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‘बाबरी की तरह जामिया मस्जिद को ध्वस्त कर देना चाहिए, यहाँ पहले हनुमान मंदिर था’: कर्नाटक में संत गिरफ्तार

अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर कर्नाटक (Karnataka) में श्रीरंगपट्टनम (Srirangapatna) की जामिया मस्जिद को ध्वस्त करने का आह्वान करने और उसके स्थान पर एक हनुमान मंदिर के निर्माण की माँग करने वाले संत ऋषि कुमार को मंगलवार (18 जनवरी 2022) को गिरफ्तार कर लिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चिकमगलुरु (Chikkamagaluru) में काली मठ के प्रमुख संत ऋषि कुमार का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में उन्होंने कथित तौर पर बयान दिया था कि बाबरी मस्जिद की तर्ज पर श्रीरंगपट्टनम की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद को गिरा देना चाहिए, क्योंकि वहाँ पहले एक हनुमान मंदिर स्थित था। इसके बाद पुलिस कुमार को गिरफ्तार कर श्रीरंगपट्टनम ले आई।

पुलिस ने बताया कि ऋषि कुमार (Rishi Kumar) कुछ दिन पहले ही सड़क दुर्घटना में एक बाल कलाकार की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए श्रीरंगपट्टनम आए हुए थे। इस दौरान साधु ने श्रीरंगपटना में जिस ऐतिहासिक मस्जिद की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) देखरेख कर रहा है, उसके सामने खड़े होकर कहा कि इस ढाँचे को भी अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तरह जल्द ही ध्वस्त कर दिया जाना चाहिए। मस्जिद के परिसर के अंदर खंभे, दीवारें और जल निकाय हिंदू वास्तुकला के प्रतीक हैं।

यह वीडियो रविवार (16 जनवरी 2022) को संत के एक सहायक ने शूट किया था। उन्होंने वीडियो में यह भी कहा कि श्रीरंगपट्टनम में एक मंदिर को मस्जिद में बदल दिया गया है। हिंदुओं को अब जाग जाना चाहिए। हिंदू संगठनों को हाथ मिलाना होगा और एकजुट होकर इस मामले में आगे आना होगा।

बताया जा रहा है कि वीडियो को उनके फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट​ किया गया था। वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद श्रीरंगपट्टनम पुलिस चिकमंगलूर जिले में स्थित काली मठ में गई और ऋषि कुमार को हिरासत में लेकर स्थानीय अदालत में पेश किया। वहीं, संत अपने बयान पर अडिग हैं और उनका कहना है कि मंदिर को मस्जिद में बदला गया है।

अदालत में संत के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल का बयान विवादास्पद नहीं है। वकील ने तर्क दिया, “मस्जिद में मंदिरों के निशान देखकर उन्होंने अपना दर्द बयां किया था।” वहीं, सरकारी वकील ने संत की रिहाई का विरोध किया। उन्होंने कहा कि उनकी जमानत याचिका पर विचार नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा होने का खतरा और सबूतों से छेड़छाड़ का अंदेशा है। कोर्ट ने बुधवार (19 जनवरी 2022) के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया था।

बता दें कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक सरकार ने हाल ही में विधानसभा में धर्मांतरण विरोधी विधेयक पारित किया है और राज्य के मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की इच्छा व्यक्त की है।

‘बाटला हाउस में हमारे बच्चों को आतंकी कह कर मार डाला, मिले शहीद का दर्जा’: मौलाना तौकीर रजा ने कहा – राहुल-प्रियंका सच्चे सेक्युलर

हिंदुओं के खिलाफ लगातार जहर उगलने वाले मौलाना तौकीर रजा को कॉन्ग्रेस के समर्थन दिए हुए अभी 24 घंटे भी नहीं बीते कि अब वो कॉन्ग्रेस पर हमला बोलते नजर आए। चुनाव के वक्त में बाटला हाउस एनकाउंटर का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ रहा है। तौकीर रजा ने विवादित बयान देते हुए बाटला हाउस एनकाउंटर पर बोलते हुए कॉन्ग्रेस पर जमकर हमला बोला और इस एनकाउंटर में मारे गए आतंकवादी को ‘शहीद’ बता दिया।

एनकाउंटर की जाँच का वादा

मौलाना तौकीर रजा ने विकास कालोनी स्थित कॉन्ग्रेस के महानगर अध्यक्ष अजय शुक्ला के आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान तौकीर रजा से सवाल किया गया कि आज आप कॉन्ग्रेस के समर्थन की बात कर रहे है लेकिन पहले आप कॉन्ग्रेस की आलोचना करते थे।

इस पर तौकीर रजा ने कहा, “ये बात बिलकुल सही है। हम हमेशा कॉन्ग्रेस के खिलाफ रहे और हमसे एक गलती यह हुई कॉन्ग्रेस की गलत पॉलिसीज की वजह से और हमने कॉन्ग्रेस को बहुत करीब से भी देखा। 2009 में जब मैं कॉन्ग्रेस के साथ खड़ा था और कॉन्ग्रेस को जिताया था। उस वक्त मैंने मंच से ये बात कही थी कि कॉन्ग्रेस ये न समझे कि उनको माफ कर दिया है। अभी आपको मुसलमानों ने पेरोल पर छोड़ा है। अगर आपका काम आगे ठीक रहेगा तो फिर आपके बारे में आगे सोचा जाएगा। लेकिन उन्होंने सोचा कि अब तो हमारी सरकार बन गई। उन्होंने मुझसे कहा था कि सरकार बनने के बाद हमारा पहला फैसला होगा कि हम सबसे पहले बाटला हाउस एनकाउंटर की जाँच करवाएँगे।”

‘मुसलमानों का हुआ कत्ल’

तौकीर रजा ने कहा, “अगर बाटला हाउस एनकाउंटर की जाँच करवा ली गई होती तो दुनिया को पता चल जाता जो मारे गए वो आतंकवादी नहीं थे। उनको शहीद का दर्जा मिलना चाहिए। जो इंस्पेक्टर शर्मा मारे गए, उनका कत्ल हुआ। उनको उनकी पुलिस ने मारा था। जाँच नहीं करवाई गई। उन्होंने कहा कि इससे पुलिस का मनोबल टूटेगा। पुलिस के मनोबल की उन्हें ज्यादा परवाह थी। हमारे मनोबल की, 20 करोड़ मुसलमानों के मनोबल की उन्हें कोई परवाह नहीं थी। हमारे बच्चों को इस तरह आतंकवादी कह कर मार डाला गया। कॉन्ग्रेस से मेरी शिकायतें हमेशा रहीं।”

बाकी करते हैं ढोंग

तौकीर रजा ने आगे कहा, “मैंने कॉन्ग्रेस को बहुत करीब से देखा। मैंने ये महसूस किया कि कॉन्ग्रेस को चारों तरफ से आरएसएस के लोगों ने घेरा हुआ है। हमेशा मैंने कॉन्ग्रेस की मुखालफत की है और हमेशा मुखालफत करता रहूँगा। लेकिन अब जब मैं प्रियंका गाँधी से मिला, मैंने करीब से उनको समझने की कोशिश की, मैंने उनसे बातचीत की, तो मैंने महसूस किया कि इस वक्त उत्तर प्रदेश में नहीं बल्कि पूरे देश में सिर्फ ये दो भाई-बहन (प्रियंका गाँधी और राहुल गाँधी) है जो सच्चे सेक्युलरिस्ट हैं। जो लोकतंत्र पर यकीन रखते हैं। बाकी तमाम लोग सेक्युलरिज्म की बातें करते है वो ढोंग करते हैं। ये दोनों सच्चे सेक्युलरिज्म हैं।”

उल्लेखनीय है कि हाल ही में मौलाना तौकीर रजा ने न्यूज 18 के एंकर अमन चोपड़ा को ऑन शो धमकी दी। तौकीर रजा के पुराने बयानों पर जब चोपड़ा के शो में सवाल किया गया तो रजा ने गुस्सा दिखाते हुए एंकर को कहा था कि या तो वो उनसे तमीज में बात करें वरना उनका मुँह तोड़ दिया जाएगा। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही इत्तेहाद-उल-मिल्लत काउंसिल (IMC)के मुखिया मौलाना तौकीर रजा ने कॉन्ग्रेस को खुला समर्थन देने का ऐलान किया था।

नाम था अरबाज, विशाल बन नाबालिग लड़की को फँसाया… फिर दोस्त के साथ गैंगरेप और धर्मांतरण का प्रयास

मध्य प्रदेश के खंडवा में नाम बदलकर एक नाबालिग को प्रेम जाल फँसाने और उसके बाद दोस्त के साथ मिलकर छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद उसका धर्मांतरण कराने का प्रयास किया गया। इस मामले में खंडवा पुलिस ने मुख्य आरोपित अरबाज के दोस्त सादिक को गिरफ्तार कर लिया है, अरबाज अभी फरार है और पुलिस सरगर्मी से उसकी तलाश कर रही है।

10 में पढ़ने वाली लगभग 15 साल की छात्रा हरसूद थाना क्षेत्र के एक गाँव की रहने वाली है, जबकि अरबाज सांवली के खानशाहवली का रहने वाला है। दोनों की करीब तीन महीने पहले सोशल मीडिया साइट इंस्टग्राम पर दोस्ती हुई थी। आरोपित ने विशाल नाम से प्रोफाइल बनाकर छात्रा से नजदीकी बढ़ाई थी। छात्रा भी उसके बहकावे में आ गई। इसके बाद अरबाज ने उसे शादी करने के उद्देश्य से खंडवा बुलाया।

अरबाज के बहकावे में आकर छात्रा घर से लाल जोड़ा और गहने लेकर विशाल बने अरबाज से मिलने मंगलवार (18 जनवरी 2022) को खंडवा पहुँच गई। अरबाज ने उसे कलेक्टर के बंगले के पीछे एक सरकारी भवन में ठहराया। उसने वहाँ छात्रा के साथ दुष्कर्म किया। इसी दौरान छात्रा को पता चला कि आरोपित का नाम विशाल नहीं अरबाज है तो लड़की ने वहाँ से भागने का प्रयास किया, लेकिन उसे घर में कैद कर लिया। इसके बाद उसने अपने दोस्त सादिक को भी बुलाया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इस दौरान आरोपितों ने छात्रा का अश्लील फोटो और वीडियो भी बना लिए। आरोपितों ने उसे मुस्लिम बनने के लिए भी धमकाया और कहा कि जब वह धर्म परिवर्तन करेगी तभी वह उससे निकाह करेगा। जब लड़की नहीं मानी तो उसे छोड़कर दोनों भाग गए।

किसी तरह वहाँ से निकल छात्रा पुराना बस स्टैंड आ गई और वहाँ बैठकर रोने लगी। जब लोगों ने एक अकेली लड़की को रोते हुए देखा तो पुलिस को सूचना दी। कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुँचकर उसे थाने ले लाई। पूछताछ के दौरान छात्रा ने पुलिस को सारा घटनाक्रम बताया। इस दौरान उसके बैग से लाल जोड़ा और गहने भी मिले।

बुधवार (19 जनवरी 2022) को पुलिस ने छात्रा का मेडिकल कराया। वहीं, आरोपितों पर रेप और पॉक्सो की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने अरबाज के साथी सादिक को गिरफ्तार कर थाने ले आई और उससे पूछताछ कर रही है। इस दौरान पुलिस को पता चला कि सादिक नगर निगम का दिहाड़ी कर्मचारी है और उसी ने सरकारी भवन की चाबी अरबाज को उपलब्ध कराई थी। इस मामले के मुख्य आरोपित अरबाज अभी फरार है और पुलिस उसे गंभीरता से तलाश कर रही है।

छात्रा ने पुलिस को बताया कि अरबाज ने विशाल बनकर दोस्ती की थी और अपने प्रेम जाल में फँसाया। खंडवा पहुँचने पर उसे पता चला कि उसका असली नाम अरबाज है और वह मुस्लिम है। उसने धर्म परिवर्तन का दबाव डाला और दोनों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने बताया कि सरकारी भवन में दोनों ने बाहर से ताला लगाकर उसे कैद करके भी रखा।

इस मामले में हरसूद थाना प्रभारी एसआर जमरा ने बताया कि किशोरी के पिता ने बेटी के अपहरण की शिकायत अज्ञात युवक के खिलाफ दर्ज कराई थी। हिंदू जागरण मंच ने इसे लव जिहाद का मामला बताते हुए सख्त कार्रवाई की माँग की है।

स्तन पकड़ करना चाहा यौन शोषण, विरोध करने पर ईशनिंदा में फँसाया: 2 साल की कानूनी लड़ाई के बाद फरीदा हुई FREE

जिस महिला के स्तन छूकर बदमाशों ने उसका यौन शोषण करना चाहा, विरोध करने पर उसी लड़की को ईशनिंदा में फँसा दिया। 2 साल की कानूनी लड़ाई के बाद अब वो लड़की आजाद है। घटना पाकिस्तान की है। लाहौर जिला एवं सत्र अदालत ने दो साल पहले ईशनिंदा की आरोपित महिला फरीदा को बरी कर दिया है। पिछले हफ्ते हुई एक सुनवाई में, अदालत ने आदेश दिया कि अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तुरंत रिहा कर दिया जाए।

समा टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, फरीदा पर ‘रमजान-उल-मुबारक की इबादत’ नामक किताब से पवित्र कुरान की आयतों वाले पृष्ठों को फाड़ने और जलाने का आरोप लगाया गया था। उसके खिलाफ मुहम्मद इरफ़ान ने मामला दर्ज किया था, जिसने खुद ही अपराध का गवाह होने का दावा किया था। 19 दिसंबर, 2020 को फरीदा के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता के तहत FIR दर्ज की गई थी। कार्यवाही के दौरान, बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि फरीदा को ‘शिकायतकर्ता द्वारा गलत मंशा से एक झूठे मामले में फँसाया गया था।

कोर्ट में बहस के दौरान बचाव पक्ष ने यह बताया, “इरफ़ान और उसके दोस्त ने मेरे मुवक्किल के स्तनों को जबरन छूने की कोशिश की और जब उसने उसे रोका तो उस पर ईशनिंदा का आरोप लगाया। आरोपित महिला ने उसी हालत में मुक़द्दस ओराक बॉक्स से किताब ली थी।” तमाम दलीलों के बाद पाकिस्तान के इतिहास में ईशनिंदा का यह मामला इसलिए भी खास बन गया जब 6 जनवरी, 2022 को अदालत ने फैसला सुनाया कि महिला घर जाने के लिए स्वतंत्र है।

अपने फैसले में, न्यायिक मजिस्ट्रेट ने टिप्पणी की कि उन्होंने मामले की संपत्ति (पुस्तक) का अवलोकन किया और पाया, “केवल एक पृष्ठ हार्ड कवर के अंदर चिपका हुआ है, आधा फटा हुआ और थोड़ा जला हुआ है। पुस्तक का मुख पृष्ठ उतना ही सुरक्षित है जितना कि यह एक नई पुस्तक प्रतीत होती है। यहाँ तक ​​कि किताब के अंदरूनी पन्नों से भी पता चलता है कि यह अच्छी स्थिति में है।”

“अगर आरोपित महिला ने लगभग दो से तीन मिनट (जैसा शिकायतकर्ताओं द्वारा दावा किया गया) में पवित्र पुस्तक को जला दिया, तो उसे पूरी तरह से जल जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं है।”

गौरतलब है कि यह मामला यौन शोषण का साबित होने और संदेह का लाभ देते हुए भले कोर्ट ने 2 साल बाद आरोपित फरीदा को बरी कर दिया हो लेकिन पाकिस्तान दंड संहिता (पीपीसी) के तहत जो कोई भी पैगंबर मुहम्मद (पीबीयूएच) के संबंध में अपमानजनक टिप्पणी करता है, उसे ईशनिंदा के तहत मौत की सजा दी जाती है। यहाँ तक कि कई बार आरोपित बस आरोप लगने भर से कट्टरपंथी मुस्लिमों के आक्रोश का शिकार हो जाता है। हाल ही में श्रीलंका के एक मैनेजर को पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में ही जिन्दा जलाने की खबर भी आई थी।

यूक्रेन पर हमला बोल सकता है रूस, बेलारूस में बढ़ाई सैनिकों की तैनाती: USA ने जताई चिंता, वहाँ से रूस पर रखना चाहता था नजर

समूचे विश्व को रूस और यूक्रेन (Russia And Ukraine) के बीच युद्ध (War) की आशंका सता रही है। दुनियाभर के देश इस बात पर चिंतित हैं कि रूस कभी भी पड़ोसी यूक्रेन पर हमले कर सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग (America) ने ये आशंका जताई है कि रूस बेलारूस के रास्ते से यूक्रेन पर हमले कर सकता है। अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यह चिंता करने वाली बात है कि रूस संयुक्त सैन्य अभ्यास की आड़ में बेलारूस में अपने सैनिको की तैनाती कर रहा है। ताकि उत्तर से यूक्रेन को घेर सके।

अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, “इस तरह के हमले में बेलारूस की मिलीभगत बेलारूसियों के लिए पूरी तरह से अस्वीकार्य होगी।” दरअसल, बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको ने ऐलान किया था कि अगले महीने से रूस और बेलारूस की सेनाएँ युद्धाभ्यास करेंगी। रूसी समाचार एजेंसी तास ने अमेरिकी विदेश विभाग के हवाले से कहा कि सामान्यतः इस युद्धाभ्यास में 42 दिनों की नोटिस और 9000 सैनिक हिस्सा लेते थे। लेकिन इस बार इसमें 1,30,000 सैनिक शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारी का कहना है कि ये पूरी तरह से अलग है। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि मध्य जनवरी से मध्य फरवरी तक रूस यूक्रेन पर हमला कर सकता है।

हालाँकि, रूस इससे इनकार कर रहा है। दोनों देशों में तनाव के मद्देनजर अमेरिका के विदेश सचिव एंटनी ब्लिंकन बुधवार (19 जनवरी, 2022) को कीव के दौरे पर आ रहे हैं। वहीं नाटो महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने रूस को यूक्रेन संकट पर और बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। लेकिन मॉस्को आगे किसी भी चर्चा में शामिल होने से पहले पश्चिमी देशों से सुरक्षा माँगों की व्यापक लिस्ट चाहता है।

रूस-यूक्रेन विवाद पर क्या कर रहे दुनिया के देश

रूस और यूक्रेन में युद्ध की आशंकाओं के बीच अमेरिका समेत दुनियाभर के कई देश यूक्रेन के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। हाल ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की को भरोसा दिलाया था को अगर रूस ने उस पर हमला किया तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश जवाबी कार्रवाई करेंगे। इस संभावित युद्ध के खतरे को भाँपते हुए ब्रिटेन ने तो रूस को एंटी टैंक हथियारों का सप्लाई की है। जबकि, कनाडा ने यूक्रेन के समर्थन में अपने स्पेशल फोर्स की टुकड़ियों को भेजा है। इसके अलावा फ्रांस और जर्मनी भी यूक्रेन के साथ खड़े हो गए हैं। हालाँकि, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी नाटो को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर वो आक्रामक रूख अख्तियार कर बातचीत करते हैं तो रूसी सेनाएँ कार्रवाई करेंगी।

गौरतलब है कि रूस ने अपने एक लाख सैनिकों को यूक्रेन की सीमा पर तैनात कर रखा है। हाल ही में उस पर ये आरोप भी लगा था कि उसने यूक्रेन पर साइबर हमले कर उसकी कई सरकार वेबसाइटों को ध्वस्त कर दिया था।

कब से चल रहा ये विवाद

दरअसल, सोवियत संघ के विघटन से पहले यूक्रेन और रूस सब एक थे। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, एक नए देश का आकार ले चुके यूक्रेन ने पश्चिमी देशों के साथ संबंध स्थापित करने के इरादे से वर्ष 2013 के अंत में यूरोपीय संघ के साथ एक पॉलिटिकल और व्यापारिक समझौता किया। इसी के साथ दोनों देशों के बीच विवाद की उत्पत्ति हुई। हालाँकि, बाद में यूक्रेन के रूसी समर्थक तत्कालीन राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच ने वार्ता को स्थगित कर दिया। लेकिन बाद में कथित तौर पर मॉस्को के दबाव में कीव में कई हफ्तों तक विरोध प्रदर्शन और हिंसा की घटनाएं हुईं।

इसके अगले साल 2014 में रूस ने दक्षिणी यूक्रेन के स्वायत्त क्षेत्र क्रीमिया पर हमला करके उसे अपने कब्जे में ले लिया। इसको लेकर रूस ने तर्क दिया कि वो क्षेत्र के रूसी बोलने वाले नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए ऐसा कर रहा है। रूस ने क्रीमिया में जनमत संग्रह भी करवाया और उस पर अपना कब्जा कर लिया। हालाँकि, यूक्रेन समेत दुनिया के बाकी देशों ने इसका विरोध किया। उस घटना के बाद के यूक्रेन के डोनेट्स्क और लुहान्स्क क्षेत्रों में रूसी समर्थक अलगाववादियों ने भी राजधानी कीव में अपनी स्वतंत्रता का ऐलान कर दिया। इसके परिणाम स्वरूप महीनों लड़ाई चली। 2015 में मिन्स्क में जर्मनी और फ्रांस की मध्यस्थता में कीव और मॉस्को के बीच शाँति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। हालाँकि, इसके बाद भी बार-बार संघर्ष विराम के उल्लंघन की घटनाएं होती रही हैं।

संयुक्त राष्ट्र के द्वारा जारी आँकड़ों के मुताबिक, मार्च 2014 से अब तक पूर्वी यूक्रेन में इस हिंसा के कारण 3,000 से अधिक लोगों की जानें गई हैं। यूरोपीय संघ और अमेरिका ने क्रीमिया और पूर्वी यूक्रेन में रूस की कार्रवाइयों के जवाब में उस पर कई एक्शन भी ले चुके हैं। इसमें व्यक्तियों पर प्रतिबंध, आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के उपाय शामिल रहे हैं। हालाँकि, इन सब से रूस डिगा नहीं है। रूस यूक्रेन पर मिंस्क समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाता रहा है।

यूक्रेन में नाटो और अमेरिका की मौजूदगी है विवाद

गौरतलब है कि रूस बार-बार इस बात से इनकार करता रहा है कि वो यूक्रेन पर हमले की योजना बना रहा है। लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूस की सीमाओं की ओर यूक्रेन में अमेरिका और नाटो बलों की मौजूदगी को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। वहीं यूक्रेन की सरकार का कहना है कि मॉस्को उन्हें नाटो के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने से नहीं रोक सकता। रूस को इस मामले में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है।

2021 में मात्र एक गैंडे का शिकार, कॉन्ग्रेस काल में मरे थे 167: केविन पीटरसन ने PM मोदी को दिया धन्यवाद, कहा – BRAVO

भारत में गैंडे के शिकार पर अंकुश लगाने के लिए इंग्लैंड के पूर्व किर्केटर केविन पीटरसन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “वाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत में पशुओं की रक्षा के लिए मालिदान देने वाले सभी महिला-पुरुषों को मेरा सलाम। मैंने इनमें से काफी से मुलाकात की है और उन सबका सम्मान करता हूँ।” उन्होंने उस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए ये बात कही, जिसमें बताया गया था कि भारत में गैंडों के शिकार लगभग ख़त्म हो गए हैं।

असम में कॉन्ग्रेस पार्टी के शासनकाल में 167 गैंडों का शिकार हुआ था, जबकि 2021 में मात्र 1 गैंडे का शिकार हुआ। इस तरह असम में गैंडे का शिकार 21 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर है। भाजपा ने सत्ता में आने से पहले ही वादा किया था कि वो एक सींग वाले गैंडों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। राष्ट्रीय अभ्यारण्य में भी गैंडों के शिकार पर अंकुश लगा है। असम के स्पेशल DGP जीपी सिंह को काजीरंगा नेशनल पार्क के ‘एंटी-पोचिंग टास्क फोर्स (APTF)’ के मुखिया भी हैं।

उन्होंने बताया कि 2021 में सिर्फ अप्रैल महीने में ही एक गैंडे का शिकार हुआ, उसके अलावा किसी अन्य महीने ऐसी कोई घटना देखने को नहीं मिली। जून 2021 में असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार ने इस टास्क फोर्स का गठन किया था। स्पेशल डीजीपी ने इसके लिए असम की सरकार और वन विभाग के कर्मियों को धन्यवाद भी दिया। बता दें कि एक सींग वाले गैंडे को असम का प्रतीक माना जाता है। 2001-2016 के दौरान इनका जम कर शिकार किया गया था।

इस अवधि में प्रदेश में कॉन्ग्रेस पार्टी की सरकार थी।अकेले 2013-14 में असम में 54 गैंडों के शिकार की खबर आई थी। 2001-2016 के बीच काजीरंगा राष्ट्रीय अभ्यारण्य और मानस में कुल मिला कर 167 गैंडों का शिकार हुआ। इस तरह से देखा जाए तो गठन के साथ ही APTF ने झंडे गाड़ने शुरू कर दिए हैं। अप्रैल 2021 में तालाब में एक गैंडे की लाश मिली थी, जिसका सींग गायब था। असम में फ़िलहाल 3400 गैंडे हैं। पिछले दशक में उनकी संख्या खासी बढ़ी है।

‘नरेंद्र मोदी आओ और इस जुल्म से निजात दिलाओ’ – पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) का है। वीडियो में यहाँ का एक शख्स सहायता के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगा रहा है। इस शख्स की पहचान मलिक वसीम के रूप में की गई है। 

वीडियो से यह स्पष्ट है कि मलिक वसीम ने भारत सरकार से उन्हें बचाने का आग्रह किया और पीएम मोदी से मदद की गुहार लगाते हुए कहा कि यहाँ की संपत्ति (पाक अधिकृत कश्मीर की) भारत और सिखों की है। वीडियो में वसीम ने बताया कि पुलिस ने उनके घर को सील कर दिया है, जिससे उनका परिवार और बच्चे सड़कों पर रहने को मजबूर हैं।

उन्होंने वीडियो में कहा, “पुलिसकर्मियों ने हमारे घर को सील कर दिया है। मैं मुजफ्फराबाद के कमिश्नर से घर हमें सौंपने के लिए कहता हूँ। आप मेरे बच्चों को सड़क पर देख सकते हैं। अगर मुझे कुछ होता है, तो आयुक्त और तहसीलदार इसके लिए जिम्मेदार हैं। वह मेरा घर खोलें, नहीं तो मैं भारत सरकार की मदद लेने के लिए मजबूर हो जाऊँगा। मैं पीएम मोदी से उन्हें सबक सिखाने की अपील करता हूँ।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं भारत सरकार और पीएम मोदी से अपील करता हूँ कि हमें इन जुल्मों से निजात दिलाएँ। मैं कमिश्नर से अपील कर रहा हूँ कि 2 घंटे के अंदर यदि मेरे घर की सील नहीं खोली गई तो मैं खुद फौरी करूँगा, जिसकी तमाम जिम्मेदारी कमिश्नर मुजफ्फराबाद की होगी।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों पाकिस्तान से भारत लौटी एक आतंकी की बीवी ‘रजिया बीबी ने आने के बाद बताया था कि पाकिस्तान ने किस तरह उसका इस्तेमाल किया और बाद में उसे बेसहारा छोड़ दिया। रजिया ने बताया कि भारत ने न केवल उसे स्वीकार किया, बल्कि उसका पुनर्वास भी किया।

जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा सेक्टर में जन्मी रजिया को बेहद छोटी उम्र (4 साल) में पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद ले जाया गया था। साल 2008 में उसका निकाह हिज्बुल मुजाहिदीन के एक आतंकी के साथ करवा दी गई। हालाँकि, उसका ये वैवाहिक जीवन अधिक दिनों तक गुलजार नहीं रह सका। भारतीय सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ के दौरान 4 आतंकियों के साथ उसके शौहर को भी मार गिराया गया था।

मुलायम सिंह यादव की उस बहू ने थामा BJP का हाथ, जिसके पति को ‘पिता का नाम’ मिलने में लगे 19 साल… वो भी SC में मामले के कारण

भारतीय जनता पार्टी को छोड़ समाजवादी पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं पर कुछ दिन पहले तक अखिलेश यादव फूले नहीं समा रहे थे और अब उन्हीं के परिवार की छोटी बहू अपर्णा यादव ने भारतीय जनता पार्टी का हाथ थाम लिया है। उन्होंने दिल्ली में बीजेपी की सदस्यता ली है। अपर्णा यादव, सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं। 

अब अपर्णा के पति प्रतीक कैसे मुलायम यादव के बेटे हैं और उनकी माँ साधना यादवा कौन हैं, वो कैसे मुलायम सिंह यादव की जिंदगी में आईं, कैसे प्रतीक यादव का पता दुनिया को चला और कैसे मुलायम सिंह यादव ने उन्हें अपने बेटे होने का तमगा दिया। ये पूरी कहानी बेहद दिलचस्प है। बिलकुल ऐसी जैसे आप फिल्मों में देखते हैं।

कैसे बढ़ी मुलायम सिंह यादव और साधना गुप्ता की बात

बात 1980 के समय की है। मुलायम सिंह यादव राजनीति के शिखर पर चढ़ रहे थे। उन्हें 1982 में लोक दल का अध्यक्ष बनाया ही गया था कि तभी उनकी मुलाकात हुई अपनी पार्टी की महिला कार्यकर्ता साधना गुप्ता से। साधना उम्र में 20 साल छोटी थीं लेकिन कहते हैं कि मुलायम सिंह यादव को उनके नैन नक्श इतने पसंद आए कि उन्होंने अपनी शादी और उम्र का लिहाज किए बिना अपना दिल दे दिया। उधर साधना की शादी भी फर्रुखाबाद के छोटे व्यापारी चंद्रप्रकाश गुप्ता से हो रखी थी। लेकिन उनसे अलग होने के बाद साधना को भी मुलायम सिंह यादव अच्छे लगने लगे। दोनों का रिश्ता परवान चढ़ा और इसके गवाह थे सिर्फ अमर सिंह। 1988 में साधना ने प्रतीक को जन्म दिया और रिश्ता वैसे ही चलता रहा। कहा जाता है कि साल 1994 में प्रतीक यादव के स्कूल फॉर्म पर पिता का नाम एमएस यादव और पते में मुलायम सिंह के कार्यकाल का पता लिखा रहता था।

साधना यादव को मिला मुलायम यादव की पत्नी का दर्जा, अमर सिंह ने निभाया रोल

साल 2003 में जब अखिलेश यादव की माँ और मुलायम सिंह यादव की पत्नी मालिति यादव का देहांत हुआ तो साधना ने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई। अमर सिंह से उन्होंने बार-बार कहा कि मुलायम सिंह यादव दुनिया के सामने उन्हें पत्नी स्वीकारें। धीरे-धीरे बात बढ़ी और मामला दुनिया के सामने आ गया। अखिलेश यादव ने कभी साधना यादव को अपने परिवार में मन से जगह नहीं दी। वो मानते थे कि उनकी माँ के साथ अन्याय हुआ है। पिता की दूसरी शादी की बात खुलने के कारण वह अमर सिंह से भी नाराज थे

साल 2007 में जब मुलायम सिंह यादव पर आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई जाँच का खतरा मंडराया, तो केस सुप्रीम कोर्ट पहुँचा और उसमें साधना व प्रतीक का नाम भी था। इसी कारण से मुलायम सिंह यादव को सार्वजनिक तौर पर मानना पड़ा कि साधना गुप्ता उनकी दूसरी पत्नी हैं और प्रतीक भी उन्हीं के बेटे हैं। आधिकारिक रूप से मुलायम सिंह यादव की निजी जिंदगी को खोल कर रख दिया और ये भी बात सामने आ गई कि साधना पर संपत्ति के तौर पर क्या है।

साधना यादव और अखिलेश यादव के मतभेद

कथिततौर पर, आधिकारिक रूप से मुलायम सिंह यादव की पत्नी बनने के बाद साधना यादव ने मुलायम सिंह यादव पर दबाव भी बनाया था कि वो सीएम की कुर्सी अखिलेश की जगह प्रतीक को दें। अफवाहें भी उड़ी थीं कि 2012 में अखिलेश के सीएम बनने पर साधना ने माँग की थी कि दो साल के बाद सीएम की कुर्सी प्रतीक को दी जाए। जब ऐसा नहीं हुआ और अखिलेश ने साधना के करीबी जीपी प्रजापति को उनके पद से हटाया, तो गृह कलह खुलकर सामने आया और मुलायम सिंह यादव पर पक्ष भी। उस समय उन्होंने अखिलेख को पार्टी में उनके पद से हटाकर ये जगह अपने भाई शिवपाल को दे दी थी।

ये अखिलेश और साधना यादव के बीच के मतभेद ही हैं जिनके कारण बातें होती हैं कि साधना की वजह से ही अखिलेश यादव अपने घर से दूर लखनऊ रहते हैं। वह किसी भी समारोह में अपने पिता और पत्नी के साथ तो दिखते हैं मगर सौतेले भाई प्रतीक के साथ कभी नजर नहीं आते।

19 साल की फिजा, 56 साल के लेखपाल से फोन पर दोस्ती… कमरे पर बुला कर नंगी तस्वीरें-वीडियो: MP पुलिस ने धर लिया

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से हनीट्रैप का मामला सामने आया है। यहाँ करीब 56 साल के एक बुजुर्ग लेखपाल से फोन पर बातचीत कर उन्हें जाल में फँसाया गया। इसके बाद में आरोपित फिजा (19 साल की लड़की) ने बुजुर्ग को अपने कमरे पर बुलाया और उन्हें न्यूड कर नग्न तस्वीरें और वीडियो बना ली। इसके बाद उन्होंने उसे वायरल करने की धमकी देकर उनसे करीब 2 लाख रुपए ऐंठ लिए।

रिपोर्ट के मुताबिक, मामला शिवपुरी लुधावली का है। यहीं के रहने वाले शरीफ खान की 19 साल की बेटी फिजा ने पोहरी क्षेत्र में तैनात लेखपाल से पहले फोन पर बातचीत शुरू की। धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती हो गई। समय के साथ ये दोस्ती गहरी होती चली गई। जब फिजा को लगा कि बुजुर्ग लेखपाल उसके जाल में फँस गया है तो उसने उससे मिलने की इच्छा जताई। उसने लेखपाल को फतेहपुर लालमाटी क्षेत्र में एक कमरे में मिलने के लिए बुलाया।

आरोपितों की प्लानिंग के तहत जैसे ही लेखपाल कमरे पर पहुँचे तो वहाँ मुख्य आरोपित फिजा ने अपने कपड़े उतार दिए और लेखपाल के साथ अश्लील हरकतें करने लगी। इस दौरान उसी कमरे में पहले से छिपे उसके साथियों ने इसका वीडियो बना लिया। वीडियो बनाने के बाद वे भी सामने आ गए। उन्होंने लेखपाल का वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उनसे 500000 रुपए की डिमांड की।

तीन किश्तों में दिए करीब 2 लाख रुपए

ब्लैकमेलिंग के डर से लेखपाल ने पहले 75 हजार रुपए सुनील गुप्ता के खाते में डलवा दिया। इसके बाद दूसरी किश्त के तौर पर उन्होंने 80 हजार रुपए देवेंद्र कुशवाह के खाते में और तीसरी किश्त के तौर पर 50 हजार रुपए राजेश गुप्ता के अकाउंट में डाले। खास बात ये है कि लेखपाल को उसी के एक मित्र ने फँसाया था।

बहरहाल ब्लैकमेलिंग से परेशान लेखपाल ने पुलिस में शिकायत की है। जिले के एसपी राजेश चंदेल के आदेश पर कोतवाली थाने के प्रभारी सुनील खेमरिया ने कार्रवाई करते हुए फिजा (19), देवेंद्र कुशवाह (23) और मनीष (30) को गिरफ्तार कर लिया। हनीट्रैप के इस गैंग की सरगना मंजू नाम की एक महिला है। पुलिस ने आरोपितों के पास से 40,000 रुपए नकद भी बरामद किए हैं।

CM की कुर्सी औरत के बराबर, जिस पर बैठेंगे AAP के मुख्यमंत्री: वायरल वीडियो पर आम आदमी पार्टी को गाली

आम आदमी पार्टी ने भगवंत मान को पंजाब में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया। इसके बाद पार्टी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया गया एक वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है। AAP के ट्विटर अकाउंट पर यह वीडियो 17 जनवरी को पोस्ट किया गया है। इस वीडियो में बॉलीवुड के एक गाने के जरिए मीम बनाकर पार्टी के भगवंत मान की एंट्री दिखाई गई है।

AAP की ओर से शेयर किए गए इस वीडियो में फिल्म ‘हे बेबी’ के ‘मस्त कलंदर’ गाने का एक मीम बनाकर भगवंत मान को मुख्यमंत्री का चेहरा बताया गया है। गाने में शाहरुख खान को भगवंत मान के तौर पर दिखाया गया है और विद्या बालन को सीएम की कुर्सी के तौर पर दिखाया गया है। वहीं गाने में अक्षय कुमार को चरणजीत सिंह चन्नी और रितेश देशमुख को नवजोत सिंह सिद्धू के तौर पर दिखाया गया है। इसके साथ ही इस मीम में अरविंद केजरीवाल और राहुल गाँधी को भी दिखाया गया है।

आम आदमी पार्टी ने नवजोत सिंह सिद्धू, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल, कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और अंत में, अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भगवंत मान के साथ अभिनेताओं के चेहरों की अदला-बदली करके गाने को एक ‘हास्यपूर्ण’ मोड़ देने की कोशिश की है। 

0.39 सेकेंड के वीडियो में सीएम के सभी दावेदारों को विद्या बालन के इर्द-गिर्द नाचते हुए दिखाया गया है, जिसे सीएम की कुर्सी के रूप में दिखाया गया है। क्लिप के अंत में आप के उम्मीदवार भगवंत मान की शानदार एंट्री होती है। उनका ‘पंजाब के लोगों’ द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया जाता है और वह अंततः सीएम की कुर्सी (विद्या बालन) पर जीत हासिल कर लेते हैं।

फिल्म के गाने का असली वर्जन यहाँ देखा जा सकता है:-

महिला को ऑब्जेक्टिफाई करने पर AAP को लताड़

विद्या बालन को सीएम की कुर्सी के तौर पर दिखाने पर लोगों ने इस पर तीखे कमेंट्स किए हैं। ज्यादातर लोगों ने इसे महिला का अपमान बताया है। कॉन्ग्रेस नेता बीवी श्रीनिवास (Srinivas BV) ने लिखा, “एक महिला को मुख्यमंत्री की कुर्सी के तौर पर दिखाना बेहद शर्मनाक है।”

पंजाब कॉन्ग्रेस ने लिखा, “कोई आश्चर्य नहीं कि उनके पास दिल्ली में एक भी नेता महिला और मंत्री नहीं हैं। वे हर रोज खुद को एक्सपोज करते हैं। महिलाओं को ऑब्जेक्टिफाई करना बंद करो।”

कई अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने भी AAP पर तीखे कमेंट्स किए।

यहाँ तक ​​कि ‘लिबरलों’ ने भी वीडियो को लेकर AAP पर निशाना साधा।

हालाँकि, सबसे मजेदार बात यह है कि फिल्म में विद्या बालन अंत में अक्षय कुमार (जिसे चन्नी दिखाया गया है) के पास लौटती है, न कि शाहरुख खान के पास, जिसे भगवंत मान के रूप में चित्रित किया गया है। इस फैक्ट पर प्रकाश डालते हुए, कई नेटिज़न्स ने चुटकी ली कि जैसे फिल्म में शाहरुख खान केवल एक कैमियो के तौर पर आते हैं और अक्षय कुमार (पंजाब के वर्तमान सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के रूप में दिखाया गया है) असल में विद्या बालन पर जीत हासिल करते हैं, जिसे सीएम की कुर्सी के रूप में दिखाया गया है। उसी तरह अंत में, चन्नी राज्य में अपना सत्ता बरकरार रखेंगे।

उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार (18 जनवरी 2022) को ऐलान किया कि पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Election) में भगवंत मान (CM Candidate Bhagwant Mann) पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। मान, संगरूर से दो बार के लोकसभा सांसद और पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख हैं।