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‘दुर्जनों पर बुलडोजर चलते रहना चाहिए, विकास की स्पीड तेज होगी’: सीएम योगी आदित्यनाथ ने 300+ का बताया फॉर्मूला

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Election-2022) के मद्देनजर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Aadityanath) ने शुक्रवार (4 फरवरी) को गोरखपुर की सदर सीट से अपना चुनावी नामांकन दाखिल किया। इसके साथ ही उन्होंने एक बार फिर से माफियाओं को चेतावनी देते हुए कहा है कि विकास के साथ बुलडोजर चलता रहेगा। विकास सज्जनों का होगा, लेकिन दुर्जनों पर तो बुल़डोजर ही चलेगा।

न्यूज 18 को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में सीएम योगी ने गोरखपुर से ही चुनाव लड़ने के पीछे की वजह का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश उनके लिए अपरिचित नहीं है। उन्होंने कहा, “पार्टी ने चुनाव लड़ने के बारे में मुझसे पूछा था, लेकिन मैंने ये फैसला पार्टी पर ही छोड़ दिया था। अब पार्टी ने ही मुझे गोरखपुर से नामांकन भरने का मौका दिया है।”

सीएम योगी ने यह भी बताया कि भाजपा आखिर कैसे 300 का जादुई आँकड़ा पार करेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में भाजपा की लोकप्रियता का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है और अब यह लड़ाई 80 और 20 के अनुपात की हो गई है। 80 में भाजपा और 20 फीसदी में बाकी सभी हैं। सीएम योगी का मानना है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से लेकर किसान कर्जमाफी तक जनता भाजपा की कल्याणकारी योजनाओं को महसूस कर रही है और इसी के आधार पर वह कह सकते हैं कि बीजेपी 300 के पार होगी।

सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) औऱ कॉन्ग्रेस (Congress) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2017 में दो लड़कों की जोड़ी आई और 2019 में बुआ और बबुआ, लेकिन यूपी की जनता ने इनके गठबंधन को रिजेक्ट कर दिया।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सीएम योगी ने गोरखपुर में कहा कि अगर विकास चलेगा तो विकास के साथ-साथ बुलडोज़र भी चलना चाहिए। दोनों का एक दूसरे के साथ संबंध है। विकास सज्जनों के लिए हैं और बुलडोजर दुर्जनों के लिए है। जब दोनों एक साथ चलेंगे तो विकास की स्पीड कई गुना ज़्यादा दिखाई देगी।

‘देवभूमि के इस्लामीकरण के खिलाफ अंतिम साँस तक लड़ूँगा’: मुस्लिम विश्वविद्यालय के विरोध पर BJP नेता के खिलाफ चुनाव आयोग पहुँची कॉन्ग्रेस

उत्तराखंड विधानसभा चुनावों (Uttarakhand Assembly Election 2022) के बीच प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत (Congress Leader Harish Rawat) पर भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा (Tajinder Pal Singh Bagga) हमलावर हैं। सोशल मीडिया पर घेरने को लेकर हरीश रावत ने शुक्रवार (4 फरवरी 2022) को चुनाव आयोग (Election Commission) से बग्गा की शिकायत की है।

उत्तराखंड कॉन्ग्रेस कमिटी की ओर से चुनाव आयोग को दी गई शिकायत में कहा गया है कि बग्गा चुनावों के दरम्यान हरीश रावत की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। पत्र में कहा गया है, भाजपा नेता बग्गा द्वारा अपनी सोशल मीडिया के ट्विटर हैंडल और फेसबुक पर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत एवं अन्य नेताओं के फोटो के साथ छेड़छाड़ न सिर्फ सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है, बल्कि हमारे नेताओं की छवि को भी धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है।”

कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह न सिर्फ चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है, बल्कि साइबर अपराध भी है। पार्टी ने चुनाव आयोग से बग्गा के ट्विटर और फेसबुक अकाउंट को ब्लॉक करने के साथ-साथ उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई का आदेश देने का आग्रह किया है।

उत्तराखंड कॉन्ग्रेस कमिटी द्वारा चुनाव आयोग को दी गई शिकायत पत्र

कॉन्ग्रेस द्वारा की गई शिकायत के बाद बग्गा ने एक और ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम तुष्टीकरण और देवभूमि उत्तराखंड के इस्लामीकरण के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “सुना है हरीशुद्दीन जी ने देवभूमि में मुस्लिम विश्वविद्यालय का विरोध करने के लिए मेरे खिलाफ शिकायत दर्ज की है। मैं ऐसा फिर कर रहा हूँ और इसे हजार बार करूँगा। वे मेरे खिलाफ हजारों शिकायत कर सकते हैं। वे मुझे जेल भेजवा सकते हैं, लेकिन मैं देवभूमि के इस्लामीकरण के कॉन्ग्रेस की योजना के खिलाफ अपनी आखिरी साँस तक लड़ूँगा।”

हरीश रावत पर कटाक्ष करते हुए उत्तराखंड में मुस्लिम विश्वविद्यालय खोलने के खिलाफ बग्गा ने शुक्रवार (4 फरवरी) को ट्वीट किया।

दरअसल, भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने पिछले कुछ दिनों में कुछ दिनों से हरीश रावत के खिलाफ कई ट्वीट किए हैं। उनका एक ट्वीट मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप से संबंधित है।

‘साइकिल का बटन दबाना है, नया पाकिस्तान बनाना है’: कानपुर में सपा प्रत्याशी के जनसंपर्क अभियान में लगे देश विरोधी नारे, जाँच में जुटी यूपी पुलिस

यूपी के कानपुर में जिन्ना के बाद समाजवादी पार्टी प्रत्याशी का पाकिस्तान प्रेम उजागर हुआ है। बिठूर विधानसभा से सपा प्रत्याशी मुनींद्र शुक्ला के समर्थकों द्वारा पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने की बात सामने आई है। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वायरल वीडियो में “साइकिल का बटन दबाना है, नया पाकिस्तान बनाना है” के नारे सुनाई दे रहे हैं। वहीं वीडियो वायरल होने के बाद यूपी पुलिस इसकी जाँच में जुट गई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि बिठूर सीट एसपी प्रत्याशी मुनींद्र शुक्ला के समर्थक जनसंपर्क कर रहे थे। इसी दौरान नारे लग रहे थे कि मोहर मारो तान के साइकिल को पहचान के। इसी बीच पाकिस्तान के नारे लगे और ढोल बजने लगा। ट्विटर पर वीडियो वायरल होने के बाद कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने कहा कि वीडियो के स्थान तथा व्यक्तियों के संबंध में जानकारी पता लगाई जा रही है। मामले की पुष्टि होते ही वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि सपा का पाकिस्तान प्रेम नया नहीं है, इसके पहले सपा मुखिया अखिलेश यादव भी जिन्ना की तारीफ कर चुके हैं।

हालाँकि, सपा समर्थकों का दावा है कि वीडियो एडिटेड है। कानपुर की बिठूर विधानसभा सीट से सपा प्रत्याशी मुनींद्र शुक्ला ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि एक कथित वीडियो टिकरा गाँव में जनसंपर्क के दौरान राष्ट्रविरोधी नारा लगाते हुए दर्शाया गया है। ये वीडियो पूरी तरह से भ्रामक है। यह वीडियो विरोधियों की साजिश है। उनके जनसंपर्क के दौरान कहीं भी इस तरह के नारे नहीं लगाए गए हैं। यह वीडियो एडिटेड है।

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव 2012 में एसपी से मुनींद्र शुक्ला ने जीत दर्ज की थी। वहीं, विधानसभा चुनाव 2017 बीजेपी के अभिजीत सांगा ने सपा के मुनींद्र शुक्ला को 58,987 मतों से हराया था। बीजेपी के अभिजीत सिंह सांगा को 1,13,289 वोट मिले थे। वहीं, एसपी के मुनींद्र शुक्ला को 54,302 वोट मिले थे। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में एक दूसरे के धुर विरोधी नेता आमने सामने हैं।

‘ईसा मसीह को प्यार करता हूँ’: पंजाब चुनाव के बीच मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा- ‘सिख धर्म में पैदा हुआ, ईसाई धर्म में आस्था’

पंजाब विधानसभा चुनावों (Punjab Assembly Election 2022) के बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Sinh Channi) ने शुक्रवार (4 फरवरी 2022) को कहा वह ईसाइयों के देवता ईसा मसीह को बहुत मानते हैं। उन्होंने कहा कि वे सिख धर्म में पैदा हुए हैं। वे ईसाई धर्म अपनाया नहीं है, लेकिन उसमें उनकी आस्था है।

न्यू इंडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ईसाई में मेरी आस्था है। पैदा सिख हुआ हूँ। लेकिन ये भी है कि मैं प्रभु ईसा मसीह को प्यार करता हूँ।”

बता दें कि चन्नी के क्रिश्चियन में धर्मांतरण करने को लेकर बहस होता रहा है। उन्होंने पिछले साल दिसंबर के अंतिम सप्ताह में कहा था कि पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार ईसा मसीह की शिक्षाओं और ईसाइयों के पवित्र धर्मग्रंथ बाइबल पर व्यापक अध्ययन और शोध के लिए एक ‘पीठ’ स्थापित करेगी। उन्होंने यह पीठ राज्य के विश्वविद्यालय करने के बारे में कही थी।  

क्रिसमस के उपलक्ष्य में ‘वॉयस ऑफ पीस मिनिस्ट्री’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि समाज के सभी वर्गों के इस पवित्र अवसर को मिलकर मनाना चाहिए। सीएम ने कहा था कि क्रिसमस न केवल ईसाइयों के लिए, बल्कि सभी धर्मों और आस्था के लोगों के लिए एक पवित्र अवसर है। ईसा मसीह ने शांति, प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का मार्ग दिखाया था, जो आज भी प्रासंगिक है।

वहीं, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चन्नी पर गंभीर आरोप लगाया था। कैप्टन ने कहा था कि वर्तमान सीएम चन्नी एक महिला अधिकारी को देर रात कॉल करके परेशान करते थे। इस बात की शिकायत उनसे महिला अधिकारी ने की थी। बाद में चन्नी से जब सवाल-जवाब हुआ तो उन्हें महिला अधिकारी से माफी माँगनी पड़ी थी।

‘बंदूक-चाकू की नोक से खेलने वाले दंगाई योगी को सह नहीं सकते, नकली समाजवादी लोगों को भूखा छोड़ देंगे’: सपा पर जमकर बरसे पीएम मोदी

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Election-2022) के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने शुक्रवार (4 फरवरी 2022) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Aaditynath) के समर्थन में जन चौपाल लगाकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को संबोधित किया। वर्चुअल रैली के दौरान पीएम मोदी ने योगी सरकार के कामकाज की सराहना करते हुए समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) पर जमकर हमला बोला। उन्होंने सपा को नकली और कागजी समाजवादी करार दिया।

पीएम नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव को लेकर कहा, “ये चुनाव सुरक्षा, सम्मान और यूपी में शांति के स्थायित्व, विकास की निरंतरता और प्रशासन में सुशासन के लिए है। ये चुनाव हिस्ट्रीशीटरों को बाहर करने और नई हिस्ट्री बनाने के लिए है। यूपी के लोगों ने अब मन बना लिया है कि दंगाइयों, माफियाओं और पर्दे के पीछ रहकर यूपी की सत्ता को हथियाने नहीं देंगे। मतदाताओं को ये अच्छी तरह से पता है कि उद्योगों, व्यापार को चलाने के लिए कानून व्यवस्था का राज होना आवश्यक है। योगी ने प्रदेश में कानून का राज स्थापित किया है। यूपी को ऐसी सरकार की जरूरत है जो डबल तेजी से काम करे और विकास करे।”

पीएम मोदी ने कहा कि माफिया से इस लड़ाई में सबसे बड़ी ताकत दलित, गरीब माताएं-बहने हैं। दंगाइयों और दबंगों को खुली छूट देने वालों ने सबसे अधिक नुकसान बहनों का किया। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि बीते पाँच सालों में प्रदेश में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस में डेढ़ लाख भर्तियाँ हुई हैं, जबकि बीते 15 सालों में सवा लाख से भी कम भर्तियाँ हुई थीं। 2017 से पहले यूपी में 13 हजार से भी कम महिलाएं पुलिस में थीं।

प्रधानमंत्री ने कहा, “आए दिन बंदूक-चाकू की नोंक पर खेलने वाले दंगाई योगी जी की सरकार को किसी भी कीमत पर सहन नहीं कर सकते। वे पूरी ताकत लगा देंगे कि यह सरकार फिर से न आए। इसलिए यूपी के लोगों से मेरी अपील है कि वे ऐसे तत्वों को कभी सफल नहीं होने दें।”

सपा पर निशाना साधते हुए पीएम ने कहा, “अगर इन्हें मौका मिल गया तो किसानों को मिल रही हज़ारों करोड़ की मदद ये परिवारवादी नकली समाजवादी बंद करा देंगे। किसानों के बैंक अकाउंट में जो MSP का पैसा जा रहा है, ये नकली समाजवादी उसे रोक देंगे। कोरोना काल में जो मुफ्त राशन मिल रहा है, ये नकली समाजवादी आपको भूखा छोड़ेंगे।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि नकली समाजवादी इस ताक में बैठे हैं कि इनकी सत्ता आए और ये मध्यम वर्ग की जेब पर डाका डालकर रियल एस्टेट माफिया को दे दें। नोएडा-गाजियाबाद के लोगों से बेहतर इन्हें कौन जानता है? राशन माफिया से लेकर कमीशन माफिया तक, ठेका माफिया से लेकर खनन माफिया तक, नकली समाजवादी फिर पुराने अवतार में आने के लिए तैयार बैठे हैं।

महिला जासूस, हनीट्रैप… चीन के खतरनाक इरादे: ब्रिटेन की खुफिया सेवा MI6 के पूर्व निदेशक निगेल इंकस्टर की आपबीती

चीन (China) का खुफिया राज्य लंबे समय से अत्यधिक सक्रिय रहा है। चीन के बारे में माना जाता है कि पूरी दुनिया में उसके जासूस (Spy) हैं। उसने अपनी कई महिला जासूसों को दूसरे देशों के प्रमुख नेताओं, अधिकारियों को हनी ट्रैप (Honeytrap) में फँसाकर खुफिया जानकारी हासिल करने के लिए तैनात किया हुआ है। इस बीच ब्रिटेन (Britain) की खुफिया सेवा MI6 के पूर्व निदेशक निगेल इंकस्टर (Nigel Inkster) ने चीन को ‘खुफिया राज्य’ बताया है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन को राज्य सुरक्षा मंत्रालय (MSS), चीन की गुप्त पुलिस एजेंसी या सैन्य खुफिया विभाग से अधिक सावधान रहना होगा। 

बता दें कि चीन के सुरक्षा विभाग को राज्य सुरक्षा मंत्रालय (MSS) कहा जाता है। यह विभाग साल 1983 में स्थापित किया गया था। विभाग काउंटर-इंटेलिजेंस, विदेशी इंटेलिजेंस के साथ-साथ घरेलू और विदेशी धरती पर खुफिया तंत्र द्वारा जानकारी जुटाने, निगरानी रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है।

निगेल इंकस्टर कहते हैं, “हमें यह गलती नहीं करनी चाहिए, जैसा कि पिछले महीने एक अखबार ने यह सोचकर किया था कि ‘चीन आज वास्तव में पुराने जमाने की जासूसी में दिलचस्पी नहीं रखता है’। इसकी खुफिया सेवाएँ अत्यधिक सक्रिय हैं और भर्ती के लिए कई अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करती हैं।”

उन्होंने कहा, “चीन अक्सर जिसे मैं ‘आइसबर्ग ऑपरेशन’ (‘iceberg operations’) कहता हूँ, उसमें शामिल होता है। हालाँकि इसे खुले तौर पर स्वीकार नहीं करता है, लेकिन जो दिखाई दे रहा है वह बड़ी तस्वीर का केवल एक अंश मात्र है। मुझे पता है क्योंकि मैं इस तरह के एक ऑपरेशन का टारगेट रहा हूँ। 2018 में, जब मैं कॉमन्स फॉरेन अफेयर्स कमेटी का सलाहकार था, एक ब्रिटिश प्रोफेसर ने सुझाव दिया कि यूरोपीय संघ/चीन (EU/China) संबंधों में जो मुझे अनुभव है, उससे मैं लेक्चर देकर अच्छा पैसा कमा सकता हूँ। क्या मैं चीनी विश्वविद्यालय में उनके दोस्तों से मिलना चाहूँगा? प्रोफेसर खुद एक पार्टी स्कूल में लेक्चर देते हैं जहाँ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) अधिकारी प्रशिक्षित होते हैं।”

निगेल इंकस्टर ने बताया कि उन्होंने शंघाई इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी के साथ ईमेल का आदान-प्रदान किया। जिसके बाद उन्हें इससे संबंधित एक थिंकटैंक, शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर यूरोपियन स्टडीज (SIES) को भेज दिया। फिर उन्हें जल्द ही शहर के लिए उड़ान भरने के लिए एक फुल पेमेंट वाला प्रस्ताव मिला। चूँकि वो पहले से ही शेन्ज़ेन में एक सम्मेलन में बोलने वाले था, तो वह प्रस्ताव के बारे में और बात करने के लिए वहाँ मिलने के लिए सहमत हुए। ईमेल में कहा गया कि ‘सुखद संयोग’ से इसके दो लोग सप्ताह के बाद बिजनेस के लिए पास के ग्वांगझोउ में मिलेंगे।

वह आगे कहते हैं, “यह पता लगाना मुश्किल नहीं था कि यह एक खुफिया दृष्टिकोण था। उन्होंने मुझे होटल में मिलने के बजाय, एक कैफे में बुलाया। वो दो लोग थे। जिसमें से शेन छोटा था, लेकिन उसी ने मेरे से बात की। शेन का अपना प्रवाह उद्देश्य के लिए उपयुक्त नहीं था, इसलिए हमने चीनी भाषा में बात की। फिर वे गुआंगझोउ में बिजनेस करने की अपनी कहानी भूल गए। यह भी स्पष्ट था कि जैसे-जैसे मैं लेक्चर देने के लिए सक्षम हो रहा था, वैसे-वैसे मैंने अपनी ग्राउंड बदली और वे भी अपने मूल हितों से दूर हो गए। वे एक प्रिंटेड ‘प्रोजेक्ट प्रस्ताव’ लाए थे और तुरंत पेमेंट सेक्शन में चले गए। इसके बाद हम संपर्क में रहने के आश्वासन के साथ अलग हो गए।”

निगेल इंकस्टर ने बताया कि इसके बाद उनके पास कई ईमेल आए। जिसमें पूछा गया कि वो उनसे कब मिल सकते हैं? क्या वो उस लेक्चर पर सलाह देने में मदद कर सकते हैं जो शेन यूके/चीन संबंधों पर दे रहे थे? (यह देखने के लिए कि टारगेट कितनी दूर जा सकता है, कुछ सामान्य अनुरोध के साथ शुरू करना एक सामान्य रणनीति है।) वह कहते हैं, “मैंने पत्राचार को समाप्त होने दिया। लेकिन मुझे यकीन है कि जिस क्षण मैं चीन में कदम रखूँगा और मिस्टर शेन मेरे सामने आएँगे। मैं वापस नहीं आ पाऊँगा।” उन्होंने कहा कि यह आश्चर्य की बात नहीं थी कि उनका खुफिया दृष्टिकोण एक ब्रिटिश अकादमिक द्वारा स्थापित किया गया था। उन्होंने कहा कि उनके विश्वविद्यालय काफी समय से टारगेट पर हैं।

‘₹4000 करोड़ दो और कंपनी की चाबी लो’: भारत पे के CEO सुहैल समीर पर भड़के MD अशनीर ग्रोवर, इस्तीफे से किया इनकार

यूपीआई पेमेंट ऐप (UPI Payment App) भारतपे (BharatPe) के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) व सह संस्थापक अशनीर ग्रोवर ने कहा कि अगर कंपनी में उनकी हिस्सेदारी के लिए 4,000 करोड़ रुपए मिल जाते हैं तो वह कंपनी छोड़ने के लिए तैयार हैं। बहुचर्चित शार्क टैंक के जजों में एक ग्रोवर पर धोखाधड़ी, दुर्व्यवहार और कॉरपोरेट गवर्नेंस के आरोप लगने के बावजूद वह कंपनी छोड़ने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। बता दें कि कंपनी के सीईओ सुहैल समीर के नेतृत्व में बोर्ड ने फोरेंसिक ऑडिट के लिए अल्वारेज एवं मार्सल और पीडब्ल्यूसी को नियुक्त किया है।

मनी कंट्रोल को ग्रोवर ने बताया कि कंपनी में उनकी हिस्सेदारी 9.5 प्रतिशत है और अगर कोई निवेशक 4,000 करोड़ रुपए देकर उनकी हिस्सेदारी खरीदता है तो वह कंपनी छोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यह उनका उचित बाजार मूल्य है। उन्होंने खुद पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। ग्रोवर ने कहा, मैंने क्या किया है कि इस्तीफा दूँ? यह सुनवाई से पहले सजा देने की तरह है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं एमडी (प्रबंध निदेशक) हूँ। मैं कंपनी चलाता हूँ। अगर निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) को लगता है कि मुझे एमडी बनने रहने की जरूरत नहीं है और किसी और को कंपनी चलानी चाहिए तो मेरे 4,000 करोड़ रुपये रखिए और चाबी ले लीजिए।” उन्होंने कहा कि वे या तो कंपनी चलाएँगे या फिर अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए तैयार हैं। इसमें कोई तीसरा विकल्प नहीं है।

पिछले साल जब भारत पे ने टाइगर ग्लोबल, कोट्यू सहित अन्य निवेशकों से 370 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 2,762.7 करोड़ रुपए) जुटाए थे, तब कंपनी का मूल्य 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 22,400 करोड़ रुपए) था। ग्रोवर ने कहा कि उस राउंड की फंडिंग के वक्त से अभी मर्चेंट व्यवसाय 50 प्रतिशत अधिक है। उस वक्त बैंक का लाइसेंस नहीं था, अभी है। उन्होंने कहा, “मैंने सबसे बड़ा P2P (पीयर-टू-पीयर) प्लेटफॉर्म बनाया है, 12% क्लब, जो तब नहीं था। मैंने पोस्टपे, एक BNPL (बाय नाउ पे लेटर) प्ले बनाया। लाइसेंस लेने के अलावा हमने PMC (बैंक) का भी विलय किया।”

इससे पहले अशनीर ग्रोवर एक वीडियो क्लीप सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद छुट्टी पर चले गए थे और कहा था कि वे 31 मार्च से पहले वापस आ जाएँगे। इस वीडियो में नाइका के IPO में निवेश नहीं कर पाने की वजह से कोटक के एक कर्मचारी को गाली दी थी। इसको लेकर ग्रोवर और कोटक के बीच कानूनी नोटिस भी जारी हुआ था।

6 मुख्यमंत्री बदले लेकिन मंत्री बने रहे थे हरिशंकर तिवारी: जेल से चुनाव जीतने वाला पहला माफिया, जिसने बेटों को भी बना दिया MP-MLA

पूर्वांचल की राजनीति में एक व्यक्ति ऐसा हुआ है, जिसने हर दलों की सरकार में अपना प्रभाव कायम किया और लंबे समय तक इलाके में प्रभावशाली बने रहे। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने परिवार के कई सदस्यों को भी विधायक और सांसद से लेकर ऊँचे-ऊँचे पदों तक पहुँचाया​। वो नाम है हरिशंकर तिवारी, जिन्होंने क्राइम से लेकर राजनीति तक की पिच पर बैटिंग की और गोरखपुर में गोरखनाथ मठ के अलावा सत्ता का कोई और केंद्र था तो वो था ‘हाता’, उनका घर।

राजनीति में लंबे समय तक रहा हरिशंकर तिवारी का दबदबा, परिवार के अन्य लोग भी बड़े-बड़े पदों पर

हरिशंकर तिवारी ने चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से 1985 में निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीते। इसके बाद उन्होंने 1989, 91 और 93 में कॉन्ग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। पाँचवी बार वो ‘ऑल इंडिया इंदिरा कॉन्ग्रेस (तिवारी)’ के टिकट पर जीते। 2002 में उन्होंने इसी क्षेत्र से ‘अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कॉन्ग्रेस’ के टिकट पर लगातार छठी बार जीत का स्वाद चखा। 2017 में उन्होंने होने बेटे विनय शंकर तिवारी को बसपा का टिकट दिला कर इस सीट से विधायक बनवाया।

वहीं उनके एक अन्य बेटे भीष्म शंकर तिवारी संत कबीर नगर से समाजवादी पार्टी के टिकट पर सांसद चुने गए थे। 2009-14 लोकसभा के काल में वो सांसद रहे थे। हरिशंकर तिवारी की छवि एक गैंगस्टर की रही है। उनका पैतृक गाँव चिल्लूपार के ही टांडा में है। हरिशंकर तिवारी के नाम एक रिकॉर्ड दर्ज है कि वो जेल में से चुनाव जीतने वाले पहले गैंगस्टर हैं। उन्हें कभी उत्तर प्रदेश का सबसे प्रभावशाली ‘ब्राह्मण चेहरा’ माना जाता था। 1997 में उन्होंने अन्य नेताओं के साथ मिल कर ‘अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कॉन्ग्रेस’ का गठन किया था।

मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव हों या फिर कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्ता हों या फिर राजनाथ सिंह, चाहे वो मायावती ही क्यों न हों – उन्होंने इन सभी की सरकारों में मंत्री पद सँभाला। उनके भतीजे गणेश शंकर पांडेय उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति के पद तक पहुँचे। अब चलते हैं थोड़ा पीछे, जब पूर्वांचल को गैंगवॉर का इलाका माना जाता था। 1980 के दशक में ही हरिशंकर तिवारी ने राजनीति का अपराधीकरण शुरू कर दिया था। हालाँकि, 2007 और 2012 के चुनावों में उन्हें अपने गढ़ में ही हार झेलनी पड़ी थी।

पूर्वांचल में अपराध की शुरुआत और माफियाओं के बीच गैंगवॉर

पूर्वांचल में ये वो दौर था, जब छात्रों को अपराध से जोड़ने का काम शुरू हुआ। जो जितना तेज़-तर्रार और अव्वल होता था, उसे माफिया गिरोह में लाने की उतनी ही ज्यादा कोशिश होती थी। हरिशंकर तिवारी का कहना है कि उन्हें राजनीति में इसीलिए आना पड़ा, क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह ने उस पर झूठे केस चला कर उन्हें जेल भिजवा दिया था। वो पहले से ही कॉन्ग्रेस के सदस्य थे और इंदिरा गाँधी के साथ काम करने का अनुभव भी उनके पास था।

80 के दशक में उनके ऊपर 26 मामले दर्ज थे। इसमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, छिनौती, रंगदारी, वसूली और सरकारी कार्य में बाधा डालने सहित कई मामले शामिल थे। लेकिन, आज तक किसी भी मामले में उन्हें न्यायालय ने दोषी नहीं करारा। 80 का दशक वो था, जब पूर्वांचल में विकास के नाम पर कई योजनाओं के टेंडर जारी हुए और उनके लिए अपराधियों में भिड़ंत हुई। हरिशंकर तिवारी धीरे-धीरे पूरे पूर्वांचल के ठेके अपने पास लेने लगे।

रेलवे, कोयला सप्लाई और खनन से लेकर शराब तक के ठेकों पर उनका ही राज चला करता था। उन्होंने लोगों के बीच अपनी ‘रॉबिनहुड’ वाली छवि बना ली। वो बार-बार जीत कर विधानसभा पहुँचते रहे और मंत्री बनते रहे, उधर आरोप लगते रहे। उनकी उम्र फ़िलहाल 85 वर्ष है और 2012 की हार के बाद उन्होंने चुनाव लड़ना बंद कर दिया। गोरखपुर के जटाशंकर मोहल्ले में उनका एक किलानुमा घर है। पूर्वांचल में कभी इसी ‘हाता’ में दरबार लगा कर अधिकतर फैसले लिए जाते थे।

वो ऐसा समय हुआ करता था, जब हरिशंकर तिवारी का नाम किसी पार्टी के साथ जुड़ते ही पूर्वांचल में उसकी किस्मत बदल जाती थी। गाजीपुर से लेकर वाराणसी तो बाद में माफियाओं का केंद्र बना, लेकिन हरिशंकर तिवारी ने गोरखपुर से ही इसकी शुरुआत की। गोरखपुर को उस समय जातीय हिंसा की आग में झोंक दिया गया था। लोग आज भी उन्हें कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अपराधीकरण के लिए जिम्मेदार मानते हैं। इसी वजह से श्रीप्रकाश शुक्ला नाम के कुख्यात शूटर का भी जन्म हुआ।

कहा जाता है कि चालाक हरिशंकर तिवारी ने हमेशा फ्रंटफुट पर खेलने की बजाए पर्दे के पीछे से बड़ी-बड़ी घटनाओं को अंजाम देने में दक्षता हासिल की। राजपूत बनाम ब्राह्मण का एक नया संघर्ष शुरू हो गया। लेकिन, अपने शातिर दिमाग के कारण वो हर पार्टी के चाहते बने रहे। उन्होंने एक माफिया से लेकर यूपी की राजनीति के ‘पंडित जी’ तक का सफर तय किया। गैंगवॉर से पहले तब लोगों में ऐलान कर दिया जाता था कि कोई घर से न निकले। बाहर गोलियाँ चलती थीं और लाशें गिरती थीं।

उन्होंने 1985 में जेल से पहले चुनाव ही निर्दलीय जीता था, वो भी भारी अंतर से। जब जगदम्बिका पाल एक दिन के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे, तब भी हरिशंकर तिवारी उनकी कैबिनेट में थे। राजपूत नेता वीरेंद्र प्रताप शाही के साथ उनका गैंगवॉर कुख्यात है। वर्चस्व की लड़ाई के लिए इन दोनों के बीच खूनी खेल चलता रहता था। वीरेंद्र शाही को मठ से भी समर्थन मिला था। बता दें कि इन दोनों पर लगाम कसने के लिए ही पहली बार गैंगस्टर एक्ट लागू हुआ था

योगी सरकार के आने के बाद ‘हाता’ में भी पड़े छापे

अब स्थिति ये है कि इनका कुछ खास राजनीतिक प्रभाव बचा नहीं है, लेकिन ब्राह्मण चेहरा के नाम पर गुलदस्ते की तरफ पार्टियाँ इन्हें अपनी तरफ करना चाहती हैं। दिसंबर 2021 में उनके परिवार ने सपा का दामन थाम लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के साथ ही जब माफियाओं पर कार्रवाई शुरू हुई, तो हरिशंकर तिवारी भी नहीं बचे। उनके घर पर पाँच थानों की पुलिस ने छापेमारी की। ‘तिवारी हाता’ में तलाशी ली गई। ये मामला खोराबार के जगदीशपुर में मार्च 2017 में रिलायंस पेट्रोल पंप के कर्मचारियों से 98 लाख रुपए की लूट से जुड़ा है।

इस मामले में जिस छोटू चौबे को गिरफ्तार किया गया था, उसने किसी सोनू पाठक का नाम लिया। इस व्यक्ति की लोकेशन हरिशंकर तिवारी के घर पर मिली थी। इस आधार पर उनके घर आधे घंटे की छापेमारी हुई थी। वहाँ से 6 लोगों को हिरासत में भी लिया गया था। तिवारी परिवार ने इसे मुद्दा भी बनाया था और हरिशंकर तिवारी सड़क पर उतर गए थे। भारी भीड़ के कारण कई थानों की पुलिस लगानी पड़ी थी। उनके बेटे विजय के ठिकानों पर CBI की छापेमारी हो चुकी है।

CBI ने लखनऊ, गोरखपुर और नोएडा के उनके ठिकानों पर रेड मारी थी। ये मामला बैंक लोन घोटाले से जुड़ा था। ये घोटाला 1500 करोड़ रुपए का है। ‘गंगोत्री इंटरप्राइजेज’ नामक की कंपनी का विधायक विनय शंकर तिवारी से सम्बन्ध बताया गया था। आरोप है कि इस कंपनी ने लोन हड़प किसी दूसरे जगह लगा दिया। मोदी लहर में भी उन्होंने 2017 में जीत दर्ज कर ली थी। उनके विधानसभा क्षेत्र में इस बार भी मुकाबला कड़ा होने वाला है और सबकी नजर इस परिवार पर है।

BBC की महिला वर्कर के साथ कुकिंग टीवी शो की शूटिंग के दौरान रेप: 9 दिन बाद लंदन पुलिस को मिली सूचना

मीडिया चैनल BBC की एक महिला कर्मचारी के साथ कथित तौर पर बलात्कार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फेमस टीवी प्रजेंटर स्टेसी डूले के नए टीवी शो की शूटिंग के दौरान बीबीसी की एक महिला कर्मचारी के साथ रेप किया गया था। द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, टीवी प्रजेंटर स्टेसी डूले के एक नए कुकिंग शो ‘Hungry For It’ की शूटिंग के दौरान रेप की घटना हुई थी। 

पुलिस ने कहा- सबूतों की जाँच हो रही है

सिटी ऑफ लंदन पुलिस ने कहा कि घटना की सूचना उन्हें दूसरे पुलिस फोर्स से मिली है और इस मामले में सबूतों की जाँच की जा रही है। एक सूत्र ने द सन को बताया कि हमलावर ने उस कमरे में जबरन घुसकर महिला के साथ जबरदस्ती की थी। खबर के मुताबिक शो में काम कर रहे क्रू को इस मामले के बारे में बताया गया था। दरअसल, बीबीसी के एक स्टाफ सदस्य ने ‘प्रोडक्शन के दौरान यौन शोषण के आरोप’ के बारे में क्रू को एक ईमेल किया था। घटना कथित तौर पर शुक्रवार 10 सितंबर, 2021 को हुई, जब बीबीसी थ्री टेलीविजन शो को फिल्माया जा रहा था।

सिटी ऑफ लंदन पुलिस ने Mirror को बताया कि कथित हमले के नौ दिन बाद एक अन्य पुलिस फोर्स ने उनसे संपर्क किया। उन्होंने कहा, “पूछताछ जारी है और इस समय कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। पीड़ित महिला को वर्तमान में विशेष रूप से प्रशिक्षित अधिकारियों द्वारा सहायता प्रदान की जा रही है।” सिटी ऑफ लंदन पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि रविवार (19 सितंबर 2021) को सिटी ऑफ लंदन पुलिस से एक अन्य पुलिस फोर्स ने संपर्क किया। पुलिस फोर्स को शुक्रवार (10 सितंबर 2021) को हुए बलात्कार की घटना रिपोर्ट मिली थी। हालाँकि, यह शिकायत देर से दर्ज करवाई गई थी।

डर गए थे सभी कर्मचारी

एक सूत्र ने द सन को बताया, “यह बेहद डरावना है जब एक शो में काम करने के दौरान ऐसा कुछ हुआ हो। हमलावर ने कथित तौर पर उस कमरे में जबरन घुसने के बाद दरवाजा अंदर से लगा लिया और महिला कर्मचारी के साथ जबरदस्ती की।” उन्होंने कहा, “इस घटना ने पूरे क्रू को हिलाकर रख दिया है और सभी वास्तव में परेशान हैं। शो में काम करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करने के दौरान हममें से किसी ने भी कभी नहीं सोचा था कि ऐसा कुछ होगा।”

हंग्री फॉर इट बनाने वाले बीबीसी स्टूडियोज ने कहा कि वे इस घटना पर टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन उन्होंने कर्मचारी को ‘उचित समर्थन’ देने के लिए ‘मजबूत प्रक्रियाओं’ की ओर इशारा किया है। खबर के मुताबिक शो के एक क्रू मेंबर ने शो के सभी वर्कर्स को घटना के बारे में ईमेल भी भेजा था लेकिन इस ईमेल में अन्य स्टाफ से कहा गया था कि वे घटना के बारे में सार्वजनिक तौर से किसी को न बताएँ। बता दें कि इस शो में दस शौकिया शेफ एक साथ रहते हैं। इस दौरान वे बड़े पुरस्कार के लिए एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं।

BBC ने क्या कहा? 

बीबीसी के एक प्रवक्ता ने बताया, “बीबीसी स्टूडियो के पास यह सुनिश्चित करने के लिए मजबूत प्रक्रियाएँ हैं कि हमारे किसी भी कर्मचारी या फ्रीलांसरों को जो किसी अपराध का शिकार हो सकते हैं, उन्हें सभी आवश्यक सहायता और देखभाल दी जाती है और मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जाता है।”

‘हिजाब पहनना मौलिक अधिकार’: मुस्लिमों के समर्थन में उतरे कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया, बीजेपी पर लगाया राजनीतिकरण का आरोप

कर्नाटक (Kranataka) के उडुपी जिले के पीयू कॉलेज में हिजाब (Hijab) पहनने को लेकर मुस्लिम लड़कियों के विरोध के बाद अब राज्य में कई अन्य कॉलेजों में भी इसी तरह के फसाद शुरू हो गए हैं। इस बीच प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने भी कॉलेजों में मुस्लिम छात्राओं के हिजाब पहनने का समर्थन किया है। उन्होंने हिजाब को मुस्लिमों का ‘फंडामेंटल राइट्स’ यानि कि मूलभूत अधिकार करार दिया है।

सिद्धारमैया ने कहा, “मुस्लिम लड़कियाँ शुरू से ही हिजाब पहनती आई हैं। यह उनका मौलिक अधिकार है। क्या वे (छात्र) इससे पहले जब भी स्कूल या कॉलेज जाते थे तो भगवा शॉल पहनते थे? यह राजनीति से प्रेरित है। इसलिए सरकार को स्टैंड लेना चाहिए।” इससे पहले मुस्लिम छात्राओं ने भी हिजाब को मौलिक अधिकार बताया था।

कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया ने आगे कहा, “शिक्षा मौलिक अधिकार है। यदि आप उन्हें (मुस्लिम लड़कियों को) स्कूल आने से रोकते हैं तो यह क्या दर्शाता है? क्या यह मौलिक अधिकार का हनन नहीं है? लड़कियाँ मुस्लिम समुदाय से हैं, उन्हें शिक्षा प्राप्त करने से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।”

कॉन्ग्रेस नेता ने भाजपा पर मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और कहा कि यह सब एक महीने से चल रहा है। आखिर सरकार क्या कर रही है? सिद्धारमैया मानते हैं कि ऐसा कोई यूनिफॉर्म नहीं है, जिससे स्टूडेंट को चिपके रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “ऐसा होने पर कुछ भाजपा के लोगों ने भगवा शॉल क्यों पहनना शुरू कर दिया? वह इस मुद्दे का राजनीतिकरण करना चाहते हैं।”

इस बीच शुक्रवार को भी उडुपी के कुंडापुर भंडारकर कॉलेज में हिजाब पहनी मुस्लिम छात्राओं को कॉलेज में प्रवेश करने से रोक दिया गया। इससे पहले गुरुवार (3 फरवरी 2022) को कुंडापुर कॉलेज में हिजाब पहनी छात्राओं को यह कहकर कॉलेज के अंदर आने से रोक दिया गया था कि शासन के आदेश व कॉलेज के दिशा-निर्देशों के अनुसार वे कक्षाओं में यूनिफॉर्म में आएँ।

कब से चल रहा है ये मामला

पीयू कॉलेज का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं। कॉलेज के प्रिंसिपल रूद्र गौड़ा ने कहा था कि छात्राएँ कॉलेज परिसर में हिजाब पहन सकती हैं, लेकिन क्लासरूम में इसकी इजाजत नहीं है। प्रिंसिपल के मुताबिक, कक्षा में एकरूपता बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया है। इसी क्रम में मुस्लिम छात्रा ने हाई कोर्ट में भी याचिका दायर कर कॉलेज पर भेदभाव का आरोप लगाया था। हालाँकि, इस बीच इस्लामीकरण के प्रतीक हिजाब के विरोध में 2 फरवरी को उडुपी के कुंडापुर सरकारी कॉलेज के 100 से अधिक छात्र भी भगवा तौलिया कंधे पर डालकर कॉलेज पहुँच गए।

भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।