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जमानत पर निकल धमकाता था दिलशाद, वायरल करता था तस्वीरें: गोरखपुर मामले के पीछे ‘लव जिहाद’, आत्महत्या को मजबूर था परिवार

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर (Gorakhpur in Uttar Pradesh) में नाबालिग बेटी के रेप के आरोपी दिलशाद हुसैन (Dilshad Hussain) को गोली मारकर हत्या करने के मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बताया जा रहा है कि दिलशाद जमानत पर बाहर आने के बाद पीड़ित परिवार पर दबाव बना रहा था। बेटी के साथ हुई घटना के बाद बदनामी और आरोपी द्वारा बनाए जा रहे दबाव को देखते हुए BSF से रिटायर्ड पिता ने अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ आत्महत्या करने की सोची थी, लेकिन बाद में दिलशाद हुसैन को मारने का निर्णय ले लिया। पिता के इस कदम का सोशल मीडिया पर लोग समर्थन कर रहे हैं और इसके लिए व्यवस्था को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि पीड़िता के पिता ने दिलशाद को पिछली तारीख पर ही उसे मारने की योजना बनाई थी, लेकिन वह उसमें सफल नहीं हो सका। तब दिलशाद कचहरी अकेले नहीं, बल्कि अपने साथ कुछ लोगों को लेकर आया था। इसी कारण पीड़िता के पिता की प्लानिंग फेल हो गई और दिलशाद बच गया, लेकिन दूसरी बार शुक्रवार (21 जनवरी 2022) को वह बच नहीं सकता। भागवत निषाद ने उस पर चार गोलियाँ चलाई, जिसमें उसकी मौत हो गई।

नाबालिग के साथ रेप के आरोप में पॉक्सो के तहत जेल में बंद रहने के बाद दिलशाद जब जमानत पर बाहर आया, तब वह लड़की पिता को परेशान करने लगा। वह मुकदमे को वापस लेने के लिए उन पर दबाव बनाता था। इतना ही नहीं, दिलशाद उनकी बेटी और खुद के निकाह की तस्वीरों के साथ-साथ अन्य तस्वीरें भी भेजता था। शर्मिंदगी के कारण उनका परिवार बाहर नहीं निकलता था।

वहीं, उनकी बेटी दिलशाद के साथ ही रहने की अपनी जिद पर अड़ी थी, जिसके कारण उसे नारी निकेतन भेज दिया गया था। बेटी कोर्ट में दिलशाद के पक्ष में बयान भी दे चुकी थी। इससे पिता और उनका परिवार परेशान रहने लगा और परिवार सहित आत्महत्या करने की सोचने लगा। हालाँकि, बाद में उन्होंने इरादा बदल दिया।

दैनिक भास्कर के अनुसार, गोली मारने वाले रेप पीड़िता के पिता भागवत निषाद (Bhagwat Nishad) के समर्थन में लोगों का कहना है कि जब एक लड़की का बाप इस तरह परेशान होगा तो और क्या करेगा? उन्होंने जो किया वो सही किया। कुछ लोगों ने न्याय-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिता ने सोचा होगा कि उसे क्या सजा होगी, तो उसने खुद ही सजा दे डाली।

नाबालिग को झाँसे में लेकर भाग गया था दिलशाद

भागवत निषाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) में तैनात थे। वह अक्सर बाहर रहते थे। इधर उन्होंने गोरखपुर के बड़हलगंज में एक मकान बनवाया और अपने परिवार को गाँव से बुलाकर वहीं रख दिया और पढ़ाई वगैरह की व्यवस्था कर दी। उनके घर के सामने 30 वर्षीय दिलशाद हुसैन का दुकान था। वह बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सकरा थाने के विधिपुर गाँव का रहने वाला था। दुकान के कारण उसने लड़की के परिवार के साथ नजदीकी पढ़ाई और उनके घर आने-जाने लगा।

बताया जा रहा है कि दिलशाद वहाँ हिंदू नाम से रहता था और लड़की को अपना हिंदू नाम ही बताया था। धीरे-धीरे उसने लड़की को झाँसे में ले लिया। भागवत निषाद 2 साल पहले जब रिटायर होकर आए तो उन्हें शंका हुई और उन्होंने अपनी बेटी पर निगाह रखनी शुरू कर दी। इसी दौरान दिलशाद किशोरी को बहला-फुसलाकर ले भागा।

बता देें कि शुक्रवार (21 जनवरी 2022) की दोपहर को रेप (Rape) पीड़िता के पिता ने जमानत पर बाहर घूम रहे दिलशाद हुसैन की गोली मारकर हत्या (Murder) कर दी थी। दिलशाद गोरखपुर में मुकदमे की तारीख के लिए आया था, लेकिन कोरोना के कारण कोर्ट के अंदर जाने पर रोक है। इसी कारण दीवानी कचहरी के गेट पर पहुँचने के बाद आरोपित दिलशाद ने अपने वकील को मिलने के लिए गेट पर बुलाया।

इससे पहले के उसका वकील उस तक पहुँचता, बलात्कार की शिकार किशोरी के पिता ने पिस्टल से उसके सिर में गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। दिलशाद हुसैन रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपित था और जमानत में बाहर था। फिलहाल पुलिस ने उसकी हत्या के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

क्रिप्टोकरेंसी के बाजार में मचा हाहाकार, डूब गई ₹74 लाख करोड़ की बड़ी रकम: Bitcoin अपने पीक से 50% नीचे गिरा

क्रिप्टोकरेंसी बाजार (Cryptocurrency Market) में गिरावट का दौर जारी है। सबसे बड़ी डिजिटल क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन (Bitcoin) की कीमत शुक्रवार (21 जनवरी 2022) को 12% से अधिक घट गई और 36,000 डॉलर से भी नीचे गिरकर जुलाई के बाद सबसे निम्नतम स्तर पर आ गई। बिटकॉइन नवंबर 2021 में अपने पीक पर था, तब से अब तक इसमें लगभग 50% की गिरावट आ चुकी है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, बिटकॉइन के अलावा अन्य क्रिप्टोकरेंसी की कीमत में भी गिरावट दर्ज की गई है। जैसे डिजिटल करेंसी Ether और मीम कॉइन में भी बड़ी गिरावट आने से क्रिप्टोकरेंसी बाजार प्रभावित हुआ है। Ethereum 12.1% गिरकर 2,593.50 डॉलर पर बंद हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाजार से प्रोत्साहन वापस लेने के फेडरल रिजर्व के फैसले से, दुनिया भर में क्रिप्टोकरेंसी को भारी नुकसान पहुँचा है।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार (22 जनवरी 2022) को बिटकॉइन की कीमत लगभग 10% की गिरावट के साथ 35,450 डॉलर पर कारोबार कर रही है। इस साल की शुरुआत से ही इसमें 14 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। नवंबर 2021 के बाद से बिटकॉइन में लगातार गिरावट के ट्रेंड ने बाजार मूल्य में 600 बिलियन डॉलर से अधिक का सफाया कर दिया है और कुल क्रिप्टो बाजार से 1 ट्रिलियन डॉलर (74 लाख करोड़ रुपए) से अधिक का नुकसान हुआ है। बेस्पोक इन्वेस्टमेंट ग्रुप के अनुसार, बिटकॉइन और क्रिप्टो बाजार में यह दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है।

बताया जा रहा है कि क्रिप्टो-केंद्रित स्टॉक (Crypto Centric Stock) में भी शुक्रवार को बड़ी गिरावट आई। इस दौरान एक पल ऐसा भी आया, जब कॉइनबेस ग्लोबल इंक (Coinbase Global Inc) में लगभग 16% की गिरावट दर्ज की गई और 2021 में पब्लिक डेब्यू करने के बाद से यह अपने निम्नतम स्तर पर आ गया। इसी तरह MicroStrategy Inc. ने 18% की गिरावट दर्ज की।

क्या है क्रिप्टोकरेंसी


बता दें कि क्रिप्टोकरेंसी एक प्रकार की डिजिटल कैश प्रणाली है। यह एक निजी कंप्यूटर चेन से जुड़ी हुई होती है और कंप्यूटर एल्गोरिदम पर बनी है। क्रिप्टोकरेंसी पर किसी भी देश या सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता है। कई देश इसे लीगल कर चुके हैं। क्रिप्टोकरेंसी को आज सबसे आसान और लोकप्रिय तरीका क्रिप्टो एक्सचेंज कहते हैं, इसके जरिए इसे खरीदना आसान हो गया है। दुनिया भर में सैकड़ों क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज काम कर रहे हैं। भारत में काम कर रहे वजीरएक्स, जेबपे, क्वाइनस्विच कुबेर, क्वाइन डीसीएक्स गो समेत कई एक्सचेंज संचालित है, जहाँ से बिटक्वाइन, इथेरियम, टेथर और डॉजक्वाइन समेत दुनिया भर की डिजिटल मुद्राएँ खरीदी जा सकती हैं।

उइगर मुस्लिमों के दमन में चीन की मदद कर रहा Pak, उन्हें पकड़-पकड़ कर ड्रैगन को सौंप देता है: छात्रों-मौलवियों को भी नहीं छोड़ता

मुस्लिमों का मसीहा बनने का दिखावा करने वाले पाकिस्तान (Pakistan) को अक्सर भारत में मुस्लिमों पर अत्याचार की झूठी बयानबाजी करते देखा गया है। लेकिन यही पाकिस्तान चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों (Uighur Muslims Repression) के दमन में चीन (China) का समर्थन कर रहा है। उसने उइगर मुस्लिमों के मानवाधिकारों को बुरी तरह से कुचले जाने पर चुप्पी साध रखी है।

समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा स्थित थिंक टैंक अधिकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय फोरम (IFFRAS) ने अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा किया है। इसमें कहा गया है कि चीन की आर्थिक वृद्धि और विशेष रूप से ‘चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC)’ में अपने निवेश के कारण पाकिस्तान में बढ़ती उपस्थिति ने बीजिंग को मानव अधिकारों के उल्लंघन और शिनजियांग में उइगर अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न सहित देश में ‘अंतरराष्ट्रीय दमन’ करने का एक बड़ा अवसर दे दिया है।

खास बात ये है कि चीनी अधिकारियों ने 26 ब्लैक लिस्टेड देशों की शिनजियांग उइघुर स्वायत्त क्षेत्र (XAR) सूची में पाकिस्तान को शामिल किया था। थिंक टैंक के मुताबिक, ब्लैकलिस्टेड देशों में किसी के साथ संपर्क या दौरा या पारिवारिक संबंध या कोई संवाद रखता रखता है तो उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। ऐसे लोग XAR अधिकारियों के रडार में रहेंगे।

दिलचस्प बात यह है कि इसी तरह पाकिस्तान में एक घटना में सिकंदर हयात और गुलाम दुर्रानी की बीवियाँ उइगर थीं, इसलिए उन्हें अलग कर दिया गया और इसके बाद XAR में जाते वक्त चीनी अधिकारियों ने पकड़ लिया। इसके बाद हयात का बेटा अपनी माँ से मिलने के लिए शिनजियांग गया था, लेकिन वो दो साल तक उससे मिल ही नहीं पाया। वहीं दुर्रानी की पत्नी को 2017 से ही हिरासत में रखा गया है।

पाकिस्तान कितना मुस्लिमों की परवाह करता है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक मामले में पाकिस्तानी सुरक्षबलों ने 14 उइगर इस्लामी छात्रों को केवल इसलिए चीन को सौंप दिया, क्योंकि उन्हें शक था कि हो सकता है कि ये चीन में आतंकी घोषित किए गए हों। इन उइगरों को चीन को सौंपने के बाद चीनी सेना ने उनकी हत्या कर दी थी।

उइगर मुस्लिमों के दमन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर उठती रही है आवाज

भले ही पाकिस्तान चीन में उइगर मुस्लिमों के दमन में चीन का समर्थन करता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों के साथ किए जा रहे बर्ताव पर मुखर रहा है। इसी क्रम फ्रांस ने गुरुवार (20 जनवरी 2022) को उइगर मुस्लिमों के साथ मानवाधिकार के मुद्दों पर चिंता जताते हुए उसे समुदाय विशेष का नरसंहार करार दिया और इसके खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया। इस पर चीन भड़का हुआ है।

पाकिस्तान के दोगले रवैये को इस तरह से समझा जा सकता है कि 2014 तक लगभग 60 उइगरों को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा निर्वासित या कैद किया गया था। उरुमची में अशांति के बाद बड़ी संख्या में उइगरों ने चीन से पाकिस्तान के रास्ते तुर्की जाने की कोशिश की थी। हालाँकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन्हें पकड़ कर बाहर कर दिया था। एक उदाहरण में पाँच निर्दोष उइगरों को 2010 में बलूचिस्तान से चीन भेजा गया था ये जानते हुए कि उनका आतंकवादियों से कोई लेना देना नहीं था।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने उइगर होने के कारण मौलवी का किया अपहरण

इसी तरह की एक घटना पाकिस्तान में पिछले साल 7 मई 2021 को घटी जब उइगर मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने के कारण पाकिस्तान में अधिकारियों ने एक इस्लामिक मौलवी का ही अपहरण कर लिया। गिरफ्तार किए गए मौलवी के भाई अब्दुल वली ने द डिप्लोमैट को बताया कि उनके भाई पर पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट से जुड़े होने का आरोप लगाया गया था। ये एक आतंकवादी संगठन है। वली कहते हैं कि वो शिनजियांग प्रांत के रहने वाले थे। लेकिन जब 1960 के दशक में चीन ने उइगर मुस्लिमों के इस्लाम का पालन करने पर रोक लगाना शुरू किया था तभी उनके पिता वहाँ से पाकिस्तान आ गए थे।

वली अपने भाई के आतंकियों से संबंध को खारिज करते हुए कहते हैं कि उनके भाई ने कभी अपने जीवन में बंदूक नहीं पकड़ी। वो इस्लामिक उपदेशक है और दुनिया को उसके साथ जो हुआ उसके बारे में बताता है। उइगर होने के कारण उसे पकड़ा गया।

J&K में आतंकियों की गिनती अब 200 से भी कम , सिर्फ 2021 में 182 ढेर : आर्मी कमांडर ने पिछले साल को कहा ऐतिहासिक

जम्मू-कश्मीर को आतंकवादियों से छुटकारा दिलाने के लिए सुरक्षा बल लगातार प्रयासों में जुटे हैं। इसी क्रम में पिछले साल 182 आतंकी मारे गए थे। इनमें 44 तो आतंकियों के टॉप कमांडर थे। आज इसी विषय पर नॉर्थन कमांड के जनरल ऑफिसर-कमांडिंग इन चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल वाई के जोशी ने बात की है।

उन्होंने साल 2021 को जम्मू-कश्मीर में तैनात जवानों के लिए ‘ऐतिहासिक’ बताया और दावा किया कि पिछले वर्ष आतंकवाद संबंधित घटनाओं और पथराव की गतिविधियों में कमी आई है। नॉर्थन कमांड के उधमपुर स्थित मुख्यालय में उन्होंने जानकारी दी कि सुरक्षा बलों और जम्मू-कश्मीर के लोगों के प्रयास के चलते आतंकवादी संबंधित घटनाओं, पथराव गतिविधियों और विरोध प्रदर्शनों में कमी आई है।

आर्मी कमांडर ने देश की सुरक्षा में जान गंवाने वाले बहादुर सैनिकों के प्रति सम्मान जाहिर किया। साथ ही असाधारण और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 40 यूनिट्स को जीओसी-इन-सी की प्रशस्ति और 26 इकाइयों को जीओसी-इन-सी का प्रशस्ति प्रमाण-पत्र दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि साल 2021 में जिस तरह आवाम ने आतंकवाद का बहिष्कार किया उससे साफ है कि अब घाटी में अलगाववाद के लिए जगह नहीं है। कई वर्षों के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की संख्या 200 से कम हो गई है जो कि एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इसके लिए उन्होंने जनता को आभार दिया।

गौरतलब है कि इससे पूर्व दिसंबर 2021 में जम्मू-कश्मीर में डीजीपी दिलबाग सिंह ने जानकारी दी थी कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबल ने 182 आतंकियों का खात्मा किया। इनमें 44 तो आतंकियों के टॉप कमांडर थे जबकि और 20 विदेशी आतंकी थे। इन आतंकियों को मारने के लिए सुरक्षाबल ने 100 सफल ऑपरेशन चलाए थे। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया था कि कैसे सीमा पार से आतंकवादियों की घुसपैठ 2021 में कमी रही और अफगानिस्तान से ऐसी कोई घटना नहीं घट पाई।

31 दिसंबर को दिए बयान में दिलबाग सिंह ने सुरक्षा बलों के 100वें सफल ऑपरेशन की जानकारी देते हुए कहा था कि 30-31 दिसंबर की रात उन्होंने आतंकियों के ख़िलाफ़ 100वाँ सफल ऑपरेशन पूरा किया। उनके अलावा आईजी विजय कुमार ने भी जानकारी दी थी कि दिसंबर 2021 में विभिन्न मुठभेड़ों में 5 पाकिस्तानियों समेत कुल 24 आतंकियों को मार गिराया गया है। इन आतंकियों के पास से अमेरिका में बनी 2 एम-4 कार्बाइन, 15 एके-47, दो दर्जन पिस्तौल, आईडी और हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए।

सुकेश चंद्रशेखर और पत्नी लीना पॉल अपनी लाइफ पर बनवाना चाहते थे फिल्म, डायरेक्टर महबूब खान को साइनिंग अमाउंट और गिफ्ट में दी थी महँगी ​कार

200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) मामले के आरोपित ठग सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) के मामले में नया खुलासा हुआ है। दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक, अब इस मामले में फिल्म डायरेक्टर और राइटर महबूब खान ऊर्फ बॉबी खान और सुकेश की कथित पत्नी लीना पॉल (Leena Paul) का नाम सामने आया है। बताया जा रहा है कि सुकेश ने अपनी लाइफ पर फिल्म बनाने के लिए बॉबी खान से संपर्क किया था और उन्हें एक महँगी कार भी गिफ्ट में दी थी।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ठग सुकेश से महँगी कार लेने के मामले में बॉबी खान को 14 जनवरी को दिल्ली कार्यालय में तलब कर पूछताछ की थी। ED के अधिकारियों ने महबूब खान का बयान दर्ज कर लिया है और वे यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि सुकेश से उसका किस तरह के उपहार और गाड़ी का लेनदेन हुआ है। इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जाँच आगे भी जारी रहेगी, क्योंकि ED अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुँची है।

ठगी के मामले में लीना पॉल भी पुलिस की गिरफ्त में है। लीना इस मामले में सुकेश का पूरा साथ देती थी। सुकेश उसकी मदद से जेल में रहकर अपने ठगी के नेटवर्क को चला रहा था। गिरफ्तार होने के बाद लीना ने पूछताछ में बताया कि वह सुधीर और जोएल नाम के दो शख्स के साथ मिलकर ठगी के पैसों को ठिकाने लगाती थी।

सुकेश चंद्रशेखर की कथित पत्नी ने ही महबूब खान से संपर्क किया था और उसे एक फिल्म बनवाने के लिए बड़ी रकम साइनिंग अमाउंट के रूप में दी थी। इसके अलावा, सुकेश और लीना ने उसे महँगी गाड़ी भी गिफ्ट में दी थी। महबूब खान ने पुलिस को बताया कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि लीना पॉल और सुकेश चंद्रशेखर ठग हैं, लेकिन जब उसे इन पर शक हुआ उसने कुछ ही दिनों में उस गाड़ी को आधी से भी कम कीमत में बेच डाला। इससे महबूब खान ED के निशाने पर आ गए। महबूब खान उर्फ़ बॉबी खान फिल्म निर्देशक और डायलॉग राइटर हैं। वह नोरा फतेही के करीबी और हिंदी सिनेमा के मशहूर कोरियोग्राफर अहमद खान के भाई हैं।

बता दें कि इससे पहले ठग सुकेश चंद्रशेखर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया था। सुकेश ने जेल के अंदर से अपने वकीलों के माध्यम से जारी पत्र में कहा था कि वह ठग नहीं है। आरोपित को ‘धोखेबाज’ या ‘ठग’ कहना गलत है, क्योंकि उसे अभी तक दोषी नहीं ठहराया गया है। पत्र में उसने यह भी दावा किया था कि वह बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस (Jacqueline Fernandez) के साथ रिलेशनशिप में था। उसने एक्ट्रेस को करोड़ों के गिफ्ट दिए थे और उसके व्यक्तिगत संंबंधों का आपराधिक मामले से कोई लेना-देना नहीं है।

डिजिटल इंडिया से आई मौन क्रांति, संसाधन-मशीनरी और अधिकारी वही… मिला बेहतर रिजल्ट: जिलाधिकारियों से मीटिंग में बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने शनिवार (22 जनवरी 2022) को कई जिलों के कलेक्टर्स (District Magistrates) के साथ वर्चुअल बैठक की। पीएम मोदी ने जिलाधिकारियों को संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल का सुझाव दिया और कहा कि एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट में जो काम हुआ है, वो विश्व की बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटीज के लिए रिसर्च का विषय है। इशारों-इशारों में विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सारे संसाधन वही हैं, सरकारी मशीनरी वही है और अधिकारी भी वही हैं, लेकिन रिजल्ट अलग है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी ने जिलाधिकारियों को टीम वर्क समझाया और कहा कि आकांक्षी जिलों में केंद्र, राज्य और लोकल एडमिनिस्ट्रेशन ने टीम वर्क किया और उसके अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं। इसके साथ उन्होंने अधिकारियों से ‘टॉप टू बॉटम’ औऱ ‘बॉटम टू टॉप’ तक सरकारी योजनाओं का फ्लो सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन और जनता के बीच प्रत्यक्ष, परोक्ष और भावनात्मक जुड़ाव बनाने की अपील की। तकनीक और इनोवेशन महत्वपूर्ण घटक बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आकांक्षी जिलों में लोगों के जीवन में हो रहे सकारात्मक बदलाव को देखकर अधिकारी भी अपने प्रयासों के लिए संतुष्टि महसूस करते होंगे और उन्हें खुद पर भी गर्व महसूस होता होगा।

प्रधानमंत्री के मुताबिक, देश के आकांक्षी जिलों ने सिद्ध कर दिया कि अगर किसी भी चीज को लागू करने की प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं को खत्म कर दिया जाय तो अच्छे रिजल्ट हासिल किए जा सकते हैं। जिलाधिकारियों को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि जब दूसरों के सपनों को साकार करने की सोच सफलता का मानदंड बनने लगे तो वो फिर कर्तव्य पथ पर इतिहास रचता है।

डिजिटल इंडिया से आई मौन क्रांति

डिजिटल इंडिया मिशन की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश डिजिटल इंडिया के रूप में देश एक मौन क्रांति का साक्षी बन रहा है। इसमें कोई भी जिला पीछे नहीं छूटे और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हर गाँव तक पहुँचे, सेवाओं और सुविधाओं की डोर स्टेप डिलीवरी का जरिया बने ये आवश्यक है। पीएम के मुताबिक, इसके लिए अलग-अलग मंत्रालयों, अलग-अलग विभागों ने 142 जिलों की एक लिस्ट तैयार की है, जहाँ आकांक्षी जिलों की ही तरह कलेक्टिव एप्रोच के साथ काम करना है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीते 4 साल में देश के लगभग हर आकांक्षी जिले में 4-5 गुना अधिक जन धन के अकाउंट खोले गए। हर परिवार को बिजली मिली, इससे गरीब के जीवन में भी ऊर्जा का संचार हुआ है। इसके अलावा करीब-करीब हर परिवार को शौचालय की सुविधा दी गई। आकांक्षी जिलों के लोगों के अंदर आगे बढ़ने की तड़प होती है।

मुंबई के 20 मंजिला इमारत में आग लगने से 7 लोगों की मौत, 15 घायल: मेयर ने कहा- भर्ती नहीं करने वाले अस्पताल की होगी जाँच

महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुंबई (Mumbai) में शनिवार (22 जनवरी 2022) को 20 मंजिल वाले कमला बिल्डिंग (Kamala Building) में भीषण आग लगने से 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि लगभग 20 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों को पास के ही भाटिया हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक, मुंबई के ताड़देव इलाके में स्थित कमला बिल्डिंग की 18वीं मंजिल पर आज सुबह करीब 7:30 बजे आग लगी थी।

बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक, आग लगने की सूचना मिलते ही तुरंत फायर ब्रिगेड की 13 गाड़ियाँ मौके पर भेज दी गई थीं, जिन्होंने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया है। वहीं, इस घटना में लगभग 19 लोगों को रेस्क्यू किया गया है।

वहीं, मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर ने बताया कि अस्पताल ने रेस्क्यू किए गए लोगों को भर्ती करने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा कि कि इस बारे में पता किया जाएगा कि आखिर इन लोगों ने ऐसा क्यों किया? इसकी शिकायत BMC कमिश्नर से करने की बात भी उन्होंने कही।

पेडनेकर ने आगे बताया कि रेस्क्यू किए गए 6 बुजुर्ग लोगों को ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम की जरूरत थी, जिन्हें तुरंत हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया गया है। आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन धुँआ बहुत ज्यादा है। बिल्डिंग से बाकी लोगों को बचा लिया गया है, उनका इलाज जनरल वार्ड में चल रहा है।

द वायर वाले वरदराजन के भाई ने ‘नेताजी’ को बताया हिटलर का दोस्त, नेटिजन्स ने कहा- ‘ब्रिटिशों का कु$%^ बोला’

दिल्ली के इंडिया गेट पर केंद्र सरकार ने ‘नेताजी’ सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति लगाने का निर्णय लेकर कई बुद्धिजीवियों को बेचैन कर दिया है। इसी क्रम में द वायर के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन के भाई तुंकू वरदराजन ने भी ‘नेताजी’ के लिए अपनी घृणा उगली है। तुंकू वरदराजन ने अपने ट्वीट में उन्हें हिटलर का दोस्त बताया और कहा कि एक व्यक्ति जो हिटलर का दोस्त था उसकी मूर्ति इंडिया गेट पर लगने वाली है।

तुंकू वरदराजन का ‘नेताजी’ पर ट्वीट

तुंकू का यह ट्वीट सोशल मीडिया साइट पर आज सुबह आया। इसके बाद से इस पर प्रतिक्रियाएँ आना चालू हैं। जैसे तुंकू ने सुभाष चंद्र बोस को हिटलर का साथी बताकर उनकी छवि को दागी दिखाने की कोशिश की, बिलकुल उसी तरह नेटिजन्स भी इतिहास की उन हस्तियों से जुड़े प्रमाण लेकर आ गए जिनका हिटलर से संबंध था। इस सूची में एम के गाँधी का वो पत्र साझा हुआ जिसे उन्होंने हिटलर के लिए लिखा था और पत्र की शुरुआत में हिटलर को ‘डियर फ्रेंड’ बताया था। साथ ही ये भी कहा था कि उनका हिटलर को ‘मित्र’ कहना कोई औपचारिकता नहीं है।

ऐसे ही कुछ यूजर्स ने तुंकू को सलाह दी कि वो ऐसी बेवकूफी करना बंद करें क्योंकि उनके ये हथकंडे सिर्फ वामपंथियों में ही चलेंगे, बाकी लोगों के बीच ये प्रोपगेंडा काम नहीं कर पाएगा। कई यूजर ने इस ट्वीट को इग्नोर करने की सलाह दी और इस बात पर जोर दिया कि तुंकू एक लिबरल है जिनका काम ही है कॉन्ग्रेस को समर्थन देना और बाकियों की आलोचना करना है।

चंद्रचूर घोष नामक यूजर ने यह ट्वीट देखने के बाद गाँधीवादी और नेहरूवादी लोगों के ज्ञान और समझ पर सवाल खड़े किए।

एक यूजर ने कहा, “हिटलर ने ईसाइयत के एजेंडे को बढ़ावा दिया। उसकी पार्टी का नाम क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक पार्टी था। उसे बड़े चर्चों का समर्थन प्राप्त था। क्या कभी इसके लिए ईसाइयत को खारिज किया गया। जिन्ना और मुस्लिम हिटलर के सबसे बड़े समर्थक थे। आपने कभी उनपर एक शब्द नहीं बोला।”

हिना ने वरदराजन को, “ब्रिटिशों का कु$%^ बताया।” अन्य यूजर ने पूछा कि दिल्ली में 70 सालों से औरंगजेब की रोड थी तब कुछ नहीं हुआ। बोस की मूर्ति लगने से परेशानी है।

बता दें कि बोस की मूर्ति पर लिबरलों की प्रतिक्रिया कल से आ रही है। कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया गेट पर नेताजी की मूर्ति लगने को लेकर अपने ट्वीट में लिखा था, “ऐसे समय जब पूरा देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती मना रहा है, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि ग्रेनाइट से बनी उनकी भव्य प्रतिमा इंडिया गेट पर स्थापित की जाएगी। यह उनके प्रति भारत के ऋणी होने का प्रतीक होगा।” साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा था, “जब तक नेताजी की भव्य प्रतिमा का काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक उनकी होलोग्राम प्रतिमा उसी स्थान पर मौजूद रहेगी। मैं नेताजी की जयंती 23 जनवरी को होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण करूँगा।”

केस ढोते-ढोते पिता भी चल बसे, माँ रहती हैं बीमार : दिल्ली दंगों में पहली सज़ा दिनेश यादव को, गरीब परिवार ने कहा – घूस न देने पर फँसाया

फरवरी 2020 में हुए दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में 20 जनवरी, 2022 को पहली सज़ा सुनाई गई है। गोकुलपुरी थाना क्षेत्र के भागीरथी विहार में रहने वाले दिनेश यादव को कड़कड़डूमा कोर्ट ने दोषी पाया है। उन्हें 5 साल की सज़ा और 12,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। 6 दिसंबर 2021 को एडिशनल सेशन जज वीरेंद्र भट ने दिनेश यादव को दोषी करार दिया था। दिनेश यादव पर मुस्लिम समुदाय की 73 वर्षीया एक वृद्धा के मकान में आगज़नी करने और उनकी भैंस और उसका बच्चा भी खोल ले जाने का आरोप था।

ऑपइंडिया की टीम पहुँची दिनेश यादव के घर

ऑपइंडिया की टीम दिनेश यादव के घर पहुँची। घर गोकुलपुरी क्षेत्र के नाले से हो कर जाता है। संकरी गलियों से होते हुए हम दिनेश यादव के 22 नंबर मकान E ब्लॉक पहुँचे। घर का लैंडमार्क ध्रुव पब्लिक स्कूल है। कॉलोनी मध्यम निम्न वर्गीय लोगों की है। अधिकतर लोग यहाँ मजदूरी या छोटी मोटी नौकरी के माध्यम से जीवन यापन कर रहे हैं। दिनेश यादव के मकान में प्लास्टर नहीं हुआ है। घर के आगे नीले रंग का गेट लगा मिला।

दिनेश यादव का घर

घर के अंदर दीवालों पर छपे हैं देवताओं के चित्र

दिनेश यादव का मकान लगभग 35 फिट लंबा और 15 फिट चौड़ा है। इसमें कुल 3 छोटे – छोटे कमरे हैं। छत पर एक कमरा उनके बड़े भाई हरीश यादव का है। दिनेश यादव के घर के अंदर की दीवालों पर हनुमान, कृष्ण की पेंटिंग वाले चित्र हैं। घर वालों ने चित्रों को खुद दिनेश द्वारा बनाया गया बताया। दीवाल पर किया पेंट कई जगहों पर उधड़ता दिखाई दिया।

घर की दीवालों पर देवताओं के चित्र

नहाने आदि के लिए कोई अलग से बाथरूम आदि नहीं है। सीढ़ियों के नीचे कुछ प्लास्टिक की बाल्टियाँ रखी मिलीं जिसमें पीने और नहाने आदि का पानी भरा था।

दिनेश का घर

दिनेश की माँ ने बेटे को बताया बेगुनाह

ऑपइंडिया से बात करते हुए दिनेश की माँ ने कहा, “मेरा नाम बुधा है। मैं UP के आज़मगढ़ जिले की रहने वाली हूँ। मेरे 2 बेटे हैं। दोनों मजदूरी करते हैं। मेरे बेटों पर इस से पहले कोई केस नहीं था। मैं दिल्ली के इस घर पर में 33 साल से रह रही हूँ। मेरे बच्चे कहीं नहीं गए। उनका नाम लिखवाया गया। आरोप लगाने वाली एक विधवा महिला है जो मुस्लिम है। उसी से गवाही करवाई गई है। फिर पुलिस को बुला कर बच्चों को गिरफ्तार करवाया गया। बच्चों को मार-पीट कर के गाली देते हुए पुलिस वाले ले गए थे। हमारे घर पर कुर्की – नीलामी का पोस्टर छाप रहे थे।”

पति की मौत बेटे की गिरफ्तारी के बाद

दिनेश की माँ ने आगे बताया, “बेटे की गिरफ्तारी के बाद मेरे पति की कुछ दिन बाद मौत हो गई। उनके शरीर ने काम करना बंद कर दिया था। अब घर का खर्च भगवान भरोसे चल रहा है। कोर्ट-कचहरी का काम मेरा बड़ा बेटा देख रहा है। घर में कोई न होने के चलते मैंने अपनी विवाहिता बेटी को ससुराल से यहाँ बुला लिया है। हमें किसी का कोई सपोर्ट नहीं है। गिरफ्तारी से सज़ा तक कोई भी हमारे दरवाजे पर नहीं आया। मेरे बेटे के साथ 4 लोग फँसे हैं। बाकियों का क्या हुआ हमें नहीं पता। भैंस खोलने आदि के आरोप बस फँसाने के लिए लगाए गए हैं।”

आरोप लगाने वाली महिला का पहले ही अपने समुदाय के लोगों से झगड़ा

दिनेश की माँ ने कहा, “आरोप लगाने वाली मुस्लिम महिला का पहले से ही मुस्लिम लोगों से झगड़ा चल रहा था। भैंस पहले से ही वही लोग खोल कर ले गए थे। वो सभी खुद बचने के हिन्दुओं पर आरोप लगा दिए हैं। हमारे इलाके में खबर फैली कि इधर मुस्लिम लोग आ रहे हैं मार करने। तब इस कॉलोनी वाले सारे लोग जमा हो गए थे। सब लोग मार करने गए कि इधर मुस्लिम न आएँ। कोई आया भी नहीं। मेरा बेटा भी वही देखने गया था। मेरे बेटे से ‘समाज वाली बात’ कही गई। कॉलोनी वालों ने इसे ‘समाज की लड़ाई’ बताया था। कुछ वहाँ से भाग लिए और कुछ खड़े रहे। जो खड़े रहे उनके नाम लगा दिए गए। मेरी कॉलोनी से 22 लोगों के नाम आए थे।”

पुलिस वाले माँग रहे थे रिश्वत

बुधा देवी ने आगे बताया, “हमने किसी रिश्तेदार से मदद नहीं ली। ये लड़ाई समाज की थी। इस समाज के लोग नहीं उठ रहे हैं। अब कर ही क्या सकते हैं। पुलिस वालों का व्यवहार बहुत खराब था। उन्होंने दूसरों से घूस खा कर ये सब किया है। हमारे परिवार से 4-5 लाख रुपए माँगे जा रहे थे। हम गरीब लोग कहाँ से देते इतना पैसा। हम पैसा नहीं दे पाए।”

पति के न रहने से अब मुझे कुछ नहीं पता कि क्या करना है आगे

दिनेश की माँ के मुताबिक, “मेरे पति के न रहने से मुझे कुछ पता ही नहीं कि अब आगे करूँ क्या? वही हर चीज के मालिक थे। किस कोर्ट में कहाँ जाना है ये हमें नहीं पता। मेरे बच्चे किस समझदारी से चलेंगे पता नहीं। मेरे पास कोई कागज़ नहीं है। बाकी जानकारी मेरे बेटे को पता होगी।”

माँ को मत भेजना जेल में

दिनेश की माँ ने कहा, “जब से मेरा बेटा पकड़ा गया है तब से मैं उसे देख नहीं पाई हूँ। वो जेल में मिलने गए अपने भाई से कहता है कि माँ को यहाँ मत भेजना। उनकी तबीयत वैसे भी खराब रहती है। मृत्यु से पहले मेरे पति 2-4 साल से काम बंद कर के बेटों के भरोसे घर बैठ चुके थे। वो भी बेटे की तरह मजदूरी कर के परिवार पालते थे।”

दिनेश यादव की माँ से बात करते ऑपइंडिया रिपोर्टर राहुल पांडेय

दिनेश यादव की बहन उर्मिला ने की ऑपइंडिया से बात

दिनेश यादव के भाई उर्मिला ने हमें बताया, “ये समाज की लड़ाई थी। इसी लड़ाई में बच्चे सिर्फ देखने के लिए गए थे। अब हम घर में सिर्फ माँ, भाई और मैं बेटी बचे हैं। मेरा एक बच्चा भी है। दिनेश कक्षा 8 तक पढ़ाई किया था। वो मजदूरी का काम करता था।”

मेरे पिता को किया टार्चर और माँगा गया घूस

दिनेश की बहन ने आगे बताया, “मेरा भाई 3 जून को पकड़ा गया। मेरे पिता की मृत्यु 28 जून को हो गई। मेरे पिता को 4-4 घंटे थाने में बिठाया गया। उन्हें टॉर्चर किया गया। उनसे पैसे माँगे जाते रहे। मेरे घर को नीलाम करने की धमकी दी जाती रही। हम लोगों से बदतमीजी नहीं हुई। मेरे बड़े भाई अपने काम धंधे में लगे रहे। उन्हें कुछ पता नहीं था। मेरे घर में घुस-घुस कर बच्चो को खोजा जाता रहा। छापेमारी के दौरान महिला पुलिस नहीं होती थी। दंगे होने के बाद मेरे भाई का नाम डलवाया गया। जब दंगे हुए तब मेरे भाई का नाम नहीं था। लड़ाई के तीसरे दिन वीडियो बनाई गई। वीडियो जोड़ कर बनाई गई है। मेरे घर की पुताई आदि दिनेश ही कर देता था। मेरी माँ को शुगर और ब्लड प्रेशर की बीमारी है।”

दिनेश यादव की बहन उर्मिला से ऑपइंडिया रिपोर्टर राहुल पांडेय की बातचीत

दिनेश यादव के भाई हरीश यादव ने ऑपइंडिया से बात की

हरीश यादव ने कहा, “दिनेश मेरा छोटा भाई है। मैं मजदूरी कर के घर चलाता हूँ। मुझे 12 हजार वेतन मिलता है। मैं शादीशुदा हूँ जबकि दिनेश की शादी अभी नहीं हुई थी। घर की स्थिति ठीक नहीं है। इसी के चलते मैं घर में प्लास्टर नहीं करवा पा रहा। 2 साल से भाई जेल में है।”

पिता की मौत में पुलिस का टॉर्चर जिम्मेदार

हरीश के पिता का नाम जगन्नाथ यादव था। हरीश ने बताया, “मेरे पिता को थाने में लगातार टॉर्चर किया जाता रहा। उन्हें घंटों थाने में बिठाया जाता रहा और पैसों की माँग की जाती रही। हफ्ते में 4-5 दिन उन्हें थाने बुलाया जाता रहा। हम गरीब लोग इतना पैसा नहीं जुटा पाए। हमारे भाई की चार्जशीट का बोझ 14 से 28 किलो का हो गया था। सरकारी कागज़ों का वजन इतना था कि उसको ढोते हुए मेरे कंधे दर्द करने लगे थे। जिस महिला के बयान पर मेरे भाई को दोषी बताया गया वो खुद ही मेरे भाई को दोषी नहीं मानती। यद्यपि इसको उन्होंने लिखित रूप से नहीं दिया। उनका कोई नुकसान नहीं हुआ था। नाले के पास 4-5 मुस्लिम परिवार हैं। उन्होंने ही ये सब बवाल मचाया था।”

सबसे ज्यादा दोषी तो ताहिर हुसैन पर उन्हें सज़ा नहीं

हरीश ने कहा, “मीडिया ही कहती थी कि ताहिर हुसैन के घर पर गुलेल बनी हुई थी। लेकिन वो पैसे वाले थे। उन्हें सज़ा नहीं हुई। मेरे भाई को निर्दोष फँसा दिया गया। जबकि मेरा भाई कहीं दंगे में नहीं। जब दंगा हो रहा था तब पुलिस वाले कहाँ थे? ये सब कुछ पुलिस वालों की मनगढ़ंत कहानियाँ हैं। 2 दिनों के अंदर क्या इन बच्चों ने इतनी वारदातें कर दी कि उन पर 20-25 मुकदमे लाद दिए गए। वो लड़के इस से पहले कभी थाने नहीं गए थे। पुलिस ने उन्हें इतना बड़ा क्रिमिनल बना दिया।”

मेरा भाई मंडावली जेल में, बोला मेरी चिंता के बदले घर संभालों

हरीश ने आगे कहा, “मेरा भाई मंडावली की 11 नंबर जेल में बंद है। उसके साथ आस पास के 4 लड़कों का गैंग बना दिया गया। सबके घर वालों के हालत ठीक नही हैं। वो सब भी हम लोगों की तरह मेहनत मजदूरी करने वाले परिवारों से हैं। पहले मैंने वकील किया था जब मेरे पिता नहीं रहे थे। उसी दौरान कोर्ट में मेरा भाई कहता था कि आप मेरी चिंता के बजाय घर संभालो। कोर्ट से मेरे भाई को सरकारी वकील मिला है। फिलहाल मेरा केस शिखा गर्ग संभाल रही हैं। वो मेरा केस फ्री में देख रहीं हैं।

हफ्ते भर पहले जज साहब ने कोर्ट में भाई को निर्दोष कहा था

हरीश ने कहा, “हफ्ते भर पहले इन्ही जज साहब ने ही कोर्ट में कहा था कि इन लड़कों को पुलिस के कहने पर सज़ा नहीं दी जा सकती। हफ्ते भर पहले मैंने न्यूज़ पेपर में पढ़ा था ये बच्चे निर्दोष हैं। हफ्ते भर में ही पता नहीं ऐसा क्या हो गया कि मेरे भाई को सज़ा दे दी गई। अब तो सब पुलिस वाले ही करने वाले ही हो गए हैं। हमारी कौन सुनने वाला है ?”

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाएँगे

हरीश ने कहा कि, “जहाँ तक साँस , वहाँ तक आस। हमारा भाई है वो। हम उसे नहीं छोड़ सकते। अभी हम हाईकोर्ट जाएँगे। वहाँ से जरूरी हुआ तो सुप्रीम कोर्ट भी जाएँगे। हमारे पिता ने मजदूरी कर के हमें संभाला है। उन्हें दंगों और पुलिस के कारनामों ने मार डाला। अब हम भी मजदूरी कर रहे थे। मेरे भाई को जीते जी मार डाला गया है। आज 2 सालों से मेरे घर में कोई भी नेता आदि मिलने नहीं आया।”

मुस्लिमों में एकता, पर हिन्दुओं में नहीं

हरीश ने आगे कहा, “मुस्लिमों में कोई बात हो जाती है तो उनकी तरफ से सब एकजुट हो जाते हैं। लेकिन हिन्दुओं में एकता नहीं है। तभी मुस्लिम हम पर हावी होते जा रहे हैं। इसी के चलते हमारा छोटा भाई आज बंद है। मैं अपने भाई को निर्दोष मानता ही नहीं बल्कि वो सच में निर्दोष है। मेरा भाई किसी भी दंगे में शामिल नहीं है। लॉक डाउन के दौरान पुलिस वाले हमारे घर पर आते रहे। हमारा भाई गली में खेल रहा था। उसे पकड़ कर ले गए। उन्हें न जाने क्या दिखा कर बता दिया गया कि ये तुम हो।”

आरोप लगाने वालों की स्थिति हमारे घर से कई गुना बेहतर

हरीश ने आगे कहा, “जिस महिला ने मेरे भाई पर आरोप लगाया है उसका नाम मनौरी है। उसके घर के हालात हमारे घर से कई गुना बेहतर हैं। भैंस चोरी आदि की बातें झूठी हैं। उसके बाद किसने क्या किया ये हमें नहीं पता। फरवरी के मामले में गिरफ्तारी जून में हुई। उसमें कई लोगों के नाम थे जिसमें कइयों के नाम निकल गए। इन बच्चों पर कई केस लाद दिए गए। मेरे भाई पर 22 केस दर्ज कर दिए गए। 23-24 साल के लड़के 2 दिन में 22 केस कर सकते हैं क्या ? उन्हें शिव विहार से ले कर मुस्तफाबाद तक के दंगों का दोषी बता दिया गया। पिता जी लॉक डाउन के बाद भाई की कानूनी लड़ाई लड़ने वाले थे। तब पुलिस वालों ने 3 महीने चार्जशीट लगने का इंतज़ार करने को कहा था। मेरे पिता जी दिमागी तौर पर डिस्टर्ब हो चुके थे और 28 मार्च को उनका देहांत हो गया।”

दिनेश यादव के भाई हरीश यादव से बातचीत करते ऑपइंडिया रिपोर्टर राहुल पांडेय

पड़ोसियों ने कैमरे के आगे कुछ भी बोलने से इंकार किया

ऑपइंडिया ने इस पूरे मामले में पड़ोसियों से जानकारी जुटाने की कोशिश की। मोहल्ले में दिनेश को लोग माइकल के नाम से जानते हैं। मुख्य सड़क से दिनेश यादव के घर के बीच लगभग 250 मीटर की दूरी है। इस बीच कुछ दुकानदारों और अन्य निवासियों से इस मामले में जानकारी लेने की कोशिश की गई। उन सभी ने इस मामले में कैमरे के आगे कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।

दिनेश उर्फ़ माइकल के घर जाने का मार्ग (भागीरथी विहार) , नाला और घर के बगल स्थित स्कूल

वोटर कार्ड को आधार से जोड़ना, मतदाता सूची का एकीकरण: चुनाव सुधार की दिशा में मोदी सरकार के महत्वपूर्ण फैसले, ‘एक देश एक चुनाव’ की ओर कदम

चुनाव सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बीते दिनों मोदी सरकार ने पिछले दिनों मतदाता पहचान-पत्र को आधार कार्ड से जोड़ने सहित कई कदम उठाए। इनमें पंचायत/निकाय चुनावों और विधानसभा/लोकसभा चुनावों की मतदाता सूचियों को एक करने और नए मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए 18 वर्ष की आयु-निर्धारण करने के लिए एक तिथि (एक जनवरी) की जगह 4 तिथि (1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर) करने जैसे कई अहम निर्णय लिए। सरकार के इन फैसलों की तारीफ करते हुए देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी समेत अन्य लोगों ने इन सुधारों को ऐतिहासिक व लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया है।

सरकार के इस फैसले से मतदाता लिस्ट को आधार कार्ड से जोड़ने पर फेक वोटर्स को चिन्हित कर उनके नाम को हटाना आसान हो जाएगा। देश में कई सारे लोगों का नाम जाने-अनजाने में एक से अधिक जगहों पर वोटिंग लिस्ट में शामिल किया गया है, जिससे ‘एक व्यक्ति एक मत’ के संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन होता है और वास्तविक जनादेश भी प्रभावित होता है। एक व्यक्ति का नाम एका से अधिक मतदाता सूचियों में होने से मतदान का सही प्रतिशत पता कर पाना मुश्किल हो जाता है। इसका लाभ उठाकर चुनावी प्रक्रिया को बाधित किया जाता है। ऐसा करके लोग लोकतंत्र को कमजोर करते हैं। लंबे समय से चुनाव आयोग इस समस्या से निजात पाने के लिए कोशिशें कर रहा है। इसके लिए कई सॉफ्टवेयर बनाकर भी मतदाता सूचियों में दुहराव को खत्म करने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। हालाँकि, वोटर लिस्ट को आधार कार्ड से जोड़ने पर फर्जी मतदाताओं से निजात मिल सकेगी। विपक्ष इसे लोगों की निजता पर हमला बता रहा है।

जम्मू यूनिवर्सिटी के अधिष्ठाता प्रोफेसर रसाल सिंह के मुताबिक, चुनाव सुधार की दिशा में मोदी सरकार द्वारा लिया गया दूसरा निर्णय पंचायत/निकाय चुनावों और विधानसभा/लोकसभा चुनावों की मतदाता सूचियों को एक करने का है। आगे बढ़ने से पहले बता दें कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, असम, मध्य प्रदेश, केरल, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और जम्मू-कश्मीर समेत दूसरे राज्यों में पंचायत/निकाय चुनावों और विधानसभा/ लोकसभा चुनावों में अलग-अलग मतदाता सूचियों का प्रयोग किया जाता है। पंचायत/निकाय चुनाव की वोटर लिस्ट को सम्बंधित राज्य का निर्वाचन आयोग तैयार करता है, जबकि विधानसभा/लोकसभा चुनाव की मतदाता सूचियों का निर्माण भारत का निर्वाचन आयोग करता है। राज्य विशेष के चुनाव आयोग को भारत के चुनाव आयोग द्वारा बनाई गई लिस्ट को पंचायत/निकाय चुनाव के लिए प्रयोग करने का अधिकार है। हालाँकि, ऐसा होने के बाद भी इन राज्यों में ऐसा नहीं किया जाता है। दरअसल, ये राज्य अलग से अपनी मतदाता सूची तैयार कराते हैं। मतदाताओं के दुहराव की तरह मतदाता सूचियों के दुहराव से भी समस्या होती है। इस प्रक्रिया में अनावश्यक रूप से संसाधनों का इस्तेमाल होता है। नई वोटर लिस्ट को तैयार करना बहुत कठिन होता है। ऐसे में इस काम को एक ही बार में निपटाने की कोशिश की जाती है।

इसका दोहराव इसलिए भी हास्यास्पद लगता है, क्योंकि पंचायत/निकाय चुनावों, विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनावों के मतदाता अलग-अलग न होकर एक ही हैं। एक ही मतदाता सूची को उपरोक्त तीनों चुनावों के लिए प्रयोग करने से बड़ी मात्रा में धन और मानव श्रम की बचत हो सकेगी। इसे समझते हुए देश के कई राज्यों में चुनाव आयोग द्वारा तैयार की गई वोटर लिस्ट का इस्तेमाल पंचायत/निकाय चुनाव के लिए करते हैं, लेकिन अब से यह कार्य भारत भर में अनिवार्य हो सकेगा। निर्वाचन आयोग द्वारा तैयार कराई जाने वाली मतदाता सूची में वार्ड का कॉलम बढ़ाकर वार्ड प्रतिनिधियों का चुनाव भी सफलतापूर्वक कराया जा सकता है।

18 साल की उम्र पूरी करते ही वोटर लिस्ट में जुड़वा सकेंगे नाम

अभी तक ऐसा नियम था कि हर साल एक जनवरी को 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवाओं के नाम को मतदाता सूची में शामिल किया जाता था। इससे 2 जनवरी से लेकर 31 दिसम्बर के बीच 18 वर्ष के होने वाले मतदाताओं को 1 वर्ष तक अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। ऐसे में अगर इस बीच में कोई चुनाव होता है तो बड़ी संख्या में युवा इससे वंचित रह जाते थे। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने 18 वर्ष की आयु निर्धारण के लिए 1 जनवरी के अलावा 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्तूबर की तारीख को तय कर दिया है। इससे लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में युवा मतदाताओं की बड़ी संख्या की समयबद्ध भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।

केंद्र सरकार द्वारा लिए गए इन तीन फैसलों से चुनाव सुधार का मार्ग प्रशस्त होगा और भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और प्रगति सुनिश्चित होगी। हालाँकि, अभी भी ये पर्याप्त नहीं हैं। धन पशुओं और अपराधियों ने भारतीय लोकतंत्र को बंधक बना लिया है। इसे उनके पंजों से छुड़ाने के लिए कठोर प्रावधानों की आवश्यकता है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की कई रिपोर्ट में ग्राम पंचायतों से लेकर विधान मंडलों और संसद के दोनों सदनों में करोड़पतियों और अपराधियों की भरमार को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। स्थिति ये है कि आज साफ़-सुथरे और सीधे-सच्चे आदमी का चुनाव लड़ना और जीतना संभव नहीं है। संसद और विधानसभाएँ भ्रष्टाचारियों और अपराधियों की आरामगाह बन गई हैं। देश उनके लिए चारागाह बन गया है। डेलिगेट वाले (अप्रत्यक्ष) चुनावों को बंद करके कुछ सफाई की जा सकती है।

गलत शपथ-पत्र देने वाले और अपराधियों के चुनाव लड़ने पर रोक, कई जगह से चुनाव लड़ने या कार्यकाल पूरा होने से पहले ही दूसरा चुनाव लड़ने, राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को मिलने वाले चंदे में पारदर्शिता, भड़काऊ बयान देने और लोक-लुभावन घोषणाएँ करने वाले प्रत्याशियों/दलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, चुनावी घोषणा-पत्र को शपथ-पत्र की तरह न्यायिक दस्तावेज बनाने, दल-बदल करने वालों और उनके परिजनों के लिए पाँच साल तक नई पार्टी या सरकार में पद लेने पर रोक, एक पद के लिए एक व्यक्ति के पाँच बार से अधिक बार चुनाव लड़ने पर रोक जैसे प्रावधान जरूरी हो गया है। दल-बदल करने वाले प्रत्याशी और उसके परिवार के लिए भी पाँच साल का “कूल-इन पीरियड” अनिवार्य किया जाना चाहिए। संपत्ति के विवरण और कूल-इन पीरियड जैसे प्रावधानों के लिए परिवार का अर्थ संयुक्त परिवार किया जाना चाहिए, क्योंकि ज्यादातर राजनीतिक दल अपराधियों और भ्रष्टाचारियों के संयुक्त परिवार हैं।

चुनाव-प्रक्रिया के दुहराव को रोकने की दिशा में भी काम किया जाना चाहिए। ‘एक देश, एक चुनाव’ ही इस दोहराव का सही समाधान है। लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराकर श्रम, समय और संसाधनों की बचत की जा सकती है।