परिवार के प्रति अपनी वफादारी साबित करने के प्रयास में, उन्होंने सेना को धोखा दिया है। मेरी वफादारी सेना के साथ है। जीवन भर मुझे गाली दो, मुझे फर्क नहीं पड़ता।”

बालों में फूल लगाते नेहरू… गंगा से बनी कोठेवाली गंगूबाई: जानिए पूर्व PM से रिश्ता, आलिया भट्ट बनी हैं ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’

इन दिनों फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी (Gangubai Kathiawadi) चर्चा में है। संजय लीला भंसाली के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म 25 फरवरी 2022 को रिलीज होनी है। आलिया भट्ट (Alia Bhatt) की फिल्म में मुख्य भूमिका है। शांतनु माहेश्वरी गंगूबाई के पति और अजय देवगन करीम लाला की भूमिका में हैं। यह फिल्म असल जिंदगी की कहानी पर आधारित बताई जाती है। फिल्म अपने कुछ दृश्यों को लेकर भी चर्चा में है, जिनमें से कुछ पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से जुड़े बताए जाते हैं।

गंगा के गंगूबाई काठियावाड़ी बनने की कहानी

यह फिल्म हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया क्वींस ऑफ मुंबई’ पर आधारित है। गंगूबाई का असली नाम गंगा हरजीवनदास था। गुजरात की गंगा हरजीवनदास कब गंगूबाई बन गई, न उसे पता चला और न ही दुनिया को इसकी खबर हुई। एक संपन्‍न परिवार में पैदा हुई गंगा का सपना था कि वह बड़ी होकर ऐक्‍ट्रेस बने। माँ-बाप ने बेटी को बड़े प्‍यार से पाला। लेकिन कॉलेज के दिनों में गंगा को प्‍यार हो गया। 16 साल की उम्र में उसे जिससे प्‍यार हुआ, वो गलत था। यह गंगा की जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हुई।

गंगा को उसके पिता के अकाउंटेंट रमनिक लाल से इश्‍क हो गया। परिवार वाले इसके ख‍िलाफ थे। गंगा को ऐक्‍ट्रेस भी बनना था। इसलिए वह रमनिक के साथ भागकर मुंबई आ गई। गंगा और रमनिक ने शादी कर ली। लेकिन अभी गंगा मुंबई की चकाचौंध को निहार ही रही थी कि पति रमनिक लाल ने उसे महज 500 रुपए में कमाठीपुरा के एक वेश्‍यालय को बेच दिया

एस हुसैन जैदी ने अपनी किताब ‘माफिया क्वीन्स ऑफ मुंबई’ में लिखा है कि माफिया डॉन करीम लाला के गैंग के एक सदस्य ने गंगूबाई के साथ रेप किया था। जिसके बाद अपने लिए गंगूबाई लड़ीं और करीम लाला से मुलाकात की। गंगूबाई ने करीम लाला को राखी बाँधी और उन्हें अपना भाई बना लिया। इसके बाद गंगा की जिंदगी बदल गई और यहीं से गंगा के ‘गंगूबाई काठ‍ियावाड़ी’ बनने की कहानी शुरू हुई।

गंगा हरजीवनदास गुजरात के काठीवाड़ की रहने वाली थी। इसलिए लोग इन्हें गंगूबाई काठ‍ियावाड़ी पुकारने लगे। वह मुंबई के सबसे नामचीन वेश्‍यालय की मालकिन बन गई। कहा जाता है कि गंगूबाई कोठे में उसी लड़की को रखती थीं जिस लड़की की मर्जी हो।

हुसैन जैदी की किताब में बताया गया है कि गंगूबाई का प्रभाव सिर्फ अंडवर्ल्ड और गैंगस्टर्स तक ही नहीं था, बल्कि बड़े-बड़े राजनेता भी उनसे प्रभावित थे। गंगूबाई ने वुमन इम्पावरमेंट समिट में वेश्यावृत्ति के पक्ष में ऐसी स्पीच दी जो काफी सुर्खियों में आ गई। धीरे-धीरे गंगूबाई के चर्चे उस वक्त प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहर लाल नेहरू तक पहुँचे।

गंगूबाई की बाल में फूल लगाते नेहरू

जवाहर लाल नेहरू गंगूबाई से काफी प्रभावित थे। उन्होंने मुलाकात के दौरान गंगूबाई से कहा कि उन्होंने यह काम क्यों चुना, जबकि वह एक अच्छा पति चुनकर बेहतर जिंदगी गुजार सकती हैं। इस पर गंगूबाई ने नेहरू से पूछा कि क्या आप मुझे मिसेज नेहरू बनाएँगे? उनके सवाल का जवाहर लाल नेहरू के पास कोई जवाब नहीं था। तब गंगूबाई ने कहा कि उपदेश देना बहुत आसान होता है, लेकिन इसे कर पाना मुश्किल। इसके अलावा फिल्म में एक ऐसा भी सीन है जिसमें पूर्व पीएम नेहरू को गंगूबाई के बालों में फूल लगाते हुए दिखाया गया है।

आलिया भट्ट की ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ के सीन पर कैंची?

यह फिल्म सेंसर बोर्ड से U/A सर्टिफिकेट के साथ पास हो गई है, लेकिन अब खबर आ रही है कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म के 4 सीन में कट लगाने को कहा है। रिपोर्ट के मुुताबिक सेंसर बोर्ड ने फिल्म के मेकर्स से 2 सीन डिलीट करने के लिए कहा है। इसके साथ ही बोर्ड ने फिल्म के कुछ डायलॉग्स में से कुछ शब्दों को हटाने को भी कहा है। खबर है कि बोर्ड ने फिल्म के मेकर्स से वह सीन बदलने के लिए भी कहा है, जिसमें पूर्व पीएम नेहरू को गंगूबाई के बालों में फूल लगाते हुए दिखाया गया है। 

गुजरात से बंगाल तक… चीनी प्रोपेगेंडा को हवा देने पर राहुल गाँधी पर भड़के नॉर्थ-ईस्ट नेता, दर्ज होंगे हजारों राजद्रोह केस

असम के कई भाजपा नेता पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के खिलाफ लगभग 1 हजार राजद्रोह का केस दर्ज करवाने की तैयारी में हैं। यह खबर समाचार एजेंसी ANI द्वारा 13 जनवरी को सूत्रों के आधार पर प्रकाशित की गई है। यह केस राहुल गाँधी के उस ट्वीट के विरोध में दर्ज करवाया जा रहा है जिसमें उन्होंने भारत को गुजरात से शुरू हो कर बंगाल पर खत्म बताया था। ANI द्वारा सूत्रों के आधार पर प्रकाशित खबर में कहा गया है कि भाजपा नेताओं का आरोप है कि राहुल गाँधी ने वामपंथी चीन के उस दावे को सहमति दे दी है जिसमें वो अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताता है।

राहुल गाँधी द्वारा यह विवादित ट्वीट 10 फरवरी को किया गया था। उस ट्वीट में राहुल गाँधी ने कहा था, “हमारी यूनियन क्षमतावान है। हमारा यूनियन संस्कृति का है। हमारा यूनियन विविधता का है। हमारा यूनियन भाषा का है। हमारा यूनियन लोगों का है। हमारा यूनियन प्रदेश का है। कश्मीर से केरल तक और गुजरात से पश्चिम बंगाल तक। भारत अपने सभी रंगों के साथ सुंदर है। भारत की भावनाओं का अपमान मत करो।”

इस ट्वीट के बाद त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने इस पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि वायनाड के सांसद ने पूर्वोत्तर के राज्यों को अपने ट्वीट में स्थान नहीं दिया। भाजपा नेताओं का आरोप है कि राहुल गाँधी ने पूर्वोत्तर राज्यों की अनदेखी तब से शुरू कर दी है जब से चीन ने अरुणाचल प्रदेश की माँग उठाई है। जिस दिन राहुल गाँधी द्वारा यह विवादित ट्वीट किया गया था उसी दिन असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था, “भारत एक यूनियन से कहीं आगे है। एक गौरवशाली राष्ट्र है। भारत को किसी टुकड़े – टुकड़े मानसिकता से नहीं ग्रसित किया जा सकता है। आपको राष्ट्र, राष्ट्रीयता और राष्ट्रप्रेम से दिक्कत क्या है? और सुनो, बंगाल के बाहर हम पूर्वोत्तर में भी अस्तित्व में हैं।”

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने गाँधी शब्द पर जोर दिया। उन्होंने राहुल गाँधी के पूर्वजों की याद दिलाते हुए बताया कि कैसे उन्होंने पूर्वोत्तर को भुला दिया था। बिप्लब देब ने लिखा, “राहुल गाँधी के वक्तव्य के आधार पर लगता है कि राहुल गाँधी हमारे खूबसूरत पूर्वोत्तर राज्यों को भूल गए हैं। ठीक अपने महान परदादा की तरह उन्होंने ने हमारे क्षेत्र को नहीं गिना। हम भी भारत के गौरवशाली अंग हैं। आपके भूल जाने की वजह ये भी है कि आपकी पार्टी का पूर्वोत्तर से पूरा सफाया हो चुका है।”

मणिपुर के मुख्यमंत्री ने राहुल गाँधी के इन शब्दों पर हैरत जताई है। उन्होंने सवाल किया है कि राहुल गाँधी मणिपुर में वोट कैसे माँग सकते हैं जब वो हमारे भारत में अस्तित्व के बारे में जानते ही नहीं हैं। उन्होंने लिखा, “मैं हैरान हूँ कि कॉन्ग्रेस पार्टी का एक सीनियर नेता अपने बयान में पूर्वोत्तर के राज्यों का जिक्र भी नहीं करता। जब उन्हें हमारी मौजूदगी का आभास ही नहीं है तो वो कॉन्ग्रेस यहाँ के लोगों से आने वाले चुनावों में वोट कैसे माँगेगी ? देश को बाँट कौन रहा है ?”

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री प्रतिमा भौमिक ने भी राहुल गाँधी के इस ट्वीट पर हैरत जताई है। उन्होंने लिखा, “यह अपमान है। राहुल गाँधी ने अपनी आलोचना में भी पूर्वोत्तर के राज्यों को इग्नोर किया है। यह कॉन्ग्रेस पार्टी की मंशा को दिखाता है। वो पूर्वोत्तर के लोगों द्वारा ठुकराए जा चुके हैं और आगे भी ठुकराए जाएँगे।”

कॉन्ग्रेस की छात्र शाखा ने मुख्यमंत्री हिमंता पर हमला बोला

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस की छात्र शाखा NSUI ने राहुल गाँधी के खिलाफ दिए गए बयान के विरोध में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा के खिलाफ प्रदर्शन किया। उत्तराखंड की एक राजनैतिक रैली में हिमंता ने कहा था, “राहुल गाँधी को सेना पर सवाल उठाने और सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत माँगने का कोई अधिकार नहीं है। उन्हें सेना से सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत चाहिए। क्या हमने कभी आप से सबूत माँगा कि आप राजीव गाँधी के ही बेटे हैं या नहीं ? तुम्हे किसने अधिकार दिया सेना से सबूत माँगने का?” इस बयान के बाद CM सरमा के खिलाफ तमाम शिकायतें दर्ज करवाई गईं हैं। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता हिमंता बिस्व सरमा के तत्काल इस्तीफे की भी माँग कर रहे हैं।