Home Blog Page 2993

जिस कॉलेज में हिजाब को लेकर विवाद, वहाँ से हथियारों सहित रज्जाब और अब्दुल गिरफ्तार: उडुपी पुलिस तीन और को कर रही तलाश

कर्नाटक के उडुपी में शुरू हुआ हिजाब का मामले के तार कहीं दूर से जुड़ते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा लगाए जा रहे ये आरोप कि यह किसी बड़े साजिश का हिस्सा है, कुछ हद तक सच होता प्रतीत होता है। दरअसल, उडुपी के जिस कॉलेज के पास हिजाब को लेकर विवाद जारी है, वहाँ से पुलिस ने दो संदिग्धों को हथियार के साथ गिरफ्तार किया है।

पुलिस द्वारा गिरफ्तार संदिग्धों के नाम रज्जाब और हाजी अब्दुल मजीद बताया जा रहा है। इन दोनों के पास से पुलिस ने हथियार बरामद किए हैं। वहीं, तीन अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। हालाँकि, इस पर पुलिस का अभी तक बयान नहीं आया है। ना ही अभी तक स्पष्ट हो पाया है ये लोग कौन हैं, कहाँ से आए हैं और किसने भेजा है। इस संंबंध में ऑपइंडिया ने उडुपी नगर पुलिस थाने से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन की वेबसाइट पर दिया गया मोबाइल नंबर ऑफ मिला।

बता दें हिजाब विवाद से दो महीने पहले ही उडुपी में मुस्लिमों ने हिंदुओं का बहिष्कार किया था। इसके पीछे गोहत्या का विरोध करना मुख्य कारण था। रिपोर्ट्स के अनुसार, 1 अक्टूबर 2021 को हिंदू जागरण मंच द्वारा तालुक के गंगोली में मवेशी चोरी और गोहत्या के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शन में मछुआरे, मछली विक्रेता और महिलाओं सहित हजारों लोगों ने हिस्सा लिया था। इसके बाद क्षेत्र में रहने वाले मुसलमानों ने गंगोली बाजार से मछली खरीद का बहिष्कार कर दिया था। इतना ही नहीं, लोगों को भी हिंदू मछली विक्रेताओं से मछली नहीं खरीदने के लिए उकसा रहे थे।

बता दें कि कर्नाटक के उडुपी के स्कूल से शुरू हुआ हिजाब विवाद पूरे कर्नाटक में फैल गया है। 3 फरवरी की सुबह कर्नाटक के उडुपी जिले के कुंडापुर के भंडारकर कॉलेज में हिजाब पहनी 20 से अधिक छात्राओं को कॉलेज में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। पीयू कॉलेज का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं।

कॉलेज के प्रिंसिपल रूद्र गौड़ा ने कहा था कि छात्राएँ कॉलेज परिसर में हिजाब पहन सकती हैं, लेकिन क्लासरूम में इसकी इजाजत नहीं है। प्रिंसिपल के मुताबिक, कक्षा में एकरूपता बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया है। इसी क्रम में मुस्लिम छात्रा ने हाईकोर्ट में भी याचिका दायर कर कॉलेज पर भेदभाव का आरोप लगाया था। हालाँकि, इस बीच इस्लामीकरण के प्रतीक हिजाब के विरोध में 2 फरवरी को उडुपी के कुंडापुर सरकारी कॉलेज के 100 से अधिक छात्र भी भगवा स्कार्फ कंधे पर डालकर कॉलेज पहुँच गए।

भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

‘भारत शोक में है, तुम ये सब दिखा रही हो?’: लता मंगेशकर के निधन के बाद मलाइका अरोड़ा की बोल्ड तस्वीर, लोगों ने कहा – ‘मतलबी औरत’

संगीत जगत की सबसे मधुर आवाज के शांत होने के बाद आज पूरे बॉलीवुड में मौन पसरा हुआ है। कुछ बॉलीवुड हस्ती लता मंगेशकर के आवास पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं तो कुछ लोग सोशल मीडिया पर ही उनके जाने पर दुख मना रहे हैं। इस बीच मलाइका अरोड़ा ने अपने इंस्टाग्राम पर अपनी एक बोल्ड तस्वीर शेयर की है जिसके बाद उन्हें सोशल मीडिया यूजर्स से लताड़ लग रही है

तस्वीर में देख सकते हैं कि मलाइका ब्रालेट और शॉर्ट्स पहने स्वीमिंग पूल में पाँव डुबाकर फोटो खिंचा रही हैं। इस तस्वीर पर कई लोग हैं जो उनकी तारीफें कर रहे हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें इस तस्वीर को देख गुस्सा आ रहा है। उनका पूछना है, “तुम इतनी मतलबी कैसे हो। बॉलीवुड तुम्हारी पहचान है और तुम लता जी को श्रद्धांजलि देना भूल गईं। उसकी जगह तुमने ये घटिया फोटो को डालना चुना। तुम स्टार नहीं तुम बेकार हो मतलबी औरत।”

एक यूजर मलाइका अरोड़ा को लिखती है, “यहाँ पूरा भारत लता मंगेशकर के लिए शॉक में है और इसको ये सब दिखाने की पड़ी है।” एक सोशल मीडिया यूजर ने मलाइका को लिखा, “राष्ट्र ने एक देवी को खोया है। वो देवी तुम्हारी अपनी इंडस्ट्री की है। तुम उनके लिए इज्जत दिखाते हुए क्या ये तस्वीर एक दिन बाद नहीं डाल सकती थीं।”

तेजा नाम की यूजर ने मलाइका को कहा, “जरा तो शर्म करलो। देश में क्या चल रहा है और तेरा क्या चल रहा है शर्म आनी चाहिए।” कुछ यूजर्स ने मलाइका के पोस्ट को देख भले ही उन्हें बुरा भला नहीं कहा लेकिन उन्होंने ये देख कर निराशा जताई कि मलाइका अरोड़ा लता मंगेशकर के लिए कोई पोस्ट करने की बजाय अपनी तस्वीर दिखा रही हैं। 

लता मंगेशकर का निधन

गौरतलब है कि सुर-साम्राज्ञी लता मंगेशकर का 92 साल की उम्र में रविवार (6 फरवरी 2022) को निधन हो गया। अपनी सुरीली आवाज से दुनिया भर में अपनी पहचान बनाने वाली गायिका ने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्‍पताल में अंतिम साँस ली। ‘भारत रत्‍न’ से सम्‍मानित दिग्गज गायिका लता मंगेशकर को 8 जनवरी 2022 को कोरोना संक्रमित पाए जाने पर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्हें न्यूमोनिया हो गया था, जिससे उनकी हालत बिगड़ने लगी। इसके बाद उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। उनकी हालत में सुधार के बाद वेंटिलेटर सपोर्ट भी हट गया था, लेकिन 5 फरवरी को उनकी स्थिति बिगड़ने लगी और उन्हें फिर से वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। आखिरकार, 6 फरवरी को ‘स्वर कोकिला’ ने अंतिम साँस ली।

सागरा प्राण तळमळला… लता मंगेशकर का ‘भारत रत्न’ छीनना चाहती थी कॉन्ग्रेस, वीर सावरकर की कविता पर भाई को निकाला था AIR से

सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर अब इस दुनिया में नहीं रहीं। रविवार (6 फरवरी, 2022) को उनका निधन हो गया। ये तो कई लोगों को पता है कि मंगेशकर परिवार के वीर विनायक दामोदर सावरकर से काफी अच्छे रिश्ते थे। लेकिन, ये कम ही लोगों को पता है कि कैसे ‘ऑल इंडिया रेडियो (AIR)’ ने लता मंगेशकर के भाई हृदयनाथ मंगेशकर को सिर्फ इसीलिए निकाल दिया था, क्योंकि उन्होंने वीर सावरकर द्वारा लिखी एक कविता गाई थी। वीर सावरकर ने इंग्लैंड में ही ‘सागरा प्राण तळमळला’ नामक ये कविता लिखी थी।

इस कविता में वीर सावरकर समुद्र से गुहार लगा रहे हैं कि वो उन्हें उनकी मातृभूमि तक ले जाए, क्योंकि अब यहाँ उनका जीना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने भारत की सुंदरता का वर्णन करते हुए लिखा है कि कैसे समुद्र को उन्होंने भारत माता के पाँव धोते हुए देखा है। वो समुद्र से कह रहे हैं कि उसने उनसे वादा किया था कि बाहर की दुनिया दिखाने के बाद वो उन्हें वापस अपनी मातृभूमि ले जाएगा। इस कविता में अपनी जन्मभूमि से अलगाव की पीड़ा है। एक परदेशी को उसकी मातृभूमि की याद सताती है, उसे इसमें दर्शाया गया है।

बता दें कि एक समय में हृदयनाथ और उनकी बहनें, लता मंगेशकर और उषा मंगेशकर वीर सावरकर की कविता को संगीतबद्ध कर चुके थे। लेकिन कॉन्ग्रेस को यह चीज नहीं पसंद आई और उन्होंने पंडित हृदयनाथ को AIR से निकलवा दिया। इस बात को स्वयं हृदयनाथ मंगेशकर ने कई सालों बाद एबीपी माझा को दिए इंटरव्यू में कहा था। उन्होंने 53 मिनट के इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें एक बार AIR की नौकरी से हाथ धोना पड़ा था, सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने वीर सावरकर की प्रतिष्ठित कविता का एक संगीतमय गायन बनाने का साहस किया था जिसमें उन्होंने उन्हें मातृभूमि में वापस ले जाने के लिए समुद्र की प्रशंसा की थी।

अपने मराठी इंटरव्यू में उन्होंने कहा था“मैं उस समय ऑल इंडिया रेडियो में काम कर रहा था। मैं 17 साल का था और मेरी तनख्वाह 500 रुपए प्रति माह थी। यह आज मूंगफली भर हो सकती है, लेकिन उस समय 500 रुपए एक बड़ा मोटा वेतन माना जाता था … संक्षेप में कहूँ तो मुझे ऑल इंडिया रेडियो से निकाल दिया गया था क्योंकि मैंने वीर सावरकर की प्रसिद्ध कविता ‘ने मजसी ने परत मातृभूमि, सागर प्राण’ के लिए एक संगीत रचना बनाने का विकल्प चुना था।”

एक ऐसा समय भी आया था, जब कॉन्ग्रेस पार्टी ने लता मंगेशकर को दिए गए ‘भारत रत्न’ अवॉर्ड छीनने की माँग की थी। ये सभी को पता है कि जनवरी 1963 में लता मंगेशकर ने जब ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाना शुरू किया, तब नेहरू की आँखों में आँसू आ गए। 2013 में लता मंगेशकर ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की थी। जनार्दन चांदुरकर उस समय मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष थे। उन्होंने तत्काल केंद्र सरकार से माँग कर दी थी कि लता मंगेशकर को दिया गया ‘भारत रत्न’ अवॉर्ड छीन लेना चाहिए। 

2018 में ‘गायत्री मंत्र’ और 2019 में भारतीय सेना के लिए ‘सौगंध मुझे इस मिट्टी की’: ये थे लता मंगेशकर के अंतिम रिकॉर्ड किए गाने

‘स्वर साम्राज्ञी’, ‘सरस्वती पुत्री’, ‘स्वर कोकिला’ जैसे अनगिनत उपमाओं एवं अलंकारों से सम्मानित की जाने वाली दिवंगत गायिका लता मंगेशकर का सबसे अंतिम रिकॉर्ड किया हुआ गीत ‘गायत्री मंत्र’ और ‘सौगंध मुझे इस मिट्टी का’ था। हर बार की तरह इस मंत्र और गाने को ही उन्होंने हृदय से गाया था।

रिलायंस इंडस्ट्री के मालिक मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी और पीरामल घराने के आनंद पीरामल की 12 दिसंबर 2018 को शादी थी। इस शादी के दौरान लता मंगेशकर के स्वर में गाए गए गायत्री मंत्र को बजाया गया था। इस मंत्र को उन्होंने शुभकामना संदेश के रूप में भेजा था।

बता देें कि लता मंगेशकर पाँच साल की छोटी उम्र से ही गाती रही हैं, लेकिन एक पेशेवर गायक के रूप में उन्होंने Naachu Yaa Gade, Khelu Saari Mani Haus Bhaari गाना गाया था। हालाँकि, यह गाना किन्हीं कारणों से कभी रीलिज नहीं पाया। इस गाने को सदाशिव राव नेवरेकर ने मराठी फिल्म किट्टी हसल के लिए 1942 में कम्पोज किया था। लता मंगेशकर की आवाज में गाना डब हुआ, लेकिन अंतिम चरण में उसे हटाया दिया गया और वह रिलीज नहीं हो पाया।

इसके बाद Natali Chaitraachi Navalaai नाम का पहला गाना रिलीज हुआ। इसे दादा चंदेडकर ने 1942 में आई मराठी फिल्म Pahili Mangalaa-gaur में शामिल किया गया था। इस फिल्म में लता मंगेशकर ने एक्टर छोटी सी भूमिका भी निभाई थी। इस गाने को आप यहाँ सुन सकते हैं।

लता मंगेशकर ने सन 1946 में पहली बार हिंदी फिल्मों के गाना गाया था। फिल्म का नाम था ‘आपकी सेवा में’ और गीत के बोल थे ‘पाँय लागूँ कर जोरी रे’।

लता मंगेशकर को भारत का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ 2001 में दिया गया था। 1999 से 2005 तक वह सांसद रहीं। उन्हें राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया गया था। फ्रांस की सरकार ने अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘लीजेंड ऑफ ऑनर’ से 2007 में सम्मानित किया था। वह भारत की पहली ऐसी गायिका थीं, जिन्होंने रॉयल अल्बर्ट हॉल, लंदन में परफॉर्म किया था। 

सर्वाधिक रिकॉर्ड की गई गायिका के लिए वर्ष 1974 में लता मंगेशकर का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया था। हालाँकि, उन्होंने इसका विरोध किया था। सबसे खास बात है कि भारत के महान कंपोजर और म्यूजिक डायरेक्टर ओपी नैयर के साथ उन्होंने कभी काम नहीं किया। साल 2019 में उन्होंने अपनी आखि‍री रिकॉर्डिंग वर्ष 2019 में की थी। भारतीय आर्मी को समर्प‍ित ‘सौगंध मुझे इस मिट्टी की’ गाया था। इसेे मयूरेश पई ने कंपोज क‍िया था और इसे 30 मार्च 2019 में र‍िलीज क‍िया गया था।  

बता दें कि स्वर साम्राज्ञी का रविवार (6 फरवरी) को सुबह मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में 92 वर्ष की आयु में देहांत हो गया। कोविड के बाद वह की परेशानियों से जूझ रही थीं। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था, लेकिन अंतत: उन्होंने इस नश्वर संसार को अलविदा कह दिया। इस दुख की घड़ी में सारा देश और दुनिया भर के संगीत प्रेमी गमगीन हैं।

असदुद्दीन ओवैसी की सलामती के लिए हैदराबाद में 101 बकरों की ‘कुर्बानी’, AIMIM के विधायक भी हुए शामिल

ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल (AIMIM) के लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी के काफिले पर किए गए हमले के बाद उनके चाहने वाले लोग उनकी सुरक्षा के लिए दुआएँ कर रहे हैं। इसी क्रम में रविवार (6 फरवरी 2022) को हैदराबाद के बाग ए जहाँआरा में ओवैसी की सुरक्षा और लंबी उम्र की दुआ करने के लिए एक व्यवसायी ने 101 बकरों की ‘कुर्बानी’ दी। रिपोर्ट के मुताबिक, उस कार्यक्रम में हैदराबाद के मलकपेट से AIMIM के विधायक बलाला भी शामिल हुए।

उल्लेखनीय है कि असदुद्दीन ओवैसी 3 फरवरी को मेरठ में एक कार्यक्रम करके दिल्ली लौट रहे थे, उसी दौरान उनके साथ ये घटना हुई थी। इसको लेकर खुद औवैसी ने ट्वीट कर जानकारी दी थी। इसके अलावा मेरठ रेंज के आईजी ने पिलखुवा प्लाजा पर गोली चलने की बात कही जा रही है। इस रूट से ओवैसी का काफिला जा रहा था और कुछ लोगों के बीच आपस में बहस हुई थी। बस इस बात की जानकारी मिली है।

उत्तर प्रदेश चुनाव के बीच ओवैसी के साथ इस तरह की घटना के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें Z कैटेगरी की सुरक्षा देने का फैसला किया था। लेकिन, ओवैसी ने केंद्र की सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद जहर उगलते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि मुझे ये नहीं पता कि हमला किसने किया था, लेकिन मुझे यकीन है कि ये लोग नाथूराम गोडसे की नजायज औलाद हैं।

बहरहाल इस मामले में यूपी पुलिस ने सचिन और शुभम नाम के दो युवकों को गिरफ्तार भी किया था। इस मसले पर यूपी के लॉ एँड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने बताया था कि ओवैसी पर हमला करने वाले लोग उनके 2013-14 में राम मंदिर और हिंदुओं को लेकर दिए गए विवादित बयानों से आहत थे। इनमें एक आरोपित सचिन तो पहले से भी धारा 307 का मुजरिम है।

‘मुझे तुमसे बहुत डर लगता है’: जब किशोर कुमार ने सिर्फ लता मंगेशकर को दिया अपना लास्ट इंटरव्यू

संगीत की दुनिया में स्वर कोकिला नाम से मशहूर लता मंगेशकर के निधन के बाद आज पूरा देश उनसे जुड़े पुराने किस्सों को याद कर रहा है। हर बड़ी हस्ती उन लम्हों को दोहराने में जुटी है जो उन्होंने लता मंगेशकर के साथ बिताए। इसी क्रम में उनके और किशोर कुमार के संबंधों पर भी जगह-जगह चर्चा है। किशोर कुमार के जीवन में लता मंगेशकर इतनीं महत्वपूर्ण थीं कि उन्होंने अपना आखिरी इंटरव्यू किसी पत्रकार को नहीं बल्कि लता मंगेशकर को दिया था।

इस इंटरव्यू में किशोर कुमार ने लता मंगेशकर को बताया था कि उन्हें बचपन से ही सिर्फ गाने का शौक था। मगर एक्टिंग करियर में उन्हें उनके भाई की वजह से आना पड़ा। इसके लिए उन्होंने मना भी किया कि उनसे एक्टिंग न करवाई जाए। उन्हें संगीत गाने हैं क्योंकि संगीत दिल से निकलता है और दूसरों के दिल तक पहुँचता है।

कैसे हुई थी लता मंगेशकर और किशोर कुमार की मुलाकात

इस इंटरव्यू में किशोर कुमार ने लता मंगेशकर के साथ अपनी उस मुलाकात को भी याद किया जब दोनों पहली बार मिले थे। उन्होंने कहा, “तुम्हें तो याद ही है कि हम कैसे मिले। तुम ट्रेन से आती थीं, मैं भी ट्रेन से आता था। तुमने मुझे घूर कर देखा, मैंने भी तुम्हें घूर कर देखा। तुम उतरीं, मैं भी उतरा। तुम टांगे में बैठीं, मैं भी टांगे में बैठा। तुम पहुँची बॉम्बे टॉकीज के दरवाजे पर, मैं भी वहाँ पहुँचा। तुमने सोचा ये फॉलो कर रहा है क्या बात है।” इस घटना के बाद लता और किशोर दा की मुलाकात खेमचंद प्रकाश ने करवाई और दोनों एक दूसरे से मिल खूब हँसे। कहते हैं कि किशोर कुमार रक्षा बंधन पर लता मंगेश्कर के घर जाते थे।

इस इंटरव्यू में किशोर कुमार अपने से जुड़ी हर बात खुल कर कह रहे थे। उन्होंने बताया कि वह लता मंगेशकर के बाद इस गायिकी वाली इंडस्ट्री से जुड़े और उन्हें ‘पा धा नी सा’ ये सब नहीं आता। इस साक्षात्कार में जब लता मंगेशकर ने किशोर दा से पूछा, “आपको मेरे साथ गाने में कैसा लगता है। इस पर किशोर दा ने कहा, “मुझे बहुत खुशी होती है। लेकिन मैं डर जाता हूँ क्योंकि तुम तो फॉर्म में हो न। तुम्हारे साथ गाते-गाते जब मैं एक्शन लेता हूँ, तो मैं सोचता हूँ तुम्हें बुरा तो नहीं लगा।” इस पर लता कहती हैं, “नहीं, मुझे बुरा नहीं लगता। मेरी ये परेशानी है कि मैं इधर-उधर चलते हुए नहीं गा पाती।”

दोनों दिग्गज इस साक्षात्कार में एक दूसरे का हौंसला बढ़ाते हैं और किशोर कुमार कहते हैं, “तुम जो करती हो न लता, वो बहुत अच्छा करती हो। लेकिन मेरे साथ क्या होता है कि मैं एक जमाने में एक्टिंग करता था। बाद में मैंने गाना शुरू कर दिया। मैं इसलिए ऑडिएंस को डबल मजे देने की कोशिश करता हूँ।” 

लता मंगेशकर के कहने पर इस इंटरव्यू में किशोर दा ने अपने पसंद के वो गाने भी बताए थे जो उन्हें अच्छे लगते हैं। इनमें ‘दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना’ भी शामिल है। उन्होंने इस इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने जीवन में इतने उतार-चढ़ाव देखें हैं कि अब ऐसा हो गया है कि जहाँ पहुँचे हैं वहाँ से ही वापस चलें जाएँ तो अच्छा है। उनके अनुसार, “ऐसे वक्त में मत जाओ जब लोग हटा दें या जब उसकी कोई गिनती न हो।” अपने इंटरव्यू में उन्होंने कहा था- “आज भगवान की दुआ से लोग पूछते हैं। मैं ऐसे ही वक्त में अलग हो जाना चाहता हूँ कि कोई ये न कहे कि ऐसे वक्त में चला गया और सच में मुझे अपना वतन बहुत याद आता है।” इस इंटरव्यू में लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने एक साथ चैरिटी करने की बात कही थी।  

राम और कृष्ण की भक्त थीं लता मंगेशकर, मीराबाई का भजन ‘माई माई कैसे जियूँ रे’ था काफी पसंद: गीत से पहले लिखती थीं ‘श्रीकृष्ण’

बॉलीवुड की महान गायिका लता मंगेशकर के निधन से पूरा देश गम में डूबा हुआ है। दैनिक जागरण के मुताबिक, लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) कृष्ण और राम भगवान की की भक्त थीं। उन्होंने मीरा के कई पद गाए। मीरा का पद ‘माई माई कैसे जियूँ रे’ उनको बेहद पसंद था। इसके अलावा उन्हें जयदेव का गीत गोविन्द भी बेहद प्रिय था। उनके बारे में कहा जाता है कि जब सुर सम्राज्ञी ने मीरा, सूरदास और जयदेव के पदों को पढ़ा तो उनकी कृष्ण में आस्था और गहरी हो गई थी।

यही नहीं उनकी एक और आदत थी यह कि वह कागज पर कोई भी गीत लिखने से पहले सबसे पहले उस पर श्रीकृष्ण लिखती थीं, फिर उसके बाद गीत के बोल। लता जी का उदयपुर के महाराज महाराणा भागवत सिंह से भी पारिवारिक किस्म का रिश्ता था। एक बार लता जी, पंडित नरेन्द्र शर्मा, उषा मंगेशकर और ह्रदयनाथ मंगेशकर उदयपुर गए थे। ये सभी उस वक्त के महाराणा मेवाड़ भागवत सिंह से मिलने उनके महल में पहुँचे थे। लता जी ने बताया कि उस दिन भागवत सिंह जी बहुत प्रसन्न थे। महाराणा ने उनसे कहा था कि आप तो कृष्ण की भक्त हैं, आपको मीरा के पद गाना और सुनना दोनों बेहद पसंद हैं।

भागवत सिंह ने उनसे यह भी कहा था कि आज आपको अपनी पूर्वज मीराबाई के भगवान का दर्शन करवाते हैं। फिर वे उनको उस कमरे में लेकर गए और वहाँ उन्हें भगवान कृष्ण की बेहद खूबसूरत मूर्ति के दर्शन करवाए। भागवत सिंह ने लता मंगेशकर को बताया कि कृष्ण की वही मूर्ति है, जिसको गोद में लेकर मीराबाई रोजाना पूजा किया करती थीं। कृष्ण की उस मूर्ति को देखकर लता जी की आँखों में आँसू आ गए थे।

दूसरा वाकया राम भक्ति से जुड़ा हुआ है। लता मंगेशकर ‘राम रतन धन पायो’ वाला रिकॉर्ड तैयार कर रही थीं। उसी समय उनके पारिवारिक मित्र पंडित नरेन्द्र शर्मा ने उनसे कहा कि राम ऐसे अकेले भगवान हुए हैं कि अगर कोई उनकी तन मन से सेवा करे तो उसके सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं। लता मंगेशकर ने यतीन्द्र मिश्र को बताया कि, पंडित नरेन्द्र शर्मा की कि बात छू गई और पता नहीं क्या हुआ कि इस रिकॉर्ड के बनने तक उनकी राम भगवान में श्रद्धा बढ़ने लगी। लता जी ने बताया था कि तभी से मैं राम भक्त हूँ और मैं मानती हूँ कि उनके जैसा चरित्र बल किसी दूसरे पौराणिक किरदार में ढूंढने से नहीं मिलेगा।

बता दें कि सुर-साम्राज्ञी लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का 92 साल की उम्र में रविवार (6 फरवरी 2022) को निधन हो गया। अपनी सुरीली आवाज से दुनिया भर में अपनी पहचान बनाने वाली गायिका ने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्‍पताल में अंतिम साँस ली।

वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम के लिए किया कॉन्सर्ट, खिलाड़ियों को दिए ₹20 लाख: क्रिकेट पर ‘सुर साम्राज्ञी’ के अहसान

स्वर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) क्रिकेट (Cricket) के बहुत बड़ी प्रशंसक थीं। कई मौकों पर उन्होंने इसे जाहिर भी किया था। आज ‘भारत रत्न’ लता मंगेशकर हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें सबके साथ हैं। लता दीदी क्रिकेट की इतनी बड़ी प्रशंसक थीं कि कपिल देव (Kapil Dev) की अगुवाई में साल 1983 में जब भारत ने क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता था तो उन्होंने भारतीय टीम के प्रत्येक खिलाड़ी को एक लाख रुपए का चेक दिया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, लता मंगेशकर ने उस वक्त भारतीय टीम को कुल 20 लाख रुपए का पुरस्कार दिया था। ये वो क्षण था जब क्रिकेट के क्षेत्र में भारत ने बहुत ही ऊँची छलाँग लगाई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विश्व कप के फाइनल में कपिल देव और उनकी टीम ने वेस्ट इंडीज को हराया था, जिसके बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) टीम को सम्मानित करना चाहता था, लेकिन उस वक्त बोर्ड की माली हालत ठीक नहीं थी। इसके बाद क्रिकेट के प्रशासक राज सिंह डूंगरपुर ने मदद के लिए लता मंगेशकर का रुख किया।

उस वक्त BCCI के अध्यक्ष रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री एनकेपी ने डूंगरपुर की जीवनी में खुलासा किया था, “राज सिंह ने लता मंगेशकर से खिलाड़ियों को पुरस्कृत करने के उद्देश्य फंड इकट्ठा करने के लिए दिल्ली में एक संगीत कार्यक्रम करने का अनुरोध किया था।”

लता दीदी से मिले एक लाख रुपए के पुरस्कार का जिक्र पूर्व क्रिकेटर कपिल देव ने मास्टर दीनानाथ मंगेशकर सम्मान समारोह के दौरान किया था। उन्होंने कहा था, “जब हमने विश्व कप जीता था तब बीसीसीआई बहुत अमीर नहीं था। मुझे फोन आया कि लताजी पूरी टीम को एक साथ इकट्ठा करेंगी और हमारे लिए गाएँगी और नकद पुरस्कारों देंगी। उन्होंने हम सभी को 1 लाख का चेक दिया – मैंने पहली बार इतनी बड़ी राशि देखी थी।” उन्होंने आगे कहा कि उस जमाने में (1983) में एक लाख रुपए बहुत बड़ी बात थी। उस दौरान हमें वनडे और टेस्ट मैचों के लिए 5000 से 10,000 रुपए तक ही मिलते थे। लेकिन हमें ‘इज्जत और सम्मान’ बहुत मिला।

अब हमारे बीच नहीं हैं लता दीदी

गौरतलब है कि स्वर कोकिला लता मंगेशकर का देहांत आज रविवार, 2 फरवरी 2022 को 92 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्‍पताल में हो गया। 8 जनवरी 2022 को कोरोना संक्रमित पाए जाने पर उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्हें न्यूमोनिया हो गया था, जिससे उनकी हालत बिगड़ने लगी। इसके बाद उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। उनकी हालत में सुधार के बाद वेंटिलेटर सपोर्ट भी हट गया था, लेकिन 5 फरवरी को उनकी स्थिति बिगड़ने लगी और उन्हें फिर से वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। आखिरकार, 6 फरवरी को ‘स्वर कोकिला’ ने अंतिम साँस ली।

झारखंड में ईसाइयों के चंगुल से मुक्त हो रहे हैं आदिवासी: 3 परिवारों के 9 सदस्यों ने की घरवापसी, 3 साल पहले किया था धर्मांतरण

शिक्षा से अब तक दूर से आदिवासियों में जैसे-जैसे शिक्षा की रौशनी फैल रही है, वे अपने समाज के प्रति होने वाले षडयंत्रों को पहचानने लगे हैं। उन्हें अहसास होने लगा कि उन्हें सुविधाओं और धन का लालच सिर्फ उनके धर्म को परिवर्तित कराने के उद्देश्य दिया जा रहा है। जैसे-जैसे धर्मांतरित आदिवासी समाज में जागृति आ रही है, वे अपने जड़ों की और लौटने लगे हैं।

झारखंड जैसे आदिवासी बहुल वाले राज्यों में धर्मांतरण का खेल पूरी गंभीरता के साथ खेला जा रहा है। धर्मांतरण कराने वाले इन गिरोहों के चक्कर में भोले-भाले आदिवासी फँस जाते हैं। राज्य के मझगाँव में भी तीन साल पहले कुछ परिवारों ने ईसाई धर्म अपना लिया था। अब ये परिवार पूरे रीति-रिवाज के साथ अपने धर्म में वापस आ गए हैं।

सरना समाजके इन परिवारों को धर्मांतरण के बाद से ही घरवापसी कराने के प्रयास किया जा रहा था। आदिवासी समाज युवा महासभा इन परिवारों को सरना धर्म में वापसी कराने का लगातार प्रयास कर रही थी। महासभा का कहना है कि यह बदलाव लोगों में अपने धर्म के प्रति प्रेम और चेतना के कारण हो रहा है।

नवभारत टाइम्स के अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगाँव थाना क्षेत्र के तेतरिया पंचायत के सिरासाई मंगापाट गाँव के 3 परिवारों के 14 सदस्य ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए थे। इनमें से 9 लोगों ने घरवापसी कर ली है, जबकि 5 अब लोग अभी ईसाई धर्म को मान रहे हैं।

सरना धर्म में वापस आने वाले श्रीकांत बांकिरा, उनकी पत्नी, दो बेटी और एक बेटा शामिल हैं। वहीं, दूसरे परिवार के जामुन सिंह कुलडीह, उनकी पत्नी और एक बेटे ने घरवापसी की। तीसरे परिवार से सिर्फ 55 साल के घनश्याम कुलडीह ने घरवापसी की है, जबकि उनकी पत्नी, बेटा एवं बहू और दो पोतियों ने अभी घरवापसी नहीं की है।

आदिवासी समाज युवा महासभा दिउरी (प्रमुख) नरेश पिंगुवा, सह उप-प्रमुख गोवर्धन पिंगुवा ने गाँव के देशाउली का शुद्धिकरण किया गया। कमेटी का कहना है कि धर्म को छोड़कर अन्‍य धर्मों में गए लागों का स्‍वागत है। उन्‍होंने कहा कि जिस तरीके से उनके पूर्वज रहे, वही उनकी भी जीवनचर्या है।

गलवान में जवान दीपक सिंह हुए थे वीरगति को प्राप्त, अब उनकी पत्नी रेखा सेना में बनेंगी लेफ्टिनेंट

लद्दाख की गलवान घाटी में जून 2020 में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ मुठभेड़ के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए इंडियन आर्मी के जवान दीपक सिंह की पत्नी रेखा देवी भी अब पति की जगह सेना में शामिल होकर देश की सरहदों की रक्षा करेंगी। रेखा (23 साल) ने ओटीए (OTA: Officers Training Academy) के एक्जाम को क्वालिफाई कर लिया है। अब उन्हें मेडिकल टेस्ट से गुजरना होगा। इसके बाद वो इंडियन आर्मी का हिस्सा हो जाएँगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, OTA की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद रेखा को प्रयागराज में पाँच दिन तक सर्विस सेलेक्शन बोर्ड में इंटरव्यू हुआ। इंडियन आर्मी वो लेफ्टिनेंट के तौर पर ज्वाइन होंगी। हालाँकि उससे पहले 9 महीने तक की कड़ी ट्रेनिंग होगी। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश के रीवा जिले के फारंदा गाँव के रहने वाले दीपक सिंह की शादी रेखा के साथ वीरगति प्राप्त करने के 8 महीने पहले ही हुई थी।

दीपक बिहार रेजिमेंट के जवान थे। उनके बड़े भाई भी सेना में हैं। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पिछले साल नवंबर 2021 में बलिदान हुए दीपक सिंह की पत्नी रेखा को मरणोपरांत वीर चक्र से नवाजा था। बिहार रेजीमेंट की 16 बटालियन में चिकित्सा सहायक रहे दीपक सिंह ने गलवान में 30 जवानों को बचाया था। वो अपने बड़े भाई से प्रेरणा लेकर सेना में शामिल हुए थे।

गौरतलब है कि गलवान झड़प के दौरान चीन ने दुनिया के सामने झूठ बोला था कि इस हमले में उसके केवल 4 जवान ही मरे थे। हालाँकि, हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की न्यूज साइट ‘द क्लैक्सन’ ने अपनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में गलवान में झड़प को लेकर चीन पोलपट्टी खोल दी।

द क्लैक्सन के एडिटर एंटोनी क्लेन ने जानकारी दी कि उन्होंने इंडिपेंडेंट सोशल मीडिया रिसर्चर्स की एक टीम बनाई थी, जिसने इस पूरे मसले पर लगभग डेढ़ साल अपनी रिसर्च की और नतीजों में पाया कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के कई सिपाही 15-16 जून को गलवान नदी की तेज धार में बह गए थे। उनके मुताबिक, ये संख्या 38 थी।​